Subject: भारतीय इतिहास

  • भागवत (वैष्णव) धर्म: कृष्ण | Q&A Practice

    ➣ भागवत् धर्म को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
    उत्तर : सात्वत् धर्म और पांचरात्र धर्म

    ➣ भागवत् धर्म के प्रवर्तक कौन थे?
    उत्तर : कृष्ण ( वृष्णिवंशी या सात्वत्वंशी )

    ➣ किस उपनिषद में कृष्ण का उल्लेख दो रूपों देवकी पुत्र एवं गोपीकृष्ण के रूप में मिलता है?
    उत्तर : छांदोग्य

    ➣ उपनिषद में सर्वप्रथम कृष्ण को देवकी पुत्र कहा गया। उनको किसका शिष्य बताया गया है?
    उत्तर : घोर अंगिरस

    ➣ जैन परम्परा के अनुसार वासुदेव कृष्ण किस जैन तीर्थकर के समकालीन थे ?
    उत्तर : अरिष्टनेमि (22वें जैन तीर्थंकर )

    ➣ विष्णु आकाश के देवता के रूप में जाने जाते थे। उनका सर्वप्रथम उल्लेख किस वेद में प्राप्त होता है ?
    उत्तर : ऋग्वेद

    ➣ महाभारत में कृष्ण का एक और कौन-सा नाम भी मिलता है?
    उत्तर : गोविंद

    ➣ मेगस्थनीज ने अपने इंडिका में कृष्ण को क्या कहा है?
    उत्तर : हेराक्लीज (कृष्ण का यूनानी रूपांतरण )

    ➣ दूसरी शताब्दी ई.पू. यवनदूत तक्षशिला निवासी हेलियोडोरस ने वासुदेव के सम्मान में विदिशा में किसकी स्थापना की थी?
    उत्तर : – गरुड़ध्वज

    ➣ स्वयं को भागवत् घोषित करने वाला हेलियोडोरस किस शुंग शासक के दरबार में आया था ?
    उत्तर : भागभन

    ➣ सातवाहन काल में भागवत धर्म तथा वासुदेव और संकर्षण की पूजा करने जानकारी प्रथम शताब्दी ई.पू. के किस अभिलेख से मिलती है?
    उत्तर : नानाघाट के अभिलेख से

    ➣ नानाघाट का अभिलेख किस प्राचीन शासक की पत्नी का है?
    उत्तर : सातवाहन शासक शातकर्णी प्रथम की पत्नी नागनिका का

    ➣ वैष्णव धर्म किस काल में अपने चरमोत्कर्ष पर था?
    उत्तर : गुप्तकाल में

    ➣ भागवत संप्रदाय के विकास में किसका योगदान अत्यधिक था ?
    उत्तर : गुप्तों का

    ➣ गुप्त शासक कौन-सी उपाधि धारण करते थे?
    उत्तर : परमभागवत्

    ➣ गुप्त काल में किस विद्वान ने वृहत्संहिता में भागवत् धर्म का उल्लेख किया है ?
    उत्तर : वाराहमिहिर

    ➣ विष्णु का वाहन गरुड़ किन शासकों का राजचिन्ह था?
    उत्तर : गुप्त शासक

    ➣ गुप्तकाल में ही अमरसिंह ने अपने ग्रंथ अमरकोश में विष्णु के कितने किया है?
    उत्तर : कुल 39

    ➣ स्कंदगुप्त का कौन-सा अभिलेख भगवान विष्णु की स्तुति से ही प्रारंभ होता है?
    उत्तर : जूनागढ़ अभिलेख

    ➣ दिल्ली में महरौली लौह स्तंभ में उल्लिखित जानकारी के मुताबिक किसने विष्णु ध्वज की स्थापना की?
    उत्तर : चंद्रगुप्त विक्रमादित्य

    ➣ देवगढ़ (झांसी) का प्रसिद्ध दशावतार मंदिर किस काल में बनवाया गया?
    उत्तर : गुप्तकाल में

    ➣ गुप्तकाल में विष्णु का सबसे लोकप्रिय अवतार कौन-सा था?
    उत्तर : वाराह अवतार

    ➣ वेंगी के पूर्वी चालुक्य भी वैष्णव धर्मानुयायी थे। उनका राजचिन्ह क्या था?
    उत्तर : गरुड़

    ➣ किस प्रतिहार शासक ने अपने ग्वालियर अभिलेख में स्वयं को वाराह अवतार घोषित किया है?
    उत्तर : मिहिरभोज

    ➣ चंदेलशासक कीर्तिवर्मन तथा कश्मीर की शासिका दिद्दा की मुद्राओं में किसकी मूर्ति मिलती है?
    उत्तर : लक्ष्मी

    ➣ 11वीं शताब्दी में दशावतार चरित किसकी रचना है जिसमें दस अवतारों का वर्णन है?
    उत्तर : क्षेमेंद्र

    ➣ 11वीं शताब्दी के ही किस लेखक ने स्थानेश्वर के निवासियों को चक्रस्वामी (विष्णु) का उपासक बताया है ?
    उत्तर : अलबरूनी

    ➣ 12वीं शताब्दी में किसने गीतगोविंद की रचना की, जिसमें राधा को कृष्ण को महान बनाया गया है?
    उत्तर : जयदेव

    ➣ किस राष्ट्रकूट शासक ने एलोरा में दशावतार का मंदिर बनवाया था ?
    उत्तर : दंतिदुर्ग

    ➣ दक्षिण भारत में वैष्णव धर्म के संत अलवार कहे जाते थे। इनकी संख्या 12 थी। एकमात्र महिला अलवार कौन थीं?
    उत्तर : आंडाल या कोदई

    ➣ अमरकोश एवं गीतगोविंद में विष्णु के 39 अवतारों का उल्लेख मिलता है, परंतु वास्तविक रूप में कितने अवतार सर्वाधिक प्रचलित हैं?
    उत्तर : दस

  • भागवत धर्म MCQ प्रश्न | UPSC

    1. भागवत संप्रदाय के विकास में किसका देन अत्यधिक था?
    (a) पार्थियन
    (b) हिंद-यूनानी लोग
    (c) कुषाण
    (d) गुप्त
    39th B.P.S.C. (Pre) 1994
    उत्तर-(d)
    भागवत (वैष्णव) धर्म अपने शिखर पर गुप्त साम्राज्य के काल में पहुँचा। गुप्त शासक स्वयं वैष्णव थे और उन्होंने इसे राजधर्म का दर्जा दिया। अधिकांश गुप्त सम्राट ‘परमभागवत’ की उपाधि ग्रहण करते थे। भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ गुप्तों का राजकीय प्रतीक चिह्न था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गुप्त काल में ही विष्णु के दशावतार की अवधारणा पूर्णतः विकसित हुई और इसे गुप्तकालीन मंदिरों व मुद्राओं पर उकेरा गया। चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने देवीचन्द्रगुप्तम् नाटक में विष्णु-भक्ति का स्पष्ट प्रतिपादन किया।
    2. अर्धनारीश्वर मूर्ति में आधा शिव तथा आधा पार्वती प्रतीक है-
    (a) पुरुष और नारी का योग
    (b) देवता और देवी का योग
    (c) देव और उसकी शक्ति का योग
    (d) उपर्युक्त किसी का नहीं
    U.P.P.C.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(c)
    अर्धनारीश्वर की संकल्पना शिव और शक्ति (पार्वती) के अभेद को दर्शाती है — अर्थात् देव और उसकी आद्याशक्ति का अविभाज्य मिलन। यह मूर्ति-शिल्प पुरुष-तत्व (चेतना) और प्रकृति-तत्व (शक्ति) की एकता का दार्शनिक प्रतीक है। कालिदास ने अपने महाकाव्य ‘कुमारसम्भवम्’ में इसी दिव्य युगल का काव्यात्मक वर्णन किया है। गुप्तोत्तर युग में ऐसी संयुक्त मूर्तियाँ विशेष रूप से लोकप्रिय हुईं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अर्धनारीश्वर की सबसे प्राचीन ज्ञात प्रतिमाएँ कुषाण काल (प्रथम-द्वितीय शताब्दी ई.) की हैं जो मथुरा कला शैली में निर्मित हैं। एलोरा की गुफा संख्या 29 में उत्कीर्ण अर्धनारीश्वर की विशाल प्रतिमा राष्ट्रकूट कालीन शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।
    3. निम्न में से किस ग्रंथ में सर्वप्रथम देवकी के पुत्र कृष्ण का वर्णन किया गया है?
    (a) महाभारत
    (b) छांदोग्य उपनिषद
    (c) अष्टाध्यायी
    (d) भागवतपुराण
    R.A.S./R.T.S. (Pre) 1999
    उत्तर-(b)
    देवकी-पुत्र कृष्ण का सबसे प्राचीन उल्लेख छांदोग्य उपनिषद (3.17.6) में मिलता है, जहाँ उन्हें घोर आंगिरस का शिष्य बताया गया है। यह उपनिषद सामवेद की परंपरा से संबंधित है और इसकी रचना लगभग 800-600 ई.पू. मानी जाती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ (लगभग 400 ई.पू.) में ‘वासुदेवक’ शब्द का प्रयोग मिलता है, जो वासुदेव कृष्ण के उपासकों के लिए प्रयुक्त होता था — यह भी कृष्ण-पूजा की प्राचीनता का प्रमाण है। मेगस्थनीज (300 ई.पू.) ने मथुरा क्षेत्र में हेराकल्स (जिसे विद्वान वासुदेव कृष्ण से समीकृत करते हैं) की पूजा का उल्लेख अपने ‘इंडिका’ में किया है।
    4. प्राचीन भारत के विश्वोत्पत्ति (Cosmogonic) विषयक धारणाओं के अनुसार, चार युगों के चक्र का क्रम इस प्रकार है-
    (a) द्वापर, कृत, त्रेता और कलि
    (b) कृत, द्वापर, त्रेता और कलि
    (c) कृत, त्रेता, द्वापर और कलि
    (d) त्रेता, द्वापर, कलि और कृत
    I.A.S. (Pre) 1996
    उत्तर-(c)
    हिन्दू ब्रह्माण्डविज्ञान के अनुसार काल-चक्र चार युगों में विभाजित है: कृत (सत्ययुग) → त्रेता → द्वापर → कलि। इन चारों युगों का सम्मिलित काल एक ‘महायुग’ या ‘चतुर्युग’ (43,20,000 वर्ष) कहलाता है और एक हजार महायुग मिलकर ब्रह्मा का एक दिन ‘कल्प’ बनाते हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्रत्येक युग की अवधि क्रमशः घटती जाती है — सत्ययुग 17,28,000 वर्ष, त्रेता 12,96,000 वर्ष, द्वापर 8,64,000 वर्ष और कलियुग 4,32,000 वर्ष का होता है। इस युग-सिद्धांत का सर्वप्रथम विस्तृत विवेचन महाभारत के ‘शांतिपर्व’ और विष्णु पुराण में मिलता है।
    5. निम्नलिखित में से कौन अलवार संत नहीं था?
    (a) पोयगई
    (b) तिरुज्ञान
    (c) पूडम
    (d) तिरुमंगई
    U.P.P.C.S. (Pre) 2013
    उत्तर-(b)
    पोयगई, पूडम (भूतम) और तिरुमंगई तमिल वैष्णव भक्ति परंपरा के 12 अलवार संतों में सम्मिलित हैं, जबकि तिरुज्ञान संबंधर शैव भक्ति परंपरा के 63 नयनार संतों में गिने जाते हैं। 12 अलवार संतों की रचनाओं का संकलन ‘नालायिर दिव्य प्रबंधम्’ कहलाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलवार संतों में आण्डाल (कोडई) एकमात्र महिला संत थीं, जिनकी कृति ‘तिरुप्पावै’ आज भी मार्गशीर्ष माह में दक्षिण भारत के मंदिरों में गाई जाती है। नाथमुनि ने 10वीं शताब्दी में ‘नालायिर दिव्य प्रबंधम्’ को संकलित व व्यवस्थित किया और इसे ‘द्राविड वेद’ का दर्जा दिया।
    6. वासुदेव कृष्ण की पूजा सर्वप्रथम किसने प्रारंभ की?
    (a) भागवतों ने
    (b) वैदिक आर्यों ने
    (c) तमिलों ने
    (d) आभीरों ने
    U.P.P.C.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(a)
    वैष्णव धर्म का आरंभिक स्वरूप ‘भागवत धर्म’ के रूप में प्रकट हुआ, जिसमें देवकी-पुत्र वासुदेव कृष्ण की आराधना की जाती थी। यह परंपरा संभवतः छठी शताब्दी ई.पू. से भी पहले स्थापित हो चुकी थी। पाणिनि के काल में वासुदेव के उपासक ‘वासुदेवक’ कहे जाते थे।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हेलिओडोरस स्तंभ (विदिशा, मध्यप्रदेश, लगभग 110 ई.पू.) इस बात का पुरातात्विक प्रमाण है कि यूनानी राजदूत हेलिओडोरस स्वयं ‘भागवत’ बन गया था और उसने वासुदेव के सम्मान में यह गरुड़ध्वज स्तंभ स्थापित किया — यह स्तंभ विष्णु-भक्ति के प्रसार का सबसे पुराना अभिलेखीय साक्ष्य माना जाता है।
    7. नयनार कौन थे ?
    (a) शैव
    (b) शाक्त
    (c) वैष्णव
    (d) सूर्योपासक
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
    उत्तर-(a)
    नयनार दक्षिण भारत के तमिल भाषी क्षेत्र में भक्तिकाल के प्रमुख शैव संत-कवि थे। इनकी कुल संख्या 63 मानी जाती है। इन्होंने ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और समर्पण के माध्यम से मोक्ष का मार्ग बताया। तमिल क्षेत्र में वैष्णव भक्त ‘अलवार’ और शिव-भक्त ‘नयनार’ कहलाए।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नयनार संतों की रचनाओं का संकलन ‘तिरुमुरै’ (12 खंड) में हुआ है, जिसे शैव साहित्य में ‘द्राविड वेद’ की मान्यता प्राप्त है। इनमें तिरुज्ञान संबंधर, अप्पर (तिरुनावुक्करसर) और सुंदरर की रचनाएँ ‘देवारम्’ नाम से प्रसिद्ध हैं और चोल मंदिरों में नित्य गायी जाती थीं।
    8. ‘नयनार’ कौन थे?
    (a) वैष्णव धर्मानुयायी
    (b) शैव धर्मानुयायी
    (c) शाक्त
    (d) सूर्योपासक
    U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
    उत्तर-(b)
    नयनार शैव धर्मानुयायी संत-कवि थे जिन्होंने तमिल भक्ति आंदोलन में शिव-भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। इन्होंने जाति-व्यवस्था की कठोरता का विरोध किया और ईश्वर-भक्ति को सर्वोच्च मार्ग बताया। इनके 63 संतों में सभी जातियों के लोग सम्मिलित थे।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नयनार परंपरा को चोल राजाओं का विशेष संरक्षण प्राप्त था। राजराज चोल प्रथम (985-1014 ई.) ने तिरुमुरै का संकलन करवाया और तंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर में नयनार-मूर्तियाँ स्थापित करवाईं — यह परंपरा राज्याश्रय से भक्ति के संस्थागत रूप लेने का उत्तम उदाहरण है।
    9. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राचीन भारत में शैव संप्रदाय था?
    (a) आजीवक
    (b) मत्तमयूर
    (c) मयमत
    (d) ईशानशिवगुरुदेवपद्धति
    I.A.S. (Pre) 1996
    उत्तर-(b)
    मत्तमयूर प्राचीन भारत का एक प्रमुख शैव संप्रदाय था। यह संप्रदाय मुख्यतः उत्तर भारत में प्रचलित था और इसके अनुयायी कश्मीर एवं मध्य भारत में विशेष रूप से सक्रिय थे। आजीवक एक स्वतंत्र श्रमण परंपरा थी, जबकि मयमत और ईशानशिवगुरुदेवपद्धति शैव आगम ग्रंथ हैं, संप्रदाय नहीं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शैव धर्म के प्रमुख संप्रदायों में पाशुपत (सबसे प्राचीन), कापालिक, कालामुख और काश्मीर शैव दर्शन (त्रिक दर्शन) सम्मिलित हैं। पाशुपत संप्रदाय के प्रवर्तक लकुलीश माने जाते हैं और इसका उल्लेख महाभारत के ‘शांतिपर्व’ में मिलता है।
    10. भागवत धर्म के प्रवर्तक थे-
    (a) जनक
    (b) कृष्ण
    (c) याज्ञवल्क्य
    (d) सूरदास
    R.A.S./R.T.S. (Pre) 1993
    उत्तर-(b)
    परंपरा और इतिहास दोनों के अनुसार भागवत धर्म के मूल प्रवर्तक वृष्णि (सात्वत) कुल में जन्मे वासुदेव कृष्ण थे। वे मथुरा के निवासी थे और देवकी के पुत्र थे। छांदोग्य उपनिषद में उन्हें घोर आंगिरस का शिष्य बताया गया है, जिससे उनके दार्शनिक व्यक्तित्व की पुष्टि होती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भागवत धर्म ‘पंचरात्र’ और ‘एकान्तिक धर्म’ के नाम से भी जाना जाता था। इस धर्म में चार व्यूहों — वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध — की अवधारणा विशिष्ट है, जो क्रमशः चेतना, जीव, मन और अहंकार के प्रतीक माने जाते हैं।
    11. भारत में आस्तिक और नास्तिक संप्रदायों में कौन-सा विमेदक लक्षण है?
    (a) ईश्वरी सत्ता में आस्था
    (b) पुनर्जन्म के सिद्धांत में आस्था
    (c) वेदों की प्रामाणिकता में आस्था
    (d) स्वर्ग तथा नरक की सत्ता में विश्वास
    ng>U.P.P.C.S. (Mains) 2005
    उत्तर-(c)
    भारतीय दर्शन में संप्रदायों को दो वर्गों में विभाजित किया गया है — आस्तिक और नास्तिक। इस वर्गीकरण का मुख्य और सर्वसम्मत आधार वेदों की प्रामाणिकता में विश्वास है। जो संप्रदाय वेदों को प्रमाण मानते हैं वे आस्तिक कहलाते हैं — जैसे सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदांत। जो वेदों को प्रमाण नहीं मानते वे नास्तिक कहलाते हैं — जैसे बौद्ध, जैन और चार्वाक। ध्यान देने योग्य है कि सांख्य दर्शन ईश्वर की सत्ता को स्वीकार नहीं करता, फिर भी वह वेद-प्रमाण्य मानने के कारण आस्तिक माना जाता है — यह तथ्य ईश्वर की सत्ता को वर्गीकरण का आधार नहीं बनने देता।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चार्वाक दर्शन को ‘लोकायत’ भी कहा जाता है और यह भौतिकवादी दर्शन का सबसे प्राचीन रूप है जो वेद, आत्मा, पुनर्जन्म — सभी को अस्वीकार करता है। जैन दर्शन ईश्वर की सत्ता नहीं मानता किंतु आत्मा और कर्म सिद्धांत को मानता है, इस कारण यह नास्तिक होते हुए भी नैतिकता में समृद्ध है।
    12. अधोलिखित में से कौन एक गीता की मुख्य शिक्षा है?
    (a) कर्मयोग
    (b) ज्ञानयोग
    (c) भक्तियोग
    (d) निष्काम कर्मयोग
    Chhattisgarh P.S.C. (Pre) 2017
    उत्तर-(d)
    भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो सबसे महत्वपूर्ण संदेश दिया वह निष्काम कर्मयोग है — अर्थात कर्म करो, किंतु उसके फल की कामना मत करो। यह सिद्धांत गीता के द्वितीय अध्याय में “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” श्लोक के माध्यम से व्यक्त हुआ है। निष्काम कर्मयोग में ज्ञान, कर्म और भक्ति तीनों का समन्वय होता है — इसीलिए यह केवल कर्मयोग से भिन्न और श्रेष्ठ है। आधुनिक काल में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने ग्रंथ ‘गीता रहस्य’ में और महात्मा गांधी ने अपनी टीका ‘अनासक्तियोग’ में इसी को गीता की केंद्रीय शिक्षा स्वीकार किया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भगवद्गीता में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। यह महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है। गीता को ‘उपनिषदों का सार’ कहा जाता है क्योंकि इसमें प्रमुख उपनिषदों के दार्शनिक विचारों को व्यावहारिक रूप दिया गया है।
    13. निम्नलिखित में से किस देवता को कला में हल लिए प्रदर्शित किया गया है?
    (a) कृष्ण
    (b) बलराम
    (c) कार्तिकेय
    (d) मैत्रेय
    ng>U.P.P.C.S. (Mains) 2007
    उत्तर-(b)
    भारतीय मूर्तिकला और धार्मिक परंपरा में बलराम को हमेशा हल (लांगल) और मूसल धारण किए हुए दिखाया जाता है। इसी कारण उन्हें ‘हलधर’ या ‘हलायुध’ भी कहा जाता है। वे श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार माने जाते हैं। कृष्ण को सामान्यतः बांसुरी, चक्र या शंख के साथ दर्शाया जाता है, जबकि कार्तिकेय को भाले (शक्ति) के साथ।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बलराम को वैष्णव परंपरा में विष्णु का आठवाँ अवतार माना जाता है। मथुरा कला शैली में बलराम की प्रतिमाएँ सर्वाधिक मिलती हैं जहाँ उन्हें नीले वस्त्रों में हल और मूसल के साथ दर्शाया गया है। बौद्ध साहित्य में भी बलराम का उल्लेख ‘संकर्षण’ नाम से मिलता है।
    14. विष्णु के किस अवतार को सागर से पृथ्वी का उद्धार करते हुए अंकित किया जाता है?
    (a) कच्छप
    (b) मत्स्य
    (c) वाराह
    (d) नृसिंह
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Pre) 2010
    U.P. U.D.A./L.D.A. (SpL) (Mains) 2010
    उत्तर-(c)
    पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरणाक्ष ने पृथ्वी को समुद्र की गहराई में छिपा दिया था। भगवान विष्णु ने वाराह (शूकर/सूअर) का रूप धारण करके उस दैत्य का वध किया और अपने दंत-शूल पर पृथ्वी को रखकर सागर से बाहर निकाला। मूर्तिकला में वाराह अवतार को मानव शरीर और वाराह के मुख के साथ, चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हुए दर्शाया जाता है। यह विष्णु का तृतीय अवतार है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उदयगिरि (मध्य प्रदेश) की गुफाओं में गुप्तकालीन वाराह अवतार की विशाल एवं भव्य प्रतिमा उत्कीर्ण है जो भारतीय मूर्तिकला की उत्कृष्ट कृतियों में मानी जाती है। इसे चंद्रगुप्त द्वितीय के काल (लगभग 401-402 ई.) का माना जाता है। वाराह को ‘पृथ्वीपति’ भी कहा जाता है।
    15. भागवत संप्रदाय में भक्ति के रूपों की संख्या है-
    (a) 7
    (b) 8
    (c) 9
    (d) 10
    U.P. U.D.A./ L.D.A. (Pre) 2010
    उत्तर-(c)
    भागवत संप्रदाय में ईश्वर प्राप्ति अथवा मोक्ष के लिए नवधा भक्ति का विधान है जिसमें नौ प्रकार की भक्ति का वर्णन मिलता है। ये हैं — श्रवण (भगवान की कथा सुनना), कीर्तन (नाम-गुण का गायन), स्मरण (ध्यान), पाद-सेवन (चरण-वंदना), अर्चन (पूजा), वंदन (नमस्कार), दास्य (सेवाभाव), सख्य (मित्रता का भाव) और आत्मनिवेदन (सम्पूर्ण समर्पण)। श्रीमद्भागवत पुराण में प्रह्लाद ने इन्हीं नौ रूपों का वर्णन किया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नवधा भक्ति का सबसे सरल और लोकप्रिय वर्णन वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में शबरी-राम संवाद में भी मिलता है। भागवत पुराण को ‘महापुराण’ की श्रेणी में रखा गया है और इसमें 12 स्कंध व 18,000 श्लोक हैं — यह वैष्णव संप्रदाय का सर्वाधिक प्रतिष्ठित ग्रंथ माना जाता है।
    16. निम्नलिखित में से कौन मोक्ष के साधन के रूप में ज्ञान, कर्म तथा भक्ति को समान महत्व देता है?
    (a) अद्वैत वेदांत
    (b) विशिष्टाद्वैतवाद वेदांत
    (c) भगवद्गीता
    (d) मीमांसा
    U.P.P.C.S. (Mains) 2005
    उत्तर-(c)
    भगवद्गीता में मोक्ष के तीन प्रमुख मार्गों — ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग — को समान रूप से महत्व दिया गया है। अद्वैत वेदांत में शंकराचार्य ने ज्ञान को सर्वोच्च स्थान दिया और माया के सिद्धांत द्वारा जगत को मिथ्या बताया। विशिष्टाद्वैत में रामानुजाचार्य ने भक्ति को मोक्ष का प्रमुख साधन माना। मीमांसा दर्शन यज्ञकर्म और वैदिक अनुष्ठानों को ही मोक्ष का मार्ग स्वीकार करता है। गीता इन तीनों को समन्वित कर एक सम्पूर्ण मार्ग प्रस्तुत करती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गीता के 18 अध्यायों को तीन भागों में बाँटा जाता है — प्रथम 6 अध्याय कर्मयोग, मध्य 6 अध्याय ज्ञानयोग और अंतिम 6 अध्याय भक्तियोग से संबंधित माने जाते हैं। रामानुजाचार्य (1017–1137 ई.) ने गीता पर ‘गीताभाष्य’ लिखा जिसमें भक्ति की प्रधानता सिद्ध की गई है।
    17. हेलियोडोरस का बेसनगर अभिलेख संदर्भित है-
    (a) संकर्षण तथा वासुदेव से
    (b) संकर्षण तथा प्रद्युम्न से
    (c) संकर्षण, प्रद्युम्न तथा वासुदेव से
    (d) केवल वासुदेव से
    I.A.S. (Pre) 1998
    उत्तर-(d)
    बेसनगर (विदिशा, मध्य प्रदेश) का गरुड़ स्तंभ लेख भागवत धर्म का सबसे प्रारंभिक पुरातात्विक प्रमाण है। इस अभिलेख में हेलियोडोरस ने केवल वासुदेव (विष्णु) को ‘देवदेवस’ अर्थात देवताओं के देव के रूप में संदर्भित किया है। हेलियोडोरस तक्षशिला का निवासी था और यवन राजा एंटियाल्किडस का राजदूत था, जो शुंग राजा भागभद्र के दरबार में आया था। उसने भागवत धर्म स्वीकार किया और यह स्तंभ स्थापित करवाया। यह लगभग दूसरी शती ई.पू. का है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह अभिलेख इस बात का प्रमाण है कि भागवत/वैष्णव धर्म विदेशियों में भी लोकप्रिय था। इसमें तीन जीवन-सिद्धांतों का उल्लेख है — दम (संयम), त्याग और अप्रमाद — जो भागवत धर्म की नैतिक शिक्षाओं को दर्शाते हैं। यह स्तंभ अभी भी विदिशा संग्रहालय परिसर में संरक्षित है।
    18. भागवत धर्म से संबंधित प्राचीनतम अभिलेखीय साक्ष्य है-
    (a) समुद्रगुप्त का इलाहाबाद अभिलेख
    (b) हलियोडोरस का बेसनगर अभिलेख
    (c) स्कंदगुप्त का मितरी स्तंभलेख
    (d) महरौली स्तंभ अभिलेख
    U.P.P.C.S. (SpL.) (Mains) 2008
    उत्तर-(b)
    भागवत धर्म से संबंधित सबसे प्राचीन अभिलेखीय साक्ष्य हेलियोडोरस का बेसनगर अभिलेख (लगभग 110 ई.पू.) है। इसमें हेलियोडोरस ने स्वयं को ‘भागवत’ घोषित किया है और वासुदेव के सम्मान में गरुड़ स्तंभ की स्थापना करवाई। समुद्रगुप्त का इलाहाबाद अभिलेख चौथी शती ई. का है, जो इससे काफी बाद का है। अतः बेसनगर अभिलेख कालक्रम में सबसे प्राचीन है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: समुद्रगुप्त के इलाहाबाद अभिलेख को हरिषेण ने संस्कृत में लिखा था और यह प्रयागराज के अशोक स्तंभ पर उत्कीर्ण है। महरौली (दिल्ली) का लौह स्तंभ लेख चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) से संबंधित है और इसमें भी विष्णु-भक्ति का स्पष्ट उल्लेख है।
    19. भागवत धर्म का ज्ञात सर्वप्रथम अमिलेखीय साक्ष्य है-
    (a) समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति
    (b) गौतमी बलश्री का नासिक अभिलेख
    (c) बेसनगर का गरुड़ स्तंभ
    (d) धनदेव का अयोध्या अभिलेख
    Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012
    उत्तर-(c)
    भागवत धर्म का ज्ञात सर्वप्रथम अभिलेखीय साक्ष्य बेसनगर (विदिशा) का गरुड़ स्तंभ है जिसे हेलियोडोरस ने स्थापित करवाया था। यह स्तंभ प्रस्तर-निर्मित (पाषाण) है और इस पर उत्कीर्ण लेख में हेलियोडोरस को ‘भागवत’ और वासुदेव को ‘देवदेवस’ कहा गया है। गौतमी बलश्री का नासिक अभिलेख सातवाहन वंश से संबंधित है और धनदेव का अयोध्या अभिलेख कोसल के शासक से संबंधित है — ये भागवत धर्म के प्राथमिक साक्ष्य नहीं हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गरुड़ को विष्णु का वाहन माना जाता है और गरुड़ स्तंभ की स्थापना वैष्णव भक्ति का प्रतीक थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने बेसनगर को एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल घोषित किया है जहाँ उत्खनन में और भी भागवत परंपरा से जुड़े अवशेष प्राप्त हुए हैं।
    20. ‘बेसनगर अमिलेख’ का हेलियोडोरस कहां का निवासी था?
    (a) पुष्कलावती
    (b) तक्षशिला
    (c) साकल
    (d) मथुरा
    U.P. U.D.A. L.D.A. (Pre) 2010
    उत्तर-(b)
    बेसनगर अभिलेख के अनुसार हेलियोडोरस तक्षशिला (वर्तमान पाकिस्तान में रावलपिंडी के निकट) का निवासी था। वह यवन (यूनानी) राजा एंटियाल्किडस का राजदूत था जिसे शुंग राजा भागभद्र के दरबार में भेजा गया था। तक्षशिला उस काल में एक प्रमुख व्यापारिक और शैक्षिक केंद्र था। यवन राजदूत का भागवत धर्म को ग्रहण करना भारतीय और यूनानी संस्कृतियों के बीच गहरे सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रमाण है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तक्षशिला विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालय नगरों में से एक था जहाँ चाणक्य (कौटिल्य) ने शिक्षा प्राप्त की थी। पुष्कलावती (वर्तमान चारसद्दा, पाकिस्तान) गांधार क्षेत्र की एक अन्य प्रमुख यूनानी बस्ती थी, जबकि साकल (वर्तमान सियालकोट) यवन राजा मिनांडर (मिलिंद) की राजधानी थी।
    21. राष्ट्रीय मानव संग्रहालय कहां पर है?
    (a) गुवाहाटी
    (b) बस्तर
    (c) भोपाल
    (d) चेन्नई
    M.P.P.C.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(c)
    राष्ट्रीय मानव संग्रहालय मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है। इसकी स्थापना 1977 ई. में हुई थी और बाद में इसका नाम बदलकर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय कर दिया गया। यह संग्रहालय भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है तथा मानव सभ्यता, जनजातीय कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:यह संग्रहालय लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसमें 36 पुनर्निर्मित आदिवासी आवास तथा 32 राज्यों की जनजातीय संस्कृति से जुड़ी वस्तुएं प्रदर्शित हैं, जो इसे एशिया के सबसे बड़े मानव विज्ञान संग्रहालयों में से एक बनाती हैं।
    22. पुरी में ‘रथयात्रा’ किसके सम्मान में निकाली जाती है?
    (a) भगवान राम के
    (b) भगवान विष्णु के
    (c) भगवान जगन्नाथ के
    (d) भगवान शिव के
    Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2007
    उत्तर-(c)
    ओडिशा के पुरी में प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ (विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण), उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के सम्मान में भव्य रथयात्रा आयोजित की जाती है। तीनों देवताओं को अलग-अलग विशाल रथों में बैठाकर गुंडिचा मंदिर तक यात्रा कराई जाती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:जगन्नाथ पुरी को चार धामों में से एक माना जाता है। पुरी रथयात्रा का उल्लेख स्कंद पुराण, नारद पुराण एवं ब्रह्म पुराण में भी मिलता है। इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
    23. भारतीय पुरातत्व का जनक’ किसे कहा जाता है?
    (a) अलेक्जेंडर कनिंघम
    (b) जॉन मार्शल
    (c) मार्टीमर ह्वीलर
    (d) जेम्स प्रिंसेप
    M.P.P.C.S. (Pre) 2017
    उत्तर-(a)
    अलेक्जेंडर कनिंघम (1814–1893 ई.) को ‘भारतीय पुरातत्व का जनक’ कहा जाता है। वे ब्रिटिश सेना में बंगाल इंजीनियर्स के अधिकारी थे और भारतीय ऐतिहासिक स्थलों की खोज व अभिलेखन में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने 1861 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना की और इसके पहले महानिदेशक बने।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:कनिंघम ने सारनाथ, सांची, तक्षशिला और कई बौद्ध स्थलों की खुदाई करवाई। उन्होंने ‘Coins of Ancient India’ और ‘The Stupa of Bharhut’ जैसे महत्त्वपूर्ण ग्रंथ भी लिखे, जो भारतीय पुरातत्व के आधारभूत संदर्भ ग्रंथ माने जाते हैं।
    24. वह प्राचीन स्थल जहां 60,000 मुनियों की सभा में संपूर्ण महाभारत- कथा का वाचन किया गया था, है –
    (a) अहिच्छत्र
    (b) हस्तिनापुर
    (c) काम्पिल्य
    (d) नैमिषारण्य
    U.P.P.C.S. (Pre) 2006
    उत्तर-(d)
    उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में स्थित नैमिषारण्य को 60,000 ऋषि-मुनियों का निवास स्थल माना गया है। यहीं पर सूत गोस्वामी ने महर्षि सौनक एवं अन्य ऋषियों के समक्ष, जब वे दीर्घकालीन यज्ञ में रत थे, समग्र महाभारत कथा का वाचन किया था। इससे पूर्व इसी कथा का पाठ वैशम्पायन ने राजा जनमेजय के सर्पयज्ञ के अवसर पर किया था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:नैमिषारण्य को ‘तीर्थों का राजा’ भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार यहाँ की भूमि पर ब्रह्मा का चक्र गिरा था, इसीलिए इसे ‘नैमिष’ (चक्र के गिरने का स्थान) कहा जाता है। यह स्थान वैष्णव, शैव और शाक्त तीनों परंपराओं के लिए पवित्र माना जाता है।
    25. सूची-I तथा सूची-II को सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही
    सूची-I सूची-II
    A. जैन धर्म 1. मदीना
    B. हिंदू धर्म 2. वेटिकन
    C. इस्लाम धर्म 3. पावापुरी
    D. ईसाई धर्म 4. वाराणसी
    कूट :
    A B C D उत्तर चुनिए-
    (a) 3 1 4 2
    (b) 1 2 4 3
    (c) 3 4 1 2
    (d) 2 3 1 4
    M.P.P.C.S. (Spl) (Pre) 2004
    उत्तर-(c)
    सूची-I और सूची-II का सही सुमेलन इस प्रकार है — जैन धर्म → पावापुरी; हिंदू धर्म → वाराणसी; इस्लाम धर्म → मदीना; ईसाई धर्म → वेटिकन। पावापुरी बिहार में स्थित है जहाँ 527 ई.पू. में भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया। वाराणसी गंगा तट पर स्थित हिंदुओं का प्राचीनतम तीर्थ है। मदीना इस्लाम का दूसरा पवित्रतम शहर है जहाँ पैगंबर मुहम्मद साहब की दरगाह है। वेटिकन विश्व का सबसे छोटा स्वतंत्र देश (44 हेक्टेयर) है और रोमन कैथोलिक चर्च की केंद्रीय सत्ता का आसन है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:पावापुरी में जल मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो एक सरोवर के मध्य स्थित है और जैन परंपरा के अनुसार उसी स्थान पर निर्मित है जहाँ महावीर का अंतिम संस्कार हुआ था। वाराणसी को ‘काशी’ नाम से भी जाना जाता है और इसे विश्व के सबसे पुराने जीवित नगरों में से एक माना जाता है।
    26. निम्नांकित में से कौन ‘प्रस्थानत्रयी’ में सम्मिलित नहीं है?
    (a) भागवत
    (b) भगवद्गीता
    (c) ब्रह्मसूत्र
    (d) उपनिषद
    U.P.P.C.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(a)
    वेदांत दर्शन के तीन सर्वप्रमुख ग्रंथों को सम्मिलित रूप से ‘प्रस्थानत्रयी’ कहा जाता है — (1) उपनिषद (श्रुति प्रस्थान), (2) ब्रह्मसूत्र (न्याय प्रस्थान), और (3) भगवद्गीता (स्मृति प्रस्थान)। भागवत पुराण इस त्रयी में सम्मिलित नहीं है। वेदांत के आचार्यों — शंकर, रामानुज, मध्व आदि — ने अपने-अपने संप्रदाय की स्थापना इन्हीं तीनों पर भाष्य लिखकर की।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:आदि शंकराचार्य (788–820 ई.) ने प्रस्थानत्रयी पर सबसे प्रभावशाली भाष्य लिखे और अद्वैत वेदांत की स्थापना की। उन्होंने पूरे भारत में चार मठों — शृंगेरी, द्वारका, पुरी और ज्योतिर्मठ — की स्थापना भी की जो आज भी सक्रिय हैं।
    27. नासिक में कुंभ मेला निम्न में किस एक नदी के तट पर लगता है-
    (a) ताप्ती नदी
    (b) नर्मदा नदी
    (c) कोयना नदी
    (d) गोदावरी नदी
    U.P.P.C.S. (Mains) 2003
    उत्तर-(d)
    नासिक में प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर गोदावरी नदी के तट पर कुंभ मेला आयोजित होता है, जिसे ‘सिंहस्थ’ भी कहा जाता है। भारत में चार स्थानों पर कुंभ मेला आयोजित होता है — (1) हरिद्वार (गंगा), (2) प्रयागराज (गंगा-यमुना-सरस्वती संगम), (3) नासिक (गोदावरी) और (4) उज्जैन (क्षिप्रा)।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:2019 में प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में अनुमानतः 24 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए थे, जो इसे विश्व के सबसे बड़े शांतिपूर्ण मानव समागमों में से एक बनाता है। यूनेस्को ने 2017 में कुंभ मेले को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की सूची में शामिल किया।
    28. रामायण के किस कांड में राम और हनुमान की पहली भेंट का वर्णन है?
    (a) किष्किन्धा कांड
    (b) सुंदर कांड
    (c) बाल कांड
    (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
    U.P.P.C.S. (Mains) 2004
    उत्तर-(a)
    महर्षि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में रचित आदिकाव्य रामायण में कुल 7 कांड हैं। चौथा कांड किष्किन्धा कांड है, जिसमें श्रीराम और हनुमान की ऐतिहासिक प्रथम भेंट का वर्णन है। इसी कांड में बालि-वध, सुग्रीव का वानर साम्राज्य का राजा बनना और सीता की खोज हेतु वानर सेना के प्रस्थान का वर्णन भी है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:वाल्मीकि रामायण में कुल लगभग 24,000 श्लोक हैं, इसीलिए इसे ‘चतुर्विंशति सहस्री संहिता’ भी कहते हैं। सुंदर कांड को रामायण का हृदय माना जाता है क्योंकि इसमें हनुमान की लंका यात्रा और सीता की खोज का विस्तृत वर्णन है।
    29. कालिका पुराण किस धर्म से संबंधित है?
    (a) वैष्णव
    (b) शाक्त
    (c) बौद्ध
    (d) जैन
    M.P.P.S.C. (Pre) 2018
    उत्तर-(b)
    कालिका पुराण हिंदू धर्म की शाक्त परंपरा से संबंधित है। यह देवी काली और शक्ति की उपासना पर केंद्रित ग्रंथ है। इसे ‘कलि पुराण’ भी कहा जाता है और यह मुख्यतः असम एवं पूर्वोत्तर भारत में प्रचलित शाक्त परंपराओं का प्रमुख धार्मिक ग्रंथ है। इसमें देवी की पूजा-विधि, तंत्र और कामाख्या मंदिर का विस्तृत वर्णन मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:कालिका पुराण में असम स्थित कामाख्या मंदिर को शक्तिपीठों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यह पुराण अन्य पुराणों से भिन्न इसलिए है क्योंकि इसमें पशुबलि और तांत्रिक अनुष्ठानों का विस्तृत उल्लेख है, जो शाक्त संप्रदाय की विशेषता है।
  • भगवत धर्म | One-Liner Practice

