शेख सलीम चिश्ती : परिचय
➣ शेख सलीम चिश्ती मुगल काल के प्रसिद्ध चिश्ती सूफ़ी संत थे। वे चिश्ती सिलसिले की साबिरी शाखा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं तथा सम्राट अकबर के समकालीन थे। उनका नाम मुगल इतिहास में विशेष रूप से अकबर एवं फ़तेहपुर सीकरी से जुड़ा हुआ है।
➣ उनका जन्म लगभग 1478 ई. में माना जाता है। उन्होंने सीकरी (वर्तमान फ़तेहपुर सीकरी, उत्तर प्रदेश) को अपनी आध्यात्मिक साधना एवं शिक्षाओं का प्रमुख केन्द्र बनाया। वे अत्यंत सादा जीवन व्यतीत करते थे और अधिकांश समय ईश्वर-भक्ति, ध्यान तथा मानव सेवा में लगे रहते थे।
➣ शेख सलीम चिश्ती चिश्ती सिलसिले की उस परम्परा का प्रतिनिधित्व करते थे, जो प्रेम, करुणा, सहिष्णुता तथा मानव सेवा को ईश्वर-प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग मानती थी। उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैल चुकी थी और विभिन्न क्षेत्रों से लोग उनका आशीर्वाद प्राप्त करने सीकरी आते थे।
अकबर एवं शेख सलीम चिश्ती
➣ मुगल सम्राट अकबर की कोई जीवित संतान नहीं थी। इस कारण वह उत्तराधिकारी को लेकर अत्यंत चिंतित रहता था। लगभग 1568 ई. में अकबर सीकरी पहुँचा और शेख सलीम चिश्ती से आशीर्वाद प्राप्त किया।
➣ परम्परागत मान्यता के अनुसार शेख सलीम चिश्ती ने अकबर को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। इसके कुछ समय बाद 1569 ई. में अकबर के यहाँ पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम संत के सम्मान में सलीम रखा गया। यही राजकुमार आगे चलकर सम्राट जहाँगीर बना।
➣ इस घटना के बाद अकबर की चिश्ती संतों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। वह नियमित रूप से अजमेर स्थित ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर ज़ियारत के लिए जाता था तथा चिश्ती संतों को विशेष सम्मान प्रदान करता था।
फ़तेहपुर सीकरी की स्थापना
➣ शेख सलीम चिश्ती के प्रति सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से अकबर ने 1571 ई. में सीकरी को अपनी नई राजधानी बनाया, जिसे आगे चलकर फ़तेहपुर सीकरी के नाम से प्रसिद्धि मिली।
➣ फ़तेहपुर सीकरी मुगल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहाँ निर्मित जामा मस्जिद, बुलंद दरवाज़ा, दीवान-ए-ख़ास, पंचमहल तथा शेख सलीम चिश्ती की दरगाह आज भी मुगल स्थापत्य एवं सूफ़ी परम्परा के महत्वपूर्ण स्मारक हैं।
• 1568 ई. — अकबर का सीकरी आगमन (परम्परागत उल्लेख)
• 1569 ई. — राजकुमार सलीम (जहाँगीर) का जन्म
• 1571 ई. — फ़तेहपुर सीकरी को राजधानी बनाया गया।
मृत्यु एवं मक़बरा
➣ 1572 ई. में शेख सलीम चिश्ती का निधन फ़तेहपुर सीकरी में हुआ। उनके निधन के पश्चात् उन्हें वहीं जामा मस्जिद परिसर में दफनाया गया, जहाँ आज उनकी प्रसिद्ध दरगाह स्थित है।
➣ प्रारम्भ में उनका मक़बरा लाल बलुआ पत्थर से निर्मित था, किन्तु बाद में सम्राट जहाँगीर ने इसे श्वेत संगमरमर से पुनर्निर्मित कराया। वर्तमान में यह मक़बरा अपनी उत्कृष्ट संगमरमर की जालियों, नक्काशी तथा मुगल स्थापत्य कला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
