जहाँगीर MCQ प्रश्न | UPSC

भारतीय इतिहास मध्यकालीन भारत जहाँगीर MCQ प्रश्न
1. निम्नलिखित अंग्रेजों में किसे जहांगीर ने ‘खान’ की उपाधि से सम्मानित किया था?
(a) हॉकिंस
(b) सर टॉमस रो
(c) एडवर्ड टेरी
(d) उपरोक्त में कोई नहीं
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(a)
जहांगीर ने विलियम हॉकिंस को ‘इंग्लिश खां’ की उपाधि प्रदान की थी। हॉकिंस 1608 ई. में सूरत बंदरगाह पर उतरा और आगरा दरबार में पहुँचा, जहाँ जहांगीर ने उसे 400 का मनसब दिया और एक आर्मीनियाई ईसाई महिला से उसका विवाह भी करवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हॉकिंस तुर्की भाषा जानता था, जिसके कारण जहांगीर उससे सीधे संवाद कर पाता था — यही कारण था कि उसे प्रारंभ में दरबार में विशेष महत्व मिला। इसके अलावा, हॉकिंस की भारत यात्रा का विवरण उसकी पत्नी मैरी हॉकिंस ने भी लिखा, जो मुगल दरबार के सामाजिक जीवन पर एक दुर्लभ महिला दृष्टिकोण प्रदान करता है।
2. ईस्ट इंडिया कंपनी ने जहांगीर के दरबार में पहले निम्न में से किसे भेजा था?
(a) सर थॉमस रो
(b) वास्कोडिगामा
(c) हॉकिंस
(d) जॉब चार्नाक
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(c)
ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से जहांगीर के दरबार में जाने वाला पहला प्रतिनिधि विलियम हॉकिंस (1608–1611 ई.) था। वह मुगल दरबार में तीन वर्षों तक रहा, किंतु पुर्तगाली व्यापारियों के विरोध और दरबारी षड्यंत्रों के कारण अंग्रेजों को व्यापारिक फरमान प्राप्त करने में सफलता नहीं मिली। सर थॉमस रो (1615–1619 ई.) ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम का राजदूत था — वह हॉकिंस के बाद आया, लेकिन वह राजनयिक स्तर का पहला आधिकारिक दूत था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: थॉमस रो ने जहांगीर से व्यापारिक संधि तो नहीं करवाई, परंतु उसने यह महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किया कि अंग्रेजों के लिए भारत में व्यापार, युद्ध से अधिक लाभकारी है — यह कथन उसके अपने पत्रों में दर्ज है।
3. मुगलों एवं मेवाड़ के राणा के मध्य ‘चित्तौड़ की संधि’ किस शासक के शासनकाल में हस्ताक्षरित हुई थी?
(a) अकबर
(b) जहांगीर
(c) शाहजहां
(d) औरंगजेब
U.P.P.C.S. (Pre) 2008 | U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
1615 ई. में मुगल सम्राट जहांगीर और मेवाड़ के राणा अमर सिंह के बीच चित्तौड़ की संधि संपन्न हुई। इस संधि की एक प्रमुख शर्त यह थी कि राणा चित्तौड़ के किले की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं करेगा। राणा अमर सिंह ने मुगल अधीनता स्वीकार कर ली और उसके पुत्र करण सिंह को मुगल दरबार में भेजा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह संधि इतिहास में उल्लेखनीय है क्योंकि यह पहली बार था जब किसी मेवाड़ शासक ने स्वेच्छा से मुगलों की अधीनता स्वीकार की — इससे पूर्व अकबर के समय महाराणा प्रताप ने कभी मुगल आधिपत्य नहीं माना। संधि की वार्ता में शहज़ादा खुर्रम (बाद में शाहजहाँ) की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
4. निम्नलिखित में से कौन जहांगीर के दरबार में ब्रिटिश शासक जेम्स प्रथम का राजदूत था?
(a) विलियम हॉकिंस
(b) विलियम फिंच
(c) पीट्रा डेला विला
(d) एडवर्ड टेरी
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(*)
इस प्रश्न का उत्तर विवादास्पद है क्योंकि दिए गए विकल्पों में सर थॉमस रो का नाम नहीं है, जो वास्तव में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम का आधिकारिक राजदूत था। थॉमस रो 1615 ई. में जहांगीर के दरबार में आया और 1619 ई. तक रहा। इसीलिए इस प्रश्न का उत्तर (*) अर्थात् कोई सही विकल्प नहीं, दिया गया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सर थॉमस रो ने अपनी भारत यात्रा का विस्तृत विवरण अपनी डायरी में लिखा, जो मुगलकालीन दरबारी जीवन, व्यापार और राजनीति को समझने का एक अमूल्य ऐतिहासिक स्रोत है। उसने जहांगीर को एक उदार और जिज्ञासु शासक के रूप में वर्णित किया है।
5. ‘दो-अस्पा’ एवं ‘सिह-अस्पा’ प्रथा किसने शुरू की थी?
