1. 1930 में महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन कहां से प्रारंभ किया था ?
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(b)
12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से अपनी ऐतिहासिक नमक यात्रा शुरू की और 24 दिनों में लगभग 390 किमी पैदल चलकर 6 अप्रैल 1930 को दांडी (गुजरात के नवसारी जिले में, समुद्र तट पर) पहुंचे, जहां नमक कानून तोड़ते हुए विधिवत सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई। चूंकि आंदोलन का वास्तविक श्रीगणेश नमक कानून भंग करने के साथ दांडी में हुआ, इसलिए सही उत्तर ‘दांडी’ है, न कि ‘साबरमती’ (जो केवल यात्रा का प्रस्थान बिंदु था)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी के साथ यात्रा में मूलतः 78 चुने हुए सत्याग्रही शामिल थे। यात्रा आरंभ करते समय गांधीजी की आयु 61 वर्ष थी।
2.दांडी यात्रा की गई-
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(d)
दांडी यात्रा वर्ष 1930 में संपन्न हुई। गांधीजी 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से रवाना हुए और 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर नमक कानून भंग किया, जिससे सविनय अवज्ञा आंदोलन की औपचारिक शुरुआत हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस दौरान भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन थे। मार्च 1931 में गांधी-इरविन समझौते के बाद यह आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था।
3. निम्नलिखित में से किस आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी सर्वाधिक मानी जाती है?
U.P.P.C.S (Mains) 2016
उत्तर-(b)
1930 के नमक सत्याग्रह (सविनय अवज्ञा आंदोलन) में महिलाओं की भागीदारी राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में सर्वाधिक मानी जाती है। सरोजिनी नायडू, कमलादेवी चट्टोपाध्याय और राजकुमारी अमृत कौर जैसी नेत्रियों के नेतृत्व में हजारों महिलाओं ने नमक कानून भंग करने, विदेशी कपड़ों व शराब की दुकानों पर धरना देने जैसी गतिविधियों में सक्रिय हिस्सा लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी की गिरफ्तारी के बाद मई 1930 में सरोजिनी नायडू ने धरासना नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया था। कमलादेवी चट्टोपाध्याय को मुंबई में नमक बेचकर कानून तोड़ने वाली अग्रणी महिलाओं में गिना जाता है।
4.किस कांग्रेस सत्र में कार्यकारी कमेटी को सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ करने का अधिकार दिया गया था?
I.A.S. (Pre) 2005
उत्तर-(b)
दिसंबर 1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में कार्यकारिणी समिति को उपयुक्त समय पर सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ने का अधिकार सौंपा गया। इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए और ‘पूर्ण स्वराज’ को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया गया। फरवरी 1930 में साबरमती आश्रम में हुई कार्यकारिणी की बैठक में गांधीजी को आंदोलन का नेतृत्व सौंपा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 31 दिसंबर 1929 की मध्यरात्रि को रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया गया था, और 26 जनवरी 1930 को पहली बार ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ के रूप में मनाया गया।
5. निम्नलिखित प्रांतों में से किस प्रांत के सत्याग्रहियों की संख्या महात्मा गांधी के दांडी कूच में सर्वाधिक थी?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(b)
संस्कृति मंत्रालय के गांधी हेरिटेज पोर्टल पर उपलब्ध सूची के अनुसार दांडी कूच में शामिल सत्याग्रहियों में सबसे अधिक संख्या गुजरात से (32) थी, इसके बाद महाराष्ट्र (13) और उत्तर प्रदेश (8) का स्थान था। चूंकि यात्रा गुजरात में ही साबरमती से दांडी तक हुई थी, इसलिए स्थानीय प्रांत से भागीदारी स्वाभाविक रूप से सबसे अधिक रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कच्छ, केरल, पंजाब और राजपुताना जैसे क्षेत्रों से भी कुछ सत्याग्रही इस यात्रा में शामिल हुए थे। आज दांडी मार्च के मूल मार्ग को ‘दांडी मार्च नेशनल मेमोरियल’ के रूप में संरक्षित किया गया है।
6.दांडी यात्रा के साथ निम्नलिखित में से क्या प्रारंभ हुआ?
