मौर्य साम्राज्य (322 -185 ई. पू.) : प्रमुख शासक और उनका योगदान

भारतीय इतिहास प्राचीन भारत मौर्य साम्राज्य (322 -185 ई. पू.)
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मौर्य साम्राज्य : प्रथम भारतीय साम्राज्य

मौर्य वंश के प्रमुख शासकों की सूची

➣ चौथी शताब्दी ई. पू. मगध में नंद वंश के शासक धनानंद का शासन था। साक्ष्यों से पता चलता है कि धनानंद एक क्रूर और अत्याचारी शासक था।

➣ चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने राजनीतिक गुरु चाणक्य के साथ मिलकर इसी नंद वंशीय शासक धनानंद को पराजित कर मगध में मौर्य वंश की आपना की। इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।

➣ चन्द्रगुप्त मौर्य को प्रथम भारतीय साम्राज्य का संस्थापक, भारत का प्रथम ऐतिहासिक सम्राट, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम नायक, भारत का मुक्तिदाता कहा जाता है। उसने ही भारत को सर्वप्रथम राजनीतिक रूप से एकबद्ध किया।

➣ चंद्रगुप्त मौर्य ने ने वृहत्तर भारत पर अपना शासन स्थापित किया। जिसका विस्तार ब्रिटिश साम्राज्य से भी बड़ा था। उसके साम्राज्य की सीमा ईरान से मिलती थी।

मौर्य साम्राज्य का मानचित्र

चंद्रगुप्त मौर्य (322-298 ई.पू.)

 जन्म 345 ई.पू.
 राज्यरोहण 322 ई.पू.
 गुरु व प्रधानमत्रीं चाणक्य या विष्णुगुप्त
 धर्म जैनधर्म
 भाषा पाली
 राजकीय चिन्ह मयूर

➣ मौर्य वंश के शासक किस वर्ण के थे, इसको लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। लेकिन बौद्ध एवं जैन ग्रंथों में उसे (चंद्रगुप्त) मोरिय क्षत्रिय कहा गया है।

➣ ऐसा इसलिये भी प्रामाणिक लगता है क्योंकि चंद्रगुप्त का गुरु चाणक्य वर्णाश्रम धर्म का प्रबल पोषक था जिसके अनुसार क्षत्रिय वर्ण का व्यक्ति ही राजत्व का अधिकारी हो सकता था।

प्रारंभिक जीवन

➣ चंद्रगुप्त मौर्य के वंश और जाति के संबंध में विद्वान एकमत नहीं हैं। कुछ विद्वानों ने ब्राह्मण साहित्य, मुद्राराक्षस, विष्णुपुराण आदि के आधार पर इसे शूद्र माना है। अधिकांश विद्वान क्षत्रिय होने पर सहमत हैं।

ब्राह्मण साहित्य में चन्द्रगुप्त मौर्य को शूद्र, जैन एवं बौद्ध साहित्य में क्षत्रिय तथा ग्रीक साहित्य में उसे निम्न-कुल का नहीं, बल्कि निम्न परिस्थिति में जन्मा हुआ बताते हैं।

विशाखदत्त के मुद्राराक्षस में उसे वृषल (निम्न कुल का) कहा गया स्पूनर ने चन्द्रगुप्त मौर्य को पारसिक/ईरानी बताया या है।

➣ क्षेमेंद्र कृत बृहत्कथामंजरी तथा सोमदेव कृत कथासरित्सागर में चंद्रगुप्त के शूद्र उत्पत्ति के विषय में विवरण मिलता है।

➣ बौद्ध ग्रंथ महाबोधिवंश के अनुसार, मौर्यनेपाली तराई के पास गोरखपुर क्षेत्र के पीपहलिवन के छोटे गणराज्य के क्षत्रिय वंश या शासक वंश के थे।

➣ हेमचंद्र के परिशिष्टपर्वन में चंद्रगुप्त को मयूर पोषकों के ग्राम के मुखिया के पुत्री का पुत्र बताया गया है।

➣ विलियम जोंस पहले विद्वान थे, जिन्होंने सैंड्रोकोट्स की पहचान मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य से की।

एरियन तथा प्लूटार्क ने चंद्रगुप्त मौर्य को एंड्रोकोट्स के रूप में वर्णित किया है।

जस्टिन ने सैंड्रोकोट्स (चंद्रगुप्त मौर्य) और सिकंदर महान की भेंट का उल्लेख किया है।

ढुण्डिराज एवं श्रीधरस्वामी ने चन्द्रगुप्त मौर्य को मुरा नामक महिला से उत्पन्न बताया है।

➣ बौद्ध ग्रन्थ महापरिनिब्बनसुत्त में मौर्यों को पिप्पलीवन के क्षत्रिय बताया गया है।

चन्द्रगुप्त की मगध विजय

➣ इनका प्रथम आक्रमण मगध पर था, जो असफल हुआ, जिसकी जानकारी महाबोधिवंश में वर्णित है।

पंजाब विजय एवं मगध पर आक्रमण कर नन्द वंश का अन्त किया, जिसकी जानकारी महावंश की टीका वशंथप्रकाशिनी से मिलती है।

➣ नन्द वंश के विरूद्ध रक्तपात से भरे युद्ध का वर्णन मिलिन्द पन्हो में है। इस युद्ध में धनानन्द के अमात्य शकटार ने चन्द्रगुप्त मौर्य की सहायता की थी।

साम्राज्य विस्तार

मुद्राराक्षस में वर्णित है कि ‘चन्द्रगुप्त का साम्राज्य चतुः समुदुपर्यन्त था। चतुः समुद्रपर्यन्त का अर्थ है- चारों समुद्रों तक” या “चारों समुद्रों की सीमा तक फैली हुई”।

प्लूटार्क एवं जस्टिन के अनुसार ‘चन्द्रगुप्त ने सम्पूर्ण भारत पर अधिकार कर लिया था। चन्द्रगुप्त ने प्रारम्भिक साम्राज्य विस्तार में हिमालय क्षेत्र के पर्वतक नामक शासक से सहायता प्राप्त की।

अहनानूर में वर्णन है कि मौर्यों ने एक विशाल सेना लेकर दक्षिण क्षेत्र में राजा मोहर पर आक्रमण किया। इस अभियान में कौशर एवं वाडुगर नामक जातियों ने मौयों की मदद की थी।

➣ यूनानी लेखक प्लूटार्क के अनुसार “चन्द्रगुप्त ने छः लाख की सेना लेकर सम्पूर्ण भारत को रौंद डाला और उस पर अधिकार कर लिया।” जस्टिन ने भी इसी प्रकार के विचार प्रकट किये हैं।

➣ चन्द्रगुप्त मौर्य की दक्षिण भारत की विजय के विषय में जानकारी तमिल ग्रन्थ अहनानूर एवं मुरनानूर तथा अशोक के अभिलेखों से मिलती है।

