1. पाटलिपुत्र के संस्थापक थे-
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
पाटलिपुत्र नगर की स्थापना अजातशत्रु के पुत्र एवं उत्तराधिकारी उदयिन (उदयभद्र) ने की थी। उसने गंगा और सोन नदी के संगम स्थल पर एक किला निर्मित करवाया और राजधानी राजगृह से स्थानांतरित कर यहाँ बसाई। आगे चलकर यह नगर शिशुनाग वंश, नंद वंश एवं मौर्य वंश की राजधानी भी रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज़ ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में पाटलिपुत्र का विस्तृत वर्णन किया है और इसे तत्कालीन विश्व के सबसे बड़े नगरों में से एक बताया है। चंद्रगुप्त मौर्य के काल में यह नगर 9 मील लंबे और 1.5 मील चौड़े क्षेत्र में फैला था।
2. उज्जैन का प्राचीनकाल में नाम क्या था?
M.P.P.C.S. (Pre) 1993
U.P.P.C.S. (Pre) 2009
U.P.P.C.S. (Pre) 2009
उत्तर-(c)
उज्जैन को प्राचीनकाल में अवंतिका के नाम से जाना जाता था। यह 16 महाजनपदों में से एक अवंति महाजनपद की उत्तरी राजधानी थी, जबकि दक्षिणी अवंति की राजधानी माहिष्मती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उज्जैन भारत के सात पवित्र नगरों (सप्तपुरी) में से एक है। यह नगर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है और यहाँ प्रत्येक 12 वर्षों में सिंहस्थ कुम्भ मेले का आयोजन होता है। सम्राट विक्रमादित्य की राजधानी भी उज्जैन ही थी।
3. सूची-I तथा सूची-II को सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही
सूची-I (राजा) सूची-II (राज्य)
A. प्रद्योत 1. मगध
B. उदयन 2. वत्स
C. प्रसेनजित 3. अवंति
D. अजातशत्रु 4. कोसल
कूट :
उत्तर चुनिए-
सूची-I (राजा) सूची-II (राज्य)
A. प्रद्योत 1. मगध
B. उदयन 2. वत्स
C. प्रसेनजित 3. अवंति
D. अजातशत्रु 4. कोसल
कूट :
उत्तर चुनिए-
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2004
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(c)
सही सुमेलन इस प्रकार है — प्रद्योत → अवंति, उदयन → वत्स, प्रसेनजित → कोसल, अजातशत्रु → मगध। ये चारों राजा बुद्धकाल के प्रमुख शासक थे और इनके आपसी संबंध बौद्ध ग्रंथों में विस्तार से वर्णित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कोसल नरेश प्रसेनजित गौतम बुद्ध के समकालीन थे और उनके परम भक्त भी थे। वत्स नरेश उदयन का विवाह अवंति नरेश प्रद्योत की पुत्री वासवदत्ता से हुआ था, जो उस काल की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रेम कथा है।
4. भारत के प्राचीनतम प्राप्त सिक्के-
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(d)
भारत के प्राचीनतम सिक्के ‘आहत सिक्के’ या ‘पंचमार्क सिक्के’ कहलाते हैं, जो मुख्यतः चाँदी के बने होते थे। इन पर ठप्पे (punch) से चिह्न अंकित किए जाते थे, इसीलिए इन्हें ‘आहत सिक्के’ कहते हैं। इनका प्रचलन लगभग 600 ई.पू. से माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भारत के सबसे प्राचीन सोने के सिक्के कुषाण शासकों ने चलाए थे, जिन्हें ‘दीनार’ कहा जाता था। आहत सिक्कों पर सूर्य, पहाड़, वृक्ष, पशु जैसे प्रतीक चिह्न अंकित मिलते हैं, परंतु इन पर किसी राजा का नाम या चित्र नहीं होता।
5. चंड-प्रद्योत किस प्राचीन गणराज्य के राजा थे?
M.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
चंड-प्रद्योत अवंति महाजनपद का शक्तिशाली शासक था। बुद्धकाल में अवंति की राजधानी उज्जैन थी। मगध नरेश बिंबिसार और प्रद्योत के संबंध मैत्रीपूर्ण थे — जब प्रद्योत पांडुरोग से पीड़ित हुए, तब बिंबिसार ने अपने प्रसिद्ध राजवैद्य जीवक को उनके उपचार हेतु भेजा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंड-प्रद्योत को उसके उग्र और क्रोधी स्वभाव के कारण ‘चंड’ (उग्र) की उपाधि दी गई थी। वह बौद्ध ग्रंथों में वर्णित षोडश महाजनपदों के प्रमुख शासकों में से एक था और अपने काल में मगध का प्रबल प्रतिद्वंद्वी माना जाता था।
6. निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?
U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2017
उत्तर-(b)
कोशल महाजनपद की राजधानियाँ साकेत एवं श्रावस्ती थीं, न कि अहिच्छत्र। अहिच्छत्र उत्तरी पांचाल की राजधानी थी, जबकि दक्षिणी पांचाल की राजधानी काम्पिल्य थी। शेष विकल्पों में — अंग की राजधानी चंपा, वत्स की कौशाम्बी और मत्स्य की विराटनगर — सभी सुमेलित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 16 महाजनपदों की जानकारी बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ और जैन ग्रंथ ‘भगवतीसूत्र’ से मिलती है। इनमें मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद था, जिसने अंततः अन्य सभी को अपने अधीन कर लिया।
7. अमिलेखीय साक्ष्य से प्रकट होता है कि नंद राजा के आदेश से एक नहर खोदी गई थी-
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(c)
खारवेल के प्रसिद्ध ‘हाथीगुम्फा अभिलेख’ (उड़ीसा) से ज्ञात होता है कि नंद राजा महापद्मनंद ने कलिंग पर विजय प्राप्त की थी। इस विजय के पश्चात उसने कलिंग में एक नहर का निर्माण करवाया और जिन भगवान की एक प्रतिमा वहाँ से उठाकर मगध ले गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हाथीगुम्फा अभिलेख ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण है और इसे भुवनेश्वर के निकट उदयगिरि पहाड़ी की एक गुफा में स्थित हाथी के आकार की गुफा में पाया गया है। यह अभिलेख कलिंग के राजा खारवेल (प्रथम शताब्दी ई.पू.) की विजयों एवं उपलब्धियों का विवरण देता है।
8.निम्नलिखित मानचित्र में प्राचीन भारत में पाए जाने वाले सोलह महाजनपदों में से चार दर्शाए गए हैं-
क्रमश: A, B, C, D द्वारा अंकित स्थल कौन से हैं?
