Subject: भारतीय इतिहास

  • प्राचीन विदेशी आक्रमण | Q&A Practice

    ➣ मौर्य काल से पहले भारत को किन दो विदेशी आक्रमणों का शिकार होना पड़ा?
    उत्तर : हखामनी आक्रमण और मैसीडोन आक्रमण

    ➣ भारत पर पहला विदेशी आक्रमण करने का असफल प्रयास 550 ई.पू. में किस ईरानी सम्राट द्वारा किया गया?
    उत्तर : साइरस

    ➣ किसने भारत पर आक्रमण करने में सबसे पहले सफलता प्राप्त की तथा 516 ई.पू. में सर्वप्रथम गांधार को जीतकर फारसी साम्राज्य में मिलाया?
    उत्तर : दारा प्रथम / डेरियस / डायरवहु

    ➣ किसका शासनकाल भारत में पारसीक आधिपत्य के चरमोत्कर्ष को व्यक्त करता है?
    उत्तर : दारा प्रथम

    ➣ किस इतिहासकार ने कहा है कि भारत का पश्चिमोत्तर क्षेत्र दारा प्रथम के साम्राज्य का 20वां प्रान्त था ?
    उत्तर : हेरोडोटस

    ➣ प्रथम इतिहासकार और भूगोलवेत्ता यूनानी हेरोडोटस द्वारा इतिहास पर लिखी सुप्रसिद्ध कृति कौन-सी है?
    उत्तर : हिस्टोरिका

    ➣ भारत अभियान के दौरान दारा प्रथम का नौसेनाध्यक्ष कौन था ?
    उत्तर : स्काईलैक्स

    ➣ किस हखामनी शासक ने अपनी फौज में भारतीयों को भी भर्ती किया, परन्तु वह यूनानियों से हार गया ?
    उत्तर : जरक्सीज / क्षयार्ष

    ➣ दारा प्रथम की मृत्यु के बाद उसका पुत्र साम्राज्य का शासक बना। उसका क्या नाम था?
    उत्तर : क्षयार्ष अथवा जरक्सीस ( लगभग 485 ई.पू.)

    ➣ पारसीकों का अंतिम सम्राट कौन था?
    उत्तर : दारा तृतीय (360-330 ई.पू.)

    ➣ दारा तृतीय को किसने इसे अरबेला गौगामेला के युद्ध में 331 ई.पू. में बुरी तरह पराजित किया था?
    उत्तर : सिकंदर

    ➣ पारसीक सम्पर्क के परिणामस्वरूप भारत के पश्चिमोत्तर प्रदेशों में किस नयी लिपि का जन्म हुआ, जो ईरानी अरेमाइक लिपि से उत्पन्न हुई थी ?
    उत्तर : खरोष्ठी

    ➣ मौर्य शासक अशोक के किन दो अभिलेखों में खरोष्ठी लिपि का प्रयोग मिलता है?
    उत्तर : मनसेहरा तथा शाहबाजगढ़ी

    ➣ हखामनी आक्रमण के बाद पश्चिमोत्तर भारत पर यूरोपीय मैसीडोन आक्रमण हुआ। यह आक्रमण किसके नेतृत्व में किया गया ?
    उत्तर : सिंकदर

    ➣ किस गांधार ( राजधानी तक्षशिला) राजा ने भारत के साथ गद्दारी कर सिकंदर का स्वागत किया?
    उत्तर : आम्भी ने

    ➣ सिकंदर किसका शिष्य था?
    उत्तर : अरस्तू

    ➣ सिकन्दर (356-323 ई.पू.) को किन अन्यो नामो भी जाना जाता है?
    उत्तर : एलेक्जेंडर तृतीय या एलेक्जेंडर द ग्रेट

    ➣ सिकन्दर किस यूनानी साम्राज्य मैसीडोन (मकदूनिया / मैसीडोनिया) के किस क्षत्रप का पुत्र था?
    उत्तर : फिलिप द्वितीय

    ➣ सिकन्दर महान पिता की मृत्यु के पश्चात् किस आयु में राजा बना?
    उत्तर : 20 वर्ष

    ➣ सिकंदर द्वारा 321 ई.पू. में किस युद्ध में दारा द्वितीय को पराजित कर भारत से ईरानी अधिकार समाप्त हो गया था?
    उत्तर : अरवेला का युद्ध

    ➣ सिंधु कूच में सिकंदर ने सर्वप्रथम किन राज्यों को परास्त किया, जिसकी स्त्रियों ने पुरुषों की मृत्यु के उपरांत युद्ध किया?
    उत्तर : अस्टक तथा अश्वकों को

    ➣ किस भारतीय राजा ने सिकंदर का विरोध किया था ?
    उत्तर : पोरस

    ➣ सिंधु नदी के पार किन दो नदियों के बीच में स्थित पंजाब के शासक पोरस (पुरू) से सिकंदर की लड़ाई हुई?
    उत्तर : झेलम तथा चिनाब

    ➣ पोरस (पुरू) और सिकंदर के बीच लड़ाई किस नदी के किनारे हुई थी?
    उत्तर : झेलम

    ➣ पोरस (पुरू) और सिकंदर के बीच हुई लड़ाई को किन अन्यो नामों से भी जाना जाता है?
    उत्तर : हाइडेस्पीज का युद्ध’ या ‘झेलम का युद्ध’

    ➣ भारत में सिकंदर के लिए उसका चरन बिन्दु व्यास नदी थी, क्योंकि ?
    उत्तर : उसकी सेना ने व्यास नदी को पार करने से इनकार कर दिया

    ➣ कठ गणजाति के लोग पंजाब के सबसे अधिक लड़ाकू योद्धाओं में से थे। किसने कठों की सामूहिक हत्या की?
    उत्तर : सिकंदर ने

    ➣ सिकंदर का सेनापति कौन था?
    उत्तर : सेल्यूकस निकेटर

    ➣ सिकंदर का जल-सेनापति कौन था ?
    उत्तर : निर्याकस

    ➣ 325 ईसा पूर्व के सितंबर माह में सिकंदर कहां से यूनान वापस चला गया ?
    उत्तर : पाटल से

    ➣ सिकंदर की मृत्यु का हुई थी ?
    उत्तर : बेबीलोन (33 वर्ष, 323 ई.पू. के लगभग)

    ➣ सिकंदर की मृत्यु के बाद उसके साम्राज्य का पूर्वी भाग किसके अधीन चला गया?
    उत्तर : सेल्यूकस निकेटर

    ➣ सिकंदर द्वारा पहला नगर रणक्षेत्र में विजय के उपलक्ष्य में बसाया गया। उसका नाम क्या रखा गया था?
    उत्तर : निकैया नगर (विजयनगर)

    ➣ सिकंदर ने दूसरा नगर झेलम नदी के दूसरे तट पर उस स्थान पर बसाया, जहां उसका प्रिय घोड़ा बुकाफेला मरा था घोड़े के नाम पर इस नगर का क्या नाम रखा गया था?
    उत्तर : बुकाफेला

    ➣ सिकंदर के आक्रमण के फलस्वरूप भारत तथा पश्चिमी देशों के बीच कौन-सा संबंध सुदृढ़ हुआ ?
    उत्तर : व्यापारिक संबंध

    ➣ व्यापारिक सम्पर्क की वृद्धि के फलस्वरूप भारत में यूनानी मुद्राओं के अनुकरण पर किस शैली के सिक्के ढाले गये?
    उत्तर : उलूक शैली

    ➣ किस यूनानी दार्शनिक पर भारतीय दर्शन का प्रभाव स्पष्ट दिखता है?
    उत्तर : पाइथागोरस

  • भारत पर यूनानी आक्रमण (सिकंदर ) MCQ प्रश्न | UPSC

    1.उस वीर भारतीय राजा का नाम बताइए, जिसे सिकंदर ने झेलम के तट पर पराजित किया था?
    (a) आम्भी
    (b) पुरु (पोरस)
    (c) चंद्रगुप्त मौर्य
    (d) महापद्मनंद
    U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2013
    उत्तर-(b)
    326 ई. पू. में झेलम (यूनानी नाम: हाइडेस्पीज) नदी के तट पर हुए युद्ध में सिकंदर ने पंजाब के शक्तिशाली राजा पुरु (पोरस) को पराजित किया। पुरु की वीरता और गरिमापूर्ण आचरण से अत्यधिक प्रभावित होकर सिकंदर ने न केवल उसका राज्य वापस किया, बल्कि उसे नए क्षेत्र भी प्रदान किए और उसे अपना मित्र और सामंत बनाया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस युद्ध में सिकंदर के प्रिय घोड़े ‘बुसेफेलस’ की मृत्यु हो गई थी, जिसकी स्मृति में सिकंदर ने झेलम के तट पर ‘बुसेफेला’ नामक नगर बसाया। इसी युद्ध के बाद सिकंदर की सेना ने व्यास नदी (यूनानी नाम: हाइफेसिस) से आगे बढ़ने से इनकार कर दिया, जिससे वह भारत विजय का अपना स्वप्न पूरा नहीं कर सका।
    2.सिकंदर के हमले के समय उत्तर भारत पर निम्नलिखित राजवंशों में से किस एक का शासन था ?
    (a) नंद
    (b) मौर्य
    (c) शुंग
    (d) कण्व
    I.A.S. (Pre) 2000
    उत्तर-(a)
    सिकंदर के भारत आक्रमण (326 ई. पू.) के समय उत्तर भारत में नंद वंश का शासन था। इस वंश का अंतिम और सर्वाधिक शक्तिशाली शासक धनानंद था, जिसे यूनानी लेखकों ने ‘अग्रमीज’ या ‘जंड्रमीज’ कहा है। उसके पास विशाल सैन्य बल था, जिसके भय से ही सिकंदर की सेना व्यास नदी से आगे बढ़ने को तैयार नहीं हुई। धनानंद का सेनापति भद्दशाल था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नंद वंश की स्थापना महापद्मनंद ने की थी, जिसे ‘सर्वक्षत्रांतक’ (सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला) कहा जाता है। यूनानी लेखक डियोडोरस के अनुसार, धनानंद के पास 2 लाख पैदल सेना, 80,000 घुड़सवार, 8,000 रथ और 6,000 हाथी थे — यही विशाल शक्ति सिकंदर की सेना को आगे बढ़ने से रोकने का मुख्य कारण बनी।
    3.निम्नलिखित में से कौन सिकंदर के साथ भारत में नहीं आया था?
    (a) नियार्कस
    (b) आनेसिक्रिटस
    (c) डाइमेकस
    (d) अरिस्टोब्यूलस
    U.P. P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015
    उत्तर-(c)
    डाइमेकस सिकंदर के साथ भारत नहीं आया था। वह सीरिया के सेल्यूसिड राजा एंटियोकस प्रथम का राजदूत था, जिसे मौर्य सम्राट बिंदुसार की राजसभा में भेजा गया था। इसके विपरीत, नियार्कस सिकंदर का नौसेना प्रमुख था जिसने सिंधु नदी से फारस की खाड़ी तक समुद्री मार्ग की खोज की; आनेसिक्रिटस और अरिस्टोब्यूलस भी सिकंदर के अभियान में शामिल इतिहासकार थे।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिकंदर के साथ आए यूनानी लेखकों के विवरण प्राचीन भारत को जानने के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। मेगस्थनीज, जो बाद में चंद्रगुप्त मौर्य की राजसभा में सेल्यूकस निकेटर का राजदूत बनकर आया, उसने ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ लिखा जो भारतीय इतिहास का एक अमूल्य यूनानी स्रोत है।
    4.निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए-
    कथन (a) : लगभग दो वर्ष के अभियान के पश्चात सिकंदर महान ने 325 ई. पू. में भारत छोड़ दिया।
    कारण (R) : वह चंद्रगुप्त मौर्य से पराजित हुआ था। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए- कूट :
    (a) (a) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (a) की सही व्याख्या है।
    (b) (a) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (a) की सही व्याख्या नहीं है।
    (c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
    (d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
    U.P.P.C.S. (Pre) 1998
    उत्तर-(c)
    हखामनी (अचमेनी) साम्राज्य को पराजित करने के बाद 326 ई. पू. में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया। लगभग दो वर्ष के सैन्य अभियान के पश्चात 325 ई. पू. के सितंबर माह में उसने पाटल (सिंधु नदी के मुहाने के पास) से वापसी की। अतः कथन (A) सही है। परंतु उसकी वापसी का कारण चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा पराजय नहीं था — सिकंदर और चंद्रगुप्त कभी युद्ध के आमने-सामने नहीं आए। वास्तविक कारण उसकी सेना का थकान और व्यास नदी पर विद्रोह था। अतः कारण (R) गलत है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिकंदर की मृत्यु 323 ई. पू. में बेबीलोन में मात्र 32-33 वर्ष की आयु में हुई। उसकी मृत्यु के बाद ही चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश को उखाड़ फेंककर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की (322 ई. पू.) और सेल्यूकस निकेटर को भी 305 ई. पू. में पराजित किया।
    5.भारत में सिकंदर की सफलता निम्न कारणों से थी-
    1. उस समय भारत में कोई केंद्रीय सत्ता नहीं थी।
    2. उसकी फौज बेहतर थी।
    3. उसे देशद्रोही शासकों से सहायता मिली।
    4. वह एक अच्छा प्रशासक था।
    नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-
    (a) 1 तथा 2
    (b) 1, 2 तथा 3
    (c) 2, 3 तथा 4
    (d) उपर्युक्त सभी
    U.P.P.C.S. (Pre) 2000
    U.P.P.C.S. (Pre) 2003
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
    उत्तर-(b)
    भारत में सिकंदर की सफलता के पीछे पहले तीन कारण सत्य हैं। डॉ. हेमचंद्र रायचौधरी के अनुसार उस काल में भारत में लगभग 28 स्वतंत्र शक्तियाँ थीं, अर्थात् कोई एक केंद्रीय सत्ता नहीं थी। सिकंदर की ‘मैसेडोनियन फालैंक्स’ नामक सैन्य व्यूह रचना अत्यंत उन्नत थी। तक्षशिला के राजा आम्भी (ओम्फिस) जैसे भारतीय शासकों ने सिकंदर का साथ दिया, जो राष्ट्रीय हित के विरुद्ध था। भारत में उसका प्रशासन सीमित और अल्पकालिक था, अतः ‘अच्छा प्रशासक’ होना उसकी सफलता का कारण नहीं था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिकंदर के भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि उसने भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संपर्क का मार्ग प्रशस्त किया। साथ ही, उसके आक्रमण से उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता ने चंद्रगुप्त मौर्य को एकीकृत साम्राज्य स्थापित करने का अनुकूल अवसर प्रदान किया।
    6. निम्नलिखित में से मगध का कौन सा राजा सिकंदर महान के समकालीन था ?
    (a) महापद्मनंद
    (b) धनानंद
    (c) सुकल्प
    (d) चंद्रगुप्त मौर्य
    44th B.P.S.C. (Pre) 2000
    उत्तर-(b)
    सिकंदर महान (356–323 ई. पू.) के समकालीन मगध का शासक धनानंद था, जो नंद वंश का अंतिम राजा था। यूनानी लेखक उसे ‘अग्रमीज’ कहते हैं। वह अत्यंत धनी था, परंतु प्रजा में अलोकप्रिय था। इसी कारण बाद में चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से उसे सिंहासन से उखाड़ फेंका।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: धनानंद की अलोकप्रियता का एक प्रमुख कारण उसकी अत्यधिक कर नीति और निम्न जाति का होना बताया जाता है — यूनानी स्रोत उसके पिता को नाई बताते हैं। चाणक्य (कौटिल्य) को धनानंद ने अपमानित किया था, जिसके फलस्वरूप चाणक्य ने नंद वंश के विनाश की प्रतिज्ञा ली और चंद्रगुप्त मौर्य को प्रशिक्षित करके मौर्य साम्राज्य की नींव रखी।
    7.युद्ध भूमि में बड़ी संख्या में सैनिकों के मारे जाने अथवा आहत हो जाने के बाद किस भारतीय गण अथवा राज्य की स्त्रियों ने सिकंदर के विरुद्ध शस्त्र धारण किया था?
    (a) अभिसार
    (b) ग्लउसाइ
    (c) कठ
    (d) मस्सग
    U.P.P.C.S. (Mains) 2013
    उत्तर-(d)
    सिकंदर के आक्रमण के समय उत्तर-पश्चिम भारत में अश्वक (अश्वकायन) एक वीर सीमांत गणराज्य था, जिसकी राजधानी मस्सग (मस्सक) थी। यूनानी स्रोतों के अनुसार, युद्ध में बड़ी संख्या में पुरुष सैनिकों के वीरगति प्राप्त करने के बाद मस्सग की महिलाओं ने स्वयं शस्त्र उठाकर आक्रमणकारी यूनानी सेना का वीरतापूर्वक सामना किया। यह भारतीय इतिहास में महिला शौर्य का एक अद्वितीय उदाहरण है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अश्वक जनजाति का उल्लेख पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ में भी मिलता है। इस क्षेत्र को आधुनिक पाकिस्तान के स्वात घाटी से समीकृत किया जाता है। सिकंदर ने अंततः छल से मस्सग पर अधिकार किया — युद्धविराम का नाटक करके भारतीय भाड़े के सैनिकों को घेरकर मार डाला, जिसे यूनानी लेखक एरियन ने भी दर्ज किया है।
  • प्राचीन भारत में विदेशी आक्रमण | पर्शियन से सिकंदर तक (518–326 ई.पू.)

    📚 विषय सूची

    ➣ भारत पर सर्वप्रथम विदेशी आक्रमण 5वीं ईसा शताब्दी पूर्व हुआ था। भारत में यह समय मगध के उत्कर्ष का काल था जहाँ हर्यक वंशीय शासक बिम्बसार (544-492ई.पू.) का शासन था।

    ➣ इस समय मगध सम्राटों का अधिकार क्षेत्र भारत के पश्चिमोत्तर प्रदेश तक विस्तृत नहीं हो पाया था। यह क्षेत्र अनेक छोटे-बड़े राज्यों में विभक्त था जिसमें कंबोज, गांधार एवं मद्र (पंजाब) प्रमुख थे।

    ➣ जिस समय मध्य भारत के राज्य, मगध साम्राज्य की विस्तारवादी नीति का शिकार हो रहे थे, पश्चिमोत्तर प्रांतों में अराजकता एवं अव्यवस्था का वातावरण व्याप्त था।

    ➣ इन क्षेत्रों में कोई ऐसी सार्वभौम शक्ति नहीं थी जो परस्पर संघर्षरत राज्यों को जीतकर एकछत्र शासन कर सके।

    ➣ ऐसी स्थिति में विदेशी आक्रांताओं का ध्यान भारत के इस भू-भाग की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक था। परिणामस्वरूप यह प्रदेश दो विदेशी आक्रमणों का शिकार हुआ-

    • हखामनी ईरानी आक्रमण (दारा प्रथम)
    • यूनानी आक्रमण (सिकंदर)
    प्राचीन भारत में विदेशी आक्रमण का इतिहास

    ➣ कालांतर में चंद्रगुप्त मौर्य नें मगध पर मौर्य राजवंश की स्थापना की और भारत को विदेशी आक्रमणों से मुक्त किया।

    भारत को सर्वप्रथम राजनीतिक रूप से एकबद्ध करने का श्रेय चंद्रगुप्त मौर्य को ही है।

    पारसी या ईरानी आक्रमण (518 ई.पू.)

    ➣ भारत पर प्रथम विदेशी आक्रमण ईरान के हखामनी वंश (ई.पू. 550-330) के शासकों ने किया था।

    साइरस द्वितीय (558–529 ई.पू.) | हखामनी साम्राज्य का संस्थापक

    ➣ छठी शताब्दी ईसा पूर्व के मध्य कुरूष अथवा साइरस (द्वितीय) नामक ईरानी व्यक्ति ने हखामनी साम्राज्य की स्थापना की।

    ➣ साइरस द्वितीय एक महात्वाकांक्षी प्रवृति का शासक था। अत: थोड़े ही समय म वह पश्चिमी एशिया का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक बन गया।

    ➣ साइरस ने सिंध के पश्चिम भारत के सीमावर्ती क्षेत्र की विजय की। प्लिनी के विवरण से ज्ञात होता है कि साइरस ने कपिशा नगर को ध्वस्त किया।

    इस प्रकार भारत पर पहला विदेशी आक्रमण करने का असफल प्रयास 550 ई.पू. में साइरस द्वितीय (कुरूष) ने किया था।

    ➣ साइरस की मृत्यु कैस्पियन क्षेत्र में डरबाइक नामक एक पूर्वी जनजाति के विरुद्ध लड़ते हुए हुई तथा उसका पुत्र केम्बिसीज द्वितीय (529 ई. पू. से 522 ई. पू.) उसके साम्राज्य का उत्तराधिकारी हुआ।

    ➣ केम्बिसीज द्वितीय गृह युद्धों में ही उलझा रहा इसलिए उसके समय में हखामनी साम्राज्य का भारत की ओर कोई विस्तार न हो सका।

    दारा प्रथम (522–486 ई.पू.) | भारत पर पारसी आक्रमण (518 ई.पू.)

