1.चाणक्य अपने बचपन में किस नाम से जाने जाते थे?
(a) अजय
(b) चाणक्य
(c) विष्णुगुप्त
(d) देवगुप्त
U.P.P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(c)
चाणक्य का बचपन का नाम विष्णुगुप्त था। उनके पिता ऋषि चणक थे, जिनके नाम पर इन्हें ‘चाणक्य’ कहा गया। अर्थशास्त्र नामक ग्रंथ के रचनाकार के रूप में इन्हें ‘कौटिल्य’ भी कहा जाता है, जो संभवतः इनके गोत्र से संबंधित नाम है। इस प्रकार इनके तीन नाम प्रचलित हैं — विष्णुगुप्त (जन्म नाम), चाणक्य (पितृ-नाम) और कौटिल्य (गोत्र नाम)।
2.सैंड्रोकोट्स से चंद्रगुप्त मौर्य की पहचान किसने की?
(a) विलियम जॉस
(b) वी. स्मिथ
(c) आर.के. मुखर्जी
(d) डी.आर. भंडारकर
48th to 52s B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
सर विलियम जोन्स (William Jones) वह पहले विद्वान थे जिन्होंने यूनानी स्रोतों में उल्लिखित ‘सैंड्रोकोट्स’ की पहचान चंद्रगुप्त मौर्य से की। यह पहचान भारतीय इतिहास की कालगणना (Chronology) की नींव बनी, जिसे ‘भारतीय इतिहास की आधारशिला’ कहा जाता है। एरियन और प्लूटार्क ने चंद्रगुप्त को ‘एंड्रोकोट्स’ लिखा है।
3.प्रथम भारतीय साम्राज्य स्थापित किया गया था-
(a) कनिष्क द्वारा
(b) हर्ष द्वारा
(c) चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा
(d) समुद्रगुप्त द्वारा
U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
उत्तर-(c)
चंद्रगुप्त मौर्य ने 321 ई.पू. में मौर्य साम्राज्य की स्थापना की, जो भारत का पहला विशाल केंद्रीकृत साम्राज्य था। उन्होंने चाणक्य की सहायता से नंद वंश को उखाड़ फेंका और पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया। उनका साम्राज्य पश्चिम में ईरान की सीमा से लेकर पूर्व में बंगाल तक और उत्तर में हिमालय से दक्षिण में मैसूर तक फैला था।
4.चाणक्य का अन्य नाम था-
(a) भट्टस्वामी
(b) विष्णुगुप्त
(c) राजशेखर
(d) विशाखदत्त
I.A.S. (Pre) 1993
उत्तर-(b)
चाणक्य इतिहास में तीन नामों से विख्यात हैं — चाणक्य, कौटिल्य और विष्णुगुप्त। ‘विष्णुगुप्त’ उनका वास्तविक व्यक्तिगत नाम था। ‘कौटिल्य’ उनके गोत्र से निकला नाम माना जाता है, जबकि ‘चाणक्य’ उनके पिता चणक के नाम पर पड़ा। अर्थशास्त्र में ग्रंथकार ने स्वयं को ‘कौटिल्य’ और ‘विष्णुगुप्त’ दोनों नामों से संबोधित किया है।
5.निम्न में से किसने ‘सैंड्रोकोट्स’ (चंद्रगुप्त मौर्य) और सिकंदर महान की भेंट का उल्लेख किया है?
(a) प्लिनी
(b) जस्टिन
(c) स्ट्रैबो
(d) मेगस्थनीज
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
रोमन इतिहासकार जस्टिन ने अपने ग्रंथ में ‘सेंद्राकोट्स’ (चंद्रगुप्त मौर्य) और सिकंदर महान की भेंट का उल्लेख किया है। जस्टिन के अनुसार, उस समय युवा चंद्रगुप्त ने सिकंदर को साम्राज्य विस्तार हेतु नंद राज्य पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास भी किया था। एरियन और प्लूटार्क ने भी चंद्रगुप्त का उल्लेख किया है।
6.भारत में पहले साम्राज्य की स्थापना किस शासक के द्वारा की गई थी ?
(a) चंद्रगुप्त मौर्य
(b) अशोक
(c) कनिष्क
(d) चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C. Re-Exam 2020
उत्तर-(a)
चंद्रगुप्त मौर्य ने 321 ई.पू. में भारत के पहले विशाल एकीकृत साम्राज्य की स्थापना की। इससे पूर्व भारत में अनेक छोटे-छोटे जनपद और महाजनपद थे, परंतु किसी एक केंद्रीय सत्ता के अधीन समस्त भारत को लाने का कार्य सर्वप्रथम चंद्रगुप्त मौर्य ने किया। उन्होंने सेल्यूकस को पराजित कर काबुल, हेरात, कंधार और बलूचिस्तान भी साम्राज्य में मिलाए।
7.जिसके ग्रंथ में चंद्रगुप्त मौर्य का विशिष्ट रूप से वर्णन हुआ है.
(a) भास
(b) शूद्रक
(c) विशाखदत्त
(d) अश्वघोष
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(c)
विशाखदत्त रचित संस्कृत नाटक ‘मुद्राराक्षस’ चंद्रगुप्त मौर्य के बारे में सर्वाधिक विस्तृत साहित्यिक जानकारी देता है। इस ग्रंथ में चंद्रगुप्त को ‘वृषल’ (कुलहीन) भी कहा गया है और नंद राजा के पुत्र के रूप में चित्रित किया गया है। नाटक मुख्यतः चाणक्य की कूटनीति और राक्षस (नंद वंश के मंत्री) को अपने पक्ष में करने की कहानी पर आधारित है।
8.निम्नलिखित में कौन-सा सबसे पुराना राजवंश है ?
(a) गुप्त
(b) मौर्य
(c) वर्धन
(d) कुषाण
Uttarakhand Lower Sub. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
दिए गए चारों विकल्पों में मौर्य वंश (लगभग 321–184 ई.पू.) सबसे प्राचीन है। इसके बाद कुषाण वंश (लगभग प्रथम-तृतीय शताब्दी ई.), फिर गुप्त वंश (लगभग 275–550 ई.) और अंत में वर्धन वंश (लगभग 606–647 ई.) का शासन रहा। मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी और यह वंश अशोक के काल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचा।
9.यूनानी लेखक जस्टिन द्वारा किसे ‘सैंड्रोकोट्स’ कहा गया था?
(a) चंद्रगुप्त मौर्य
(b) चंद्रगुप्त प्रथम
(c) चंद्रगुप्त द्वितीय
(d) समुद्रगुप्त
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
यूनानी-रोमन स्रोतों में चंद्रगुप्त मौर्य को विभिन्न नामों से पुकारा गया है — जस्टिन ने ‘सेंद्राकोट्स’, एरियन तथा प्लूटार्क ने ‘एंड्रोकोट्स’ लिखा है। इन सभी नामों की पहचान चंद्रगुप्त मौर्य से की जाती है। जस्टिन के अनुसार, चंद्रगुप्त साधारण कुल में उत्पन्न हुए थे परंतु अपनी प्रतिभा और पराक्रम से सम्राट बने।
10. कौटिल्य प्रधानमंत्री थे-
(a) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के
(b) अशोक के
(c) चंद्रगुप्त मौर्य के
(d) राजा जनक के
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2002
उत्तर-(c)
कौटिल्य (चाणक्य / विष्णुगुप्त) चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री, महामंत्री एवं प्रधान पुरोहित तीनों पदों पर एक साथ आसीन थे। उन्होंने ही नंद वंश के विरुद्ध चंद्रगुप्त की सहायता करके मौर्य साम्राज्य की स्थापना संभव बनाई। उनका ‘अर्थशास्त्र’ राजनीति, कूटनीति और प्रशासन पर भारत में लिखा गया सबसे प्राचीन उपलब्ध ग्रंथ है।
11. कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में किस पहलू पर प्रकाश डाला गया है?
(a) आर्थिक जीवन
(b) राजनीतिक नीतियां
(c) धार्मिक जीवन
(d) सामाजिक जीवन
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ एक राजनीति शास्त्र का अनुपम ग्रंथ है। इसमें मुख्य रूप से राजनीतिक नीतियों, शासन के सिद्धांतों और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया है। यह ग्रंथ एक ऐतिहासिक दस्तावेज न होकर राजनीतिशास्त्र का मानक ग्रंथ है।
12. बुलंदीबाग प्राचीन स्थान था –
(a) कपिलवस्तु का
(b) पाटलिपुत्र का
(c) श्रावस्ती का
(d) वाराणसी
U.P.P.C.S. (Spl) (Mains) 2008
उत्तर-(b)
बुलंदीबाग पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) का एक प्राचीन स्थल है। यहाँ की गई खुदाई में मौर्यकालीन नगर परकोटे (नगर की रक्षा दीवार) के लकड़ी के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार पास के कुम्रहार स्थल से चंद्रगुप्त के राजप्रासाद के अवशेष मिले हैं।
13. निम्नांकित में से किसकी तुलना मैक्यावेली के ‘प्रिंस’ से की जा सकती है?
(a) कालिदास का मालविकाग्निमित्रम
(b) कौटिल्य का अर्थशास्त्र
(c) वात्स्यायन का कामसूत्र
(d) तिरुवल्लुवर का तिरुक्कुरल
U.P.P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ की तुलना इटली के राजनीतिक विचारक मैक्यावेली की प्रसिद्ध कृति ‘द प्रिंस’ (The Prince, 1532) से की जाती है। दोनों ही ग्रंथ राजनीतिक यथार्थवाद पर आधारित हैं और दोनों में राज्य की सुरक्षा और शासक की सत्ता को नैतिकता से ऊपर रखा गया है।
14. पाटलिपुत्र में स्थित चंद्रगुप्त का महल मुख्यतः बना था –
(a) ईंटों का
(b) पत्थर का
(c) लकड़ी का
(d) मिट्टी का
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(c)
पुरातात्विक उत्खनन से प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार पाटलिपुत्र में स्थित चंद्रगुप्त मौर्य का राजप्रासाद मुख्यतः लकड़ी से निर्मित था। कुम्रहार स्थल पर डी.बी. स्पूनर के नेतृत्व में हुई खुदाई (1912-13) में इस लकड़ी के विशाल महल के अवशेष प्रकाश में आए।
15. कौटिल्य की पुस्तक अर्थशास्त्र किस विषय पर आधारित है?
(a) आर्थिक संबंध
(b) शासनकला के सिद्धांत और अभ्यास
(c) विदेश नीति
(d) धन संचय
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित ‘अर्थशास्त्र’ शासनकला के सिद्धांतों और व्यवहार पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें सप्तांग सिद्धांत (राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दण्ड और मित्र) और मंडल सिद्धांत (विदेश नीति) जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएं प्रस्तुत की गई हैं। साथ ही प्रशासन, कृषि, व्यापार और शिल्प की विस्तृत जानकारी भी दी गई है।
16. कौटिल्य का अर्थशास्त्र है, एक
(a) चंद्रगुप्त मौर्य के संबंध में नाटक
(b) आत्मकथा
(c) चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास
(d) शासन के सिद्धांतों की पुस्तक
U.P. P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(d)
कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ न तो कोई नाटक है, न आत्मकथा और न ही इतिहास — यह शासन के सिद्धांतों और राजनीति की एक सुव्यवस्थित पुस्तक है। इसमें राजा के कर्तव्यों, मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली, कर-व्यवस्था और युद्धनीति आदि का विस्तृत विवरण मिलता है।
17. निम्नलिखित में से राज्य के सप्तांग सिद्धांत के अनुसार, राज्य का सातवां अंग कौन-सा था?
(a) जनपद
(b) दुर्ग
(c) मित्र
(d) कोश
U.P.P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015
उत्तर-(c)
कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत में राज्य के सात अंग हैं — राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड और मित्र (सुहृद)। इनमें ‘मित्र’ सातवाँ और अंतिम अंग है। कौटिल्य के अनुसार मित्र राजा के लिए कान के समान हैं जो शांति और युद्ध दोनों में सहायक होते हैं।
18. किसके शासनकाल में डीमेकस भारत आया था?
