1. मुमताज महल का असली नाम था-
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(a)
मुमताज महल का वास्तविक नाम अर्जुमंद बानो बेगम था। वे मुगल सम्राट जहांगीर के प्रधानमंत्री आसफ खां की पुत्री थीं और नूरजहां की भतीजी थीं। उनका विवाह 1612 ई. में शहजादे खुर्रम (शाहजहां) से हुआ। शाहजहां ने उन्हें ‘मुमताज महल’ की उपाधि दी जिसका अर्थ है ‘महल का गहना’। 1631 ई. में बुरहानपुर में अपने 14वें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद शाहजहां ने उनकी स्मृति में आगरा में विश्वप्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण करवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुमताज महल शाहजहां के साथ युद्ध अभियानों में भी जाती थीं और राजकीय मुहर (शाही मुद्रा) की अभिरक्षक भी थीं। उनकी मृत्यु के बाद शाहजहां ने दो वर्षों तक शोक में सफेद वस्त्र पहने।
2. बनारस एवं इलाहाबाद के तीर्थयात्रा कर की समाप्ति के लिए किसने मुगल बादशाह के सामने बनारस के पंडितों का नेतृत्व किया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
कवींद्राचार्य सरस्वती शाहजहां के दरबार से जुड़े प्रकांड विद्वान थे। इन्होंने बादशाह से निवेदन कर बनारस और इलाहाबाद में हिंदू तीर्थयात्रियों पर लगाया जाने वाला कर समाप्त करवाया। इनकी रचना ‘कवींद्र कल्पलता’ शाहजहां की प्रशस्ति में लिखी गई थी। ये ब्रज और अवधी दोनों भाषाओं के उत्कृष्ट कवि थे और इन्हें ‘सरस्वती’ की उपाधि से विभूषित किया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तीर्थयात्रा कर (Pilgrim Tax) का प्रचलन मुगल काल में आर्थिक राजस्व के एक स्रोत के रूप में था; इसे ‘तीर्थ-कर’ या ‘जज़िया’ से अलग माना जाता था। शाहजहां ने यह कर समाप्त करके हिंदू प्रजा के प्रति उदारता का परिचय दिया था।
3. कंधार के निकल जाने से मुगल साम्राज्य को एक बड़ा धक्का पहुंचा-
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
1649 ई. में शाहजहां के शासनकाल में कंधार पर ईरान के शाह अब्बास द्वितीय का अधिकार हो गया। यह मुगल साम्राज्य के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत हानिकारक था, क्योंकि कंधार उत्तर-पश्चिमी सीमा पर एक महत्वपूर्ण दुर्ग और व्यापारिक केंद्र था। इसके बिना मुगलों की सीमा सुरक्षा कमजोर पड़ गई। शाहजहां ने कंधार पुनः प्राप्त करने के लिए तीन बड़े सैन्य अभियान भेजे — 1649, 1652 और 1653 में — लेकिन तीनों असफल रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कंधार पर नियंत्रण का महत्व इसलिए भी था क्योंकि यह मध्य एशिया और भारत के बीच प्रमुख व्यापार मार्ग पर स्थित था। कंधार की अंतिम हानि को मुगल साम्राज्य की उत्तर-पश्चिमी सीमा नीति की सबसे बड़ी विफलता माना जाता है।
4. ईरान के शाह और मुगल शासकों के बीच झगड़े की जड़ क्या थी?
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
कंधार मुगल सम्राटों और ईरान के सफावी शासकों के बीच लंबे समय तक विवाद का केंद्र रहा। दोनों साम्राज्यों के लिए कंधार पर अधिकार प्रतिष्ठा और सामरिक सुरक्षा का विषय था। कंधार कई बार हाथ बदला — 1622 ई. में ईरान ने इसे जहांगीर से छीना, 1638 ई. में शाहजहां ने पुनः अधिकृत किया और 1649 ई. में ईरान ने फिर से अपने कब्जे में ले लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कंधार पर संघर्ष का एक प्रमुख कारण यह भी था कि ईरान के शिया सफावी वंश और मुगलों के बीच धार्मिक-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी थी। मुगल-ईरान संघर्ष में अंततः ईरान की जीत हुई और कंधार स्थायी रूप से ईरानी क्षेत्र बन गया।
5. दिल्ली की प्रसिद्ध जामा मस्जिद का निर्माण किसने किया?
