1. सिंधु घाटी संस्कृति वैदिक सभ्यता से भिन्न थी, क्योंकि-
(a) इसके पास विकसित शहरी जीवन की सुविधाएं थीं।
(b) इसके पास चित्रलेखीय लिपि थी।
(c) इसके पास लोहे और रक्षा शस्त्रों के ज्ञान का अभाव था।
(d) उपर्युक्त सभी।
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(d)
सिंधु घाटी संस्कृति कई महत्वपूर्ण पहलुओं में वैदिक सभ्यता से अलग थी। सिंधु सभ्यता एक विकसित नगरीय सभ्यता थी जिसमें सुनियोजित नगर, ढकी हुई नालियाँ और बहुमंजिली इमारतें पाई जाती थीं, जबकि वैदिक सभ्यता मुख्यतः ग्रामीण एवं पशुपालक थी। सिंधु सभ्यता की लिपि भावचित्रात्मक (Pictographic) थी जिसे अभी तक पूर्णतः पढ़ा नहीं जा सका है, जबकि वैदिक साहित्य संस्कृत भाषा में रचा गया। सिंधु सभ्यता में लोहे का कोई प्रमाण नहीं मिला — यह एक कांस्य युगीन सभ्यता थी — जबकि वैदिक काल के उत्तरार्ध में लोहे का प्रयोग होने लगा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिंधु सभ्यता में घोड़े के अस्तित्व के प्रमाण अत्यंत सीमित और विवादास्पद हैं, जबकि वैदिक सभ्यता में घोड़ा (अश्व) अत्यंत महत्वपूर्ण था और अश्वमेध यज्ञ इसका प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा, सिंधु सभ्यता में अग्नि-वेदिका (Sacrificial Fire) के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले, जबकि वैदिक धर्म में यज्ञ-अग्नि केंद्रीय भूमिका निभाती थी।
2. हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा
जोड़ा सही नहीं है ?
(a) एम. रफीक मुगल – हड़प्पा सभ्यता ने मेसोपोटामिया सभ्यता से प्रेरणा ली
(b) ई. जे.एच. मैके – सुमेर से लोगों का पलायन
(c) मार्टीमर ह्वीलर – पश्चिमी एशिया से सभ्यता के विचार’ का प्रवसन
(d) अमलानंद घोष – हड़प्पा सभ्यता का उद्भव पूर्व हड़प्पा सभ्यता की परिपक्वता के परिणामस्वरूप हुआ
R.A.S. / R.T.S. (Pre) (Re-Exam) 2013
उत्तर-(a)
हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों में मतभेद रहा है। ई. जे. एच. मैके और मार्टीमर ह्वीलर जैसे विद्वान बाहरी प्रभाव के सिद्धांत में विश्वास रखते थे। अमलानंद घोष ने स्थानीय उत्पत्ति का समर्थन करते हुए कहा कि हड़प्पा सभ्यता पूर्व-हड़प्पा संस्कृतियों की क्रमिक परिपक्वता का परिणाम थी। एम. रफीक मुगल ने भी स्थानीय उत्पत्ति के सिद्धांत का समर्थन किया और यह स्थापित किया कि हड़प्पा सभ्यता का उद्भव रावी नदी के क्षेत्र में हुआ — उन्होंने मेसोपोटामिया से प्रेरणा के विचार का खंडन किया। इसीलिए विकल्प (a) में दिया गया जोड़ा गलत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा सभ्यता और मेसोपोटामिया सभ्यता के बीच व्यापारिक संबंधों के साक्ष्य मिले हैं — मेसोपोटामिया के अभिलेखों में “मेलुहा” का उल्लेख है, जिसे अधिकांश विद्वान सिंधु क्षेत्र से जोड़ते हैं। इसके अलावा, हड़प्पा से पूर्व की “हाकरा संस्कृति” को रफीक मुगल ने सिंधु सभ्यता का प्रारंभिक चरण माना है।
3.मानव समाज विलक्षण है, क्योंकि वह मुख्यतया आश्रित होता है-
(a) संस्कृति पर
(b) अर्थव्यवस्था पर
(c) धर्म पर
(d) विज्ञान पर
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(b)
मानव समाज की विशिष्टता इस बात में निहित है कि वह अपनी जीविका, संगठन और विकास के लिए मुख्यतः अर्थव्यवस्था पर निर्भर रहता है। मानव इतिहास के विभिन्न चरण — जैसे खाद्य-संग्राहक समाज, कृषि समाज और औद्योगिक समाज — इसी अर्थव्यवस्था के बदलाव की कहानी हैं। जैसे-जैसे उत्पादन के साधन और तरीके बदले, सामाजिक संरचना, वर्ग-विभाजन और सांस्कृतिक मूल्य भी बदलते गए। धर्म, विज्ञान और संस्कृति ये सभी भी अर्थव्यवस्था से प्रभावित होते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) के सिद्धांत के अनुसार समाज की आर्थिक संरचना (Base) ही उसकी राजनीतिक, कानूनी और वैचारिक संरचना (Superstructure) को निर्धारित करती है। इसी आधार पर मार्क्स ने मानव इतिहास को दास समाज, सामंती समाज, पूँजीवादी समाज आदि चरणों में विभाजित किया।
4. सिंधु घाटी सभ्यता को आर्यों से पूर्व की रखे जाने का महत्वपूर्ण कारक है-
(a) लिपि
(b) नगर नियोजन
(c) तांबा
(d) मृद्भाड
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(d)
पुरातात्विक खुदाइयों में विभिन्न कालक्रमों में पाए गए मृद्भांड (मिट्टी के बर्तन) यह प्रमाणित करते हैं कि सिंधु घाटी सभ्यता आर्यों से पुरानी थी। हड़प्पा सभ्यता से संबंधित मृद्भांड लाल रंग के होते थे जिन पर काली आकृतियाँ चित्रित होती थीं। इसके विपरीत, आर्यों से संबंधित मृद्भांड धूसर (Grey) रंग के थे, विशेषकर “चित्रित धूसर मृद्भांड” (Painted Grey Ware – PGW) जो बाद के काल के हैं। इस भिन्नता के आधार पर पुरातत्वविदों ने दोनों सभ्यताओं के कालक्रम को अलग-अलग निर्धारित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: “चित्रित धूसर मृद्भांड संस्कृति” (PGW Culture) का काल लगभग 1200–600 ई.पू. माना जाता है और इसे महाभारत काल से जोड़ा जाता है। इससे पहले का “उत्तरी काले पॉलिश मृद्भांड” (Northern Black Polished Ware – NBPW) मौर्यकाल से संबंधित है। इस प्रकार मृद्भांड पुरातात्विक काल-निर्धारण का सबसे विश्वसनीय साधन हैं।
5.सिंधु घाटी के निवासियों की सभ्यता को जानने का मूल स्रोत है,
वहां पाई गई
(a) मोहरें
(b) बर्तन, जेवर, हथियार तथा औजार
(c) मंदिर
(d) लिपि
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में जानकारी का सबसे प्रमुख और समृद्ध स्रोत वहाँ से प्राप्त मोहरें हैं। अब तक लगभग 3500 से अधिक मोहरें खोजी जा चुकी हैं। इन मोहरों पर विभिन्न पशुओं (जैसे एकशृंगी पशु — Unicorn, हाथी, बैल) और लिपि के चिह्न अंकित हैं, जो तत्कालीन धार्मिक विश्वासों, व्यापारिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रकाश डालते हैं। ये मोहरें प्रायः स्टेटाइट (Steatite) पत्थर से बनी हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिंधु मोहरों में सर्वाधिक प्रचलित चित्र “एकशृंगी पशु” (Unicorn) का है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त “पशुपति मुहर” अत्यंत प्रसिद्ध है जिसमें एक योगी मुद्रा में बैठे देवता के चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा दर्शाए गए हैं — इन्हें प्रोटो-शिव (आद्य शिव) के रूप में पहचाना जाता है।
6. हड़प्पा निम्नलिखित में से किस सभ्यता से संबद्ध है?