(a) चंद्रगुप्त मौर्य
(b) बिंदुसार
(c) अशोक
(d) कनिष्क
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
डीमेकस (Deimachus) सीरिया के सेल्यूसिड राजा एंटियोकस प्रथम का राजदूत था जो मेगस्थनीज के बाद बिंदुसार की राजसभा में पाटलिपुत्र आया था। स्ट्रैबो ने अपने भूगोल ग्रंथ में इसका उल्लेख किया है।
19. बिंदुसार के शासनकाल में अशोक ने अवंति महाजनपद जीतकर मौर्य साम्राज्य में मिला लिया था। इसका उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
(a) बुद्ध घोष की समंत पासादिका
(b) कौटिल्य का अर्थशास्त्र
(c) पाणिनि की अष्टाध्यायी
(d) पतंजलि का महाभाष्य
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
बुद्धघोष द्वारा रचित ‘समंत पासादिका’ (Samantapāsādikā) एक बौद्ध पालि ग्रंथ है जिसमें उल्लेख है कि बिंदुसार के शासनकाल में अशोक उज्जयिनी (अवंति) का उपराजा (वायसराय) था और उसने अवंति को मौर्य साम्राज्य में मिलाया। ‘दिव्यावदान’ से भी इसकी पुष्टि होती है।
20. किस प्राचीन नगर के अवशेष कुम्रहार स्थल से प्राप्त हुए हैं?
(a) वैशाली
(b) पाटलिपुत्र
(c) कपिलवस्तु
(d) श्रावस्ती
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(b)
कुम्रहार पटना (बिहार) में स्थित एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जहाँ से प्राचीन पाटलिपुत्र के राजप्रासाद के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहाँ D.B. स्पूनर (1912-13) और बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा उत्खनन किया गया।
21. किसने सहिष्णुता, उदारता और करुणा के त्रिविध आधार पर राजधर्म की स्थापना की?
(a) अशोक
(b) अकबर
(c) रणजीत सिंह
(d) शिवाजी
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(a)
सम्राट अशोक ने ‘धम्म’ नामक एक विशेष नैतिक आचार संहिता का प्रतिपादन किया, जिसका मूल आधार सहिष्णुता, उदारता और करुणा था। यह किसी एक धर्म या संप्रदाय से बंधा हुआ नहीं था, बल्कि संपूर्ण मानवजाति के कल्याण के लिए था। अशोक ने इसे अपने शिलालेखों और स्तंभलेखों के माध्यम से साम्राज्य के कोने-कोने तक फैलाया।
22. सेल्यूकस, जिनको अलेक्जेंडर द्वारा सिंध एवं अफगानिस्तान का प्रशासक नियुक्त किया गया था, को किस भारतीय राजा ने हराया था?
(a) समुद्रगुप्त
(b) अशोक
(c) बिंदुसार
(d) चंद्रगुप्त
M.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य ने 305 ई.पू. में सेल्यूकस निकेटर की आक्रमणकारी सेना को निर्णायक रूप से परास्त किया था। सेल्यूकस सिकंदर के साम्राज्य के पूर्वी भाग का उत्तराधिकारी था। इस पराजय के बाद सेल्यूकस को संधि करनी पड़ी, जिसके अंतर्गत उसने अरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया और पेरोपेमिसाडे जैसे क्षेत्र चंद्रगुप्त को सौंप दिए।
23. निम्न में से कौन-सा क्षेत्र अशोक के साम्राज्य में सम्मिलित नहीं था ?
(a) अफगानिस्तान
(b) बिहार
(c) श्रीलंका
(d) कलिंग
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
श्रीलंका (तत्कालीन ताम्रपर्णी) अशोक के साम्राज्य का भाग नहीं था। अशोक के द्वितीय शिलालेख में चोल, पाण्ड्य, सतियपुत्त, केरलपुत्त और ताम्रपर्णी को ‘प्रत्यंत राज्य’ अर्थात् सीमावर्ती स्वतंत्र राज्य कहा गया है। असम (प्राग्ज्योतिष) भी अशोक के साम्राज्य से बाहर था। शेष लगभग समस्त भारतीय उपमहाद्वीप उसके अधीन था।
24. चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को किस वर्ष में पराजित किया था ?
(a) 317 ई.पू.
(b) 315 ई.पू.
(c) 305 ई.पू.
(d) 300 ई.पू.
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014
उत्तर-(c)
चंद्रगुप्त मौर्य ने 305 ई.पू. में सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया था। यह युद्ध उस समय हुआ जब सेल्यूकस ने सिकंदर के पूर्वी प्रदेशों को पुनः जीतने का प्रयास किया। चंद्रगुप्त की विजय इतनी निर्णायक थी कि सेल्यूकस को न केवल विशाल क्षेत्र देने पड़े, बल्कि संधि की शर्तों के रूप में वैवाहिक संबंध भी स्थापित करना पड़ा।
25. निम्नलिखित में से किस मौर्य राजा ने दक्कन की विजय प्राप्त की थी ?
(a) अशोक
(b) चंद्रगुप्त
(c) बिंदुसार
(d) कुणाल
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
दक्षिण भारत की विजय का श्रेय मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य को दिया जाता है। जैन साहित्य और तमिल साक्ष्य दोनों इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। अशोक के कई अभिलेख दक्षिण भारत में पाए गए हैं, परंतु अशोक ने केवल कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) लड़ा था। बिंदुसार की विजयों के ऐतिहासिक प्रमाण अत्यंत अनिश्चित हैं, अतः दक्षिण विजय चंद्रगुप्त मौर्य की ही मानी जाती है।
26. मालवा, गुजरात एवं महाराष्ट्र किस शासक ने पहली बार जीता ?
(a) हर्ष
(b) स्कंदगुप्त
(c) विक्रमादित्य
(d) चंद्रगुप्त मौर्य
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(d)
चंद्रगुप्त मौर्य पहले ऐसे शासक थे जिन्होंने मालवा, गुजरात और महाराष्ट्र को अपने साम्राज्य में शामिल किया। उनके समय तक साम्राज्य का विस्तार पश्चिम में हिंदुकुश से पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक और उत्तर में हिमालय से दक्षिण में मैसूर तक था। रुद्रदामन के जूनागढ़ शिलालेख तथा जैन ग्रंथों से सौराष्ट्र और अवंति पर उनके अधिकार की पुष्टि होती है।
27. अभिलेख, जिससे यह प्रमाणित होता है कि चंद्रगुप्त का प्रभाव पश्चिम भारत पर था, है-
(a) कलिंग शिलालेख
(b) अशोक का गिरनार शिलालेख
(c) रुद्रदामन का जूनागढ़ शिलालेख
(d) अशोक का सोपारा शिलालेख
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(c)
लगभग 150 ई. में उत्कीर्ण रुद्रदामन के जूनागढ़ (गिरनार) शिलालेख में यह उल्लेख है कि आनर्त और सौराष्ट्र क्षेत्र में चंद्रगुप्त मौर्य के प्रांतीय राज्यपाल ‘पुष्यगुप्त वैश्य’ ने एक सिंचाई बाँध (सुदर्शन झील) का निर्माण करवाया था। इससे स्पष्ट होता है कि वर्तमान गुजरात का यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य का अंग था।
28. गुजरात चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य में सम्मिलित था, यह प्रमाणित
(a) ग्रीक विवरणों से
(b) रुद्रदामन के जूनागढ़ शिला अभिलेख से
(c) जैन परंपरा से
(d) अशोक के स्तंभलेख II से
U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
उत्तर-(b)
गुजरात के मौर्य साम्राज्य में सम्मिलित होने का प्रमाण रुद्रदामन के जूनागढ़ शिला अभिलेख से मिलता है। इस अभिलेख में स्पष्ट उल्लेख है कि चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने सौराष्ट्र प्रदेश में सुदर्शन झील का निर्माण कराया था, जो यह सिद्ध करता है कि यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य के अधीन था।
29. उस मानचित्र में — जो किसी एक शासक के साम्राज्य की सबसे बड़ी सीमा दर्शाता है — निम्नलिखित में से क्या प्रदर्शित होगा?
(a) कनिष्क से उसकी मृत्यु के समय
(b) समुद्रगुप्त से, उसके दक्षिण भारत अभियान के उपरांत
(c) अशोक से, उसके शासनकाल के अंतिम समय
(d) हर्ष के राज्यारोहण के अवसर पर थानेश्वर के साम्राज्य से
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
अशोक के शासनकाल के अंतिम समय में उनका साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप में सर्वाधिक विस्तृत था। असम और सुदूर दक्षिण के कुछ राज्यों को छोड़कर संपूर्ण भारतवर्ष उनके साम्राज्य के अंतर्गत था। उनके शिलालेखों और स्तंभलेखों की व्यापक भौगोलिक उपस्थिति उनके साम्राज्य की विशालता की सटीक जानकारी देती है।
30. अशोक के निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें दक्षिण भारतीय राज्यों का उल्लेख हुआ है?
(a) तृतीय मुख्य शिलालेख
(b) द्वितीय मुख्य शिलालेख
(c) नवां मुख्य शिलालेख
(d) प्रथम स्तंभ अभिलेख
U.P.P.C.S (Mains) 2016
उत्तर-(b)
अशोक के द्वितीय मुख्य शिलालेख में दक्षिण भारतीय राज्यों — चोल, पाण्ड्य, सतियपुत्त, केरलपुत्त और ताम्रपर्णी (श्रीलंका) — का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इस अभिलेख में इन्हें ‘प्रत्यंत राज्य’ कहा गया है, अर्थात् ये मौर्य साम्राज्य की सीमा पर स्थित स्वतंत्र राज्य थे। इस अभिलेख में यह भी उल्लेख है कि अशोक ने इन क्षेत्रों में मनुष्यों और पशुओं दोनों के लिए चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराईं।
31. सांची का स्तूप किस राज्य में स्थित है?
(a) अमरावती
(b) भरहुत
(c) सांची
(d) सारनाथ
U.P.P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(c)
स्थापत्य कला की दृष्टि से सांची के महास्तूप को सर्वश्रेष्ठ स्तूप माना जाता है। यह मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक पहाड़ी पर स्थित है। इसका प्रारंभिक निर्माण सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था। बाद के काल में शुंग और सातवाहन शासकों ने इसका विस्तार किया। भरहुत का स्तूप म.प्र. के सतना जिले में है, जबकि अमरावती का स्तूप आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में कृष्णा नदी के दाहिने तट पर स्थित है। सारनाथ का धमेख स्तूप गुप्तकाल में निर्मित है।
32. भारत का प्रथम अस्पताल एवं औषधि-बाग निर्माण करवाया था-
(a) अशोक ने
(b) चंद्रगुप्त मौर्य ने
(c) भगवान महावीर ने
(d) धन्वंतरि ने
U.P. Lower Sub. (Mains) 2015
उत्तर-(a)
सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में मनुष्यों और पशुओं दोनों के लिए औषधालय (अस्पताल) एवं औषधि-बागों का निर्माण करवाया — यह भारत का प्रथम ज्ञात चिकित्सा-संस्थान माना जाता है। अशोक ने पशु-पक्षियों के वध पर प्रतिबंध लगाया, छायादार वृक्ष लगवाए, धर्मशालाएं और कुएं भी बनवाए। वह युद्ध विजेता से अधिक ‘धम्म विजेता’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
33. रज्जुक थे-
(a) चोल राज्य में व्यापारी
(b) मौर्य शासन में अधिकारी
(c) गुप्त साम्राज्य में सामंत वर्ग
(d) शक सेना में अधिकारी
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
अशोक के अभिलेखों में ‘रज्जुक’ नामक प्रशासनिक पदाधिकारी का उल्लेख मिलता है। ये मौर्य प्रशासन में जिला स्तर के अधिकारी थे जिन्हें राजस्व एवं न्याय दोनों क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त थे — आधुनिक जिलाधिकारी के समकक्ष। अपने चतुर्थ स्तंभ लेख में अशोक ने रज्जुकों की तुलना उस विश्वसनीय धात्री से की है जिसे माता-पिता अपने बच्चे की देखभाल के लिए नियुक्त करते हैं।
34. “अशोक ने बौद्ध होते हुए भी हिंदू धर्म में आस्था नहीं छोड़ी” इसका प्रमाण है-
(a) तीर्थयात्रा
(b) मोक्ष में विश्वास
(c) ‘देवनामप्रिय’ की उपाधि
(d) पशु चिकित्सालय खोले
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1999
उत्तर-(c)
अशोक के सभी अभिलेखों में उसे ‘देवानामपिय’ (देवताओं का प्रिय) तथा ‘पियदसि’ (देखने में प्रिय/सुंदर) कहा गया है। ‘देवानामपिय’ की उपाधि हिंदू परंपरा से जुड़ी है और यह इस बात का संकेत देती है कि अशोक बौद्ध होते हुए भी हिंदू धर्म की कुछ परंपराओं और विश्वासों से पूरी तरह अलग नहीं हुआ। अशोक का राज्याभिषेक लगभग 269 ई.पू. में हुआ था।
35. सार्थवाह किसे कहते थे?
