1. किस सिख गुरु की मृत्यु के लिए औरंगजेब जिम्मेदार है?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2004
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2005
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2005
उत्तर-(b)
गुरु तेग बहादुर (1621-1675 ई.) सिक्खों के नौवें गुरु थे। मुगल बादशाह औरंगजेब की कट्टर इस्लामी नीतियों के विरुद्ध उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा का बीड़ा उठाया। कश्मीरी पंडितों के आग्रह पर उन्होंने औरंगजेब के धर्मांतरण के दबाव का खुलकर विरोध किया। इस पर औरंगजेब ने 1675 ई. में दिल्ली के चांदनी चौक में उन्हें सार्वजनिक रूप से शिरच्छेद का दंड दिया। उन्हें ‘हिंद की चादर’ अर्थात् भारत की ढाल कहा जाता है। उनके बलिदान स्थल पर आज गुरुद्वारा शीश गंज साहिब स्थित है।
2. गुरु नानक ने अपना उत्तराधिकारी किसे नियुक्त किया था?
M.P.P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
गुरु नानक देव (1469-1539 ई.) सिक्ख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु थे। उनका जन्म तलवंडी (वर्तमान पाकिस्तान में ननकाना साहिब) में हुआ था। उन्होंने अपने परम शिष्य लहना को उत्तराधिकारी नियुक्त किया, जो आगे चलकर ‘गुरु अंगद देव’ के नाम से सिक्खों के दूसरे गुरु बने। ‘अंगद’ शब्द का अर्थ है ‘मेरा अंग’, जो गुरु नानक ने लहना को इसलिए दिया क्योंकि वे उन्हें अपना ही अंश मानते थे। गुरु नानक ने चार उदासियाँ (लंबी धार्मिक यात्राएं) कीं जिनमें उन्होंने भारत, श्रीलंका, तिब्बत, अरब और मक्का-मदीना तक की यात्रा की।
3. आदि ग्रंथ अथवा गुरु ग्रंथ साहेब का संकलन निम्नांकित में से किसने किया था?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2004
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
सिक्खों के पाँचवें गुरु अर्जुन देव (1581-1606 ई.) ने 1604 ई. में अमृतसर में ‘आदि ग्रंथ’ का संकलन किया। इसमें छः सिख गुरुओं की वाणी के साथ-साथ कबीर, नामदेव, रैदास, बाबा फरीद, जयदेव जैसे संत-भक्त कवियों की रचनाएं भी सम्मिलित हैं। बाद में दसवें गुरु गोविंद सिंह ने गुरु तेग बहादुर की वाणी भी इसमें जोड़कर इसे ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ नाम दिया और 1708 ई. में इसे सिक्खों का शाश्वत गुरु घोषित किया। यह ग्रंथ गुरुमुखी लिपि में है और इसमें कुल 1430 पृष्ठ और 6000 से अधिक भजन (शब्द) हैं।
4. निम्नलिखित में से किन सिख गुरुओं को तत्कालीन शासकों द्वारा मृत्युदंड दिया गया था?
1. गुरु अंगद 2. गुरु अर्जुन देव
3. गुरु हर गोविंद 4. गुरु तेग बहादुर
सही उत्तर का चयन निम्नांकित कूट से कीजिए-
कूट :
1. गुरु अंगद 2. गुरु अर्जुन देव
3. गुरु हर गोविंद 4. गुरु तेग बहादुर
सही उत्तर का चयन निम्नांकित कूट से कीजिए-
कूट :
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
उत्तर-(a)
सिक्ख इतिहास में केवल दो गुरुओं को मुगल शासकों ने मृत्युदंड दिया। पाँचवें गुरु अर्जुन देव को 1606 ई. में जहांगीर ने विद्रोही शहजादे खुसरो की सहायता करने के आरोप में लाहौर में यातना देकर शहीद किया। नवें गुरु तेग बहादुर को 1675 ई. में औरंगजेब ने इस्लाम स्वीकार न करने पर दिल्ली में शिरच्छेद का दंड दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय है कि गुरु अर्जुन देव की शहादत से क्रोधित होकर उनके पुत्र व छठे गुरु हरगोविंद ने ‘मीरी-पीरी’ की दो तलवारें धारण कर सिक्ख पंथ को सैन्य स्वरूप देने की नींव रखी।
5. निम्नलिखित में से किसे गुरु नानक ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था?