U.P.P.C.S (Pre) 2000
उत्तर-(c)
12 मार्च 1930 को शुरू हुई दांडी यात्रा 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून भंग करने के साथ संपन्न हुई, और इसी घटना से देशव्यापी सविनय अवज्ञा आंदोलन का सूत्रपात हुआ। यह आंदोलन शीघ्र ही पूरे देश में फैल गया; तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम तक नमक यात्रा निकाली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: असम में इसके समानांतर ‘जंगल सत्याग्रह’ (वन कानूनों का उल्लंघन) चलाया गया, जबकि उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान (सीमांत गांधी) के नेतृत्व में खुदाई खिदमतगारों ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
7. महात्मा गांधी ने 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन का आरंभ किया था-
I.A.S. (Pre) 1995
उत्तर-(b)
1930 का सविनय अवज्ञा आंदोलन औपचारिक रूप से दांडी में आरंभ हुआ, जहां गांधीजी ने साबरमती से 24 दिन की पैदल यात्रा के बाद 6 अप्रैल 1930 को समुद्र तट पर नमक बनाकर कानून तोड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ब्रिटिश सरकार 1882 के नमक अधिनियम के तहत नमक उत्पादन व बिक्री पर एकाधिकार रखते हुए उस पर कर वसूलती थी; गांधीजी ने इसे आम जनता पर सर्वाधिक अन्यायपूर्ण कर बताते हुए आंदोलन का प्रतीक बनाया।
8.सविनय अवज्ञा आंदोलन के रूप में गांधीजी ने ‘दांडी मार्च’ प्रारंभ किया था-
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी की ओर कूच आरंभ किया था, जबकि नमक कानून का वास्तविक उल्लंघन 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचने पर हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यात्रा आरंभ करने से पहले 2 मार्च 1930 को गांधीजी ने वायसराय लॉर्ड इरविन को पत्र लिखकर अपनी आगामी कार्रवाई की पूर्व सूचना दी थी, जिसे एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ माना जाता है।
9.निम्नलिखित में से किसने गांधीजी के नमक आंदोलन में भाग लिया ?
Jharkhand P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(d)
सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर और कमलादेवी चट्टोपाध्याय — तीनों ने ही गांधीजी के नमक सत्याग्रह में सक्रिय भागीदारी निभाई थी, इसलिए सही उत्तर ‘उपर्युक्त में से सभी’ है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजकुमारी अमृत कौर आगे चलकर स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनीं, जबकि सरोजिनी नायडू 1925 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
10.गांधीजी ने दांडी यात्रा प्रारंभ की थी-
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2002
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(b)
गांधीजी ने अपनी प्रसिद्ध दांडी यात्रा साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से प्रारंभ की थी, जहां से वे चुनिंदा सत्याग्रहियों के साथ पैदल चलकर दांडी पहुंचे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: साबरमती आश्रम की स्थापना गांधीजी ने 1917 में की थी। यात्रा पर निकलने से पहले उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि स्वराज प्राप्त किए बिना वे आश्रम नहीं लौटेंगे — और संयोग से वे जीवनभर वापस नहीं लौटे।
11. भारतीय इतिहास में 6 अप्रैल, 1930 की तिथि जानी जाती है-
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(a)
