1.1947 से पहले 26 जनवरी को कहा जाता था-
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(d)
26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस द्वारा ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ के रूप में मनाया गया था, क्योंकि लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929) में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित होने के बाद यह तय हुआ था कि प्रत्येक वर्ष इस दिन देशभर में लोग स्वतंत्रता की शपथ लें। आजादी मिलने के बाद इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संविधान सभा ने भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को ही लागू किया, ताकि इस तिथि का राष्ट्रीय महत्व बना रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा संविधान को अंगीकार किया गया था, जबकि इसे लागू 26 जनवरी, 1950 को किया गया। (2) डॉ. राजेंद्र प्रसाद 26 जनवरी, 1950 को भारत के पहले राष्ट्रपति बने थे।
2.31 दिसंबर, 1929 को अर्द्धरात्रि में भारतीय राष्ट्रध्वज को किसने फहराया था ?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
31 दिसंबर, 1929 की मध्यरात्रि को कांग्रेस अध्यक्ष पं. जवाहरलाल नेहरू ने लाहौर में रावी नदी के तट पर तिरंगा झंडा फहराकर पूर्ण स्वराज के संकल्प की घोषणा की। यह आयोजन लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ प्रस्ताव पारित होने के तुरंत बाद हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इस समय प्रयुक्त तिरंगे में केसरिया, श्वेत और हरे रंग की पट्टियां थीं, जिसके मध्य में चरखा बना हुआ था, जो 1931 में कांग्रेस द्वारा औपचारिक रूप से अपनाए गए ध्वज का स्वरूप था। (2) इस अधिवेशन के पश्चात ही कांग्रेस ने 26 जनवरी, 1930 को ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ मनाने का निर्णय लिया।
3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा किस दिन को ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ घोषित किया गया था?
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(a)
कांग्रेस कार्यसमिति ने 2 जनवरी, 1930 की बैठक में यह निर्णय लिया कि 26 जनवरी, 1930 को ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें देशभर में स्वतंत्रता की शपथ ली गई। यह निर्णय लाहौर अधिवेशन में पारित पूर्ण स्वराज प्रस्ताव की कड़ी का हिस्सा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इसके बाद हर वर्ष 26 जनवरी को ‘पूर्ण स्वाधीनता दिवस’ के रूप में मनाया जाता रहा, जब तक 1950 में यह तिथि गणतंत्र दिवस में परिवर्तित नहीं हो गई। (2) इसी प्रस्ताव के आधार पर महात्मा गांधी ने 1930 में दांडी मार्च के माध्यम से सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की।
4.भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, निम्नलिखित में से किसने
प्रस्तावित किया कि स्वराज को सभी प्रकार के विदेशी नियंत्रण
से मुक्त संपूर्ण स्वतंत्रता के रूप में परिभाषित किया जाए?
I.A.S. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
1921 के अहमदाबाद अधिवेशन में मौलाना हसरत मोहानी ने यह प्रस्ताव रखा कि स्वराज को विदेशी नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त संपूर्ण स्वतंत्रता के रूप में परिभाषित किया जाए और इसे कांग्रेस का अंतिम लक्ष्य घोषित किया जाए, हालांकि उस समय कांग्रेस ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस अधिवेशन के निर्वाचित अध्यक्ष सी.आर. दास जेल में होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके, जिसके चलते हकीम अजमल खान ने अध्यक्षता की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) मौलाना हसरत मोहानी उर्दू के प्रसिद्ध शायर भी थे, जिन्हें ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा देने का श्रेय दिया जाता है। (2) उनका मूल प्रस्ताव लगभग आठ वर्ष बाद, 1929 के लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।
5.कांग्रेस के 1929 के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस का लक्ष्य ‘पूर्ण स्वराज’ किसके द्वारा घोषित किया गया?
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
1928 के कलकत्ता अधिवेशन में सरकार को नेहरू रिपोर्ट स्वीकार करने हेतु एक वर्ष का अल्टीमेटम दिया गया था। समय-सीमा बीत जाने पर दिसंबर 1929 में लाहौर अधिवेशन में पं. जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में ‘पूर्ण स्वराज’ को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) यह नेहरू रिपोर्ट मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में 1928 में तैयार की गई थी, जिसमें भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस की मांग की गई थी। (2) लाहौर अधिवेशन के समय जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के सबसे युवा अध्यक्षों में से एक थे।
6.कांग्रेस ने कब पहली बार भारत की स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित किया था?
