अशोक के अभिलेख: प्रकार, भाषा और महत्व

📚 विषय सूची
अशोक के अभिलेख

➣ अशोक शिलाओं पर सन्देश खुदवाने वाला प्रथम भारतीय शासक था। अशोक के अभिलेख राज्यादेश के रूप में जारी किये गए। जिसकी प्रेरणा उसने ईरानी शासक दारा प्रथम (डेरियस) से मिली थी।

➣ ज्ञातव्य हो दारा प्रथम हखमानी साम्राज्य से था। जिसने 500 ई..पू के लगभग सर्वप्रथम भारत पर सफल आक्रमण किया था।

➣ अशोक के अभिलेख पालि भाषा में लिखे गए हैं। इन अभिलेखों के माध्यम से अशोक ने अपने सन्देश जनता व सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाएं थे।

अभिलेखों के प्रकार

➣ अशोक के अभिलेखों का विभाजन निम्नलिखित वर्गों में किया जा सकता है-

अशोक के अभिलेख की भाषा

➣ 1. शिला लेख यह लेख पहाड़ों को काटकर शिलाखण्डों को समतल कर उस पर उत्कीर्ण किया जाता था।

➣ 2. स्तंभ लेख प्राकृतिक शिलाओं की प्रचुर अनुपलब्धता के कारण पत्थरों से तैयार कृत्रिम स्तंभों पर उत्कीर्ण लेख जिसको अन्य स्थलों पर आसानी से स्थान्तरित किया जा सकता है।

➣ 3. गुहा लेख यह लेख धार्मिक सहिष्णु सम्राटों द्वारा साधु-संतों तथा बौद्ध भिक्षुकों को निवास हेतु बनाये गये, पहाड़ी गुहाओं में दान देने व दान लेने वालों की जानकारी हेतु उत्कीर्ण लेख थे।

  • अशोक का सबसे लम्बा अभिलेख भाब्रू लघु शिलालेख है।
  • अशोक का सबसे छोटा अभिलेख रूम्मिनदेई स्तम्भ लेख है।
  • सबसे लम्बा स्तम्भ लेख संख्या-7 है।
  • अशोक के शिलालेखों से उसके शासन के 8वें वर्ष से 29वें वर्ष तक की घटनाओं की जानकारी मिलती है।
  • अशोक के वृहद् शिलालेखों की संख्या चौदह है, जो आठ स्थानों से प्राप्त हुए हैं (कुछ स्रोतों में सात स्थान)।

अशोक के अभिलेखों के खोजकर्ता

शिलालेख खोजकर्तावर्ष
धौली अभिलेख किट्टो1837 ई.
भाब्रू शिलालेखकैप्टन बर्ट1840 ई.
बराबर व नागार्जुनी गुफा हैरिंग्टन1785 ई.
दिल्ली-टोपराकैप्टन पोलियर1785 ई.
दिल्ली-मेरठ स्तम्भ लेख पैड्रे टीपैन्थेलर1750 ई.
मानसेहराकैप्टन ले1889 ई.
कालसी शिलालेख जॉन फॉरेस्ट1860 ई.
रुम्मिनदेईफिहरर1896 ई.
जौगढ़ अभिलेखसर वाल्टर इलियट1850 ई.
गिरनार शिलालेखलेफ्टिनेंट कर्नल टाड1822 ई.
शहबाजगढी फ्रांसीसी अधिकारी 1836 ई.
इलाहाबाद स्तंभ लेखटी.एस. बर्ट1834 ई.
मास्की अभिलेखबीडेन1915 ई.
निगालि सागरफिहरर1895 ई.
रामपुरवाकार्लाइल1872 ई.
सारनाथ स्तंभऑरेल स्टाइन1905 ई

➣ अशोक के शिलालेख ब्राह्मी, ग्रीक, अरमाइक तथा खरोष्ठी लिपि में उत्कीर्ण हैं, जबकि सभी स्तम्भ लेख प्राकृत भाषा में हैं। शाहबाजगढ़ी तथा मानसेहरा के शिलालेख की लिपि खरोष्ठी है।

➣ 1750 में टीफेन्थैलर ने सबसे पहले दिल्ली में अशोक के स्तम्भ का पता लगाया था, किंतु अशोक के अभिलेखों को सबसे पहले जेम्स प्रिंसेप ने 1837ई. में पढ़ने में सफलता प्राप्त की।