➣ बंगाल पर चन्द्रगुप्त की विजय महास्थान अभिलेख से प्रकट होती है। महास्थान अभिलेख में काकिणी (काकिनी) नामक मुद्रा का उल्लेख भी मिलता है।

➣ चन्द्रगुप्त मौर्य ने उत्तर-पश्चिम में हिन्दुकुश पर्वत तक अपनी सीमा का विस्तार कर सर्वप्रथम भारत की वैज्ञानिक सीमा को प्राप्त किया, जिसके लिए 18वीं-19वीं शताब्दी में अंग्रेज भी संघर्षरत रहे।” यह कथन विन्सेन्ट स्मिथ का है।

305 ई.पू. में चन्द्रगुप्त ने तत्कालीन यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया। फलस्वरुप चन्द्रगुप्त तथा सेल्युकस के बीच सन्धि हुई।

➣ सन्धिस्वरूप सेल्यूकस ने अपनी पुत्री हेलेना का विवाह चन्द्रगुप्त से किया, चार प्रान्त – एरिया (हेरात), अराकोसिया (कन्धार), जेड्रोसिया (बलुचिस्तान/मकरानतट) तथा पेरोपनिसडाई (काबुल) दहेज में दिये। बदले में चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को 500 हाथी दिये।

➣ सेल्यूकस के साथ हुए चन्द्रगुप्त के इस युद्ध एवं सन्धि का वर्णन एप्पियानस, स्ट्रेबो एवं प्लुटार्क ने किया है एंव एप्पियानस एवं स्ट्रेबो ने इस वैवाहिक संबंध का वर्णन किया है।

➣ इस विवाह के लिए चाणक्य ने दो शर्त रखी थी –

  • पहली, हेलेना से उत्पन्न संतान उनके राज्य का उत्तराधिकारी नहीं होगी, क्योंकि हेलेना एक विदेशी महिला हैं।
  • दूसरी – हेलेना कभी भी चंद्रगुप्त के राज्य कार्य में हस्तक्षेप नहीं करेंगी, लेकिन गृहस्थ जीवन में उनका पूर्ण अधिकार होगा।

विशाखदत्त के नाटक मुद्राराक्षस में भी इस युद्ध एवं हेलन से चन्द्रगुप्त के विवाह का वर्णन है।

➣ चन्द्रगुप्त मौर्य के बारे में कहा जाता है कि उसने समुद्रों के मध्य की भूमि को जीता था। उसका साम्राज्य उत्तर-पश्चिम में ईरान (फारस) से लेकर पूर्व में बंगाल तक, उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में उत्तरी कर्नाटक (मैसूर) तक फैला हुआ था।

➣ सल्यूकस ने अपने राजदूत मेगस्थनीज को चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा। यूनानी लेखकों ने पाटलिपुत्र को पालिनोथा के नाम से संबोधित किया।

➣ मेगस्थनीज मौर्य दरबार में काफी समय तक रहा। भारत में रहकर उसने जो कुछ देखा-सुना उसे उसने इण्डिका नामक अपनी पुस्तक लिपिबद्ध किया।

➣ चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन के अन्तिम वर्षों में मगध में 12 वर्षों तक भीषण अकाल पड़ा, जिसकी पुष्टि जैन ग्रन्थों से होती है।

➣ चन्द्रगुप्त मौर्य के महास्थान एवं सौहगरा अभिलेख भी अकाल से निपटने के प्रबन्धों (राशनिंग प्रणाली) पर प्रकाश डालते हैं।

➣ चन्द्रगुप्त मौर्य के सौराष्ट्र के गवर्नर (राष्ट्रीय) पुष्यगुप्त वैश्य ने इतिहास प्रसिद्ध सुदर्शन झील का निर्माण कराया। इससे चन्द्रगुप्त मौर्य के पश्चिम भारत पर प्रभाव की जानकारी मिलती है।

➣ चन्द्रगुप्त मौर्य की चन्द्रगुप्त संज्ञा का प्राचीनतम् अभिलेखीय साक्ष्य रूद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख से मिलता है।

मृत्यु

➣ अपने अन्तिम समय में चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैन मुनि भद्रबाहु से दीक्षा लेकर श्रवणबेलगोला (मैसूर) में 298 ई.पू. सल्लेखण (उपवास) द्वारा देह का त्याग किया।

➣ परिशिष्ट पर्व के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म स्वीकार किया था।

➣ सेल्यूकस सिकंदर का प्रमुख सेनापति था। सिकंदर की मृत्यु के बाद वह बेबीलोन का शासक बना था। साथ ही सिकंदर द्वारा जीते गये भारतीय और ईरानी क्षेत्रों का भी उत्तराधिकारी बन बैठा।

➣ उसने सेल्यूसिड नाम से अपना साम्राज्य भी खड़ा कर लिया और बैजीलियस नामक उपाधि धारण की, जिसका अर्थ होता है राजा।

➣ सिकंदर की ही तरह सेल्यूकस ने भी भारत पर 304 ई.पू. में आक्रमण किया। जिसमे उसे सम्राट चंद्रगुप्त का सामना करना पड़ा। इस युद्ध में उसकी हार हुई फलतः उसे संधि का प्रस्ताव करना पड़ा।

➣ चंद्रगुप्त मौर्य के शासन की दो मुख्य उपलब्धियां –

  • यूनानियों के विदेशी शासन से देश को मुक्त करना।
  • नंदों के घृणित एवं अत्याचारपूर्ण शासन की समाप्ति।

व्यक्तित्व

➣ चंद्रगुप्त मौर्य को एक महान विजेता, साम्राज्य निर्माता तथा कुशल प्रशासक कहा गया है।

➣ चंद्रगुप्त की प्रशासनिक योग्यता अपने समय में उत्कृष्ट थी। मौर्यो की प्रशासनिक व्यवस्था कालांतर की सभी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्थाओं का आधार कही जा सकती है।

➣ यह बहुत कुछ चंद्रगुप्त की रचनात्मक प्रतिभा तथा उसके गुरु एवं प्रधान कौटिल्य की राजनीतिक सूझबूझ का ही परिणाम थी।

चन्द्रगुप्त मौर्य के विभिन्न नाम

➣ यूनानी ग्रन्थों में चन्द्रगुप्त मौर्य के 3 नामों का उल्लेख मिलता है-

सैन्ड्रोकोट्सइस शब्द का प्रयोग स्ट्रैबो, मरियन एवं जस्टिन ने किया है।
एन्ड्रोकोट्स इस नाम का प्रयोग एप्पियानस और प्लूटार्क ने किया है।
सैन्ड्रोकोप्ट्स इसका प्रयोग नियार्कस ने किया है।