M.P. P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
दिसंबर 1929 में लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार औपचारिक रूप से ‘पूर्ण स्वराज’ अर्थात संपूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित किया, जो 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में दी गई चेतावनी की परिणति थी। इसी अधिवेशन में 31 दिसंबर की मध्यरात्रि को रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इससे पहले तक कांग्रेस का घोषित लक्ष्य ‘स्वराज’ अथवा ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत स्वशासन था, संपूर्ण स्वतंत्रता नहीं। (2) इस प्रस्ताव के पश्चात 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में नमक सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई।
7.’पूर्ण स्वराज’ का प्रस्ताव लाहौर कांग्रेस में पारित किया गया, वर्ष-
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
U.P. Lower Sub. (Pre) 1999
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
U.P. Lower Sub. (Pre) 1999
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
वर्ष 1929 में लाहौर में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ का प्रस्ताव पारित हुआ, जिसकी अध्यक्षता पं. जवाहरलाल नेहरू ने की। यह प्रस्ताव कलकत्ता अधिवेशन (1928) की चेतावनी के बाद आया, जब ब्रिटिश सरकार ने नेहरू रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इस अधिवेशन के तुरंत बाद, 26 जनवरी 1930 को देशभर में ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ मनाया गया। (2) लाहौर अधिवेशन के समय भगत सिंह व उनके साथियों का क्रांतिकारी आंदोलन भी पंजाब क्षेत्र में सक्रिय था, जिससे लाहौर तत्कालीन राष्ट्रीय राजनीति का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था।
8.1921 के अहमदाबाद अधिवेशन में निम्नलिखित नेताओं में से किसने संपूर्ण स्वराज को कांग्रेस का लक्ष्य मानने का प्रस्ताव
रखा ?
I.A.S. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
अहमदाबाद अधिवेशन (1921) में हसरत मोहानी ने संपूर्ण स्वराज को कांग्रेस का लक्ष्य बनाने का प्रस्ताव रखा था, परंतु उस समय महात्मा गांधी सहित अधिकांश नेता ब्रिटिश शासन के भीतर ही स्वशासन (स्वराज) प्राप्त करने के पक्ष में थे, इसलिए यह प्रस्ताव तत्काल स्वीकार नहीं हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) यह अधिवेशन असहयोग आंदोलन के दौरान आयोजित हुआ था, जब कांग्रेस ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध व्यापक जन-आंदोलन चला रही थी। (2) हसरत मोहानी की यह मांग लगभग आठ वर्ष पश्चात 1929 के लाहौर अधिवेशन में साकार हुई, जब ‘पूर्ण स्वराज’ को औपचारिक लक्ष्य घोषित किया गया।
9. निम्नलिखित में से किस एक ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी जिसमें “पूर्ण स्वराज” का प्रस्ताव पारित हुआ था?
