❑ शाहजहाँ फरवरी, 1628 ई. में राजगद्दी पर बैठा।
❑ शाहजहाँ का वास्तविक नाम शहजादा खुर्रम था।
❑ शाहजहाँ का विवाह अर्जुमन्द बानो बेगम से हुआ था।
❑ अर्जुमन्द बानो बेगम को शाहजहाँ ने मलिका-ए-जमानी की उपाधि प्रदान की।
❑ अर्जुमन्द बानो बेगम को मुमताज महल के नाम से जाना जाता है।
❑ हुमायूँ का मकबरा ताजमहल का पूर्ववर्ती माना जाता है।
❑ शाहजहाँ ने मुमताज महल की याद में ताजमहल का निर्माण करवाया।
❑ मुमताज महल आसफ खाँ की पुत्री थी।
❑ शाहजहाँ ‘अबुल मुजफ्फर शिहाबुद्दीन मुहम्मद साहिब किरान-ए-सानी’ की उपाधि के साथ गद्दी पर बैठा।
❑ शाहजहाँ ने महावत खाँ को खानखाना की उपाधि प्रदान की।
❑ 1632 ई. में पुर्तगालियों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए शाहजहाँ ने उनके हुगली व्यापारिक केन्द्र पर अधिकार कर लिया।
❑ सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोविन्द का शाहजहाँ से संघर्ष हुआ।
❑ शाहजहाँ ने दक्षिण का सूबेदार औरंगजेब को नियुक्त किया।
❑ औरंगजेब ने दक्षिण की राजधानी औरंगाबाद को बनाया।
❑ खानदेश की राजधानी बुरहानपुर थी।
❑ औरंगजेब ने दक्षिण भारत को चार सूबों में बाँटा।
❑ बरार की राजधानी इलिचपुर थी।
❑ तेलंगाना की राजधानी नान्देड़ थी।
❑ औरंगजेब ने दक्षिण में भू-राजस्व व्यवस्था का दायित्व मुर्शिद कुली खाँ को सौंपा।
❑ मीर जुमला का वास्तविक नाम मीर मोहम्मद सैय्यद था।
❑ मीर जुमला ने शाहजहाँ को ‘कोहिनूर’ हीरा भेंट किया था।
❑ शाहजहाँ ने मीर जुमला को दक्षिणी सूबों का प्रधानमंत्री पद दिया था।
❑ मुगल आधिपत्य के समय गोलकुण्डा विश्व के सबसे बड़े हीरा बाजार के रूप में प्रसिद्ध था।
❑ शाहजहाँ ने मध्य एशिया विजय के लिये शहजादा मुराद एवं औरंगजेब को भेजा।
❑ औरंगजेब पहली बार 1636–1644 ई. तक तथा दूसरी बार 1652–1657 ई. तक दक्षिण का सूबेदार रहा।
❑ शाहजहाँ की सात संतानें (चार पुत्र एवं तीन पुत्रियाँ) थीं।
❑ शाहजहाँ के चारों पुत्रों में सर्वाधिक उदार दारा शिकोह था।
❑ शाहजहाँ ने दारा शिकोह को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।
❑ शाहजहाँ ने मयूर सिंहासन का निर्माण बेबादल खाँ से करवाया।
❑ मुगल शासक शाहजहाँ को निर्माताओं का राजकुमार कहा जाता है।
❑ वास्तुकला की दृष्टि से शाहजहाँ का काल स्वर्णयुग कहलाता है।
❑ विश्व का प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा शाहजहाँ के तख्त-ए-तावूस (मयूर सिंहासन) में जड़ा था।
❑ दिल्ली की जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहाँ ने करवाया।
❑ शाहजहाँ ने दाम और आधा के मध्य ‘आना’ नामक नए सिक्के का प्रचलन करवाया।
❑ लगान वसूली की ठेकेदारी प्रथा का आरम्भ शाहजहाँ ने किया।