➣ चन्द्रगुप्त के प्रशासन की सबसे बड़ी विशेषता, विशाल सेना का रख-रखाव था।

चंद्रगुप्त की मुक्ति सेना

➣ चंद्रगुप्त ने उन गणतंत्रों के वीर सैनिक व जनता को एकत्रित किया था जिन्होंने अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सिकंदर से अंतिम दम तक युद्ध किया था। इनको जस्टिन ने लुटेरा कहा है।

➣ भारतीय ग्रंथों में आरट्ट या अराष्ट्रक कहा गया है। किंतु चंद्रगुप्त केवल इन रंग रूटों पर ही निर्भर नहीं रहा।

➣ उसने सैन्य संग्रह के सभी साधनों का उपयोग किया और एक मिली-जुली सेना तैयार की जिसमें मुद्रारक्षस नाटक के अनुसार शक, यवन, किरात, कंबोज, पारसीक, वाह्निक आदि विविध जातियों के सैनिक सम्मिलित थे।

कौटिल्य/चाणक्य

➣ चाणक्य चन्द्रगुप्त का प्रधानमंत्री एंव गुरु था जिसने उसे मगध की गद्दी प्राप्त करने में सहायता प्रदान की थी।

महावंश टीका में उल्लेख मिलता है कि चाणक्य तक्षशिला निवासी एक ब्राह्मण था। पुराणों में उसे द्विजर्षम’ (श्रेष्ठ ब्राह्मण) कहा गया है।

➣ माना जाता है कि चाणक्य ने ईसा से 370 वर्ष पूर्व ऋषि चणक के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। उसका पालन-पोषण और शिक्षा उसकी माता के संरक्षण में हुआ।

बृहत्कथाकोश के अनुसार चाणक्य की पत्नी का नाम यशोमती था।

➣ चंद्रगुप्त एवं चाणक्य ने मिलकर नंद वंश का उन्मूलन कर मौर्य वंश की नींव डाली। महावंश के अनुसार कौटिल्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य को जम्बू द्वीप (भारत) का शासक (सकल जम्बूद्वीप स्वामी) बनाया।

मुद्राराक्षस में कहा गया है कि राजा नंद ने भरे दरबार में चाणक्य को उसके उस सम्मानित पद से हटा दिया जो उसे दरबार में दिया गया था। इस पर चाणक्य ने शपथ ली कि वह उसके परिवार तथा वंश को समूल नष्ट करके नंद से बदला लेगा।

बिन्दुसार (298-273 ई.पू.)

➣ बिन्दुसार चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। जो 298 ईसा पूर्व में 15 वर्ष की आयु में मगध की राजगद्दी पर बैठा।

➣ बिन्दुसार को वायु पुराण में मद्रसार तथा जैन ग्रन्थों में सिंहसेन कहा गया है। बिंदुसार, अमित्रघात नाम से भी जाना जाता जिसका अर्थ होता है- शत्रु विनाशक।

➣ जैन ग्रन्थों के अनुसार बिन्दुसार की माता का नाम दुर्धरा था। बिन्दुसार का सीजेरियन तकनीक (सर्जरी) से जन्म हुआ था।

➣ यूनानी लेखों में इसे अमित्रोकेडस एवं स्ट्रेबो ने अलित्रोकेडस कहा है, जबकि पंतजलि के महाभाष्य में अमित्रघात नाम है।

बिन्दुसार के विभिन्न नाम
स्रोत नाम
अमित्रोचेट्स यूनानी लेखक
अमित्रघात संस्कृत ग्रन्थ (पतंजलि)
अमिट्रोकेड्स स्ट्रेबो
वायु पुराण मद्रसार
जैन ग्रन्थ सिंहसेन
फा प्येन चुलीन (चीनी ग्रंथ) बिन्दुपाल

यूनानी सम्बन्ध

➣ स्ट्रैबो के अनुसार, सीरिया का शासक एटियोकस प्रथम ने डायमेकस नामक एक राजदूत बिंदुसार के दरबार में भेजा, जो मेगस्थनीज का उत्तराधिकारी माना जाता था।

➣ प्लिनी के अनुसार मिस्र के शासक टालमी द्वितीय फिलाडेल्फस ने डायनोसिस (डायोनिसिस) नामक राजदूत बिन्दुसार के दरबार में भेजा था।

➣ टालमी द्वितीय फिलाडेल्फस’ ने सिकन्दरिया में भारतीय ग्रन्थों के अनुवाद को सुरक्षित रखने हेतु एक पुस्तकालय की स्थापना की।

एथीनियस नामक एक अन्य यूनानी लेखक ने बिंदुसार तथा सीरिया के शासक एटियोकस प्रथम के बीच मैत्रीपूर्ण पत्र-व्यवहार का वर्णन किया है, जिसमें भारतीय शासक ने तीन चीजों की मांग की थी-

  • सूखी अंजीर
  • अंगूरी मदिरा
  • एक दार्शनिक

➣ सीरियाई सम्राट ने दो चीजें (अंगूरी मदिरा तथा सूखी अंजीर) भिजवा दीं, परंतु तीसरी मांग के संबंध में कहा कि यूनानी कानून के अनुसार दार्शनिकों का विक्रय नहीं किया जा सकता है।

तक्षशिला विद्रोह

➣ बिंदुसार के शासनकाल में तक्षशिला में हुए दो विद्रोहों का वर्णन मिलता है। उस समय तक्षशिला का गवर्नर सुसीम था। इस विद्रोह को दबाने के लिये बिंदुसार ने पहले सुसीम को और बाद में अशोक को भेजा।

तक्षशिला का प्रथम विद्रोह जनता का एवं दूसरा राजदरबार के षडयंत्र का परिणाम था। प्रथम विद्रोह के दमन के समय अशोक उज्जैन/अवन्ति के गवर्नर के रूप में गया था।

तारानाथ के अनुसार बिन्दुसार ने 16 प्रदेशों पर विजय पाई एवं अपना साम्राज्य एक समुद्र से दूसरे समुद्र तक फैलाया।’

महावंश के अनुसार बिन्दुसार ब्राह्मण धर्म का अनुयायी था। उसने 60 हजार ब्राह्मणों के प्रति उदारता दिखाई।

➣ बिन्दुसार आजीवक धर्म का अनुयायी था। दिव्यावदान से ज्ञात होता है कि उसकी राजसभा में आजीवक संप्रदाय का एक ज्योतिषी पिंगलवत्स निवास करता था।

चाणक्य बिन्दुसार का भी प्रधानमंत्री था। चाणक्य के बाद राधागुप्त प्रधानमंत्री बना।

दिव्यावदान के अनुसार बिन्दुसार की सभा में 500 सदस्यों वाली एक मंत्रिपरिषद् थी, जिसका प्रधान खल्लाटक था।

सम्राट अशोक (273- 232 ई.पू.)