daigram here
I.A.S. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
प्रश्नगत मानचित्र में A, B, C, D से क्रमश: मत्स्य, अवंति, वत्स तथा अंग महाजनपद दर्शाए गए हैं। मत्स्य महाजनपद राजस्थान प्रांत के जयपुर क्षेत्र में बसा था। इसकी राजधानी विराटनगर थी। पश्चिमी तथा मध्य मालवा के क्षेत्र में अवंति महाजनपद बसा हुआ था। इसके दो भाग थे- उत्तरी अवंति (राजधानी-उज्जयिनी) तथा दक्षिणी अवंति (राजधानी-माहिष्मती)। आधुनिक इलाहाबाद तथा बांदा जिले प्राचीन काल में वत्स महाजनपद का निर्माण करते थे, कौशाम्बी इसकी राजधानी थी। उत्तरी बिहार के वर्तमान भागलपुर तथा मुंगेर के जिले अंग महाजनपद के अंतर्गत थे, चंपा इसकी राजधानी थी।
9. प्राचीन नगर, जो महाभारत और महाभाष्य दोनों में उल्लेखित है-
R.A.S./R.T.S (Pre) 2016
उत्तर-(*)
मध्यमिका (नगरी) राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के निकट स्थित एक प्राचीन नगर है, जिसका उल्लेख महाभारत और पतंजलि रचित महाभाष्य दोनों में मिलता है। इसी प्रकार विराटनगर (बैराठ), जो राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है, का उल्लेख भी इन दोनों ग्रंथों में मिलता है — पांडवों ने यहीं अपना अज्ञातवास बिताया था। इसीलिए इस प्रश्न का उत्तर (*) अर्थात दोनों (a) और (c) है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पतंजलि का महाभाष्य (लगभग 150 ई.पू.) संस्कृत व्याकरण का महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो पाणिनि की अष्टाध्यायी पर भाष्य है। इसमें तत्कालीन भौगोलिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों की भी बहुमूल्य जानकारी मिलती है।
10.’मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र’ बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
उत्तर में चंपा नदी से घिरा हुआ था।
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(b)
प्राचीन पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार थी — उत्तर में गंगा नदी और पश्चिम में सोन नदी। यह नगर नदियों की प्राकृतिक सुरक्षा के कारण अत्यंत सुदृढ़ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेगस्थनीज़ के अनुसार पाटलिपुत्र की सुरक्षा के लिए नगर के चारों ओर लकड़ी की विशाल दीवार बनाई गई थी जिसमें 570 मीनारें और 64 द्वार थे। नगर के चारों ओर एक गहरी खाई भी थी। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी पाटलिपुत्र की नगर-व्यवस्था का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
11. विश्व का पहला गणतंत्र वैशाली में किसके द्वारा स्थापित किया गया ?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
वैशाली में लिच्छवियों द्वारा स्थापित गणराज्य को विश्व का सर्वप्रथम गणतंत्र माना जाता है। लिच्छवी वज्जि संघ के सबसे प्रभावशाली कुल थे और इस संघ का मुख्यालय वैशाली था। बुद्ध काल में वैशाली सबसे बड़े और शक्तिशाली गणराज्यों में से एक था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वैशाली में ही द्वितीय बौद्ध संगीति (383 ई.पू.) का आयोजन हुआ था, जो बौद्ध धर्म के इतिहास में अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटना है। इसके अलावा, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का जन्म भी वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ था।
12. निम्न में से कौन-सा युग्म उपयुक्त जोड़ी है?
R.A.S. /R.T.S. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
राजा चेटक लिच्छवी गणराज्य के प्रमुख शासक थे। इनकी पुत्री त्रिशला (जिसे वेदेहा भी कहा जाता है) का विवाह मगध के राजकुमार सिद्धार्थ से हुआ था, और त्रिशला जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की माँ थीं। चेटक की एक अन्य पुत्री चेल्लणा का विवाह मगध नरेश बिंबिसार से हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लिच्छवी वज्जि संघ के प्रधान वंशों में से एक थे और वज्जि संघ में कुल 8 कुल (clans) सम्मिलित थे। चंद्रगुप्त मौर्य की माता का संबंध भी कुछ इतिहासकार लिच्छवी वंश से मानते हैं।
13. प्रारंभिक गणतंत्र में कौन-सा नहीं था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(*)
बुद्धकाल में गंगाघाटी में अनेक गणराज्यों का अस्तित्व था जिनमें कपिलवस्तु के शाक्य, वैशाली के लिच्छवी, कुशीनारा व पावा के मल्ल, मिथिला के विदेह, रामगाम के कोलिय आदि प्रमुख थे। यौधेय गणतंत्र का सबसे पहला उल्लेख व्याकरणाचार्य पाणिनी की अष्टाध्यायी में मिलता है। समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में भी यौधेयों पर उसकी विजय का उल्लेख है, इससे सिद्ध होता है कि यह गणतंत्र चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से गुप्तकाल तक विद्यमान था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यौधेय गणराज्य का क्षेत्र मुख्यतः वर्तमान पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में फैला हुआ था। इनके सिक्के भी पाए गए हैं जो इनकी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था की पुष्टि करते हैं।
14. निम्नलिखित में से किस राजा ने पाटलिपुत्र बसाया था?
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(d)
पाटलिपुत्र नगर की स्थापना हर्यक वंश के शासक उदयिन (उदायिभद्र) ने की थी। यह नगर गंगा और सोन नदियों के संगम पर बसाया गया था। उदयिन ने अपनी राजधानी राजगृह से स्थानांतरित करके पाटलिपुत्र को बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यूनानी इतिहासकार मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को ‘पालिबोथ्रा’ नाम से संबोधित किया था और इसे विश्व के सबसे बड़े और समृद्ध नगरों में से एक बताया था। चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग ने भी पाटलिपुत्र की यात्रा की थी।
15. उदयिन-वासवदत्ता की दंतकथा संबंधित है-
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(a)
उदयिन और वासवदत्ता की प्रसिद्ध प्रेम कथा उज्जैन (उज्जयिनी) से संबंधित है। इस कथा को महाकवि भास ने अपने संस्कृत नाटक ‘स्वप्नवासवदत्तम्’ में अमर किया है। इस नाटक में वत्सराज उदयिन तथा अवंति नरेश प्रद्योत की पुत्री वासवदत्ता की प्रेम कहानी का वर्णन है जब उदयिन उज्जयिनी के कारागार में बंदी थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी जो वर्तमान इलाहाबाद (प्रयागराज) के निकट स्थित थी। बौद्ध ग्रंथों में उदयिन को एक धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक के रूप में भी चित्रित किया गया है।
16. किस शासक द्वारा सर्वप्रथम पाटलिपुत्र का राजधानी के रूप में चयन किया गया?
