मुगलकालीन प्रशासन व्यवस्था MCQ प्रश्न | UPSC History

भारतीय इतिहास मध्यकालीन भारत मुगलकालीन प्रशासन व्यवस्था MCQ प्रश्न
1. मुगलकाल में सेना का प्रधान निम्न में से कौन था?
(a) शहना-ए-पील
(b) मीर बख्शी
(c) वजीर
(d) सवाहेनिगार
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(b)
मुगल साम्राज्य में मीर बख्शी सैन्य प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी होता था। वह सभी श्रेणियों के मनसबदारों की नियुक्ति के आदेश जारी करता था और सैनिकों का मुआयना (हुलिया दर्ज करना) तथा घोड़ों को दागने (दाग प्रथा) का कार्य उसी के अधीन था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल काल में तीन मीर बख्शी होते थे — प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय — जो मिलकर सैन्य विभाग का संचालन करते थे। ‘दाग प्रथा’ (घोड़ों को दागना) और ‘हुलिया’ (सैनिकों का विवरण रखना) की व्यवस्था अकबर ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए लागू की थी।
2. मध्यकालीन भारत में मनसबदारी प्रथा खासतौर पर इसलिए चालू की गई थी, ताकि-
(a) सेना में भर्ती की जा सके
(b) राजस्व संग्रह में सुविधा हो
(c) धार्मिक सामंजस्य सुनिश्चित हो
(d) साफ-सुथरा प्रशासन लागू हो सके
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
मनसबदारी व्यवस्था अकबर द्वारा लगभग 1571 ई. में लागू की गई थी। यह एक ऐसी समन्वित प्रशासनिक-सैन्य व्यवस्था थी जिसमें सभी नागरिक एवं सैन्य अधिकारियों को एक निश्चित ‘मनसब’ (पद-श्रेणी) प्रदान किया जाता था। इसका प्रमुख उद्देश्य एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन स्थापित करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह व्यवस्था मंगोल दशमलव सैन्य प्रणाली से प्रेरित थी। मनसबदारी में ‘जात’ (व्यक्तिगत पद) और ‘सवार’ (रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या) — ये दोहरी व्यवस्था अकबर के शासन के 40वें वर्ष में जोड़ी गई।
3. मुगल प्रशासन में ‘मुहतसिब’ था-
(a) सेना अधिकारी
(b) विदेश विभाग का मुख्य
(c) लोक आचरण अधिकारी
(d) पत्र-व्यवहार विभाग का अधिकारी
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
उत्तर-(c)
मुगल प्रशासन में ‘मुहतसिब’ सार्वजनिक नैतिकता एवं आचरण के निरीक्षण विभाग का प्रमुख अधिकारी होता था। वह समाज में नैतिक मानकों को बनाए रखने, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर नियंत्रण रखने और धार्मिक नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह पद इस्लामी प्रशासनिक परंपरा से लिया गया था। अकबर ने इस पद का उपयोग मदिरा-विक्रय और वेश्यावृत्ति को नगरों से बाहर करने के लिए किया था, हालाँकि बाद के मुगल शासकों के काल में इस पद की प्रभावशीलता कम होती गई।
4. निम्नलिखित में से किसे मुगल सेना में चिकित्सक नियुक्त किया गया था?
(a) बर्नियर को
(b) करेरी को
(c) मनूची को
(d) टैवर्नियर को
U. P. P. C. S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(c)
निकोलो मनूची (Niccolao Manucci) एक इतालवी यात्री था जो 17वीं शताब्दी में भारत आया। उसने प्रारंभ में दारा शिकोह की सेना में तोपची (artillery man) का कार्य किया। 1659 ई. में दारा शिकोह की औरंगजेब के हाथों पराजय और मृत्यु के बाद मनूची ने चिकित्सा का पेशा अपनाया और मुगल दरबार से जुड़ा रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मनूची ने ‘Storia do Mogor’ नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा जो मुगल दरबार के जीवन, राजनीति और औरंगजेब के शासन पर एक महत्वपूर्ण समकालीन स्रोत माना जाता है। फ्रांसीसी चिकित्सक फ्रांस्वा बर्नियर भी मुगल दरबार में चिकित्सक के रूप में रहे और उन्होंने ‘Travels in the Mughal Empire’ लिखी।
5. मुगल प्रशासन के दौरान जिले को किस नाम से जाना जाता था?