➣ अशोक बिन्दुसार का पुत्र था। जैन अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने बिंदुसार की इच्छा के विरुद्ध मगध के शासन पर अधिकार कर लिया।

➣ बिन्दुसार ने अशोक के बड़े भाई सुसीम को उत्तराधिकारी नियुक्त किया, लेकिन अशोक प्रधानमंत्री राधागुप्त की सहायता से सम्राट बनने में सफल रहा। उसने राधागुप्त को अपना प्रधानमंत्री बनाया।

➣ अशोक शुरुआत में ब्राह्मण धर्म का अनुयायी था परंतु बाद में कलिंग युद्ध के पश्चात बौद्ध अनुयायी बन गया। राजतरंगिणी के अनुसार अशोक शैव धर्म का अनुयायी था।

राज्याभिषेक

➣ राज्याभिषेक से पूर्व अशोक उज्जैन का गर्वनर था।

महाबोधिवंश तथा तारानाथ के अनुसार सत्ता प्राप्ति के लिये गृहयुद्ध में अपने 99 भाइयों का वध करके अशोक ने साम्राज्य प्राप्त किया।

➣ चार वर्ष तक चले इस उत्तराधिकार युद्ध के पश्चात् अशोक ने 269 ई.पू. विधिवत राज्याभिषेक करवाया।

➣ अशोक ने चक्रवती सम्राट की उपाधि धारण की थी। चक्रवर्ती सम्राट की परिभाषा चाणक्य के अर्थशास्त्र में मिलती है।

चाणक्य के अनुसार, हिमालय से लेकर समुद्र तक हजार योजन विस्तार वाला भू-भाग चक्रवर्ती राजा का शासन होता है। भरत, भारत के पहले ‘चक्रवर्ती सम्राट’ थे।

➣ आजीवक मुनि पिंगलवत्सजीव (बिन्दुसार के दरबार में) ने भविष्यवाणी की थी कि अशोक राजसिंहासन पर बैठेगा।

स्रोत

➣ अशोक के जीवन की प्रारम्भिक जानकारी बौद्ध ग्रन्थों दिव्यावदान एवं सिंहली अनुश्रुति से मिलती है।

➣ बौद्ध ग्रन्थों में अशोक की माता का नाम सुभद्रांगी मिलता है। इसके अन्य नाम धर्मा एवं जनपद, कल्याणी थे। वह चम्पा के ब्राह्मण की बेटी थी।

➣ अशोक की माता सुभद्रांगी आजीवक धर्म की अनुयायी थी। आजीवक जनसान उसके कुलगुरु थे।

➣ अशोक नाम का उल्लेख मास्की, गुर्जरा, नेट्टूर तथा उदेगोलम अभिलेख में ही मिलता है। पुराणों में उसे अशोकवर्धन तथा दीपवंश में करमोली कहा गया है। कनगनहल्ली लेख में राज्यो/राजा अशोक कहा है।

➣ अशोक ने गुजर्रा अभिलेख में स्वयं को राजा अशोक कहा है। अशोक को धर्मराज भी कहा गया है।

➣ अभिलेखों में अशोक को ईरानी शैली में देवनांप्रिय तथा देवनांपियदस्सि (देवों का प्यारा) जैसी उपाधियों से विभूषित किया गया है।

➣ अशोक के अलावा उसके पौत्र दशरथ तथा श्रीलंका के शासक तिस्स ने भी देवनांप्रिय की उपाधि धारण की।

➣ राज्याभिषेक से संबंधित मास्की के लघु शिलालेख में अशोक ने स्वयं को बुद्ध शाक्य कहा है।

बुद्धघोष द्वारा रचित सामन्तपासादिका एवं सुमंगल विलासिनी से एवं आर्यमंजूश्रीमूलकल्प से अशोक के जीवन की घटनाएँ मिलती अशोकावदानमाला में उपगुप्त द्वारा अशोक को दिये गये धर्मोपदेश की जानकारी मिलती है।

➣ कल्हण अशोक को कश्मीर का प्रथम मौर्य शासक बताता है। राजतरंगिणी के अनुसार अशोक ने वितस्ता (झेलम) नदी के किनारे श्रीनगर की स्थापना की।

सारनाथ लेख के अनुसार नेपाल अशोक के साम्राज्य में था। अशोक की पुत्री चारूमती ने नेपाल में देवपतन एवं अशोक ने ललितपतन नगर बसाया।

साम्राज्य विस्तार

➣ कई अभिलेखों से स्पष्ट हो जाता है कि उसका साम्राज्य उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत (अफगानिस्तान) से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तथा पश्चिम में काठियावाड़ (गुजरात) से लेकर पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत था।

➣ कल्हण की राजतरंगिणी से पता चलता है कि उसका अधिकार कश्मीर पर भी था।

➣ इसके अनुसार उसने वहाँ धर्मारिणी विहार में अशोकेश्वर नामक मंदिर की स्थापना करवाई थी। कश्मीर में श्रीनगर तथा नेपाल में देवपत्तन नामक नगर बसाया।

असम में अशोक कालीन साक्ष्यों के न मिलने से स्पष्ट होता है कि वह मौर्य साम्राज्य के बाहर था।

कलिंग युद्ध (261 ई. पू. )

➣ सिंहासन पर विराजमान होने के बाद, अशोक ने केवल एक युद्ध किया, जिसे कलिंग युद्ध कहा जाता है। अशोक के तेरहवें अभिलेख से कलिंग युद्ध के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है।

➣ अपने राज्याभिषेक के 8वें वर्ष में लगभग 261 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया और कलिंग की राजधानी तोसली पर अधिकार कर लिया। यह वर्तमान ओडिशा के दक्षिणी भाग स्थित है।

➣ कलिंग के हाथीगुम्फा अभिलेख से प्रकट होता है कि सम्भवतः उस समय कलिंग पर नन्दराज नाम का कोई राजा राज्य कर रहा था।

➣ उसके अनुसार, इस दौरान 1,00,000 लोग मारे गए, लाखों तबाह हो गए और 1,50,000 को कैदी बना लिया गया। नरसंहार से विचलित अशोक ने युद्ध की नीति त्याग कर, सांस्कृतिक विजय की नीति अपनाई। फलस्वरूप अशोक ने भेरिघोष का स्थान पर धम्मघोष अपना लिया।

भब्रू अभिलेख से ज्ञात होता है कि कलिंग युद्ध के ढाई वर्ष बाद अशोक ने उपगुप्त के प्रभाव में आकर बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था।

प्लिनी के अनुसार अशोक ने कलिंग को व्यापार-व्यवसाय की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण समझकर इस पर आक्रमण किया।

➣ कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार कलिंग हाथियों के लिए प्रसिद्ध था। इन्हीं हाथियों को प्राप्त करने के लिए अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया था।