    ➣ भारत पर 516 ई.पू. में सर्वप्रथम सफल आक्रमण दारा प्रथम/डेरियस/डायरवहु ने किया जिससे गांधार (वर्तमान पाकिस्तान -अफगानिस्तान ) फारसी साम्राज्य में मिल गया।

    ➣ दारा के यूनानी सेनापति स्काईलैक्स था जिसने सिंधु से भारतीय समुद्र में उतरकर अरब और मकरान तटों का पता लगाया।

    हेरोडोटस के अनुसार अधिकृत भारतीय भू-भाग ईरानी साम्राज्य का बीसवाँ प्रांत बना तथा भारत से 360 टेलेन्ट स्वर्ण राजस्व के रूप में ईरान को मिलता था।

    ➣ दारा प्रथम के तीन अभिलेखों बेहिस्तून,पर्सिपोलिस और नक्शेरूस्तम से सिद्ध होता है कि उसी ने सर्वप्रथम सिन्धु नदी के तटवती भारतीय भू-भागों को अधिकृत किया।

    क्षयार्ष / ज़रक्सीज (486–465 ई.पू.) | ग्रीस युद्ध और साम्राज्य विस्तार

    ➣ यह दारा का पुत्र था तथा इसने अपने पिता के साम्राज्य को सुरक्षित रखा, किंतु यह यूनानियों द्वारा परास्त किया गया था।

    जेरेक्सस (क्षयार्ष) ने भारतीयों को अपनी सेना में भर्ती कर यूनानियों के विरुद्ध काम लिया। ये सैनिक गांधार एवं सिन्धु प्रदेश से गए थे।

    ➣ हेरोडोटस के अनुसार भारतीय सैनिकों के वस्त्र सूती थे।

    ➣ जरक्सीज की मृत्यु के पश्चात् उसके तात्कालिक उत्तराधिकारी क्रमशः अर्तजरक्सीज प्रथम एवं अर्तजरक्सीज द्वितीय हुए। साक्ष्यों से पता चलता है इन उत्तराधिकारियों द्वारा दारा प्रथम द्वारा निर्मित साम्राज्य को सुरक्षित रखा गया।

    दारा तृतीय (360–330 ई.पू.) | सिकंदर से युद्ध और साम्राज्य पतन

    ➣ दारा तृतीय अन्तिम ईरानी सम्राट था, जिसे सिकन्दर ने 331 ई.पू. में आरबेला के युद्ध में पराजित किया। इस युद्ध को एरियन ने गोगामेला का युद्ध कहा था।

    ➣ दारा तृतीय को सिकन्दर द्वारा पराजित किये जाने से भारत से ईरानी आधिपत्य समाप्त हो गया। इस प्रकार राजनीतिक दृष्टिकोण से भारत-ईरान संबंध का भारत पर कोई स्थाई प्रभाव नहीं हुआ।

    • समुद्री मार्ग की खोज से विदेशी व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
    • पश्चिमोत्तर भारत में दायीं से बायीं ओर लिखी जाने वाली खरोष्ठी लिपि का प्रचार हुआ।
    • ईरानियों की आरमेइक लिपि का प्रचार-प्रसार हुआ।
    • अभिलेख उत्कीर्ण करने की प्रथा प्रारम्भ हुई।
    • ईरानियों की क्षत्रप शासन प्रणाली का शक-कुषाण युग में पर्याप्त विकास हुआ।
    • ईरानी चाँदी के सिक्के (सिग्लोई/शैकल्स) एवं सोने के डेरिक भारत में प्रचलित हुए।
    • मौर्य सम्राट के केश प्रक्षालन (बाल धोने की प्रथा) की प्रथा ईरान से ग्रहण हुई।
    • सत्प्रांत (Satraliy) प्रणाली के कारण भारत में प्रांतीय शासन व्यवस्था का विकास हुआ।
    • कर वसूली और प्रशासन में केंद्रीकृत व्यवस्था की अवधारणा मजबूत हुई।
    • उत्तर-पश्चिम भारत में ईरानी स्थापत्य कला का प्रभाव देखने को मिला।
    • प्रशासनिक शब्दावली में कुछ ईरानी शब्दों का प्रवेश हुआ।
    • व्यापारिक मार्गों के विकास से भारत का मध्य एशिया और पश्चिम एशिया से संपर्क बढ़ा।
    • ईरानी प्रभाव से शाही दरबार की आडंबरपूर्ण (शाही) संस्कृति का विकास हुआ।
    • सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों में संगठित सैन्य व्यवस्था को बढ़ावा मिला।
    क्षेत्र प्रभाव
    प्रशासनिक प्रभाव • क्षत्रप (Satrapy) प्रणाली का विकास
    • केंद्रीकृत प्रशासन की अवधारणा मजबूत हुई
    • सीमावर्ती क्षेत्रों में संगठित प्रशासनिक नियंत्रण
    • राजदरबार में शाही एवं भव्य परंपरा
    सांस्कृतिक प्रभाव • केश प्रक्षालन (बाल धोने की प्रथा) ईरान से आई
    • शाही जीवन में आडंबरपूर्ण संस्कृति का विकास
    • राजदरबारी परंपराओं पर विदेशी प्रभाव
    लिपि एवं लेखन • खरोष्ठी लिपि का प्रचार (दाएँ से बाएँ)
    • आरमेइक लिपि का प्रभाव
    • अभिलेख उत्कीर्ण करने की प्रथा प्रारम्भ
    आर्थिक प्रभाव • विदेशी व्यापार को प्रोत्साहन
    • स्थल एवं समुद्री मार्गों का विकास
    • मध्य एवं पश्चिम एशिया से व्यापार संबंध
    • सिक्के: सिग्लोई/शैकल्स (चाँदी), डेरिक (सोना)
    भाषाई एवं प्रशासनिक प्रभाव • ईरानी शब्दों का प्रशासन में प्रवेश
    • कर वसूली की संगठित व्यवस्था का विकास
    कला एवं स्थापत्य • उत्तर-पश्चिम भारत में ईरानी स्थापत्य का प्रभाव
    • भवन निर्माण में विदेशी शैली का मिश्रण

    यूनानी या मकदूनियाई आक्रमण (326 ई.पू.)

    ➣ ईरानी आक्रमण के पश्चात् भारत को यूनानी आक्रमण अतत् मकदूनियाई शासक सिकन्दर के आक्रमण का सामना करना पड़ा।

    सिकन्दर (356–323 ई.पू.) | भारत पर आक्रमण (326 ई.पू.

    भारत पर सिकंदर का आक्रमण

    एलेक्जेंडर तृतीय या एलेक्जेंडर द ग्रेट के नाम से विख्यात सिकन्दर (356-323 ई.पू.)यूनानी साम्राज्य मैसीडोन (मकदूनिया/मैसीडोनिया) के फिलिप द्वितीय का पुत्र था।

    ➣ फिलिप द्वितीय की हत्या 329 ई.पू. में कर दी गई। पिता की मृत्यु के पश्चात् सिंकदर लगभग 20 वर्ष की अल्पायु में ही सिंहासनारूढ़ हुआ। वह अरस्तू का शिष्य था।

    ➣ सिकंदर के आक्रमण के समय पश्चिमोत्तर भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था, जिनमें कुछ गणतंत्रात्मक एवं कुछ राजतंत्रात्मक थे और जिनको अलग-अलग जीतना सिकंदर के लिए आसान था।

    ➣ डॉ. हेमचन्द्रराय चौधरी के अनुसार सिकन्दर के आक्रमण के समय उत्तरी पश्चिमी भारत में 28 राज्य (11 राजतंत्र एवं 17 गणराज्य थे।)

    ➣ भारत विजय अभियान के अंतर्गत सिकन्दर ने 326 ई. पू. में बल्ख (बैक्ट्यिा) को जीतने के बाद काबुल होता हुआ हिन्दुकुश पर्वत (खैबर दरा) को पार किया।

    ➣ सिंधु कूच में सिकंदर ने सर्वप्रथम अस्टक तथा अश्वकों राज्यों को परास्त किया, अश्वक राज्य की राजधानी मसग थी। यहाँ का शासक अस्सेकेनाय युद्ध में मारा गया।

    ➣ राजा के मरने के बाद उसकी रानी किलऑफिस (कृपी) ने युद्ध का नेतृत्व किया। देखते ही देखते राज्य की सारी स्त्रियाँ स्वतन्त्रता युद्ध में कूद पड़ी, अन्ततः पराजित हुई।

    ➣ सिकन्दर के आक्रमण के दौरान पश्चिमोत्तर की एक अन्य लड़ाकू जाति अर्जुनायनो (आगालास्सोई जाति) सभी 20 हजार नागरिकों के साथ वीरतापूर्वक प्रतिशोध के पश्चात् अपनी स्त्रियों व बच्चों के साथ आग में जल मरे, जो जौहर की पहली लिखित घटना है।

    तक्षशिला शासक आम्भी ने आत्मसमर्पण के साथ उसका स्वागत करते हुए उसे सहयोग का वचन दिया। आम्भि को भारत का पहला देशद्रोही भी कहा गया है।

    ➣ आम्भि के अलावा हिन्दुकुश के शशिगुप्त, पुष्करावती एवं संजय नामक राजाओं ने भी सिकन्दर का साथ दिया।

    हाईडेस्पीज का युद्ध (326 ई.पू.)

    ➣ भारत की भूमि पर सिकंदर का प्रबल प्रतिरोध पौरव राजा पोरस ने किया। पोरस का राज्य झेलम एवं चिनाब नदियों के बीच में था। 327 ई.पू. में सिकंदर ने काबुल घाटी होते हुए भारत में प्रवेश किया और आगे बढ़ते हुए 326 ई.पू. (वसंत ऋतु) में उसकी सेना झेलम (Hydaspes) नदी के किनारे पहुँची। इसी समय पोरस ने दूसरी तरफ अपनी मजबूत रक्षा व्यवस्था स्थापित कर ली, जिससे दोनों सेनाओं के बीच निर्णायक संघर्ष की स्थिति बन गई।

    326 ई.पू. में सिकन्दर ने झेलम नदी के तट पर राजा पोरस को पराजित किया। इस युद्ध को झेलम का युद्ध , वितस्ता का युद्ध , कर्री का युद्ध तथा ग्रीक इतिहासकार हाईडेस्पीज का युद्ध कहते हैं।

    एरियन के अनुसार पोरस की सेना में 4000 अश्वारोही, 300 रथ, 200 हाथी एवं 30000 पैदल सैनिक थे। किन्तु युद्ध में पोरस की हार हुई, पोरस को बन्दी बना लिया गया। परन्तु सिकंदर ने पोरस की बहादुरी से प्रभावित होकर उसके राज्य को वापस कर उससे मित्रता कर ली।


    नीसा के गणतांत्रिक राज्य ने बिना युद्ध के ही सिकन्दर की अधीनता स्वीकार कर ली एवं अपने को यूनानियों का वंशज बताया।

    ➣ सिकन्दर की सेना ने व्यास नदी से आगे बढ़ने से इन्कार कर दिया। इसके बाद सिकन्दर झेलम के किनारे बढ़ते हुए सौभूति, शिवि, मालव, क्षुद्रक, सौद्राम, अलोर एवं पाटल को जीतते हुए सिंधु नदी के मुहाने पर पहुँचा, जहाँ से उसने सेना का एक भाग नियार्कस के नेतृत्व में समुद्री मार्ग से तथा दूसरा भाग स्थल मार्ग से स्वदेश भेजा।

    मालव एवं क्षुद्रकों ने संगठित होकर सिकन्दर का प्रतिरोध किया। ऐसा कहा जाता है कि इस राज्य के ब्राह्मणों ने लेखनी के बदले तलवार उठा ली थी।

    पंजाब का कठ (कथाई) गणराज्य, जिसकी राजधानी संगल थी, जिन्होंने युद्ध के समय राजधानी के चारों ओर रथों का घेरा बनाया, लेकिन अन्त में सिकन्दर ने इन्हें पोरस की सहायता से परास्त किया।

    ➣ कठों ने ही यूनानियों को जहाजी रसोईघर एवं परिवहन नौकाएँ प्रदान की।

    ➣ सिन्धु नदी तट पर स्थित पाटल में द्वैराज्य प्रथा थी तथा पाटल की विजय सिकन्दर की अंतिम विजय थी। यहाँ पर पाइथन नामक ग्रीक को अपना क्षत्रप नियुक्त किया, जो भारत में अंतिम यवन क्षत्रप था।

    ➣ भारत में 19 माह व्यतीत करने के पश्चात कोनोस नामक सेनापति के सुझाव पर सिकन्दर ने वापस लौटने का निर्णय लिया और विजित भारतीय क्षेत्रों का क्षत्रप सेनापति फिलिप को बनाया।

    ➣ वापस लौटने से पूर्व यूनानी देवताओं की स्मृति में व्यास नदी के तट पर विजय सीमा अंकित करने के लिए 12 विशाल वेदियाँ स्थापित की तथा उनकी विधिवत पूजा की।

    ➣ सिकन्दर भारतीय दार्शनिक कालानास को अपने साथ ले गया। मेगस्थनीज के अनुसार मंडनिस नामक दार्शनिक ने सिकन्दर को अपने ज्ञान से प्रभावित किया।

    ➣ सिकन्दर ने दो नगरों की स्थापना की थी। पहला नगर निकैया (विजय नगर) अपनी जीत के उपलक्ष्य में तथा झेलम नदी के तट पर दूसरा नगर अपने प्रिय घोड़े बुकाफेला के नाम पर बसाया।

    ➣ सिकन्दर ने काबुल के पास अलेक्जेन्ड्रिया तथा सिंध में भी अलेक्जेन्ड्रिया नामक नगर बसाया।

    कर्टियस के अनुसार मालव जन ने श्वेत लौह मुद्रा सिकन्दर को भेंट में दी थी। यह प्राचीन भारत में विकसित लौह-प्रौद्योगिकी का साक्ष्य है।

    323 ई.पू. में बेबीलोन में सिकन्दर का मस्तिष्क ज्वर के कारण 33 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

    ➣ मृत्यु के बाद उसके साम्राज्य का पूर्वी भाग सेल्यूकस निकेटर अधीन चला गया।

    ➣ सिकंदर के साथ आने वाले लेखकों में नियार्कस, ऑनसिक्रिटस तथा अरिस्टोव्यूलस के विवरण अधिक प्रामाणिक एवं विश्वसनीय हैं।

    ➣ सिकन्दर की मृत्यु के बाद 321 ई. पू. उसके सेनापतियों में साम्राज्य विभाजन के लिए त्रिपैरेदिसस की सन्धि हुई। विजित क्षेत्रों को 4 प्रशासनिक इकाइयों में बांटा गया।

    1. सिंधु का उत्तरी व पश्चिमी भागफिलिप
    2. सिंधु व झेलम का भागतक्षशिला का शासक आम्भी
    3. झेलम व व्यास नदी का भागपोरस राजा
    4. सिंधु का निचला भागपिथोन

    ➣ कालांतर में मगध शासक चन्द्रगुप्त मौर्य ने इन सभी प्रदेशो को जीतकर भारत में मिला लिया और एक अखण्ड भारत का निर्माण किया।

    भारत में सिकंदर की सफलता का कारण

    • सिकंदर की सफलता का प्रमुख कारण भारत में किसी एक केंद्रीय सत्ता का अभाव था।
    • दूसरा महत्त्वपूर्ण कारण उसकी सेना का शक्तिशाली होना था।
    • उसकी सेना में तेज-तर्रार घोड़ों की बहुलता थी।
    • आम्भी जैसे देशद्रोहियों का सहयोग भी उसकी सफलता का एक बड़ा कारण था।
    • एरियन के अनुसार युद्ध कला में भारतवासी अन्य तत्कालीन जन से श्रेष्ठ थे।
    • प्लूटार्क के अनुसार यदि सिकन्दर का आक्रमण न होता तो बड़े-बड़े नगर न बनते।

    सिकंदर के आक्रमण का भारत पर प्रभाव

    • प्राचीन यूरोप को प्राचीन भारत के संपर्क में आने का अवसर मिला।
    • भारत और यूनान के बीच विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष संपर्क की स्थापना हुई।
    • पश्चिमोत्तर भारत के अनेक छोटे-छोटे राज्यों का एकीकरण हुआ।
    • सिकंदर के आक्रमण से भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में राजनीतिक एकता की प्रवृत्ति बढ़ी।
    • ग्रीक (यूनानी) और भारतीय संस्कृतियों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्रारम्भ हुआ।
    • गांधार शैली की मूर्तिकला का विकास हुआ, जिसमें यूनानी और भारतीय कला का मिश्रण दिखाई देता है।
    • सिकंदर के अभियान से अनेक स्थल और जलमार्ग खुले, जो आगे चलकर भारत के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में सहायक बने।
    • भारतीयों ने यूनानियों से क्षत्रप प्रणाली और मुद्रा निर्माण की कला को ग्रहण किया, जिससे प्रशासन और सिक्कों का विकास हुआ।
    • यूनानी प्रभाव से भारत में नए प्रकार के सिक्कों का प्रचलन हुआ (उलूक शैली आदि)।
    • भारतीय सैन्य व्यवस्था में परिवर्तन आया और हाथी सेना के साथ-साथ अश्वारोही सेना का महत्व बढ़ा।
    • भारतीय ज्योतिष यूनानी ज्योतिष से प्रभावित हुआ। यूनानी शब्द Horoscope का संस्कृत रूप होराशास्त्र बना।
    • भारतीय रंगमंच पर यवनिका शब्द का प्रयोग यूनानी प्रभाव को दर्शाता है।
    • चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में भी यूनानी ज्ञान का सीमित प्रभाव भारत में देखा गया।
    • भारत में शहरीकरण और व्यापारिक नगरों के विकास को भी आंशिक गति मिली।
    नदी का नामयूनानी नाम
    झेलमहाइडेस्पीज
    रावीहाइड्रोटीस
    चिनाबअकेसिनीज
    व्यासहाईफेसिस
    सतलजजरड्रोस/हेसिड्रोस

    सिकंदर के समय भारत के 28 स्वतंत्र राज्य

    अस्सकेनोसगुरेअन्स
    तक्षशिलाप्यूकेलाओटिस
    आस्पेशियनअभिसार
    नीसागांदारिस
    अरसेक्ससोफाइटस
    ग्लोगनिकायअगलसोई
    कैथियंसआब स्टनोई
    सिबोर्डसोद्राई
    मलोईआक्सीकनोस
    ओसेडिओईपुरू
    मोसिकनोसअद्रेस्ताई
    पटलेन (पाटल)फेगेला
    सूद्रकजाथ्रोयी
    मसनोईसम्बोस

    सिकंदर के समकालीन यूनानी लेखक

    नियकिस327-326 ई. पू.स्ट्रेबो व एरियन विवरण सिकंदर के जहाजी बेड़े का एडमिरल।
    अरिस्टोबयुलस327-326 ई. पू.युद्ध का इतिहास एरियन व प्लूटार्क ने अपनी रचनाओं का आधार बताया।
    ओनो सेक्रिटस 327-326 ई. पू.सिकंदर की जीवनी जहाजी बेड़े का चालक।
    • सिकन्दर का गुरु अरस्तु था।
    • सिकंदर के घोड़े का नाम बुकाफेला था।
    • सिकन्दर 19 माह भारत में रहा।
    • नियार्कस सिकन्दर की जल सेना का सेनापति था।
    • अरिस्टोब्युलस ने सिकन्दर के युद्धों का इतिहास लिखा।
    • ओनेसिक्रिटस सिकन्दर का जीवनी लेखक था।

    ईरानी आक्रमण और सिकंदर के आक्रमण की तुलना

    ईरानी प्रभाव = प्रशासन + लिपि + मुद्रा + क्षत्रप व्यवस्था
    सिकंदर प्रभाव = कला + संस्कृति + ज्योतिष + राजनीतिक एकता + व्यापार विस्तार
    आधार ईरानी आक्रमण का प्रभाव सिकंदर का आक्रमण का प्रभाव
    राजनीतिक प्रभाव क्षत्रप (Satrap) प्रणाली का विकास छोटे राज्यों का एकीकरण, राजनीतिक एकता की प्रवृत्ति
    प्रशासन प्रांतीय शासन व केंद्रीकरण का विकास विदेशी संपर्क से प्रशासनिक सुधार
    मुद्रा प्रणाली सिग्लोई, डेरिक जैसे ईरानी सिक्कों का प्रचलन यूनानी प्रभाव, उलूक शैली के सिक्के
    लिपि / भाषा खरोष्ठी और आरमेइक लिपि का प्रसार यूनानी शब्दों का प्रभाव (होराशास्त्र आदि)
    कला सीमित प्रभाव, प्रशासनिक शैली पर असर गांधार कला का विकास (ग्रीक + भारतीय मिश्रण)
    व्यापार पश्चिमी एशिया से व्यापार विस्तार नए स्थल व जलमार्ग खुले
    सेना क्षत्रप व्यवस्था से संगठित शासन अश्वारोही सेना का विकास
    विज्ञान / ज्ञान प्रशासनिक तकनीक में सुधार यूनानी ज्योतिष का प्रभाव (होराशास्त्र)
    संस्कृति दरबारी शाही संस्कृति का विकास यवनिका शब्द व यूनानी सांस्कृतिक प्रभाव
    विदेशी संपर्क ईरान व पश्चिमी एशिया से संपर्क यूनान व यूरोप से प्रत्यक्ष संपर्क
  • मगध का उत्कर्ष (600–322 BCE)): राजवंश, शासक और राजधानी

