स्वराज पार्टी का गठन PYQ MCQ प्रश्न | UPSC

भारतीय इतिहास आधुनिक भारत स्वराज पार्टी का गठन PYQ MCQ प्रश्न
1. स्वराज दल की स्थापना असफलता के बाद हुई-
(a) असहयोग आंदोलन
(b) सविनय अवज्ञा आंदोलन
(c) रौलेट बिल सत्याग्रह
(d) चंपारण सत्याग्रह
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
Bihar P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की घटना के बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को अचानक वापस ले लिया, जिससे राष्ट्रीय आंदोलन में एक गहरी निराशा छा गई। इस असफलता के बाद मोतीलाल नेहरू और चित्तरंजन दास ने विधानमंडलों के अंदर प्रवेश करके ब्रिटिश सरकार का विरोध करने की नई रणनीति अपनाई और जनवरी 1923 में ‘स्वराज पार्टी’ की स्थापना की। सी.आर. दास इसके अध्यक्ष और मोतीलाल नेहरू महासचिव बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वराज पार्टी ने 1923 के केंद्रीय विधानसभा चुनावों में 101 में से 42 सीटें जीतीं, जो उनकी उल्लेखनीय सफलता थी। इसके अलावा, 1925 में विट्ठलभाई पटेल को केंद्रीय विधानसभा का अध्यक्ष (स्पीकर) चुनवाना स्वराजियों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही — वे इस पद पर पहुँचने वाले पहले भारतीय थे।
2. ‘स्वराज दल’ की स्थापना किसने की?
(a) तिलक एवं चित्तरंजन दास
(b) गांधी एवं मोतीलाल नेहरू
(c) गांधी एवं तिलक
(d) चित्तरंजन दास एवं मोतीलाल नेहरू
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(d)
स्वराज दल की स्थापना दिसंबर 1922 में कांग्रेस के गया अधिवेशन में बहुमत से उनका प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद जनवरी 1923 में चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने मिलकर की। बाल गंगाधर तिलक का 1920 में निधन हो चुका था, अतः वे इस पार्टी के संस्थापक नहीं हो सकते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वराज पार्टी का पूरा नाम ‘कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी’ था और यह अपने को कांग्रेस का एक अभिन्न अंग मानती थी। सी.आर. दास का 1925 में निधन हो जाने के बाद स्वराज पार्टी का नेतृत्व मोतीलाल नेहरू ने संभाला और धीरे-धीरे यह पार्टी 1926 तक अप्रभावी हो गई।
3. भारत में स्वराज पार्टी की स्थापना निम्नलिखित कारणों में से एक अथवा अधिक के लिए की गई थी-
1. गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लेना
2. काउंसिलों में प्रवेश कर तथा उन्हें काम न करने देकर 1919 के भारत शासन अधिनियम का उच्छेदन करना
3. ब्रिटिश सरकार द्वारा दमन
4. भारतीयों द्वारा इस आशय की अनुभूति कि उन्हें प्रशासन का अनुभव प्राप्त करना चाहिए
कूट :
(a) 1 केवल
(b) 1 और 2
(c) 1, 2 और 3
(d) 1, 3 और 4.
U.P Lower Sub.(Pre) 1998
उत्तर-(b)
स्वराज पार्टी की स्थापना के दो मुख्य कारण थे — पहला, गांधीजी द्वारा 1922 में असहयोग आंदोलन वापस लेना जिससे राष्ट्रीय स्तर पर निराशा व्याप्त हो गई; और दूसरा, मोतीलाल नेहरू व सी.आर. दास की यह रणनीति कि 1919 के भारत शासन अधिनियम के तहत बनी परिषदों में प्रवेश करके अंदर से उन्हें ध्वस्त किया जाए। ब्रिटिश दमन (विकल्प 3) स्वराज पार्टी के गठन का प्रत्यक्ष कारण नहीं था, और प्रशासनिक अनुभव (विकल्प 4) भी मुख्य उद्देश्य नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के तहत स्थापित विधानमंडलों का आरंभ में कांग्रेस ने बहिष्कार किया था। स्वराजियों ने इन परिषदों में बजट को अस्वीकृत करके और कार्यकारी प्रस्तावों को रोककर ब्रिटिश प्रशासन को भीतर से बाधित करने की नीति अपनाई, जो ‘उत्तरदायी सरकार न चलने देने’ की नीति के रूप में जानी गई।
4. मोतीलाल नेहरू और सी.आर. दास द्वारा 1923 ई. में गठित पार्टी का नाम क्या था?
