मद्रास नेटिव एसोसिएशन (1852) : स्थापना, उद्देश्य, प्रमुख गतिविधियाँ एवं पतन

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मद्रास नेटिव एसोसिएशन (1852)

➣ मद्रास नेटिव एसोसिएशन की स्थापना 26 फरवरी 1852 ई. को मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी द्वारा की गई थी। इसे मद्रास प्रेसीडेंसी की प्रथम प्रमुख राजनीतिक संस्था माना जाता है।

➣ इसके प्रथम अध्यक्ष स्वयं गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी तथा प्रथम सचिव पी. सोमसुंदरम चेट्टियार थे।

➣ 19वीं शताब्दी के मध्य तक बंगाल में ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन (1851) जैसी संस्थाओं के माध्यम से राजनीतिक गतिविधियाँ संगठित रूप लेने लगी थीं, जबकि मद्रास प्रेसीडेंसी में ऐसी कोई प्रभावशाली भारतीय राजनीतिक संस्था नहीं थी।

➣ दूसरी ओर ब्रिटिश प्रशासनिक नीतियों, भूमि-राजस्व व्यवस्था, सरकारी सेवाओं में भारतीयों की सीमित भागीदारी तथा ईसाई मिशनरी गतिविधियों को लेकर शिक्षित भारतीयों में असंतोष बढ़ रहा था। इन परिस्थितियों ने एक स्वतंत्र राजनीतिक संगठन की आवश्यकता को जन्म दिया।

➣ प्रारम्भ में गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी की योजना ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की मद्रास शाखा स्थापित करने की थी, किन्तु बाद में उन्होंने एक स्वतंत्र राजनीतिक संस्था गठित करने का निर्णय लिया।

➣ इसी निर्णय के परिणामस्वरूप मद्रास नेटिव एसोसिएशन अस्तित्व में आई, जिसने दक्षिण भारत में संगठित राजनीतिक गतिविधियों की नींव रखी।

➣ मद्रास नेटिव एसोसिएशन की स्थापना से पहले ही गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी सार्वजनिक जीवन एवं पत्रकारिता में सक्रिय हो चुके थे। उन्होंने 1844 ई. (कुछ स्रोतों के अनुसार 2 अक्टूबर 1844) में द क्रिसेंट नामक पत्रिका की स्थापना की थी।

➣ यह मद्रास की प्रारम्भिक भारतीय-स्वामित्व वाली पत्रिकाओं में से एक थी। इस पत्रिका ने सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने तथा आगे चलकर राजनीतिक संगठन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

➣ द क्रिसेंट का उद्देश्य हिन्दू समाज के हितों की रक्षा, ईसाई मिशनरी गतिविधियों की आलोचना तथा जनमत को जागरूक बनाना था। इसी पत्रकारिता एवं सार्वजनिक जीवन के अनुभव ने गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी को एक संगठित राजनीतिक संस्था की आवश्यकता का अनुभव कराया।

➣ अपनी स्थापना के तुरंत बाद ही मद्रास नेटिव एसोसिएशन ने मद्रास प्रेसीडेंसी से संबंधित प्रशासनिक, कृषि एवं सामाजिक समस्याओं को संगठित रूप से उठाना प्रारम्भ किया।

➣ आगे चलकर इसकी गतिविधियों के कारण टॉर्चर कमीशन (1854) जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाए गए तथा इसने दक्षिण भारत में राजनीतिक चेतना के विकास का आधार तैयार किया।

▪ कुछ पुराने स्रोतों में मद्रास नेटिव एसोसिएशन की स्थापना 1849 ई. बताई गई है, किंतु अधिकांश आधुनिक एवं प्रामाणिक स्रोत (जैसे Encyclopaedia Britannica) 26 फरवरी 1852 ई. को ही सही मानते हैं।
▪ परीक्षा में यदि 1849 एवं 1852 दोनों विकल्प हों, तो 1852 ई. को अधिक प्रामाणिक माना जाना चाहिए।

उद्देश्य

  • मद्रास प्रेसीडेंसी के भारतीयों के हितों एवं अधिकारों की रक्षा करना।
  • ब्रिटिश सरकार के समक्ष भारतीयों की समस्याओं एवं माँगों को संगठित रूप से प्रस्तुत करना।
  • रैयतवाड़ी व्यवस्था, जमींदारी व्यवस्था तथा अन्य कृषि एवं राजस्व नीतियों में सुधार की माँग करना।
  • सरकारी सेवाओं एवं प्रशासन में भारतीयों को अधिक प्रतिनिधित्व दिलाना।
  • शिक्षा संस्थानों में बढ़ते ईसाई मिशनरी प्रभाव तथा जबरन धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों का विरोध करना।
  • संवैधानिक, शांतिपूर्ण एवं वैधानिक उपायों के माध्यम से प्रशासनिक सुधारों की माँग करना तथा जनमत को जागरूक बनाना।