(a) सुमेरियन सभ्यता
(b) सिन्धु घाटी सभ्यता
(c) वैदिक सभ्यता
(d) मेसोपोटामिया सभ्यता
M.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(b)
हड़प्पा, सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख पुरास्थल है जो वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रावी नदी के तट पर स्थित है। 1921 में दयाराम साहनी के नेतृत्व में इस स्थल की पहली बार व्यवस्थित खुदाई की गई। चूँकि इस सभ्यता के प्रमाण सर्वप्रथम यहीं से मिले, इसलिए इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं। यह सभ्यता कालानुक्रम में मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं की समकालीन थी, किन्तु उनसे स्वतंत्र रूप से विकसित हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा सभ्यता का विस्तार लगभग 12.5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था, जो मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं से भी बड़ा था। इस सभ्यता के प्रमुख नगरों में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा और राखीगढ़ी शामिल हैं। राखीगढ़ी (हरियाणा) को हाल के उत्खनन के आधार पर इस सभ्यता का सबसे बड़ा ज्ञात नगर माना जाने लगा है।
7. सिंधु घाटी की सभ्यता गैर आर्य थी, क्योंकि-
(a) वह नगरीय सभ्यता थी।
(b) उसकी अपनी लिपि थी।
(c) उसकी खेतिहर अर्थव्यवस्था थी।
(d) उसका विस्तार नर्मदा घाटी तक था।
U.P.P.S.C. (GIC ) 2010
उत्तर-(a)
सिंधु घाटी सभ्यता को गैर-आर्य इसलिए माना जाता है क्योंकि वह एक परिपक्व नगरीय सभ्यता थी, जबकि आर्य मूलतः एक ग्रामीण और पशुचारक समाज थे। आर्यों के वैदिक साहित्य में नगरों का वर्णन प्रायः शत्रु के “पुर” (किलेबंद नगर) के रूप में है, जिसे इंद्र नष्ट करते हैं — यह सिंधु नगरों की ओर इशारा हो सकता है। इसके अलावा, सिंधु सभ्यता में अश्व के प्रमाण नगण्य हैं, जबकि आर्य संस्कृति में घोड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिंधु सभ्यता की नगर योजना अत्यंत वैज्ञानिक थी — नगरों को “ग्रिड पैटर्न” में बसाया गया था, सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और घरों में स्नानागार तथा उन्नत जल-निकासी प्रणाली थी। यह नगर नियोजन की दक्षता किसी भी समकालीन सभ्यता में नहीं पाई जाती।
8.सिंधु सभ्यता संबंधित है-
(a) प्रागैतिहासिक युग से
(b) आद्य-ऐतिहासिक युग से
(c) ऐतिहासिक युग से
(d) मेसोपोटामिया सभ्यता
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
39th B.P.S. C. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
सिंधु सभ्यता आद्य-ऐतिहासिक (Proto-Historic) काल से संबंधित है। इतिहास के कालखंडों में “प्रागैतिहासिक” वह काल है जिसमें लेखन कला का अभाव होता है, “ऐतिहासिक” वह काल है जिसकी लिपि पढ़ी जा चुकी हो, और “आद्य-ऐतिहासिक” वह मध्यवर्ती स्थिति है जिसमें लेखन के साक्ष्य तो हैं किन्तु उन्हें अभी पूरी तरह समझा नहीं जा सका। सिंधु लिपि में लगभग 400-600 चिह्न हैं, परन्तु आज तक इसे पूर्णतः पढ़ा नहीं जा सका है, इसीलिए यह आद्य-ऐतिहासिक श्रेणी में आती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिंधु लिपि को दाईं से बाईं ओर (Right to Left) लिखा जाता था और कभी-कभी “बुस्त्रोफेदन” शैली में भी — जिसमें एक पंक्ति दाईं से बाईं और अगली पंक्ति बाईं से दाईं लिखी जाती है। इस लिपि को पढ़ने के लिए दुनिया भर में सैकड़ों प्रयास हो चुके हैं, किन्तु अभी तक कोई सर्वमान्य समाधान नहीं मिला है।
9.हड़प्पा संस्कृति की जान का प्रमुख स्रोत है—
(a) शिलालेख
(b) पकी मिट्टी की मुहरों पर अंकित लेख
(c) पुरातात्विक खुदाई
(d) उपर्युक्त सभी
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
U.P.P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(c)
हड़प्पा संस्कृति की जानकारी का सर्वप्रमुख स्रोत पुरातात्विक उत्खनन है। चूँकि सिंधु लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है, इसलिए शिलालेखों और मुहरों पर अंकित लेखों का उपयोग इतिहास लेखन में नहीं हो सकता। खुदाई में प्राप्त अवशेष — जैसे भवन, मुहरें, मिट्टी के बर्तन, आभूषण, औजार, और मूर्तियाँ — ही इस सभ्यता के सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक जीवन पर प्रकाश डालते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा सभ्यता का पहला उत्खनन 1921 में हड़प्पा में दयाराम साहनी द्वारा और 1922 में मोहनजोदड़ो में राखालदास बनर्जी द्वारा किया गया था। दोनों खुदाइयाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तत्कालीन महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देशन में हुईं। 1924 में जॉन मार्शल ने ही आधिकारिक रूप से इस सभ्यता की घोषणा विश्व के समक्ष की थी।
10.निम्नलिखित में से कौन-सा सिंधु घाटी की सभ्यता पर प्रकाश डालता है?
(a) शिलालेख
(b) पुरातत्व संबंधी खुदाई
(c) बर्तनों की मुहरों पर लिखावट
(d) धार्मिक ग्रंथ
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(b)
सिंधु घाटी सभ्यता पर सबसे अधिक प्रकाश पुरातात्विक खुदाइयों से पड़ता है। धार्मिक ग्रंथ इस सभ्यता के बारे में मौन हैं, शिलालेख नहीं पाए गए हैं, और मुहरों की लिपि अभी अपठित है। इसीलिए उत्खनन से प्राप्त भौतिक साक्ष्य ही एकमात्र विश्वसनीय जानकारी का स्रोत हैं। मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार (Great Bath), हड़प्पा के अन्नागार (Granaries), और लोथल का बंदरगाह इसी पुरातात्विक खुदाई के परिणाम हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मोहनजोदड़ो का “विशाल स्नानागार” (Great Bath) 11.88 मीटर लंबा, 7.01 मीटर चौड़ा और 2.43 मीटर गहरा है और इसे जल-रोधी बनाने के लिए पक्की ईंटों के साथ जिप्सम का प्रयोग किया गया था — यह तत्कालीन इंजीनियरिंग की उत्कृष्टता का प्रमाण है। यह संभवतः धार्मिक स्नान-अनुष्ठानों के लिए प्रयुक्त होता था।
11. निम्नलिखित पशुओं में से किस एक हड़प्पा संस्कृति में पाई
मुहरों और टेराकोटा कलाकृतियों में निरूपण (Representation)
नहीं हुआ था ?
