रौलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड MCQ प्रश्न | UPSC

भारतीय इतिहास आधुनिक भारत रौलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड MCQ प्रश्न
1.रौलेट सत्याग्रह के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(1) रौलेट अधिनियम, ‘सेडिशन कमेटी’ की सिफारिश पर आधारित था।
(2) रौलेट सत्याग्रह में, गांधीजी ने होमरूल लीग का उपयोग करने का प्रयास किया।
(3) साइमन कमीशन के आगमन के विरुद्ध हुए प्रदर्शन रौलेट सत्याग्रह के साथ-साथ हुए।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही
I.A.S. (Pre) 2015
उत्तर-चुनिए ।
सेडिशन (राजद्रोह) समिति का गठन वर्ष 1917 में न्यायमूर्ति सिडनी रौलेट की अध्यक्षता में हुआ था, और इसी समिति की सिफारिशों के आधार पर रौलेट अधिनियम बनाया गया, इसलिए कथन (1) सही है। गांधीजी ने इस अधिनियम के विरोध में सत्याग्रह सभा का गठन किया और होमरूल आंदोलन से जुड़े लोगों को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया, अतः कथन (2) भी सही है। साइमन कमीशन भारत 3 फरवरी 1928 को पहुंचा था, जबकि रौलेट सत्याग्रह 1919 में हुआ था, यानी दोनों घटनाओं के बीच लगभग नौ वर्षों का अंतर है, इसलिए कथन (3) गलत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रौलेट एक्ट के विरोध के दौरान ही 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ, जिसने इस आंदोलन को और अधिक तीव्र बना दिया।
2.जब रौलेट एक्ट पारित हुआ था, उस समय भारत का वायसराय कौन था?
(a) लॉर्ड इर्विन
(b) लॉर्ड रीडिंग
(c) लॉर्ड चेम्सफोर्ड
(d) लॉर्ड वेवेल
I.A.S. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
लॉर्ड चेम्सफोर्ड 1916 से 1921 तक भारत के वायसराय रहे, और उन्हीं के शासनकाल में मार्च 1919 में रौलेट एक्ट पारित हुआ। उल्लेखनीय है कि लॉर्ड चेम्सफोर्ड के कार्यकाल में ही मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919) भी लागू हुए, जिसके माध्यम से प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy) की व्यवस्था शुरू की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उनके ही कार्यकाल में जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) हुआ, जिसकी जिम्मेदारी तत्कालीन पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर पर भी डाली जाती है।
3.अखिल भारतीय राजनीति में गांधी का पहला साहसिक कदम था-
(a) असहयोग आंदोलन
(b) रौलेट सत्याग्रह
(c) चंपारन आंदोलन
(d) दांडी यात्रा
I.A.S. (Pre) 1999
उत्तर-(b)
गांधीजी का राष्ट्रीय स्तर पर पहला बड़ा आंदोलन रौलेट एक्ट के विरुद्ध 1919 में शुरू किया गया सत्याग्रह था, जिसमें उन्होंने होमरूल लीग, खिलाफत कमेटी और सत्याग्रह सभा- इन तीन राजनीतिक मंचों का सहारा लिया। इससे पहले चंपारन (1917), खेड़ा (1918) और अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918) में उनकी भागीदारी क्षेत्रीय स्तर तक सीमित थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रौलेट सत्याग्रह के दौरान ही 6 अप्रैल 1919 को अखिल भारतीय हड़ताल (हरताल) का आयोजन हुआ, जिसे गांधीजी के नेतृत्व में पहला अखिल भारतीय जन-आंदोलन माना जाता है। दूसरा तथ्य यह है कि इसी आंदोलन के क्रम में पंजाब में हुई हिंसा और दमन ने आगे चलकर जलियांवाला बाग त्रासदी को जन्म दिया।
4.रौलेट एक्ट के विरोध में किसने लगान न देने का आंदोलन चलाने का सुझाव दिया था?
(a) अबुल कलाम आजाद
(b) गांधीजी
(c) रबींद्रनाथ टैगोर
(d) स्वामी श्रद्धानंद
U.P.P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(d)
रौलेट एक्ट के विरोध में आर्य समाज से जुड़े स्वामी श्रद्धानंद ने भू-लगान न देने (नो-रेवेन्यू कैम्पेन) जैसे प्रत्यक्ष असहयोग के उपाय अपनाने का सुझाव दिया था। यह कानून इतना कठोर था कि इसे “बिना वकील, बिना दलील, बिना अपील” का कानून कहा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वामी श्रद्धानंद दिल्ली में रौलेट एक्ट विरोधी प्रदर्शनों के प्रमुख नेताओं में से एक थे और उन्होंने जामा मस्जिद से हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीकात्मक भाषण भी दिया था। दूसरा तथ्य यह है कि रबींद्रनाथ टैगोर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में अपनी “नाइटहुड” की उपाधि वापस कर दी थी, जो इसी दौर की एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया थी।
5.रौलेट एक्ट का लक्ष्य था-
(a) युद्ध प्रयासों को अनिवार्य आर्थिक समर्थन
(b) बिना मुकदमा चलाए बंदी बनाना और मुकदमों की सुनवाई संक्षिप्त प्रक्रिया द्वारा
(c) खिलाफत आंदोलन का दमन
(d) प्रेस स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाना
I.A.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
रौलेट एक्ट के माध्यम से ब्रिटिश सरकार को यह शक्ति मिली कि वह किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना खुली अदालती सुनवाई के, संक्षिप्त (समरी) प्रक्रिया द्वारा ही दंडित कर सके और बिना मुकदमा चलाए लंबे समय तक हिरासत में रख सके। यह कानून प्रथम विश्व युद्ध के बाद भी देश में बढ़ती क्रांतिकारी गतिविधियों, विशेषकर पंजाब और बंगाल में, को दबाने के इरादे से लाया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम को औपचारिक रूप से अराजकतावादी और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम, 1919 (Anarchical and Revolutionary Crimes Act) कहा जाता है। दूसरा तथ्य यह है कि इसी अधिनियम के विरोध में हुए आंदोलनों के दबाव के कारण ब्रिटिश सरकार को बाद में इसे निरस्त करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
6.भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, रौलेट एक्ट ने किस कारण से सार्वजनिक रोष उत्पन्न किया?
