भारत का संवैधानिक विकास (1773-1947) PYQ MCQ प्रश्न | UPSC History

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1.कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट भारत वर्ष में प्रथम बार किस अधिनियम द्वारा बनाई गई थी?
(a) पिट्स इंडिया एक्ट
(b) 1909 का अधिनियम
(c) 1919 का अधिनियम
(d) 1858 का अधिनियम
(e) इनमें से कोई नहीं
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(e)
भारत में कलकत्ता सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना वास्तव में 1773 ई. के रेग्युलेटिंग एक्ट के अंतर्गत हुई थी, जो दिए गए विकल्पों में शामिल नहीं है, इसलिए सही उत्तर ‘इनमें से कोई नहीं’ है। यह न्यायालय 1774 में क्रियाशील हुआ और इसमें एक मुख्य न्यायाधीश तथा तीन अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश एलिजा इम्पे (Elijah Impey) थे, तथा इसी न्यायालय ने प्रसिद्ध नंदकुमार मुकदमे (1775) में फैसला सुनाया था, जिसे बाद में विवादास्पद माना गया।
2.निम्नलिखित में से किस अधिनियम के तहत लॉर्ड कार्नवालिस को अपनी काउंसिल के फैसलों को रद्द करने का अधिकार मिला था ?
(a) रेग्युलेटिंग एक्ट
(b) 1786 का एक्ट
(c) 1793 का चार्टर एक्ट
(d) 1813 का चार्टर एक्ट
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
1786 ई. के अधिनियम के तहत लॉर्ड कार्नवालिस को गवर्नर जनरल की परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को विशेष परिस्थितियों में रद्द करने तथा अपने स्वयं के निर्णय लागू करने का अधिकार दिया गया। यह अधिनियम इसलिए लाया गया ताकि कार्नवालिस को गवर्नर जनरल पद स्वीकार करने हेतु राजी किया जा सके, क्योंकि वे गवर्नर जनरल एवं प्रधान सेनापति दोनों पदों की शक्तियाँ एक साथ चाहते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लॉर्ड कार्नवालिस ने 1793 में बंगाल में स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) लागू किया तथा उसी वर्ष कार्नवालिस कोड के माध्यम से कार्यपालिका और न्यायपालिका को अलग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
3.किस साल रेग्युलेटिंग एक्ट पारित किया गया था?
(a) ई.स. 1757
(b) ई.स. 1765
(c) ई.स. 1773
(d) ई.स. 1793
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 ई. में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा कुप्रबंधन पर नियंत्रण स्थापित करना था। इस अधिनियम के तहत मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसियों को कलकत्ता प्रेसीडेंसी के अधीन कर दिया गया तथा बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल का पद प्रदान किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वारेन हेस्टिंग्स बंगाल के प्रथम गवर्नर जनरल (1774-1785) बने, और इसी एक्ट के तहत गवर्नर जनरल की सहायता हेतु चार सदस्यीय एक कार्यकारी परिषद (Executive Council) का भी गठन किया गया।
4.ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा स्थापित उच्चतम न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश थे-
(a) एलिजा इम्पे
(b) कोर्टनी इल्बर्ट
(c) फिलिप फ्रांसिस
(d) उपर्युक्त में से कोई भी नहीं
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(a)
1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट के तहत स्थापित कलकत्ता उच्चतम न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश एलिजा इम्पे (Elijah Impey) थे। यह न्यायालय 1774 में कार्य करना आरंभ हुआ तथा इसमें मुख्य न्यायाधीश सहित कुल चार न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: एलिजा इम्पे गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स के बचपन के मित्र तथा सहपाठी थे, जिस कारण 1775 के नंदकुमार मुकदमे में उनकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे और बाद में ब्रिटिश संसद में उनके विरुद्ध महाभियोग की कार्यवाही भी चलाई गई।
5.निम्नलिखित अधिनियमों में से प्रथम बार किसमें गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल के पद हेतु प्राविधान किया गया था ?
(a) रेग्युलेटिंग अधिनियम, 1773
(b) पिट का भारत अधिनियम, 1784
(c) 1813 का चार्टर अधिनियम
(d) 1833 का अधिनियम
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(a)
रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 ने पहली बार बंगाल के गवर्नर के पद को गवर्नर जनरल के पद में परिवर्तित कर दिया, जिसके अधीन मद्रास एवं बंबई प्रेसीडेंसियां भी आ गईं। इस पद पर पहली नियुक्ति वारेन हेस्टिंग्स की हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बाद में 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा इस पद का नाम बदलकर ‘गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया’ कर दिया गया, और लॉर्ड विलियम बैंटिक भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने।
6.रेग्युलेटिंग एक्ट पारित किया गया-
(a) 1773 में
(b) 1774 में
(c) 1785 में
(d) 1793 में
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(a)
ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी में फैले भ्रष्टाचार व कुशासन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1773 ई. में रेग्युलेटिंग एक्ट पारित किया। इसके अंतर्गत मद्रास व बंबई प्रेसीडेंसियों को कलकत्ता प्रेसीडेंसी के नियंत्रण में रखा गया तथा बंगाल के गवर्नर का पदनाम बदलकर गवर्नर जनरल कर दिया गया, जिस पर प्रथम नियुक्ति वारेन हेस्टिंग्स की हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम के तहत कंपनी के निदेशक मंडल (Court of Directors) को भारत संबंधी राजस्व, नागरिक व सैन्य मामलों की जानकारी ब्रिटिश सरकार को नियमित रूप से भेजना अनिवार्य किया गया।
7.भारत के गवर्नर जनरल को किस एक्ट के द्वारा अपनी समिति के निर्णय को अस्वीकार करने का अधिकार मिला?
(a) 1773 ई. का रेग्युलेटिंग एक्ट
(b) 1784 ई. का पिट्स इंडिया एक्ट
(c) 1786 ई. का एक्ट
(d) 1813 ई. का एक्ट
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(c)
1786 ई. के अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल को विशेष परिस्थितियों में अपनी परिषद (काउंसिल) के निर्णयों को रद्द करने तथा स्वयं के निर्णय लागू करने का अधिकार प्राप्त हुआ। यह प्रावधान विशेष रूप से लॉर्ड कार्नवालिस को गवर्नर जनरल पद स्वीकारने हेतु राजी करने के लिए लाया गया था, जिन्हें गवर्नर जनरल एवं प्रधान सेनापति दोनों पदों की शक्तियाँ चाहिए थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिकार-संपन्न स्थिति में कार्नवालिस ने आगे चलकर 1793 का स्थायी बंदोबस्त तथा कार्नवालिस कोड जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार लागू किए।
8.निम्न में से किसके अंतर्गत भारत में सर्वप्रथम सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना हुई?
(a) रेग्युलेटिंग अधिनियम, 1773
(b) चार्टर अधिनियम, 1853
(d) भारतीय संविधान अधिनियम, 1950
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(a)
1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट के अंतर्गत भारत में पहली बार कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान रखा गया। यह न्यायालय 1774 में औपचारिक रूप से कार्यरत हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस न्यायालय का क्षेत्राधिकार मुख्यतः कलकत्ता शहर तथा उसके निवासियों तक सीमित था, और इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश एलिजा इम्पे नियुक्त हुए थे।
9.रेग्युलेटिंग एक्ट किस वर्ष पारित किया गया था?
(a) 1753
(b) 1757
(c) 1764
(d) 1773
M.P.P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
1773 ई. में ब्रिटिश संसद ने रेग्युलेटिंग एक्ट पारित कर ईस्ट इंडिया कंपनी के कुशासन एवं भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इस अधिनियम से बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल का दर्जा मिला और मद्रास-बंबई प्रेसीडेंसियां उसके अधीन कर दी गईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम के तहत ही भारत में पहली बार कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना (1774) की गई, जो भारत में ब्रिटिश न्यायिक व्यवस्था की नींव मानी जाती है।
10.लोक सेवाओं की परीक्षा इंग्लैंड तथा भारत में एक साथ करने की संस्तुति निम्न में किसके द्वारा की गई थी?
(a) एचिसन आयोग द्वारा
(b) हॉबहाउस आयोग द्वारा
(d) लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Mains) 2010
उत्तर-(c)
1918 में प्रस्तुत मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि प्रशासनिक सेवाओं में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाने हेतु सिविल सेवा परीक्षा इंग्लैंड और भारत दोनों जगह एक साथ आयोजित होनी चाहिए, तथा उच्च सिविल सेवा के एक-तिहाई पद भारतीयों के लिए आरक्षित रखे जाएं। इसी संस्तुति के फलस्वरूप वर्ष 1922 से सिविल सेवा परीक्षा भारत और इंग्लैंड में समानांतर रूप से आयोजित होने लगी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इससे पूर्व 1887 में एचिसन आयोग ने इसके विपरीत सुझाव दिया था कि परीक्षा दोनों देशों में एक साथ नहीं होनी चाहिए, तथा मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के आधार पर ही भारत सरकार अधिनियम, 1919 पारित हुआ, जिसने प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy) की व्यवस्था लागू की।
11. भारतीय व्यापार में ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार समाप्त किया गया-
(a) 1793 में
(b) 1803 में
(c) 1813 में
(d) 1833 में
I.A.S. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
1813 ई. के चार्टर एक्ट के माध्यम से ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत के साथ व्यापार पर एकाधिकार समाप्त कर दिया गया, हालांकि चीन के साथ व्यापार तथा चाय के व्यापार में उसका एकाधिकार बना रहा। इसी अधिनियम ने कंपनी के भारतीय क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों के प्रवेश की अनुमति भी प्रदान की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी चार्टर एक्ट में पहली बार भारतीयों की शिक्षा हेतु प्रतिवर्ष एक लाख रुपये व्यय करने का प्रावधान भी जोड़ा गया, जो भारत में आधुनिक शिक्षा के प्रसार की दिशा में सरकार का प्रारंभिक कदम माना जाता है।
12. चार्टर अधिनियम, 1813 भारत के लिए महत्वपूर्ण समझे जाने का निम्नलिखित में से कौन-सा एक कारण है?