(a) गाय
(b) हाथी
(c) गैंडा
(d) बाघ
I.A.S. (Pre) 2001
उत्तर-(a)
हड़प्पा सभ्यता की मुहरों एवं टेराकोटा कलाकृतियों में गाय का चित्रण नहीं मिलता है। इन कलाकृतियों में हाथी, गैंडा, बाघ, भेड़, हिरण और एकश्रृंग काल्पनिक पशु (Unicorn) जैसे जीवों का चित्रण मिलता है। गाय को धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व बाद के वैदिक काल में प्राप्त हुआ, जहाँ उसे ‘अघ्न्या’ (न मारी जाने योग्य) कहा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा मुहरों में सबसे अधिक चित्रित पशु एकश्रृंग बैल (Unicorn Bull) है, जो शायद किसी धार्मिक या व्यापारिक प्रतीक के रूप में प्रयुक्त होता था। इसके अतिरिक्त, मोहनजोदड़ो से प्राप्त ‘पशुपति मुहर’ में एक ध्यानमग्न देवता को हाथी, गैंडा, बाघ और भैंस जैसे पशुओं से घिरा दर्शाया गया है, जिसे प्रोटो-शिव का रूप माना जाता है।
12. सूची-1 (प्राचीन रथल) को सूची-II (पुरातत्वीय खोज) के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही
सूची-I ( प्राचीन स्थल) सूची-II ( पुरातत्वीय खोज)
A. लोथल – 1. जुता हुआ खेत
B. कालीबंगा – 2. गोदीबाड़ा
C. धौलावीरा – 3. पक्की मिट्टी की बनी हुई हल की प्रतिकृति
D. बनावली – 4. हड़प्पन लिपि के बड़े आकार के दस चिह्नों वाला एक शिलालेख
कूट : उत्तर चुनिए-
A B C D
(a) 1 2 3 4
(b) 2 1 4 3
(c) 1 2 4 3
(d) 2 1 3 4
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(b)
इन हड़प्पाकालीन स्थलों और उनकी पुरातात्त्विक खोजों का सुमेलन इस प्रकार है — लोथल (गुजरात, खम्भात की खाड़ी के निकट) से विश्व की प्राचीनतम गोदीबाड़ा (Dockyard) के अवशेष प्राप्त हुए हैं। कालीबंगा (राजस्थान, घग्गर नदी तट) से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं। धौलावीरा (गुजरात, कच्छ) से हड़प्पा लिपि के बड़े आकार के 10 चिह्नों वाला शिलालेख मिला है। बनावली (हरियाणा, फतेहाबाद) से पकी मिट्टी की बनी हल की प्रतिकृति प्राप्त हुई है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लोथल का गोदीबाड़ा (Dockyard) लगभग 37 मीटर × 22 मीटर आकार का है और यह सिंधु नदी की एक सहायक नहर से जुड़ा था, जो इसके उन्नत समुद्री व्यापार का प्रमाण है। धौलावीरा हड़प्पा सभ्यता के तीन चरणों — प्रारम्भिक, परिपक्व और उत्तर — तीनों के अवशेष एक साथ देने वाला दुर्लभ स्थल है। इसे वर्ष 2021 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
13. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए
गए कूट का प्रयोग करते हुए सही
सूची-I सूची-II
A. हड़प्पा – 1. गोदावरी
B. हस्तिनापुर – 2. रावी
C. नागार्जुन कोंडा – 3. गंगा
D. पैठन – 4. कृष्णा
कूट :
उत्तर चुनिए।
(a) 1 2 3 4
(b) 2 3 4 1
(c) 4 3 2 1
(d) 3 4 1 2
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(b)
इन प्राचीन स्थलों और उनसे संबंधित नदियों का सुमेलन इस प्रकार है — हड़प्पा → रावी नदी (वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में), हस्तिनापुर → गंगा नदी (उत्तर प्रदेश, मेरठ के निकट), नागार्जुन कोंडा → कृष्णा नदी (आंध्र प्रदेश), पैठन → गोदावरी नदी (महाराष्ट्र, औरंगाबाद जिले के निकट)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नागार्जुन कोंडा आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर बने नागार्जुन सागर बाँध के जलाशय में डूब गया था; इसलिए इसके अवशेषों को नागार्जुन द्वीप (Nagarjuna Island) पर संरक्षित किया गया है। पैठन (प्राचीन नाम: प्रतिष्ठान) सातवाहन राजाओं की राजधानी थी और दक्षिण भारत के इतिहास में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है।
14. भारत में चांदी की उपलब्धता के प्राचीनतम साक्ष्य मिलते हैं-
(a) हड़प्पा संस्कृति में
(b) पश्चिमी भारत की ताम्रपाषाण संस्कृति में
(c) वैदिक संहिताओं में
(d) चांदी के आहत सिक्कों में
I.A.S. (Pre) 1994
उत्तर-(a)
भारत में चाँदी के उपयोग के सबसे प्राचीनतम साक्ष्य हड़प्पा/सिंधु सभ्यता से प्राप्त होते हैं। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई में चाँदी के बर्तन, आभूषण और अन्य वस्तुएँ मिली हैं। विद्वानों का मानना है कि हड़प्पावासी राजस्थान की जावर (उदयपुर) तथा अजमेर की खानों से चाँदी प्राप्त करते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पाई लोगों को सोने, चाँदी, ताँबे और टिन — चार धातुओं का ज्ञान था, परंतु लोहे का ज्ञान नहीं था, इसीलिए इसे ताम्र-कांस्य सभ्यता कहा जाता है। हड़प्पा से प्राप्त चाँदी के ‘ठोस’ आभूषण उस काल की उत्कृष्ट धातु-शिल्प तकनीक के प्रमाण हैं, जो इस सभ्यता की समृद्धि को दर्शाते हैं।
15. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए
गए कूट से सही
सूची I सूची II
A. हड़प्पा – 1. एन. जी. मजूमदार (1936-37)
B. हस्तिनापुर – 2. जॉन मार्शल (1913-34)
C, तक्षशिला – 3. दयाराम साहनी (1923-24 तथा 1924-25)
D. कौशाम्बी – 4. बी. बी. लाल (1950-52)
कूट :
A B C D
उत्तर चुनिए –
(a) 4 2 1 3
(b) 1 3 4 2
(c) 3 4 2 1
(d) 4 1 3 2
U.P. R.O/A.R.O. (Mains) 2017
उत्तर-(c)
इन पुरातात्त्विक स्थलों और उनके उत्खनन-कर्ताओं का सही सुमेलन इस प्रकार है — हड़प्पा → दयाराम साहनी (1923-24 व 1924-25), हस्तिनापुर → बी. बी. लाल (1950-52), तक्षशिला → जॉन मार्शल (1913-34), कौशाम्बी → एन. जी. मजूमदार (1936-37)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा की प्रारंभिक खोज का श्रेय दयाराम साहनी को जाता है, लेकिन इस सभ्यता को व्यापक पहचान दिलाने और वैज्ञानिक उत्खनन की नींव रखने का कार्य सर जॉन मार्शल के निर्देशन में हुआ। बी. बी. लाल ने हस्तिनापुर उत्खनन में चित्रित धूसर मृद्भांड (Painted Grey Ware) की खोज की, जो उत्तर वैदिक काल से संबंधित है और महाभारत-कालीन बस्तियों से जोड़ी जाती है।
16. मूर्ति पूजा का आरंभ कब से माना जाता है?
उत्तर वैदिक काल
(a) पूर्व आर्य
(b)
(c) मौर्य काल
(d) कुषाण काल
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(a)
मूर्ति पूजा का प्रारंभ पूर्व आर्य काल अर्थात् सैंधव (हड़प्पा) सभ्यता के समय से माना जाता है। इस सभ्यता के विभिन्न पुरास्थलों से मातृ देवी (Mother Goddess) की असंख्य मृण्मूर्तियाँ तथा मुहरों पर देवी-देवताओं के अंकन प्राप्त हुए हैं, जो संगठित धार्मिक पूजा का संकेत देते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर योगासन में बैठी आकृति को ‘आद्य शिव’ या ‘पशुपति’ माना गया है, जिसके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा व भैंसा अंकित हैं — यह मूर्ति पूजा की प्राचीनता का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, सैंधव स्थलों पर अग्नि-वेदिकाएँ (Fire Altars) भी मिली हैं, विशेषतः कालीबंगा में, जो अनुष्ठानिक धर्म की विद्यमानता सिद्ध करती हैं।
17. हड़प्पा में मिट्टी के बर्तनों पर सामान्यतः किस रंग का उपयोग हुआ था ?
(a) लाल
(b) नीला-हरा
(c) पांडु
(d) नीला
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(a)
हड़प्पा सभ्यता के मृद्भांडों (मिट्टी के बर्तनों) पर मुख्यतः लाल रंग का प्रयोग होता था। इन बर्तनों को पैर से चालित चाक पर बनाया जाता था। बर्तनों के ऊपरी भाग पर लाल रंग की पुताई की जाती थी और निचले भाग में काले रंग से ज्यामितीय एवं प्राकृतिक चित्रकारी की जाती थी, जिसे ‘लाल और काला मृद्भांड’ (Red and Black Ware) कहा जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पाई मृद्भांडों पर काले रंग की चित्रकारी में मछली, पत्तियाँ, मोर, पीपल के पत्ते और ज्यामितीय आकृतियाँ प्रमुखता से मिलती हैं। ये मृद्भांड उच्च तापमान वाली भट्ठियों में पकाए जाते थे, जिससे इनकी टिकाऊपन असाधारण थी और ये पानी के प्रति अपेक्षाकृत अभेद्य बन जाते थे।
18. निम्नलिखित में से कौन-सा एक हड़प्पा स्थल नहीं है?
