1. किसके सुझावों पर भारतीयों को साइमन कमीशन से बाहर रखा गया ?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
इस विषय पर इतिहासकारों और स्रोतों में थोड़ा मतभेद पाया जाता है। कई पुस्तकों एवं वेबसाइटों में यह बताया गया है कि तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इर्विन की सलाह पर ही साइमन कमीशन में किसी भारतीय सदस्य को शामिल नहीं किया गया था। वहीं दूसरी ओर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के लेखों एवं भाषणों के संकलन (Writings and Speeches, Vol-17, Part-1) में यह उल्लेख मिलता है कि भारतीयों को इस आयोग से बाहर रखने की सिफारिश उस समय के भारत सचिव लॉर्ड बिरकेनहेड ने की थी। आयोग वर्ष 1928 में भारत पहुंचा, और इसमें कोई भारतीय सदस्य न होने के कारण देशभर में इसका तीव्र विरोध हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) लॉर्ड बिरकेनहेड पहले ही यह चुनौती दे चुके थे कि भारतीय दल आपस में मिलकर कोई सर्वमान्य संविधान तैयार करके दिखाएं, जिसके उत्तर में बाद में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में ‘नेहरू रिपोर्ट’ (1928) तैयार की गई। (2) लॉर्ड इर्विन के कार्यकाल में ही दिसंबर 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ का प्रस्ताव पारित हुआ था।
2.साइमन कमीशन के आने के विरुद्ध भारतीय जन-आंदोलन क्यों हुआ ?
I.A.S. (Pre) 2013
उत्तर-(c)
साइमन कमीशन के विरुद्ध भारतीय जन-आक्रोश का मूल कारण यह था कि इस सात-सदस्यीय आयोग में एक भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया था, जबकि यह आयोग भारत के संवैधानिक भविष्य पर सिफारिशें देने वाला था। इसी कारण भारतीयों ने इसे विदेशी थोपा हुआ निर्णय मानते हुए इसका बहिष्कार किया और इसे ‘श्वेत कमीशन’ कहकर पुकारा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) 3 फरवरी 1928 को जब यह आयोग बंबई पहुंचा, उस दिन देशव्यापी हड़ताल हुई और स्थान-स्थान पर काले झंडे दिखाकर “साइमन, वापस जाओ” के नारे लगाए गए। (2) लाहौर में इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए, जिनकी कुछ सप्ताह बाद मृत्यु हो गई — इसी घटना के प्रतिशोध में भगत सिंह व साथियों ने सॉन्डर्स की हत्या की थी।
3. निम्नलिखित कथनों में से कौन साइमन कमीशन के संबंध में सही है? कथनों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
1.उसकी नियुक्ति 1919 एक्ट के क्रियान्वयन की पूछताछ के लिए की गई थी।
2.उसके अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे।
3. उसने संघीय प्रकार की सरकार के लिए संस्तुति की थी।
4. भारतीय नेताओं ने उसका विरोध किया था।
कूट :
1.उसकी नियुक्ति 1919 एक्ट के क्रियान्वयन की पूछताछ के लिए की गई थी।
2.उसके अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे।
3. उसने संघीय प्रकार की सरकार के लिए संस्तुति की थी।
4. भारतीय नेताओं ने उसका विरोध किया था।
कूट :
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(d)
भारत सरकार अधिनियम, 1919 में यह व्यवस्था थी कि अधिनियम के पारित होने के दस वर्ष बाद इसकी कार्यप्रणाली की समीक्षा हेतु एक वैधानिक आयोग नियुक्त किया जाएगा। इसी प्रावधान के तहत नवंबर 1927 में जॉन साइमन की अध्यक्षता में सात ब्रिटिश सांसदों का यह आयोग गठित हुआ, जिसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था। आयोग ने केंद्रीय विधानमंडल के पुनर्गठन में संघीय भावना अपनाने तथा सदस्यों को प्रांतीय विधानमंडलों द्वारा परोक्ष रूप से चुने जाने की सिफारिश की थी। भारतीय नेताओं ने इसके आगमन का व्यापक विरोध किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) साइमन कमीशन की रिपोर्ट मई 1930 में प्रकाशित हुई, जिसके सुझावों पर विचार हेतु ही गोलमेज सम्मेलनों (1930-32) का आयोजन लंदन में किया गया। (2) आयोग के विरोध के दौरान ही कांग्रेस के विभिन्न दलों ने मिलकर भारत के लिए स्वयं का संविधान प्रस्तुत करने हेतु दिसंबर 1928 में ‘नेहरू रिपोर्ट’ तैयार की।
4.1928 ई. में साइमन कमीशन भारत में किस उद्देश्य से आया?
