1. दिल्ली सल्तनत के पराभव के उपरांत किस शासक द्वारा स्वर्ण मुद्रा का सर्वप्रथम प्रचलन किया गया?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
दिल्ली सल्तनत के पतन के पश्चात् मुगल शासक हुमायूं पहला ऐसा शासक था जिसने स्वर्ण मुद्रा प्रचलित की। बाद में शेरशाह सूरी ने भी स्वर्ण सिक्के जारी किए, परंतु उसकी मुद्रा प्रणाली में सर्वाधिक महत्व शुद्ध चाँदी के ‘रुपये’ को दिया जाता है, जो आधुनिक भारतीय रुपये का आधार बना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह सूरी ने तांबे का ‘दाम’ भी चलाया, जिससे एक रुपया = 64 दाम का मानक स्थापित हुआ — यह द्विधातु मुद्रा प्रणाली भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण वित्तीय सुधार था।
2. हुमायूं ने चुनार दुर्ग पर प्रथम बार आक्रमण कब किया?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
हुमायूं ने चुनार दुर्ग पर पहली बार 1532 ई. में आक्रमण किया। इतिहासकार सतीश चंद्र इसे अगस्त-सितंबर 1531 मानते हैं। हुमायूं ने इस किले को चार महीने तक घेरे रखा, अंततः शेर खाँ (शेरशाह) ने उसकी अधीनता स्वीकार कर ली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चुनार दुर्ग उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में गंगा नदी के किनारे स्थित एक अत्यंत सामरिक महत्व का किला था — इसके नियंत्रण से पूर्वी भारत के व्यापार मार्गों पर वर्चस्व स्थापित होता था, इसीलिए हुमायूं और शेरशाह दोनों इस पर अधिकार के लिए संघर्षरत रहे।
3. निम्न नामों में से उसे चिह्नित करिए, जो हुमायूं के भाइयों में से किसी का नाम नहीं था-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
बाबर के पुत्र और हुमायूं के सगे भाई थे — कामरान, अस्करी और हिन्दाल। ‘उस्मान’ नाम का कोई भाई नहीं था। हुमायूं बाबर का ज्येष्ठ पुत्र था और उसका जन्म 1508 ई. में काबुल में हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कामरान मिर्जा ने हुमायूं के सबसे कठिन समय में, जब वह शेरशाह से पराजित होकर निर्वासित था, काबुल और कंधार पर अपना अधिकार बनाए रखा और हुमायूं को शरण देने से भी इनकार किया — इस भाई के विश्वासघात को मुगल इतिहास की एक प्रमुख पारिवारिक त्रासदी माना जाता है।
4. निम्नलिखित में से किन दो शासकों के मध्य 17 मई, 1540 में कन्नौज के पास युद्ध हुआ?
U.P.B.E.O. (Pre) 2019
उत्तर-(b)
17 मई 1540 को कन्नौज (बिलग्राम) का युद्ध शेरशाह सूरी और हुमायूं के बीच हुआ, जिसमें हुमायूं की निर्णायक पराजय हुई। इस हार के बाद हुमायूं को भारत छोड़कर 15 वर्षों तक निर्वासन में रहना पड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कन्नौज के युद्ध से ठीक एक वर्ष पहले 1539 में चौसा के युद्ध में भी शेरशाह ने हुमायूं को पराजित किया था — इन लगातार दो पराजयों ने मुगल सत्ता को अस्थायी रूप से पूरी तरह समाप्त कर दिया और भारत में सूर वंश का शासन स्थापित किया।
5. निम्नलिखित में से किस सुल्तान ने पहले “हजरते आला” की उपाधि अपनाई और बाद में ‘सुल्तान’ की?
