❑ बैक्ट्रियाई शासकों का इतिहास उनके सिक्कों के आधार पर लिखा गया है।
❑ बैक्ट्रियाई या यूनानी वंश की दो शाखायें थीं- (1) यूथेडेमस वंश (2) यूक्रेटाइड्स वंश।
❑ यूथेडेमस वंश की राजधानी स्यालकोट या साकल थी।
❑ यूक्रेटाइड्स वंश की राजधानी तक्षशिला थी।
❑ भारत के भीतरी भाग में प्रवेश करने वाला पहला यूनानी शासक डेमेट्रियस था।
❑ डेमेट्रियस ने अपने पिता की स्मृति में यूथीडेमिया नामक नगर बसाया।
❑ मिलिन्द अथवा मिनाण्डर की बौद्धमत के प्रति बहुत श्रद्धा थी।
❑ मिलिन्दपंन्हो नामक ग्रन्थ में मिनाण्डर एवं बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीचसंवाद का संकलन है।
❑ युक्रेटाइडिस को यूनानी स्रोतों में एशिया का संरक्षक कहा गया है।
❑ भारत में सबसे पहले सोने के सिक्के यूनानियों ने जारी किये थे।
❑ सिक्कों पर राजाओं के चित्र एवं तिथि लेखन की परिपाटी यूनानियों ने ही बाद में गांधार शैली का रूप लिया।
❑ यूनानियों ने ही भारतीयों को हेलनेस्टिक कला से परिचित कराया, जिसने भारत में पहला पार्थियन या पहलव शासक माउस (90 ई. पू.-70 ई. पू.) था।
❑ पहलवों का मूल स्थान ईरान में था।
❑ गोन्डोफर्निस पहलव वंश का सबसे शक्तिशाली शासक था। इसके शासनकाल का एक अभिलेख तख्तेबही पेशावर से प्राप्त हुआ है।
❑ गोन्डोफर्निस के समय ही इसाई धर्म प्रचारक सेन्ट थॉमस भारत आया था।
❑ पहलवों के सिक्कों का भण्डार तक्षशिला में सिरकप के पास खुदाई मिला है।
❑ भारत में यूनानियों के बाद शक आये थे।
❑ शक मूलतः मध्य एशिया के निवासी थे।
❑ शक चारागाह की खोज में भारत आए थे।
❑ भारत के शक राजा अपने आप को क्षत्रप कहते थे।
❑ भारत में शकों की दो शाखायें थी, जो पश्चिमी भारत में केन्द्रित थी-(1) क्षहरात (2) कार्द्धमक
❑ क्षहरात शक महाराष्ट्र के नासिक में केन्द्रित थे।
❑ कार्द्धमक सौराष्ट्र-क्षेत्र के उज्जैन में केन्द्रित थे।
❑ क्षहरात वंश का पहला शासक माउस या मोग था।
❑ नहपान ने क्षत्रप और महाक्षत्रप दोनों ही उपाधियाँ धारण की थी। नहपान ने महाराष्ट्र का एक बड़ा भाग सातवाहनों से छीना था।
❑ प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र भड़ौच पर क्षहरातों का कब्जा था।
❑ कार्द्धमक शक शाखा का संस्थापक यशोमितिक था।
❑ कार्द्धमक शाखा का सबसे प्रसिद्ध शासक रुद्रदामन (130-150 ई०) था। साथ ही शकों का सबसे प्रतापी राजा भी हुआ।
❑ रुद्रदामन के सम्बन्ध में जानकारी उसके गिरनार (जूनागढ़) अभिलेख से मिलती है।
❑ जूनागढ़ अभिलेख संस्कृत भाषा में लिखा पहला बड़ा शिलालेख है।
❑ काठियावाड़ के सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार रुद्रदामन I द्वारा कराया गया।
❑ शुदर्शन झील का निर्माण किया गया था-मौर्यो द्वारा।
❑ कार्द्धमक वंश का अंतिम् शासक रुद्र सिंह द्वितीय था।
❑ उज्जैन के एक स्थानीय राजा ने शकों को 58 ई.पू. पराजित कर विक्रमादित्य की उपाधि धारण की।
❑ शकों पर विजय के उपलक्ष्य में शुरू किया गया शवत-विक्रम संवत (58 ई.पू.)।
❑ गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त II सबसे अधिक विख्यात विक्रमादित्य था।
❑ भारत में कुषाण वंश की स्थापना कुजुल कडफिसेस ने 15 ई० में की।
❑ चीनी स्रोतों के अनुसार कुषाण चीन के पश्चिमोत्तर क्षेत्र के यू-ची कबीले के थे।
❑ कुजुल कडफिसेस ने काबुल और कश्मीर में हरमोयर्स को हराकर अपना राज्य स्थापित किया।
❑ कुजुल कडफिसेस ने केवल ताँबे के सिक्के चलवाये।
❑ कुजुल कडफिसेस के बाद विम कडफिसेस (65 ई. में) राजा बना।
❑ विम कडफिसेस ने सोने एवं ताँबे के सिक्के जारी किये।
❑ यद्यपि उसके ताम्र तथा रजत (चाँदी) के सिक्के भी मिले हैं तथापि स्वर्ण सिक्के की संख्या अधिक है।
❑ भारत में सर्वप्रथम यूनानियों ने ही सोने के सिक्के किए, जिनकी मात्रा कुषाणों के शासन काल में बढ़ी।