(a) अहर
(b) विश्यास
(c) सूबा
(d) सरकार
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
मुगल प्रशासनिक संरचना में साम्राज्य को ‘सूबों’ (प्रांतों) में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सूबे को कई ‘सरकारों’ (जिलों) में बाँटा जाता था। सरकार को आगे ‘परगनों’ या ‘महलों’ में विभाजित किया जाता था, और परगने के नीचे ‘मौजे’ (गाँव) होते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के समय में कुल 12 सूबे थे जो औरंगजेब के काल तक बढ़कर 21 हो गए। प्रत्येक सरकार का प्रमुख अधिकारी ‘फौजदार’ होता था जो कानून-व्यवस्था और सैन्य मामलों का प्रभारी था, जबकि ‘अमलगुज़ार’ राजस्व संग्रह का कार्य देखता था।
6. मुगल काल में जनपद (जिला) क्या कहलाता था?
(a) इक्ता
(b) सरकार
(c) तर्फ़
(d) सूबा
U.P. Lower Sub. (Pre) 2009
उत्तर-(b)
मुगल काल में जनपद (जिला) को ‘सरकार’ कहा जाता था। यह प्रशासनिक इकाई सूबे और परगने के मध्य की कड़ी थी। ‘इक्ता’ दिल्ली सल्तनत काल की प्रशासनिक इकाई थी, जबकि ‘तर्फ’ मुगल काल में परगने के एक उपविभाग को कहते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल प्रशासनिक पदानुक्रम इस प्रकार था — सूबा (प्रांत) → सरकार (जिला) → परगना → मौजा (ग्राम)। परगने के प्रमुख अधिकारियों में ‘शिकदार’ (सैन्य प्रशासन) और ‘आमिल’ (राजस्व) प्रमुख थे।
7. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, अहंदी वे घुड़सवार सिपाही थे-
1. जिन्होंने अपनी सेवाएं एकाकी प्रदान की
2. जिन्होंने किसी सरदार के साथ अपने को संलग्न नहीं किया
3. सम्राट ही जिनका आसन्न कर्नल था
4. जिन्होंने अपने को मिर्जाओं के साथ संलग्न किया
इन कथनों में से-
(a) 1, 3 और 4 सही हैं।
(b) 1, 2 और 3 सही हैं।
(c) 2 और 3 सही हैं।
(d) 1 और 4 सही हैं।
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(b)
‘अहदी’ मुगल सेना के विशेष अभिजात घुड़सवार सैनिक थे जो सीधे बादशाह की सेवा में होते थे। वे किसी मनसबदार या सरदार के अधीन नहीं होते थे — बादशाह ही उनका प्रत्यक्ष स्वामी था। उनकी भर्ती, वेतन, घोड़े और वस्त्र सब राज्य द्वारा प्रदान किए जाते थे। एक अहदी को लगभग 500 रुपये मासिक वेतन मिलता था, जबकि सामान्य घुड़सवार को मात्र 12–15 रुपये।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के काल में अहदी सैनिकों की संख्या लगभग 12,000 तक पहुँच गई थी। इनके अतिरिक्त ‘दाखिली’ नामक एक अन्य श्रेणी के घुड़सवार भी होते थे, जो मनसबदारों के कोटे में शामिल होते थे किंतु राज्य के खर्चे पर भरण-पोषण पाते थे।
8. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है-
अभिकथन (A) : मुगल साम्राज्य मूल रूप से एक सैनिक राज्य था।
कारण (R) : केंद्रीय शासन व्यवस्था के विकास की प्राणशक्ति उसकी सैनिक शक्ति पर निर्भर थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए।
(a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) (A) सत्य है, किंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, किंतु (R) सत्य है।
U.P.P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
मुगल साम्राज्य की समस्त प्रशासनिक संरचना सैन्य शक्ति पर टिकी थी। लगभग सभी उच्च अधिकारियों (मनसबदारों) को सैन्य दायित्व सौंपे जाते थे और साम्राज्य का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण सेना के बल पर ही संभव हुआ। अतः अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सटीक व्याख्या करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल सेना में चार प्रमुख अंग थे — पैदल सेना (पियादा), घुड़सवार सेना (सवार), हाथी सेना (फीलखाना) और तोपखाना (तोपचीखाना)। तोपखाना मुगल सैन्य श्रेष्ठता का सबसे महत्वपूर्ण कारण था, जिसने पानीपत के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाई।
9. मुगल शासन में मीर बख्शी का कर्तव्य था-
(a) किसानों से टैक्स वसूल करना
(b) आय-व्यय का लेखा रखना
(c) न्याय देना
(d) भू-राजस्व अधिकारियों का पर्यवेक्षण
U.P. P.C.S. (Spl.) Pre 2004
उत्तर-(d)
मुगल प्रशासन में मीर बख्शी भू-राजस्व अधिकारियों के कार्यों का पर्यवेक्षण करता था। साथ ही वह सैन्य विभाग के वेतन वितरण से भी संबद्ध था। इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार ने मीर बख्शी को ‘Pay Master’ (वेतनाधिकारी) की संज्ञा दी है, किंतु यह उसका नियमित कार्य नहीं था — वास्तविक वेतनाधिकारी ‘दीवान-ए-तन’ होता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल केंद्रीय प्रशासन में चार प्रमुख विभागाध्यक्ष थे — वकील (प्रधानमंत्री), दीवान (वित्त मंत्री), मीर बख्शी (सैन्य प्रशासन) और सद्र-उस-सुदूर (धार्मिक मामले एवं दान)। इनमें से दीवान का पद कालांतर में सर्वाधिक प्रभावशाली हो गया।
10. निम्नलिखित बातों में से कौन एक मुगल मनसबदारी व्यवस्था के विषय में सत्य नहीं है?
