मौर्य साम्राज्य | One-Liner Practice

भारतीय इतिहास प्राचीन भारत मौर्य साम्राज्य
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चन्द्रगुप्त मौर्य (322 ई.पू. – 298 ई.पू.)

❑ चंद्रगुप्त मौर्य ने नंदवंश के अंतिम शासक धननंद (धनानंद) को हराकर मौर्य वंश की स्थापना 322 ई. पू. में की।

❑ सिकन्दर के लौट जाने और उसकी अकाल मृत्यु के कारण पंजाब में फैली अराजकता का चंद्रगुप्त ने लाभ उठाया और अपने सुयोग्य परामर्शदाता गुरु चाणक्य की मदद से वह पंजाब का सम्राट बन बैठा।

❑ तक्षशिला धनुर्विद्या तथा वैधक की शिक्षा के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध था। चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपनी सैनिक शिक्षा यहीं पर ग्रहण किया था।

❑ कोशल के राजा प्रसेनजित, मगध का राजवैद्य जीवक, सुप्रसिद्ध राजनीतिविद् चाणक्य, बौद्ध विद्वान वसुबन्धु आदि ने यहीं शिक्षा प्राप्त की थी।

❑ चाणक्य ने अर्थशास्त्र नामक पुस्तक लिखी जो मौर्य काल के इतिहास को जानने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत है।

❑ ब्राह्मण साहित्य चंद्रगुप्त मौर्य को शूद्र कुल का और जैन एवं बौद्ध साहित्य उसे क्षत्रिय कुल का मानते हैं।

❑ चन्द्रगुप्त मौर्य की संज्ञा का प्राचीनतम अभिलेखीय साक्ष्य रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख से मिलता है।

❑ जूनागढ़ अभिलेख ब्राह्मी लिपि में है।

❑ चन्द्रगुप्त मौर्य एवं सेल्यूकस के बीच युद्ध 305 ई.पू. में हुआ था। जिसमें सेल्यूकस पराजित हुआ। फलस्वरूप चन्द्रगुप्त मौर्य तथा सेल्यूकस के बीच सन्धि हुई तथा सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह चन्द्रगुप्त के साथ कर दिया। इस प्रकार चन्द्रगुप्त ने यूनानियों को भारत से बाहर निकाल दिया।

❑ सेल्यूकस ने अपने राजदूत मेगस्थनीज को चन्द्रगुप्त के दरबार में भेजा था। मेगस्थनीज ने इंडिका की रचना की थी।

❑ चन्द्रगुप्त ने सेल्यूकस को 500 हाथी उपहार में दिये थे। (प्लूटार्क के अनुसार)

❑ चन्द्रगुप्त को यूनानियों ने सैन्ड्रोकोटस कहा है।

❑ अपने जीवन के अंतिम समय में चन्द्रगुप्त ने जैन धर्म स्वीकार किया।

❑ सेल्यूकस ने चन्द्रगुप्त को एरिया (काबुल), अराकोसिया (कान्धार), ग्रेदेसिया (तरान) प्रान्त दिये थे।

❑ चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी हेलेना (कार्नेलिया) सेल्यूकस की पुत्री थी।

❑ चन्द्रगुप्त मौर्य के दक्षिण विजय की जानकारी तमिल ग्रंथ-अहनानूरू एवं पुरनानूरू से मिलती है।

❑ चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना के छः अंग थे – अश्व सेना, हस्तिसेना, पैदल, नौसेना, रथ सेना और सैन्य सहायता विभाग।

❑ विभागों के अध्यक्ष को अमात्य कहा जाता था।

❑ चन्द्रगुप्त का जैन गुरु भद्रबाहु था।

❑ चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु कर्नाटक के श्रवणबेलगोला स्थित चन्द्रागिरि पहाड़ी पर 298 ई.पू. में हुई थी।

❑ चन्द्रगुप्त मौर्य ने सल्लेखना विधि से (भूखे-प्यासे रहकर) शरीर का त्याग किया था।

❑ विलियम जोन्स पहले विद्वान थे जिन्होंने सैन्ड्रोकोट्टस की पहचान भारतीय ग्रंथों में चंद्रगुप्त से की है।

❑ प्लूटार्क के अनुसार चन्द्रगुप्त ने 6 लाख सेना लेकर समूचे भारत पर आधिपत्य स्थापित किया।

❑ चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने सुदर्शन नामक झील का निर्माण करवाया।

❑ विलियम जोन्स पहले विद्वान थे जिन्होंने सैन्ड्रोकोट्टस की पहचान भारतीय ग्रंथों में चंद्रगुप्त से की है।