(a) दलालों को
(b) व्यापारियों के काफिले को
(c) महाजनों को
(d) तीर्थयात्रियों को
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(b)
मौर्यकाल में व्यापारियों के संगठित काफिले (कारवां) को ‘सार्थवाह’ कहा जाता था। इसका उल्लेख कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी मिलता है। ये व्यापारी समूह लंबी दूरी के व्यापार के लिए एक साथ यात्रा करते थे, जिससे सुरक्षा और संसाधनों की साझेदारी होती थी।
36. निम्नलिखित में से किस स्रोत में अशोक के राज्यकाल में तृतीय बौद्ध समिति होने का उल्लेख मिलता है ?
1.अशोक के अभिलेख
2.दीपवंश
3.महावंश
4.दिव्यावदान
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-
(a) 1, 2
(b) 2, 3
(c) 3,4
(d) 1,4
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(b)
सिंहली ग्रंथों दीपवंश और महावंश के अनुसार अशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र में बौद्ध धर्म की तृतीय महासंगीति का आयोजन हुआ था। इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु ‘मोग्गलिपुत्त तिस्स’ ने की। अशोक के स्वयं के अभिलेखों में इस संगीति का उल्लेख नहीं मिलता।
37. अशोक के शासनकाल में बौद्ध सभा किस नगर में आयोजित की गई थी?
(a) मगध
(b) पाटलिपुत्र
(c) समस्तीपुर
(d) राजगृह
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
अशोक के शासनकाल में तृतीय बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना, बिहार) में आयोजित हुई थी। पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी थी और उस काल का सबसे प्रमुख नगर था। यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में पाटलिपुत्र को उस युग का सबसे भव्य नगर बताया है।
38. निम्नलिखित मौर्य शासक बौद्ध धर्म के अनुयायी थे-
1.चंद्रगुप्त
अशोक
3.बिंदुसार
4.दशरथ
सही उत्तर चुनिए-
(a) 1 एवं 2
(b) 2 एवं 3
(c) 3 एवं 4
(d) 2 एवं 4
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
मौर्य वंश में अशोक और उसका पौत्र दशरथ बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। दशरथ ने भी अशोक की भांति ‘देवानांपिय’ की उपाधि धारण की। चंद्रगुप्त मौर्य ने वृद्धावस्था में जैन धर्म स्वीकार किया था और बिंदुसार आजीवक संप्रदाय का अनुयायी था।
39. निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकारी मौर्य प्रशासन का भाग नहीं था?
(a) अग्रहारिक
(b) युक्त
(c) प्रादेशिक
(d) राजुक
R.A.S./R.T.S. (Pre) (Re-Exam) 2013
उत्तर-(a)
अशोक के तृतीय शिलालेख में मौर्य प्रशासन के तीन प्रमुख पदाधिकारियों का उल्लेख मिलता है — युक्त (जिला स्तर पर राजस्व वसूली), राजुक (राजस्व एवं न्याय अधिकारी), और प्रादेशिक (मंडल प्रमुख, संभागीय आयुक्त के समकक्ष)। ‘अग्रहारिक’ मौर्य प्रशासन का अंग नहीं था; यह पद मौर्य-प्रशासन में प्रमाणित नहीं है।
40. सारनाथ स्तंभ का निर्माण किया था-
(a) हर्षवर्धन ने
(b) अशोक ने
(c) गौतम बुद्ध ने
(d) कनिष्क ने
U.P. Lower Sub. (Spl.) Pre 2008
उत्तर-(b)
सारनाथ स्तंभ का निर्माण सम्राट अशोक ने करवाया था। इस स्तंभ के शीर्ष पर चार सिंहों की आकृति है जो शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और अभय का प्रतीक है। भारत सरकार ने 26 जनवरी 1950 को इस सिंह-शीर्ष को अपने राजकीय चिह्न के रूप में अपनाया। मौर्यकाल के सभी स्तंभ चुनार (उत्तर प्रदेश) के बलुआ पत्थर से बने हैं और इनकी पॉलिश आज भी चमकदार है।
41. अशोक के शिलालेखों को सर्वप्रथम किसने पढ़ा था?
(a) बूहलर
(b) रॉबर्ट सेबेल
(c) जेम्स प्रिंसेप
(d) कॉड्रिगटन
I.A.S. (Pre) 1993
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(c)
ब्रिटिश पुरालेखशास्त्री जेम्स प्रिंसेप ने सन् 1837 में अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने ब्राह्मी और खरोष्ठी दोनों लिपियों की वर्णमाला का सफलतापूर्वक उद्वाचन किया, जो भारतीय इतिहास की पुनर्रचना में एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ।
42. सांची का स्तूप किस शासक ने बनवाया था?
(a) बिंबिसार
(b) अशोक
(c) हर्षवर्धन
(d) पुष्यमित्र
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(b)
सांची के स्तूपों का निर्माण मौर्य सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था। सांची मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में विदिशा नगर के समीप एक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ कुल तीन प्रमुख स्तूप हैं — स्तूप संख्या 1 (महास्तूप) सबसे बड़ा और महत्त्वपूर्ण है, जिसका व्यास लगभग 36.6 मीटर और ऊँचाई लगभग 16.4 मीटर है।
43. ब्राह्मी लिपि का प्रथम उवाचन किस पर उत्कीर्ण अक्षरों से किया गया ?
(a) पत्थर की पट्टियों पर
(b) मुहरों पर
(c) स्तंभों पर
(d) सिक्कों पर
U.P.P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(a)
ब्राह्मी लिपि का प्रथम उवाचन (decipherment) जेम्स प्रिंसेप द्वारा पत्थर की पट्टियों अर्थात् शिलालेखों पर उत्कीर्ण अक्षरों के आधार पर किया गया था। ब्राह्मी लिपि बाईं से दाईं ओर लिखी जाती है और इसे भारत की अधिकांश आधुनिक लिपियों जैसे देवनागरी, बंगाली, गुजराती आदि की जननी माना जाता है।
44. सांची का स्तूप किसने बनवाया था?
(a) चंद्रगुप्त
(b) कौटिल्य
(c) गौतम बुद्ध
(d) अशोक
M.P.P.C.S. (Pre) 2006
M.P.P.C.S. (Pre) 1995
M.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(d)
सांची का स्तूप सम्राट अशोक ने बनवाया था। बौद्ध धर्म अपनाने के पश्चात् अशोक ने देशभर में 84,000 स्तूपों के निर्माण का श्रेय बौद्ध परंपरा में लिया जाता है, जिनमें से सांची का महास्तूप सर्वाधिक प्रसिद्ध है। इस स्तूप में भगवान बुद्ध के अवशेषों को सुरक्षित रखा गया है।
45. निम्नांकित में से कौन-सा अशोक कालीन अभिलेख ‘खरोष्ठी’ लिपि में है?
(a) कालसी
(b) गिरनार
(c) शाहबाजगढ़ी
(d) मेरठ
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(c)
अशोक के अभिलेखों में से शाहबाजगढ़ी (पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में) और मानसेहरा (पाकिस्तान) के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में उत्कीर्ण हैं। खरोष्ठी लिपि दाईं से बाईं ओर लिखी जाती है और इसका प्रचलन मुख्यतः उत्तर-पश्चिम भारत एवं मध्य एशिया में था। शेष सभी अभिलेख सामान्यतः ब्राह्मी लिपि में हैं।
46. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही
सूची-I (स्थान) सूची-II (स्मारक / भग्नावशेष)
A. कौशाम्बी – 1. धमेख स्तूप
B. कुशीनगर – 2. घोषिताराम मठ
C. सारनाथ – 3. रानाभर स्तूप
D. श्रावस्ती – 4. सहेत-महेत
कूट :
A B C D
(a) 2 1 3 4
(b) 4 3 2 1
(c) 2 3 1 4
(d) 4 2 1 3 उत्तर चुनिए –
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(c)
दिए गए स्थानों और उनसे संबद्ध स्मारकों का सही सुमेलन इस प्रकार है — कौशाम्बी (उत्तर प्रदेश) में घोषिताराम मठ स्थित है, जो बुद्ध के एक प्रमुख दानी अनुयायी घोषित श्रेष्ठी द्वारा निर्मित था; कुशीनगर में रानाभर स्तूप है, जो बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किए जाने की स्मृति में बनाया गया था; सारनाथ में धमेख स्तूप है, जो उस स्थान को इंगित करता है जहाँ बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) दिया था; और श्रावस्ती को सहेत-महेत पुरातात्त्विक स्थल से पहचाना जाता है।
47. विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची का प्राचीन नाम यह भी था-
(a) काकणाम
(b) वेत्रवती
(c) बेसनगरी
(d) दशपुर
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
सांची का प्राचीन नाम ‘काकणाम’ (काकनाड) था, जो चौथी शताब्दी के गुप्तकालीन अभिलेखों में ‘काकणाम महाविहार’ के रूप में उल्लिखित है। महावंश ग्रंथ में इसे ‘चेतियगिरि’ (स्तूपों का पर्वत) कहा गया है, क्योंकि यहाँ पर्वत की चोटी पर अनेक स्तूपों का निर्माण हुआ था। सांची के निकट विदिशा (प्राचीन नाम — वेत्रवती) स्थित है जो मौर्यकाल में एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था।
48. अशोक के शिलालेखों (Inscriptions) में प्रयुक्त भाषा है-
(a) संस्कृत
(b) प्राकृत
(c) पाली
(d) हिंदी
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं। प्राकृत उस काल की जनसामान्य की भाषा थी, जिसे अशोक ने इसलिए अपनाया ताकि उनके धम्म संदेश जनता तक सुगमता से पहुँच सकें। उनके अभिलेखों को कई वर्गों में बाँटा जा सकता है — 14 प्रमुख शिलालेख, लघु शिलालेख, स्तम्भलेख और गुहालेख। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा) में खरोष्ठी लिपि का उपयोग हुआ, जबकि अफगानिस्तान के कंदहार में यूनानी (Greek) और आरमेइक भाषाओं में द्विभाषीय अभिलेख प्राप्त हुए हैं।
49. पत्थर पर प्राचीनतम शिलालेख किस भाषा में थे?