6 अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी ने दांडी में मुट्ठीभर नमक उठाकर सविनय अवज्ञा (सिविल नाफरमानी) आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की। सुभाषचंद्र बोस ने इस अभियान की तुलना नेपोलियन के एल्बा से पेरिस तक के कूच से की थी। अंग्रेज पत्रकार ब्रेल्सफोर्ड ने इसका उपहास उड़ाते हुए पूछा था कि क्या महज एक केतली का पानी उबालकर साम्राज्य को चुनौती दी जा सकती है, जिसके जवाब में ‘स्टेट्समैन’ अखबार ने लिखा कि गांधीजी समुद्र का पानी तब तक उबालते रहेंगे जब तक डोमिनियन दर्जा नहीं मिल जाता।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस घटना ने एक सामान्य वस्तु (नमक) को साम्राज्यवाद-विरोधी प्रतिरोध का शक्तिशाली प्रतीक बना दिया। दांडी पहुंचने के तुरंत बाद देशभर में पेशावर, शोलापुर, धरासना जैसे अनेक स्थानों पर समानांतर रूप से नमक कानून तोड़ा जाने लगा।
12. ऐतिहासिक ‘दांडी मार्च’ का संबंध है-
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
उत्तर-(b)
दांडी मार्च का सीधा संबंध 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी द्वारा नमक कानून तोड़े जाने की घटना से है। साबरमती आश्रम से 24 दिन की पदयात्रा के बाद गांधीजी दांडी पहुंचे और वहां समुद्र तट पर नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार के नमक एकाधिकार कानून को चुनौती दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नमक कर एक अप्रत्यक्ष किंतु सर्वव्यापी कर था, जो गरीब से गरीब व्यक्ति को भी सीधे प्रभावित करता था, इसलिए इसने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाया। दांडी मार्च की अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक पहचान दिलाई।
13. सविनय अवज्ञा आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
1. महात्मा गांधी को नमक कानून तोड़ने के विरोध में सजा नहीं दी गई थी।
2.मदन मोहन मालवीय, देवदास गांधी और के.एम. मुंशी को नमक कानून तोड़ने पर सजा दी गई थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
1. महात्मा गांधी को नमक कानून तोड़ने के विरोध में सजा नहीं दी गई थी।
2.मदन मोहन मालवीय, देवदास गांधी और के.एम. मुंशी को नमक कानून तोड़ने पर सजा दी गई थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2016
उत्तर-चुनिए।
कथन 1 असत्य है क्योंकि नमक कानून तोड़ने के अपराध में ब्रिटिश सरकार ने गांधीजी को गिरफ्तार कर यरवदा जेल भेजा था। कथन 2 सत्य है, क्योंकि नमक सत्याग्रह में भाग लेकर कानून तोड़ने के कारण मदन मोहन मालवीय, देवदास गांधी और के.एम. मुंशी जैसे नेताओं को भी सजा दी गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी को 5 मई 1930 की रात कराड़ी गांव (गुजरात) में गिरफ्तार किया गया था, जब वे धरासना नमक कारखाने की ओर बढ़ने वाले थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद सरोजिनी नायडू ने धरासना सत्याग्रह का नेतृत्व संभाला, जिसमें हुए लाठीचार्ज की रिपोर्टिंग अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की थी।
14. सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ-
U.P. P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(c)
सविनय अवज्ञा आंदोलन की औपचारिक शुरुआत दांडी मार्च के समापन पर हुई, जब 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने दांडी में नमक कानून भंग किया। होमरूल आंदोलन, बंगाल विभाजन और पूर्ण स्वराज की घोषणा जैसी घटनाएं इससे पहले हो चुकी थीं, परंतु आंदोलन का वास्तविक क्रियान्वयन दांडी मार्च की समाप्ति के साथ ही हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929) में कांग्रेस कार्यसमिति को आंदोलन शुरू करने का अधिकार पहले ही दे दिया गया था, परंतु इसका औपचारिक प्रारंभ दांडी मार्च से हुआ। इस आंदोलन के दौरान देशभर में लगभग 90,000 से अधिक सत्याग्रही गिरफ्तार हुए थे।
15. सबसे पहले कौन-सी घटना घटी?