➣ 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने ही ब्राह्मी लिपि में लिखी देवनामपिय प्रियदरसी (देवताओं का प्रिय) से अशोक का समीकरण स्थापित किया।

भब्रू अभिलेख सिर्फ बौद्ध भिक्षुओं के लिए था, जनता के लिए नहीं। भन्नू अभिलेख में अशोक ने बौद्ध त्रिरत्न (बुद्ध, धम्म, संघ) को नमस्कार किया है और बौद्ध शास्त्रों से चुने हुए अंश उद्धृत किये हैं।

धौली तथा जौगढ़ के शिलालेख पृथक् कलिंग लेख कहलाते हैं। इसमें सभी मनुष्यों को अपनी सन्तान बताया गया है।

भब्रू अभिलेख एकमात्र स्तम्भ है, जिसमें अशोक ने स्वयं को मगध का सम्राट बताया। अशोक के भाब्रू शिलालेख में धम्म का उल्लेख मिलता है।

➣ अशोक के शिलालेख निम्नलिखित स्थानों से प्राप्त हुयें हैं –

1. शाहबाजगढ़ीपेशावर
2. मानसेहराहजारा
3. कालसी देहरादून, उत्तराखण्ड
4. गिरनारकाठियावाड़ में जूनागढ़ के समीप गिरनार की पहाड़ी
5. धौली पुरी , उड़ीसा
6. जौगढ़ उड़ीसा के गंजाम
7. एरागुडि कुर्नूल , आन्ध्र प्रदेश
8. सोपारा थाणे, महाराष्ट्र प्रान्त

1.शिलालेख

➣ अशोक के शिलालेख को दो वर्गों में बांटा गया है – वृहत शिलालेखलघु शिलालेख

➣ वृहत शिलालेखों में सम्राट अशोक के 14 प्रमुख शिलालेख हैं –

शिलालेख 1 व 2: पशुबलि की निंदा तथा मनुष्यों एवं पशुओं के चिकित्सा संबंधी प्रबंध का वर्णन।
शिलालेख 3: व्यवहार के सनातन नियमों का वर्णन तथा राजकीय पदाधिकारियों को आदेश कि वे प्रत्येक 5 वर्ष के बाद दौरे पर जायें।
शिलालेख 4: व्यवहार के सनातन नियमों की व्याख्या।
शिलालेख 5: धम्ममहामात्रों की नियुक्ति एवं कार्यों का निर्देश।
शिलालेख 6: आत्म नियंत्रण पर बल।
शिलालेख 7 व 8: अशोक की तीर्थयात्रा का वर्णन।
शिलालेख 9: वास्तविक उत्पादन और वास्तविक कार्यों का वर्णन।
शिलालेख 10: राजा और उसके उच्च अधिकारियों को हमेशा जनहित के कार्यों में लगे रहने का अनुदेश।
शिलालेख 11: धम्म विजय की विशेषताओं का वर्णन।
शिलालेख 12: धार्मिक सहिष्णुता पर बल।
शिलालेख 13: कलिंग युद्ध का वर्णन तथा अशोक के हृदय परिवर्तन का मार्मिक चित्रण।
शिलालेख 14: जनता से धम्म का जीवन ग्रहण करने की अपील।

लघु शिलालेख

➣ ये शिलालेख 14 वृहत शिलालेख में सम्मिलित नहीं किये गए हैं इसलिए इन्हे लघु शिलालेख कहा गया है।

➣ ये चौदह शिलालेखों के मुख्य वर्ग के अतिरिक्त हैं तथा लघु शिलालेखों को लघु शिलालेख संख्या 1 एवं लघु शिलालेख संख्या 2 में बाँटा गया है।

➣ ये निम्नलिखित स्थानों से प्राप्त हुए हैं-

1. रूपनाथ जबलपुर, मध्य प्रदेश
2. गुजर्रा दतिया, मध्य प्रदेश
3. सहसराम बिहार
4. भाब्रू बैराठ, जयपुर
5.मास्की रायचूर, कर्नाटक
6. ब्रह्मगिरी चित्तलदुर्ग, कर्नाटक
7. सिद्धपुर चित्तलदुर्ग, कर्नाटक
8. जटिंगरामेश्वर चित्तलदुर्ग, कर्नाटक
9. एरंगुडि कर्नूल, आन्ध्र प्रदेश
10. गोविमठ मैसूर, कर्नाटक
11. पालकिगुण्डु मैसूर, कर्नाटक
12. राजुल मंडगिरी कर्नूल, आन्ध्र प्रदेश
13. अहरौरा मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश
14. सारोमारो शहडोल, मध्य प्रदेश
15. नेटूर मैसूर, कर्नाटक
16. उदेगोलम् बेलारी, कर्नाटक
17. सन्नाती गुलबर्गा, कर्नाटक
18. पनगुडरिया बुधनी, मध्य प्रदेश