(a) चन्हूदड़ो
(b) कोटदीजी
(c) सोहगौरा
(d) देसलपुर
I.A.S. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
सोहगौरा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में राप्ती नदी के किनारे स्थित एक गाँव है। यह स्थल हड़प्पा सभ्यता से संबंधित नहीं है, बल्कि यहाँ से मौर्यकालीन ताम्रपत्र अभिलेख प्राप्त हुआ है जिसमें अन्नागार (Granary/Food store) के होने का उल्लेख है। चन्हूदड़ो और कोटदीजी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में तथा देसलपुर गुजरात के कच्छ में हड़प्पाई स्थल हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चन्हूदड़ो की विशेषता यह है कि यह एकमात्र हड़प्पाकालीन नगर था जहाँ किले (Citadel) के कोई प्रमाण नहीं मिले। यहाँ से मनके बनाने (Bead-making), शंख की चूड़ियाँ बनाने और मुहर निर्माण की कारखाना-शैली के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो इसे एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र सिद्ध करते हैं।
19. एक जुते हुए खेत की खोज की गई थी-
(a) मोहनजोदड़ो में
(b) कालीबंगा
(c) हड़प्पा में
(d) लोथल
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(b)
जुते हुए खेत (Ploughed Field) के साक्ष्य कालीबंगा (राजस्थान, हनुमानगढ़ जिला, घग्गर नदी तट) से प्राप्त हुए हैं। यह विश्व का सबसे पुराना ज्ञात जुता हुआ खेत है। इस खेत में दो दिशाओं में हल की लकीरें मिलती हैं, जो यह संकेत देती हैं कि दो अलग-अलग फसलें एक साथ बोई जाती थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कालीबंगा की एक और विशेषता यह है कि यहाँ से अग्नि-वेदिकाओं (Fire Altars) की एक श्रृंखला प्राप्त हुई है, जो हड़प्पा सभ्यता में अग्नि-पूजा या यज्ञ परंपरा की ओर संकेत करती है। साथ ही, कालीबंगा में प्राक्-हड़प्पा (Pre-Harappan) और परिपक्व हड़प्पा दोनों चरणों के अवशेष मिले हैं, जो इसे सभ्यता के विकास-क्रम को समझने हेतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाते हैं।
20. निम्न में से किस हड़प्पन नगर में जुते हुए खेतों के निशान मिले-
(a) कालीबंगा
(b) धौलावीरा
(c) मोहनजोदड़ो
(d) लोथल
66th B.P.S.C. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
जुते हुए खेत के निशान कालीबंगा से ही प्राप्त हुए हैं। यहाँ से मिले खेतों में हल की दो परस्पर-काटती लकीरें (criss-cross furrows) मिली हैं। आधुनिक राजस्थान में आज भी इसी प्रकार की दोहरी फसल तकनीक प्रयोग में लाई जाती है, जिसमें एक दिशा में गेहूँ और दूसरी में सरसों बोई जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा सभ्यता में कृषि उपकरणों में पत्थर और ताम्बे के औजार प्रयुक्त होते थे; लकड़ी का हल भी उपयोग में था, परंतु लोहे के हल का प्रमाण नहीं है। बनावली (हरियाणा) से प्राप्त पकी मिट्टी की हल की प्रतिकृति इस सभ्यता में हल-आधारित कृषि की पुष्टि करती है।
21. सिंधु सभ्यता के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) नगरों में नालियों की सुदृढ़ व्यवस्था थी।
(b) व्यापार और वाणिज्य उन्नत दशा में था।
(c) मातृदेवी की उपासना की जाती थी।
(d) लोग लोहे से परिचित थे।
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(d)
सिंधु सभ्यता एक कांस्य-युगीन सभ्यता थी। यहाँ के निवासी ताँबे और टिन की मिश्रधातु अर्थात् काँसे का उपयोग करते थे, किंतु लोहे से वे पूर्णतः अपरिचित थे। नगरों में जल-निकासी की व्यवस्था अत्यंत सुनियोजित थी — ढकी हुई नालियाँ घर-घर से जुड़ती थीं। व्यापार के प्रमाण मेसोपोटामिया (इराक) तक के सम्बन्धों से मिलते हैं। मातृदेवी की अनेक मृण्मूर्तियाँ विभिन्न स्थलों पर मिली हैं जो धार्मिक आस्था को दर्शाती हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सिंधु सभ्यता में ताँबे का प्रयोग सर्वाधिक होता था। खेतड़ी (राजस्थान) की ताँबे की खानों से यहाँ के लोग धातु प्राप्त करते थे।
सैंधव लिपि अभी तक पूर्णतः पढ़ी नहीं जा सकी है; यह लिपि भावचित्रात्मक (Pictographic) है और दाईं से बाईं ओर लिखी जाती थी।
22. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए।
सूची-I (हड़प्पीय स्थल) सूची-II (स्थिति)
A. मांडा 1. राजस्थान
B. दैमाबाद 2. हरियाणा
C. कालीबंगा 3. जम्मू एवं कश्मीर
D. राखीगढ़ी 4. महाराष्ट्र
कूट :
A B C D
(a) 1 2 3 4
(b) 2 3 4 1
(c) 3 4 1 2
(d) 4 1 2 3
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(c)
सही सुमेलन इस प्रकार है — मांडा: जम्मू एवं कश्मीर (चिनाब नदी के तट पर), दैमाबाद: महाराष्ट्र (अहमदनगर जिला, प्रवरा नदी तट), कालीबंगा: राजस्थान (हनुमानगढ़ जिला, घग्गर नदी तट), राखीगढ़ी: हरियाणा (हिसार जिला)। मांडा हड़प्पा सभ्यता का सबसे उत्तरी ज्ञात स्थल है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:राखीगढ़ी को क्षेत्रफल की दृष्टि से भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा हड़प्पाकालीन नगर माना जाता है — यह मोहनजोदड़ो से भी बड़ा हो सकता है।
>दैमाबाद से काँसे की चार उत्कृष्ट मूर्तियाँ मिली हैं जिनमें एक बैलगाड़ी और एक भैंसे की मूर्ति प्रमुख हैं; यह स्थल हड़प्पा सभ्यता का दक्षिणतम बिंदु माना जाता है।
23. सैंधव सभ्यता का महान स्नानागार प्राप्त हुआ है?
(a) मोहनजोदड़ो
(b) हड़प्पा
(c) लोथल
(d) कालीबंगा
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(a)
मोहनजोदड़ो (सिंध, पाकिस्तान) से प्राप्त महान स्नानागार सैंधव स्थापत्य का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इसकी लंबाई उत्तर-दक्षिण में 55 मीटर तथा चौड़ाई पूर्व-पश्चिम में 33 मीटर है। केंद्रीय जलकुंड 11.88 मीटर लंबा, 7.01 मीटर चौड़ा और 2.43 मीटर गहरा है। कुंड को जलरोधक बनाने के लिए पक्की ईंटों पर डामर का लेप किया गया था। यह किसी धार्मिक अनुष्ठान से सम्बद्ध सार्वजनिक स्नानागार था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:महान स्नानागार के चारों ओर स्तम्भों वाले बरामदे और आठ छोटे-छोटे स्नानकक्ष थे, जो संभवतः पुजारियों या अभिजात वर्ग के व्यक्तिगत उपयोग के लिए बने थे।
लोथल (गुजरात) में एक विशाल डॉकयार्ड (बंदरगाह) मिला है जो समुद्री व्यापार का प्रमाण है — इसकी लंबाई लगभग 214 मीटर और चौड़ाई 36 मीटर थी।
24. निम्न में से सिंधु सभ्यता से संबंधित कौन-से केंद्र उत्तर प्रदेश में स्थित हैं?