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(c)
पाटलिपुत्र को सर्वप्रथम राजधानी के रूप में हर्यक वंश के शासक उदयिन ने चुना था। उदयिन अजातशत्रु का पुत्र था। उसने गंगा और सोन नदियों के संगम पर इस नगर को बसाकर राजगृह की जगह पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बाद में शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक ने भी पाटलिपुत्र को ही अपनी राजधानी बनाए रखा और यहीं द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया। मौर्य काल में पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की भव्य राजधानी बनी और इसे ‘कुसुमपुर’ भी कहा जाता था।
17. प्रथम मगध साम्राज्य का उत्कर्ष किस शताब्दी में हुआ था?
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
प्रथम मगध साम्राज्य का उत्कर्ष ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी में हुआ था। इस साम्राज्य की नींव रखने वाले हर्यक वंश के राजा बिंबिसार (लगभग 544-492 ई.पू.) थे जिन्हें मगध साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। बिंबिसार ने वैवाहिक संबंधों और विजयों द्वारा मगध की शक्ति को अत्यंत विस्तृत किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मगध की शक्ति वृद्धि के प्रमुख कारणों में उसकी भौगोलिक स्थिति, लोहे की खदानें (राजगृह के निकट), उपजाऊ भूमि और गंगा नदी का व्यापारिक मार्ग प्रमुख थे। बिंबिसार बौद्ध धर्म के संरक्षक थे और उन्होंने स्वयं गौतम बुद्ध से भेंट की थी।
18. पाटलिपुत्र को किस शासक ने सर्वप्रथम अपनी राजधानी बनाया?
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(a)
यद्यपि पाटलिपुत्र की स्थापना हर्यक वंश के शासक उदयिन ने की थी, परंतु दिए गए विकल्पों में उदयिन का नाम नहीं होने के कारण चंद्रगुप्त मौर्य सही उत्तर है। चंद्रगुप्त मौर्य ने पाटलिपुत्र को अपने विशाल मौर्य साम्राज्य की राजधानी बनाया और इसे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में पाटलिपुत्र की किलेबंदी अत्यंत सुदृढ़ थी — मेगस्थनीज के अनुसार नगर की रक्षा के लिए 570 बुर्जों और 64 द्वारों वाली लकड़ी की विशाल प्राचीर थी। कौटिल्य (चाणक्य) के अर्थशास्त्र में भी नगर प्रशासन के अनेक विवरण मिलते हैं।
19. ईसा पूर्व छठी सदी में विश्व की प्रथम गणतंत्रात्मक व्यवस्था कहां थी?
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(a)
ईसा पूर्व छठी शताब्दी में विश्व की प्रथम गणतंत्रात्मक व्यवस्था वैशाली में थी जिसे लिच्छवियों ने स्थापित किया था। वैशाली का यह गणतंत्र एथेंस के लोकतंत्र से भी पुराना माना जाता है। वज्जि संघ के अंतर्गत वैशाली में एक संगठित संसद (गणपरिषद) के माध्यम से शासन चलाया जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वैशाली की गणपरिषद में 7707 राजाओं (सदस्यों) के होने का उल्लेख बौद्ध ग्रंथों में मिलता है। अजातशत्रु ने वैशाली गणराज्य को षड्यंत्र और युद्ध के माध्यम से अंततः मगध साम्राज्य में विलीन कर लिया था।
20. निम्नलिखित में से कौन-सा एक, ईसा पूर्व छठी शताब्दी में, प्रारंभ में भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली नगर राज्य था?
I.A.S. (Pre) 1999
उत्तर-(d)
ईसा पूर्व छठी शताब्दी के प्रारंभ में मगध भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली नगर-राज्य था। अनेक जातक ग्रंथों में उस काल के अन्य नगर-राज्यों की तुलना में मगध की अधिक समृद्धि और शक्ति का वर्णन मिलता है। मगध की कोशल, अंग और काशी से दीर्घकालीन प्रतिद्वंद्विता रही और अंततः मगध इन सभी पर विजयी रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मगध के उत्थान में उसकी अनुकूल भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ राजगृह (गिरिव्रज) जैसी प्राकृतिक रूप से सुरक्षित राजधानी का भी योगदान था। 16 महाजनपदों में मगध ही एकमात्र ऐसा राज्य था जो आगे चलकर विशाल साम्राज्य में परिवर्तित हो सका।
21. गोदावरी नदी के तट पर स्थित महाजनपद था –
R.A.S./ R.T.S. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
16 महाजनपदों में अस्सक (अश्मक) एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो विंध्य पर्वत के दक्षिण में स्थित था। यह नर्मदा और गोदावरी नदियों के बीच के क्षेत्र में फैला हुआ था, जो वर्तमान महाराष्ट्र के अहमदनगर और औरंगाबाद जिलों के आसपास का इलाका है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसकी राजधानी पोतन (प्रतिष्ठान/पैठन) थी, जो आज के महाराष्ट्र में गोदावरी तट पर स्थित है। उल्लेखनीय है कि बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रंथ भगवती सूत्र — दोनों में 16 महाजनपदों की सूची में अस्सक का नाम सम्मिलित है। बौद्ध साहित्य में यह भी उल्लेख मिलता है कि महात्मा बुद्ध के समय अस्सक में आर्यों की एक विशेष शाखा निवास करती थी जिन्हें ‘अश्मक’ कहा जाता था।
22. छठवीं शताब्दी ई.पू. में शुक्तिमती राजधानी थी-
U.P.P.C.S (Mains) 2011
उत्तर-(c)
चेदि महाजनपद वर्तमान बुंदेलखंड के पूर्वी भाग तथा उससे लगे क्षेत्रों में स्थित था। इसकी राजधानी ‘सोत्थिवती’ (पालि) थी, जिसे संस्कृत में ‘शुक्तिमती’ कहा जाता है। यह नगरी वर्तमान मध्य प्रदेश में यमुना की सहायक नदी केन (शुक्तिमती) के तट पर बसी थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:महाभारत के अनुसार, चेदि राज्य पर शिशुपाल का शासन था, जो कृष्ण का विरोधी था और जिसका वध कृष्ण ने किया था। चेदि राज्य का उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक अत्यंत प्राचीन जनपद था।
23. सोलह महाजनपदों के युग में मथुरा इनमें से किसकी राजधानी थी?