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
1534 ई. में बंगाल के शासक नुसरत शाह को पराजित करने के बाद शेर खाँ ने ‘हजरते आला’ की उपाधि धारण की। फिर 1539 ई. में चौसा के युद्ध में हुमायूं पर विजय के बाद उन्होंने ‘शेरशाह’ की उपाधि अपनाई, खुतबा पढ़वाया और अपने नाम का सिक्का चलवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह सूरी का वास्तविक नाम फरीद खाँ था — उन्हें ‘शेर खाँ’ की उपाधि उनके पालक बिहार के सूबेदार बहार खाँ लोहानी ने दी थी, क्योंकि फरीद ने अकेले एक शेर को मार गिराया था।
6. हुमायूं द्वारा लड़े गए चार प्रमुख युद्धों का तिथि अनुसार सही क्रम अंकित करें, युद्ध-स्थलों के नाम नीचे अंकित हैं-
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
हुमायूं के चार प्रमुख युद्धों का कालक्रम: देवरा (1532 ई.) → चौसा (1539 ई.) → कन्नौज (1540 ई.) → सरहिंद (1555 ई.)। सरहिंद के युद्ध में हुमायूं ने सूर वंश के शासक सिकंदर शाह सूरी को पराजित कर दिल्ली पर पुनः अधिकार किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सरहिंद युद्ध के केवल 6 महीने बाद जनवरी 1556 में हुमायूं की मृत्यु दिल्ली स्थित पुस्तकालय (शेर मंडल) की सीढ़ियों से गिरने के कारण हुई — इस प्रकार 15 वर्षों के संघर्ष के बाद वापस जीता गया साम्राज्य उन्हें बहुत कम समय के लिए ही मिला।
7. शेरशाह सूरी द्वारा किए गए सुधारों में सम्मिलित थे-
(1) राजस्व सुधार (2) प्रशासनिक सुधार
(3) सैनिक सुधार (4) करेंसी प्रणाली में सुधार
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
(1) राजस्व सुधार (2) प्रशासनिक सुधार
(3) सैनिक सुधार (4) करेंसी प्रणाली में सुधार
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
शेरशाह सूरी को मध्यकालीन भारत का एक क्रांतिकारी प्रशासक माना जाता है। राजस्व सुधार में उन्होंने रैयतवाड़ी व्यवस्था लागू की और भूमि को पैमाइश कर लगान निर्धारित किया। प्रशासनिक दृष्टि से साम्राज्य को 47 सरकारों में विभाजित किया। सैनिक सुधार में घोड़ों को दागने और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा शुरू की। मुद्रा सुधार में शुद्ध चाँदी का रुपया (178 ग्रेन) और ताँबे का दाम (380 ग्रेन) प्रचलित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह ने ग्रैंड ट्रंक रोड (सड़क-ए-आज़म) का विस्तार और पुनर्निर्माण कराया तथा प्रत्येक दो कोस पर सराय बनवाई — यह डाक व्यवस्था और व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी और इसे भारत का पहला संगठित सड़क नेटवर्क माना जाता है।
8. निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए और उन्हें क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए।
I. दौराह का युद्ध II. कन्नौज का युद्ध
III. सामूगढ़ का युद्ध IV. चौसा का युद्ध
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
I. दौराह का युद्ध II. कन्नौज का युद्ध
III. सामूगढ़ का युद्ध IV. चौसा का युद्ध
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2017
उत्तर-(b)
इन चारों युद्धों का सही कालक्रम है: दौराह (1531/1532 ई.) → चौसा (1539 ई.) → कन्नौज (1540 ई.) → सामूगढ़ (1658 ई.)। ध्यान दें कि सामूगढ़ का युद्ध मुगलकाल में हुआ, जब औरंगजेब ने अपने भाई दाराशिकोह को पराजित किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सामूगढ़ का युद्ध (29 मई 1658) औरंगजेब और मुराद बख्श की संयुक्त सेना और शाहजहाँ के उत्तराधिकारी दाराशिकोह के बीच आगरा के निकट हुआ था — इस युद्ध ने मुगल उत्तराधिकार संघर्ष का निर्णय किया और औरंगजेब के सम्राट बनने का मार्ग प्रशस्त किया।
9. निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए और उन्हें क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए।
I. दौराह का युद्ध II. कन्नौज का युद्ध
III. सामूगढ़ का युद्ध IV. चौसा का युद्ध
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
I. दौराह का युद्ध II. कन्नौज का युद्ध
III. सामूगढ़ का युद्ध IV. चौसा का युद्ध
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2017
उत्तर-(b)