❑ प्लूटार्क के अनुसार चन्द्रगुप्त ने 6 लाख सेना लेकर समूचे भारत पर आधिपत्य स्थापित किया।

❑ चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने सुदर्शन नामक झील का निर्माण करवाया।

❑ मेगस्थनीज के अनुसार भारत में दास प्रथा नहीं था।

❑ मेगस्थनीज भारतीय समाज को सात जातियों में विभक्त किया। सात जातियां- दार्शनिक, किसान, अहीर, कारीगर या शिल्पी, सैनिक, निरीक्षक, सभासद तथा अन्य शासक वर्ग।

❑ मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को पालिब्रोथा नाम दिया था।

बिन्दुसार (298 ई.पू. – 272 ई.पू.)

❑ चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र बिन्दुसार, 298 ई.पू. में गद्दी पर बैठा।

❑ यूनानी लेखक बिन्दुसार को अमित्रोकेट्स या अमित्रघात के नाम से जानते थे।

❑ बिन्दुसार के समय तक्षशिला में विद्रोह हुआ था। तक्षशिला विद्रोह दबाने के लिये अशोक और सुसीम को भेजा गया था।

❑ बिन्दुसार के दरबार में यूनानी राजदूत डाइमेकस आया था।

❑ बिन्दुसार ने सीरिया के राजा एण्टियोकस से मदिरा, सूखे अंजीर एवं एक दार्शनिक मांगा था। एण्टियोकस ने दार्शनिक (यूनानी कानून में इसकी अनुमति नहीं थी) भेजने से मना कर दिया था।

❑ बिन्दुसार आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था।

❑ पिंगलवत्स नामक आजीवक विद्वान बिन्दुसार के दरबार में रहता था।

❑ अशोक के राजा बनने की भविष्यवाणी पिंगलवत्स ने की थी।

❑ बिन्दुसार की मृत्यु के समय अशोक उज्जैन में राज्यपाल था।

❑ बिन्दुसार ने दो समुद्रों के बीच की भूमि समेत 16 राज्यों को जीता था।

❑ आजीवक बनने से पूर्व बिन्दुसार ब्राह्मण धर्म को मानता था।

❑ तक्षशिला विद्रोह का मुख्य कारण अधिकारियों का दुर्व्यवहार था।

❑ चाणक्य या कौटिल्य के बचपन का नाम विष्णुगुप्त था। चाणक्य ने तीन मौर्य राजाओं के राज्य का संचालन किया।

❑ चाणक्य ने अर्थशास्त्र (राजनीतिक विज्ञान) की रचना की

❑ चाणक्य को भारत का मैकियावेली कहा जाता है।

❑ चाणक्य के पिता का नाम चणक था।

अशोक (269 ई.पू. – 232 ई.पू.)

❑ मौर्य साम्राज्य का महानतम् शासक अशोक था। सिंहली अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने अपने 99 भाइयों की हत्या की थी।

❑ अभिलेखों में अशोक को देवानामप्रिय या देवानामप्रियदर्शी नाम से सम्बोधित किया गया है।

❑ पुराणों में अशोक को वर्द्धन नाम से जाना जाता है।

❑ अशोक ने कश्मीर में श्रीनगर बसाया था।

❑ कलिंग हाथियों के लिए प्रसिद्ध था

❑ अशोक के तेरहवें शिलालेख से ज्ञात होता है कि अशोक ने 261 ई.पू. में कलिंग विजय की थी। इस समय वहां का राजा नंदराज था।

❑ कलिंग की राजधानी तोसली थी।

❑ अशोक ने नेपाल में ललितपत्तन नगर बसाया।

❑ अशोक चक्र, धर्मचक्र का वर्णन करता है जिसमें 24 तिलियाँ हैं। इसे अशोक चक्र इसलिए कहते हैं क्योंकि लॉयन कैपिटल सारनाथ सहित सम्राट अशोक द्वारा जारी अशोक के फरमानों पर चक्र उत्कीर्ण किए गए हैं।

❑ कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने भेरी घोष त्याग कर धम्म घोष अपनाया।

❑ अशोक की कर नीति की जानकारी रुम्मिनदेई अभिलेख से मिलती है।

❑ बौद्ध धर्म अपनाने से पहले वह भगवान शिव की पूजा करता था।

❑ अशोक को उपगुप्त ने बौद्ध धर्म में दीक्षित किया।

❑ बाराबर पहाड़ी पर आजीवकों के लिये अशोक ने कर्ण, चोपार, सुदामा एवं विश्वझोपड़ी गुफाओं का निर्माण कराया।