पनगुडरिया लघु शिलालेख में अशोक को महाराज कुमार कहा गया है।

➣ 1986 ई. में सन्नाती से अशोक का नवीनतम् शिलालेख मिला है, जिसमें 12वें एवं 14वें वृहत्त् शिलालेख के कुछ अंश मिलते हैं।

भाब्रू के दो शिलालेख जयपुर के बैराठ में बीजक की पहाड़ियों से 1837 ई. में कैप्टन बर्ट द्वारा खोजे गये। यह अशोक को बौद्ध प्रमाणित करने का सबसे बड़ा अभिलेखीय साक्ष्य है।

➣ भाब्रू अभिलेख वर्तमान में कलकत्ता संग्रहालय में है। इसमें बौद्ध धर्म के त्रिरत्नों- बुद्ध, धम्म एवं संघ में आस्था प्रकट करते हैं।

अहरौरा लघु शिलालेख में अशोक 256 रातें स्तूप निर्माण हेतु भ्रमण में बिताने का उल्लेख करता है।

➣ अशोक का सबसे दक्षिणी अभिलेख एर्रगुडि लघु शिलालेख है। एर्रगुडि लघु शिलालेख एकमात्र अभिलेख है जो खरोष्ठी एंव ब्राही दोनों लिपि में है।

➣ अशोक के एर्रगुडि लघु शिलालेख में करगिक नामक अधिकारी का उल्लेख मिलता है, जो लेखाधिकारी का कार्य करता था।

सबसे दक्षिणी स्तम्भ लेख अमरावती वृहत् शिलालेख है। अमरावती वृहत् शिलालेख जीर्ण-शीर्ण अवस्था में मिला है।

➣ अशोक का व्यक्तिगत नाम केवल मास्की, गुर्जरा. नेटटूर और उदेगोलम में मिलता है। सर्वप्रथम कर्नाटक के मास्की अभिलेख में अशोक नाम पढ़ा गया था। अन्य सभी में उसे देवप्रिय से सम्बोधित किया गया है।

भब्रू अभिलेख सिर्फ बौद्ध भिक्षुओं के लिए था, जनता के लिए नहीं। भन्नू अभिलेख में अशोक ने बौद्ध त्रिरत्न (बुद्ध, धम्म, संघ) को नमस्कार किया है और बौद्ध शास्त्रों से चुने हुए अंश उद्धृत किये हैं।

धौली तथा जौगढ़ के शिलालेख पृथक् कलिंग लेख कहलाते हैं। इसमें सभी मनुष्यों को अपनी सन्तान बताया गया है।

भब्रू अभिलेख एकमात्र स्तम्भ है, जिसमें अशोक ने स्वयं को मगध का सम्राट बताया। अशोक के भाब्रू शिलालेख में धम्म का उल्लेख मिलता है।

2.स्तम्भ लेख

➣ अशोक के कुछ पाषाण स्तम्भों पर भी उत्कीर्ण हैं। जिसके कारण ये स्तम्भ लेख कहलाये। इन्हे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह स्थान्तरित किया जा सकता है।

➣ अशोक के स्तम्भ लेखों को वृहत स्तम्भ लेख तथा लघु स्तम्भ लेख में विभाजित किया गया है-

वृहत स्तंभ लेख

दिल्ली टोपरा स्तंभ लेख दिल्ली
दिल्ली मेरठ स्तंभ लेख दिल्ली
लौरिया अरराज स्तंभ लेख चम्पारण, बिहार
लौरिया नन्दनगढ़चम्पारण, बिहार।
रामपुरव स्तंभ लेख चम्पारण, बिहार।
प्रयाग स्तंभ लेख इलाहाबाद