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    मगध प्राचीन भारत के सोलह महाजनपद में से एक था। बौद्ध काल तथा परवर्तीकाल में उत्तरी भारत का सबसे अधिक शक्तिशाली जनपद था। इसकी स्थिति स्थूल रूप से दक्षिण बिहार के प्रदेश में थी। आधुनिक पटना तथा गया ज़िला इसमें शामिल थे।

    6वीं शताब्दी ई.पू. में गंगाघाटी में जहां एक तरफ साम्राज्यवाद का उदय हो रहा था, एक विशाल सुसंगठित साम्राज्य की नींव रखी जा रही थी, ठीक उसी समय, अनेक नए धार्मिक संप्रदायों का उदय हो रहा था।

    ➣ जिस प्रकार साम्राज्यवादी गतिविधियों का केंद्र मगध बना, उसी प्रकार नवीन धार्मिक गतिविधियों का भी केंद्र मगध ही बना था।

    ➣ मगध का उल्लेख सर्वप्रथम अथर्ववेद में मिलता हैं ऋग्वेद में यद्यपि मगध का उल्लेख नहीं मिलता, तथापि कीकट (किराट) नामक जाति व इसके शासक प्रमगंद का उल्लेख मिलता हैं इसकी पहचान मगध से की गई है।

    प्रमुख शासक राजधानी
    जरासंध (बृहद्रथ वंश) गिरिव्रज या वसुमती
    बिम्बसार (हर्यक वंश) राजगृह
    उदायिन (हर्यक वंश) पाटलिपुत्र या कुसुमपुर
    शिशुनाग (शिशुनाग वंश) वैशाली
    कालाशोक (शिशुनाग वंश) पाटलिपुत्र

    ➣ इसके बाद से मगध की राजधानी पाटलिपुत्र ही रही।

    बृहद्रथ वंश : मगध का प्रारम्भिक राजवंश

    ➣ पुराणों के अनुसार, मगध पर शासन करने वाला पहला राजवंश बृहद्रथ वंश था। इस वंश के पहले राजा बृहद्रथ का पुत्र जरासंध था, जिसने गिरिव्रज को अपनी राजधानी बनाया।

    ➣ मगध के प्राचीन इतिहास की रूपरेखा महाभारत तथा पुराणों में मिलती है। इन ग्रंथों के अनुसार मगध के सबसे प्राचीन राजवंश का संस्थापक बृहद्रथ था।

    ➣ वह जरासंध का पिता और वसु चैध-उपरिचर का पुत्र था। मगध की आरंभिक राजधानी वसुमती या गिरिव्रज की स्थापना का श्रेय वसु को ही था।

    ➣ बृहद्रथ का पुत्र जरासंध एक पराक्रमी शासक था, जिसने अनेक राजाओं को पराजित किया। अंततोगत्वा उसे श्रीकृष्ण के निर्देश पर भीम के हाथों पराजित होकर मरना पड़ा।

    रिपुंजय इस वंश (बृहदथ) का अतिम शासक था।

    हर्यक वंश (पितृहंता वंश): मगध के उत्कर्ष की शुरुआत

    ➣ बृहद्रथ-वंश के पश्चात मगध में जो नया राजवंश सत्ता में आया, वह हर्यक वंश के नाम से विख्यात हुआ।

    ➣ बौद्ध एवं जैनग्रंथों में इस वंश को हर्यक वंश कहा गया है। इस वंश का प्रथम महान शासक बिम्बिसार हुआ, जिसने मगध साम्राज्य की नींव रखी थी।

    बिम्बिसार (544 – 492 ई.पू.) : मगध का शक्तिशाली निर्माता

    ➣ बिम्बिसार ने हर्यक वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक (544-492 ई.पू.) था। उसे मगध-साम्राज्य की महत्ता का वास्तविक संस्थापक भी माना जाता है। यह बौद्ध तथा जैन दोनों मतों का पोषक था।

    ➣ मत्स्य पुराण में बिम्बिसार को क्षेत्रौजस तथा जैन साहित्य में श्रेणिक कहा गया है।

    ➣ महावंश के अनुसार, बिंबिसार 15 वर्ष की आयु में मगध नरेश बना था। बिम्बिसार ने विजयों तथा वैवाहिक संबंधों के द्वारा अपने वंश का विस्तार किया।

    ➣ इसने लिच्छवी गणराज्य के शासक चेटक की पुत्री चेलना (छलना) के साथ विवाह कर मगध की उत्तरी सीमा सुरक्षित किया।

    ➣ दूसरा प्रमुख वैवाहिक संबंध कोशल नरेश प्रसेनजित की बहन महाकोशला के साथ किया। इस वैवाहिक संबंध से उसे काशी का प्रांत (अथवा उसके कुछ ग्राम) प्राप्त हो गए।

    ➣ अन्य प्रमुख वैवाहिक संबंध मद्र देश (पंजाब) की राजकुमारी क्षेमा, जिसकी पहचान वैदेही वासवी से की गई है , के साथ करके मद्रों का सहयोग प्राप्त किया।

    ➣ बिम्बिसार का राजवैद्य जीवक राजगृह की गणिका सालवती का पुत्र था। जीवक का लालन-पालन बिम्बिसार के पुत्र राजकुमार अभय ने किया।

    ➣ बिम्बिसार ने जीवक को अवन्ति नरेश चण्डप्रद्योत की पीलिया (पाण्डु) नामक बीमारी को ठीक करने के लिए भेजा था। जिससे मैत्री संबंध स्थापित हुए।

    ➣ बिम्बिसार ने अंग देश के शासक ब्रह्मदत्त को पराजित कर उसे अपने राज्य में मिला लिया और अपने पुत्र अजातशत्रु को वहां का शासक नियुक्त किया।

    ➣ मगध की आरम्भिक राजधानी वसुमती या गिरिव्रज थी, जिसकी स्थापना वसु ने की थी। इसे कुशाग्रपुर भी कहते हैं।

    ➣ कालांतर में लिच्छवियों की बढ़ती शक्ति के कारण बिम्बिसार ने उत्तर की ओर नयी राजधानी राजगृह बनायी। जिसका वास्तुकार महागोविन्द था। मगध का वास्तुकार भी महागोविन्द ही था।

    ➣ मगध प्रतिद्वंदी अवन्ति राज्य था, जिसकी राजधानी उज्जैन थी। इसके राजा चण्डप्रद्योत महासेन का बिम्बिसार से युद्ध हुआ था। परन्तु दोनों में अंतत: समझौता हो गया।

    ➣ बिम्बिसार ने पहली बार मगध में सुदृढ़ शासन व्यवस्था की नींव डाली। बुद्धघोष के अनुसार बिम्बिसार के साम्राज्य में 80 हजार गांव थे तथा उसका विस्तार 300 लीग (लगभग 900 मील) था।

    विनयपिटक से ज्ञात होता है कि इसने वेणुवन नामक उद्यान बुद्ध एवं संघ के निमित्त प्रदान किया था। दीघनिकाय से ज्ञात होता है कि बिंबिसार ने चंपा के ब्राह्मण को वहां की संपूर्ण आमदनी दान में दे दिया।

    ➣ बिम्बिसार ने भिक्षुओं के लिए तरपण्य (नदी पार शुल्क) समाप्त कर दिया था।

    ➣ बिंबिसार को अपने पुत्र अजातशत्रु द्वारा बंदी बनाकर कारागार में डालने का उल्लेख बौद्ध एवं जैन ग्रंथों में मिलता है।

    ➣ बिंबिसार की मृत्यु 492 ई.पू. के लगभग हो गई।

    अजातशत्रु (492 – 460 ई.पू.): साम्राज्य विस्तार का प्रतीक

    ➣ बिंबिसार के पश्चात इसका पुत्र कुणिक (अजातशत्रु ) मगध का शासक हुआ। औपापतित सूत्र में अजातशत्रु को देवनाम प्रिय कहा गया है।

    देवदत्त के उकसाने पर अपने पिता बिम्बिसार की हत्या कर अजातशत्रु मगध का शासक बना। बौद्ध ग्रन्थ अजातशत्रु को पितृहन्ता घोषित करते हैं, जबकि जैन ग्रन्थ नहीं।

    ➣ लिच्छवियों से सुरक्षा के लिए अजातशत्रु ने राजगृह का दुर्गीकरण करवाया। अजातशत्रु ने ही सर्वप्रथम पाटलिपुत्र की महत्ता पहचानी एवं पाटलिपुत्र दुर्ग का निर्माण करवाया।

    ➣ लेकिन पाटलिपुत्र नगर की स्थापना और उसे राजधानी बनाने का कार्य उदायिन ने किया। पाटलिपुत्र की स्थापना अजातशत्रु के उत्तराधिकारी उदयन ने गंगा और सोन नदी के संगम पर एक किला बनाकर की थी।

    ➣ यह अपने पिता के समान ही साम्राज्यवादी था। अजातशत्रु ने वज्जि संघ, कोशल एवं काशी को मगध साम्राज्य में मिलाया।

    ➣ इसके शासन के प्रारंभिक वर्षों में मगध एवं कोशल राज्य के बीच संघर्ष शुरू हो गया। किंतु बाद में मगध के शासक अजातशत्रु तथा कोशल के शासक प्रसेनजित के बीच संधि हो गई।

    ➣ प्रसेनजित ने अपने पुत्री वाजिरा का विवाह अजातशत्रु से कर दिया तथा पुनः काशी के ऊपर उसका अधिकार स्वीकार कर लिया।

    ➣ सुमंगल विलासिनी के अनुसार वज्जि संघ एवं अजातशत्रु के बीच संघर्ष का कारण गंगा नदी किनारे हीरों की खानें थी।

    ➣ अजातशत्रु ने लिच्छवी गणराज्य की राजधानी वैशाली को जीतकर मगध साम्राज्य का हिस्सा बना लिया था। इस प्रकार काशी और वैशाली को मिला लेने के बाद मगध का साम्राज्य और विस्तृत हो गया।

    ➣ जैन-ग्रंथों के अनुसार बिम्बिसार ने लिच्छवी राजकुमारी से उत्पन्न दो पुत्र हल्ल एवं बेहल्ल को अपना सेचनक नामक हाथी तथा बहुमूल्य 18 लड़ियों का हार दिया था।

    ➣ अजातशत्रु ने राजा बनने पर अपनी रानी पद्मावती के उकसाने पर इन्हें वापस माँगा। हल्ल एवं बेहल्ल अपने नाना चेटक के पास वैशाली चले गये। इस कारण अजातशत्रु ने वैशाली से युद्ध किया।

    ➣ मगध में वस्सकार (वर्षकार) एवं कोसल में दीर्घचारायण प्रभावशाली मन्त्री थे। इससे वज्जि संघ को जीतने में बड़ी आसानी हुई। अजातशत्रु का एक अन्य मंत्री सुनीधि (सुनीढ़) था।

    ➣ अजातशत्रु के मंत्री वस्सकार ने वैशाली के लिच्छवियों में फूट डाली थी। वस्सकार ने इस मामले में बुद्ध से सलाह ली थी। इस क्रम में वस्सकार ने बुद्ध से राजगृह (गृहकूट पर्वत) में मुलाकात की।

    ➣ अजातशत्रु के शासनकाल के 8वें वर्ष में बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ। उसनें राजगृह में स्तूप का निर्माण करवाया था।

    ➣ दीघ निकाय के अनुसार क्षत्रिय होने के आधार पर अजातशत्रु ने बुद्ध के अस्थि अवशेषों में हिस्सेदारी का दावा करते हुए कहा था कि बुद्ध भी खतिय (क्षत्रिय), मैं भी खतिय।

    ➣ इसी के काल में राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया, जिसमें बुद्ध की शिक्षाओं को सुत्तपिटक तथा विनयपिटक के रूप में लिपिबद्ध किया गया।

    ➣ कालांतर में इसकी हत्या इसके पुत्र उदायिन ने कर दी थी।

    ➣ पुराणों के अनुसार 28 वर्ष तथा बौद्ध साक्ष्यों के अनुसार 32 वर्ष तक अजातशत्रु ने शासन किया।

    उदायिन या उदयभद्र (460 – 444 ई.पू.): पाटलिपुत्र का संस्थापक

    ➣ उदायिन ने गंगा और सोन नदियों के संगम पर पाटलिपुत्र या कुसुमपुर नामक नगर की स्थापना की तथा राजगृह से अपनी राजधानी स्थानांतरित की।

    ➣ उदायिन जैन धर्मावलम्बी था।

    ➣ इसकी हत्या एक व्यक्ति ने छूरा भोंक कर दी थी। उदायिन के बाद उसके 3 पुत्रों (अनिरूद्ध, मुंडक और नागदशक अथवा दर्शक) ने क्रमवार राज्य किये। पुराणों अथवा कथाकोश में नागदशक का एक नाम दर्शक मिलता है।

    ➣ हर्यंक वंश के अंतिम शासक नागदशक या दर्शक को शिशुनाग नामक अमात्य एवं काशी (बनारस) के राज्यपाल ने अपदस्थ कर शिशुनाग वंश की नींव डाली।

    शिशुनाग वंश : मगध का पश्चिमी विस्तार

    ➣ इस वंश का संस्थापक शिशुनाग था। यह वनारस के राजा का गर्वनर था। शिशु अवस्था में माता पिता ने उनका परित्याग कर दिया था। उसकी रक्षा एक नाग ने किया था इसलिए शिशुनाग के नाम से प्रसिद्ध हुए।

    शिशुनाग (412 – 394 ई.पू.) : अवन्ति विजेता शासक

    महावंश टीका में शिशुनाग को एक लिच्छवी राजा की वेश्या पत्नी से उत्पन्न कहा गया है। पुराणों के अनुसार वह क्षत्रिय था।

    ➣ शिशुनाग ने अवन्ति को जीतकर मगध साम्राज्य में मिलाया तथा वज्जियों पर नियंत्रण रखने के लिए पाटलिपुत्र के अतिरिक्त वैशाली को दूसरी राजधानी बनाया।

    ➣ इसकी सबसे बड़ी सफलता अवंति राज्य को जीतकर उसे मगध साम्राज्य में मिलाना था। शिशुनाग ने अवन्ति के शासक अवन्तिवर्धन को पराजित किया था।

    ➣ इस विजय के पश्चात शिशुनाग का वत्स के ऊपर भी अधिकार हो गया, क्योंकि वह अवंति के अधीन था। अवंति और वत्स पर अधिकार हो जाने से पश्चिमी विश्व के साथ पाटलिपुत्र को व्यापार-वाणिज्य के लिए एक नया मार्ग प्राप्त हो गया।

    ➣ अवंति की विजय शिशुनाग के लिए लाभदायक सिद्ध हुई। इससे मगध साम्राज्य की पश्चिमी सीमा मालवा तक पहुंच गई। अब मगध साम्राज्य के अन्तर्गत बंगाल से लेकर मालवा तक का भू-भाग सम्मिलित था।

    ➣ शिशुनाग ने गिरिव्रज के अतिरिक्त वैशाली नगर को अपनी दूसरी राजधानी बनाई थी, जो बाद में उसकी प्रधान राजधानी बन गई।

    प्राचीन भारत में जनता द्वारा चुना गया प्रथम ऐतिहासिक शासक शिशुनाग था। दूसरा बंगाल के पाल वंशीय शासक गोपाल प्रथम (750-770 ई.) है।

    कालाशोक (394 – 366 ई.पू.)द्वितीय बौद्ध संगीति काल

    महावंश के अनुसार, शिशुनाग की मृत्यु के पश्चात उसका पुत्र कालाशोक राजा बना। पुराणों में कालाशोक को काकवर्ण कहा गया है।

    ➣ इसने अपनी राजधानी पुन: पाटलिपुत्र में स्थानांतरित कर लिया। इस समय के बाद पाटलिपुत्र में ही मगध की राजधानी रही।

    सिंहली महाकाव्यों के अनुसार गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण लगभग सौ वर्ष बाद कालाशोक के शासनकाल के दसवें वर्ष में वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति (383 ई.पू.) का आयोजन हुआ। इस संगीति में बौद्ध संघ दो संप्रदायों स्थविर तथा महासंघिक में विभाजित हो गए।

    बाणभट्ट के हर्षचरित से ज्ञात होता है कि राजधानी के समीप घूमते किसी व्यक्ति ने कालाशोक की हत्या कर दी।

    महानंदिन (366-344 ई. पू.) : शिशुनाग वंश का अंतिम शासक

    ➣ महाबोधिवंश के अनुसार कालाशोक की हत्या के बाद उसके दस पुत्रों (1. भद्रसेन, 2. कोर्णदवर्ण, 3. मंगुरा, 4. सर्वज्ञजह, 5. जालिक, 6. उभक, 7. संजय, 8. कोर्व्य, 9. नंदीवर्धन, 10. पंचमक) ने संयुक्त रूप से 22 वर्षो तक शासन किया जिसमें सर्वप्रमुख महानन्दिन (नंदिवर्धन) था।

    ➣ कालाशोक के उत्तराधिकारियों का शासन 344 ई.पू. के लगभग समाप्त हो गया। महानंदिन शिशुनाग वंश का अंतिम शासक सिद्ध हुआ।

    महापदमनंद ने शिशुनाग वंश को समाप्त कर एक नये राजवंश की स्थापना की जो नंद वंश के नाम से जाना गया।

    नंद वंश: विशाल और समृद्ध साम्राज्य

    ➣ शिशुनाग वंश का अंत कर नंद वंश की स्थापना जिस व्यक्ति ने की, वह निम्न वर्ण से संबंधित था। विभिन्न ग्रंथों में उसका नाम भिन्न-भिन्न दिया गया है।

    ➣ पुराण में उसे महापद्म, जबकि महाबोधि वंश में उसे उग्रसेन कहा गया है। पुराणों के अनुसार, महापद्मनंद शिशुनाग वंश के अंतिम राजा महानदिन की शुद्ध स्त्री के गर्भ से उत्पन्न हुआ था।

    ➣ जैन ग्रंथ परिशिष्टपर्वन के अनुसार, वह नापित (नाई) पिता और वेश्या माता का पुत्र था।

    ➣ खारवेल के हाथीगुम्फा अभिलेख से पता चलता है कि नन्द राजा ने कलिंग को जीता एवं कलिंग से जिनसेन की प्रतिमा उठाकर ले गया तथा कलिंग में एक नहर का निर्माण भी करवाया।

    पाणिनी महापद्मनन्द का मित्र था। पाणिनी का जन्म गांधार के शालातूर में हुआ था।

    ➣ महापद्मनन्द ने अपने जैन मंत्री कल्पक की सहायता से क्षत्रियों का विनाश किया था।

    ➣ नंद वंश में कुल राजा होने के कारण उन्हें नवनंद कहा जाता है। महाबोधि वंश के अनुसार, इनके नाम हैं-उग्रसेन, पण्डुक, पण्डुगति, भूतपाल, राष्ट्रपाल, गोविषाणक, दशसिद्धक, कैवर्त तथा धनानंद।

    धनानंद नंद वंश का अंतिम सम्राट था। यूनानी लेखकों ने धनानन्द को अग्रेमीज कहा है। इसी शासक के समय में सिंकदर (326 ई.पू.) ने भारत में आक्रमण किया था।

    ➣ धनानंद के जैन अमात्य शकटाल तथा स्थूलभद्र थे। उपवर्ष, वररूचि, कात्यायन जैसे विद्वान भी नंद काल में ही उत्पन्न हुए थे।

    दीपवंश एवं महावंश के अनुसार धनानन्द ने 80 करोड़ धनराशि गंगा के भीतर एक पर्वत गुफा में छिपा रखी थी। टर्नर ने महावंश के आधार पर नन्द शासकों को लालची बताया।

    ➣ संगम कवि मामलनूर एवं ह्वेनसांग ने भी नन्दों की अतुल्य सम्पत्ति का उल्लेख किया है। कथासरित्सागर के अनुसार नन्दों के पास 99 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं थी।

    ➣ जनता पर अत्यधिक कर लगाने के कारण जनता इससे असंतुष्ट थी। इसका लाभ चन्द्रगुप्त मौर्य ने उठाकर, चाणक्य की मदद से इसकी हत्या कर मौर्य वंश की स्थापना की थी।