(a) इसने ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत में प्रचार पर रोक लगा दी।
(b) इसने भारत के औद्योगीकरण पर जोर दिया।
(c) इसके द्वारा भारतीयों की शिक्षा के लिए वित्तीय प्रावधान किया गया।
(d) इसके द्वारा भारत में रेल तंत्र विकसित करने के लिए स्वीकृति दी गई।
U.P.P.C.S (Mains) 2016
उत्तर-(c)
चार्टर अधिनियम, 1813 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि विद्वान भारतीयों को प्रोत्साहित करने, साहित्य के सुधार व पुनरुत्थान तथा विज्ञान की उन्नति हेतु प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की राशि निर्धारित की जाए। इसी प्रावधान के आधार पर सरकार ने जनता में शिक्षा के प्रसार की जिम्मेदारी लेनी आरंभ की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी का भारतीय व्यापार पर एकाधिकार भी समाप्त कर दिया तथा ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म-प्रचार की अनुमति भी प्रदान की, जो पूर्व में प्रतिबंधित थी।
13. 1793 में एक विनियम द्वारा जिला कलेक्टर को उसकी न्यायिक
शक्तियों से वंचित कर दिया गया और केवल संग्राहक अभिकर्ता
बना दिया गया। ऐसे विनियमन का कारण क्या था?
(a) लॉर्ड कार्नवालिस ने महसूस किया कि जिला कलेक्टर की राजस्व संग्रहण की दक्षता, अन्य कार्यों के बोझ न रहने से, बहुत अधिक बढ़ जाएगी।
(b) लॉर्ड कार्नवालिस ने महसूस किया कि न्यायिक शक्ति अनिवार्य रूप से यूरोपियनों के हाथ में होनी चाहिए, जबकि जिलों में राजस्व संग्रहण का कार्य भारतीयों को सौंपा जा सकता है।
(c) लॉर्ड कार्नवालिस जिला कलेक्टर में संकेंद्रित इतनी विस्तृत शक्ति से सतर्क हो गया था और महसूस करता था कि एक व्यक्ति में इतनी परम शक्ति का होना अवांछनीय है।
(d) न्यायिक कार्य के लिए भारत का गहरा ज्ञान और कानून में अच्छा प्रशिक्षण होना आवश्यक था और लॉर्ड कार्नवालिस महसूस करता था कि जिला कलेक्टर को केवल राजस्व संग्राहक होना चाहिए।
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(c)
लॉर्ड कार्नवालिस एक ही व्यक्ति के हाथों में अत्यधिक शक्तियों के संकेंद्रण को अनुचित मानता था, इसलिए उसने जिला कलेक्टर से न्यायिक शक्तियां छीनकर उसे केवल राजस्व संग्रहण तक सीमित कर दिया और शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत को व्यावहारिक रूप दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए कार्नवालिस ने 1793 में ही कार्नवालिस कोड लागू किया, जिसके तहत जिला स्तर पर दीवानी अदालतें स्थापित की गईं तथा न्यायिक कार्यों के लिए पृथक जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई, जो भारत में आधुनिक न्यायिक प्रशासन की एक महत्वपूर्ण नींव मानी जाती है।
14. चार्टर एक्ट, 1833 में निम्न प्रावधानों में से कौन-सा एक नहीं था ?
(a) ईस्ट इंडिया कंपनी की व्यापारिक गतिविधियों का समापन
(b) काउंसिल में परम सत्ताधिकारी के पदनाम को भारत के गवर्नर जनरल के पदनाम बदलना
(c) काउंसिल में गवर्नर जनरल को विधिकर्ता की सभी शक्तियां प्रदान करना
(d) गवर्नर जनरल की काउंसिल में विधि सदस्य के रूप में एक भारतीय की नियुक्ति
I.A.S. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
चार्टर एक्ट, 1833 द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के समस्त वाणिज्यिक अधिकार समाप्त कर दिए गए और उसे केवल राजनैतिक कार्यों तक सीमित कर दिया गया। इस अधिनियम से बंगाल का गवर्नर जनरल पूरे भारत का गवर्नर जनरल बन गया तथा उसकी परिषद में विधि निर्माण हेतु एक चौथा सदस्य—विधि सदस्य—जोड़ा गया, परंतु यह पद किसी भारतीय के लिए नहीं बल्कि एक अंग्रेज के लिए आरक्षित था, अतः विकल्प (d) असत्य है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस पद पर नियुक्त होने वाले प्रथम विधि सदस्य लॉर्ड मैकाले थे, जिनकी अध्यक्षता में गठित विधि आयोग ने भारतीय दंड संहिता (IPC) का प्रारूप तैयार किया, जो 1860 में लागू हुई।
15. किस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिश संसद ने चाय और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया था?
(a) 1813 का चार्टर अधिनियम
(b) 1833 का चार्टर अधिनियम
(c) 1853 का चार्टर अधिनियम
(d) 1873 का चार्टर अधिनियम
U.P. R.O/A.R.O. (Mains) 2018
उत्तर-(a)
1813 के चार्टर अधिनियम द्वारा ब्रिटिश संसद ने ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय व्यापार पर एकाधिकार समाप्त कर दिया, जबकि चीन के साथ व्यापार तथा चाय व्यापार का एकाधिकार कंपनी के पास बना रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कंपनी का चीन व्यापार पर शेष बचा यह एकाधिकार भी अगले चार्टर अधिनियम, 1833 द्वारा पूर्णतः समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद कंपनी पूरी तरह से एक प्रशासनिक इकाई के रूप में कार्य करने लगी और उसका व्यापारिक स्वरूप समाप्त हो गया।
16. निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में व्यापारिक एकाधिकार समाप्त किया गया?
(a) 1793 का चार्टर एक्ट
(b) 1813 का चार्टर एक्ट
(c) 1833 का चार्टर एक्ट
(d) 1853 का चार्टर एक्ट
(e) इनमें से कोई नहीं
Chhattisgarh P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
1813 के चार्टर एक्ट के अंतर्गत ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत के साथ व्यापार संबंधी एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया, जिससे अन्य ब्रिटिश व्यापारियों के लिए भारतीय व्यापार के द्वार खुल गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम की अवधि 20 वर्ष निर्धारित की गई थी, और इसमें प्रत्येक 20 वर्ष बाद कंपनी के चार्टर की समीक्षा व नवीनीकरण की व्यवस्था भी रखी गई, जिसके तहत आगे चलकर 1833, 1853 आदि के चार्टर एक्ट पारित हुए।
17. किस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी का चाय व शक्कर के व्यापार का एकाधिकार समाप्त किया?
(a) रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773
(c) चार्टर एक्ट, 1813
(d) चार्टर एक्ट, 1833
M.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-बोनस अंक
यह प्रश्न त्रुटिपूर्ण माना गया, क्योंकि 1813 का चार्टर एक्ट कंपनी का चाय एवं चीन व्यापार पर एकाधिकार बनाए रखता है, न कि शक्कर पर—यदि प्रश्न में शक्कर के स्थान पर चीन शब्द होता तो विकल्प (d) सही सिद्ध होता। इसी त्रुटि को स्वीकार करते हुए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने सभी अभ्यर्थियों को बोनस अंक प्रदान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कंपनी का चाय व चीन व्यापार पर शेष बचा एकाधिकार अंततः 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा पूर्णतः समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद कंपनी एक विशुद्ध प्रशासनिक संस्था बनकर रह गई।
18.निम्न में से किस एक वर्ष से ब्रिटिश सरकार अंतिम रूप से भारत एवं इंग्लैंड में एक ही समय साथ-साथ इंडियन सिविल सर्विसेज (आई.सी.एस.) की परीक्षा आयोजित करने हेतु सहमत हुई थी ?