U.P. P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(a)
साइमन कमीशन का गठन मुख्यतः भारत सरकार अधिनियम, 1919 (मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) के क्रियान्वयन की समीक्षा करने तथा यह आकलन करने के उद्देश्य से किया गया था कि भारत उत्तरदायी शासन की दिशा में कितनी प्रगति करने योग्य है। इस प्रकार इसका कार्यक्षेत्र मूलतः प्रशासनिक एवं संवैधानिक सुधारों पर विचार करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) मूल योजना के अनुसार यह समीक्षा 1929 में होनी थी, परंतु ब्रिटेन की कंजरवेटिव सरकार ने इसे दो वर्ष पहले ही नवंबर 1927 में नियुक्त कर दिया, ताकि अगला चुनाव होने से पहले इसकी रिपोर्ट आ सके। (2) आयोग के साथ काम करने हेतु भारत में केंद्रीय एवं प्रांतीय स्तर पर भारतीय सदस्यों वाली सहयोगी समितियां भी बनाई गई थीं, जिनकी अध्यक्षता सर तेज बहादुर सप्रू ने की थी।
5. भारतीयों ने साइमन कमीशन का बहिष्कार किया था क्योंकि.
U.P.P.C.S. (Pre) 2004
U.P.P.C.S. (Mains) 2003
I.A.S. (Pre) 1998
U.P.P.C.S. (Mains) 2003
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
साइमन कमीशन के बहिष्कार का प्रमुख कारण यह था कि इसके सभी सात सदस्य ब्रिटिश संसद के अंग्रेज सदस्य थे और भारत के संवैधानिक भविष्य से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण समिति में एक भी भारतीय प्रतिनिधि को सम्मिलित नहीं किया गया था। इसे भारतीय राजनीतिक दलों ने अपने आत्मसम्मान और स्वशासन के अधिकार पर सीधा प्रहार माना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) मुस्लिम लीग का एक धड़ा, जिसका नेतृत्व मोहम्मद अली जिन्ना कर रहे थे, उसने भी कांग्रेस के साथ मिलकर आयोग का बहिष्कार किया था, जबकि मुहम्मद शफी के नेतृत्व वाला दूसरा धड़ा आयोग के साथ सहयोग के पक्ष में था। (2) पंजाब में लाला लाजपत राय के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन पर लाठीचार्ज हुआ, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनका निधन हो गया।
6. निम्नलिखित में से साइमन कमीशन का कौन एक सदस्य उदारवादी दल का था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(a)
साइमन कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन साइमन ब्रिटेन के उदारवादी दल (Liberal Party) से संबंधित थे। इसके विपरीत, कमीशन में शामिल क्लीमेंट एटली श्रमिक दल (Labour Party) के सदस्य थे, जो आगे चलकर 1945 से 1951 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने और जिनके कार्यकाल में ही 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) सात सदस्यीय इस आयोग में कंजरवेटिव, लिबरल और लेबर — तीनों प्रमुख ब्रिटिश दलों के प्रतिनिधि शामिल थे, ताकि यह एक सर्वदलीय (all-party) ब्रिटिश संसदीय आयोग प्रतीत हो। (2) आगे चलकर क्लीमेंट एटली की लेबर सरकार ने ही भारत की स्वतंत्रता और विभाजन से संबंधित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 पारित कराया।
7.साइमन कमीशन भारत किस वर्ष आया ?
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
38th B.P.S.C. (Pre) 1992
38th B.P.S.C. (Pre) 1992
उत्तर-(b)
साइमन कमीशन की नियुक्ति नवंबर 1927 में हुई थी, परंतु यह भारत वर्ष 1928 में पहुंचा। ज्ञातव्य है कि भारत सरकार अधिनियम, 1919 में प्रावधान था कि दस वर्ष बाद इसकी समीक्षा हेतु एक संवैधानिक आयोग बनाया जाएगा, परंतु ब्रिटेन की कंजरवेटिव सरकार ने समय से दो वर्ष पूर्व ही इस आयोग का गठन कर दिया। जॉन साइमन की अध्यक्षता में बने इस सात-सदस्यीय आयोग में कोई भारतीय सदस्य न होने के कारण भारतीयों ने इसका व्यापक विरोध किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) साइमन कमीशन 3 फरवरी 1928 को बंबई पहुंचा, और उसी दिन देशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया गया। (2) आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई 1930 में प्रकाशित हुई, जिसमें प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy) को समाप्त कर वहां उत्तरदायी शासन स्थापित करने की सिफारिश की गई थी।
8. साइमन कमीशन की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?