    नन्द वंश से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

    • नन्द शासकों ने जैन धर्म को प्रश्रय दिया।
    • नन्द वंश ने सर्वप्रथम वृहत् मगध साम्राज्य की स्थापना की थी।
    • युद्ध में हाथियों का सबसे पहले प्रयोग मगध राज्य ने किया।
    • नन्द वंश के विनाश में आजीवक धर्म की भूमिका रही।
    • पाणिनी, कात्यायन एवं पतंजलि को त्रिमुनि कहा जाता है।
    • कथा सरित्सागर के अनुसार अयोध्या नन्दों की महत्वपूर्ण छावनी थी।
    • अष्टाध्यायी के अनुसार नन्द शासकों ने माप-तौल की नई प्रणाली नंदोपक्रमाणिमानानि चलाई थी।
  • महाजनपदों का उदय (600 ई.पू.) | Q&A Practice

    ➣ छठी शताब्दी ईसा पूर्व का एक प्रमुख लक्षण क्या था?
    उत्तर : नगरीकरण

    ➣ ईसा पूर्व छठी शताब्दी में विश्व की प्रथम गणतंत्रात्मक व्यवस्था कहां थी ?
    उत्तर : वैशाली

    ➣ 16 महाजनपदों में से कितने महाजनपद उत्तर भारत में अवस्थित थे?
    उत्तर : 15

    ➣ दक्षिण भारत में गोदावरी नदी के किनारे स्थित एकमात्र जनपद कौन-सा था ?
    उत्तर : अस्मक

    ➣ बुद्ध और महावीर किस महाजनपद से आते थे?
    उत्तर : मगध

    ➣ उस गणतंत्र का नाम बताइये जो छठी शताब्दी ईसा पूर्व जातियों का राज्यसंघ था?
    उत्तर : वज्जि

    ➣ बुद्ध के समय कितने गणतंत्र राज्य थे ?
    उत्तर : 10

    ➣ बुद्ध का जन्म किस गणराज्य में हुआ था?
    उत्तर : शाक्य गणराज्य,राजधानी कपिलवस्तु

    ➣ मल्ल महाजनपद के दो भाग कौन-कौन से थे ?
    उत्तर : कुशीनारा के मल्ल एवं पावा के मल्ल

    ➣ वज्जि संघ की राजधानी कहां स्थित थी ?
    उत्तर : वैशाली

    ➣ मगध के पश्चिम में स्थित अंग की राजधानी क्या थी?
    उत्तर : चंपा

    ➣ पुराणों के अनुसार चंपा का प्राचीन नाम क्या था?
    उत्तर : मालिनी

    ➣ महाजनपदों की शासन प्रणाली में किन दो जातियों को कर से मुक्ति की सुविधा थी?
    उत्तर : ब्राह्मण तथा क्षत्रिय

    ➣ महाजनपदों की गणतंत्रात्मक व्यवस्था में प्रतिनिधियों की संख्या क्या कहलाती थी?
    उत्तर : संथागार

    ➣ सोलह महाजनपदों की सूची कहां उपलब्ध है ?
    उत्तर : अंगुत्तर निकाय में

    ➣ प्रथम मगध साम्राज्य का उत्कर्ष किस शताब्दी में हुआ था?
    उत्तर : ई.पू. छठी शताब्दी

    ➣ उस राज्य का नाम बताइये जिसने पहली बार युद्ध में हाथियों का इस्तेमाल किया ?
    उत्तर : मगध

    ➣ पुराणों के अनुसार मगध राजवंश का संस्थापक कौन था?
    उत्तर : बृहद्रथ

    ➣ प्रद्योत कहां का राजा था?
    उत्तर : अवन्ति

    ➣ प्राचीन श्रावस्ती का नगरविन्यास किस आकृति का था ?
    उत्तर : अर्द्धचन्द्राकार

    ➣ राजगृह का राजकीय चिकित्सक जीवक, जिसे गणिका के नाम से जाना जाता है, का क्या नाम है?
    उत्तर : सलावती

    ➣ कौन-सा प्राचीन भारतीय नगर तीन विद्वान संतों- कपिल, गार्गी और मैत्रेय का घर था?
    उत्तर : मिथिला

  • महाजनपदों का उदय | One-Liner Practice

    ❑ बुद्ध के जन्म के पूर्व लगभग छठी शताब्दी ई. पू. में भारतवर्ष 16 महाजनपदों में बंटा हुआ था।

    ❑ इन महाजनपदों का उल्लेख बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में मिलता है।

    ❑ कम्बोज राज्य श्रेष्ठ घोड़ों के लिये प्रसिद्ध था।

    ❑ चम्पा का प्राचीन नाम मालिनी था।

    ❑ वज्जि संघ आठ कुलों का एक संघ था।

    ❑ पांचाल को वैदिक सभ्यता का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि कहा गया है।

    ❑ रामायण से पता चलता है कि तक्षशिला की स्थापना भरत के पुत्र तक्ष ने की थी।

    ❑ गौतम बुद्ध के समय अवन्ति का राजा प्रद्योत था।

    ❑ गौतम बुद्ध के समय कोशल का राजा प्रसेनजित था।

    ❑ मगध का राज्य बिम्बिसार गौतम बुद्ध का मित्र तथा संरक्षक था।

    ❑ बुद्धकालीन सर्वाधिक बड़ा एवं शक्तिशाली गणतन्त्र वैशाली का लिच्छवी (गणतंत्र) था।

    ❑ बुद्धकालीन चार शक्तिशाली राजतन्त्र कोशल, मगध, वत्स एवं अवन्ति थे।

    ❑ गांधार एवं कम्बोज के क्षत्रियों को वार्ताशास्त्रेप- जीविनः कहा गया है।

    ❑ उत्तरापथ मार्ग-उत्तर-पश्चिम से (पुष्कलावती तक्षशिला) से पाटलिपुत्र और ताम्रलिप्ति तक जाता है। कालांतर में यही ग्रांड ट्रक रोड कहलाया।

    ❑ दूसरा प्रसिद्ध व्यापारिक मार्ग पश्चिम में पाटल से पूर्व में कौशाम्बी तक जाता था, तदुपरान्त उत्तरापथ मार्ग से सम्बद्ध हो जाता था।