(a) इसने धर्म की स्वतंत्रता को कम किया
(b) इसने भारतीय परंपरागत शिक्षा को दबाया
(c) इसने लोगों को बिना मुकदमा चलाए जेल भेजने के लिए अधिकृत किया
(d) इसने श्रमिक संघ (ट्रेड यूनियन) की गतिविधियों को नियंत्रित किया
I.A.S. (Pre) 2009
उत्तर-(c)
रौलेट एक्ट के विरुद्ध जनता में भारी गुस्सा इस कारण फैला क्योंकि इसके तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को संदेह मात्र के आधार पर, बिना खुली अदालती सुनवाई के, अनिश्चितकाल तक जेल में बंद रख सकती थी। इस अधिनियम की पृष्ठभूमि न्यायमूर्ति सिडनी रौलेट की अध्यक्षता वाली समिति की 1918 में दी गई रिपोर्ट से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य देश में फैल रही क्रांतिकारी हिंसा पर नियंत्रण करना बताया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस कानून का विरोध केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुस्लिम लीग और अन्य उदारवादी नेताओं ने भी इसकी आलोचना की। दूसरा तथ्य यह है कि इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में इस विधेयक के विरोध में मोहम्मद अली जिन्ना और अन्य भारतीय सदस्यों ने इस्तीफा देकर अपना विरोध जताया था।
7.रौलेट एक्ट लाने का क्या प्रयोजन था?
(a) भूमि-सुधार
(b) राष्ट्रीय एवं क्रांतिकारी गतिविधियों पर रोक लगाना
(c) ‘बैलेंस ऑफ ट्रेड’ को ठीक करना
(d) द्वितीय विश्व युद्ध के बंदियों पर मुकदमा चलाना
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
रौलेट एक्ट का मुख्य प्रयोजन देश में फैल रही राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी गतिविधियों, खासकर बंगाल और पंजाब में हो रही हिंसक कार्रवाइयों, पर सख्ती से रोक लगाना था। ब्रिटिश सरकार ने इसके लिए मार्च 1919 में इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में विधेयक पारित कराया, जिसे जनता ने “काला कानून” कहकर पुकारा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह विधेयक उस समय पारित हुआ जब प्रथम विश्व युद्ध हाल ही में समाप्त हुआ था और भारतीयों को उम्मीद थी कि युद्ध में सहयोग के बदले उन्हें अधिक राजनीतिक अधिकार मिलेंगे, परंतु इसके विपरीत यह दमनकारी कानून लाया गया। दूसरा तथ्य यह है कि गांधीजी ने इस कानून के विरोध में ‘सत्याग्रह सभा’ की स्थापना की, जो उनके नेतृत्व में बना पहला अखिल भारतीय राजनीतिक संगठन था।
8.रौलेट एक्ट भारत में लागू किया गया था-
(a) सन् 1909 में
(b) सन् 1919 में
(c) सन् 1930 में
(d) सन् 1942 में
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
रौलेट एक्ट मार्च 1919 में इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा पारित किया गया था और उसी वर्ष यह कानून के रूप में लागू हुआ। ध्यान देने योग्य है कि सन् 1909 में मॉर्ले-मिंटो सुधार लाया गया था, सन् 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी यात्रा हुई थी, जबकि सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ था- इस प्रकार इन वर्षों को रौलेट एक्ट से जोड़ना ऐतिहासिक रूप से गलत होगा।
9.’रौलेट एक्ट’ किस वायसराय के काल में पारित हुआ था?
(a) लॉर्ड हार्डिंग II
(b) लॉर्ड रीडिंग
(c) लॉर्ड चेम्सफोर्ड
(d) लॉर्ड मिंटो II
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
उत्तर-(c)
रौलेट एक्ट लॉर्ड चेम्सफोर्ड के वायसराय काल (1916-1921) में मार्च 1919 में पारित हुआ था। इसी कार्यकाल में मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार भी लाए गए, जिनके अंतर्गत भारत शासन अधिनियम 1919 के माध्यम से प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली स्थापित की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लॉर्ड चेम्सफोर्ड का पूरा कार्यकाल राजनीतिक उथल-पुथल से भरा रहा, जिसमें रौलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड और असहयोग आंदोलन जैसी बड़ी घटनाएं शामिल हैं। दूसरा तथ्य यह है कि लॉर्ड हार्डिंग II के कार्यकाल (1910-1916) में ही दिल्ली को भारत की राजधानी बनाया गया था, जो इस प्रश्न के भ्रामक विकल्प से जुड़ा एक अलग ऐतिहासिक संदर्भ है।
10.रौलेट एक्ट का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विरोध किया, क्योंकि इसका लक्ष्य था-
(a) वैयक्तिक स्वतंत्रता को सीमित करना
(b) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को प्रतिबंधित करना
(c) सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को विस्तृत करना
(d) देशद्रोह के आरोप में राष्ट्रीय नेताओं को बंदी बनाना
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने रौलेट एक्ट का तीव्र विरोध इसलिए किया क्योंकि यह कानून किसी भी नागरिक की वैयक्तिक स्वतंत्रता पर बिना न्यायिक प्रक्रिया के सीधा हस्तक्षेप करता था, जिससे यह स्वतंत्रता और न्याय के मौलिक सिद्धांतों के विरुद्ध माना गया। मार्च 1919 में पारित यह विधेयक सरकार को असीमित अधिकार देता था कि वह किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना अभियोग और अपील के अवसर के हिरासत में रख सके।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस कानून के विरोध में महात्मा गांधी ने 6 अप्रैल 1919 को अखिल भारतीय हड़ताल का आह्वान किया, जिसे भारत का पहला राष्ट्रव्यापी सविनय प्रतिरोध माना जाता है। दूसरा तथ्य यह है कि इस विरोध आंदोलन के दमन के क्रम में ही पंजाब में मार्शल लॉ लागू कर जलियांवाला बाग हत्याकांड को अंजाम दिया गया, जिसने ब्रिटिश शासन की वैधता पर गहरा प्रश्न खड़ा कर दिया।
11.जलियांवाला बाग में प्रदर्शन के लिए क्यों लोग जमा हुए थे?
