भारत का विभाजन और स्वतंत्रता PYQ MCQ प्रश्न | UPSC History

भारतीय इतिहास›आधुनिक भारत ›भारत का संवैधानिक विकास (1773–1947) › भारत का विभाजन और स्वतंत्रता PYQ MCQ प्रश्न
1. ब्रिटिश सरकार ने जून, 1948 तक भारत छोड़ने की घोषणा की थी-
(a) 1946 में
(b) फरवरी, 1947 में
(c) अप्रैल, 1947 में
(d) जून, 1947 में
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(b)
20 फरवरी, 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में ऐतिहासिक घोषणा की कि ब्रिटेन जून 1948 से पहले भारत में उत्तरदायी हाथों को सत्ता सौंपकर देश छोड़ देगा। इसी घोषणा के बाद लॉर्ड वेवेल को हटाकर लॉर्ड माउंटबेटन को नया वायसराय नियुक्त किया गया, जिन्होंने 24 मार्च, 1947 को पदभार ग्रहण किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: एटली की इस घोषणा को “20 फरवरी की घोषणा” भी कहा जाता है, जिसने भारतीय राजनीति में एक निर्णायक मोड़ ला दिया। वेवेल ने इस सत्ता-हस्तांतरण के लिए ‘ऑपरेशन मैडहाउस’ नामक एक आपातकालीन योजना भी तैयार की थी, जिसे बाद में माउंटबेटन की योजना ने प्रतिस्थापित कर दिया।
(a) ब्रिटिश शासन की निरंतरता की।
(b) सत्ता के हस्तांतरण की।
(c) देश के विभाजन की।
(d) सांप्रदायिक समस्याओं के समाधान की।
U.P. P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b&c)
3 जून, 1947 को घोषित माउंटबेटन योजना दो उद्देश्यों का एकसाथ आधार बनी — पहला, भारत में ब्रिटिश सत्ता का भारतीयों को हस्तांतरण, और दूसरा, भारतीय उपमहाद्वीप का भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियनों में विभाजन। इसी योजना के आधार पर ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947’ तैयार किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: माउंटबेटन योजना को ‘जून थर्ड प्लान’ (3 जून की योजना) के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना में यह प्रावधान था कि ब्रिटिश भारत के प्रांतों की विधानसभाएं स्वयं यह तय करेंगी कि वे भारत के साथ रहना चाहती हैं या पाकिस्तान के साथ, जिससे जनप्रतिनिधित्व का सिद्धांत बनाए रखा गया।
3. भारत के विभाजन से संबंधित ‘माउंटबेटन योजना’ की सरकारी तौर पर घोषणा कब हुई थी?
(a) 4 जून, 1947
(b) 10 जून, 1947
(c) 3 जुलाई, 1947
(d) 3 जून, 1947
M.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(d)
माउंटबेटन योजना की आधिकारिक घोषणा 3 जून, 1947 को की गई थी। इसी दिन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने कांग्रेस, मुस्लिम लीग और सिख प्रतिनिधियों को योजना की जानकारी दी और सभी प्रमुख दलों ने इसे स्वीकार कर लिया। इसी योजना के अनुसार भारत और पाकिस्तान दोनों का जन्म हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस योजना को स्वीकार करते समय कांग्रेस के जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल ने विभाजन को अनिवार्य मानते हुए सहमति दी, जबकि महात्मा गांधी इसके विरोध में थे। गांधीजी ने कहा था कि विभाजन उनकी लाश पर होगा, किंतु परिस्थितियों ने उन्हें मौन सहमति देने पर विवश कर दिया।
4. भारतीयों को वर्ष 1947 में सार्वभौम सत्ता सौंपने की योजना निम्न में से किस नाम से जानी गई?
(a) डूरंड योजना
(b) मार्ले-मिंटो सुधार
(c) माउंटबेटन योजना
(d) वेवेल योजना
U.P.P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(c)
वर्ष 1947 में भारतीयों को सार्वभौम सत्ता सौंपने की प्रक्रिया ‘माउंटबेटन योजना’ के अंतर्गत सम्पन्न हुई। लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत में विभिन्न नेताओं से गहन विचार-विमर्श के बाद यह योजना तैयार की, जिसे 3 जून, 1947 को सार्वजनिक किया गया। इस योजना के तहत 15 अगस्त, 1947 को दो स्वतंत्र डोमिनियन — भारत और पाकिस्तान — अस्तित्व में आए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वेवेल योजना (1945) भी सत्ता हस्तांतरण का एक पूर्व प्रयास थी जिसे ‘शिमला सम्मेलन’ के नाम से भी जाना जाता है, किंतु जिन्ना के असहयोग के कारण यह विफल हो गई थी। डूरंड योजना 1893 में अफगानिस्तान और ब्रिटिश भारत के बीच सीमा-निर्धारण से संबंधित थी, जिसका भारत की स्वतंत्रता से कोई संबंध नहीं था।
5. कौन-सी योजना भारतीय स्वतंत्रता का आधार बनी?
(a) क्रिप्स योजना
(b) वेवेल योजना
(c) माउंटबेटन योजना
(d) इनमें से कोई नहीं
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(c)
माउंटबेटन योजना (3 जून, 1947) ही वह योजना थी जो भारतीय स्वतंत्रता का वास्तविक आधार बनी। माउंटबेटन ने दो महीने की गहन वार्ताओं के बाद निष्कर्ष निकाला कि अखंड भारत को बनाए रखना संभव नहीं है और विभाजन ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है। इसी योजना के आधार पर 15 अगस्त, 1947 की तिथि स्वतंत्रता के लिए निर्धारित की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: क्रिप्स योजना (1942) स्टेफर्ड क्रिप्स द्वारा प्रस्तुत की गई थी जिसमें युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन दर्जा देने का प्रस्ताव था, किंतु कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने इसे अस्वीकार कर दिया। गांधीजी ने इसे ‘दिवालिया बैंक पर आगे की तारीख का चेक’ कहकर इसकी आलोचना की थी।
6. भारत के स्वतंत्र होते समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री कौन था?