U.P. P.C.S. (Pre) 2009
I.A.S. (Pre) 2006
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
I.A.S. (Pre) 2006
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(b)
दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता पं. जवाहरलाल नेहरू ने की थी, जिसमें ‘पूर्ण स्वराज’ को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया गया। नेहरू की अध्यक्षता में ही 31 दिसंबर की मध्यरात्रि को रावी नदी के किनारे तिरंगा फहराया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) जवाहरलाल नेहरू 1929 में मात्र 40 वर्ष की आयु में कांग्रेस अध्यक्ष बने थे, जो उस समय तक के सबसे युवा अध्यक्षों में से एक थे। (2) इससे पहले 1928 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू (जवाहरलाल के पिता) ने की थी, जिन्होंने नेहरू रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
10. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (1929) के अध्यक्ष थे-
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
यह प्रश्न मूल रूप से 1929 के लाहौर अधिवेशन के अध्यक्ष पं. जवाहरलाल नेहरू से संबंधित है, परंतु विकल्पों में स्थान-नामों (अमृतसर, त्रिपुरा) के साथ व्यक्ति-नामों को मिश्रित कर भ्रम उत्पन्न किया गया है। वास्तविक उत्तर जवाहरलाल नेहरू है, जिन्होंने इस अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए ‘पूर्ण स्वराज’ को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) कांग्रेस का अमृतसर अधिवेशन 1919 में हुआ था, जिसकी अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू ने की थी, और इसी अधिवेशन में जलियांवाला बाग हत्याकांड की निंदा की गई थी। (2) त्रिपुरी अधिवेशन (1939) में सुभाष चंद्र बोस दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए थे, जिसके बाद गांधीजी से मतभेद के कारण उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया।
11. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1929) इतिहास में इसलिए बहुत प्रसिद्ध है, क्योंकि-
1. कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग का एक संकल्प पारित किया
2. इस अधिवेशन में उग्रवादियों एवं उदारवादियों के बीच झगड़े को सुलझा लिया गया
3. इस अधिवेशन में दो राष्ट्रों की मांग के सिद्धांत को अस्वीकार करते हुए एक संकल्प पारित किया गया
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग का एक संकल्प पारित किया
2. इस अधिवेशन में उग्रवादियों एवं उदारवादियों के बीच झगड़े को सुलझा लिया गया
3. इस अधिवेशन में दो राष्ट्रों की मांग के सिद्धांत को अस्वीकार करते हुए एक संकल्प पारित किया गया
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
I.A.S. (Pre) 2012
उत्तर-(a)
लाहौर अधिवेशन (1929) की प्रसिद्धि का मुख्य कारण केवल पूर्ण स्वराज का संकल्प पारित होना है। उग्रवादियों-उदारवादियों के बीच मतभेद का निपटारा सूरत विभाजन (1907) के बाद लखनऊ अधिवेशन (1916) में हुआ था, और ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ को अस्वीकार करने वाला कोई संकल्प इस अधिवेशन में पारित नहीं हुआ। इसलिए केवल कथन 1 सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) कांग्रेस-लीग एकता और लखनऊ संधि (1916) में तिलक तथा जिन्ना दोनों उपस्थित थे, जिसने उग्रवादी-उदारवादी गुटों को पुनः एकजुट किया था। (2) ‘द्वि-राष्ट्र सिद्धांत’ को औपचारिक रूप से मुस्लिम लीग ने 1940 के लाहौर प्रस्ताव (पाकिस्तान प्रस्ताव) में प्रस्तुत किया था, जो कांग्रेस के 1929 अधिवेशन से बिल्कुल भिन्न और बहुत बाद की घटना है।
12. निम्नांकित में से कौन-सा 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पारित संकल्प में शामिल नहीं था?
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Mains) 2010
उत्तर-(d)
31 दिसंबर, 1929 को पारित संकल्प में कहा गया कि गोलमेज सम्मेलन से कोई लाभ नहीं, नेहरू समिति की डोमिनियन स्टेटस योजना समाप्त की जाती है, स्वराज का अर्थ पूर्ण स्वतंत्रता है, तथा कांग्रेस उचित समय पर सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ करेगी। इस संकल्प में अस्पृश्यता उन्मूलन का कोई उल्लेख नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) अस्पृश्यता उन्मूलन का विषय कांग्रेस के कार्यक्रमों में महात्मा गांधी द्वारा अधिक प्रमुखता से 1932-33 के पूना पैक्ट और हरिजन आंदोलन के दौरान उठाया गया। (2) भारत की पहली स्पष्ट विदेश नीति संबंधी मांग 1921 के अहमदाबाद अधिवेशन में ही उठाई गई थी, जिसे लाहौर अधिवेशन में गोलमेज सम्मेलन के बहिष्कार के रूप में और सशक्त किया गया।
13. स्वतंत्रता का नव-ग्रहीत तिरंगा पहली बार कब लहराया गया?
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
उत्तर-(b)
31 दिसंबर, 1929 की अर्द्धरात्रि को जवाहरलाल नेहरू ने लाहौर में रावी नदी के तट पर नवीन त्रिरंगा ध्वज फहराया, जो पूर्ण स्वराज के संकल्प का प्रतीक बना। यह आयोजन लाहौर अधिवेशन के समापन के साथ हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इस ध्वज में केसरिया, श्वेत और हरा रंग तथा मध्य में चरखे का चित्र था, जिसे 1931 में कांग्रेस ने औपचारिक रूप से अपनाया। (2) वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज में चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया।
14. निम्नलिखित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशनों में से किसमें कांग्रेस का लक्ष्य पूर्ण स्वराज घोषित किया गया?