(a) अकबर
(b) जहांगीर
(c) शाहजहां
(d) औरंगजेब
46th B.P.S.C. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
दो-अस्पा और सिह-अस्पा प्रथा जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में की गई एक महत्वपूर्ण संशोधन थी। ‘दो-अस्पा’ का अर्थ था दोगुनी घुड़सवार सेना और ‘सिह-अस्पा’ का अर्थ था तिगुनी घुड़सवार सेना रखना, जबकि मनसबदार का जात पद (व्यक्तिगत दर्जा) अपरिवर्तित रहता था। इससे मनसबदारों की सैन्य जिम्मेदारी बढ़ाई जा सकती थी बिना उनका दर्जा बढ़ाए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर द्वारा स्थापित मनसबदारी व्यवस्था में मूलतः ‘जात’ (व्यक्तिगत दर्जा) और ‘सवार’ (घुड़सवार सेना) — ये दो पद होते थे। जहांगीर की दो-अस्पा/सिह-अस्पा प्रथा इसी ‘सवार’ पद का विस्तार था, जिसे बाद में शाहजहाँ के शासनकाल में और अधिक जटिल बना दिया गया।
6. किस मुगल शासक का मकबरा भारत में नहीं है?
(a) औरंगजेब
(b) जहांगीर
(c) हुमायूं
(d) बाबर
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(b & d)
मुगल वंश के दो शासकों — बाबर और जहांगीर — के मकबरे भारत की वर्तमान भौगोलिक सीमाओं के बाहर स्थित हैं। बाबर का मकबरा काबुल (अफगानिस्तान) में ‘बाग-ए-बाबर’ में है, जबकि जहांगीर का मकबरा लाहौर के निकट शाहदरा (पाकिस्तान) में स्थित है। जहांगीर के मकबरे का निर्माण उनकी मृत्यु (1627 ई.) के बाद उनकी पत्नी नूरजहाँ ने करवाया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर के मकबरे की एक विशेषता यह है कि इसमें कोई गुम्बद नहीं है — यह मुगल स्थापत्य शैली से एक उल्लेखनीय विचलन है। बाबर ने स्वयं वसीयत की थी कि उन्हें काबुल में दफनाया जाए, क्योंकि वे काबुल के बगीचों से विशेष प्रेम करते थे।
7. मुगल सम्राट जहांगीर ने निम्न में से किसे ‘इंग्लिश खां’ की उपाधि दी थी?
(a) अलबुकर्क
(b) फ्रांसिस्को अल्मीडा
(c) विलियम हॉकिंस
(d) हेनरी द नेविगेटर
U.P.P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015
उत्तर-(c)
विलियम हॉकिंस अगस्त 1608 में सूरत पहुंचा और अप्रैल 1609 में जहांगीर के दरबार में आगरा पहुंचा। जहांगीर ने उससे अत्यंत मित्रवत व्यवहार किया और उसे ‘इंग्लिश खां’ की उपाधि प्रदान की तथा उसे अपने दरबार में रहने के लिए कहा। हॉकिंस ने जहांगीर के दरबार का विवरण अपनी रचना में लिखा है जो मुगलकालीन इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विलियम हॉकिंस तुर्की भाषा जानता था, जिस कारण वह जहांगीर से सीधे बातचीत कर सकता था — यही कारण था कि जहांगीर को वह पसंद आया। हॉकिंस ईस्ट इंडिया कंपनी के जहाज ‘हेक्टर’ से भारत आया था, जो भारत आने वाला पहला अंग्रेजी जहाज था।
8. निम्न विदेशी यात्रियों में से किसने जहांगीर के शासनकाल में भारत की यात्रा की थी?