➣ विजयोपरान्त कलिंग में दो अधीनस्थ प्रशासनिक केन्द्र स्थापित किये गये-(1) उत्तरी केन्द्र (राजधानी-तोसलि, धौली) (2) दक्षिणी केन्द्र (राजधानी- जौगढ़) समापा।

अशोक और बौद्ध धर्म

➣ सिंहली अनुश्रुतियों दीपवंश एवं महावंश के अनुसार अशोक को उसके शासन के चौथे वर्ष निग्रोध नामक भिक्षु ने बौद्ध धर्म में दीक्षित किया। तत्पश्चात् मोग्गलिपुत्ततिस्स के प्रभाव से वह पूर्णरूपेण बौद्ध हो गया।

➣ अशोक ने मोग्गलिपुत्ततिस्स की अध्यक्षता में तीसरी बौद्ध संगीति बुलाई। जिसमे मौग्गलिपुत्ततिस्स ने अभिधम्म पिटक के कथावस्तु की रचना की।

मोग्गलिपुत्ततिस्स ने अशोक के पुत्र महेन्द्र को भी बौद्ध धर्म में दीक्षित किया।

➣ बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद अशोक ने आखेट तथा विहार यात्राएँ रोक दी तथा उनके स्थान पर धर्म याजाएँ प्रारंभ की।

➣ डॉ. स्मिथ के अनुसार अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के स्थलों की तीर्थयात्रा का क्रम- लुम्बिनी, कपिलवस्तु, सारनाथ, श्रावस्ती, बौधगया एवं कुशीनगर था।

दिव्यावदान के अनुसार बालपण्डित (समुद्र) नामक भिक्षु के प्रभाव के कारण अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया एवं उपगुप्त ने अशोक को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया।

➣ अशोक ने अपने शासन के दसवें वर्ष सर्वप्रथम बोध गया की यात्रा की। इसके बाद अपने अभिषेक के बीसवें वर्ष लुम्बिनी ग्राम गया।

➣ उसने लुम्बिनी ग्राम को कर मुक्त घोषित किया क्योंकि यह बुद्ध का जन्म स्थल था तथा केवल 1/8 भाग कर के रूप में लेने की घोषणा की।

➣ राज्याभिषेक के बीसवें वर्ष अशोक निगालीसागर भी गया तथा 14वें वर्ष कनकमुनि बुद्ध के स्तूप का दूसरी बार संवर्द्धन कर आकार दो गुना किया।

भाब्रू शिलालेख में अशोक बुद्ध, धम्म तथा संघ के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करता है। यह अशोक के बौद्ध होने का सबसे बड़ा प्रमाण है। इसमें 7 महत्वपूर्ण बौद्ध पुस्तकों की सूची दी गई है।

➣ अशोक को बौद्ध सिद्ध करने वाला दूसरा अभिलेख उसका शासनादेश है, जो सारनाथ, साँची तथा कौशाम्बी के लघु स्तम्भों पर उत्कीर्ण है।

➣ राज्याभिषेक से संबंधित लघु शिलालेख में अशोक ने अपने को बुद्धशाक्य (बुद्धोपासक) कहा है।

तारानाथ ने अशोक का धर्म तान्त्रिक बौद्ध एवं उसे मातृदेवी का उपासक बताया है जबकि स्मिथ के अनुसार अशोक एक साथ भिक्षु एवं सम्राट दोनों था।

बराबर की पहाड़ियों में अशोक ने आजीवकों के निवास हेतु चार गुफाओं का निर्माण कराया, जिनके नाम थे- कर्ण, चौपार, सुदामा तथा विश्व झोपड़ी।

➣ अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए लगभग 84,000 स्तूपों का निर्माण करवाया। जिसमे सबसे विख्यात साँची-स्तूप है। किन्तु कालांतर में पुष्यमित्र शुंग ने इन 84 हजार स्तूपों को नष्ट कर दिया।

➣ अशोक ने ना केवल दक्षिण भारत, बल्कि श्रीलंका, म्यांमार (बर्मा) और अन्य देशों में लोगों को बौद्ध धर्म में परिवर्तित करने के लिए अपने प्रचारक भेजे-

धर्म प्रचारकदेश
महेन्द्र और संघमित्राश्रीलंका
महादेवमहिषमंडल (मैसूर)
सोन और उत्तरासुवर्ण भूमि
महाधर्मरक्षितमहाराष्ट्र
मज्झन्तिककश्मीर व गांधार
रक्षितवनवासी (कर्नाटक)
धर्मरक्षितअपरातक
महारक्षितयवन देश
मज्झिमहिमालय देश

अशोक का धम्म

➣ मौर्य काल में नास्तिक धर्मों की लोकप्रियता में वृद्धि हुई, जिसकी ब्राह्मण धर्म में कठोर प्रतिक्रिया हुई। परिणामस्वरूप सामाजिक वातावरण तनावपूर्ण हुआ। इस तनाव को अशोक ने धम्म से भरने की कोशिश की।

➣ अपनी प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए अशोक ने जिन आचारों एवं नियमों की संहिता प्रस्तुत की है, उसे अभिलेखों में धम्म कहा गया है। अशोक ने धम्म की परिभाषा दीर्घ निकाय के राहुलोवाद सुत्त(सिंगालोवाद सुत) से ली है।

➣ अशोक का धम्म मूलतः उपासक बौद्ध धर्म था। जिसका चरम लक्ष्य स्वर्ग प्राप्ति था। रोमिला थापर के अनुसार अशोक के धम्म का उद्देश्य देश की राजनैतिक एकता की प्राप्ति था।

➣ अशोक का धम्म सभी धर्मों का मिश्रण है। धम्म की परिभाषा अशोक के 7वें स्तम्भ लेखों में मिलती है। उसने अपने धम्म की परिभाषा सामान्यत: राहुलोवाद सूत्त से ली थी।

➣ अपने सिंहासनारोहण के 12वें वर्ष अशोक ने निगाली सागर की धर्म यात्रा की। वहां उसने कनक मुनि के स्तूप का विस्तार किया।

➣ अशोक ने धम्म के प्रचार के लिए 13वें वर्ष में नये अधिकारी धम्म महामात्र की नियुक्ति की।

प्रादेशिक, राजुक तथा युक्तों को प्रति पाँचवें वर्ष धर्म प्रचार हेतु यात्रा पर भेजा जाता था, जिसे अनुसंयान कहा गया है, जबकि उज्जैन एवं तक्षशिला में प्रति तीसरे वर्ष इन्हें यात्रा हेतु भेजा जाता था।

