➣ मेगास्थनीज (305ईसा पू0) यह सेल्युकस का राजदूत था तथा चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। अपनी पुस्तक इण्डिका में इसने मौर्ययुगीन समाज एवं संस्कृति के विषय में लिखा है।
➣ हेरोडोडस इसने अपनी पुस्तक हिस्टोरिका में 5वीं सदी ई. पू. के भारत-फारस संबंधों का वर्णन किया है। इसका विवरण अनुश्रुतियों पर आधारित है। इसे इतिहास का पिता कहा जाता है।
➣ टीसियस यह ईरान का राजवैद्य था। इसका विवरण आश्चर्यजनक कहानियों से परिपूर्ण होने के कारण अविश्वसनीय है। नियार्कस, एनिसिक्रटस एवं आरिस्टोबुलस के विवरण प्रामाणिक एवं विश्वसनीय हैं। ये सभी सिकंदर के साथ भारत आए थे।
➣ इत्सिंग यह 7वीं सदी के अंत में भारत आया। इसने अपने विवरण में नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय तथा अपने समय के भारत का वर्णन किया है।
➣ डायनोसियस यह मिन नरेशटॉलमी फिलाडेल्फस का राजदूत था जो अशोक के राजदरबार में आया था।
➣ डायमेकस यह सीरिया के नरेश एन्टियोकस का राजदूत था जो बिन्दुसार के राजरबार में आया था।
➣ टॉलेमी इसने दूसरी सदी में ज्योग्राफी की रचना की।
➣ प्लिनी इसने नेचुरल स्टिोरिका पुस्तक लिखी, जिसमें भारतीय खनिज पदार्थों, पशुओं, पेड़-पौधों आदि के बारे में विवरण प्राप्त होता है।
➣ हवेनसांग हर्ष के शासनकाल में आए वेनसांग के यात्रा वृत्तांत ‘सी-यू-की’ में तत्कालीन भारत की सामाजिक-धार्मिक स्थिति का विवरण मिलता है। वह सर्वप्रथम भारत के कपिशा राज्य पहुँचा। वह 15 वर्षों तक भारत में रहा तथा 645 ई. में चीन लौट गया। हवेनसांग नालंदा xविश्वविद्यालय में अध्ययन करने तथा भारत से बौद्ध ग्रंथों को एकत्र कर ले जाने के लिए आया था। इसके यात्रा वृत्तांत सी-यू-की’ में 138 देशों का विवरण प्राप्त होता है। इसके अनुसार सिंध का राजा शूद्र था।
➣ सुंगयुन यह 518 ई. में भारत की यात्रा पर आया। इसने अपने तीन वर्षों की यात्रा के दौरान बौद्ध धर्म की प्रतियाँ एकत्रित की।
➣ फाहियान फाह्यान भारत में 399 ईस्वी में भारत में आया था। जब भारत पर चंद्रगुप्त विक्रमादित्य का शासन था। यह चन्द्रगुप्त द्वितीय (गुप्त) के दरबार में आया था। इसकी रचना ‘फो-क्यो-की’ में गुप्तकाल के भारतीय समाज, राजनीति, संस्कृति तथा बौद्ध धर्म की स्थिति का विवरण प्राप्त होता है।
➣ कास्मास इंदिकांप्लूसटेस कास्मास इंदिकोप्लूसटेस एक यूनानी व्यापारी था, जो बाद में बौद्ध भिक्षु बन गया। उसने अपना यात्रा वृत्तांत क्रिश्चियन टोपोग्राफी नामक अपनी पुस्तक में लिखा है।
➣ सुलेमान इसने पाल एवं प्रतिहार राजाओं के विषय में लिखा। यह 9वीं सदी के मध्य में भारत आया था।
➣ अलबरूनी यह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। इसने किताब-उल-हिन्द या तहकीक-ए-हिन्द कृति की रचना की।
इसमें राजपूतकालीन समाज, धर्म, रीति-रिवाज, राजनीति इत्यादि के बारे में जानकारी मिलती है।➣ अलमसूदी यह अरबी यात्री था। जो प्रतिहार शासक महिपाल प्रथम के शासन काल में भारत आया। इसने राष्ट्रकूट राजाओं की महत्ता का वर्णन किया है। इसने महजुल जबाह नामक ग्रंथ की रचना की।