(a) फादर एंथोनी मांसरेट
(b) फ्रांसिस्को पेलसर्ट
(c) निकोलो मनुक्की
(d) फ्रंक्वायस बर्नियर
U.P.P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
फ्रांसिस्को पेलसर्ट (Francisco Pelsaert) एक डच व्यापारी और यात्री था, जो जहांगीर के शासनकाल में भारत आया। उसने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘रेमोन्स्ट्रैंटी’ (Remonstrantie) में मुगल समाज, व्यापार और जहांगीर के शासनकाल का विस्तृत एवं प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया। अन्य विकल्पों में — फादर एंथोनी मांसरेट अकबर के काल में आए, निकोलो मनुक्की औरंगजेब के काल में, और फ्रांस्वा बर्नियर शाहजहां व औरंगजेब के काल में आए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पेलसर्ट ने अपनी पुस्तक में मुगल भारत में भारी आर्थिक असमानता का उल्लेख किया — उसने लिखा कि यहाँ केवल दो वर्ग हैं: अत्यंत धनी और अत्यंत निर्धन। बर्नियर ने भी इसी विषय पर अपनी पुस्तक ‘ट्रैवल्स इन द मुगल एम्पायर’ में प्रकाश डाला है।
9. जहांगीर ने थॉमस रो को कहां मिलने का अवसर दिया था?
(a) आगरा
(b) अजमेर
(c) दिल्ली
(d) फतेहपुर सीकरी
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(b)
सर थॉमस रो जनवरी 1616 में अजमेर में जहांगीर के दरबार में पहली बार उपस्थित हुआ। वह इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम का राजदूत था और 1615 से 1619 ई. तक भारत में रहा। अजमेर में प्रथम मुलाकात के बाद वह जहांगीर के साथ मांडू, अहमदाबाद जैसे कई स्थानों पर भी गया और आगरा में लगभग एक वर्ष रहा। 1619 ई. में वह जहांगीर का एक शाही फरमान लेकर इंग्लैंड लौटा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: थॉमस रो ने जहांगीर से व्यापारिक रियायतें और फैक्ट्री स्थापित करने की अनुमति मांगी थी, परंतु उसे पूर्ण सफलता नहीं मिली। उसने अपनी भारत यात्रा का विवरण ‘द एम्बेसी ऑफ सर थॉमस रो’ नामक पुस्तक में लिखा, जो मुगल दरबार के राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन का बहुमूल्य स्रोत है।
10. ब्रिटिश राजदूत के रूप में सर थॉमस रो भारत आया था, शासनकाल में-
(a) अकबर के
(b) औरंगजेब के
(c) जहांगीर के
(d) शाहजहां के
U.P.P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(c)
सर थॉमस रो ब्रिटेन के राजा जेम्स प्रथम का आधिकारिक राजदूत था, जो मुगल शासक जहांगीर के दरबार में 1615-1619 ई. के दौरान रहा। वह 18 सितंबर 1615 को सूरत पहुंचा और जनवरी 1616 में अजमेर में जहांगीर से मिला। उसका प्रमुख उद्देश्य ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए व्यापारिक संधि और सुरक्षा की गारंटी प्राप्त करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सर थॉमस रो से पहले ब्रिटेन के राजा जेम्स प्रथम ने 1607-08 में विलियम हॉकिंस को अनौपचारिक दूत के रूप में जहांगीर के पास भेजा था, लेकिन हॉकिंस को कोई औपचारिक राजदूत का दर्जा प्राप्त नहीं था। थॉमस रो पहले आधिकारिक ब्रिटिश राजदूत थे जिन्हें किसी मुगल सम्राट के दरबार में भेजा गया।
11. इंग्लैंड के जेम्स प्रथम के राजदूत सर थॉमस रो किस वर्ष भारत आए थे?
(a) 1616
(b) 1615
(c) 1516
(d) 1614
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
सर थॉमस रो 18 सितंबर 1615 को सूरत पहुंचे और इसके बाद जनवरी 1616 में अजमेर में जहांगीर के दरबार में उपस्थित हुए। ध्यान देने योग्य है कि उनके भारत आगमन का वर्ष 1615 है, न कि 1616, जो कि दरबार में पहुंचने का वर्ष है। वह 1619 तक भारत में रहे और अंत में जहांगीर का शाही फरमान लेकर इंग्लैंड लौटे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सर थॉमस रो ने मुगल दरबार में भेंट के समय अपने सम्मान की रक्षा के लिए झुकने से मना कर दिया था और पश्चिमी शिष्टाचार के अनुसार केवल टोपी उतारकर अभिवादन किया था — यह तत्कालीन प्रोटोकॉल के लिए एक साहसी कदम था। उनकी पुस्तक ‘जर्नल ऑफ द मिशन टू द मुगल एम्पायर’ मुगलकालीन दरबारी जीवन का प्रत्यक्षदर्शी विवरण है।
12. भारत में इंग्लैंड का कौन-सा दूत जहांगीर के पीछे अजमेर से मांडू आया?
