हिन्दू-धर्म : भारत का प्राचीन सनातन धर्म
➣ हिन्दू धर्म में अन्य धर्मों के विपरीत कोई एक अकेला सिद्धान्त या नियम लागू नहीं होता है जिसे सभी हिन्दुओं को मानना ज़रूरी है। इसके अन्तर्गत कई मत और सम्प्रदाय आते हैं और सभी को बराबर श्रद्धा दी जाती है।
हिन्दू धर्म में चार मुख्य सम्प्रदाय हैं:
- वैष्णव – विष्णु से संबंधित
- शैव – शिव से संबंधित
- शाक्त – देवी शक्ति से संबंधित
- स्मार्त – परमेश्वर के विभिन्न रूपों को एक ही समान मानने वाला सम्प्रदाय
➣ लेकिन ज्यादातर हिन्दू स्वयं को किसी भी एक सम्प्रदाय में वर्गीकृत नहीं करते हैं। धर्मग्रन्थ भी कई हैं। फ़िर भी, वे मुख्य सिद्धान्त अथवा मान्यताएं, जो ज़्यादातर हिन्दू मानते हैं, विश्वास करते हैं।
➣ हिन्दू धर्म भारत का सर्वप्रमुख धर्म है, जिसे इसकी प्राचीनता एवं विशालता के कारण सनातन धर्म भी कहा जाता है।
➣ अन्य धर्मों के समान हिन्दू धर्म किसी पैगम्बर या व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित धर्म नहीं है। यह प्राचीन काल से चले आ रहे विभिन्न धर्मों, मतमतांतरों, आस्थाओं एवं विश्वासों का समुच्चय है।
➣ उपनिषद काल, वैदिक काल में हिन्दू धर्म के दार्शनिक पक्ष का विकास हुआ। ईश्वर को अजर-अमर, अनादि, सर्वत्रव्यापी कहा गया। इसी समय योग, सांख्य, वेदांत आदि षड दर्शनों का विकास हुआ।
➣ विकासशील धर्म होने के कारण विभिन्न कालों में इसमें नये-नये आयाम जुड़ते गये। इसमें आदिम ग्राम देवताओं, भूत-पिशाची, स्थानीय देवी-देवताओं, झाड़-फूँक, तंत्र-मत्र से लेकर त्रिदेव एवं अन्य देवताओं तथा निराकार ब्रह्म, सभी की आराधना होती है।
➣ नौंवीं से चौदहवीं शताब्दी के मध्य विभिन्न पुराणों की रचना हुई। पुराणों में मध्य युगीन धर्म, ज्ञान-विज्ञान तथा इतिहास का वर्णन मिलता है। पुराणों ने ही हिन्दू धर्म में अवतारवाद की अवधारणा का सूत्रपात किया।
➣ पुराणों के पश्चात् भक्तिकाल का आगमन होता है, जिसमें विभिन्न संतों एवं भक्तों ने साकार ईश्वर की आराधना पर ज़ोर दिया।
➣ हिन्दू धर्म लघु एवं महान् परम्पराओं का समन्वय दर्शाता है। एक ओर वैदिक तथा पुराणकालीन देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना होती है जबकि दूसरी ओर कापलिक और अवधूतों द्वारा भयावह कर्मकांडीय आराधना की जाती है।
➣ हिन्दू धर्म सर्वथा विरोधी सिद्धान्तों का भी उत्तम एवं सहज समन्वय है। एक ओर भक्ति रस से सराबोर भक्त हैं, तो दूसरी ओर अनीश्वर-अनात्मवादी के साथ नास्तिक भी दिखाई पड़ जाते हैं।
अवधारानाएं तथा मान्यताएँ
➣ इसमें एकेश्वरवाद पर बल दिया गया है , ब्रह्म को सर्वव्यापी, एकमात्र सत्ता, निर्गुण तथा सर्वशक्तिमान माना गया है।
➣ सभी धर्मो के अनुसार हिन्दू धर्म अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति अर्थात् आत्मा का ब्रह्मलीन हो जाना, बताया गया है।
