सूफी आंदोलन : परिचय, प्रमुख सूफी संत एवं सिलसिले

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सूफी आंदोलन : परिचय

➣ मध्यकालीन भारत में जहाँ एक ओर इस्लाम का प्रचार हथियार के बल पर किया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर सूफी संतों ने धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता एवं हिन्दू-मुस्लिम सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देकर समाज में प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश फैलाया।

➣ सूफी आंदोलन इस्लाम की रहस्यवादी एवं आध्यात्मिक परम्परा है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रेम, भक्ति, मानव सेवा, आत्मशुद्धि तथा ईश्वर से प्रत्यक्ष आध्यात्मिक सम्बन्ध स्थापित करना था।

➣ सूफी शब्द की उत्पत्ति के विषय में विभिन्न मत प्रचलित हैं। अधिकांश विद्वान इसे अरबी शब्द सूफ़ (ऊन) से जोड़ते हैं, क्योंकि प्रारम्भिक सूफी संत ऊनी वस्त्र धारण करते थे।

➣ कुछ विद्वान इसकी व्युत्पत्ति सफ़ा (पवित्रता) तथा अहल-ए-सुफ्फ़ा (पैगम्बर मुहम्मद के साथ रहने वाले तपस्वी अनुयायी) से भी मानते हैं।

➣ सूफीवाद का विकास प्रारम्भिक इस्लामी जगत में इराक, ईरान, सीरिया तथा ख़ुरासान जैसे क्षेत्रों में हुआ।

➣ बाद में यह मध्य एशिया होते हुए भारत पहुँचा और यहाँ की स्थानीय संस्कृति एवं भक्ति परम्परा से प्रभावित होकर अधिक उदार एवं समन्वयवादी स्वरूप में विकसित हुआ।

➣ सूफी संत एकेश्वरवाद (तौहीद) में विश्वास रखते थे। वे बाह्य आडम्बरों की अपेक्षा आंतरिक पवित्रता, ईश्वर-प्रेम, मानव सेवा तथा आत्मिक साधना को अधिक महत्व देते थे।

➣ सूफी संतों के निवास एवं आध्यात्मिक शिक्षा-केन्द्र को खानकाह अथवा जमाअतख़ाना कहा जाता था। यही स्थान सूफी शिक्षा, लंगर, आध्यात्मिक चर्चा तथा जनसेवा के प्रमुख केन्द्र होते थे।

➣ सूफी परम्परा में गुरु को पीर अथवा शेख, शिष्य को मुरीद तथा ईश्वर के प्रिय संत को वली कहा जाता था। ईश्वर से आत्मिक मिलन की अवस्था को वस्ल कहा जाता है।

➣ प्रारम्भिक प्रसिद्ध सूफी संतों में हसन बसरी का विशेष स्थान माना जाता है। वहीं राबिया अल-बसरी इस्लामी इतिहास की प्रथम प्रसिद्ध महिला सूफी संत मानी जाती हैं, जिन्होंने ईश्वर के प्रति निष्काम प्रेम (इश्क़-ए-हक़ीक़ी) पर विशेष बल दिया।

➣ सूफी सिलसिले मुख्यतः दो प्रकार के माने जाते हैं- बा-शरा तथा बे-शरा। बा-शरा सिलसिले इस्लामी शरीयत (धार्मिक विधि) का पालन करते थे, जबकि बे-शरा सिलसिलों में शरीयत के नियमों का कठोर पालन अपेक्षाकृत कम था। भारत में अधिकांश प्रमुख सूफी सिलसिले बा-शरा परम्परा से सम्बद्ध थे।

➣ मध्यकालीन भारत में अनेक सूफी सिलसिले सक्रिय थे। इनमें चिश्ती, सुहरावर्दी, कादिरी, नक्शबन्दी, फिरदौसी तथा शत्तारी सिलसिले विशेष रूप से प्रसिद्ध हुए। इनमें चिश्ती सिलसिला भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय एवं प्रभावशाली माना जाता है।

सूफी शब्दअर्थ
पीर / शेखगुरु
मुरीदशिष्य
खानकाहसूफी मठ / आध्यात्मिक केन्द्र
जमाअतख़ानासामूहिक उपासना एवं निवास स्थल
वलीईश्वर का प्रिय संत
वस्लईश्वर से आत्मिक मिलन
तौहीदएकेश्वरवाद

