मौर्यकालीन प्रमुख तथ्य और परीक्षा नोट्स

भारतीय इतिहास प्राचीन भारत मौर्य साम्राज्य (322 -185 ई. पू.) मौर्यकालीन प्रमुख तथ्य और परीक्षा नोट्स
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धम्म यात्रा : अशोक की धार्मिक नीति

➣ राजा का दौरा धम्म यात्रा या धर्म यात्रा कहलाता था। यह एक प्रकार की तीर्थयात्रा होती थी, जिसमें राजा गांव का दौरा करता था, वृद्धों और संन्यासियों को दान देता था, गांव-बस्ती की हालत देखता था और धर्म संबंधी प्रवचन करता था।

➣ अशोक ने बोधगया की तीर्थयात्रा कर धम्म यात्रा की परम्परा को शुरू किया।

➣ अशोक ने लुम्बिनी (बुद्ध का जन्म स्थान),कपिलवस्तु (बाल्यावस्था स्थल), बोधगया (तपोभूमि और ज्ञान प्राप्ति), सारनाथ (धर्मचक्रप्रवर्तन स्थल, प्रथम उपदेश),

कुशीनगर (महापरिनिर्वाण स्थल) और बुद्ध कोनकमन (कनक मुनि) के स्तूप आदि की यात्रा की। इन धम्म यात्राओं का उल्लेख अशोक के शिलालेख 7 व 8 में मिलता है।

सांची स्तूप : मौर्यकालीन बौद्ध स्थापत्य कला

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के समीप सांची बौद्ध स्तूपों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां पहाड़ी पर मौर्य शासक अशोक ने विशाल स्तूप का निर्माण करवाया था।

➣ यह ईंटों का बना था जिसके चारों ओर लकड़ी की बाड़ लगी थी। सांची के दीर्घकाल तक बौद्धधर्म से संबंधित रहने के कारण इसका नाम चेतिया (चैत्यगिरि) प्रसिद्ध हुआ।

अशोक द्वारा निर्मित महास्तूप शुंगकाल में पाषाण पट्टिकाओं से जड़ा गया। लकड़ी के स्थान पर पाषाण वेदिका बनाई गयी तथा चारो दिशाओं में 4 तोरण (Gateways) लगा दिये गये।

➣ बुद्ध के जीवन की घटनाओं व जातक कथाओं के चित्रों से भरे है और नीचे से ऊपर तक अलंकृत हैं इन पर सिंह, हाथी, धर्मचक्र, यज्ञ, त्रिरत्ल के चित्र खुदे हुए है।

➣ वेदिकाओं पर अंकित लेखों में दानकर्ताओं के नाम सुरक्षित है जिन्होंने स्मारकों के निर्माण में योगदान किया। इनमें शासक, भिक्षु, सामान्य जन सभी है।

➣ मुख्य स्तूप के दक्षिणी द्वार पर उत्कीर्ण लेख में सातवाहन शासक शातकर्णी का नाम है।

अशोक स्तंभ : मौर्यकालीन कला और शिलालेख

➣ अशोक के स्तंभ ईरानी व यूनानी कला से प्रभावित है। अशोक के लाट पर जिस प्रकार की पशुआकृतियां हैं, वह हड़प्पा की पशु आकृतियों की परंपरा से मेल खाती हैं।

➣ माना जाता है कि पत्थर पर चमकदार पॉलिश करने की कला भारत में ईरानी संपर्क के पहले से ज्ञात थी।

➣ इसका एक प्रमाण काली मिट्टी के बर्तनों को पॉलिश कर चमकदार बनाने की प्रक्रिया में ढूंढा जा सकता है।

➣ पुनः ईरानी स्तंभ जहां नालीदार है और प्रस्तर खम्भों के जोड़ने से बने हैं वहीं अशोक के लाट सपाट और एक ही पत्थर से बने हैं। दोनों स्तंभों के घंटा व अलंकरण में भी अंतर है।

➣ भारत ने इस स्तम्भ को अपने राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया है तथा स्तम्भ के निचले भाग पर स्थित अशोक चक्र को तिरंगे के मध्य में रखा है ।