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
दिए गए विकल्पों में सबसे पहले साइमन कमीशन का भारत आगमन (3 फरवरी 1928) हुआ, इसके बाद दांडी मार्च का प्रारंभ (12 मार्च 1930), फिर गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931) और अंततः भारत छोड़ो आंदोलन का प्रारंभ (9 अगस्त 1942) हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: साइमन कमीशन के विरुद्ध ‘साइमन कमीशन वापस जाओ’ के नारों के साथ देशव्यापी विरोध हुए; लाहौर में हुए लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनका निधन हो गया। इस कमीशन में कोई भी भारतीय सदस्य शामिल न होने के कारण इसका व्यापक विरोध हुआ था।
16. “शक्ति के विरुद्ध अधिकार की इस लड़ाई में मैं विश्व की सहानुभूति चाहता हूं।” यह कथन किससे सम्बद्ध है?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(b)
5 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचने पर महात्मा गांधी ने वहां उपस्थित देशी-विदेशी संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि वे शक्ति के विरुद्ध अधिकार की इस लड़ाई में विश्व जनमत का समर्थन चाहते हैं। यह कथन सीधे तौर पर गांधीजी की दांडी यात्रा और आगामी नमक सत्याग्रह से जुड़ा है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी का यह वक्तव्य अंतरराष्ट्रीय प्रेस में व्यापक रूप से प्रकाशित हुआ, जिससे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक नैतिक समर्थन मिलना शुरू हुआ। टाइम पत्रिका ने वर्ष 1930 में महात्मा गांधी को ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुना था, जो काफी हद तक दांडी मार्च से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान का परिणाम था।
17. दांडी मार्च शुरू किया गया था-
U.P. P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(b)
दांडी मार्च नमक कानून तोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, न कि इसके समर्थन में, और न ही रौलेट एक्ट से इसका कोई सीधा संबंध था। गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार के नमक उत्पादन व बिक्री पर एकाधिकार वाले कानून को सविनय अवज्ञा के माध्यम से चुनौती देने हेतु यह यात्रा आरंभ की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रौलेट एक्ट 1919 में पारित हुआ था और उसके विरुद्ध सत्याग्रह एक अलग आंदोलन था, जिसका दांडी मार्च (1930) से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। नमक कानून तोड़ने के बाद गांधीजी ने दक्षिण की ओर बढ़कर धरासना नमक कारखाने पर सत्याग्रह करने की योजना बनाई थी, हालांकि अपनी गिरफ्तारी के कारण वे स्वयं वहां नहीं पहुंच सके।
18.कथन (a) : महात्मा गांधी द्वारा नमक आंदोलन वर्ष 1930 में चलाया गया था।
कारण (R) : महात्मा गांधी का उद्देश्य था कि गरीबों को नमक मुफ्त उपलब्ध हो। उपर्युक्त वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
कूट :
कारण (R) : महात्मा गांधी का उद्देश्य था कि गरीबों को नमक मुफ्त उपलब्ध हो। उपर्युक्त वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
कूट :
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Pre) 2003
U.P.P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(c)
कथन (A) सही है क्योंकि नमक आंदोलन वास्तव में वर्ष 1930 में चलाया गया था, परंतु कारण (R) गलत है क्योंकि गांधीजी का मूल उद्देश्य गरीबों को मुफ्त नमक दिलाना नहीं, बल्कि नमक कर तथा सरकार के नमक एकाधिकार को समाप्त कराना था। आंदोलन शुरू करने से पहले गांधीजी ने वायसराय इरविन के समक्ष 11 मांगें रखी थीं, जिनमें नमक कर की समाप्ति प्रमुख थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इन 11 मांगों में नमक कर समाप्त करने के अतिरिक्त लगान में कमी, सैन्य व्यय में कटौती और रुपये की विनिमय दर में सुधार जैसी मांगें भी शामिल थीं। यदि सरकार ये मांगें मान लेती, तो गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को टाल देने की बात भी कही थी।
19. दांडी यात्रा कितने दिन चली थी?
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(c)
गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से प्रस्थान कर 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर नमक कानून भंग किया; इस प्रकार यह यात्रा कुल 24 दिनों तक चली, जिसमें लगभग 390 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यात्रा के दौरान गांधीजी प्रतिदिन औसतन लगभग 16-19 किलोमीटर पैदल चलते थे और रास्ते में पड़ने वाले लगभग 24 गांवों में रुककर सभाएं कीं। यात्रा की समाप्ति तक प्रारंभिक 78 सत्याग्रहियों की संख्या बढ़कर हजारों में पहुंच गई थी, क्योंकि रास्ते में कई लोग इसमें शामिल होते गए।
20. गांधीजी ने जिस विदेशी पत्रकार को दांडी मार्च के समय अपने साबरमती आश्रम में ठहराया, वह था-
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2003
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2003
उत्तर-(b)
अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर को गांधीजी ने दांडी मार्च के दौरान अपने साबरमती आश्रम में ठहराया था। बाद में धरसना सत्याग्रह के दौरान हुई पुलिस की बर्बरता का आंखों देखा विवरण लिखते हुए मिलर ने बताया कि अपने अठारह वर्षों के पत्रकारिता-जीवन में उन्होंने अनेक दंगे और विद्रोह देखे, परंतु धरसना जैसा भयावह दृश्य उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वेब मिलर की यह रिपोर्ट यूनाइटेड प्रेस के माध्यम से दुनियाभर के 1300 से अधिक समाचार-पत्रों में प्रकाशित हुई थी, जिसने ब्रिटिश शासन की क्रूरता को अंतरराष्ट्रीय जनमत के सामने उजागर किया। इस रिपोर्ट को अमेरिकी कांग्रेस में भी पढ़ा गया था।
21.नमक सत्याग्रह के समय गांधीजी के गिरफ्तार हो जाने के बाद आंदोलन के नेता के रूप में उनका स्थान किसने लिया?