• भारत में सबसे लोकप्रिय सूफी सिलसिला : चिश्ती

• सूफी मठ : खानकाह / जमाअतख़ाना

• गुरु : पीर / शेख

• शिष्य : मुरीद

• ईश्वर का प्रिय संत : वली

• ईश्वर से आत्मिक मिलन : वस्ल

• प्रथम प्रसिद्ध महिला सूफी संत : राबिया अल-बसरी

• भारत के प्रमुख सूफी सिलसिले : चिश्ती, सुहरावर्दी, कादिरी, नक्शबन्दी, फिरदौसी एवं शत्तारी

प्रमुख सूफी संत एवं उनके संप्रदाय

➣ मध्यकालीन भारत में विभिन्न सूफी सिलसिलों (संप्रदायों) के अनेक संत हुए, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में सूफी विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया। निम्नलिखित सारणी में प्रमुख सूफी संत, उनके संबंधित संप्रदाय तथा प्रमुख कार्यक्षेत्र का विवरण दिया गया है।

मध्यकालीन भारत में सूफी आंदोलन
सूफी संतसंप्रदाय (सिलसिला)प्रमुख कार्यक्षेत्र / पहचान
शेख नासिरुद्दीन चिराग़-ए-देहलवीचिश्तीदिल्ली; निज़ामुद्दीन औलिया के उत्तराधिकारी एवं दिल्ली सल्तनत काल के अंतिम महान चिश्ती संत
शेख बहाउद्दीन ज़कारियासुहरावर्दीमुल्तान; भारत में सुहरावर्दी सिलसिले के प्रमुख प्रचारक
शेख शरफ़ुद्दीन याहिया मनेरीसुहरावर्दीबिहार; मख़दूम-उल-मुल्क के नाम से प्रसिद्ध
शेख नूरुद्दीन नूरानी (नुंद ऋषि)ऋषि (रिशी) संप्रदायकश्मीर; ऋषि परम्परा के प्रमुख संत
शेख बाकी बिल्लाहनक्शबन्दीदिल्ली; भारत में नक्शबन्दी सिलसिले के प्रवर्तक

भारत में प्रमुख सूफी सिलसिलों के आगमन का क्रम

➣ मध्यकालीन भारत में विभिन्न समयों पर अनेक सूफी सिलसिलों का आगमन हुआ। इनमें चिश्ती सिलसिला सबसे पहले और सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ। इसके बाद अन्य सिलसिलों का भारत में क्रमिक रूप से प्रसार हुआ।

क्रमसूफी सिलसिलाभारत में प्रमुख प्रवर्तक
1.चिश्तीख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती
2.सुहरावर्दीशेख बहाउद्दीन ज़कारिया
3.फिरदौसीशेख शरफ़ुद्दीन याहिया मनेरी
4.शत्तारीशाह अब्दुल्ला शत्तार
5.कादिरीशाह नियामतुल्लाह / मियाँ मीर (भारत में प्रमुख प्रचारक)
6.नक्शबन्दीशेख बाकी बिल्लाह

• भारत में सबसे पहले आने वाला एवं सर्वाधिक लोकप्रिय सूफी सिलसिला : चिश्ती

• भारत में सबसे अंत में आने वाला प्रमुख सूफी सिलसिला : नक्शबन्दी

• परीक्षा हेतु आगमन क्रम : चिश्ती → सुहरावर्दी → फिरदौसी → शत्तारी → कादिरी → नक्शबन्दी

भारत के प्रमुख सूफी सिलसिले, उनके संस्थापक एवं प्रमुख संत

➣ मध्यकालीन भारत में अनेक सूफी सिलसिलों का विकास हुआ। प्रत्येक सिलसिले के अपने संस्थापक, सिद्धांत तथा प्रमुख संत थे।

➣ भारत में चिश्ती, सुहरावर्दी, कादिरी, नक्शबन्दी एवं शत्तारी सिलसिले सर्वाधिक प्रभावशाली रहे।