  • महाजनपद (छठी ईसा सदी पू ) MCQ प्रश्न | UPSC

    1. पाटलिपुत्र के संस्थापक थे-
    (a) उदयिन
    (b) बिबिसार
    (c) अशोक
    (d) महापद्मनंद
    48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
    उत्तर-(a)
    पाटलिपुत्र नगर की स्थापना अजातशत्रु के पुत्र एवं उत्तराधिकारी उदयिन (उदयभद्र) ने की थी। उसने गंगा और सोन नदी के संगम स्थल पर एक किला निर्मित करवाया और राजधानी राजगृह से स्थानांतरित कर यहाँ बसाई। आगे चलकर यह नगर शिशुनाग वंश, नंद वंश एवं मौर्य वंश की राजधानी भी रही।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज़ ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में पाटलिपुत्र का विस्तृत वर्णन किया है और इसे तत्कालीन विश्व के सबसे बड़े नगरों में से एक बताया है। चंद्रगुप्त मौर्य के काल में यह नगर 9 मील लंबे और 1.5 मील चौड़े क्षेत्र में फैला था।
    2. उज्जैन का प्राचीनकाल में नाम क्या था?
    (a) तक्षशिला
    (b) इंद्रप्रस्थ
    (c) अवंतिका
    (d) इनमें से कोई नहीं
    M.P.P.C.S. (Pre) 1993
    U.P.P.C.S. (Pre) 2009
    उत्तर-(c)
    उज्जैन को प्राचीनकाल में अवंतिका के नाम से जाना जाता था। यह 16 महाजनपदों में से एक अवंति महाजनपद की उत्तरी राजधानी थी, जबकि दक्षिणी अवंति की राजधानी माहिष्मती थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उज्जैन भारत के सात पवित्र नगरों (सप्तपुरी) में से एक है। यह नगर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है और यहाँ प्रत्येक 12 वर्षों में सिंहस्थ कुम्भ मेले का आयोजन होता है। सम्राट विक्रमादित्य की राजधानी भी उज्जैन ही थी।
    3. सूची-I तथा सूची-II को सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही
    सूची-I (राजा) सूची-II (राज्य)
    A. प्रद्योत 1. मगध
    B. उदयन 2. वत्स
    C. प्रसेनजित 3. अवंति
    D. अजातशत्रु 4. कोसल
    कूट :
    उत्तर चुनिए-
    (a) A-1, B-2, C-3, D-4
    (b) A-4, B-3, C-2, D-1
    (c) A-3, B-2, C-4, D-1
    (d) A-4, B-1, C-3, D-2
    U.P.P.C.S. (Pre) 2000
    U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2004
    उत्तर-(c)
    सही सुमेलन इस प्रकार है — प्रद्योत → अवंति, उदयन → वत्स, प्रसेनजित → कोसल, अजातशत्रु → मगध। ये चारों राजा बुद्धकाल के प्रमुख शासक थे और इनके आपसी संबंध बौद्ध ग्रंथों में विस्तार से वर्णित हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कोसल नरेश प्रसेनजित गौतम बुद्ध के समकालीन थे और उनके परम भक्त भी थे। वत्स नरेश उदयन का विवाह अवंति नरेश प्रद्योत की पुत्री वासवदत्ता से हुआ था, जो उस काल की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रेम कथा है।
    4. भारत के प्राचीनतम प्राप्त सिक्के-
    (a) तांबे के थे
    (b) सोने के थे
    (c) रांगा के थे
    (d) चांदी के थे
    U.P.P.S.C. (GIC) 2010
    उत्तर-(d)
    भारत के प्राचीनतम सिक्के ‘आहत सिक्के’ या ‘पंचमार्क सिक्के’ कहलाते हैं, जो मुख्यतः चाँदी के बने होते थे। इन पर ठप्पे (punch) से चिह्न अंकित किए जाते थे, इसीलिए इन्हें ‘आहत सिक्के’ कहते हैं। इनका प्रचलन लगभग 600 ई.पू. से माना जाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भारत के सबसे प्राचीन सोने के सिक्के कुषाण शासकों ने चलाए थे, जिन्हें ‘दीनार’ कहा जाता था। आहत सिक्कों पर सूर्य, पहाड़, वृक्ष, पशु जैसे प्रतीक चिह्न अंकित मिलते हैं, परंतु इन पर किसी राजा का नाम या चित्र नहीं होता।
    5. चंड-प्रद्योत किस प्राचीन गणराज्य के राजा थे?
    (a) काशी
    (b) अंग
    (c) अवंति
    (d) वज्जि
    M.P.P.C.S. (Pre) 2019
    उत्तर-(c)
    चंड-प्रद्योत अवंति महाजनपद का शक्तिशाली शासक था। बुद्धकाल में अवंति की राजधानी उज्जैन थी। मगध नरेश बिंबिसार और प्रद्योत के संबंध मैत्रीपूर्ण थे — जब प्रद्योत पांडुरोग से पीड़ित हुए, तब बिंबिसार ने अपने प्रसिद्ध राजवैद्य जीवक को उनके उपचार हेतु भेजा था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंड-प्रद्योत को उसके उग्र और क्रोधी स्वभाव के कारण ‘चंड’ (उग्र) की उपाधि दी गई थी। वह बौद्ध ग्रंथों में वर्णित षोडश महाजनपदों के प्रमुख शासकों में से एक था और अपने काल में मगध का प्रबल प्रतिद्वंद्वी माना जाता था।
    6. निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?
    (a) अंग-चंपा
    (b) कोशल-अहिच्छत्र
    (c) वत्स-कौशाम्बी
    (d) मत्स्य- विराटनगर
    U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2017
    उत्तर-(b)
    कोशल महाजनपद की राजधानियाँ साकेत एवं श्रावस्ती थीं, न कि अहिच्छत्र। अहिच्छत्र उत्तरी पांचाल की राजधानी थी, जबकि दक्षिणी पांचाल की राजधानी काम्पिल्य थी। शेष विकल्पों में — अंग की राजधानी चंपा, वत्स की कौशाम्बी और मत्स्य की विराटनगर — सभी सुमेलित हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 16 महाजनपदों की जानकारी बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ और जैन ग्रंथ ‘भगवतीसूत्र’ से मिलती है। इनमें मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद था, जिसने अंततः अन्य सभी को अपने अधीन कर लिया।
    7. अमिलेखीय साक्ष्य से प्रकट होता है कि नंद राजा के आदेश से एक नहर खोदी गई थी-
    (a) अंग में
    (b) बंग में
    (c) कलिंग में
    (d) मगध में
    U.P.P.C.S. (Pre) 1999
    उत्तर-(c)
    खारवेल के प्रसिद्ध ‘हाथीगुम्फा अभिलेख’ (उड़ीसा) से ज्ञात होता है कि नंद राजा महापद्मनंद ने कलिंग पर विजय प्राप्त की थी। इस विजय के पश्चात उसने कलिंग में एक नहर का निर्माण करवाया और जिन भगवान की एक प्रतिमा वहाँ से उठाकर मगध ले गया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हाथीगुम्फा अभिलेख ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण है और इसे भुवनेश्वर के निकट उदयगिरि पहाड़ी की एक गुफा में स्थित हाथी के आकार की गुफा में पाया गया है। यह अभिलेख कलिंग के राजा खारवेल (प्रथम शताब्दी ई.पू.) की विजयों एवं उपलब्धियों का विवरण देता है।
    8.निम्नलिखित मानचित्र में प्राचीन भारत में पाए जाने वाले सोलह महाजनपदों में से चार दर्शाए गए हैं- क्रमश: A, B, C, D द्वारा अंकित स्थल कौन से हैं? daigram here
    (a) मत्स्य, चेदि, कोसल, अंग
    (b) शूरसेन, अवंति, वत्स, मगध
    (c) मत्स्य, अवंति, वत्स, अंग
    (d) शूरसेन, चेदि, कोसल, मगध
    I.A.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(c)
    प्रश्नगत मानचित्र में A, B, C, D से क्रमश: मत्स्य, अवंति, वत्स तथा अंग महाजनपद दर्शाए गए हैं। मत्स्य महाजनपद राजस्थान प्रांत के जयपुर क्षेत्र में बसा था। इसकी राजधानी विराटनगर थी। पश्चिमी तथा मध्य मालवा के क्षेत्र में अवंति महाजनपद बसा हुआ था। इसके दो भाग थे- उत्तरी अवंति (राजधानी-उज्जयिनी) तथा दक्षिणी अवंति (राजधानी-माहिष्मती)। आधुनिक इलाहाबाद तथा बांदा जिले प्राचीन काल में वत्स महाजनपद का निर्माण करते थे, कौशाम्बी इसकी राजधानी थी। उत्तरी बिहार के वर्तमान भागलपुर तथा मुंगेर के जिले अंग महाजनपद के अंतर्गत थे, चंपा इसकी राजधानी थी।
    9. प्राचीन नगर, जो महाभारत और महाभाष्य दोनों में उल्लेखित है-
    (a) मध्यमिका (नगरी)
    (b) कर्कोट
    (c) विराटनगर (बैराठ)
    (d) रैढ़
    R.A.S./R.T.S (Pre) 2016
    उत्तर-(*)
    मध्यमिका (नगरी) राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के निकट स्थित एक प्राचीन नगर है, जिसका उल्लेख महाभारत और पतंजलि रचित महाभाष्य दोनों में मिलता है। इसी प्रकार विराटनगर (बैराठ), जो राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है, का उल्लेख भी इन दोनों ग्रंथों में मिलता है — पांडवों ने यहीं अपना अज्ञातवास बिताया था। इसीलिए इस प्रश्न का उत्तर (*) अर्थात दोनों (a) और (c) है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पतंजलि का महाभाष्य (लगभग 150 ई.पू.) संस्कृत व्याकरण का महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो पाणिनि की अष्टाध्यायी पर भाष्य है। इसमें तत्कालीन भौगोलिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों की भी बहुमूल्य जानकारी मिलती है।
    10.’मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र’ बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? उत्तर में चंपा नदी से घिरा हुआ था।
    (a) पाटलिपुत्र पूरब में गंगा नदी से एवं
    (b) पाटलिपुत्र उत्तर में गंगा नदी से एवं पश्चिम में सोन नदी से घिरा हुआ था।
    (c) पाटलिपुत्र दक्षिण में विंध्य पर्वत से एवं पूरब में गंगा नदी से घिरा हुआ था।
    (d) पाटलिपुत्र दक्षिण में विंध्य पर्वत से एवं पश्चिम में चम्पा नदी से घिरा हुआ था।
    Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2020
    उत्तर-(b)
    प्राचीन पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार थी — उत्तर में गंगा नदी और पश्चिम में सोन नदी। यह नगर नदियों की प्राकृतिक सुरक्षा के कारण अत्यंत सुदृढ़ था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज़ के अनुसार पाटलिपुत्र की सुरक्षा के लिए नगर के चारों ओर लकड़ी की विशाल दीवार बनाई गई थी जिसमें 570 मीनारें और 64 द्वार थे। नगर के चारों ओर एक गहरी खाई भी थी। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी पाटलिपुत्र की नगर-व्यवस्था का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
    11. विश्व का पहला गणतंत्र वैशाली में किसके द्वारा स्थापित किया गया ?
    (a) मौर्य
    (b) नंद
    (c) गुप्त
    (d) लिच्छवी
    48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
    उत्तर-(d)
    वैशाली में लिच्छवियों द्वारा स्थापित गणराज्य को विश्व का सर्वप्रथम गणतंत्र माना जाता है। लिच्छवी वज्जि संघ के सबसे प्रभावशाली कुल थे और इस संघ का मुख्यालय वैशाली था। बुद्ध काल में वैशाली सबसे बड़े और शक्तिशाली गणराज्यों में से एक था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वैशाली में ही द्वितीय बौद्ध संगीति (383 ई.पू.) का आयोजन हुआ था, जो बौद्ध धर्म के इतिहास में अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटना है। इसके अलावा, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का जन्म भी वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ था।
    12. निम्न में से कौन-सा युग्म उपयुक्त जोड़ी है?
    (a) पार्श्वनाथ – जनत्रिका
    (b) बिंदुसार शाक्य
    (c) स्कंदगुप्त मौर्य
    (d) चेटक लिच्छवी
    R.A.S. /R.T.S. (Pre) 2013
    उत्तर-(d)
    राजा चेटक लिच्छवी गणराज्य के प्रमुख शासक थे। इनकी पुत्री त्रिशला (जिसे वेदेहा भी कहा जाता है) का विवाह मगध के राजकुमार सिद्धार्थ से हुआ था, और त्रिशला जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की माँ थीं। चेटक की एक अन्य पुत्री चेल्लणा का विवाह मगध नरेश बिंबिसार से हुआ था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लिच्छवी वज्जि संघ के प्रधान वंशों में से एक थे और वज्जि संघ में कुल 8 कुल (clans) सम्मिलित थे। चंद्रगुप्त मौर्य की माता का संबंध भी कुछ इतिहासकार लिच्छवी वंश से मानते हैं।
    13. प्रारंभिक गणतंत्र में कौन-सा नहीं था?
    (a) शाक्य
    (b) लिच्छवी
    (c) यौधेय
    (d) उपर्युक्त सभी
    U.P.P.C.S. (Pre) 1992
    उत्तर-(*)
    बुद्धकाल में गंगाघाटी में अनेक गणराज्यों का अस्तित्व था जिनमें कपिलवस्तु के शाक्य, वैशाली के लिच्छवी, कुशीनारा व पावा के मल्ल, मिथिला के विदेह, रामगाम के कोलिय आदि प्रमुख थे। यौधेय गणतंत्र का सबसे पहला उल्लेख व्याकरणाचार्य पाणिनी की अष्टाध्यायी में मिलता है। समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में भी यौधेयों पर उसकी विजय का उल्लेख है, इससे सिद्ध होता है कि यह गणतंत्र चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से गुप्तकाल तक विद्यमान था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यौधेय गणराज्य का क्षेत्र मुख्यतः वर्तमान पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में फैला हुआ था। इनके सिक्के भी पाए गए हैं जो इनकी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था की पुष्टि करते हैं।
    14. निम्नलिखित में से किस राजा ने पाटलिपुत्र बसाया था?
    (a) शिशुनाग
    (b) बिंबिसार
    (c) अजातशत्रु
    (d) उदयिन
    44th B.P.S.C. (Pre) 2000
    उत्तर-(d)
    पाटलिपुत्र नगर की स्थापना हर्यक वंश के शासक उदयिन (उदायिभद्र) ने की थी। यह नगर गंगा और सोन नदियों के संगम पर बसाया गया था। उदयिन ने अपनी राजधानी राजगृह से स्थानांतरित करके पाटलिपुत्र को बनाया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यूनानी इतिहासकार मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को ‘पालिबोथ्रा’ नाम से संबोधित किया था और इसे विश्व के सबसे बड़े और समृद्ध नगरों में से एक बताया था। चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग ने भी पाटलिपुत्र की यात्रा की थी।
    15. उदयिन-वासवदत्ता की दंतकथा संबंधित है-
    (a) उज्जैन से
    (b) मथुरा से
    (c) माहिष्मती से
    (d) कौशाम्बी से
    U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
    उत्तर-(a)
    उदयिन और वासवदत्ता की प्रसिद्ध प्रेम कथा उज्जैन (उज्जयिनी) से संबंधित है। इस कथा को महाकवि भास ने अपने संस्कृत नाटक ‘स्वप्नवासवदत्तम्’ में अमर किया है। इस नाटक में वत्सराज उदयिन तथा अवंति नरेश प्रद्योत की पुत्री वासवदत्ता की प्रेम कहानी का वर्णन है जब उदयिन उज्जयिनी के कारागार में बंदी थे।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी जो वर्तमान इलाहाबाद (प्रयागराज) के निकट स्थित थी। बौद्ध ग्रंथों में उदयिन को एक धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक के रूप में भी चित्रित किया गया है।
    16. किस शासक द्वारा सर्वप्रथम पाटलिपुत्र का राजधानी के रूप में चयन किया गया?
    (a) अजातशत्रु द्वारा
    (b) कालाशोक द्वारा
    (c) उदयिन द्वारा
    (d) कनिष्क द्वारा
    46th B.P.S.C. (Pre) 2003
    उत्तर-(c)
    पाटलिपुत्र को सर्वप्रथम राजधानी के रूप में हर्यक वंश के शासक उदयिन ने चुना था। उदयिन अजातशत्रु का पुत्र था। उसने गंगा और सोन नदियों के संगम पर इस नगर को बसाकर राजगृह की जगह पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बाद में शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक ने भी पाटलिपुत्र को ही अपनी राजधानी बनाए रखा और यहीं द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया। मौर्य काल में पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की भव्य राजधानी बनी और इसे ‘कुसुमपुर’ भी कहा जाता था।
    17. प्रथम मगध साम्राज्य का उत्कर्ष किस शताब्दी में हुआ था?
    (a) ई.पू. चौथी शताब्दी
    (b) ई.पू. छठवीं शताब्दी
    (c) ई.पू. दूसरी शताब्दी
    (d) ई.पू. पहली शताब्दी
    42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
    उत्तर-(b)
    प्रथम मगध साम्राज्य का उत्कर्ष ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी में हुआ था। इस साम्राज्य की नींव रखने वाले हर्यक वंश के राजा बिंबिसार (लगभग 544-492 ई.पू.) थे जिन्हें मगध साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। बिंबिसार ने वैवाहिक संबंधों और विजयों द्वारा मगध की शक्ति को अत्यंत विस्तृत किया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मगध की शक्ति वृद्धि के प्रमुख कारणों में उसकी भौगोलिक स्थिति, लोहे की खदानें (राजगृह के निकट), उपजाऊ भूमि और गंगा नदी का व्यापारिक मार्ग प्रमुख थे। बिंबिसार बौद्ध धर्म के संरक्षक थे और उन्होंने स्वयं गौतम बुद्ध से भेंट की थी।
    18. पाटलिपुत्र को किस शासक ने सर्वप्रथम अपनी राजधानी बनाया?
    (a) चंद्रगुप्त मौर्य
    (b) अशोक महान
    (c) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
    (d) कनिष्क
    42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
    उत्तर-(a)
    यद्यपि पाटलिपुत्र की स्थापना हर्यक वंश के शासक उदयिन ने की थी, परंतु दिए गए विकल्पों में उदयिन का नाम नहीं होने के कारण चंद्रगुप्त मौर्य सही उत्तर है। चंद्रगुप्त मौर्य ने पाटलिपुत्र को अपने विशाल मौर्य साम्राज्य की राजधानी बनाया और इसे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में पाटलिपुत्र की किलेबंदी अत्यंत सुदृढ़ थी — मेगस्थनीज के अनुसार नगर की रक्षा के लिए 570 बुर्जों और 64 द्वारों वाली लकड़ी की विशाल प्राचीर थी। कौटिल्य (चाणक्य) के अर्थशास्त्र में भी नगर प्रशासन के अनेक विवरण मिलते हैं।
    19. ईसा पूर्व छठी सदी में विश्व की प्रथम गणतंत्रात्मक व्यवस्था कहां थी?
    (a) वैशाली
    (b) एथेन्स
    (c) स्पार्टा
    (d) पाटलिपुत्र
    46th B.P.S.C. (Pre) 2003
    उत्तर-(a)
    ईसा पूर्व छठी शताब्दी में विश्व की प्रथम गणतंत्रात्मक व्यवस्था वैशाली में थी जिसे लिच्छवियों ने स्थापित किया था। वैशाली का यह गणतंत्र एथेंस के लोकतंत्र से भी पुराना माना जाता है। वज्जि संघ के अंतर्गत वैशाली में एक संगठित संसद (गणपरिषद) के माध्यम से शासन चलाया जाता था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वैशाली की गणपरिषद में 7707 राजाओं (सदस्यों) के होने का उल्लेख बौद्ध ग्रंथों में मिलता है। अजातशत्रु ने वैशाली गणराज्य को षड्यंत्र और युद्ध के माध्यम से अंततः मगध साम्राज्य में विलीन कर लिया था।
    20. निम्नलिखित में से कौन-सा एक, ईसा पूर्व छठी शताब्दी में, प्रारंभ में भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली नगर राज्य था?
    (a) गांधार
    (b) कम्बोज
    (c) काशी
    (d) मगध
    I.A.S. (Pre) 1999
    उत्तर-(d)
    ईसा पूर्व छठी शताब्दी के प्रारंभ में मगध भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली नगर-राज्य था। अनेक जातक ग्रंथों में उस काल के अन्य नगर-राज्यों की तुलना में मगध की अधिक समृद्धि और शक्ति का वर्णन मिलता है। मगध की कोशल, अंग और काशी से दीर्घकालीन प्रतिद्वंद्विता रही और अंततः मगध इन सभी पर विजयी रहा।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मगध के उत्थान में उसकी अनुकूल भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ राजगृह (गिरिव्रज) जैसी प्राकृतिक रूप से सुरक्षित राजधानी का भी योगदान था। 16 महाजनपदों में मगध ही एकमात्र ऐसा राज्य था जो आगे चलकर विशाल साम्राज्य में परिवर्तित हो सका।
    21. गोदावरी नदी के तट पर स्थित महाजनपद था –
    (a) अवंति
    (b) वत्स
    (c) अस्सक
    (d) कम्बोज
    R.A.S./ R.T.S. (Pre) 2008
    उत्तर-(c)
    16 महाजनपदों में अस्सक (अश्मक) एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो विंध्य पर्वत के दक्षिण में स्थित था। यह नर्मदा और गोदावरी नदियों के बीच के क्षेत्र में फैला हुआ था, जो वर्तमान महाराष्ट्र के अहमदनगर और औरंगाबाद जिलों के आसपास का इलाका है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसकी राजधानी पोतन (प्रतिष्ठान/पैठन) थी, जो आज के महाराष्ट्र में गोदावरी तट पर स्थित है। उल्लेखनीय है कि बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रंथ भगवती सूत्र — दोनों में 16 महाजनपदों की सूची में अस्सक का नाम सम्मिलित है। बौद्ध साहित्य में यह भी उल्लेख मिलता है कि महात्मा बुद्ध के समय अस्सक में आर्यों की एक विशेष शाखा निवास करती थी जिन्हें ‘अश्मक’ कहा जाता था।
    22. छठवीं शताब्दी ई.पू. में शुक्तिमती राजधानी थी-
    (a) पांचाल की
    (b) कुरु की
    (c) चेदि की
    (d) अवंति की
    U.P.P.C.S (Mains) 2011
    उत्तर-(c)
    चेदि महाजनपद वर्तमान बुंदेलखंड के पूर्वी भाग तथा उससे लगे क्षेत्रों में स्थित था। इसकी राजधानी ‘सोत्थिवती’ (पालि) थी, जिसे संस्कृत में ‘शुक्तिमती’ कहा जाता है। यह नगरी वर्तमान मध्य प्रदेश में यमुना की सहायक नदी केन (शुक्तिमती) के तट पर बसी थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:महाभारत के अनुसार, चेदि राज्य पर शिशुपाल का शासन था, जो कृष्ण का विरोधी था और जिसका वध कृष्ण ने किया था। चेदि राज्य का उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक अत्यंत प्राचीन जनपद था।
    23. सोलह महाजनपदों के युग में मथुरा इनमें से किसकी राजधानी थी?
    (a) वज्जि
    (b) वत्स
    (c) काशी
    (d) शूरसेन
    Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
    उत्तर-(d)
    शूरसेन महाजनपद की राजधानी मथुरा थी, जो यमुना नदी के तट पर स्थित थी। यह यादव वंश का प्रमुख केंद्र था। महाभारत काल में यहाँ के राजा उग्रसेन और उनके पुत्र कंस का उल्लेख मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बौद्ध साहित्य में मथुरा को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और सांस्कृतिक नगर के रूप में चित्रित किया गया है। उल्लेखनीय है कि मेगस्थनीज ने भी शूरसेन (सूरसेनोई) का वर्णन किया है और बताया है कि यहाँ के लोग हेरेकल्स (हरि/कृष्ण) की पूजा करते थे — यह भारत में कृष्ण-भक्ति के प्राचीनतम ऐतिहासिक साक्ष्यों में से एक है।
    24. निम्न में से किन ग्रंथों में प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों (षोडश महाजनपद) की सूची मिलती है? नीचे दिए गए कूट से सही
    1. अर्थशास्त्र 2. अंगुत्तर निकाय
    3. दीघनिकाय 4. भगवती सूत्र
    कूट :
    उत्तर का चयन कीजिए-
    (a) 2 और 4
    (b) 2, 3 और 4
    (c) 1 और 2
    (d) 1, 2 और 3
    R.A.S. / R.T.S (Pre) 2016
    उत्तर-(a)
    16 महाजनपदों की सूची केवल दो ग्रंथों में मिलती है — बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ और जैन ग्रंथ ‘भगवती सूत्र’। दीघनिकाय में 16 महाजनपदों की कोई सुव्यवस्थित सूची नहीं है, और कौटिल्य का अर्थशास्त्र मौर्यकाल का ग्रंथ है जो महाजनपदों की ऐतिहासिक सूची नहीं देता। दोनों ग्रंथों की सूची में मामूली अंतर है — भगवती सूत्र में ‘कलिंग’ का उल्लेख है, जबकि अंगुत्तर निकाय में ‘गंधार’ और ‘कम्बोज’ का उल्लेख है। यह अंतर इस बात का प्रमाण है कि विभिन्न परंपराओं में महाजनपदों की पहचान अलग-अलग थी।
    25. चंपा किस महाजनपद की राजधानी थी?
    (a) मगध
    (b) वज्जि
    (c) कोशल
    (d) अंग
    U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014
    उत्तर-(d)
    अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो वर्तमान बिहार के भागलपुर जिले के समीप गंगा और चंपा नदियों के संगम पर स्थित थी। महाभारत तथा पुराणों में इस नगर का प्राचीन नाम ‘मालिनी’ मिलता है। दीघनिकाय में उल्लेख है कि इस नगर की योजना महान वास्तुकार महागोविंद ने बनाई थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अंग महाजनपद पर बाद में मगध के राजा बिम्बिसार ने अधिकार कर लिया था। उल्लेखनीय है कि महाभारत के महारथी कर्ण को अंग का राजा बनाया गया था और चंपा उनकी राजधानी थी — इसीलिए कर्ण को ‘अंगराज’ भी कहा जाता है।
    26. महाभारत के अनुसार, उत्तर ी पांचाल की राजधानी स्थित थी-
    (a) हस्तिनापुर में
    (b) इंद्रप्रस्थ में
    (c) अहिच्छत्र में
    (d) मथुरा मे
    U.P.P.C.S. (Mains) 2006
    उत्तर-(c)
    पांचाल महाजनपद गंगा-यमुना दोआब के मध्यवर्ती भाग में स्थित था और यह दो भागों में विभाजित था। उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र थी, जो वर्तमान उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रामनगर के समीप स्थित थी। दक्षिणी पांचाल की राजधानी कांपिल्य थी, जो वर्तमान फर्रुखाबाद जिले में स्थित है। हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ कुरु राज्य की राजधानियाँ थीं, जबकि मथुरा शूरसेन की राजधानी थी। महाभारत के अनुसार, द्रोणाचार्य ने अपने शिष्यों की सहायता से पांचाल राज्य को जीतकर उसे कुरुओं और पांडवों के बीच बाँटा था।
    27. महाजनपद युग के 16 जनपदों के नाम बौद्ध साहित्य में प्रायः उल्लिखित मिलते हैं। निम्नलिखित में से किन जनपदों के नाम पाणिनि की अष्टाध्यायी में उल्लिखित हैं ?
    (a) मगध
    (b) अश्मक
    (c) कम्बोज
    (d) चेदि
    नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर चुनिए-
    (a) A, B और C
    (b) D और E
    (c) C, D और E
    (d) A, C, D और E
    R.A.S./R.T.S. (Pre) (Re-Exam) 2013
    उत्तर-(a)
    पाणिनि संस्कृत व्याकरण के महानतम आचार्य थे। इनका जन्म गांधार प्रदेश (वर्तमान पाकिस्तान के शाहबाजगढ़ी क्षेत्र) में हुआ था और इनका काल लगभग 500–400 ई.पू. माना जाता है। इनकी कृति अष्टाध्यायी में 8 अध्याय और लगभग 4000 सूत्र हैं। इसमें 22 जनपदों का उल्लेख मिलता है, जिनमें मगध, अश्मक, कम्बोज, गांधार और शूरसेन प्रमुख हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अष्टाध्यायी ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक और भौगोलिक स्थितियों की जानकारी देती है। विशेष रूप से, पाणिनि ने अपने ग्रंथ में गणराज्यों (संघों) का भी उल्लेख किया है, जो उस युग की लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का प्रमाण है।
    28. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 16 महाजनपदों के विषय में निम्नलिखित में से किस बौद्ध ग्रंथ में सूचना मिलती है?
    (a) दीघनिकाय
    (b) त्रिपिटक
    (c) दीपवंश
    (d) अंगुत्तर निकाय
    U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
    उत्तर-(d)
    बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ में छठी शताब्दी ई.पू. के 16 महाजनपदों की सुव्यवस्थित सूची मिलती है। ये 16 महाजनपद हैं — अंग, मगध, काशी, कोसल, वज्जि, मल्ल, चेदि, वत्स, कुरु, पांचाल, मत्स्य, शूरसेन, अस्मक, अवंति, गांधार और कम्बोज। अंगुत्तर निकाय पालि भाषा में रचित सुत्तपिटक का एक भाग है जिसमें बुद्ध के उपदेश संख्यात्मक क्रम में संकलित हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में भी 16 महाजनपदों की सूची मिलती है, लेकिन इसमें ‘कलिंग’ का उल्लेख है जबकि ‘गांधार’ और ‘कम्बोज’ नहीं हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि इनमें से अधिकांश महाजनपद उत्तरी भारत में गंगा के मैदान में स्थित थे।
    29. सोलह महाजनपदों की सूची उपलब्ध है-
    (a) महाभारत में
    (b) अंगुत्तर निकाय में
    (c) छांदोग्य उपनिषद में
    (d) संयुक्त निकाय में
    46th B.P.S.C. (Pre) 2003
    उत्तर-(b)
    16 महाजनपदों की सुस्पष्ट सूची बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ में उपलब्ध है। महाभारत में अनेक जनपदों का उल्लेख है, किंतु वहाँ 16 महाजनपदों की कोई क्रमबद्ध सूची नहीं दी गई है। छांदोग्य उपनिषद एक उपनिषद ग्रंथ है जो दार्शनिक विषयों पर केंद्रित है, और संयुक्त निकाय में भी इस प्रकार की कोई विशिष्ट सूची नहीं मिलती।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अंगुत्तर निकाय थेरवाद बौद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो सुत्तपिटक का चौथा भाग है। महाजनपद काल (600–325 ई.पू.) भारतीय इतिहास में राजनीतिक एकीकरण की प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण था, जो अंततः मौर्य साम्राज्य की स्थापना के साथ परिणत हुआ।
    30. निम्न में से कौन एक बौद्ध ग्रंथ “सोलह महाजनपदों” का उल्लेख करता है?
    (a) अंगुत्तर निकाय
    (b) मज्झिम निकाय
    (c) खुद्दक निकाय
    (d) दीघनिकाय
    U.P.P.C.S. (Pre) 2008
    U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
    उत्तर-(a)
    सोलह महाजनपदों का उल्लेख करने वाला बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ है। मज्झिम निकाय में मध्यम लंबाई के सुत्त संकलित हैं, खुद्दक निकाय में धम्मपद, जातक आदि लघु ग्रंथ हैं, और दीघनिकाय में दीर्घ सुत्तों का संग्रह है — किंतु इनमें से किसी में भी 16 महाजनपदों की व्यवस्थित सूची नहीं मिलती।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अंगुत्तर निकाय सुत्तपिटक के पाँच निकायों में से एक है और इसमें उपदेशों को 1 से 11 तक के अंकों के क्रम में व्यवस्थित किया गया है। यह ग्रंथ न केवल धार्मिक बल्कि तत्कालीन भारत की राजनीतिक-भौगोलिक स्थिति को समझने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।
    31. किसने मगध साम्राज्य में वज्जि गणसंघ को हराकर आत्मसात किया ?
    (a) चंद्रगुप्त मौर्य
    (b) अशोक
    (c) महापद्मनंद
    (d) अजातशत्रु
    Jharkhand P.S.C. (Mains) 2016
    उत्तर-(d)
    अजातशत्रु (492–460 ई.पू.) ने वज्जि संघ को पराजित कर उसे मगध साम्राज्य में मिलाया। वज्जि संघ एक शक्तिशाली गणतांत्रिक संघ था, जिसका नेतृत्व लिच्छवी करते थे और वैशाली उनकी प्रमुख राजधानी थी। अजातशत्रु ने सीधे युद्ध की बजाय कूटनीति का सहारा लिया — उसने अपने मंत्री वस्सकार को वज्जि संघ में आंतरिक फूट डालने के लिए भेजा, जिससे उनका संगठन कमज़ोर हो गया। इसके बाद उसने सैन्य आक्रमण कर उन्हें परास्त किया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अजातशत्रु ने इस युद्ध में दो नए शस्त्रों का प्रयोग किया — महाशिलाकंटक (एक प्रकार की पत्थर फेंकने वाली मशीन) और रथमूसल (रथ से जुड़ी घूमने वाली गदा)। बौद्ध ग्रंथ महापरिनिब्बानसुत्त में इस संघर्ष का उल्लेख मिलता है।
    32. मगध के किस प्रारंभिक शासक ने राज्यारोहण के लिए अपने पिता की हत्या की एवं स्वयं इसी कारणवश अपने पुत्र द्वारा मारा गया ?
    (a) बिंबिसार
    (b) अजातशत्रु
    (c) उदयिन
    (d) नागदशक
    U.P.P.C.S. (Pre) 2007
    उत्तर-(b)
    अजातशत्रु ने अपने पिता बिंबिसार की हत्या कर मगध की सत्ता हथियाई और बाद में उसके पुत्र उदयिन ने उसी की हत्या कर दी। यह हर्यंक वंश की पितृहंता परंपरा का प्रतीक बन गया। बिंबिसार को बौद्ध स्रोतों में मगध का प्रथम प्रतापी शासक माना जाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जैन ग्रंथों के अनुसार अजातशत्रु को ‘कुणिक’ भी कहा जाता था। उसने अपने शासनकाल में बुद्ध और महावीर दोनों से भेंट की थी और वह बौद्ध धर्म का समर्थक था।
    33. प्राचीन महाजनपद मगध की प्रथम राजधानी कौन-सी थी?
    (a) पाटलिपुत्र
    (b) वैशाली
    (c) चंपा
    (d) उपयुक्त में से कोई नहीं या एक से अधिक
    66th B.P.S.C. (Pre), 2020
    उत्तर-(d)
    मगध की प्रथम राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) थी, जो इस प्रश्न के विकल्पों में नहीं दी गई है। अतः सही उत्तर “उपयुक्त में से कोई नहीं” होगा। पुराणों के अनुसार बृहद्रथ वंश के राजा जरासंध ने गिरिव्रज को राजधानी बनाया था। बाद में उदयिन ने राजधानी पाटलिपुत्र स्थानांतरित की।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजगृह (गिरिव्रज) को पाँच पहाड़ियों से घिरा होने के कारण प्राकृतिक रूप से सुरक्षित माना जाता था। यहीं पर बुद्ध के निर्वाण के पश्चात प्रथम बौद्ध संगीति (483 ई.पू.) का आयोजन भी हुआ था।
    34. राजकुमार जो अपने पिता की मृत्यु के लिए उत्तर उत्तरदायी था-
    (a) अजातशत्रु
    (b) चण्डप्रद्योत
    (c) प्रसेनजित
    (d) उदयन
    U.P.P.C.S. (Pre) 2011
    उत्तर-(a)
    अजातशत्रु ने अपने पिता बिंबिसार को कारागार में डालकर उनकी मृत्यु का कारण बना। कुछ स्रोतों के अनुसार उसने स्वयं उनकी हत्या की, जबकि अन्य के अनुसार बिंबिसार ने कारागार में ही प्राण त्यागे। बौद्ध ग्रंथों में बिंबिसार को ‘श्रेणिक’ नाम से भी जाना जाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बिंबिसार ने वैवाहिक कूटनीति के माध्यम से कोशल, वैशाली और मद्र जैसे राज्यों से संबंध स्थापित किए थे। उन्होंने कोशल की राजकुमारी कोशलादेवी से विवाह किया था, जिसके दहेज में काशी प्रदेश मगध को मिला था।
    35. निम्नलिखित में से कौन एक मगध साम्राज्य की राजधानी नहीं रही ?
    (a) गिरिव्रज
    (b) राजगृह
    (c) पाटलिपुत्र
    (d) कौशाम्बी
    Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011
    उत्तर-(d)
    कौशाम्बी मगध साम्राज्य की राजधानी कभी नहीं रही। यह वत्स महाजनपद की राजधानी थी। गिरिव्रज और राजगृह एक ही स्थान के दो नाम हैं — ये मगध की प्रारंभिक राजधानी थी। बाद में उदयिन ने पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौशाम्बी आधुनिक उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) के निकट स्थित थी। वत्स राज्य के प्रसिद्ध शासक उदयन (मगध के उदयिन से भिन्न) थे, जो बौद्ध कथाओं में अत्यंत प्रसिद्ध हैं।
    36. मगध की राजधानी कौन-सी थी?
    (a) प्रतिष्ठान
    (b) वैशाली
    (c) गिरिव्रज (राजगृह)
    (d) चंपा
    47th B.P.S.C. (Pre) 2005
    उत्तर-(c)
    मगध की राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) थी। पुराणों के अनुसार बृहद्रथ वंश के शासक जरासंध ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। हर्यंक वंश के काल में भी यही राजधानी रही। अजातशत्रु के पुत्र उदयिन ने गंगा-सोन नदियों के संगम पर पाटलिग्राम की स्थापना की और राजधानी वहाँ स्थानांतरित की, जो आगे चलकर पाटलिपुत्र बनी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चाणक्य के अर्थशास्त्र में पाटलिपुत्र की राजधानी के रूप में महत्ता का उल्लेख है। मेगस्थनीज़ ने भी अपने ग्रंथ ‘इंडिका’ में पाटलिपुत्र का भव्य वर्णन किया है।
    37. अजातशत्रु के वंश का नाम क्या था?
    (a) मौर्य
    (b) हर्यंक
    (c) नंद
    (d) गुप्त
    53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
    उत्तर-(b)
    अजातशत्रु हर्यंक वंश से संबंधित था। इस वंश की स्थापना बिंबिसार ने की थी। हर्यंक वंश के बाद शिशुनाग वंश, फिर नंद वंश और उसके पश्चात मौर्य वंश का शासन मगध पर स्थापित हुआ।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हर्यंक वंश को बौद्ध ग्रंथों में ‘पितृहंता वंश’ भी कहा गया है क्योंकि इस वंश के कई शासकों ने अपने पिता की हत्या कर सत्ता प्राप्त की। शिशुनाग ने नागदशक को उखाड़कर हर्यंक वंश का अंत किया और एक नए वंश की नींव रखी।
    38. मगध की प्रारंभिक राजधानी कौन-सी थी?
    (a) पाटलिपुत्र
    (b) वैशाली
    (c) राजगृह (गिरिव्रज)
    (d) चंपा
    53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
    उत्तर-(c)
    मगध की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी। यह स्थान वर्तमान बिहार के नालंदा जिले में स्थित है। पाँच पर्वतों — वैभारगिरि, रत्नागिरि, उदयगिरि, स्वर्णगिरि और वैपुलगिरि — से घिरी होने के कारण यह नगरी अभेद्य मानी जाती थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महाभारत में जरासंध की राजधानी के रूप में गिरिव्रज का उल्लेख आता है। भगवान बुद्ध ने राजगृह में अनेक उपदेश दिए और यहाँ के वेणुवन (बाँस का उद्यान) में विश्राम किया था — यह बुद्ध को बिंबिसार द्वारा भेंट किया गया था।
    39. प्राचीन श्रावस्ती का नगर विन्यास किस आकृति का है ?
    (a) वृत्ताकार
    (b) अर्धचंद्राकार
    (c) त्रिभुजाकार
    (d) आयताकार
    U.P.P.C.S. (Pre) 2010
    उत्तर-(b)
    प्राचीन श्रावस्ती का नगर विन्यास अर्धचंद्राकार (Crescentic) था। अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1861 ई. में इसकी पहचान उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में स्थित सहेत-महेत नामक स्थल से की। यह कोशल महाजनपद की एक प्रमुख नगरी थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: श्रावस्ती में जेतवन विहार स्थित था, जिसे अनाथपिण्डक (सुदत्त) नामक धनी व्यापारी ने भगवान बुद्ध को भेंट किया था। बुद्ध ने अपने जीवन के 25 वर्षावास यहीं बिताए थे, जो किसी भी एक स्थान पर उनके सबसे अधिक वर्षावास हैं।
    40. छठी शताब्दी ई.पू. का मत्स्य महाजनपद स्थित था-
    (a) उत्तर प्रदेश में
    (b) राजस्थान में
    (c) बुंदेलखंड में
    (d) रुहेलखंड में
    U.P.P.C.S. (Pre) 2017
    उत्तर-(b)
    मत्स्य महाजनपद राजस्थान के जयपुर और अलवर के आसपास के क्षेत्र में स्थित था। इसकी राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ, जयपुर के निकट) थी। महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का अंतिम वर्ष यहीं राजा विराट के दरबार में बिताया था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बैराठ (विराटनगर) में अशोककालीन एक शिलालेख और बौद्ध स्तूप के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं, जो दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र मौर्य काल में भी महत्त्वपूर्ण था। मत्स्य जनपद का उल्लेख अथर्ववेद और पाणिनि की अष्टाध्यायी में भी मिलता है।
    41. मगध में नंद वंश का संस्थापक कौन था?
    (a) महापद्मनंद
    (b) धनानंद
    (c) नंदिवर्धन
    (d) महानंदिन
    Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016
    उत्तर-(a)
    शिशुनाग वंश के पतन के बाद मगध की सत्ता नंद वंश के हाथों में आई। इस वंश की नींव महापद्मनंद ने रखी, जिसे उग्रसेन भी कहा जाता है। पुराण उन्हें ‘सर्वक्षत्रांतक’ (समस्त क्षत्रियों का नाश करने वाला) एवं ‘अपरोपरशुराम’ की उपाधि से संबोधित करते हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महापद्मनंद की माता एक नाई (नाइन) जाति की महिला थी और पिता शिशुनाग वंश के राजा महानंदिन थे, इसलिए उन्हें ‘एकराट’ (एकमात्र सम्राट) भी कहा जाता है। नंद वंश भारत का पहला गैर-क्षत्रिय साम्राज्यवादी वंश माना जाता है।
    42. वाराणसी को निम्नलिखित में से किसने अपनी द्वितीय राजधानी बनाया था ?
    (a) अजातशत्रु
    (b) कालाशोक
    (c) महापद्मनद
    (d) शिशुनाग
    U.P.G.I.C. प्रवक्ता, 2007-
    उत्तर-(*)
    छठी शताब्दी ई.पू. में वाराणसी काशी महाजनपद की राजधानी थी। हर्यक वंश के शासक बिंबिसार ने इसे कोशल नरेश प्रसेनजित की बहन महाकोशला से विवाह के दहेज में प्राप्त किया। शिशुनाग ने गिरिव्रज को अपनी मुख्य राजधानी और वैशाली को द्वितीय राजधानी बनाया था, तथा अपने पुत्र को वाराणसी का उपराजा नियुक्त किया। इस प्रश्न में दिए गए विकल्पों में स्पष्टता का अभाव है; उ.प्र. लोक सेवा आयोग ने इसका उत्तर शिशुनाग माना है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन निरंतर बसे हुए नगरों में से एक है। ऋग्वेद में भी काशी (वाराणसी) का उल्लेख मिलता है, जो इसकी अत्यंत प्राचीनता को सिद्ध करता है।
    43. काल्पी नगर किस नदी के तट पर स्थित है?
    (a) गंगा
    (b) यमुना
    (c) नर्मदा
    (d) कृष्णा
    U.P.P.C.S. (Mains) 2015
    उत्तर-(b)
    काल्पी उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में यमुना नदी के तट पर बसा एक ऐतिहासिक नगर है। प्राचीन काल में इसे ‘कालप्रिया’ नाम से जाना जाता था। मान्यता है कि इसे चौथी शताब्दी में राजा वसुदेव ने बसाया था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मध्यकाल में काल्पी एक प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र था। 1858 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी के बाद काल्पी को ही अपना अगला रणक्षेत्र बनाया था।
    44. मालवा क्षेत्र पर मगध की सत्ता का विस्तार निम्न में से किसक शासन काल में हुआ था?
    (a) बिंबिसार के
    (b) अजातशत्रु
    (c) उदयभद्र के
    (d) शिशुनाग के
    U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
    उत्तर-(d)
    पुराणों के अनुसार मगध के राजा शिशुनाग ने अवंति (वर्तमान मालवा) राज्य को युद्ध में परास्त कर मगध साम्राज्य में विलीन कर लिया था। यह मगध की शक्ति विस्तार की एक महत्वपूर्ण घटना है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शिशुनाग से पहले अवंति और मगध के बीच लगभग 100 वर्षों तक संघर्ष चलता रहा था, जिसमें अजातशत्रु और उदयभद्र जैसे हर्यक वंश के शासकों ने भी अवंति को जीतने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता अंततः शिशुनाग को मिली। अवंति की राजधानी उज्जयिनी थी, जो आज भी मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नगर है।
    45. निम्नलिखित मगध राजवंशों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए-
    1. नंद वंश 2. शुंग वंश
    3. मौर्य वंश 4. हर्यक वंश
    निम्न कूटों में से चुनिए-
    (a) 2, 1, 4 एंव 3
    (c) 3, 2, 1 एवं 4
    (b) 4, 1, 3 एवं 2
    (d) 1, 3, 4 एवं 2
    Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2008
    उत्तर-(b)
    मगध पर शासन करने वाले इन चार वंशों का सही कालक्रम इस प्रकार है—हर्यक वंश (544–412 ई.पू.), नंद वंश (344–321 ई.पू.), मौर्य वंश (321–184 ई.पू.), शुंग वंश (184–75 ई.पू.)। उल्लेखनीय है कि हर्यक और नंद वंश के बीच शिशुनाग वंश (412–344 ई.पू.) का भी शासन था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हर्यक वंश की स्थापना बिंबिसार ने की थी और इसे मगध साम्राज्य के विस्तार का वास्तविक आरंभकर्ता माना जाता है। शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या करके की थी।
    46. नंद वंश के पश्चात मगध पर किस राजवंश ने शासन किया ?
    (a) मौर्य
    (b) शुग
    (c) गुप्त
    (d) कुषाण
    44th B.P.S.C. (Pre) 2000
    उत्तर-(a)
    नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद के काल में अत्यधिक करों और उत्पीड़न से जनता में व्यापक असंतोष फैल गया। चंद्रगुप्त मौर्य ने कूटनीतिज्ञ चाणक्य (कौटिल्य) के मार्गदर्शन में धनानंद को पराजित कर उसका वध किया और 321 ई.पू. में मौर्य वंश की स्थापना की। इस प्रकार नंद वंश के ठीक बाद मौर्य वंश का शासन आया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंद्रगुप्त मौर्य ने सिकंदर के सेनापतियों को भी पराजित कर पश्चिमोत्तर भारत को विदेशी प्रभाव से मुक्त कराया था। मौर्य साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप का पहला विशाल केंद्रीकृत साम्राज्य था, जो अफगानिस्तान से लेकर दक्षिण भारत तक फैला था।
    47. मगध का कौन-सा सम्राट ‘अपरोपरशुराम’ के नाम से जाना जाता है?
    (a) बिंदुसार
    (b) अजातशत्रु
    (c) कालाशोक
    (d) महापद्मनंद
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl) (Pre) 2010
    उत्तर-(d)
    नंद वंश के संस्थापक महापद्मनंद को पुराणों में ‘अपरोपरशुराम’ की उपाधि दी गई है, जिसका अर्थ है ‘दूसरा परशुराम’। यह उपाधि उन्हें क्षत्रियों का दमन करने के कारण दी गई थी। उन्हें ‘सर्वक्षत्रांतक’ (सभी क्षत्रियों का नाशक) भी कहा जाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महापद्मनंद ने कलिंग को भी जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था और वहाँ एक नहर खुदवाई थी, जिसका उल्लेख खारवेल के हाथीगुम्फा अभिलेख में मिलता है। उनके साम्राज्य को ‘एकराट’ की संज्ञा दी गई क्योंकि यह संपूर्ण उत्तर भारत पर एकछत्र प्रभुत्व स्थापित करने वाला पहला साम्राज्य था।
    48. राजा नंद का उल्लेख करने वाला अभिलेखीय प्रमाण है-
    (a) खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख
    (b) रुम्मिनदेई स्तम्भ अभिलेख
    (c) रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
    (d) धनदेव का अयोध्या अभिलेख
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Mains) 2010
    उत्तर-(a)
    ओडिशा के भुवनेश्वर के निकट स्थित उदयगिरि पहाड़ी की हाथीगुम्फा गुफा में कलिंग नरेश खारवेल का प्रसिद्ध अभिलेख उत्कीर्ण है। इसमें उल्लेख है कि नंद राजा महापद्मनंद ने कलिंग में एक नहर खुदवाई थी। यह अभिलेख नंद वंश की गतिविधियों का एकमात्र महत्वपूर्ण अभिलेखीय साक्ष्य है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हाथीगुम्फा अभिलेख ब्राह्मी लिपि में प्राकृत भाषा में लिखा गया है और इसमें खारवेल के 13 वर्षों के शासन का विवरण मिलता है। यह अभिलेख भारतीय नहर-निर्माण की जानकारी देने वाला प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य भी है।
    49. गौतम बुद्ध के समय का प्रसिद्ध वैद्य जीवक जिसके दरबार से संबंधित था?
    (a) बिंबिसार
    (b) चण्ड प्रद्योत
    (c) प्रसेनजित
    (d) उदयन
    U.P. U.D.A./ L.D.A. (Pre) 2006
    उत्तर-(a)
    बुद्धकाल के महान वैद्य जीवक मगध नरेश बिंबिसार के दरबार से संबद्ध थे और उनके राजवैद्य थे। बिंबिसार ने उन्हें अवंति के राजा चंड प्रद्योत की चिकित्सा के लिए भेजा था। जीवक ने स्वयं गौतम बुद्ध की भी चिकित्सा की थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जीवक को आयुर्वेद के इतिहास में एक महान शल्य चिकित्सक (surgeon) के रूप में जाना जाता है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार उन्होंने मस्तिष्क की जटिल शल्य चिकित्सा भी की थी। वे तक्षशिला विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित चिकित्सक थे।
    50. निम्नलिखित कथन (a) और (b) को पढ़ें और नीचे दिए गए कूटों में से सही
    (a) विश्व के सभी भागों में ईस्वी पूर्व छठवीं शताब्दी एक महान धार्मिक उथल-पुथल का काल था।
    (b) वैदिक धर्म बहुत जटिल हो चुका था। उत्तर का चयन करें-
    कूट :
    (a) दोनों (a) औ (b) गलत हैं।
    (b) दोनों (a) और (b) सही हैं।
    (c) (a) सही है, जबकि (b) गलत है।
    (d) (a)गलत है, जबकि (b) सही है।
    Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012
    उत्तर-(b)
    ईसा पूर्व छठी शताब्दी विश्व के इतिहास में धार्मिक-दार्शनिक जागृति का काल था। भारत में बौद्ध और जैन धर्म का उदय हुआ; चीन में कन्फ्यूशियस, ईरान में जरथुस्त्र और यूनान में पाइथागोरस ने पुरानी मान्यताओं को चुनौती दी। भारत में वैदिक धर्म अत्यंत जटिल हो चुका था — यज्ञों पर अत्यधिक खर्च, पशुबलि और पुरोहित वर्ग के वर्चस्व ने आम जनता में असंतोष उत्पन्न किया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इतिहासकार कार्ल जैस्पर्स ने इस काल को ‘Axial Age’ (धुरी काल) कहा है, जब विश्व के विभिन्न भागों में स्वतंत्र रूप से महान दार्शनिक एवं धार्मिक आंदोलन प्रारंभ हुए। भारत में इस काल में लगभग 62 दार्शनिक संप्रदायों का उल्लेख बौद्ध ग्रंथों में मिलता है।
    51. सूची-1 तथा सूची-II को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही चुनिए :
    सूची-I (उ.प्र. के प्राचीन जनपद) सूची-II (राजधानी)
    A. कुरु – 1. साकेत
    B. पांचाल – 2. कौशाम्बी
    C. कोशल – 3. अहिच्छत्र
    D. वत्स -4. इंद्रप्रस्थ
    कूट :
    A B C D
    (a) 1 2 3 4
    (b) 4 3 2 1
    (c) 3 4 2 1
    (d) 4 2 3 1
    U.P.P.C.S. (Pre) 2008
    उत्तर-(b)
    इन महाजनपदों और उनकी राजधानियों का सही सुमेलन है — कुरु : इंद्रप्रस्थ, पांचाल : अहिच्छत्र, कोशल : साकेत, वत्स : कौशाम्बी। कोशल की एक अन्य महत्वपूर्ण नगरी श्रावस्ती भी थी, जो बाद में राजधानी बनी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी वर्तमान इलाहाबाद (प्रयागराज) के निकट स्थित थी और गंगा-यमुना के संगम क्षेत्र में व्यापार का एक प्रमुख केंद्र थी। पांचाल दो भागों — उत्तर पांचाल (अहिच्छत्र) और दक्षिण पांचाल (काम्पिल्य) — में विभाजित था।
    52. सूची – I को सूची – II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही चुनिए –
    सूची – I (महाजनपद) सूची – II (राजधानी)
    A. मत्स्य 1. मथुरा
    B. कुरु 2. पोतन
    C. शूरसेन 3. विराटनगर
    D. अश्मक 4. इंद्रप्रस्थ
    कूट :
    A B C D
    (a) 4 2 1 3
    (b) 3 1 4 2
    (c) 3 4 1 2
    (d) 2 3 4 1
    U.P.P.C.S. (Pre) 2020
    उत्तर-(c)
    सही सुमेलन इस प्रकार है — मत्स्य : विराटनगर, कुरु : इंद्रप्रस्थ, शूरसेन : मथुरा, अश्मक : पोतन। मत्स्य महाजनपद वर्तमान राजस्थान के अलवर-जयपुर क्षेत्र में स्थित था और इसकी राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराट, जयपुर) थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शूरसेन महाजनपद की राजधानी मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है। अश्मक महाजनपद दक्षिण भारत में स्थित एकमात्र महाजनपद था, जो गोदावरी नदी के तट पर स्थित था।
    53. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही सुमेलित नहीं है?
    (a) कम्बोज – राजपुर/हाटक
    (b) अश्मक – पोतन/पोटिल
    (c) शूरसेन – कौशाम्बी
    (d) कोशल – श्रावस्ती
    U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2016
    उत्तर-(c)
    शूरसेन की राजधानी कौशाम्बी नहीं बल्कि मथुरा थी। कौशाम्बी वत्स महाजनपद की राजधानी थी। शेष युग्म सही हैं — कम्बोज की राजधानी राजपुर/हाटक, अश्मक की पोतन/पोटिल और कोशल की श्रावस्ती (और साकेत) थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कम्बोज महाजनपद वर्तमान अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित था। यह अपने उत्कृष्ट घोड़ों के लिए प्रसिद्ध था और यहाँ के लोगों की गणना महाभारत में योद्धाओं के रूप में हुई है।
    54. वर्तमान उत्तर प्रदेश में भारत के प्राचीनतम सोलह महाजनपद में से कुल कितने महाजनपद स्थित थे?
    (a) 06
    (b) 07
    (c) 08
    (d) 09
    U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2021
    उत्तर-(c)
    छठी शताब्दी ई.पू. के सोलह महाजनपदों में से 8 वर्तमान उत्तर प्रदेश की भौगोलिक सीमाओं के अंतर्गत स्थित थे — कुरु, पांचाल, काशी, कोशल, शूरसेन, चेदि, वत्स और मल्ला। इन सोलह महाजनपदों का उल्लेख बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तरनिकाय’ में मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जैन ग्रंथ ‘भगवती सूत्र’ में भी 16 महाजनपदों की सूची है, लेकिन दोनों सूचियों में कुछ नाम भिन्न हैं। अंगुत्तरनिकाय की सूची को अधिक प्रामाणिक माना जाता है क्योंकि वह ऐतिहासिक दृष्टि से अधिक सुसंगत है।
    55. निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन प्राचीन भारत की श्रेणी व्यवस्था के बारे में असत्य है? उत्तर भारत में प्रचलित थी।
    (a) श्रेणी व्यापारियों और कारीगरों का संगठन थी।
    (b) उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता और कीमत संबंधित श्रेणी द्वारा निर्धारित की जाती थी।
    (c) श्रेणी अपने सदस्यों के आचरण पर भी नियंत्रण रखा करती थी।
    (d) श्रेणी व्यवस्था मात्र
    R.A.S./R.T.S. (Pre) 2018
    उत्तर-(d)
    प्राचीन भारत में श्रेणियाँ (guilds) एक ही व्यवसाय या शिल्प के लोगों के संगठन थे। ये व्यापार का संचालन, वस्तुओं की कीमत व गुणवत्ता का निर्धारण तथा सदस्यों के आचरण पर नियंत्रण रखती थीं। यह व्यवस्था केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं थी — दक्षिण भारत में भी श्रेणियों का उल्लेख मिलता है। अतः विकल्प (d) असत्य है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: श्रेणियाँ न केवल व्यापारिक संस्थाएँ थीं, बल्कि वे बैंकिंग का कार्य भी करती थीं — धन जमा करना और ऋण देना। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में श्रेणियों के विस्तृत नियम-कायदों का उल्लेख मिलता है, जो उनकी संगठित प्रकृति को दर्शाता है।
  • महाजनपदों का उदय (600 ई. पू.): जनपदों से शक्तिशाली राज्यों का विकास