➣ मार्कोपोलो भारत आने वाला प्रथम यूरोपीय यात्री इटली के वेनिस शहर का मार्कोपोलो था, जो दो बार क्रमश 1288 ई. और 1293 ई. में भारत आया था। इसकी यात्रा लगभग 1271 में लाईआसुस बंदरगाह (आर्मेनिया ) से वोल्गा तट , सीरिया , फारस, काराकोरम तथा मध्य एशिया तक हुई है जिसमे इसे लगभग 3 वर्षों का समय लगा।
➣ इब्नबतूता इसका पूरा नाम अबू अब्दुला मुहम्मद था। इब्नबतूता एक विद्वान अफ्रीकी (मोरक्को) यात्री था। वह 1333 ई. में मुहम्मद तुगलक के राज्यकाल में भारत आया। तुगलक ने उसे राजधानी दिल्ली का काजी नियुक्त किया। इसने रेहला नामक पुस्तक लिखी।
➣ अब्दुर्रज्जाक यह एक ईरानी यात्री था। यह 1442-43 ई. में देवराजय द्वितीय के काल में विजयनगर आया था।
➣ अकानासी निकितन रूसी यात्री ‘अकानासी निकितन’ ने 1470 से 1474 ई. तक बहमनी राज्य की यात्रा की।
➣ निकोलो कोन्टी एक इटली का यात्री, जिसने देवराय प्रथम के शासनकाल में विजयनगर साम्राज्य का भ्रमण किया। इसने दक्षिण – पूर्व एशिया और चीन तक की यात्रा की। इसने अपनी यात्रा की विवरण लैटिन भाषा में लिखा। जिसमे भारत के शहर , राज – व्यवस्था , प्रथाओं तथा त्योहारों का वर्णन मिलता है।
➣ डोमिनोगोज पायस और फर्नाओ नूनिज एक पुर्तगाली यात्री ‘डोमिनोगोज पायस’ विजयनगर आया था। इसके 13 वर्ष बाद एक और पुर्तगाली ‘फर्नाओ नूनिज’ भी विजयनगर आया था।
➣ टॉमस स्टीफेंस टॉमस स्टीफेंस भारत आने वाला पहला अंग्रेज था, जो गोवा स्थित जेसुइट कॉलेज का रेक्टर था।
➣ एडुआर्डो बारबोसा बारबोसा 1560 ई. में भारत आने वाला एक जेसुइट पादरी था। उसने सर्वप्रथम विजयनगर राज्य का भ्रमण किया और तत्पश्चात 1581 ई. में उत्तरी भारत तथा बंगाल की यात्रा की।
➣ फिच 1583 ई. में एक अंग्रेज व्यापारी ‘फिच’ अपने दो साथियों के साथ भारत आया और सात वर्ष तक यहां रहा।
➣ जॉन गमिडनाल 1599 ई. में एक और अंग्रेज यात्री जॉन गमिडनाल (मिल्डेन हाल) स्थल मार्ग से भारत आया और सात वर्ष तक यहां रहा। वह अकबर के दरबार में आगरा भी आया।
➣ कैप्टन हॅाकिग्स यह जहांगीर के समय भारत आया था तथा ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए सुविधा प्राप्त करने का प्रयास किया। यह फारसी भाषा का जानकार था। जहाँगीर के नाम इंग्लैण्ड के राजा जेम्स प्रथम का पत्र लेकर वह 1608 ई. में भारत के सूरत में पहुँचा। हॉकिन्स को जहाँगीर ने ख़ान की उपाधि देकर सम्मानित किया था। हॉकिन्स 1613 ई. में मुग़ल दरबार से चला गया और वापस इंग्लैण्ड पहुँच गया।
➣ डॉ. जेमिली करेरी इटली का यात्री डॉ. जेमिली करेरी औरंगजेब (1658-1707) के शासन काल में भारत आया था।
➣ बर्नियर फ्रांसिस बर्नियर एक फ्रांसीसी विद्वान डॉक्टर थे, जो सत्रहवीं सदी में भारत आए थे। उस समय भारत पर मुगलों का शासन था। बर्नियर के आगमन के समय मुगल बादशाह शाहजहां अपने जीवन के अंतिम चरण में थे।
➣ वास्कोडिगामा पुर्तगाली नाविक, जो ‘केप ऑफ गुडहोप’ के मार्ग से 1498 ई. में कालीकट पहुंचा। इसे भारत की खोज का श्रेय जाता है।
विदेशी यात्री : कालक्रमानुसार
| भ्रमण काल | यात्री | शासनकाल |
|---|---|---|
| 305ईसा -297 ई० | मेगास्थनीज (यूनानी राजदूत ) | चन्द्रगुप्त मौर्य |
| 298-273 ई० | डाइमेकस (सीरिया का राजदूत) | बिन्दुसार |
| 284-262 ई० | डायोनिसियस (मिस्र राजदूत) | का बिन्दुसार, अशोक |
| 399-414 ई० | फाहियान (चीनी बौद्ध यात्री) | चन्द्रगुप्त द्वितीय |