➣ उसके धम्म में अहिंसा, बड़ों का सम्मान, पशु वध पर रोक, सभी सम्प्रदायों में सहिष्णुता,खीले उत्सवों एवं कर्मकांडों पर रोक, ब्राह्मणों एवं श्रमणों के प्रति उदारता आदि शामिल थे।

➣ अशोक ने धम्म महामात्रों को महिला सहित विभिन्न सामाजिक समूहों में धर्म प्रचार के लिए नियुक्त किया और अपने साम्राज्य में न्याय लागू करने के लिए राजुका नियुक्त किए।

➣ अशोक ने धम्म के विचारों को प्रसारित करने के लिये सीरिया, मिस, ग्रीस तथा श्रीलंका आदि देशों में दूत भेजे। उल्लेखनीय है भारत से बाहर सर्वप्रथम बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार अशोक ने किया था।

अशोक की उपाधियाँ

उपाधिस्रोत
1. अशोकमास्की लघु शिलालेख
2. देवानांप्रियस अशोक राजागुर्जरा लघु शिलालेख
3. अशोक मौर्यरूद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
4. पियदस्सि राजा बराबर गुहा लेख
5. पियदस्सि राजा मगधभाब्रू बैराट लघु शिलालेख
6. पियदस्सि राजाकंधार वृहत शिलालेख, दीपवंश, महावंश
7. अशोकवर्द्धनपुराण
8. राजा अशोकनेटूर लघु शिलालेख
9. राजा अशोक देवानांप्रियउद्गोलम लघु शिलालेख

अशोक के उत्तराधिकारी

तीवर, कुणाल (धविवर्धन) एवं जालौक अशोक के पुत्र थे। संघमित्रा के अलावा उसकी चारुमति नामक पुत्री भी थी। चारुमति का विवाह नेपाल के क्षत्रिय देवपाल से हुआ था।

  1. कुणाल
  2. बन्धुपालित (कुणाल का पुत्र)
  3. इन्द्रपालित (बन्धुपालित का भाई)
  4. दशोन (बन्धुपालित का पौत्र)
  5. दशरथ (अशोक का पुत्र)
  6. सम्प्रति (दशरथ का पुत्र)
  7. शालिशूक
  8. देवधर्मन् (देववर्मा)
  9. शतधनुष (देवधर्मन् का पुत्र)
  10. बृहद्रथ (अन्तिम शासक)

दिव्यावदान के अनुसार

  1. कुणाल
  2. सम्प्रति (कुणाल का पुत्र)
  3. बृहस्पति (सम्पति का पुत्र)
  4. वृषसेन (बृहस्पति का पुत्र)
  5. पुष्यधर्मन (वृषसेन का पुत्र)
  6. पुष्यमित्र (पुष्यधर्मन का पुत्र)
कुणाल (232-224 ई.पू. )

➣ अशोक को मृत्यु के पश्चात उसके पुत्रों में कुणाल को गद्दी प्राप्त हुई। बौद्ध व् जैन ग्रंथों में कुणाल को विवर्धन’ (दिव्यावदान) तथा सुयशस (विष्ण व भागवतपुराण) भी कहा गया।

➣ कुणाल के अंधा होने के कारण मगध का प्रशासन उसके पुत्र सम्प्रति के नियंत्रण में था। इसीलिए बौद्ध व जैनगंथों में संपति को ही अशोक का उत्तराधिकारी माना गया है।

जालौक : कश्मीर

➣ कल्हण की राजतरंगिणी के अनुसार कश्मीर का स्वतंत्र शासक अशोक का पुत्र जालौक था जिसने श्रीनगर बसाया।

➣ कुणाल के शासनकाल में पश्चिमोत्तर सीमा पर यवनो के आक्रमण होने लग गए। जिसे रोकने के लिए अशोक के द्वितीय पुत्र जालौक को भेजा गया।

➣ जालौक आक्रमणों को रोकने में सफल रहा। परन्तु उसने कश्मीर को साम्राज्य से अलग स्वंत्रत कर दिया और वहां शासन करने लगा।

कुणाल के पश्चात मौर्य साम्राज्य पश्चिमी और पूर्वी दो भागों में विभाजित हो गया। पश्चिमी भाग पर सम्प्रति का शासन था, जिसकी राजधानी उज्जयिनी थी। जबकि पूर्वी भाग पर दशरथ (अशोक का पौत्र) का शासन था, जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।

दशरथ (224-216 ई.पू.)

वायुपुराण के अनुसार कुणाल के बाद उसका पुत्र बंधुपालित राजा बना, लेकिन मत्स्यपुराण के अनुसार दशरथ राजा बना।

➣ दशरथ के अभिलेख नागार्जुनी पहाड़ी (बराबर की पहाड़ी, गया, बिहार) से प्राप्त हुए हैं। उसने पितामह अशोक के समान ही देवानामप्रिय को उपाधि ग्रहण की थी।

➣ दशरथ ने नागार्जुनी पहाड़ी में लोमश ऋषि की गुफा एवं गोपिका गुफा दो गुफाएं आजीवकों को दान में दी थी।

संप्रति (216-207 ई.पू.)

➣ अशोक के उत्तराधिकारियों में संप्रति सबसे योग्य शासक साबित हुआ।

➣ संप्रति अपने पिता कुणाल तथा दशरथ के शासनकाल में ही राजकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चूका था।

➣ संपति जैन मतानुयायी था। सम्प्रति ने जैन तीर्थकरों के हजारों मंदिरों का निर्माण कराया। उसने सुहास्तिन मुनि के प्रभाव में आकर जैन धर्म स्वीकार कर लिया था।

➣ अपने अंत समय में सम्प्रति ने भी चंद्रगुप्त मौर्य की तरह एक जैन की भांति श्रवणबेलगोला में सल्लेखन करते हुए प्राण त्याग दिये।

शालिशूक (207-206 ई.पू.)

➣ संप्रति के बाद शालिशक या शालिशूक राजा बना। उसका दूसरा नाम बृहस्पति भी मिलता है।

➣ वह संप्रति का पुत्र था। उसने सुभगसेन उपाधि धारण की थी।

➣ शालिशुक को गार्गी संहिता में अधार्मिक, धूर्त एवं झगड़ालू तथा यज्ञों का अनुष्ठान रोकने वाला कहा गया है।

➣ उसके शासनकाल में साम्राज्य में अव्यवस्था और अशांति व्याप्त हो गई। इस अव्यवस्था का लाभ उठा कर राजकुमार वृषसेन ने सामान्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्वतंत्र राज्य की स्थापना कर लिया।

➣ इसी समय उत्तर-पश्चिमी सीमा पर यवनों ने एण्टियोकस के नेतृत्व में हमला कर दिया। गार्गीसहिता के अनुसार यवनों ने मथुरा, पांचाल व साकेत पर अधिकार कर लिया था।