➣ आज भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनकी दरगाह पर संतति-सुख, मनोकामना तथा आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं। यह दरगाह भारत में हिन्दू-मुस्लिम सांस्कृतिक समन्वय का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।
ऐतिहासिक महत्व
➣ शेख सलीम चिश्ती का भारतीय इतिहास में सबसे बड़ा महत्व यह है कि उन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर और चिश्ती सूफ़ी परम्परा के बीच संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाया। उनके प्रभाव के कारण अकबर का चिश्ती संतों के प्रति सम्मान अत्यधिक बढ़ा।
➣ अकबर द्वारा फ़तेहपुर सीकरी को राजधानी बनाना केवल राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह चिश्ती सूफ़ी परम्परा के प्रति उसकी गहरी श्रद्धा का भी प्रतीक था। इस घटना ने मुगल शासन एवं सूफ़ी परम्परा के संबंधों को नई दिशा प्रदान की।
➣ शेख सलीम चिश्ती की दरगाह मुगल स्थापत्य, सूफ़ी संस्कृति तथा भारतीय धार्मिक समन्वय का एक महत्वपूर्ण स्मारक मानी जाती है। वर्तमान में यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल फ़तेहपुर सीकरी परिसर का प्रमुख आकर्षण है।
शेख सलीम चिश्ती : एक दृष्टि में
| विषय | विवरण |
|---|---|
| जन्म | लगभग 1478 ई. |
| सिलसिला | चिश्ती (साबिरी शाखा) |
| मुख्य कार्यक्षेत्र | सीकरी (वर्तमान फ़तेहपुर सीकरी) |
| समकालीन शासक | सम्राट अकबर |
| प्रमुख ऐतिहासिक घटना | राजकुमार सलीम (जहाँगीर) के जन्म से जुड़ी परम्परागत मान्यता |
| मृत्यु | 1572 ई., फ़तेहपुर सीकरी |
| प्रसिद्ध स्मारक | शेख सलीम चिश्ती का संगमरमर का मक़बरा, फ़तेहपुर सीकरी |
• शेख सलीम चिश्ती अकबर के समकालीन प्रसिद्ध चिश्ती संत थे।
• वे चिश्ती सिलसिले की साबिरी शाखा से सम्बद्ध थे।
• उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र — सीकरी (फ़तेहपुर सीकरी)
• परम्परागत मान्यता के अनुसार उनके आशीर्वाद से अकबर को पुत्र सलीम (जहाँगीर) की प्राप्ति हुई।
• 1571 ई. में अकबर ने फ़तेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाया।
• वर्तमान संगमरमर का मक़बरा जहाँगीर द्वारा बनवाया गया।
• मक़बरा फ़तेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद के परिसर में स्थित है।
• फ़तेहपुर सीकरी का परित्याग मुख्यतः जल संकट एवं उत्तर-पश्चिमी सीमाओं की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण हुआ।
Quick Revision
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| शेख सलीम चिश्ती किस मुगल शासक के समकालीन थे? | सम्राट अकबर |
| उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र कहाँ था? | सीकरी (वर्तमान फ़तेहपुर सीकरी) |
| राजकुमार सलीम का नाम किसके सम्मान में रखा गया? | शेख सलीम चिश्ती |
| अकबर ने फ़तेहपुर सीकरी को राजधानी कब बनाया? | 1571 ई. |
| वर्तमान संगमरमर का मक़बरा किसने बनवाया? | सम्राट जहाँगीर |
| शेख सलीम चिश्ती का मक़बरा कहाँ स्थित है? | जामा मस्जिद परिसर, फ़तेहपुर सीकरी |
| वे चिश्ती सिलसिले की किस शाखा से सम्बद्ध थे? | साबिरी शाखा |
| फ़तेहपुर सीकरी के परित्याग का प्रमुख कारण क्या था? | जल संकट तथा सामरिक-राजनीतिक कारण |
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