U.P. U.D.A. / L.D.A. (Pre) 2006
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(a)
6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ने के बाद हुई गांधीजी की गिरफ्तारी पर आंदोलन का नेतृत्व अब्बास तैयबजी के हाथों में आ गया। इस आंदोलन में महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी निभाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अब्बास तैयबजी वकालत के पेशे से जुड़े गुजरात के एक प्रतिष्ठित नेता और गांधीजी के घनिष्ठ सहयोगियों में गिने जाते थे। उनकी भी गिरफ्तारी के बाद आंदोलन का नेतृत्व सरोजिनी नायडू ने संभाला, जिन्होंने धरसना सत्याग्रह का नेतृत्व किया।
22. इनमें से किसने अप्रैल, 1930 में नमक कानून तोड़ने के लिए तंजौर तट पर एक अभियान संगठित किया था?
I.A.S. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
अप्रैल 1930 में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने तमिलनाडु में तंजौर के समुद्री तट पर नमक कानून तोड़ने के लिए त्रिचिनापल्ली से वेदारण्यम तक की नमक यात्रा का आयोजन किया। 30 अप्रैल 1930 को उनकी गिरफ्तारी के बावजूद उनके समर्थकों ने यह आंदोलन जारी रखा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सी. राजगोपालाचारी आगे चलकर स्वतंत्र भारत के एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल बने। उनकी वेदारण्यम नमक यात्रा को दक्षिण भारत में दांडी मार्च के समानांतर सबसे प्रमुख नमक सत्याग्रह माना जाता है।
23. गांधी के दांडी मार्च के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
U.P. P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(c)
गांधीजी ने अपने साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से चुने हुए सत्याग्रहियों के साथ 12 मार्च 1930 को दांडी की ओर कूच किया। 24 दिनों की पैदल यात्रा के बाद वे 5 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचे और अगले दिन 6 अप्रैल 1930 को मुट्ठीभर नमक उठाकर कानून का प्रतीकात्मक उल्लंघन किया। नमक को आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा इसलिए बनाया गया क्योंकि इस आवश्यक वस्तु पर लगा सरकारी कर गरीबों पर सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव डालता था। विकल्प (c) में प्रयुक्त शब्द ‘नमक बनाया’ तकनीकी रूप से सटीक नहीं है, क्योंकि गांधीजी ने समुद्री जल उबालकर नमक का निर्माण नहीं किया था, बल्कि तट पर प्राकृतिक रूप से जमा नमक की डली उठाकर प्रतीकात्मक रूप से कानून तोड़ा था; इसलिए यही कथन असत्य माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक’ (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) के अनुसार इस यात्रा में गांधीजी सहित कुल 81 सत्याग्रही शामिल थे, जबकि अधिकांश इतिहास की पुस्तकों में यह संख्या 78 बताई गई है। यात्रा के दौरान गांधीजी रास्ते में पड़ने वाले गांवों में रुककर सभाएं करते और लोगों को सत्याग्रह व स्वदेशी का संदेश देते थे।
24.उस विदेशी पत्रकार का नाम बताइए, जिसने धरसना साल्ट वर्क्स पर सत्याग्रह के बारे में समाचार दिए-
U.P.P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(c)
धरसना साल्ट वर्क्स पर हुए सत्याग्रह और वहां पुलिस द्वारा की गई बर्बरता की रिपोर्टिंग अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने की थी, जिनकी रिपोर्ट दुनियाभर में प्रकाशित होकर ब्रिटिश शासन की निंदा का कारण बनी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: धरसना सत्याग्रह 21 मई 1930 को सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में हुआ था, जब सत्याग्रही बिना किसी प्रतिरोध के पुलिस की लाठियां सहते रहे। इस घटना को अहिंसक सविनय अवज्ञा का एक प्रतीकात्मक उदाहरण माना जाता है, जिसने अंतरराष्ट्रीय जनमत को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पक्ष में मोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
25. महात्मा गांधी धरसना नमक गोदाम पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के धावे के समय कहां थे?