अन्य उत्तराधिकारी

➣ शालिशूक के पश्चात् देववर्मा, शतधनुष, बृहद्रव क्रमवार शासक हुए।

➣ देववर्मा के समय में ही बैक्ट्रिया के यवन शासक डिपेट्रियस ने 200 ई.पू. में भारत पर आक्रमण कर उत्तर के कुछ क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया।

➣ मौर्यवंश का अंतिम शासक बृहद्रथ (191-187 ई.पू.) था। वह एक अयोग्य शासक साबित हुआ। वह सारा समय वह भोग विलास में व्यतीत करता था।

➣ इसका लाभ कर बृहद्रथ के सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने उसकी हत्या कर सत्ता प्राप्त कर लिया और मौर्यवंश का अंत कर दिया।

➣ अब इसके पश्चात मगध पर मौयों के स्थान पर ब्राह्मणीय वंश शुंग का शासन प्रारम्भ हुआ।

साम्राज्य के पतन के कारण

ब्राह्मणों की प्रतिक्रिया

➣ अशोक पहले शैव धर्म का उपासक था। परन्तु कलिंग युद्ध के उपरांत उसने बौद्ध धर्म अपना लिया था। फलस्वरूप उसने पशु-पक्षियों की हत्या पर प्रतिबन्ध लगा दिया और महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले अनुष्ठानों की निन्दा की।

➣ अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के बलि-विरोध के अनुपालन ने ब्राह्मणों की आय को प्रभावित किया। ग्रामीण इलाकों को नियन्त्रित करने तथा वहाँ व्यवहारसमता और दण्डसमता लागू करने के लिए राजुकों को नियुक्त किया गया। इसका तात्पर्य था कि सभी वर्गों के लिए समान अपराध के लिए समान दण्ड।

➣ क्योंकि ब्राह्मणों द्वारा संकलित धर्मशास्त्रों में वर्ण के आधार पर इसमे काफी भेदभाव था। इसलिए अशोक की नीति ने ब्राह्मणों को नाराज किया।

➣ मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद कुछ अन्य साम्राज्य पर ब्राह्मणों ने शासन किया। शुंग और कण्व, जिन्होंने मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद मध्य प्रदेश और पूर्व की ओर शासन किया, ब्राह्मण थे।

➣ इसी तरह, सातवाहनों ने, जिसने पश्चिमी दक्कन और आन्ध्र में साम्राज्यों की स्थापना की, ब्राह्मण होने का दावा करते थे।

➣ इन ब्राह्मण राजवंशों ने वैदिक यज्ञ को पुनः प्रारम्भ किया जो अशोक द्वारा उपेक्षित कर दिया गया था।

वित्तीय संकट

➣ मौर्य साम्राज्य अपने काल का सबसे विशालकाय साम्राज्य था। प्राचीन समय में मौर्य के पास सबसे बड़ी सेना और अधिकारियों का सबसे बड़ा संगठन था। फलत: इसके संचालन ने मौर्य साम्राज्य के लिए वित्तीय संकट पैदा कर दिया।

➣ अशोक ने बौद्ध भिक्षुओं को बहुत दान दिए, जिसका असर शाही खजाने पर पड़ा। अन्त में, इन खर्चों के निर्वहन के लिए, वे सोने की मूर्तियों को पिघलाने के लिए तक बाध्य हुए।

चीन की महान दीवार तथा विदेशी आक्रमण

➣ अशोक मुख्यत: देश और विदेश में धर्म प्रचार में व्यस्त रहते थे, वे उत्तर-पश्चिमी सीमा की तरफ दर्रों की सुरक्षा पर ध्यान देने में असमर्थ थे।

तीसरी शताब्दी ई.पू. में मध्य एशिया सिथियन निरन्तर बढ़ रहे थे। वे चीन और भारत में स्थापित साम्राज्य के लिए खतरे की घण्टी थे।

➣ चीनी शासक सिं हुआंग ती (247-10ई.पू.) ने 220 ई.पू. में सिथियन के आक्रमण से बचने के लिए चीन की महान दीवार का निर्माण किया जबकि अशोक ने ऐसा कुछ नहीं किया।

➣ फलस्वरूप सीथियन भारत की ओर बढ़ने लगे , उन्होंने पार्थियन, शक और यूनान को भारतीय उपमहाद्वीप की तरफ बढ़ने पर मजबूर कर दिया। यूनानियों ने उत्तर अफगानिस्तान में एक राज्य स्थापित किया । जिसे बैक्ट्रिया कहा जाता था।

➣ उन्होंने सबसे पहले 206 ई.पू. में भारत पर आक्रमण किया। इसके बाद भारत कई आक्रमण हुए जो इस्वी सन् तक चले।

➣ 185 ई.पू.में, पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य साम्राज्य को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। वह एक ब्राह्मण था। जो मौर्य साम्राज्य के अन्तिम शासक बृहद्रथ के सेनापति था। उसने ब्राह्मणों को बढ़ावा दिया तथा बौद्धों का कत्ले आम किया। उनके बाद कण्व आए, वे भी ब्राह्मण थे।

➣ इतिहासकारों ने मौर्य साम्राज्य के पतन के निम्नलिखित कारण बताए हैं –

डी.एन, झा साम्राज्य के दुर्बल उत्तराधिकारी
महामहोपाध्याय अशोक की धार्मिक नीति
रोमिला थापर शासन में केंद्रीयकरण की प्रधानता
कौसाम्बी उत्तरकालीन मौर्यों की संकटपूर्ण अर्थव्यवस्था
हरप्रसाद शास्त्री व हेमचंद्र राय चौधरी अशोक की शांति प्रियता और अहिंसक नीति

सम्बंधित प्रश्न

➣ अपने गुरू चाणक्य की सहायता से अंतिम नंद शासक घनानंद को पराजित कर 25 वर्ष की आयु में किसने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की?- चंद्रगुप्त मौर्य

➣ अशोक के अभिलेखों के अतिरिक्त किस शक महाक्षत्रप का जूनागढ़ (गिरनार) लेख मौर्य इतिहास के विषय में सूचनाएं प्रदान करता है?- रूद्रदामन

➣ यूनानी लेखक चंद्रगुप्त मौर्य के लिए किस नाम का उल्लेख करते हैं?- एंड्रोकोटस या सैंड्रोकोटस

➣ सैंड्रोकोटस से चंद्रगुप्त की पहचान किसने की है?- विलियम जोन्स

➣ चंद्रगुप्त की सेना को ‘डाकुओं का गिरोह’ कौन कहता है?- जस्टिन

➣ किस शासक ने व्यापक विजयों द्वारा प्रथम अखिल भारतीय साम्राज्य की स्थापना की? चंद्रगुप्त मौर्य ने छः लाख की सेना लेकर सम्पूर्ण भारत को रौंद डाला यह कथन किस यूनानी लेखक का है – प्लूटाक