(a) क्लाइव
(b) थॉमस रो
(c) लार्ड एस्टर
(d) क्लाइड
M.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
थॉमस रो जहांगीर के दरबार में अजमेर में पहली बार मिला और इसके बाद वह जहांगीर के साथ मांडू, अहमदाबाद और अन्य स्थानों पर भी गया। वह बादशाह के साथ शिकार पर भी गया और आगरा में लगभग एक वर्ष तक रहा। यह उनके घनिष्ठ संपर्क का प्रमाण है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मांडू (वर्तमान मध्यप्रदेश) मुगल काल में ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल था। जहांगीर को मांडू से विशेष लगाव था और उन्होंने वहाँ कई महत्वपूर्ण दरबारी बैठकें आयोजित कीं। थॉमस रो ने इन यात्राओं का विस्तृत विवरण अपनी डायरी में दर्ज किया है, जो मुगल राजपरिवार की जीवनशैली को समझने का एक दुर्लभ प्राथमिक स्रोत है।
13. एक डच पर्यटक, जिसने जहांगीर के शासनकाल का मूल्यवान विवरण दिया है, वह था-
(a) फ्रांसिस्को पेलसर्ट
(b) हॉकिंस
(c) निकोलाओ मनूची
(d) पीटर मुंडी
U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
उत्तर-(a)
फ्रांसिस्को पेलसर्ट एक डच व्यापारी-यात्री था जो जहांगीर के शासनकाल में भारत आया और यहाँ डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) के प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया। उसने अपनी पुस्तक ‘रेमोन्स्ट्रैंटी’ में मुगल भारत का अत्यंत मूल्यवान विवरण दिया है। अन्य विकल्पों में — विलियम हॉकिंस अंग्रेज था और जहांगीर के समय आया, पीटर मुंडी ब्रिटिश यात्री था जो शाहजहां के काल में आया, और निकोलो मनूची इतालवी यात्री था जो मुगल उत्तराधिकार युद्ध के काल में आया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पेलसर्ट ने अपनी पुस्तक में भारतीय किसानों और कारीगरों की दयनीय दशा का मार्मिक वर्णन किया है। उल्लेखनीय यह भी है कि पेलसर्ट उस डच जहाज ‘बाटाविया’ का व्यापारिक अधिकारी बना था जो 1629 में ऑस्ट्रेलिया के तट पर भग्न हो गया — यह इतिहास के सबसे चर्चित समुद्री दुर्घटनाओं में से एक है।
14. निम्नलिखित विदेशी यात्रियों को उनके भारत आने के कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए-
I. विलियम हॉकिंस    II. राल्फ फिच    III. सर थॉमस रो    IV. निकोलस डाउंटन
(a) II, I, IV एवं III
(b) IV, II, I एवं III
(c) I, III, II एवं IV
(d) III, II, IV एवं I
U.P.P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
सही कालक्रम इस प्रकार है: राल्फ फिच (1583 ई.) → विलियम हॉकिंस (1608 ई.) → निकोलस डाउंटन (1614-15 ई.) → सर थॉमस रो (1615 ई.)। राल्फ फिच भारत आने वाला पहला अंग्रेज यात्री था, जो 1583 में आगरा पहुंचा। विलियम हॉकिंस 1608 में सूरत आया, निकोलस डाउंटन 1614-15 में भारत पहुंचा और सर थॉमस रो सितंबर 1615 में सूरत पहुंचे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राल्फ फिच अकबर के शासनकाल में भारत आया था और उसने अकबर के दरबार का भी भ्रमण किया था। उसकी यात्रा वृत्तांत ने बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना (1600 ई.) को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि उसके विवरणों ने भारत के विशाल व्यापारिक अवसरों को उजागर किया था।
15. मुगल चित्रकला किसके राज्यकाल में अपनी पराकाष्ठा पर पहुंची?
(a) हुमायूं
(b) अकबर
(c) जहांगीर
(d) शाहजहां
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर-(c)
मुगल चित्रकला का स्वर्णकाल सम्राट जहांगीर (1605–1627 ई.) के शासनकाल में आया। जहांगीर ने चित्रकारी को धार्मिक ग्रंथों की सीमा से बाहर निकालकर उसे एक स्वतंत्र कला के रूप में स्थापित किया। उनके दरबार में फारुख बेग, दौलत, मनोहर, उस्ताद मंसूर और अबुल हसन जैसे महान चित्रकार थे। जहांगीर को स्वयं चित्रकला की गहरी परख थी — वे किसी भी चित्र को देखकर बता सकते थे कि उसे किस कलाकार ने बनाया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर के काल में पशु-पक्षियों और प्रकृति चित्रण को विशेष महत्व मिला — उस्ताद मंसूर इस विधा के सर्वश्रेष्ठ कलाकार थे। जहांगीर की आत्मकथा ‘तुज़ुक-ए-जहांगीरी’ में चित्रकला से संबंधित अनेक रोचक विवरण मिलते हैं।
16. जहांगीरकालीन निम्नलिखित में से किस एक चित्रकार को ‘नादिर-उल-अस्र’ की उपाधि प्रदान की गई?
