पाषाणकालीन सभ्यता : जीवन शैली एक नजर में

पुरापाषाण युग

➣ पृथ्वी की उत्पति 4600 मिलियन वर्ष पूर्व मानी गयी है। जबकि पृथ्वी पर 3500 मिलियन वर्ष पूर्व जीवन अस्तित्व में आया।

➣ प्रथम मानव लगभग 30 करोड़ वर्ष, जो एक लंगूर जैसा था, हुआ।

➣ मानव विकास के क्रम में लगभग 6 करोड़-60 लाख वर्ष होमिनिडास नामक जीव दक्षिण व पूर्वी अफ्रीका में रहता था।

➣ प्राचीनतम मानव के रूप में जिस जीव का विकास हुआ था वह तक़रीबन 30 मिलियन वर्ष पहले विकसित हुआ था। मानव विकास के क्रम में आस्ट्रलोपेथीकस नामक प्राणी को महत्वपूर्ण माना गया है।

➣ यह प्राचीन पुरापाषाण का काल था। इस समय मानव जीव को खेती करना, आग जलाना और बर्तन बनाने जैसी कला का ज्ञान नहीं था।

➣ सम्भवत: वह ऐसे फलों एवं सब्जियों, कंद-मूलों (खाद्य संग्रह) पर जीवन व्यतीत करते जो जंगलों में उपजते थे।

➣ 1. 8 सहस्त्राब्दी वर्ष मानव विकास के क्रम होमो इरेक्टस अस्तित्व में आया। सम्भवः है यह काल पुरापाषाण युग का मध्य काल ( लगभग 1 लाख से 40 हजार ई. पू.) था। इस समय मानव जीव पत्थर का उपयोग करने लग गया था। पत्थर की बनी पहली हाथ कुल्हाड़ी एंव आग की खोज इस समय की महत्वपूर्ण दें थी।

➣ मानव शिकार करना सीख गया था। परन्तु पशुपालन , खेती व अभी तक नहीं हुआ था। हालाँकि भाषा का ज्ञान हो गया। इसलिए इस युग को शिकार एंव खाद्य संग्रह युग नाम से भी जाना जाता है।

➣ आधुनिक मानव होमो सेपियंस सेपियंस दक्षिण अफ्रीका में , उत्तर पुरापाषाण युग यानि पुरापाषाण युग के अंत में अस्तित्व में आये। यह हिमयुग की अंतिम अवस्था थी जब बर्फ पिघलने लगी।

➣ पुरापाषाण युग के पश्चात् मध्यपाषाण युग की शुरुवात होती है। यह युग उत्तर पाषाण काल के अंत तथा नवपाषाण काल के मध्य का काल था।

➣ इस समय जलवायु गर्म होने लग गयी। जलवायु परिवर्तन ने जीव और वनस्पतियों में परिवर्तन लाए। पर्याप्त वर्षा व सघन वनस्पति ने मानव जीवन का नया अध्याय आरम्भ किया।

➣ इसमें मानव को पशुपालन ज्ञान हो जाता है। उनके द्वारा पहला पाला गया पशु कुत्ता था। इसलिए इसे पशुपालन युग भी कहा जाता है।

शिकार (पुरापाषाण युग की देन) के लिए बने हथियार अभी भी पत्थर या पाषाण के थे मानव को अभी खेती तथा धातु का ज्ञान नहीं था।

नव पाषाण युग (7 हजार – 7000 ई. पू.)

➣ मध्यपाषाण युग के पश्चात् नव पाषाण युग का उदय होता है इस युग में मानव-जीवन में बहुत अधिक परिवर्तन आया।

खेती के साथ-साथ मिटटी के बर्तन बनाना सीख गया। मानव द्वारा पहला उपयुक्त अनाज जौ था।

➣ क्योंकि नव पाषाण युग के लोगों को अन्न उगाने का श्रेय जाता है इसलिए इस युग को अन्न उत्पादक युग भी कहा जाता है।

➣ नव पाषाण युग में मानव को धातु का ज्ञान हो गया था। वे लोग धातु और पत्थर-शिल्प के कुशल कारीगर बने। काल के अंत तक उसे कताई व बुनाई का भी ज्ञान हो गया।

➣ मानव अब सामाजिक ढांचे में ढलने लग गया था। अंतिम संस्कार और धार्मिक क्रियाकलाप अस्तित्व में आये। अब मृत मानव शरीर को अस्थि – कलश में अपने घर के निचे उत्तर – दक्षिण की स्थिति में समाधिस्थ करते थे। साथ ही देवी देवताओं की पूजा होने लगी थी।

हालाँकि मध्यपाषाण काल में पहली बार मानव कंकालों को विधिवत रूप से दफ़न करने की प्रकिया शुरू हुई थी।

➣ धातु के आधार पर समय को तीन भागों में बांटा गया है – ताम्र युग (तांबा ), कांस्य युग (हड़प्पा संभ्यता), लौह युग (लगभग 1200 ई. पू. तक )

➣ मानव द्वारा प्रयोग की जाने वाली पहली धातु तांबा थी। वह पाषाण व तांबे का साथ साथ प्रयोग करने लगे इसलिए इस धातु के प्रारंभिक उपयोग को ताम्र पाषाण युग नाम से भी जाना जाता है।

सिंधु घाटी सभ्यता यानी हड़प्पा संभ्यता नवपाषाण काल के कांस्य युग से ही सम्बंधित है। इसलिए हड़प्पा संभ्यता को कांस्य युगीन संभ्यता नाम से भी जाना जाता है। इसके आलावा मेसोपोटामिया , मिस्र सभ्यता व् चीनी सभ्यता समकालीन रहे।

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