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
धरसना नमक गोदाम पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के धावे से पहले ही, 5 मई 1930 को महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर यरवदा जेल भेज दिया गया था। उनकी अनुपस्थिति में पहले अब्बास तैयबजी ने और उनकी गिरफ्तारी के बाद सरोजिनी नायडू ने 21 मई 1930 को धरसना नमक गोदाम पर हुए धावे का नेतृत्व किया, जिसका विस्तृत विवरण अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने प्रस्तुत किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यरवदा जेल पुणे में स्थित है, जहां गांधीजी को इससे पहले भी 1922 के असहयोग आंदोलन के बाद रखा गया था। धरसना सत्याग्रह की घटना को कई अंतरराष्ट्रीय लेखकों और इतिहासकारों ने अहिंसक प्रतिरोध की सबसे प्रभावशाली मिसालों में गिना है।
26. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन महात्मा गांधी की दांडी यात्रा के विषय में असत्य है?
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(d)
दांडी यात्रा एक संपूर्ण पैदल यात्रा थी, जो साबरमती आश्रम से आरंभ होकर दांडी में संपन्न हुई और कुल 24 दिनों में पूरी हुई। परंतु इसकी शुरुआत 15 मार्च 1930 को नहीं, बल्कि 12 मार्च 1930 को हुई थी, इसलिए विकल्प (d) असत्य है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यात्रा के दौरान गांधीजी ने रास्ते में पड़ने वाले लगभग दो दर्जन गांवों में जनसभाएं कर लोगों को स्वदेशी अपनाने और शराबबंदी का संदेश दिया। उनकी यह यात्रा ‘दांडी पदयात्रा’ के रूप में राष्ट्रीय स्मृति में अमर हो गई।
27. निम्नलिखित में से कौन ‘दांडी मार्च’ में महात्मा गांधी के साथ था ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(b)
दांडी मार्च के दौरान अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर गांधीजी के साथ मौजूद थे, जबकि एच.एन. ब्रेल्सफोर्ड, जी. स्लोकोम्ब और जैम्स पेटर्सन इस यात्रा में सम्मिलित नहीं थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वेब मिलर यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल के संवाददाता थे, और बाद में धरसना सत्याग्रह की उनकी रिपोर्टिंग ने उन्हें विश्वभर में प्रसिद्धि दिलाई। दांडी मार्च को कवर करने के लिए दर्जनों भारतीय व विदेशी पत्रकार साथ चल रहे थे, जिससे यह यात्रा शुरू से ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रही।
28. आचार्य विनोबा भावे किस आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रथम बार गिरफ्तार हुए थे?
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
आचार्य विनोबा भावे गांधीजी के अत्यंत निकट सहयोगियों में से एक थे और उन्होंने गांधीजी द्वारा संचालित अनेक आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। वर्ष 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के दौरान वे पहली बार गिरफ्तार हुए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी ने विनोबा भावे को अपना ‘आध्यात्मिक उत्तराधिकारी’ माना और 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह में उन्हें सबसे पहले सत्याग्रही के रूप में चुना। स्वतंत्रता के बाद विनोबा भावे ने भूदान आंदोलन की शुरुआत की, जिसके तहत उन्होंने भूमिहीनों के लिए स्वैच्छिक भूमि-दान का अभियान चलाया।
29. सन् 1930 में अंग्रेज सरकार के विरुद्ध, प्रसिद्ध ‘पेशावर कांड’ का नायक कौन था?