प्रमुख गतिविधियाँ

➣ मद्रास नेटिव एसोसिएशन ने अपनी स्थापना के कुछ ही महीनों बाद दिसंबर 1852 ई. में ब्रिटिश संसद को एक विस्तृत याचिका भेजी। इसमें मद्रास प्रेसीडेंसी की प्रशासनिक, कृषि एवं राजस्व संबंधी समस्याओं का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया।

➣ इस याचिका में विशेष रूप से रैयतवाड़ी व्यवस्था एवं जमींदारी व्यवस्था के कारण किसानों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला गया। साथ ही, भूमि-राजस्व की वसूली के दौरान अधिकारियों द्वारा किसानों पर किए जाने वाले शारीरिक उत्पीड़न एवं अन्य अत्याचारों का भी विस्तार से उल्लेख किया गया।

➣ संस्था ने अपनी याचिका में परम्परागत ग्राम-व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की भी माँग की। उसका मत था कि ग्राम-स्तर की पारंपरिक संस्थाओं को पुनः सशक्त बनाकर प्रशासन को अधिक उत्तरदायी एवं प्रभावी बनाया जा सकता है।

➣ 25 फरवरी 1853 ई. को इस याचिका को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में अर्ल ऑफ एलनबरो द्वारा प्रस्तुत किया गया। इससे मद्रास प्रेसीडेंसी की समस्याएँ पहली बार ब्रिटिश संसद में व्यवस्थित रूप से चर्चा का विषय बनीं।

➣ इस याचिका के प्रभाव से ब्रिटिश सरकार ने सितंबर 1854 ई. में टॉर्चर कमीशन का गठन किया। इस आयोग का उद्देश्य राजस्व अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ किए जाने वाले उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार की जाँच करना था। कांग्रेस-पूर्व राजनीतिक संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत याचिकाओं के परिणामस्वरूप गठित यह प्रारम्भिक एवं महत्वपूर्ण जाँच आयोगों में से एक माना जाता है।

➣ चार्टर एक्ट, 1853 के पारित होने के बाद मद्रास नेटिव एसोसिएशन ने 1855 ई. में ब्रिटिश संसद को एक दूसरी विस्तृत याचिका भेजी। इस पर लगभग 14,000 भारतीयों के हस्ताक्षर थे, जो उस समय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जनसमर्थन का प्रमाण माने जाते हैं।

➣ इस याचिका में संस्था ने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन करने की माँग की। संस्था का मत था कि कंपनी-शासन भारतीयों के हितों की रक्षा करने में असफल रहा है, इसलिए प्रशासन में मूलभूत परिवर्तन आवश्यक है।

➣ 14 अप्रैल 1856 को गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी तथा अन्य भारतीयों द्वारा हस्ताक्षरित एक और याचिका हाउस ऑफ लॉर्ड्स में प्रस्तुत की गई, जिसमें भारत के प्रशासन से संबंधित विभिन्न शिकायतों एवं सुधारों की आवश्यकता को पुनः रेखांकित किया गया।

➣ 1858 ई. में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के माध्यम से भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर सीधे ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया गया। यद्यपि यह परिवर्तन मुख्यतः 1857 के विद्रोह के परिणामस्वरूप हुआ, फिर भी कंपनी-शासन को समाप्त करने की माँग मद्रास नेटिव एसोसिएशन सहित कई प्रारम्भिक राजनीतिक संस्थाओं द्वारा पहले ही उठाई जा चुकी थी।

➣ 1859 ई. में संस्था ने भारत सचिव एडवर्ड हेनरी स्टेनली को एक याचिका भेजी। इसमें शिक्षा संस्थानों में बढ़ते ईसाई मिशनरी प्रभाव, बाइबिल शिक्षा को प्रोत्साहन तथा हिन्दू क्षेत्रों में चर्च निर्माण जैसे विषयों पर चिंता व्यक्त की गई। यह संस्था की अंतिम प्रमुख सार्वजनिक गतिविधियों में से एक थी।

➣ गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी की सार्वजनिक सेवाओं को देखते हुए उन्हें आगे चलकर मद्रास विधान परिषद का सदस्य नियुक्त किया गया। वे इस प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त होने वाले दूसरे भारतीय थे, जो उस समय भारतीय नेतृत्व की बढ़ती स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण संकेत था।

पतन

➣ 1859 ई. के बाद मद्रास नेटिव एसोसिएशन की गतिविधियाँ धीरे-धीरे कम होने लगीं। प्रारम्भिक वर्षों में जिस सक्रियता के साथ संस्था ने सार्वजनिक प्रश्नों को उठाया था, वह आगे चलकर बनाए रखना संभव नहीं हो सका।