    ❑ वैष्णव धर्म के विषय में प्रारंभिक जानकारी उपनिषदों से मिलती है। जिसका विकास भागवत धर्म से हुआ।

    ❑ भागवत सम्प्रदाय का सर्वोच्च देवता वासुदेव कृष्ण हैं, जिसकी बाद में पहचान विष्णु के साथ की गयी है।

    ❑ दक्षिण भारत (तमिल भूमि) में भागवत आंदोलन का प्रसार 12 अलवारों द्वारा किया गया।

    ❑ भागवत सम्प्रदाय के प्रमुख तत्व भक्ति एवं अहिंसा है। अहिंसा का अर्थ किसी जीव का वध न करना है जबकि भक्ति का अर्थ प्रेममय निष्ठा निवेदन है।

    ❑ वैष्णव धर्म के प्रवर्तक कृष्ण थे, जो बृष्णि कबीले के थे और उनका निवास स्थान मथुरा था।

    ❑ कृष्ण का उल्लेख सर्वप्रथम छांदोग्य उपनिषद् में देवकी-पुत्र और अंगिरस के शिष्य के रूप में हुआ है।

    ❑ विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख मत्स्य पुराण में मिलता है।

    ❑ विष्णु के दस अवतार हैं-मत्स्य, कूर्म, वराह, (शूकर), नरसिंह, वामन, परशुराम (भृगुपति), राम, बलराम (कृष्ण), बुद्ध एवं कल्कि।

    ❑ अवतारवाद का सर्वप्रथम उल्लेख भगवद्गीता में मिलता है।

    ❑ वैष्णव धर्म में ईश्वर को प्राप्त करने के लिए सर्वाधिक महत्त्व भक्ति को दिया गया है।

    ❑ वैष्णव धर्म का सर्वाधिक विकास गुप्त काल में हुआ। गुप्तकाल में ही अमरसिंह ने अपने ग्रंथ अमरकोश में विष्णु केकुल 39 नामों का वर्णन किया है।

    ➣ दक्षिण भारत में भागवत धर्म के उपासक अलवार कहे जाते थे। प्रमुख अलवार संत तिरूमंगाई, पेरिय अलवार एवं नाम्मालवार थे। अलवार सन्त बारह थे।

    आन्दाल नामक महिला अलवार संत ने स्वयं को विष्णु की प्रेमिका माना।

    ➣ केरल का राजा कुलशेखर अलवार संत एवं विष्णु का भक्त था। कुलशेखर की रामं में भी अगाध आस्था थी। कुलशेखर ने पेरुमल तिरुमोलि नामक ग्रन्थ की रचना की।

    ➣ यूनानी राजा एण्टियालकीडास के राजदूत हेलियोडोरस ने विदिशा के बेसनगर में नौवें शुंग शासक भागभद्र के काल में विष्णु (वासुदेव) के सम्मान में गरूड़ ध्वज की स्थापना की एवं स्तम्भ का निर्माण करवाकर अभिलेख खुदवाया।

    ➣ भागवत धर्म से सम्बन्धित प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य हेलियोडोरस का गरूड़ स्तम्भ अभिलेख है।

    ➣ भक्ति का सर्वप्रथम उल्लेख श्वेताश्वर उपनिषद में मिलता है जबकि भक्ति का सर्वप्रथम विस्तृत उल्लेख भगवतगीता में मिलता है।

    ➣ गुप्त काल में विद्वान वाराहमिहिर ने वृहत्संहिता में भागवत् धर्म का उल्लेख किया है।

    स्कंदगुप्त का जूनागढ़ अभिलेख में भगवान विष्णु की स्तुति से ही प्रारंभ होता है। स्कन्दगुप्त के भीतरी अभिलेख में देवकी एवं कृष्ण का उल्लेख है।

    सात्वत सम्प्रदाय वैष्णव धर्म से सम्बन्धित है।

    ➣ दिल्ली में महरौली लौह स्तंभ में उल्लिखित जानकारी के मुताबिक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने विष्णु ध्वज की स्थापना की।

    ➣ गुप्तकाल में विष्णु का सबसे लोकप्रिय अवतार वाराह अवतार था।

    ➣ प्रतिहार शासक मिहिरभोज ने अपने ग्वालियर अभिलेख में स्वयं को वाराह अवतार घोषित किया है।

    12वीं शताब्दी में जयदेव ने गीतगोविंद की रचना की, जिसमें राधा-कृष्ण को महान बनाया गया है।

    ➣ राष्ट्रकूट शासक दंतिदुर्ग ने एलोरा में दशावतार का मंदिर बनवाया था जो भागवत धर्म से सम्बंधित था।

    ➣ प्रत्येक वर्ष आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ (कृष्ण), बलराम और सुभद्रा के सम्मान में रथयात्रा निकाली जाती है।

  • भगवत धर्म : श्रीकृष्ण, विष्णु के 10 अवतार और भक्ति परंपरा

    📚 विषय सूची

    ➣ ब्राह्मण धर्म के जटिल कर्मकाण्ड एवं यज्ञीय व्यवस्था के विरुद्ध प्रतिक्रिया स्वरूप उदय होने वाला पहला सम्प्रदाय भागवत सम्प्रदाय था।

    ➣ भागवत धर्म का उद्भव मौर्योत्तर काल में हुआ। इस धर्म के विषय में प्रारम्भिक जानकारी उपनिषदों में मिलती है।

    छांदोग्य उपनिषद में श्री कृष्ण का उल्लेख सर्वप्रथम मिलता है। उसमें कृष्ण को देवकी पुत्र व ऋषि घोर अंगिरस का शिष्य बताया गया है।

    ➣ भागवत धर्म से वैष्णव धर्म का विकास हुआ। भागवत धर्म के प्रवर्तक शप्तवंशी कृष्ण थे। जो बृष्णि कबीले के थे और उनका निवास स्थान मथुरा था।

    वासुदेव कृष्ण का प्रारंभिक अभिलेखीय उल्लेख बेसनगर स्थित गरुड़ स्तम्भ अभिलेख में पाया जाता है।

    ➣ इनके अनुयायियों को भगवत कहते हैं। इसी के आधार पर इस धर्म का नाम भागवत धर्म पड़ा।

    ऋग्वेद में विष्णु का उल्लेख आकाश के देवता के रूप में हुआ है। उत्तर वैदिक काल में तीन प्रमुख देवता-प्रजापति, रुद्र एवं विष्णु थे। विष्णु को लोग पालक एवं रक्षक मानने लगे। पतंजलि ने वासुदेव को विष्णु का रूप बताया है।

    विष्णु पुराण में भी वासुदेव को विष्णु का एक नाम बताया गया है। इस प्रकार जब कृष्ण-विष्णु का तादात्म्य नारायण से स्थापित हुआ, तब वैष्णव धर्म की एक संज्ञा पांचरात्र धर्म हो गया।

    ➣ कृष्ण का सम्बन्ध साल्व वंश से था। इसलिए इसे साल्व धर्म भी कहते हैं।

    ➣ भागवत धर्म तथा वासुदेव की पूजा का उल्लेख महर्षि पाणिनि ने किया है। उन्होंने वासुदेव के उपासकों को वासुदेवक कहा है।

    ➣ एक मानवीय नायक के रूप में वासुदेव के दैवीकरण का सबसे प्राचीन (सर्वप्रथम) उल्लेख पाणिनी की अष्टाध्यायी से प्राप्त होता है।

    ➣ भागवत सम्प्रदाय के प्रमुख तत्व भक्ति एवंअहिंसा है। भक्ति का अर्थ प्रेममय निष्ठा निवेदन है जबकि अहिंसा का अर्थ किसी जीव का वध न करना है।

    ➣ महाभारत काल में वासुदेव कृष्ण का तादात्म्य विष्णु से स्थापित किया गया। महाभारत में इनका एक और नाम गोविंद भी मिलता है।

    ➣ जैन धर्म ग्रन्थ उत्तराध्ययन सूत्र में वासुदेव को केशव नाम से पुकारा गया तथा वासुदेव को 22वें तीर्थंकर अरिष्टनेमि का समकालीन बताया गया है।

    ➣ विष्णु का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में प्राप्त होता है। तदनुसार इन्होंने वामन अवतार में 3 पगों से समस्त लोकों को नाप लिया था।

    ➣ विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख मत्स्य पुराण में मिलता है। ये दस अवतार हैं-मत्स्य, कूर्म, वराह, (शूकर), नरसिंह, वामन, परशुराम (भृगुपति), राम, बलराम (कृष्ण), बुद्ध एवं कल्कि।

    ➣ यह धर्म प्रारंभ में मथुरा एवं उसके आस-पास के क्षेत्रों में प्रचलित था। मथुरा से इस धर्म का प्रसार धीरे-धीरे भारत के अन्य भागों में हुआ।

    मेगस्थनीज ने अपने इंडिका में शूरसेन (मथुरा) के लोगों को कृष्ण का उपासक होना बताया है तथा कृष्ण को हेराक्लीज (कृष्ण का रूपांतरण) कहा।

    ➣ भागवत धर्म से संबद्ध प्रथम उपलब्ध प्रस्तर स्मारक विदिशा (बेसनगर) का गरुड़ स्तंभ है। इससे पता चलता है कि तक्षशिला के यवन राजदूत हेलियोडोरस ने भागवत धर्म ग्रहण किया तथा इस स्तंभ की स्थापना करवाकर उसकी पूजा की थी।

    ➣ इस पर उत्कीर्ण लेख में हेलियोडोरस को भागवत तथा वासुदेव को देवदेवस अर्थात देवताओं का देवता कहा गया था। अपोलोडोटस के सिक्कों पर सबसे पहले भागवत धर्म के चिह्न मिलते हैं।

    महाक्षत्रप शोडासकालीन मोरा (मथुरा) पाषाण लेख में पंचवीरों (संकर्षण,वासुदेव, प्रद्युम्न, साम्ब तथा अनिरुद्ध) की पाषाण प्रतिमाओं को मंदिर में स्थापित किए जाने का उल्लेख मिलता है।

    गुप्तकाल में वैष्णव धर्म की उत्कर्ष पर था। गुप्त शासक परमभागवत् नामक उपाधि धारण करते थे तथा विष्णु का वाहन गरुड़ गुप्तशासकों का राजचिन्ह भी था।

    मेहरौली स्तंभ लेख में उल्लेख मिलता है कि चंद्रगुप्त द्वितीय ने विष्णुपद पर्वत पर विष्णु ध्वज की स्थापना करवाई थी।

    ➣ स्कंदगुप्त के भितरी स्तंभ लेख (गाजीपुर) में विष्णु की मूर्ति स्थापित किए जाने का उल्लेख है। जूनागढ़ लेख से ज्ञात होता है कि चक्रपालित ने सुदर्शन झील के तट पर विष्णु की मूर्ति स्थापित करवाई थी।

    ➣ देवगढ़ की मूर्ति में विष्णु को शेषशायी पर विश्राम करते हुए दिखाया गया है। गुप्तकाल में अमरसिंह ने अपने ग्रंथ अमरकोश में विष्णु के 42 नामों का वर्णन किया है।

    ➣ वेंगी के पूर्वी चालुक्य शासक वैष्णव मतानुयाई थे। गुप्तों के समान ही उनका राजचिह्न गरुड़ था।

    राष्ट्रकूट नरेश दंतिदुर्ग ने एलोरा में दशावतार का प्रसिद्ध मंदिर बनवाया था। इस मंदिर में विष्णु के दस अवतारों की कथा मूर्तियों में अंकित है। क्षेमेंद्र रचित दशावतार चरित में भी विष्णु के दस अवतारों का वर्णन मिलता है।

    ➣ दक्षिण भारत (तमिल भूमि) में भागवत आंदोलन का प्रसार अलवारों द्वारा किया गया। अलवार शब्द का अर्थ होता है-ज्ञानी व्यक्ति।

    ➣ अलवार संतों की संख्या 12 बताई गई है। इनमें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं- पोयगई, पूडम, पेय, तिरुमंगई, आण्डाल, नम्मालवार आदि। अलवार संतों में एकमात्र महिला साध्वी आण्डाल थी। जिसे ‘दक्षिण की मीरा’ कहा जाता है।

    ➣ चोल काल में वैष्णव धर्म के प्रचार का कार्य अलवारों के स्थान पर आचार्यों ने किया। आचार्य परंपरा में प्रथम नाम नाथमुनि का लिया जाता है। इन्हें मधुरकवि का शिष्य बताया जाता है। इन्होंने न्यायतत्व की रचना की।

    श्रीकृष्ण: भागवत सम्प्रदाय के प्रमुख देवता

     देवकी-वसुदेवमाता-पिता
     यशोदा-नन्दपालनकर्ता माता-पिता
     बलरामनन्द का पुत्र (उपनाम-हलधर)
     कंसमामा
     जरासंधमामा का श्वसुर
     संदीपनी व उपमन्युगुरु
     घोरा अंगिरसगुरु (छान्दोग्य उपनिषद्)
     कुब्जाकंस की दासी व कृष्णभक्त
     राधाप्रेमिका
     रुक्मिणीपटरानी व प्रद्युम्न की माता
     जाबंतीरानी व साम्ब की माता
     प्रद्युम्न,साम्बपुत्र
     अनिरुद्धपौत्र
     द्वारकाराजधानी
     पांचजन्यशंख

    भगवान विष्णु के 10 अवतार और उनका महत्व

    ➣ भागवत धर्म की महत्त्वपूर्ण विशेषता अवतारवाद का प्रथम उल्लेख भगवद्गीता में है। भगवद्गीता महाभारत के भीष्म पर्व का अंश है।

    ➣ यद्दपि अमरकोश में विष्णु के 39 अवतारों का उल्लेख मिलता है, परंतु वास्तविक रूप में 10 अवतार सर्वाधिक प्रचलित है।

    ➣ पुराणों में भी विष्णु के दस अवतारों का विवरण प्राप्त होता है। ये हैं-मत्स्य, कूर्म अथवा कच्छप, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध एवं कल्कि (कलि)।

    मत्स्य पुराण में विष्णु के अवतारों की सूची में कृष्ण के स्थान पर बुद्ध को स्थान दिया गया है। मत्स्य पुराण के अलावा क्षेमेन्द्र कृत दशावतार चरित एवं जयदेव कृत गीत गोविन्द में भी विष्णु के दस अवतारों का वर्णन है।

    नारायण, नृसिंह एवं वामन दैवीय अवतार माने जाते हैं और शेष सात मानवीय अवतार माने जाते हैं। विष्णु अवतारों में वराह, राम एवं कृष्ण अधिक लोकप्रिय हैं।

    1. मत्स्य : विष्णु के प्रथम अवतार की कथा

    ➣ इसका उल्लेख सर्वप्रथम शतपथ ब्राहाण में मिलता है जब पृथ्वी विश्वव्यापी जल प्रलय से भयभीत हुई तो विष्णु ने मत्स्य (मछली) के रूप में अवतार लिया और मनु को इस आसन्न भय से सावधान किया।

    ➣ पृथ्वी के जलमग्न हो जाने पर सृष्टि के क्रम को पुनर्स्थापित करने के लिए मत्स्य अवतार ने मनु, उनके परिवार और सप्त ऋषियोंवेदों को एक जलपोत द्वारा (जो मत्स्य के सिर पर निकले सींग से रस्सी द्वारा आबद्ध था) सुरक्षित बचाकर ले जाए।

    2. कूर्म : समुद्र मंथन में विष्णु की भूमिका

    ➣ पृथ्वी के जलमग्न होने के कारण पृथ्वी की कई अमूल्य वस्तुएं विश्व सिंधु के तल में समुद्र के गर्भ में) समा गये थे जिसमें अमृत भी एक था।

    ➣ इन वस्तुओं का प्राप्त करने हेतु देवताओं (सुरों) व दानवों (असुरो) ने समुद्र मंथन की योजना बनाई।

    समुद्र-मंथन की योजना को कार्यान्वित करने हेतु विष्णु ने एक वृहदाकार कूर्म (कछुआ) के रूप में अवतार लिया।

    ➣ देवताओं ने कूर्म के पीठ पर मंदराचल पर्वत को रखकर नागराज वासुकि को मंदराचल में लपेट कर समुद्र-मंथन किया।

    ➣ समुद्र-मंथन के फलस्वरूप देवताओं ने अमृत व अन्य वस्तुओं के साथ-साथ देवी लक्ष्मी को भी प्राप्त किया। अमृत के बंटवारे को लेकर देवताओं व दानवों में युद्ध (सुरासुर युद्ध) हुआ जिसमें देवताओं की जीत हुई।

    ➣ परन्तु छल वश एक राक्षस ने अमृत पान कर लिया तब विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से गला काट दिया परन्तु अमृत पान के कारण वह मृत्यु को प्राप्त नहीं हो सका और राहूकेतु दो भागों में बंट गया।

    3. वराह : पृथ्वी की रक्षा की पौराणिक कथा

    ➣ विष्णु के अवतारों में वराह अवतार सर्वाधिक लोकप्रिय है। इसमें वराह समुद्र से पृथ्वी का उद्धार करते हैं। वराह का प्रथम उल्लेख ऋग्वेद में है तथा नृसिंह अवतार का उल्लेख तैत्तिरीय आरण्यक में है।

    दानव हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को विश्व सिंधु में डुबोकर पृथ्वीवासियों पर अत्याचार करने लगा। देवताओं ने उसे मारने के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना किये।

    ➣ अब हिरण्याक्ष विष्ठा (मल) का कोट बनाकर उसकी आड़ में रहने लगा। विष्ठा की कोट ढाहने के लिए भगवान विष्णु ने एक वृहदाकार वराह/वाराह (शूकर/सूअर) के रूप में अवतार लिया और हिरण्याक्ष को मारकर पृथ्वी को अपने दांतों से उठाकर उसे यथास्थान रख दिया।

    ऐसी मान्यता है कि हिरण्याक्ष अपने अगले जन्म रावण का भाई कुम्भकरण हुआ।

    4. नरसिंह : हिरण्यकश्यप वध की कथा

    विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद को बचाने हेतु नरसिंह के रूप में अवतार लिया।

    ➣ प्रहलाद के पिता हिरण्यकशिपु को वरदान प्राप्त था कि वह किसी देवता या दानव से,पशु या मानव से, दिन या रात में, भीतर या बाहर में, धरती या आकाश में, अस्त्र या शस्त्र से मारा नही जा सकता।

    ➣ वरदान प्राप्ति के बाद हिरण्यकशिपु पृथ्वीलोक में अत्याचार करने लगा।

    ➣ भगवान विष्णु नरसिंह अर्थात नर का शरीर और सिंह का मुख धारण करके प्रकट हो गये। उन्होंने संध्या समय में अपनी जांघों पर हिरण्यकशिपु के शरीर को रखकर अपने नाखुनों से फाड़ कर वध किया।

    ऐसा कहा जाता है कि हिरण्यकशिपु ही अगले जन्म में रावण हुआ।

    5. वामन : राजा बलि और तीन पग भूमि की कथा

    राक्षसराज बलि ने संसार पर आधिपत्य कर लिया और अत्यधिक तप-दान के सहारे उसके अलौकिक शक्ति की ऐसी वृद्धि हुई कि उसने देवताओं तक को पीड़ित करना शुरू कर दिया।

    ➣ जब देवताओं ने अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना की तब विष्णु ने वामन के रूप में अवतार लिया और बलि के सम्मुख प्रकट होकर उससे 3 पग भूमि की याचना की थी।

    ➣ बलि द्वारा दान की याचना स्वीकारने पर वामन (बौना) ने अपना विशाल रूप धारण कर पहले पग में पृथ्वी, दूसरे पग में आकाश और तीसरे पग में महाबलि के पूरे शरीर को मापकर उसे पाताल लोक भेज दिया।

    ➣ विष्णु के 3 पग के बारे में ऋग्वेद में भी दिया गया है।

    द्वापर युग में कंश द्वारा मारे गए 6 पुत्र मृत्यु पश्चात् बलि के पास आये थे। जिन्हे आगे कृष्ण ने मुक्त कर दिया था।

    6. परशुराम : विष्णु के क्रोध और न्याय का प्रतीक

    विष्णु में मानव रूप में जमदग्नि नामक ब्राह्मण के पुत्र परशुराम के रूप में अवतार लिये। वे पराक्रमी किंतु क्रोधी स्वाभाव के थे।

    ➣ परशुराम ने कार्तवीर्य नामक क्षत्रिय राजा की हत्या इसलिए कर दी कि उसने जमदग्नि से कामधेनु गाय बलात् छीन लिया था एवं उनके आश्रम को नष्ट कर दिया था।

    ➣ प्रत्युत्तर में कार्तवीर्य के पुत्रों ने जमदग्नि की हत्या कर दी।

    ➣ तभी से परशुराम ने पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन करने की प्रतिज्ञा की और 21 बार कार्तवीर्य के वंशजों को परास्त किया।

    7. राम : मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन

    श्रीलंका के राजा रावण के अत्याचारों से मानव जाति को बचाने के लिए विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र राम के रूप में अवतार लिया।

    ➣ उपास्यदेव व अवतार के रूप में मान्यता का स्पष्ट वर्णन कालिदास (4वीं सदी ई. के अंत में) के रघुवंशम में मिलती है।

    8. कृष्ण : श्रीकृष्ण और भगवद्गीता का महत्व

    ➣ यह अवतार विष्णु के सभी अवतारों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। मथुरा नरेश कंस जैसे दानवों का वध करने, मानवता व लोक कल्याण की रक्षा हेतु विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया।

    ➣ एक बहेलिये द्वारा चलाये गये बाण पैर के तलुए में लगने के कारण कृष्ण के जीवन का अंत हो गया।

    ये बहेलिये ही अपने पिछले जन्म में वानर राज बाली था जिसे छिपकर राम ने मारा इसलिए कर्म सिंद्धांत के अनुसार इस जन्म में बहेलिये के रूप में उसने कृष्ण को मारा।

    9. बुद्ध : भगवान बुद्ध को विष्णु अवतार माना जाना

    ➣ ऐतिहासिक रूप से विष्णु का यह अंतिम अवतार है। वैदिक कर्मकांडों व यज्ञों से होने वाली बलि हिंसक कृत्यों को दूर करने के लिए विष्णु ने बुद्ध के रूप में अवतार लिया।

    ➣ बुद्ध ने मध्य मार्ग के अनुसरण पर बल दिया तथा प्रेम और अहिंसा का प्रचार-प्रसार किया।

    10. कल्कि अवतार : विष्णु के अंतिम अवतार की भविष्यवाणी

    ➣ कल्कि अवतार का होना अभी शेष है।

    ➣ ऐसी कल्पना की गई है कि कलियुग के अंतिम चरण में भगवान विष्णु हाथ में तलवार लेकर श्वेत अश्व पर सवार होकर पृथ्वी पर अवतरित होंगे और कलियुग का अंत कर नये युग की स्थापना करेंगे।

    ➣ विष्णु के इन अवतारों को जीव विकास क्रमानुसार भी बताया गया है –

    युग और अवतारों का जैव विकास क्रम

    युग जैव विकास का क्रम
    सतयुग 1. मत्स्य अवतार – मछली (जलीय जीव)
    2. कूर्म अवतार – कछुआ (उभयचर: जल व स्थल)
    3. वराह अवतार – सूअर (स्थल का पशु)
    4. नरसिंह अवतार – अर्द्धमानव-अर्द्धपशु (मानव व पशु के बीच का रूप)
    त्रेतायुग 5. वामन अवतार – बौना मानव (लघु मानव)
    6. परशुराम अवतार – शस्त्रधारी मानव (परशु/फरसा का प्रयोगकर्ता)
    7. राम अवतार – मर्यादित समाज में रहने वाला मानव
    द्वापर युग 8. कृष्ण अवतार – पशुपालन आधारित मानव
    9. बुद्ध अवतार – कृषि एवं शांति को बढ़ावा देने वाला मानव
    कलियुग 10. कल्कि अवतार – भविष्य का संहारक मानव रूप

    भागवत में वासुदेव (कृष्ण) की उपासना के साथ ही तीन अन्य व्यक्तियों की उपासना भी की जाती थी:

    1. संकर्षण (बलराम) – वसुदेव और रोहिणी से उत्पन्न पुत्र
    2. प्रद्युम्न – कृष्ण और रुक्मिणी से उत्पन्न पुत्र
    3. अनिरुद्ध – प्रद्युम्न के पुत्र

    ➣ इन चारों (वासुदेव सहित) को चतुर्व्यूह की संज्ञा दी जाती है। चतुर्व्यूह पूजा का प्रथम उल्लेख विष्णु संहिता में मिलता है।

    ➣ राजा सर्वतात के दूसरी सदी ई.पू. के घोसुण्डी शिलालेख (चित्तौड़गढ़, राजस्थान) में वासुदेव एवं संकर्षण की पूजा का उल्लेख है।

    ➣ पहली सदी ई.पू. के सातवाहनों के नानाघाट अभिलेख में संकर्षण (बलराम) और वासुदेव की पूजा का उल्लेख है।

    ➣ वायु पुराण में इन चारों के साथ साम्ब’ (कृष्ण और जाग्बवंती से उत्पन्न पुत्र) को मिलाकर पंचवीर कहा गया है।

    ➣ भागवत धर्म में नवधा भक्ति का विशेष महत्त्व है। श्रवण (परीक्षित), कीर्तन (शुकदेव), स्मरण (प्रह्लाद), पादसेवन (लक्ष्मी), अर्चन (पृथुराजा), वंदन (अक्रूर), दास्य (हनुमान), सख्य (अर्जुन) और आत्मनिवेदन (बलि राजा) – इन्हें नवधा भक्ति कहते हैं।

    ➣ वैष्णव धर्म के प्रमुख आचार्य हैं-रामानुज, मध्व, बल्लभ, चैतन्य आदि।

    ➣ पांचरात्र व्यूह के प्रमुख देवता :- 1. वासुदेव, 2. लक्ष्मी, 3. संकर्षण 4. प्रद्युम्न , 5. अनिरूद्ध

    ➣ मथुरा के पास मोरा नामक स्थान से प्रथम शताब्दी ई. के एक लेख में तोस नामक विदेशी स्त्री द्वारा वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न, साम्ब एवं अनिरूद्ध (पाँच वृष्णि वीरों की पूजा का प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य) की मूर्तियों की उपासना का उल्लेख है।

    साम्ब सूर्यपूजा से संबंधित थे। साम्ब पांचरात्र व्यूह में नहीं आते जबकि पाँच वृष्णि वीरों में आते हैं।

    ➣ पांचरात्र वैष्णव धर्म का प्रधान मत था। इसका विकास तीसरी शताब्दी ई.पू. के आस-पास हुआ। पांचरात्र का प्रथम उल्लेख महाभारत के नाराणीय खण्ड में मिलता है।

    ➣ पांचरात्र के प्रमुख देवता नारायण विष्णु थे। नारायण का प्रथम उल्लेख शतपथ ब्राह्मण में मिलता है।

    ➣ पांचरात्र में पाँच पदार्थ हैं – 1. परमतत्व 2. मुक्ति, 3. युक्ति 4. योग 5. विषय। अतः यह पांचरात्र कहलाता है।

    प्रमुख मंदिर

     जगन्नाथ मंदिरपुरी (ओडिशा)
     दशावतार मंदिरदेवगढ़ (उत्तर प्रदेश)
     विष्णु मंदिरतिगवां (म.प्र.)
     विष्णु मंदिरएरण (म.प्र.)
     द्वारिकाधीश मंदिरमथुरा (उत्तर प्रदेश)
     द्वारिकाधीश मंदिरद्वारका (गुजरात)

    ➣ भागवत संप्रदाय के विकास में गुप्तों का योगदान अत्यधिक था।

  • शैव धर्म: शिव | Q&A Practice

    ➣ शैव धर्म किस देवता से सम्बंधित है ?
    उत्तर : शिव से

    ➣ किसने मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुद्रा पर अंकित मूर्ति को शिव का प्रारंभिक रूप सिद्ध किया है?
    उत्तर : मार्शल ने

    ➣ ऋग्वेद में शिव का नाम रुद्र (अंतरिक्ष के देवता) मिलता है। उत्तर वैदिक काल में की किस संहिता में इनका नाम शिव प्राप्त होता है?
    उत्तर : तैत्तिरीय संहिता

    ➣ लिंग पूजा का प्रथम उल्लेख किस में मिलता है?
    उत्तर : मत्स्य पुराण में

    ➣ महाभारत के किस पर्व में भी लिंग पूजा का उल्लेख है?
    उत्तर : अनुशासन पर्व

    ➣ शिव की प्राचीनतम मूर्ति पहली शताब्दी ई. में कहां प्राप्त हुई ?
    उत्तर : रेणु गुंटा, मद्रास के निकट

    ➣ पाणिनि के 14 सूत्र किसके डमरू से उत्पन्न माना जाता है?
    उत्तर : महादेव

    ➣ ऐतिहासिक युग में सर्वप्रथम मौर्य काल में कौन उल्लेख करता है कि शूरसेन (मथुरा) डायनोसिस (शिव का यूनानी रूपांतर) की पूजा करते थे ?
    उत्तर : मेगस्थनीज

    ➣ अशोक का पौत्र जालौक किस धर्म का अनुयायी था?
    उत्तर : शैव धर्म

    ➣ मौर्योत्तर काल में किस कुषाण शासक की मुद्राओं पर त्रिशूलधारी शिव और नन्दी के चित्र का अंकन मिलता है तथा पृष्ठ भाग पर महेश्वर अंकित है, जो शैव धर्म से संबंधित प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य है?
    उत्तर : विम कडफिसस

    ➣ किस कुषाण शासक की मुद्राओं में शिवलिंग का चित्रण मिलता है?
    उत्तर : हुविष्क

    ➣ कुमारसंभव के लेखक कौन हैं?
    उत्तर : कालिदास (शैव उपासक)

    ➣ नचना कुठार तथा भूमरा से क्रमश: किनके किनके मंदिर प्राप्त हुए हैं?
    उत्तर : क्रमश: पार्वती तथा शिव

    ➣ समुद्रगुप्त के समय की किस अभिलेख में शिव की जटा से गंगा के निकलने का उल्लेख मिलता है?
    उत्तर : प्रयाग प्रशस्ति

    ➣ गुप्तोत्तर काल में महाकवि भारवि की किस रचना में किरात वेशधारी शिव और अर्जुन के बीच युद्ध का वर्णन है?
    उत्तर : किरातार्जुनीयम

    ➣ 619 ई. से पहले हर्षवर्धन (बाद में बौद्ध धर्म), गौड़ नरेश शशांक और कामरूप के भास्करवर्मा किस धर्म के उपासक थे?
    उत्तर : शैव धर्म

    ➣ परमारवंश के राजा भोज शैव धर्म के अनुयायी थे। उनके द्वारा रचित कौन-सी पुस्तक शैवधर्म से संबंधित है?
    उत्तर : तत्वपरीक्षा

    ➣ पाल, चंदेल, एवं सेन वंश के ज्यादातर अभिलेख किस मंत्र से प्रारंभ होते हैं?
    उत्तर : ओम नमः शिवाय

    ➣ किस चंदेल राजा ने कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण महमूद गजनवी पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में करवाया ?
    उत्तर : विद्याधर

    ➣ 1025 ई. में गुजरात स्थित किस शिव मंदिर को महमूद गजनवी द्वारा नष्ट किया गया ?
    उत्तर : सोमनाथ मंदिर

    ➣ सोमनाथ मंदिर महमूद गजनवी द्वारा नष्ट किये जाने के पश्चात किस शासक ने इसका पुनर्निर्माण करवाया?
    उत्तर : परमार शासक भोज एवं अन्हिलवाड़ के चालुक्य शासक कुमारपाल

    ➣ दक्षिण भारत में शैवधर्म का प्रचार प्रसार करने वाले संतों को क्या कहा जाता था, जिनकी कुल संख्या 63 थी?
    उत्तर : नयनार