(a) गांधीजी और लाजपत राय की गिरफ्तारी के प्रति विरोध प्रदर्शन करने
(b) किचलू तथा सत्यपाल के बंदी बनाने के विरोध में प्रदर्शन करने
(c) बैसाखी की प्रार्थना के लिए
(d) पंजाब सरकार के अमानवीय कार्यकलापों के प्रति विरोध 2 प्रकट करने
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जुटी भीड़ का मुख्य उद्देश्य पंजाब के दो प्रमुख जनप्रिय नेताओं डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी का विरोध करना था। ये दोनों नेता रौलेट एक्ट विरोधी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, जिसके चलते ब्रिटिश प्रशासन ने उन्हें निर्वासित कर दिया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह सभा बैसाखी के पर्व के दिन हुई थी, जिसके कारण वहां पंजाब के दूर-दराज इलाकों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और व्यापारी जुटे थे, जिन्हें मार्शल लॉ की घोषणा की जानकारी भी नहीं थी। दूसरा तथ्य यह है कि इस सभा से कुछ दिन पहले ही पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर ने अमृतसर में सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसका उल्लंघन मानते हुए जनरल डायर ने गोली चलाने का आदेश दिया।
12.द अनार्किकल एंड रिवोल्यूशनरी क्राइम एक्ट, 1919 को सामान्य बोलचाल में कहा जाता था-
(a) रौलेट एक्ट
(b) पिट्स इंडिया एक्ट
(c) इंडियन आर्म्स एक्ट
(d) अलबर्ट बिल
I.A.S (Pre) 1996
उत्तर-(a)
अनार्किकल एंड रिवोल्यूशनरी क्राइम एक्ट, 1919 का आम बोलचाल का नाम रौलेट एक्ट था, जो इसकी सिफारिश करने वाली समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सिडनी रौलेट के नाम पर रखा गया। इस समिति का गठन 1917 में देश में बढ़ रही क्रांतिकारी हिंसा, विशेषकर बंगाल और पंजाब में, की जांच के लिए किया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस अधिनियम के विरोध में महात्मा गांधी ने सत्याग्रह सभा की स्थापना की और 6 अप्रैल 1919 को अखिल भारतीय हड़ताल का आयोजन किया। दूसरा तथ्य यह है कि इस कानून के विरोध की पृष्ठभूमि में ही पंजाब में हुए दमन ने अंततः जलियांवाला बाग जैसी दुखद घटना को जन्म दिया।
13.30 मई, 1919 को अपना अलंकरण (Honour) भारत सरकार को लौटाने वाले व्यक्ति थे-
(a) जमनालाल बजाज
(b) तेज बहादुर सप्रू
(c) महात्मा गांधी
(d) रबींद्रनाथ टैगोर
U.P.P.C.S. (Pre) 2001
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
जलियांवाला बाग नरसंहार से गहरे आहत होकर रबींद्रनाथ टैगोर ने 30 मई 1919 को ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदत्त ‘नाइटहुड’ की उपाधि वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड को पत्र लिखकर लौटा दी थी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि इस तरह के अमानवीय कृत्य के बाद सम्मान की उपाधियां अपमानजनक प्रतीत होती हैं और वे अपने देशवासियों के साथ ही खड़ा रहना चाहते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टैगोर को यह नाइटहुड उपाधि वर्ष 1915 में दी गई थी, और इसे लौटाने का यह कदम ब्रिटिश शासन के प्रति भारतीय बुद्धिजीवियों के बढ़ते असंतोष का प्रतीक बना। दूसरा तथ्य यह है कि इसी घटना के विरोध में सर शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारी परिषद से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
14.जनरल डायर का नाम किस घटना से जुड़ा हुआ है?
(a) ब्लैकहोल कलकत्ता
(b) रानी दुर्गावती की लड़ाई
(c) 1857 का संग्राम
(d) जलियांवाला बाग
M.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(d)
ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर का नाम जलियांवाला बाग हत्याकांड से जुड़ा है, जिसने 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में निहत्थी शांतिपूर्ण भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया था। डायर ने बिना किसी चेतावनी के लगभग दस मिनट तक लगातार फायरिंग कराई और बाग के एकमात्र निकास द्वार को भी सैनिकों से अवरुद्ध कर दिया था, जिससे भागने का कोई रास्ता नहीं बचा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस नरसंहार की जांच के लिए ब्रिटिश सरकार ने हंटर कमीशन का गठन किया, जिसकी रिपोर्ट में डायर के कृत्य की आलोचना की गई, लेकिन उसे किसी गंभीर सजा का सामना नहीं करना पड़ा। दूसरा तथ्य यह है कि इस नरसंहार का बदला 1940 में क्रांतिकारी उधम सिंह ने लंदन में पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर की हत्या करके लिया था।
15.जलियांवाला बाग कत्लेआम किस शहर में हुआ?