(a) इसमें 33 वर्ग थे।
(b) उन्हें ‘मशरुत’ अथवा सशर्त पद प्राप्त होते थे।
(c) उनका ‘सवार’ पद ‘जात’ पद से अधिक हो सकता था।
(d) समस्त कार्यकारी एवं सैन्य अधिकारियों को मनसब प्रदान किए जाते थे।
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(c)
मनसबदारी व्यवस्था में ‘जात’ मनसबदार का व्यक्तिगत पद-दर्जा था जो उसके वेतन का निर्धारण करता था, जबकि ‘सवार’ उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या को दर्शाता था। नियम यह था कि ‘सवार’ पद कभी भी ‘जात’ पद से अधिक नहीं हो सकता था। इस आधार पर मनसबदारों को तीन कोटियों में बाँटा जाता था। इस व्यवस्था में कुल 33 वर्ग थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: न्यूनतम मनसब 10 और अधिकतम 10,000 का होता था (हालाँकि शहजादों को 12,000 तक का मनसब भी मिलता था)। 1,000 से अधिक ‘जात’ वाले मनसबदार ‘अमीर’ और 5,000 से ऊपर वाले ‘अमीर-उल-उमरा’ कहलाते थे।
11. मुगलकालीन भारत में राज्य की आय का प्रमुख स्रोत क्या था?
(a) लूट
(b) राजगत संपत्ति
(c) भू-राजस्व
(d) कर
U.P. P.C.S. (Pre) 1995
उत्तर-(c)
मध्यकालीन भारत में भू-राजस्व राज्य की आय का सबसे बड़ा स्रोत था। शेरशाह सूरी ने सबसे पहले एक सुनियोजित लगान व्यवस्था स्थापित की, जिसमें भूमि की पैमाइश (रकबा) के आधार पर कर निर्धारित किया जाता था। अकबर ने इसे और परिष्कृत किया — टोडरमल की देखरेख में ‘आइन-ए-दहसाला’ (दस-वर्षीय औसत) पद्धति लागू की गई, जिसमें पिछले दस वर्षों के उत्पादन के औसत के आधार पर राजस्व निर्धारित होता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के काल में भू-राजस्व सामान्यतः उपज का एक-तिहाई भाग होता था। मुगल काल में ‘बटाई’ (फसल बँटवारा) और ‘नकदी’ दोनों प्रकार से भू-राजस्व वसूला जाता था, जिसमें नकद भुगतान को प्राथमिकता दी जाती थी क्योंकि इससे मनसबदारों को नकद वेतन देना सरल हो जाता था।
12. मुगल प्रशासन में ‘मदद-ए-माश’ इंगित करता है-
(a) चुंगी कर (Toll Tax)
(b) विद्वानों को दी जाने वाली राजस्व मुक्त अनुदत्त भूमि
(c) सैन्य अधिकारियों को दी जाने वाली पेंशन
(d) बुवाई कर (Cultivation Tax)
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
‘मदद-ए-माश’ का शाब्दिक अर्थ है ‘आजीविका की सहायता’। मुगल प्रशासन में यह शब्द उस भूमि के लिए प्रयुक्त होता था जो विद्वानों, धर्मगुरुओं, कवियों और धार्मिक संस्थाओं को राजस्व-मुक्त रूप में दान दी जाती थी। इसे ‘सयूरगल’ भी कहा जाता था। यह भूमि वंशानुगत होती थी किंतु बेची नहीं जा सकती थी। इन अनुदानों की देखरेख का दायित्व ‘सद्र-उस-सुदूर’ (मुख्य धार्मिक अधिकारी) पर था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: औरंगजेब के काल में ‘मदद-ए-माश’ की जाँच के आदेश दिए गए क्योंकि इन अनुदानों में व्यापक भ्रष्टाचार और जालसाजी हो रही थी — अनेक अपात्र व्यक्ति भी इसका लाभ उठा रहे थे। इसके अतिरिक्त, ‘वक्फ’ भूमि मदद-ए-माश से भिन्न थी — वक्फ धार्मिक उद्देश्यों के लिए समर्पित होती थी जबकि मदद-ए-माश व्यक्तिगत अनुदान था।
13. मनसबदारी व्यवस्था के संदर्भ में, कौन-सा कथन सही है/हैं?