(a) विंस्टन चर्चिल
(b) क्लीमेंट एटली
(c) हैरोल्ड मैकमिलन
(d) इनमें से कोई नहीं
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
भारत की स्वतंत्रता (15 अगस्त, 1947) के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट रिचर्ड एटली थे, जो लेबर पार्टी से थे। उन्होंने 1945 के आम चुनाव में विंस्टन चर्चिल को हराकर सत्ता प्राप्त की थी और 1945 से 1951 तक प्रधानमंत्री रहे। भारत को स्वतंत्रता दिलाने में एटली की नीति की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विंस्टन चर्चिल, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के नायक माने जाते थे, भारत की स्वतंत्रता के घोर विरोधी थे। उन्होंने एक बार कहा था कि वे “भारतीय साम्राज्य के विघटन की अध्यक्षता करने के लिए राजा के प्रधानमंत्री नहीं बने हैं।” यही कारण है कि लेबर पार्टी की सरकार आने पर ही भारत को स्वतंत्रता देने की प्रक्रिया तेज हो सकी।
7. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 प्रभावी हुआ था-
(a) जुलाई 4, 1947 को
(b) जुलाई 10, 1947 को
(c) जुलाई 18, 1947 को
(d) अगस्त 14, 1947 को
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
उत्तर-(c)
माउंटबेटन योजना के अनुरूप ब्रिटिश संसद ने जुलाई 1947 में ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम’ पारित किया और यह अधिनियम 18 जुलाई, 1947 से विधिवत प्रभावी हो गया। इस अधिनियम के अंतर्गत 15 अगस्त, 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियनों की स्थापना निश्चित की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसने ब्रिटिश भारत के 565 से अधिक देशी रियासतों को स्वतंत्र रहने, भारत में मिलने या पाकिस्तान में जाने का विकल्प दिया। इसी ‘Paramountcy की समाप्ति’ के कारण हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी रियासतों का विलय एक जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया बन गई।
8. जब भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी यू.के. में निम्न में से किस एक पार्टी की सत्ता थी?
(a) कंजर्वेटिव पार्टी
(b) लेबर पार्टी
(c) लिबरल पार्टी
(d) सोशलिस्ट पार्टी
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, उस समय ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार थी और क्लीमेंट एटली प्रधानमंत्री थे। लेबर पार्टी ने 1945 के आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी के नेता विंस्टन चर्चिल को भारी मतों से पराजित करके सत्ता प्राप्त की थी और एटली ने 1945-1951 तक शासन किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1945 के ब्रिटिश आम चुनाव के परिणाम अप्रत्याशित थे — द्वितीय विश्वयुद्ध के विजयी नायक चर्चिल की भारी हार हुई और लेबर पार्टी को 393 सीटें मिलीं। लेबर पार्टी की विचारधारा समाजवादी झुकाव की थी और वह भारतीय स्वशासन के प्रति अपेक्षाकृत सहानुभूतिपूर्ण थी, जिसने भारत को समय पर स्वतंत्रता दिलाने में सहायक भूमिका निभाई।
9. ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम’ (द इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट) ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया-
(a) जनवरी, 1947 में
(b) जुलाई, 1947 में
(c) अगस्त, 1947 में
(d) अगस्त, 1946 में
Uttarakhand U.D.A. / L.D.A. (Pre) 2007
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
3 जून, 1947 की माउंटबेटन योजना के अनुरूप ब्रिटिश संसद ने जुलाई 1947 में ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम’ पारित किया। इस अधिनियम में भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियनों की स्थापना के लिए 15 अगस्त, 1947 की तिथि निश्चित की गई और यह अधिनियम 18 जुलाई, 1947 को लागू हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम के पारित होने के साथ ही 1935 के ‘भारत सरकार अधिनियम’ की अधिकांश धाराएं निरस्त हो गईं। इसके अंतर्गत दोनों नए डोमिनियनों को अपने-अपने संविधान बनाने तक के लिए भारत सरकार अधिनियम, 1935 को अंतरिम संविधान के रूप में उपयोग करने का अधिकार दिया गया।
10. लॉर्ड माउंटबेटन वायसराय के रूप में भारत आए-
(a) भारतीय उपमहाद्वीप को विभाजित करने की विशेष हिदायत के साथ
(b) यथासंभव भारत को संयुक्त रखने की विशेष हिदायत के साथ।
(c) जिन्ना की पाकिस्तान की मांग को स्वीकार करने की विशेष हिदायत के साथ।
(d) कांग्रेस का विभाजन स्वीकार करने हेतु राजी करने की विशेष हिदायत के साथ।
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(b)
लॉर्ड माउंटबेटन को ब्रिटिश सरकार ने यह निर्देश देकर भेजा था कि वे सत्ता हस्तांतरण के साथ-साथ यथासंभव भारत को अखंड और एकजुट रखने का प्रयास करें। हालाँकि, भारत में राजनीतिक परिस्थितियों का गहन अध्ययन करने के बाद माउंटबेटन इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अखंड भारत अब व्यावहारिक नहीं रहा और विभाजन अपरिहार्य हो गया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: माउंटबेटन ब्रिटेन के शाही परिवार से संबंधित थे — वे महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पति प्रिंस फिलिप के चाचा थे। माउंटबेटन भारत विभाजन के बाद भी स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने और जून 1948 तक इस पद पर रहे, जब उनकी जगह सी. राजगोपालाचारी ने ली और वे भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल बने।
11. भारत के विभाजन को टालने का अंतिम अवसर समाप्त हो गया था-
(a) क्रिप्स मिशन को अस्वीकार करने के साथ ही
(b) राजगोपालाचारी फॉर्मूले की अस्वीकार करने के साथ ही
(c) कैबिनेट मिशन को अस्वीकार करने के साथ ही
(d) वेवेल प्लान को अस्वीकार करने के साथ ही
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(c)
16 मई, 1946 को कैबिनेट मिशन योजना घोषित हुई, जिसमें मुस्लिम लीग की पाकिस्तान की मांग को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया गया। मुस्लिम लीग ने 6 जून, 1946 को इस योजना को मान लिया था, परंतु 29 जुलाई, 1946 को जिन्ना ने अपनी स्वीकृति वापस ले ली। इसी के साथ एक अखंड भारत की संभावना का अंतिम द्वार बंद हो गया और विभाजन अपरिहार्य हो गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कैबिनेट मिशन में तीन ब्रिटिश मंत्री शामिल थे — पेथिक लॉरेंस (भारत सचिव), स्टेफर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष) और ए.वी. अलेक्जेंडर (नौसेना मंत्री)। इस मिशन ने भारत को तीन क्षेत्रों (A, B, C) में वर्गीकृत करते हुए एक संघीय ढांचे का प्रस्ताव रखा था, जो अखंड भारत के लिए अंतिम व्यावहारिक प्रयास था।
12. रेडक्लिफ समिति किसलिए नियुक्त की गई थी?