(a) पालि
(b) संस्कृत
(d) ब्राह्मी
(c) प्राकृत
U.P.P.C.S. (Pre) 2009
उत्तर-(c)
पत्थर पर उत्कीर्ण प्राचीनतम शिलालेख प्राकृत भाषा में हैं, जो अशोक के अभिलेखों के रूप में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के हैं। प्राकृत भाषा, संस्कृत की ही एक लोकप्रिय और सरलीकृत शाखा थी जो जनसामान्य द्वारा बोली जाती थी। ब्राह्मी यहाँ भाषा नहीं बल्कि लिपि है — अतः विकल्प (d) गलत है।
50. तीर्थयात्रा के समय सम्राट अशोक निम्नलिखित स्थानों पर गए। उन्होंने किस मार्ग का अनुगमन किया?
नीचे दिए गए कूट से सही
1. गया 2. कपिलवस्तु
3. कुशीनगर 4. लुम्बिनी
5. सारनाथ 6. श्रावस्ती
कूट :
उत्तर चुनिए-
(a) 1, 2, 3, 4, 5 तथा 6
(c) 4, 5, 6, 3, 2 तथा 1
(b) 1, 3, 4, 2, 5 तथा 6
(d) 4, 2, 1, 5, 3 तथा 6
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(d)
इतिहासकार विंसेट आर्थर स्मिथ के अनुसार अशोक ने बौद्ध गुरु उपगुप्त के साथ बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों की धम्म यात्रा इस क्रम में की — लुम्बिनी (जन्मस्थान), कपिलवस्तु (बाल्यकाल), बोधगया/गया (ज्ञान प्राप्ति), सारनाथ (प्रथम उपदेश), कुशीनगर (महापरिनिर्वाण) और श्रावस्ती (दीर्घकालीन प्रवास)। यह क्रम जीवन-यात्रा के कालक्रम से मेल खाता है।
51. प्राचीन भारत में निम्नलिखित में से कौन-सी एक लिपि दाईं ओर से बाईं ओर लिखी जाती थी ?
(a) ब्राह्मी
(b) नंदनागरी
(c) शारदा
(d) खरोष्ठी
I.A.S. (Pre) 1997
उत्तर-(d)
खरोष्ठी लिपि प्राचीन भारत की एकमात्र प्रमुख लिपि थी जो दाएँ से बाएँ की दिशा में लिखी जाती थी — ठीक उसी प्रकार जैसे अरबी और फ़ारसी लिखी जाती हैं। यह मुख्यतः उत्तर-पश्चिम भारत (वर्तमान पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान) में प्रचलित थी। इसे पढ़ने का श्रेय मैसन, जेम्स प्रिंसेप, नोरिस, लैसेन और कनिंघम जैसे विद्वानों को जाता है।
52. अशोक का अपने शिलालेखों में सामान्यतः जिस नाम से उल्लेख हुआ है, वह है-
(a) चक्रवर्ती
(b) धर्मदेव
(c) धर्मकीर्ति
(d) प्रियदर्शी
I.A.S. (Pre) 1995
उत्तर-(d)
अशोक के शिलालेखों में उन्हें “देवानांपिय” (देवताओं का प्रिय) और “देवानांपियदसि” (प्रियदर्शी) की उपाधियों से संबोधित किया गया है। स्वयं “अशोक” नाम केवल कुछ ही अभिलेखों जैसे मास्की, गुर्जरा, नेत्तुर और उडेगोलम में उल्लिखित है। पुराणों में उन्हें “अशोकवर्द्धन” कहा गया है।
53. मौर्य साम्राज्य के पेशावर के निकट उत्तर पश्चिम भाग में अशोक के शिलालेख थे-
(a) ब्राह्मी लिपि में
(b) आरमेइक लिपि में
(c) देवनागरी लिपि में
(d) खरोष्ठी लिपि में
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(d)
मौर्य साम्राज्य के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र, विशेषकर पेशावर के निकट, अशोक के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में उत्कीर्ण हैं। इस श्रेणी में “शाहबाजगढ़ी” (खैबर पख्तूनख्वा) और “मानसेहरा” (पाकिस्तान) के अभिलेख आते हैं। अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं — केवल ये दो ही खरोष्ठी लिपि में हैं।
54. ब्राह्मी लिपि को सर्वप्रथम किसने पढ़ा?
(a) ए. कनिंघम
(b) ए.एच. दानी
(c) व्यूलर
(d) जेम्स प्रिंसेप
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
ब्राह्मी लिपि को सर्वप्रथम सन् 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा। प्रिंसेप ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी और प्रतिभाशाली भाषाविद् थे। उन्होंने सिक्कों और शिलालेखों की तुलनात्मक विधि का उपयोग कर ब्राह्मी वर्णमाला को समझने में सफलता प्राप्त की। इसी सफलता के आधार पर वे अशोक के शिलालेखों को भी पढ़ने में सक्षम हुए।
55. अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ा था-
(a) जेम्स प्रिंसेप ने
(b) जॉर्ज व्यूलर ने
(c) विसेंट स्मिथ ने
(d) अहमद हसन दानी ने
U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
उत्तर-(a)
अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा। उन्होंने ब्राह्मी लिपि की वर्णमाला को व्यवस्थित रूप से समझकर इन अभिलेखों का अर्थ उद्घाटित किया। उनकी इस खोज ने प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में एक नई क्रांति ला दी।
56. निम्नलिखित में से प्राचीन भारत की कौन-सी लिपि दाहिने से बाईं ओर लिखी जाती थी ?
(a) ब्राह्मी
(b) शारदा
(c) खरोष्ठी
(d) नन्दनागरी
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
खरोष्ठी लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी। इसके विपरीत ब्राह्मी, शारदा और नंदनागरी आदि लिपियाँ बाएँ से दाएँ लिखी जाती थीं। खरोष्ठी मुख्यतः गांधार क्षेत्र (वर्तमान पाकिस्तान-अफगानिस्तान) की लिपि थी और इसका प्रसार मध्य एशिया तक हुआ।
57. सम्राट अशोक के राजादेशों का सबसे पहले विकूटन (डिसाइफर) किसने किया था ?
(a) जॉर्ज व्यूलर
(b) जेम्स प्रिंसेप
(c) मैक्स मुलर
(d) विलियम जोन्स
I.A.S. (Pre) 2016
उत्तर-(b)
अशोक के राजादेशों को सर्वप्रथम जेम्स प्रिंसेप ने 1837 ई. में पढ़ा और उनका विकूटन (decipher) किया। उन्होंने ब्राह्मी वर्णमाला की कुंजी खोलकर इन शिलालेखों की भाषा को समझा जो प्राकृत थी। यह उपलब्धि भारतीय पुरालेख विद्या (Epigraphy) के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।
58. अशोक के शिलालेखों को पढ़ने वाला प्रथम अंग्रेज कौन था?
(a) जॉन टॉवर
(b) हैरी स्मिथ
(c) चार्ल्स मेटकॉफ
(d) जेम्स प्रिंसेप
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
जेम्स प्रिंसेप वह प्रथम अंग्रेज थे जिन्होंने अशोक के शिलालेखों को सफलतापूर्वक पढ़ा। उन्होंने 1837 ई. में यह ऐतिहासिक कार्य संपन्न किया। उनसे पहले कई विद्वानों ने प्रयास किए थे किंतु पूर्ण सफलता नहीं मिली। प्रिंसेप की इस उपलब्धि ने अशोक के इतिहास और मौर्य साम्राज्य की नीतियों को समझने का मार्ग प्रशस्त किया।
59. वह स्थान, जहां प्राक् अशोक ब्राह्मी लिपि का पता चला है –
(a) नागार्जुनकोंडा
(b) अनुराधापुर
(c) ब्रह्मगिरि
(d) मास्की
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(b)
प्राक्-अशोक ब्राह्मी लिपि (चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से भी पहले की) के साक्ष्य श्रीलंका के अनुराधापुर से प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त पिपरहवा (उत्तर प्रदेश), सोहगौरा (उत्तर प्रदेश) और महास्थान (बांग्लादेश) से भी प्राक्-अशोक काल के ब्राह्मी अभिलेखों के साक्ष्य मिले हैं।
60. अपने शिलालेखों में अशोक सामान्यतः किस नाम से जाने जाते है?
(a) चक्रवर्ती
(b) प्रियदर्शी
(c) धर्मदेव
(d) धर्मकीर्ति
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(b)
अशोक के शिलालेखों में उन्हें प्रायः “देवानांपियदसि” अर्थात् “प्रियदर्शी” के नाम से संबोधित किया गया है, जिसका अर्थ है “देवताओं का प्रिय, सुंदर दृष्टि वाला”। यह उपाधि अशोक की राजकीय पहचान थी। “अशोक” नाम स्वयं केवल कुछ विशेष अभिलेखों में ही मिलता है।
61. कालसी प्रसिद्ध है-
(a) बौद्ध चैत्यों हेतु
(b) फारसी सिक्कों के कारण
(c) अशोक के शिलालेख के कारण
(d) गुप्तकालीन मंदिरों हेतु
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(c)
कालसी उत्तराखंड के देहरादून जिले में यमुना नदी के तट पर स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यहाँ अशोक का चौदहवाँ वृहत शिलालेख प्राप्त हुआ है, जो पहाड़ी पत्थर पर उत्कीर्ण है। यह उत्तर भारत में प्राप्त अशोक के सबसे महत्वपूर्ण शिलालेखों में से एक है।
62. केवल वह स्तंभ, जिसमें अशोक ने स्वयं को मगध का सम्राट बताया है-
(a) मास्की का लघु स्तंभ
(b) रुम्मिनदेई स्तंभ
(c) क्वीन स्तंभ
(d) भाब्रू स्तंभ
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(d)
भाब्रू (बैराट) स्तंभ लेख अशोक के अभिलेखों में विशेष स्थान रखता है। इसमें अशोक ने स्वयं को ‘मागध सम्राट’ (मगध का सम्राट) कहा है और बौद्ध संघ के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की है। यह एकमात्र अभिलेख है जो अशोक को प्रमाणित रूप से बौद्ध धर्मावलंबी सिद्ध करता है।
63. अभिलेखों में किस शासक का उल्लेख ‘पियदस्सी’ एवं ‘देवानामप्रिय’ के रूप में किया गया है?
(a) चंद्रगुप्त मौर्य
(b) अशोक
(c) समुद्रगुप्त
(d) हर्षवर्धन
M.P.P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
अशोक के अधिकांश अभिलेखों में उसे ‘देवानामप्रिय’ (देवताओं का प्रिय) और ‘पियदस्सी’ (प्रियदर्शी — जो सबका कल्याण देखता है) की उपाधियों से संबोधित किया गया है। व्यक्तिगत नाम ‘अशोक’ केवल मास्की, गुर्जरा, नेत्तूर और उडेगोलम के लघु शिलालेखों में ही मिलता है।
64. निम्नलिखित वक्तव्यों में कौन-सा एक वक्तव्य अशोक के प्रस्तर स्तंभों के बारे में गलत है?
(a) इन पर बढ़िया पॉलिश है।
(b) ये अखंड हैं।
(c) स्तंभों का शैफ्ट शुंडाकार है।
(d) ये स्थापत्य संरचना के भाग हैं।
I.A.S. (Pre) 1997
उत्तर-(d)
अशोक के प्रस्तर स्तंभ किसी भवन या स्थापत्य संरचना का हिस्सा नहीं हैं — वे स्वतंत्र रूप से स्थापित पृथक रचनाएँ हैं। ये स्तंभ एकाश्म (अखंड पत्थर से निर्मित) हैं, इन पर मौर्यकालीन चमकदार पॉलिश है और इनका शैफ्ट ऊपर की ओर क्रमशः पतला होता जाता है (शुंडाकार)।
65. निम्नलिखित में से किस उभारदार मूर्तिशिल्प (रिलीफ स्कल्प्चर) शिलालेख में अशोक के प्रस्तर रूप चित्र के साथ ‘राण्यो अशोक’ (राजा अशोक) उल्लिखित है?