I.A.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
दिए गए विकल्पों में से सही कथन यह है कि साइमन कमीशन ने प्रांतों में चली आ रही द्वैध शासन प्रणाली (Dyarchy) को समाप्त कर वहां पूर्ण उत्तरदायी सरकार (responsible government) स्थापित करने की सिफारिश की थी। शेष विकल्पों में वर्णित बातें आयोग की वास्तविक सिफारिशों से मेल नहीं खातीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) द्वैध शासन प्रणाली मूलतः मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919 के तहत प्रांतों में लागू की गई थी, जिसमें विषयों को ‘आरक्षित’ और ‘हस्तांतरित’ श्रेणियों में बांटा गया था। (2) साइमन कमीशन की सिफारिशों के आधार पर ही आगे चलकर भारत सरकार अधिनियम, 1935 का प्रारूप तैयार हुआ, जिसमें प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर पूर्ण स्वायत्तता दी गई।
9. साइमन आयोग नियुक्त किया गया था-
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(b)
साइमन आयोग की औपचारिक नियुक्ति नवंबर 1927 में हुई थी, हालांकि यह भारत की धरती पर अगले वर्ष यानी फरवरी 1928 में पहुंचा। भारत सरकार अधिनियम, 1919 में दस वर्ष बाद समीक्षा का प्रावधान होने के बावजूद ब्रिटेन की कंजरवेटिव सरकार ने इसे समय से पहले ही गठित कर दिया, जिसके पीछे राजनीतिक कारण यह था कि आगामी ब्रिटिश आम चुनाव से पहले रिपोर्ट तैयार हो जाए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इस आयोग के अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे, इसलिए इसे ‘साइमन कमीशन’ के नाम से जाना गया, जबकि इसका औपचारिक नाम ‘भारतीय सांविधिक आयोग’ (Indian Statutory Commission) था। (2) आयोग में कुल सात सदस्य थे, जिनमें से कोई भी भारतीय नहीं था, जिस कारण इसे भारत में ‘श्वेत कमीशन’ (All-White Commission) कहकर बहिष्कृत किया गया।
10.नीचे दो वक्तव्य कथन (a) एवं कारण (R) दिए गए हैं-
कथन (a) : कांग्रेस ने साइमन आयोग का बहिष्कार किया था।
कारण (R) : साइमन आयोग में एक भी सदस्य भारतीय नहीं था।
उपर्युक्त के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन एक सही है?
कथन (a) : कांग्रेस ने साइमन आयोग का बहिष्कार किया था।
कारण (R) : साइमन आयोग में एक भी सदस्य भारतीय नहीं था।
उपर्युक्त के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन एक सही है?
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Pre) 2010
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Pre) 2010
उत्तर-(a)
यह कथन पूर्णतः सत्य है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने साइमन आयोग का बहिष्कार किया था, और इसका सही कारण यही था कि सात सदस्यीय इस आयोग में एक भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया था। चूंकि कारण (R), कथन (A) की पूर्ण और सटीक व्याख्या प्रस्तुत करता है, अतः दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) कांग्रेस के अतिरिक्त मुस्लिम लीग के जिन्ना गुट, हिंदू महासभा और अन्य कई राजनीतिक दलों ने भी आयोग के बहिष्कार में कांग्रेस का साथ दिया था, जिससे यह एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया। (2) इसी बहिष्कार आंदोलन के दौरान दिसंबर 1928 में कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस ने सरकार को एक वर्ष के भीतर डोमिनियन स्टेटस देने हेतु चेतावनी दी, अन्यथा पूर्ण स्वराज की मांग किए जाने की घोषणा की।
11. निम्नलिखित में से किसने सर्वप्रथम भारत के लिए औपनिवेशिक स्वराज्य की मांग की थी?