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
शूरसेन महाजनपद की राजधानी मथुरा थी, जो यमुना नदी के तट पर स्थित थी। यह यादव वंश का प्रमुख केंद्र था। महाभारत काल में यहाँ के राजा उग्रसेन और उनके पुत्र कंस का उल्लेख मिलता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बौद्ध साहित्य में मथुरा को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और सांस्कृतिक नगर के रूप में चित्रित किया गया है। उल्लेखनीय है कि मेगस्थनीज ने भी शूरसेन (सूरसेनोई) का वर्णन किया है और बताया है कि यहाँ के लोग हेरेकल्स (हरि/कृष्ण) की पूजा करते थे — यह भारत में कृष्ण-भक्ति के प्राचीनतम ऐतिहासिक साक्ष्यों में से एक है।
24. निम्न में से किन ग्रंथों में प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों (षोडश महाजनपद) की सूची मिलती है? नीचे दिए गए कूट से
सही
1. अर्थशास्त्र 2. अंगुत्तर निकाय
3. दीघनिकाय 4. भगवती सूत्र
कूट :
उत्तर का चयन कीजिए-
1. अर्थशास्त्र 2. अंगुत्तर निकाय
3. दीघनिकाय 4. भगवती सूत्र
कूट :
उत्तर का चयन कीजिए-
R.A.S. / R.T.S (Pre) 2016
उत्तर-(a)
16 महाजनपदों की सूची केवल दो ग्रंथों में मिलती है — बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ और जैन ग्रंथ ‘भगवती सूत्र’। दीघनिकाय में 16 महाजनपदों की कोई सुव्यवस्थित सूची नहीं है, और कौटिल्य का अर्थशास्त्र मौर्यकाल का ग्रंथ है जो महाजनपदों की ऐतिहासिक सूची नहीं देता। दोनों ग्रंथों की सूची में मामूली अंतर है — भगवती सूत्र में ‘कलिंग’ का उल्लेख है, जबकि अंगुत्तर निकाय में ‘गंधार’ और ‘कम्बोज’ का उल्लेख है। यह अंतर इस बात का प्रमाण है कि विभिन्न परंपराओं में महाजनपदों की पहचान अलग-अलग थी।
25. चंपा किस महाजनपद की राजधानी थी?
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014
उत्तर-(d)
अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो वर्तमान बिहार के भागलपुर जिले के समीप गंगा और चंपा नदियों के संगम पर स्थित थी। महाभारत तथा पुराणों में इस नगर का प्राचीन नाम ‘मालिनी’ मिलता है। दीघनिकाय में उल्लेख है कि इस नगर की योजना महान वास्तुकार महागोविंद ने बनाई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अंग महाजनपद पर बाद में मगध के राजा बिम्बिसार ने अधिकार कर लिया था। उल्लेखनीय है कि महाभारत के महारथी कर्ण को अंग का राजा बनाया गया था और चंपा उनकी राजधानी थी — इसीलिए कर्ण को ‘अंगराज’ भी कहा जाता है।
26. महाभारत के अनुसार,
उत्तर ी पांचाल की राजधानी स्थित थी-
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
पांचाल महाजनपद गंगा-यमुना दोआब के मध्यवर्ती भाग में स्थित था और यह दो भागों में विभाजित था। उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र थी, जो वर्तमान उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रामनगर के समीप स्थित थी। दक्षिणी पांचाल की राजधानी कांपिल्य थी, जो वर्तमान फर्रुखाबाद जिले में स्थित है। हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ कुरु राज्य की राजधानियाँ थीं, जबकि मथुरा शूरसेन की राजधानी थी। महाभारत के अनुसार, द्रोणाचार्य ने अपने शिष्यों की सहायता से पांचाल राज्य को जीतकर उसे कुरुओं और पांडवों के बीच बाँटा था।
27. महाजनपद युग के 16 जनपदों के नाम बौद्ध साहित्य में प्रायः उल्लिखित मिलते हैं। निम्नलिखित में से किन जनपदों के नाम पाणिनि की अष्टाध्यायी में उल्लिखित हैं ?
R.A.S./R.T.S. (Pre) (Re-Exam) 2013
उत्तर-(a)
पाणिनि संस्कृत व्याकरण के महानतम आचार्य थे। इनका जन्म गांधार प्रदेश (वर्तमान पाकिस्तान के शाहबाजगढ़ी क्षेत्र) में हुआ था और इनका काल लगभग 500–400 ई.पू. माना जाता है। इनकी कृति अष्टाध्यायी में 8 अध्याय और लगभग 4000 सूत्र हैं। इसमें 22 जनपदों का उल्लेख मिलता है, जिनमें मगध, अश्मक, कम्बोज, गांधार और शूरसेन प्रमुख हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अष्टाध्यायी ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक और भौगोलिक स्थितियों की जानकारी देती है। विशेष रूप से, पाणिनि ने अपने ग्रंथ में गणराज्यों (संघों) का भी उल्लेख किया है, जो उस युग की लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का प्रमाण है।
28. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 16 महाजनपदों के विषय में निम्नलिखित में से किस बौद्ध ग्रंथ में सूचना मिलती है?