    ➣ किस नयनार ने जैनियों को मदुरा में वाद-विवाद में हराकर राजा समेत प्रजा को शैव धर्म में दीक्षित किया तथा 8000 जैनियों को शूली पर चढ़वा दिया?
    उत्तर : सम्बन्दर

    ➣ किस नयनार ने पल्लव शासक महेंद्रवर्मन को शैव धर्म में दीक्षित किया जो प्रारंभ में जैन थे?
    उत्तर : अप्पर या तिरूनावुक्रशु

    ➣ शैव मत के चार सम्प्रदाय कौन-कौन से हैं?
    उत्तर : पाशुपत, शैव, कापालिक और कालामुख पाशुपत

    ➣ शैव सम्प्रदाय का सबसे प्राचीन सम्प्रदाय है, इस सम्प्रदाय का संस्थापक कौन था?
    उत्तर : लकुलीश

    ➣ कापालिक सम्प्रदाय के उपासक किसको शिव का अवतार मानकर उनकी उपासना करते हैं?
    उत्तर : भैरव

    ➣ किस नाटक से पता चलता है कि श्रीशैल नामक स्थान कापालिकों का प्रमुख केंद्र मालतीमाधव नाटक (भवभूति) था?
    उत्तर :

    ➣ बीरशैव अथवा लिंगायत सम्प्रदाय के उपासक शिव के किस रूप की आराधना करते थे?
    उत्तर : शिवलिंग

    ➣ लिंगायत सम्प्रदाय का प्रवर्तक किसको माना जाता है?
    उत्तर : वासवराज एवं चिन्नावासन

    ➣ नाथपंथ सम्प्रदाय अथवा योगिनी कौल मार्ग की स्थापना दसवीं शताब्दी में किसने की, जिसमें शिव को आदिनाथ मानते हुए नौ नाथों को दिव्य पुरुष के रूप में मान्यता प्रदान की गयी है?
    उत्तर : मत्स्येन्द्रनाथ या मच्छन्दरनाथ

    ➣ 11वीं शताब्दी में नाथपंथ सम्प्रदाय के प्रचार-प्रसार का कार्य किसने किया?
    उत्तर : बाबा गोरखनाथ

    शाक्त धर्म

    ➣ शक्ति के प्रारंभिक रूप में सिंधु घाटी सभ्यता में किसकी पूजा की जाती थी ?
    उत्तर : मातृदेवी

    ➣ भारतीय दर्शन की प्रारंभिक शाखा कौन है ?
    उत्तर : सांख्य

    ➣ किसे भारतीय परमाणुवाद का जनक कहा जाता है?
    उत्तर : महर्षि कणाद

    ➣ आजीवक संप्रदाय के संस्थापक कौन थे?
    उत्तर : मखली गोसाल

    ➣ शाक्त धर्म अपने चरमोत्कर्ष पर किस काल में था ?
    उत्तर : गुप्तकाल में

    ➣ किस राष्ट्रकूट शासक ने एक बार अपने बाएं हाथ की अंगुली काटकर देवी को चढ़ा दिया था ?
    उत्तर : अमोघवर्ष

    ➣ संप्रति शाक्त उपासना के तीन प्रमुख केंद्र कौन से हैं?
    उत्तर : कश्मीर, कांची तथा असम स्थित कामाख्या |

    ➣ कामाख्या किस मत का प्रसिद्ध केंद्र है?
    उत्तर : कौल मत

  • शैव धर्म | One-Liner Practice

    ❑ पूर्व-वैदिक धर्म अर्थात् सिंधु धर्म का महत्वपूर्ण अवयव पशुपति महादेव की पूजा करना था। इस देवता को आदिम-शिव कहकर वर्णित किया गया है और वैदिक धर्म विशेषकर उत्तर-वैदिक धर्म में रुद्र को पशुपति महादेव का वैदिक प्रतिरूप माना गया है।

    ❑ शैव मत उत्तर-उपनिषद् काल में उस समय सुस्पष्ट तौर पर प्रकट हुआ जब शिव की पहचान आतंकित करने वाले वैदिक देवता रुद्र के साथ की गयी।

    ❑ शिव का अभिप्राय मंगलमय होना है।

    ❑ लिंग के रूप में शिव की व्यापक स्तर पर पूजा होती है। यह अभिव्यक्ति तथा जीवन का स्रोत है और जिसके अन्दर स्वाभाविक रूप में विखण्डन एवं मृत्यु के बीज विद्यमान है।

    ❑ स्त्री का प्रजनन अवयव (योनि) शिव की शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है और यह उसकी लौकिक ऊर्जा का मानवीय गुण है।

    ❑ कुछ पुराणों ने सम्पूर्ण सृष्टि की पहचान शिव के साथ उसके पांच रूपों तत्पुरुष, नामदेव, अघोरेश, साधोजात एवं इशान की अवधारणा के माध्यम से की है।

    ❑ शिव के पाँचों रूपों को पाँच दिशाओं का शासक बताया गया है जिसमें पाताल और आकाश के चार बिंदु शामिल हैं और यह स्थलीय विस्तार की पूर्णता को निश्चित करता है।

    ❑ शिव के 11 रुद्र अवतार हैं-कपिल, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्त्र, अजपाद, अहिरबुधन्य, शम्भू, चाँद तथा भाव।

    ❑ शिव के निम्नलिखित अवतार हैं-अर्द्धनारीश्वर, नंदी, शरभ, गृहपति, नीलकंठ, ऋषि दुर्वाशा, महेश, हनुमान, वृषभ, पिप्पलाद, वैजनाथ (वैश्यनाथ), यतिननाथ, कृष्णदर्शन, अवधुवेश्वर, भिछुवरेया (विश्वेश्वर), सुरेश्वर, ब्रह्मचारी, सुनातनार्टक, साधु, विभु अश्वथमा, किराट, वीरभद्र, भैरव, अल्लमा, खानदोबा।

    ❑ शैवमत के भावनात्मक पक्ष का प्रचार नायनारों द्वारा किया गया था जबकि उसके सैद्धान्तिक पक्ष को शैव बुद्धिजीवियों (आचार्यों) ने पूर्ण किया। ये आचार्य अगमनत, शुद्ध तथा वीरशैव जैसे शैव आंदोलन के रूपों से संबंधित थे।

    ❑ शुद्ध शैववादियों ने रामानुज की शिक्षाओं को अपनाया और श्रीकान्त शिवाचार्य उनका महान व्याख्याकार था।

    ❑ मत्स्यपुराण में लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मिलता है।

    ❑ शिव धर्म के विकास की प्रक्रिया में कुछ संप्रदायों- पशुपति, कापालिक, कालामुख, लिंगायत आदि का विकास हुआ। इसका वर्णन वामन पुराण में मिलता है।

    ❑ कापालिक संप्रदाय के इष्टदेव भैरव थे जिसका प्रमुख केन्द्र श्रीशैल नामक स्थान था।

    ❑ कालामुख संप्रदाय के लोगों को महाव्रतधर कहा जाता है।

    ❑ लिंगायत को जंगम या वीरशैव संप्रदाय भी कहा जाता है। यह दक्षिण भारत में प्रचलित था। इस संप्रदाय के प्रवर्तक अल्लभ प्रभु और इनके शिष्य बासव थे।

    ❑ वीरशैववादियों का नेतृत्व बासव द्वारा किया गया।

    ❑ पाशुपत संप्रदाय के संस्थापक लकुलीश थे जिसको शिव का अवतार माना जाता है। इसके द्वारा रचित मुख्य ग्रंथ पाशुपत सूत्र है।

    ❑ पाशुपत संप्रदाय का मुख्य संबंध अनुष्ठान एवं अनुशासन से है। इसका अंतिम लक्ष्य शिव के साथ अन्तरविलीन होना है जिससे सभी प्रकार के दुःख एवं परेशानियों से मुक्ति प्राप्त होना है।

    ❑ अथर्ववेद में शिव को शर्व, भव, पशुपति तथा भूपति कहा गया है।

    ❑ नाथ संप्रदाय की स्थापना मत्स्येन्द्र नाथ ने की थी। इसके प्रमुख प्रचारक बाबा गोरखनाथ थे।

    ❑ कालामुख संप्रदाय के अनुयायियों को शिव पुराण में महाव्रतधर कहा गया है। इस संप्रदाय के लोग नर-कपाल में ही भोजन, जल तथा सुरापान करते हैं और साथ ही अपने शरीर पर चिता की भस्म मलते हैं।

    ❑ दक्षिण भारत में शैवधर्म चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव एवं चोलों के समय लोकप्रिय रहा।

    ❑ कुषाण शासकों की मुद्राओं पर शिव एवं नन्दी का एक साथ अंकन प्राप्त होता है।

    ❑ तमिल शैवमत की शिक्षाओं को प्रथम बार व्यवस्थित करने वाला मेयकान्तर था।

  • मौर्य साम्राज्य (322-185 ई.पू.) | Q&A Practice

    ➣ अपने गुरू चाणक्य की सहायता से अंतिम नंद शासक घनानंद को पराजित मगध पर मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने की थी ?
    उत्तर : चंद्रगुप्त मौर्य ( 25 वर्ष की आयु में )

    ➣ अशोक के अभिलेखों के अतिरिक्त किस शक महाक्षत्रप का जूनागढ़ (गिरनार) लेख मौर्य इतिहास के विषय में सूचनाएं प्रदान करता है?
    उत्तर : रूद्रदामन

    ➣ ब्राह्मण ग्रंथ चंद्रगुप्त मौर्य को किस कुल से संबंधित बताते हैं?
    उत्तर : शूद्र अथवा निम्न कुल से

    ➣ बौद्ध ग्रन्थ चंद्रगुप्त मौर्य को क्या बताते हैं?
    उत्तर : क्षत्रिय

    ➣ मुद्राराक्षस में चंद्रगुप्त को नंदराज का पुत्र माना गया है। इसमें उनको क्या कहा गया है?
    उत्तर : वृषल

    ➣ यूनानी लेखक चंद्रगुप्त मौर्य के लिए किस नाम का उल्लेख करते हैं?
    उत्तर : एंड्रोकोटस’ या ‘सैंड्रोकोटस’

    ➣ सैंड्रोकोटस’ से चंद्रगुप्त की पहचान किसने की है?
    उत्तर : विलियम जोन्स

    ➣ चंद्रगुप्त की सेना को ‘डाकुओं का गिरोह’ कौन कहता है?
    उत्तर : जस्टिन

    ➣ किस शासक ने व्यापक विजयों द्वारा प्रथम अखिल भारतीय साम्राज्य की स्थापना की?
    उत्तर : चन्द्रगुप्त मौर्य

    ➣ किस यूनानी लेखक ने लिखा है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने छः लाख की सेना लेकर सम्पूर्ण भारत को रौंद डाला और उसपर अधिकार कर लिया?
    उत्तर : प्लूटार्क

    ➣ चंद्रगुप्त ने 305 ईसा पूर्व किस तत्कालीन यूनानी शासक को पराजित कर और उसके साथ संधि उससे कुछ क्षेत्रों के कुछ भाग ले लिये ?
    उत्तर : सेल्यूकस निकेटर

    ➣ सेल्युकस निकेटर ने अपनी किस पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त से करके उपर्युक्त चारों प्रांत दहेज के रूप में दिये ?
    उत्तर : लेडी हेलेना

    ➣ सेल्युकस निकेटर ने किसको अपने राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा ?
    उत्तर : मेगस्थनीज

    ➣ किस मौर्य शासक के शासन की दो मुख्य उपलब्धियां थीं?
    उत्तर : पहली, यूनानियों के विदेशी शासन से देश को मुक्त करना, तथा दूसरी, नंदों के घृणित एवं अत्याचारपूर्ण शासन की समाप्ति

    ➣ चाणक्य को इतिहासमें अन्य किन दो नामों से जाना जाता है?
    उत्तर : विष्णुगुप्त तथा कौटिल्य

    ➣ चाणक्य ने किस कृति की रचना की, जो तत्कालीन राजनीति, अर्थनीति, इतिहास, आचरणशास्त्र, धर्म आदि पर भली-भांति प्रकाश डालते हैं?
    उत्तर : ‘अर्थशास्त्र’

    ➣ मेगस्थनीज ने जो कुछ भारत में देखा, उसका वर्णन अपनी किस पुस्तक में किया है ?
    उत्तर : इंडिका

    ➣ मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक इंडिका में किसके शासनकाल का वर्णन किया है ?
    उत्तर : चंद्रगुप्त मौर्य

    ➣ किसने मेगस्थनीज कं वृतान्त को पूर्णतया असत्य एवं अविश्वसनीय कहा है?
    उत्तर : स्ट्रेम्बो

    ➣ चंद्रगुप्त मौर्य की दक्षिण भारत की विजय के विषय में जानकारी अशोक के अभिलेखों के अलावा किन तमिल ग्रंथों से मिलती है?
    उत्तर : अहनानूर’ एवं ‘पुरनानूर’

    ➣ किस अभिलेख से बंगाल पर चंद्रगुप्त की विजय के बारे में पता चलता है?
    उत्तर : महास्थान

    ➣ किसने भारतीय समाज में सात वर्ग- दार्शनिक, कृषक, शिकारी और पशुपालक, व्यापारी और शिल्पी, योद्धा, निरीक्षण तथा मंत्री होने की बात कही थी ?
    उत्तर : मेगस्थनीज

    ➣ मेगस्थनीज के अनुसार भारत के लोग यूनानी देवता डायोनिसियस तथा हेराक्लीज की पूजा करते थे। इन दोनों यूनानी देवताओं की साम्यता किस हिन्दू देवों से पायी जाती है?
    उत्तर : क्रमश: शिव तथा कृष्ण

    ➣ मौर्य शासनकाल के दौरान केन्द्रीय न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय कहां स्थित था?
    उत्तर : पाटलिपुत्र

    ➣ चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने अंतिम समय में सिंहासन छोड़ने के पश्चात किस जैनमुनि से जैन धर्म की दीक्षा ली?
    उत्तर : भद्रबाहु

    ➣ चंद्रगुप्त मौर्य ने 298 ई.पू. में उपवास द्वारा समाधिस्थ होकर किस स्थान पर शरीर त्याग दिया?
    उत्तर : श्रवणबेलगोला ( मैसूर)

    ➣ जैन लेखों के अनुसार, चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के अंत में मगध को कितने वर्षों तक भीषण अकाल झेलना पड़ा?
    उत्तर : 12 वर्षों तक

    ➣ मालवा, गुजरात एवं महाराष्ट्र किस शासक ने पहली बार जीता?
    उत्तर : चंद्रगुप्त मौर्य

    ➣ दीदारगंज यक्षिणी किस काल की हैं?
    उत्तर : मौर्य काल

    ➣ किस मौर्य राजा ने दक्कन की विजय प्राप्त की थी ?
    उत्तर : चंद्रगुप्त मौर्य ने

    ➣ पाटलिपुत्र में स्थित चंद्रगुप्त मौर्य का महल मुख्यतः किससे बना था?
    उत्तर : पत्थर से

    बिंदुसार

    ➣ चंद्रगुप्त मौर्य ने 24 वर्षो तक शासन करने के बाद अपने किस पुत्र को सिंहासन पर बैठाया?
    उत्तर : बिंदुसार

    ➣ जैन परंपराओं में बिंदुसार की माता का नाम क्या मिलता है?
    उत्तर : दुर्धरा

    ➣ थेरवादी परंपरा के अनुसार बिंदुसार किस धर्म का अनुयायी था?
    उत्तर : ब्राह्मण धर्म

    ➣ यूनानी लेखकों ने बिंदुसार को ‘अमित्रोकेडीज’ या ‘अमित्रकट’ (शत्रुओं को नष्ट करने वाला ) कहा है। इसका संस्कृत रूपान्तर क्या होता है?
    उत्तर : अमित्रघात

    ➣ तिब्बती लामा तारानाथ और जैन अनुश्रुति के मुताबिक बिंदुसार का मंत्री कौन था?
    उत्तर : चाणक्य

    ➣ चाणक्य के बाद महामंत्री कौन बने?
    उत्तर : खल्लाटक और राधागुप्त

    ➣ सेल्यूकस के उत्तराधिकारी एंटियोकस प्रथम ने किसको अपना राजदूत बनाकर बिंदुसार के दरबार में भेजा ?
    उत्तर : डायमेकस

    ➣ ऐथेनियस के मुताबिक बिंदुसार ने किसी सीरियाई शासक को एक यूनानी दार्शनिक भेजने के लिए आग्रह किया था?
    उत्तर : एंटियोकस

    ➣ बिंदुसार के शासन के दौरान अशांति कहां पर थी ?
    उत्तर : तक्षशिला में

    ➣ तक्षशिला में हुए विद्रोह को सफलतापूर्वक दबाने के लिए बिंदुसार ने किसको भेजा था?
    उत्तर : अशोक

    सम्राट अशोक

    ➣ बिंदुसार की मृत्यु के उपरोत मगंध का सम्राट कौन बना?
    उत्तर : सम्राट अशोक

    ➣ सम्राट अशोक का नाम अशोक किस शिलालेख में मिलता है?
    उत्तर : लघु शिलालेख, मास्की (गुजरों में भी )

    ➣ किस ग्रथ के अनुसार, अशोक ने अपने निन्यानबे भाइयों को मारकर सत्ता पर अधिकार किया। उसका केवल एक भाई ही (तिस्स) जीवित रहा?
    उत्तर : श्रीलंकाई ग्रंथ ‘दीपवंश’ तथा ‘महावंश’

    ➣ महावंश’ के मुताबिक, अशोक के राज्यारोहण और राज्याभिषेक में लगभग 4 वर्ष का अन्तर था, जो कब से कब तक चला?
    उत्तर : 274 ई.पू. से 270 ई.पू. तक

    ➣ अशोक को उसके पिता ने 18 वर्ष की आयु में अवंती राष्ट्र का शासक नियुक्त किया था। उसकी राजधानी कहां थी ?
    उत्तर : उज्जयिनी

    ➣ अपने प्रारम्भिक जीवन में अशोक किन क्षेत्रो का प्रांतपति था?
    उत्तर : तक्षशिला एवं उज्जयिनी

    ➣ सिंहासनारोहण के समय अशोक किस क्षेत्र का प्रांतपति था?
    उत्तर : उज्जयिनी

    ➣ भब्रू अभिलेख में अशोक को किस नाम से मगध नरेश कहा है?
    उत्तर : प्रियदर्शी

    ➣ अपने अभिलेखों में अशोक सामान्यतः किन दो उपाधियों का प्रयोग करता था ?
    उत्तर : देवानामप्रिय और पियदस्सि।

    ➣ सबसे पहले दिल्ली में अशोक के स्तम्भ का पता किसने लगाया?
    उत्तर : 1750 में टीफेन्थैलर ने

    ➣ अशोक के अभिलेखों को सबसे पहले किसने और कब पढ़ा?
    उत्तर : जेम्स प्रिंसेप ने 1837 ई. में

    ➣ 1837 में किसने ब्राह्मी लिपि में लिखी देवनामपिय प्रियदस्सी (देवताओं का प्रिय) से अशोक का समीकरण स्थापित किया है?
    उत्तर : जेम्स प्रिंसेप

    ➣ अशोक के सभी शिलालेख, लघुशिलालेख, स्तम्भलेख एवं लघुस्तम्भ लेख किस लिपि में उत्कीर्ण हैं?
    उत्तर : ब्राह्मी लिपि

    ➣ अशोक के किस अभिलेख से अन्न भंडार के विषय में जानकारी मिलती है?
    उत्तर : सोहगौरा एवं महास्थान

    ➣ अशोक के सभी अभिलेखों का विषय प्रशासनिक था, जबकि रुम्मिन देई अभिलेख का विषय क्या था?
    उत्तर : आर्थिक

    ➣ सातवें स्तम्भ लेख में उल्लिखित अशोक द्वारा जनता को दिया गया धर्म संदेश क्या कहलाता था?
    उत्तर : धर्म श्रवण

    ➣ अशोक ऐसा प्रथम शासक था, जिसने अभिलेखों के माध्यम से अपनी प्रजा को सम्बोधित किया। उसको इसकी प्रेरणा किस ईरानी शासक से मिली थी ?
    उत्तर : द्वारा प्रथम (डेरियस)

    ➣ तृतीय बौद्ध संगीति के अध्यक्ष मोग्गलिपुत्त तिस्स के प्रभाव से अशोक पूर्णत: बौद्ध हो गया। 250 ई.पू. पाटिलपुत्र में हुई इस संगीति का अशोक के किस अभिलेख जिक्र किया गया है?
    उत्तर : किसी में भी नहीं

    ➣ अशोकावदानमाला के अनुसार, अशोक की माता का क्या नाम था ?
    उत्तर : सुभद्रागी

    ➣ अशोक की तीन रानियां से कारुवाकी का उल्लेख किस स्तंभ में हुआ है?
    उत्तर : इलाहाबाद स्तंभ

    ➣ कौशाम्बी तथा प्रयाग के स्तम्भों में अशोक की रानी कारुवाकी द्वारा दान दिये जाने का उल्लेख है। इन अभिलेखों को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
    उत्तर : रानी का अभिलेख

    ➣ राजकुमार ‘तीवर’ अभिलेखों में वर्णित एकमात्र पुत्र हैं। उनकी माता कौन थीं?
    उत्तर : कारुवाकी

    ➣ टॉमस का कथन है है कि प्रारंभ में अशोक जैन धर्म का अनुयायी के किस वर्ष में उसने बौद्ध धर्म अपनाया?
    उत्तर : अपने अभिषेक 9वें वर्ष

    ➣ दीपवंश’, ‘महावंश’ और ‘सामंत – पासादिका’ के अनुसार, अशोक को उसके शासनकाल के चौथे वर्ष में किस भिक्षु ने दीक्षित किया था?
    उत्तर : निग्रोथ नामक भिक्षु

    ➣ दिव्यावदन और चीनी यात्री ह्वेनसांग के मुताबिक अशोक को बौद्ध धर्म में दीक्षित करने का श्रेय किस भिक्षु को जाता है?
    उत्तर : उपगुप्त

    ➣ अशोक के जीवन की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कलिंग युद्ध थी। इसका वर्णन किस शिलालेख से प्राप्त होता है?
    उत्तर : 13वां शिलालेख

    ➣ किस अभिलेख से ज्ञात होता है कि कलिंग युद्ध के ढाई वर्ष बाद अशोक ने उपगुप्त के प्रभाव में आकर बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया?
    उत्तर : भब्रू अभिलेख

    ➣ कलिंग युद्ध किस वर्ष में हुआ था ?
    उत्तर : 261 ई.पू. में

    ➣ किस स्थान के निकट प्रसिद्ध कलिंग युद्ध लड़ा गया था ?
    उत्तर : धौली

    ➣ कलिंग राजा खारवेल किस वंश के महानतम शासक थे?
    उत्तर : महामेघवाहन वंश या चेदी वंश

    ➣ किस इतिहासकार के अनुसार, अशोक ने कलिंग को व्यापार व्यवसाय की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण समझकर इस पर आक्रमण किया ?
    उत्तर : प्लिनी

    ➣ दक्षिण भारत से होने वाले व्यापारिक मार्ग पर एकाधिकार करने के लिए कलिंग एक आवश्यक केन्द्र था। उस समय कलिंग किसके लिए प्रसिद्ध था ?
    उत्तर : हाथियों व हाथीदांत के लिए

    ➣ अशोक का कौन सा अभिलेख सिर्फ बौद्ध भिक्षुओं के लिए था, जनता के लिए नहीं?
    उत्तर : भन्नू अभिलेख

    ➣ वह एकमात्र स्तम्भ कौन-सा है, जिसमें अशोक ने स्वयं को मगध का सम्राट बताया है?
    उत्तर : भब्रू अभिलेख

    ➣ किस बौद्ध संगीति के बाद अशोक ने विभिन्न देशों में धर्म प्रचारक भेजे एवं विश्व शांति की परिकल्पना करते हुए विश्व में धम्म विजय की नीति अपनायी ?
    उत्तर : तृतीय

    ➣ पहली बार किसने बिहार के बोधगया में महाबोधि मंदिर का निर्माण करवाया था ?
    उत्तर : अशोक ने

    ➣ कल्हण की राजतरंगिणी के अनुसार, कश्मीर मौर्य साम्राज्य का अंग था। कश्मीर में अशोक ने किस नगर की स्थापना की?
    उत्तर : श्रीनगर

    ➣ कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ के मुताबिक, कश्मीर में अशोक का उत्तराधिकारी जालौक हुआ। वह किस धर्म का उपासक था ?
    उत्तर : शैव

    ➣ अशोक ने अपने प्रथम लघु शिलालेख (रूपनाथ) में स्वयं को क्या संबोधित किया है?
    उत्तर : बुद्ध शाक्य

    ➣ अपने सिंहासनारोहण के 12वें वर्ष अशोक ने ‘निगाली सागर’ की धर्म यात्रा की। वहां उसने किस मुनि के स्तूप का विस्तार किया ?
    उत्तर : कनक मुनि

    ➣ अशोक ने धम्म के प्रचार के लिए 13वें वर्ष में किस नये अधिकारी की नियुक्ति की?
    उत्तर : धम्म महामात्र

    ➣ अशोक ने अपने अधिकारियों को कितने वर्ष के अंतराल पर धम्म यात्रा के लिए निकलने का आदेश जारी किया ?
    उत्तर : प्रति पांचवें वर्ष

    ➣ अशोक ने युद्ध के पूर्व होने वाले भेरीघोष की जगह किसकी घोषणा की?
    उत्तर : धम्मघोष की

    ➣ अशोक का अनुकरण करते हुए श्रीलंका के किस शासक ने ‘देवानामप्रिय’ की उपाधि ग्रहण की ?
    उत्तर : तिस्स ने

    ➣ अशोक ने किसको श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा था ?
    उत्तर : महेन्द्र (पुत्र) एवं संघमित्रा ( पुत्री)

    ➣ धर्म प्रचारक मंडल में ‘धम्मरक्षित’ एवं ‘महारक्षित’ कौन होते थे?
    उत्तर : यवनजातीय

    ➣ अशोक ने लुम्बिनी की तीर्थयात्रा के दौरान वहां भू-राजस्व की दर घटाकर कितनी कर दी थी?
    उत्तर : 1/8

    ➣ अशोक के काल में किस धार्मिक कर को समाप्त कर दिया?
    उत्तर : बलि (तीर्थयात्रा कर)

    ➣ अशोक की किस पुत्री का विवाह नेपाल के किस क्षत्रिय देवपाल से हुआ था?
    उत्तर : चारुमति

    ➣ अशोक ने अपने शासन के 12वें वर्ष में बराबर की पहाड़ियों में स्थित एक गुफा किस सम्प्रदाय को दान में दी थी ?
    उत्तर : आजीवक सम्प्रदाय

    उत्तराधिकारी

    ➣ अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य कितने भागों में विभाजित हो गया?
    उत्तर : पश्चिमी और पूर्वी

    ➣ पश्चिमी भाग पर कुणाल (अशोक का पुत्र) का शासन था। पूर्वी भाग पर किसका शासन था, जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी ?
    उत्तर : दशरथ (अशोक का पौत्र)

    ➣ कुणाल को दिव्यावदान में क्या कहा गया है ?
    उत्तर : धर्मनिवर्धन

    ➣ कुणाल के अंधा होने के कारण मगध का प्रशासन उसके किस पुत्र के हाथ में था?
    उत्तर : सम्प्रति

    ➣ अशोक के पौत्रों में से किसने अशोक के समान ही ‘देवानामप्रिय’ की उपाधि ग्रहण की थी?
    उत्तर : दशरथ

    ➣ दशरथ ने नागार्जुनी पहाड़ी में कौन-सी दो गुफाएं आजीवकों को दान में दी थीं?
    उत्तर : लोमश ऋषि की गुफा एवं गोपिका गुफा

    ➣ दशरथ ने किस गुफा को अपने अभिषेक वर्ष में बनवाया था ?
    उत्तर : गोपिका गुफा

    ➣ दशरथ के पश्चात कौन मौर्य साम्राज्य का शासक हुआ, जिसका वर्णन मत्स्य पुराण, बौद्ध एवं जैन साहित्य में कुणाल के पुत्र के रूप में किया गया है?
    उत्तर : सम्प्रति

    ➣ सम्प्रति के समय दो राजधानियां कौन-कौन सी थीं?
    उत्तर : पाटलिपुत्र (प्रथम) तथा उज्जयिनी (द्वितीय)

    ➣ सम्प्रति ने जैन तीर्थंकरों के हजारों मंदिरों का निर्माण कराया। उसने किसके प्रभाव में आकर जैन धर्म स्वीकार किया?
    उत्तर : सुहास्तिन मुनि

    ➣ किस मौर्य शासक ने चंद्रगुप्त मौर्य की तरह एक जैनी की भांति श्रवणबेलगोला में सल्लेखन करते हुए प्राण त्यागे थे ?
    उत्तर : सम्प्रति

    ➣ सम्प्रति के बाद कौन मौर्य शासक बना, जिसने 12 वर्षों तक शासन किया ?
    उत्तर : शालिशुक

    ➣ किस मौर्य शासक को ‘गार्गी संहिता’ में अधार्मिक, धूर्त एवं झगड़ालू तथा यज्ञों का अनुष्ठान रोकने वाला कहा गया है?
    उत्तर : शालिशुक

    ➣ पुराणों के अनुसार, अंतिम मौर्य शासक की हत्या किसने की थी?
    उत्तर : सेनापति पुष्यमित्र शुंग

    ➣ अंतिम मौर्य सम्राट का क्या नाम था ?
    उत्तर : वृहद्रथ

    ➣ अशोक ने अपने सभी अभिलेखों में एकरूपता से किस प्राकृत भाषा का प्रयोग किया है?
    उत्तर : मागधी

    ➣ अशोक ने समूचे भारत और सीलोन (वर्तमान श्रीलंका) में बौद्ध धर्म का प्रसार किस प्रकार किया?
    उत्तर : धर्म महामात्रों को भेजकर

    ➣ धम्म की शिक्षा देने के लिए अशोक ने किन पदाधिकारियों की नियुक्ति की थी?
    उत्तर : धम्म महामत्त

    मौर्यकालीन समाज

    ➣ अर्थशास्त्र के मुताबिक वर्णाश्रम व्यवस्था के तहत किन वर्गों के लोगों को सेना में भर्ती करने का उल्लेख मिलता है?
    उत्तर : सभी चार वर्णों के लोगों को

    ➣ मौर्य काल में नास्तिक धर्मों की लोकप्रियता में वृद्धि हुई, जिसकी ब्राह्मण धर्म में कठोर प्रतिक्रिया हुई। परिणामस्वरूप सामाजिक वातावरण तनावपूर्ण था। इस तनाव को अशोक ने किससे भरने की कोशिश की ?
    उत्तर : धम्म से

    ➣ मौर्य समाज में शिक्षा एवं संस्कृति के संरक्षक कौन थे, जिन्हें कर से मुक्त रखा जाता था ?
    उत्तर : ब्राह्मण

    ➣ ब्राह्मण’ अपराध करने पर उन्हें यातना के बजाय क्या किया जाता था?
    उत्तर : माथे पर एक चिह्न दागना

    ➣ मौर्य काल में कृषकों को संख्या सर्वाधिक थी। संख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर कौन थे?
    उत्तर : क्षत्रिय या योद्धा वर्ग

    ➣ ब्राह्मण साहित्य में स्त्रियों को दूसरे दर्जे का नागरिक समझा जाता था। क्या बौद्ध एवं

    ➣ जैन धर्म में स्त्रियों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता था ?
    उत्तर : नहीं

    ➣ मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तकों में बहुपत्नी प्रथा, विधवा पुनर्विवाह एवं विवाह विच्छेद (तलाक) का उल्लेख किया है। मेगस्थनीज के अनुसार क्या भारत में दास प्रथा थी ?
    उत्तर : नहीं

    ➣ दो समुद्रों के बीच भूमि जीतने के लिए ‘चक्रवर्ती’ शब्द का प्रयोग किसने किया?
    उत्तर : कौटिल्य

    राज-प्रशासन

    ➣ मौर्य प्रशासन की जानकारी कौटिल्य (चाणक्य या विष्णुगुप्त) के ‘अर्थशास्त्र’ के अतिरिक्त किससे प्राप्त होती है?
    उत्तर : ‘इंडिका’ (मेगस्थनीज)

    ➣ मौर्य प्रशासन में सभी प्रकार की सत्ता का स्रोत एवं उसका केन्द्र बिन्दु कौन होता था?
    उत्तर : सम्राट (राजा)

    ➣ अशोक ने अपने किस शिलालेख में कहा है कि ‘सभी मनुष्य मेरी संतान हैं ?
    उत्तर : पांचवें वृहत शिलालेख में

    ➣ अशोक ने मौर्यकालीन केन्द्रीकृत शासन व्यवस्था को किस शासन व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया ?
    उत्तर : पितृवत निरंकुश राजतंत्र

    ➣ सम्राट अपने शासन कार्यों में अमात्यों मंत्रियों तथा अधिकारियों से सहायता प्राप्त करता था। अर्थशास्त्र के अनुसार, किसका स्थान सम्राट के बाद दूसरा था ?
    उत्तर : अमात्य

    ➣ अर्थशास्त्र के अनुसार, शासन की सुविधा के लिए अनेक प्रशासनिक विभाग बनाये गये थे, जिनकी संख्या 18 थी। इनको क्या कहा जाता था ?
    उत्तर : तीर्थ

    ➣ चंद्रगुप्त मौर्य एवं बिंदुसार के समय में कुछ काल तक प्रधानमंत्री तथा प्रमुख धर्माधिकारी के दोनों पद किसके पास थे?
    उत्तर : कौटिल्य (चाणक्य )

    अर्थव्यवस्था

    ➣ मौर्य शासन में गुप्तचर विभागका संचालन ‘गूढ़पुरुष’ (जासूस) करते थे। ये गूढ़पुरुष किसके नियंत्रण में कार्य सम्पन्न करते थे?
    उत्तर : महामात्यपसर्प

    ➣ मौर्यकाल में किसने गुप्तचरों को ‘इंस्पेक्टर’ नाम दिया है?
    उत्तर : स्ट्रेबो

    ➣ गुप्तचर विभाग में नियुक्ति किस परीक्षा के माध्यम से होती थी?
    उत्तर : उपधा परीक्षण

    ➣ मौर्य शासन के दौरान शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए पुलिस होती थी। इन्हें क्या कहा जाता था?
    उत्तर : रक्षिन

    ➣ सैन्य विभाग का प्रधान सेनापति’ होता था। युद्ध क्षेत्र में सेना का संचालन करने वाला पदाधिकारी क्या कहलाता था?
    उत्तर : नायक

    ➣ किसने सैन्य प्रशासन के लिए 30 सदस्यों वाली एक समिति का वर्णन किया है, जो 5-5 सदस्यों की 6 उपसमितियों में विभाजित थीं?
    उत्तर : मेगस्थनीज

    ➣ मौर्य काल में सैनिकों को नकद वेतन मिलता था। सेनापति का वार्षिक वेतन कितना था?
    उत्तर : 48 हजार पण

    ➣ कौटिल्य के अर्थशास्त्र में ‘नवाध्यक्ष’ के उल्लेख से मौर्यों के पास किस प्रकार की सेना होने का प्रमाण मिलता है?
    उत्तर : नौसेना

    ➣ कुणाल कहां का राज्यपाल था?
    उत्तर : तक्षशिला

    ➣ रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार, सौराष्ट्र ( काठियावाड़) का राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य था। उसने सिंचाई के लिए किस झील का निर्माण करवाया था ?
    उत्तर : सुदर्शन झील

    ➣ अशोक के समय में सौराष्ट्र (काठियावाड़) के किस प्रांतपति ने सुदर्शन झील से पानी के निकास के लिए नहरें बनवायी थीं?
    उत्तर : तुषास्प ( यवन)

    ➣ मौर्य काल में जिले या स्थानीय के प्रशासक को क्या कहा जाता था?
    उत्तर : स्थानिक

    ➣ मौर्य काल में’ कौन भूमि के सर्वेक्षण एवं भू-राजस्व का निर्धारण करने के लिए उत्तरदायी होता था?
    उत्तर : रज्जुक

    ➣ युक्त’ नामक अधिकारी किस प्रकार का कार्य करता था ?
    उत्तर : सचिवालयी कार्य एवं लेखा व्यवस्था

    ➣ ग्राम स्तर तथा जनपद स्तर के बीच में प्रशासन का एक माध्यमिक स्तर भी था। यह 5 या 10 गांवों के समूह की एक इकाई होता था, इनके अधिकारी क्या कहलाते थे?
    उत्तर : गोप और स्थानिक

    ➣ गोप कौन-सा एक अन्य पद भी धारण करता था?
    उत्तर : जनगणना पदाधिकारी

    ➣ राजस्व वसूली का मुख्य अधिकारी क्या कहलाता था?
    उत्तर : ‘समाहर्ता’

    ➣ राजकोष के प्रधान अधिकारी को क्या कहा जाता था?
    उत्तर : सन्निधाता

    ➣ भूमि कर क्या कहलाता था?
    उत्तर : भाग

    ➣ भूमि कर कृषि उपज के कितने भाग तक होता था?
    उत्तर : 1/6 -1/4 भाग तक

    ➣ सिंचाई की सुविधाओं से युक्त भूमि पर उपज के कितने भाग तक अतिरिक्त भूमि कर लिया जाता था?
    उत्तर : 1/5 से 1/3 भाग तक

    ➣ अशोक के रुम्मिनदेई अभिलेख के अनुसार, लुंबिनी ग्राम ( बुद्ध का जन्म स्थल) से उत्पादन का कितना भाग कर के रूप में लिया जाता था?
    उत्तर : मात्र 8वां भाग

    ➣ अर्थशास्त्र के अनुसार, एक आपातकालीन कर भी लिया जाता था। इस क्या नाम था?
    उत्तर : प्रणय

    ➣ बगीचों से प्राप्त होने वाली आय को क्या जाता था?
    उत्तर : सेतु

    ➣ मौर्य काल में लिया जाने वाला कर ‘बलि’ किस प्रकार का कर था?
    उत्तर : धार्मिक कर

    ➣ मौर्य काल में किन तीन भाषाओं का प्रचलन था?
    उत्तर : संस्कृत, प्राकृत और पालि।

    ➣ अशोक ने किसको सम्पूर्ण साम्राज्य की राजभाषा बनाया और इसी भाषा में अपने अभिलेख उत्कीर्ण कराए ?
    उत्तर : पालि को

    ➣ मौर्य प्रशासन में सिक्कों की जांच करने वाले अधिकारी को क्या कहा जाता था?
    उत्तर : रूपदर्शक

    ➣ मौर्य साम्राज्य की राजकीय मुद्रा चांदी से निर्मित थी, जिसका भार 3/4 तोले के बराबर था। मौर्य काल की राजकीय मुद्रा को क्या कहा जाता था?
    उत्तर : पण

    ➣ मौर्य काल की अर्थव्यवस्था में किस शब्द का प्रयोग समुद्री मार्गों के लिए किया जाता था?
    उत्तर : संयानपथ

    ➣ ब्राह्मणों को राज्य की ओर से कर मुक्त भूमि दान में दी जाती थी। इसे क्या कहा जाता था?
    उत्तर : ब्रह्मदेय

    अन्य

    ➣ किस मौर्य शासक के समय में कश्मीर के श्रीनगर और नेपाल के ललितपाटन नामक नगरों का निर्माण हुआ?
    उत्तर : अशोक

    ➣ पत्थर पर शीशे की तरह चमकीली पॉलिश लगाने की कला मौर्य कलाकारों ने किससे सोखी थी ?
    उत्तर : हखामनियों से

    ➣ सांची का विशाल स्तूप किस के समय को निर्धारित करता है?
    उत्तर : मौर्यों के समय को

    ➣ मैक्यावेली के ‘द प्रिंस’ की तुलना किस भारतीय ग्रंथ से की जा सकती है?
    उत्तर : कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ से

    ➣ मौर्यकाल के लोक सेवकों को आम तौर पर क्या कहा जाता था ?
    उत्तर : अमात्य

    ➣ अशोक के अधीन मौर्य राजतंत्र का शासन कैसा था ?
    उत्तर : प्रबुद्ध स्वेच्छाचारी शासन

    ➣ अशोक के धर्मचक्र ( या धम्मचक्र) में कितनी तीलियां (ओर) अंकित हैं?
    उत्तर : 24

    ➣ विशाखदत्त ने अपने सुप्रसिद्ध नाटक ‘मुझराक्षस’ में किस मौर्य सम्राट का विशिष्ट रूप से वर्ण उपलब्ध है?
    उत्तर : चंद्रगुप्त मौर्य

    ➣ अशोक का समकालीन तुरमय कहां का राजा था?
    उत्तर : मिस्र

    ➣ पत्थर पर प्राचीनतम शिलालेख किस भाषा में थे?
    उत्तर : प्राकृत

  • मौर्य साम्राज्य | One-Liner Practice

    📚 विषय सूची

    चन्द्रगुप्त मौर्य (322 ई.पू. – 298 ई.पू.)