(a) 1922
(b) 1923
(c) 1924
(d) 1925
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(a)
वर्ष 1922 से भारतीय सिविल सेवा (आई.सी.एस.) की परीक्षा भारत में भी आयोजित होने लगी, जबकि इससे पूर्व यह परीक्षा केवल इंग्लैंड में ही आयोजित की जाती थी। इसी क्रम में आगे 1926 में भारत में एक लोक सेवा आयोग का गठन हुआ, जिसका स्थान 1935 के अधिनियम के तहत संघीय लोक सेवा आयोग ने ले लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वर्ष 1937 से संघीय लोक सेवा आयोग ने ब्रिटिश लोक सेवा आयोग से पूर्णतः स्वतंत्र होकर परीक्षा आयोजित करनी शुरू की, तथा 1950 में संविधान लागू होने के बाद इसका नाम बदलकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) कर दिया गया।
19. नागरिक सेवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को सिद्धांततः स्वीकार किया गया-
(a) 1833 में
(b) 1853 में
(c) 1858 में
(d) 1882 में
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
1853 ई. के चार्टर एक्ट में यह व्यवस्था की गई कि नियंत्रण बोर्ड के पदाधिकारियों का वेतन सरकार निर्धारित करेगी परंतु उसका भुगतान कंपनी के कोष से होगा, तथा निदेशकों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी गई, जिनमें से 6 सदस्य क्राउन द्वारा मनोनीत किए जाने थे। इसी अधिनियम में पहली बार यह सिद्धांत स्वीकार किया गया कि सिविल सेवाओं में नियुक्तियां बिना किसी भेदभाव के प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से की जाएंगी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी सिद्धांत के क्रियान्वयन हेतु 1854 में मैकाले समिति का गठन किया गया, जिसकी सिफारिशों के आधार पर 1855 से इंग्लैंड में सिविल सेवा हेतु प्रतियोगी परीक्षाएं आरंभ हुईं।
20. सूची-I (भारत की उपनिवेशीय सरकार के अधिनियम) को सूची-II
(प्रावधान) के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-
सूची-I (भारत की उपनिवेशीय सरकार के अधिनियम) सूची-II (प्रावधान)
A. चार्टर एक्ट, 1813 1. भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को पूरी तरह विनियमित करने के लिए ब्रिटेन में एक बोर्ड ऑफ कंट्रोल स्थापित करना
B. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 2.भारत में कंपनी का व्यापार एकाधिकार समाप्त कर दिया गया
C. एक्ट ऑफ 1858 3. शासन का अधिकार ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया गया
D. पिट्स इंडिया एक्ट 4. कंपनी के निदेशकों को कंपनी के प्रबंध से संबंधित सभी पत्राचार और दस्तावेज ब्रिटिश सरकार को प्रस्तुत करने को कहा गया
कूट :
(a) A-2, B-4, C-3, D-1
(b) A-1, B-3, C-4, D-2
(c) A-2, B-3, C-4, D-1
(d) A-1, B-4, C-3, D-2
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(a)
1813 के चार्टर एक्ट द्वारा कंपनी का भारतीय व्यापार पर एकाधिकार समाप्त कर दिया गया, हालांकि उसका चीन तथा चाय व्यापार पर एकाधिकार बना रहा। रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 के अंतर्गत कंपनी के निदेशकों को प्रबंधन संबंधी सभी दस्तावेज ब्रिटिश सरकार को सौंपने की बाध्यता दी गई, जबकि एक्ट ऑफ 1858 ने भारत का शासन कंपनी से लेकर सीधे ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया। पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ने इंग्लैंड में बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना कर कंपनी की नीतियों पर नियंत्रण स्थापित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1858 का यह अधिनियम आधिकारिक रूप से ‘गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1858’ कहलाता है, तथा इसके बाद लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वायसराय बने।
21.ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने चाय के व्यापारिक एकाधिकार को खो दिया-
(a) 1793 के चार्टर एक्ट द्वारा
(b) 1813 के चार्टर एक्ट द्वारा
(c) 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा
(d) 1853 के चार्टर एक्ट द्वारा
U.P.P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
1813 के चार्टर एक्ट में कंपनी का भारतीय व्यापार पर एकाधिकार तो समाप्त कर दिया गया था, परंतु चीन एवं चाय व्यापार पर उसका एकाधिकार अगले 20 वर्षों तक बना रहा। यह शेष एकाधिकार अंततः 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा पूर्णतः समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद कंपनी का कार्य केवल ब्रिटिश सरकार की ओर से भारत का प्रशासन चलाना रह गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्लासी (1757) व बक्सर (1764) के युद्धों के बाद ब्रिटिश संसद ने समय-समय पर 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट, 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट तथा 1793, 1813, 1833 के चार्टर अधिनियम पारित कर कंपनी के प्रशासन पर क्रमिक रूप से नियंत्रण बढ़ाया।
22. भारतीय सिविल सेवा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
1. भारत सरकार अधिनियम, 1919 में भारतीय सिविल सेवा के लिए एक अलग परीक्षा का प्रावधान किया गया, जो भारत में होनी थी।
2. भारतीय सिविल सेवा में 1941 में, भारतीयों का प्रतिशत यूरोपवासियों से अधिक था।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए-
कूट :
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 ना ही 2
U.P.R.O./ A.R.O. (Pre) 2021
उत्तर-(c)
भारत सरकार अधिनियम, 1919 की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1922 से भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा भारत में भी आयोजित की जाने लगी, जो उससे पहले केवल इंग्लैंड में होती थी। 1 जनवरी, 1941 तक सिविल सेवा में कार्यरत भारतीयों की संख्या (617) यूरोपीय अधिकारियों की संख्या (585) से अधिक हो चुकी थी, अतः दोनों कथन सत्य हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह बदलाव मुख्यतः मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों (1919) की उस सिफारिश का परिणाम था, जिसमें उच्च सिविल सेवा के एक-तिहाई पद भारतीयों के लिए आरक्षित करने की बात कही गई थी।
23. निम्नलिखित में से किस कानून ने पहली बार भारत में एक क्रियाशील विधान परिषद का सृजन किया?
(a) चार्टर एक्ट, 1793
(b) चार्टर एक्ट, 1813
(c) चार्टर एक्ट, 1853
(d) चार्टर एक्ट, 1833
U.P.P.C.S. (Mains) 2016
उत्तर-(c)
1853 ई. के चार्टर एक्ट द्वारा कार्यपालिका एवं विधायी शक्तियों को पृथक करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाते हुए भारत के लिए पहली बार एक अलग, क्रियाशील विधान परिषद की स्थापना की गई, जिसमें कुल 12 सदस्य रखे जा सकते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम में सिविल सेवाओं में नियुक्ति हेतु प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को भी सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया गया, जो भारतीय प्रशासनिक ढांचे में योग्यता-आधारित चयन की दिशा में पहला औपचारिक प्रयास माना जाता है।
24. बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना किस अधिनियम के अंतर्गत की गई?
(a) रेग्युलेटिंग अधिनियम, 1773
(b) सेटलमेंट अधिनियम, 1781
(c) चार्टर अधिनियम, 1813
(d) पिट्स इंडिया अधिनियम, 1784
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(d)
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से इंग्लैंड में एक बोर्ड ऑफ कंट्रोल (नियंत्रण बोर्ड) की स्थापना की गई, जिसका मुख्य कार्य ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशक मंडल की नीतियों की निगरानी व नियंत्रण करना था। इस अधिनियम के माध्यम से कंपनी के वाणिज्यिक कार्यों को छोड़कर शेष सभी सैन्य, असैन्य एवं राजस्व संबंधी मामलों को इस बोर्ड के अधीन कर दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पिट्स इंडिया एक्ट के परिणामस्वरूप भारत में द्वैध शासन प्रणाली (Dual System of Government) की शुरुआत हुई, जिसमें कंपनी का प्रशासनिक ढांचा तथा ब्रिटिश सरकार का बोर्ड ऑफ कंट्रोल—दोनों संयुक्त रूप से नियंत्रण रखते थे।
25.सूची-I तथा सूची-II को सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-
सूची-I सूची-II
A. नियंत्रण परिषद की स्थापना 1. नियामक अधिनियम, 1773
B. सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 2. पिट का भारतीय अधिनियम, 1784
C. ईसाई मिशनरियों को भारत में कार्य करने की अनुमति 4. चार्टर अधिनियम, 1813
D. गवर्नर जनरल परिषद में कानूनी सदस्य की नियुक्ति 3. चार्टर अधिनियम, 1833
कूट :
A B C D
(a) 1 2 3 4
(b) 2 1 3 4
(c) 1 2 4 3
(d) 2 4 1 3
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
उत्तर-(b)
नियंत्रण परिषद (बोर्ड ऑफ कंट्रोल) की स्थापना पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा हुई, जबकि कलकत्ता सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 के तहत हुई थी। ईसाई मिशनरियों को भारत में प्रवेश एवं कार्य करने की अनुमति 1813 के चार्टर अधिनियम द्वारा दी गई, जबकि गवर्नर जनरल की परिषद में एक कानूनी सदस्य की नियुक्ति का प्रावधान 1833 के चार्टर अधिनियम में किया गया, अतः सही सुमेल विकल्प (b) है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1833 के अधिनियम के तहत नियुक्त प्रथम विधि सदस्य लॉर्ड मैकाले थे, जिन्होंने भारतीय दंड संहिता का प्रारूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
26. निम्नलिखित में से किस अधिनियम के द्वारा अंग्रेजों ने भारत में सर्वप्रथम परोक्ष निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत की ?
(a) 1909
(b) 1861
(c) 1867
(d) 1892
U.P.P.C.S (Mains) 2016
उत्तर-(d)
भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 के माध्यम से अंग्रेजों ने भारत में पहली बार अप्रत्यक्ष (परोक्ष) निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत की, हालांकि इसे ‘निर्वाचन’ के बजाय औपचारिक रूप से ‘सिफारिश’ (Recommendation) की संज्ञा दी गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम के तहत विधान परिषदों के सदस्यों को बजट पर बहस करने तथा सरकार से सार्वजनिक हित के मुद्दों पर सवाल पूछने का सीमित अधिकार भी पहली बार प्राप्त हुआ।
27. बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता में उच्च न्यायालयों की स्थापना कब हुई ?
(a) 1861
(b) 1851
(c) 1871
(d) 1881
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Pre) 2010
उत्तर-(a)
ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861 के आधार पर बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता में उच्च न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 1862 में ये तीनों उच्च न्यायालय वास्तविक रूप से अस्तित्व में आए, इसलिए निकटतम सही उत्तर 1861 है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम, 1861 द्वारा गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में विधायी कार्यों हेतु अतिरिक्त सदस्यों को शामिल करने तथा गवर्नर जनरल को आपातकालीन स्थिति में अध्यादेश जारी करने की शक्ति भी प्रदान की गई थी।
28. निम्नांकित में से किस एक्ट के द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई?
(a) चार्टर एक्ट, 1833
(b) इंडियन काउंसिल्स एक्ट, 1861
(c) इंडियन काउंसिल्स एक्ट, 1892
(d) इंडियन काउंसिल्स एक्ट, 1909
U.P.P.C.S. (Pre) 1997
U.P. U.D.A. / L.D.A. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
इंडियन काउंसिल्स एक्ट, 1861 के अंतर्गत गवर्नर जनरल को आपातकालीन परिस्थितियों में अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति प्रदान की गई, परंतु ऐसे अध्यादेश अधिकतम छह माह तक ही प्रभावी रह सकते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम के माध्यम से गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में विधि निर्माण हेतु अतिरिक्त सदस्यों को शामिल करने की व्यवस्था की गई तथा बॉम्बे व मद्रास प्रेसीडेंसियों की विधान परिषदों को भी पुनर्स्थापित किया गया।
29. निम्नलिखित में से किस अधिनियम के अंतर्गत भारतीय विधान परिषद को बजट पर बहस करने की शक्ति प्राप्त हुई ?