❑ शाहजहाँ ने 1636–37 ई. में ‘सिजदा’ एवं ‘पाबोस’ प्रथा समाप्त कर दी।
❑ शाहजहाँ ने ‘इलाही संवत’ के स्थान पर ‘हिजरी संवत’ चलाया।
❑ ‘गंगा लहरी’ तथा ‘रस गंगाधर’ के लेखक पंडित जगन्नाथ (महाकविराय) शाहजहाँ के राजकवि थे। चिन्तामणि, कबीन्द्राचार्य और सुन्दरदास भी शाहजहाँ के दरबार के प्रमुख हिन्दू लेखक थे।
❑ ‘दक्षिण का टोडरमल’ मुर्शिद कुली खाँ को कहा जाता है।
❑ शाहजहाँ के शासन के 20 वर्षों का इतिहास अब्दुल हमीद लाहौरी ने ‘पादशाहनामा’ में लिखा।
❑ महाभारत का फारसी अनुवाद ‘रज़्मनामा’ के नाम से किया गया।
❑ मुगल काल में संगमरमर जोधपुर के मकराना से लाया जाता था।
❑ शाहजहाँ के दरबार के प्रमुख चित्रकार मुहम्मद फकीर एवं मीर हासिम थे।
❑ शाहजहाँ ने ताजमहल का निर्माण उस्ताद ईसा खाँ की देखरेख में कराया।
❑ ताजमहल का नक्शा (खाका) उस्ताद अहमद लाहौरी ने तैयार किया था।
❑ शाहजहाँ ने उस्ताद अहमद लाहौरी को नादिर-उल-अस्र की उपाधि दी थी।
❑ शाहजहाँ के बीमार पड़ने पर प्रथम उत्तराधिकार युद्ध फरवरी, 1658 ई. में बहादुरपुर में हुआ।
❑ उत्तराधिकार की अन्तिम लड़ाई अप्रैल, 1659 ई. में दारा एवं औरंगजेब के बीच हुई।
❑ दारा शिकोह को इस्लाम धर्म की अवहेलना करने के आरोप में मृत्युदण्ड दिया गया।
❑ दारा शिकोह ने अपना अंतिम समय अलवर (राजस्थान) के कंकबाड़ी किले में बिताया, जिसे जयसिंह द्वितीय ने बनवाया था।
❑ औरंगजेब ने शाहजहाँ को कैद कर आगरा किले में रखा था।
❑ शाहजहाँ की मृत्यु जनवरी, 1666 ई. में हुई।
❑ शाहजहाँ की अर्थी को साधारण नौकरों एवं हिजड़ों ने कंधा दिया।
❑ पंडित जगन्नाथ को शाहजहाँ ने महाकविराय की उपाधि प्रदान की।
❑ पंडित जगन्नाथ ने गंगालहरी नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की।
❑ शाहजहाँ ने युद्धबंदियों को मुसलमान बनाने की प्रथा पुनः प्रारम्भ की।
❑ शाहजहाँ ने पगड़ी में बादशाह की तस्वीर पहनने पर प्रतिबन्ध लगा दिया।
❑ शाहजहाँ ने पंजाब एवं कश्मीर के हिन्दू-मुस्लिम विवाहों पर लगने वाला कर समाप्त कर दिया।
❑ शाहजहाँ ने झरोखा दर्शन, तुलादान तथा हिन्दू राजाओं को तिलक लगाने की परम्परा जारी रखी।
❑ 1648 ई. में शाहजहाँ ने आगरा के स्थान पर दिल्ली को राजधानी बनाया तथा शाहजहाँनाबाद नगर की स्थापना की।
❑ 1630–32 ई. में गुजरात एवं दक्षिण भारत में भीषण अकाल पड़ा, जिसका वर्णन पीटर मुंडी ने किया है।
❑ 1630–32 ई. के अकाल के समय शाहजहाँ ने भू-राजस्व का 1/11 भाग माफ कर दिया।
❑ 1632 ई. में शाहजहाँ ने माही मरातिब नामक सर्वोच्च सम्मान को पुनः प्रतिष्ठित किया।
❑ माही मरातिब की परम्परा का प्रारम्भ सर्वप्रथम फ़ारस के शासक खुसरो परवेज़ ने किया था।
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