    ❑ चंद्रगुप्त मौर्य ने नंदवंश के अंतिम शासक धननंद (धनानंद) को हराकर मौर्य वंश की स्थापना 322 ई. पू. में की।

    ❑ सिकन्दर के लौट जाने और उसकी अकाल मृत्यु के कारण पंजाब में फैली अराजकता का चंद्रगुप्त ने लाभ उठाया और अपने सुयोग्य परामर्शदाता गुरु चाणक्य की मदद से वह पंजाब का सम्राट बन बैठा।

    ❑ तक्षशिला धनुर्विद्या तथा वैधक की शिक्षा के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध था। चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपनी सैनिक शिक्षा यहीं पर ग्रहण किया था।

    ❑ कोशल के राजा प्रसेनजित, मगध का राजवैद्य जीवक, सुप्रसिद्ध राजनीतिविद् चाणक्य, बौद्ध विद्वान वसुबन्धु आदि ने यहीं शिक्षा प्राप्त की थी।

    ❑ चाणक्य ने अर्थशास्त्र नामक पुस्तक लिखी जो मौर्य काल के इतिहास को जानने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत है।

    ❑ ब्राह्मण साहित्य चंद्रगुप्त मौर्य को शूद्र कुल का और जैन एवं बौद्ध साहित्य उसे क्षत्रिय कुल का मानते हैं।

    ❑ चन्द्रगुप्त मौर्य की संज्ञा का प्राचीनतम अभिलेखीय साक्ष्य रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख से मिलता है।

    ❑ जूनागढ़ अभिलेख ब्राह्मी लिपि में है।

    ❑ चन्द्रगुप्त मौर्य एवं सेल्यूकस के बीच युद्ध 305 ई.पू. में हुआ था। जिसमें सेल्यूकस पराजित हुआ। फलस्वरूप चन्द्रगुप्त मौर्य तथा सेल्यूकस के बीच सन्धि हुई तथा सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह चन्द्रगुप्त के साथ कर दिया। इस प्रकार चन्द्रगुप्त ने यूनानियों को भारत से बाहर निकाल दिया।

    ❑ सेल्यूकस ने अपने राजदूत मेगस्थनीज को चन्द्रगुप्त के दरबार में भेजा था। मेगस्थनीज ने इंडिका की रचना की थी।

    ❑ चन्द्रगुप्त ने सेल्यूकस को 500 हाथी उपहार में दिये थे। (प्लूटार्क के अनुसार)

    ❑ चन्द्रगुप्त को यूनानियों ने सैन्ड्रोकोटस कहा है।

    ❑ अपने जीवन के अंतिम समय में चन्द्रगुप्त ने जैन धर्म स्वीकार किया।

    ❑ सेल्यूकस ने चन्द्रगुप्त को एरिया (काबुल), अराकोसिया (कान्धार), ग्रेदेसिया (तरान) प्रान्त दिये थे।

    ❑ चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी हेलेना (कार्नेलिया) सेल्यूकस की पुत्री थी।

    ❑ चन्द्रगुप्त मौर्य के दक्षिण विजय की जानकारी तमिल ग्रंथ-अहनानूरू एवं पुरनानूरू से मिलती है।

    ❑ चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना के छः अंग थे – अश्व सेना, हस्तिसेना, पैदल, नौसेना, रथ सेना और सैन्य सहायता विभाग।

    ❑ विभागों के अध्यक्ष को अमात्य कहा जाता था।

    ❑ चन्द्रगुप्त का जैन गुरु भद्रबाहु था।

    ❑ चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु कर्नाटक के श्रवणबेलगोला स्थित चन्द्रागिरि पहाड़ी पर 298 ई.पू. में हुई थी।

    ❑ चन्द्रगुप्त मौर्य ने सल्लेखना विधि से (भूखे-प्यासे रहकर) शरीर का त्याग किया था।

    ❑ विलियम जोन्स पहले विद्वान थे जिन्होंने सैन्ड्रोकोट्टस की पहचान भारतीय ग्रंथों में चंद्रगुप्त से की है।

    ❑ प्लूटार्क के अनुसार चन्द्रगुप्त ने 6 लाख सेना लेकर समूचे भारत पर आधिपत्य स्थापित किया।

    ❑ चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने सुदर्शन नामक झील का निर्माण करवाया।

    ❑ विलियम जोन्स पहले विद्वान थे जिन्होंने सैन्ड्रोकोट्टस की पहचान भारतीय ग्रंथों में चंद्रगुप्त से की है।

    ❑ प्लूटार्क के अनुसार चन्द्रगुप्त ने 6 लाख सेना लेकर समूचे भारत पर आधिपत्य स्थापित किया।

    ❑ चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने सुदर्शन नामक झील का निर्माण करवाया।

    ❑ मेगस्थनीज के अनुसार भारत में दास प्रथा नहीं था।

    ❑ मेगस्थनीज भारतीय समाज को सात जातियों में विभक्त किया। सात जातियां- दार्शनिक, किसान, अहीर, कारीगर या शिल्पी, सैनिक, निरीक्षक, सभासद तथा अन्य शासक वर्ग।

    ❑ मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को पालिब्रोथा नाम दिया था।

    बिन्दुसार (298 ई.पू. – 272 ई.पू.)

    ❑ चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र बिन्दुसार, 298 ई.पू. में गद्दी पर बैठा।

    ❑ यूनानी लेखक बिन्दुसार को अमित्रोकेट्स या अमित्रघात के नाम से जानते थे।

    ❑ बिन्दुसार के समय तक्षशिला में विद्रोह हुआ था। तक्षशिला विद्रोह दबाने के लिये अशोक और सुसीम को भेजा गया था।

    ❑ बिन्दुसार के दरबार में यूनानी राजदूत डाइमेकस आया था।

    ❑ बिन्दुसार ने सीरिया के राजा एण्टियोकस से मदिरा, सूखे अंजीर एवं एक दार्शनिक मांगा था। एण्टियोकस ने दार्शनिक (यूनानी कानून में इसकी अनुमति नहीं थी) भेजने से मना कर दिया था।

    ❑ बिन्दुसार आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था।

    ❑ पिंगलवत्स नामक आजीवक विद्वान बिन्दुसार के दरबार में रहता था।

    ❑ अशोक के राजा बनने की भविष्यवाणी पिंगलवत्स ने की थी।

    ❑ बिन्दुसार की मृत्यु के समय अशोक उज्जैन में राज्यपाल था।

    ❑ बिन्दुसार ने दो समुद्रों के बीच की भूमि समेत 16 राज्यों को जीता था।

    ❑ आजीवक बनने से पूर्व बिन्दुसार ब्राह्मण धर्म को मानता था।

    ❑ तक्षशिला विद्रोह का मुख्य कारण अधिकारियों का दुर्व्यवहार था।

    ❑ चाणक्य या कौटिल्य के बचपन का नाम विष्णुगुप्त था। चाणक्य ने तीन मौर्य राजाओं के राज्य का संचालन किया।

    ❑ चाणक्य ने अर्थशास्त्र (राजनीतिक विज्ञान) की रचना की

    ❑ चाणक्य को भारत का मैकियावेली कहा जाता है।

    ❑ चाणक्य के पिता का नाम चणक था।

    अशोक (269 ई.पू. – 232 ई.पू.)

    ❑ मौर्य साम्राज्य का महानतम् शासक अशोक था। सिंहली अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने अपने 99 भाइयों की हत्या की थी।

    ❑ अभिलेखों में अशोक को देवानामप्रिय या देवानामप्रियदर्शी नाम से सम्बोधित किया गया है।

    ❑ पुराणों में अशोक को वर्द्धन नाम से जाना जाता है।

    ❑ अशोक ने कश्मीर में श्रीनगर बसाया था।

    ❑ कलिंग हाथियों के लिए प्रसिद्ध था

    ❑ अशोक के तेरहवें शिलालेख से ज्ञात होता है कि अशोक ने 261 ई.पू. में कलिंग विजय की थी। इस समय वहां का राजा नंदराज था।

    ❑ कलिंग की राजधानी तोसली थी।

    ❑ अशोक ने नेपाल में ललितपत्तन नगर बसाया।

    ❑ अशोक चक्र, धर्मचक्र का वर्णन करता है जिसमें 24 तिलियाँ हैं। इसे अशोक चक्र इसलिए कहते हैं क्योंकि लॉयन कैपिटल सारनाथ सहित सम्राट अशोक द्वारा जारी अशोक के फरमानों पर चक्र उत्कीर्ण किए गए हैं।

    ❑ कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने भेरी घोष त्याग कर धम्म घोष अपनाया।

    ❑ अशोक की कर नीति की जानकारी रुम्मिनदेई अभिलेख से मिलती है।

    ❑ बौद्ध धर्म अपनाने से पहले वह भगवान शिव की पूजा करता था।

    ❑ अशोक को उपगुप्त ने बौद्ध धर्म में दीक्षित किया।

    ❑ बाराबर पहाड़ी पर आजीवकों के लिये अशोक ने कर्ण, चोपार, सुदामा एवं विश्वझोपड़ी गुफाओं का निर्माण कराया।

    ❑ अशोक ने लुम्बिनी को धार्मिक करों से मुक्त कर दिया। क्योंकि यह बुद्ध की जन्मस्थली थी।

    ❑ अशोक की माता का नाम सुभद्रांगी था। सुभद्रांगी चंपा के एक ब्राह्मण की पुत्री थी।

    ❑ असंधिमित्रा एवं कारूवाकी अशोक की पत्नियाँ थी। कारूवाकी के पुत्र का नाम तीवर था।

    ❑ अशोक की एक अन्य पत्नी नागदेवी से उत्पन्न पुत्र-पुत्री महेन्द्र एवं संघमित्रा थे।

    ❑ अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिये पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।

    ❑ अशोक का उल्लेख मास्की, नेत्तूर, गुर्जरा एवं उदेगोलम अभिलेख में है।

    ❑ अशोक के अभिलेखों को 1837 ई. में जेम्स प्रिसेंप ने सर्वप्रथम पढ़ा।

    ❑ टोपरा और मेरठ के स्तम्भों को फिरोजशाह तुगलक ने दिल्ली मंगवाया।

    ❑ कौशाम्बी स्तम्भ को अकबर इलाहाबाद लाया था जिसे अशोक ने स्तंभलेख उत्कीर्ण करवाये थे।

    ❑ अशोक के अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गये हैं।

    ❑ दो वृहद् शिलालेख मानसेहरा और शाहबाजगढ़ी ‘खरोष्ठी लिपि’ में लिखे गए हैं।

    ❑ कंधार अभिलेख’ दो भाषाओं ग्रीक एवं आर्मेइक भाषा में लिखे गये हैं।

    ❑ अशोक के अभिलेखों में कंधार को छोड़कर शेष सभी प्राकृत भाषा में लिखे गये हैं।

    ❑ लैम्पाक में खंडित अवस्था में एक अभिलेख पाया गया है, जो आर्मेइक भाषा में है।

    ❑ इलाहाबाद स्तम्भ जो कौशाम्बी से लाया गया था, इस पर समुद्रगुप्त और जहाँगीर के भी अभिलेख हैं।

    ❑ वृहद् शिलालेखों की संख्या 14 है। स्तम्भ लेखों की कुल संख्या 13 है, जो दस स्तम्भों पर अंकित है।

    ❑ चार लघु स्तम्भ लेखों में से एक को रानी का लेख कहा जाता है, जो इलाहाबाद में है।

    ❑ सांची का स्तूप (विदिशा, मध्यप्रदेश), भरहुत का स्तंभ (सतना, मध्यप्रदेश) तथा सारनाथ स्थित धर्मराजिका स्तूप का निर्माण अशोक ने करवाया था। मौर्य वंश का राजकीय चिह्न मयूर (मोर) था।

    ❑ प्रधान शिलालेखों में सबसे बड़ा 13वां शिलालेख है। सातवां स्तम्भ लेख सभी लेखों में सबसे बड़ा है।

    ❑ अशोक के शिलालेख की खोज 1750 ई. में पाद्रेटी फेन्थैलर ने की थी।

    ❑ राज्याभिषेक से सम्बन्धित मास्की के लघु शिलालेख में अशोक ने स्वयं को बुद्ध शाक्य कहा है।

    ❑ भाब्रू अभिलेख अशोक का सबसे लम्बा स्तंभ लेख है।

    ❑ बौद्ध परंपरा अशोक को 84 हजार स्तूपों के निर्माण का श्रेय प्रदान करती है।

    ❑ अशोक का प्रधानमंत्री राधागुप्त था।

    ❑ फ्लीट अशोक के धम्म को राजधर्म मानते हैं।

    ❑ रोमिला थापर के अनुसार धम्म अशोक का अपना आविष्कार था।

    मौर्य प्रशासन

    ❑ सत्ता का केन्द्रीयकरण राजा में होते हुए भी वह निरंकुश नहीं होता था।

    ❑ कौटिल्य ने राज्य के सात अंग निर्दिष्ट किए हैं – राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, सेना और मित्र।

    ❑ राजा द्वारा मुख्यमंत्री एवं पुरोहित की नियुक्ति उनके चरित्र की भली-भाँति जाँच के बाद की जाती थी, इस क्रिया को उपधा परीक्षण कहा जाता था।

    ❑ अर्थशास्त्र में 18 विभागों का उल्लेख है, जिसे तीर्थ कहा गया है। तीर्थों के अध्यक्ष को महामात्र कहा गया है।

    ❑ प्रांतों का शासन राजवंशीय कुमार या आर्यपुत्र नामक पदाधिकारियों द्वारा होता था।

    ❑ विषय (जिला) विषयपति के अधीन होता था।

    ❑ जिले का प्रशासनिक अधिकारी स्थानिक था जो समाहर्ता के अधीन था।

    ❑ प्रशासन की सबसे छोटी इकाई गोप था, जो दस गाँवों का शासन संभालता था।

    ❑ समाहर्ता के अधीन प्रदेष्ट्रि नामक अधिकारी भी होता था, जो स्थानिक, गोप एवं ग्राम अधिकारियों के कार्यों की जाँच करता था।

    ❑ मेगस्थनीज के अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों का एक मंडल करता था, जो 6 समितियों में विभक्त था-

    ❑ प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे।
    ❑ प्रथम समिति – उद्योग शिल्पों का निरीक्षण
    ❑ द्वितीय समिति – विदेशियों की देख-रेख
    ❑ तृतीय समिति – जन्म-मरण का लेखा-जोखा
    ❑ चतुर्थ समिति – व्यापार/वाणिज्य
    ❑ पांचवीं समिति – निर्मित वस्तुओं के विक्रय का निरीक्षण
    ❑ छठी समिति -विक्रय मूल्य का दसवाँ भाग विक्रय कर के रूप में वसूलना।

    ❑ सैनिक प्रबंध की देख-रेख करने वाला तथा सीमांत क्षेत्रों का व्यवस्थापक अंतपाल होता था।

    ❑ मौर्यकाल में दो प्रकार के न्यायालय थे – (1) कण्टकशोधन (फौजदारी न्यायालय ), (2) धर्मस्थीय (दीवानी न्यायालय)।

    ❑ नगर न्यायाधीश को व्यावहारिक महामात्र तथा जनपद न्यायाधीश को राज्जुक कहते थे।

    ❑ चाणक्य के अनुसार कानून के चार मुख्य अंग थे-धर्म, व्यवहार, चरित्र और शासन।

    ❑ मौर्यकाल में दो प्रकार के गुप्तचर (गूढ़ पुरुष) थे- (1) संस्था ( एक जगह स्थिर होकर गुप्तचरी करते थे), (2) संचार (घूम-घूमकर गुप्तचरी करते थे)।

    ❑ स्त्री गुप्तचर भी थी जिन्हें वृषली, भिक्षुकी तथा परिव्राजक कहा जाता था।

    ❑ राज्य की अर्थ-व्यवस्था कृषि, पशुपालन और वाणिज्य पर आधारित थी, जिन्हें सम्मिलित रूप से वार्ता कहा गया है।

    ❑ अदेवमातृक (मुख्य कृषि भूमि) – ऐसी भूमि जिसमें बिना वर्षा के भी अच्छी खेती हो सके।

    ❑ मौर्यकाल में चाँदी की आहत मुद्रायें चलती थीं, जिन पर मयूर, पर्वत और अर्द्धचंद्र की मुहर अंकित होती थी।

    ❑ निजी खेती करने पर राजा को उपज का 1/6 भाग दिया जाता था।

    ❑ बलि एक प्रकार का भू-राजस्व कर था।

    ❑ हिरण्य कर अनाज के रूप में न होकर नकद लिया जाता था।

    ❑ राजकीय भूमि से होने वाली आय को सीता कही जाती थी।

    ❑ एग्रोनोमई मार्ग निर्माण के विशेष अधिकारी को कहा जाता था।

    ❑ दूरी मापने की इकाई को 10 स्टेडिया कहा जाता है।

    ❑ कौटिल्य के अनुसार दक्षिण से बहुमूल्य वस्तुयें-मुक्ता, मणि, हीरा, सोना, शंख इत्यादि आने के कारण, दक्षिण से व्यापार अधिक लाभदायक था।

    ❑ भारत का व्यापार रोम, फारस, सीरिया, मिस्र आदि देशों से होता था।

    ❑ पूर्वी तट पर ताम्रलिप्ति तथा पश्चिमी तट पर सोपारा एवं भड़ौच (भृगुकच्छ) प्रमुख बन्दरगाह थे।

    ❑ ब्याज को रूपिका एवं परीक्षण कहा जाता था।

    ❑ व्यापारियों के श्रेणी के प्रधान को सार्थवाह कहा जाता था।

    मौर्य साम्राज्य के पतन के कारण


    ❑ अशोक के दुर्बल अधिकारी
    ❑ उत्तराधिकारी के निश्चित नियम का अभाव
    ❑ ब्राह्मणों द्वारा विद्रोह
    ❑ राज्यपालों के अत्याचार
    ❑ आन्तरिक विद्रोह
    ❑ विशाल साम्राज्य
    ❑ गुप्तचर विभाग का अभाव
    ❑ विदेशी आक्रमण
    ❑ धन का अभाव
    ❑ सैनिक शक्ति का क्षीण होना