(a) भारत में अल्पसंख्यकों की समस्या को सुलझाने के लिए
(b) स्वतंत्रता विधेयक को कार्यरूप में परिणत करने के लिए
(c) भारत और पाकिस्तान के बीच सीमाओं को निर्धारित करने के लिए
(d) पूर्वी बंगाल के दंगों की जांच करने के लिए
I.A.S. (Pre) 2014
उत्तर-(c)
लॉर्ड माउंटबेटन ने 30 जून, 1947 को दो सीमा आयोग गठित किए — एक पंजाब के लिए और एक बंगाल के लिए — तथा सर सिरिल रेडक्लिफ को दोनों का अध्यक्ष नियुक्त किया। इन आयोगों का कार्य मुस्लिम और गैर-मुस्लिम जनसंख्या के आधार पर इन दो प्रांतों की सीमाएं निर्धारित करना था। प्रत्येक आयोग में चार सदस्य थे — दो कांग्रेस से और दो मुस्लिम लीग से।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रेडक्लिफ इससे पहले कभी भारत नहीं आए थे और उन्होंने मात्र पांच सप्ताह में 88 मिलियन लोगों को प्रभावित करने वाली 4,50,000 वर्ग किमी. की सीमारेखा खींची। रेडक्लिफ रेखा 17 अगस्त, 1947 को, यानी स्वतंत्रता के दो दिन बाद घोषित की गई, जिससे पंजाब और बंगाल में बड़े पैमाने पर विस्थापन और हिंसा हुई।
13. कथन (A) : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने माउंटबेटन योजना को स्वीकार किया। कारण (R) : वह द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को मानती थी। नीचे दिए गए कूट से सही चुनिए-
(a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P. P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
कथन (A) सत्य है — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने माउंटबेटन योजना को स्वीकार किया था। किंतु कारण (R) असत्य है क्योंकि कांग्रेस ने कभी भी द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को नहीं माना। कांग्रेस ने विभाजन इसलिए स्वीकार किया क्योंकि सांप्रदायिक हिंसा की बढ़ती लहर और राजनीतिक गतिरोध को देखते हुए यह एकमात्र व्यावहारिक विकल्प प्रतीत हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: द्वि-राष्ट्र सिद्धांत के प्रमुख प्रवर्तक मुहम्मद अली जिन्ना थे, जिन्होंने 1940 के लाहौर अधिवेशन में पाकिस्तान की मांग को औपचारिक रूप दिया। इसके विपरीत, कांग्रेस का मानना था कि धर्म राष्ट्रीयता का आधार नहीं हो सकता — यह सिद्धांत महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद सभी ने अंत तक बनाए रखा।
14. भारत के विभाजन के विकल्प के रूप में गांधीजी ने माउंटबेटन को सुझाया था कि वे-
(a) स्वतंत्रता प्रदान करने के कार्य को स्थगित करें।
(b) जिन्ना को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें।
(c) नेहरू एवं जिन्ना को साथ-साथ सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें।
(d) सेना को कुछ समय के लिए अधिकार ग्रहण करने के लिए आमंत्रित करें।
I.A.S. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
31 मार्च, 1947 को गांधीजी की माउंटबेटन से पहली मुलाकात हुई। गांधीजी ने सुझाव दिया कि भारत विभाजन के बजाय संपूर्ण अंतरिम सरकार मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना को सौंप दी जाए, ताकि सांप्रदायिक तनाव और दंगों को रोका जा सके। हालाँकि नेहरू और सरदार पटेल सहित कांग्रेस कार्यकारिणी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी विभाजन के इतने विरुद्ध थे कि उन्होंने कहा था — “अगर कांग्रेस बंटवारा करेगी तो उसे मेरी लाश के ऊपर करना पड़ेगा।” यह भी उल्लेखनीय है कि 15 अगस्त, 1947 को जब पूरा देश उत्सव मना रहा था, गांधीजी दिल्ली में नहीं बल्कि कलकत्ता (कोलकाता) में थे और वहाँ सांप्रदायिक शांति के लिए उपवास पर थे।
15. भारत के विभाजन का बाल्कन प्लान (Balkan Plan) उपज था—
(a) डब्ल्यू. चर्चिल के मस्तिष्क का
(b) एम.ए. जिन्ना के मस्तिष्क का
(c) लॉर्ड माउंटबेटन के मस्तिष्क का
(d) वी.पी. मेनन के मस्तिष्क का
I.A.S. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
भारतीय नेताओं के साथ 133 से अधिक साक्षात्कारों के बाद माउंटबेटन इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि कैबिनेट मिशन योजना अब व्यावहारिक नहीं रही। तब उन्होंने एक वैकल्पिक विभाजन-योजना तैयार की, जिसे गुप्त रूप से ‘बाल्कन प्लान’ नाम दिया गया। इस योजना में विभिन्न प्रांतों को स्वयं निर्णय लेने का अधिकार देने की परिकल्पना थी, जो संभावित रूप से भारत को कई छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित कर सकती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जब यह ‘बाल्कन प्लान’ जवाहरलाल नेहरू को दिखाया गया, तो उन्होंने इसे तत्काल अस्वीकार कर दिया क्योंकि इससे भारत अनेक टुकड़ों में बंट जाता। इसके बाद वी.पी. मेनन (माउंटबेटन के संवैधानिक सलाहकार) ने एक नई योजना प्रस्तुत की जो बाद में 3 जून की माउंटबेटन योजना बनी — इसमें केवल दो डोमिनियन (भारत और पाकिस्तान) बनाने का प्रावधान था।
16. भारतीय स्वाधीनता विधेयक को राजकीय स्वीकृति प्राप्त हुई थी-
(a) 18 जुलाई, 1947 को
(b) 19 जुलाई, 1947 को
(c) 20 जुलाई, 1947 को
(d) 21 जुलाई, 1947 को
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(a)
भारतीय स्वतंत्रता विधेयक को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने 4 जुलाई, 1947 को हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रस्तुत किया। 15 जुलाई को हाउस ऑफ कॉमन्स ने और 16 जुलाई को हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने इसे पारित किया। अंततः 18 जुलाई, 1947 को ब्रिटेन के राजा जॉर्ज VI की राजकीय स्वीकृति (Royal Assent) से यह विधेयक अधिनियम बना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह अधिनियम ब्रिटिश संसद के इतिहास में सबसे तेज गति से पारित होने वाले महत्त्वपूर्ण विधेयकों में से एक था — इसे केवल 15 दिनों में पूर्ण संसदीय प्रक्रिया से गुजारा गया। इस अधिनियम के पारित होने के साथ ही भारत में 1858 से चली आ रही ‘क्राउन रूल’ (ब्रिटिश ताज का शासन) औपचारिक रूप से समाप्त हो गई।
17. 1947 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस देश के विभाजन के लिए मुख्य रूप से इसलिए सहमत हुई, क्योंकि-
(a) उन्हें तब दो-राष्ट्र सिद्धांत स्वीकार था।
(b) इसे ब्रिटिश सरकार द्वारा थोपा गया था और कांग्रेस इस मामले में निसहाय थी।
(c) वे बड़े पैमाने पर संभावित सांप्रदायिक दंगों को बचाना चाहते थे।
(d) भारत स्वाधीनता प्राप्त करने के अवसर से अन्यथा वंचित रह जाता।
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
कांग्रेस ने 3 जून, 1947 की माउंटबेटन योजना के तहत विभाजन स्वीकार किया, किंतु इसका मुख्य कारण द्वि-राष्ट्र सिद्धांत की स्वीकृति नहीं, बल्कि सांप्रदायिक हिंसा की भयावह आशंका थी। सरदार वल्लभभाई पटेल ने कहा था कि यदि विभाजन न माना जाता तो भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाता और एक के बजाय कई पाकिस्तान बन जाते।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अगस्त 1946 में मुस्लिम लीग के ‘Direct Action Day’ (16 अगस्त) के बाद कलकत्ता में हुए भीषण दंगों में हजारों लोग मारे गए थे। इस हिंसा ने कांग्रेस नेताओं को यह विश्वास दिला दिया कि यदि विभाजन के बिना स्वतंत्रता ली गई, तो देशव्यापी गृहयुद्ध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
18. भारत विभाजन के संदर्भ में 1947 में नियुक्त सीमा आयोग की अध्यक्षता किसने की थी?