(a) कंगनहल्ली
(b) सांची
(c) शाहबाजगढ़ी
(d) सोहगौरा
I.A.S. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) जिले में भीमा नदी के तट पर स्थित कंगनहल्ली में एक प्राचीन बौद्ध स्तूप है। यहाँ पाषाण पर उत्कीर्ण अशोक के रूप चित्र के नीचे ‘राण्यो अशोक’ (राजा अशोक) अभिलेख अंकित है। यह अशोक का एकमात्र प्राप्त प्रस्तर रूप चित्र माना जाता है।
66. निम्नलिखित में से किस एक अभिलेख में अशोक के व्यक्तिगत नाम का उल्लेख मिलता है?
(a) कालसी
(b) रुम्मिनदेई
(c) विशिष्ट कलिंग राजादेश
(d) मास्की
I.A.S. (Pre) 1997
उत्तर-(d)
अशोक के अधिकांश अभिलेखों में उसे केवल ‘देवानामप्रिय पियदस्सी’ कहा गया है। किंतु मास्की, गुर्जरा, नेत्तूर और उडेगोलम के लघु शिलालेखों में ‘अशोक’ नाम स्पष्ट रूप से अंकित है। मास्की (कर्नाटक) के अभिलेख की खोज 1915 ई. में हुई थी, जिसने पहली बार ‘देवानामप्रिय’ को निश्चित रूप से अशोक से जोड़ा।
67. निम्नलिखित अभिलेखों में से किस लेख में ‘अशोक’ नाम उल्लिखित है?
(a) भाब्रू अभिलेख
(b) तेरहवां शिलालेख
(c) रुम्मिनदेई स्तंभ लेख
(d) मास्की का लघु शिलालेख
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 2007
उत्तर-(d)
मास्की (कर्नाटक के रायचूर जिले में स्थित) का लघु शिलालेख उन चुनिंदा अभिलेखों में से एक है जिनमें ‘अशोक’ नाम सीधे उल्लिखित है। शेष अधिकांश अभिलेखों में केवल ‘देवानामप्रिय पियदस्सी’ उपाधि का प्रयोग हुआ है।
68. निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें अशोक का नामोल्लेख हुआ है?
(a) गुर्जरा में
(b) अहरौरा में
(c) ब्रह्मगिरि में
(d) सारनाथ में
U.P. P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
गुर्जरा (मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित) के लघु शिलालेख में अशोक का नाम स्पष्टतः अंकित है। यह उन चार अभिलेखों में से एक है जिनमें ‘अशोक’ नाम प्रत्यक्ष रूप से मिलता है — शेष हैं मास्की, नेत्तूर और उडेगोलम।
69. गुर्जरा लघु शिलालेख, जिसमें अशोक का नामोल्लेख किया गया है, कहां स्थित है?
(a) उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में
(b) मध्य प्रदेश के दतिया जिले में
(c) राजस्थान के जयपुर जिले में
(d) बिहार के चंपारन जिले में
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
गुर्जरा लघु शिलालेख मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित है। इसमें अशोक का नाम प्रत्यक्ष रूप से उल्लिखित है, जो इसे ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
70. अशोक का रुम्मिनदेई स्तंभ संबंधित है-
(a) बुद्ध के जन्म से
(b) बुद्ध के ज्ञान-प्राप्ति से
(c) बुद्ध के प्रथम उपदेश से
(d) बुद्ध के शरीर-त्याग से
U.P.P.C.S.(SpL) (Mains) 2008
उत्तर-(a)
रुम्मिनदेई (वर्तमान नेपाल में लुम्बिनी) का स्तंभ लेख बुद्ध की जन्मभूमि की यात्रा के उपलक्ष्य में अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 20वें वर्ष स्थापित किया था। इस अभिलेख में उसने लुम्बिनी ग्राम का भू-राजस्व 1/8 भाग (पहले 1/6 था) कर दिया और बलि (धार्मिक कर) को पूर्णतः माफ कर दिया।
71.
अशोक के निम्न अभिलेखों में से पूर्णरूपेण धार्मिक सहिष्णुता के प्रति समर्पित कौन-सा अभिलेख है ?
(a) शिलालेख XIII
(b) शिलालेख XII
(c) स्तंभलेख VII
(d) भाब्रू लघु शिलालेख
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
अशोक का बारहवाँ दीर्घ शिलालेख (Rock Edict XII) विशेष रूप से धार्मिक सहिष्णुता को समर्पित है। इसमें अशोक ने सभी धार्मिक संप्रदायों के प्रति आदर और उनके सार की वृद्धि की कामना व्यक्त की है। उन्होंने “धम्म महामात्रों” (Dhamma Mahamatras) नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी जो विभिन्न संप्रदायों के बीच सौहार्द बनाए रखते थे।
72. निम्नलिखित में से किस शासक ने अपनी प्रजा को इस अभिलेख के माध्यम से परामर्श दिया?
“कोई भी व्यक्ति जो अपने संप्रदाय को महिमा-मंडित करने की दृष्टि से अपने धार्मिक संप्रदाय की प्रशंसा करता है या अपने संप्रदाय के प्रति अत्यधिक भक्ति के कारण अन्य संप्रदायों की निंदा करता है, वह अपितु अपने संप्रदाय को गंभीर रूप से हानि पहुंचाता है।”
(a) अशोक
(b) समुद्रगुप्त
(c) हर्षवर्धन
(d) कृष्णदेव राय
I.A.S. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
प्रस्तुत उद्धरण मौर्य सम्राट अशोक के बारहवें शिलालेख (Rock Edict XII) से लिया गया है, जो धार्मिक सहिष्णुता का संदेश देता है। अशोक ने स्पष्ट किया कि दूसरे संप्रदायों की निंदा करना अंततः अपने ही पंथ को कमज़ोर करता है।
73.
उत्तराखंड में, सम्राट अशोक के शिलालेखों की एक प्रति कहां मिली थी?
(a) नैनीताल
(b) पौड़ी
(c) टिहरी
(d) कालसी
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Mains) 2007
उत्तर-(d)
उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित कालसी (Kalsi) नामक स्थान पर अशोक के चौदह दीर्घ शिलालेखों का एक पूर्ण सेट प्राप्त हुआ है। यह शिलालेख यमुना नदी के किनारे एक विशाल शिला पर उत्कीर्ण है। यह स्थान मौर्य साम्राज्य की उत्तर-पश्चिमी सीमा का प्रतिनिधित्व करता है।
74. निम्नलिखित में से किस दक्षिणी राज्य का उल्लेख अशोक के अभिलेखों में नहीं है?
(a) चोल
(b) पाण्ड्य
(c) सतियपुत्त
(d) सातवाहन
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(d)
अशोक के दूसरे और तेरहवें शिलालेख में जिन दक्षिणी राज्यों का उल्लेख मिलता है, वे हैं — चोल, पाण्ड्य, सतियपुत्त, केरलपुत्त और ताम्रपर्णी (श्रीलंका)। इनमें सातवाहन राज्य का कोई उल्लेख नहीं है क्योंकि सातवाहन वंश का उदय मौर्यों के पतन के बाद लगभग 230 ई.पू. के आसपास हुआ था।
75. कलिंग युद्ध की विजय तथा क्षतियों का वर्णन अशोक के किस शिलालेख (Rock Edict) में है?
(a) शिलालेख I
(b) शिलालेख II
(c) शिलालेख XII
(d) शिलालेख XIII
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
अशोक के तेरहवें शिलालेख (Rock Edict XIII) में कलिंग युद्ध का विस्तृत विवरण मिलता है। यह युद्ध 261 ई.पू. में हुआ, जो अशोक के राज्याभिषेक के लगभग 8 वर्ष बाद था।
76. कलिंग युद्ध का विवरण हमें ज्ञात होता है-
(a) 13वें शिलालेख द्वारा
(b) रुम्मिनदेई स्तंभ लेख द्वारा
(c) ह्वेनसांग के विवरण द्वारा
(d) प्रथम लघु शिलालेख द्वारा
U.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(a)
कलिंग युद्ध का प्रामाणिक विवरण अशोक के तेरहवें (XIII) शिलालेख से प्राप्त होता है। रुम्मिनदेई स्तंभलेख में बुद्ध के जन्मस्थान लुंबिनी की यात्रा का उल्लेख है, ह्वेनसांग सातवीं शताब्दी ई. का चीनी यात्री था जिसका कालिंग युद्ध से कोई संबंध नहीं, और प्रथम लघु शिलालेख में अशोक के बौद्ध धर्म अपनाने का संदर्भ है।
77. अशोक के जो प्रमुख शिलालेख (Rock Edicts) संगम राज्य के विषय में हमें बताते हैं, उनमें सम्मिलित हैं-
(a) I और X शिलालेख
(b) I और XI शिलालेख
(c) II और XIII शिलालेख
(d) II और XIV शिलालेख
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
अशोक के द्वितीय (II) और त्रयोदश (XIII) शिलालेखों में संगम राज्यों — चोल, पाण्ड्य, सतियपुत्त, केरलपुत्त तथा ताम्रपर्णी (श्रीलंका) — का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। दूसरे शिलालेख में इन राज्यों में पशु-चिकित्सा और मानव-चिकित्सा की व्यवस्था का वर्णन है, जो अशोक की प्रजा-कल्याण नीति को दर्शाता है।
78. अशोक का समकालीन तुरमय कहां का राजा था?
(a) मिस्र
(b) कोरिंथ
(c) मेसीडोनिया
(d) सीरिया
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(a)
अशोक के तेरहवें शिलालेख में उल्लिखित “तुरमय” या “तुरमाय” की पहचान टालेमी II फिलाडेल्फस से की जाती है, जो मिस्र (Egypt) का शासक था और उसने 285-246 ई.पू. तक शासन किया। अशोक ने उसके पास धम्म-दूत भेजे थे।
79. टालेमी फिलाडेल्फस, जिसके साथ अशोक के राजनय संबंध थे, कहां का शासक था?
(a) साइरोन
(b) मिस्र
(c) मकदूनिया
(d) सीरिया
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(b)
टालेमी II फिलाडेल्फस मिस्र का शासक था। अशोक के तेरहवें शिलालेख में उसे “तुरमय” नाम से संबोधित किया गया है। अशोक ने उसके दरबार में बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु दूत भेजे थे। उल्लेखनीय है कि अशोक और टालेमी II दोनों लगभग एक ही काल में शासन कर रहे थे — यह प्राचीन भारत और भूमध्यसागरीय सभ्यता के बीच राजनयिक संपर्क का दुर्लभ प्रमाण है।
80. निम्नलिखित में से किस राजवंश के शासकों के सुदूर देशों जैसे सीरिया एवं मिस्र के साथ राजकीय संबंध थे?
(a) चोल
(b) गुप्त
(c) मौर्य
(d) पल्लव
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(c)
मौर्य वंश, विशेषतः सम्राट अशोक, के सीरिया, मिस्र, मकदूनिया, साइरीन और एपीरस जैसे सुदूर देशों के साथ राजनयिक संबंधों का विस्तृत प्रमाण तेरहवें शिलालेख में मिलता है। चंद्रगुप्त मौर्य ने भी सेल्यूकस निकेटर (सीरिया के यूनानी शासक) के साथ संधि की थी और उसके राजदूत मेगस्थनीज को पाटलिपुत्र में रहने की अनुमति दी थी।
81. मेगस्थनीज दूत था –
(a) सेल्यूकस का
(b) सिकंदर का
(c) डेरियस का
(d) यूनानियों का
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(a)
मेगस्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था, जिसे उसने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। सेल्यूकस यूनानी सेनापति सिकंदर के उत्तराधिकारियों में से एक था जिसने सीरिया पर शासन किया। मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र में कई वर्षों तक निवास किया और वहाँ की राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक स्थितियों का सूक्ष्म अवलोकन किया। उसने अपने अनुभवों को ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ में संकलित किया, जो यद्यपि मूल रूप में अब उपलब्ध नहीं है, किंतु परवर्ती यूनानी लेखकों के उद्धरणों के माध्यम से ज्ञात है।
82. मेगस्थनीज ने भारतीय समाज को कितनी श्रेणियों में विभाजित किया ?
