❑ जैन परम्परा के अनुसार इस धर्म में 24 तीर्थंकर हुए हैं।
❑ जैन धर्म के पहले तीर्थंकर एवं संस्थापक ऋषभदेव थे। अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी के अनुयायी निर्ग्रन्थ कहलाते थे।
❑ महावीर जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक थे।
❑ महावीर स्वामी का जन्म 540 ई.पू. में वैशाली के कुण्डग्राम में हुआ था, यह बिहार राज्य में है।
❑ उनकी माता त्रिशला वैशाली के लिच्छवी गणराज्य के प्रमुख चेटक की बहन थी।
❑ महावीर स्वामी को जम्भृक ग्राम के निकट, ऋजुपालिका नदी के तट पर ज्ञान प्राप्त हुआ था।
❑ महावीर की पत्नी का नाम यशोदा था।
❑ यशोदा से जन्म लेने वाली महावीर की पुत्री प्रियदर्शना का विवाह जमालि नामक क्षत्रिय से हुआ, वह महावीर का प्रथम शिष्य था।
❑ जैन धर्म में पूर्ण ज्ञान को कैवल्य ज्ञान कहा गया है।
❑ पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक क्षत्रियों के संघ के प्रधान थे। उनके बड़े भाई नंदिवधन थे।
❑ महावीर स्वामी की मृत्यु पावापुरी में 468 ई. पू. में हुई थी। बुद्ध की मृत्यु कुशीनारा में हुई थी।
❑ बौद्ध साहित्य में महावीर को निगण्ठ-नाथंपुत्त कहा गया है।
❑ जैन भिक्षुओं को नग्न रहने की शिक्षा महावीर स्वामी ने दी थी।
❑ पार्श्वनाथ के चार व्रतों अहिंसा (हिंसा नहीं करना), अमृषा या झूठ न बोलना, अचौर्य या चोरी न करना, अपरिग्रह या संपत्ति अर्जित नहीं करना में महावीर ने पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य या इंद्रिय निग्रह करना जोड़ा।
❑ जैन धर्म का सबसे महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त अहिंसा था।
❑ जैन साहित्य को अंग कहते हैं।
❑ जैन धर्म के मौलिक ग्रन्थ चौदह पूर्व कहलाते हैं।
❑ जैन धर्म के अनुसार निर्वाण प्राप्ति के लिये त्रिरत्न का अनुशीलन आवश्यक जैन धर्म का सबसे बड़ा केन्द्र चम्पानगरी था।
❑ शुरू में जैनियों द्वारा प्राकृत भाषा को अपनाया गया।
❑ महावीर स्वामी ने अपना प्रथम उपदेश राजगीर में (पालि भाषा में) दिया था।
❑ कर्नाटक में जैन धर्म को चन्द्रगुप्त मौर्य ले गया।
जैन सिद्धों की पांच श्रेणियाँ1. तीर्थंकर-जिसने मोक्ष प्राप्त किया हो।
2. अर्हत-जो निर्वाण प्राप्ति की ओर अग्रसर हो ।
3. आचार्य-जो जैन भिक्षु समूह का प्रमुख हो ।
4. उपाध्याय-जैन शिक्षक।
5. साधु-सभी जैन भिक्षु
❑ श्रवणबेलगोला में गोमतेश्वर की मूर्ति चामुण्डराय ने बनवाई।
❑ कलिंग राजा खारवेल तथा अजातशत्रु का पुत्र उदायिन जैन धर्म के अनुयायी थे।
❑ महावीर स्वामी ने प्राकृत भाषा को प्रचार का माध्यम बनाया।
❑ मथुरा मूर्तिकला के विकास में जैन मत का सर्वाधिक योगदान रहा।
❑ जैन धर्म दो सम्प्रदायों, श्वेताम्बर एवं दिगम्बर में बँट गया।
❑ जैन धर्म का प्रसिद्ध सिद्धान्त स्यावाद (सप्तभंगी ज्ञान) या अनेकान्तवाद है।
❑ जैनियों द्वारा शरीर को भूखा रखकर प्राण त्यागने को सल्लेखना विधि कहा जाता है।
❑ जैन मठों को बसदि कहा जाता था।
❑ महावीर की मृत्यु के बाद सुधर्मन, जो गंधर्व था, जैन धर्मगुरु बना।
❑ जैन धर्म में ईश्वर एवं आत्मा की मान्यता नहीं है।
❑ जैन तीर्थंकर ऋषभदेव तथा अरिष्टनेमि का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।
❑ विष्णु पुराण तथा भागवत पुराण में ऋषभदेव का उल्लेख नारायण के अवतार के रूप में मिलता है।
❑ भद्रबाहु एवं उनके अनुयायियों को दिगम्बर कहा गया। ये दक्षिणी जैनी कहे जाते थे।
❑ स्थूलभद्र एवं उनके अनुयायियों को श्वेताम्बर कहा गया।
❑ जैन अनुश्रुतियों के अनुसार पार्श्वनाथ को 100 वर्ष की आयु में सम्मेद पर्वत पर निर्वाण प्राप्त हुआ।
❑ जैन धर्मानुसार ज्ञान के तीन स्रोत हैं- (1) प्रत्यक्ष (2) अनुमान (3) तीर्थंकरों के वचन।
❑ महावीर के जीवन काल में ही 10 गणधर की मृत्यु हो गयी, महावीर के बाद केवल सुधर्मण जीवित था।
❑ खारवेल के हाथी गुम्फा की गुफाओं में प्रारंभिक जैन के अवशेष मिलते हैं।
❑ जैन धर्म पुनर्जन्म एवं कर्मवाद में विश्वास करता है। उनके अनुसार कर्मफल ही जन्म तथा मृत्यु का कारण है।
❑ राजस्थान में माउण्ट आबु पर दिलवाड़ा मंदिर का निर्माण जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा किया गया।
❑ जैन परम्परा के अनुसार अरिष्टनेमि कृष्ण के समकालीन थे।
❑ चम्पा के शासक दधिवाहन की पुत्री चन्दना महावीर की पहली महिला भिक्षुणी थी।
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