(a) माउंटबेटन
(b) रेडक्लिफ
(c) जेम्स बोल्ट
(d) रिचर्डसन
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(b)
भारत विभाजन के संदर्भ में 1947 में गठित पंजाब और बंगाल दोनों सीमा आयोगों की अध्यक्षता सर सिरिल रेडक्लिफ ने की। रेडक्लिफ एक著名 ब्रिटिश बैरिस्टर थे जिन्हें 88 मिलियन लोगों और 4,50,000 वर्ग किमी. क्षेत्र को विभाजित करने का दुष्कर कार्य सौंपा गया। उनके द्वारा खींची गई सीमा रेखा 17 अगस्त, 1947 को सार्वजनिक की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रेडक्लिफ ने अपना कार्य पूर्ण करने के बाद भारत से अपना पारिश्रमिक लेने से इनकार कर दिया और तुरंत स्वदेश लौट गए। उन्होंने कहा था कि विभाजन रेखा खींचने का यह कार्य उनके जीवन का सबसे कठिन और पीड़ादायक अनुभव था। इस विभाजन के परिणामस्वरूप इतिहास का सबसे बड़ा मानव प्रवासन हुआ — लगभग 1.4 से 1.7 करोड़ लोगों को विस्थापित होना पड़ा।
19. कथन (A) : अंग्रेजों ने भारत को 1947 में स्वतंत्रता प्रदान कर दी। कारण (R) : अंग्रेज द्वितीय विश्व युद्ध में निर्बल हो चुके थे। नीचे दिए कूट से सही चुनिए-
(a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
(d) (A) तथा (R) दोनों ही गलत हैं।
U.P.P.C.S. (Pre) 2001
U.P. Lower Sub.(Spl.) (Pre) 2003
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(a)
कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है। द्वितीय विश्वयुद्ध (1939–45) ने ब्रिटेन को आर्थिक और सैन्य दृष्टि से बुरी तरह कमजोर कर दिया था। स्टेफर्ड क्रिप्स ने हाउस ऑफ कॉमन्स में स्वीकार किया था कि भारत में दमनकारी शासन बनाए रखने के लिए आवश्यक जनशक्ति और संसाधन ब्रिटेन के पास अब नहीं थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन पर लगभग 3 अरब पाउंड का ऋण था और उसे अमेरिका से भारी कर्ज लेना पड़ा था। साथ ही, 1946 में भारतीय नौसेना विद्रोह (Royal Indian Navy Mutiny) ने ब्रिटेन को यह भी संकेत दे दिया था कि अब भारतीय सशस्त्र बल भी ब्रिटिश शासन के समर्थन में विश्वसनीय नहीं रहे — इन सब कारणों ने मिलकर भारत को शीघ्र स्वतंत्रता देने का निर्णय अपरिहार्य बना दिया।
20. नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं जिनमें से पहले को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है-
कथन (A) : स्वतंत्र भारत में ब्रिटेन की प्रभुता बनी रही।
कारण (R) : स्वतंत्र भारत के गवर्नर जनरल की नियुक्ति ब्रिटेन के प्रभुतासंपन्न शासक ने की।
ऊपर के दोनों वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में कौन सही है?
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (A) की सही व्याख्या (R) करता है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (A) की सही व्याख्या (R) नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
कथन (A) गलत है क्योंकि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार 15 अगस्त, 1947 से भारत पर ब्रिटेन की किसी प्रकार की प्रभुता नहीं रही — भारत एक स्वतंत्र डोमिनियन बन गया। किंतु कारण (R) सत्य है, क्योंकि स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन की नियुक्ति तकनीकी रूप से ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज VI द्वारा ही की गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: माउंटबेटन के बाद चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) जून 1948 में भारत के दूसरे और प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल बने। भारत 26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र बनने पर ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के अंतर्गत गवर्नर-जनरल पद समाप्त हो गया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने।
21. 14/15 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि केंद्रीय असेम्बली में इकबाल का गीत ‘हिन्दोस्तां हमारा’ तथा ‘जन-गण-मन’ किसने गाया?
(a) रामेश्वरी नेहरू
(b) मीरा बेन
(c) सुचेता कृपलानी
(d) एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी
U.P.P.C.S. (Pre.) 2010
उत्तर-(c)
14-15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को केंद्रीय असेम्बली के ऐतिहासिक सत्र में सुचेता कृपलानी ने इकबाल का प्रसिद्ध गीत ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ और राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ गाया। इसी सत्र में जवाहरलाल नेहरू ने अपना विश्वप्रसिद्ध भाषण ‘Tryst with Destiny’ (नियति से साक्षात्कार) दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सुचेता कृपलानी कांग्रेस नेता जे.बी. कृपलानी की पत्नी थीं और स्वयं भी एक著名 स्वतंत्रता सेनानी थीं। वे बाद में 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त किया।
22. निम्नांकित में से कौन स्वतंत्र भारत का प्रथम गवर्नर जनरल था?
(a) लॉर्ड माउंटबेटन
(b) सर स्टेफोर्ड क्रिप्स
(c) सी. राजगोपालाचारी
(d) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(a)
स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन थे, जिन्होंने 15 अगस्त, 1947 से जून 1948 तक यह पद संभाला। उनके बाद चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) स्वतंत्र भारत के दूसरे और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल बने, जो 1948 से 1950 तक इस पद पर रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 26 जनवरी, 1950 को भारत के गणतंत्र बनने पर गवर्नर जनरल का पद समाप्त हो गया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मुहम्मद अली जिन्ना स्वयं बने, जबकि भारत ने माउंटबेटन को यह पद सौंपा — यह एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक और प्रतीकात्मक अंतर था।
23. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की 14-15 जून, 1947 को संपन्न हुई बैठक में भारत-विभाजन के विपक्ष में किसने मतदान किया था?