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2021
उत्तर-(b)
गुरु नानक ने अपने परम निष्ठावान शिष्य लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। लहना मूलतः माता देवी के भक्त थे और खडूर साहिब के निवासी थे। गुरु नानक की सेवा और समर्पण देखकर उन्होंने लहना को ‘अंगद’ नाम दिया। गुरु अंगद देव ने गुरु नानक की शिक्षाओं को ‘गुरुमुखी’ लिपि में संकलित किया। अन्य विकल्पों में मरदाना गुरु नानक के बचपन के साथी और रबाब वादक थे, जबकि श्री चंद गुरु नानक के पुत्र थे, जिन्होंने उदासी पंथ की स्थापना की।
6. किस सिख गुरु ने विद्रोही राजकुमार खुसरो की सहायता धन एवं आशीर्वाद से की थी?
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
1606 ई. में मुगल बादशाह जहांगीर के विरुद्ध विद्रोह करने वाले शहजादे खुसरो ने भागते हुए पंजाब में गुरु अर्जुन देव से भेंट की। गुरु ने उसे आशीर्वाद दिया और संभवतः आर्थिक सहायता भी दी। इस पर जहांगीर ने गुरु अर्जुन देव पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाया। गुरु द्वारा जुर्माना अदा करने से इनकार करने पर उन्हें लाहौर में रावी नदी के तट पर कठोर यातनाएं दी गईं और 1606 ई. में उनकी शहादत हुई। यह सिक्ख इतिहास की पहली शहादत थी, जिसने आगे चलकर सिक्ख पंथ को एक संघर्षशील स्वरूप दिया।
7. पंजाब में अमृतसर नगर को स्थापित किया था-
U.P. P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
सिक्खों के चौथे गुरु रामदास (1574-1581 ई.) ने अमृतसर नगर की स्थापना की। मुगल बादशाह अकबर ने उन्हें 500 बीघा भूमि दान दी, जिस पर उन्होंने एक पवित्र तालाब खुदवाया जिसे ‘अमृत सरोवर’ (अमृत का तालाब) कहा गया। इसी के नाम पर नगर का नाम ‘अमृतसर’ पड़ा, पहले यह ‘रामदासपुर’ कहलाता था। बाद में पाँचवें गुरु अर्जुन देव ने इसी सरोवर के मध्य में स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) का निर्माण कराया, जो आज सिक्खों का सर्वप्रमुख तीर्थस्थल है।
8. किस सिख गुरु को अकबर ने 500 बीघा जमीन दी थी?
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Mains) 2007
उत्तर-(b)
मुगल सम्राट अकबर ने सिक्खों के चौथे गुरु रामदास और उनकी पत्नी बीबी भानी को 500 बीघा भूमि दान दी। यह भूमि मूलतः बीबी भानी को उपहारस्वरूप दी गई थी, क्योंकि वे तीसरे गुरु अमरदास की पुत्री थीं। अकबर का सिक्ख गुरुओं से सौहार्दपूर्ण संबंध था; उन्होंने गुरु अमरदास से भी भेंट की थी और लंगर में आम लोगों के साथ बैठकर भोजन किया था। गुरु रामदास ने इसी भूमि पर ‘अमृत सरोवर’ खुदवाकर अमृतसर शहर की नींव रखी।
9. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
गुरु अर्जुन देव ने 1604 ई. में ‘आदि ग्रंथ’ का संकलन किया — यही सही सुमेलित युग्म है। अन्य विकल्पों की जांच करें: ‘मीरी’ (सांसारिक सत्ता) और ‘पीरी’ (आध्यात्मिक सत्ता) की दो तलवारें छठे गुरु हरगोविंद ने धारण कीं, न कि गुरु अमरदास ने। ‘मनजी’ प्रथा (22 प्रशासनिक धर्म-क्षेत्रों में विभाजन) गुरु अमरदास ने आरंभ की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘दल खालसा’ की स्थापना नवाब कपूर सिंह ने 1748 ई. में की थी। उल्लेखनीय है कि ‘खालसा पंथ’ की स्थापना दसवें गुरु गोविंद सिंह ने 1699 ई. में बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में की थी।
10. निम्नलिखित में से किस सिख गुरु ने ‘गुरुमुखी’ प्रारंभ की?
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(d)
गुरुमुखी लिपि का विकास सिक्खों के दूसरे गुरु अंगद देव (1539-1552 ई.) ने किया। ‘गुरुमुखी’ शब्द का अर्थ है ‘गुरु के मुख से निकली वाणी’। यह लिपि मूलतः पुरानी शारदा लिपि और लांडा लिपि से विकसित हुई है। गुरु अंगद देव ने इस लिपि को सरल, व्यवस्थित और सुलभ रूप देकर इसे आम जनता तक पहुंचाया ताकि गुरु नानक की वाणी को व्यापक रूप से लिखा-पढ़ा जा सके। वर्तमान में यही लिपि पंजाब की आधिकारिक लिपि है और पंजाबी भाषा इसी में लिखी जाती है।
11. ‘खालसा पंथ’ कितने वर्ष पहले प्रारंभ हुआ?