नीचे दिए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
I. कालीबंगा
II. लोथल
III. आलमगीरपुर
IV. हुलास
>कूट :
(a) I, II, III, IV
(b) I, II
(c) II, III
(d) III, IV
U.P.P.C.S. (Pre) 2018
उत्तर-(d)
कालीबंगा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में और लोथल गुजरात के अहमदाबाद जिले में स्थित है। आलमगीरपुर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हिंडन नदी के किनारे स्थित है, जबकि हुलास सहारनपुर जिले में स्थित है। ये दोनों ही उत्तर प्रदेश में हड़प्पाकालीन पुरास्थल हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:आलमगीरपुर को हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी ज्ञात स्थल माना जाता है; इसकी खोज 1958 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की गई थी।
उत्तर प्रदेश में सिंधु सभ्यता के अन्य स्थल भी हैं जैसे बड़ागाँव (सहारनपुर), माँट (मथुरा) — ये सभी इस सभ्यता के पूर्वी विस्तार को प्रमाणित करते हैं।
25. निम्नांकित में किसका सुमेल नहीं है?
(a) आलमगीरपुर – उत्तर प्रदेश
(b) लोथल – गुजरात
(c) कालीबंगा – हरियाणा
(d) रोपड़ – पंजाब
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(c)
कालीबंगा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्गर नदी के किनारे स्थित है, न कि हरियाणा में। इसकी पहचान सर्वप्रथम 1951 में पुरातत्वविद् अमलानंद घोष ने की थी और बाद में 1961-69 के मध्य बी. बी. लाल तथा बी. के. थापर ने इसका व्यवस्थित उत्खनन किया। शेष तीनों युग्म सुमेलित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:कालीबंगा से पूर्व-हड़प्पाकालीन और हड़प्पाकालीन दोनों स्तरों के साक्ष्य मिले हैं। यहाँ से विश्व के सबसे प्राचीन जुते हुए खेत (Ploughed Field) का साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
कालीबंगा से अग्निवेदियाँ (Fire Altars) मिली हैं जो हड़प्पा स्थलों में असाधारण है और यज्ञ-अनुष्ठानों की ओर संकेत करती हैं।
26. हड़प्पा संस्कृति के स्थल एवं उनकी स्थिति संबंधी निम्नलिखित युग्मों में से कौन एक सही सुमेलित नहीं है?
(a) आलमगीरपुर – उत्तर प्रदेश
(b) बनावली – हरियाणा
(c) दैगाबाद – महाराष्ट्र
(d) राखीगढ़ी – राजस्थान
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार जिले में घग्गर नदी के तट पर स्थित है, राजस्थान में नहीं। इसकी खोज 1969 में सूरजभान ने की थी। बनावली भी हरियाणा (फतेहाबाद जिला) में है। शेष सभी युग्म सुमेलित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:राखीगढ़ी में हाल के उत्खनन कार्यों (2013-2016) के दौरान DNA विश्लेषण हेतु मानव कंकाल प्राप्त हुए हैं जो सैंधव जनसंख्या की उत्पत्ति को समझने में क्रांतिकारी सिद्ध हो सकते हैं।
बनावली से मिट्टी से बना हल (Toy Plough) मिला है जो कृषि गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
27. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
सूची-I सूची-II
(हड़प्पा संस्कृति की बस्ती) (नदी जिस पर अवस्थित है)
A. हड़प्पा – भोगवा
B. कालीबंगा – घग्गर
C. लोथल – रावी
D. रोपड़ – सतलज
कूट :
(a) 3 2 1 4
(b) 3 4 1 2
(c) 4 2 3 1
(d) 1 3 2 4
U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
उत्तर-(a)
सही सुमेलन इस प्रकार है — हड़प्पा: रावी नदी (पंजाब, पाकिस्तान), कालीबंगा: घग्गर नदी (राजस्थान), लोथल: भोगवा नदी (गुजरात), रोपड़: सतलज नदी (पंजाब, भारत)। सूची में A के सामने ‘भोगवा’ और C के सामने ‘रावी’ दिया गया है — ये आपस में अदला-बदली हैं, इसलिए A=3 (रावी), C=1 (भोगवा) सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:हड़प्पा को 1826 में चार्ल्स मैसन ने पहली बार देखा था और 1921 में दयाराम साहनी ने इसका प्रथम वैज्ञानिक उत्खनन किया था — इसीलिए इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता पड़ा।
रोपड़ (वर्तमान नाम: रूपनगर) स्वतंत्र भारत में खोजा गया पहला हड़प्पाकालीन स्थल था; इसकी खोज 1953 में यज्ञदत्त शर्मा ने की थी।
28. सिंधु घाटी सभ्यता जानी जाती है-
(1) अपने नगर नियोजन के लिए
(2) मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के लिए
(3) अपने कृषि संबंधी कार्य के लिए एवं
(4) अपने उद्योगों के लिए
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए
कूट :
(a) 1 और 2
(b) 1, 2 और 3
(c) 2, 3 और 4
(d) उपर्युक्त सभी
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2003
उत्तर-(d)
सिंधु घाटी सभ्यता चारों उल्लिखित विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है। नगर नियोजन में ग्रिड पैटर्न, पक्की ईंटें और जल-निकासी व्यवस्था अद्वितीय थी। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो इसके दो प्रमुख नगर हैं। कालीबंगा से जुते हुए खेत के और बनावली से हल के साक्ष्य कृषि-कार्य की पुष्टि करते हैं। मोहनजोदड़ो, हड़प्पा और चन्हूदड़ो में मनका निर्माण व शंख उद्योग के साक्ष्य मिले हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सिंधु सभ्यता में मानकीकृत बाट और माप (Standardized Weights & Measures) का प्रयोग होता था। ये बाट घनाभ (Cuboid) आकार के थे और 16 के गुणकों में बढ़ते थे।
सिंधु सभ्यता की नगर-योजना में सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और मुख्य सड़क की चौड़ाई लगभग 9-10 मीटर तक होती थी — इसे ‘प्रथम ग्रिड नगर’ की संज्ञा दी जाती है।
29. हड़प्पा किस नदी के किनारे अवस्थित है?
(a) व्यास
(b) सतलज
(c) रावी
(d) घग्गर
Jharkhand P.C.S. (Mains) 2016
उत्तर-(c)
हड़प्पा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मोंटगोमरी (वर्तमान साहिवाल) जिले में रावी नदी के बाएँ तट पर स्थित है। यह सभ्यता का प्रथम खोजा गया नगर था और इसी के नाम पर पूरी सभ्यता को ‘हड़प्पा सभ्यता’ कहा जाता है। दयाराम साहनी ने 1921 में इसे पुरातात्विक दृष्टि से विश्व के सामने प्रस्तुत किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:हड़प्पा में दो टीले मिले हैं — पश्चिमी टीले पर दुर्ग (Citadel) और पूर्वी टीले पर निचला नगर था। अनाज भंडारगृह (Granaries) भी यहाँ मिले हैं जो राज्य-नियंत्रित आर्थिक व्यवस्था का संकेत देते हैं।
हड़प्पा से ‘R-37’ नामक एक विशाल कब्रिस्तान मिला है जो हड़प्पाकालीन अंत्येष्टि प्रथाओं को समझने का प्रमुख स्रोत है।
30. ‘विशाल स्नानागार’ किस पुरातत्व-स्थल से पाया गया था?
विशाल स्नानागार मोहनजोदड़ो (सिंध, पाकिस्तान) के पश्चिमी टीले पर स्थित है। इसे उत्खनन में 1922 में राखालदास बनर्जी ने प्रकाश में लाया था। इस स्नानागार की विशेषता यह थी कि इसकी दीवारें और फर्श जलरोधक बनाने के लिए डामर (Bitumen/Tar) से लीपी गई थीं। पुरातत्वविद् जॉन मार्शल ने इसे “प्राचीन विश्व का सबसे प्रभावशाली स्मारक” कहा है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:महान स्नानागार से सटे एक विशाल अन्नागार (Granary) के भी अवशेष मिले हैं — यह संभवतः नगर का सबसे बड़ा भवन था जो केंद्रीय प्रशासन से जुड़ा था।
मोहनजोदड़ो का अर्थ सिंधी भाषा में ‘मृतकों का टीला’ है। इसकी खोज 1922 में हुई और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित है।
31. सिंधु सभ्यता का कौन-सा स्थान भारत में स्थित है ?