(b) भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
(c) भारतीय परिषद अधिनियम, 1909
(d) भारत शासन अधिनियम, 1919
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
उत्तर-(b)
भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 के तहत विधानमंडल के सदस्यों को बजट पर अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार दिया गया, यद्यपि इस पर कोई प्रस्ताव लाने या मत-विभाजन कराने का अधिकार उन्हें नहीं था। साथ ही उन्हें सार्वजनिक हित के मामलों में छह दिन की पूर्व सूचना देकर प्रश्न पूछने का अधिकार भी प्रदान किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम के माध्यम से भारत में पहली बार अप्रत्यक्ष निर्वाचन (चुनाव) की प्रक्रिया का सूत्रपात हुआ, यद्यपि इसे औपचारिक रूप से ‘सिफारिश’ प्रणाली कहा गया था।
30. भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से क्राउन को स्थानांतरित किया गया-
(a) 1833 के चार्टर अधिनियम के अंतर्गत
(b) 1853 के चार्टर अधिनियम के अंतर्गत
(c) 1858 के भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत
(d) 1861 के भारतीय परिषद अधिनियम के अंतर्गत
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(c)
1858 के भारत सरकार अधिनियम के माध्यम से भारतीय प्रशासन का नियंत्रण ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर सीधे ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया गया। इसके अंतर्गत इंग्लैंड में एक भारत सचिव (Secretary of State for India) का पद सृजित किया गया, जिसकी सहायता हेतु 15 सदस्यीय एक मंत्रणा परिषद बनाई गई, जिसमें आठ सदस्य सरकार द्वारा तथा शेष सात कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा चुने जाने थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम के बाद लॉर्ड कैनिंग भारत के अंतिम गवर्नर जनरल सह प्रथम वायसराय नियुक्त हुए, और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स तथा बोर्ड ऑफ कंट्रोल की समस्त शक्तियां भारत सचिव को हस्तांतरित कर दी गईं।
31. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1.चार्टर एक्ट, 1853 के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय व्यापार के एकाधिकार को उत्सादित कर दिया गया।
2.गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1858 के अंतर्गत ब्रिटिश संसद ने ईस्ट इंडिया कंपनी को पूर्णतः समाप्त कर भारत में सीधा शासन करने का उत्तरदायित्व ग्रहण किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) दोनों 1 और 2
(d) न ही 1 और न ही 2
I.A.S. (Pre) 2006
उत्तर-(b)
ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय व्यापार के एकाधिकार को वास्तव में 1853 के नहीं बल्कि 1813 के चार्टर एक्ट द्वारा समाप्त किया गया था (चीन तथा चाय व्यापार को छोड़कर), अतः कथन 1 गलत है। दूसरी ओर, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1858 के अंतर्गत ब्रिटिश संसद ने कंपनी से शासन का दायित्व अपने हाथ में लेकर भारत पर सीधा शासन स्थापित किया, इसलिए कथन 2 सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1853 का चार्टर एक्ट मुख्यतः इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसने पहली बार भारत में एक पृथक विधान परिषद की स्थापना की तथा सिविल सेवाओं में प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली के सिद्धांत को स्वीकार किया।
32. भारत में मीडिया को नियंत्रित करने के लिए एक्ट कब पारित किए गए थे?
(a) 1835, 1867, 1878, 1908
(b) 1854, 1864, 1872, 1910
(c) 1854, 1872, 1908, 1910
(d) 1867, 1908, 1910, 1919
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
प्रेस पर दमनकारी नीतियों की शुरुआत करते हुए सबसे पहले 1835 ई. में प्रेस एक्ट लागू किया गया, इसके बाद 1867 में प्रेस और पुस्तकों के पंजीकरण संबंधी अधिनियम पारित हुआ। गवर्नर जनरल लॉर्ड लिटन ने 1878 में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट के माध्यम से सरकार-विरोधी सामग्री प्रकाशित करने वाले पत्रों पर रोक लगाई, तथा लॉर्ड मिंटो ने 1908 में एक और प्रेस नियंत्रण अधिनियम पारित किया, जिसके तहत सरकार को भड़काऊ प्रकाशनों को जब्त करने का अधिकार मिला।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट, 1878 को ‘गैगिंग एक्ट’ के नाम से भी जाना जाता है और इसे लॉर्ड लिटन के उत्तराधिकारी लॉर्ड रिपन ने 1882 में निरस्त कर दिया था।
33. ब्रिटिश इंडिया के निम्नलिखित में से किस एक अधिनियम ने सामूहिक कार्यचालन के स्थान पर "विभाग" या विभागीय पद्धति द्वारा वायसराय की कार्यकारी परिषद पर उनके प्राधिकार को और बल प्रदान किया ?
(a) इंडियन काउंसिल एक्ट, 1861
(b) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1858
(c) इंडियन काउंसिल एक्ट, 1892
(d) इंडियन काउंसिल एक्ट, 1909
I.A.S. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
इंडियन काउंसिल एक्ट, 1861 के आधार पर वायसराय लॉर्ड कैनिंग ने विभागीय (Portfolio) प्रणाली आरंभ की, जिसके तहत परिषद के अलग-अलग सदस्यों को अलग-अलग प्रशासनिक विभाग सौंपे गए और प्रत्येक विभाग एक निश्चित व्यक्ति के अधीन कार्य करने लगा, जिससे सामूहिक निर्णय प्रणाली के बजाय व्यक्तिगत जिम्मेदारी को बल मिला।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यही विभागीय प्रणाली आगे चलकर आधुनिक मंत्रिमंडलीय व्यवस्था की नींव बनी, तथा इसी अधिनियम, 1861 द्वारा बंगाल, उत्तर-पश्चिमी प्रांत तथा पंजाब में भी विधान परिषदों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
34. निम्नलिखित में से किस वर्ष वर्तमान उत्तर प्रदेश का प्रायः संपूर्ण क्षेत्र बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग करके आगरा प्रेसीडेंसी के अधीन कर दिया गया?
(a) 1832 ई.
(b) 1833 ई.
(c) 1834 ई.
(d) 1835 ई.
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2021
उत्तर-(c)
चार्टर एक्ट, 1833 में दिए गए प्रावधान के अनुरूप 14 नवंबर, 1834 को बंगाल प्रेसीडेंसी का विभाजन करके एक नई, चौथी प्रेसीडेंसी — आगरा प्रेसीडेंसी — का गठन किया गया, जिसके अंतर्गत वर्तमान उत्तर प्रदेश का लगभग समूचा क्षेत्र आ गया। इस नई प्रेसीडेंसी का प्रथम गवर्नर सर चार्ल्स टी. मैटकॉफ (सी.टी. मैटकॉफ) को नियुक्त किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आगरा प्रेसीडेंसी को बाद में 1836 में ‘उत्तर-पश्चिमी प्रांत’ (North-Western Provinces) के रूप में पुनर्गठित किया गया, जो आगे चलकर 1902 में संयुक्त प्रांत (United Provinces) और स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश कहलाया।
35. द्वैध शासन का जनक किसे माना जाता है ?
(a) लॉर्ड क्लाइव
(b) हेक्टर
(c) लॉर्ड मैकाले
(d) सर लियोनिल कर्टिस
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
B.P.C.S. (Pre.) 2016
उत्तर-(d)
सर लियोनिल कर्टिस को द्वैध शासन (Diarchy) की अवधारणा का जनक माना जाता है, क्योंकि द्वैध शासन संबंधी उनके विचारों ने ही आगे चलकर भारत सरकार अधिनियम, 1919 का आधार तैयार किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: द्वैध शासन के अंतर्गत प्रांतीय विषयों को ‘हस्तांतरित’ (जनता के प्रतिनिधियों के अधीन) तथा ‘आरक्षित’ (गवर्नर के अधीन) दो भागों में बांटा गया था, और यह व्यवस्था व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण अंततः 1935 के अधिनियम द्वारा समाप्त कर दी गई।
36. भारत में ब्रिटेन के सभी सवैधानिक प्रयोगों में से सबसे कम समय तक चला-
(a) 1861 का इंडियन काउंसिल एक्ट
(b) 1892 का इंडियन काउंसिल एक्ट
(c) 1909 का इंडियन काउंसिल एक्ट
(d) 1919 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट
I.A.S. (Pre) 1999
उत्तर-(c)
1909 का इंडियन काउंसिल एक्ट (मार्ले-मिंटो सुधार) भारत में ब्रिटिश संवैधानिक प्रयोगों में सबसे अल्पकालिक साबित हुआ, क्योंकि जल्द ही इसे 1919 के अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया। रैम्जे मैक्डोनाल्ड ने इन सुधारों को प्रजातंत्र और नौकरशाही के बीच एक अधूरे व अल्पकालिक समझौते के रूप में वर्णित किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम के तहत मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था पहली बार लागू की गई, जिसे भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की शुरुआत माना जाता है।
37. ब्रिटिश भारत में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा की गई थी?
(a) भारतीय कौंसिल अधिनियम, 1892
(b) मिंटो-मार्ले सुधार, 1909
(c) मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919
(d) भारत सरकार अधिनियम, 1935
M.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(b)
भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 (मिंटो-मार्ले सुधार) के माध्यम से ब्रिटिश भारत में पहली बार सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था लागू की गई, जिसके अंतर्गत मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल का प्रावधान किया गया। महात्मा गांधी ने इन सुधारों की कड़ी आलोचना करते हुए इन्हें भारत के लिए अत्यंत हानिकारक बताया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम के तहत सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में नियुक्त होने वाले प्रथम भारतीय सदस्य बने।
38. निम्न में से किस अधिनियम ने भारत में पृथक् निर्वाचक मंडल का आरंभ किया?