(a) चार
(b) पांच
(c) छः
(d) सात
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
मेगस्थनीज ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘इंडिका’ में मौर्यकालीन भारतीय समाज को सात श्रेणियों में वर्गीकृत किया है— (1) दार्शनिक/ब्राह्मण, (2) कृषक, (3) पशुपालक व आखेटक, (4) कारीगर व शिल्पी, (5) योद्धा, (6) निरीक्षक और (7) सभासद/मंत्री। उसने यह भी उल्लेख किया कि कोई भी व्यक्ति अपनी श्रेणी से बाहर विवाह नहीं कर सकता था और न ही दूसरी श्रेणी का व्यवसाय अपना सकता था। उल्लेखनीय रूप से मेगस्थनीज ने भारत में दास प्रथा के अस्तित्व का उल्लेख नहीं किया, जो कि विवादास्पद है क्योंकि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में दासों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
83. कथन (a) : मौर्यकालीन शासकों ने धार्मिक आधार पर भू-अनुदान नहीं दिया था।
कारण (R) : भू-अनुदान के विरुद्ध कृषकों ने विद्रोह किया।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही
उत्तर चुनिए
(a) (a) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (a) की सही व्याख्या है।
(b) (a) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (a) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(c)
मौर्य शासकों ने धार्मिक उद्देश्यों से भूमि दान करने की परंपरा नहीं अपनाई थी। धार्मिक आधार पर भूमिदान का सबसे प्राचीन प्रमाण सातवाहन काल के अभिलेखों से मिलता है, जो मौर्योत्तर काल में आते हैं। अतः कथन (A) पूर्णतः सही है। किंतु कारण (R) असत्य है, क्योंकि इतिहास में ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जो यह बताता हो कि भू-अनुदान के विरोध में किसानों ने कोई संगठित विद्रोह किया हो। मौर्यकाल में भूमि पर राज्य का स्वामित्व होता था और राज्य ही कृषि की देख-रेख करता था।
84. अशोक के ‘धम्म’ का मूल संदेश क्या है?
(a) राजा के प्रति वफादारी
(b) शांति एवं अहिंसा
(c) बड़ों का सम्मान
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(d)
अशोक का ‘धम्म’ किसी एक धर्म विशेष से नहीं, बल्कि एक व्यापक नैतिक आचार संहिता से संबंधित था। अशोक के द्वितीय और सप्तम शिलालेखों में धम्म के मूल तत्त्वों का उल्लेख है — जिनमें पाप से बचना, दया करना, दान देना, सत्य बोलना, मन की पवित्रता, व्यवहार में मधुरता और साधुता शामिल हैं। इस प्रकार अशोक के धम्म में शांति, अहिंसा, बड़ों का सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता — सभी तत्त्व एक साथ समाहित हैं। इसीलिए सही उत्तर विकल्प (d) है, क्योंकि धम्म का संदेश किसी एक बिंदु तक सीमित नहीं था।
85. निम्न में से अशोक के किस अभिलेख में पारंपरिक अवसरों पर पशु बलि पर रोक लगाई गई है, ऐसा लगता है कि यह पाबंदी पशुओं के वध पर थी ?
(a) शिला अभिलेख I
(b) स्तंभ अभिलेख V
(c) शिला अभिलेख IX
(d) शिला अभिलेख XI
R.A. S./R.T.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
अशोक के पाँचवें स्तंभ लेख में विस्तारपूर्वक उन जीव-जंतुओं की सूची दी गई है जिनके वध पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसमें तोते, मैना, जंगली बत्तख, चमगादड़, मछली, कछुआ, साही, बैल, कबूतर आदि अनेक जीव शामिल थे। साथ ही यह भी निर्देश था कि पर्व और त्योहार के विशेष दिनों जैसे तिष्य, पुनर्वसु और ऋतुओं की पूर्णिमा को पशुओं को बधिया न किया जाए। प्रथम शिलालेख में भी पशु बलि के विरुद्ध उल्लेख मिलता है, किंतु परंपरागत अवसरों पर विस्तृत पाबंदी का विशेष विवरण पाँचवें स्तंभ लेख में ही मिलता है।
86. निम्नलिखित प्राचीन भारतीय अभिलेखों में से कौन-सा एक खाद्यान्न को देश में संकटकाल में उपयोग हेतु सुरक्षित रखने के बारे में प्राचीनतम शाही आदेश है?
(a) सोहगौरा ताम्रपत्र
(b) अशोक का रुम्मिनदेई स्तंभलेख
(c) प्रयाग प्रशस्ति
(d) चंद्र का मेहरौली स्तंभ शिलालेख
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(a)
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से प्राप्त सोहगौरा ताम्रपत्र अभिलेख तथा बांग्लादेश के बोगरा जिले से प्राप्त महास्थान अभिलेख — ये दोनों मौर्यकालीन प्राकृत भाषा में रचित हैं और ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी की ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं। सोहगौरा ताम्रपत्र में अकाल जैसी आपदा की स्थिति में अन्न भंडारण और राहत वितरण से संबंधित निर्देश हैं, जो इसे प्राचीनतम ज्ञात शाही आदेश बनाते हैं। इस अकाल की ऐतिहासिक पुष्टि जैन ग्रंथों से भी होती है।
87. कथन (a) : अशोक ने कलिंग को मौर्य साम्राज्य में जोड़ लिया था।
कारण (R) : कलिंग दक्षिण भारत को जाने वाले स्थलीय एवं समुद्री मार्गों को नियंत्रित करता था।
सही
कूट :
उत्तर का चुनाव, नीचे दिए गए कूट के प्रयोग से करें-
(a) (a) और (R) दोनों सही हैं और (R), (a) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (a) और (R) दोनों सही हैं और (R), (a) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
उत्तर-(a)
अशोक ने अपने राज्याभिषेक के लगभग 8 वर्ष पश्चात (261 ई.पू. के आसपास) कलिंग पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की और उसे मौर्य साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया। कलिंग का भौगोलिक स्थान अत्यंत सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण था — वह दक्षिण भारत को जोड़ने वाले स्थल मार्गों के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी के समुद्री व्यापार मार्गों को भी नियंत्रित करता था। यदि कलिंग स्वतंत्र रहता, तो मगध साम्राज्य के लिए दक्षिण से व्यापारिक संपर्क बनाना कठिन होता। अतः दोनों — कथन और कारण — सत्य हैं, और कारण, कथन की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
88. प्रसिद्ध यूनानी राजदूत मेगस्थनीज भारत में किसके दरबार में आए थे?
(a) अशोक
(b) हर्षवर्धन
(c) चंद्रगुप्त मौर्य
(d) हेमू
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
मेगस्थनीज को सेल्यूकस निकेटर ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत के रूप में भेजा था। यह नियुक्ति 305 ई.पू. के आसपास हुए उस संधि समझौते के बाद हुई जिसमें सेल्यूकस को पश्चिमोत्तर भारत के कुछ प्रदेश चंद्रगुप्त को सौंपने पड़े और बदले में 500 हाथी प्राप्त हुए। मेगस्थनीज ने मौर्य राजधानी पाटलिपुत्र में निवास किया और वहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य शक्ति एवं सामाजिक जीवन का विस्तृत विवरण ‘इंडिका’ में लिखा।
89. किसके शासनकाल में मेगस्थनीज भारत आया?
(a) अशोक
(b) हर्षवर्धन
(c) चंद्रगुप्त मौर्य
(d) कुमारगुप्त
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(c)
मेगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में भारत आया था। चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 321 ई.पू. से 297 ई.पू. तक शासन किया। मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) में निवास करते हुए मौर्य प्रशासन, नगर व्यवस्था और समाज का अध्ययन किया। उसकी रचना ‘इंडिका’ बाद के लेखकों जैसे डायोडोरस, स्ट्रेबो और एरियन के उद्धरणों के माध्यम से आज आंशिक रूप में उपलब्ध है।
90. मौर्य समाज का सात वर्गों में विभाजन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है –
(a) कौटिल्य के अर्थशास्त्र में
(b) अशोक के शिलालेखों में
(c) पुराणों में
(d) मेगस्थनीज की पुस्तक ‘इंडिका’ में
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(d)
मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में मौर्यकालीन समाज को सात वर्गों में विभाजित किया है — (1) दार्शनिक, (2) कृषक, (3) पशुपालक एवं आखेटक, (4) कारीगर एवं शिल्पी, (5) योद्धा, (6) निरीक्षक, और (7) सभासद। इसमें से कृषक सबसे बड़ा वर्ग था। यह वर्गीकरण भारतीय वर्ण व्यवस्था से भिन्न था क्योंकि यह व्यवसाय पर आधारित था, जन्म पर नहीं।
91. मेगस्थनीज की पुस्तक का नाम क्या है?
(a) अर्थशास्त्र
(b) ऋग्वेद
(c) पुराण
(d) इंडिका
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
Uttarakhand U.D.A./ L.D.A. (Mains) 2007
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
M.P.P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
मेगस्थनीज एक यूनानी राजदूत था जिसे सेल्यूकस निकेटर ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। उसने पाटलिपुत्र में रहकर मौर्य साम्राज्य का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और अपने अनुभवों को ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ में लिपिबद्ध किया। यह ग्रंथ मौर्यकालीन भारत के इतिहास का एक अमूल्य विदेशी स्रोत है।
92. निम्नलिखित में से किस स्रोत में उल्लिखित है कि प्राचीन भारत में दासता नहीं थी?
(a) अर्थशास्त्र
(b) मुद्राराक्षस
(c) मेगस्थनीज की इंडिका
(d) वायुपुराण
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2013
उत्तर-(c)
मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में स्पष्ट रूप से लिखा है कि भारत में दासता की प्रथा नहीं थी और सभी भारतीय स्वतंत्र थे। यह तथ्य उल्लेखनीय है क्योंकि उसी काल में यूनान और रोम में दास प्रथा बहुत प्रचलित थी। हालाँकि, कौटिल्य के अर्थशास्त्र में दासों के प्रकार और उनके अधिकारों का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जो मेगस्थनीज के कथन से भिन्न है।
93. वह स्रोत जिसमें पाटलिपुत्र के प्रशासन का वर्णन उपलब्ध है-
(a) दिव्यावदान
(b) अर्थशास्त्र
(c) इंडिका
(d) अशोक शिलालेख
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(c)
मेगस्थनीज की ‘इंडिका’ में मौर्यकालीन राजधानी पाटलिपुत्र के नगर प्रशासन का विस्तृत एवं व्यवस्थित विवरण मिलता है। उसके अनुसार, पाटलिपुत्र का प्रशासन 30 सदस्यों वाली एक समिति द्वारा संचालित होता था, जो 6 उप-समितियों में विभाजित थी और प्रत्येक में 5-5 सदस्य थे। इन समितियों के कार्यों में उद्योग-धंधों की देखरेख, विदेशियों की व्यवस्था, जन्म-मृत्यु का पंजीकरण, व्यापार नियंत्रण, निर्मित वस्तुओं की जाँच और बिक्री कर वसूली शामिल थे।
94. निम्नलिखित में से कौन स्रोत मौर्यों के नगर प्रशासन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है?
(a) कौटिल्य का अर्थशास्त्र
(b) मेगस्थनीज की इंडिका
(c) विशाखदत्त का मुद्राराक्षस
(d) अशोक का अभिलेख
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(b)
मेगस्थनीज की ‘इंडिका’ मौर्य नगर प्रशासन के बारे में सर्वाधिक विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने वाला स्रोत है। इसमें पाटलिपुत्र की 6 समितियों की कार्यप्रणाली का सुस्पष्ट विवरण है। यद्यपि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में प्रशासन के सैद्धांतिक पहलुओं का वर्णन मिलता है, किंतु नगर प्रशासन का प्रत्यक्षदर्शी विवरण केवल ‘इंडिका’ में ही उपलब्ध है।
95. मौर्यकाल में टैक्स को छुपाने (चोरी) के लिए इनमें से क्या दण्ड दिया जाता था?