➣ इसमें आत्मा की अवधारणा से पुनर्जन्म की भी पुष्टि होती है अर्थात् उसका पुनर्जन्म होता है।
➣ आत्मा के प्रत्येक जन्म द्वारा प्राप्त जीव रूप को योनि (जैव प्रजाति) कहते हैं। ऐसी 84 करोड़ योनियों की कल्पना की गई है, जिसमें कीट-पतंगे, पशु-पक्षी, वृक्ष और मानव आदि सभी शामिल हैं। मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ योनि कहा गया है।
➣ कर्मफल का सिद्धांत माना गया है। प्रत्येक जन्म के दौरान जीवन द्वारा किये गये कर्मो का फल आत्मा को अगले जन्म में भुगतना पड़ता है।
➣ कर्मफल से सम्बंधित दो लोक, स्वर्ग और नरक हैं। स्वर्ग में देवी-देवता अत्यंत समृद्ध जीवन व्यतीत करते हैं, जबकि नरक अत्यंत कष्टदायक, अंधकारमय बताया गया है। अच्छे कर्म करने वाला प्राणी मृत्युपरांत स्वर्ग में और बुरे कर्म करने वाला नरक में स्थान पाता है।
➣ हिन्दू समाज चार वर्णों में विभाजित है- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र। ये चार वर्ण प्रारम्भ में कर्म के आधार पर विभाजित थे।
➣ ब्राह्मण का कर्तव्य शिक्षण, पूजन, कर्मकांड जबकि क्षत्रिय का धर्मानुसार शासन तथा देश व धर्म की रक्षा करना, वैश्यों का कृषि एवं व्यापार तथा शूद्रों को सेवा करना जैसे क्रियाकलापों में विभाजित किया गया है।
➣ हिन्दू धर्म में मानव जीवन को 100 वर्ष मानते हुए चार आश्रम– ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्न्यास, में विभाजित किया गया है। प्रत्येक की संभावित अवधि 25 वर्ष मानी गई।
➣ ब्रह्मचर्य आश्रम में व्यक्ति गुरु आश्रम में जाकर विद्याध्ययन करना , गृहस्थ आश्रम में विवाह तथा अन्य भोग विलास करना , वानप्रस्थ में विरक्त जीवन अर्थात उत्तरदायित्व अपने पुत्रों को सौंपना तथा अंत में सन्न्यास आश्रम में गृह त्यागकर ईश्वर की उपासना में लीन होना जाना।
➣ चार पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। उपयुक्त आचार-व्यवहार और कर्तव्य धर्म, सतमार्ग से धनपार्जन, काम शारीरिक सुख तथा धर्मानुसार आचरण कर जीवन-मरण से मुक्ति होना मोक्ष है।
➣ ज्ञानयोग, भक्तियोग, कर्मयोग तथा राजयोग ये चार योग हैं, जो आत्मा को ब्रह्म से जोड़ने के मार्ग हैं। जिसमे ज्ञान योग दार्शनिक एवं तार्किक विधि का , भक्तियोग आत्मसमर्पण और सेवा भाव का, कर्मयोग समाज की सेवा का तथा राजयोग शारीरिक एवं मानसिक साधना का अनुसरण करता है।
➣ सोलह संस्कार मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह पवित्र संस्कार सम्पन्न किये जाते हैं।
➣ चारो दिशाओं उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार हिन्दू धाम क्रमश: बद्रीनाथ, रामेश्वरम्, जगन्नाथपुरी और द्वारका हैं, जहाँ की यात्रा प्रत्येक हिन्दू का कर्तव्य है।
➣ हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथ हैं- चार वेद (ॠग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद) तेरह उपनिषद, अठारह पुराण, रामायण, महाभारत, गीता, रामचरितमानस आदि हैं।