(a) रेग्युलेटिंग अधिनियम, 1773
(b) चार्टर अधिनियम, 1833
(c) पिट इंडिया अधिनियम, 1784
(d) भारतीय परिषद अधिनियम, 1909
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(d)
भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 के अंतर्गत मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की स्थापना करके भारत में सांप्रदायिक आधार पर निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत की गई। इससे पूर्व के रेग्युलेटिंग अधिनियम, पिट्स इंडिया अधिनियम या चार्टर अधिनियम, 1833 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पृथक निर्वाचक मंडल की यह व्यवस्था आगे चलकर 1932 के सांप्रदायिक पंचाट (Communal Award) के माध्यम से दलित वर्गों तक भी विस्तारित करने का प्रयास किया गया, जिसका महात्मा गांधी ने पूना पैक्ट के जरिए विरोध किया।
39. मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड की रिपोर्ट-
(a) भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 का आधार बनी
(b) भारत सरकार अधिनियम, 1919 का आधार बनी
(c) भारत सरकार अधिनियम, 1935 का आधार बनी
(d) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का आधार बनी
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2011
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
तत्कालीन भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू तथा वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड द्वारा प्रस्तुत संयुक्त रिपोर्ट ही भारत सरकार अधिनियम, 1919 के निर्माण का आधार बनी। इस रिपोर्ट में प्रांतों में उत्तरदायी शासन की दिशा में क्रमिक प्रगति की सिफारिश की गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन (Diarchy) प्रणाली लागू की गई, जिसकी मूल अवधारणा सर लियोनिल कर्टिस के विचारों से प्रेरित थी।
40.20 अगस्त, 1917 के सुधारों की घोषणा को जाना जाता है-
(b) मॉर्ले घोषणा के नाम से
(c) मिंटो घोषणा के नाम से
(d) चेम्सफोर्ड घोषणा के नाम से
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
20 अगस्त, 1917 को हुई सुधारों की घोषणा को उस समय के भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू के नाम पर मॉन्टेग्यू घोषणा कहा जाता है, जिसमें भारत में उत्तरदायी शासन की क्रमिक स्थापना की बात कही गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी घोषणा के आधार पर आगे मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट (1918) तैयार हुई, जो अंततः भारत सरकार अधिनियम, 1919 के रूप में कानूनी स्वरूप में परिणत हुई।
41. 1919 में जब मॉन्टेग्यू – चेम्सफोर्ड अधिनियम पास हुआ था, तब इंग्लैंड का प्रधानमंत्री कौन था?
(a) लायड जॉर्ज
(b) जॉर्ज हैमिल्टन
(c) सर सैमुअल हौर
(d) लॉर्ड सैलिशबरी
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
60th To 62nd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(a)
वर्ष 1919 में जब मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियम पारित हुआ, उस समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री डेविड लॉयड जॉर्ज थे, जिन्होंने 1916 से 1922 तक इस पद पर कार्य किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लॉयड जॉर्ज के प्रधानमंत्रित्व काल में ही प्रथम विश्व युद्ध का अंत हुआ तथा भारत में रॉलेट एक्ट (1919) और जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) जैसी महत्वपूर्ण घटनाएं भी इसी अवधि में घटित हुईं।
42. भारतीय उच्चायुक्त के पद का सृजन किस अधिनियम से हुआ?
(a) भारतीय काउंसिल अधिनियम, 1909
(b) भारत सरकार अधिनियम, 1919
(c) भारत सरकार अधिनियम, 1935
(d) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत भारत सचिव के बढ़ते कार्यभार को कम करने के उद्देश्य से भारतीय उच्चायुक्त (High Commissioner) का पद सृजित किया गया, जिसका मुख्य कार्य भारत सरकार के लिए सैन्य सामग्री व अन्य वस्तुओं की खरीद, ठेके देना, व्यापारिक हितों की देखभाल तथा इंग्लैंड में अध्ययनरत भारतीय छात्रों की सहायता करना था। उच्चायुक्त एवं उसके सहायकों के वेतन का भार भारतीय राजस्व से वहन किया जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह पद इंग्लैंड में भारत की एक प्रकार की अर्ध-राजनयिक उपस्थिति के रूप में कार्य करता था, जो आगे चलकर स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रमंडल देशों के मध्य उच्चायुक्त की आधुनिक अवधारणा का आधार बना।
43. निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
कथन (a) : द्विशासन का अर्थ प्रशासन के विषयों का दो वर्गों में विभाजन था।
कारण (R) : प्रांतों में उत्तरदायी शासन के बोध का प्रवर्तन कराने का प्रयत्न किया गया था।
उपर्युक्त के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा एक सही उत्तर है?
कूट :
(a) दोनों <(a) और (R) सही हैं और (R), (a) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) दोनों (a) और (R) सही हैं, परंतु (R), (a) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 1998
उत्तर-(a)
1919 के अधिनियम द्वारा प्रांतीय प्रशासन में सबसे बड़ा परिवर्तन द्वैध शासन प्रणाली के रूप में आया, जिसके तहत प्रांतीय विषयों को आरक्षित तथा हस्तांतरित—दो श्रेणियों में बांटा गया। हस्तांतरित विषयों का दायित्व निर्वाचित विधायिका के सदस्यों को सौंपकर प्रांतों में उत्तरदायी शासन की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया, जैसा कि अधिनियम की प्रस्तावना में भी स्पष्ट किया गया था। अतः कथन तथा कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सटीक व्याख्या करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आरक्षित विषयों (जैसे पुलिस, राजस्व) पर गवर्नर व उसकी कार्यकारी परिषद का पूर्ण नियंत्रण रहता था, जिसके कारण वास्तविक उत्तरदायित्व सीमित ही रह गया।
44. निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
कथन (a) : भारत सरकार अधिनियम, 1919 के प्रवर्तन साथ शासन का ढांचा और उसकी विशेषतः एकात्मक और केंद्रीय ही रहीं।
कारण (R) : सत्ता का एक बड़ा भाग प्रांतों को प्रत्यायोजित किया गया था।
उपर्युक्त के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा एक सही उत्तर है?
कूट :
(a) (a) और (R) दोनों सही हैं और (R), (a) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (a) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (a) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
भारत सरकार अधिनियम, 1919 में विषयों को केंद्रीय सूची (47 विषय, जैसे रक्षा, विदेश नीति, मुद्रा, संचार, आयकर) तथा राज्य सूची (50 विषय, जैसे स्थानीय स्वशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, कानून-व्यवस्था) में विभाजित किया गया, जिन पर क्रमशः केंद्रीय विधानमंडल और प्रांतीय विधानमंडलों को कानून बनाने की शक्ति दी गई। चूंकि सत्ता का एक बड़ा हिस्सा प्रांतों को हस्तांतरित हुआ, इसलिए शासन-ढांचा पूर्णतः एकात्मक व केंद्रीय बना रहना असत्य है, जबकि कारण सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसके बावजूद गवर्नर जनरल के पास किसी भी सूची के विषय को दूसरी सूची में स्थानांतरित करने का विशेषाधिकार बना रहा, जिससे यह व्यवस्था पूर्ण संघीय ढांचे से भिन्न, अर्ध-संघीय प्रकृति की मानी जाती है।
45. निम्न में से भारत सरकार अधिनियम 1919 के बारे में असत्य कथन को चिह्नित कीजिए-
(a) यह अधिनियम मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है।
(b) इस अधिनियम में केंद्रीय एवं प्रांतीय विषयों को अलग कर दिया गया था।
(c) भारत सरकार अधिनियम, 1919 वर्ष 1921 में लागू हुआ।
(d) मॉन्टेग्यू भारत के राज्य सचिव एवं लॉर्ड चेम्सफोर्ड भारत के वायसराय थे।
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
भारत सरकार अधिनियम, 1919 वास्तव में मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम के नाम से जाना जाता है, न कि मार्ले-मिंटो सुधार के नाम से (जो 1909 के अधिनियम के लिए प्रयुक्त होता है), अतः विकल्प (a) असत्य है। शेष विकल्प सही हैं—इसमें केंद्रीय व प्रांतीय विषयों का पृथक्करण किया गया, यह 1921 में लागू हुआ, और उस समय मॉन्टेग्यू भारत सचिव तथा लॉर्ड चेम्सफोर्ड वायसराय थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम के तहत केंद्रीय स्तर पर द्विसदनीय विधानमंडल (केंद्रीय विधानसभा तथा राज्य परिषद) की स्थापना भी पहली बार की गई थी।
46. भारत सरकार अधिनियम, 1919 ने निम्नलिखित में से किसको स्पष्ट रूप से परिभाषित किया?
(a) न्यायपालिका एवं विधायिका (लेजिस्लेचर) के बीच शक्ति का पृथक्करण
(b) केंद्रीय एवं प्रांतीय सरकारों की अधिकारिता
(c) भारत के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एवं वायसराय की शक्तियां
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
I.A.S. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
भारत सरकार अधिनियम, 1919 ने केंद्रीय तथा प्रांतीय सरकारों के अधिकार-क्षेत्रों को विषयों की सूची बनाकर स्पष्ट रूप से परिभाषित किया, जिसमें केंद्रीय सूची तथा प्रांतीय (राज्य) सूची अलग-अलग निर्धारित की गई। इस प्रकार भारत में पहली बार शासन की शक्तियों के औपचारिक वितरण की नींव पड़ी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह विभाजन पूर्णतः संघीय व्यवस्था नहीं था, क्योंकि गवर्नर जनरल के पास दोनों सूचियों के विषयों पर हस्तक्षेप की विशेष शक्तियां सुरक्षित रखी गई थीं।
47. मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड प्रस्ताव किससे संबंधित थे?