(a) हड़प्पा
(b) मोहनजोदड़ो
(c) लोथल
(d) इनमें से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Pre) 1995
उत्तर-(c)
लोथल सिंधु सभ्यता का एक प्रमुख नगर था जो वर्तमान गुजरात राज्य के अहमदाबाद जिले में भोगवा नदी के तट पर, सरगवाल ग्राम के निकट स्थित है। इसके विपरीत हड़प्पा पाकिस्तान के पंजाब में तथा मोहनजोदड़ो पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लोथल में एक विशाल गोदी (Dockyard) के अवशेष मिले हैं, जो विश्व की प्राचीनतम ज्ञात बंदरगाहों में से एक मानी जाती है। यहाँ से चावल की भूसी और घोड़े की मूर्ति के प्रमाण भी मिले हैं, जो इसे अन्य हड़प्पाई स्थलों से विशिष्ट बनाते हैं।
32. सिंधु घाटी सभ्यता का कौन-सा स्थान अब पाकिस्तान में है?
(a) कालीबंगा
(b) हड़प्पा
(c) लोथल
(d) आलमगीरपुर
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 1994
उत्तर-(b)
हड़प्पा के अवशेष आधुनिक पाकिस्तान के मांटगोमरी (वर्तमान नाम: शाहीवाल) जिले में स्थित हैं। यह नगर रावी नदी के बाएं तट पर बसा था। कालीबंगा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में, लोथल गुजरात में तथा आलमगीरपुर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:हड़प्पा की खोज सर्वप्रथम 1826 में चार्ल्स मेसन ने की थी और 1921 में दयाराम साहनी ने इसका विधिवत उत्खनन करवाया। यहाँ से अन्नागार (Granary) के अवशेष मिले हैं जो हड़प्पाई अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता को दर्शाते हैं।
33. हड़प्पा संस्कृति के निम्नलिखित स्थलों में कौन सिंध में अवस्थित है?
1. हड़प्पा 2. मोहनजोदड़ो
3. चन्हूदड़ों 4. सुरकोटडा
नीचे दिए गए कूट में से सही कूट :
उत्तर निर्दिष्ट कीजिए
(a) 1 एवं 2
(b) 2 एंव 3
(c) 2, 3 एवं 4
(d) 1, 2, 3 एंव 4
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(b)
हड़प्पा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है, जबकि मोहनजोदड़ो और चन्हूदड़ो दोनों पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अवस्थित हैं। सुरकोटडा भारत के गुजरात राज्य में स्थित एक हड़प्पाकालीन पुरास्थल है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सुरकोटडा (गुजरात) से घोड़े की अस्थियों के अवशेष मिले हैं, जो हड़प्पा सभ्यता में घोड़े की उपस्थिति का संकेत देते हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ से एक विशेष प्रकार के कब्रिस्तान के प्रमाण भी मिले हैं।
लोथल गुजरात राज्य के अहमदाबाद जिले में भोगवा नदी के तट पर स्थित है। यह हड़प्पा सभ्यता का एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था। इसकी खोज एस. आर. राव ने 1954 में की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लोथल में मिली गोदीवाड़ा (Dockyard) संरचना लगभग 37 मीटर × 22 मीटर आकार की है और यह ईंटों से निर्मित है — यह प्राचीन विश्व की सबसे सुनियोजित बंदरगाहों में से एक मानी जाती है। यहाँ से द्विमुखी आरी (Double-edged saw) भी प्राप्त हुई है।
35. मोहनजोदड़ो निम्नलिखित में से कहां पर स्थित है ?
(a) भारत के गुजरात राज्य में
(b) भारत के पंजाब राज्य में
(c) पाकिस्तान के सिंध प्रांत में
(d) अफगानिस्तान में
M.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(c)
मोहनजोदड़ो पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के दाहिने तट पर स्थित है। इसकी खोज राखालदास बनर्जी ने 1922 में की थी। मोहनजोदड़ो का अर्थ सिंधी भाषा में ‘मुर्दों का टीला’ होता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मोहनजोदड़ो से प्रसिद्ध ‘पुरोहित राजा की मूर्ति’ (Priest-King), ‘नर्तकी की कांस्य प्रतिमा’ तथा विशाल स्नानागार (Great Bath) के अवशेष प्राप्त हुए हैं। विशाल स्नानागार लगभग 12 × 7 मीटर का है और इसे धार्मिक शुद्धिकरण के लिए उपयोग किया जाता था।
36. दधेरी एक परवर्ती हड़प्पीय पुरास्थल है-
उत्तर प्रदेश का
(a) जम्मू का
(b) पंजाब का
(c) हरियाणा का
(d)
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(b)
दधेरी एक परवर्ती हड़प्पाकालीन पुरास्थल है जो पंजाब राज्य के लुधियाना जिले में गोविंदगढ़ के समीप स्थित है। यह स्थल चित्रित धूसर मृद्भांड (Painted Grey Ware) संस्कृति से संबद्ध है, जिसे प्रायः वैदिक-उत्तर काल से जोड़ा जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) संस्कृति का काल लगभग 1200–600 ईसा पूर्व माना जाता है और इसे महाभारत काल की भौतिक संस्कृति से भी जोड़ा जाता है। दधेरी में मिले साक्ष्य हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद की सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाते हैं।
37. रंगपुर जहां हड़प्पा की समकालीन सभ्यता थी, है-
उत्तर प्रदेश में
(a) पंजाब में
(b) पूर्वी
(c) सौराष्ट्र में
(d) राजस्थान में
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1999
उत्तर-(c)
रंगपुर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में भादर नदी के तट पर स्थित है। यहाँ उत्खनन से प्राक्-हड़प्पा, हड़प्पा और उत्तर-हड़प्पाकालीन तीनों चरणों के पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो इसे एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थल बनाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:रंगपुर से धान की भूसी (Rice Husk) के अवशेष प्राप्त हुए हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि हड़प्पाकालीन लोग चावल की खेती से परिचित थे। यह साक्ष्य हड़प्पा सभ्यता की कृषि विविधता को उजागर करता है।
38. चन्हूदड़ो के उत्खनन का निर्देशन किया था –
(a) जे.एच. मैके ने
(b) सर जॉन मार्शल ने
(c) आइ. ई. एम. ह्वीलर ने
(d) सर आरेल स्टीन ने
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
चन्हूदड़ो मोहनजोदड़ो से लगभग 130 किमी. दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसकी प्रारंभिक खोज 1931 में एन. जी. मजूमदार ने की थी। तत्पश्चात् 1935–36 में जे. एच. मैके ने यहाँ व्यवस्थित उत्खनन करवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चन्हूदड़ो एकमात्र हड़प्पाई नगर है जहाँ किले (Citadel) के अवशेष नहीं मिले। यहाँ से मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory) के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो इसे एक प्रमुख शिल्प केंद्र सिद्ध करते हैं।
39. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे
कूट से सही
दिए गए
सूची – I (हड़प्पा पुरास्थल) सूची II ( संघ राज्यक्षेत्र / भारत के राज्य)
A. बालू-1. उत्तर प्रदेश
B. मांडा-2. जम्मू एवं कश्मीर
C. पाडरी-3. हरियाणा
D. हुलास 4. गुजरात
कूट :
A B C D
उत्तर चुनिए –
(a) 3 2 1 4
(b) 2 3 4 1
(c) 3 4 3 1
(d) 3 2 4 1
U.P.P.S.C. (Pre) 2020
उत्तर-(d)
सही सुमेलन इस प्रकार है — बालू: हरियाणा, मांडा: जम्मू एवं कश्मीर, पाडरी: गुजरात, हुलास: उत्तर प्रदेश। मांडा, जम्मू जिले में चिनाब नदी के तट पर स्थित है और यह हड़प्पा सभ्यता का सबसे उत्तरी ज्ञात स्थल है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बालू (हरियाणा) से हड़प्पाकालीन अग्निकुंड के अवशेष मिले हैं जो धार्मिक अनुष्ठानों की ओर संकेत करते हैं। हुलास (उत्तर प्रदेश) गंगा-यमुना दोआब में स्थित है, जो हड़प्पा सभ्यता के पूर्वी विस्तार का प्रमाण है।
40. सिंधु घाटी सभ्यता का कौन-सा स्थान अब पाकिस्तान में है?