(a) इंडिपेंडेंस पार्टी
(b) गदर पार्टी
(c) स्वराज पार्टी
(d) इंडियन नेशनल पार्टी.
U.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(c)
जनवरी 1923 में मोतीलाल नेहरू और सी.आर. दास ने मिलकर ‘स्वराज पार्टी’ (कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी) की स्थापना की। इसे गदर पार्टी (जो 1913 में लाला हरदयाल ने अमेरिका में स्थापित की थी) या इंडिपेंडेंस पार्टी से भ्रमित नहीं करना चाहिए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वराज पार्टी की विचारधारा को ‘परिवर्तनवादी’ कहा जाता था, जबकि गांधी जी के समर्थक ‘अपरिवर्तनवादी’ कहलाते थे। पार्टी की सबसे बड़ी सफलता केंद्रीय विधानसभा में 1924 में मोशन ऑफ नो-कॉन्फिडेंस पास कराना था, जो किसी भारतीय दल द्वारा पहली बार किया गया था।
5. स्वराज पार्टी का गठन की असफलता के बाद हुआ।
(a) असहयोग आंदोलन
(b) भारत छोड़ो आंदोलन
(c) सिविल नाफर्मानी आंदोलन
(d) स्वदेशी आंदोलन
43rd B.P.S.C. (Pre) 1999.
उत्तर-(a)
1920-22 के असहयोग आंदोलन की विफलता और गांधीजी की गिरफ्तारी के बाद देशभर में निराशा का माहौल था। इसी निराशा के बीच से एक नई राजनीतिक दिशा निकली जब मोतीलाल नेहरू और चित्तरंजन दास ने तय किया कि ब्रिटिश शासन से लड़ाई केवल बाहर से नहीं, बल्कि परिषदों के भीतर से भी लड़ी जानी चाहिए। इस विचार ने जनवरी 1923 में स्वराज पार्टी को जन्म दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सी.आर. दास, जो उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष थे, ने गया अधिवेशन (दिसंबर 1922) में परिषद-प्रवेश का प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और स्वराज पार्टी बनाई। यह भारतीय राजनीतिक इतिहास में पहली बार था जब किसी राष्ट्रीय नेता ने रचनात्मक विरोध की रणनीति के रूप में विधायिका में भागीदारी को चुना।
6. स्वराज पार्टी को संस्थापित किया था-
(a) बाल गंगाधर तिलक तथा महात्मा गांधी ने
(b) बिपिन चंद्र पाल तथा लाला लाजपत राय ने
(c) सी.आर. दास तथा मोतीलाल नेहरू ने
(d) सरदार पटेल तथा राजेंद्र प्रसाद ने
U.P Lower Sub.(Pre) 1998
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002
M.P.P.C.S. (Pre) 2006
Uttarakhand U.D.A. / L.D.A. (Pre) 2007
उत्तर-(c)
स्वराज पार्टी की स्थापना जनवरी 1923 में सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने की थी। बाल गंगाधर तिलक का 1920 में निधन हो चुका था; बिपिन चंद्र पाल और लाला लाजपत राय गरम दल के नेता थे; तथा सरदार पटेल और राजेंद्र प्रसाद का इस पार्टी से कोई संस्थापक संबंध नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वराज पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं में श्रीनिवास आयंगर (मद्रास प्रांत की स्वराज पार्टी के प्रमुख) और एन.सी. केलकर शामिल थे। मद्रास में सी. राजगोपालाचारी ‘परिवर्तन-विरोधियों’ का नेतृत्व करते थे और उन्होंने स्वराज पार्टी में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
7. मोतीलाल नेहरू स्वराज दल के नेता थे। निम्न में से कौन दल में नहीं था ?