    ➣ यह समय वैदिक काल के अंत का था। लोगों के भौतिक जीवन में काफी विकास हुआ। खानाबदोश और घुमन्तू जीवन का अन्त हो गया था।

    ➣ लौहे के बढ़ते उपयोग ने बड़े राज्यों को जन्म दिया। नए कृषि उपकरणों से कृषि व्यवस्थित ढंग से होने लगी। छोटे-छोटे कबीलों ने राज्यों का रूप ले लिया।

    ➣ इन महाजपदों का उल्लेख बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रन्थ भवति सूत्र में मिलता है।

    ➣ बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तरनिकाय से ज्ञात होता है कि गौतम बुद्ध के जन्म के पूर्व समस्त उत्तर भारत 16 बड़े राज्यों में विभाजित था। इन्हें सोलह (षोडश) महाजनपद कहा गया है। इन सोलह महाजनपदों के नाम हैं-कोशल, काशी, मगध, अंग, वज्जि, चेदि, मल्ल, वत्स, कुरु, पांचाल, मत्स्य, शूरसेन, कम्बोज, अवंति, अस्सक (अश्मक) तथा गांधार।

    ➣ जैन ग्रंथ भगवतीसूत्र में भी इन 16 महाजनपदों के नाम मिलते हैं, किंतु इसमें कुछ नाम भिन्न दिए गए हैं। इसमें प्राप्त सोलह महाजनपदों के नाम हैं-अंग, बंग, मलय, अच्छ, वच्छ (वत्स), मगह (मगध), मालव, कोच्छ, लाढ़, मोलि (मल्ल), कोशल, काशी, पाठ्य, सम्मुत्तर, अवध एवं वज्जि।

    16 महाजनपदों में से 15 महाजनपद उत्तर भारत में थे जबकि दक्षिण भारत में गोदावरी नदी के किनारे स्थित एकमात्र जनपद अस्मक था।

    जनपदराजधानीक्षेत्र
    1.अंगचंपाभागलपुर, मुंगेर (बिहार)
    2.मगध गिरिव्रज/राजगृह पटना एवं गया (बिहार)
    3.काशीवाराणसीवाराणसी के आसपास
    4.कोशल साकेत एवं श्रावस्तीपूर्वी उत्तर प्रदेश
    5.वज्जिवैशालीमुजफ्फरपुर के आसपास (बिहार)
    6.मल्लकुशीनारा/पावा देवरिया एवं गोरखपुर (उ. प्र.)
    7.चेदिसुक्तिमती बुंदेलखण्ड (उ. प्र.)
    8.वत्सकौशाम्बीइलाहाबाद (उ.प्र.)
    9.कुरुइन्द्रप्रस्थ मेरठ तथा हरियाणा के क्षेत्र
    10.पाचालअहिच्छत्र, काम्पिल्यआधुनिक पश्चिम उत्तर प्रदेश
    11.सूरसेनमथुरामथुरा (उ. प्र.)
    12.गांधारतक्षशिलापेशावर तथा कश्मीर
    13.कम्बोजराजपुरा (हाटक)उत्तर प्रदेश सीमा प्रान्त
    14.अस्मकपोतन या पोटिलगोदावरी क्षेत्र
    15.अवन्तिउज्जयिनी/ महिष्मतीमालवा और मध्य प्रदेश
    16.मत्स्यविराटनगरजयपुर के आसपास
    महाजनपदों का उदय

    ➣ उत्तरी बिहार के वर्तमान भागलपुर तथा मुंगेर के जिले अंग महाजनपद के अंतर्गत थे। इसकी राजधानी चंपा थी। महाभारत तथा पुराणों में इसका प्राचीन नाम मालिनी प्राप्त होता है।

    ➣ बुद्ध के समय भारत के छः महानगरों में चंपा की गणना की जाती थी। महापरिनिर्वाणसूत्र में इन छः महानगरों के नाम प्राप्त होते हैं। ये हैं-चंपा, राजगृह, बनारस, साकेत, कौशाम्बी तथा श्रावस्ती।

    ➣ दीघनिकाय के अनुसार, चंपा नगर निर्माण की योजना वास्तुकार महागोविंद ने की थी।

    वैशाली के लिच्छवियों ने विश्व का पहला गणतंत्र स्थापित किया था। सुत्तनिपात में वैशाली को मगधम् पुरम कहा गया है। ईसा पूर्व छठी शताब्दी में विश्व की प्रथम गणतंत्रात्मक व्यवस्था वैशाली का लिच्छवि में थी।

    काशी का सबसे शक्तिशाली शासक ब्रह्मदत्त था। इसने कोशल पर विजय प्राप्त की थी। अंततोगत्वा कोशल के राजा कंस ने काशी को जीतकर अपने राज्य में शामिल कर लिया।

    ➣ प्रसेनजित के समय कोशल का काशी के अतिरिक्त कपिलवस्तु के शाक्य, केसपुत्त के कालाम, रामगाम के कोलिय, पावा और कुशीनारा के मल्ल, पिप्पलिवन के मोरिय आदि गणराज्यों पर भी अधिकार था।

    संयुक्त निकाय के अनुसार, प्रसेनजित पांच राजाओं के एक गुट का नेतृत्व करता था।

    ➣ रामायणकालीन कोशल राज्य की राजधानी अयोध्या थी। कोशल के प्रमुख नगर श्रावस्ती और अयोध्या थे।

    ➣ बुद्ध काल में कोशल के दो भाग हो गए थे। उत्तरी भाग की राजधानी श्रावस्ती तथा दक्षिणी भाग की राजधानी साकेत थी। उत्खननों के आधार पर ज्ञात हुआ है कि प्राचीन श्रावस्ती का नगर विन्यास अर्द्धचंद्राकार था।

    ➣ पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में मल्ल महाजनपद स्थित था। इसके दो भाग थे-एक की राजधानी पावा (पडरौना) तथा दूसरे की कुशीनारा (कसया) थी।

    ➣ छठीं शताब्दी ई.पू. आधुनिक बुंदेलखंड के पूर्वी तथा उसके समीपवर्ती भागों में चेदि महाजनपद स्थित था। इसकी राजधानी सोत्यिवती थी, जिसकी पहचान महाभारत में शुक्तिमती से की जाती है।

    ➣ महाभारत काल में चेदि का शासक शिशुपाल था, जिसका वध कृष्ण द्वारा किया गया था।

    ➣ प्रयागराज के आस-पास के क्षेत्रों में वत्स महाजनपद स्थित था। विष्णु पुराण होता है कि हस्तिनापुर के राजा निचक्षु ने हस्तिनापुर के गंगा के प्रवाह बह जाने के बाद कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाई थी।

    ➣ बुद्ध काल में यहां पौरव वंश का शासन था। यहां का शासक उदयन था। बौद्ध भिक्षु पिण्डोला ने उदयन को बौद्ध मत में दीक्षित किया था।

    ➣ उदयन-वासवदत्ता की दंतकथा उज्जैन से संबंधित है। इस कथा को महाकवि भास ने अपने नाटक स्वप्नवासवदत्तम् में वर्णित किया है।

    ➣ कुरु महाजनपद मेरठ, दिल्ली तथा थानेश्वर के भू-भागों में स्थित था। महाभारतकालीन हस्तिनापुर नगर इसी राज्य में स्थित था। बुद्ध के समय यहां का राजा कोरव्य था।

    पांचाल महाजनपद आधुनिक रुहेलखंड के बरेली, बदायूं तथा फर्रुखाबाद के जिलों से मिलकर बनता था। प्रारंभ में इसके दो भाग थे-उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र तथा दक्षिणी पांचाल की राजधानी कांपिल्य थी।

    ➣ पांचाल महाजनपद के अंतर्गत कान्यकुब्ज का प्रसिद्ध नगर स्थित था। पांचाल जनपद की सीमाएं हिमालय की तलहटी से लेकर दक्षिण में चंबल नदी तक तथा पूर्व में कोसल तथा पश्चिम में कुरु जनपद को स्पर्श करती थीं।

    ➣ पांचाल मूलतः एक राजतंत्र था, किंतु ऐसा प्रतीत होता है कि कौटिल्य के समय तक वह एक गणराज्य हो गया था।

    मत्स्य महाजनपद राजस्थान के जयपुर क्षेत्र में बसा हुआ था। इसके अंतर्गत वर्तमान अलवर एवं भरतपुर का एक भाग भी सम्मिलित था। इसकी राजधानी विराट की स्थापना विराट नामक राजा द्वारा की गई थी।

    शूरसेन महाजनपद आधुनिक ब्रजमंडल क्षेत्र में बसा हुआ था। इसकी राजधानी मथुरा थी। प्राचीन यूनानी लेखक इस राज्य को शूरसेनोई तथा इसकी राजधानी को मेथोरा कहते थे।

    अश्मक महाजनपद गोदावरी नदी (आंध्र प्रदेश) के तट पर स्थित था। महाजनपदों में केवल अश्मक ही दक्षिण भारत में स्थित था।

    अवंति महाजनपद पश्चिमी तथा मध्य मालवा के क्षेत्र में बसा था। इस महाजनपद के दो भाग थे-उत्तरी अवंति की राजधानी उज्जयिनी तथा दक्षिणी अवंति की राजधानी माहिष्मती थी।

    ➣ गौतम बुद्ध के समय यहां का राजा प्रद्योत था। बिंबिसार के समय में मगध के साथ प्रद्योत के संबंध मैत्रीपूर्ण थे।

    प्रद्योत को पाण्डुरोग से ग्रसित हो जाने पर बिंबिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को उसके उपचार के लिए भेजा। बौद्ध पुरोहित महाकच्चायन के प्रभाव से प्रद्योत बौद्ध बन गया।

    ➣ प्राचीन भारत के उत्तरी भाग में दो जनपद थे। ये जनपद थे-गांधार और कम्बोजगांधार महाजनपद वर्तमान पाकिस्तान के पेशावर तथा रावलपिंडी जिलों में स्थित था।

    ➣ रामायण से ज्ञात होता है कि तक्षशिला नगर की स्थापना भरत के पुत्र तक्ष ने की थी। गांधार महाजनपद का दूसरा प्रमुख नगर पुष्कलावती था।

    ➣ कौटिल्य ने कम्बोजों को वार्ताशस्त्रोपजीवी संघ अर्थात पशुपालन, कृषि, वाणिज्य तथा शस्त्र द्वारा जीविका चलाने वाला कहा है। प्राचीन समय में कम्बोज अपने श्रेष्ठ घोड़ों के लिए विख्यात था।

    ➣ सोलह महाजनपदों में से चार-कोशल, मगध, वत्स तथा अवंति अत्यंत शक्तिशाली थे।

    ➣ सोलह महाजनपदों में से आठ वर्तमान उत्तर प्रदेश में स्थित थे। ये महाजनपद हैं-काशी, कोशल, वत्स, मल्ल, कुरु, पांचाल, शूरसेन तथा चेदि।

    ➣ बुद्ध काल में गंगाघाटी में कई गणराज्यों के अस्तित्व का प्रमाण मिलता है। ये गणराज्य थे-कपिलवस्तु के शाक्य, सुमसुमारगिरि के भग्ग, अलकप्प के बुलि, केसपुत्त के कालाम, रामगाम के कोलिय, कुशीनारा के मल्ल, पावा के मल्ल, पिप्पलिवन के मोरिय, वैशाली के लिच्छवी तथा मिथिला के विदेह।

    महाजनपद एवं गणतंत्र व्यवस्था

    • पाणिनी के अष्टाध्यायी में 22 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।
    • वैशाली के लिच्छवियों ने विश्व का पहला गणतंत्र स्थापित किया था।
    • महाजनपदों की गणतंत्रात्मक व्यवस्था में प्रतिनिधियों की सभा को संथागार कहा जाता था।
    • बुद्ध के समय 10 गणतंत्र राज्य थे। इनमें से 8 वज्जि संघ के अंतर्गत थे, शेष 2 मल्ल संघ के अंतर्गत थे।
    • महाजनपदों की शासन प्रणाली में ब्राह्मण तथा क्षत्रिय को कर से मुक्ति की सुविधा थी।
  • अन्य प्राचीन धर्म | | One-Liner Practice

    ईसाई धर्म

    ❑ ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह थे।

    ❑ ईसा मसीह का जन्म जेरुसेलम के निकट बैथलेहम नामक स्थान पर हुआ था।

    ❑ ईसा मसीह के माता का नाम मेरी तथा पिता का नाम जोसेफ था।

    ❑ ईसा ने अपने जीवन के प्रथम 30 वर्ष एक बढ़ई के रूप में बैथलेहम के निकट नाजरेथ में बिताए।

    ❑ ईसा मसीह के प्रथम दो शिष्य एंडूस एवं पीटर थे।

    ❑ ईसा मसीह को 33 ई. में सूली पर चढ़ाया गया। इनको सूली पर रोमन गवर्नर पोंटियस ने चढ़ाया।

    ❑ ईसाई धर्म का सबसे पवित्र चिह्न क्रॉस है।

    ❑ ईसाई त्रित्व में विश्वास रखते हैं, ये हैं, ईश्वर- पिता, ईश्वर-पुत्र, ईश्वर-पवित्र आत्मा।

    ❑ ईसाई धर्म का प्रमुख ग्रंथ बाइबिल है।

    ❑ ईसा मसीह के जन्म दिवस को क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है।

    इस्लाम धर्म

    ❑ इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद थे।

    ❑ हजरत मुहम्मद का जन्म 570 ई. में मक्का में हुआ था।

    ❑ हजरत मुहम्मद के पिता का नाम अब्दुल्ला और माता का नाम अमीना था।

    ❑ हजरत मुहम्मद को 610 ई. में मक्का के पास हीरा नामक गुफा में ज्ञान की प्राप्ति हुई।

    ❑ हजरत मुहम्मद की शादी 25 वर्ष की अवस्था में खदीजा नामक विधवा के साथ हुई।

    ❑ इनकी पुत्री का नाम फातिमा एवं दामाद का नाम अली हजरत हुसैन था।

    ❑ 24 सितम्बर, 622 ई. को पैगम्बर मुहम्मद के मक्का से मदीना की यात्रा इस्लाम जगत में मुस्लिम संवत् (हिजरी संवत्) के नाम से जाना जाता है।

    ❑ देवदूत ग्रैब्रियल ने पैगम्बर मुहम्मद को कुरान अरबी भाषा में संप्रेषित की थी।

    ❑ इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ कुरान है।

    ❑ नमाज के अवसर पर मक्का की ओर की दिशा को किबला कहा जाता है।

    ❑ पैगम्बर मुहम्मद ने कुरान की शिक्षाओं का उपदेश दिया।

    ❑ पैगम्बर मुहम्मद के उत्तराधिकारी खलीफा कहलाते हैं।

    ❑ 8 जून, 632 ई. को हजरत मुहम्मद की मृत्यु हो गई। उसके बाद मदीना में दफनाया गया।

    ❑ हजरत मुहम्मद की मृत्यु के बाद इस्लाम धर्म सुन्नी तथा शिया नामक दो पंथों में विभक्त हो गया।

    ❑ सुन्नी उसे कहते हैं जो सुन्ना में विश्वास करते हैं। सुन्ना पैगम्बर मुहम्मद के कथनों तथा कार्यों का विवरण ग्रंथ है।

    ❑ शिया अली की शिक्षाओं में विश्वास करते हैं तथा उन्हें मुहम्मद का न्यायसम्मत उत्तराधिकारी मानते हैं।

    ❑ अली की 661 ई. में हत्या कर दी गई। अली के पुत्र हुसैन की हत्या 680 ई. में कर्बला (इराक) नामक स्थान पर कर दी गई। इन दोनों हत्या ने शिया को निश्चित मत का रूप दे दिया।

    ❑ सर्वप्रथम पैगम्बर साहब का जीवन-चरित्र इब्न ईशाक ने लिखा।

    ❑ मुहम्मद पैगम्बर के जन्म दिन पर ईद-ए-मिलाद-उन-नबी पर्व मनाया जाता है।

    ❑ इस्लाम जगत में खलीफा पद 1924 ई. तक रहा क्योंकि उसी वर्ष इसे तुर्की शासक मुस्तफा कमालपाशा ने समाप्त कर दिया।

    पारसी धर्म

    ❑ इन धर्मों के अतिरिक्त पारसी धर्म के पैगम्बर जरथुस्ट्र (ईरानी) थे, जिनके शिक्षाओं का संकलन जेन्दा अवेस्ता नामक ग्रंथ में है, जो पारसियों का धार्मिक ग्रंथ है।

    ❑ पारसी धर्म के अनुयायी एक ईश्वर अहुर को मानते हैं।

    ❑ पारसी धर्म के अनुयायियों को अग्नि-पूजक कहा जाता है।

    ❑ जेन्दा अवेस्ता नामक ग्रंथ की मूल शिक्षा का सूत्र सद्-विचार, सद्-वचन तथा सद्-कार्य है।

    यहूदी धर्म

    ❑ यहूदी धर्म (Judaism) विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक है, जिसे दुनिया का प्रथम एकेश्वरवादी धर्म माना जाता है।

    ❑ करीब 4000 साल पुराना यहूदी धर्म वर्तमान के इजरायल राष्ट्र का राजधर्म है।

    ❑ यहूदी एकेश्वरवादी होते हैं, लेकिन वे ईश्वर को त्रीएक के रूप में समझते हैं अर्थात् परमपिता परमेश्वर, उनके पुत्र ईसा मसीह (यीशु मसीह) और पवित्र आत्मा।

    ❑ इस धर्म में मूर्ति पूजा को पाप माना जाता है।

    ❑ यहूदी अपने भगवान को यहवेह या यहोवा कहते हैं।

    ❑ यहूदी धर्म की शुरुआत पैगंबर अब्राहम (अबराहम या इब्राहिम) से मानी जाती है, जो ईसा से 2000 वर्ष पूर्व हुए थे।

    ❑ पैगंबर अब्राहम के पहले बेटे का नाम हजरत इसहाक और दूसरे का नाम हजरत इस्माईल था। दोनों के पिता एक थे, किंतु माँ अलग-अलग थीं।

    ❑ हजरत इसहाक की माँ का नाम सराह था और हजरत इस्माईल की माँ हाजरा थीं।

    ❑ पैगंबर अब्राहम के पोते का नाम हजरत याकूब था।

    ❑ याकूब का ही दूसरा नाम इजरायल था।

    ❑ याकूब ने ही यहूदियों की 12 जातियों को मिलाकर एक सम्मिलित राष्ट्र इजरायल बनाया था।

    ❑ इजरायल की स्थापना 1948 में हुई थी।

    ❑ दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक यहूदी धर्म से ही ईसाई और इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हुई है।

    ❑ यहूदियों की धर्मभाषा इब्रानी (हिब्रू) और यहूदी धर्मग्रंथ का नाम तनख है, जो इब्रानी भाषा में लिखा गया है।

    ❑ तनख को तालमुद या तोरा भी कहते हैं। तनख का रचनाकाल ई.पू. 444 से लेकर ई.पू. 100 के बीच का माना जाता है।

    ❑ ईसा से लगभग 1,500 वर्ष पूर्व अब्राहम के बाद यहूदी इतिहास में सबसे बड़ा नाम पैगंबर मूसा का है।

    ❑ यहूदी धर्म का प्रवेश भारत में 2985 वर्ष पूर्व अर्थात् 973 ईसा पूर्व केरल के मालाबार तट पर हुआ था।