यहूदी धर्म : विश्व का प्राचीन एकेश्वरवादी धर्म
➣ यहूदी धर्म विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक है,जिसे दुनिया का प्रथम एकेश्वरवादी धर्म माना जाता है।
➣ यहूदी धर्म का उदय फिलिस्तीन में हुआ जो हिब्रू कबीले का मूल धर्म था।
➣ यहूदी धर्म की शुरुआत पैगंबर अब्राहम (अवराहम या इब्राहिम) से मानी जाती है, जो ईसा से 2000 वर्ष पूर्व हुए थे।
➣ करीव 4000 साल पुराना यहूदी धर्म वर्तमान के इजरायल राष्ट्र का राजधर्म है।
➣ हालाँकि यहूदी एकेश्वरवादी होते हैं, लेकिन वे ईश्वर को त्रीएक के रूप में मानते हैं अर्थात् परमपिता परमेश्वर, उनके पुत्र ईसा मसीह (यीशु मसीह) और पवित्र आत्मा।
➣ इस धर्म में मूर्ति पूजा को पाप माना जाता है।
➣ यहूदी धर्म के पूजास्थल को सिनागौग तथा पुरोहित को रबी कहते हैं।
➣ यहूदी अपने भगवान को यहवेह या यहोवा कहते हैं।
➣ पैगंबर अब्राहम के पहले बेटे का नाम हजरत इसहाक और दूसरे का नाम हजरत इस्माईल था। दोनों के पिता एक थे, किंतु माँ अलग-अलग थीं।
➣ हजरत इसहाक की मां का नाम सराह था और हजरत इस्माईल की माँ हाजरा थीं।
➣ पैगंवर अब्राहम के पोते का नाम हजरत याकूब था। जिसका दूसरा नाम इजरायल था।
➣ याकूब ने ही यहूदियों की 12 जातियों को मिलाकर एक सम्मिलित राष्ट्र इजरायल बनाया था।
➣ दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक यहूदी धर्म से ही ईसाई और इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हुई है।
➣ यहूदियों की धर्मभाषा इब्रानी (हिब्रू) तथा धर्मग्रंथ का नाम तनख है, जो इब्रानी भाषा में लिखा गया है। तनख को तालमुद या तोराह नाम से जाना जाता है।
➣ तनख का रचनाकाल ई.पू. 444 से लेकर ई.पू. 100 के बीच का माना जाता है।
➣ ईसा से लगभग 1,500 वर्ष पूर्व अब्राहम के बाद यहूदी इतिहास में सबसे बड़ा नाम पैगंबर मूसा का है।
➣ यह सिर्फ एक धर्म ही नहीं बल्कि पूरी जीवन-पद्धति है जो कि इजरायल और हिब्रू भाषियों का राजधर्म है। धर्म में ईश्वर और उसके नबी यानि पैगम्बर की मान्यता प्रधान है।
➣ 2017 की जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार विश्व में सिर्फ 1.45 करोड़ यहूदी ही बचे हैं। जिनमें से लगभग 64 लाख इजरायल में और 57 लाख अमेरिका में निवास करते हैं।
➣ यहूदी धर्म का प्रवेश भारत में 2985 वर्ष पूर्व अर्थात् 973 ईसा पूर्व केरल के मालाबार तट पर हुआ था।
पारसी धर्म : जरथुस्त्र और पारसी परंपरा
➣ पारसी धर्म या ज़रथुष्ट्र धर्म विश्व का अत्यंत प्राचीन धर्म है, जिसकी स्थापना आर्यों की ईरानी शाखा के एक संत ज़रथुष्ट्र ने की थी।
➣ संत ज़रथुष्ट्र को 30 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
➣ वे ईरानी आर्यों के स्पीतमा कुटुम्ब के पौरुषहस्प के पुत्र थे। उनकी माता का नाम दुधधोवा (दोग्दों) था।