M.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
खालसा पंथ की स्थापना सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ने 30 मार्च 1699 ई. को बैसाखी पर्व के शुभ अवसर पर आनंदपुर साहिब (पंजाब) में की थी। इस प्रश्न के हल के समय (वर्ष 2000) खालसा पंथ की स्थापना को लगभग 300 वर्ष पूर्ण हो चुके थे, इसीलिए उत्तर (b) सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खालसा की स्थापना के समय गुरु गोविंद सिंह ने पाँच प्यारों (पंज प्यारे) — दया सिंह, धर्म सिंह, हिम्मत सिंह, मोहकम सिंह और साहिब सिंह — को सर्वप्रथम अमृत छकाया था। खालसा पंथ की 300वीं वर्षगाँठ (त्रिशताब्दी) वर्ष 1999 में ‘खालसा सजना दिवस’ के रूप में बड़े पैमाने पर मनाई गई थी।
12. बंदा बहादुर का मूल नाम था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(b)
बंदा बहादुर का मूल नाम लच्छन देव (Lachhman Dev) था। ये राजपूत परिवार में जन्मे थे और बाद में एक वैरागी साधु बन गए। नांदेड़ में गुरु गोविंद सिंह जी से भेंट के पश्चात उन्होंने सिख धर्म अपनाया और गुरु जी ने उन्हें ‘बंदा बहादुर’ नाम दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बंदा बहादुर ने 1710 ई. में सरहिंद के मुगल गवर्नर वज़ीर खान को पराजित कर मार डाला, जिसने गुरु गोविंद सिंह के दो छोटे साहिबज़ादों को शहीद किया था। बंदा बहादुर ने पंजाब में एक संक्षिप्त सिख शासन स्थापित किया और किसानों को ज़मीन का स्वामित्व दिलाने वाले प्रारंभिक भूमि-सुधार लागू किए।
13. पटना में किस सिख गुरु का जन्म हुआ था?
56 to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 ई. को पटना साहिब, बिहार में हुआ था। उनका निधन 7 अक्टूबर 1708 ई. को नांदेड़ (वर्तमान महाराष्ट्र) में हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जिस स्थान पर पटना में उनका जन्म हुआ, वहाँ आज ‘तख्त श्री हरमंदिर साहिब पटना’ (पटना साहिब गुरुद्वारा) स्थित है, जो सिखों के पाँच तख्तों में से एक प्रमुख तख्त है। गुरु गोविंद सिंह महान योद्धा होने के साथ-साथ एक विद्वान कवि भी थे; उन्होंने ‘जापु साहिब’ और ‘चंडी दी वार’ जैसी रचनाएँ लिखीं।
14. निम्न में से किस स्थान पर एक प्रसिद्ध सिख गुरुद्वारा अवस्थित है?
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Mains) 2006
उत्तर-(b)
हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से लगभग 4,329 मीटर (14,200 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। यह एक हिमालयी झील के किनारे बसा हुआ है और सिखों के सर्वाधिक पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। गुरु गोविंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा ‘विचित्र नाटक’ में इस स्थान पर ध्यान करने का उल्लेख किया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हेमकुंड साहिब के समीप ही हिंदुओं का प्रसिद्ध ‘लक्ष्मण मंदिर’ भी स्थित है, जिससे यह स्थल हिंदू और सिख दोनों समुदायों के लिए एक साझा आस्था का केंद्र है। यह तीर्थ स्थल जून से अक्टूबर के मध्य ही खुलता है, क्योंकि शेष समय यह भारी हिमपात के कारण दुर्गम रहता है।
15. सिक्खों के अंतिम गुरु कौन थे?