(a) कालीबंगा
(b) हड़प्पा
(c) लोथल
(d) आलमगीरपुर
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 1994
उत्तर-(b)
हड़प्पा नगर आधुनिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शाहीवाल (पूर्व नाम: मांटगोमरी) जिले में रावी नदी के तट पर स्थित है। कालीबंगा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे, लोथल गुजरात में भोगवा नदी के तट पर, और आलमगीरपुर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हिंडन नदी के किनारे स्थित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा स्थल की खोज सर्वप्रथम 1826 ई. में चार्ल्स मेसन ने की थी, लेकिन वैज्ञानिक उत्खनन दयाराम साहनी ने 1921 में करवाया। हड़प्पा में दो अलग-अलग टीले मिले हैं — एक दुर्ग क्षेत्र और एक आवासीय क्षेत्र — जो इस नगर की सुनियोजित नगर-व्यवस्था को दर्शाते हैं।
41. सिंधु सभ्यता का कौन-सा स्थान भारत में स्थित है ?
(a) हड़प्पा
(b) मोहनजोदड़ो
(c) लोथल
(d) इनमें से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Pre) 1995
उत्तर-(c)
लोथल गुजरात के अहमदाबाद जिले में भोगवा नदी के तट पर सरगवाल गाँव के समीप स्थित है। यह सिंधु सभ्यता का एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ एक विशाल बंदरगाह (Dockyard) के साक्ष्य मिले हैं, जो इसे एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र सिद्ध करता है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो दोनों वर्तमान पाकिस्तान में स्थित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लोथल का उत्खनन 1955-62 के बीच भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) के एस. आर. राव ने करवाया था। यहाँ से प्राप्त चावल के साक्ष्य यह सिद्ध करते हैं कि हड़प्पा काल में चावल की खेती भी होती थी।
42. मोहनजोदड़ो निम्नलिखित में से कहां पर स्थित है ?
(a) भारत के गुजरात राज्य में
(b) भारत के पंजाब राज्य में
(c) पाकिस्तान के सिंध प्रांत में
(d) अफगानिस्तान में
M.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(c)
मोहनजोदड़ो पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के दाहिने तट पर स्थित है। इसका अर्थ सिंधी भाषा में “मृतकों का टीला” होता है। यहाँ से विशाल स्नानागार (Great Bath), अन्नागार और एक नृत्यरत नारी की कांस्य मूर्ति जैसे महत्त्वपूर्ण पुरावशेष प्राप्त हुए हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में आर. डी. बनर्जी ने की थी। यहाँ से प्राप्त महान स्नानागार (Great Bath) की लंबाई 11.88 मीटर, चौड़ाई 7.01 मीटर और गहराई 2.43 मीटर है, जो धार्मिक स्नान के लिए उपयोग किया जाता था।
43. हड़प्पा संस्कृति के निम्नलिखित स्थलों में कौन सिंध में अवस्थित है?
q1. हड़प्पा z2. मोहनजोदड़ो
q3. चन्हूदड़ों z4. सुरकोटडा
नीचे दिए गए कूट में से सही
कूट :
उत्तर निर्दिष्ट कीजिए
(a) 1 एवं 2
(b) 2 एंव 3
(c) 2, 3 एवं 4
(d) 1, 2, 3 एंव 4
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(b)
हड़प्पा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रावी नदी के तट पर स्थित है। मोहनजोदड़ो और चन्हूदड़ो दोनों पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित हैं। सुरकोटडा भारत के गुजरात राज्य में स्थित है जहाँ से घोड़े की हड्डियों के प्रारंभिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चन्हूदड़ो सिंध का एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल है जहाँ कोई दुर्ग (Citadel) नहीं मिला। यहाँ से मनके (Beads) बनाने के कारखाने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो इसे एक प्रमुख शिल्प-उत्पादन केंद्र दर्शाते हैं।
44. रंगपुर जहां हड़प्पा की समकालीन सभ्यता थी, है-
उत्तर प्रदेश में
(a) पंजाब में
(b) पूर्वी
(c) सौराष्ट्र में
(d) राजस्थान में
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1999
उत्तर-(c)
रंगपुर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में भादर नदी के तट पर स्थित है। यहाँ से प्राक्-हड़प्पा, परिपक्व हड़प्पा और उत्तर-हड़प्पाकालीन — तीनों अवस्थाओं के साक्ष्य मिले हैं, जो इसे एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पुरास्थल बनाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रंगपुर का उत्खनन 1953-54 में ए. रंगनाथ राव ने करवाया था। यहाँ से धान की भूसी (Rice Husk) के साक्ष्य मिले हैं, जो सिंधु सभ्यता में चावल के उपयोग का प्रमाण देते हैं।
45. चन्हूदड़ो के उत्खनन का निर्देशन किया था –
(a) जे.एच. मैके ने
(b) सर जॉन मार्शल ने
(c) आइ. ई. एम. ह्वीलर ने
(d) सर आरेल स्टीन ने
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
चन्हूदड़ो मोहनजोदड़ो से लगभग 130 किमी. दक्षिण-पूर्व में सिंध प्रांत में स्थित है। इसकी खोज सर्वप्रथम 1931 में एन. जी. मजूमदार ने की थी। तत्पश्चात् 1935-36 में अमेरिकन स्कूल ऑफ इंडिक एंड ईरेनियन स्टडीज़ के अंतर्गत जे. एच. मैके ने यहाँ व्यवस्थित उत्खनन करवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चन्हूदड़ो में उत्खनन से बिल्ली के पीछे कुत्ते के पंजों के निशान वाली एक ईंट मिली है, जो उस काल में पालतू पशुओं की उपस्थिति का रोचक प्रमाण है। यह स्थल हड़प्पाकालीन मनकों (Beads) और सीप की कलाकृतियों के निर्माण के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध था।
46. दधेरी एक परवर्ती हड़प्पीय पुरास्थल है-
उत्तर प्रदेश का
(a) जम्मू का
(b) पंजाब का
(c) हरियाणा का
(d)
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(b)
दधेरी एक परवर्ती हड़प्पाकालीन पुरास्थल है जो भारतीय पंजाब के लुधियाना जिले में गोविंदगढ़ के निकट स्थित है। यह स्थल चित्रित धूसर मृद्भांड (Painted Grey Ware) संस्कृति से संबंधित है, जो प्रायः आर्यों के आगमन के काल से जोड़ी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दधेरी से ताँबे की वस्तुएँ और हड्डी के उपकरण प्राप्त हुए हैं। यह स्थल हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद की संक्रमणकालीन सांस्कृतिक स्थिति को समझने के लिए पुरातत्त्वविदों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
लोथल गुजरात के अहमदाबाद जिले में भोगवा नदी के तट पर स्थित है। यह हड़प्पा सभ्यता का एक प्रमुख बंदरगाह नगर था। यहाँ से एक सुनियोजित बंदरगाह (Dockyard) के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि यह नगर अरब सागर के रास्ते मेसोपोटामिया से व्यापार का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लोथल से एक युगल शवाधान (Double Burial) का साक्ष्य मिला है। यहाँ से प्राप्त बंदरगाह की लंबाई 219 मीटर और चौड़ाई 37 मीटर थी, जो उस काल की उन्नत इंजीनियरिंग का प्रमाण है।
48. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे
कूट से सही
दिए गए
सूची – I (हड़प्पा पुरास्थल) सूची II ( संघ राज्यक्षेत्र / भारत के राज्य)
A. बालू-1. उत्तर प्रदेश
B. मांडा-2. जम्मू एवं कश्मीर