  • मौर्य साम्राज्य MCQ प्रश्न | UPSC

    1.चाणक्य अपने बचपन में किस नाम से जाने जाते थे?
    (a) अजय
    (b) चाणक्य
    (c) विष्णुगुप्त
    (d) देवगुप्त
    U.P.P.C.S. (Pre) 2006
    उत्तर-(c)
    चाणक्य का बचपन का नाम विष्णुगुप्त था। उनके पिता ऋषि चणक थे, जिनके नाम पर इन्हें ‘चाणक्य’ कहा गया। अर्थशास्त्र नामक ग्रंथ के रचनाकार के रूप में इन्हें ‘कौटिल्य’ भी कहा जाता है, जो संभवतः इनके गोत्र से संबंधित नाम है। इस प्रकार इनके तीन नाम प्रचलित हैं — विष्णुगुप्त (जन्म नाम), चाणक्य (पितृ-नाम) और कौटिल्य (गोत्र नाम)।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चाणक्य ने तक्षशिला विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी और वहीं वे अध्यापक भी रहे। उनका ‘अर्थशास्त्र’ ग्रंथ 15 अधिकरणों और 180 प्रकरणों में विभाजित है, जो राजनीति, अर्थव्यवस्था, सैन्य रणनीति और कूटनीति का विस्तृत विवेचन करता है।
    2.सैंड्रोकोट्स से चंद्रगुप्त मौर्य की पहचान किसने की?
    (a) विलियम जॉस
    (b) वी. स्मिथ
    (c) आर.के. मुखर्जी
    (d) डी.आर. भंडारकर
    48th to 52s B.P.S.C. (Pre) 2008
    उत्तर-(a)
    सर विलियम जोन्स (William Jones) वह पहले विद्वान थे जिन्होंने यूनानी स्रोतों में उल्लिखित ‘सैंड्रोकोट्स’ की पहचान चंद्रगुप्त मौर्य से की। यह पहचान भारतीय इतिहास की कालगणना (Chronology) की नींव बनी, जिसे ‘भारतीय इतिहास की आधारशिला’ कहा जाता है। एरियन और प्लूटार्क ने चंद्रगुप्त को ‘एंड्रोकोट्स’ लिखा है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस पहचान के आधार पर ही भारत के प्राचीन इतिहास को यूनानी इतिहास से जोड़कर एक निश्चित तिथि-क्रम स्थापित किया जा सका। चंद्रगुप्त मौर्य और सिकंदर की भेंट लगभग 326 ई.पू. में हुई मानी जाती है, जब सिकंदर पंजाब में था।
    3.प्रथम भारतीय साम्राज्य स्थापित किया गया था-
    (a) कनिष्क द्वारा
    (b) हर्ष द्वारा
    (c) चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा
    (d) समुद्रगुप्त द्वारा
    U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
    उत्तर-(c)
    चंद्रगुप्त मौर्य ने 321 ई.पू. में मौर्य साम्राज्य की स्थापना की, जो भारत का पहला विशाल केंद्रीकृत साम्राज्य था। उन्होंने चाणक्य की सहायता से नंद वंश को उखाड़ फेंका और पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया। उनका साम्राज्य पश्चिम में ईरान की सीमा से लेकर पूर्व में बंगाल तक और उत्तर में हिमालय से दक्षिण में मैसूर तक फैला था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंद्रगुप्त मौर्य ने जीवन के अंतिम वर्षों में जैन धर्म स्वीकार किया और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में जाकर संलेखना (उपवास द्वारा देह त्याग) की विधि से अपना जीवन समाप्त किया। उनके साम्राज्य का विस्तार लगभग 50 लाख वर्ग किलोमीटर था।
    4.चाणक्य का अन्य नाम था-
    (a) भट्टस्वामी
    (b) विष्णुगुप्त
    (c) राजशेखर
    (d) विशाखदत्त
    I.A.S. (Pre) 1993
    उत्तर-(b)
    चाणक्य इतिहास में तीन नामों से विख्यात हैं — चाणक्य, कौटिल्य और विष्णुगुप्त। ‘विष्णुगुप्त’ उनका वास्तविक व्यक्तिगत नाम था। ‘कौटिल्य’ उनके गोत्र से निकला नाम माना जाता है, जबकि ‘चाणक्य’ उनके पिता चणक के नाम पर पड़ा। अर्थशास्त्र में ग्रंथकार ने स्वयं को ‘कौटिल्य’ और ‘विष्णुगुप्त’ दोनों नामों से संबोधित किया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चाणक्य के ‘अर्थशास्त्र’ की पांडुलिपि को 1905 में मैसूर के पुस्तकालयाध्यक्ष आर. शामाशास्त्री ने खोजा और 1909 में इसका प्रकाशन किया। इससे पहले यह ग्रंथ लगभग एक हजार वर्षों से लुप्त माना जाता था।
    5.निम्न में से किसने ‘सैंड्रोकोट्स’ (चंद्रगुप्त मौर्य) और सिकंदर महान की भेंट का उल्लेख किया है?
    (a) प्लिनी
    (b) जस्टिन
    (c) स्ट्रैबो
    (d) मेगस्थनीज
    U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
    उत्तर-(b)
    रोमन इतिहासकार जस्टिन ने अपने ग्रंथ में ‘सेंद्राकोट्स’ (चंद्रगुप्त मौर्य) और सिकंदर महान की भेंट का उल्लेख किया है। जस्टिन के अनुसार, उस समय युवा चंद्रगुप्त ने सिकंदर को साम्राज्य विस्तार हेतु नंद राज्य पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास भी किया था। एरियन और प्लूटार्क ने भी चंद्रगुप्त का उल्लेख किया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था जो चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में पाटलिपुत्र आया था। उसने ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ की रचना की जो मौर्यकालीन भारत की शासन-व्यवस्था, समाज और भूगोल की महत्वपूर्ण जानकारी देता है, यद्यपि यह ग्रंथ अब केवल अंशों में उपलब्ध है।
    6.भारत में पहले साम्राज्य की स्थापना किस शासक के द्वारा की गई थी ?
    (a) चंद्रगुप्त मौर्य
    (b) अशोक
    (c) कनिष्क
    (d) चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य
    (e) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
    66th B.P.S.C. Re-Exam 2020
    उत्तर-(a)
    चंद्रगुप्त मौर्य ने 321 ई.पू. में भारत के पहले विशाल एकीकृत साम्राज्य की स्थापना की। इससे पूर्व भारत में अनेक छोटे-छोटे जनपद और महाजनपद थे, परंतु किसी एक केंद्रीय सत्ता के अधीन समस्त भारत को लाने का कार्य सर्वप्रथम चंद्रगुप्त मौर्य ने किया। उन्होंने सेल्यूकस को पराजित कर काबुल, हेरात, कंधार और बलूचिस्तान भी साम्राज्य में मिलाए।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस निकेटर के बीच 305 ई.पू. में संधि हुई, जिसके तहत सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त से किया और बदले में चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस को 500 हाथी उपहार में दिए।
    7.जिसके ग्रंथ में चंद्रगुप्त मौर्य का विशिष्ट रूप से वर्णन हुआ है.
    (a) भास
    (b) शूद्रक
    (c) विशाखदत्त
    (d) अश्वघोष
    46th B.P.S.C. (Pre) 2003
    उत्तर-(c)
    विशाखदत्त रचित संस्कृत नाटक ‘मुद्राराक्षस’ चंद्रगुप्त मौर्य के बारे में सर्वाधिक विस्तृत साहित्यिक जानकारी देता है। इस ग्रंथ में चंद्रगुप्त को ‘वृषल’ (कुलहीन) भी कहा गया है और नंद राजा के पुत्र के रूप में चित्रित किया गया है। नाटक मुख्यतः चाणक्य की कूटनीति और राक्षस (नंद वंश के मंत्री) को अपने पक्ष में करने की कहानी पर आधारित है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विशाखदत्त का एक अन्य प्रसिद्ध नाटक ‘देवीचंद्रगुप्त’ है जो चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) पर आधारित है। ‘मुद्राराक्षस’ में ‘मुद्रा’ का अर्थ है — राक्षस (मंत्री) की मुहर (अंगूठी), जो नाटक के कथानक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
    8.निम्नलिखित में कौन-सा सबसे पुराना राजवंश है ?
    (a) गुप्त
    (b) मौर्य
    (c) वर्धन
    (d) कुषाण
    Uttarakhand Lower Sub. (Pre) 2010
    उत्तर-(b)
    दिए गए चारों विकल्पों में मौर्य वंश (लगभग 321–184 ई.पू.) सबसे प्राचीन है। इसके बाद कुषाण वंश (लगभग प्रथम-तृतीय शताब्दी ई.), फिर गुप्त वंश (लगभग 275–550 ई.) और अंत में वर्धन वंश (लगभग 606–647 ई.) का शासन रहा। मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी और यह वंश अशोक के काल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचा।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था, जिसकी हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 184 ई.पू. में की और शुंग वंश की नींव रखी। मौर्य साम्राज्य के पतन का एक प्रमुख कारण अशोक के बाद कमजोर उत्तराधिकारियों का आना और साम्राज्य का विखंडन माना जाता है।
    9.यूनानी लेखक जस्टिन द्वारा किसे ‘सैंड्रोकोट्स’ कहा गया था?
    (a) चंद्रगुप्त मौर्य
    (b) चंद्रगुप्त प्रथम
    (c) चंद्रगुप्त द्वितीय
    (d) समुद्रगुप्त
    Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016
    उत्तर-(a)
    यूनानी-रोमन स्रोतों में चंद्रगुप्त मौर्य को विभिन्न नामों से पुकारा गया है — जस्टिन ने ‘सेंद्राकोट्स’, एरियन तथा प्लूटार्क ने ‘एंड्रोकोट्स’ लिखा है। इन सभी नामों की पहचान चंद्रगुप्त मौर्य से की जाती है। जस्टिन के अनुसार, चंद्रगुप्त साधारण कुल में उत्पन्न हुए थे परंतु अपनी प्रतिभा और पराक्रम से सम्राट बने।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘सैंड्रोकोट्स’ की पहचान भारतीय इतिहास का एक निर्णायक ‘Anchor Point’ है। इसी के आधार पर भारत का प्राचीन इतिहास यूनानी कालगणना से जोड़ा गया। सिकंदर के भारत अभियान की तिथि (326 ई.पू.) और चंद्रगुप्त के राज्यारोहण (321 ई.पू.) के बीच यह संबंध स्थापित करके भारतीय इतिहास की संपूर्ण कालरेखा निश्चित की गई।
    10. कौटिल्य प्रधानमंत्री थे-
    (a) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के
    (b) अशोक के
    (c) चंद्रगुप्त मौर्य के
    (d) राजा जनक के
    U.P.P.C.S. (Pre) 2002
    U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2002
    उत्तर-(c)
    कौटिल्य (चाणक्य / विष्णुगुप्त) चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री, महामंत्री एवं प्रधान पुरोहित तीनों पदों पर एक साथ आसीन थे। उन्होंने ही नंद वंश के विरुद्ध चंद्रगुप्त की सहायता करके मौर्य साम्राज्य की स्थापना संभव बनाई। उनका ‘अर्थशास्त्र’ राजनीति, कूटनीति और प्रशासन पर भारत में लिखा गया सबसे प्राचीन उपलब्ध ग्रंथ है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में ‘सप्तांग सिद्धांत’ का वर्णन है, जिसके अनुसार राज्य के सात अंग होते हैं — राजा, अमात्य (मंत्री), जनपद (भूमि), दुर्ग, कोश (खजाना), दण्ड (सेना) और मित्र। यह सिद्धांत भारतीय राजनीतिक चिंतन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
    11. कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में किस पहलू पर प्रकाश डाला गया है?
    (a) आर्थिक जीवन
    (b) राजनीतिक नीतियां
    (c) धार्मिक जीवन
    (d) सामाजिक जीवन
    45th B.P.S.C. (Pre) 2001
    उत्तर-(b)
    कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ एक राजनीति शास्त्र का अनुपम ग्रंथ है। इसमें मुख्य रूप से राजनीतिक नीतियों, शासन के सिद्धांतों और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया है। यह ग्रंथ एक ऐतिहासिक दस्तावेज न होकर राजनीतिशास्त्र का मानक ग्रंथ है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अर्थशास्त्र को 1904-05 में पंडित रुद्रपट्टणम शामाशास्त्री ने मैसूर के एक पुस्तकालय में पुनः खोजा था और 1909 में इसका प्रकाशन किया। इस ग्रंथ में 15 अधिकरण, 150 अध्याय और 6000 श्लोक हैं।
    12. बुलंदीबाग प्राचीन स्थान था –
    (a) कपिलवस्तु का
    (b) पाटलिपुत्र का
    (c) श्रावस्ती का
    (d) वाराणसी
    U.P.P.C.S. (Spl) (Mains) 2008
    उत्तर-(b)
    बुलंदीबाग पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) का एक प्राचीन स्थल है। यहाँ की गई खुदाई में मौर्यकालीन नगर परकोटे (नगर की रक्षा दीवार) के लकड़ी के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार पास के कुम्रहार स्थल से चंद्रगुप्त के राजप्रासाद के अवशेष मिले हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुलंदीबाग से प्राप्त लकड़ी की दीवार को ‘पलिसेड वाल’ (Palisade Wall) कहा जाता है। मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र की इस लकड़ी की दीवार का वर्णन अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में किया है — उन्होंने इस नगर की प्रशंसा करते हुए इसे तत्कालीन विश्व के सर्वश्रेष्ठ नगरों में गिना था।
    13. निम्नांकित में से किसकी तुलना मैक्यावेली के ‘प्रिंस’ से की जा सकती है?
    (a) कालिदास का मालविकाग्निमित्रम
    (b) कौटिल्य का अर्थशास्त्र
    (c) वात्स्यायन का कामसूत्र
    (d) तिरुवल्लुवर का तिरुक्कुरल
    U.P.P.C.S. (Pre) 1994
    उत्तर-(b)
    कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ की तुलना इटली के राजनीतिक विचारक मैक्यावेली की प्रसिद्ध कृति ‘द प्रिंस’ (The Prince, 1532) से की जाती है। दोनों ही ग्रंथ राजनीतिक यथार्थवाद पर आधारित हैं और दोनों में राज्य की सुरक्षा और शासक की सत्ता को नैतिकता से ऊपर रखा गया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कुछ इतिहासकार अर्थशास्त्र को मैक्यावेली के ‘द प्रिंस’ से भी अधिक व्यापक मानते हैं, क्योंकि इसमें कूटनीति के साथ-साथ कृषि, व्यापार, खनन और न्याय व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा है। कौटिल्य का काल (लगभग 350-275 ईसा पूर्व) मैक्यावेली से करीब 1800 वर्ष पहले का है।
    14. पाटलिपुत्र में स्थित चंद्रगुप्त का महल मुख्यतः बना था –
    (a) ईंटों का
    (b) पत्थर का
    (c) लकड़ी का
    (d) मिट्टी का
    41st B.P.S.C. (Pre) 1996
    उत्तर-(c)
    पुरातात्विक उत्खनन से प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार पाटलिपुत्र में स्थित चंद्रगुप्त मौर्य का राजप्रासाद मुख्यतः लकड़ी से निर्मित था। कुम्रहार स्थल पर डी.बी. स्पूनर के नेतृत्व में हुई खुदाई (1912-13) में इस लकड़ी के विशाल महल के अवशेष प्रकाश में आए।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कुम्रहार से प्राप्त 80 स्तंभों वाला विशाल सभागार (Audience Hall) पर्सेपोलिस के अचमेनिद स्थापत्य से प्रभावित माना जाता है। यूनानी दूत मेगस्थनीज ने इस महल की भव्यता का उल्लेख करते हुए लिखा है कि यह सूसा और एकबताना के फारसी महलों से भी अधिक शानदार था।
    15. कौटिल्य की पुस्तक अर्थशास्त्र किस विषय पर आधारित है?
    (a) आर्थिक संबंध
    (b) शासनकला के सिद्धांत और अभ्यास
    (c) विदेश नीति
    (d) धन संचय
    63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
    उत्तर-(b)
    कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित ‘अर्थशास्त्र’ शासनकला के सिद्धांतों और व्यवहार पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें सप्तांग सिद्धांत (राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दण्ड और मित्र) और मंडल सिद्धांत (विदेश नीति) जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएं प्रस्तुत की गई हैं। साथ ही प्रशासन, कृषि, व्यापार और शिल्प की विस्तृत जानकारी भी दी गई है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अर्थशास्त्र में जासूसी व्यवस्था (गुप्तचर तंत्र) का अत्यंत विस्तृत विवरण मिलता है — कौटिल्य ने महिला गुप्तचरों (विषकन्याओं) के उपयोग का भी उल्लेख किया है। इस ग्रंथ में ‘चतुरंग सेना’ (हाथी, घोड़ा, रथ और पैदल) के संगठन का भी वर्णन है।
    16. कौटिल्य का अर्थशास्त्र है, एक
    (a) चंद्रगुप्त मौर्य के संबंध में नाटक
    (b) आत्मकथा
    (c) चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास
    (d) शासन के सिद्धांतों की पुस्तक
    U.P. P.C.S. (Mains) 2012
    उत्तर-(d)
    कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ न तो कोई नाटक है, न आत्मकथा और न ही इतिहास — यह शासन के सिद्धांतों और राजनीति की एक सुव्यवस्थित पुस्तक है। इसमें राजा के कर्तव्यों, मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली, कर-व्यवस्था और युद्धनीति आदि का विस्तृत विवरण मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘अर्थशास्त्र’ संस्कृत में रचित है और इसे ‘नीतिशास्त्र’ की परंपरा का सर्वोच्च ग्रंथ माना जाता है। इसमें राजा के लिए दैनिक दिनचर्या (Time Management) का भी उल्लेख है — कौटिल्य के अनुसार राजा को दिन को 16 भागों में बांटकर राजकाज चलाना चाहिए।
    17. निम्नलिखित में से राज्य के सप्तांग सिद्धांत के अनुसार, राज्य का सातवां अंग कौन-सा था?
    (a) जनपद
    (b) दुर्ग
    (c) मित्र
    (d) कोश
    U.P.P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015
    उत्तर-(c)
    कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत में राज्य के सात अंग हैं — राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड और मित्र (सुहृद)। इनमें ‘मित्र’ सातवाँ और अंतिम अंग है। कौटिल्य के अनुसार मित्र राजा के लिए कान के समान हैं जो शांति और युद्ध दोनों में सहायक होते हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौटिल्य ने मित्रों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया है — ‘सहज मित्र’ (वंश-परंपरा से प्राप्त) और ‘कृत्रिम मित्र’ (स्वार्थ से जुड़े)। इनमें सहज मित्र अधिक विश्वसनीय माने जाते हैं। सप्तांग सिद्धांत के इन सात तत्वों को आधुनिक राजनीति विज्ञान में राज्य के आवश्यक तत्वों की पहली व्यवस्थित अवधारणा माना जाता है।
    18. किसके शासनकाल में डीमेकस भारत आया था?
    (a) चंद्रगुप्त मौर्य
    (b) बिंदुसार
    (c) अशोक
    (d) कनिष्क
    U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
    उत्तर-(b)
    डीमेकस (Deimachus) सीरिया के सेल्यूसिड राजा एंटियोकस प्रथम का राजदूत था जो मेगस्थनीज के बाद बिंदुसार की राजसभा में पाटलिपुत्र आया था। स्ट्रैबो ने अपने भूगोल ग्रंथ में इसका उल्लेख किया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बिंदुसार के दरबार में एक अन्य यूनानी राजदूत डायोनीसियस (Dionysius) भी आया था, जिसे मिस्र के राजा टॉलेमी द्वितीय फिलाडेल्फस ने भेजा था। बिंदुसार ने स्वयं सेल्यूकस के उत्तराधिकारी एंटियोकस से तीन वस्तुएं मंगाई थीं — मीठी शराब, अंजीर और एक दार्शनिक, जिस पर एंटियोकस ने मजाक करते हुए कहा कि दार्शनिक बेचे नहीं जाते।
    19. बिंदुसार के शासनकाल में अशोक ने अवंति महाजनपद जीतकर मौर्य साम्राज्य में मिला लिया था। इसका उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
    (a) बुद्ध घोष की समंत पासादिका
    (b) कौटिल्य का अर्थशास्त्र
    (c) पाणिनि की अष्टाध्यायी
    (d) पतंजलि का महाभाष्य
    M.P.P.C.S. (Pre) 2020
    उत्तर-(a)
    बुद्धघोष द्वारा रचित ‘समंत पासादिका’ (Samantapāsādikā) एक बौद्ध पालि ग्रंथ है जिसमें उल्लेख है कि बिंदुसार के शासनकाल में अशोक उज्जयिनी (अवंति) का उपराजा (वायसराय) था और उसने अवंति को मौर्य साम्राज्य में मिलाया। ‘दिव्यावदान’ से भी इसकी पुष्टि होती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अवंति महाजनपद को उज्जयिनी और माहिष्मती — दो भागों में बांटा जाता था। अशोक के उज्जयिनी में रहने के दौरान ही उसने विदिशा की एक व्यापारी पुत्री देवी (शाक्यकुमारी) से विवाह किया, जिससे उसके पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा का जन्म हुआ — ये दोनों बाद में बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु श्रीलंका गए।
    20. किस प्राचीन नगर के अवशेष कुम्रहार स्थल से प्राप्त हुए हैं?
    (a) वैशाली
    (b) पाटलिपुत्र
    (c) कपिलवस्तु
    (d) श्रावस्ती
    U.P.P.C.S. (Mains) 2011
    उत्तर-(b)
    कुम्रहार पटना (बिहार) में स्थित एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जहाँ से प्राचीन पाटलिपुत्र के राजप्रासाद के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहाँ D.B. स्पूनर (1912-13) और बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा उत्खनन किया गया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कुम्रहार से 80 पॉलिशदार बलुआ पत्थर के स्तंभों वाला एक विशाल सभा भवन मिला है जिसे ‘अशोक का सभा भवन’ या ‘मौर्यकालीन अष्टशाला’ कहते हैं। इन स्तंभों पर की गई ‘मौर्य पॉलिश’ अत्यंत चमकदार है — इस तकनीक का रहस्य आधुनिक विज्ञान अभी तक पूरी तरह सुलझा नहीं पाया है।
    21. किसने सहिष्णुता, उदारता और करुणा के त्रिविध आधार पर राजधर्म की स्थापना की?
    (a) अशोक
    (b) अकबर
    (c) रणजीत सिंह
    (d) शिवाजी
    U.P.P.C.S. (Pre) 1993
    उत्तर-(a)
    सम्राट अशोक ने ‘धम्म’ नामक एक विशेष नैतिक आचार संहिता का प्रतिपादन किया, जिसका मूल आधार सहिष्णुता, उदारता और करुणा था। यह किसी एक धर्म या संप्रदाय से बंधा हुआ नहीं था, बल्कि संपूर्ण मानवजाति के कल्याण के लिए था। अशोक ने इसे अपने शिलालेखों और स्तंभलेखों के माध्यम से साम्राज्य के कोने-कोने तक फैलाया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के ‘धम्म’ का प्रचार केवल भारत तक सीमित नहीं था — उन्होंने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु भेजा था। इसके अलावा अशोक ने ‘धम्म महामात्र’ नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जिनका कार्य धम्म के सिद्धांतों को जनसाधारण तक पहुँचाना था।
    22. सेल्यूकस, जिनको अलेक्जेंडर द्वारा सिंध एवं अफगानिस्तान का प्रशासक नियुक्त किया गया था, को किस भारतीय राजा ने हराया था?
    (a) समुद्रगुप्त
    (b) अशोक
    (c) बिंदुसार
    (d) चंद्रगुप्त
    M.P.P.C.S. (Pre) 2008
    उत्तर-(d)
    मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य ने 305 ई.पू. में सेल्यूकस निकेटर की आक्रमणकारी सेना को निर्णायक रूप से परास्त किया था। सेल्यूकस सिकंदर के साम्राज्य के पूर्वी भाग का उत्तराधिकारी था। इस पराजय के बाद सेल्यूकस को संधि करनी पड़ी, जिसके अंतर्गत उसने अरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया और पेरोपेमिसाडे जैसे क्षेत्र चंद्रगुप्त को सौंप दिए।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस संधि के तहत सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त मौर्य से किया था तथा मेगस्थनीज को अपना राजदूत मौर्य दरबार में भेजा था। मेगस्थनीज ने ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ में मौर्यकालीन प्रशासन और समाज का विस्तृत वर्णन किया है, जो उस काल का एक महत्वपूर्ण विदेशी साक्ष्य है।
    23. निम्न में से कौन-सा क्षेत्र अशोक के साम्राज्य में सम्मिलित नहीं था ?
    (a) अफगानिस्तान
    (b) बिहार
    (c) श्रीलंका
    (d) कलिंग
    42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
    उत्तर-(c)
    श्रीलंका (तत्कालीन ताम्रपर्णी) अशोक के साम्राज्य का भाग नहीं था। अशोक के द्वितीय शिलालेख में चोल, पाण्ड्य, सतियपुत्त, केरलपुत्त और ताम्रपर्णी को ‘प्रत्यंत राज्य’ अर्थात् सीमावर्ती स्वतंत्र राज्य कहा गया है। असम (प्राग्ज्योतिष) भी अशोक के साम्राज्य से बाहर था। शेष लगभग समस्त भारतीय उपमहाद्वीप उसके अधीन था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यद्यपि श्रीलंका अशोक के साम्राज्य में नहीं था, तथापि अशोक का श्रीलंका पर सांस्कृतिक प्रभाव गहरा था। उनके पुत्र महेंद्र ने वहाँ के राजा देवानांपिय तिस्स को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। साथ ही, अशोक के अभिलेख अफगानिस्तान (शाहबाजगढ़ी और मान्सेहरा) में भी पाए गए हैं, जो उनके साम्राज्य की पश्चिमी सीमा को प्रमाणित करते हैं।
    24. चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को किस वर्ष में पराजित किया था ?
    (a) 317 ई.पू.
    (b) 315 ई.पू.
    (c) 305 ई.पू.
    (d) 300 ई.पू.
    U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014
    उत्तर-(c)
    चंद्रगुप्त मौर्य ने 305 ई.पू. में सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया था। यह युद्ध उस समय हुआ जब सेल्यूकस ने सिकंदर के पूर्वी प्रदेशों को पुनः जीतने का प्रयास किया। चंद्रगुप्त की विजय इतनी निर्णायक थी कि सेल्यूकस को न केवल विशाल क्षेत्र देने पड़े, बल्कि संधि की शर्तों के रूप में वैवाहिक संबंध भी स्थापित करना पड़ा।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस संधि में चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को 500 हाथी उपहार में दिए थे, जिनका सेल्यूकस ने बाद में इप्सस के युद्ध (301 ई.पू.) में उपयोग किया। इन हाथियों ने उस युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई, जिसमें उसके प्रतिद्वंद्वी एंटिगोनस की पराजय हुई।
    25. निम्नलिखित में से किस मौर्य राजा ने दक्कन की विजय प्राप्त की थी ?
    (a) अशोक
    (b) चंद्रगुप्त
    (c) बिंदुसार
    (d) कुणाल
    46th B.P.S.C. (Pre) 2003
    उत्तर-(b)
    दक्षिण भारत की विजय का श्रेय मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य को दिया जाता है। जैन साहित्य और तमिल साक्ष्य दोनों इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। अशोक के कई अभिलेख दक्षिण भारत में पाए गए हैं, परंतु अशोक ने केवल कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) लड़ा था। बिंदुसार की विजयों के ऐतिहासिक प्रमाण अत्यंत अनिश्चित हैं, अतः दक्षिण विजय चंद्रगुप्त मौर्य की ही मानी जाती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जैन परंपरा के अनुसार, चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने अंतिम दिनों में जैन धर्म अपना लिया था और अपने गुरु भद्रबाहु के साथ कर्नाटक के श्रवणबेलगोला चले गए थे, जहाँ उन्होंने सल्लेखना (उपवास द्वारा मृत्यु) व्रत ग्रहण किया। यह स्थान आज भी जैन तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है।
    26. मालवा, गुजरात एवं महाराष्ट्र किस शासक ने पहली बार जीता ?
    (a) हर्ष
    (b) स्कंदगुप्त
    (c) विक्रमादित्य
    (d) चंद्रगुप्त मौर्य
    U.P.P.C.S. (Pre) 1991
    उत्तर-(d)
    चंद्रगुप्त मौर्य पहले ऐसे शासक थे जिन्होंने मालवा, गुजरात और महाराष्ट्र को अपने साम्राज्य में शामिल किया। उनके समय तक साम्राज्य का विस्तार पश्चिम में हिंदुकुश से पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक और उत्तर में हिमालय से दक्षिण में मैसूर तक था। रुद्रदामन के जूनागढ़ शिलालेख तथा जैन ग्रंथों से सौराष्ट्र और अवंति पर उनके अधिकार की पुष्टि होती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश को पराजित कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना लगभग 321 ई.पू. में की थी। उनके गुरु और प्रधानमंत्री चाणक्य (कौटिल्य) ने ‘अर्थशास्त्र’ नामक ग्रंथ लिखा, जो प्रशासन, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का अद्वितीय ग्रंथ है तथा आज भी राजनीतिशास्त्र में अत्यंत प्रासंगिक माना जाता है।
    27. अभिलेख, जिससे यह प्रमाणित होता है कि चंद्रगुप्त का प्रभाव पश्चिम भारत पर था, है-
    (a) कलिंग शिलालेख
    (b) अशोक का गिरनार शिलालेख
    (c) रुद्रदामन का जूनागढ़ शिलालेख
    (d) अशोक का सोपारा शिलालेख
    39th B.P.S.C. (Pre) 1994
    U.P.P.C.S. (Pre) 1996
    उत्तर-(c)
    लगभग 150 ई. में उत्कीर्ण रुद्रदामन के जूनागढ़ (गिरनार) शिलालेख में यह उल्लेख है कि आनर्त और सौराष्ट्र क्षेत्र में चंद्रगुप्त मौर्य के प्रांतीय राज्यपाल ‘पुष्यगुप्त वैश्य’ ने एक सिंचाई बाँध (सुदर्शन झील) का निर्माण करवाया था। इससे स्पष्ट होता है कि वर्तमान गुजरात का यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य का अंग था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यही जूनागढ़ शिलालेख यह भी बताता है कि अशोक के काल में उनके राज्यपाल तुषास्प ने उस सुदर्शन झील की मरम्मत करवाई थी, और बाद में रुद्रदामन ने भी उसका पुनरुद्धार किया। इस प्रकार यह एक ही अभिलेख मौर्य और शक दोनों युगों की जानकारी देता है — भारतीय इतिहास का यह एक अत्यंत दुर्लभ उदाहरण है।
    28. गुजरात चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य में सम्मिलित था, यह प्रमाणित
    (a) ग्रीक विवरणों से
    (b) रुद्रदामन के जूनागढ़ शिला अभिलेख से
    (c) जैन परंपरा से
    (d) अशोक के स्तंभलेख II से
    U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
    उत्तर-(b)
    गुजरात के मौर्य साम्राज्य में सम्मिलित होने का प्रमाण रुद्रदामन के जूनागढ़ शिला अभिलेख से मिलता है। इस अभिलेख में स्पष्ट उल्लेख है कि चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने सौराष्ट्र प्रदेश में सुदर्शन झील का निर्माण कराया था, जो यह सिद्ध करता है कि यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य के अधीन था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जूनागढ़ शिलालेख शक महाक्षत्रप रुद्रदामन प्रथम द्वारा संस्कृत भाषा में लिखवाया गया था और यह प्रशस्ति साहित्य के आरंभिक उदाहरणों में से एक है। यह अभिलेख इस दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है कि यह एकमात्र ऐसा अभिलेख है जो मौर्य, शुंग और शक — तीनों कालखंडों की जानकारी एक साथ देता है।
    29. उस मानचित्र में — जो किसी एक शासक के साम्राज्य की सबसे बड़ी सीमा दर्शाता है — निम्नलिखित में से क्या प्रदर्शित होगा?
    (a) कनिष्क से उसकी मृत्यु के समय
    (b) समुद्रगुप्त से, उसके दक्षिण भारत अभियान के उपरांत
    (c) अशोक से, उसके शासनकाल के अंतिम समय
    (d) हर्ष के राज्यारोहण के अवसर पर थानेश्वर के साम्राज्य से
    I.A.S. (Pre) 1998
    उत्तर-(c)
    अशोक के शासनकाल के अंतिम समय में उनका साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप में सर्वाधिक विस्तृत था। असम और सुदूर दक्षिण के कुछ राज्यों को छोड़कर संपूर्ण भारतवर्ष उनके साम्राज्य के अंतर्गत था। उनके शिलालेखों और स्तंभलेखों की व्यापक भौगोलिक उपस्थिति उनके साम्राज्य की विशालता की सटीक जानकारी देती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के अभिलेख भारत के अतिरिक्त अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी पाए गए हैं — शाहबाजगढ़ी, मान्सेहरा, कंधार आदि प्रमुख स्थल हैं। कंधार से अशोक का एक द्विभाषीय (ग्रीक-अरामाइक) अभिलेख मिला है, जो उनके साम्राज्य की बहुभाषीय और बहुसांस्कृतिक प्रकृति को दर्शाता है।
    30. अशोक के निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें दक्षिण भारतीय राज्यों का उल्लेख हुआ है?
    (a) तृतीय मुख्य शिलालेख
    (b) द्वितीय मुख्य शिलालेख
    (c) नवां मुख्य शिलालेख
    (d) प्रथम स्तंभ अभिलेख
    U.P.P.C.S (Mains) 2016
    उत्तर-(b)
    अशोक के द्वितीय मुख्य शिलालेख में दक्षिण भारतीय राज्यों — चोल, पाण्ड्य, सतियपुत्त, केरलपुत्त और ताम्रपर्णी (श्रीलंका) — का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इस अभिलेख में इन्हें ‘प्रत्यंत राज्य’ कहा गया है, अर्थात् ये मौर्य साम्राज्य की सीमा पर स्थित स्वतंत्र राज्य थे। इस अभिलेख में यह भी उल्लेख है कि अशोक ने इन क्षेत्रों में मनुष्यों और पशुओं दोनों के लिए चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराईं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के चौदह मुख्य शिलालेखों में से द्वितीय और तेरहवाँ शिलालेख विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं — द्वितीय में सामाजिक कल्याण कार्यों और पड़ोसी राज्यों का वर्णन है, जबकि तेरहवें शिलालेख में कलिंग युद्ध की विभीषिका और उससे उत्पन्न अशोक के हृदय-परिवर्तन का मार्मिक वर्णन मिलता है।
    31. सांची का स्तूप किस राज्य में स्थित है?
    (a) अमरावती
    (b) भरहुत
    (c) सांची
    (d) सारनाथ
    U.P.P.C.S. (Mains) 2008
    उत्तर-(c)
    स्थापत्य कला की दृष्टि से सांची के महास्तूप को सर्वश्रेष्ठ स्तूप माना जाता है। यह मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक पहाड़ी पर स्थित है। इसका प्रारंभिक निर्माण सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था। बाद के काल में शुंग और सातवाहन शासकों ने इसका विस्तार किया। भरहुत का स्तूप म.प्र. के सतना जिले में है, जबकि अमरावती का स्तूप आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में कृष्णा नदी के दाहिने तट पर स्थित है। सारनाथ का धमेख स्तूप गुप्तकाल में निर्मित है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सांची के स्तूप को यूनेस्को ने 1989 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। सांची के स्तूप के चार तोरण द्वार (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) हैं, जिन पर बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं के दृश्य उकेरे गए हैं — ये मौर्योत्तर कालीन शिल्प कला का अद्भुत उदाहरण हैं।
    32. भारत का प्रथम अस्पताल एवं औषधि-बाग निर्माण करवाया था-
    (a) अशोक ने
    (b) चंद्रगुप्त मौर्य ने
    (c) भगवान महावीर ने
    (d) धन्वंतरि ने
    U.P. Lower Sub. (Mains) 2015
    उत्तर-(a)
    सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में मनुष्यों और पशुओं दोनों के लिए औषधालय (अस्पताल) एवं औषधि-बागों का निर्माण करवाया — यह भारत का प्रथम ज्ञात चिकित्सा-संस्थान माना जाता है। अशोक ने पशु-पक्षियों के वध पर प्रतिबंध लगाया, छायादार वृक्ष लगवाए, धर्मशालाएं और कुएं भी बनवाए। वह युद्ध विजेता से अधिक ‘धम्म विजेता’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के द्वितीय शिलालेख में स्पष्ट उल्लेख है कि उसने मनुष्यों तथा पशुओं की चिकित्सा के लिए सड़कों के किनारे औषधियाँ उगवाईं और कुएं खुदवाए। इसके अतिरिक्त, अशोक ने श्रीलंका में भी अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा के माध्यम से बौद्ध धर्म का प्रसार करवाया, जो उसके लोककल्याणकारी स्वभाव को दर्शाता है।
    33. रज्जुक थे-
    (a) चोल राज्य में व्यापारी
    (b) मौर्य शासन में अधिकारी
    (c) गुप्त साम्राज्य में सामंत वर्ग
    (d) शक सेना में अधिकारी
    U.P.P.C.S. (Pre) 1996
    उत्तर-(b)
    अशोक के अभिलेखों में ‘रज्जुक’ नामक प्रशासनिक पदाधिकारी का उल्लेख मिलता है। ये मौर्य प्रशासन में जिला स्तर के अधिकारी थे जिन्हें राजस्व एवं न्याय दोनों क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त थे — आधुनिक जिलाधिकारी के समकक्ष। अपने चतुर्थ स्तंभ लेख में अशोक ने रज्जुकों की तुलना उस विश्वसनीय धात्री से की है जिसे माता-पिता अपने बच्चे की देखभाल के लिए नियुक्त करते हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौर्य प्रशासन में रज्जुक के ऊपर ‘प्रादेशिक’ (मंडल स्तर के प्रमुख) और उनके नीचे ‘युक्त’ (ग्राम-स्तरीय राजस्व अधिकारी) होते थे। अशोक ने प्रशासनिक दौरे के लिए ‘महामात्र’ नामक विशेष अधिकारी भी नियुक्त किए थे, जो धम्म के प्रचार-प्रसार हेतु विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करते थे।
    34. “अशोक ने बौद्ध होते हुए भी हिंदू धर्म में आस्था नहीं छोड़ी” इसका प्रमाण है-
    (a) तीर्थयात्रा
    (b) मोक्ष में विश्वास
    (c) ‘देवनामप्रिय’ की उपाधि
    (d) पशु चिकित्सालय खोले
    R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1999
    उत्तर-(c)
    अशोक के सभी अभिलेखों में उसे ‘देवानामपिय’ (देवताओं का प्रिय) तथा ‘पियदसि’ (देखने में प्रिय/सुंदर) कहा गया है। ‘देवानामपिय’ की उपाधि हिंदू परंपरा से जुड़ी है और यह इस बात का संकेत देती है कि अशोक बौद्ध होते हुए भी हिंदू धर्म की कुछ परंपराओं और विश्वासों से पूरी तरह अलग नहीं हुआ। अशोक का राज्याभिषेक लगभग 269 ई.पू. में हुआ था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक ने कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) के भयंकर रक्तपात के बाद बौद्ध धर्म अपनाया था। उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु को उसका धर्म-गुरु माना जाता है। उल्लेखनीय है कि अशोक ने बौद्ध धर्म को राज्यधर्म घोषित नहीं किया; उसकी ‘धम्म’ नीति सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता पर आधारित थी।
    35. सार्थवाह किसे कहते थे?
    (a) दलालों को
    (b) व्यापारियों के काफिले को
    (c) महाजनों को
    (d) तीर्थयात्रियों को
    U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
    उत्तर-(b)
    मौर्यकाल में व्यापारियों के संगठित काफिले (कारवां) को ‘सार्थवाह’ कहा जाता था। इसका उल्लेख कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी मिलता है। ये व्यापारी समूह लंबी दूरी के व्यापार के लिए एक साथ यात्रा करते थे, जिससे सुरक्षा और संसाधनों की साझेदारी होती थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौर्यकाल में व्यापार को सुगम बनाने के लिए ‘अध्यक्ष’ नामक अधिकारी नियुक्त किए जाते थे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी थी। उस काल में ‘पण’ मुख्य मुद्रा थी और व्यापार में तौल एवं माप की एकरूपता बनाए रखने के लिए विशेष अधिकारी होते थे।
    36. निम्नलिखित में से किस स्रोत में अशोक के राज्यकाल में तृतीय बौद्ध समिति होने का उल्लेख मिलता है ?
    1.अशोक के अभिलेख
    2.दीपवंश
    3.महावंश
    4.दिव्यावदान
    नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-
    (a) 1, 2
    (b) 2, 3
    (c) 3,4
    (d) 1,4
    U.P.P.C.S. (Pre) 1999
    उत्तर-(b)
    सिंहली ग्रंथों दीपवंश और महावंश के अनुसार अशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र में बौद्ध धर्म की तृतीय महासंगीति का आयोजन हुआ था। इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु ‘मोग्गलिपुत्त तिस्स’ ने की। अशोक के स्वयं के अभिलेखों में इस संगीति का उल्लेख नहीं मिलता।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में महाकश्यप की अध्यक्षता में (483 ई.पू.), द्वितीय वैशाली में सब्बकामी की अध्यक्षता में (383 ई.पू.) और चतुर्थ संगीति कश्मीर के कुंडलवन में कनिष्क के शासनकाल में वसुमित्र की अध्यक्षता में हुई। तृतीय संगीति में थेरवाद मत को अधिकृत रूप से मान्यता दी गई और अभिधम्मपिटक का संकलन पूर्ण हुआ।
    37. अशोक के शासनकाल में बौद्ध सभा किस नगर में आयोजित की गई थी?
    (a) मगध
    (b) पाटलिपुत्र
    (c) समस्तीपुर
    (d) राजगृह
    45th B.P.S.C. (Pre) 2001
    उत्तर-(b)
    अशोक के शासनकाल में तृतीय बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना, बिहार) में आयोजित हुई थी। पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी थी और उस काल का सबसे प्रमुख नगर था। यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में पाटलिपुत्र को उस युग का सबसे भव्य नगर बताया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पाटलिपुत्र की स्थापना मूलतः उदयिन (अजातशत्रु के पुत्र) ने लगभग 490 ई.पू. में की थी। मौर्यकाल में इसे लकड़ी की विशाल प्राचीर से घेरा गया था जिसमें 570 मीनारें और 64 द्वार थे — यह विवरण मेगस्थनीज की ‘इंडिका’ से प्राप्त होता है।
    38. निम्नलिखित मौर्य शासक बौद्ध धर्म के अनुयायी थे-
    1.चंद्रगुप्त
    अशोक
    3.बिंदुसार
    4.दशरथ
    सही उत्तर चुनिए-
    (a) 1 एवं 2
    (b) 2 एवं 3
    (c) 3 एवं 4
    (d) 2 एवं 4
    Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013
    उत्तर-(d)
    मौर्य वंश में अशोक और उसका पौत्र दशरथ बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। दशरथ ने भी अशोक की भांति ‘देवानांपिय’ की उपाधि धारण की। चंद्रगुप्त मौर्य ने वृद्धावस्था में जैन धर्म स्वीकार किया था और बिंदुसार आजीवक संप्रदाय का अनुयायी था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दशरथ मौर्य ने गया के निकट नागार्जुनी पहाड़ियों में आजीवक भिक्षुओं को गुफाएं दान में दी थीं। उल्लेखनीय है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने अंतिम दिनों में जैन संत भद्रबाहु के साथ कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में जाकर सल्लेखना (उपवास द्वारा मृत्यु वरण) ग्रहण की थी।
    39. निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकारी मौर्य प्रशासन का भाग नहीं था?
    (a) अग्रहारिक
    (b) युक्त
    (c) प्रादेशिक
    (d) राजुक
    R.A.S./R.T.S. (Pre) (Re-Exam) 2013
    उत्तर-(a)
    अशोक के तृतीय शिलालेख में मौर्य प्रशासन के तीन प्रमुख पदाधिकारियों का उल्लेख मिलता है — युक्त (जिला स्तर पर राजस्व वसूली), राजुक (राजस्व एवं न्याय अधिकारी), और प्रादेशिक (मंडल प्रमुख, संभागीय आयुक्त के समकक्ष)। ‘अग्रहारिक’ मौर्य प्रशासन का अंग नहीं था; यह पद मौर्य-प्रशासन में प्रमाणित नहीं है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौर्य प्रशासन में ‘महामात्र’ धम्म के प्रचार के लिए विशेष रूप से नियुक्त अधिकारी थे, जिनका उल्लेख अशोक के पाँचवें शिलालेख में मिलता है। इसके अलावा ‘अंतमहामात्र’ सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए नियुक्त होते थे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में 18 प्रकार के ‘अध्यक्षों’ (विभागीय प्रमुखों) का उल्लेख है जो विभिन्न विभागों का प्रबंधन करते थे।
    40. सारनाथ स्तंभ का निर्माण किया था-
    (a) हर्षवर्धन ने
    (b) अशोक ने
    (c) गौतम बुद्ध ने
    (d) कनिष्क ने
    U.P. Lower Sub. (Spl.) Pre 2008
    उत्तर-(b)
    सारनाथ स्तंभ का निर्माण सम्राट अशोक ने करवाया था। इस स्तंभ के शीर्ष पर चार सिंहों की आकृति है जो शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और अभय का प्रतीक है। भारत सरकार ने 26 जनवरी 1950 को इस सिंह-शीर्ष को अपने राजकीय चिह्न के रूप में अपनाया। मौर्यकाल के सभी स्तंभ चुनार (उत्तर प्रदेश) के बलुआ पत्थर से बने हैं और इनकी पॉलिश आज भी चमकदार है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सारनाथ वह पवित्र स्थान है जहाँ गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश (धम्मचक्कपवत्तन) दिया था — इसे ‘प्रथम धर्मोपदेश’ या ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ कहते हैं। अशोक के स्तंभों पर जो लिपि उत्कीर्ण है वह मुख्यतः ब्राह्मी है; इन्हें 19वीं सदी में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ने में सफलता प्राप्त की।
    41. अशोक के शिलालेखों को सर्वप्रथम किसने पढ़ा था?
    (a) बूहलर
    (b) रॉबर्ट सेबेल
    (c) जेम्स प्रिंसेप
    (d) कॉड्रिगटन
    I.A.S. (Pre) 1993
    U.P.P.C.S. (Mains) 2006
    U.P.P.S.C. (GIC) 2010
    उत्तर-(c)
    ब्रिटिश पुरालेखशास्त्री जेम्स प्रिंसेप ने सन् 1837 में अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने ब्राह्मी और खरोष्ठी दोनों लिपियों की वर्णमाला का सफलतापूर्वक उद्वाचन किया, जो भारतीय इतिहास की पुनर्रचना में एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उल्लेखनीय तथ्य यह है कि प्रिंसेप को प्रारंभ में अभिलेखों में उल्लिखित ‘देवानांपिय पियदसि’ नाम के राजा की पहचान नहीं हो पाई थी; बाद में श्रीलंकाई बौद्ध ग्रंथ महावंश की सहायता से यह स्पष्ट हुआ कि यह अशोक ही थे। जेम्स प्रिंसेप उस समय कलकत्ता टकसाल (Calcutta Mint) में कार्यरत थे और एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के सचिव भी रहे।
    42. सांची का स्तूप किस शासक ने बनवाया था?
    (a) बिंबिसार
    (b) अशोक
    (c) हर्षवर्धन
    (d) पुष्यमित्र
    U.P.P.C.S. (Pre) 1991
    उत्तर-(b)
    सांची के स्तूपों का निर्माण मौर्य सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था। सांची मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में विदिशा नगर के समीप एक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ कुल तीन प्रमुख स्तूप हैं — स्तूप संख्या 1 (महास्तूप) सबसे बड़ा और महत्त्वपूर्ण है, जिसका व्यास लगभग 36.6 मीटर और ऊँचाई लगभग 16.4 मीटर है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शुंग काल (185–73 ईसा पूर्व) में पुष्यमित्र शुंग के शासनकाल में इस ईंट निर्मित स्तूप को पत्थर से आच्छादित करके विस्तारित किया गया। सांची के स्तूप को UNESCO ने 1989 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। अशोक की पत्नी देवी, जो विदिशा के एक व्यापारी की पुत्री थीं, का संबंध भी इसी क्षेत्र से था।
