मराठा साम्राज्य | One-Liner Practice

भारतीय इतिहास मध्यकालीन भारत मराठा साम्राज्य

शिवाजी का जन्म 19 फरवरी, 1630 ई. को पूना के निकट शिवनेरी दुर्ग में हुआ था।

शिवाजी के माता-पिता का नाम जीजाबाई और शाहजी भोंसले था।

1643 ई. में शिवाजी ने अपने पिता की पूना जागीर के प्रशासक के रूप में कार्य प्रारम्भ किया।

1647 ई. में शिवाजी ने पूर्ण रूप से शासन-कार्य सम्भाला।

शिवाजी पर सर्वाधिक प्रभाव दादाजी कोंडदेव का था। दादाजी कोंडदेव, शिवाजी के संरक्षक एवं मार्गदर्शक थे।

समर्थ रामदास को शिवाजी का आध्यात्मिक गुरु माना जाता है।

समर्थ रामदास ने दासबोध एवं मनाचे श्लोक की रचना की।

समर्थ रामदास ने महाराष्ट्र धर्म का प्रतिपादन किया।

शिवाजी के शासनकाल में उनके अधिकार में लगभग 240 किले थे।

1646 ई. में शिवाजी ने सर्वप्रथम तोरण (तोरणा) दुर्ग पर अधिकार किया।

1647 ई. में कोंडाणा (सिंहगढ़) दुर्ग पर अधिकार किया।

1656 ई. में रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।

1648 ई. में शाहजी को बीजापुर द्वारा बंदी बनाया गया।

1657 ई. में शिवाजी ने पहली बार मुगलों से युद्ध किया।

1659 ई. में शिवाजी ने बीजापुर के प्रसिद्ध सरदार अफजल खाँ का वध बघनखे से किया।

1664 ई. में शिवाजी ने पहली बार सूरत को लूटा।

1665 ई. में औरंगजेब ने आमेर के राजा मिर्जा राजा जयसिंह को शिवाजी के विरुद्ध भेजा।

जयसिंह ने पुरन्दर पर अधिकार कर शिवाजी से पुरन्दर की संधि (1665 ई.) की।

पुरन्दर की संधि के बाद मुगल दरबार द्वारा शिवाजी को राजा की उपाधि प्रदान की गई।

1666 ई. में औरंगजेब ने शिवाजी को आगरा के जयपुर भवन में नजरबंद कर दिया।

1670 ई. में शिवाजी ने सूरत पर दूसरा आक्रमण किया।

1672 ई. में सल्हेर के युद्ध में शिवाजी ने मुगलों को पराजित किया।

1674 ई. में रायगढ़ में काशी के विद्वान गंगाभट्ट द्वारा शिवाजी का राज्याभिषेक कराया गया, जिसके बाद उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की।

शिवाजी का साम्राज्य स्वराज्य एवं मुल्क-ए-कदीम नामक दो भागों में विभाजित था।

मराठी को राजभाषा का दर्जा दिया गया।

रघुनाथ पंडित हनुमंते ने राज्यव्यवहार कोश (मराठी प्रशासनिक शब्दकोश) की रचना की।

शिवाजी के मंत्रिमंडल को अष्टप्रधान कहा जाता था।

पेशवा प्रधानमंत्री तथा अमात्य वित्तमंत्री होता था।

सर-ए-नौबत सेनापति कहलाता था।

शिवाजी की सेना का मुख्य भाग घुड़सवार एवं पैदल सेना थी। घुड़सवार दो प्रकार के थे—बरगीर एवं सिलेदार

शिवाजी की राजस्व व्यवस्था मलिक अम्बर द्वारा विकसित रैयतवाड़ी व्यवस्था से प्रभावित थी।

मराठा कर व्यवस्था के दो प्रमुख कर चौथ एवं सरदेशमुखी थे।

चौथ विजित प्रदेशों से वसूला जाने वाला उपज का एक-चौथाई (¼) कर था।

सरदेशमुखी कुल राजस्व का 10% अतिरिक्त कर था।

शिवाजी ने भूमि मापन के लिए काठी नामक मापक का प्रयोग किया।

शिवाजी ने हिंदव धर्मोद्धारक की उपाधि के साथ छत्रपति का सिंहासन ग्रहण किया।

शिवाजी के राजपुरोहित गंगाभट्ट थे।

गंगाभट्ट ने शिवाजी को मेवाड़ के सिसोदिया वंश का क्षत्रिय घोषित किया।

कर्नाटक अभियान, शिवाजी का अंतिम विजय अभियान था।

3 अप्रैल 1680 ई. में शिवाजी की मृत्यु हुई।

शिवाजी के उत्तराधिकारी शम्भाजी बने।

शम्भाजी ने औरंगजेब के विद्रोही पुत्र अकबर को शरण दी।

1689 ई. में औरंगजेब ने शम्भाजी को बंदी बनाकर मृत्यु दण्ड दिलवाया।

शम्भाजी की पत्नी येसुबाई तथा पुत्र शाहू को बंदी बना लिया गया।

शम्भाजी की मृत्यु के बाद उनके सौतेले भाई राजाराम को मराठा मंत्रिपरिषद् ने राजा घोषित किया।

1700 ई. में राजाराम की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ताराबाई ने अपने पुत्र शिवाजी द्वितीय को गद्दी पर बैठाया और मुगलों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा।

1707 ई. में आजम शाह ने शाहू को रिहा किया।

1713 ई. में शाहू ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा नियुक्त किया।

राजाराम ने नौवें मंत्री के रूप में प्रतिनिधि पद का सृजन किया।

बालाजी विश्वनाथ के बाद पेशवा का पद वंशानुगत हो गया।

पेशवा के सचिवालय को हुजूर दफ्तर (पूना) कहा जाता था।

❑ सबसे महत्वपूर्ण दफ्तर अल-बरीज दफ्तर था।

❑ गाँव के मुख्य अधिकारी को पाटिल (पटेल) कहा जाता था।

शाहू एवं ताराबाई के मध्य चले गृहयुद्ध ने पेशवाओं की शक्ति को बढ़ाया।

बाजीराव प्रथम, शिवाजी के बाद गुरिल्ला युद्ध का सबसे बड़ा प्रतिपादक माना जाता है।

शाहू ने बाजीराव प्रथम को योग्य पिता का योग्य पुत्र कहा।

बाजीराव प्रथम ने हिन्दू पद-पादशाही का आदर्श प्रस्तुत किया।

1749 ई. में अपनी मृत्यु से पूर्व शाहू ने राजाराम द्वितीय (रामराजा) को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया।

बालाजी बाजीराव को नाना साहब के नाम से भी जाना जाता था।

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