(a) मेरठ
(b) आगरा
(c) अमृतसर
(d) लाहौर
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
जलियांवाला बाग हत्याकांड पंजाब प्रांत के अमृतसर शहर में 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन हुआ था। यह स्थान स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) के निकट स्थित एक बंद मैदान था, जिसमें प्रवेश और निकास के लिए केवल एक संकरा मार्ग था, जिसने नरसंहार के दौरान भीड़ के भागने की संभावना को लगभग समाप्त कर दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वर्तमान में इस स्थान पर भारत सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय स्मारक (जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल) स्थापित किया गया है, जिसका उद्घाटन 1961 में हुआ था। दूसरा तथ्य यह है कि इस घटना ने अमृतसर शहर को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थान के रूप में स्थापित कर दिया।
16.वर्ष 1919 भारतीय इतिहास से संबंधित है-
(a) कलकत्ता से दिल्ली में राजधानी के बदले जाने से
(b) जलियांवाला बाग त्रासदी से
(c) बंगाल-विभाजन से
(d) खिलाफत आंदोलन से
38th B.P.S.C. (Pre) 1992
उत्तर-(b)
वर्ष 1919 भारतीय इतिहास में जलियांवाला बाग त्रासदी के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है, जो 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में घटित हुई थी। इसी वर्ष मार्च में रौलेट एक्ट पारित हुआ था और इसके साथ ही मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के आधार पर भारत शासन अधिनियम 1919 भी लाया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कलकत्ता से दिल्ली राजधानी परिवर्तन वर्ष 1911 में, बंगाल विभाजन वर्ष 1905 में और खिलाफत आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1919 के अंत में हुई, परंतु यह प्रश्न विशेष रूप से जलियांवाला बाग त्रासदी की पहचान कराता है क्योंकि यही 1919 की सबसे प्रभावशाली घटना मानी जाती है।
17.जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ-
(a) 5 मई, 1918
(b) 1 अप्रैल, 1919
(c) 13 अप्रैल, 1919
(d) 29 अप्रैल, 1919
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(c)
जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के पावन पर्व के दिन हुआ था, जब अमृतसर में जुटी एक शांतिपूर्ण सभा पर जनरल डायर के आदेश पर गोलियां चलाई गईं। बैसाखी का दिन पंजाब में फसल कटाई का त्योहार होने के साथ ही सिख समुदाय के लिए धार्मिक रूप से भी विशेष महत्व रखता है, जिसके कारण उस दिन बाग में सामान्य से अधिक लोग एकत्रित हुए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस घटना के तुरंत बाद पंजाब में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और कई स्थानों पर कठोर दमनकारी कार्रवाइयां, जैसे ‘रेंगने का आदेश’ (क्रॉलिंग ऑर्डर), लागू की गईं। दूसरा तथ्य यह है कि इस नरसंहार की स्मृति में हर वर्ष 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
18.काफी संख्या में लोग अमृतसर के जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को एकत्रित हुए थे, गिरफ्तारी के विरोध में-
(a) स्वामी श्रद्धानंद और मजहरुल हक
(b) मदन मोहन मालवीय और मोहम्मद अली जिन्ना
(c) महात्मा गांधी और अबुल कलाम आजाद
(d) डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
अमृतसर में जलियांवाला बाग में जुटी विशाल भीड़ का उद्देश्य पंजाब के लोकप्रिय नेताओं डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी एवं निर्वासन के विरुद्ध शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना था। इस सभा पर जनरल आर.ई.एच. डायर के आदेश पर गोलियां चलवाई गईं, जिसमें सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग मारे गए, जबकि गैर-सरकारी अनुमानों में मृतकों की संख्या लगभग 1000 तक बताई जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस घटना के विरोध में रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी नाइटहुड की उपाधि लौटा दी और सर शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारी परिषद से इस्तीफा दे दिया। दूसरा तथ्य यह है कि इस नरसंहार की जांच के लिए गठित हंटर कमीशन की रिपोर्ट के समानांतर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी अपनी एक स्वतंत्र जांच समिति बनाई थी, जिसमें महात्मा गांधी भी शामिल थे।
19.जलियांवाला बाग नरसंहार किस गांधीवादी सत्याग्रह के संबंध में हुआ ?
(a) स्वदेशी सत्याग्रह
(b) रौलेट सत्याग्रह
(c) बारदोली सत्याग्रह
(d) वैयक्तिक सत्याग्रह
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
64th B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(b)
जलियांवाला बाग नरसंहार रौलेट सत्याग्रह की पृष्ठभूमि में हुआ था, जो मार्च 1919 में पारित रौलेट एक्ट के विरोध में महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाया गया देशव्यापी आंदोलन था। गांधीजी ने इस सत्याग्रह के लिए होमरूल लीग, खिलाफत कमेटी और स्वयं स्थापित सत्याग्रह सभा का सहयोग लिया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बारदोली सत्याग्रह, जो भू-कर वृद्धि के विरुद्ध गुजरात में हुआ था, वर्ष 1928 में हुआ, जबकि व्यक्तिगत सत्याग्रह 1940-41 में विनोबा भावे के नेतृत्व में आरंभ हुआ था- ये दोनों जलियांवाला बाग की घटना से समयक्रम में काफी बाद की हैं। दूसरा तथ्य यह है कि रौलेट सत्याग्रह के दौरान पंजाब में हुए तनाव और दमन ने ही अंततः 13 अप्रैल 1919 की दुखद घटना को जन्म दिया।
20.कौन-सी महत्वपूर्ण घटना जलियांवाला बाग नरसंहार के तुरंत पूर्व घटी थी?