(a) सामाजिक सुधार
(b) शैक्षिक सुधार
(c) पुलिस प्रशासन में सुधार
(d) सांविधानिक सुधार
I.A.S. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड प्रस्ताव मूलतः भारत में सांविधानिक (संवैधानिक) सुधारों से संबंधित थे, जिनका उद्देश्य भारत में उत्तरदायी शासन की दिशा में क्रमिक प्रगति सुनिश्चित करना था। इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर भारत सरकार अधिनियम, 1919 पारित हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह प्रस्ताव 20 अगस्त, 1917 की मॉन्टेग्यू घोषणा से प्रेरित था, जिसमें पहली बार आधिकारिक रूप से भारत में उत्तरदायी सरकार की स्थापना के लक्ष्य को स्वीकार किया गया।
48. भारतीय इतिहास के संदर्भ में द्वैध शासन (डायआर्की) सिद्धांत किसे निर्दिष्ट करता है ?
(a) केंद्रीय विधानमंडल का दो सदनों में विभाजन।
(b) दो सरकारों अर्थात केंद्रीय और राज्य सरकारों का शुरू किया जाना।
(c) दो शासक-समुच्चय; एक लंदन में और दूसरा दिल्ली में होना।
(d) प्रांतों में प्रत्यायोजित विषयों का दो प्रवर्गों में विभाजन
U.P.S.C. सिविल सेवा (प्रा.) परीक्षा, 2017
उत्तर-(d)
द्वैध शासन (डायआर्की) सिद्धांत का तात्पर्य प्रांतों को हस्तांतरित विषयों को दो श्रेणियों—आरक्षित तथा हस्तांतरित—में बांटने से है, न कि केंद्रीय विधानमंडल के द्विसदनीकरण या केंद्र-राज्य सरकारों की स्थापना से। इस व्यवस्था के तहत हस्तांतरित विषय निर्वाचित मंत्रियों के अधीन तथा आरक्षित विषय गवर्नर की सीधी निगरानी में रहते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: द्वैध शासन की इस अवधारणा के प्रवर्तक सर लियोनिल कर्टिस माने जाते हैं, और यह व्यवस्था 1921 से 1937 तक अधिकांश प्रांतों में लागू रही।
49. द्वैध शासन प्रणाली लागू करने वाला एक्ट आया था-
(a) 1861 में
(b) 1892 में
(c) 1909 में
(d) 1919 में
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(d)
द्वैध शासन (डायआर्की) प्रणाली को औपचारिक रूप से भारत सरकार अधिनियम, 1919 के माध्यम से प्रांतों में लागू किया गया, जिसके अंतर्गत प्रशासनिक विषयों को आरक्षित एवं हस्तांतरित वर्गों में बांटा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह प्रणाली व्यावहारिक स्तर पर कई कठिनाइयों के कारण असफल मानी गई, विशेषकर वित्तीय संसाधनों के असमान बंटवारे के कारण, और अंततः इसे भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत प्रांतीय स्वायत्तता की व्यवस्था द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया।
50.प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली (Dyarchy) किस अधिनियम के अंतर्गत लागू की गई थी?
(a) 1892
(b) 1909
(c) 1919
(d) 1935
U.P. P.C.S. (Pre) 2004
U.P. P.C.S. (Pre) 2005
उत्तर-(c)
भारत के प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली की शुरुआत मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार अर्थात् भारत सरकार अधिनियम, 1919 के तहत हुई, जिसने पहली बार ‘उत्तरदायी शासन’ शब्द का स्पष्ट प्रयोग किया। इसके अंतर्गत प्रांतीय विषयों को आरक्षित (गवर्नर की कार्यकारिणी के अधीन) तथा हस्तांतरित (निर्वाचित मंत्रियों के अधीन) दो भागों में बांटा गया। यह व्यवस्था अधिकांश प्रांतों में 1921 से 1937 तक चली, यद्यपि बंगाल में 1924-27 तथा मध्य प्रांत में 1924-26 के दौरान इसे स्थगित रखा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: द्वैध शासन प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि आरक्षित विषयों (पुलिस, राजस्व) के लिए वित्त गवर्नर के नियंत्रण में रहता था, जिससे हस्तांतरित विषयों के मंत्रियों के पास पर्याप्त संसाधनों का अभाव बना रहता था।
51.1935 के भारत सरकार अधिनियम की निम्नलिखित में से कौन- सा एक वैशिष्ट-युक्त नहीं है?
(a) केंद्र में, साथ ही साथ राज्यों में द्वैध शासन
(b) द्विसदनी विधानमंडल
(c) प्रांतीय स्वायत्तता
(d) एक अखिल भारतीय संघ
I.A.S. (Pre) 2000
उत्तर-(a)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर उन्हें स्वायत्तता प्रदान की गई, जबकि केंद्र में इसके विपरीत द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई, अतः प्रांतों में द्वैध शासन को इस अधिनियम की विशेषता बताना गलत है। इस अधिनियम की वास्तविक विशेषताओं में द्विसदनीय केंद्रीय विधानमंडल, प्रांतीय स्वायत्तता तथा एक प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ शामिल था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ में देशी रियासतों का प्रवेश स्वैच्छिक रखा गया था, और पर्याप्त संख्या में रियासतों की सहमति न मिलने के कारण यह संघीय ढांचा व्यवहार में कभी लागू नहीं हो सका।
52. भारत सरकार अधिनियम, 1935 के मुख्य तत्वों में सम्मिलित थे-
1. एक संघ का प्रावधान
2.प्रांतों को स्वायत्तता देना
3. प्रांतों में द्विशासन की प्रस्तावना
4. केंद्रीय विधायिका को संप्रभुता प्रदान करना
नीचे दी गई कूट संरचना में से ही सही उत्तर का चयन कीजिए-
कूट :
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 3 और 4
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 1998
उत्तर-(a)
1935 के अधिनियम द्वारा भारत में पहली बार एक संघात्मक शासन व्यवस्था की स्थापना का प्रावधान किया गया, जिसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांतों के साथ इच्छुक देशी रियासतों को भी शामिल करने की योजना थी, परंतु रियासतों की अनिच्छा के कारण यह संघ वास्तविकता में कभी स्थापित नहीं हो सका। साथ ही इस अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर उन्हें स्वायत्तता प्रदान की, इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसके विपरीत केंद्र में द्वैध शासन लागू किया गया तथा केंद्रीय विधायिका को पूर्ण संप्रभुता प्राप्त नहीं थी, क्योंकि गवर्नर जनरल के पास व्यापक विवेकाधीन एवं विशेष शक्तियां सुरक्षित रखी गई थीं।
53. निम्नलिखित में से किसने ब्रिटिश भारत में प्रांतीय स्वायत्तता शुरू की ?
(a) भारत सरकार अधिनियम 1919
(b) कैबिनेट मिशन
(d) भारत सरकार अधिनियम 1935
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(d)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 ने ब्रिटिश भारत के प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त करके पहली बार वास्तविक प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की, जिसके तहत प्रांतों में उत्तरदायी सरकारों का गठन निर्वाचित मंत्रिमंडलों द्वारा किया जाने लगा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम के आधार पर 1937 में प्रांतीय विधानसभाओं के लिए पहला आम चुनाव हुआ, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अधिकांश प्रांतों में बहुमत प्राप्त हुआ और वहां कांग्रेसी मंत्रिमंडल बने।
54. भारत सरकार अधिनियम, 1935 निम्नलिखित में से किसकी रिपोर्ट पर आधारित था?
(a) कैबिनेट मिशन
(b) क्रिप्स मिशन
(c) रौलेट कमीशन
(d) साइमन कमीशन
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(d)
भारत सरकार अधिनियम, 1919 में प्रत्येक दस वर्ष बाद राजनैतिक स्थिति की समीक्षा का प्रावधान था, जिसके अनुसरण में 1927 में साइमन आयोग गठित किया गया। साइमन आयोग की रिपोर्ट, सर्वदलीय सम्मेलन की नेहरू रिपोर्ट, गोलमेज सम्मेलनों की चर्चाएं तथा ब्रिटिश सरकार का श्वेत पत्र—इन सबके सम्मिलित आधार पर भारत सरकार अधिनियम, 1935 तैयार हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: साइमन आयोग में कोई भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था, जिसके विरोध में भारत में व्यापक आंदोलन हुआ और इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान लाहौर में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल होकर बाद में चल बसे।
55. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1935 के भारत सरकार अधिनियम की कुछ विशेषताएं थीं-
1. गवर्नरी प्रांतों में द्वैध शासन की समाप्ति (Abolition of Diarchy in States)
2.गवर्नरों को विधायी क्रियाओं में निषेधाधिकार (वीटो) की शक्ति तथा स्वयं द्वारा विधि बनाना
3. सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के नियम की समाप्ति
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) 1 और 2
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
I.A.S. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
1935 के अधिनियम द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन के स्थान पर पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की गई तथा आरक्षित एवं हस्तांतरित विषयों के बीच का भेद समाप्त हो गया, साथ ही गवर्नरों को विशेष परिस्थितियों में व्यक्तिगत विवेकाधीन शक्तियों तथा स्वयं अध्यादेश जारी करने का अधिकार भी दिया गया, इस प्रकार कथन 1 और 2 सही हैं। हालांकि इस अधिनियम ने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को समाप्त नहीं किया, बल्कि इसका और अधिक विस्तार करते हुए अनुसूचित जातियों, सिखों, यूरोपीयों, भारतीय-ईसाइयों तथा एंग्लो-इंडियनों को भी पृथक प्रतिनिधित्व प्रदान किया, अतः कथन 3 गलत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह विस्तारित सांप्रदायिक निर्वाचन प्रणाली मुख्यतः 1932 के सांप्रदायिक पंचाट (कम्युनल अवार्ड) पर आधारित थी।
56. भारत सरकार अधिनियम, 1935 ने समाप्त की-
(a) प्रांतीय स्वायत्तता
(b) प्रांतीय द्वैध शासन व्यवस्था
(c) भारत की संघीय संरचना
(d) जिम्मेदार केंद्रीय सरकार
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 ने 1919 के अधिनियम द्वारा प्रांतों में स्थापित द्वैध शासन व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त कर दिया और उसके स्थान पर प्रांतीय स्वायत्तता की व्यवस्था लागू की, जिसके तहत निर्वाचित प्रांतीय मंत्रिमंडल अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यद्यपि प्रांतों को अधिक स्वायत्तता मिली, फिर भी गवर्नर के पास आपातकालीन स्थिति में प्रांतीय स्वशासन को स्थगित कर विशेष शक्तियां अपने हाथ में लेने का अधिकार बना रहा, जिसका प्रयोग 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी हुआ।
57. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1935 में
1. प्रांतीय स्वशासन का उपबंध था।
2. एक संघीय न्यायालय (फेडरल कोर्ट) की स्थापना का उपबंध था।
3. केंद्र में अखिल भारत संघ का उपबंध था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
I.A.S. (Pre) 2005
उत्तर-(d)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 में एक साथ कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए—संघात्मक सरकार की स्थापना, केंद्र में द्वैध शासन, प्रांतों में स्वायत्त शासन, द्विसदनीय केंद्रीय विधानमंडल, केंद्र-प्रांत शक्ति विभाजन तथा एक संघीय (फेडरल) न्यायालय की स्थापना, इसलिए तीनों कथन सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भारत का वर्तमान संवैधानिक ढांचा काफी हद तक इसी अधिनियम पर आधारित है, तथा इसमें स्थापित फेडरल कोर्ट ही आगे चलकर स्वतंत्र भारत में सर्वोच्च न्यायालय के रूप में विकसित हुआ।
58.1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
(a) यह भारतीय संविधान का प्रमुख स्रोत है।
(b) इसके द्वारा भारत को स्वतंत्रता मिली।
(c) इसमें भारत विभाजन उल्लिखित है।
(d) इसके द्वारा रियासतें समाप्त हुईं।
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट इसलिए ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि इसकी अनेक संरचनात्मक विशेषताएं—जैसे संघीय व्यवस्था, केंद्र-राज्य शक्ति विभाजन, राज्यपाल-राज्य संबंध, तथा फेडरल कोर्ट—स्वतंत्र भारत के संविधान, 1950 में लगभग यथावत अपना ली गईं, इसलिए इसे भारतीय संविधान का सबसे प्रमुख स्रोत माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम में लगभग 321 धाराएं तथा 10 अनुसूचियां थीं, जो उस समय ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अब तक का सबसे बड़ा एवं विस्तृत विधायी दस्तावेज़ था।
59. निम्नलिखित में से किसने भारत सरकार अधिनियम, 1935 को "गुलामी का अधिकार-पत्र" कहा था?