❑ अशोक ने लुम्बिनी को धार्मिक करों से मुक्त कर दिया। क्योंकि यह बुद्ध की जन्मस्थली थी।

❑ अशोक की माता का नाम सुभद्रांगी था। सुभद्रांगी चंपा के एक ब्राह्मण की पुत्री थी।

❑ असंधिमित्रा एवं कारूवाकी अशोक की पत्नियाँ थी। कारूवाकी के पुत्र का नाम तीवर था।

❑ अशोक की एक अन्य पत्नी नागदेवी से उत्पन्न पुत्र-पुत्री महेन्द्र एवं संघमित्रा थे।

❑ अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिये पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।

❑ अशोक का उल्लेख मास्की, नेत्तूर, गुर्जरा एवं उदेगोलम अभिलेख में है।

❑ अशोक के अभिलेखों को 1837 ई. में जेम्स प्रिसेंप ने सर्वप्रथम पढ़ा।

❑ टोपरा और मेरठ के स्तम्भों को फिरोजशाह तुगलक ने दिल्ली मंगवाया।

❑ कौशाम्बी स्तम्भ को अकबर इलाहाबाद लाया था जिसे अशोक ने स्तंभलेख उत्कीर्ण करवाये थे।

❑ अशोक के अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गये हैं।

❑ दो वृहद् शिलालेख मानसेहरा और शाहबाजगढ़ी ‘खरोष्ठी लिपि’ में लिखे गए हैं।

❑ कंधार अभिलेख’ दो भाषाओं ग्रीक एवं आर्मेइक भाषा में लिखे गये हैं।

❑ अशोक के अभिलेखों में कंधार को छोड़कर शेष सभी प्राकृत भाषा में लिखे गये हैं।

❑ लैम्पाक में खंडित अवस्था में एक अभिलेख पाया गया है, जो आर्मेइक भाषा में है।

❑ इलाहाबाद स्तम्भ जो कौशाम्बी से लाया गया था, इस पर समुद्रगुप्त और जहाँगीर के भी अभिलेख हैं।

❑ वृहद् शिलालेखों की संख्या 14 है। स्तम्भ लेखों की कुल संख्या 13 है, जो दस स्तम्भों पर अंकित है।

❑ चार लघु स्तम्भ लेखों में से एक को रानी का लेख कहा जाता है, जो इलाहाबाद में है।

❑ सांची का स्तूप (विदिशा, मध्यप्रदेश), भरहुत का स्तंभ (सतना, मध्यप्रदेश) तथा सारनाथ स्थित धर्मराजिका स्तूप का निर्माण अशोक ने करवाया था। मौर्य वंश का राजकीय चिह्न मयूर (मोर) था।

❑ प्रधान शिलालेखों में सबसे बड़ा 13वां शिलालेख है। सातवां स्तम्भ लेख सभी लेखों में सबसे बड़ा है।

❑ अशोक के शिलालेख की खोज 1750 ई. में पाद्रेटी फेन्थैलर ने की थी।

❑ राज्याभिषेक से सम्बन्धित मास्की के लघु शिलालेख में अशोक ने स्वयं को बुद्ध शाक्य कहा है।

❑ भाब्रू अभिलेख अशोक का सबसे लम्बा स्तंभ लेख है।

❑ बौद्ध परंपरा अशोक को 84 हजार स्तूपों के निर्माण का श्रेय प्रदान करती है।

❑ अशोक का प्रधानमंत्री राधागुप्त था।

❑ फ्लीट अशोक के धम्म को राजधर्म मानते हैं।

❑ रोमिला थापर के अनुसार धम्म अशोक का अपना आविष्कार था।

मौर्य प्रशासन

❑ सत्ता का केन्द्रीयकरण राजा में होते हुए भी वह निरंकुश नहीं होता था।

❑ कौटिल्य ने राज्य के सात अंग निर्दिष्ट किए हैं – राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, सेना और मित्र।

❑ राजा द्वारा मुख्यमंत्री एवं पुरोहित की नियुक्ति उनके चरित्र की भली-भाँति जाँच के बाद की जाती थी, इस क्रिया को उपधा परीक्षण कहा जाता था।

❑ अर्थशास्त्र में 18 विभागों का उल्लेख है, जिसे तीर्थ कहा गया है। तीर्थों के अध्यक्ष को महामात्र कहा गया है।