(a) असहयोग आंदोलन
(b) रौलेट एक्ट का बनना
(c) सांप्रदायिक अवॉर्ड
(d) साइमन कमीशन का आना
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
जलियांवाला बाग नरसंहार से ठीक पहले की महत्वपूर्ण घटना मार्च 1919 में रौलेट एक्ट का पारित होना था, जिसके विरोध में गांधीजी ने 6 अप्रैल 1919 को अखिल भारतीय हड़ताल का आयोजन किया था। इसी विरोध आंदोलन की कड़ी में 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थी भीड़ पर नृशंस गोलीबारी कराई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: असहयोग आंदोलन वर्ष 1920 में, सांप्रदायिक अवॉर्ड वर्ष 1932 में और साइमन कमीशन का भारत आगमन वर्ष 1928 में हुआ, इस तरह ये सभी घटनाएं जलियांवाला बाग के बाद की हैं, न कि पूर्व की।
21.हंटर आयोग की नियुक्ति की गई थी-
(a) काली कोठरी घटना के बाद
(b) जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद
(c) 1857 के विद्रोह के बाद
(d) बंगाल के विभाजन के बाद
I.A.S. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
हंटर आयोग की नियुक्ति 13 अप्रैल 1919 को घटित जलियांवाला बाग हत्याकांड की जांच हेतु ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई थी। इस आयोग ने मार्च 1920 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें यह तर्क दिया गया कि चूंकि उपद्रव क्रांति का रूप ले सकते थे, इसलिए मार्शल लॉ का लागू होना और भीड़ पर गोली चलाना उचित कार्रवाई थी, हालांकि आयोग ने जनरल डायर के इस कृत्य को निर्णय की एक भूल भी माना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हंटर आयोग की इस पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी एक स्वतंत्र समानांतर जांच समिति का गठन किया, जिसमें महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू और अन्य प्रमुख नेता शामिल थे। दूसरा तथ्य यह है कि ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में डायर के पक्ष में प्रस्ताव पारित होने के बावजूद हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने उसकी कार्रवाई का समर्थन कर दिया था, जिससे भारतीय जनमानस में और अधिक आक्रोश फैला।
22.जलियांवाला बाग हत्याकांड 1919 में पंजाब में हुए अत्याचारों से अपने विरोध के रूप में किस विख्यात व्यक्ति ने ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गई नाइट की उपाधि को वापस लौटा दिया?
(a) तेज बहादुर सप्रू
(b) आशुतोष मुखर्जी
(c) रबींद्रनाथ टैगोर
(d) सैयद अहमद खान
I.A.S. (Pre) 2004
उत्तर-(c)
पंजाब में हुए अत्याचारों के विरुद्ध रबींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदत्त ‘नाइटहुड’ की उपाधि को 30 मई 1919 को वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड को पत्र लिखकर लौटा दिया था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि इस तरह के निर्दयतापूर्ण कृत्य के बाद सम्मान चिह्न धारण करना अपमानजनक है और वे अपने देशवासियों के साथ एकजुट होकर खड़ा रहना चाहते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टैगोर को यह नाइटहुड की उपाधि वर्ष 1915 में प्रदान की गई थी, और उन्हें 1913 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका था। दूसरा तथ्य यह है कि इसी घटना के विरोध में सर शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारी परिषद से अपना इस्तीफा दे दिया था, जो इस दौर का एक अन्य महत्वपूर्ण प्रतिरोध था।
23.निम्नलिखित घटनाओं का सही क्रम नीचे दिए गए कूट से ज्ञात कीजिए-
1. जलियांवाला बाग नरसंहार
2. डॉ. सत्यपाल का बंदी बनाया जाना
3. 1919 का अमृतसर कांग्रेस का अधिवेशन
कूट :
(a) 2, 1, 3
(c) 2, 3, 1
(b) 1, 2, 3
(d) 3, 2, 1
U.P. Lower Sub.(Spl.) (Pre) 2002
U.P. Lower Sub. (Pre) 2003
उत्तर-(a)
इन तीन घटनाओं का सही कालानुक्रमिक क्रम यह है कि सबसे पहले 9 अप्रैल 1919 को अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू को गिरफ्तार किया, इसके चार दिन बाद 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ, और इसके बाद दिसंबर 1919 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अमृतसर अधिवेशन आयोजित हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अमृतसर अधिवेशन में महात्मा गांधी ने पहली बार कांग्रेस के मंच पर सक्रिय रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और जलियांवाला बाग की घटना की जांच के लिए कांग्रेस की अपनी समिति की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। दूसरा तथ्य यह है कि इस अधिवेशन में रौलेट एक्ट और मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ था।
24.निम्न में से किसके द्वारा जलियांवाला कांड के विरोध में ‘सर’ की उपाधि त्यागी गई?
(a) महात्मा गांधी
(b) जवाहरलाल नेहरू
(c) रबींद्रनाथ टैगोर
(d) तेज बहादुर सप्रू
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(c)
जलियांवाला बाग कांड के विरोध में रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी ‘सर’ (नाइटहुड) की उपाधि त्याग दी थी, जो उन्हें 1915 में ब्रिटिश सरकार ने प्रदान की थी। टैगोर ने 30 मई 1919 को वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड को एक पत्र लिखकर यह उपाधि लौटाई और इसे अपने देशवासियों के साथ नैतिक एकजुटता प्रदर्शित करने का माध्यम बताया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टैगोर ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा था कि अब समय आ गया है जब सम्मान के तमगे अपमान के विरोधाभासी संदर्भ में हमारे कलंक को उजागर करते हैं। दूसरा तथ्य यह है कि उपर्युक्त विकल्पों में से तेज बहादुर सप्रू ने उपाधि नहीं त्यागी थी, बल्कि वे एक प्रमुख उदारवादी नेता और वकील के रूप में जाने जाते थे, जिन्होंने बाद में साइमन कमीशन के साथ सहयोग करने का प्रयास किया।
25.किसके विरुद्ध विरोध प्रदर्शन के अभिप्राय के रूप में रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी नाइट की पदवी त्याग दी?