Uttarakhand U.D.A. / L.D.A. (Mains) 2007
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान पेशावर में हुए प्रसिद्ध ‘पेशावर कांड’ के नायक वीर चंद्रसिंह गढ़वाली थे, जिन्होंने गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों का नेतृत्व करते हुए निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से साफ इंकार कर दिया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस घटना के लिए वीर चंद्रसिंह गढ़वाली को सैन्य अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में घटा दिया गया। उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खां के वर्षों के सामाजिक कार्य के कारण ही यहां सविनय अवज्ञा आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला था।
30. ‘लाल कुर्ती’ आंदोलन के नेता थे-
Uttarakhand U.D.A. / L.D.A. (Pre) 2007
U.P. Lower Sub.(Pre) 2009
U.P. Lower Sub.(Pre) 2009
उत्तर-(b)
‘लाल कुर्ती’ (खुदाई खिदमतगार) आंदोलन का नेतृत्व खान अब्दुल गफ्फार खां ने किया था, जो उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में पठान राष्ट्रवादी एकता और ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खान अब्दुल गफ्फार खां को ‘सीमांत गांधी’ की उपाधि से जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने अहिंसा के सिद्धांत को कबायली पख्तून समाज में गहराई से स्थापित किया। आजादी के बाद वे पाकिस्तान में रहे और वहां लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे, जिसके चलते उन्हें लंबे समय तक जेल में भी रहना पड़ा।
31. सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) की असफलता के बाद गांधीजी ने महत्व दिया-
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
सविनय अवज्ञा आंदोलन की असफलता के बाद गांधीजी ने रचनात्मक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी। सितंबर 1932 में उन्होंने हरिजन कल्याण हेतु ‘अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग’ की स्थापना की और ‘हरिजन’ नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन शुरू किया। अक्टूबर 1934 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से अस्थायी रूप से हटकर अपना समय हरिजनोत्थान को समर्पित करने का निश्चय किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी दौर में गांधीजी ने खादी, ग्रामोद्योग और बुनियादी शिक्षा जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों पर भी विशेष बल दिया, जिन्हें वे स्वराज प्राप्ति की दीर्घकालिक नींव मानते थे। 1936 में उन्होंने वर्धा के निकट सेवाग्राम आश्रम की स्थापना की, जो उनकी रचनात्मक गतिविधियों का केंद्र बना।
32. भारतीय स्वाधीनता संघर्ष के दौरान रेड शर्ट्स के नाम से भी पहचाने जाने वाले खुदाई खिदमतगारों ने आह्वान किया-
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खां के नेतृत्व में स्थापित ‘खुदाई खिदमतगार’ संगठन को इसकी लाल पोशाक के कारण ‘लाल कुर्ती’ (Red Shirts) भी कहा जाता था। इस संगठन ने पठान क्षेत्रीय राष्ट्रवादी एकता और ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष का आह्वान किया तथा श्रमजीवियों की स्थिति सुधारने की मांग उठाई। उल्लेखनीय है कि जब अन्य प्रांतों में मुसलमान सत्याग्रह आंदोलन से प्रायः दूर रहे, तब सीमा प्रांत के मुसलमानों ने गफ्फार खां के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खुदाई खिदमतगार संगठन की औपचारिक स्थापना वर्ष 1929 में हुई थी, और इसके सदस्य पूर्णतः अहिंसा का पालन करते हुए कार्य करते थे। यह संगठन बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गया और स्वतंत्रता संग्राम का एक अभिन्न अंग बन गया।
33. जियातरंग आंदोलन कहां प्रारंभ हुआ?
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान मणिपुर की जनजातियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। यहां नगा जनजाति की वीरांगना गैडिनल्यू के नेतृत्व में चलाए गए इस आंदोलन को ‘जियातरंग आंदोलन’ के नाम से जाना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रानी गैडिनल्यू को मात्र 16 वर्ष की आयु में अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था और वे लंबे समय तक जेल में रहीं। जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें ‘पहाड़ों की रानी’ (Rani of the Hills) की उपाधि दी थी, और स्वतंत्र भारत सरकार ने बाद में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।
34. 1929 में ‘खुदाई खिदमतगार’ को किसने संगठित किया?