❑ प्रांतों का शासन राजवंशीय कुमार या आर्यपुत्र नामक पदाधिकारियों द्वारा होता था।

❑ विषय (जिला) विषयपति के अधीन होता था।

❑ जिले का प्रशासनिक अधिकारी स्थानिक था जो समाहर्ता के अधीन था।

❑ प्रशासन की सबसे छोटी इकाई गोप था, जो दस गाँवों का शासन संभालता था।

❑ समाहर्ता के अधीन प्रदेष्ट्रि नामक अधिकारी भी होता था, जो स्थानिक, गोप एवं ग्राम अधिकारियों के कार्यों की जाँच करता था।

❑ मेगस्थनीज के अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों का एक मंडल करता था, जो 6 समितियों में विभक्त था-

❑ प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे।
❑ प्रथम समिति – उद्योग शिल्पों का निरीक्षण
❑ द्वितीय समिति – विदेशियों की देख-रेख
❑ तृतीय समिति – जन्म-मरण का लेखा-जोखा
❑ चतुर्थ समिति – व्यापार/वाणिज्य
❑ पांचवीं समिति – निर्मित वस्तुओं के विक्रय का निरीक्षण
❑ छठी समिति -विक्रय मूल्य का दसवाँ भाग विक्रय कर के रूप में वसूलना।

❑ सैनिक प्रबंध की देख-रेख करने वाला तथा सीमांत क्षेत्रों का व्यवस्थापक अंतपाल होता था।

❑ मौर्यकाल में दो प्रकार के न्यायालय थे – (1) कण्टकशोधन (फौजदारी न्यायालय ), (2) धर्मस्थीय (दीवानी न्यायालय)।

❑ नगर न्यायाधीश को व्यावहारिक महामात्र तथा जनपद न्यायाधीश को राज्जुक कहते थे।

❑ चाणक्य के अनुसार कानून के चार मुख्य अंग थे-धर्म, व्यवहार, चरित्र और शासन।

❑ मौर्यकाल में दो प्रकार के गुप्तचर (गूढ़ पुरुष) थे- (1) संस्था ( एक जगह स्थिर होकर गुप्तचरी करते थे), (2) संचार (घूम-घूमकर गुप्तचरी करते थे)।

❑ स्त्री गुप्तचर भी थी जिन्हें वृषली, भिक्षुकी तथा परिव्राजक कहा जाता था।

❑ राज्य की अर्थ-व्यवस्था कृषि, पशुपालन और वाणिज्य पर आधारित थी, जिन्हें सम्मिलित रूप से वार्ता कहा गया है।

❑ अदेवमातृक (मुख्य कृषि भूमि) – ऐसी भूमि जिसमें बिना वर्षा के भी अच्छी खेती हो सके।

❑ मौर्यकाल में चाँदी की आहत मुद्रायें चलती थीं, जिन पर मयूर, पर्वत और अर्द्धचंद्र की मुहर अंकित होती थी।

❑ निजी खेती करने पर राजा को उपज का 1/6 भाग दिया जाता था।

❑ बलि एक प्रकार का भू-राजस्व कर था।

❑ हिरण्य कर अनाज के रूप में न होकर नकद लिया जाता था।

❑ राजकीय भूमि से होने वाली आय को सीता कही जाती थी।

❑ एग्रोनोमई मार्ग निर्माण के विशेष अधिकारी को कहा जाता था।

❑ दूरी मापने की इकाई को 10 स्टेडिया कहा जाता है।

❑ कौटिल्य के अनुसार दक्षिण से बहुमूल्य वस्तुयें-मुक्ता, मणि, हीरा, सोना, शंख इत्यादि आने के कारण, दक्षिण से व्यापार अधिक लाभदायक था।

❑ भारत का व्यापार रोम, फारस, सीरिया, मिस्र आदि देशों से होता था।

❑ पूर्वी तट पर ताम्रलिप्ति तथा पश्चिमी तट पर सोपारा एवं भड़ौच (भृगुकच्छ) प्रमुख बन्दरगाह थे।

❑ ब्याज को रूपिका एवं परीक्षण कहा जाता था।

❑ व्यापारियों के श्रेणी के प्रधान को सार्थवाह कहा जाता था।

मौर्य साम्राज्य के पतन के कारण


❑ अशोक के दुर्बल अधिकारी
❑ उत्तराधिकारी के निश्चित नियम का अभाव
❑ ब्राह्मणों द्वारा विद्रोह
❑ राज्यपालों के अत्याचार
❑ आन्तरिक विद्रोह
❑ विशाल साम्राज्य
❑ गुप्तचर विभाग का अभाव
❑ विदेशी आक्रमण
❑ धन का अभाव
❑ सैनिक शक्ति का क्षीण होना

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