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(d)
बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ में छठी शताब्दी ई.पू. के 16 महाजनपदों की सुव्यवस्थित सूची मिलती है। ये 16 महाजनपद हैं — अंग, मगध, काशी, कोसल, वज्जि, मल्ल, चेदि, वत्स, कुरु, पांचाल, मत्स्य, शूरसेन, अस्मक, अवंति, गांधार और कम्बोज। अंगुत्तर निकाय पालि भाषा में रचित सुत्तपिटक का एक भाग है जिसमें बुद्ध के उपदेश संख्यात्मक क्रम में संकलित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में भी 16 महाजनपदों की सूची मिलती है, लेकिन इसमें ‘कलिंग’ का उल्लेख है जबकि ‘गांधार’ और ‘कम्बोज’ नहीं हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि इनमें से अधिकांश महाजनपद उत्तरी भारत में गंगा के मैदान में स्थित थे।
29. सोलह महाजनपदों की सूची उपलब्ध है-
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
16 महाजनपदों की सुस्पष्ट सूची बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ में उपलब्ध है। महाभारत में अनेक जनपदों का उल्लेख है, किंतु वहाँ 16 महाजनपदों की कोई क्रमबद्ध सूची नहीं दी गई है। छांदोग्य उपनिषद एक उपनिषद ग्रंथ है जो दार्शनिक विषयों पर केंद्रित है, और संयुक्त निकाय में भी इस प्रकार की कोई विशिष्ट सूची नहीं मिलती।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अंगुत्तर निकाय थेरवाद बौद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो सुत्तपिटक का चौथा भाग है। महाजनपद काल (600–325 ई.पू.) भारतीय इतिहास में राजनीतिक एकीकरण की प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण था, जो अंततः मौर्य साम्राज्य की स्थापना के साथ परिणत हुआ।
30. निम्न में से कौन एक बौद्ध ग्रंथ “सोलह महाजनपदों” का उल्लेख करता है?
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(a)
सोलह महाजनपदों का उल्लेख करने वाला बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ है। मज्झिम निकाय में मध्यम लंबाई के सुत्त संकलित हैं, खुद्दक निकाय में धम्मपद, जातक आदि लघु ग्रंथ हैं, और दीघनिकाय में दीर्घ सुत्तों का संग्रह है — किंतु इनमें से किसी में भी 16 महाजनपदों की व्यवस्थित सूची नहीं मिलती।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अंगुत्तर निकाय सुत्तपिटक के पाँच निकायों में से एक है और इसमें उपदेशों को 1 से 11 तक के अंकों के क्रम में व्यवस्थित किया गया है। यह ग्रंथ न केवल धार्मिक बल्कि तत्कालीन भारत की राजनीतिक-भौगोलिक स्थिति को समझने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।
31. किसने मगध साम्राज्य में वज्जि गणसंघ को हराकर आत्मसात किया ?
Jharkhand P.S.C. (Mains) 2016
उत्तर-(d)
अजातशत्रु (492–460 ई.पू.) ने वज्जि संघ को पराजित कर उसे मगध साम्राज्य में मिलाया। वज्जि संघ एक शक्तिशाली गणतांत्रिक संघ था, जिसका नेतृत्व लिच्छवी करते थे और वैशाली उनकी प्रमुख राजधानी थी। अजातशत्रु ने सीधे युद्ध की बजाय कूटनीति का सहारा लिया — उसने अपने मंत्री वस्सकार को वज्जि संघ में आंतरिक फूट डालने के लिए भेजा, जिससे उनका संगठन कमज़ोर हो गया। इसके बाद उसने सैन्य आक्रमण कर उन्हें परास्त किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अजातशत्रु ने इस युद्ध में दो नए शस्त्रों का प्रयोग किया — महाशिलाकंटक (एक प्रकार की पत्थर फेंकने वाली मशीन) और रथमूसल (रथ से जुड़ी घूमने वाली गदा)। बौद्ध ग्रंथ महापरिनिब्बानसुत्त में इस संघर्ष का उल्लेख मिलता है।
32. मगध के किस प्रारंभिक शासक ने राज्यारोहण के लिए अपने पिता की हत्या की एवं स्वयं इसी कारणवश अपने पुत्र द्वारा मारा गया ?
U.P.P.C.S. (Pre) 2007
उत्तर-(b)
अजातशत्रु ने अपने पिता बिंबिसार की हत्या कर मगध की सत्ता हथियाई और बाद में उसके पुत्र उदयिन ने उसी की हत्या कर दी। यह हर्यंक वंश की पितृहंता परंपरा का प्रतीक बन गया। बिंबिसार को बौद्ध स्रोतों में मगध का प्रथम प्रतापी शासक माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जैन ग्रंथों के अनुसार अजातशत्रु को ‘कुणिक’ भी कहा जाता था। उसने अपने शासनकाल में बुद्ध और महावीर दोनों से भेंट की थी और वह बौद्ध धर्म का समर्थक था।
33. प्राचीन महाजनपद मगध की प्रथम राजधानी कौन-सी थी?
66th B.P.S.C. (Pre), 2020
उत्तर-(d)
मगध की प्रथम राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) थी, जो इस प्रश्न के विकल्पों में नहीं दी गई है। अतः सही उत्तर “उपयुक्त में से कोई नहीं” होगा। पुराणों के अनुसार बृहद्रथ वंश के राजा जरासंध ने गिरिव्रज को राजधानी बनाया था। बाद में उदयिन ने राजधानी पाटलिपुत्र स्थानांतरित की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजगृह (गिरिव्रज) को पाँच पहाड़ियों से घिरा होने के कारण प्राकृतिक रूप से सुरक्षित माना जाता था। यहीं पर बुद्ध के निर्वाण के पश्चात प्रथम बौद्ध संगीति (483 ई.पू.) का आयोजन भी हुआ था।
34. राजकुमार जो अपने पिता की मृत्यु के लिए
उत्तर उत्तरदायी था-
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
अजातशत्रु ने अपने पिता बिंबिसार को कारागार में डालकर उनकी मृत्यु का कारण बना। कुछ स्रोतों के अनुसार उसने स्वयं उनकी हत्या की, जबकि अन्य के अनुसार बिंबिसार ने कारागार में ही प्राण त्यागे। बौद्ध ग्रंथों में बिंबिसार को ‘श्रेणिक’ नाम से भी जाना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बिंबिसार ने वैवाहिक कूटनीति के माध्यम से कोशल, वैशाली और मद्र जैसे राज्यों से संबंध स्थापित किए थे। उन्होंने कोशल की राजकुमारी कोशलादेवी से विवाह किया था, जिसके दहेज में काशी प्रदेश मगध को मिला था।
35. निम्नलिखित में से कौन एक मगध साम्राज्य की राजधानी नहीं रही ?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(d)
कौशाम्बी मगध साम्राज्य की राजधानी कभी नहीं रही। यह वत्स महाजनपद की राजधानी थी। गिरिव्रज और राजगृह एक ही स्थान के दो नाम हैं — ये मगध की प्रारंभिक राजधानी थी। बाद में उदयिन ने पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौशाम्बी आधुनिक उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) के निकट स्थित थी। वत्स राज्य के प्रसिद्ध शासक उदयन (मगध के उदयिन से भिन्न) थे, जो बौद्ध कथाओं में अत्यंत प्रसिद्ध हैं।
36. मगध की राजधानी कौन-सी थी?