(a) दौलत
(b) बिशनदास
(c) मनोहर
(d) मंसूर
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(d)
जहांगीर ने उस्ताद मंसूर को ‘नादिर-उल-अस्र’ (अर्थात् ‘युग का आश्चर्य’) की उपाधि से सम्मानित किया। मंसूर विशेषतः पशु-पक्षियों के यथार्थवादी चित्रण के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने बंगाल के दुर्लभ ‘साइबेरियन क्रेन’ और अन्य विदेशी पक्षियों के चित्र बनाए जो आज भी कला जगत में अत्यंत मूल्यवान माने जाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उस्ताद मंसूर ने 1619 ई. में कश्मीर की एक दुर्लभ ट्यूलिप प्रजाति का चित्र बनाया था जिसे जहांगीर ने इतना पसंद किया कि उस फूल का नाम ही ‘गुल-ए-मंसूर’ रख दिया। मंसूर के बनाए पक्षी-चित्र आज ब्रिटिश संग्रहालय सहित विश्व के कई प्रमुख संग्रहालयों में सुरक्षित हैं।
17. निम्नलिखित चित्रकारों में से किसे जहांगीर ने नादिर-उज़-ज़मां की पदवी दी थी?
(a) अबुल हसन
(b) फर्रुख बेग
(c) बिशनदास
(d) आगा रज़ा
U.P.P.C.S. (Main) 2013
उत्तर-(a)
अबुल हसन को जहांगीर ने ‘नादिर-उज़-ज़मां’ (अर्थात् ‘समय का चमत्कार’) की उपाधि दी थी। अबुल हसन मुख्यतः व्यक्तिचित्रण (Portrait Painting) में अत्यंत निपुण थे। उन्होंने जहांगीर के ‘जहांगीरनामा’ के लिए कई प्रसिद्ध चित्र बनाए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अबुल हसन द्वारा बनाया गया ‘जहांगीर ग्लोब पर खड़े होकर’ (Jahangir Preferring a Sufi Sheikh to Kings) शीर्षक चित्र मुगल दरबारी चित्रकला का सबसे प्रतिष्ठित उदाहरण माना जाता है, जो अब फ्रीर गैलरी ऑफ आर्ट, वाशिंगटन में संरक्षित है। अबुल हसन के पिता ‘आगा रज़ा’ भी जहांगीर के दरबार में एक प्रतिष्ठित चित्रकार थे।
18. सम्राट जहांगीर को कहां दफन किया गया?
(a) आगरा
(b) दिल्ली
(c) लाहौर
(d) श्रीनगर
Uttarakhand Lower Sub. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
मुगल सम्राट जहांगीर का निधन 1627 ई. में कश्मीर से लाहौर लौटते समय रास्ते में हुआ। उन्हें लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) के निकट शाहदरा में रावी नदी के किनारे दफनाया गया, जहाँ उनकी पत्नी नूरजहाँ ने उनका भव्य मकबरा बनवाया। यह मकबरा आज भी पाकिस्तान में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर के मकबरे के निर्माण में नूरजहाँ ने स्वयं गहरी रुचि ली — इसकी वास्तुकला में पच्चीकारी (Pietra Dura) का शानदार उपयोग किया गया है जो ताजमहल की शैली का पूर्वाभास देती है। दिलचस्प बात यह है कि नूरजहाँ ने अपना मकबरा जहांगीर के मकबरे के ठीक पास, उसी परिसर में बनवाया।
19. मुगल चित्रकला किसके नेतृत्व में अपने शीर्ष बिंदु पर थी?