M.P. P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
गुरु गोविंद सिंह सिख परंपरा के दसवें और अंतिम मानव गुरु थे। अपने निधन से पूर्व उन्होंने घोषणा की कि उनके बाद कोई मानव गुरु नहीं होगा और सिखों का शाश्वत गुरु अब ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ (पवित्र ग्रंथ) होगा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गुरु गोविंद सिंह ने ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ को गुरुगद्दी सौंपते समय कहा था — “सब सिखन को हुकम है गुरु मानियो ग्रंथ।” इसी कारण सिख धर्म में ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ को जीवित गुरु के रूप में सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है और इसे गुरुद्वारे में सिंहासन पर विराजित किया जाता है।
16. गुरु गोविंद सिंह की महानता निहित है, इसमें कि-
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1993
उत्तर-(a)
गुरु गोविंद सिंह की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि सिखों को ‘खालसा पंथ’ नामक एक सुसंगठित सैनिक-धार्मिक संप्रदाय में परिवर्तित करना थी। उन्होंने प्रत्येक सिख को ‘पाँच ककार’ (केश, कंघा, कड़ा, कच्छा, कृपाण) धारण करने का आदेश दिया और सभी सिख पुरुषों के नाम के साथ ‘सिंह’ तथा महिलाओं के साथ ‘कौर’ उपनाम जोड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गुरु गोविंद सिंह ने मुगल सम्राट औरंगजेब के अत्याचारों का डटकर विरोध किया और उन्हें ‘जफरनामा’ (विजय-पत्र) नामक एक ऐतिहासिक पत्र फारसी में लिखा, जिसमें उन्होंने औरंगजेब की धार्मिक असहिष्णुता की तीखी आलोचना की। यह पत्र साहस और नैतिक दृढ़ता का अद्भुत उदाहरण माना जाता है।
17. किसकी समाधि के कारण नांदेड़ गुरुद्वारा सिक्खों द्वारा पवित्र माना जाता है?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
नांदेड़ (महाराष्ट्र) में स्थित ‘हज़ूर साहिब’ गुरुद्वारा सिखों के पाँच तख्तों में से एक है। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ गुरु गोविंद सिंह जी का 7 अक्टूबर 1708 ई. को एक अफगान जमशेद खान द्वारा आघात किए जाने के बाद निधन हुआ था। उनकी समाधि यहीं बनाई गई, जिससे यह स्थल सिखों का प्रमुख तीर्थ बन गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘हज़ूर साहिब’ गुरुद्वारे के गर्भगृह में गुरु गोविंद सिंह जी के शस्त्र आज भी सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ प्रदर्शित किया जाता है। इस गुरुद्वारे का वर्तमान भवन महाराजा रणजीत सिंह और हैदराबाद के निज़ाम के सहयोग से 19वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था।
18. ‘खालसा’ के संस्थापक गुरु थे-
U.P.P.C.S. (Mains) 2006 | Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(d)
खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोविंद सिंह जी ने 1699 ई. में की थी। ‘खालसा’ शब्द अरबी के ‘खालिस’ से बना है जिसका अर्थ है ‘शुद्ध’ या ‘स्वतंत्र’। इस पंथ का उद्देश्य एक ऐसे निडर, अनुशासित और धर्मनिष्ठ समुदाय का निर्माण करना था जो धर्म की रक्षा के लिए सदा तत्पर रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोविंद सिंह जी के पिता, नौवें गुरु तेग बहादुर जी की औरंगजेब द्वारा 1675 ई. में की गई क्रूर हत्या की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया भी थी। गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी हिंदुओं को जबरन धर्मांतरण से बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था, इसीलिए उन्हें ‘हिंद की चादर’ कहा जाता है।
19. किस सिख गुरु के द्वारा सिक्खों का ‘खालसा’ में रूपांतरण किया गया था?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
गुरु गोविंद सिंह जी ने 1699 ई. में सिखों को ‘खालसा’ में परिवर्तित किया। इस ऐतिहासिक क्षण में उन्होंने सभा में उपस्थित हज़ारों सिखों से अपने सिर की आहुति माँगी, जिस पर पाँच साहसी सिख आगे आए — इन्हें ही ‘पंज प्यारे’ कहा गया। इन्हीं पाँचों को सर्वप्रथम ‘अमृत’ (खंडे का पाहुल) पिलाकर खालसा में दीक्षित किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पंज प्यारों में पाँच अलग-अलग वर्णों और क्षेत्रों के व्यक्ति शामिल थे, जो गुरु गोविंद सिंह के जाति-मुक्त समाज के संदेश का प्रतीक था। खालसा दीक्षा के बाद गुरु गोविंद सिंह ने स्वयं उन्हीं पाँच प्यारों से अमृत ग्रहण किया, जो गुरु-शिष्य के बीच समानता का अद्वितीय उदाहरण है।
20. निम्न में से किस सिख गुरु ने खालसा पंथ की स्थापना की थी?
M.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(a)
खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोविंद सिंह जी ने 1699 ई. में आनंदपुर साहिब में की। यह घटना सिख इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है, जब एक आध्यात्मिक समुदाय एक संगठित, समर्पित और अनुशासित सैन्य-धार्मिक शक्ति में रूपांतरित हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गुरु नानक देव जी (प्रथम गुरु) ने 1469 ई. में सिख धर्म की नींव रखी थी, जबकि पाँचवें गुरु अर्जुन देव जी ने ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ का संकलन किया और अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) की स्थापना की। इस प्रकार दसों गुरुओं ने क्रमशः सिख धर्म को उसका वर्तमान स्वरूप प्रदान किया।
प्रातिक्रिया दे