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(c)
औपनिवेशिक स्वराज्य (डोमिनियन स्टेट्स) की मांग सर्वप्रथम मोतीलाल नेहरू ने मार्च 1925 में केंद्रीय विधानमंडल में संविधान-निर्माण हेतु एक प्रतिनिधिक सम्मेलन बुलाने के प्रस्ताव के रूप में रखी थी। चूंकि विकल्प (b) में उनके साथ गोविंद वल्लभ पंत का नाम गलत जोड़ा गया है, अतः सही उत्तर विकल्प (c) बनता है, क्योंकि सर तेजबहादुर सप्रू और एम.आर. जयकर मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता वाली उसी समिति के सदस्य थे, जिसने ‘नेहरू रिपोर्ट’ में डोमिनियन स्टेट्स की मांग को औपचारिक रूप दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) सर तेजबहादुर सप्रू वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के साथ सहयोग हेतु गठित ‘भारतीय केंद्रीय समिति’ (Indian Central Committee) के भी अध्यक्ष थे। (2) मोतीलाल नेहरू ने 1923 में स्वराज पार्टी की स्थापना भी सी.आर. दास के साथ मिलकर की थी, जिसका उद्देश्य विधान परिषदों में प्रवेश कर सरकार की नीतियों का विरोध करना था।
12. ‘नेहरू रिपोर्ट’ तैयार की थी-
Uttarakhand U.D.A. / L.D.A. (Pre) 2007
उत्तर-(a)
‘नेहरू रिपोर्ट’ (1928) साइमन कमीशन (1927) के जवाब में तैयार की गई थी, जिसमें भारत के लिए एक संभावित डोमिनियन संविधान का खाका प्रस्तुत किया गया था। इस सर्वदलीय समिति की अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू ने की थी, जबकि उनके पुत्र जवाहरलाल नेहरू इसके सचिव के रूप में कार्यरत थे। कुल नौ सदस्यों वाली इस समिति में दो मुस्लिम सदस्य भी शामिल थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) यह रिपोर्ट अगस्त 1928 में लखनऊ में आयोजित सर्वदलीय सम्मेलन में प्रस्तुत की गई थी और इसे ब्रिटिश शासनकाल में भारतीयों द्वारा तैयार किया गया पहला महत्वपूर्ण संविधान-प्रारूप माना जाता है। (2) इस रिपोर्ट को मुस्लिम लीग के जिन्ना गुट ने अस्वीकार कर दिया, जिसके फलस्वरूप मार्च 1929 में जिन्ना ने अपना ’14 सूत्रीय प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया।
13. ‘पंजाब केसरी’ की उपाधि किसको दी गई थी?
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2007
उत्तर-(c)
लाला लाजपत राय (1865-1928) पंजाब के एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई। उनके अदम्य साहस और जुझारू नेतृत्व के कारण उन्हें ‘पंजाब केसरी’ (पंजाब का शेर) की उपाधि से सम्मानित किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) वे लाल-बाल-पाल त्रयी के सदस्य थे, जिसमें बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल भी शामिल थे, और ये तीनों गरम दल (उग्रवादी) विचारधारा के प्रमुख नेता माने जाते थे। (2) 1928 में लाहौर में साइमन कमीशन विरोधी जुलूस का नेतृत्व करते समय पुलिस लाठीचार्ज में वे गंभीर रूप से घायल हुए और कुछ सप्ताह बाद उनका निधन हो गया, जिसके प्रतिशोध में भगत सिंह व उनके साथियों ने सॉन्डर्स की हत्या की थी।
14. मुस्लिम लीग के निम्नलिखित में से किस अधिवेशन में एम.ए. जिन्ना ने अपना 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(c)
28 मार्च 1929 को दिल्ली में आयोजित मुस्लिम लीग के अधिवेशन में मोहम्मद अली जिन्ना ने नेहरू रिपोर्ट (1928) के विरोधस्वरूप अपना प्रसिद्ध 14 सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। नेहरू रिपोर्ट में जहां संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र की वकालत की गई थी, वहीं जिन्ना के प्रस्ताव में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की मांग रखी गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) जिन्ना के 14 सूत्रों में केंद्र में अवशिष्ट शक्तियां (residuary powers) प्रांतों को सौंपने, पंजाब व बंगाल में मुस्लिम बहुसंख्यक बनाए रखने तथा केंद्रीय विधानमंडल में मुसलमानों के लिए एक-तिहाई प्रतिनिधित्व की मांग प्रमुख थी। (2) यही 14 सूत्र आगे चलकर भारत-विभाजन की राजनीतिक मांग की वैचारिक नींव बने और बाद में 1940 के लाहौर प्रस्ताव (पाकिस्तान प्रस्ताव) में इनकी झलक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
15. अभिकथन (a) : 1928 में लाहौर में लाला लाजपत राय के नेतृत्व में साइमन कमीशन का विरोध आयोजित किया गया था।
कारण (R) : साइमन कमीशन में एक भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था।
उपर्युक्त दोनों वक्तव्यों के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है-
कारण (R) : साइमन कमीशन में एक भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था।
उपर्युक्त दोनों वक्तव्यों के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है-
M.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