(a) जहांगीर
(b) हुमायूं
(c) शाहजहां
(d) अकबर
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
मुगल चित्रकला अपने उच्चतम शिखर पर जहांगीर के शासनकाल (1605–1627 ई.) में पहुँची। हुमायूं ने फारसी चित्रकारों को भारत लाकर इस परंपरा की नींव रखी, और अकबर ने इसे एक समृद्ध दरबारी कला के रूप में स्थापित किया, किंतु जहांगीर के समय तक यह कला अपनी परिपक्वता के चरम पर थी। शाहजहाँ के काल में ध्यान वास्तुकला की ओर अधिक केंद्रित हो गया और चित्रकला का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल चित्रकला की शुरुआत हुमायूँ ने ईरानी चित्रकारों — मीर सैय्यद अली और ख्वाजा अब्दुस समद — को भारत बुलाकर की थी। औरंगजेब के काल में धार्मिक कठोरता के कारण मुगल दरबारी चित्रकला लगभग समाप्त हो गई और अनेक चित्रकार राजपूत दरबारों में चले गए।
20. निम्नलिखित में से किसका मकबरा भारत से बाहर स्थित है?
(a) हुमायूं
(b) औरंगजेब
(c) जहांदार शाह
(d) जहांगीर
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
चारों विकल्पों में से केवल जहांगीर का मकबरा भारत से बाहर — लाहौर (पाकिस्तान) के शाहदरा में — स्थित है। हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में, औरंगजेब का मकबरा खुल्दाबाद (महाराष्ट्र) में, और जहाँदार शाह की कब्र दिल्ली में स्थित है। 1947 के विभाजन के बाद जहांगीर का मकबरा पाकिस्तान के क्षेत्र में चला गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर के मकबरे को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में शामिल किया गया है। हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली) 1993 से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और इसे ‘ताजमहल का पूर्वज’ भी कहा जाता है क्योंकि इसकी वास्तुशैली ने ताजमहल के डिज़ाइन को प्रेरित किया।
21. एत्मादुद्दौला का मकबरा आगरा में किसने बनवाया था?
(a) अकबर
(b) जहांगीर
(c) नूरजहां
(d) शाहजहां
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
एत्मादुद्दौला का मकबरा नूरजहां ने 1622-28 ई. के मध्य आगरा में यमुना नदी के पश्चिमी तट पर अपने पिता मिर्जा गियास बेग की स्मृति में बनवाया था। मिर्जा गियास बेग को जहांगीर ने ‘एत्मादुद्दौला’ (राज्य का स्तंभ) की उपाधि दी थी। यह मकबरा पूर्णतः श्वेत संगमरमर से निर्मित है और इसमें पहली बार भारत में ‘पिट्रा ड्यूरा’ (Pietra Dura) अर्थात् अर्ध-कीमती पत्थरों की जड़ाऊ कारीगरी का प्रयोग किया गया। इसी कारण इसे ‘ज्वेल बॉक्स’ या ‘बेबी ताज’ भी कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि बाद में शाहजहां ने इसी पिट्रा ड्यूरा तकनीक का व्यापक उपयोग ताजमहल के निर्माण में किया।
22. निम्न में से कौन नूरजहां के गुट का सदस्य नहीं था?
(a) जहांगीर
(b) गियास बेग
(c) आसफ खां
(d) खुर्रम
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(a)
जहांगीर से विवाह (1611 ई.) के पश्चात नूरजहां ने ‘नूरजहां गुट’ (जुन्ता दल) का गठन किया। इस शक्तिशाली दरबारी गुट के सदस्य थे — एत्मादुद्दौला (नूरजहां के पिता गियास बेग), अस्मत बेगम (नूरजहां की माँ), आसफ खां (नूरजहां का भाई) और शहजादा खुर्रम (बाद में शाहजहां)। स्वयं जहांगीर इस गुट का सदस्य नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नूरजहां का वास्तविक नाम मेहरुन्निसा था और वह शेर अफगान की विधवा थी। नूरजहां मुगल इतिहास की एकमात्र ऐसी महिला थी जिसके नाम के सिक्के ढाले गए और उसे शाही फरमान जारी करने का अधिकार दिया गया।
23. गोविंद महल, जो हिंदू वास्तुकला का अप्रतिम उदाहरण है, स्थित है-
(a) दतिया में
(b) खजुराहो में
(c) ओरछा में
(d) ग्वालियर में
U.P.P.C.S. (Pre) 2005
उत्तर-(a)
गोविंद महल मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित सात मंजिला भव्य महल है, जिसका निर्माण 1614 ई. में बुंदेल राजा वीरसिंह देव बुंदेला ने करवाया था। यह बुंदेलखंड स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है और पूरी तरह पत्थरों से निर्मित है। इस महल की विशेषता यह है कि इसमें लोहे या लकड़ी का उपयोग नहीं किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजा वीरसिंह देव बुंदेला अबुल फज़ल का हत्यारा था, जिसे जहांगीर ने उच्च पद से पुरस्कृत किया था।
24. खुसरो किस मुगल बादशाह का पुत्र था?