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
दिल्ली की जामा मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने 1650 से 1656 ई. के बीच करवाया। यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है जिसे लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बनाया गया है। इसके तीन प्रवेश द्वार हैं — पूर्वी द्वार से बादशाह आते थे जबकि उत्तरी और दक्षिणी द्वार आम जनता के लिए थे। इस मस्जिद में एक साथ 25,000 से अधिक नमाज़ी नमाज़ अदा कर सकते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जामा मस्जिद का पूरा नाम ‘मस्जिद-ए-जहाँनुमा’ है जिसका अर्थ है ‘विश्व को देखने वाली मस्जिद’। इसके निर्माण में लगभग 10 लाख रुपये की तत्कालीन लागत आई थी और इसे बनाने में करीब 5,000 कारीगरों ने काम किया था।
6. शाहजहां के बल्ख अभियान का उद्देश्य था-
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(a)
शाहजहां ने 1646-47 ई. में बल्ख और बदख्शां अभियान आरंभ किया। इसका उद्देश्य वहाँ एक मित्रवत मुगल समर्थक शासक स्थापित करना था ताकि ये क्षेत्र ईरान और मुगल साम्राज्य के बीच बफर राज्य की भूमिका निभा सकें। यह अभियान प्रारंभ में सफल रहा परंतु स्थानीय जनता के प्रतिरोध और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मुगल सेना को अंततः पीछे हटना पड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बल्ख अभियान के दौरान शहजादे औरंगजेब को भी सेना का नेतृत्व सौंपा गया था, जहाँ उन्होंने अपनी सैन्य योग्यता का परिचय दिया। इस अभियान में भारी धन व्यय हुआ और यह मुगल इतिहास के सबसे महँगे किंतु निरर्थक अभियानों में गिना जाता है।
7. निम्न में से कौन शाहजहां के शासनकाल का ‘राजकवि’ था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(a)
शाहजहां के दरबार में फारसी साहित्य का विशेष स्थान था। उन्होंने ईरानी फारसी पद्य शैली के प्रसिद्ध कवि अबू तालिब कलीम काशानी को अपना ‘राजकवि’ (मलिकुश्शुअरा) नियुक्त किया। कलीम ने ‘पादशाहनामा’ की पद्यात्मक प्रस्तुति में योगदान दिया। उनकी रचनाएं शाहजहां के काल की घटनाओं और दरबारी जीवन का जीवंत चित्रण करती हैं। शाहजहां के दरबार में कुदसी, मीर मुहम्मद काशी, सायब, और चंद्रभान ब्राह्मण जैसे अनेक विद्वान कवि भी थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शाहजहां स्वयं भी फारसी का अच्छा ज्ञान रखते थे और काव्य-रसिक थे। उनके दरबार में संस्कृत, हिंदी और फारसी तीनों भाषाओं के विद्वानों को संरक्षण प्राप्त था, जो उनकी सांस्कृतिक उदारता का प्रमाण है।
8. हिंदू तथा ईरानी वास्तुकला का सर्वप्रथम समन्वय हमें देखने को मिलता है-
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992
उत्तर-(a)
ताजमहल मुगल स्थापत्य कला का सर्वोच्च उदाहरण है जिसमें भारतीय, ईरानी और मध्य एशियाई वास्तुकला शैलियों का अद्भुत समन्वय किया गया है। इसके निर्माण में शाहजहां ने भारत, ईरान और मध्य एशिया के श्रेष्ठ वास्तुकारों, इंजीनियरों और शिल्पियों को बुलाया था। मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी को माना जाता है। ताजमहल का निर्माण 1632 से 1653 ई. के बीच हुआ और इसमें लगभग 20,000 कारीगरों ने काम किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ताजमहल की नींव में कुएं जैसी संरचना (Well Foundation) बनाई गई है जो आगरा की रेतीली जमीन में भार वहन करती है। ताजमहल को 1983 ई. में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) घोषित किया गया।
9. ऊपर दिए गए मानचित्र में छायित क्षेत्र दर्शाता है-
I.A.S. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