1. मनसबदारी व्यवस्था राज्य के कुलीन वर्ग से संबंधित थी, जिसे अकबर ने प्रारंभ किया।
2. मनसबदारी का पद पैतृक था।
नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर चुनिए-
(a) केवल 1
(b) 1 और 2 दोनों
(c) केवल 2
(d) न तो 1 और न ही 2
U.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
अकबर ने अपने शासन के 11वें वर्ष (1567 ई.) में मनसबदारी व्यवस्था आरंभ की। ‘मनसब’ फ़ारसी शब्द है जिसका अर्थ ‘पद’ या ‘श्रेणी’ है। यह व्यवस्था मुगल नौकरशाही की रीढ़ थी जिसमें सभी सैनिक व असैनिक अधिकारियों को एक श्रेणीबद्ध क्रम में रखा गया था। मनसबदारी का पद कभी भी वंशानुगत नहीं था — मनसबदार की मृत्यु होने पर उसकी सारी संपत्ति (‘पेशकश’) राज्य को वापस हो जाती थी। अतः कथन 1 सही है और कथन 2 गलत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मनसबदारी व्यवस्था में ‘जात’ और ‘सवार’ दो प्रकार के मनसब होते थे — ‘जात’ से अधिकारी का व्यक्तिगत वेतन और पद निर्धारित होता था, जबकि ‘सवार’ से यह पता चलता था कि उसे कितने घुड़सवार सैनिक रखने होंगे। अकबर ने जात और सवार का भेद अपने शासन के 40वें वर्ष के आसपास आरंभ किया।
14. मुगल भारत के संदर्भ में, जागीरदार और जमींदार के बीच क्या अंतर है/हैं?
1. जागीरदारों के पास न्यायिक और पुलिस दायित्वों के एवज में भूमि आबंटनों का अधिकार होता था, जबकि जमींदारों के पास राजस्व अधिकार होते थे तथा उन पर राजस्व उगाही को छोड़कर अन्य कोई दायित्व पूरा करने की बाध्यता नहीं होती थी।
2. जागीरदारों को किए गए भूमि आबंटन वंशानुगत होते थे और जमींदारों के राजस्व अधिकार वंशानुगत नहीं होते थे।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
I.A.S. (Pre) 2019
उत्तर-(d)
मुगल प्रशासन में जागीरदार वे मनसबदार होते थे जिन्हें नकद वेतन के स्थान पर ‘जागीर’ (भू-राजस्व संग्रह का अधिकार) दिया जाता था। जागीरदार का अधिकार केवल सेवाकाल तक सीमित था — न तो यह वंशानुगत था और न ही यह न्यायिक या पुलिस दायित्वों के एवज में दिया जाता था। इसके विपरीत, जमींदार परंपरागत भू-धारक होते थे जिनके राजस्व अधिकार वंशानुगत थे। इस प्रकार कथन 1 में जागीरदार के दायित्वों का विवरण गलत है और कथन 2 में जमींदार के बारे में उल्टा कहा गया है, इसलिए दोनों कथन असत्य हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल काल में जागीरों की गंभीर समस्या ‘जागीर संकट’ (Jagir Crisis) थी — विशेषतः औरंगजेब के काल में, जब मनसबदारों की संख्या बढ़ती गई किंतु उपलब्ध जागीर भूमि सीमित रही, जिससे अनेक मनसबदार बिना जागीर के रह गए और साम्राज्य की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई।
15. निम्न में दिए गए कथन (A) एवं (B) के व्याख्यान को पढ़ें और निम्न के कूट में से सही उत्तर का चयन करें-
(A) सभी मनसबदार सेना के पदाधिकारी नहीं होते थे।
(B) मुगल शासन के अधीन उच्च पदाधिकारी भी मनसबदार होते थे, और उनका वर्गीकरण होता था।
(a) (A) एवं (B) दोनों ही गलत हैं।
(b) (A) एवं (B) दोनों ही सही हैं।
(c) (A) सही है, जबकि (B) गलत है।
(d) (A) गलत है, जबकि (B) सही है।
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