➣ सेल्युकस निकेटर ने अपनी किस पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त से करके उपर्युक्त चारो प्रांत दहेज के रूप में दिये- लेडी हेलेना/कार्नेलिया

➣ सेल्युकस निकेटर ने किसको अपने राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा?- मेगस्थनीज

➣ चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान किसका रहा- चाणक्य।

➣ चाणक्य इतिहास में अन्य किन दो नामों से जाना जाता है- विष्णुगुप्त तथा कौटिल्य

➣ चाणक्य ने किस कृति की रचना की, जिसमें 15 अधिकरण, 180 प्रकरण और करीब 6,000 श्लोक हैं जो तत्कालीन राजनीति, अर्थनीति, इतिहास, आचरणशास्त्र, धर्म आदि पर भली- भांति प्रकाश डालते हैं? – अर्थशास्त्र

➣ मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक इंडिका में किसके शासनकाल का वर्णन किया है- चंद्रगुप्त मौर्य

➣ किसने मेगस्थनीज के वृतान्त को पूर्णतया असत्य एवं अविश्वसनीय कहा है? – स्ट्रेम्बो

➣ चंद्रगुप्त मौर्य की दक्षिण भारत की विजय के विषय में जानकारी अशोक के अभिलेखों के अलावा किन तमिल ग्रंथों से मिलती है- ‘अहनानूर’ एवं ‘पुरनानूर’

➣ किस अभिलेख से बंगाल पर चंद्रगुप्त की विजय के बारे में पता चलता है? – महास्थान

➣ मेगस्थनीज ने कहा था कि भारत के लोग यूनानी देवता डायोनिसियस तथा हेराक्लीज की पूजा करते थे। इन दोनों यूनानी देवताओं की साम्यता किस हिन्दू देवों से पायी जाती है? – क्रमशः शिव तथा कृष्ण

➣ मौर्य शासनकाल के दौरान केन्द्रीय न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय कहां स्थित था? – पाटलिपुत्र

➣ जैन लेखों के अनुसार, चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के अंत में मगध को कितने वर्षों तक भीषण अकाल झेलना पड़ा? – 12 वर्षों तक

➣ जब मगध में 12 वर्ष का दुर्भिक्ष पड़ा तब सिंहासन छोड़ने के पश्चात चंद्रगुप्त मौर्य ने किस जैनमुनि से जैन धर्म की दीक्षा ली?- भद्रबाहु

➣ चंद्रगुप्त मौर्य ने 298 ई.पू. में उपवास द्वारा समाधिस्थ होकर किस स्थान पर शरीर का त्याग किया- श्रवणबेलगोला (मैसूर)

➣ चंद्रगुप्त मौर्य ने 24 वर्षों तक शासन करने के बाद अपने किस पुत्र को सिंहासन पर बैठाया?- बिंदुसार

➣ मौर्य काल में लिया जाने वाला कर ‘बलि’ किस प्रकार का कर था?- धार्मिक कर

➣ मौर्य काल में तीन भाषाओं का प्रचलन था- संस्कृत, प्राकृत और पालि।

➣ अशोक ने इनमें से किसको सम्पूर्ण साम्राज्य की राजभाषा बनाया और इसी भाषा में अपने अभिलेख उत्कीर्ण कराए? – पालि को

➣ मौर्य प्रशासन में सिक्कों की जांच करने वाले अधिकारी को क्या कहा जाता था?- रूपदर्शक

➣ मौर्य साम्राज्य की राजकीय मुद्रा चांदी से निर्मित थी, जिसका भार 3/4 तोले के बराबर था। इस राजकीय मुद्रा को क्या कहा जाता था? – पण

➣ मौर्य काल की अर्थव्यवस्था में किस शब्द का प्रयोग समुद्री मार्गों के लिए किया जाता था? – संयानपथ

➣ ब्राह्मणों को राज्य की ओर से कर मुक्त भूमि दान में दी जाती थी। इसे क्या कहा जाता था?- ब्रह्मदेय

➣ किस मौर्य शासक के समय में कश्मीर के श्रीनगर और नेपाल के ललितपाटन नामक नगरों का निर्माण हुआ?- अशोक

➣ पत्थर पर शीशे की तरह चमकीली पॉलिश लगाने की कला मौर्य कलाकारों ने किससे सीखी थी? – हखामनियों से

➣ मौर्य काल में किस जाति के विद्रोहियों को जल में डुबोकर मृत्युदंड दिया जाता था? – ब्राह्मण

➣ सांची का विशाल स्तूप किस के समय को निर्धारित करता है? – मौर्यों के समय को

➣ कुम्हरार का पुरातात्विक स्थल किसके राजप्रासाद से सम्बद्ध है?- मौर्यों के

➣ मैक्यावेली के ‘द प्रिंस’ की तुलना किस भारतीय ग्रंथ से की जा सकती है?- कौटिल्य के अर्थशास्त्र से

➣ मौर्यकाल के लोक सेवकों को आम तौर पर क्या कहा जाता था?- अमात्य

➣ अशोक के अधीन मौर्य राजतंत्र का शासन कैसा था? प्रबुद्ध स्वेच्छाचारी शासन अशोक के धर्मचक्र (या धम्मचक्र) में कितनी तीलियां (ओर) अंकित हैं? – 24

➣ विशाखदत्त ने अपने सुप्रसिद्ध नाटक ‘मुद्मराक्षस’ में किस मौर्य सम्राट का विशिष्ट रूप से वर्ण उपलब्ध है?- चंद्रगुप्त मौर्य

➣ अशोक का समकालीन तुरमय कहां का राजा था?- मिस्र

➣ पत्थर पर प्राचीनतम शिलालेख किस भाषा में थे?- प्राकृत

अशोक की विश्व को सन्देश

➣ अशोक ने सर्वप्रथम विश्व की जीओ और जीने दो व राजनीतिक हिंसा धर्म विरुद्ध है का सन्देश दिया।

➣ इतिहास में अशोक को महान सम्राट , से संबोंधित किया जाता है क्योंकि यह पहला ऐसा सम्राट था जिसने शस्त्र त्याग कर अध्यात्मिक मार्ग अपना लिया

➣ संभवत अकबर को भी महान कहा गया है , बैरम खां जो की उसका संरक्षक रहा उसकी मृत्यु के बाद अकबर में काफी परिवर्तन आया उसने अपने समकालीन धार्मिक आन्दोलन को बढ़ावा दिया इसमें उसका सबसे महतवपूर्ण कार्य जजिया कर समाप्ति का उल्लेख मिलता है जिससे उसके आध्यात्मिकता में रूचि के बारे में पता चलता है हालाँकि उसने शस्त्रों का त्याग नहीं किया उसने अपने साम्राज्य विस्तार की नीति का अनुकरण किया

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