मानचित्र में दर्शाया गया क्षेत्र शाहजहां के साम्राज्य को प्रदर्शित करता है। इसकी पहचान का प्रमुख आधार यह है कि इसमें काबुल (वर्तमान अफगानिस्तान) सम्मिलित है, जबकि दक्षिण भारत का गोलकुंडा इसकी सीमा से बाहर है। गोलकुंडा पर 1687 ई. में औरंगजेब ने अधिकार किया था। शाहजहां का साम्राज्य उत्तर में काबुल से लेकर दक्षिण में अहमदनगर तक फैला था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शाहजहां के शासनकाल में मुगल साम्राज्य की समृद्धि अपने चरमोत्कर्ष पर थी। अनुमानतः उस समय भारत की विश्व GDP में हिस्सेदारी लगभग 24-25% थी, जो उस युग में किसी भी अन्य देश से अधिक थी।
10. निम्न में से किस मुगल बादशाह ने दिल्ली की जामा मस्जिद का निर्माण करवाया?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(c)
दिल्ली की जामा मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने करवाया था। शाहजहां मुगल सम्राटों में सबसे महान निर्माणकर्ता माने जाते हैं — उनके काल में ताजमहल, दिल्ली का लाल किला, आगरा का मोती मस्जिद और दिल्ली की जामा मस्जिद जैसी अद्वितीय इमारतें बनीं। जामा मस्जिद लाल किले के ठीक सामने एक ऊँचे चबूतरे पर स्थित है। मस्जिद के तीन प्रवेश द्वारों में से पूर्वी द्वार बादशाह के लिए आरक्षित था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शाहजहां के स्थापत्य प्रेम के कारण उन्हें ‘इंजीनियर राजा’ (Engineer King) भी कहा जाता है। उनके काल में सफेद संगमरमर का उपयोग लाल बलुआ पत्थर की तुलना में अधिक होने लगा, जो मुगल वास्तुकला की एक नई पहचान बनी।
11. दारा शिकोह ने किस शीर्षक के अंतर्गत उपनिषदों का फारसी में अनुवाद किया था?
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2004 & U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(d)
दारा शिकोह ने शाहजहां के शासनकाल में 52 उपनिषदों का फारसी अनुवाद ‘सिर्र-ए-अकबर’ (महान रहस्य) शीर्षक से किया। यह अनुवाद 1657 ई. में पूर्ण हुआ। दारा ने ‘मज्म-उल-बहरीन’ (दो समुद्रों का संगम) नामक मूल ग्रंथ भी लिखा, जिसमें उन्होंने हिंदू और इस्लामी रहस्यवाद के बीच समानताएं दर्शाई हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दारा शिकोह ने भगवद्गीता और योगवशिष्ठ का भी फारसी में अनुवाद करवाया था। फ्रांसीसी विद्वान एनकेतिल-दुपेरॉन ने ‘सिर्र-ए-अकबर’ का लैटिन अनुवाद किया, जिससे यूरोप में पहली बार उपनिषदों का ज्ञान पहुँचा।
12. निम्नलिखित में से किसने साम्राज्य की राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित की?
U.P.P. C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(c)
शाहजहां ने 1628 ई. में ‘अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दीन मुहम्मद साहिब किरन-ए-सानी’ की उपाधि धारण कर आगरा में राज्याभिषेक करवाया। बाद में उसने मुगल साम्राज्य की राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित की और ‘शाहजहांनाबाद’ नाम से एक नया नगर बसाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘किरन-ए-सानी’ का अर्थ है ‘द्वितीय सहस्राब्दी का स्वामी’, जो शाहजहां ने स्वयं को इस्लामी कैलेंडर के दूसरे हजार वर्ष की शुरुआत में सत्तारूढ़ होने के संदर्भ में धारण किया। शाहजहांनाबाद वर्तमान में दिल्ली का ‘पुरानी दिल्ली’ क्षेत्र कहलाता है।
13. ‘सिर्र-ए-अकबर’ के लेखक थे-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
उत्तर-(b)
शाहजहां के बड़े पुत्र दारा शिकोह ने ‘सिर्र-ए-अकबर’ की रचना की, जिसमें 52 उपनिषदों का संस्कृत से फारसी में अनुवाद है। दारा एक उदार विचारक थे जो हिंदू और इस्लाम धर्म में सामंजस्य स्थापित करना चाहते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इतिहासकार स्टेनली लेनपूल ने दारा को उनकी धार्मिक सहिष्णुता के कारण ‘लघु अकबर’ की संज्ञा दी। दारा के गुरु मुल्ला शाह बदख्शानी थे, जो कादिरी सूफी संप्रदाय के प्रमुख संत थे।
14. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-
सूची-I (स्मारक) सूची-II (निर्माता)
A. अलाई दरवाजा, दिल्ली 1. अलाउद्दीन खिलजी
B. बुलंद दरवाजा, फतेहपुर सीकरी 2. अकबर
C. मोती मस्जिद, आगरा 3. शाहजहां
D. मोती मस्जिद, दिल्ली 4. औरंगजेब
कूट :
A B C D
सूची-I (स्मारक) सूची-II (निर्माता)
A. अलाई दरवाजा, दिल्ली 1. अलाउद्दीन खिलजी
B. बुलंद दरवाजा, फतेहपुर सीकरी 2. अकबर
C. मोती मस्जिद, आगरा 3. शाहजहां
D. मोती मस्जिद, दिल्ली 4. औरंगजेब
कूट :
A B C D
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
सही सुमेलन: अलाई दरवाजा (दिल्ली) — अलाउद्दीन खिलजी द्वारा 1311 ई. में निर्मित; बुलंद दरवाजा (फतेहपुर सीकरी) — अकबर ने गुजरात विजय (1572 ई.) के उपलक्ष्य में बनवाया; मोती मस्जिद (आगरा) — शाहजहां ने आगरा किले के भीतर श्वेत संगमरमर से बनवाई; मोती मस्जिद (दिल्ली) — औरंगजेब ने लाल किले के परिसर में बनवाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुलंद दरवाजा विश्व के सबसे ऊंचे प्रवेश द्वारों में से एक है, इसकी ऊंचाई लगभग 54 मीटर (176 फीट) है। अलाई दरवाजा भारत में इस्लामी वास्तुकला के प्रारंभिक उदाहरणों में से एक है और इसमें पहली बार वास्तविक मेहराब का प्रयोग किया गया।
15. इनमें से किसे शाहजहां ने ‘शाह बुलंद इकबाल’ की पदवी दी थी?
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
उत्तर-(a)
शाहजहां ने अपने प्रिय ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह को ‘शाह बुलंद इकबाल’ (उच्च भाग्य का राजा) की पदवी से सम्मानित किया। दारा को शाहजहां ने उत्तराधिकारी के रूप में भी तैयार किया था, किंतु उत्तराधिकार युद्ध में 1659 ई. में औरंगजेब ने उसे पराजित कर मृत्युदंड दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दारा शिकोह ने ‘हसनात-उल-आरिफीन’ नामक ग्रंथ में सूफी संतों के जीवन का वर्णन किया है। शाहजहां के चार पुत्रों में दारा, शूजा, औरंगजेब और मुराद थे — इन सभी के बीच उत्तराधिकार का संघर्ष मुगल इतिहास की सबसे लंबी उत्तराधिकार लड़ाइयों में से एक था।
16. दिल्ली के लाल किले का निर्माण करवाया था-
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(d)
शाहजहां ने दिल्ली में ‘शाहजहांनाबाद’ नामक नगर बसाया और उसके भीतर लाल बलुआ पत्थर से लाल किले का निर्माण 1638 से 1648 ई. के बीच करवाया। इसके वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी थे, जिन्होंने ताजमहल का डिज़ाइन भी तैयार किया था। किले का पश्चिमी द्वार ‘लाहौरी दरवाजा’ और दक्षिणी द्वार ‘दिल्ली दरवाजा’ कहलाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लाल किले के भीतर ‘दीवान-ए-खास’ में प्रसिद्ध मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) रखा था, जिसे 1739 ई. में नादिरशाह लूटकर ईरान ले गया। लाल किले को 2007 ई. में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।
17. लाल किले के निर्माण के श्रेय का अधिकारी कौन है?
U.P. P.C.S. (Pre) 2002 & U.P. P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(d)
दिल्ली के लाल किले का निर्माण श्रेय शाहजहां को जाता है। यह किला यमुना नदी के किनारे स्थित है और लगभग 254.67 एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसके निर्माण में लगभग 10 वर्ष (1638–1648 ई.) का समय लगा और उस समय इसकी लागत लगभग एक करोड़ रुपये थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लाल किले में ‘रंग महल’ वह स्थान था जहां शाही महिलाएं निवास करती थीं और जिसके बीच से एक नहर (नहर-ए-बहिश्त) प्रवाहित होती थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर पर इसी किले में मुकदमा चलाया था।
18. उपनिषदों का फारसी में अनुवाद किस मुगल सम्राट के शासनकाल में हुआ?
