1.उस वीर भारतीय राजा का नाम बताइए, जिसे सिकंदर ने झेलम के तट पर पराजित किया था?
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2013
उत्तर-(b)
326 ई. पू. में झेलम (यूनानी नाम: हाइडेस्पीज) नदी के तट पर हुए युद्ध में सिकंदर ने पंजाब के शक्तिशाली राजा पुरु (पोरस) को पराजित किया। पुरु की वीरता और गरिमापूर्ण आचरण से अत्यधिक प्रभावित होकर सिकंदर ने न केवल उसका राज्य वापस किया, बल्कि उसे नए क्षेत्र भी प्रदान किए और उसे अपना मित्र और सामंत बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस युद्ध में सिकंदर के प्रिय घोड़े ‘बुसेफेलस’ की मृत्यु हो गई थी, जिसकी स्मृति में सिकंदर ने झेलम के तट पर ‘बुसेफेला’ नामक नगर बसाया। इसी युद्ध के बाद सिकंदर की सेना ने व्यास नदी (यूनानी नाम: हाइफेसिस) से आगे बढ़ने से इनकार कर दिया, जिससे वह भारत विजय का अपना स्वप्न पूरा नहीं कर सका।
2.सिकंदर के हमले के समय उत्तर भारत पर निम्नलिखित राजवंशों में से किस एक का शासन था ?
I.A.S. (Pre) 2000
उत्तर-(a)
सिकंदर के भारत आक्रमण (326 ई. पू.) के समय उत्तर भारत में नंद वंश का शासन था। इस वंश का अंतिम और सर्वाधिक शक्तिशाली शासक धनानंद था, जिसे यूनानी लेखकों ने ‘अग्रमीज’ या ‘जंड्रमीज’ कहा है। उसके पास विशाल सैन्य बल था, जिसके भय से ही सिकंदर की सेना व्यास नदी से आगे बढ़ने को तैयार नहीं हुई। धनानंद का सेनापति भद्दशाल था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नंद वंश की स्थापना महापद्मनंद ने की थी, जिसे ‘सर्वक्षत्रांतक’ (सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला) कहा जाता है। यूनानी लेखक डियोडोरस के अनुसार, धनानंद के पास 2 लाख पैदल सेना, 80,000 घुड़सवार, 8,000 रथ और 6,000 हाथी थे — यही विशाल शक्ति सिकंदर की सेना को आगे बढ़ने से रोकने का मुख्य कारण बनी।
3.निम्नलिखित में से कौन सिकंदर के साथ भारत में नहीं आया था?
U.P. P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015
उत्तर-(c)
डाइमेकस सिकंदर के साथ भारत नहीं आया था। वह सीरिया के सेल्यूसिड राजा एंटियोकस प्रथम का राजदूत था, जिसे मौर्य सम्राट बिंदुसार की राजसभा में भेजा गया था। इसके विपरीत, नियार्कस सिकंदर का नौसेना प्रमुख था जिसने सिंधु नदी से फारस की खाड़ी तक समुद्री मार्ग की खोज की; आनेसिक्रिटस और अरिस्टोब्यूलस भी सिकंदर के अभियान में शामिल इतिहासकार थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिकंदर के साथ आए यूनानी लेखकों के विवरण प्राचीन भारत को जानने के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। मेगस्थनीज, जो बाद में चंद्रगुप्त मौर्य की राजसभा में सेल्यूकस निकेटर का राजदूत बनकर आया, उसने ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ लिखा जो भारतीय इतिहास का एक अमूल्य यूनानी स्रोत है।
4.निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए-
कथन (a) : लगभग दो वर्ष के अभियान के पश्चात सिकंदर महान ने 325 ई. पू. में भारत छोड़ दिया।
कारण (R) : वह चंद्रगुप्त मौर्य से पराजित हुआ था। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए- कूट :
कथन (a) : लगभग दो वर्ष के अभियान के पश्चात सिकंदर महान ने 325 ई. पू. में भारत छोड़ दिया।
कारण (R) : वह चंद्रगुप्त मौर्य से पराजित हुआ था। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए- कूट :
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
हखामनी (अचमेनी) साम्राज्य को पराजित करने के बाद 326 ई. पू. में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया। लगभग दो वर्ष के सैन्य अभियान के पश्चात 325 ई. पू. के सितंबर माह में उसने पाटल (सिंधु नदी के मुहाने के पास) से वापसी की। अतः कथन (A) सही है। परंतु उसकी वापसी का कारण चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा पराजय नहीं था — सिकंदर और चंद्रगुप्त कभी युद्ध के आमने-सामने नहीं आए। वास्तविक कारण उसकी सेना का थकान और व्यास नदी पर विद्रोह था। अतः कारण (R) गलत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिकंदर की मृत्यु 323 ई. पू. में बेबीलोन में मात्र 32-33 वर्ष की आयु में हुई। उसकी मृत्यु के बाद ही चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश को उखाड़ फेंककर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की (322 ई. पू.) और सेल्यूकस निकेटर को भी 305 ई. पू. में पराजित किया।
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