(a) अबुल कलाम आजाद
(b) खान अब्दुल गफ्फार खां
(c) सरदार पटेल
(d) गोविंद बल्लभ पंत
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर-(b)
14-15 जून, 1947 की AICC बैठक में विभाजन का प्रस्ताव गोविंद बल्लभ पंत ने रखा और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने (पहले के अपने विरोध के बावजूद) इसका समर्थन किया। किंतु खान अब्दुल गफ्फार खां (सीमांत गांधी), डॉ. किचलू और पुरुषोत्तम दास टंडन ने इसके विरुद्ध मतदान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खान अब्दुल गफ्फार खां को ‘सीमांत गांधी’ या ‘बाचा खां’ भी कहा जाता था। विभाजन के बाद उन्हें पाकिस्तान में रहना पड़ा जहाँ उन्होंने कई वर्ष जेल में बिताए। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने पठानों को भेड़ियों के सामने फेंक दिया है। 1987 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया गया।
24. स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल कौन थे?
(a) राजगोपालाचारी
(b) वॉरेन हेस्टिंग्स
(c) लॉर्ड डलहौजी
(d) लॉर्ड माउंटबेटन
M.P.P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन (1947-48) थे और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (1948-50) थे। वॉरेन हेस्टिंग्स ब्रिटिश भारत के पहले गवर्नर जनरल (1773-85) थे, जबकि लॉर्ड डलहौजी 1848-56 तक गवर्नर जनरल रहे और अपनी ‘हड़प नीति’ (Doctrine of Lapse) के लिए जाने जाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजगोपालाचारी न केवल प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे बल्कि वे अंतिम गवर्नर जनरल भी थे, क्योंकि 26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र बनने के बाद यह पद समाप्त हो गया। वे ‘राजाजी’ के नाम से प्रसिद्ध थे और बाद में स्वतंत्र पार्टी की स्थापना भी की।
25. 15 जून, 1947 को कांग्रेस के दिल्ली अधिवेशन में भारत के विभाजन का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। इस अधिवेशन के अध्यक्ष थे-
(a) राजेंद्र प्रसाद
(b) सरदार वल्लभभाई पटेल
(c) आचार्य जे.बी. कृपलानी
(d) जवाहरलाल नेहरू
U.P.P.C.S. (Pre) 2007
U.P.P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(c)
15 जून, 1947 को दिल्ली में जब कांग्रेस महासमिति ने भारत विभाजन का प्रस्ताव स्वीकार किया, तब कांग्रेस के अध्यक्ष आचार्य जे.बी. कृपलानी थे। प्रस्ताव गोविंद बल्लभ पंत ने रखा, मौलाना आजाद ने इसका समर्थन किया तथा नेहरू और पटेल ने भी सहमति दी। नवंबर 1947 में कृपलानी ने अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृपलानी के इस्तीफे के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इसके बाद 1948 में जयपुर अधिवेशन में पट्टाभि सीतारमैया, 1950 में नासिक अधिवेशन में पुरुषोत्तम दास टंडन और 1951-54 तक नेहरू स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष रहे — जिससे प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष एक ही होने की परंपरा शुरू हुई।
26. निम्नलिखित में से किसने 1947 के कांग्रेस कमेटी की बैठक द्वारा विभाजन के प्रस्ताव के पारित होने को ‘राष्ट्रवाद का संप्रदायवाद के पक्ष में समर्पण’ के रूप में लिया?
(a) डॉ. किचलू
(b) पुरुषोत्तम दास टंडन
(c) जवाहरलाल नेहरू
(d) जी.बी. पंत
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(a)
पंजाब प्रांतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सैफुद्दीन किचलू ने विभाजन के प्रस्ताव के पारित होने को ‘राष्ट्रवाद का संप्रदायवाद के पक्ष में समर्पण’ कहकर तीखी आलोचना की। वे विभाजन के घोर विरोधी थे और स्वतंत्रता के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से नाता जोड़ लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. किचलू 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड से जुड़े एक प्रमुख नेता थे — उनकी गिरफ्तारी के विरोध में ही अमृतसर में भारी जनसमूह इकट्ठा हुआ था, जिसके बाद जनरल डायर ने निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया। 1952 में उन्हें सोवियत संघ का प्रतिष्ठित ‘स्टालिन शांति पुरस्कार’ भी प्रदान किया गया।
27. पहले अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति की थी-
(a) गवर्नर जनरल ने
(b) ब्रिटिश सम्राट ने
(c) महात्मा गांधी ने
(d) वायसराय ने
U.P.P.C.S. (Pre) 2001
उत्तर-(a)
स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की नियुक्ति तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने की थी। यह ब्रिटिश संवैधानिक परंपरा के अनुरूप था, जिसमें बहुमत प्राप्त दल के नेता को गवर्नर जनरल सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नेहरू 15 अगस्त, 1947 से 27 मई, 1964 (अपनी मृत्यु तक) भारत के प्रधानमंत्री रहे — यह कुल 16 वर्ष 286 दिनों का कार्यकाल था, जो अब तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल है। नेहरू के बाद गुलजारीलाल नंदा दो बार (1964 और 1966 में) कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में थोड़े समय के लिए पद पर रहे।
28. सन् 1947 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दिल्ली अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की?
(a) जे.बी. कृपलानी
(b) राजेंद्र प्रसाद
(c) अबुल कलाम आजाद
(d) जवाहरलाल नेहरू
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
उत्तर-(a)
1947 में दिल्ली में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्षता जे.बी. कृपलानी ने की थी। यही वह अधिवेशन था जिसमें 15 जून, 1947 को कांग्रेस महासमिति ने माउंटबेटन योजना के तहत भारत विभाजन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जे.बी. कृपलानी (जीवतराम भगवानदास कृपलानी) महात्मा गांधी के निकट सहयोगी थे और ‘आचार्य’ की उपाधि से विभूषित थे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने ‘किसान मजदूर प्रजा पार्टी’ की स्थापना की जो आगे चलकर ‘प्रजा सोशलिस्ट पार्टी’ में विलीन हो गई।
29. नई दिल्ली में 1947 में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में निम्नलिखित में से किसने विभाजन के प्रस्ताव का समर्थन किया था?
(a) गोविंद बल्लभ पंत
(b) सरदार वल्लभभाई पटेल
(c) जे.बी. कृपलानी
(d) अबुल कलाम आजाद
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(d)
14 जून, 1947 को AICC की बैठक में गोविंद बल्लभ पंत ने विभाजन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने उसका अनुसमर्थन (Second) किया। यह उल्लेखनीय है क्योंकि आजाद पहले विभाजन के प्रबल विरोधी थे और 1940-46 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए अखंड भारत के लिए संघर्ष करते रहे थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौलाना आजाद ने अपनी आत्मकथा ‘India Wins Freedom’ में लिखा कि उन्होंने विभाजन का समर्थन मजबूरी में किया, क्योंकि उस समय कोई और रास्ता नहीं बचा था। यह पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1988 में पूर्ण रूप से प्रकाशित हुई — इसके 30 पृष्ठ उनके निर्देश पर 30 वर्षों के लिए सील किए गए थे।
30. 14/15 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि को अंतरिम संसद के रूप में किसने सत्ता ग्रहण की?