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
उत्तर-(c)
मगध की राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) थी। पुराणों के अनुसार बृहद्रथ वंश के शासक जरासंध ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। हर्यंक वंश के काल में भी यही राजधानी रही। अजातशत्रु के पुत्र उदयिन ने गंगा-सोन नदियों के संगम पर पाटलिग्राम की स्थापना की और राजधानी वहाँ स्थानांतरित की, जो आगे चलकर पाटलिपुत्र बनी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चाणक्य के अर्थशास्त्र में पाटलिपुत्र की राजधानी के रूप में महत्ता का उल्लेख है। मेगस्थनीज़ ने भी अपने ग्रंथ ‘इंडिका’ में पाटलिपुत्र का भव्य वर्णन किया है।
37. अजातशत्रु के वंश का नाम क्या था?
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
अजातशत्रु हर्यंक वंश से संबंधित था। इस वंश की स्थापना बिंबिसार ने की थी। हर्यंक वंश के बाद शिशुनाग वंश, फिर नंद वंश और उसके पश्चात मौर्य वंश का शासन मगध पर स्थापित हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हर्यंक वंश को बौद्ध ग्रंथों में ‘पितृहंता वंश’ भी कहा गया है क्योंकि इस वंश के कई शासकों ने अपने पिता की हत्या कर सत्ता प्राप्त की। शिशुनाग ने नागदशक को उखाड़कर हर्यंक वंश का अंत किया और एक नए वंश की नींव रखी।
38. मगध की प्रारंभिक राजधानी कौन-सी थी?
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(c)
मगध की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी। यह स्थान वर्तमान बिहार के नालंदा जिले में स्थित है। पाँच पर्वतों — वैभारगिरि, रत्नागिरि, उदयगिरि, स्वर्णगिरि और वैपुलगिरि — से घिरी होने के कारण यह नगरी अभेद्य मानी जाती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महाभारत में जरासंध की राजधानी के रूप में गिरिव्रज का उल्लेख आता है। भगवान बुद्ध ने राजगृह में अनेक उपदेश दिए और यहाँ के वेणुवन (बाँस का उद्यान) में विश्राम किया था — यह बुद्ध को बिंबिसार द्वारा भेंट किया गया था।
39. प्राचीन श्रावस्ती का नगर विन्यास किस आकृति का है ?
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
प्राचीन श्रावस्ती का नगर विन्यास अर्धचंद्राकार (Crescentic) था। अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1861 ई. में इसकी पहचान उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में स्थित सहेत-महेत नामक स्थल से की। यह कोशल महाजनपद की एक प्रमुख नगरी थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: श्रावस्ती में जेतवन विहार स्थित था, जिसे अनाथपिण्डक (सुदत्त) नामक धनी व्यापारी ने भगवान बुद्ध को भेंट किया था। बुद्ध ने अपने जीवन के 25 वर्षावास यहीं बिताए थे, जो किसी भी एक स्थान पर उनके सबसे अधिक वर्षावास हैं।
40. छठी शताब्दी ई.पू. का मत्स्य महाजनपद स्थित था-
U.P.P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
मत्स्य महाजनपद राजस्थान के जयपुर और अलवर के आसपास के क्षेत्र में स्थित था। इसकी राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ, जयपुर के निकट) थी। महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का अंतिम वर्ष यहीं राजा विराट के दरबार में बिताया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बैराठ (विराटनगर) में अशोककालीन एक शिलालेख और बौद्ध स्तूप के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं, जो दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र मौर्य काल में भी महत्त्वपूर्ण था। मत्स्य जनपद का उल्लेख अथर्ववेद और पाणिनि की अष्टाध्यायी में भी मिलता है।
41. मगध में नंद वंश का संस्थापक कौन था?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
शिशुनाग वंश के पतन के बाद मगध की सत्ता नंद वंश के हाथों में आई। इस वंश की नींव महापद्मनंद ने रखी, जिसे उग्रसेन भी कहा जाता है। पुराण उन्हें ‘सर्वक्षत्रांतक’ (समस्त क्षत्रियों का नाश करने वाला) एवं ‘अपरोपरशुराम’ की उपाधि से संबोधित करते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महापद्मनंद की माता एक नाई (नाइन) जाति की महिला थी और पिता शिशुनाग वंश के राजा महानंदिन थे, इसलिए उन्हें ‘एकराट’ (एकमात्र सम्राट) भी कहा जाता है। नंद वंश भारत का पहला गैर-क्षत्रिय साम्राज्यवादी वंश माना जाता है।
42. वाराणसी को निम्नलिखित में से किसने अपनी द्वितीय राजधानी बनाया था ?
U.P.G.I.C. प्रवक्ता, 2007-
उत्तर-(*)
छठी शताब्दी ई.पू. में वाराणसी काशी महाजनपद की राजधानी थी। हर्यक वंश के शासक बिंबिसार ने इसे कोशल नरेश प्रसेनजित की बहन महाकोशला से विवाह के दहेज में प्राप्त किया। शिशुनाग ने गिरिव्रज को अपनी मुख्य राजधानी और वैशाली को द्वितीय राजधानी बनाया था, तथा अपने पुत्र को वाराणसी का उपराजा नियुक्त किया। इस प्रश्न में दिए गए विकल्पों में स्पष्टता का अभाव है; उ.प्र. लोक सेवा आयोग ने इसका उत्तर शिशुनाग माना है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन निरंतर बसे हुए नगरों में से एक है। ऋग्वेद में भी काशी (वाराणसी) का उल्लेख मिलता है, जो इसकी अत्यंत प्राचीनता को सिद्ध करता है।
43. काल्पी नगर किस नदी के तट पर स्थित है?