    43. ब्राह्मी लिपि का प्रथम उवाचन किस पर उत्कीर्ण अक्षरों से किया गया ?
    (a) पत्थर की पट्टियों पर
    (b) मुहरों पर
    (c) स्तंभों पर
    (d) सिक्कों पर
    U.P.P.C.S. (Mains) 2008
    उत्तर-(a)
    ब्राह्मी लिपि का प्रथम उवाचन (decipherment) जेम्स प्रिंसेप द्वारा पत्थर की पट्टियों अर्थात् शिलालेखों पर उत्कीर्ण अक्षरों के आधार पर किया गया था। ब्राह्मी लिपि बाईं से दाईं ओर लिखी जाती है और इसे भारत की अधिकांश आधुनिक लिपियों जैसे देवनागरी, बंगाली, गुजराती आदि की जननी माना जाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ब्राह्मी लिपि के सबसे प्राचीन साक्ष्य अशोककालीन अभिलेखों से प्राप्त होते हैं, जो तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के हैं। उल्लेखनीय है कि ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों में मतभेद है — कुछ इसे सेमेटिक लिपि से व्युत्पन्न मानते हैं, जबकि अन्य इसे स्वदेशी उद्भव की लिपि मानते हैं।
    44. सांची का स्तूप किसने बनवाया था?
    (a) चंद्रगुप्त
    (b) कौटिल्य
    (c) गौतम बुद्ध
    (d) अशोक
    M.P.P.C.S. (Pre) 2006
    M.P.P.C.S. (Pre) 1995
    M.P.P.C.S. (Pre) 2012
    उत्तर-(d)
    सांची का स्तूप सम्राट अशोक ने बनवाया था। बौद्ध धर्म अपनाने के पश्चात् अशोक ने देशभर में 84,000 स्तूपों के निर्माण का श्रेय बौद्ध परंपरा में लिया जाता है, जिनमें से सांची का महास्तूप सर्वाधिक प्रसिद्ध है। इस स्तूप में भगवान बुद्ध के अवशेषों को सुरक्षित रखा गया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सांची के चार तोरण द्वार (उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम) विशेष रूप से सातवाहन काल में निर्मित हुए और इन पर बुद्ध के जीवन तथा जातक कथाओं के दृश्य उत्कीर्ण हैं। तोरण द्वारों पर बुद्ध को प्रतीकात्मक रूप से (पदचिह्न, छत्र, धर्मचक्र आदि के रूप में) दर्शाया गया है, मानवीय रूप में नहीं — यह प्रारंभिक बौद्ध कला की विशेषता है।
    45. निम्नांकित में से कौन-सा अशोक कालीन अभिलेख ‘खरोष्ठी’ लिपि में है?
    (a) कालसी
    (b) गिरनार
    (c) शाहबाजगढ़ी
    (d) मेरठ
    Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011
    उत्तर-(c)
    अशोक के अभिलेखों में से शाहबाजगढ़ी (पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में) और मानसेहरा (पाकिस्तान) के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में उत्कीर्ण हैं। खरोष्ठी लिपि दाईं से बाईं ओर लिखी जाती है और इसका प्रचलन मुख्यतः उत्तर-पश्चिम भारत एवं मध्य एशिया में था। शेष सभी अभिलेख सामान्यतः ब्राह्मी लिपि में हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उल्लेखनीय है कि खरोष्ठी लिपि का उद्वाचन सर्वप्रथम नॉरिस (Norris) ने किया था, न कि जेम्स प्रिंसेप ने — हालाँकि प्रिंसेप ने भी इसमें योगदान दिया। तक्षशिला से आरमेइक (Aramaic) लिपि में लिखा गया अशोक का एक भग्न अभिलेख भी प्राप्त हुआ है, जो उसकी बहुभाषीय प्रशासनिक नीति का प्रमाण है।
    46. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही
    सूची-I (स्थान) सूची-II (स्मारक / भग्नावशेष)
    A. कौशाम्बी – 1. धमेख स्तूप
    B. कुशीनगर – 2. घोषिताराम मठ
    C. सारनाथ – 3. रानाभर स्तूप
    D. श्रावस्ती – 4. सहेत-महेत
    कूट :
    A B C D
    (a) 2 1 3 4
    (b) 4 3 2 1
    (c) 2 3 1 4
    (d) 4 2 1 3 उत्तर चुनिए –
    U.P.P.C.S. (Mains) 2010
    उत्तर-(c)
    दिए गए स्थानों और उनसे संबद्ध स्मारकों का सही सुमेलन इस प्रकार है — कौशाम्बी (उत्तर प्रदेश) में घोषिताराम मठ स्थित है, जो बुद्ध के एक प्रमुख दानी अनुयायी घोषित श्रेष्ठी द्वारा निर्मित था; कुशीनगर में रानाभर स्तूप है, जो बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किए जाने की स्मृति में बनाया गया था; सारनाथ में धमेख स्तूप है, जो उस स्थान को इंगित करता है जहाँ बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) दिया था; और श्रावस्ती को सहेत-महेत पुरातात्त्विक स्थल से पहचाना जाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उल्लेखनीय तथ्य यह है कि सारनाथ का धमेख स्तूप गुप्तकाल (5वीं शताब्दी ईस्वी) में पुनर्निर्मित हुआ और इसकी ऊँचाई लगभग 28.35 मीटर है। सहेत-महेत में ‘सहेत’ जेतवन विहार को और ‘महेत’ प्राचीन श्रावस्ती नगर को इंगित करता है।
    47. विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची का प्राचीन नाम यह भी था-
    (a) काकणाम
    (b) वेत्रवती
    (c) बेसनगरी
    (d) दशपुर
    M.P.P.C.S. (Pre) 2020
    उत्तर-(a)
    सांची का प्राचीन नाम ‘काकणाम’ (काकनाड) था, जो चौथी शताब्दी के गुप्तकालीन अभिलेखों में ‘काकणाम महाविहार’ के रूप में उल्लिखित है। महावंश ग्रंथ में इसे ‘चेतियगिरि’ (स्तूपों का पर्वत) कहा गया है, क्योंकि यहाँ पर्वत की चोटी पर अनेक स्तूपों का निर्माण हुआ था। सांची के निकट विदिशा (प्राचीन नाम — वेत्रवती) स्थित है जो मौर्यकाल में एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अतिरिक्त तथ्य के रूप में यह जानना महत्त्वपूर्ण है कि सांची को 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश अधिकारी जनरल टेलर ने पुनः खोजा था, और इसके बाद पुरातत्त्ववेत्ता अलेक्जेंडर कनिंघम ने यहाँ विस्तृत उत्खनन कार्य किया।
    48. अशोक के शिलालेखों (Inscriptions) में प्रयुक्त भाषा है-
    (a) संस्कृत
    (b) प्राकृत
    (c) पाली
    (d) हिंदी
    44th B.P.S.C. (Pre) 2000
    उत्तर-(b)
    अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं। प्राकृत उस काल की जनसामान्य की भाषा थी, जिसे अशोक ने इसलिए अपनाया ताकि उनके धम्म संदेश जनता तक सुगमता से पहुँच सकें। उनके अभिलेखों को कई वर्गों में बाँटा जा सकता है — 14 प्रमुख शिलालेख, लघु शिलालेख, स्तम्भलेख और गुहालेख। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा) में खरोष्ठी लिपि का उपयोग हुआ, जबकि अफगानिस्तान के कंदहार में यूनानी (Greek) और आरमेइक भाषाओं में द्विभाषीय अभिलेख प्राप्त हुए हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह तथ्य उल्लेखनीय है कि अशोक के अभिलेखों में वे स्वयं को ‘देवानांपिय’ (देवताओं के प्रिय) और ‘पियदसि’ (प्रिय दर्शन वाले) कहते हैं — किसी भी अभिलेख में ‘अशोक’ नाम मात्र कुछ ही स्थानों पर मिलता है।
    49. पत्थर पर प्राचीनतम शिलालेख किस भाषा में थे?
    (a) पालि
    (b) संस्कृत
    (d) ब्राह्मी
    (c) प्राकृत
    U.P.P.C.S. (Pre) 2009
    उत्तर-(c)
    पत्थर पर उत्कीर्ण प्राचीनतम शिलालेख प्राकृत भाषा में हैं, जो अशोक के अभिलेखों के रूप में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के हैं। प्राकृत भाषा, संस्कृत की ही एक लोकप्रिय और सरलीकृत शाखा थी जो जनसामान्य द्वारा बोली जाती थी। ब्राह्मी यहाँ भाषा नहीं बल्कि लिपि है — अतः विकल्प (d) गलत है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह ध्यान देने योग्य तथ्य है कि भारत में संस्कृत भाषा में प्रथम अभिलेख गुप्तकाल से प्राप्त होते हैं, जो लगभग चौथी-पाँचवीं शताब्दी ईस्वी के हैं। इस प्रकार प्राकृत शिलालेख, संस्कृत शिलालेखों से कई शताब्दी पुराने हैं।
    50. तीर्थयात्रा के समय सम्राट अशोक निम्नलिखित स्थानों पर गए। उन्होंने किस मार्ग का अनुगमन किया?
    नीचे दिए गए कूट से सही
    1. गया 2. कपिलवस्तु
    3. कुशीनगर 4. लुम्बिनी
    5. सारनाथ 6. श्रावस्ती कूट : उत्तर चुनिए-
    (a) 1, 2, 3, 4, 5 तथा 6
    (c) 4, 5, 6, 3, 2 तथा 1
    (b) 1, 3, 4, 2, 5 तथा 6
    (d) 4, 2, 1, 5, 3 तथा 6
    U.P.P.C.S. (Pre) 1999
    उत्तर-(d)
    इतिहासकार विंसेट आर्थर स्मिथ के अनुसार अशोक ने बौद्ध गुरु उपगुप्त के साथ बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों की धम्म यात्रा इस क्रम में की — लुम्बिनी (जन्मस्थान), कपिलवस्तु (बाल्यकाल), बोधगया/गया (ज्ञान प्राप्ति), सारनाथ (प्रथम उपदेश), कुशीनगर (महापरिनिर्वाण) और श्रावस्ती (दीर्घकालीन प्रवास)। यह क्रम जीवन-यात्रा के कालक्रम से मेल खाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के आठवें शिलालेख में स्वयं उन्होंने उल्लेख किया है कि राज्याभिषेक के दसवें वर्ष वे संबोधि (बोधगया) गए। रुम्मिनदेई अभिलेख (नेपाल में स्थित लुम्बिनी का प्रमाण) के अनुसार राज्याभिषेक के 20वें वर्ष अशोक लुम्बिनी पहुँचे और वहाँ के ग्रामवासियों को कर में छूट प्रदान की — यह किसी भारतीय शासक द्वारा कर-राहत का प्राचीनतम अभिलेखीय उदाहरण है।
    51. प्राचीन भारत में निम्नलिखित में से कौन-सी एक लिपि दाईं ओर से बाईं ओर लिखी जाती थी ?
    (a) ब्राह्मी
    (b) नंदनागरी
    (c) शारदा
    (d) खरोष्ठी
    I.A.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(d)
    खरोष्ठी लिपि प्राचीन भारत की एकमात्र प्रमुख लिपि थी जो दाएँ से बाएँ की दिशा में लिखी जाती थी — ठीक उसी प्रकार जैसे अरबी और फ़ारसी लिखी जाती हैं। यह मुख्यतः उत्तर-पश्चिम भारत (वर्तमान पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान) में प्रचलित थी। इसे पढ़ने का श्रेय मैसन, जेम्स प्रिंसेप, नोरिस, लैसेन और कनिंघम जैसे विद्वानों को जाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खरोष्ठी लिपि का उद्भव अरामाइक लिपि से हुआ माना जाता है जो ईरानी अचमेनिद साम्राज्य की राजकीय लिपि थी। यह लिपि कुषाण काल (लगभग पहली-तीसरी शताब्दी ई.) तक प्रयोग में रही, जिसके बाद यह धीरे-धीरे लुप्त हो गई।
    52. अशोक का अपने शिलालेखों में सामान्यतः जिस नाम से उल्लेख हुआ है, वह है-
    (a) चक्रवर्ती
    (b) धर्मदेव
    (c) धर्मकीर्ति
    (d) प्रियदर्शी
    I.A.S. (Pre) 1995
    उत्तर-(d)
    अशोक के शिलालेखों में उन्हें “देवानांपिय” (देवताओं का प्रिय) और “देवानांपियदसि” (प्रियदर्शी) की उपाधियों से संबोधित किया गया है। स्वयं “अशोक” नाम केवल कुछ ही अभिलेखों जैसे मास्की, गुर्जरा, नेत्तुर और उडेगोलम में उल्लिखित है। पुराणों में उन्हें “अशोकवर्द्धन” कहा गया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: “मास्की अभिलेख” (कर्नाटक) की खोज 1915 में हुई और यह पहला अभिलेख था जिसमें “अशोक” नाम स्पष्ट रूप से मिला, जिससे इन अभिलेखों को निश्चित रूप से अशोक से जोड़ा जा सका। इससे पहले “देवानांपियदसि” की पहचान को लेकर विद्वानों में मतभेद था।
    53. मौर्य साम्राज्य के पेशावर के निकट उत्तर पश्चिम भाग में अशोक के शिलालेख थे-
    (a) ब्राह्मी लिपि में
    (b) आरमेइक लिपि में
    (c) देवनागरी लिपि में
    (d) खरोष्ठी लिपि में
    Jharkhand P.C.S. (Pre) 2021
    उत्तर-(d)
    मौर्य साम्राज्य के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र, विशेषकर पेशावर के निकट, अशोक के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में उत्कीर्ण हैं। इस श्रेणी में “शाहबाजगढ़ी” (खैबर पख्तूनख्वा) और “मानसेहरा” (पाकिस्तान) के अभिलेख आते हैं। अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं — केवल ये दो ही खरोष्ठी लिपि में हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अफगानिस्तान में कंधार (शर-ए-कुना) से प्राप्त अशोक के अभिलेख यूनानी (Greek) और अरामाइक दोनों लिपियों में मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि अशोक ने अपने साम्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय भाषा और लिपि के अनुसार अभिलेख उत्कीर्ण कराए।
    54. ब्राह्मी लिपि को सर्वप्रथम किसने पढ़ा?
    (a) ए. कनिंघम
    (b) ए.एच. दानी
    (c) व्यूलर
    (d) जेम्स प्रिंसेप
    U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
    48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
    उत्तर-(d)
    ब्राह्मी लिपि को सर्वप्रथम सन् 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा। प्रिंसेप ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी और प्रतिभाशाली भाषाविद् थे। उन्होंने सिक्कों और शिलालेखों की तुलनात्मक विधि का उपयोग कर ब्राह्मी वर्णमाला को समझने में सफलता प्राप्त की। इसी सफलता के आधार पर वे अशोक के शिलालेखों को भी पढ़ने में सक्षम हुए।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जेम्स प्रिंसेप ने एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की पत्रिका में अपनी खोज प्रकाशित की थी। ब्राह्मी विश्व की अधिकांश दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई लिपियों जैसे देवनागरी, बंगाली, तमिल, थाई, तिब्बती आदि की जननी लिपि मानी जाती है।
    55. अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ा था-
    (a) जेम्स प्रिंसेप ने
    (b) जॉर्ज व्यूलर ने
    (c) विसेंट स्मिथ ने
    (d) अहमद हसन दानी ने
    U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
    उत्तर-(a)
    अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा। उन्होंने ब्राह्मी लिपि की वर्णमाला को व्यवस्थित रूप से समझकर इन अभिलेखों का अर्थ उद्घाटित किया। उनकी इस खोज ने प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में एक नई क्रांति ला दी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्रिंसेप से पूर्व टी. फैनथेलर (1796) और कोल ब्रुक (1801) ने भी ब्राह्मी को पढ़ने के प्रयास किए थे किंतु पूर्ण सफलता नहीं मिली। प्रिंसेप की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मौर्यकालीन इतिहास की प्रामाणिक जानकारी पहली बार संभव हुई।
    56. निम्नलिखित में से प्राचीन भारत की कौन-सी लिपि दाहिने से बाईं ओर लिखी जाती थी ?
    (a) ब्राह्मी
    (b) शारदा
    (c) खरोष्ठी
    (d) नन्दनागरी
    65th B.P.S.C. (Pre) 2019
    उत्तर-(c)
    खरोष्ठी लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी। इसके विपरीत ब्राह्मी, शारदा और नंदनागरी आदि लिपियाँ बाएँ से दाएँ लिखी जाती थीं। खरोष्ठी मुख्यतः गांधार क्षेत्र (वर्तमान पाकिस्तान-अफगानिस्तान) की लिपि थी और इसका प्रसार मध्य एशिया तक हुआ।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खरोष्ठी लिपि में लिखे गए ग्रंथ मध्य एशिया (चीनी तुर्केस्तान) में भी पाए गए हैं, जो प्रारंभिक बौद्ध धर्म के प्रसार के साक्ष्य हैं। इस लिपि में लिखी गई प्राकृत-खरोष्ठी पांडुलिपियाँ विश्व की सबसे प्राचीन बौद्ध पांडुलिपियों में गिनी जाती हैं।
    57. सम्राट अशोक के राजादेशों का सबसे पहले विकूटन (डिसाइफर) किसने किया था ?
    (a) जॉर्ज व्यूलर
    (b) जेम्स प्रिंसेप
    (c) मैक्स मुलर
    (d) विलियम जोन्स
    I.A.S. (Pre) 2016
    उत्तर-(b)
    अशोक के राजादेशों को सर्वप्रथम जेम्स प्रिंसेप ने 1837 ई. में पढ़ा और उनका विकूटन (decipher) किया। उन्होंने ब्राह्मी वर्णमाला की कुंजी खोलकर इन शिलालेखों की भाषा को समझा जो प्राकृत थी। यह उपलब्धि भारतीय पुरालेख विद्या (Epigraphy) के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जेम्स प्रिंसेप कोलकाता टकसाल (Calcutta Mint) के अधीक्षक थे। उनकी असामयिक मृत्यु मात्र 40 वर्ष की आयु में 1840 ई. में हुई। उनके सम्मान में एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल ने “प्रिंसेप मेमोरियल” की स्थापना कोलकाता में की जो आज भी विद्यमान है।
    58. अशोक के शिलालेखों को पढ़ने वाला प्रथम अंग्रेज कौन था?
    (a) जॉन टॉवर
    (b) हैरी स्मिथ
    (c) चार्ल्स मेटकॉफ
    (d) जेम्स प्रिंसेप
    Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003
    उत्तर-(d)
    जेम्स प्रिंसेप वह प्रथम अंग्रेज थे जिन्होंने अशोक के शिलालेखों को सफलतापूर्वक पढ़ा। उन्होंने 1837 ई. में यह ऐतिहासिक कार्य संपन्न किया। उनसे पहले कई विद्वानों ने प्रयास किए थे किंतु पूर्ण सफलता नहीं मिली। प्रिंसेप की इस उपलब्धि ने अशोक के इतिहास और मौर्य साम्राज्य की नीतियों को समझने का मार्ग प्रशस्त किया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के शिलालेखों की खोज का श्रेय टी. फैनथेलर को है जिन्होंने 1750 ई. के लगभग दिल्ली-टोपरा स्तंभ का उल्लेख किया था। बाद में 1834 ई. में जॉर्ज टर्नर ने इन अभिलेखों के कुछ अक्षरों की पहचान की, किंतु संपूर्ण विकूटन प्रिंसेप ने ही किया।
    59. वह स्थान, जहां प्राक् अशोक ब्राह्मी लिपि का पता चला है –
    (a) नागार्जुनकोंडा
    (b) अनुराधापुर
    (c) ब्रह्मगिरि
    (d) मास्की
    U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008
    उत्तर-(b)
    प्राक्-अशोक ब्राह्मी लिपि (चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से भी पहले की) के साक्ष्य श्रीलंका के अनुराधापुर से प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त पिपरहवा (उत्तर प्रदेश), सोहगौरा (उत्तर प्रदेश) और महास्थान (बांग्लादेश) से भी प्राक्-अशोक काल के ब्राह्मी अभिलेखों के साक्ष्य मिले हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अनुराधापुर (श्रीलंका) में ब्राह्मी लिपि के ये प्रारंभिक साक्ष्य व्यापार चिह्नों (potter’s marks) के रूप में मिले हैं जो लगभग 600-500 ईसा पूर्व के बताए जाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि ब्राह्मी लिपि अशोक से बहुत पहले ही अस्तित्व में आ गई थी।
    60. अपने शिलालेखों में अशोक सामान्यतः किस नाम से जाने जाते है?
    (a) चक्रवर्ती
    (b) प्रियदर्शी
    (c) धर्मदेव
    (d) धर्मकीर्ति
    65th B.P.S.C. (Pre) 2019
    उत्तर-(b)
    अशोक के शिलालेखों में उन्हें प्रायः “देवानांपियदसि” अर्थात् “प्रियदर्शी” के नाम से संबोधित किया गया है, जिसका अर्थ है “देवताओं का प्रिय, सुंदर दृष्टि वाला”। यह उपाधि अशोक की राजकीय पहचान थी। “अशोक” नाम स्वयं केवल कुछ विशेष अभिलेखों में ही मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: श्रीलंकाई ग्रंथ “महावंश” में भी अशोक को “पियदस्सी” (प्रियदर्शी) कहा गया है। यही कारण था कि 1837 में प्रिंसेप द्वारा अभिलेख पढ़े जाने के बाद भी लंबे समय तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि “देवानांपियदसि” वास्तव में अशोक ही हैं — यह स्पष्टता मास्की अभिलेख की खोज (1915) के बाद हुई।
    61. कालसी प्रसिद्ध है-
    (a) बौद्ध चैत्यों हेतु
    (b) फारसी सिक्कों के कारण
    (c) अशोक के शिलालेख के कारण
    (d) गुप्तकालीन मंदिरों हेतु
    U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
    उत्तर-(c)
    कालसी उत्तराखंड के देहरादून जिले में यमुना नदी के तट पर स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यहाँ अशोक का चौदहवाँ वृहत शिलालेख प्राप्त हुआ है, जो पहाड़ी पत्थर पर उत्कीर्ण है। यह उत्तर भारत में प्राप्त अशोक के सबसे महत्वपूर्ण शिलालेखों में से एक है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कालसी का यह शिलालेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में लिखा गया है। इसमें अशोक की धम्म नीति, पशु हत्या निषेध और पड़ोसी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख है। यह शिलालेख 1860 ई. में ब्रिटिश अधिकारी फॉरेस्ट द्वारा खोजा गया था।
    62. केवल वह स्तंभ, जिसमें अशोक ने स्वयं को मगध का सम्राट बताया है-
    (a) मास्की का लघु स्तंभ
    (b) रुम्मिनदेई स्तंभ
    (c) क्वीन स्तंभ
    (d) भाब्रू स्तंभ
    39th B.P.S.C. (Pre) 1994
    उत्तर-(d)
    भाब्रू (बैराट) स्तंभ लेख अशोक के अभिलेखों में विशेष स्थान रखता है। इसमें अशोक ने स्वयं को ‘मागध सम्राट’ (मगध का सम्राट) कहा है और बौद्ध संघ के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की है। यह एकमात्र अभिलेख है जो अशोक को प्रमाणित रूप से बौद्ध धर्मावलंबी सिद्ध करता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भाब्रू अभिलेख राजस्थान के जयपुर के निकट बैराट में मिला था। इसमें अशोक ने बौद्ध धर्म के सात विशेष ग्रंथों की सूची दी है और भिक्षुओं व गृहस्थों को उन्हें पढ़ने की प्रेरणा दी है — यह बौद्ध साहित्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
    63. अभिलेखों में किस शासक का उल्लेख ‘पियदस्सी’ एवं ‘देवानामप्रिय’ के रूप में किया गया है?
    (a) चंद्रगुप्त मौर्य
    (b) अशोक
    (c) समुद्रगुप्त
    (d) हर्षवर्धन
    M.P.P.C.S. (Pre) 2015
    उत्तर-(b)
    अशोक के अधिकांश अभिलेखों में उसे ‘देवानामप्रिय’ (देवताओं का प्रिय) और ‘पियदस्सी’ (प्रियदर्शी — जो सबका कल्याण देखता है) की उपाधियों से संबोधित किया गया है। व्यक्तिगत नाम ‘अशोक’ केवल मास्की, गुर्जरा, नेत्तूर और उडेगोलम के लघु शिलालेखों में ही मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘देवानामप्रिय’ उपाधि केवल अशोक को नहीं, बल्कि श्रीलंकाई शासक तिस्स को भी दी गई थी। अशोक ने श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को भेजा था।
    64. निम्नलिखित वक्तव्यों में कौन-सा एक वक्तव्य अशोक के प्रस्तर स्तंभों के बारे में गलत है?
    (a) इन पर बढ़िया पॉलिश है।
    (b) ये अखंड हैं।
    (c) स्तंभों का शैफ्ट शुंडाकार है।
    (d) ये स्थापत्य संरचना के भाग हैं।
    I.A.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(d)
    अशोक के प्रस्तर स्तंभ किसी भवन या स्थापत्य संरचना का हिस्सा नहीं हैं — वे स्वतंत्र रूप से स्थापित पृथक रचनाएँ हैं। ये स्तंभ एकाश्म (अखंड पत्थर से निर्मित) हैं, इन पर मौर्यकालीन चमकदार पॉलिश है और इनका शैफ्ट ऊपर की ओर क्रमशः पतला होता जाता है (शुंडाकार)।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ये स्तंभ मुख्यतः चुनार (उत्तर प्रदेश) के बलुआ पत्थर से निर्मित हैं। इनकी औसत ऊँचाई लगभग 40-50 फुट और वजन 50 टन तक होता था। मौर्यकालीन पॉलिश की चमक आज भी अद्वितीय मानी जाती है और इसे पुनः प्राप्त करना आधुनिक तकनीक के लिए भी दुष्कर है।
    65. निम्नलिखित में से किस उभारदार मूर्तिशिल्प (रिलीफ स्कल्प्चर) शिलालेख में अशोक के प्रस्तर रूप चित्र के साथ ‘राण्यो अशोक’ (राजा अशोक) उल्लिखित है?
    (a) कंगनहल्ली
    (b) सांची
    (c) शाहबाजगढ़ी
    (d) सोहगौरा
    I.A.S. (Pre) 2019
    उत्तर-(a)
    कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) जिले में भीमा नदी के तट पर स्थित कंगनहल्ली में एक प्राचीन बौद्ध स्तूप है। यहाँ पाषाण पर उत्कीर्ण अशोक के रूप चित्र के नीचे ‘राण्यो अशोक’ (राजा अशोक) अभिलेख अंकित है। यह अशोक का एकमात्र प्राप्त प्रस्तर रूप चित्र माना जाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कंगनहल्ली स्थल की खुदाई 1994 से 2004 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई थी। यहाँ प्राप्त शिल्पकृतियाँ सातवाहन काल (लगभग पहली-दूसरी शताब्दी ईसवी) की हैं और इनमें बुद्ध के जीवन से संबंधित अनेक दृश्य चित्रित हैं।
    66. निम्नलिखित में से किस एक अभिलेख में अशोक के व्यक्तिगत नाम का उल्लेख मिलता है?
    (a) कालसी
    (b) रुम्मिनदेई
    (c) विशिष्ट कलिंग राजादेश
    (d) मास्की
    I.A.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(d)
    अशोक के अधिकांश अभिलेखों में उसे केवल ‘देवानामप्रिय पियदस्सी’ कहा गया है। किंतु मास्की, गुर्जरा, नेत्तूर और उडेगोलम के लघु शिलालेखों में ‘अशोक’ नाम स्पष्ट रूप से अंकित है। मास्की (कर्नाटक) के अभिलेख की खोज 1915 ई. में हुई थी, जिसने पहली बार ‘देवानामप्रिय’ को निश्चित रूप से अशोक से जोड़ा।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इससे पहले विद्वान ‘देवानामप्रिय’ की पहचान को लेकर अनिश्चित थे। मास्की अभिलेख की खोज से पहले जेम्स प्रिंसेप ने 1837 ई. में ब्राह्मी लिपि को पढ़ने में सफलता पाई थी, जो अशोक के अभिलेखों को समझने में मील का पत्थर साबित हुई।
    67. निम्नलिखित अभिलेखों में से किस लेख में ‘अशोक’ नाम उल्लिखित है?
    (a) भाब्रू अभिलेख
    (b) तेरहवां शिलालेख
    (c) रुम्मिनदेई स्तंभ लेख
    (d) मास्की का लघु शिलालेख
    R.A.S. / R.T.S. (Pre) 2007
    उत्तर-(d)
    मास्की (कर्नाटक के रायचूर जिले में स्थित) का लघु शिलालेख उन चुनिंदा अभिलेखों में से एक है जिनमें ‘अशोक’ नाम सीधे उल्लिखित है। शेष अधिकांश अभिलेखों में केवल ‘देवानामप्रिय पियदस्सी’ उपाधि का प्रयोग हुआ है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के व्यक्तिगत नाम का उल्लेख करने वाले चार स्थल हैं — मास्की, गुर्जरा, नेत्तूर और उडेगोलम। इनमें से नेत्तूर और उडेगोलम भी कर्नाटक में ही स्थित हैं, जो दर्शाता है कि दक्षिण भारत में अशोक की पहचान स्पष्ट रूप से नाम सहित की जाती थी।
    68. निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें अशोक का नामोल्लेख हुआ है?
    (a) गुर्जरा में
    (b) अहरौरा में
    (c) ब्रह्मगिरि में
    (d) सारनाथ में
    U.P. P.C.S. (Pre) 2015
    उत्तर-(a)
    गुर्जरा (मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित) के लघु शिलालेख में अशोक का नाम स्पष्टतः अंकित है। यह उन चार अभिलेखों में से एक है जिनमें ‘अशोक’ नाम प्रत्यक्ष रूप से मिलता है — शेष हैं मास्की, नेत्तूर और उडेगोलम।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गुर्जरा अभिलेख की खोज 1954 ई. में हुई थी। यह अभिलेख ब्राह्मी लिपि में प्राकृत भाषा में लिखा गया है और इसमें अशोक की धम्म प्रचार की नीति का उल्लेख है। दतिया जिले में इस अभिलेख की उपस्थिति यह भी सिद्ध करती है कि मध्य भारत तक मौर्य साम्राज्य का विस्तार था।
    69. गुर्जरा लघु शिलालेख, जिसमें अशोक का नामोल्लेख किया गया है, कहां स्थित है?
    (a) उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में
    (b) मध्य प्रदेश के दतिया जिले में
    (c) राजस्थान के जयपुर जिले में
    (d) बिहार के चंपारन जिले में
    U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
    उत्तर-(b)
    गुर्जरा लघु शिलालेख मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित है। इसमें अशोक का नाम प्रत्यक्ष रूप से उल्लिखित है, जो इसे ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौर्य साम्राज्य में दतिया क्षेत्र ‘दशार्ण’ जनपद का हिस्सा था। गुर्जरा का यह अभिलेख इस बात का प्रमाण है कि मध्य भारत के आंतरिक क्षेत्रों तक अशोक की धम्म नीति का प्रचार-प्रसार हुआ था। यह अभिलेख छोटे आकार का होने के बावजूद ऐतिहासिक महत्व में अग्रणी है।
    70. अशोक का रुम्मिनदेई स्तंभ संबंधित है-
    (a) बुद्ध के जन्म से
    (b) बुद्ध के ज्ञान-प्राप्ति से
    (c) बुद्ध के प्रथम उपदेश से
    (d) बुद्ध के शरीर-त्याग से
    U.P.P.C.S.(SpL) (Mains) 2008
    उत्तर-(a)
    रुम्मिनदेई (वर्तमान नेपाल में लुम्बिनी) का स्तंभ लेख बुद्ध की जन्मभूमि की यात्रा के उपलक्ष्य में अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 20वें वर्ष स्थापित किया था। इस अभिलेख में उसने लुम्बिनी ग्राम का भू-राजस्व 1/8 भाग (पहले 1/6 था) कर दिया और बलि (धार्मिक कर) को पूर्णतः माफ कर दिया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लुम्बिनी में अशोक के स्तंभ के अलावा एक प्रसिद्ध मायादेवी मंदिर भी है, जहाँ बुद्ध की माता महामाया ने उन्हें जन्म दिया था। 1896 ई. में जर्मन पुरातत्वविद् डॉ. फ्यूहरर ने इस स्तंभ की खोज की थी, जिसने लुम्बिनी को बौद्ध तीर्थस्थल के रूप में पुनः स्थापित किया।
    71. अशोक के निम्न अभिलेखों में से पूर्णरूपेण धार्मिक सहिष्णुता के प्रति समर्पित कौन-सा अभिलेख है ?
    (a) शिलालेख XIII
    (b) शिलालेख XII
    (c) स्तंभलेख VII
    (d) भाब्रू लघु शिलालेख
    U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
    उत्तर-(b)
    अशोक का बारहवाँ दीर्घ शिलालेख (Rock Edict XII) विशेष रूप से धार्मिक सहिष्णुता को समर्पित है। इसमें अशोक ने सभी धार्मिक संप्रदायों के प्रति आदर और उनके सार की वृद्धि की कामना व्यक्त की है। उन्होंने “धम्म महामात्रों” (Dhamma Mahamatras) नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी जो विभिन्न संप्रदायों के बीच सौहार्द बनाए रखते थे।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसी शिलालेख में अशोक ने कहा है कि दूसरे संप्रदायों की निंदा न करके उनसे सीखने का प्रयास करना चाहिए — यह विचार आधुनिक पंथनिरपेक्षता की आधारशिला माना जाता है।
    72. निम्नलिखित में से किस शासक ने अपनी प्रजा को इस अभिलेख के माध्यम से परामर्श दिया? “कोई भी व्यक्ति जो अपने संप्रदाय को महिमा-मंडित करने की दृष्टि से अपने धार्मिक संप्रदाय की प्रशंसा करता है या अपने संप्रदाय के प्रति अत्यधिक भक्ति के कारण अन्य संप्रदायों की निंदा करता है, वह अपितु अपने संप्रदाय को गंभीर रूप से हानि पहुंचाता है।”
    (a) अशोक
    (b) समुद्रगुप्त
    (c) हर्षवर्धन
    (d) कृष्णदेव राय
    I.A.S. (Pre) 2020
    उत्तर-(a)
    प्रस्तुत उद्धरण मौर्य सम्राट अशोक के बारहवें शिलालेख (Rock Edict XII) से लिया गया है, जो धार्मिक सहिष्णुता का संदेश देता है। अशोक ने स्पष्ट किया कि दूसरे संप्रदायों की निंदा करना अंततः अपने ही पंथ को कमज़ोर करता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय है कि अशोक के अभिलेख मुख्यतः प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखे गए थे, जो उस काल की जनसामान्य की भाषा थी — इससे यह स्पष्ट होता है कि उनके संदेश सीधे आम जनता तक पहुँचाने के उद्देश्य से लिखे जाते थे। पश्चिमोत्तर भारत (आधुनिक पाकिस्तान-अफगानिस्तान क्षेत्र) में अशोक के अभिलेख खरोष्ठी और अरामाइक लिपि में भी मिले हैं।
    73. उत्तराखंड में, सम्राट अशोक के शिलालेखों की एक प्रति कहां मिली थी?
    (a) नैनीताल
    (b) पौड़ी
    (c) टिहरी
    (d) कालसी
    Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Mains) 2007
    उत्तर-(d)
    उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित कालसी (Kalsi) नामक स्थान पर अशोक के चौदह दीर्घ शिलालेखों का एक पूर्ण सेट प्राप्त हुआ है। यह शिलालेख यमुना नदी के किनारे एक विशाल शिला पर उत्कीर्ण है। यह स्थान मौर्य साम्राज्य की उत्तर-पश्चिमी सीमा का प्रतिनिधित्व करता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कालसी के शिलालेख में यवन राजाओं (ग्रीक शासकों) का उल्लेख मिलता है, जो अशोक के अंतरराष्ट्रीय राजनयिक संबंधों का प्रमाण है। इसकी खोज सर्वप्रथम 1860 में ब्रिटिश अधिकारी फॉरेस्ट ने की थी।
    74. निम्नलिखित में से किस दक्षिणी राज्य का उल्लेख अशोक के अभिलेखों में नहीं है?
    (a) चोल
    (b) पाण्ड्य
    (c) सतियपुत्त
    (d) सातवाहन
    U.P.P.C.S. (Mains) 2005
    उत्तर-(d)
    अशोक के दूसरे और तेरहवें शिलालेख में जिन दक्षिणी राज्यों का उल्लेख मिलता है, वे हैं — चोल, पाण्ड्य, सतियपुत्त, केरलपुत्त और ताम्रपर्णी (श्रीलंका)। इनमें सातवाहन राज्य का कोई उल्लेख नहीं है क्योंकि सातवाहन वंश का उदय मौर्यों के पतन के बाद लगभग 230 ई.पू. के आसपास हुआ था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उल्लेखनीय है कि “सतियपुत्त” की पहचान आधुनिक कर्नाटक के “सत्यपुत्र” जनजाति या क्षेत्र से की जाती है, और यह अशोक के अभिलेखों में उल्लिखित सबसे कम चर्चित दक्षिणी राज्य है।
    75. कलिंग युद्ध की विजय तथा क्षतियों का वर्णन अशोक के किस शिलालेख (Rock Edict) में है?
    (a) शिलालेख I
    (b) शिलालेख II
    (c) शिलालेख XII
    (d) शिलालेख XIII
    I.A.S. (Pre) 1998
    उत्तर-(d)
    अशोक के तेरहवें शिलालेख (Rock Edict XIII) में कलिंग युद्ध का विस्तृत विवरण मिलता है। यह युद्ध 261 ई.पू. में हुआ, जो अशोक के राज्याभिषेक के लगभग 8 वर्ष बाद था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इस शिलालेख में उल्लेख है कि युद्ध में लगभग 1 लाख लोग मारे गए, 1.5 लाख बंदी बनाए गए और उससे भी अधिक लोग अन्य कारणों से काल-कवलित हुए। इस भीषण नरसंहार से व्यथित होकर अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया और “भेरीघोष” (युद्ध की नगाड़ेबाजी) की जगह “धम्मघोष” (धर्म का प्रचार) को अपनी नीति बनाया। यह शिलालेख प्राचीन भारत में युद्ध के परिणामस्वरूप किसी शासक के हृदय-परिवर्तन का सबसे प्रामाणिक दस्तावेज माना जाता है।
    76. कलिंग युद्ध का विवरण हमें ज्ञात होता है-
    (a) 13वें शिलालेख द्वारा
    (b) रुम्मिनदेई स्तंभ लेख द्वारा
    (c) ह्वेनसांग के विवरण द्वारा
    (d) प्रथम लघु शिलालेख द्वारा
    U.P.P.C.S (Pre) 2016
    उत्तर-(a)
    कलिंग युद्ध का प्रामाणिक विवरण अशोक के तेरहवें (XIII) शिलालेख से प्राप्त होता है। रुम्मिनदेई स्तंभलेख में बुद्ध के जन्मस्थान लुंबिनी की यात्रा का उल्लेख है, ह्वेनसांग सातवीं शताब्दी ई. का चीनी यात्री था जिसका कालिंग युद्ध से कोई संबंध नहीं, और प्रथम लघु शिलालेख में अशोक के बौद्ध धर्म अपनाने का संदर्भ है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कलिंग (वर्तमान ओडिशा) की विजय के बाद यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य में मिला लिया गया और तोशाली इसकी राजधानी बनाई गई, जहाँ एक कुमार (राजकुमार) को प्रशासक नियुक्त किया गया।
    77. अशोक के जो प्रमुख शिलालेख (Rock Edicts) संगम राज्य के विषय में हमें बताते हैं, उनमें सम्मिलित हैं-
    (a) I और X शिलालेख
    (b) I और XI शिलालेख
    (c) II और XIII शिलालेख
    (d) II और XIV शिलालेख
    I.A.S. (Pre) 1998
    उत्तर-(c)
    अशोक के द्वितीय (II) और त्रयोदश (XIII) शिलालेखों में संगम राज्यों — चोल, पाण्ड्य, सतियपुत्त, केरलपुत्त तथा ताम्रपर्णी (श्रीलंका) — का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। दूसरे शिलालेख में इन राज्यों में पशु-चिकित्सा और मानव-चिकित्सा की व्यवस्था का वर्णन है, जो अशोक की प्रजा-कल्याण नीति को दर्शाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ये संगम राज्य मौर्य साम्राज्य के अधीन नहीं थे, बल्कि अशोक के पड़ोसी मित्र-राज्य थे — यह दक्षिण भारत में मौर्य साम्राज्य की दक्षिणी सीमा निर्धारित करने में भी सहायक है।
    78. अशोक का समकालीन तुरमय कहां का राजा था?
    (a) मिस्र
    (b) कोरिंथ
    (c) मेसीडोनिया
    (d) सीरिया
    U.P.P.C.S. (Pre) 2012
    उत्तर-(a)
    अशोक के तेरहवें शिलालेख में उल्लिखित “तुरमय” या “तुरमाय” की पहचान टालेमी II फिलाडेल्फस से की जाती है, जो मिस्र (Egypt) का शासक था और उसने 285-246 ई.पू. तक शासन किया। अशोक ने उसके पास धम्म-दूत भेजे थे।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसी शिलालेख में पाँच यवन राजाओं का उल्लेख है: अंतियोक (सीरिया), तुरमय (मिस्र), अंतकिनी (मकदूनिया), मग (साइरीन) और अलिक सुंदर (एपीरस)। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि टालेमी II फिलाडेल्फस अलेक्जेंड्रिया के प्रसिद्ध पुस्तकालय का महान संरक्षक था और उसके काल में ही ग्रीक-मिस्री संस्कृति का अद्भुत समन्वय हुआ था।
    79. टालेमी फिलाडेल्फस, जिसके साथ अशोक के राजनय संबंध थे, कहां का शासक था?
    (a) साइरोन
    (b) मिस्र
    (c) मकदूनिया
    (d) सीरिया
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
    उत्तर-(b)
    टालेमी II फिलाडेल्फस मिस्र का शासक था। अशोक के तेरहवें शिलालेख में उसे “तुरमय” नाम से संबोधित किया गया है। अशोक ने उसके दरबार में बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु दूत भेजे थे। उल्लेखनीय है कि अशोक और टालेमी II दोनों लगभग एक ही काल में शासन कर रहे थे — यह प्राचीन भारत और भूमध्यसागरीय सभ्यता के बीच राजनयिक संपर्क का दुर्लभ प्रमाण है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसके अतिरिक्त, अशोक के दूतों के मिस्र जाने का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि मौर्य साम्राज्य की राजनयिक पहुँच केवल एशिया तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह अफ्रीका महाद्वीप तक भी विस्तृत थी।
    80. निम्नलिखित में से किस राजवंश के शासकों के सुदूर देशों जैसे सीरिया एवं मिस्र के साथ राजकीय संबंध थे?
    (a) चोल
    (b) गुप्त
    (c) मौर्य
    (d) पल्लव
    U.P.P.S.C. (GIC) 2010
    उत्तर-(c)
    मौर्य वंश, विशेषतः सम्राट अशोक, के सीरिया, मिस्र, मकदूनिया, साइरीन और एपीरस जैसे सुदूर देशों के साथ राजनयिक संबंधों का विस्तृत प्रमाण तेरहवें शिलालेख में मिलता है। चंद्रगुप्त मौर्य ने भी सेल्यूकस निकेटर (सीरिया के यूनानी शासक) के साथ संधि की थी और उसके राजदूत मेगस्थनीज को पाटलिपुत्र में रहने की अनुमति दी थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह भी उल्लेखनीय है कि इन राजनयिक संबंधों के साक्ष्य के रूप में मौर्यकालीन पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) में खुदाई में ग्रीक शैली के खंभों के अवशेष और विदेशी मूल की कलाकृतियाँ भी मिली हैं।
    81. मेगस्थनीज दूत था –
    (a) सेल्यूकस का
    (b) सिकंदर का
    (c) डेरियस का
    (d) यूनानियों का
    63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
    उत्तर-(a)
    मेगस्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था, जिसे उसने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। सेल्यूकस यूनानी सेनापति सिकंदर के उत्तराधिकारियों में से एक था जिसने सीरिया पर शासन किया। मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र में कई वर्षों तक निवास किया और वहाँ की राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक स्थितियों का सूक्ष्म अवलोकन किया। उसने अपने अनुभवों को ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ में संकलित किया, जो यद्यपि मूल रूप में अब उपलब्ध नहीं है, किंतु परवर्ती यूनानी लेखकों के उद्धरणों के माध्यम से ज्ञात है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज से पूर्व चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में एक अन्य यूनानी दूत भी आ चुका था जिसका नाम डेमेकोस था। इसके अतिरिक्त, मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक में पाटलिपुत्र को उस काल का सबसे बड़ा और समृद्ध नगर बताया था, जो गंगा और सोन नदियों के संगम पर स्थित था।
    82. मेगस्थनीज ने भारतीय समाज को कितनी श्रेणियों में विभाजित किया ?
    (a) चार
    (b) पांच
    (c) छः
    (d) सात
    46th B.P.S.C. (Pre) 2003
    उत्तर-(d)
    मेगस्थनीज ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘इंडिका’ में मौर्यकालीन भारतीय समाज को सात श्रेणियों में वर्गीकृत किया है— (1) दार्शनिक/ब्राह्मण, (2) कृषक, (3) पशुपालक व आखेटक, (4) कारीगर व शिल्पी, (5) योद्धा, (6) निरीक्षक और (7) सभासद/मंत्री। उसने यह भी उल्लेख किया कि कोई भी व्यक्ति अपनी श्रेणी से बाहर विवाह नहीं कर सकता था और न ही दूसरी श्रेणी का व्यवसाय अपना सकता था। उल्लेखनीय रूप से मेगस्थनीज ने भारत में दास प्रथा के अस्तित्व का उल्लेख नहीं किया, जो कि विवादास्पद है क्योंकि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में दासों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज का यह वर्गीकरण जाति-आधारित नहीं बल्कि व्यवसाय-आधारित था। उसने यह भी लिखा कि भारतीय लोग ईमानदार होते हैं और उनमें चोरी की प्रवृत्ति बहुत कम है — उसके अनुसार मौर्यकालीन भारत में घरों में ताले नहीं लगाए जाते थे।
    83. कथन (a) : मौर्यकालीन शासकों ने धार्मिक आधार पर भू-अनुदान नहीं दिया था।
    कारण (R) : भू-अनुदान के विरुद्ध कृषकों ने विद्रोह किया।
    नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
    (a) (a) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (a) की सही व्याख्या है।
    (b) (a) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (a) की सही व्याख्या नहीं है।
    (c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
    (d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
    U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
    उत्तर-(c)
    मौर्य शासकों ने धार्मिक उद्देश्यों से भूमि दान करने की परंपरा नहीं अपनाई थी। धार्मिक आधार पर भूमिदान का सबसे प्राचीन प्रमाण सातवाहन काल के अभिलेखों से मिलता है, जो मौर्योत्तर काल में आते हैं। अतः कथन (A) पूर्णतः सही है। किंतु कारण (R) असत्य है, क्योंकि इतिहास में ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जो यह बताता हो कि भू-अनुदान के विरोध में किसानों ने कोई संगठित विद्रोह किया हो। मौर्यकाल में भूमि पर राज्य का स्वामित्व होता था और राज्य ही कृषि की देख-रेख करता था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौर्यकाल में सीताध्यक्ष नामक अधिकारी राजकीय भूमि (सीता भूमि) की देखरेख करता था। भूमि का वर्गीकरण कई श्रेणियों में होता था जैसे — क्षेत्र (कृषि भूमि), वन, खान आदि, और इन सब पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण था।
    84. अशोक के ‘धम्म’ का मूल संदेश क्या है?
    (a) राजा के प्रति वफादारी
    (b) शांति एवं अहिंसा
    (c) बड़ों का सम्मान
    (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
    63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
    उत्तर-(d)
    अशोक का ‘धम्म’ किसी एक धर्म विशेष से नहीं, बल्कि एक व्यापक नैतिक आचार संहिता से संबंधित था। अशोक के द्वितीय और सप्तम शिलालेखों में धम्म के मूल तत्त्वों का उल्लेख है — जिनमें पाप से बचना, दया करना, दान देना, सत्य बोलना, मन की पवित्रता, व्यवहार में मधुरता और साधुता शामिल हैं। इस प्रकार अशोक के धम्म में शांति, अहिंसा, बड़ों का सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता — सभी तत्त्व एक साथ समाहित हैं। इसीलिए सही उत्तर विकल्प (d) है, क्योंकि धम्म का संदेश किसी एक बिंदु तक सीमित नहीं था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक ने ‘धम्म महामात्र’ नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जिनका कार्य धम्म के प्रचार-प्रसार की देखरेख करना था। इसके अलावा, अशोक ने श्रीलंका, सीरिया, मिस्र, मकदूनिया और साइरीन जैसे देशों में भी धम्म प्रचारक भेजे थे।
    85. निम्न में से अशोक के किस अभिलेख में पारंपरिक अवसरों पर पशु बलि पर रोक लगाई गई है, ऐसा लगता है कि यह पाबंदी पशुओं के वध पर थी ?
    (a) शिला अभिलेख I
    (b) स्तंभ अभिलेख V
    (c) शिला अभिलेख IX
    (d) शिला अभिलेख XI
    R.A. S./R.T.S. (Pre) 2013
    उत्तर-(b)
    अशोक के पाँचवें स्तंभ लेख में विस्तारपूर्वक उन जीव-जंतुओं की सूची दी गई है जिनके वध पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसमें तोते, मैना, जंगली बत्तख, चमगादड़, मछली, कछुआ, साही, बैल, कबूतर आदि अनेक जीव शामिल थे। साथ ही यह भी निर्देश था कि पर्व और त्योहार के विशेष दिनों जैसे तिष्य, पुनर्वसु और ऋतुओं की पूर्णिमा को पशुओं को बधिया न किया जाए। प्रथम शिलालेख में भी पशु बलि के विरुद्ध उल्लेख मिलता है, किंतु परंपरागत अवसरों पर विस्तृत पाबंदी का विशेष विवरण पाँचवें स्तंभ लेख में ही मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के प्रथम शिलालेख में उल्लेख है कि पूर्व में राजमहल की रसोई में प्रतिदिन सैकड़ों पशु मारे जाते थे, किंतु अभिलेख लिखे जाने के समय केवल तीन पशु — दो मोर और एक मृग — मारे जाते थे। अशोक ने राज्याभिषेक के 26वें वर्ष यह आदेश जारी किया था।