(a) केंद्रीय लेजिस्लेटिव असेम्बली
(b) संविधान सभा
(c) अंतरिम सरकार
(d) चैम्बर ऑफ प्रिंसेज
M.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
14-15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को संविधान सभा ने अंतरिम संसद के रूप में सत्ता ग्रहण की। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार जब तक नया संविधान नहीं बन जाता और नए विधानमंडल का गठन नहीं हो जाता, तब तक संविधान सभा ही डोमिनियन के केंद्रीय विधानमंडल के रूप में कार्य करेगी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी ऐतिहासिक सत्र में नेहरू ने अपना अमर भाषण ‘Tryst with Destiny’ दिया — “बहुत वर्ष पहले हमने नियति से एक वादा किया था और अब समय आ गया है कि हम अपना वचन पूरा करें।” भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई थी और इसने 26 नवंबर, 1949 को संविधान को अंगीकृत किया, जो 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।
31. भारत का अंतिम वायसराय था-
(a) लॉर्ड वेवेल
(b) लॉर्ड माउंटबेटन
(c) लॉर्ड लिनलिथगो
(d) आकिनलेक
M.P.P.C.S. (Pre) 2010
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(b)
भारत के अंतिम ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन थे। उन्होंने 24 मार्च, 1947 को लॉर्ड वेवेल के स्थान पर वायसराय का पद ग्रहण किया और 3 जून, 1947 को भारत विभाजन की योजना प्रस्तुत की। 15 अगस्त, 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के साथ ही वायसराय का पद समाप्त हो गया और वे स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लॉर्ड लिनलिथगो (1936-44) भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले वायसराय थे और उन्हीं के कार्यकाल में द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ तथा ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942) हुआ। लॉर्ड वेवेल (1943-47) ने 1946 में कैबिनेट मिशन आमंत्रित किया था किंतु वार्ताओं के गतिरोध के कारण उन्हें हटाकर माउंटबेटन को नियुक्त किया गया।
32. बिल्कुल प्रारंभ से भारत के राष्ट्रपति के पद पर आसीन व्यक्तियों का निम्नलिखित में से कौन एक सही क्रम है?
(a) सी. राजगोपालाचारी, राजेंद्र प्रसाद, जाकिर हुसैन, वी.वी. गिरि
(b) राजेंद्र प्रसाद, एस. राधाकृष्णन, वी.वी. गिरि, जाकिर हुसैन
(c) सी. राजगोपालाचारी, राजेंद्र प्रसाद, एस. राधाकृष्णन, फखरुद्दीन अली अहमद
(d) राजेंद्र प्रसाद, एस. राधाकृष्णन, जाकिर हुसैन, वी.वी. गिरि
U.P.P.C.S. (Pre) 2009
उत्तर-(d)
भारत के राष्ट्रपतियों का सही क्रम है — डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1950-62), डॉ. एस. राधाकृष्णन (1962-67), डॉ. जाकिर हुसैन (1967-69) और वी.वी. गिरि (1969-74)। डॉ. राजेंद्र प्रसाद एकमात्र राष्ट्रपति थे जो दो पूर्ण कार्यकाल (12 वर्ष) तक इस पद पर रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. जाकिर हुसैन कार्यकाल के दौरान पद पर रहते हुए निधन पाने वाले भारत के पहले राष्ट्रपति थे (मई 1969)। उनके बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति वी.वी. गिरि बने, जिन्होंने बाद में चुनाव लड़कर राष्ट्रपति पद जीता — यह चुनाव कांग्रेस में विभाजन का कारण बना और इंदिरा गांधी ने आधिकारिक उम्मीदवार के विरुद्ध गिरि का समर्थन किया।
33. स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि मंत्री थे-
(a) एम.सी. सीतलवाड़
(b) बी.आर. अंबेडकर
(c) कैलाश नाथ काटजू
(d) रफी अहमद किदवई
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि मंत्री डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर थे। महात्मा गांधी की सलाह पर उन्हें नेहरू मंत्रिमंडल में यह पद दिया गया। विधि मंत्री के रूप में उन्होंने संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में भारतीय संविधान के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई, इसीलिए उन्हें ‘भारतीय संविधान का जनक’ कहा जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. अंबेडकर ने 1951 में हिंदू कोड बिल पारित न होने के विरोध में मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया था। यह विधेयक महिलाओं को संपत्ति और विवाह संबंधी समान अधिकार देने से जुड़ा था। 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
34. 15 अगस्त, 1947 को निम्नलिखित में से कौन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष था?
(a) राजेंद्र प्रसाद
(b) जवाहरलाल नेहरू
(c) जे.बी. कृपलानी
(d) सरदार पटेल
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(c)
15 अगस्त, 1947 को भारत की स्वतंत्रता के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष जे.बी. कृपलानी थे। वे नवंबर 1946 के मेरठ अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए थे और नवंबर 1947 में त्यागपत्र देने तक इस पद पर रहे। उनके इस्तीफे के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद कांग्रेस अध्यक्ष बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मौलाना अबुल कलाम आजाद 1940-46 तक लगातार छह वर्षों तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, जो किसी भी नेता का सबसे लंबा अध्यक्षीय कार्यकाल था। जे.बी. कृपलानी उनके उत्तराधिकारी बने। उल्लेखनीय है कि जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बनने के बाद 1951-54 तक कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे।
35. स्वतंत्र भारत का अंतिम गवर्नर जनरल कौन था?