इन चारों युद्धों का सही कालक्रम इस प्रकार है — दौराह का युद्ध (1531/1532 ई.), चौसा का युद्ध (1539 ई.), कन्नौज का युद्ध (1540 ई.) और सामूगढ़ का युद्ध (1658 ई.)। चौसा के युद्ध में शेरशाह ने हुमायूं को पराजित किया था, जबकि कन्नौज (बिलग्राम) के युद्ध में हुमायूं की निर्णायक पराजय हुई और उसे भारत छोड़ना पड़ा। सामूगढ़ का युद्ध मुगल उत्तराधिकार संघर्ष का हिस्सा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चौसा के युद्ध (26 जून, 1539) में शेरशाह की जीत के बाद उसने “शेरशाह” की उपाधि धारण की — इससे पूर्व वह केवल “शेर खां” कहलाता था। सामूगढ़ के युद्ध (1658 ई.) में औरंगजेब और मुराद ने मिलकर दारा शिकोह को पराजित किया, जो आगे चलकर औरंगजेब के मुगल सम्राट बनने का निर्णायक मोड़ बना।
10. हुमायूं ने चुनार दुर्ग पर प्रथम बार आक्रमण कब किया?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
हुमायूं ने चुनार दुर्ग पर प्रथम आक्रमण 1532 ई. में किया, हालांकि इतिहासकार सतीश चंद्र इसे अगस्त-सितंबर 1531 ई. मानते हैं। हुमायूं ने इस किले को लगभग चार महीने तक घेरे में रखा, परंतु अंततः शेर खां ने उसकी अधीनता स्वीकार कर संधि कर ली और किला बचा लिया। चुनार दुर्ग गंगा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत सामरिक महत्व का किला था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चुनार दुर्ग पर हुमायूं का दूसरा आक्रमण 1537–38 ई. में हुआ, जब उसने इसे छह महीने की घेराबंदी के बाद जीता — किंतु इस दौरान शेरशाह ने बंगाल पर अधिकार कर अपनी शक्ति बहुत बढ़ा ली। यह दुर्ग वर्तमान उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित है और ऐतिहासिक दृष्टि से इसे “पूर्व का प्रवेश द्वार” भी कहा जाता है।
11. शेरशाह सूरी की मृत्यु हुई-
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(b)
शेरशाह सूरी की मृत्यु 13 मई, 1545 ई. को कालिंजर (वर्तमान उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित) के किले पर विजय अभियान के दौरान हुई। किले की घेराबंदी के समय बारूद के गोले अनायास फट गए, जिससे शेरशाह बुरी तरह झुलस गया और उसी दिन उसका निधन हो गया। उस समय कालिंजर का शासक कीरत सिंह था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह का मकबरा सासाराम (बिहार) में स्थित है, जो एक कृत्रिम झील के मध्य बना है और अफगान स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। शेरशाह का वास्तविक नाम फरीद खान था और उसने 1540 में कन्नौज (बिलग्राम) के युद्ध में हुमायूं को पराजित कर दिल्ली की सत्ता प्राप्त की थी।
12. शेरशाह सूरी का अंतिम अभियान निम्नलिखित में से किस राज्य के विरुद्ध था?
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2016
उत्तर-(a)
कालिंजर का अभियान शेरशाह सूरी का अंतिम सैन्य अभियान था। कालिंजर का दुर्ग विंध्य पर्वतमाला पर स्थित एक अत्यंत दुर्जेय किला था, जिसे जीतना शेरशाह के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। इसी अभियान के दौरान बारूद विस्फोट में वह घायल हुआ और उसकी मृत्यु हो गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह ने अपने संक्षिप्त शासनकाल (1540–1545) में मालवा, रणथंभौर, मारवाड़, मुल्तान और बंगाल सहित अनेक क्षेत्रों को जीता था। कालिंजर विजय से पूर्व उसने 1544 ई. में मारवाड़ के शासक मालदेव को सम्मेल (जोजावर) के युद्ध में पराजित किया था, जो उसके सबसे कठिन युद्धों में से एक माना जाता है।
13. निम्नलिखित में से किसने अपने बादशाह पति के लिए मकबरे का निर्माण करवाया था?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
हाजी बेगम (जिनका वास्तविक नाम बेगा बेगम था) ने अपने पति मुगल सम्राट हुमायूं की स्मृति में दिल्ली में हुमायूं का मकबरा बनवाया। इसका निर्माण 1565–1572 ई. के बीच हुआ और इसे ईरानी वास्तुकार मीरक मिर्जा गियास ने डिजाइन किया था। यह भारत का पहला मकबरा है जो पूर्णतः चारबाग शैली में बना है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हुमायूं का मकबरा भारत का प्रथम दोहरे गुंबद वाला मकबरा है और इसे 1993 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। यह मकबरा ताजमहल का प्रेरणास्रोत माना जाता है — ताजमहल की कई वास्तुशिल्प विशेषताएं इसी मकबरे से प्रेरित हैं।
14. शुद्ध चांदी का रुपया का आविष्कार किसने किया?