Bihar P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
वर्ष 1929 में खान अब्दुल गफ्फार खां ने उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में ‘खुदाई खिदमतगार’ नामक स्वयंसेवी संगठन की स्थापना की, जिसे इसकी विशिष्ट लाल वर्दी के कारण ‘लाल कुर्ती’ भी कहा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह संगठन कांग्रेस के साथ मिलकर सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय रहा और इसके सदस्यों ने अहिंसक प्रतिरोध की मिसाल कायम की। पेशावर में 1930 में गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों द्वारा निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इंकार करने की घटना भी इसी क्षेत्र में खुदाई खिदमतगारों की सक्रियता का परिणाम मानी जाती है।
35. प्रभावती देवी किस क्षेत्र की स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थीं?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की अनेक महिलाओं ने उल्लेखनीय योगदान दिया, जिनमें सरला देवी, प्रभावती देवी, राजवंशी देवी, सुनीति देवी और राधिका देवी प्रमुख थीं। प्रभावती देवी पटना की प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्रभावती देवी का विवाह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण से हुआ था, और वे स्वयं भी सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से सम्मिलित रहीं। उन्होंने गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों, विशेषकर खादी और हरिजन कल्याण से जुड़े कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
36.लाल कुर्ती दल संगठित किया गया था-
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(c)
‘लाल कुर्ती’ (खुदाई खिदमतगार) दल मुख्य रूप से अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालने और उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में पठान राष्ट्रवादी एकता स्थापित करने के उद्देश्य से संगठित किया गया था, न कि किसी अलग पख्तूनिस्तान, पाकिस्तान निर्माण या साम्यवादी राज्य की स्थापना के लिए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस संगठन के सदस्य पूर्णतः अहिंसा के सिद्धांत का पालन करते थे, जो उस दौर के कबायली समाज में एक असाधारण उपलब्धि मानी जाती है। बंटवारे के समय खान अब्दुल गफ्फार खां और उनके अनुयायियों ने अविभाजित भारत के पक्ष में अपनी राय रखी थी।
37. बेगूसराय के चौकीदारी टैक्स के विरुद्ध आंदोलन, एक हिस्सा था-
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
दिसंबर 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उत्तरी बिहार के सारण जिले में चौकीदारी टैक्स के विरोध में प्रदर्शन हुआ, जिसे प्रदर्शनकारियों ने दमन की परवाह किए बिना जारी रखा। अगले महीने बेगूसराय में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एकत्रित भारी भीड़ ने उपमंडल अधिकारी को एक गड्ढे में धकेल दिया था, और गोलीबारी के बाद ही वह वहां से हटी। यह आंदोलन सविनय अवज्ञा आंदोलन का ही एक हिस्सा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चौकीदारी टैक्स ग्रामीण स्तर पर वसूला जाने वाला एक स्थानीय कर था, जिसका उपयोग गांव की चौकीदारी व्यवस्था के लिए होता था; इसे ब्रिटिश दमनकारी तंत्र का प्रतीक मानकर बड़े पैमाने पर इसका बहिष्कार किया गया। बिहार में इस प्रकार के स्थानीय कर-विरोधी आंदोलनों ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को ग्रामीण क्षेत्रों तक व्यापक रूप से फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
38.गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया था-
U.P.P.C.S. (Spl) (Pre) 2004
उत्तर-(c)
सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान पेशावर में गढ़वाल रेजीमेंट के सिपाहियों ने वीर चंद्रसिंह गढ़वाली के नेतृत्व में निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने से इंकार कर दिया था। इस क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय खान अब्दुल गफ्फार खां के कार्यों के परिणामस्वरूप खुदाई खिदमतगारों (लाल कुर्ती) का संगठन तैयार हुआ था, जिसकी इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह घटना अप्रैल 1930 में घटी थी और इसे ब्रिटिश सेना में अनुशासनहीनता का एक दुर्लभ व साहसिक उदाहरण माना जाता है। इस घटना के लिए वीर चंद्रसिंह गढ़वाली को सैन्य न्यायालय द्वारा कड़ी सजा सुनाई गई, परंतु यह घटना भारतीय सैनिकों में राष्ट्रवादी चेतना के उभार का प्रतीक बन गई।
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