मेरठ स्तम्भ लेख, प्रारम्भ में उत्तर प्रदेश सहारनपुर (खिज्राबाद) जिले में तथा टोपरा स्तम्भ लेख हरियाणा में स्थापित था। मध्य युग में तुगलक शासक फिरोजशाह तुगलक द्वारा इन्हे दिल्ली लाया गया। जिसमे मेरठ स्तम्भ लेख मुग़ल शासक फरुखसियर के शासनकाल में खंडित हो गया।

➣ प्रयाग- यह पहले कौशाम्बी में था, जो बाद में अकबर द्वारा इलाहाबाद के किले में लाया गया।

लघु स्तम्भ लेख

➣ अशोक के कुछ स्तम्भों पर एक-एक लेख हैं , जिन्हे लघु स्तम्भ की श्रेणी में रखा गया है। लघु स्तम्भ लेख में अशोक की राजकीय घोषणाएँ उत्कीर्ण हैं –

1. सांची स्तम्भ लेखरायसेन जिला, मध्यप्रदेश
2, सारनाथ स्तम्भ लेखवाराणसी, उत्तर प्रदेश
3. कौशाम्बी/इलाहबाद स्तम्भ लेखइलाहाबाद के समीप
4. रुम्मिनदेई स्तम्भ लेखनेपाल की तराई में स्थित
5. निग्लीवा स्तम्भ लेख निग्लीवा सागर

सांची-सारनाथ-कौशाम्बी के लघु स्तम्भ लेख में अशोक अपने महापात्रों को संघ भेद रोकने का आदेश देता है।

कौशाम्बी स्तम्भ लेख में अशोक की रानी कारूवाकी के दान का उल्लेख मिलता है। इसलिए इसे रानी का लेख भी कहते हैं। अभिलेखों में केवल इसी रानी का उल्लेख है।

रुम्मिनदेई स्तम्भ में अशोक द्वारा धर्मयात्रा पर जाने का विवरण है। रुम्मिनदेई अभिलेख के अनुसार, अशोक ने लुबिनी ग्राम (बुद्ध का जन्म स्थल) से उत्पादन का राज्य कर 1 /6 भाग घटाकर मात्र 8वां भाग कर दिया था।

➣ निग्लीवा स्तम्भ के लेख में कनकमुनि के स्तूप के संवर्द्धन की चर्चा हुई है। 14वें वर्ष कनकमुनि बुद्ध के स्तूप का दूसरी बार संवर्द्धन कर आकार दो गुना किया।

3.गुहा-लेख

➣ दक्षिणी बिहार के गया जिले में स्थित बराबर नामक पहाड़ी को काटकर गुफाओं की दीवारों पर अशोक के गुहा लेख उत्कीर्ण मिले हैं। इन्हें अशोक द्वारा आजीवक साधुओं को दान दिया था

1. नयग्रोध/सुरामा गुहा, 2.. विश्व झोपड़ी गुफा, 3. कर्ण-चौपड़ गुफा।

➣ ये सभी अभिलेख प्राकृत भाषा में तथा ब्रह्मी लिपि में लिखे गये हैं। केवल 2 अभिलेखों (1.शाहबाजगढ़ी, 2.मानसेहरा) की लिपि खरोष्ठी है, किन्तु इन दोनों में प्राकृत भाषा है।

➣ अशोक ने आजीवकों के निवास हेतु तीन गुफाओं का निर्माण करवाया जिनके नाम हैं- कर्ण चौपार, सुदामा तथा विश्व झोपड़ी।

नागार्जुनी गुहालेख अशोक के पौत्र दशरथ ने उत्कीर्ण कराये।

मास्की एवं गुजर्रा लेख में अशोक का व्यक्तिगत नाम देवनांप्रिय मिलता है, जबकि नेटूर लेख में अशोक के अपने नाम का उल्लेख मिलता है।

➣ तक्षशिला से अरामेईक लिपि में लिखा गया एक भग्नल अभिलेख, कंदहार के पास शरे कुना नामक स्थल से यूनानी तथा अरामेईक लिपियों में लिखा गया द्विभाषीय अभिलेख, काबुल नदी के बायें किनारे पर जलालाबाद के ऊपर स्थित लघमान (काबुल) नामक स्थान से अरामेईक लिपि में लिखा गया अशोक का अभिलेख प्राप्त हुआ है।

📚 Chapters

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Swipe left/right to change content

    Share This Page

    WhatsApp Telegram