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(b)
काल्पी उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में यमुना नदी के तट पर बसा एक ऐतिहासिक नगर है। प्राचीन काल में इसे ‘कालप्रिया’ नाम से जाना जाता था। मान्यता है कि इसे चौथी शताब्दी में राजा वसुदेव ने बसाया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मध्यकाल में काल्पी एक प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र था। 1858 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी के बाद काल्पी को ही अपना अगला रणक्षेत्र बनाया था।
44. मालवा क्षेत्र पर मगध की सत्ता का विस्तार निम्न में से किसक शासन काल में हुआ था?
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(d)
पुराणों के अनुसार मगध के राजा शिशुनाग ने अवंति (वर्तमान मालवा) राज्य को युद्ध में परास्त कर मगध साम्राज्य में विलीन कर लिया था। यह मगध की शक्ति विस्तार की एक महत्वपूर्ण घटना है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शिशुनाग से पहले अवंति और मगध के बीच लगभग 100 वर्षों तक संघर्ष चलता रहा था, जिसमें अजातशत्रु और उदयभद्र जैसे हर्यक वंश के शासकों ने भी अवंति को जीतने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता अंततः शिशुनाग को मिली। अवंति की राजधानी उज्जयिनी थी, जो आज भी मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नगर है।
45. निम्नलिखित मगध राजवंशों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए-
1. नंद वंश 2. शुंग वंश
3. मौर्य वंश 4. हर्यक वंश
निम्न कूटों में से चुनिए-
1. नंद वंश 2. शुंग वंश
3. मौर्य वंश 4. हर्यक वंश
निम्न कूटों में से चुनिए-
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
मगध पर शासन करने वाले इन चार वंशों का सही कालक्रम इस प्रकार है—हर्यक वंश (544–412 ई.पू.), नंद वंश (344–321 ई.पू.), मौर्य वंश (321–184 ई.पू.), शुंग वंश (184–75 ई.पू.)। उल्लेखनीय है कि हर्यक और नंद वंश के बीच शिशुनाग वंश (412–344 ई.पू.) का भी शासन था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हर्यक वंश की स्थापना बिंबिसार ने की थी और इसे मगध साम्राज्य के विस्तार का वास्तविक आरंभकर्ता माना जाता है। शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या करके की थी।
46. नंद वंश के पश्चात मगध पर किस राजवंश ने शासन किया ?
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(a)
नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद के काल में अत्यधिक करों और उत्पीड़न से जनता में व्यापक असंतोष फैल गया। चंद्रगुप्त मौर्य ने कूटनीतिज्ञ चाणक्य (कौटिल्य) के मार्गदर्शन में धनानंद को पराजित कर उसका वध किया और 321 ई.पू. में मौर्य वंश की स्थापना की। इस प्रकार नंद वंश के ठीक बाद मौर्य वंश का शासन आया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंद्रगुप्त मौर्य ने सिकंदर के सेनापतियों को भी पराजित कर पश्चिमोत्तर भारत को विदेशी प्रभाव से मुक्त कराया था। मौर्य साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप का पहला विशाल केंद्रीकृत साम्राज्य था, जो अफगानिस्तान से लेकर दक्षिण भारत तक फैला था।
47. मगध का कौन-सा सम्राट ‘अपरोपरशुराम’ के नाम से जाना जाता है?
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl) (Pre) 2010
उत्तर-(d)
नंद वंश के संस्थापक महापद्मनंद को पुराणों में ‘अपरोपरशुराम’ की उपाधि दी गई है, जिसका अर्थ है ‘दूसरा परशुराम’। यह उपाधि उन्हें क्षत्रियों का दमन करने के कारण दी गई थी। उन्हें ‘सर्वक्षत्रांतक’ (सभी क्षत्रियों का नाशक) भी कहा जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महापद्मनंद ने कलिंग को भी जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था और वहाँ एक नहर खुदवाई थी, जिसका उल्लेख खारवेल के हाथीगुम्फा अभिलेख में मिलता है। उनके साम्राज्य को ‘एकराट’ की संज्ञा दी गई क्योंकि यह संपूर्ण उत्तर भारत पर एकछत्र प्रभुत्व स्थापित करने वाला पहला साम्राज्य था।
48. राजा नंद का उल्लेख करने वाला अभिलेखीय प्रमाण है-
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Mains) 2010
उत्तर-(a)
ओडिशा के भुवनेश्वर के निकट स्थित उदयगिरि पहाड़ी की हाथीगुम्फा गुफा में कलिंग नरेश खारवेल का प्रसिद्ध अभिलेख उत्कीर्ण है। इसमें उल्लेख है कि नंद राजा महापद्मनंद ने कलिंग में एक नहर खुदवाई थी। यह अभिलेख नंद वंश की गतिविधियों का एकमात्र महत्वपूर्ण अभिलेखीय साक्ष्य है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हाथीगुम्फा अभिलेख ब्राह्मी लिपि में प्राकृत भाषा में लिखा गया है और इसमें खारवेल के 13 वर्षों के शासन का विवरण मिलता है। यह अभिलेख भारतीय नहर-निर्माण की जानकारी देने वाला प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य भी है।
49. गौतम बुद्ध के समय का प्रसिद्ध वैद्य जीवक जिसके दरबार से
संबंधित था?