(a) सी. राजगोपालाचारी
(b) राजेंद्र प्रसाद
(c) लॉर्ड माउंटबेटन
(d) लॉर्ड कैनिंग
M.P.P.C.S. (Pre) 1998
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
46th B.P.S.C. (Pre) 2004
M.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) थे, जिन्होंने यह पद 1948 से 26 जनवरी, 1950 तक संभाला। 26 जनवरी, 1950 को भारत के गणतंत्र बनने पर यह पद समाप्त हो गया। वे 1952-54 तक मद्रास के मुख्यमंत्री भी रहे और 1959 में कांग्रेस छोड़कर ‘स्वतंत्र पार्टी’ की स्थापना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लॉर्ड कैनिंग 1858 में ब्रिटिश ताज (Crown) द्वारा भारत का शासन संभालने के बाद भारत के प्रथम वायसराय बने थे — इससे पहले वे गवर्नर जनरल थे। राजगोपालाचारी 1954 में भारत रत्न पाने वाले प्रथम व्यक्तियों में से एक थे — उन्हें सी. राजगोपालाचारी, एस. राधाकृष्णन और सी.वी. रमन को एक साथ यह सम्मान दिया गया।
36. भारत के विभाजन के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे-
(a) सी. राजगोपालाचारी
(b) जे.बी. कृपलानी
(c) जवाहरलाल नेहरू
(d) मौलाना अबुल कलाम आजाद
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(b)
भारत विभाजन के समय जे.बी. कृपलानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे। वे नवंबर 1946 के मेरठ अधिवेशन में अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे और नवंबर 1947 तक इस पद पर रहे। उनके त्यागपत्र के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृपलानी से पहले मौलाना अबुल कलाम आजाद 1940 से 1946 तक लगातार छह वर्षों तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे — यह किसी भी व्यक्ति का कांग्रेस में सबसे लंबा अध्यक्षीय कार्यकाल है। विभाजन के विरोध में होने के बावजूद आजाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने और 1956 तक इस पद पर रहे।
37. स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे-
(a) राजगोपालाचारी
(b) सुरेंद्र नाथ
(c) राजेंद्र प्रसाद
(d) बी.आर. अंबेडकर
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी थे, जिन्होंने जून 1948 में माउंटबेटन के स्थान पर यह पद ग्रहण किया और 26 जनवरी, 1950 तक इस पद पर रहे। वे स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर जनरल भी थे क्योंकि गणतंत्र की स्थापना के साथ यह पद समाप्त हो गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजगोपालाचारी (राजाजी) तमिल के著名 लेखक भी थे और उन्होंने रामायण तथा महाभारत का तमिल और अंग्रेजी में सरल पुनर्कथन किया। उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से असहमति जताई थी और जिन्ना से समझौते के लिए ‘राजाजी फॉर्मूला’ (1944) प्रस्तुत किया था, जिसे कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया था।
38. भारत के प्रथम एवं अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल थे—
(a) आर.एम. गोपाला
(b) डॉ. एस. राधाकृष्णन
(c) सी. राजगोपालाचारी
(d) रामानुज आचार्य
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2007
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(c)
सी. राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के एकमात्र भारतीय गवर्नर जनरल थे — वे इस पद पर आने वाले प्रथम भारतीय भी थे और अंतिम भी। 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के साथ गवर्नर जनरल पद की जगह राष्ट्रपति पद की स्थापना हुई और डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. एस. राधाकृष्णन गवर्नर जनरल नहीं बल्कि भारत के दूसरे राष्ट्रपति (1962-67) थे। इससे पहले वे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति (1952-62) भी रहे। उनके जन्मदिवस 5 सितंबर को पूरे देश में ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
39. लॉर्ड माउंटबेटन की अध्यक्षता में बनी विभाजन परिषद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किसने किया था?
(a) अबुल कलाम आजाद ने
(b) जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने
(c) राजेंद्र प्रसाद ने
(d) जे.बी. कृपलानी ने
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(b)
लॉर्ड माउंटबेटन की अध्यक्षता में गठित विभाजन परिषद में कांग्रेस की ओर से जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल सम्मिलित हुए, जबकि मुस्लिम लीग की ओर से जिन्ना और लियाकत अली खां ने प्रतिनिधित्व किया। इन्हीं विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप 3 जून, 1947 को माउंटबेटन योजना प्रस्तुत की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सरदार पटेल विभाजन के व्यावहारिक पक्षधर थे — उनका मानना था कि अखंड भारत में एक अस्थिर और आंशिक पाकिस्तान की तुलना में एक स्वतंत्र और सुदृढ़ भारत बेहतर है। स्वतंत्रता के बाद पटेल ने गृहमंत्री के रूप में 562 देशी रियासतों का भारत में विलय सुनिश्चित किया, जिसके कारण उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ और ‘भारत का बिस्मार्क’ कहा जाता है।
40. माउंटबेटन योजना (जून, 1947) ने निम्नलिखित में से किस (किन) प्रांत (प्रांतों) में लोक निर्णयार्थ (जनमत संग्रह) की संस्तुति की थी?
(a) सिंध
(b) बलूचिस्तान
(c) पश्चिम सीमांत प्रांत
(d) उपर्युक्त में से सभी
Jharkhand P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(d)
माउंटबेटन योजना (3 जून, 1947) के अनुसार पंजाब और बंगाल की प्रांतीय सभाओं को दो भागों में बैठकर विभाजन का निर्णय करना था। इसके अतिरिक्त उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत, सिंध, बलूचिस्तान और असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह (Referendum) का प्रावधान था, ताकि जनता स्वयं तय कर सके कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल होना चाहती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत में जनमत संग्रह के परिणामस्वरूप बहुमत पाकिस्तान के पक्ष में आया, जिससे वहाँ के कांग्रेसी नेता और ‘सीमांत गांधी’ खान अब्दुल गफ्फार खां बेहद निराश हुए। असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह में पाकिस्तान (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान, अब बांग्लादेश) के पक्ष में बहुमत आया, जिससे यह क्षेत्र भारत से अलग हो गया।
41. भारतीय स्वतंत्रता के समय अंग्रेजी महाराज था-
(a) जॉर्ज पंचम्
(b) जॉर्ज षष्ठम्
(c) राजा एडवर्ड सप्तम्
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Jharkhand P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(b)
15 अगस्त, 1947 को भारत की स्वतंत्रता के समय ब्रिटेन का सम्राट जॉर्ज षष्ठम् था। उसे दिसंबर 1936 में सम्राट घोषित किया गया था जब उसके बड़े भाई एडवर्ड अष्टम् ने वालिस सिम्पसन से विवाह के लिए सिंहासन त्याग दिया था। जॉर्ज षष्ठम् फरवरी 1952 में निधन तक सम्राट रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जॉर्ज पंचम् (1910-36) वह ब्रिटिश सम्राट थे जो 1911 में दिल्ली दरबार में स्वयं भारत आए थे — यह किसी ब्रिटिश सम्राट का भारत का एकमात्र दौरा था। जॉर्ज षष्ठम् के निधन के बाद उनकी पुत्री एलिजाबेथ द्वितीय 1952 में रानी बनीं, जो 2022 में अपने निधन तक 70 वर्षों से अधिक समय तक शासन करने वाली ब्रिटेन की सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली सम्राज्ञी बनीं।
42. संविधान को 26 जनवरी के दिन लागू करने का निर्णय इसलिए किया गया, क्योंकि-
(a) यह एक शुभ दिन था।
(b) इस तिथि को 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ किया गया था।
(c) कांग्रेस ने इस तिथि को 1930 में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया था।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(c)
भारत का संविधान 26 नवंबर, 1949 को ही तैयार हो गया था, किंतु इसे 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया। इसके पीछे कारण यह था कि 26 जनवरी, 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929) के प्रस्ताव के अनुसार पूर्ण स्वराज की मांग करते हुए इसे ‘स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाया था। इस ऐतिहासिक तिथि को अमर बनाए रखने के लिए 26 जनवरी को ‘गणतंत्र दिवस’ के रूप में चुना गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 26 जनवरी, 1930 के उस ऐतिहासिक दिन देश भर में रावी नदी के तट पर जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा फहराते हुए पूर्ण स्वराज की शपथ दिलाई थी। 1930 से 1947 तक प्रतिवर्ष 26 जनवरी को ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाने की परंपरा रही, जो 15 अगस्त, 1947 के बाद गणतंत्र दिवस में परिवर्तित हो गई।
43. निम्नलिखित में से किसने कहा कि “ब्रिटिश शासन की सबसे अधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत का एकीकरण था”?