सिलसिलामूल संस्थापकभारत में प्रवर्तक / प्रमुख प्रचारकप्रमुख संत
चिश्तीअबू इसहाक़ शामी चिश्तीख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्तीमुईनुद्दीन चिश्ती, कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी, बाबा फ़रीद, निज़ामुद्दीन औलिया, नासिरुद्दीन चिराग़-ए-देहलवी, गेसूदराज, सलीम चिश्ती
सुहरावर्दीशिहाबुद्दीन उमर सुहरावर्दीबहाउद्दीन ज़कारियाबहाउद्दीन ज़कारिया, शरफ़ुद्दीन याहिया मनेरी, जलालुद्दीन तबरीज़ी
कादिरीअब्दुल कादिर जीलानीशाह नियामतुल्लाह एवं अन्य प्रचारकमियाँ मीर, मुल्ला शाह बदख्शी, दारा शिकोह
नक्शबन्दीबहाउद्दीन नक्शबन्दबाकी बिल्लाहबाकी बिल्लाह, शेख अहमद सरहिंदी, शाह वलीउल्लाह
शत्तारीशाह अब्दुल्ला शत्तारशाह अब्दुल्ला शत्तारमुहम्मद गौस ग्वालियरी, वजीहुद्दीन अलवी
कलंदरियापरम्परागत रूप से विभिन्न संतअब्दुल अज़ीज़ मक्की (भारत में)बू अली कलंदर, नजमुद्दीन कलंदर
मदारियाबदीउद्दीन शाह मदारबदीउद्दीन शाह मदारबदीउद्दीन शाह मदार

प्रमुख सूफी संत एवं उनकी दरगाहें

➣ भारत में अनेक सूफी संतों की दरगाहें आज भी विभिन्न धर्मों के लोगों की आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं। इनमें से कई दरगाहें भारतीय सांस्कृतिक समन्वय एवं धार्मिक सहिष्णुता की प्रतीक मानी जाती हैं।

सूफी संतजन्म स्थानमृत्युप्रसिद्ध दरगाह / मक़बरा
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्तीसीस्तान/संजर (मतभेद)1236 ई.अजमेर (राजस्थान)
कुतुबुद्दीन बख्तियार काकीऔश (फ़रगना)1235 ई.महरौली, दिल्ली
बाबा फ़रीद (फ़रीदुद्दीन गंज-ए-शकर)खोतवाल, मुल्तान क्षेत्र1265 ई.पाकपट्टन (वर्तमान पाकिस्तान)
शेख निज़ामुद्दीन औलियाबदायूँ (उत्तर प्रदेश)1325 ई.निज़ामुद्दीन, दिल्ली
अमीर खुसरोपटियाली (उत्तर प्रदेश)1325 ई.निज़ामुद्दीन दरगाह परिसर, दिल्ली
शेख नासिरुद्दीन चिराग़-ए-देहलवीअयोध्या (उत्तर प्रदेश)1356 ई.दिल्ली
शेख बुरहानुद्दीन गरीबदिल्ली1337 ई.दौलताबाद (महाराष्ट्र)
ख़्वाजा बंदा नवाज़ गेसूदराजदिल्ली1422 ई.गुलबर्गा (कलबुर्गी, कर्नाटक)
शेख सलीम चिश्तीसीकरी क्षेत्र (परम्परागत)1572 ई.फ़तेहपुर सीकरी (उत्तर प्रदेश)

• सबसे प्रसिद्ध दरगाह : ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती (अजमेर)

• दिल्ली की सबसे प्रसिद्ध सूफी दरगाह : निज़ामुद्दीन औलिया

• पाकिस्तान की प्रसिद्ध सूफी दरगाह : बाबा फ़रीद (पाकपट्टन)

• दक्षिण भारत की प्रसिद्ध चिश्ती दरगाह : बंदा नवाज़ गेसूदराज (गुलबर्गा)