(a) श्रीनिवास आयंगर
(b) चितरंजन दास
(c) विट्ठलभाई पटेल
(d) सी. राजगोपालाचारी
U.P.P.C.S. (Pre)
1993 | U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(d)
सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) स्वराज दल के सदस्य नहीं थे। वे ‘परिवर्तन-विरोधी’ खेमे के प्रमुख नेता थे जिन्होंने दिसंबर 1922 के गया अधिवेशन में सी.आर. दास के प्रस्ताव को पराजित करवाया। इसके विपरीत, चित्तरंजन दास (संस्थापक व अध्यक्ष), मोतीलाल नेहरू (महासचिव), श्रीनिवास आयंगर (मद्रास शाखा) और विट्ठलभाई पटेल सभी स्वराज पार्टी के महत्वपूर्ण नेता थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विट्ठलभाई पटेल (सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई) 1925 में केंद्रीय विधान सभा के अध्यक्ष (स्पीकर) निर्वाचित हुए, जो किसी भारतीय का इस पद पर पहला चुनाव था। यह स्वराज पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
8. निम्न में किसने स्वराज पार्टी निर्माण करने के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्याग-पत्र दिया था?
(a) सी.आर. दास
(b) मोतीलाल नेहरू
(c) विट्ठलभाई पटेल
(d) फिरोजशाह मेहता
U.P. P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(a)
दिसंबर 1922 के गया अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सी.आर. दास ने परिषद-प्रवेश का प्रस्ताव रखा, किंतु यह बहुमत से अस्वीकृत हो गया। इसके बाद उन्होंने तत्काल अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया और मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर जनवरी 1923 में स्वराज पार्टी की नींव रखी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सी.आर. दास को ‘देशबंधु’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उनका निधन जून 1925 में मात्र 54 वर्ष की आयु में हो गया, जिससे स्वराज पार्टी को अपूरणीय क्षति हुई। उनके जाने के बाद पार्टी की एकजुटता कमजोर पड़ने लगी और 1926 के चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन पहले की तुलना में कमजोर रहा।
9. 1923 में स्वराज पार्टी का गठन किसने किया?
(a) महात्मा गांधी
(b) वल्लभ भाई पटेल
(c) सी.आर. दास व मोतीलाल नेहरू
(d) बी.आर. अम्बेडकर
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(c)
1923 में स्वराज पार्टी का गठन सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने किया। यह प्रश्न BPSC के संदर्भ में है, जहाँ विकल्प (d) ‘बी.आर. अम्बेडकर’ को उत्तर दिखाया गया है, किंतु ऐतिहासिक तथ्य के अनुसार सही उत्तर (c) है। महात्मा गांधी और वल्लभभाई पटेल परिषद-प्रवेश के विरोधी थे, जबकि अम्बेडकर की अलग राजनीतिक गतिविधियाँ थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वराज पार्टी ने परिषदों में बजट को अस्वीकृत करने की नीति अपनाई। 1924 में केंद्रीय विधानसभा में उन्होंने लगातार तीन बार बजट को पास नहीं होने दिया, जो ब्रिटिश शासन के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनी। इस प्रकार उन्होंने संसदीय तरीके से स्वराज की माँग को प्रभावी रूप से उठाया।
10. निम्न में से कौन ‘स्वराज पार्टी’ के गठन से संबंधित थे?
1. सुभाष चंद्र बोस 2. सी. आर. दास
3. जवाहरलाल नेहरू 4. मोतीलाल नेहरू
नीचे दिए गए कूट से सही चुनिए-
कूट :
(a) 1, 2, 3 तथा 4
(b) 1, 2 तथा 3
(c) 2 तथा 3
(d) 2 तथा 4
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू (2 और 4)
स्वराज पार्टी के गठन से सीधे जुड़े नेता सी.आर. दास (संस्थापक अध्यक्ष) और मोतीलाल नेहरू (संस्थापक महासचिव) थे। सुभाष चंद्र बोस 1923 में सी.आर. दास के राजनीतिक सहयोगी जरूर थे, किंतु वे पार्टी के संस्थापक नहीं थे। जवाहरलाल नेहरू उस दौर में युवा कांग्रेस के रूप में सक्रिय थे और परिषद-प्रवेश की नीति को लेकर संशय में थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1920 के दशक में सुभाष चंद्र बोस सी.आर. दास के प्रमुख शिष्यों में से एक थे और बंगाल में उनके राजनीतिक कार्यों में सक्रिय सहयोगी थे। सी.आर. दास के निधन के बाद बोस ने बंगाल में उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। यह भी उल्लेखनीय है कि जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस दोनों बाद में अधिक उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा की ओर झुके।
11. अगस्त, 1925 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली का अध्यक्ष निम्नलिखित में से कौन था?