U.P.P.C.S (Mains) 2011
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.S.C. (Mains) 2008
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.S.C. (Mains) 2008
उत्तर-(a)
दिसंबर 1929 में आयोजित लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने औपचारिक रूप से ‘पूर्ण स्वराज’ को अपना लक्ष्य घोषित किया, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) कराची अधिवेशन (1931) में मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम संबंधी प्रस्ताव पारित हुआ था, जो गांधी-इरविन समझौते के पश्चात आयोजित हुआ। (2) बंबई में आयोजित 1942 के अधिवेशन में ‘भारत छोड़ो’ (Quit India) प्रस्ताव पारित किया गया था, जो स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम और सबसे व्यापक जन-आंदोलन का आधार बना।
15. पूर्ण स्वराज संकल्प को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में किसने प्रस्तुत किया था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(b)
पूर्ण स्वराज संकल्प जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किया गया और उन्होंने ही इसे लाहौर अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता का अर्थ अब ‘पूर्ण स्वतंत्रता’ है, न कि डोमिनियन स्टेटस। इसी अधिवेशन में नेहरू समिति की रिपोर्ट को भी निरस्त घोषित कर दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) यह नेहरू समिति रिपोर्ट जवाहरलाल के पिता मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में 1928 में तैयार हुई थी, जिसमें डोमिनियन स्टेटस की मांग की गई थी। (2) बाल गंगाधर तिलक का निधन 1920 में ही हो गया था, अतः वे 1929 के इस अधिवेशन में सम्मिलित नहीं हो सकते थे।
16. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निम्नलिखित अधिवेशनों में से किस एक की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने सर्वप्रथम की थी ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(a)
जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार 1929 के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला, जिसमें पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ और 26 जनवरी को ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ मनाने का निर्णय लिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) कलकत्ता अधिवेशन (1928) की अध्यक्षता उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने की थी, जिसमें नेहरू रिपोर्ट प्रस्तुत हुई थी। (2) जवाहरलाल नेहरू कुल चार बार कांग्रेस अध्यक्ष बने—1929 (लाहौर), 1936 (लखनऊ), 1937 (फैजपुर) और 1951-54 के बीच पुनः कई बार।
17.कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा सबसे पहले कहां की?
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की औपचारिक घोषणा सर्वप्रथम 1929 के लाहौर अधिवेशन में की, जहाँ जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में यह संकल्प पारित हुआ। विकल्पों में स्थान (लाहौर, लखनऊ) के साथ व्यक्ति-नामों को मिलाकर भ्रम उत्पन्न किया गया है, जबकि वास्तविक सही उत्तर स्थान के रूप में लाहौर ही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) लखनऊ अधिवेशन (1916) कांग्रेस-मुस्लिम लीग एकता तथा उग्रवादी-उदारवादी मेलजोल के लिए जाना जाता है, पूर्ण स्वराज से नहीं। (2) सुभाष चंद्र बोस ने 1938 के हरिपुरा अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष पद ग्रहण किया था, जो लाहौर अधिवेशन से लगभग एक दशक बाद हुआ।
18. स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 1929 का अधिवेशन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस अधिवेशन में-
I.A.S. (Pre) 2014
उत्तर-(b)
1929 के लाहौर अधिवेशन का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इसमें कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ को अपना अंतिम लक्ष्य स्वीकार किया, जबकि पहले तक स्व-शासन (डोमिनियन स्टेटस के अंतर्गत) ही प्रमुख मांग थी। असहयोग आंदोलन इससे पूर्व 1920-22 में चल चुका था और गोलमेज सम्मेलन में भागीदारी का निर्णय इस अधिवेशन के विपरीत, बल्कि गांधी-इरविन समझौते (1931) के बाद हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) असहयोग आंदोलन की शुरुआत सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में हुई थी और चौरी-चौरा घटना (1922) के बाद इसे स्थगित कर दिया गया। (2) कांग्रेस ने प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) का बहिष्कार किया था, परंतु गांधी-इरविन समझौते के पश्चात गांधीजी ने स्वयं द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लिया।
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