(a) के.एम. पणिक्कर
(b) एन.एन. श्रीनिवास
(c) रजनी कोठारी
(d) योगेंद्र सिंह
U.P. P.C.S.(Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(a)
प्रसिद्ध इतिहासकार और कूटनीतिज्ञ के.एम. पणिक्कर ने कहा था कि “ब्रिटिश शासन की सबसे अधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत का एकीकरण था।” उनका मत था कि विभिन्न रियासतों और प्रांतों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य ब्रिटिश प्रशासनिक ढांचे की देन था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: के.एम. पणिक्कर (कावलम माधव पणिक्कर) एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे — इतिहासकार, राजनयिक और लेखक। वे स्वतंत्र भारत में चीन (1948-52), मिस्र और फ्रांस में राजदूत रहे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Asia and Western Dominance’ (1953) एशियाई देशों पर यूरोपीय उपनिवेशवाद के प्रभाव का गहन विश्लेषण करती है।
44. अगस्त, 1947 में स्वतंत्रता दिवस के समारोहों में निम्नलिखित में से कौन नेता कहीं भी सम्मिलित नहीं हुआ?
(a) जवाहरलाल नेहरू
(b) महात्मा गांधी
(c) वल्लभभाई पटेल
(d) राजेंद्र प्रसाद
U.P.P.C.S (Mains) 2016
उत्तर-(b)
15 अगस्त, 1947 को जब पूरा देश स्वतंत्रता का उत्सव मना रहा था, महात्मा गांधी किसी भी समारोह में सम्मिलित नहीं हुए। वे उस समय कलकत्ता (कोलकाता) में सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए उपवास पर थे और हिंदू-मुस्लिम एकता की अपील कर रहे थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कलकत्ता में गांधीजी की उपस्थिति और उपवास का इतना प्रभाव पड़ा कि माउंटबेटन ने कहा था कि जहाँ पंजाब में शांति बनाए रखने के लिए 55,000 सैनिक लगाने पड़े, वहीं बंगाल में गांधीजी अकेले ही ‘वन मैन बाउंड्री फोर्स’ की भूमिका निभा रहे थे। गांधीजी की हत्या 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने की, जो विभाजन के लिए गांधीजी को दोषी मानता था।
45. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1946 में मेरठ में आयोजित अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?
(a) जे.बी. कृपलानी
(b) मौलाना अबुल कलाम आजाद
(c) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(d) बी. पट्टाभि सीतारमैया
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Pre) 2010
उत्तर-(a)
नवंबर 1946 में मेरठ में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्षता जे.बी. कृपलानी ने की थी। इसी अधिवेशन में वे कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए और नवंबर 1947 तक इस पद पर रहे। यही कारण है कि भारत के विभाजन और स्वतंत्रता (1947) के समय वे कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मेरठ अधिवेशन से पहले 1940-46 तक मौलाना अबुल कलाम आजाद लगातार छह वर्षों तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे — यह कांग्रेस इतिहास का सबसे लंबा अध्यक्षीय कार्यकाल है। बी. पट्टाभि सीतारमैया ने 1948 के जयपुर अधिवेशन में कृपलानी के इस्तीफे और राजेंद्र प्रसाद के संक्षिप्त कार्यकाल के बाद कांग्रेस की अध्यक्षता संभाली।
46. अंग्रेजों द्वारा भारतीयों को 1947 में सत्ता हस्तांतरित किए जाने के समय कांग्रेस अध्यक्ष कौन था?
(a) जवाहरलाल नेहरू
(b) राजेंद्र प्रसाद
(c) अबुल कलाम आजाद
(d) जे.बी. कृपलानी
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
15 अगस्त, 1947 को जब ब्रिटेन ने भारतीयों को सत्ता हस्तांतरित की, उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष जे.बी. कृपलानी थे। वे नवंबर 1946 के मेरठ अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए थे। सत्ता हस्तांतरण के बाद नवंबर 1947 में उन्होंने त्यागपत्र दे दिया, जिसके बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद कांग्रेस अध्यक्ष बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जे.बी. कृपलानी ने बाद में कांग्रेस छोड़कर 1951 में ‘किसान मजदूर प्रजा पार्टी’ की स्थापना की। 1952 के पहले आम चुनाव के बाद यह पार्टी सोशलिस्टों के साथ मिलकर ‘प्रजा सोशलिस्ट पार्टी’ बन गई। कृपलानी एक निर्भीक संसदीय वक्ता के रूप में प्रसिद्ध थे और अपनी पत्नी सुचेता कृपलानी के साथ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदार रहे।
47. “भारतीय राष्ट्रवाद ब्रिटिश राज का शिशु था।” यह कथन किसका है?
(a) बिपिन चंद्र
(b) आर. कोपलैंड
(c) आर.सी. मजूमदार
(d) पी.ई. रॉबर्ट्स
U.P. P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(b)
ब्रिटिश इतिहासकार आर. कोपलैंड ने लिखा था कि “भारतीय राष्ट्रवाद तो अंग्रेजी राज की ही संतति थी।” उनका तात्पर्य यह था कि ब्रिटिश शासन ने अनजाने में ही भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना जगाई — अंग्रेजी भाषा, रेल, डाक-तार और पश्चिमी शिक्षा जैसी चीजें भारतीयों को एकजुट करने का माध्यम बनीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस विचार से असहमत भारतीय इतिहासकार बिपिन चंद्र का मत था कि भारतीय राष्ट्रवाद की जड़ें भारत की अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं में हैं, न कि ब्रिटिश शासन में। आर.सी. मजूमदार भी एक प्रमुख राष्ट्रवादी इतिहासकार थे जिन्होंने ‘History and Culture of the Indian People’ जैसी बहुखंडीय रचना से भारतीय इतिहास लेखन को समृद्ध किया।

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