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(b)
शेरशाह सूरी ने भारतीय मुद्रा इतिहास में एक क्रांतिकारी सुधार करते हुए शुद्ध चांदी का रुपया चलाया, जिसका वजन 178 ग्रेन था और उसमें 173 ग्रेन विशुद्ध चांदी होती थी। इससे पहले प्रचलित मिश्रित धातु के सिक्कों को उसने समाप्त किया। इतिहासकार विन्सेंट स्मिथ ने लिखा है कि यह रुपया ब्रिटिश मुद्रा प्रणाली का आधार बना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह ने तीन प्रकार के शुद्ध धातु सिक्के चलाए — सोने का मोहर, चांदी का रुपया और तांबे का दाम। रुपया शब्द संस्कृत के “रूप्य” (चांदी) से लिया गया है। शेरशाह के सिक्कों पर एक ओर अरबी और दूसरी ओर देवनागरी लिपि में अभिलेख अंकित होते थे, जो उसकी समन्वयवादी प्रशासनिक नीति को दर्शाता है।
15. चांदी का सिक्का किसने शुरू किया?
M.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(b)
शेरशाह सूरी को सुव्यवस्थित और शुद्ध मुद्रा प्रणाली की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। उसने घिसे-पिटे और मिश्रित धातु के सिक्कों को हटाकर निश्चित वजन और मानक के शुद्ध सोने, चांदी तथा तांबे के सिक्के चलाए। उसकी यह मुद्रा व्यवस्था मुगल काल में भी जारी रही और ब्रिटिश भारत की मुद्रा प्रणाली की नींव बनी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह से पूर्व अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार मूल्य नियंत्रण (बाजार सुधार) के लिए सांकेतिक मुद्रा (टोकन करेंसी) का प्रयोग किया था, परंतु शुद्ध धातु के मानकीकृत सिक्कों की व्यवस्थित प्रणाली शेरशाह ने ही स्थापित की। शेरशाह के रुपये का प्रचलन मुहम्मद बिन तुगलक के तांबे के सांकेतिक सिक्कों की विफलता के बाद भारत में मुद्रा विश्वसनीयता बहाल करने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
16. शेरशाह के अंतर्गत तांबे के दाम और चांदी के रुपया की विनिमय दर क्या थी?
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
शेरशाह की मुद्रा व्यवस्था में 1 चांदी के रुपये का मूल्य 64 तांबे के दाम के बराबर निर्धारित किया गया था। चांदी के रुपये का वजन 178 ग्रेन और तांबे के दाम का वजन 380 ग्रेन था। यह विनिमय दर स्थिर और स्पष्ट होने के कारण व्यापार को बहुत सुविधा हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह की मुद्रा प्रणाली में एक सोने के मोहर का मूल्य लगभग 10-12 चांदी के रुपयों के बराबर था। शेरशाह ने देश भर में टकसालों (मिंट) की स्थापना की और सिक्कों पर जारी वर्ष तथा टकसाल का नाम अंकित करने की प्रथा भी आरंभ की, जो मुद्रा की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
17. शेरशाह का उत्तराधिकारी था-
M.P.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(b)
शेरशाह सूरी की मृत्यु के बाद उसका छोटा पुत्र जलाल खां, इस्लामशाह के नाम से 1545 ई. में गद्दी पर बैठा। उसने अपने पिता की प्रशासनिक व्यवस्था को न केवल बनाए रखा, बल्कि उसे और अधिक सुदृढ़ किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस्लामशाह ने अपनी राजधानी दिल्ली से बदलकर ग्वालियर और फिर आगरा के निकट ‘मनकोट’ स्थानांतरित की थी। उसने 1553 ई. तक लगभग 8 वर्षों तक कुशलतापूर्वक शासन किया और सूर वंश को स्थिरता प्रदान की।
18. दिल्ली में ‘पुराना किला’ के भवनों का निर्माण किया था-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2009
उत्तर-(c)
दिल्ली का पुराना किला शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित है। इसके परिसर में किला-ए-कुहना मस्जिद और शेर मंडल प्रमुख भवन हैं। शेर मंडल एक अष्टभुजीय दो मंजिला भवन है जिसका उपयोग हुमायूँ ने पुनः सत्ता प्राप्त करने के बाद पुस्तकालय के रूप में किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी शेर मंडल की सीढ़ियों से फिसलकर गिरने के कारण 1556 ई. में मुगल सम्राट हुमायूँ की मृत्यु हुई थी। पुराना किला को हिंदू महाकाव्य महाभारत में वर्णित इंद्रप्रस्थ नगर का स्थल भी माना जाता है।
19. निम्नलिखित में किस स्मारक का निर्माण शेरशाह ने करवाया था?