मनसबदारी व्यवस्था केवल सैन्य अधिकारियों तक सीमित नहीं थी। इसमें सूबेदार, दीवान, काजी, सद्र और दरबारी कवि जैसे असैनिक अधिकारी भी सम्मिलित थे। इस प्रकार कथन (A) सही है। अबुल फजल ने ‘आइन-ए-अकबरी’ में बताया है कि मनसबदारों की 66 श्रेणियाँ थीं जो 10 से लेकर 10,000 तक की संख्या में थीं, हालाँकि व्यवहार में 33 श्रेणियाँ ही प्रचलित थीं। अतः कथन (B) भी सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 5,000 और उससे ऊपर के मनसब केवल शाहजादों और अत्यंत वरिष्ठ अमीरों को ही दिए जाते थे। अकबर के काल में सर्वोच्च मनसब 10,000 का था जो केवल मुगल राजकुमारों को ही मिलता था; जबकि राजा मान सिंह और अजीज कोका जैसे कुछ विशिष्ट अमीरों को भी उच्च मनसब प्राप्त हुए।
16. मुगल सम्राट जिसने तंबाकू के प्रयोग पर निषेध लगाया था-
(a) अकबर
(b) बाबर
(c) जहांगीर
(d) औरंगजेब
U.P.P.C.S. (Mains) 2005 | Jharkhand P.C.S (Pre) 2013
उत्तर-(c)
तंबाकू को पुर्तगाली व्यापारी लगभग 1605 ई. में भारत लाए। यह इतनी तेजी से लोकप्रिय हुआ कि मात्र एक दशक में इसकी लत सभी वर्गों में फैल गई। जहांगीर ने 1617 ई. में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तंबाकू के सेवन पर प्रतिबंध लगाया और आदेश दिया कि जो व्यक्ति तंबाकू पीता पकड़ा जाए उसके होंठ काट दिए जाएँ — हालाँकि यह दंड व्यापक रूप से लागू नहीं हो सका।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर ने अपनी आत्मकथा ‘तुजुक-ए-जहांगीरी’ में स्वयं स्वीकार किया है कि वह मदिरा और अफीम का सेवन करता था, फिर भी उसने तंबाकू को हानिकारक मानते हुए इस पर प्रतिबंध लगाया। यह भी
भारत में तंबाकू की खेती 17वीं शताब्दी में इतनी तेजी से फैली कि आगरा, गुजरात और बंगाल में यह प्रमुख नकदी फसल बन गई।
17. मुगल प्रशासनिक शब्दावली में ‘माल’ प्रतिनिधित्व करता है-
(a) भू-राजस्व का
(b) वेतन का
(c) भत्तों का
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
U.P. Lower Sub. (Pre) 2009
उत्तर-(a)
मुगल प्रशासनिक शब्दावली में ‘माल’ शब्द भू-राजस्व से संबंधित था। ‘माल विभाग’ या ‘दीवानी’ भू-राजस्व के निर्धारण, संग्रह और लेखा-जोखा का कार्य करता था। परगने स्तर पर ‘अमिल’ या ‘आमिल’ राजस्व वसूली का प्रमुख अधिकारी होता था और ‘कानूनगो’ भूमि संबंधी अभिलेखों का संरक्षक था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल भू-राजस्व शब्दावली में ‘ज़ब्त’ उस प्रणाली को कहते थे जिसमें भूमि की माप के आधार पर नकद में राजस्व निर्धारित होता था। ‘हासिल’ वह राशि थी जो वास्तव में वसूल की जाती थी, जबकि ‘जमा’ वह राशि थी जो सिद्धांत रूप में निर्धारित की गई थी — इन दोनों के अंतर से ही मुगल राजस्व प्रशासन की कार्यकुशलता आँकी जाती थी।
18. मुंगल मनसबदारी व्यवस्था के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए एवं नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए-
1. ‘जात’ एवं ‘सवार’ पद प्रदान किए जाते थे।
2. मनसबदार आनुवांशिक अधिकारी होते थे।
3. मनसबदारों के तीन वर्ग थे।
4. दीवान कार्यालय द्वारा इनको वेतन दिया जाता था।
(a) चारों कथन सही हैं।
(b) चारों कथन गलत हैं।
(c) केवल 1, 2 एवं 3 सही हैं।
(d) केवल 1 एवं 3 सही हैं।
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Mains) 2010 | U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010
उत्तर-(d)