(a) जवाहरलाल नेहरू
(b) एम.ए. जिन्ना
(c) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(d) मौलाना अबुल कलाम आजाद
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Pre) 2010
उत्तर-(a)
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत सरकार अधिनियम, 1935 की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “गुलामी का अधिकार-पत्र” अथवा “दासता का आज्ञा-पत्र” की संज्ञा दी थी। ब्रिटिश शासनकाल में पारित यह अब तक का सबसे विस्तृत विधायी दस्तावेज था, जिसमें 14 भाग, 321 धाराएं तथा 10 अनुसूचियां शामिल थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम को नेहरू ने एक अन्य प्रसिद्ध उक्ति में “एक ऐसी कार, जिसमें ब्रेक तो हैं परंतु इंजन नहीं” कहकर भी आलोचना की थी, तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1936 के लखनऊ अधिवेशन में इसे पूर्णतः अस्वीकार कर दिया था।
60. किस अधिनियम के बारे में जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि "हमें एक ऐसी कार दी गई थी, जिसमें सब ब्रेक थे किंतु इंजन नहीं था"?
(a) 1858 का अधिनियम
(b) 1909 का अधिनियम
(c) 1919 का अधिनियम
(d) 1935 का अधिनियम
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(d)
जवाहरलाल नेहरू ने भारत सरकार अधिनियम, 1935 पर व्यंग्य करते हुए इसे “एक ऐसी कार जिसमें सब ब्रेक थे किंतु इंजन नहीं” कहा था, जिसका आशय यह था कि यह अधिनियम भारतीयों को वास्तविक सत्ता देने के बजाय केवल नियंत्रण तंत्र (ब्रेक) प्रदान करता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अधिनियम को नेहरू ने अन्यत्र “गुलामी का अधिकार-पत्र” भी कहा था, और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे 1936 के लखनऊ अधिवेशन में औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया था, यद्यपि व्यावहारिक राजनीति में कांग्रेस ने इसके अंतर्गत 1937 के प्रांतीय चुनावों में भाग लिया।
61. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने किस अधिवेशन में भारत सरकार अधिनियम, 1935 को अस्वीकार किया था?
(a) रामगढ़ अधिवेशन, 1940
(b) लखनऊ अधिवेशन, 1936
(c) फैजपुर अधिवेशन
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने वर्ष 1936 में आयोजित अपने लखनऊ अधिवेशन में भारत सरकार अधिनियम, 1935 को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया था, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अधिनियम की आलोचना के बावजूद कांग्रेस ने व्यावहारिक रणनीति अपनाते हुए इसी अधिनियम के तहत 1937 में हुए प्रांतीय विधानसभा चुनावों में भाग लिया और अधिकांश प्रांतों में स्पष्ट बहुमत प्राप्त करते हुए वहां अपनी सरकारें भी बनाईं।
62. निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा सवैधानिक निरंकुशता का सिद्धांत प्रवृत्त किया गया?
(a) 1909 का भारतीय काउंसिल अधिनियम
(b) 1919 का भारत सरकार अधिनियम
(c) 1935 का भारत सरकार अधिनियम
(d) 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
M.P. P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(c)
संवैधानिक निरंकुशता का सिद्धांत भारत सरकार अधिनियम, 1935 के माध्यम से प्रवृत्त हुआ, जिसमें गवर्नर तथा गवर्नर जनरल को व्यापक विवेकाधीन एवं आरक्षित शक्तियां प्रदान की गई थीं। यह अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा पारित तत्कालीन सबसे विस्तृत तथा जटिल संवैधानिक दस्तावेज था, जिसमें भारत संघ की स्थापना, संघीय न्यायपालिका, तथा केंद्र-राज्य शक्ति विभाजन जैसे प्रावधान सम्मिलित थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यही कारण था कि जवाहरलाल नेहरू ने इसे लोकतांत्रिक सत्ता के बजाय ब्रिटिश नियंत्रण को सुदृढ़ करने वाला दस्तावेज मानते हुए इसकी तीखी आलोचना की थी।
63. 1935 के भारत अधिनियम द्वारा प्रस्तावित फेडरल यूनियन में राजसी प्रांतों को शामिल करने के पीछे अंग्रेजों की असली मंशा थी-
(a) राजसी प्रांतों पर और अधिक प्रत्यक्ष राजनैतिक और प्रशासनिक नियंत्रण रखना
(b) उपनिवेश के प्रशासन में राजाओं को सक्रिय रूप से शामिल करना
(c) अंग्रेजों द्वारा समस्त राजसी प्रांतों के संपूर्ण राजनैतिक और प्रशासनिक अधिग्रहण को अंततः प्रभावी बनाना
(d) राष्ट्रवादी नेताओं के साम्राज्यवाद विरोधी सिद्धांतों को व्यर्थ करने के लिए राजाओं का इस्तेमाल करना
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
1935 के अधिनियम द्वारा प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ में देशी रियासतों को शामिल करने के पीछे ब्रिटिश सरकार की वास्तविक मंशा राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर करने हेतु राजाओं का उपयोग करना था। इस प्रस्तावित संघ के केंद्रीय विधानमंडल के उच्च सदन में लगभग 25 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाली रियासतों को 260 में से 104 (लगभग 40 प्रतिशत) सीटें तथा निचले सदन में 375 में से 125 (33 प्रतिशत) सीटें दी गई थीं, जिन्हें राजा स्वयं मनोनीत करते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस असंगत प्रतिनिधित्व का उद्देश्य केंद्रीय विधानमंडल में कांग्रेस जैसे राष्ट्रवादी दलों के प्रभाव को संतुलित करना था, और यही एक प्रमुख कारण रहा कि प्रस्तावित संघीय ढांचा वास्तविकता में कभी लागू नहीं हो सका।
64. भारत शासन अधिनियम, 1919 के अंतर्गत भारतीय विधायिका का अंतिम निर्वाचन किस वर्ष में आयोजित किया गया था?
(a) 1930
(b) 1934
(c) 1945
(d) 1947
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
भारत शासन अधिनियम, 1919 के प्रावधानों के तहत केंद्रीय विधानसभा के लिए अंतिम चुनाव वर्ष 1945 में आयोजित हुआ था, इससे पूर्व 1923, 1926, 1930 तथा 1934 में भी चुनाव हो चुके थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1935 के अधिनियम का संघीय (फेडरल) प्रावधान कभी लागू नहीं हो पाया था, इसीलिए केंद्रीय स्तर पर 1919 के अधिनियम के अंतर्गत ही चुनाव होते रहे, जबकि प्रांतीय स्तर पर 1937 में हुआ चुनाव 1935 के अधिनियम के तहत आयोजित किया गया था।
65. केंद्रीय विधानसभा का/के निम्नांकित में से कौन-सा/से निर्वाचन भारत शासन अधिनियम, 1919 के तहत हुआ/हुए?