U.P.P.C.S. (Pre) 2009, 1992 & U.P. P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(a)
शाहजहां के शासनकाल में उनके पुत्र शहजादे दारा शिकोह ने 52 उपनिषदों का फारसी अनुवाद ‘सिर्र-ए-अकबर’ शीर्षक के अंतर्गत किया। दारा ने यह कार्य 1657 ई. में वाराणसी के पंडितों की सहायता से पूर्ण किया। इतिहासकार लेनपूल ने उनकी सहिष्णुता के कारण उन्हें ‘लघु अकबर’ कहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दारा शिकोह ने उपनिषदों के अतिरिक्त ‘रामायण’ और ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ का भी फारसी अनुवाद करवाया था। ‘सिर्र-ए-अकबर’ को बाद में लैटिन भाषा में ‘ओपस्नेखत’ नाम से अनुवादित किया गया, जिसने यूरोप के दार्शनिकों जैसे शोपेनहावर को गहरे रूप से प्रभावित किया।
19. किस मुगल बादशाह ने बलवन द्वारा प्रारंभ किया गया दरबारी रिवाज़ ‘सिजदा’ समाप्त कर दिया था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2010 & U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
‘सिजदा’ एक ईरानी दरबारी परंपरा थी जिसमें सम्राट के समक्ष साष्टांग दंडवत् प्रणाम किया जाता था। इसे दिल्ली सल्तनत में बलबन ने प्रारंभ किया और यह मुगल दरबार में भी जारी रही। शाहजहां ने 1636–37 ई. में इस प्रथा को इस्लामी सिद्धांतों के विरुद्ध मानते हुए समाप्त कर दिया, क्योंकि ‘सिजदा’ केवल अल्लाह के सामने ही करना इस्लाम में उचित माना जाता है। इसके स्थान पर ‘चहार तस्लीम’ (चार बार झुककर सलाम करना) की प्रथा लागू की गई। साथ ही ‘जमीनबोस’ (जमीन चूमना) और पगड़ी में बादशाह की तस्वीर पहनने की प्रथा भी बंद की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने ‘दीन-ए-इलाही’ के अंतर्गत ‘सिजदा’ और ‘जमीनबोस’ को प्रोत्साहन दिया था, जिसे रूढ़िवादी मुस्लिम वर्ग सदैव इस्लाम-विरोधी मानता था। शाहजहां का यह निर्णय उसकी तुलनात्मक रूप से अधिक रूढ़िवादी धार्मिक नीति को दर्शाता है।
20. अधोलिखित में से कौन एक दाराशिकोह की रचना है?
Chhattisgarh P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(d)
‘मज्म-उल-बहरीन’ (दो समुद्रों का संगम) दारा शिकोह की मौलिक रचना है जिसमें उन्होंने हिंदू वेदांत दर्शन और इस्लामी सूफी विचारधारा के बीच की समानताओं को उजागर किया है। यह ग्रंथ 1655 ई. में लिखा गया। ‘सिर्र-ए-अकबर’ दारा का अनुवाद कार्य था, मूल रचना नहीं। अन्य विकल्पों में ‘तबकात-ए-नासिरी’ मिनहाज-उस-सिराज की, ‘किताबुल हिंद’ और ‘तहकीक-ए-हिंद’ अलबेरूनी की रचनाएं हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दारा शिकोह की अन्य प्रमुख रचनाओं में ‘सफीनत-उल-औलिया’ (सूफी संतों की जीवनियां) और ‘हसनात-उल-आरिफीन’ शामिल हैं। दारा ने संस्कृत के अध्ययन के लिए वाराणसी के पंडितों को दिल्ली बुलाया था।
21. निम्नलिखित में से कौन शाहजहां के शासनकाल में अधिकांश समय तक दक्कन का गवर्नर रहा था?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2009
उत्तर-(d)
औरंगजेब शाहजहां के शासनकाल में दो बार दक्कन का गवर्नर रहा — पहली बार 1636–44 ई. तथा दूसरी बार 1652 ई. से उत्तराधिकार युद्ध में विजय तक। दक्कन में रहते हुए उसने प्रशासनिक दक्षता और सैन्य अनुशासन का परिचय दिया। इसी काल में उसका पहली बार मराठा नेता छत्रपति शिवाजी से संघर्ष हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: औरंगजेब ने दक्कन गवर्नर रहते हुए 1657 ई. में गोलकुंडा और बीजापुर पर आक्रमण किया, किंतु शाहजहां के आदेश पर उसे वापस लौटना पड़ा। दक्कन का यह अनुभव बाद में सम्राट बनने पर उसकी दक्कन नीति की नींव बना।
22. दाराशिकोह को किस स्थान पर दफनाया गया था?