(a) अकबर
(b) जहांगीर
(c) शाहजहां
(d) बहादुरशाह प्रथम
M.P.P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
खुसरो जहांगीर का ज्येष्ठ पुत्र था, जो उसकी राजपूत पत्नी मानबाई (आमेर के राजा भगवंत दास की पुत्री) से उत्पन्न हुआ था। अप्रैल 1606 ई. में खुसरो ने अपने मामा मानसिंह और ससुर मिर्जा अजीज कोका के समर्थन से जहांगीर के विरुद्ध विद्रोह किया, परंतु भैरोवाल में पराजित होकर बंदी बना लिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर ने उसे अंधा करवा दिया था। सिख गुरु अर्जुन देव ने खुसरो को आशीर्वाद दिया था, जिसके कारण जहांगीर ने उन्हें फांसी दे दी — यह सिख इतिहास में पहले गुरु शहीद थे। अंततः शाहजहां ने 1621 ई. में दक्षिण अभियान के दौरान खुसरो की हत्या करवा दी।
25. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए-
सूची-I (निर्माता)     सूची-II (स्मारक)
A. बाबर     1. जामा मस्जिद (संभल)
B. हुमायूं     2. दीनपनाह
C. अकबर     3. जहांगीरी महल
D. जहांगीर     4. अकबर के मकबरे को पूर्ण करवाना

कूट :
  A   B   C   D
(a) 1   2   3   4
(b) 1   2   4   3
(c) 2   1   4   3
(d) 4   3   2   1
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(a)
संभल की जामा मस्जिद बाबर द्वारा, दिल्ली स्थित दीनपनाह (एक नगर-दुर्ग) हुमायूं द्वारा, आगरे के किले में जहांगीरी महल अकबर द्वारा बनवाया गया था। जहांगीर ने सिकंदरा (आगरा) में अकबर के मकबरे को पूरा करवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने स्वयं अपने मकबरे का निर्माण अपने जीवनकाल में आरंभ करवाया था, जिसे जहांगीर ने 1613 ई. में पूर्ण करवाया। आगरे के किले का मूल निर्माण अकबर ने लाल बलुआ पत्थर से 1565 ई. में करवाया था; इसी किले में ‘जहांगीरी महल’ स्थित है जो अकबर ने अपने पुत्र जहांगीर के लिए बनवाया था।
26. जहांगीर के दरबार में पक्षियों का सबसे बड़ा चित्रकार था-
(a) ख्वाजा अब्दुस्समद
(b) सैयद अली तब्रीजी
(c) बसावन
(d) मंसूर
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
उस्ताद मंसूर जहांगीर के दरबार का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार था जो पशु-पक्षियों और फूल-पौधों के चित्रण में अद्वितीय था। जहांगीर ने उसे ‘नादिर-उल-अस्र’ (युग का अद्भुत) की उपाधि दी थी। मंसूर ने साइबेरियाई क्रेन (सारस) और बंगाल में पाए गए दुर्लभ ‘चपनोस फूल’ के चित्र बनाए जो आज भी प्रसिद्ध हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर स्वयं भी कला और प्रकृति का गहरा पारखी था — उसने अपनी आत्मकथा ‘तुजुक-ए-जहांगीरी’ में लिखा है कि वह किसी चित्र को देखकर बता सकता था कि वह किस कलाकार ने बनाया है।
27. निम्नलिखित मुगल बादशाहों में किसने अपनी आत्मकथा (Autobiography) फारसी में लिखी?
(a) बाबर
(b) अकबर
(c) जहांगीर
(d) औरंगजेब
U.P.P.C.S. (Pre) 2001 | U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(c)
जहांगीर ने अपनी आत्मकथा फारसी भाषा में लिखी, जिसे ‘तुजुक-ए-जहांगीरी’ या ‘जहांगीरनामा’ कहा जाता है। इस ग्रंथ में उसने अपने गुणों के साथ-साथ व्यक्तिगत दोषों का भी ईमानदारी से वर्णन किया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसके तीन भाग हैं — प्रस्तावना (मोहम्मद हादी द्वारा जहांगीर की मृत्यु के बाद लिखी गई), मूल भाग (स्वयं जहांगीर द्वारा), और अंतिम भाग (मोतमिद खां द्वारा पूर्ण किया गया)। इसके विपरीत, बाबर ने अपनी आत्मकथा ‘तुजुक-ए-बाबरी’ (बाबरनामा) तुर्की (चगताई) भाषा में लिखी थी, जिसका फारसी अनुवाद अब्दुर रहीम खानखाना ने किया था।
28. अबुल फज़ल के हत्यारे को पुरस्कृत किया था?