(a) मृत्युदण्ड
(b) सामानों की कुर्की (जब्ती)
(c) कारावास
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(a)
मेगस्थनीज की ‘इंडिका’ के अनुसार, पाटलिपुत्र में बिक्री कर वसूलने का कार्य छठी नगर-समिति करती थी। विक्रय वस्तु के मूल्य का दसवाँ भाग (1/10) कर के रूप में लिया जाता था। यदि कोई व्यापारी इस कर की चोरी करते हुए पकड़ा जाता था, तो उसे मृत्युदण्ड दिया जाता था — यह दंड-व्यवस्था की अत्यंत कठोर प्रकृति को दर्शाता है।
96. मौर्य समाज का विभाजन सात वर्गों में विशेष तौर पर उल्लिखित
(a) कौटिल्य के अर्थशास्त्र में
(b) अशोक के शिलालेख में
(c) पुराणों में
(d) मेगस्थनीज की इंडिका में
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(d)
मेगस्थनीज ने ‘इंडिका’ में मौर्यकालीन समाज को सात वर्गों में विभाजित बताया है। यह विभाजन वर्ण-व्यवस्था पर आधारित नहीं था, बल्कि व्यवसाय और सामाजिक कार्य पर आधारित था।
100. मौर्य काल में ‘सीता’ से तात्पर्य है-
(a) एक देवी
(b) एक धार्मिक संप्रदाय
(c) राजकीय भूमि से प्राप्त आय
(d) ऊसर भूमि
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(c)
मौर्यकाल में राजकीय स्वामित्व वाली भूमि को ‘सीता भूमि’ कहा जाता था और उससे प्राप्त होने वाली आय को ‘सीता’ कहते थे। इसकी देखरेख एवं प्रबंधन के लिए ‘सीताध्यक्ष’ नामक अधिकारी नियुक्त होता था, जो कृषि विभाग का प्रमुख था। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सीता भूमि पर राज्य द्वारा दास, बंदी एवं मजदूरों से खेती करवाने का उल्लेख मिलता है।
101. मौर्य काल में भूमि कर, जो कि राज्य की आय का मुख्य स्रोत था, किस अधिकारी द्वारा एकत्रित किया जाता था?
(a) अग्रोनोमोई
(b) शुल्काध्यक्ष
(c) सीताध्यक्ष
(d) अक्राध्यक्ष
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
मौर्यकाल में भूमि कर एकत्र करने का कार्य ‘सीताध्यक्ष’ करता था, जो कृषि एवं राजकीय भूमि के प्रबंधन का प्रमुख अधिकारी था। ‘शुल्काध्यक्ष’ व्यापार एवं वाणिज्य पर कर संग्रह करता था, ‘अक्राध्यक्ष’ (आकाराध्यक्ष) खानों की देखरेख करता था, तथा ‘अग्रोनोमोई’ सड़कों के रख-रखाव और माप से संबंधित था।
102. कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ के अनुसार, मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में निम्नलिखित न्यायालय अस्तित्व में थे-
1.धर्ममहामात्र
2.धर्मस्थ
3.रज्जुक
4.कंटकशोधन
सही उत्तर चुनिए-
(a) 1 एवं 2
(b) 2 एवं 3
(c) 1 एवं 3
(d) 2 एवं 4
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(d)
कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था के अंतर्गत दो प्रमुख न्यायालयों का वर्णन है — ‘धर्मस्थीय’ (दीवानी न्यायालय) और ‘कंटकशोधन’ (फौजदारी न्यायालय)। धर्मस्थीय न्यायालय में ‘व्यावहारिक’ न्यायाधीश होता था, जबकि कंटकशोधन न्यायालय में ‘प्रदेष्टा’ न्यायाधीश का कार्य करता था। ‘धर्ममहामात्र’ अशोक द्वारा नियुक्त धार्मिक अधिकारी थे, न कि न्यायालय।
103. मौर्य मंत्रिपरिषद में निम्न में से कौन राजस्व इकठ्ठा करने से संबंधित था ?
(a) समाहर्ता
(b) व्यभारिका
(c) अंतपाल
(d) प्रदेष्टा
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(a)
मौर्य मंत्रिपरिषद में ‘समाहर्ता’ राजस्व संग्रह का सर्वोच्च अधिकारी था, जो पूरे साम्राज्य में करों की वसूली और राजकोष में जमा करने की व्यवस्था देखता था। ‘अंतपाल’ सीमावर्ती दुर्गों और क्षेत्रों की रक्षा करता था, जबकि ‘प्रदेष्टा’ विषयों (कमिश्नरियों) का प्रशासनिक अधिकारी था। ‘सन्निधाता’ राजकोष एवं भंडार का संरक्षक होता था।
104. ‘भाग’ एवं ‘बलि’ थे-
(a) सैनिक विभाग
(b) राजस्व के स्रोत
(c) धार्मिक अनुष्ठान
(d) प्रशासकीय विभाग
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
प्राचीन भारत में ‘भाग’ और ‘बलि’ दोनों राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत थे। ‘भाग’ भूमि से उत्पन्न उपज का वह हिस्सा था जो राजा को कर के रूप में दिया जाता था — सामान्यतः यह उपज का 1/6 भाग होता था। ‘बलि’ एक अन्य प्रकार का कर था जो प्रजा से स्वैच्छिक अथवा अनिवार्य रूप से लिया जाता था। वैदिक काल में ‘बलि’ स्वैच्छिक भेंट थी, किंतु बाद के काल में यह अनिवार्य कर बन गया।
105. मौर्य काल में ‘एग्रोनोमोई’ अधिकारी निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से संबंधित थे ?
(a) माप और तौल
(b) प्रशासन प्रबंधन
(c) मार्ग निर्माण
(d) राजस्व प्रबंधन
U.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
मेगस्थनीज द्वारा उल्लिखित ‘एग्रोनोमोई’ (Agronamoi) अधिकारी मार्ग निर्माण एवं रख-रखाव से मुख्यतः संबंधित थे। ये अधिकारी सड़कों पर प्रत्येक 10 स्टेडिया (लगभग 1.85 किमी) की दूरी पर पत्थर के मील-स्तंभ लगवाते थे। इसके अलावा वे सिंचाई सुविधाओं के पर्यवेक्षण, भूमि की माप और स्थानीय न्यायिक कार्य भी करते थे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (c) माना है।
106. निम्नलिखित में से कौन मौर्ययुगीन अधिकारी तौल-माप का प्रभारी था?
(a) पौतवाध्यक्ष
(b) पण्याध्यक्ष
(c) सीताध्यक्ष
(d) सूनाध्यक्ष
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(a)
मौर्यकाल में ‘पौतवाध्यक्ष’ तौल-माप (Weights and Measures) विभाग का प्रमुख अधिकारी था। वह यह सुनिश्चित करता था कि बाजारों में प्रयुक्त बाट और माप मानक एवं सही हों। ‘पण्याध्यक्ष’ वाणिज्य एवं व्यापार विभाग का प्रभारी था, ‘सूनाध्यक्ष’ बूचड़खाने और पशु-वध से संबंधित था, तथा ‘सीताध्यक्ष’ कृषि भूमि का अधिकारी था।
107. ‘पंकोदकसन्निरोधे’ मौर्य प्रशासन द्वारा लिया जाने वाला जुर्माना था-
(a) पीने के पानी को गंदा करने पर
(b) सड़क पर कीचड़ फैलाने पर
(c) कूड़ा फेंकने पर
(d) मंदिर को गंदा करने पर
R.A.S. / R.T.S. (Pre) (Re-Exam) 2013
उत्तर-(b)
‘पंकोदकसन्निरोधे’ मौर्य प्रशासन में सड़क पर जल और कीचड़ एकत्र करने अथवा फेंकने पर लगाया जाने वाला दंड (जुर्माना) था। यह दर्शाता है कि मौर्यकाल में नगर स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन बहुत सचेत था। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में इस प्रकार के अनेक जुर्मानों का उल्लेख है।
108. मौर्य काल में शिक्षा का सर्वाधिक प्रसिद्ध केंद्र था-
(a) वैशाली
(b) नालंदा
(c) तक्षशिला
(d) उज्जैन
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
मौर्यकाल में तक्षशिला (वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिंडी के निकट) शिक्षा का सर्वाधिक प्रसिद्ध केंद्र था। यहाँ वेद, व्याकरण, दर्शन, चिकित्साशास्त्र, राजनीति एवं धनुर्विद्या आदि की शिक्षा दी जाती थी। स्वयं कौटिल्य (चाणक्य) तक्षशिला में अध्ययन कर चुके थे। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्तकाल में हुई थी, अतः वह मौर्यकाल की संस्था नहीं थी।
109. मौर्य नरेशों के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन सही है? उन्होंने विकास किया था-
A. संस्कृति, कला व साहित्य B. सोने के सिक्के
C. प्रांतीय विभाजन D. हिंदुकुश तक साम्राज्य
(a) केवल A
(b) केवल B
(c) केवल A, B, C
(d) केवल A, C, D
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(d)
मौर्य सम्राटों ने संस्कृति, कला एवं साहित्य (A), प्रांतीय विभाजन (C) और हिंदुकुश तक साम्राज्य विस्तार (D) — इन तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। अशोक के अभिलेखों में साम्राज्य के 5 प्रांत — उत्तरापथ, अवंतिरट्ठ, कलिंग, दक्षिणापथ और प्राच्य — वर्णित हैं। स्वर्ण सिक्के प्रचलित करने का श्रेय हिंद-यवन (इंडो-ग्रीक) शासकों को है, मौर्यों को नहीं। अतः कथन B असत्य है।
110. वर्तमान नगरपालिका प्रशासन का कौन-सा कार्य मौर्य काल से जारी है?
(a) नाप-तौल के बांटों का निरीक्षण
(b) वस्तुओं की कीमतें निर्धारित करना
(c) जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण
(d) शिल्पकारों का संरक्षण
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992
उत्तर-(c)
मेगस्थनीज के विवरण के अनुसार पाटलिपुत्र की नगर परिषद में 5-5 सदस्यों वाली 6 समितियाँ थीं। इनमें से तीसरी समिति जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण का कार्य करती थी। यह व्यवस्था आज भी नगरपालिका प्रशासन द्वारा जारी है। नगर का प्रमुख ‘नागरक’ या ‘पुरमुख्य’ कहलाता था।
111. विदेशियों को भारतीय समाज में मनु द्वारा दिया गया सामाजिक स्तर था-
(a) क्षत्रियों का
(b) व्रात्य क्षत्रियों का
(c) वैश्यों का
(d) शूद्रों का
U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
उत्तर-(b)
मनुस्मृति के अनुसार यवन, शक, पह्लव, चीन आदि विदेशी जातियों को “व्रात्य क्षत्रिय” की श्रेणी में रखा गया था — अर्थात ऐसे क्षत्रिय जो संस्कारों से भ्रष्ट हो गए। इससे स्पष्ट होता है कि मनु ने विदेशियों को सामाजिक व्यवस्था में पूरी तरह बाहर नहीं किया, बल्कि एक निम्नतर क्षत्रिय दर्जा दिया।
112. ईस्वी सन के पूर्व की कुछ शताब्दियों में निम्नलिखित में से किन शासकों ने गिरनार क्षेत्र में जल संसाधन व्यवस्था की ओर ध्यान दिया ?