| 547 ई० | कास्मॉस (यूनानी बौद्ध यात्री) | दक्षिण भारत में |
| 629-644 ई० | ह्वेनसांग (चीनी बौद्ध यात्री) | हर्षवर्द्धन |
| 643 ई० | वांग-हुएन-सी (चीनी राजदूत) | हर्षवर्द्धन |
| 675-695 ई० | इत्सिंग (चीनी बौद्ध यात्री) | पश्चिमोतर भारत में |
| 864 ई० | इब्ने खुर्दादब (अरब यात्री) | मिहिर भोज प्रतिहार |
| 9वीं शताबदी | सुलेमान (अरब यात्री) | नरेश देवपाल(बंगाल ) |
| 915-916 ई० | अलमसूदी (अरब यात्री) | महिपाल प्रथम प्रतिहार |
| 1000-1030 ई० | अलबरूनी (गजनी का विद्वान) | पश्चिमोतर भारत में |
| 1288-1292 ई० | मार्कोपोलो (इटली का यात्री) | पांड्य राज्य |
| 1333-1342 ई० | इब्नबतूता (मोरक्को का यात्री) | मुहम्मद तुगलक |
| 1420-1422 ई० | निकोली कोण्टी (इटली का यात्री) | देवराय प्रथम (विजय नगर) |
| 1421-1431 ई० | चेंग-ही (चीनी यात्री) | जलालुद्दीन (बंगाल) |
| 1442-1443 ई० | अब्दुज्जाक (ईरान का राजदूत) | देवराय द्वितीय (विजय नगर) |
| 1470-1474ई० | अथनासियस निकेतन (रूसी यात्री) | बहमनी राज्य |
| 1498 ई० | वास्कोडिगामा (पुर्तगाली यात्री) | जमोरिन (केरल) |
| 1503-1508 ई. | बार्थोलोम्यू डियाज(इटालियन नाविक) | दक्कन |
| 1516-1518 ई० | एडुअर्डो बारबोसा (पुर्तगाली यात्री) | कृष्णदेव राय |
| 1520-1522ई० | डोमिंगोज पेइज (पुर्तगाल यात्री) | कृष्णदेव राय |
| 1520-1522ई० | डोमिंगोज पेइज (पुर्तगाल यात्री) | कृष्णदेव राय |
| 1535-1537 ई० | नूनिज (पुर्तगाली अश्व सौदागर) | अच्युत देवराय |
| 1567-1568 ई | सीजर फ्रेडरिज (पुर्तगाली यात्री) | विजयनगर |
| 1578-1582 ई० | एथोनी मासेरात (पुर्तगाली पादरी) | अकबर |
| 1585-1591 ई० | रॉल्फ फिंच (प्रथम अंग्रेज यात्री) | अकबर |
| 16वीं शताब्दी | जॉन लिंसकोतेन (डच यात्री) | विजयनगर |
| 16वीं शताब्दी | लामा तारानाथ (तिब्बती बौद्ध यात्री) | पूर्वी भारत |
| 1608-1613 ई० | कैप्टन हॉकिन्स (अंग्रेज) | जहाँगीर |
| 1608-1612 ई. | विलियम फिंच (अंग्रेज यात्री) | जहाँगीर |
| 1608-1617 ई. | जॉन जुरदां (पुर्तगाली यात्री) | जहाँगीर |
| 1608-1615 ई० | निकोलस डाउटन(नौसेना अधिकारी) | जहाँगीर |
| 1612-1616 ई० | निकोलस विथिंगटन (अंग्रेज यात्री) | जहाँगीर |
| 1612-1617 ई० | टामस कोर्सेट (अंग्रेज यात्री) | जहाँगीर |
| 1615-1619 ई० | सर टॉमस रो (अंग्रेजी राजदूत) | जहाँगीर |
| 1616-1619 ई. | एडवर्ड टेरी (अंग्रेज पादरी) | जहाँगीर |
| 1615-1621ई० | पाल केनिग (अंग्रेज यात्री) | जहाँगीर |
| 1622-1660 ई० | पित्रा देला वेली (इटली का यात्री) | जहाँगीर |
| 1626-1633 ई. | जॉन लायट (डच यात्री) | शाहजहाँ |
| 1627-1681 ई० | जॉन फ्रियर (अंग्रेज यात्री) | शाहजहाँ |
| 1630-1634 ई. | पीटर मुण्डी (इटली का यात्री) | शाहजहाँ |
| 1641-1687 ई० | टेवर्नियर (फ्रेंच जौहरी) | शाहजहाँ एवं औरंगजेब |
| 1656-1687 ई० | मनूची (इटली का यात्री) | औरंगजेब |
| 1658-1668 ई. | बर्नियर (फ्रेंच चिकित्सक) | औरंगजेब |
| 1666-1668 ई. | जीन चिन नाट (फ्रेंच यात्री) | औरंगजेब |
| 1695-1699 ई० | रोमेल्ली कोरेरी (इटली का यात्री) | बीजापुर |
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