    86. निम्नलिखित प्राचीन भारतीय अभिलेखों में से कौन-सा एक खाद्यान्न को देश में संकटकाल में उपयोग हेतु सुरक्षित रखने के बारे में प्राचीनतम शाही आदेश है?
    (a) सोहगौरा ताम्रपत्र
    (b) अशोक का रुम्मिनदेई स्तंभलेख
    (c) प्रयाग प्रशस्ति
    (d) चंद्र का मेहरौली स्तंभ शिलालेख
    I.A.S. (Pre) 1998
    उत्तर-(a)
    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से प्राप्त सोहगौरा ताम्रपत्र अभिलेख तथा बांग्लादेश के बोगरा जिले से प्राप्त महास्थान अभिलेख — ये दोनों मौर्यकालीन प्राकृत भाषा में रचित हैं और ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी की ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं। सोहगौरा ताम्रपत्र में अकाल जैसी आपदा की स्थिति में अन्न भंडारण और राहत वितरण से संबंधित निर्देश हैं, जो इसे प्राचीनतम ज्ञात शाही आदेश बनाते हैं। इस अकाल की ऐतिहासिक पुष्टि जैन ग्रंथों से भी होती है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सोहगौरा ताम्रपत्र में ‘धान्यागार’ यानी अन्न भंडार गृहों के निर्माण का उल्लेख है। यह अभिलेख इस दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि यह प्राचीन भारत में राज्य द्वारा आपदा प्रबंधन की व्यवस्था का प्रथम दस्तावेजी प्रमाण है।
    87. कथन (a) : अशोक ने कलिंग को मौर्य साम्राज्य में जोड़ लिया था।
    कारण (R) : कलिंग दक्षिण भारत को जाने वाले स्थलीय एवं समुद्री मार्गों को नियंत्रित करता था।
    सही
    कूट :
    उत्तर का चुनाव, नीचे दिए गए कूट के प्रयोग से करें-
    (a) (a) और (R) दोनों सही हैं और (R), (a) का सही स्पष्टीकरण है।
    (b) (a) और (R) दोनों सही हैं और (R), (a) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
    (c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
    (d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
    U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
    उत्तर-(a)
    अशोक ने अपने राज्याभिषेक के लगभग 8 वर्ष पश्चात (261 ई.पू. के आसपास) कलिंग पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की और उसे मौर्य साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया। कलिंग का भौगोलिक स्थान अत्यंत सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण था — वह दक्षिण भारत को जोड़ने वाले स्थल मार्गों के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी के समुद्री व्यापार मार्गों को भी नियंत्रित करता था। यदि कलिंग स्वतंत्र रहता, तो मगध साम्राज्य के लिए दक्षिण से व्यापारिक संपर्क बनाना कठिन होता। अतः दोनों — कथन और कारण — सत्य हैं, और कारण, कथन की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कलिंग युद्ध में लगभग 1 लाख लोग मारे गए और डेढ़ लाख से अधिक लोग बंदी बनाए गए। इस भीषण नरसंहार से व्यथित होकर अशोक ने युद्ध नीति का त्याग कर ‘धम्म विजय’ की नीति अपनाई — यह परिवर्तन विश्व इतिहास में एक अद्वितीय घटना मानी जाती है।
    88. प्रसिद्ध यूनानी राजदूत मेगस्थनीज भारत में किसके दरबार में आए थे?
    (a) अशोक
    (b) हर्षवर्धन
    (c) चंद्रगुप्त मौर्य
    (d) हेमू
    R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(c)
    मेगस्थनीज को सेल्यूकस निकेटर ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत के रूप में भेजा था। यह नियुक्ति 305 ई.पू. के आसपास हुए उस संधि समझौते के बाद हुई जिसमें सेल्यूकस को पश्चिमोत्तर भारत के कुछ प्रदेश चंद्रगुप्त को सौंपने पड़े और बदले में 500 हाथी प्राप्त हुए। मेगस्थनीज ने मौर्य राजधानी पाटलिपुत्र में निवास किया और वहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य शक्ति एवं सामाजिक जीवन का विस्तृत विवरण ‘इंडिका’ में लिखा।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र नगर की तुलना तत्कालीन विश्व के महानतम नगरों से की थी। उसके अनुसार पाटलिपुत्र में एक विशाल राज-प्रासाद था जो ईरान के पर्सेपोलिस से भी अधिक भव्य था — यद्यपि यह उसका व्यक्तिगत मत था।
    89. किसके शासनकाल में मेगस्थनीज भारत आया?
    (a) अशोक
    (b) हर्षवर्धन
    (c) चंद्रगुप्त मौर्य
    (d) कुमारगुप्त
    U.P.P.C.S. (Mains) 2017
    उत्तर-(c)
    मेगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में भारत आया था। चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 321 ई.पू. से 297 ई.पू. तक शासन किया। मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) में निवास करते हुए मौर्य प्रशासन, नगर व्यवस्था और समाज का अध्ययन किया। उसकी रचना ‘इंडिका’ बाद के लेखकों जैसे डायोडोरस, स्ट्रेबो और एरियन के उद्धरणों के माध्यम से आज आंशिक रूप में उपलब्ध है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज के उत्तराधिकारी के रूप में डेमेकोस, बिंदुसार के दरबार में यूनानी राजदूत बनकर आए थे। इसी प्रकार डायोनिसस नामक एक अन्य यूनानी दूत अशोक के काल में भारत आया था — इस प्रकार तीनों प्रमुख मौर्य शासकों के दरबार में यूनानी राजदूत आए।
    90. मौर्य समाज का सात वर्गों में विभाजन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है –
    (a) कौटिल्य के अर्थशास्त्र में
    (b) अशोक के शिलालेखों में
    (c) पुराणों में
    (d) मेगस्थनीज की पुस्तक ‘इंडिका’ में
    63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
    उत्तर-(d)
    मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में मौर्यकालीन समाज को सात वर्गों में विभाजित किया है — (1) दार्शनिक, (2) कृषक, (3) पशुपालक एवं आखेटक, (4) कारीगर एवं शिल्पी, (5) योद्धा, (6) निरीक्षक, और (7) सभासद। इसमें से कृषक सबसे बड़ा वर्ग था। यह वर्गीकरण भारतीय वर्ण व्यवस्था से भिन्न था क्योंकि यह व्यवसाय पर आधारित था, जन्म पर नहीं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज ने यह भी लिखा कि भारत में अकाल कभी नहीं पड़ता क्योंकि यहाँ दो फसलें होती हैं। यह अतिरंजित विवरण अवश्य है, परंतु इससे मौर्यकालीन कृषि की समृद्धि का पता चलता है। उल्लेखनीय है कि मेगस्थनीज ने कौटिल्य का कोई उल्लेख नहीं किया, जो इतिहासकारों के लिए एक रहस्य बना हुआ है।
    91. मेगस्थनीज की पुस्तक का नाम क्या है?
    (a) अर्थशास्त्र
    (b) ऋग्वेद
    (c) पुराण
    (d) इंडिका
    47th B.P.S.C. (Pre) 2005
    Uttarakhand U.D.A./ L.D.A. (Mains) 2007
    56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
    M.P.P.C.S. (Pre) 2015
    उत्तर-(d)
    मेगस्थनीज एक यूनानी राजदूत था जिसे सेल्यूकस निकेटर ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। उसने पाटलिपुत्र में रहकर मौर्य साम्राज्य का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और अपने अनुभवों को ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ में लिपिबद्ध किया। यह ग्रंथ मौर्यकालीन भारत के इतिहास का एक अमूल्य विदेशी स्रोत है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज की मूल ‘इंडिका’ अब उपलब्ध नहीं है — यह ग्रंथ खंडित हो चुका है और इसके अंश केवल बाद के यूनानी लेखकों जैसे स्ट्रैबो, डियोडोरस और एरियन की रचनाओं में उद्धरण के रूप में मिलते हैं। मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक में चंद्रगुप्त मौर्य की शक्तिशाली सेना का उल्लेख किया है, जिसमें 6 लाख पैदल सैनिक, 30,000 घुड़सवार और 9,000 हाथी थे।
    92. निम्नलिखित में से किस स्रोत में उल्लिखित है कि प्राचीन भारत में दासता नहीं थी?
    (a) अर्थशास्त्र
    (b) मुद्राराक्षस
    (c) मेगस्थनीज की इंडिका
    (d) वायुपुराण
    U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2013
    उत्तर-(c)
    मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में स्पष्ट रूप से लिखा है कि भारत में दासता की प्रथा नहीं थी और सभी भारतीय स्वतंत्र थे। यह तथ्य उल्लेखनीय है क्योंकि उसी काल में यूनान और रोम में दास प्रथा बहुत प्रचलित थी। हालाँकि, कौटिल्य के अर्थशास्त्र में दासों के प्रकार और उनके अधिकारों का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जो मेगस्थनीज के कथन से भिन्न है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौटिल्य के अर्थशास्त्र में दासों की 9 श्रेणियाँ बताई गई हैं, जैसे — युद्धबंदी, ऋण न चुकाने वाले, जन्मजात दास आदि। इससे स्पष्ट होता है कि मेगस्थनीज का यह कथन या तो उसकी सीमित जानकारी पर आधारित था या भारतीय दासता यूनानी दासता से गुणात्मक रूप से भिन्न थी।
    93. वह स्रोत जिसमें पाटलिपुत्र के प्रशासन का वर्णन उपलब्ध है-
    (a) दिव्यावदान
    (b) अर्थशास्त्र
    (c) इंडिका
    (d) अशोक शिलालेख
    46th B.P.S.C. (Pre) 2003
    उत्तर-(c)
    मेगस्थनीज की ‘इंडिका’ में मौर्यकालीन राजधानी पाटलिपुत्र के नगर प्रशासन का विस्तृत एवं व्यवस्थित विवरण मिलता है। उसके अनुसार, पाटलिपुत्र का प्रशासन 30 सदस्यों वाली एक समिति द्वारा संचालित होता था, जो 6 उप-समितियों में विभाजित थी और प्रत्येक में 5-5 सदस्य थे। इन समितियों के कार्यों में उद्योग-धंधों की देखरेख, विदेशियों की व्यवस्था, जन्म-मृत्यु का पंजीकरण, व्यापार नियंत्रण, निर्मित वस्तुओं की जाँच और बिक्री कर वसूली शामिल थे।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पाटलिपुत्र गंगा और सोन नदियों के संगम पर स्थित था और मेगस्थनीज ने इसे विश्व के सबसे बड़े और सुंदर नगरों में से एक बताया। उसके अनुसार नगर की लंबाई 80 स्टेडिया (लगभग 14.8 किमी) और चौड़ाई 15 स्टेडिया (लगभग 2.8 किमी) थी, जो चारों ओर से एक गहरी खाई से घिरी थी।
    94. निम्नलिखित में से कौन स्रोत मौर्यों के नगर प्रशासन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है?
    (a) कौटिल्य का अर्थशास्त्र
    (b) मेगस्थनीज की इंडिका
    (c) विशाखदत्त का मुद्राराक्षस
    (d) अशोक का अभिलेख
    U.P.P.C.S. (Mains) 2009
    उत्तर-(b)
    मेगस्थनीज की ‘इंडिका’ मौर्य नगर प्रशासन के बारे में सर्वाधिक विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने वाला स्रोत है। इसमें पाटलिपुत्र की 6 समितियों की कार्यप्रणाली का सुस्पष्ट विवरण है। यद्यपि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में प्रशासन के सैद्धांतिक पहलुओं का वर्णन मिलता है, किंतु नगर प्रशासन का प्रत्यक्षदर्शी विवरण केवल ‘इंडिका’ में ही उपलब्ध है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज द्वारा वर्णित छठी समिति बिक्री कर (Sales Tax) वसूलती थी, जो मूल्य का दसवाँ भाग (10%) होता था। इसके अतिरिक्त, तीसरी समिति जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन करती थी — यह प्राचीन भारत में नागरिक पंजीकरण की एक अत्यंत उन्नत व्यवस्था का प्रमाण है।
    95. मौर्यकाल में टैक्स को छुपाने (चोरी) के लिए इनमें से क्या दण्ड दिया जाता था?
    (a) मृत्युदण्ड
    (b) सामानों की कुर्की (जब्ती)
    (c) कारावास
    (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
    Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
    उत्तर-(a)
    मेगस्थनीज की ‘इंडिका’ के अनुसार, पाटलिपुत्र में बिक्री कर वसूलने का कार्य छठी नगर-समिति करती थी। विक्रय वस्तु के मूल्य का दसवाँ भाग (1/10) कर के रूप में लिया जाता था। यदि कोई व्यापारी इस कर की चोरी करते हुए पकड़ा जाता था, तो उसे मृत्युदण्ड दिया जाता था — यह दंड-व्यवस्था की अत्यंत कठोर प्रकृति को दर्शाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार भी कर-चोरी को गंभीर अपराध माना जाता था। अर्थशास्त्र में ‘शुल्काध्यक्ष’ (सीमा शुल्क अधिकारी) का उल्लेख है जो व्यापार पर निगरानी रखता था। मौर्य काल में राजस्व का मुख्य स्रोत ‘भाग’ (भूमि कर), ‘बलि’ (धार्मिक कर), ‘शुल्क’ (व्यापार कर) और ‘कर’ (विशेष उपकर) थे।
    96. मौर्य समाज का विभाजन सात वर्गों में विशेष तौर पर उल्लिखित
    (a) कौटिल्य के अर्थशास्त्र में
    (b) अशोक के शिलालेख में
    (c) पुराणों में
    (d) मेगस्थनीज की इंडिका में
    U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
    उत्तर-(d)
    मेगस्थनीज ने ‘इंडिका’ में मौर्यकालीन समाज को सात वर्गों में विभाजित बताया है। यह विभाजन वर्ण-व्यवस्था पर आधारित नहीं था, बल्कि व्यवसाय और सामाजिक कार्य पर आधारित था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज ने यह भी उल्लेख किया कि ये सात वर्ग परस्पर अंतर्विवाह नहीं करते थे और न ही एक वर्ग का व्यक्ति दूसरे वर्ग का व्यवसाय अपना सकता था। उसने किसान वर्ग को सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण वर्ग बताया, जो युद्ध के समय भी खेती करता रहता था और किसी पक्ष द्वारा नहीं सताया जाता था।
    100. मौर्य काल में ‘सीता’ से तात्पर्य है-
    (a) एक देवी
    (b) एक धार्मिक संप्रदाय
    (c) राजकीय भूमि से प्राप्त आय
    (d) ऊसर भूमि
    U.P.P.C.S. (Pre) 2013
    उत्तर-(c)
    मौर्यकाल में राजकीय स्वामित्व वाली भूमि को ‘सीता भूमि’ कहा जाता था और उससे प्राप्त होने वाली आय को ‘सीता’ कहते थे। इसकी देखरेख एवं प्रबंधन के लिए ‘सीताध्यक्ष’ नामक अधिकारी नियुक्त होता था, जो कृषि विभाग का प्रमुख था। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सीता भूमि पर राज्य द्वारा दास, बंदी एवं मजदूरों से खेती करवाने का उल्लेख मिलता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अर्थशास्त्र के अनुसार, सीताध्यक्ष की जिम्मेदारी थी कि वह बीज, उपकरण और सिंचाई का प्रबंध भी करे, जिससे राज्य की कृषि आय अधिकतम हो सके। इसके अतिरिक्त, मौर्यकाल में ‘भाग’ के रूप में उपज का 1/6 भाग कर के रूप में लिया जाता था, जबकि ‘सीता’ भूमि की आय पूरी तरह राजकोष में जाती थी।
    101. मौर्य काल में भूमि कर, जो कि राज्य की आय का मुख्य स्रोत था, किस अधिकारी द्वारा एकत्रित किया जाता था?
    (a) अग्रोनोमोई
    (b) शुल्काध्यक्ष
    (c) सीताध्यक्ष
    (d) अक्राध्यक्ष
    R.A.S./R.T.S. (Pre) 2010
    उत्तर-(c)
    मौर्यकाल में भूमि कर एकत्र करने का कार्य ‘सीताध्यक्ष’ करता था, जो कृषि एवं राजकीय भूमि के प्रबंधन का प्रमुख अधिकारी था। ‘शुल्काध्यक्ष’ व्यापार एवं वाणिज्य पर कर संग्रह करता था, ‘अक्राध्यक्ष’ (आकाराध्यक्ष) खानों की देखरेख करता था, तथा ‘अग्रोनोमोई’ सड़कों के रख-रखाव और माप से संबंधित था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार मौर्यकाल में भूमि कर (भाग) सामान्यतः उपज का 1/6 भाग होता था, परंतु विशेष परिस्थितियों में यह 1/4 या 1/3 भाग तक भी हो सकता था। ‘समाहर्ता’ केंद्र स्तर पर समस्त राजस्व के संग्रह का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
    102. कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ के अनुसार, मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में निम्नलिखित न्यायालय अस्तित्व में थे-
    1.धर्ममहामात्र
    2.धर्मस्थ
    3.रज्जुक
    4.कंटकशोधन
    सही उत्तर चुनिए-
    (a) 1 एवं 2
    (b) 2 एवं 3
    (c) 1 एवं 3
    (d) 2 एवं 4
    Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014
    उत्तर-(d)
    कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था के अंतर्गत दो प्रमुख न्यायालयों का वर्णन है — ‘धर्मस्थीय’ (दीवानी न्यायालय) और ‘कंटकशोधन’ (फौजदारी न्यायालय)। धर्मस्थीय न्यायालय में ‘व्यावहारिक’ न्यायाधीश होता था, जबकि कंटकशोधन न्यायालय में ‘प्रदेष्टा’ न्यायाधीश का कार्य करता था। ‘धर्ममहामात्र’ अशोक द्वारा नियुक्त धार्मिक अधिकारी थे, न कि न्यायालय।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कंटकशोधन न्यायालय मुख्यतः बाजार में होने वाली धोखाधड़ी, मिलावट और अपराधों से संबंधित मामलों की सुनवाई करता था। अशोक के काल में ‘रज्जुक’ नामक अधिकारियों को भी न्यायिक अधिकार प्रदान किए गए थे, जो ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय का कार्य देखते थे।
    103. मौर्य मंत्रिपरिषद में निम्न में से कौन राजस्व इकठ्ठा करने से संबंधित था ?
    (a) समाहर्ता
    (b) व्यभारिका
    (c) अंतपाल
    (d) प्रदेष्टा
    U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
    उत्तर-(a)
    मौर्य मंत्रिपरिषद में ‘समाहर्ता’ राजस्व संग्रह का सर्वोच्च अधिकारी था, जो पूरे साम्राज्य में करों की वसूली और राजकोष में जमा करने की व्यवस्था देखता था। ‘अंतपाल’ सीमावर्ती दुर्गों और क्षेत्रों की रक्षा करता था, जबकि ‘प्रदेष्टा’ विषयों (कमिश्नरियों) का प्रशासनिक अधिकारी था। ‘सन्निधाता’ राजकोष एवं भंडार का संरक्षक होता था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: समाहर्ता और सन्निधाता मौर्यकाल के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अमात्यों में गिने जाते थे। कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में इन दोनों पदों के कार्यों और दायित्वों का विस्तार से वर्णन किया है। समाहर्ता 40 प्रकार के विभिन्न करों की देखरेख करता था।
    104. ‘भाग’ एवं ‘बलि’ थे-
    (a) सैनिक विभाग
    (b) राजस्व के स्रोत
    (c) धार्मिक अनुष्ठान
    (d) प्रशासकीय विभाग
    U.P.P.C.S. (Pre) 1996
    उत्तर-(b)
    प्राचीन भारत में ‘भाग’ और ‘बलि’ दोनों राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत थे। ‘भाग’ भूमि से उत्पन्न उपज का वह हिस्सा था जो राजा को कर के रूप में दिया जाता था — सामान्यतः यह उपज का 1/6 भाग होता था। ‘बलि’ एक अन्य प्रकार का कर था जो प्रजा से स्वैच्छिक अथवा अनिवार्य रूप से लिया जाता था। वैदिक काल में ‘बलि’ स्वैच्छिक भेंट थी, किंतु बाद के काल में यह अनिवार्य कर बन गया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौर्यकाल में ‘हिरण्य’ (नकद कर) और ‘कर’ (व्यापारिक कर) भी राजस्व के अन्य प्रमुख स्रोत थे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राज्य की आय के लगभग 40 विभिन्न स्रोतों का उल्लेख किया गया है।
    105. मौर्य काल में ‘एग्रोनोमोई’ अधिकारी निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से संबंधित थे ?
    (a) माप और तौल
    (b) प्रशासन प्रबंधन
    (c) मार्ग निर्माण
    (d) राजस्व प्रबंधन
    U.P.P.C.S. (Pre) 2020
    उत्तर-(c)
    मेगस्थनीज द्वारा उल्लिखित ‘एग्रोनोमोई’ (Agronamoi) अधिकारी मार्ग निर्माण एवं रख-रखाव से मुख्यतः संबंधित थे। ये अधिकारी सड़कों पर प्रत्येक 10 स्टेडिया (लगभग 1.85 किमी) की दूरी पर पत्थर के मील-स्तंभ लगवाते थे। इसके अलावा वे सिंचाई सुविधाओं के पर्यवेक्षण, भूमि की माप और स्थानीय न्यायिक कार्य भी करते थे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (c) माना है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: एग्रोनोमोई का उल्लेख मेगस्थनीज की पुस्तक ‘इंडिका’ में मिलता है। ये अधिकारी नगर के बाहरी क्षेत्र में कार्य करते थे, जबकि नगर के भीतर ‘एस्टीनोमोई’ (Astynomoi) छह समितियों के माध्यम से नगर प्रशासन का कार्य देखते थे।
    106. निम्नलिखित में से कौन मौर्ययुगीन अधिकारी तौल-माप का प्रभारी था?
    (a) पौतवाध्यक्ष
    (b) पण्याध्यक्ष
    (c) सीताध्यक्ष
    (d) सूनाध्यक्ष
    U.P.P.C.S. (Mains) 2012
    उत्तर-(a)
    मौर्यकाल में ‘पौतवाध्यक्ष’ तौल-माप (Weights and Measures) विभाग का प्रमुख अधिकारी था। वह यह सुनिश्चित करता था कि बाजारों में प्रयुक्त बाट और माप मानक एवं सही हों। ‘पण्याध्यक्ष’ वाणिज्य एवं व्यापार विभाग का प्रभारी था, ‘सूनाध्यक्ष’ बूचड़खाने और पशु-वध से संबंधित था, तथा ‘सीताध्यक्ष’ कृषि भूमि का अधिकारी था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार पौतवाध्यक्ष को यह अधिकार था कि वह गलत तराजू या बाट का उपयोग करने वाले व्यापारियों पर भारी जुर्माना लगाए। मानक बाटों और मापों को प्रत्येक 4 महीने में एक बार जाँचा और प्रमाणित किया जाता था।
    107. ‘पंकोदकसन्निरोधे’ मौर्य प्रशासन द्वारा लिया जाने वाला जुर्माना था-
    (a) पीने के पानी को गंदा करने पर
    (b) सड़क पर कीचड़ फैलाने पर
    (c) कूड़ा फेंकने पर
    (d) मंदिर को गंदा करने पर
    R.A.S. / R.T.S. (Pre) (Re-Exam) 2013
    उत्तर-(b)
    ‘पंकोदकसन्निरोधे’ मौर्य प्रशासन में सड़क पर जल और कीचड़ एकत्र करने अथवा फेंकने पर लगाया जाने वाला दंड (जुर्माना) था। यह दर्शाता है कि मौर्यकाल में नगर स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन बहुत सचेत था। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में इस प्रकार के अनेक जुर्मानों का उल्लेख है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अर्थशास्त्र में नगर सफाई के लिए विस्तृत नियम दिए गए हैं — घर के सामने गंदगी फेंकने पर 1/8 पण, श्मशान के पास गंदगी करने पर अधिक दंड का प्रावधान था। नगर प्रशासन की छह समितियों में से एक समिति विशेष रूप से विदेशियों की देखभाल और नगर के भ्रमण की व्यवस्था करती थी, जो मौर्यकाल के सुव्यवस्थित नगर प्रशासन का प्रमाण है।
    108. मौर्य काल में शिक्षा का सर्वाधिक प्रसिद्ध केंद्र था-
    (a) वैशाली
    (b) नालंदा
    (c) तक्षशिला
    (d) उज्जैन
    47th B.P.S.C. (Pre) 2005
    Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010
    उत्तर-(c)
    मौर्यकाल में तक्षशिला (वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिंडी के निकट) शिक्षा का सर्वाधिक प्रसिद्ध केंद्र था। यहाँ वेद, व्याकरण, दर्शन, चिकित्साशास्त्र, राजनीति एवं धनुर्विद्या आदि की शिक्षा दी जाती थी। स्वयं कौटिल्य (चाणक्य) तक्षशिला में अध्ययन कर चुके थे। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्तकाल में हुई थी, अतः वह मौर्यकाल की संस्था नहीं थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तक्षशिला विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। यहाँ 16 वर्ष की आयु के बाद प्रवेश मिलता था और एक विद्यार्थी औसतन 8 वर्ष तक शिक्षा ग्रहण करता था। यहाँ एक साथ हजारों की संख्या में छात्र अध्ययन करते थे और यूनान, चीन, बेबीलोन आदि देशों से भी विद्यार्थी आते थे।
    109. मौर्य नरेशों के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन सही है? उन्होंने विकास किया था-
    A. संस्कृति, कला व साहित्य B. सोने के सिक्के
    C. प्रांतीय विभाजन D. हिंदुकुश तक साम्राज्य
    (a) केवल A
    (b) केवल B
    (c) केवल A, B, C
    (d) केवल A, C, D
    U.P.P.C.S. (Pre) 1990
    उत्तर-(d)
    मौर्य सम्राटों ने संस्कृति, कला एवं साहित्य (A), प्रांतीय विभाजन (C) और हिंदुकुश तक साम्राज्य विस्तार (D) — इन तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। अशोक के अभिलेखों में साम्राज्य के 5 प्रांत — उत्तरापथ, अवंतिरट्ठ, कलिंग, दक्षिणापथ और प्राच्य — वर्णित हैं। स्वर्ण सिक्के प्रचलित करने का श्रेय हिंद-यवन (इंडो-ग्रीक) शासकों को है, मौर्यों को नहीं। अतः कथन B असत्य है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौर्यकाल में चांदी के पंचमार्क सिक्के (आहत मुद्राएँ) प्रचलित थे, जिन्हें ‘कार्षापण’ कहा जाता था। चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस निकेटर को पराजित करके हिंदुकुश से परे का क्षेत्र भी प्राप्त किया था और बदले में 500 हाथी दिए थे।
    110. वर्तमान नगरपालिका प्रशासन का कौन-सा कार्य मौर्य काल से जारी है?
    (a) नाप-तौल के बांटों का निरीक्षण
    (b) वस्तुओं की कीमतें निर्धारित करना
    (c) जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण
    (d) शिल्पकारों का संरक्षण
    R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992
    उत्तर-(c)
    मेगस्थनीज के विवरण के अनुसार पाटलिपुत्र की नगर परिषद में 5-5 सदस्यों वाली 6 समितियाँ थीं। इनमें से तीसरी समिति जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण का कार्य करती थी। यह व्यवस्था आज भी नगरपालिका प्रशासन द्वारा जारी है। नगर का प्रमुख ‘नागरक’ या ‘पुरमुख्य’ कहलाता था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज की इन छह समितियों में से पहली समिति उद्योग-धंधों की, दूसरी विदेशियों की देखभाल की, चौथी व्यापार एवं वाणिज्य की, पाँचवीं निर्मित वस्तुओं की बिक्री की और छठी बिक्री कर वसूलने की जिम्मेदारी निभाती थी। उल्लेखनीय है कि ये छह समितियाँ नगर प्रशासन की सामूहिक रूप से जिम्मेदार थीं, कोई भी समिति अकेले निर्णय नहीं ले सकती थी।
    111. विदेशियों को भारतीय समाज में मनु द्वारा दिया गया सामाजिक स्तर था-
    (a) क्षत्रियों का
    (b) व्रात्य क्षत्रियों का
    (c) वैश्यों का
    (d) शूद्रों का
    U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
    उत्तर-(b)
    मनुस्मृति के अनुसार यवन, शक, पह्लव, चीन आदि विदेशी जातियों को “व्रात्य क्षत्रिय” की श्रेणी में रखा गया था — अर्थात ऐसे क्षत्रिय जो संस्कारों से भ्रष्ट हो गए। इससे स्पष्ट होता है कि मनु ने विदेशियों को सामाजिक व्यवस्था में पूरी तरह बाहर नहीं किया, बल्कि एक निम्नतर क्षत्रिय दर्जा दिया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मनुस्मृति में यह भी कहा गया है कि जो क्षत्रिय ब्राह्मणों की सेवा नहीं करते और वैदिक संस्कारों का पालन नहीं करते, वे धीरे-धीरे शूद्रता को प्राप्त होते हैं — इसी आधार पर विदेशी जातियों की व्याख्या की गई। इसके अलावा, चाणक्य के अर्थशास्त्र में विदेशी व्यापारियों के अधिकारों एवं कर्तव्यों का भी उल्लेख है, जो दर्शाता है कि प्राचीन भारत में विदेशियों को सीमित नागरिक दर्जा प्राप्त था।
    112. ईस्वी सन के पूर्व की कुछ शताब्दियों में निम्नलिखित में से किन शासकों ने गिरनार क्षेत्र में जल संसाधन व्यवस्था की ओर ध्यान दिया ?
    1.महापद्मनंद
    2.चंद्रगुप्त मौर्य
    3.अशोक
    4.रुद्रदामन
    नीचे के कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए –
    (a) 1, 2
    (b) 2, 3
    (c) 3, 4
    (d) 2, 3, 4
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
    उत्तर-(b)
    गिरनार (जूनागढ़, गुजरात) क्षेत्र में जल प्रबंधन की दिशा में चंद्रगुप्त मौर्य ने प्रसिद्ध सुदर्शन झील का निर्माण करवाया था। तत्पश्चात अशोक ने इस झील से सिंचाई नहरें निकलवाईं। यह जानकारी शक क्षत्रप रुद्रदामन के जूनागढ़ शिलालेख (लगभग 150 ई.) से प्राप्त होती है — यद्यपि रुद्रदामन का कार्य ईस्वी सन के बाद का है, इसलिए वह इस प्रश्न के दायरे में नहीं आता।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सुदर्शन झील का पुनरुद्धार गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त के समय (लगभग 455-467 ई.) में भी हुआ था — इसका उल्लेख जूनागढ़ से प्राप्त स्कंदगुप्त के शिलालेख में मिलता है। यह झील प्राचीन भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण कृत्रिम जलाशय परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।
    113. निम्नलिखित व्यक्ति भारत में किसी-न-किसी समय आए-
    1.फाह्यान
    2.इत्सिंग
    3.मेगस्थनीज
    4.ह्वेनसांग
    उनके आगमन का सही कालानुक्रम है-
    (a) 3, 1, 2, 4
    (b) 3, 1, 4, 2
    (c) 1, 3, 2, 4
    (d) 1, 3, 4, 2
    I.A.S. (Pre) 1999
    उत्तर-(b)
    इन चार विदेशी यात्रियों के भारत आगमन का सही कालक्रम इस प्रकार है — मेगस्थनीज (लगभग 302 ई.पू., चंद्रगुप्त मौर्य का काल) → फाह्यान (399-414 ई., चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य का काल) → ह्वेनसांग (629-645 ई., हर्षवर्धन का काल) → इत्सिंग (671-695 ई.)। मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में मौर्य साम्राज्य का विस्तृत विवरण दिया।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फाह्यान पहला चीनी यात्री था जिसने विशेष रूप से बौद्ध धर्म के तीर्थस्थलों की यात्रा के उद्देश्य से भारत आया और बौद्ध ग्रंथों की प्रतिलिपियाँ लेकर गया। ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में लगभग 5 वर्षों तक अध्ययन किया और वहाँ के आचार्य शीलभद्र से शिक्षा ग्रहण की।
    114. अंतिम मौर्य सम्राट था?
    (a) जालौक
    (b) अवंति वर्मा
    (c) नंदी वर्धन
    (d) बृहद्रथ
    48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
    उत्तर-(d)
    मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था, जिसकी हत्या 184 ई.पू. में उसके ही सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने सैनिकों की परेड के दौरान की थी। इस हत्या के बाद पुष्यमित्र ने शुंग वंश की स्थापना की।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बृहद्रथ एक निर्बल एवं अयोग्य शासक था जिसके काल में मौर्य साम्राज्य काफी सिकुड़ चुका था। पुष्यमित्र शुंग एक ब्राह्मण था और उसे परंपरागत रूप से बौद्ध धर्म विरोधी माना गया है — कुछ बौद्ध ग्रंथों में उस पर बौद्ध विहारों को नष्ट करने का आरोप भी लगाया गया है, हालांकि इतिहासकारों में इस पर मतभेद है।
    115. भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में इतिवृत्तों, राजवंशीय इतिहासों तथा वीरगाथाओं को कंठस्थ करना निम्नलिखित में से किसका व्यवसाय था?
    (a) श्रमण
    (b) परिव्राजक
    (c) अग्रहारिक
    (d) मागध
    I.A.S. (Pre) 2016
    उत्तर-(d)
    प्राचीन भारत में “मागध” और “सूत” वर्ग के लोगों का मुख्य व्यवसाय राजवंशीय इतिहासों, वीरगाथाओं तथा इतिवृत्तों को कंठस्थ कर राज दरबारों में सुनाना था। ये लोग मौखिक परंपरा के संरक्षक थे और राजाओं की वंशावली एवं शौर्यगाथाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे पहुँचाते थे।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महाभारत एवं पुराणों में सूत-मागधों का उल्लेख राजाओं के स्तुतिपाठक के रूप में मिलता है। वे प्रायः युद्धभूमि में भी राजाओं के साथ जाते थे और उनके पराक्रम का वर्णन करते थे। इनकी परंपरा को ही आधुनिक “चारण” एवं “भाट” परंपरा का पूर्वज माना जाता है।
    116. निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
    1. अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या उसके प्रधान सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की थी।
    2. अंतिम शुंग राजा देवभूति की हत्या उसके ब्राह्मण मंत्री वासुदेव कण्व ने की और उसने राजसिंहासन हथिया लिया।
    3. आंध्र ने कण्व राजवंश के अंतिम शासक को पद वंचित किया था।
    इन कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
    (a) 1 और 2
    (b) केवल 2
    (c) केवल 3
    (d) 1, 2 और 3
    I.A.S. (Pre) 2003
    उत्तर-(d)
    तीनों कथन ऐतिहासिक दृष्टि से सही हैं। पुष्यमित्र शुंग ने 184 ई.पू. में बृहद्रथ की हत्या कर शुंग वंश की स्थापना की। शुंग वंश के अंतिम राजा देवभूति को उसके मंत्री वासुदेव कण्व ने मारकर कण्व वंश की नींव रखी। तत्पश्चात वायु पुराण के अनुसार, सातवाहन (आंध्र) शासक सिमुक ने अंतिम कण्व शासक सुशर्मा को पदच्युत कर मार डाला।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कण्व वंश लगभग 75-30 ई.पू. तक शासन में रहा और इसके केवल चार शासक हुए — वासुदेव, भूमित्र, नारायण और सुशर्मा। सातवाहन वंश (जिसे आंध्र वंश भी कहा जाता है) दक्षिण भारत का पहला महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक राजवंश माना जाता है, जिसने लगभग 300 वर्षों तक शासन किया।
    117. गांवों के शासन को स्वायत्तशासी पंचायतों के माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था का सूत्रपात किसने किया?
    (a) कुषाणों ने
    (b) द्रविड़ों ने
    (c) आर्यों ने
    (d) मौर्यों ने
    R.A.S./R.T.S. (Pre) 1997
    उत्तर-(b)
    ग्राम स्वशासन की परंपरा का सूत्रपात मुख्यतः द्रविड़ों, विशेषकर चोल शासकों द्वारा किया गया। चोल काल में “उर”, “सभा” और “नगरम” जैसी ग्राम परिषदें अत्यंत सुगठित एवं स्वायत्त रूप से कार्य करती थीं। उत्तरमेरूर (तमिलनाडु) से प्राप्त शिलालेख इन परिषदों की कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण देते हैं।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चोल काल में ग्राम सभाओं के सदस्यों के चुनाव के लिए “कुड़वोलई” पद्धति अपनाई जाती थी, जिसमें नारियल के पत्तों पर नाम लिखकर उन्हें पात्र में डाला जाता था और फिर एक बच्चे से निकलवाया जाता था — यह प्राचीन भारत की लॉटरी आधारित लोकतांत्रिक प्रक्रिया मानी जाती है।
    118. प्राचीन भारत के निम्नलिखित ग्रंथों में से किसमें पति द्वारा परित्यक्त पत्नी के लिए विवाह विच्छेद की अनुमति दी गई है?
    (a) कामसूत्र
    (b) मानवधर्मशास्त्र
    (d) अर्थशास्त्र
    (c) शुक्र नीतिसार
    I.A.S. (Pre) 1996
    उत्तर-(d)
    कौटिल्य के अर्थशास्त्र में विवाह विच्छेद (तलाक) का स्पष्ट प्रावधान मिलता है। यदि पति लंबे समय तक विदेश में रहे, शरीर से दोषपूर्ण हो, या पत्नी को त्याग दे — तो स्त्री को विवाह विच्छेद का अधिकार दिया गया था। इसी प्रकार पत्नी के चारित्रिक दोष की स्थिति में पति भी यह अधिकार रखता था। यह मौर्यकालीन समाज की अपेक्षाकृत उदार विधिक व्यवस्था को दर्शाता है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अर्थशास्त्र में विवाह के आठ प्रकारों का उल्लेख है और इसमें स्त्रियों की आर्थिक स्वतंत्रता का भी समर्थन किया गया है — स्त्रियों को अपनी “स्त्रीधन” संपत्ति रखने का अधिकार था। यह दृष्टिकोण मनुस्मृति से भिन्न था, जो स्त्री स्वतंत्रता पर कड़े प्रतिबंध लगाती है।
    119. निम्नलिखित में से किसमें पुनर्विवाह वर्जित (Prohibits) है?
    (a) जातक
    (b) मनुस्मृति
    (c) याज्ञवल्क्य
    (d) अर्थशास्त्र
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
    U.P.P.C.S. (Pre) 2003
    उत्तर-(b)
    मनुस्मृति में स्त्रियों के लिए पुनर्विवाह का निषेध स्पष्ट रूप से किया गया है। इस ग्रंथ के अनुसार विधवा स्त्री को पुनर्विवाह की अनुमति नहीं थी, जबकि विधुर पुरुष पुनर्विवाह कर सकता था। यह व्यवस्था प्राचीन भारतीय समाज में लैंगिक असमानता की प्रतीक थी।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मनुस्मृति के विपरीत, कौटिल्य के अर्थशास्त्र एवं नारद स्मृति में विधवा पुनर्विवाह की अनुमति दी गई थी। आधुनिक भारत में विधवा पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता “हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856” द्वारा मिली, जिसे ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों से पारित करवाया गया।
    120. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही
    सूची-I सूची-II
    A. चंद्रगुप्त – 1. पियदसि
    B. बिंदुसार – 2. सैंड्रोकोट्टस
    C. अशोक – 3. अमित्रघात
    D. चाणक्य – 4. विष्णुगुप्त कूट : A B C D उत्तर का चयन कीजिए-
    (a) 2 3 4 1
    (b) 1 3 2 4
    (c) 2 3 1 4
    (d) 3 4 2 1
    U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001
    उत्तर-(c)
    सही सुमेलन इस प्रकार है — चंद्रगुप्त मौर्य को यूनानी लेखकों ने “सैंड्रोकोट्टस” कहा; बिंदुसार को “अमित्रघात” (शत्रुओं का नाश करने वाला) कहा गया; अशोक के शिलालेखों में उन्हें “पियदसि” (प्रियदर्शी) कहा गया है; और चाणक्य का वास्तविक नाम “विष्णुगुप्त” था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: “पियदसि” (प्रियदर्शी) नाम अशोक के स्वयं के शिलालेखों में मिलता है, और यही नाम श्रीलंकाई बौद्ध ग्रंथ “दीपवंश” एवं “महावंश” में भी आता है। चाणक्य को “कौटिल्य” नाम उनकी चाल-चलन की कुटिलता के कारण मिला, जबकि “विष्णुगुप्त” उनका गोत्र-नाम था।
    121. बराबर पहाड़ी की गुफाओं के विषय में निम्न में से कौन एक सही नहीं है?
    (a) बराबर पहाड़ी पर कुल चार गुफाएं हैं।
    (b) तीन गुफाओं की दीवार पर अशोक के अभिलेख उत्कीर्ण हैं।
    (c) ये अभिलेख इन गुफाओं को आजीविकाओं को समर्पित होने का उल्लेख करते हैं।
    (d) ये अभिलेख ईसा पूर्व छठीं शताब्दी के हैं।
    U.P.P.C.S. (Pre) 2017
    उत्तर-(d)
    बिहार के गया जिले में स्थित बराबर पहाड़ी पर कुल चार गुफाएं हैं — कर्ण चौपड़, सुदामा, विश्वझोपड़ी और लोमस ऋषि। इनमें से पहली तीन गुफाओं की दीवारों पर सम्राट अशोक के लेख उत्कीर्ण हैं, जिनमें इन्हें आजीवक संप्रदाय के साधुओं को दान में देने का उल्लेख है। ये अभिलेख तीसरी शताब्दी ई.पू. (मौर्यकाल) के हैं, न कि छठी शताब्दी ई.पू. के — इसीलिए विकल्प (d) असत्य है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चौथी गुफा ‘लोमस ऋषि’ स्थापत्य कला की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है — इसका प्रवेशद्वार हाथियों की नक्काशी से अलंकृत है और यह भारत की प्राचीनतम अर्धवृत्ताकार (Chaitya arch) वाली गुफाओं में से एक मानी जाती है। आजीवक संप्रदाय के प्रवर्तक मक्खलि गोशाल थे, जो भगवान महावीर के समकालीन थे।
    122. निम्नलिखित में से किस अभिलेख में चंद्रगुप्त और अशोक दोनों का उल्लेख किया गया है ?
    (a) गौतमीपुत्र शातकर्णि की नासिक प्रशस्ति
    (b) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
    (c) अशोक का गिरनार अभिलेख
    (d) स्कंदगुप्त का जूनागढ़ अभिलेख
    U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
    उत्तर-(b)
    महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख शक संवत् 72 (लगभग 150 ई.) का है। यह एकमात्र ऐसा अभिलेख है जिसमें चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक — दोनों का नामोल्लेख एक साथ मिलता है। इस अभिलेख में सुदर्शन झील के पुनर्निर्माण का विस्तृत विवरण दिया गया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख संस्कृत गद्य में लिखित प्राचीनतम दीर्घ अभिलेखों में से एक है — इससे पहले अधिकांश शाही अभिलेख प्राकृत भाषा में होते थे। यह अभिलेख रुद्रदामन की विजयों — मालव, अपरांत, आनर्त, सुराष्ट्र आदि — का भी प्रमाण देता है, जिससे शक शासकों की शक्ति का अंदाज़ा लगता है।
    123. मौर्यकालीन मूर्तियों में, मणिभद्र (यक्ष) नाम से अंकित मूर्ति किस स्थान से प्राप्त हुई है?
    (a) झींग-का-नगरा
    (b) नोह ग्राम
    (c) बेसनगर
    (d) परखम
    R.A.S./R.T.S (Pre) 2021
    उत्तर-(d)
    मथुरा के निकट ‘परखम’ ग्राम से प्राप्त ‘मणिभद्र यक्ष’ की विशाल मूर्ति मौर्यकालीन लोक कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मूर्ति लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है और इस पर ‘मणिभद्र’ नाम उत्कीर्ण है, जिससे इसकी पहचान सुनिश्चित होती है। मौर्यकाल में यक्ष पूजा एक प्रमुख लोक धर्म था।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मणिभद्र को जैन धर्म में भी एक महत्त्वपूर्ण यक्ष देवता माना जाता है — वे तीर्थंकर पार्श्वनाथ के शासन देवता (शासनदेव) के रूप में पूजित हैं। मथुरा कला शैली की विशेषता यह है कि यहाँ की मूर्तियाँ स्थानीय लाल चित्तीदार बलुआ पत्थर से बनाई जाती थीं, जो गांधार कला शैली की विदेशी प्रभाव वाली मूर्तियों से भिन्न हैं।
    124. जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, जिस प्रथम शासक ने गिरनार क्षेत्र में एक झील का निर्माण करवाया, वह था-
    (a) चंद्रगुप्त मौर्य
    (b) अशोक
    (c) रुद्रदामन
    (d) स्कंदगुप्त
    U.P.P.C.S. (Mains) 2002
    U.P.P.C.S. (Mains) 2007
    उत्तर-(a)
    गुजरात के गिरनार (जूनागढ़) क्षेत्र में प्रसिद्ध ‘सुदर्शन झील’ का निर्माण सर्वप्रथम चंद्रगुप्त मौर्य के काल में उनके राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने करवाया था। बाद में अशोक के शासनकाल में उनके प्रांतीय गवर्नर यवनराज तुषास्फ ने इस झील में नहरें खुदवाईं। लगभग 150 ई. में शक महाक्षत्रप रुद्रदामन ने भारी वर्षा से टूटे बाँध का पुनर्निर्माण करवाया और पाँचवीं शताब्दी ई. में गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त ने भी इसकी मरम्मत करवाई।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सुदर्शन झील भारत की प्राचीनतम कृत्रिम जलाशयों में से एक है। इसका विवरण रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख में विस्तार से मिलता है, जो इसे सिंचाई व पेयजल दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी बताता है — यह मौर्यकालीन जल-प्रबंधन की उन्नत तकनीक का प्रमाण है।
    125. निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें अशोक का अभिलेख भी पाया गया है?
    (a) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
    (b) गौतमीपुत्र सातकर्णी से संबंधित नासिक प्रशस्ति
    (c) खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख
    (d) उपर्युक्त में से किसी में नहीं
    U.P.P.C.S (Mains) 2016
    उत्तर-(a)
    जूनागढ़ (गिरनार, गुजरात) की एक ही शिला पर कई कालखंडों के अभिलेख उत्कीर्ण हैं। इस शिला पर अशोक के 14 शिलालेखों के साथ-साथ रुद्रदामन (लगभग 150 ई.) और स्कंदगुप्त (लगभग 457-58 ई.) के अभिलेख भी मिलते हैं। 1822 ई. में कर्नल टाड ने इस शिलालेख को सर्वप्रथम खोजा था। रुद्रदामन का यह अभिलेख शुद्ध संस्कृत भाषा में ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक के गिरनार शिलालेख को सबसे पहले 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा और ब्राह्मी लिपि का सफलतापूर्वक अर्थ निकाला — यह उपलब्धि भारतीय पुरालेख विज्ञान (Epigraphy) की आधारशिला बनी। गिरनार का यह स्थल UNESCO की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है।
    126. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
    1. लोथल – एनसिएंट डाकयार्ड
    2.सारनाथ – फर्स्ट सरमन ऑफ बुद्ध
    3.राजगिरि – लॉयन कैपिटल ऑफ अशोक
    4. नालंदा – ग्रेट सीट ऑफ बुद्धिस्ट लर्निंग
    नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए –
    (a) 1, 2, 3, 4
    (b) 3 तथा 4
    (c) 1, 2 तथा 4
    (d) 1 तथा 2
    U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
    उत्तर-(c)
    युग्म 1 (लोथल – एनसिएंट डाकयार्ड), युग्म 2 (सारनाथ – फर्स्ट सरमन ऑफ बुद्ध) और युग्म 4 (नालंदा – ग्रेट सीट ऑफ बुद्धिस्ट लर्निंग) — तीनों सही हैं। युग्म 3 गलत है क्योंकि ‘लॉयन कैपिटल ऑफ अशोक’ (अशोक का सिंह स्तंभशीर्ष) राजगिरि में नहीं, बल्कि सारनाथ में मिला है, जो वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय चिह्न है।
    📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लोथल (गुजरात) में मिला डॉकयार्ड विश्व का प्राचीनतम ज्ञात बंदरगाह माना जाता है, जो लगभग 2400 ई.पू. का है — यह सिंधु सभ्यता के समुद्री व्यापार की उन्नत दशा को दर्शाता है। सारनाथ का अशोक स्तंभ जहाँ बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) दिया था — इस स्थल को ‘ऋषिपत्तन’ या ‘मृगदाव’ भी कहा जाता था।
  • मौर्यकालीन प्रमुख तथ्य और परीक्षा नोट्स