(a) सी.आर. दास
(b) मोतीलाल नेहरू
(c) एम.आर. जयकर
(d) विट्ठलभाई पटेल
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
अगस्त 1925 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के अध्यक्ष विट्ठलभाई जे. पटेल थे। वे 1925 में इस पद पर निर्वाचित हुए और पहले भारतीय बने जिन्होंने इस संवैधानिक पद को सुशोभित किया। इस चुनाव को स्वराज पार्टी की सबसे बड़ी संसदीय उपलब्धियों में गिना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विट्ठलभाई पटेल, सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई थे। अध्यक्ष पद पर रहते हुए विट्ठलभाई पटेल ने पीठासीन अधिकारी की तटस्थता और गरिमा को बखूबी बनाए रखा, जिससे उन्हें ब्रिटिश सदस्यों का भी सम्मान प्राप्त हुआ।
12. स्वराज आम जनता के लिए होना चाहिए केवल वर्गों के लिए नहीं, के प्रसिद्ध सूत्र की घोषणा की-
(a) सी.आर. दास ने
(b) सी. राजगोपालाचारी ने
(c) मोतीलाल नेहरू ने
(d) गोपीनाथ साहा ने
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(a)
यह ऐतिहासिक उद्घोषणा देशबंधु चित्तरंजन दास (सी.आर. दास) की थी — “स्वराज आम जनता के लिए होना चाहिए, केवल वर्गों के लिए नहीं।” इस कथन से स्पष्ट होता है कि सी.आर. दास का दृष्टिकोण केवल उच्च वर्गीय राजनीतिक स्वायत्तता तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सामाजिक और आर्थिक न्याय के भी पक्षधर थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सी.आर. दास ने 1923 में बंगाल पैक्ट (हिंदू-मुस्लिम समझौता) किया था जिसमें सरकारी नौकरियों और स्थानीय निकायों में मुसलमानों के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व का प्रावधान था — यह उस युग में साम्प्रदायिक सौहार्द की एक साहसी कोशिश थी। हालाँकि यह पैक्ट बाद में अखिल भारतीय कांग्रेस द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया।
13. निम्न में से कौन एक स्वराज पार्टी से संबंधित नहीं थे?
(a) मोतीलाल नेहरू
(b) सी.आर. दास
(c) एन.सी केलकर
(d) राजेंद्र प्रसाद
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(d)
डॉ. राजेंद्र प्रसाद गांधीजी के अनुयायी और ‘परिवर्तन-विरोधी’ खेमे से थे, इसलिए वे स्वराज पार्टी से नहीं जुड़े। मोतीलाल नेहरू (महासचिव), सी.आर. दास (अध्यक्ष) और एन.सी. केलकर तीनों स्वराज पार्टी के प्रमुख नेता थे। एन.सी. केलकर पहले बाल गंगाधर तिलक के निकट सहयोगी थे और बाद में स्वराजियों के साथ आ गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. राजेंद्र प्रसाद बाद में भारत के प्रथम राष्ट्रपति (1950-1962) बने। वे गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह (1917) से ही उनके समर्पित अनुयायी थे और रचनात्मक कार्यक्रमों में विश्वास रखते थे, न कि परिषद-प्रवेश की नीति में।
14. वे राष्ट्रीय नेता कौन थे, जो 1925 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे?
(a) मोतीलाल नेहरू
(b) सी.आर. दास
(c) वल्लभभाई पटेल
(d) विट्ठलभाई पटेल
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(d)
1925 में विट्ठलभाई जे. पटेल सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वे स्वराज पार्टी के सक्रिय सदस्य थे। सी.आर. दास का जून 1925 में निधन हो चुका था अतः वे इस पद पर नहीं आ सकते थे। मोतीलाल नेहरू और वल्लभभाई पटेल भी इस पद पर निर्वाचित नहीं हुए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विट्ठलभाई पटेल 1933 में यूरोप में अपने उपचार के दौरान सुभाष चंद्र बोस से मिले और दोनों ने मिलकर ब्रिटिश नीतियों की आलोचना करने वाला एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया, जिसे ‘पटेल-बोस घोषणापत्र’ के नाम से जाना जाता है।
15. कांग्रेसी नेताओं द्वारा मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट की निंदा करने पर कई नरमपंथियों ने पार्टी को छोड़कर निम्न में से कौन-सी पार्टी का गठन किया ?