❑ कुषाण शासकों ने स्वर्ण एवं ताँबा दोनों ही प्रकार के सिक्कों को प्रचलित किया था।
❑ विम कडफिसेस ने महाराज, राजाधिराज, महेश्वर एवं सर्वलोकेश्वर की उपाधि धारण की।
❑ विम कडफिसेस के सिक्कों पर शिव, नन्दी एवं त्रिशूल की आकृति खुदी थी।
❑ विम कडफिसेस शैव धर्म को मानता था।
❑ कुषाण वंश का सबसे प्रतापी शासक कनिष्क था।
❑ कनिष्क 78 ई. में राजा बना तथा कनिष्क ने 78 ई. में शक संवत् शुरू किया था। यही आजकल भारत का राष्ट्रीय पंचांग है।
❑ कनिष्क की राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) थी।
❑ कनिष्क की द्वितीय राजधानी मथुरा में थी।
❑ कनिष्क ने पाटलिपुत्र के शासक को हराकर, वहाँ से विद्वान अश्वघोष, बुद्ध का भिक्षापात्र एवं एक अनोखा मुर्गा साथ लाया।
❑ कनिष्क ने कश्मीर विजय के बाद वहाँ कनिष्कपुर नगर बसाया।
❑ कनिष्क की सबसे महत्वपूर्ण विजय चीन के यारकंद, खोतान तथा काशगर की विजय थी।
❑ कुषाण राजा देवपुत्र की उपाधि धारण की थी जिसे चीनियों से ली थी।
❑ कनिष्क बौद्ध धर्म की महायान शाखा का अनुयायी था।
❑ चौथी बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म हीनयान तथा महायान नामक शाखाओं में बँट गया।
❑ चौथी बौद्ध संगीति में विभाषाशास्त्र पुस्तक लिखी गई।
❑ कनिष्क के सिक्के यूनानी एवं ईरानी भाषा में थी।
❑ मथुरा से प्राप्त कनिष्क की मूर्ति सैनिक वेशभूषा में है।
❑ बुद्ध के अवशेषों पर कनिष्क ने पेशावर में एक स्तूप एवं मठ का निर्माण करवाया।
❑ कनिष्क के दरबार में महान दार्शनिक अश्वघोष रहता था।
❑ अश्वघोष कनिष्क के राजकवि थे।
❑ अश्वघोष ने बुद्धचरित् एवं सूत्रालंकार की रचना की।
❑ कुषाण शासक कनिष्क के समकालीन नागार्जुन, अश्वघोष एवं वसुमित्र थे।
❑ इस समय कला की दो शैलियाँ (1) मथुरा शैली तथा (2) गांधार शैली प्रसिद्ध थीं।
❑ गांधार शैली में निर्मित बुद्ध तथा बोधिसत्व मूर्तियाँ ही विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
❑ मथुरा शैली में अनेक स्तूपों, विहारों तथा मूर्तियों का निर्माण किया गया है।
❑ गांधार शैली को यूनानी-बौद्ध, इण्डो ग्रीक-रोमन कला भी कहा जाता है।
❑ प्रसिद्ध दार्शनिक एवं वैज्ञानिक तथा शून्यवाद का प्रतिपादक नागार्जुन कनिष्क के दरबार में रहता था।
❑ नागार्जुन ने माध्यमिक सूत्र ग्रंथ लिखा।
❑ विभाष की रचना वसुमित्र ने की।
❑ कनिष्क का दरबारी चिकित्सक चरक था।
❑ चरक ने चरक संहिता लिखी थी।
❑ बौद्ध धर्म का विश्वकोष विभाषाशास्त्र को कहा जाता है।
❑ कनिष्क का पुरोहित संघरक्ष था।
❑ कनिष्क को बौद्ध धर्म में अवश्घोष ने दीक्षित किया।
❑ भारत का आइन्सटीन नागार्जुन को कहा गया है।
❑ कुषाण वंश का अंतिम शासक वासुदेव था। वासुदेव शैव मतानुयायी था। मुद्राओं पर शिव तथा नन्दी की आकृतियाँ उत्कीर्ण मिलती हैं।
❑ सोने के सर्वाधिक सिक्के कुषाणों ने चलाये।
❑ कुषाण शासकों को देवपुत्र कहा जाता था।
❑ कुषाणों में मृत शासकों की मूर्तियों को मन्दिरों में रखा जाता था।
❑ सेना में घुड़सवारी की दक्षता, सैनिक वेशभूषा एवं व्यूह रचना के क्षेत्र में कुषाणों ने भारत को नई जानकारियां दी थी।
❑ मथुरा से कनिष्क की एक सिर रहित मूर्ति मिली है जिस पर महाराज राजाधिराजा देवपुत्रों कनिष्को अंकित है।
❑ चीन से व्यापार करने के लिये रोम को कुषाणों से मधुर संबंध बनाने पड़े।
❑ यह व्यापार महान रेशम मार्ग या सिल्क मार्ग से सम्पन्न होता था। इससे कुषाणों को बहुत अधिक आय होती थी।
❑ सर्वाधिक बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण गांधार कला के अन्तर्गत हुआ है।
❑ पतंजलि ने मथुरा से सटका नामक वस्त्र पाये जाने का उल्लेख किया है।
❑ भारत में इथोपिया से हाथी दाँत एवं सोना आता था।
❑ तक्षशिला विभिन्न दिशाओं से आने वाले माल के संग्रह स्थल के रूप में प्रसिद्ध था।
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