(a) अकबर ने
(b) जहांगीर ने
(c) मानसिंह ने
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Mains) 2003
उत्तर-(b)
अबुल फज़ल अकबर का प्रमुख दरबारी, ‘नवरत्नों’ में से एक और ‘आइन-ए-अकबरी’ तथा ‘अकबरनामा’ का लेखक था। शहजादा सलीम (जहांगीर) ने अपने पिता अकबर के प्रभावशाली सलाहकार अबुल फज़ल से घृणा करते हुए राजा वीरसिंह बुंदेला से उसकी हत्या करवाई (1602 ई.)। जब जहांगीर 3 नवंबर 1605 ई. को आगरे के किले में गद्दीनशीन हुआ और उसने ‘नूरुद्दीन मुहम्मद जहांगीर बादशाह गाजी’ की उपाधि धारण की, तो उसने वीरसिंह बुंदेला को पुरस्कारस्वरूप उच्च मनसब प्रदान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अबुल फज़ल शेख मुबारक का पुत्र था और उसका भाई फैजी अकबर का राजकवि था।
29. निम्नलिखित में से किसने जहांगीर के विरुद्ध विद्रोह किया था?
1. आसफ खां    2. खुर्रम    3. महाबत खां    4. खुसरो
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 2 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
जहांगीर के शासनकाल में तीन प्रमुख विद्रोह हुए — (1) खुसरो का विद्रोह (1606 ई.): जहांगीर के गद्दीनशीन होते ही उसके ज्येष्ठ पुत्र खुसरो ने विद्रोह किया, जो भैरोवाल के युद्ध में पराजित हुआ। (2) खुर्रम (शाहजहां) का विद्रोह (1623-25 ई.): दक्षिण की सूबेदारी से असंतुष्ट होकर खुर्रम ने विद्रोह किया; इसका दमन महाबत खां के नेतृत्व में किया गया। (3) महाबत खां का विद्रोह (1626 ई.): महाबत खां ने जहांगीर को झेलम नदी के तट पर बंदी बना लिया; नूरजहां की चतुराई से जहांगीर मुक्त हुए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आसफ खां ने जहांगीर के विरुद्ध कोई विद्रोह नहीं किया था।
30. पर्चिनकारी (पिट्रा ड्यूरा) निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) दीवारों में अर्थ-कीमती पत्थर जड़कर फूलों की नक्काशी करना
(b) मीनारों में टेढ़ी दीवार बनाना
(c) संरचना में मेहराब का इस्तेमाल करना
(d) इमारतों में मार्बल का प्रयोग करना
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
पर्चिनकारी या पच्चीकारी (Pietra Dura / पिट्रा ड्यूरा) एक इतालवी शिल्पकला तकनीक है जिसमें संगमरमर या पत्थर की सतह में रंग-बिरंगे अर्ध-कीमती पत्थर (जैसे लैपिस लाजुली, पुखराज, हरिताश्म) जड़कर फूल-पत्तियों और ज्यामितीय आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भारत में इस तकनीक का प्रथम प्रयोग एत्मादुद्दौला के मकबरे (आगरा, 1622-28 ई.) में नूरजहां ने करवाया। इसके बाद शाहजहां ने इसी तकनीक का भव्यतम उपयोग ताजमहल (1632-53 ई.) में किया, जहाँ 28 से अधिक प्रकार के बहुमूल्य पत्थरों का प्रयोग इस जड़ाऊ कार्य में हुआ।
31. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
(a) अकबर का मकबरा – सिकंदरा
(b) जहांगीर का मकबरा – शाहदरा
(c) शेख सलीम चिश्ती का मकबरा – फतेहपुर सीकरी
(d) शेख निजामुद्दीन औलिया का मकबरा – अजमेर
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(d)
शेख निजामुद्दीन औलिया का मकबरा अजमेर में नहीं, बल्कि दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र (गियासपुर) में स्थित है। ये चिश्ती सूफी परंपरा के महान संत थे जिनका निधन 1325 ई. में हुआ। अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह स्थित है, जो निजामुद्दीन औलिया से भिन्न संत हैं। शेख निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्यों में अमीर खुसरो (प्रसिद्ध कवि और संगीतकार) और हसन देहलवी शामिल थे। अमीर खुसरो की कब्र भी उन्हीं के मकबरे के प्रांगण में है।

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