U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2017
उत्तर-(a)
1659 ई. में उत्तराधिकार युद्ध में पराजित दारा शिकोह को बलूची सरदार मलिक जीवन ने धोखे से औरंगजेब के सैनिकों को सौंप दिया। औरंगजेब द्वारा नियुक्त न्याय समिति ने दारा को ‘विधर्मी’ घोषित कर मृत्युदंड दिया। दारा का धड़ हुमायूं के मकबरे परिसर (दिल्ली) में दफनाया गया, जबकि उसका सिर ताजमहल परिसर (आगरा) में दफनाया गया। इस प्रकार दिल्ली उसका मुख्य दफन-स्थल माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कहा जाता है कि औरंगजेब ने दारा का कटा हुआ सिर कैद में बंद अपने पिता शाहजहां को भेजा था। मुगल उत्तराधिकार संघर्ष में दारा की मृत्यु के अलावा, शूजा बर्मा (अराकान) में गुमनाम मौत मरा और मुराद को औरंगजेब ने ग्वालियर किले में कैद कर हत्या करवा दी।
23. सुप्रसिद्ध ‘कोहिनूर’ हीरा शाहजहां को किसने उपहार में दिया था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(c)
मीर जुमला का वास्तविक नाम मोहम्मद सईद था। वह मूलतः ईरान के आर्दिस्तान का निवासी था और गोलकुंडा में हीरे का व्यापार करता था। बाद में वह गोलकुंडा सल्तनत का प्रधानमंत्री बना। शाहजहां ने उसे पांच हजार का मनसब प्रदान किया, जिस अवसर पर मीर जुमला ने उन्हें विश्व का सर्वाधिक मूल्यवान हीरा कोहिनूर भेंट किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कोहिनूर हीरा मूलतः आंध्र प्रदेश की गोलकुंडा खदानों से निकला था। यह हीरा बाद में नादिरशाह, अहमद शाह दुर्रानी और रणजीत सिंह के हाथों से होते हुए 1849 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से ब्रिटेन पहुंचा और अब यह लंदन के टॉवर में महारानी के मुकुट का हिस्सा है।
24. हिंदू धर्मग्रंथों का अध्ययन करने वाला प्रथम मुस्लिम था-
U.P. P.C.S. (Mains) 2003
उत्तर-(b)
दिए गए विकल्पों में दारा शिकोह हिंदू धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन करने वाले प्रथम मुस्लिम थे। शाहजहां के चारों पुत्रों में दारा सर्वाधिक विद्वान और उदारमना थे। उन्होंने उपनिषद, योगवशिष्ठ, भगवद्गीता और रामायण आदि ग्रंथों का न केवल अध्ययन किया, बल्कि इनका फारसी में अनुवाद भी करवाया, ताकि मुस्लिम पाठक भी इन्हें समझ सकें।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दारा ने वाराणसी, द्वारका और पुरी जैसे हिंदू तीर्थस्थलों का भ्रमण किया था और कई प्रख्यात हिंदू संतों व पंडितों से धर्म-चर्चा की थी। उनकी सूफी दीक्षा मियां मीर और मुल्ला शाह बदख्शानी से हुई थी, जिसने उनके सर्वधर्म-समभाव दृष्टिकोण को और गहरा किया।
25. निम्नलिखित में किस इतिहासकार ने शाहजहां के शासनकाल को मुगलकाल का ‘स्वर्ण युग’ कहा है?
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(c)
डॉ. ए.एल. श्रीवास्तव ने अपनी पुस्तक ‘मुगलकालीन भारत’ में शाहजहां के शासनकाल को मध्यकालीन भारतीय इतिहास का ‘स्वर्ण युग’ कहा है। हालांकि उन्होंने स्वयं यह स्पष्ट किया कि यह गौरव मुख्यतः वास्तुकला एवं कला के क्षेत्र में ही सार्थक है। आर.एस. शर्मा भी इस मत के समर्थक हैं। इसके विपरीत वी.ए. स्मिथ और जे.एन. सरकार इस काल को ‘स्वर्ण युग’ मानने के पक्ष में नहीं थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शाहजहां के काल में ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद और दीवान-ए-खास जैसी अनेक स्थापत्य कृतियां बनीं, जिनके कारण उसे ‘वास्तुकला का राजकुमार’ (Prince of Builders) भी कहा जाता है। उसके शासनकाल में मुगल चित्रकला भी अपने उत्कर्ष पर थी।
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