(a) बंगाल का विभाजन
(b) 1910 का प्रेस एक्ट
(c) जलियांवाला बाग हत्याकांड
(d) नमक कानून
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(c)
रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी नाइटहुड की पदवी जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में त्यागी थी, जो 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जनरल डायर के आदेश पर निहत्थी भीड़ पर गोलीबारी के रूप में घटित हुआ था। ध्यान देने योग्य है कि बंगाल विभाजन वर्ष 1905 में, 1910 का प्रेस एक्ट उसी वर्ष में और नमक कानून के विरुद्ध आंदोलन (दांडी यात्रा) वर्ष 1930 में हुआ था, इस तरह ये सभी घटनाएं समयक्रम में जलियांवाला बाग से भिन्न हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टैगोर ने इस घटना से पहले भी अपनी रचनाओं और भाषणों के माध्यम से सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए थे, परंतु यह उनका सबसे प्रत्यक्ष राजनीतिक विरोध-कृत्य माना जाता है। दूसरा तथ्य यह है कि टैगोर ने शांतिनिकेतन में स्थापित अपने विश्वविद्यालय के माध्यम से भी स्वतंत्र भारतीय शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया था।
26.जालियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में निम्नलिखित में से किसने वायसराय की कार्य परिषद से त्याग-पत्र दे दिया था ?
(a) रबींद्रनाथ टैगोर
(b) मदन मोहन मालवीय
(c) सर शंकरन नायर
(d) उपर्युक्त तीनों
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
U.P. Lower Sub. (Pre) 2013
उत्तर-(c)
जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में सर शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारी परिषद की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जबकि रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी नाइटहुड की उपाधि लौटाकर अलग ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया था। शंकरन नायर एक प्रतिष्ठित न्यायविद् और राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने आगे चलकर अपनी पुस्तक में पंजाब में हुए दमन की कड़ी आलोचना भी की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शंकरन नायर वर्ष 1897 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके थे, जो उन्हें इस दौर के एक वरिष्ठ और सम्मानित नेता के रूप में स्थापित करता है। दूसरा तथ्य यह है कि उनकी पुस्तक ‘गांधी एंड अनार्की’ में किए गए दावों के आधार पर पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर ने उनके विरुद्ध मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था।
27.जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में वायसराय की कार्यकारिणी परिषद की सदस्यता से किसने इस्तीफा दे दिया?
(a) महात्मा गांधी
(b) रबींद्रनाथ टैगोर
(c) शंकरन नायर
(d) जमनालाल बजाज
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(c)
जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) के विरोध स्वरूप शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारी परिषद से अपनी सदस्यता त्याग दी थी, जो उस समय एकमात्र भारतीय सदस्य के रूप में इस परिषद में शामिल थे। उनके इस्तीफे के समानांतर रबींद्रनाथ टैगोर ने भी ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदत्त ‘नाइट’ या ‘सर’ की उपाधि लौटा दी थी, जो उन्हें 1915 में प्रदान की गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शंकरन नायर के इस्तीफे के बाद ब्रिटिश सरकार पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव बढ़ गया, जिसके चलते अंततः हंटर कमीशन का गठन करना पड़ा। दूसरा तथ्य यह है कि शंकरन नायर का जन्म केरल में हुआ था और वे मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहने के साथ ही एक प्रमुख समाज सुधारक के रूप में भी जाने जाते हैं।
28.नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (a) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है-
अभिकथन (a) : रबींद्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि को त्याग दिया।
कारण (R) : वे असहयोग आंदोलन में भाग लेना चाहते थे। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए-
कूट :
(a) (a) और (R) दोनों सही हैं और (R), (a) की सही व्याख्या करता है।
(b) (a) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (a) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
अभिकथन (a) सही है कि रबींद्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि त्याग दी थी, परंतु कारण (R) गलत है क्योंकि टैगोर ने यह उपाधि 30 मई 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में लौटाई थी, जबकि असहयोग आंदोलन की शुरुआत इसके लगभग एक वर्ष बाद, सितंबर 1920 में हुई थी। इस तरह उपाधि त्यागने का कारण असहयोग आंदोलन में भागीदारी नहीं, बल्कि पंजाब में हुए ब्रिटिश दमन के प्रति गहरा क्षोभ और नैतिक विरोध था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टैगोर स्वयं को किसी राजनीतिक दल या आंदोलन से प्रत्यक्ष रूप से नहीं जोड़ते थे और उन्होंने बाद में असहयोग आंदोलन की कुछ रणनीतियों, विशेषकर शिक्षा-संस्थानों के बहिष्कार, की आलोचना भी की थी। दूसरा तथ्य यह है कि टैगोर का यह दृष्टिकोण उनकी सार्वभौमिक मानवतावाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा से प्रेरित था, जो उन्हें गांधीजी की रणनीतियों से कई बार भिन्न दृष्टिकोण रखने को प्रेरित करता था।
29.रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी ‘नाइटहुड’ उपाधि किस कारण त्याग दी?
(a) सविनय अवज्ञा आंदोलन का क्रूर दमन
(b) भगत सिंह को फांसी दिया जाना
(c) जलियांवाला बाग हत्याकांड
(d) चौरी-चौरा की घटना
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी नाइटहुड उपाधि जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में त्यागी थी, जो 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ था, जबकि सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930), भगत सिंह की फांसी (1931) और चौरी-चौरा की घटना (1922) सभी इसके बाद की घटनाएं हैं और इनका टैगोर के इस कृत्य से कोई सीधा संबंध नहीं है। टैगोर ने 30 मई 1919 को वायसराय को लिखे अपने पत्र में पंजाब में हुए अत्याचारों के प्रति अपनी गहरी वेदना और असहमति व्यक्त की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टैगोर की रचनाएं, जैसे ‘गीतांजलि’, जिसके लिए उन्हें 1913 में नोबेल पुरस्कार मिला, ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सम्मानित साहित्यिक व्यक्तित्व बना दिया था, जिससे उनके इस विरोध-कृत्य का प्रभाव भी व्यापक रहा। दूसरा तथ्य यह है कि टैगोर ने इसके बाद भी कई अवसरों पर ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध अपने लेखन और सार्वजनिक वक्तव्यों के माध्यम से आवाज उठाई।
30.निम्नलिखित में से किसके विरोध में रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी ‘नाइटहुड’ का परित्याग कर दिया था?