1.महापद्मनंद
2.चंद्रगुप्त मौर्य
3.अशोक
4.रुद्रदामन
नीचे के कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए –
(a) 1, 2
(b) 2, 3
(c) 3, 4
(d) 2, 3, 4
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(b)
गिरनार (जूनागढ़, गुजरात) क्षेत्र में जल प्रबंधन की दिशा में चंद्रगुप्त मौर्य ने प्रसिद्ध सुदर्शन झील का निर्माण करवाया था। तत्पश्चात अशोक ने इस झील से सिंचाई नहरें निकलवाईं। यह जानकारी शक क्षत्रप रुद्रदामन के जूनागढ़ शिलालेख (लगभग 150 ई.) से प्राप्त होती है — यद्यपि रुद्रदामन का कार्य ईस्वी सन के बाद का है, इसलिए वह इस प्रश्न के दायरे में नहीं आता।
113. निम्नलिखित व्यक्ति भारत में किसी-न-किसी समय आए-
1.फाह्यान
2.इत्सिंग
3.मेगस्थनीज
4.ह्वेनसांग
उनके आगमन का सही कालानुक्रम है-
(a) 3, 1, 2, 4
(b) 3, 1, 4, 2
(c) 1, 3, 2, 4
(d) 1, 3, 4, 2
I.A.S. (Pre) 1999
उत्तर-(b)
इन चार विदेशी यात्रियों के भारत आगमन का सही कालक्रम इस प्रकार है — मेगस्थनीज (लगभग 302 ई.पू., चंद्रगुप्त मौर्य का काल) → फाह्यान (399-414 ई., चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य का काल) → ह्वेनसांग (629-645 ई., हर्षवर्धन का काल) → इत्सिंग (671-695 ई.)। मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में मौर्य साम्राज्य का विस्तृत विवरण दिया।
114. अंतिम मौर्य सम्राट था?
(a) जालौक
(b) अवंति वर्मा
(c) नंदी वर्धन
(d) बृहद्रथ
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था, जिसकी हत्या 184 ई.पू. में उसके ही सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने सैनिकों की परेड के दौरान की थी। इस हत्या के बाद पुष्यमित्र ने शुंग वंश की स्थापना की।
115. भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में इतिवृत्तों, राजवंशीय इतिहासों तथा वीरगाथाओं को कंठस्थ करना निम्नलिखित में से किसका व्यवसाय था?
(a) श्रमण
(b) परिव्राजक
(c) अग्रहारिक
(d) मागध
I.A.S. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
प्राचीन भारत में “मागध” और “सूत” वर्ग के लोगों का मुख्य व्यवसाय राजवंशीय इतिहासों, वीरगाथाओं तथा इतिवृत्तों को कंठस्थ कर राज दरबारों में सुनाना था। ये लोग मौखिक परंपरा के संरक्षक थे और राजाओं की वंशावली एवं शौर्यगाथाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे पहुँचाते थे।
116. निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
1. अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या उसके प्रधान सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की थी।
2. अंतिम शुंग राजा देवभूति की हत्या उसके ब्राह्मण मंत्री वासुदेव कण्व ने की और उसने राजसिंहासन हथिया लिया।
3. आंध्र ने कण्व राजवंश के अंतिम शासक को पद वंचित किया था।
इन कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
I.A.S. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
तीनों कथन ऐतिहासिक दृष्टि से सही हैं। पुष्यमित्र शुंग ने 184 ई.पू. में बृहद्रथ की हत्या कर शुंग वंश की स्थापना की। शुंग वंश के अंतिम राजा देवभूति को उसके मंत्री वासुदेव कण्व ने मारकर कण्व वंश की नींव रखी। तत्पश्चात वायु पुराण के अनुसार, सातवाहन (आंध्र) शासक सिमुक ने अंतिम कण्व शासक सुशर्मा को पदच्युत कर मार डाला।
117. गांवों के शासन को स्वायत्तशासी पंचायतों के माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था का सूत्रपात किसने किया?
(a) कुषाणों ने
(b) द्रविड़ों ने
(c) आर्यों ने
(d) मौर्यों ने
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
ग्राम स्वशासन की परंपरा का सूत्रपात मुख्यतः द्रविड़ों, विशेषकर चोल शासकों द्वारा किया गया। चोल काल में “उर”, “सभा” और “नगरम” जैसी ग्राम परिषदें अत्यंत सुगठित एवं स्वायत्त रूप से कार्य करती थीं। उत्तरमेरूर (तमिलनाडु) से प्राप्त शिलालेख इन परिषदों की कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण देते हैं।
118. प्राचीन भारत के निम्नलिखित ग्रंथों में से किसमें पति द्वारा परित्यक्त पत्नी के लिए विवाह विच्छेद की अनुमति दी गई है?
(a) कामसूत्र
(b) मानवधर्मशास्त्र
(d) अर्थशास्त्र
(c) शुक्र नीतिसार
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में विवाह विच्छेद (तलाक) का स्पष्ट प्रावधान मिलता है। यदि पति लंबे समय तक विदेश में रहे, शरीर से दोषपूर्ण हो, या पत्नी को त्याग दे — तो स्त्री को विवाह विच्छेद का अधिकार दिया गया था। इसी प्रकार पत्नी के चारित्रिक दोष की स्थिति में पति भी यह अधिकार रखता था। यह मौर्यकालीन समाज की अपेक्षाकृत उदार विधिक व्यवस्था को दर्शाता है।
119. निम्नलिखित में से किसमें पुनर्विवाह वर्जित (Prohibits) है?
(a) जातक
(b) मनुस्मृति
(c) याज्ञवल्क्य
(d) अर्थशास्त्र
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
मनुस्मृति में स्त्रियों के लिए पुनर्विवाह का निषेध स्पष्ट रूप से किया गया है। इस ग्रंथ के अनुसार विधवा स्त्री को पुनर्विवाह की अनुमति नहीं थी, जबकि विधुर पुरुष पुनर्विवाह कर सकता था। यह व्यवस्था प्राचीन भारतीय समाज में लैंगिक असमानता की प्रतीक थी।
120. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही
सूची-I सूची-II
A. चंद्रगुप्त – 1. पियदसि
B. बिंदुसार – 2. सैंड्रोकोट्टस
C. अशोक – 3. अमित्रघात
D. चाणक्य – 4. विष्णुगुप्त
कूट :
A B C D
उत्तर का चयन कीजिए-
(a) 2 3 4 1
(b) 1 3 2 4
(c) 2 3 1 4
(d) 3 4 2 1
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
सही सुमेलन इस प्रकार है — चंद्रगुप्त मौर्य को यूनानी लेखकों ने “सैंड्रोकोट्टस” कहा; बिंदुसार को “अमित्रघात” (शत्रुओं का नाश करने वाला) कहा गया; अशोक के शिलालेखों में उन्हें “पियदसि” (प्रियदर्शी) कहा गया है; और चाणक्य का वास्तविक नाम “विष्णुगुप्त” था।
121. बराबर पहाड़ी की गुफाओं के विषय में निम्न में से कौन एक सही नहीं है?
(a) बराबर पहाड़ी पर कुल चार गुफाएं हैं।
(b) तीन गुफाओं की दीवार पर अशोक के अभिलेख उत्कीर्ण हैं।
(c) ये अभिलेख इन गुफाओं को आजीविकाओं को समर्पित होने का उल्लेख करते हैं।
(d) ये अभिलेख ईसा पूर्व छठीं शताब्दी के हैं।
U.P.P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(d)
बिहार के गया जिले में स्थित बराबर पहाड़ी पर कुल चार गुफाएं हैं — कर्ण चौपड़, सुदामा, विश्वझोपड़ी और लोमस ऋषि। इनमें से पहली तीन गुफाओं की दीवारों पर सम्राट अशोक के लेख उत्कीर्ण हैं, जिनमें इन्हें आजीवक संप्रदाय के साधुओं को दान में देने का उल्लेख है। ये अभिलेख तीसरी शताब्दी ई.पू. (मौर्यकाल) के हैं, न कि छठी शताब्दी ई.पू. के — इसीलिए विकल्प (d) असत्य है।
122. निम्नलिखित में से किस अभिलेख में चंद्रगुप्त और अशोक दोनों का उल्लेख किया गया है ?
(a) गौतमीपुत्र शातकर्णि की नासिक प्रशस्ति
(b) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
(c) अशोक का गिरनार अभिलेख
(d) स्कंदगुप्त का जूनागढ़ अभिलेख
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख शक संवत् 72 (लगभग 150 ई.) का है। यह एकमात्र ऐसा अभिलेख है जिसमें चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक — दोनों का नामोल्लेख एक साथ मिलता है। इस अभिलेख में सुदर्शन झील के पुनर्निर्माण का विस्तृत विवरण दिया गया है।
123. मौर्यकालीन मूर्तियों में, मणिभद्र (यक्ष) नाम से अंकित मूर्ति किस स्थान से प्राप्त हुई है?
(a) झींग-का-नगरा
(b) नोह ग्राम
(c) बेसनगर
(d) परखम
R.A.S./R.T.S (Pre) 2021
उत्तर-(d)
मथुरा के निकट ‘परखम’ ग्राम से प्राप्त ‘मणिभद्र यक्ष’ की विशाल मूर्ति मौर्यकालीन लोक कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मूर्ति लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है और इस पर ‘मणिभद्र’ नाम उत्कीर्ण है, जिससे इसकी पहचान सुनिश्चित होती है। मौर्यकाल में यक्ष पूजा एक प्रमुख लोक धर्म था।
124. जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, जिस प्रथम शासक ने गिरनार क्षेत्र में एक झील का निर्माण करवाया, वह था-
(a) चंद्रगुप्त मौर्य
(b) अशोक
(c) रुद्रदामन
(d) स्कंदगुप्त
U.P.P.C.S. (Mains) 2002
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(a)
गुजरात के गिरनार (जूनागढ़) क्षेत्र में प्रसिद्ध ‘सुदर्शन झील’ का निर्माण सर्वप्रथम चंद्रगुप्त मौर्य के काल में उनके राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने करवाया था। बाद में अशोक के शासनकाल में उनके प्रांतीय गवर्नर यवनराज तुषास्फ ने इस झील में नहरें खुदवाईं। लगभग 150 ई. में शक महाक्षत्रप रुद्रदामन ने भारी वर्षा से टूटे बाँध का पुनर्निर्माण करवाया और पाँचवीं शताब्दी ई. में गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त ने भी इसकी मरम्मत करवाई।
125. निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें अशोक का अभिलेख भी पाया गया है?
(a) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
(b) गौतमीपुत्र सातकर्णी से संबंधित नासिक प्रशस्ति
(c) खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख
(d) उपर्युक्त में से किसी में नहीं
U.P.P.C.S (Mains) 2016
उत्तर-(a)
जूनागढ़ (गिरनार, गुजरात) की एक ही शिला पर कई कालखंडों के अभिलेख उत्कीर्ण हैं। इस शिला पर अशोक के 14 शिलालेखों के साथ-साथ रुद्रदामन (लगभग 150 ई.) और स्कंदगुप्त (लगभग 457-58 ई.) के अभिलेख भी मिलते हैं। 1822 ई. में कर्नल टाड ने इस शिलालेख को सर्वप्रथम खोजा था। रुद्रदामन का यह अभिलेख शुद्ध संस्कृत भाषा में ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है।
126. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
1. लोथल – एनसिएंट डाकयार्ड
2.सारनाथ – फर्स्ट सरमन ऑफ बुद्ध
3.राजगिरि – लॉयन कैपिटल ऑफ अशोक
4. नालंदा – ग्रेट सीट ऑफ बुद्धिस्ट लर्निंग
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही
उत्तर चुनिए –
(a) 1, 2, 3, 4
(b) 3 तथा 4
(c) 1, 2 तथा 4
(d) 1 तथा 2
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(c)
युग्म 1 (लोथल – एनसिएंट डाकयार्ड), युग्म 2 (सारनाथ – फर्स्ट सरमन ऑफ बुद्ध) और युग्म 4 (नालंदा – ग्रेट सीट ऑफ बुद्धिस्ट लर्निंग) — तीनों सही हैं। युग्म 3 गलत है क्योंकि ‘लॉयन कैपिटल ऑफ अशोक’ (अशोक का सिंह स्तंभशीर्ष) राजगिरि में नहीं, बल्कि सारनाथ में मिला है, जो वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय चिह्न है।