‘मनसब’ का अर्थ ‘पद’ या ‘श्रेणी’ है। अकबर ने अपने अंतिम वर्षों में ‘जात’ और ‘सवार’ दो प्रकार के मनसब निर्धारित किए। मनसबदारों को तीन वर्गों में बाँटा गया था — प्रथम श्रेणी (5000 और उससे ऊपर), द्वितीय श्रेणी (500 से 5000) और तृतीय श्रेणी (500 से नीचे)। मनसबदार आनुवंशिक नहीं थे (कथन 2 गलत), और उनका वेतन नकद या जागीर के रूप में दिया जाता था, न कि केवल दीवान कार्यालय द्वारा (कथन 4 आंशिक रूप से भ्रामक)। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘दु-अस्पा सिह-अस्पा’ एक विशेष प्रावधान था जो शाहजहाँ के काल में जोड़ा गया — इसमें सवार मनसब के अनुसार दोगुने या तिगुने घोड़े रखने की आवश्यकता होती थी, जो विशेष सैन्य सेवाओं के लिए दिया जाता था।
19. कथन (A) : मुगलकाल में मनसबदारी प्रथा विद्यमान थी।
कारण (R) : मनसबदारों का चयन योग्यता के आधार पर होता था।
(a) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन को स्पष्ट करता है।
(b) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण कथन को स्पष्ट नहीं करता है।
(c) कथन सही है, परंतु कारण गलत है।
(d) कथन गलत है, परंतु कारण सही है।
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
कथन (A) निर्विवाद रूप से सही है — मुगलकाल में मनसबदारी प्रथा साम्राज्य की प्रशासनिक नींव थी। कारण (R) भी सत्य है क्योंकि मनसब देते समय व्यक्ति की योग्यता, सैन्य कौशल और निष्ठा पर विचार किया जाता था। किन्तु कारण, कथन की व्याख्या नहीं करता — मनसबदारी प्रथा का अस्तित्व इस तथ्य पर निर्भर नहीं था कि चयन योग्यता से हो। प्रथा के अस्तित्व के अनेक कारण थे जैसे केंद्रीकृत नियंत्रण, सैन्य संगठन और राजस्व वितरण। अतः उत्तर (b) सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मनसबदारों की नियुक्ति सम्राट स्वयं करता था और ‘बख्शी’ (सेनाध्यक्ष) उनके घोड़ों व सैनिकों का वार्षिक निरीक्षण (‘दाग’ और ‘चेहरा’) करता था ताकि मनसबदार फर्जी सैनिक न दिखाकर राजकोष को धोखा न दे सकें। यह ‘दाग’ प्रथा शेरशाह सूरी के समय से चली आ रही थी।
20. मध्यकालीन भारत के ऐतिहासिक स्रोतों में चकला शब्द का प्रयोग हुआ है। यह-
(a) परगना के समानार्थी था।
(b) सरकार के समानार्थी था।
(c) सूबा और परगना के बीच की क्षेत्रीय इकाई था, लेकिन सरकार के समानार्थी नहीं था।
(d) उपलिखित में से कोई भी नहीं।
U.P.P.C.S. (Pre) 2018
उत्तर-(c)
मुगल प्रशासनिक ढाँचे में सबसे बड़ी इकाई ‘सूबा’ (प्रांत) होती थी, उसके नीचे ‘सरकार’ (जिला), फिर ‘परगना’ (तहसील) और सबसे छोटी इकाई ‘ग्राम’ थी। शाहजहाँ के काल में प्रशासनिक सुविधा के लिए कई परगनों को मिलाकर एक नई मध्यवर्ती इकाई ‘चकला’ बनाई गई। ‘चकला’ सूबा और परगना के बीच की इकाई थी, किन्तु यह ‘सरकार’ के समानार्थी नहीं थी — दोनों अलग-अलग प्रशासनिक संदर्भों में थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘चकलादार’ चकला का प्रमुख अधिकारी होता था जो राजस्व संग्रह और स्थानीय प्रशासन की देखरेख करता था। मुगलोत्तर काल में मराठा और ब्रिटिश प्रशासन ने भी स्थानीय स्तर पर इस शब्द का उपयोग किया। औरंगजेब के काल में ‘चकला’ व्यवस्था अधिक सुदृढ़ हुई क्योंकि दक्षिण में नए विजित प्रदेशों के प्रबंधन के लिए लचीली प्रशासनिक इकाइयों की आवश्यकता थी।
21. निम्नलिखित में से किस शासक ने ‘शाहरुख’ नामक चांदी का सिक्का चलाया?