प्रमुख सूफी शब्दावलियाँ

शब्दअर्थ / महत्व
हनफ़ी (मत)सुन्नी इस्लाम का उदार विधि-मत; भारत के अधिकांश सूफी इसी मत के अनुयायी थे।
कुफ्रइस्लाम के मूल सिद्धांतों अथवा अल्लाह में विश्वास न करना।
खानकाहसूफी संतों का मठ, निवास, शिक्षा एवं आध्यात्मिक साधना का केन्द्र।
खिर्कापीर द्वारा धारण किया जाने वाला ऊनी चोगा; आध्यात्मिक अधिकार का प्रतीक।
तज़किरासूफी संतों की जीवनी एवं उनके जीवन-वृत्त का साहित्य।
दरगाहसूफी संत का मक़बरा, जो श्रद्धा एवं तीर्थस्थल के रूप में विकसित हो जाता है।
मकतूबातसूफी संतों द्वारा लिखे गए पत्रों का संकलन।
मलफ़ूज़ातसूफी संतों के उपदेश, प्रवचन एवं वार्तालाप का संकलन।
समाईश्वर-भक्ति के लिए संगीत एवं कव्वाली सुनने की आध्यात्मिक परम्परा।
ज़िक्रईश्वर का निरन्तर स्मरण।
रक्सआध्यात्मिक नृत्य।
हब्स-ए-दमश्वास को नियंत्रित करने की साधना (प्राणायाम)।
चिल्लालगातार 40 दिनों तक एकांत साधना एवं तपस्या।
फ़नाअहंकार का पूर्ण लोप होकर ईश्वर में विलीन हो जाना।
तवक्कुलईश्वर पर पूर्ण विश्वास एवं निर्भरता।
वहदत-उल-वुजूदसमस्त सृष्टि में ईश्वर की एकता का सिद्धांत (सर्वेश्वरवाद)।
बा-शराशरीयत (इस्लामी विधान) का पालन करने वाले सूफी।
बे-शराशरीयत के नियमों का कठोर पालन न करने वाले सूफी।
तर्क-ए-दुनियासांसारिक सुखों एवं मोह-माया का त्याग।
पीर / शेखगुरु।
मुरीदशिष्य।
सिलसिलागुरु-शिष्य परम्परा।
वलीईश्वर का प्रिय संत।
वस्लईश्वर से आध्यात्मिक मिलन।
बैअत (बैअह)किसी सूफी गुरु (पीर) के हाथ पर आध्यात्मिक दीक्षा ग्रहण करना तथा उसे अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक स्वीकार करना।
खलीफ़ापीर द्वारा नियुक्त आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, जिसे सिलसिले के प्रचार-प्रसार एवं शिष्यों का मार्गदर्शन करने का अधिकार प्राप्त होता था।
इर्शादपीर द्वारा मुरीद को दिया जाने वाला आध्यात्मिक उपदेश एवं मार्गदर्शन।
मुराक़बाध्यान (Meditation) की सूफी साधना, जिसके माध्यम से साधक ईश्वर के सान्निध्य का अनुभव करने का प्रयास करता है।
इश्क़-ए-हक़ीक़ीईश्वर के प्रति निष्काम एवं सर्वोच्च प्रेम; सूफी दर्शन का प्रमुख आधार।
फ़क़्रसादा, त्यागपूर्ण एवं वैराग्यपूर्ण जीवन; सांसारिक वैभव से दूर रहना।
उर्ससूफी संत की पुण्यतिथि, जिसे ईश्वर से आत्मिक मिलन (वस्ल) के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
लंगरखानकाह या दरगाह में सभी लोगों के लिए निःशुल्क सामूहिक भोजन की व्यवस्था।
जमाअतख़ानाखानकाह का वह भाग जहाँ सामूहिक प्रार्थना, उपदेश एवं शिष्यों की बैठक होती थी।
शरीयत (शरअ)इस्लाम के धार्मिक नियम, आचार-संहिता एवं विधि-विधान, जिनका पालन विशेष रूप से बा-शरा सूफी करते थे।
तरीक़तआध्यात्मिक साधना का मार्ग, जिसके माध्यम से साधक ईश्वर की ओर अग्रसर होता है।
हक़ीक़तईश्वर के परम सत्य का प्रत्यक्ष आध्यात्मिक अनुभव।
मआरिफ़त (मारिफ़त)ईश्वर के वास्तविक स्वरूप का आध्यात्मिक ज्ञान; सूफी साधना की उच्च अवस्था।
तौहीदईश्वर (अल्लाह) की पूर्ण एकता एवं एकेश्वरवाद का सिद्धांत।
दरवेशत्यागी एवं फकीर जीवन व्यतीत करने वाला सूफी साधक।
फ़क़ीरसांसारिक इच्छाओं एवं संपत्ति का त्याग कर आध्यात्मिक जीवन अपनाने वाला व्यक्ति।
ज़ाहिदवैराग्य, तपस्या एवं आत्मसंयम का पालन करने वाला साधक।
सज्जादा-नशीनकिसी सूफी दरगाह या खानकाह का वंशानुगत अथवा आध्यात्मिक उत्तराधिकारी एवं संरक्षक।
मुरशिदआध्यात्मिक गुरु; पीर का ही एक अन्य नाम।
सालिकईश्वर की प्राप्ति के मार्ग पर चलने वाला साधक।
मजज़ूबईश्वर-प्रेम एवं आध्यात्मिक समाधि में पूर्णतः लीन सूफी संत।
कव्वालीसूफी भक्ति-संगीत की शैली, जिसे विशेष रूप से चिश्ती सिलसिले ने लोकप्रिय बनाया।
ज़ियारतसूफी संतों की दरगाह पर श्रद्धापूर्वक दर्शन या तीर्थ-यात्रा करना।
इबादतईश्वर की उपासना एवं आराधना।

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