चाणक्य : मौर्य साम्राज्य के महान राजनीतिज्ञ

➣ चाणक्य (लगभग 375-283 ई.पू.) चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु और महामंत्री थे।

➣ चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है।

➣ चाणक्य की पत्नी का नाम यशोमती था।

➣ उन्होंने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनवाया। उन्होंने बिंदुसार और अशोक का भी मार्गदर्शन किया।

➣ चाणक्य ने तक्षशिला विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और वहां के आचार्य भी बने।

➣ चाणक्य के कहने पर सिकंदर के सेनापति सेल्युकस की बेटी हेलेना से चंद्रगुप्त ने विवाह किया था। चंद्रगुप्त के राज्य निर्माण का समस्त इतिहास वस्तुतः उसके गुरु चाणक्य का कार्य था।

➣ कुछ विद्वान मानते हैं कि हेलेना ने ही चाणक्य की हत्या करवा दी।

➣ कौटिल्य ने अर्थशास्त्र की रचना की, जो राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का एक महान ग्रंथ है। इसमें उन्होंने वर्णन किया है कि एक राजा किस प्रकार से राजनीतिक और आर्थिक शक्ति प्राप्त कर सकता है।

अर्थशास्त्र : कौटिल्य की प्रसिद्ध रचना

➣ कौटिल्य का अर्थशास्त्र’ ऐतिहासिक ग्रंथ नहीं है, अपितु राजनीति शास्त्र का एक अद्वितीय ग्रंथ है। अर्थशास्त्र प्राचीन भारत में राजकीय एवं सामाजिक व्यवस्था के अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत है।

अर्थशास्त्र के लेखक के रूप में इसी पुस्तक में उल्लिखित कौटिल्य तथा एक पद्यखंड में उल्लिखित विष्णुगुप्त नाम की साम्यता चाणक्य से की जाती है।

➣ अर्थशास्त्र की भाषा संस्कृत है। यह गद्य-पद्य मिश्रित सूत्र शैलो (अन्य पुरूष शैली) में है। इसमें 6000 श्लोक, 180 प्रकरण, 141 अध्याय एवं 15 अधिकरण हैं।

➣ अर्थशास्त्र प्राचीन भारतीय चिन्तन की नीतिशास्त्र परम्परा का प्रतिनिधि ग्रन्थ है। इसकी तुलना मैक्यावेली के ‘प्रिंस से की जाती है।

➣ इसमें चक्रवर्ती सम्राट, राजा के कर्तव्य, विस्तृत कर प्रणाली तथा सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। इसमें राज्य के सप्तांग सिद्धांत– राजा, आमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड एवं मित्र की व्याख्या मिलती है।

➣ अर्थशास्त्र की हस्तलिखित पांडुलिपि मैसूर रियासत के पुस्तकालयाध्यक्ष शाम शास्त्री द्वारा सन 1909 ई. में इस ग्रन्थ का प्रकाशन करवाया और 1915 ई. इसका अंग्रेजी अनुवाद किया गया।

छठे अधिकरण में राज्य की सात प्रकृतियों या अंगों अर्थात् सप्तांग सिद्धान्त एवं मण्डल सिद्धान्त का विवेचन है।

मेगस्थनीज की इण्डिका : मौर्यकालीन भारत का विवरण

➣ मेगस्थनीज, सेल्यूकस का राजदूत था जो चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में 304 ई.पू. से 299 ई. पू. के बीच रहा।

➣ मैगस्थनीज़ ने ‘इण्डिका’ में भारतीय जीवन, परम्पराओं, रीति-रिवाजों का वर्णन किया है। उसके ग्रंथ इण्डिका से चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रशासन की विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है। हालाँकि यह ग्रंथ अपने मूल रूप में उपलब्ध नहीं है।

यह भारत आने वाला प्रथम राजदूत था।

➣ इण्डिका ग्रीक भाषा में है इसे मौर्य समाज का दर्पण कहा जाता है।

➣ मेगस्थनीज ने चन्द्रगुप्त का नाम सैन्ड्रोकाट्स के रूप में उद्धृत किया है। इसके अनुसार शासक के चारों ओर सशस्त्र महिलाएं अंगरक्षक के रूप में रहती थी।

