समय शब्दावली

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक समय-संबंधित शब्द और अवधारणाएं

भारतीय इतिहास के स्रोत

प्राचीन ग्रंथ, अभिलेख, सिक्के और पुरातात्विक प्रमाण

भारत पर हुए विदेशी आक्रमण

भारत पर हुए प्रमुख विदेशी आक्रमण और उनका प्रभाव

विदेशी यात्रियों का विवरण

भारत आने वाले प्रमुख विदेशी यात्रियों के विवरण

भारत के प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध

भारत के महत्वपूर्ण युद्धों का संक्षिप्त विवरण और परिणाम

इतिहास का संपूर्ण कालक्रम

प्राचीन काल से आधुनिक काल तक का विस्तृत कालक्रम

महत्वपूर्ण अध्याय

इतिहास के अति महत्वपूर्ण चैप्टर

महत्वपूर्ण तथ्य

इतिहास के उपयोगी स्मरणीय बिंदु

सिंधु घाटी सभ्यता का प्रमुख नगर मोहनजोदड़ो वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित है।
हड़प्पा सभ्यता की खोज का श्रेय दयाराम साहनी को दिया जाता है, जिन्होंने 1921 में हड़प्पा स्थल की खुदाई शुरू की थी।
लोथल सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख नगर था, जो अपने प्राचीन बंदरगाह के लिए प्रसिद्ध है।
वैदिक काल में ऋग्वेद को सबसे प्राचीन वेद माना जाता है।
महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर माने जाते हैं।
गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था, जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है।
बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी में हुआ था।
मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322 ईसा पूर्व में की थी।
चंद्रगुप्त मौर्य के मार्गदर्शक चाणक्य थे, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त नामों से भी जाना जाता है।
अर्थशास्त्र की रचना कौटिल्य ने की थी, जिसमें शासन, अर्थव्यवस्था और प्रशासन से संबंधित विषयों का वर्णन मिलता है।
अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का त्याग कर बौद्ध धर्म के प्रचार को बढ़ावा दिया।
अशोक के शिलालेख भारतीय इतिहास में उसके शासन और धम्म नीति के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।
गुप्त काल को भारतीय इतिहास में कला, साहित्य, विज्ञान और संस्कृति की उन्नति के कारण स्वर्ण युग कहा जाता है।
आर्यभट्ट ने आर्यभटीय की रचना की और गणित तथा खगोल विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत का एक प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र था, जहाँ दूर-दूर से विद्यार्थी अध्ययन करने आते थे।
हर्षवर्धन ने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया और उत्तर भारत के एक बड़े क्षेत्र पर शासन किया।
कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली सल्तनत का प्रथम शासक तथा गुलाम वंश का संस्थापक था।
इल्तुतमिश ने दिल्ली सल्तनत को मजबूत किया और चाँदी का टंका तथा तांबे का जीतल प्रचलित किया।
रजिया सुल्तान दिल्ली सल्तनत की प्रथम और एकमात्र महिला शासक थीं।
अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण के लिए विभिन्न वस्तुओं की कीमतें निर्धारित की थीं।
मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करने का प्रयास किया था।
फिरोज शाह तुगलक ने सिंचाई व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नहरों का निर्माण कराया था।
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना हरिहर और बुक्का ने 1336 ई. में की थी।
कृष्णदेवराय विजयनगर साम्राज्य के तुलुव वंश के सबसे प्रसिद्ध शासकों में से एक थे।
बाबर ने 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल सत्ता की नींव रखी।
हुमायूँ के बाद अकबर ने 1556 ई. में मुगल साम्राज्य की सत्ता संभाली।
अकबर ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाई और सुलह-ए-कुल की अवधारणा को बढ़ावा दिया।
अबुल फजल ने अकबरनामा और आइन-ए-अकबरी की रचना की थी।
शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की स्मृति में आगरा में ताजमहल का निर्माण करवाया था।
औरंगजेब मुगल साम्राज्य का अंतिम प्रमुख शक्तिशाली शासक माना जाता है।
शिवाजी ने मराठा साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1674 ई. में उनका राज्याभिषेक हुआ।
गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना की और एकेश्वरवाद तथा मानव समानता का संदेश दिया।
प्लासी का युद्ध 1757 ई. में हुआ, जिसमें ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को पराजित किया।
बक्सर का युद्ध 1764 ई. में हुआ, जिसके बाद भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की राजनीतिक शक्ति और मजबूत हुई।
स्थायी बंदोबस्त 1793 ई. में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा बंगाल में लागू किया गया था।
1857 का विद्रोह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारत का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक व्यापक विद्रोह था, जिसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है।
मंगल पांडे 1857 के विद्रोह से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे और उनका विद्रोह बैरकपुर में हुआ था।
रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 के विद्रोह के दौरान झाँसी में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष किया था।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 ई. में हुई और इसके प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू. सी. बनर्जी थे।
बंगाल विभाजन 1905 ई. में लॉर्ड कर्जन द्वारा किया गया, जिसके विरोध में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ।
महात्मा गांधी 1915 ई. में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
चंपारण सत्याग्रह 1917 ई. में गांधीजी के नेतृत्व में हुआ और यह भारत में उनका पहला प्रमुख सत्याग्रह माना जाता है।
खेड़ा सत्याग्रह 1918 ई. में किसानों की कर संबंधी समस्याओं को लेकर गांधीजी के नेतृत्व में चलाया गया था।
अहमदाबाद मिल हड़ताल 1918 ई. में गांधीजी के नेतृत्व में हुई, जिसमें उन्होंने मजदूरों के वेतन के मुद्दे का समर्थन किया।
रॉलेट एक्ट 1919 ई. में ब्रिटिश सरकार द्वारा पारित किया गया, जिसके विरोध में देशभर में व्यापक असंतोष फैला।
जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ, जहाँ जनरल डायर के आदेश पर निहत्थी भीड़ पर गोली चलाई गई।
खिलाफत आंदोलन प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारतीय मुसलमानों द्वारा उस्मानी खलीफा के पद और खिलाफत संस्था के समर्थन में चलाया गया था।
असहयोग आंदोलन 1920 ई. में गांधीजी के नेतृत्व में शुरू हुआ और इसका उद्देश्य अहिंसक असहयोग के माध्यम से ब्रिटिश शासन का विरोध करना था।
चौरी-चौरा कांड 5 फरवरी 1922 को हुआ, जिसके बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
साइमन कमीशन 1928 ई. में भारत आया और इसके विरोध में लाला लाजपत राय ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।
दांडी मार्च 1930 ई. में गांधीजी ने नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से दांडी तक निकाला था।
भारत छोड़ो आंदोलन 1942 ई. में शुरू हुआ और इसका प्रमुख नारा “करो या मरो” था।
भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली और जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।