I.A.S. (Pre) 1993
उत्तर-(a)
किला-ए-कुहना मस्जिद का निर्माण शेरशाह ने 1541 ई. में पुराना किला परिसर में करवाया था। यह मस्जिद अफगान और मुगल स्थापत्य का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है तथा उत्तर भारत की श्रेष्ठतम ऐतिहासिक इमारतों में गिनी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस मस्जिद में बहुरंगी पत्थरों की जड़ाई का कार्य देखने को मिलता है, जो उस काल की उत्कृष्ट शिल्पकारी का प्रमाण है। जौनपुर की अटाला मस्जिद फिरोज तुगलक के काल में आरंभ हुई और इब्राहिम शर्की के काल (1408 ई.) में पूर्ण हुई थी।
20. “मात्र एक मुठ्ठी बाजरे के चक्कर में मैंने अपना साम्राज्य खो दिया होता।” इस कथन को आप किस मध्यकालीन शासक से संबद्ध करेंगे?
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(c)
यह कथन शेरशाह सूरी का है, जो उसने मारवाड़ के सामेल (जनवरी 1544 ई.) के युद्ध के बाद कहा था। राव मालदेव के नेतृत्व में राजपूतों के अदम्य साहस और वीरता को देखकर शेरशाह को यह स्वीकार करना पड़ा कि वह एक मुठ्ठी बाजरे (मारवाड़ की प्रमुख फसल) के लिए लगभग अपना साम्राज्य खो देता।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस युद्ध में राजपूत वीर जेता और कूपा ने शेरशाह की सेना को कड़ी टक्कर दी थी और वे वीरगति को प्राप्त हुए। शेरशाह ने इस युद्ध में विजय तो पाई, किंतु उसे अपनी सेना की भारी क्षति उठानी पड़ी।
21. शेरशाह का मकबरा कहां है?
U.P. P.C.S. (Pre) 2002
M.P.P.C.S (Pre) 2016
M.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(a)
शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार के रोहतास जिले में सासाराम नगर में एक कृत्रिम झील के मध्य ऊँचे चबूतरे पर स्थित है। यह हिंदू और इस्लामी स्थापत्य का अद्भुत संगम है और अफगान वास्तुकला की सर्वोत्कृष्ट कृतियों में से एक माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस मकबरे का निर्माण स्वयं शेरशाह ने अपने जीवनकाल में ही आरंभ करवाया था और इसके वास्तुकार मीर मुहम्मद अलीवाल खां थे। मकबरे का गुंबद लगभग 46 मीटर ऊँचा है और यह ताजमहल से पूर्व का सबसे भव्य मकबरा माना जाता है।
22. शेरशाह को दफनाया गया था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(b)
शेरशाह सूरी की मृत्यु 22 मई 1545 ई. को कालिंजर दुर्ग की घेराबंदी के दौरान हुई, जब बारूद के एक गोले के फटने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मृत्यु के बाद उसे उसके गृहनगर सासाराम (बिहार) में दफनाया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह ने भारत में 1540 से 1545 ई. तक मात्र पाँच वर्ष शासन किया, किंतु इस अल्प काल में उसने ऐसी प्रशासनिक, डाक और सड़क व्यवस्था स्थापित की जो आगे चलकर अकबर के प्रशासन का आधार बनी। उसका मूल नाम फरीद खां था।
23. कृषकों की सहायता के लिए किस मध्यकालीन भारतीय शासक ने पट्टा एवं कबूलियत की व्यवस्था प्रारंभ की थी?