    ❑ 2017 की जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार विश्व में सिर्फ 1.45 करोड़ यहूदी ही बचे हैं। जिनमें से लगभग 64 लाख इजरायल में और 57 लाख अमेरिका में रहते हैं।

    शक्ति संप्रदाय

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    ❑ शक्ति संप्रदाय या देवी की पूजा का उल्लेख महाभारत से प्राप्त होता है।

    ❑ जिस समय शक्ति के चित्र को शिव के साथ उसकी पत्नी के रूप में चित्रित किया जाता है तब वह उसका लाभ वाला पक्ष है और इसको पार्वती देवी या उमा या महादेवी कहा जाता है।

    ❑ शक्ति के बहुत से नामों में से मंसा, शीतला, चण्डी तथा दुर्गा-काली हैं।

    ❑ तान्त्रिक तत्व जैनमत, महायान बौद्धमत, शैवमत, वैष्णव मत एवं शक्ति संप्रदाय में भी विद्यमान रहते हैं।

    ❑ तान्त्रिक संप्रदाय का विकास अफगानिस्तान सीमा के साथ उत्तर-पश्चिम भारत तथा पश्चिम बंगाल और असम में या उप-महाद्वीप के मामूली हिन्दूवादी क्षेत्र में हुआ।

  • अन्य धार्मिक परंपराएँ : भारत में विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएँ

    📚 विषय सूची

    हिन्दू-धर्म : भारत का प्राचीन सनातन धर्म

    ➣ हिन्दू धर्म में अन्य धर्मों के विपरीत कोई एक अकेला सिद्धान्त या नियम लागू नहीं होता है जिसे सभी हिन्दुओं को मानना ज़रूरी है। इसके अन्तर्गत कई मत और सम्प्रदाय आते हैं और सभी को बराबर श्रद्धा दी जाती है।

    हिन्दू धर्म में चार मुख्य सम्प्रदाय हैं:

    • वैष्णव – विष्णु से संबंधित
    • शैव – शिव से संबंधित
    • शाक्त – देवी शक्ति से संबंधित
    • स्मार्त – परमेश्वर के विभिन्न रूपों को एक ही समान मानने वाला सम्प्रदाय

    ➣ लेकिन ज्यादातर हिन्दू स्वयं को किसी भी एक सम्प्रदाय में वर्गीकृत नहीं करते हैं। धर्मग्रन्थ भी कई हैं। फ़िर भी, वे मुख्य सिद्धान्त अथवा मान्यताएं, जो ज़्यादातर हिन्दू मानते हैं, विश्वास करते हैं।

    ➣ हिन्दू धर्म भारत का सर्वप्रमुख धर्म है, जिसे इसकी प्राचीनता एवं विशालता के कारण सनातन धर्म भी कहा जाता है।

    ➣ अन्य धर्मों के समान हिन्दू धर्म किसी पैगम्बर या व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित धर्म नहीं है। यह प्राचीन काल से चले आ रहे विभिन्न धर्मों, मतमतांतरों, आस्थाओं एवं विश्वासों का समुच्चय है।

    ➣ उपनिषद काल, वैदिक काल में हिन्दू धर्म के दार्शनिक पक्ष का विकास हुआ। ईश्वर को अजर-अमर, अनादि, सर्वत्रव्यापी कहा गया। इसी समय योग, सांख्य, वेदांत आदि षड दर्शनों का विकास हुआ।

    ➣ विकासशील धर्म होने के कारण विभिन्न कालों में इसमें नये-नये आयाम जुड़ते गये। इसमें आदिम ग्राम देवताओं, भूत-पिशाची, स्थानीय देवी-देवताओं, झाड़-फूँक, तंत्र-मत्र से लेकर त्रिदेव एवं अन्य देवताओं तथा निराकार ब्रह्म, सभी की आराधना होती है।

    नौंवीं से चौदहवीं शताब्दी के मध्य विभिन्न पुराणों की रचना हुई। पुराणों में मध्य युगीन धर्म, ज्ञान-विज्ञान तथा इतिहास का वर्णन मिलता है। पुराणों ने ही हिन्दू धर्म में अवतारवाद की अवधारणा का सूत्रपात किया।

    ➣ पुराणों के पश्चात् भक्तिकाल का आगमन होता है, जिसमें विभिन्न संतों एवं भक्तों ने साकार ईश्वर की आराधना पर ज़ोर दिया।

    ➣ हिन्दू धर्म लघु एवं महान् परम्पराओं का समन्वय दर्शाता है। एक ओर वैदिक तथा पुराणकालीन देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना होती है जबकि दूसरी ओर कापलिक और अवधूतों द्वारा भयावह कर्मकांडीय आराधना की जाती है।

    ➣ हिन्दू धर्म सर्वथा विरोधी सिद्धान्तों का भी उत्तम एवं सहज समन्वय है। एक ओर भक्ति रस से सराबोर भक्त हैं, तो दूसरी ओर अनीश्वर-अनात्मवादी के साथ नास्तिक भी दिखाई पड़ जाते हैं।

    अवधारानाएं तथा मान्यताएँ

    ➣ इसमें एकेश्वरवाद पर बल दिया गया है , ब्रह्म को सर्वव्यापी, एकमात्र सत्ता, निर्गुण तथा सर्वशक्तिमान माना गया है।

    ➣ सभी धर्मो के अनुसार हिन्दू धर्म अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति अर्थात् आत्मा का ब्रह्मलीन हो जाना, बताया गया है।

    ➣ इसमें आत्मा की अवधारणा से पुनर्जन्म की भी पुष्टि होती है अर्थात् उसका पुनर्जन्म होता है।

    ➣ आत्मा के प्रत्येक जन्म द्वारा प्राप्त जीव रूप को योनि (जैव प्रजाति) कहते हैं। ऐसी 84 करोड़ योनियों की कल्पना की गई है, जिसमें कीट-पतंगे, पशु-पक्षी, वृक्ष और मानव आदि सभी शामिल हैं। मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ योनि कहा गया है।

    कर्मफल का सिद्धांत माना गया है। प्रत्येक जन्म के दौरान जीवन द्वारा किये गये कर्मो का फल आत्मा को अगले जन्म में भुगतना पड़ता है।

    ➣ कर्मफल से सम्बंधित दो लोक, स्वर्ग और नरक हैं। स्वर्ग में देवी-देवता अत्यंत समृद्ध जीवन व्यतीत करते हैं, जबकि नरक अत्यंत कष्टदायक, अंधकारमय बताया गया है। अच्छे कर्म करने वाला प्राणी मृत्युपरांत स्वर्ग में और बुरे कर्म करने वाला नरक में स्थान पाता है।

    ➣ हिन्दू समाज चार वर्णों में विभाजित है- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र। ये चार वर्ण प्रारम्भ में कर्म के आधार पर विभाजित थे।

    ब्राह्मण का कर्तव्य शिक्षण, पूजन, कर्मकांड जबकि क्षत्रिय का धर्मानुसार शासन तथा देश व धर्म की रक्षा करना, वैश्यों का कृषि एवं व्यापार तथा शूद्रों को सेवा करना जैसे क्रियाकलापों में विभाजित किया गया है।

    ➣ हिन्दू धर्म में मानव जीवन को 100 वर्ष मानते हुए चार आश्रमब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्न्यास, में विभाजित किया गया है। प्रत्येक की संभावित अवधि 25 वर्ष मानी गई।

    ब्रह्मचर्य आश्रम में व्यक्ति गुरु आश्रम में जाकर विद्याध्ययन करना , गृहस्थ आश्रम में विवाह तथा अन्य भोग विलास करना , वानप्रस्थ में विरक्त जीवन अर्थात उत्तरदायित्व अपने पुत्रों को सौंपना तथा अंत में सन्न्यास आश्रम में गृह त्यागकर ईश्वर की उपासना में लीन होना जाना।

    ➣ चार पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। उपयुक्त आचार-व्यवहार और कर्तव्य धर्म, सतमार्ग से धनपार्जन, काम शारीरिक सुख तथा धर्मानुसार आचरण कर जीवन-मरण से मुक्ति होना मोक्ष है।

    ज्ञानयोग, भक्तियोग, कर्मयोग तथा राजयोग ये चार योग हैं, जो आत्मा को ब्रह्म से जोड़ने के मार्ग हैं। जिसमे ज्ञान योग दार्शनिक एवं तार्किक विधि का , भक्तियोग आत्मसमर्पण और सेवा भाव का, कर्मयोग समाज की सेवा का तथा राजयोग शारीरिक एवं मानसिक साधना का अनुसरण करता है।

    सोलह संस्कार मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह पवित्र संस्कार सम्पन्न किये जाते हैं।

    ➣ चारो दिशाओं उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार हिन्दू धाम क्रमश: बद्रीनाथ, रामेश्वरम्, जगन्नाथपुरी और द्वारका हैं, जहाँ की यात्रा प्रत्येक हिन्दू का कर्तव्य है।

    ➣ हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथ हैं- चार वेद (ॠग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद) तेरह उपनिषद, अठारह पुराण, रामायण, महाभारत, गीता, रामचरितमानस आदि हैं।

    यहूदी धर्म : विश्व का प्राचीन एकेश्वरवादी धर्म

    ➣ यहूदी धर्म विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक है,जिसे दुनिया का प्रथम एकेश्वरवादी धर्म माना जाता है।

    ➣ यहूदी धर्म का उदय फिलिस्तीन में हुआ जो हिब्रू कबीले का मूल धर्म था।

    ➣ यहूदी धर्म की शुरुआत पैगंबर अब्राहम (अवराहम या इब्राहिम) से मानी जाती है, जो ईसा से 2000 वर्ष पूर्व हुए थे।

    ➣ करीव 4000 साल पुराना यहूदी धर्म वर्तमान के इजरायल राष्ट्र का राजधर्म है।

    ➣ हालाँकि यहूदी एकेश्वरवादी होते हैं, लेकिन वे ईश्वर को त्रीएक के रूप में मानते हैं अर्थात् परमपिता परमेश्वर, उनके पुत्र ईसा मसीह (यीशु मसीह) और पवित्र आत्मा।

    ➣ इस धर्म में मूर्ति पूजा को पाप माना जाता है।

    ➣ यहूदी धर्म के पूजास्थल को सिनागौग तथा पुरोहित को रबी कहते हैं।

    ➣ यहूदी अपने भगवान को यहवेह या यहोवा कहते हैं।

    ➣ पैगंबर अब्राहम के पहले बेटे का नाम हजरत इसहाक और दूसरे का नाम हजरत इस्माईल था। दोनों के पिता एक थे, किंतु माँ अलग-अलग थीं।

    ➣ हजरत इसहाक की मां का नाम सराह था और हजरत इस्माईल की माँ हाजरा थीं।

    ➣ पैगंवर अब्राहम के पोते का नाम हजरत याकूब था। जिसका दूसरा नाम इजरायल था।

    ➣ याकूब ने ही यहूदियों की 12 जातियों को मिलाकर एक सम्मिलित राष्ट्र इजरायल बनाया था।

    ➣ दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक यहूदी धर्म से ही ईसाई और इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हुई है।

    ➣ यहूदियों की धर्मभाषा इब्रानी (हिब्रू) तथा धर्मग्रंथ का नाम तनख है, जो इब्रानी भाषा में लिखा गया है। तनख को तालमुद या तोराह नाम से जाना जाता है।

    ➣ तनख का रचनाकाल ई.पू. 444 से लेकर ई.पू. 100 के बीच का माना जाता है।

    ➣ ईसा से लगभग 1,500 वर्ष पूर्व अब्राहम के बाद यहूदी इतिहास में सबसे बड़ा नाम पैगंबर मूसा का है।

    ➣ यह सिर्फ एक धर्म ही नहीं बल्कि पूरी जीवन-पद्धति है जो कि इजरायल और हिब्रू भाषियों का राजधर्म है। धर्म में ईश्वर और उसके नबी यानि पैगम्बर की मान्यता प्रधान है।

    ➣ 2017 की जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार विश्व में सिर्फ 1.45 करोड़ यहूदी ही बचे हैं। जिनमें से लगभग 64 लाख इजरायल में और 57 लाख अमेरिका में निवास करते हैं।

    ➣ यहूदी धर्म का प्रवेश भारत में 2985 वर्ष पूर्व अर्थात् 973 ईसा पूर्व केरल के मालाबार तट पर हुआ था।

    पारसी धर्म : जरथुस्त्र और पारसी परंपरा

    ➣ पारसी धर्म या ज़रथुष्ट्र धर्म विश्व का अत्यंत प्राचीन धर्म है, जिसकी स्थापना आर्यों की ईरानी शाखा के एक संत ज़रथुष्ट्र ने की थी।

    ➣ संत ज़रथुष्ट्र को 30 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।

    ➣ वे ईरानी आर्यों के स्पीतमा कुटुम्ब के पौरुषहस्प के पुत्र थे। उनकी माता का नाम दुधधोवा (दोग्दों) था।

    ➣ इनके के शिक्षाओं का संकलन जेन्दा अवेस्ता नामक ग्रंथ में है, जो पारसियों का धार्मिक ग्रंथ है।

    ➣ पारसी धर्म के अनुयायी एक ईश्वर अहुर को मानते हैं।

    ➣ पारसी धर्म के अनुयायियों को अग्नि-पूजक कहा जाता है।

    ➣ जेन्दा अवेस्ता नामक ग्रंथ की मूल शिक्षा का सूत्र सद्-विचार, सद्-वचन तथा सद्-कार्य है।

    ➣ पारसी धर्म में वे शवों को ऊँची मीनार पर खुला छोड़ देते हैं, जहाँ गिद्ध-चील उसे नोंच-नांचकर खा जाते हैं। बाद में उसकी अस्थियाँ एकत्रित कर शव दफनाया जाता था। परन्तु हाल के वर्षों में शव को सीधे दफनाया जा रहा है।

    ईसाई धर्म : यीशु मसीह और ईसाई परंपरा

    ➣ ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह (जीसस क्राइस्ट) थे।

    ➣ ईसा मसीह का जन्म 4 ई. पू. में जेरुसेलम के निकट बैथलेहम नामक स्थान पर हुआ था।

    ➣ ईसा मसीह के माता का नाम मेरी तथा पिता का नाम जोसेफ था।

    ➣ ईसा ने अपने जीवन के प्रथम 30 वर्ष एक बढ़ई के रूप में बैथलेहम के निकट नाजरेथ में बिताए।

    ➣ ईसा मसीह के प्रथम दो शिष्य एंडूस एवं पीटर थे।

    ➣ ईसा मसीह को 33 ई.पू. में सूली पर चढ़ाया गया। इनको सूली पर रोमन गवर्नर पोंटियस ने चढ़ाया था।

    ➣ ईसाई धर्म का सबसे पवित्र चिह्न क्रॉस है।

    ➣ ईसाई त्रित्व में विश्वास रखते हैं, ये हैं, ईश्वर- पिता, ईश्वर-पुत्र, ईश्वर-पवित्र आत्मा।

    ➣ ईसाई धर्म का प्रमुख ग्रंथ बाइबिल है।

    ➣ ईसाई धर्म की दो शाखाएं है रोमन कैथोलिक व प्रोटोस्टेंट तथा उपासना स्थल को गिरजाघर (चर्च ) कहा जाता है।

    ➣ ईसा मसीह के जन्म दिवस 25 दिसंबर को क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है। अनुमान है कि पहला क्रिसमस रोम में 336 ई.पू. में मनाया गया था।

    ➣ पहली शताब्दी में ईसाई धर्म प्रचारक सेंट थॉमस भारत आया था इसी से भारत में ईसाई धर्म की शुरूआत हुई।

    ➣ दुनिया का सबसे बड़ा चर्च सेंट बेसिलिका चर्च, वेटिकन सिटी में है। जिसमे 10 हजार व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है।

    ➣ पवित्र ग्रन्थ में ईसा को शांति का राजकुमार नाम से पुकारा गया है।

    शाक्त धर्म : देवी शक्ति की उपासना परंपरा

    ➣ शक्ति को ईष्ट देवी मानकर पूजा करने वालों का सम्प्रदाय, शाक्त धर्म कहलाता है।

    ➣ हिन्दुओं के शाक्त सम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है।

    ➣ शाक्त सम्प्रदाय में योग और साधना से सिद्धि प्राप्त करने पर जोर दिया गया हैं। इन सिद्धियाँ का उद्देशय केवल मोक्ष प्राप्त करना है।

    ➣ शैव धर्म के साथ शाक्त धर्म का घनिष्ठ संबंध रहा है। शाक्त धर्म की प्राचीनता भी शैव धर्म के समान प्रागैतिहासिक युग तक जाती है। सैंधव सभ्यता में मातृदेवी की उपासना व्यापक रूप से प्रचलित थी।

    ➣ मातृदेवी की बहुसंख्यक मूर्तियां खुदाई में प्राप्त हुई हैं। वैदिक साहित्य से सरस्वती, अदिति, उषा, लक्ष्मी आदि देवियों के विषय में सूचना मिलती है।

    ➣ देवी महात्म्य का विस्तृत वर्णन महाभारत तथा पुराणों में प्राप्त होता है।

    ➣ देवी की उपासना तीन रूपों में की जाती थी। ये रूप हैं-शांत या सौम्य रूप, उग्र या प्रचंड रूप और काम प्रधान रूप। समाज में प्रायः देवी के सौम्य रूप की पूजा की जाती है।

    ➣ सौम्य रूप की प्रतीक उमा, पार्वती, लक्ष्मी आदि हैं। उग्न रूप की प्रतीक चंडी, दुर्गा, भैरवी, कपाली आदि हैं।

    ➣ जम्मू में स्थित शारदा देवी का मंदिर शक्ति के सौम्य रूप का प्रतीक है, जो आज वैष्णों देवी के रूप में विख्यात है।

    कापालिक एवं कालामुख जैसे घोरपंथी संप्रदाय देवी के प्रचण्ड रूप की पूजा करते हैं। उग्र रूप की पूजा दुर्गा, चण्डी, कपाली, काली, भैरवी आदि रूपों में होती है। कलकत्ता का काली मंदिर प्रसिद्ध है।

    कामरूपिणी देवी की पूजा शाक्त लोग करते है। वे देवी को आनंद भैरवी, त्रिपुर सुंदरी, ललिता आदि कहते हैं। असम का कामाख्या मन्दिर इसी रूप में है।

    ➣ भेड़ाघाट (जबलपुर, मध्य प्रदेश) के निकट 64 योगिनी का मंदिर शक्ति पूजा से संबंधित है। खजुराहो, सम्भलपुर (उड़ीसा), ललितपुर (उत्तर प्रदेश) में भी 64 योगिनी मन्दिर है।

    ➣ प्रतिहार शासक महेंद्रपाल के लेखों में दुर्गा की महिषासुरमर्दिनी, कांचनदेवी, अम्बा आदि नामों की स्तुति मिलती है।

    ➣ भारत में शक्ति की पूजा दुर्गा एवं महिषासुर मर्दिनी के नाम से अधिक होती है। दुर्गा पूजा का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण में मिलता है।

    ➣ राष्ट्रकूट शासक अमोघवर्ष महालक्ष्मी का अनन्य भक्त था। संजन लेख से ज्ञात होता है कि उसने एक बार अपने बाएं हाथ की अंगुलि काटकर देवी को चढ़ा दिया था।

    ➣ श्रीहर्ष ने अपने ग्रंथ नैषधीयचरित में सरस्वती मंत्र की महत्ता का प्रतिपादन किया।

    संप्रति शाक्त उपासना तीन प्रमुख केंद्र हैं। ये हैं-कश्मीर, कांची तथा असम स्थित कामाख्या। असम स्थित कामाख्या कौल मत का प्रसिद्ध केंद्र है।

    1. कौलमार्गी (वामाचारी)

    ➣ कौलमार्गी पंचमकार (1. मघ, 2. मांस, 3. मत्स्य, 4. मुद्रा, 5. मैथुन) की उपासना करते हैं। इनमें नाम से प्रारंभ होते हैं।

    ➣ तामस, साधक भौतिक आधार पर इनका अनुगमन करते हैं और क्षणिक सिद्धि प्राप्त करते हैं।

    2. समयाचारी (दक्षिणाचारी)

    ➣ ये सामान्य रूप से देवी की पूजा करते हैं। शाक्त सम्प्रदाय में देवी के 9 योनियों का वृत्त बनाकर उसके मध्य में एक योनि का चित्र खिंचकर चक्र बनाया जाता है। इसे श्री चक कहते हैं।

    शाक्त धर्म से सम्बंधित प्रमुख मंदिर

     वैष्णो देवी का मंदिर (सौम्य रूप )जम्मू
     विंध्यवासिनी देवी का मंदिरविंध्याचल
     चौसठ योगिनी का मंदिरभेड़ाघाट (म.प्र.)
     पार्वती मंदिर (सौम्य रूप)नाचना-कुठार (म.प्र.)
     कामाख्या मंदिर (कामरूप)असम
     दक्षिणेश्वर काली मंदिर (उग्र रूप)कोलकाता
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