➣ संस्था के पतन का कोई एक निश्चित कारण नहीं था, किन्तु अधिकांश इतिहासकार इसके पीछे गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी की व्यक्तिगत वित्तीय कठिनाइयों को प्रमुख कारण मानते हैं। उन्होंने अपने सार्वजनिक एवं पत्रकारिता कार्यों, विशेषकर द क्रिसेंट पत्रिका के संचालन पर पर्याप्त धन व्यय किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई।

➣ संस्थापक के आर्थिक एवं व्यक्तिगत संकट का सीधा प्रभाव संस्था की गतिविधियों पर पड़ा। परिणामस्वरूप संगठन की सक्रियता लगातार घटती गई और नए नेतृत्व का भी प्रभावी विकास नहीं हो सका।

➣ अंततः 1867 ई. में मद्रास नेटिव एसोसिएशन को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया। इसके साथ ही दक्षिण भारत की पहली प्रमुख राजनीतिक संस्था का कार्यकाल समाप्त हो गया।

➣ यद्यपि यह संस्था अधिक समय तक अस्तित्व में नहीं रही, फिर भी इसने दक्षिण भारत में संगठित राजनीतिक गतिविधियों की ऐसी परंपरा स्थापित की, जिसे आगे चलकर मद्रास महाजन सभा (1884) जैसी संस्थाओं ने आगे बढ़ाया।

महत्वपूर्ण तथ्य

सारणी

विषयविवरण
स्थापना तिथि26 फरवरी 1852 ई. (कुछ पुराने स्रोतों में 1849, किंतु 1852 अधिक प्रामाणिक)
स्थानमद्रास (वर्तमान चेन्नई)
संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्षगज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी
प्रथम सचिवपी. सोमसुंदरम चेट्टियार
प्रेरणाप्रारम्भ में ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन (1851) की मद्रास शाखा स्थापित करने की योजना, बाद में स्वतंत्र संस्था का गठन
प्रमुख पत्रिकाद क्रिसेंट (The Crescent), स्थापना 1844 ई.
प्रमुख याचिकाएँ1852 (रैयतवाड़ी व्यवस्था, कृषकों की स्थिति एवं राजस्व प्रताड़ना), 1855 (ब्रिटिश क्राउन के अधीन शासन की माँग, लगभग 14,000 हस्ताक्षर), 1859 (ईसाई मिशनरी प्रभाव का विरोध)
महत्वपूर्ण परिणामटॉर्चर कमीशन (सितंबर 1854) का गठन
पतन1867 ई. में वित्तीय कठिनाइयों के कारण संस्था भंग
उत्तराधिकारी संस्थामद्रास महाजन सभा (1884)
विशेषतामद्रास प्रेसीडेंसी (दक्षिण भारत) की प्रथम प्रमुख राजनीतिक संस्था

कालक्रम

वर्षघटना
1844द क्रिसेंट (The Crescent) पत्रिका की स्थापना
26 फरवरी 1852मद्रास नेटिव एसोसिएशन की स्थापना
दिसंबर 1852ब्रिटिश संसद को प्रथम याचिका
25 फरवरी 1853याचिका हाउस ऑफ लॉर्ड्स में प्रस्तुत
सितंबर 1854टॉर्चर कमीशन का गठन
1855दूसरी याचिका (लगभग 14,000 हस्ताक्षर)
14 अप्रैल 1856एक अन्य याचिका हाउस ऑफ लॉर्ड्स में प्रस्तुत
1859भारत सचिव एडवर्ड हेनरी स्टेनली को याचिका
1867मद्रास नेटिव एसोसिएशन भंग
1884मद्रास महाजन सभा की स्थापना

परीक्षा सार

➣ मद्रास नेटिव एसोसिएशन की स्थापना 26 फरवरी 1852 को गज़ुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी ने मद्रास में की; वे इसके प्रथम अध्यक्ष भी थे।
➣ पी. सोमसुंदरम चेट्टियार इसके प्रथम सचिव थे।
➣ प्रारम्भिक योजना ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की मद्रास शाखा बनाने की थी, बाद में स्वतंत्र संस्था बनाई गई।
➣ दिसंबर 1852 की याचिका में रैयतवाड़ी व्यवस्था, राजस्व प्रताड़ना एवं कृषकों की समस्याएँ उठाई गईं।
➣ इस याचिका के बाद सितंबर 1854 में टॉर्चर कमीशन गठित किया गया।
➣ 1855 की याचिका (लगभग 14,000 हस्ताक्षर) में ईस्ट इंडिया कंपनी के स्थान पर ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष शासन की माँग की गई।
➣ 1859 में संस्था ने ईसाई मिशनरी प्रभाव एवं बाइबिल शिक्षा के संबंध में भारत सचिव को याचिका भेजी।
➣ 1867 में संस्था भंग हो गई; आगे चलकर मद्रास महाजन सभा (1884) ने दक्षिण भारत के राजनीतिक नेतृत्व को आगे बढ़ाया।

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