U.P. U.D.A./ L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(a)
बुद्धकाल के महान वैद्य जीवक मगध नरेश बिंबिसार के दरबार से संबद्ध थे और उनके राजवैद्य थे। बिंबिसार ने उन्हें अवंति के राजा चंड प्रद्योत की चिकित्सा के लिए भेजा था। जीवक ने स्वयं गौतम बुद्ध की भी चिकित्सा की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जीवक को आयुर्वेद के इतिहास में एक महान शल्य चिकित्सक (surgeon) के रूप में जाना जाता है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार उन्होंने मस्तिष्क की जटिल शल्य चिकित्सा भी की थी। वे तक्षशिला विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित चिकित्सक थे।
50. निम्नलिखित कथन (a) और (b) को पढ़ें और नीचे दिए गए कूटों में से सही
(a) विश्व के सभी भागों में ईस्वी पूर्व छठवीं शताब्दी एक महान धार्मिक उथल-पुथल का काल था।
(b) वैदिक धर्म बहुत जटिल हो चुका था। उत्तर का चयन करें-
कूट :
(a) विश्व के सभी भागों में ईस्वी पूर्व छठवीं शताब्दी एक महान धार्मिक उथल-पुथल का काल था।
(b) वैदिक धर्म बहुत जटिल हो चुका था। उत्तर का चयन करें-
कूट :
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
ईसा पूर्व छठी शताब्दी विश्व के इतिहास में धार्मिक-दार्शनिक जागृति का काल था। भारत में बौद्ध और जैन धर्म का उदय हुआ; चीन में कन्फ्यूशियस, ईरान में जरथुस्त्र और यूनान में पाइथागोरस ने पुरानी मान्यताओं को चुनौती दी। भारत में वैदिक धर्म अत्यंत जटिल हो चुका था — यज्ञों पर अत्यधिक खर्च, पशुबलि और पुरोहित वर्ग के वर्चस्व ने आम जनता में असंतोष उत्पन्न किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इतिहासकार कार्ल जैस्पर्स ने इस काल को ‘Axial Age’ (धुरी काल) कहा है, जब विश्व के विभिन्न भागों में स्वतंत्र रूप से महान दार्शनिक एवं धार्मिक आंदोलन प्रारंभ हुए। भारत में इस काल में लगभग 62 दार्शनिक संप्रदायों का उल्लेख बौद्ध ग्रंथों में मिलता है।
51. सूची-1 तथा सूची-II को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए
कूट से सही चुनिए :
सूची-I (उ.प्र. के प्राचीन जनपद) सूची-II (राजधानी)
A. कुरु – 1. साकेत
B. पांचाल – 2. कौशाम्बी
C. कोशल – 3. अहिच्छत्र
D. वत्स -4. इंद्रप्रस्थ
कूट :
A B C D
सूची-I (उ.प्र. के प्राचीन जनपद) सूची-II (राजधानी)
A. कुरु – 1. साकेत
B. पांचाल – 2. कौशाम्बी
C. कोशल – 3. अहिच्छत्र
D. वत्स -4. इंद्रप्रस्थ
कूट :
A B C D
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
इन महाजनपदों और उनकी राजधानियों का सही सुमेलन है — कुरु : इंद्रप्रस्थ, पांचाल : अहिच्छत्र, कोशल : साकेत, वत्स : कौशाम्बी। कोशल की एक अन्य महत्वपूर्ण नगरी श्रावस्ती भी थी, जो बाद में राजधानी बनी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी वर्तमान इलाहाबाद (प्रयागराज) के निकट स्थित थी और गंगा-यमुना के संगम क्षेत्र में व्यापार का एक प्रमुख केंद्र थी। पांचाल दो भागों — उत्तर पांचाल (अहिच्छत्र) और दक्षिण पांचाल (काम्पिल्य) — में विभाजित था।
52. सूची – I को सूची – II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही चुनिए –
सूची – I (महाजनपद) सूची – II (राजधानी)
A. मत्स्य 1. मथुरा
B. कुरु 2. पोतन
C. शूरसेन 3. विराटनगर
D. अश्मक 4. इंद्रप्रस्थ
कूट :
A B C D
सूची – I (महाजनपद) सूची – II (राजधानी)
A. मत्स्य 1. मथुरा
B. कुरु 2. पोतन
C. शूरसेन 3. विराटनगर
D. अश्मक 4. इंद्रप्रस्थ
कूट :
U.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
सही सुमेलन इस प्रकार है — मत्स्य : विराटनगर, कुरु : इंद्रप्रस्थ, शूरसेन : मथुरा, अश्मक : पोतन। मत्स्य महाजनपद वर्तमान राजस्थान के अलवर-जयपुर क्षेत्र में स्थित था और इसकी राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराट, जयपुर) थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शूरसेन महाजनपद की राजधानी मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है। अश्मक महाजनपद दक्षिण भारत में स्थित एकमात्र महाजनपद था, जो गोदावरी नदी के तट पर स्थित था।
53. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही सुमेलित नहीं है?
U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2016
उत्तर-(c)
शूरसेन की राजधानी कौशाम्बी नहीं बल्कि मथुरा थी। कौशाम्बी वत्स महाजनपद की राजधानी थी। शेष युग्म सही हैं — कम्बोज की राजधानी राजपुर/हाटक, अश्मक की पोतन/पोटिल और कोशल की श्रावस्ती (और साकेत) थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कम्बोज महाजनपद वर्तमान अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित था। यह अपने उत्कृष्ट घोड़ों के लिए प्रसिद्ध था और यहाँ के लोगों की गणना महाभारत में योद्धाओं के रूप में हुई है।
54. वर्तमान
उत्तर प्रदेश में भारत के प्राचीनतम सोलह महाजनपद में से कुल कितने महाजनपद स्थित थे?
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2021
उत्तर-(c)
छठी शताब्दी ई.पू. के सोलह महाजनपदों में से 8 वर्तमान उत्तर प्रदेश की भौगोलिक सीमाओं के अंतर्गत स्थित थे — कुरु, पांचाल, काशी, कोशल, शूरसेन, चेदि, वत्स और मल्ला। इन सोलह महाजनपदों का उल्लेख बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तरनिकाय’ में मिलता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जैन ग्रंथ ‘भगवती सूत्र’ में भी 16 महाजनपदों की सूची है, लेकिन दोनों सूचियों में कुछ नाम भिन्न हैं। अंगुत्तरनिकाय की सूची को अधिक प्रामाणिक माना जाता है क्योंकि वह ऐतिहासिक दृष्टि से अधिक सुसंगत है।
55. निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन प्राचीन भारत की श्रेणी व्यवस्था के बारे में असत्य है?
उत्तर भारत में प्रचलित थी।
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2018
उत्तर-(d)
प्राचीन भारत में श्रेणियाँ (guilds) एक ही व्यवसाय या शिल्प के लोगों के संगठन थे। ये व्यापार का संचालन, वस्तुओं की कीमत व गुणवत्ता का निर्धारण तथा सदस्यों के आचरण पर नियंत्रण रखती थीं। यह व्यवस्था केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं थी — दक्षिण भारत में भी श्रेणियों का उल्लेख मिलता है। अतः विकल्प (d) असत्य है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: श्रेणियाँ न केवल व्यापारिक संस्थाएँ थीं, बल्कि वे बैंकिंग का कार्य भी करती थीं — धन जमा करना और ऋण देना। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में श्रेणियों के विस्तृत नियम-कायदों का उल्लेख मिलता है, जो उनकी संगठित प्रकृति को दर्शाता है।
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