    📚 विषय सूची

    धम्म यात्रा : अशोक की धार्मिक नीति

    ➣ राजा का दौरा धम्म यात्रा या धर्म यात्रा कहलाता था। यह एक प्रकार की तीर्थयात्रा होती थी, जिसमें राजा गांव का दौरा करता था, वृद्धों और संन्यासियों को दान देता था, गांव-बस्ती की हालत देखता था और धर्म संबंधी प्रवचन करता था।

    ➣ अशोक ने बोधगया की तीर्थयात्रा कर धम्म यात्रा की परम्परा को शुरू किया।

    ➣ अशोक ने लुम्बिनी (बुद्ध का जन्म स्थान),कपिलवस्तु (बाल्यावस्था स्थल), बोधगया (तपोभूमि और ज्ञान प्राप्ति), सारनाथ (धर्मचक्रप्रवर्तन स्थल, प्रथम उपदेश),

    कुशीनगर (महापरिनिर्वाण स्थल) और बुद्ध कोनकमन (कनक मुनि) के स्तूप आदि की यात्रा की। इन धम्म यात्राओं का उल्लेख अशोक के शिलालेख 7 व 8 में मिलता है।

    सांची स्तूप : मौर्यकालीन बौद्ध स्थापत्य कला

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के समीप सांची बौद्ध स्तूपों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां पहाड़ी पर मौर्य शासक अशोक ने विशाल स्तूप का निर्माण करवाया था।

    ➣ यह ईंटों का बना था जिसके चारों ओर लकड़ी की बाड़ लगी थी। सांची के दीर्घकाल तक बौद्धधर्म से संबंधित रहने के कारण इसका नाम चेतिया (चैत्यगिरि) प्रसिद्ध हुआ।

    अशोक द्वारा निर्मित महास्तूप शुंगकाल में पाषाण पट्टिकाओं से जड़ा गया। लकड़ी के स्थान पर पाषाण वेदिका बनाई गयी तथा चारो दिशाओं में 4 तोरण (Gateways) लगा दिये गये।

    ➣ बुद्ध के जीवन की घटनाओं व जातक कथाओं के चित्रों से भरे है और नीचे से ऊपर तक अलंकृत हैं इन पर सिंह, हाथी, धर्मचक्र, यज्ञ, त्रिरत्ल के चित्र खुदे हुए है।

    ➣ वेदिकाओं पर अंकित लेखों में दानकर्ताओं के नाम सुरक्षित है जिन्होंने स्मारकों के निर्माण में योगदान किया। इनमें शासक, भिक्षु, सामान्य जन सभी है।

    ➣ मुख्य स्तूप के दक्षिणी द्वार पर उत्कीर्ण लेख में सातवाहन शासक शातकर्णी का नाम है।

    अशोक स्तंभ : मौर्यकालीन कला और शिलालेख

    ➣ अशोक के स्तंभ ईरानी व यूनानी कला से प्रभावित है। अशोक के लाट पर जिस प्रकार की पशुआकृतियां हैं, वह हड़प्पा की पशु आकृतियों की परंपरा से मेल खाती हैं।

    ➣ माना जाता है कि पत्थर पर चमकदार पॉलिश करने की कला भारत में ईरानी संपर्क के पहले से ज्ञात थी।

    ➣ इसका एक प्रमाण काली मिट्टी के बर्तनों को पॉलिश कर चमकदार बनाने की प्रक्रिया में ढूंढा जा सकता है।

    ➣ पुनः ईरानी स्तंभ जहां नालीदार है और प्रस्तर खम्भों के जोड़ने से बने हैं वहीं अशोक के लाट सपाट और एक ही पत्थर से बने हैं। दोनों स्तंभों के घंटा व अलंकरण में भी अंतर है।

    ➣ भारत ने इस स्तम्भ को अपने राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया है तथा स्तम्भ के निचले भाग पर स्थित अशोक चक्र को तिरंगे के मध्य में रखा है ।

    चाणक्य : मौर्य साम्राज्य के महान राजनीतिज्ञ

    ➣ चाणक्य (लगभग 375-283 ई.पू.) चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु और महामंत्री थे।

    ➣ चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है।

    ➣ चाणक्य की पत्नी का नाम यशोमती था।

    ➣ उन्होंने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनवाया। उन्होंने बिंदुसार और अशोक का भी मार्गदर्शन किया।

    ➣ चाणक्य ने तक्षशिला विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और वहां के आचार्य भी बने।

    ➣ चाणक्य के कहने पर सिकंदर के सेनापति सेल्युकस की बेटी हेलेना से चंद्रगुप्त ने विवाह किया था। चंद्रगुप्त के राज्य निर्माण का समस्त इतिहास वस्तुतः उसके गुरु चाणक्य का कार्य था।

    ➣ कुछ विद्वान मानते हैं कि हेलेना ने ही चाणक्य की हत्या करवा दी।

    ➣ कौटिल्य ने अर्थशास्त्र की रचना की, जो राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का एक महान ग्रंथ है। इसमें उन्होंने वर्णन किया है कि एक राजा किस प्रकार से राजनीतिक और आर्थिक शक्ति प्राप्त कर सकता है।

    अर्थशास्त्र : कौटिल्य की प्रसिद्ध रचना

    ➣ कौटिल्य का अर्थशास्त्र’ ऐतिहासिक ग्रंथ नहीं है, अपितु राजनीति शास्त्र का एक अद्वितीय ग्रंथ है। अर्थशास्त्र प्राचीन भारत में राजकीय एवं सामाजिक व्यवस्था के अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत है।

    अर्थशास्त्र के लेखक के रूप में इसी पुस्तक में उल्लिखित कौटिल्य तथा एक पद्यखंड में उल्लिखित विष्णुगुप्त नाम की साम्यता चाणक्य से की जाती है।

    ➣ अर्थशास्त्र की भाषा संस्कृत है। यह गद्य-पद्य मिश्रित सूत्र शैलो (अन्य पुरूष शैली) में है। इसमें 6000 श्लोक, 180 प्रकरण, 141 अध्याय एवं 15 अधिकरण हैं।

    ➣ अर्थशास्त्र प्राचीन भारतीय चिन्तन की नीतिशास्त्र परम्परा का प्रतिनिधि ग्रन्थ है। इसकी तुलना मैक्यावेली के ‘प्रिंस से की जाती है।

    ➣ इसमें चक्रवर्ती सम्राट, राजा के कर्तव्य, विस्तृत कर प्रणाली तथा सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। इसमें राज्य के सप्तांग सिद्धांत– राजा, आमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड एवं मित्र की व्याख्या मिलती है।

    ➣ अर्थशास्त्र की हस्तलिखित पांडुलिपि मैसूर रियासत के पुस्तकालयाध्यक्ष शाम शास्त्री द्वारा सन 1909 ई. में इस ग्रन्थ का प्रकाशन करवाया और 1915 ई. इसका अंग्रेजी अनुवाद किया गया।

    छठे अधिकरण में राज्य की सात प्रकृतियों या अंगों अर्थात् सप्तांग सिद्धान्त एवं मण्डल सिद्धान्त का विवेचन है।

    मेगस्थनीज की इण्डिका : मौर्यकालीन भारत का विवरण

    ➣ मेगस्थनीज, सेल्यूकस का राजदूत था जो चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में 304 ई.पू. से 299 ई. पू. के बीच रहा।

    ➣ मैगस्थनीज़ ने ‘इण्डिका’ में भारतीय जीवन, परम्पराओं, रीति-रिवाजों का वर्णन किया है। उसके ग्रंथ इण्डिका से चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रशासन की विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है। हालाँकि यह ग्रंथ अपने मूल रूप में उपलब्ध नहीं है।

    यह भारत आने वाला प्रथम राजदूत था।

    ➣ इण्डिका ग्रीक भाषा में है इसे मौर्य समाज का दर्पण कहा जाता है।

    ➣ मेगस्थनीज ने चन्द्रगुप्त का नाम सैन्ड्रोकाट्स के रूप में उद्धृत किया है। इसके अनुसार शासक के चारों ओर सशस्त्र महिलाएं अंगरक्षक के रूप में रहती थी।

    ➣ चन्द्रगुप्त की राजधानी पोलिब्रोधा (पाटलिपुत्र) का विस्तृत वर्णन किया उसके अनुसार पाटलिपुत्र गंगा व सोन नदियों के संगम पर स्थित था तथा पूर्वी भारत का सबसे बड़ा नगर था।

    ➣ मेगस्थनीज ने उत्तरापथ का वर्णन किया है। यह सड़क सिन्ध को बंगाल के सोनारगाँव से जोड़ती थी। इस सड़क का निर्माण चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा करवाया गया था।

    ➣ मेगस्थनीज के अनुसार भारत में दास प्रथा विद्यमान नहीं थी, जबकि कौटिल्य ने 9 प्रकार के दासों का वर्णन किया है।

    ➣ मेगस्थनीज ने लिखा है कि भारत में अकाल नहीं पड़ते थे, जबकि चन्द्रगुप्त मौर्य के समय अकाल पड़ने का वर्णन मिलता है।

    ➣ अकाल के समय राज्य द्वारा अनाज वितरण (राशनिंग प्रणाली) का वर्णन है।

    मेगस्थनीज के अनुसार भारत में लेखन कला का अभाव था।

    ➣ उसने सिलास नामक एक ऐसी नदी का उल्लेख किया है, जिसमें कुछ भी तैर नहीं सकता था।

    ➣ मैगस्थनीज़ ने भारत से प्राप्त होने वाली खनिज सम्पदा में सोना, चांदी, ताँबा एवं टिन की प्रशंसा की है।

    ➣ मैगस्थनीज़ के अनुसार भारत में चीटियां सोने का संग्रह करती थीं।

    मौर्यकालीन शब्द एंव उनके अर्थ

    सीताराजकीय भूमि तथा इस भूमि से प्राप्त आय
    बलिएक प्रकार का धार्मिक कर या चढ़ावा
    क्षेत्रकेभूमि का मालिक
    उपवासकाश्तकार
    रूपजीवावेश्यावृत्ति कर जीविकायापन करने वाली स्त्रियाँ
    जेठ्ठकशिल्पी संघ का मुखिया
    श्रेष्ठीव्यापारिक संघ का मुखिया
    गहपतिभू-स्वामी
    सेतुफल, फूल, सब्जियों पर लिया जाने वाला कर
    विष्टिबेगार
    भागभूमिकर (किसानों की निजी भूमि पर कर)
    अमात्यउच्च प्रशासनिक अधिकारियों का वर्ग
    उद्रगसिंचाई कर
    प्रणयआपातकालीन कर
    सेनाभक्तमसेना कर जो सेना के प्रयाण के समय तेल व चावल के रूप में लिया जाता था।
    हिरण्यनकद कर, जो अनाज के रूप में नहीं लिया जाता था।
    राष्ट्रअन्य साधनों से प्राप्त राजस्व
    पौरराजधानी का शासक
    अक्षपटलाध्यक्षमहालेखा पाल
    महामात्यापसर्पगुप्तचर विभाग का अध्यक्ष
    वार्ताकृषि, पशुपालन एवं व्यापार का सम्मिलित रूप
    पथिकरसमाहर्ता द्वारा वसूल किया गया अतिरिक्त कर
    विवीतपशुओं की रक्षा के लिए वसूला गया कर
    रक्षित पुलिस (अर्थशास्त्र के अनुसार)
    कौष्ठेयकसरकारी जलाशय से सिंचित भूमि से लिया जाने वाला कर
    सार्थवाहव्यापारियों का काफिला
    परिहीनकसरकारी भूमि पर पशुओं द्वारा हानि पहुँचाने पर लिया जाने वाला कर।
    पिण्डकरपूरे गाँव से वर्ष में एक बार वसूला जाने वाला कर
    औपायनिकविशेष अवसरों पर राजा को दी जाने वाली भेंट
    पार्श्वअधिक लाभ होने पर व्यापारियों से लिया जाने वाला कर

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