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(c)
शेरशाह सूरी ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए ‘पट्टा’ और ‘कबूलियत’ नामक दो महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों की व्यवस्था लागू की। ‘पट्टा’ सरकार द्वारा किसान को दिया जाने वाला वह प्रपत्र था जिसमें निर्धारित लगान का उल्लेख होता था, जबकि ‘कबूलियत’ किसान द्वारा लगान चुकाने की स्वीकृति में दिया जाने वाला प्रतिज्ञापत्र था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह ने भूमि की पैमाइश के लिए ‘सिकंदरी गज’ और ‘सन की डंडी’ का उपयोग किया तथा भूमि को उर्वरता के आधार पर तीन श्रेणियों — अच्छी, मध्यम और खराब — में विभाजित किया। उपज का सामान्यतः एक-तिहाई भाग राजस्व के रूप में लिया जाता था।
24. दिल्ली के पुराना किला के वर्तमान स्वरूप का निर्माण निम्नलिखित में से किसने करवाया था?
U.P.P.C.S (Mains) 2016
उत्तर-(a)
दिल्ली के पुराना किला का वर्तमान स्वरूप शेरशाह सूरी ने 1540 से 1545 ई. के बीच तैयार करवाया था। यह किला यमुना नदी के किनारे प्राचीन दीन-पनाह नगर के आंतरिक भाग में स्थित है, जिसे मूलतः हुमायूँ ने बसाना आरंभ किया था और शेरशाह ने इसे पूर्ण किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पुराना किला में तीन प्रमुख द्वार हैं — हुमायूँ दरवाजा, तलाकी दरवाजा और बड़ा दरवाजा। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण द्वारा यहाँ किए गए उत्खनन में महाभारत काल (1000 ई.पू.) के प्रमाण मिले हैं, जो इसे इंद्रप्रस्थ से जोड़ते हैं।
25. निम्नलिखित में से किसने पूर्वी बंगाल से लेकर पेशावर तक ‘सड़क-ए-आजम’ कहलायी जाने वाली सड़क बनवाई?
Chhattisgarh P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(d)
‘सड़क-ए-आजम’ अर्थात् ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था। यह सड़क सोनारगांव (बंगाल) से लाहौर (पाकिस्तान) तक लगभग 2400 किलोमीटर लंबी थी। प्राचीनकाल में इसे ‘उत्तरापथ’ के नाम से जाना जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शेरशाह ने इस सड़क के दोनों किनारों पर छायादार वृक्ष लगवाए, प्रत्येक कोस पर सराय (विश्रामगृह) बनवाई और कुएँ खुदवाए। उसने कुल लगभग 1700 सरायें बनवाईं, जिनमें हिंदुओं और मुसलमानों दोनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होती थी। यह सड़क आज भी NH-1 और NH-2 के रूप में उपयोग में है।
26. इन शासकों में से किसने अपनी सैन्य टुकड़ियों को दो सौ, दो सौ पचास एवं पांच सौ की इकाइयों में विभाजित किया था?
64th B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(e)
यह सैन्य विभाजन इस्लाम शाह (शेरशाह के पुत्र) ने किया था। उसने अपनी सेना को पचास, दो सौ, दो सौ पचास और पाँच सौ की इकाइयों में संगठित किया। चूँकि प्रश्न में ‘पचास’ की इकाई छूटी हुई है और इस्लाम शाह विकल्प (d) में दिया है, अतः सही उत्तर (e) — अर्थात् एक से अधिक — माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस्लाम शाह ने सैनिकों का हुलिया (शारीरिक विवरण) रजिस्टर में दर्ज करने की प्रथा चलाई ताकि सेना में फर्जी सैनिकों की भर्ती रोकी जा सके — यह व्यवस्था अलाउद्दीन खिलजी की ‘दाग’ प्रथा से प्रेरित थी। उसने आगरा के निकट ‘ग्वालियर’ और ‘फतेहपुर’ (पुरानी दिल्ली नहीं) को अपना प्रशासनिक केंद्र बनाया।
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