(a) स्वराज पार्टी
(b) इंडियन फ्रीडम पार्टी
(c) इंडिपेंडेंस फेडरेशन ऑफ इंडिया
(d) इंडियन लिबरल फेडरेशन
I.A.S. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
जब कांग्रेस ने मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों की निंदा की, तो सुरेंद्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में उदारवादी नेताओं ने कांग्रेस से अलग होकर ‘इंडियन लिबरल फेडरेशन’ (अखिल भारतीय उदारवादी संघ) की स्थापना की। इन उदारवादियों का मानना था कि सुधारों को स्वीकार कर उनके भीतर काम करना उचित है। यह भारतीय राजनीति में 1907 के सूरत विघटन के बाद दूसरा बड़ा विभाजन था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार 1919 के भारत शासन अधिनियम का आधार बने। इन सुधारों ने ‘द्वैध शासन’ (Dyarchy) प्रणाली लागू की जिसके तहत प्रांतों में कुछ विषय भारतीय मंत्रियों को और कुछ ब्रिटिश गवर्नर के पास सुरक्षित रखे गए। इसी अधूरेपन के कारण कांग्रेस इसे अपर्याप्त मानती थी।
16. निम्नलिखित में से कौन ‘देशबंधु’ के नाम से प्रसिद्ध है?
(a) चंद्रशेखर
(b) चितरंजन दास
(c) ए.ओ. ह्यूम
(d) एनी बेसेंट
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(b)
चित्तरंजन दास (सी.आर. दास) को ‘देशबंधु’ अर्थात् ‘राष्ट्र का मित्र’ के नाम से जाना जाता है। वे इंग्लैंड से बैरिस्टरी की पढ़ाई करके लौटे और एक प्रतिष्ठित वकील बने। उनकी सबसे उल्लेखनीय कानूनी सफलता 1908 के अलीपुर बमकांड मुकदमे में अरविंद घोष का बचाव करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सी.आर. दास ने 1906 में कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में स्वदेशी आंदोलन का समर्थन किया था। उन्होंने अपनी विशाल संपत्ति और सफल वकालत का त्याग करके राष्ट्र सेवा को अपनाया, जिस कारण जनता ने उन्हें ‘देशबंधु’ की उपाधि से नवाजा। उनका निधन मात्र 54 वर्ष की आयु में जून 1925 में दार्जिलिंग में हुआ।
17. निम्नलिखित घटनाओं का सही कालक्रम चुनिए-
(i) लखनऊ समझौता
(ii) स्वराज दल की स्थापना
(iii) जलियांवाला हत्याकांड
(iv) बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु
निम्नलिखित कूट में से उत्तर चुनिए-
(a) (i), (iv), (iii) एवं (ii)
(b) (iv), (iii), (i) एवं (ii)
(c) (i), (iii), (iv) एवं (ii)
(d) (i), (ii), (iii) एवं (iv)
R.A.S./ R.T.S. (Pre) 2018
उत्तर-(c)
इन घटनाओं का सही कालानुक्रम इस प्रकार है- लखनऊ समझौता : 1916 (कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच), जलियांवाला हत्याकांड : 13 अप्रैल 1919, बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु : 1 अगस्त 1920, स्वराज दल की स्थापना : जनवरी 1923।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लखनऊ समझौते में कांग्रेस ने पृथक निर्वाचन मंडल के रूप में मुसलमानों की माँग को मान लिया था, जो आगे चलकर साम्प्रदायिक राजनीति की नींव बना। वहीं जलियांवाला हत्याकांड ने भारतीय जनमानस में ब्रिटिश शासन के प्रति घृणा की जो लहर जगाई, उसने असहयोग आंदोलन को अभूतपूर्व जनसमर्थन दिलाया।
18. बिहार में स्वराज दल का गठन किसने किया?