(a) 1926
(b) 1937
(c) 1945
सही उत्तर का चयन नीचे दिए गए कूट से कीजिए :
कूट :
(a) केवल (a)
(b) (b) और (c)
(c) (a) और (c)
(d) (a), (b) और (c)
R.A.S./ R.T.S. (Pre) 2018
उत्तर-(c)
भारत शासन अधिनियम, 1919 के अंतर्गत केंद्रीय विधानसभा के चुनाव वर्ष 1923, 1926, 1930, 1934 तथा 1945 में हुए थे, जबकि 1937 में हुआ विधानसभा चुनाव वास्तव में प्रांतीय स्तर पर था और यह भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत आयोजित हुआ था, अतः सही उत्तर विकल्प (a) और (c) है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 1935 के अधिनियम का प्रस्तावित संघीय (केंद्रीय स्तर का) ढांचा कभी क्रियान्वित नहीं हुआ, जिस कारण केंद्र में चुनाव पुराने 1919 के अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत ही होते रहे।
66. भारत सरकार अधिनियम, 1935 के मुख्य तत्वों में सम्मिलित थे-
1. एक संघ का प्रावधान
2.प्रांतों को स्वायत्तता देना
3. प्रांतों में द्विशासन की प्रस्तावना
4. केंद्रीय विधायिका को संप्रभुता प्रदान करना
नीचे दी गई कूट संरचना में से ही सही उत्तर का चयन कीजिए-
कूट :
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 3 और 4
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 1998
उत्तर-(a)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 ने भारत में पहली बार संघात्मक सरकार की स्थापना का प्रावधान किया, जिसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांतों के साथ इच्छुक देशी रियासतों को भी शामिल करने की योजना थी, यद्यपि रियासतों की अनिच्छा के कारण यह संघ व्यवहार में कभी नहीं बन सका। साथ ही इसने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर उन्हें स्वायत्तता प्रदान की, जबकि केंद्र में इसके विपरीत द्वैध शासन लागू किया गया, इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चूंकि प्रस्तावित संघ कभी लागू नहीं हो सका, इसलिए केंद्रीय स्तर पर भारत शासन अधिनियम, 1919 के प्रावधान ही स्वतंत्रता तक प्रभावी बने रहे, और केंद्रीय विधानसभा के चुनाव 1945 तक इसी पुराने अधिनियम के अंतर्गत होते रहे।
67. ब्रिटिश शासनकाल में संविधान के विकास में कौन-सा कानून ऐतिहासिक नहीं था ?
(a) रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773
(b) चार्टर एक्ट, 1833
(c) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1919
(d) प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट, 1955
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(d)
रेग्युलेटिंग एक्ट (1773), चार्टर एक्ट (1833) तथा गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट (1919) — ये तीनों ब्रिटिश संसद द्वारा भारत के संवैधानिक विकास के दृष्टिकोण से पारित किए गए ऐतिहासिक अधिनियम हैं, जबकि प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट, 1955 स्वतंत्र भारत की संसद द्वारा पारित एक सामाजिक विधान है, जो छुआछूत उन्मूलन से संबंधित है, न कि संवैधानिक विकास से।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह अधिनियम मूलतः 1955 में ‘अस्पृश्यता अपराध अधिनियम’ (Untouchability Offences Act) के नाम से पारित हुआ था, जिसे बाद में 1976 में संशोधित कर ‘नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम’ (Protection of Civil Rights Act) नाम दिया गया।
68. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर का चयन कीजिए-
सूची-I सूची-II
A. दि रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 1. प्रदेशों की स्वायत्तता के लिए प्रावधान
B. भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 2. द्वैध शासन का प्रारंभ
C. भारतीय सरकार अधिनियम, 1919 3. सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल का प्रारंभ
D. भारत सरकार अधिनियम, 1935 4. सुप्रीम कोर्ट की स्थापना
कूट :
A B C D
(a) 1 2 3 4
(b) 4 3 2 1
(c) 2 1 4 3
(d) 3 4 1 2
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 के अंतर्गत कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई; भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 (मार्ले-मिंटो सुधार) द्वारा मुसलमानों के लिए सांप्रदायिक (पृथक) निर्वाचन मंडल की शुरुआत हुई; भारत सरकार अधिनियम, 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली लागू की; तथा 1935 के अधिनियम ने प्रांतों को औपचारिक रूप से स्वायत्तता प्रदान की, यद्यपि वास्तविक कार्यकारी शक्तियां गवर्नर के पास ही केंद्रित रहीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1935 के अधिनियम में गवर्नर को लगभग वही विवेकाधीन एवं आरक्षित शक्तियां प्राप्त थीं जो केंद्र में गवर्नर जनरल को प्राप्त थीं, जिस कारण इसे ‘संवैधानिक निरंकुशता’ का सिद्धांत भी कहा गया।
69. निम्नलिखित अधिनियमों में से किसके द्वारा भारत परिषद (इंडिया कौंसिल) को समाप्त किया गया?
(a) मार्ले-मिंटो सुधार, 1909
(b) भारत सरकार अधिनियम, 1919
(c) भारत सरकार अधिनियम, 1935
(d) भारत स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
U.P.R.O./ A.R.O. (Re-Exam) (Pre) 2016
उत्तर-(c)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के माध्यम से 1858 से चली आ रही भारत परिषद (इंडिया कौंसिल) को समाप्त कर दिया गया, साथ ही इसी अधिनियम से केंद्र-राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन तथा प्रांतों में द्वैध शासन की समाप्ति करते हुए केंद्र में द्वैध शासन लागू किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम द्वारा स्थापित प्रस्तावित संघ में अवशिष्ट शक्तियां गवर्नर जनरल को प्रदान की गई थीं, जो भारत के वर्तमान संविधान से भिन्न व्यवस्था है, जिसमें अवशिष्ट शक्तियां केंद्र (संसद) के पास हैं।
70.भारतीय शासन अधिनियम, 1935 के द्वारा स्थापित संघ में अवशिष्ट शक्तियां किसे दी गई थीं?
(a) संघीय विधानमंडल को
(b) गवर्नर जनरल को
(c) प्रांतीय विधानमंडल को
(d) प्रांतीय राज्यपालों को
I.A.S. (Pre) 2018
उत्तर-(b)
1935 के अधिनियम द्वारा प्रस्तावित संघ में अवशिष्ट (Residuary) शक्तियां संघीय विधानमंडल के बजाय गवर्नर जनरल के विवेकाधिकार में रखी गई थीं, जो इस अधिनियम की एक विशिष्ट व अपारंपरिक विशेषता मानी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसके विपरीत, भारत के वर्तमान संविधान (अनुच्छेद 248) में अवशिष्ट शक्तियां संसद (केंद्रीय विधानमंडल) को प्राप्त हैं, जो कनाडा के संघीय मॉडल से प्रेरित मानी जाती है, न कि अमेरिका के मॉडल से, जहां अवशिष्ट शक्तियां राज्यों के पास होती हैं।
71. भारत सरकार अधिनियम, 1935 में अंतर्विष्ट "अनुदेश-प्रपत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ इंस्ट्रक्शंस)" को वर्ष 1950 में भारत के संविधान में किस रूप में समाविष्ट किया गया?
(a) मूल अधिकार
(b) राज्य की नीति के निदेशक तत्व
(c) राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
(d) भारत सरकार के कार्य का संचालन
I.A.S. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
1935 के अधिनियम में गवर्नर जनरल तथा प्रांतीय गवर्नरों को दिए जाने वाले ‘अनुदेश-प्रपत्र’ (Instrument of Instructions) की भावना को संविधान निर्माताओं ने 1950 में लागू संविधान में ‘राज्य की नीति के निदेशक तत्वों’ (नीति निदेशक तत्व) के रूप में समाहित किया, जो सरकार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चूंकि नीति निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, इसलिए कुछ आलोचकों ने इन्हें केवल ‘पवित्र आकांक्षाओं की घोषणा’ अथवा ‘बैंक का ऐसा चेक जो बैंक की सुविधानुसार ही भुनाया जाए’ कहकर उनकी सीमाओं को रेखांकित किया है।
72.यह किसने कहा-"मुझे इस आरोप के संबंध में कोई क्षमा नहीं मांगनी है कि संविधान के प्रारूप में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट,
1935 के एक बड़े भाग को पुनः उत्पादित कर दिया गया है?"
(a) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(b) सरदार पटेल
(c) जवाहरलाल नेहरू
(d) डॉ. बी.आर. अंबेडकर
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(d)
4 नवंबर, 1948 को संविधान सभा में संविधान के प्रारूप पर बहस के दौरान डॉ. भीमराव अंबेडकर ने आलोचकों को उत्तर देते हुए स्पष्ट कहा कि प्रारूप में भारत शासन अधिनियम, 1935 के अधिकांश प्रावधान सम्मिलित करने में उन्हें कोई शर्म नहीं है, क्योंकि संवैधानिक विचारों पर किसी का पेटेंट अधिकार नहीं होता।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. अंबेडकर की अध्यक्षता में गठित प्रारूप समिति का गठन 29 अगस्त, 1947 को हुआ था, और उसके द्वारा तैयार संविधान का प्रारूप 21 फरवरी, 1948 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सौंपा गया।
73."क्या आप मुझे एक भी स्वतंत्र देश दिखा सकते हैं जहां पृथक मताधिकार हो ?.. ..अंग्रेज जा चुके हैं, परंतु वे शरारत छोड़ गए हैं।"
निम्नलिखित में से किसने उपर्युक्त वाक्य को संविधान सभा के
बहस में कहा था?
(a) सोमनाथ लाहिड़ी
(b) जवाहरलाल नेहरू
(c) सरदार वल्लभभाई पटेल
(d) एन.जी. रंगा
U.P.P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(c)
संविधान सभा में पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था का विरोध करते हुए संयुक्त निर्वाचक मंडल के पक्ष में बोलते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल ने कहा था कि अंग्रेज भले ही चले गए हों, परंतु सांप्रदायिक निर्वाचन जैसी शरारत छोड़ गए हैं, जिसे और आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सरदार पटेल इस दौरान संविधान सभा की ‘मूल अधिकार, अल्पसंख्यक तथा जनजातीय एवं बहिष्कृत क्षेत्र संबंधी सलाहकार समिति’ के अध्यक्ष भी थे, जिसकी सिफारिश पर अंततः संविधान में अल्पसंख्यकों के लिए पृथक निर्वाचन के बजाय संयुक्त निर्वाचन प्रणाली को अपनाया गया।

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