➣ इनके के शिक्षाओं का संकलन जेन्दा अवेस्ता नामक ग्रंथ में है, जो पारसियों का धार्मिक ग्रंथ है।
➣ पारसी धर्म के अनुयायी एक ईश्वर अहुर को मानते हैं।
➣ पारसी धर्म के अनुयायियों को अग्नि-पूजक कहा जाता है।
➣ जेन्दा अवेस्ता नामक ग्रंथ की मूल शिक्षा का सूत्र सद्-विचार, सद्-वचन तथा सद्-कार्य है।
➣ पारसी धर्म में वे शवों को ऊँची मीनार पर खुला छोड़ देते हैं, जहाँ गिद्ध-चील उसे नोंच-नांचकर खा जाते हैं। बाद में उसकी अस्थियाँ एकत्रित कर शव दफनाया जाता था। परन्तु हाल के वर्षों में शव को सीधे दफनाया जा रहा है।
ईसाई धर्म : यीशु मसीह और ईसाई परंपरा
➣ ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह (जीसस क्राइस्ट) थे।
➣ ईसा मसीह का जन्म 4 ई. पू. में जेरुसेलम के निकट बैथलेहम नामक स्थान पर हुआ था।
➣ ईसा मसीह के माता का नाम मेरी तथा पिता का नाम जोसेफ था।
➣ ईसा ने अपने जीवन के प्रथम 30 वर्ष एक बढ़ई के रूप में बैथलेहम के निकट नाजरेथ में बिताए।
➣ ईसा मसीह के प्रथम दो शिष्य एंडूस एवं पीटर थे।
➣ ईसा मसीह को 33 ई.पू. में सूली पर चढ़ाया गया। इनको सूली पर रोमन गवर्नर पोंटियस ने चढ़ाया था।
➣ ईसाई धर्म का सबसे पवित्र चिह्न क्रॉस है।
➣ ईसाई त्रित्व में विश्वास रखते हैं, ये हैं, ईश्वर- पिता, ईश्वर-पुत्र, ईश्वर-पवित्र आत्मा।
➣ ईसाई धर्म का प्रमुख ग्रंथ बाइबिल है।
➣ ईसाई धर्म की दो शाखाएं है रोमन कैथोलिक व प्रोटोस्टेंट तथा उपासना स्थल को गिरजाघर (चर्च ) कहा जाता है।
➣ ईसा मसीह के जन्म दिवस 25 दिसंबर को क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है। अनुमान है कि पहला क्रिसमस रोम में 336 ई.पू. में मनाया गया था।
➣ पहली शताब्दी में ईसाई धर्म प्रचारक सेंट थॉमस भारत आया था इसी से भारत में ईसाई धर्म की शुरूआत हुई।
➣ दुनिया का सबसे बड़ा चर्च सेंट बेसिलिका चर्च, वेटिकन सिटी में है। जिसमे 10 हजार व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है।
➣ पवित्र ग्रन्थ में ईसा को शांति का राजकुमार नाम से पुकारा गया है।
शाक्त धर्म : देवी शक्ति की उपासना परंपरा
➣ शक्ति को ईष्ट देवी मानकर पूजा करने वालों का सम्प्रदाय, शाक्त धर्म कहलाता है।
➣ हिन्दुओं के शाक्त सम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है।
➣ शाक्त सम्प्रदाय में योग और साधना से सिद्धि प्राप्त करने पर जोर दिया गया हैं। इन सिद्धियाँ का उद्देशय केवल मोक्ष प्राप्त करना है।
➣ शैव धर्म के साथ शाक्त धर्म का घनिष्ठ संबंध रहा है। शाक्त धर्म की प्राचीनता भी शैव धर्म के समान प्रागैतिहासिक युग तक जाती है। सैंधव सभ्यता में मातृदेवी की उपासना व्यापक रूप से प्रचलित थी।
➣ मातृदेवी की बहुसंख्यक मूर्तियां खुदाई में प्राप्त हुई हैं। वैदिक साहित्य से सरस्वती, अदिति, उषा, लक्ष्मी आदि देवियों के विषय में सूचना मिलती है।