(a) अकबर
(b) बाबर
(c) हुमायूं
(d) शाहजहां
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
बाबर ने अपने शासनकाल में दो प्रमुख धातुओं के सिक्के जारी किए — चांदी और तांबे के। चांदी के सिक्के को ‘शाहरुख’ कहा जाता था, जबकि तांबे का सिक्का ‘फलूस’ कहलाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘शाहरुख’ नाम तैमूरी परंपरा से लिया गया था, जो बाबर के पूर्वज शाहरुख मिर्जा (तैमूर के पुत्र) के नाम पर आधारित था। बाबर ने भारत में मुगल वंश की स्थापना के साथ ही मुद्रा व्यवस्था को भी संगठित करने का प्रयास किया, जिसे बाद के मुगल शासकों ने और विकसित किया।
22. निम्नलिखित में से किस मुगलकालीन नहर का निर्माण फिरोज शाह की रजबवाह को पुनर्जीवित करके किया गया?
(a) शेखनू-नी
(b) शहाब नहर
(c) नहर-ए-बिहिश्त
(d) नहर-ए-आगरा
U.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(b)
मुगलकालीन शहाब (शिहाब) नहर मूलतः फिरोजशाह तुगलक की रजबवाह नहर का पुनरुद्धार थी। अकबर के शासनकाल में पहले शिहाबुद्दीन खान और बाद में नूरुद्दीन मुहम्मद तार खान ने इसे खुदवाकर और चौड़ा करवाकर इसका नाम ‘शिहाब नहर’ रखा। यह नहर यमुना नदी से निकाली गई थी और इससे दिल्ली के आसपास के बड़े क्षेत्र में सिंचाई होती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगलों ने नहर निर्माण में विशेष रुचि ली — शाहजहाँ के काल में प्रसिद्ध ‘नहर-ए-बिहिश्त’ बनाई गई जो दिल्ली के लाल किले तक पानी पहुँचाती थी और जिसे अली मर्दान खान ने निर्मित करवाया था।
23. अकबर के शासनकाल में दक्कन में निम्न पद्धतियों में से कौन-सा भू-राजस्व वसूली का प्रचलित आधार था?
(a) कनकूत
(b) हल की संख्या
(c) जब्त
(d) गल्लाबख्शी
U.P.P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
अकबर के शासनकाल में उत्तर भारत में टोडरमल की ‘जब्त’ पद्धति लागू थी, किंतु दक्कन में यह व्यवस्था नहीं थी। दक्कन में किसान ‘हल की संख्या’ के आधार पर राज्य को भू-राजस्व देते थे — अर्थात् जितने हल जोते जाते, उतने के अनुसार कर निर्धारित होता था। यह एक पुरानी और सरल पद्धति थी जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टोडरमल की जब्त पद्धति केवल उन क्षेत्रों में लागू होती थी जहाँ नकद अर्थव्यवस्था विकसित थी और उपज की पिछले दस वर्षों की दरों का आँकड़ा उपलब्ध हो — इसीलिए इसे ‘दहसाला बंदोबस्त’ भी कहते हैं।
24. सूची – I को सूची – II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
सूची – I (अधिकारी) सूची – II (विहित कर्तव्य)
A. दीवान-ए-तन 1. कार्यालय को संभालने के लिए
B. मुस्तार्फी 2. प्रमुख घटनाओं व फरमानों को सूचीबद्ध करना
C. मुशरिफ 3. जागीर व वेतन को देखना
D. वकियानवीस 4. राज्य की आय-व्यय का निरीक्षण करना

कूट : A B C D
(a) 2 4 1 3
(b) 3 4 1 2
(c) 1 3 2 4
(d) 4 1 2 3
U.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(b)
मुगल प्रशासन में विभिन्न अधिकारियों के कार्य स्पष्ट रूप से विभाजित थे। दीवान-ए-तन जागीर व नकद वेतन की देखरेख करता था; मुस्तार्फी राज्य की समग्र आय-व्यय का महालेखा परीक्षक (Auditor General) जैसा काम करता था; मुशरिफ कार्यालय के दैनिक प्रशासन का प्रभारी होता था; और वकियानवीस महत्वपूर्ण घटनाओं व शाही फरमानों को लिखित रूप में सुरक्षित रखता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वकियानवीस को ‘वाकिया-नवीस’ भी कहा जाता था और यह पद मुगल प्रशासन में सूचना-तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा था — सम्राट इनकी रिपोर्टों के आधार पर साम्राज्य के विभिन्न भागों की स्थिति से अवगत रहता था।
25. मध्यकाल में बंटाई शब्द का अर्थ था-
(a) धार्मिक कर
(b) लगान निर्धारण का तरीका
(c) धन कर
(d) संपत्ति कर
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