(a) रौलेट एक्ट
(b) जलियांवाला बाग जनसंहार
(c) साइमन कमीशन
(d) क्रिप्स मिशन
U.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(b)
रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी नाइटहुड की उपाधि जलियांवाला बाग जनसंहार के विरोध में त्यागी थी, जबकि रौलेट एक्ट (मार्च 1919), साइमन कमीशन (1928) और क्रिप्स मिशन (1942) इस घटना से अलग समय की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं हैं। टैगोर का यह कदम 30 मई 1919 को आया, यानी नरसंहार के लगभग छह सप्ताह बाद, जब उन्हें पंजाब में हुए अत्याचारों की पूरी जानकारी प्राप्त हो गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: क्रिप्स मिशन ब्रिटेन द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय राजनीतिक दलों को सीमित स्वशासन का प्रस्ताव देने के लिए भेजा गया था, जिसे कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया था। दूसरा तथ्य यह है कि साइमन कमीशन में किसी भी भारतीय सदस्य को शामिल न करने के विरोध में देशभर में व्यापक प्रदर्शन हुए थे, जो टैगोर की इस घटना से पूर्णतः भिन्न ऐतिहासिक प्रसंग है।
31.निम्नलिखित में से किसके कारण सार्वजनिक रोष की लहर उभरी जिसके फलस्वरूप जलियांवाला बाग में ब्रिटिश द्वारा जनसंहार की घटना घटी ?
(a) दि आर्म्स एक्ट
(b) दि पब्लिक सेफ्टी एक्ट
(c) दि रौलेट एक्ट
(d) दि वर्नाकुलर प्रेस एक्ट
I.A.S. (Pre) 2007
उत्तर-(c)
मार्च 1919 में पारित रौलेट एक्ट के कारण ही देशभर में व्यापक सार्वजनिक रोष फैला, जिसके विरोध में महात्मा गांधी के आह्वान पर पंजाब समेत पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हुए, और इसी विरोध की कड़ी में 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश सेना द्वारा निहत्थी भीड़ पर गोलीबारी कराई गई। रौलेट एक्ट के तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना खुली अदालती सुनवाई के अनिश्चितकाल तक हिरासत में रख सकती थी, जिससे यह कानून “बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील” के नाम से बदनाम हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वर्नाकुलर प्रेस एक्ट 1878 में लॉर्ड लिटन के समय लाया गया था और इसका जलियांवाला बाग की घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है। दूसरा तथ्य यह है कि रौलेट एक्ट विरोधी आंदोलन के दौरान ही पंजाब के लोकप्रिय नेताओं डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी हुई, जिसके विरोध में ही जलियांवाला बाग में सभा आयोजित की गई थी।
32.लंदन में 13 मार्च, 1940 को सर माइकल ओ’ डायर को गोली मारा गया-
(a) मदनलाल धींगरा
(b) एम.पी.टी. आचार्य
(c) वी.डी. सावरकर
(d) ऊधम सिंह
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
Bihar P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में आयोजित एक सभा के दौरान क्रांतिकारी ऊधम सिंह ने जलियांवाला बाग नरसंहार के समय पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर रहे सर माइकल ओ’डायर को गोली मारकर हत्या कर दी थी, जो उस नरसंहार के लगभग 21 वर्ष बाद लिया गया प्रतिशोध था। ऊधम सिंह को इस हत्या के बाद गिरफ्तार किया गया और जुलाई 1940 में उन्हें फांसी की सजा दी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ध्यान देने योग्य है कि मदनलाल धींगरा ने 1909 में कर्जन वायली की हत्या की थी, जबकि वी.डी. सावरकर इन घटनाओं से वैचारिक रूप से जुड़े क्रांतिकारी विचारक थे, परंतु इस विशेष हत्या से इनका सीधा संबंध नहीं है। दूसरा तथ्य यह है कि ऊधम सिंह ने अपनी फांसी से पहले कहा था कि उन्होंने अपने देश के अपमान का बदला लेने के लिए यह कृत्य किया, जिससे वे भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के एक प्रमुख शहीद के रूप में स्मरण किए जाते हैं।
33.1919 में जघन्य जलियांवाला बाग कांड के समय भारत का वायसराय कौन था?