➣ चन्द्रगुप्त की राजधानी पोलिब्रोधा (पाटलिपुत्र) का विस्तृत वर्णन किया उसके अनुसार पाटलिपुत्र गंगा व सोन नदियों के संगम पर स्थित था तथा पूर्वी भारत का सबसे बड़ा नगर था।

➣ मेगस्थनीज ने उत्तरापथ का वर्णन किया है। यह सड़क सिन्ध को बंगाल के सोनारगाँव से जोड़ती थी। इस सड़क का निर्माण चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा करवाया गया था।

➣ मेगस्थनीज के अनुसार भारत में दास प्रथा विद्यमान नहीं थी, जबकि कौटिल्य ने 9 प्रकार के दासों का वर्णन किया है।

➣ मेगस्थनीज ने लिखा है कि भारत में अकाल नहीं पड़ते थे, जबकि चन्द्रगुप्त मौर्य के समय अकाल पड़ने का वर्णन मिलता है।

➣ अकाल के समय राज्य द्वारा अनाज वितरण (राशनिंग प्रणाली) का वर्णन है।

मेगस्थनीज के अनुसार भारत में लेखन कला का अभाव था।

➣ उसने सिलास नामक एक ऐसी नदी का उल्लेख किया है, जिसमें कुछ भी तैर नहीं सकता था।

➣ मैगस्थनीज़ ने भारत से प्राप्त होने वाली खनिज सम्पदा में सोना, चांदी, ताँबा एवं टिन की प्रशंसा की है।

➣ मैगस्थनीज़ के अनुसार भारत में चीटियां सोने का संग्रह करती थीं।

मौर्यकालीन शब्द एंव उनके अर्थ

सीताराजकीय भूमि तथा इस भूमि से प्राप्त आय
बलिएक प्रकार का धार्मिक कर या चढ़ावा
क्षेत्रकेभूमि का मालिक
उपवासकाश्तकार
रूपजीवावेश्यावृत्ति कर जीविकायापन करने वाली स्त्रियाँ
जेठ्ठकशिल्पी संघ का मुखिया
श्रेष्ठीव्यापारिक संघ का मुखिया
गहपतिभू-स्वामी
सेतुफल, फूल, सब्जियों पर लिया जाने वाला कर
विष्टिबेगार
भागभूमिकर (किसानों की निजी भूमि पर कर)
अमात्यउच्च प्रशासनिक अधिकारियों का वर्ग
उद्रगसिंचाई कर
प्रणयआपातकालीन कर
सेनाभक्तमसेना कर जो सेना के प्रयाण के समय तेल व चावल के रूप में लिया जाता था।
हिरण्यनकद कर, जो अनाज के रूप में नहीं लिया जाता था।
राष्ट्रअन्य साधनों से प्राप्त राजस्व
पौरराजधानी का शासक
अक्षपटलाध्यक्षमहालेखा पाल
महामात्यापसर्पगुप्तचर विभाग का अध्यक्ष
वार्ताकृषि, पशुपालन एवं व्यापार का सम्मिलित रूप
पथिकरसमाहर्ता द्वारा वसूल किया गया अतिरिक्त कर
विवीतपशुओं की रक्षा के लिए वसूला गया कर
रक्षित पुलिस (अर्थशास्त्र के अनुसार)
कौष्ठेयकसरकारी जलाशय से सिंचित भूमि से लिया जाने वाला कर
सार्थवाहव्यापारियों का काफिला
परिहीनकसरकारी भूमि पर पशुओं द्वारा हानि पहुँचाने पर लिया जाने वाला कर।
पिण्डकरपूरे गाँव से वर्ष में एक बार वसूला जाने वाला कर
औपायनिकविशेष अवसरों पर राजा को दी जाने वाली भेंट
पार्श्वअधिक लाभ होने पर व्यापारियों से लिया जाने वाला कर

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