यह अभिकथन पूर्णतः सही है कि 1928 में लाहौर में लाला लाजपत राय के नेतृत्व में साइमन कमीशन का विरोध-प्रदर्शन हुआ था, क्योंकि सात सदस्यीय इस आयोग में कोई भारतीय सदस्य नहीं था, जिस कारण देशभर में इसका तीव्र विरोध हुआ। चूंकि कारण (R) इस विरोध के पीछे की वास्तविक वजह को सही ढंग से स्पष्ट करता है, अतः अभिकथन और कारण दोनों सही हैं तथा (R), अभिकथन की उचित व्याख्या प्रस्तुत करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) 3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन इंग्लैंड से बंबई पहुंचा था, और उसी दिन देशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया गया था। (2) लाहौर में हुए इस लाठीचार्ज में घायल होने के कुछ सप्ताह बाद, 17 नवंबर 1928 को लाला लाजपत राय का निधन हो गया, जिसने आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन को नई दिशा दी।
16.कांग्रेस दल की उग्र शाखा ने, जिसके एक प्रमुख नेता जवाहरलाल र
नेहरू थे, ‘इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग’ की स्थापना की। वह
लीग किसके विरोध में स्थापित हुई थी ?
I.A.S. (Pre) 1995
उत्तर-(c)
कांग्रेस के भीतर युवा एवं उग्रवादी विचारधारा के नेताओं को ‘नेहरू रिपोर्ट’ में प्रस्तावित डोमिनियन स्टेट्स (औपनिवेशिक स्वराज्य) की मांग स्वीकार्य नहीं थी, क्योंकि वे तत्काल पूर्ण स्वराज्य को लक्ष्य बनाना चाहते थे। इसी असहमति के परिणामस्वरूप जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने मिलकर कांग्रेस के भीतर एक दबाव-समूह के रूप में ‘इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग’ की स्थापना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इस वैचारिक संघर्ष का समाधान दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में हुआ, जहां जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने औपचारिक रूप से ‘पूर्ण स्वराज’ को अपना लक्ष्य घोषित किया। (2) 31 दिसंबर 1929 की मध्यरात्रि को रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराकर 26 जनवरी को प्रतिवर्ष ‘स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाने का संकल्प लिया गया, जो आगे चलकर ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ के नाम से जाना गया।
17.लाला लाजपत राय घायल हुए थे-
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(a)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दिसंबर 1927 में मद्रास अधिवेशन में साइमन कमीशन के विरोध का निर्णय लिया था। 3 फरवरी 1928 को जब यह कमीशन बंबई पहुंचा, तब देशव्यापी हड़ताल हुई और “साइमन कमीशन, वापस जाओ” के नारों के साथ जुलूस निकाले गए। लाहौर में ऐसे ही एक विरोध-जुलूस का नेतृत्व करते हुए लाला लाजपत राय पुलिस के लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल हुए, और इसी बर्बर पिटाई के कारण कुछ सप्ताह बाद उनका निधन हो गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) मृत्यु से पूर्व उन्होंने कहा था कि उन पर किया गया हर प्रहार ब्रिटिश साम्राज्य के पतन की आखिरी कील साबित होगा। (2) उनकी मृत्यु के प्रतिशोध में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने मिलकर लाहौर में पुलिस अधिकारी जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या की, जिसे ‘लाजपत राय हत्याकांड का बदला’ माना जाता है।
18. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
नेहरू रिपोर्ट. की अध्यक्षता में एक कमेटी द्वारा तैयार किया गया था और इसका विषय था………
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
साइमन कमीशन को नियुक्त करने वाले तत्कालीन भारत सचिव लॉर्ड बिरकेनहेड ने यह चुनौती दी थी कि भारतीय राजनीतिक दल मिलकर ऐसा संविधान-प्रारूप नहीं बना सकते जिसे व्यापक स्वीकृति मिले। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए फरवरी, मई और अगस्त 1928 में सर्वदलीय सम्मेलन आयोजित हुए, जिनमें मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय (कुल नौ सहित) समिति ने अगस्त 1928 में भारत की संवैधानिक व्यवस्थाओं से संबंधित प्रस्तावित संविधान का प्रारूप प्रस्तुत किया, जो ‘नेहरू रिपोर्ट’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इस रिपोर्ट में सांप्रदायिक आधार पर पृथक निर्वाचन मंडल को अस्वीकार करते हुए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र, सभी वयस्कों के लिए मताधिकार, महिलाओं हेतु समान अधिकार तथा धर्म व राज्य के पृथक्करण जैसी प्रगतिशील सिफारिशें की गई थीं। (2) इस रिपोर्ट को मुस्लिम लीग के एक वर्ग (जिन्ना गुट) ने अस्वीकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप मार्च 1929 में जिन्ना ने अपना ’14 सूत्रीय प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया।
19. निम्न में से कौन वर्ष 1928 में ‘इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग’ के गठन से संबद्ध थे?