➣ देवी महात्म्य का विस्तृत वर्णन महाभारत तथा पुराणों में प्राप्त होता है।
➣ देवी की उपासना तीन रूपों में की जाती थी। ये रूप हैं-शांत या सौम्य रूप, उग्र या प्रचंड रूप और काम प्रधान रूप। समाज में प्रायः देवी के सौम्य रूप की पूजा की जाती है।
➣ सौम्य रूप की प्रतीक उमा, पार्वती, लक्ष्मी आदि हैं। उग्न रूप की प्रतीक चंडी, दुर्गा, भैरवी, कपाली आदि हैं।
➣ जम्मू में स्थित शारदा देवी का मंदिर शक्ति के सौम्य रूप का प्रतीक है, जो आज वैष्णों देवी के रूप में विख्यात है।
➣ कापालिक एवं कालामुख जैसे घोरपंथी संप्रदाय देवी के प्रचण्ड रूप की पूजा करते हैं। उग्र रूप की पूजा दुर्गा, चण्डी, कपाली, काली, भैरवी आदि रूपों में होती है। कलकत्ता का काली मंदिर प्रसिद्ध है।
➣ कामरूपिणी देवी की पूजा शाक्त लोग करते है। वे देवी को आनंद भैरवी, त्रिपुर सुंदरी, ललिता आदि कहते हैं। असम का कामाख्या मन्दिर इसी रूप में है।
➣ भेड़ाघाट (जबलपुर, मध्य प्रदेश) के निकट 64 योगिनी का मंदिर शक्ति पूजा से संबंधित है। खजुराहो, सम्भलपुर (उड़ीसा), ललितपुर (उत्तर प्रदेश) में भी 64 योगिनी मन्दिर है।
➣ प्रतिहार शासक महेंद्रपाल के लेखों में दुर्गा की महिषासुरमर्दिनी, कांचनदेवी, अम्बा आदि नामों की स्तुति मिलती है।
➣ भारत में शक्ति की पूजा दुर्गा एवं महिषासुर मर्दिनी के नाम से अधिक होती है। दुर्गा पूजा का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण में मिलता है।
➣ राष्ट्रकूट शासक अमोघवर्ष महालक्ष्मी का अनन्य भक्त था। संजन लेख से ज्ञात होता है कि उसने एक बार अपने बाएं हाथ की अंगुलि काटकर देवी को चढ़ा दिया था।
➣ श्रीहर्ष ने अपने ग्रंथ नैषधीयचरित में सरस्वती मंत्र की महत्ता का प्रतिपादन किया।
➣ संप्रति शाक्त उपासना तीन प्रमुख केंद्र हैं। ये हैं-कश्मीर, कांची तथा असम स्थित कामाख्या। असम स्थित कामाख्या कौल मत का प्रसिद्ध केंद्र है।
1. कौलमार्गी (वामाचारी)
➣ कौलमार्गी पंचमकार (1. मघ, 2. मांस, 3. मत्स्य, 4. मुद्रा, 5. मैथुन) की उपासना करते हैं। इनमें नाम म से प्रारंभ होते हैं।
➣ तामस, साधक भौतिक आधार पर इनका अनुगमन करते हैं और क्षणिक सिद्धि प्राप्त करते हैं।
2. समयाचारी (दक्षिणाचारी)
➣ ये सामान्य रूप से देवी की पूजा करते हैं। शाक्त सम्प्रदाय में देवी के 9 योनियों का वृत्त बनाकर उसके मध्य में एक योनि का चित्र खिंचकर चक्र बनाया जाता है। इसे श्री चक कहते हैं।
शाक्त धर्म से सम्बंधित प्रमुख मंदिर
| वैष्णो देवी का मंदिर (सौम्य रूप ) | जम्मू |
| विंध्यवासिनी देवी का मंदिर | विंध्याचल |
| चौसठ योगिनी का मंदिर | भेड़ाघाट (म.प्र.) |
| पार्वती मंदिर (सौम्य रूप) | नाचना-कुठार (म.प्र.) |
| कामाख्या मंदिर (कामरूप) | असम |
| दक्षिणेश्वर काली मंदिर (उग्र रूप) | कोलकाता |
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