(a) लॉर्ड चेम्सफोर्ड
(b) लॉर्ड मिंटो
(c) लॉर्ड डलहौजी
(d) लॉर्ड कैनिंग
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(a)
13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय भारत के वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916-1921) थे, जिनके ही कार्यकाल में मार्च 1919 में रौलेट एक्ट और भारत शासन अधिनियम 1919 (मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) भी लागू हुए थे। ध्यान देने योग्य है कि लॉर्ड डलहौजी (1848-1856) और लॉर्ड कैनिंग (1856-1862) उन्नीसवीं सदी के मध्य के गवर्नर-जनरल/वायसराय थे, जबकि लॉर्ड मिंटो II (1905-1910) बीसवीं सदी की शुरुआत में वायसराय रहे- ये सभी जलियांवाला बाग की घटना से कई दशक पहले के हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लॉर्ड चेम्सफोर्ड के कार्यकाल में ही असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि भी तैयार हुई, क्योंकि जलियांवाला बाग की घटना ने महात्मा गांधी का ब्रिटिश शासन के प्रति दृष्टिकोण मूल रूप से बदल दिया। दूसरा तथ्य यह है कि चेम्सफोर्ड के बाद वर्ष 1921 में लॉर्ड रीडिंग ने वायसराय का पद ग्रहण किया, जिनके कार्यकाल में असहयोग आंदोलन और चौरी-चौरा की घटना हुई।
34.ऊधम सिंह ने लंदन में मारा-
(a) लॉर्ड हार्डिंग
(b) जनरल डायर
(c) सर माइकल ओ डायर
(d) लॉर्ड विलिंगडन
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
ऊधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में सर माइकल ओ’डायर की हत्या की थी, जो जलियांवाला बाग नरसंहार के समय पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर के पद पर कार्यरत थे और जिन्हें उस दमनकारी कार्रवाई का प्रमुख जिम्मेदार माना जाता है। ध्यान देने योग्य है कि गोली चलाने का प्रत्यक्ष आदेश जनरल आर.ई.एच. डायर ने दिया था, परंतु ऊधम सिंह ने माइकल ओ’डायर को इसके लिए नैतिक और प्रशासनिक रूप से जिम्मेदार मानकर उन्हें निशाना बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ऊधम सिंह ने इस हत्या को अंजाम देने के लिए अपनी एक पुस्तक के भीतर रिवॉल्वर छिपाकर सभा स्थल में प्रवेश किया था, और घटना के बाद उन्होंने भागने का कोई प्रयास नहीं किया। दूसरा तथ्य यह है कि ऊधम सिंह को 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में फांसी दी गई, और 1974 में उनके अवशेष भारत वापस लाए गए।
35.जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए जिम्मेदार ओ’ डायर को निम्न में किसने मार डाला?
(a) पृथ्वीसिंह आजाद
(b) सरदार किशन सिंह
(c) ऊधम सिंह
(d) सोहन सिंह जोश
U.P. P.C.S. (Pre) 1994
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
पंजाब के क्रांतिकारी ऊधम सिंह ने मार्च 1940 में जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के उद्देश्य से लंदन में सर माइकल ओ’डायर की हत्या कर दी थी, जो उस समय पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर के पद पर कार्यरत थे और जिन्होंने मार्शल लॉ लागू कर पंजाब में कठोर दमन की नीति अपनाई थी। इस हत्या के लिए ऊधम सिंह को गिरफ्तार किया गया और मुकदमे के बाद उन्हें मृत्युदंड दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सरदार किशन सिंह स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के पिता थे, और सोहन सिंह जोश पंजाब के एक प्रमुख कम्युनिस्ट नेता थे, परंतु इन दोनों का इस विशेष हत्या से कोई सीधा संबंध नहीं है। दूसरा तथ्य यह है कि ऊधम सिंह ने इस घटना के बाद अपना नाम “राम मोहम्मद सिंह आजाद” बताया था, जो हिंदू, मुस्लिम और सिख तीनों समुदायों के प्रति एकता का प्रतीक माना जाता है।
36.निम्नलिखित घटनाओं में से किस एक को मॉन्टेग्यू ने ‘निवारक हत्या’ के नाम से विशेषीकृत किया है?
(a) INA सक्रियतावादियों की हत्या
(b) जलियांवाला बाग का नरसंहार
(c) महात्मा गांधी को गोली मारा जाना
(d) कर्नल-वाइथ को गोली मारा जाना
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(b)
तत्कालीन भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू ने 13 अप्रैल 1919 को घटित जलियांवाला बाग नरसंहार को ‘निवारक हत्या’ की संज्ञा दी थी, जो इस बात को इंगित करता था कि यह कार्रवाई आवश्यकता से कहीं अधिक कठोर और अनुपातहीन थी। इसके समानांतर ईसाई मिशनरी और गांधीजी के मित्र दीनबंधु सी.एफ. एंड्रयूज ने इस घटना को जान-बूझकर की गई क्रूर हत्या बताया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मॉन्टेग्यू ही वे व्यक्ति थे जिनके नाम पर मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (भारत शासन अधिनियम 1919) रखा गया, जो जलियांवाला बाग की घटना के साथ ही उसी वर्ष लागू हुआ। दूसरा तथ्य यह है कि मॉन्टेग्यू की इस आलोचनात्मक टिप्पणी ने ब्रिटिश संसद में भी इस घटना पर हुई बहस को प्रभावित किया, हालांकि हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने अंततः जनरल डायर के कृत्य के पक्ष में मतदान किया था।
37.जलियांवाला बाग नरसंहार पर कांग्रेस जांच समिति की रिपोर्ट के प्रारूप लिखने का कार्य सौंपा गया था-
(a) जवाहरलाल नेहरू को
(b) महात्मा गांधी को
(c) सी.आर. दास को
(d) फजलुल हक को
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(b)
जलियांवाला बाग नरसंहार की जांच के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट का प्रारूप तैयार करने का दायित्व महात्मा गांधी को सौंपा गया था, जो हंटर कमीशन की सरकारी रिपोर्ट के समानांतर एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच प्रस्तुत करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस समिति में मोतीलाल नेहरू, सी.आर. दास और अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी शामिल थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न पर अपने प्रारंभिक उत्तर-पत्रक में विकल्प (b) को सही माना था, परंतु बाद में संशोधित उत्तर-पत्रक में इस प्रश्न को ही निरस्त कर दिया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ऐतिहासिक स्रोतों में इस विषय पर कुछ मतभेद रहा है। दूसरा तथ्य यह है कि यह कांग्रेस जांच समिति दिसंबर 1919 के अमृतसर अधिवेशन से पहले गठित हुई थी और इसकी रिपोर्ट ने आगे चलकर असहयोग आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार करने में भी भूमिका निभाई।

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