(a) श्रीकृष्ण सिंह
(b) रामलाल शाह
(c) बंकिम चंद्र मित्र
(d) शचीन्द्रनाथ सान्याल
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
बिहार में स्वराज दल की प्रांतीय शाखा के नेता श्रीकृष्ण सिंह थे। जनवरी 1923 में सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा केंद्रीय स्तर पर स्थापित ‘कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी’ के अंतर्गत विभिन्न प्रांतों में शाखाएँ गठित की गईं। बंकिम चंद्र मित्र और शचीन्द्रनाथ सान्याल का स्वराज पार्टी से कोई सीधा संबंध नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: श्रीकृष्ण सिंह आगे चलकर स्वतंत्र भारत में बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने और ‘बिहार केसरी’ के नाम से विख्यात हुए। शचीन्द्रनाथ सान्याल क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े थे और 1924 के हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापकों में से एक थे।
19. ‘सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली’ का प्रथम भारतीय अध्यक्ष (स्पीकर) कौन था ?
(a) सर हरीसिंह गौर
(b) विट्ठलभाई जे. पटेल
(c) वल्लभभाई जे. पटेल
(d) पुरुषोत्तम दास टंडन
Uttarakhand U.D.A. / L.D.A. (Pre) 2007
उत्तर-(b)
सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के प्रथम भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई जे. पटेल थे, जो 1925 में इस पद पर निर्वाचित हुए। वे स्वराज पार्टी के सक्रिय सदस्य थे। सर हरीसिंह गौर, वल्लभभाई पटेल और पुरुषोत्तम दास टंडन में से कोई भी इस पद पर नहीं रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विट्ठलभाई पटेल से पहले इस पद पर ब्रिटिश अधिकारी आसीन होते थे। अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति स्वराजियों की उस रणनीति की सफलता थी जिसमें वे ब्रिटिश संस्थाओं के भीतर भारतीय नियंत्रण स्थापित करना चाहते थे। उन्होंने 1925 से 1930 तक इस पद पर कार्य किया।
20. स्वतंत्रता पूर्व भारत में निम्नलिखित में से किसने केंद्रीय विधानसभा में स्वराज दल का समर्थन किया था?
(a) एम.ए. जिन्ना
(b) मौलाना अबुल कलाम आजाद
(c) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(d) जवाहरलाल नेहरू
U.P. P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(a)
नवंबर 1923 के चुनावों में स्वराज पार्टी ने 101 में से 42 सीटें जीतीं। केंद्रीय विधानसभा में एक प्रभावशाली विपक्षी मोर्चा बनाने के लिए स्वराजियों ने जिन्ना के नेतृत्व वाले समूह, उदारवादियों और कुछ निर्दलीय सदस्यों जैसे मदन मोहन मालवीय के साथ गठजोड़ किया। एम.ए. जिन्ना उस दौर में अभी तक एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में जाने जाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1924 में इसी गठजोड़ के बल पर स्वराजियों ने केंद्रीय विधानसभा में एक अविश्वास प्रस्ताव पारित कराया — यह किसी भारतीय दल द्वारा ऐसा करने का पहला उदाहरण था। इसके अलावा उन्होंने सरकारी बजट को तीन बार अस्वीकृत करवाया, जो ब्रिटिश प्रशासन के लिए एक बड़ी राजनीतिक असुविधा बना।
21. निम्नलिखित में से किन लोगों ने 16 दिसंबर, 1922 को इंडिपेंडेट पार्टी बनाने का निर्णय लिया था? नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
1. लाला हरदयाल 2. मदन मोहन मालवीय
3. मोहम्मद अली जिन्ना 4. मोतीलाल नेहरू
कूट :
(a) 1 तथा 2
(b) 2 तथा 3
(c) 3 तथा 4
(d) 2 तथा 4
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-मदन मोहन मालवीय और मोतीलाल नेहरू
16 दिसंबर 1922 को मदन मोहन मालवीय और मोतीलाल नेहरू ने इंडिपेंडेंट पार्टी बनाने का निर्णय लिया था। यह पार्टी उन नेताओं का मंच थी जो परिषदों में प्रवेश तो चाहते थे किंतु सी.आर. दास की ‘स्वराज पार्टी’ से अलग अपनी पहचान रखना चाहते थे। बाद में मोतीलाल नेहरू जनवरी 1923 में सी.आर. दास के साथ मिलकर स्वराज पार्टी में शामिल हो गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मदन मोहन मालवीय हिंदू महासभा के संस्थापक सदस्यों में से थे और उन्होंने 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। वे परिषदों में काम करने के पक्षधर थे किंतु सांप्रदायिक प्रश्नों पर सी.आर. दास से मतभेद रखते थे, विशेषकर बंगाल पैक्ट (1923) के संदर्भ में।

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