1. जवाहरलाल 2. सुभाष चंद्र बोस
3. आचार्य नरेंद्र देव 4. जयप्रकाश नारायण
अपना उत्तर दिए गए कूट से चुनिए-
कूट :
1. जवाहरलाल 2. सुभाष चंद्र बोस
3. आचार्य नरेंद्र देव 4. जयप्रकाश नारायण
अपना उत्तर दिए गए कूट से चुनिए-
कूट :
U.P. Lower (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(c)
वर्ष 1928 में ‘इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग’ की स्थापना जवाहरलाल नेहरू तथा सुभाष चंद्र बोस ने संयुक्त रूप से की थी। इस लीग का मुख्य उद्देश्य नेहरू रिपोर्ट में प्रस्तावित डोमिनियन स्टेट्स की मांग से आगे बढ़कर पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को मुखरता से उठाना था, और इसने कांग्रेस के भीतर ब्रिटिश राज के विरुद्ध प्रगतिशील व उग्रवादी शक्तियों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इस लीग के गठन के पीछे मुख्य प्रेरणा यह असंतोष था कि नेहरू रिपोर्ट (1928) में पूर्ण स्वराज की बजाय औपनिवेशिक स्वराज्य की मांग रखी गई थी, जो युवा वर्ग को अपर्याप्त लगी। (2) इसी विचारधारा का परिणाम दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में देखने को मिला, जहां जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने औपचारिक रूप से ‘पूर्ण स्वराज’ को अपना लक्ष्य घोषित किया।
20. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के काल के संदर्भ में नेहरू रिपोर्ट में निम्नलिखित में से किसकी/किस-किस की अनुशंसा की गई थी?
1. भारत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता
2. अल्पसंख्यकों हेतु आरक्षित स्थानों के लिए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र
3. संविधान में भारतीयों के लिए मौलिक अधिकारों का प्रावधान
निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए-
1. भारत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता
2. अल्पसंख्यकों हेतु आरक्षित स्थानों के लिए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र
3. संविधान में भारतीयों के लिए मौलिक अधिकारों का प्रावधान
निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए-
I.A.S. (Pre) 2011
उत्तर-चुनिए-
नेहरू रिपोर्ट (1928) में भारत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता की नहीं, बल्कि डोमिनियन स्टेट्स (औपनिवेशिक स्वराज्य के दर्जे) की मांग रखी गई थी, इसलिए कथन 1 गलत है। इसमें सांप्रदायिक आधार पर पृथक निर्वाचक मंडलों के स्थान पर अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित स्थानों सहित संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र का प्रस्ताव था, और साथ ही प्रस्तावित संविधान में भारतीयों के लिए भाषण, प्रेस, सभा एवं संगठन बनाने की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का भी प्रावधान किया गया था, अतः कथन 2 व 3 सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) यह रिपोर्ट मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता वाली नौ-सदस्यीय सर्वदलीय समिति द्वारा अगस्त 1928 में प्रस्तुत की गई थी, और इसमें सभी वयस्कों के लिए मताधिकार व महिलाओं के लिए समान अधिकार जैसी सिफारिशें भी शामिल थीं। (2) नेहरू रिपोर्ट को भारतीयों द्वारा तैयार किया गया पहला व्यापक संविधान-प्रारूप माना जाता है, जिसे मुस्लिम लीग के जिन्ना गुट ने अस्वीकार करते हुए 1929 में अपना ’14 सूत्रीय प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया था।
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