बंटाई (जिसे गल्लाबख्शी भी कहते थे) लगान निर्धारण की वह पद्धति थी जिसमें फसल कटाई के बाद उपज को राज्य और किसान के बीच एक निश्चित अनुपात में बाँटा जाता था। शेरशाह सूरी ने तीन पद्धतियाँ अपनाई थीं — (1) नश्क/कनकूत (अनुमान द्वारा), (2) नकदी/जब्ती (नकद भुगतान), और (3) गल्लाबख्शी/बंटाई (उपज में हिस्सा)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बंटाई पद्धति तीन प्रकार से होती थी — खेत बटाई (खड़ी फसल का बँटवारा), लंक बटाई (कटाई के बाद बंडलों का बँटवारा) और रास बटाई (दाने निकालने के बाद बँटवारा)। यह पद्धति किसानों में सर्वाधिक लोकप्रिय थी क्योंकि इसमें फसल खराब होने की स्थिति में राज्य को भी नुकसान उठाना पड़ता था।
26. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
कथन (A) : अकबर ने शेरशाह की तरह राज्य के सिक्कों के प्रचलन को नियमित करने का प्रयास किया।
कारण (R) : शेरशाह की मुद्रा पद्धति के समान, अकबर के समय का ताम्र का प्रमुख सिक्का दाम था।
नीचे दिए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
(a) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
(b) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(d) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
U.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
अकबर ने शेरशाह की त्रिधातु मुद्रा प्रणाली (सोना, चाँदी, ताँबा) को आधार मानकर अपनी मुद्रा व्यवस्था विकसित की। तांबे का प्रमुख सिक्का ‘दाम’ था और 1 रुपये में 40 दाम होते थे। राज्य की आय-व्यय की गणना दाम में ही की जाती थी। आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर (b) दिया था, किंतु विशेषज्ञों के अनुसार सही उत्तर (a) होना चाहिए, क्योंकि कारण (R) वास्तव में कथन (A) की व्याख्या करता है — शेरशाह की पद्धति का अनुसरण करने का प्रमाण ही यह है कि अकबर ने भी ‘दाम’ सिक्का बनाए रखा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के काल में चाँदी के रुपये पर ‘अल्लाहु अकबर’ लिखा जाता था, जो दोहरे अर्थ वाला था — ‘ईश्वर महान है’ और ‘अकबर ईश्वर है’।
27. निम्नलिखित राजाओं में से किसने रामसीता की आकृतियों और ‘रामसीय’ देवनागरी लेख से युक्त कुछ सिक्के चलाए?
(a) भोज
(b) सिद्धराज जयसिंह
(c) जैन उल आबिदीन
(d) अकबर
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(d)
अकबर ने अपनी सुलह-ए-कुल (सर्वधर्म समभाव) की नीति के तहत राम-सीता की आकृतियों और देवनागरी लिपि में ‘रामसिया’ या ‘रामसीय’ अंकित सिक्के चलवाए। यह उसकी धार्मिक सहिष्णुता और हिंदू प्रजा को आत्मसात् करने की नीति का ठोस प्रमाण है। इसी प्रकार अकबर ने कुछ सिक्कों पर ‘सीताराम’ और राधा-कृष्ण जैसे हिंदू प्रतीक भी अंकित करवाए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर ने ‘इलाही’ संवत् (1583 ई.) के नाम से एक नया सौर पंचांग भी चलाया था, जो उसके नवरत्नों में से एक अबुल फजल की सहायता से तैयार किया गया था — यह भी उसकी सार्वभौमिक धर्म-नीति का ही अंग था।
28. मुगल शासन में तांबे का सिक्का कहलाता था-
(a) रुपया
(b) दाम
(c) टंका
(d) शम्सी
U.P. P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(b)
मुगल काल में टकसालों से तीन धातुओं के सिक्के ढाले जाते थे — सोने का ‘मोहर’, चाँदी का ‘रुपया’ और तांबे का ‘दाम’। दाम रुपये के 40वें भाग के बराबर होता था और आम जनजीवन में सर्वाधिक प्रचलित था। अकबर के बाद जहाँगीर ने सिक्कों पर नवीनता लाई — उसने अपने और नूरजहाँ के नाम के सिक्के एक साथ जारी किए, जो किसी मुगल महिला के नाम पर जारी होने वाले पहले सिक्के थे। इसके अतिरिक्त जहाँगीर ने ‘राशि सिक्के’ (Zodiac coins) भी जारी किए जो बारह राशियों के चिह्नों से अंकित थे और इन्हें उच्च कलात्मक मूल्य का माना जाता है।

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