C. पाडरी-3. हरियाणा
D. हुलास 4. गुजरात
कूट :
A B C D
उत्तर चुनिए –
(a) 3 2 1 4
(b) 2 3 4 1
(c) 3 4 3 1
(d) 3 2 4 1
U.P.P.S.C. (Pre) 2020
उत्तर-(d)
सही सुमेलन इस प्रकार है — बालू: हरियाणा (कैथल जिले में घग्घर नदी के तट पर स्थित), मांडा: जम्मू एवं कश्मीर (चिनाब नदी के तट पर, यह सिंधु सभ्यता का सर्वाधिक उत्तरी पुरास्थल है), पाडरी: गुजरात (समुद्र तट के निकट स्थित, नमक उत्पादन के साक्ष्य मिले हैं), हुलास: उत्तर प्रदेश (सहारनपुर जिले में स्थित)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मांडा (जम्मू-कश्मीर) हड़प्पा सभ्यता का सबसे उत्तरी छोर पर स्थित पुरास्थल है। पाडरी (गुजरात) से नमक के उत्पादन के सबसे प्राचीन साक्ष्य मिले हैं, जो समुद्री व्यापार में इसकी भूमिका को रेखांकित करते हैं।
49. सिंधु घाटी के लोग पूजा करते थे-
(a) पशुपति की
(b) इंद्र और वरुण की
(c) ब्रह्मा की
(d) विष्णु की
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(a)
मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक प्रसिद्ध मोहर पर ध्यान-मुद्रा में बैठे एक योगी का चित्र उत्कीर्ण है, जिसके चारों ओर विभिन्न पशु अंकित हैं। इस आकृति को विद्वानों ने ‘आद्य-शिव’ या ‘पशुपति’ की संज्ञा दी है। यह हड़प्पा सभ्यता में शिव-उपासना की प्राचीनतम साक्ष्य मानी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इस मोहर की खोज 1928 में जॉन मार्शल ने की थी। हड़प्पावासियों में वृक्ष-पूजा (विशेषतः पीपल) और नाग-पूजा के भी प्रमाण मिले हैं।
50. भारत में हड़प्पा का वृहद स्थल है-
(a) राखीगढ़ी
(b) धौलावीरा
(c) कालीबंगा
(d) लोथल
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
हरियाणा के हिसार जिले में स्थित राखीगढ़ी, भारत में हड़प्पा सभ्यता का सबसे विस्तृत पुरास्थल है। इसका क्षेत्रफल लगभग 350 हेक्टेयर आँका गया है। समग्र रूप से मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, गनवेरीवाला (पाकिस्तान) तथा राखीगढ़ी और धौलावीरा (भारत) — ये पाँचों वृहद स्थलों की श्रेणी में आते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:राखीगढ़ी में 2018–19 में किए गए DNA विश्लेषण (CCMB, हैदराबाद) ने यहाँ के निवासियों के आनुवंशिक स्वरूप को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
51. निम्न में से किस हड़प्पाकालीन स्थल से ‘हल’ का टेराकोटा प्राप्त हुआ?
(a) धौलावीरा
(b) बनावली
(c) कालीबंगा
(d) लोथल
60th to 62nd B.P.S.C. (Pre) 2016
उत्तर-(b)
हरियाणा के फतेहाबाद जिले में स्थित बनावली से मिट्टी से बना हल (टेराकोटा) प्राप्त हुआ है, जो हड़प्पाकालीन कृषि-उपकरणों का दुर्लभ साक्ष्य है। इससे सिद्ध होता है कि हड़प्पावासी उन्नत कृषि पद्धतियों से परिचित थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:कालीबंगा (राजस्थान) से जुते हुए खेत के निशान (ploughed field) प्राप्त हुए हैं, जो विश्व में अब तक के सबसे प्राचीन जुते हुए खेत के प्रमाण माने जाते हैं।
52. सिंधु घाटी सभ्यता का पत्तन नगर था-
(a) हड़प्पा
(b) कालीबंगा
(c) लोथल
(d) मोहनजोदड़ो
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(c)
गुजरात के अहमदाबाद जिले में भोगावा नदी के तट पर स्थित लोथल सिंधु घाटी सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह नगर था। यहाँ एक विशाल ‘डॉकयार्ड’ (गोदी) के अवशेष मिले हैं जो समुद्री व्यापार की गतिविधियों का प्रमाण देते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लोथल की खोज 1954–55 में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के डॉ. एस.आर. राव ने की थी। यहाँ से धान (चावल) की भूसी के भी साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
53. स्थापित सिंधु घाटी सभ्यता जिन नदियों के तट पर बसी थी, वे थीं — नीचे दिए गए कूट में सही उत्तर का चयन कीजिए।
1. सिंधु
2. चेनाब
3. झेलम
4. गंगा
कूट:
(a) 1 और 2
(b) 1, 2 और 3
(c) 2, 3 और 4
(d) सभी चारों
U.P.P.C.S. (Pre) 2009
उत्तर-(b)
सिंधु घाटी सभ्यता मुख्यतः सिंधु, चेनाब और झेलम नदियों के तटीय क्षेत्रों में पल्लवित हुई। इसका विस्तार उत्तर में झेलम के पूर्वी तट से लेकर दक्षिण में यमुना की सहायक नदी हिंडन तक था। गंगा नदी इस सभ्यता के प्रमुख क्षेत्र में सम्मिलित नहीं थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:हड़प्पा सभ्यता का भौगोलिक विस्तार लगभग 12.5 लाख वर्ग किमी था, जो मेसोपोटामिया और मिस्र की सभ्यताओं से भी अधिक था।
54. निम्नलिखित में से कौन-सा एक हड़प्पा का बंदरगाह है?
(a) सिकंदरिया
(b) लोथल
(c) महास्थानगढ़
(d) नागपट्टनम
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
लोथल हड़प्पा सभ्यता का एकमात्र ज्ञात बंदरगाह नगर है जहाँ एक सुनियोजित गोदीबाड़ा (डॉकयार्ड) मिला है। इसकी माप लगभग 216×37 मीटर है और यह ईंटों से निर्मित था। यह गोदी ज्वार-भाटे के अनुसार जहाजों के ठहरने के लिए उपयुक्त थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लोथल से प्राप्त मनकों, माप-बाटों और मुहरों से यह स्पष्ट होता है कि यहाँ से मेसोपोटामिया (वर्तमान इराक) के साथ समुद्री व्यापार होता था।
55. भारत का सबसे बड़ा हड़प्पन पुरास्थल है-
(a) आलमगीरपुर
(b) कालीबंगा
(c) लोथल
(d) राखीगढ़ी
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(d)
राखीगढ़ी (हिसार, हरियाणा) भारत का सबसे बड़ा हड़प्पन पुरास्थल है। इसमें कम से कम सात टीले (mounds) शामिल हैं और यह लगभग 350 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह समग्र हड़प्पा सभ्यता के पाँच वृहद स्थलों में से एक है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:राखीगढ़ी में उत्खनन कार्य 1969 में सूरजभान ने आरंभ किया था। यहाँ से नालियों की उन्नत व्यवस्था, बड़े अन्नागार और अग्नि-वेदिकाएँ प्राप्त हुई हैं।
56. निम्नलिखित में से कौन-सा घाटी की सभ्यता से संबंधित स्थल नहीं है?
(a) कालीबंगा
(b) रोपड़
(c) पाटलिपुत्र
(d) लोथल
M.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(c)
कालीबंगा (राजस्थान), रोपड़ (पंजाब) और लोथल (गुजरात) — ये तीनों सिंधु घाटी सभ्यता के महत्त्वपूर्ण स्थल हैं। पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना, बिहार) का संबंध महाजनपद काल और मौर्य साम्राज्य से है, न कि हड़प्पा सभ्यता से।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:पाटलिपुत्र की स्थापना लगभग 490 ई.पू. में अजातशत्रु के काल में हुई थी और यह मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की राजधानी थी।
57. सिंधु घाटी के लोग विश्वास करते थे-
(a) आत्मा और ब्रह्म में
(b) कर्मकांड में
(c) यज्ञ प्रणाली में
(d) मातृ शक्ति में
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1993
उत्तर-(*)
सिंधु सभ्यता की लिपि अद्यावधि अपठित है, इसलिए इन लोगों के धार्मिक विश्वासों के बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। उत्खनन में मिली असंख्य स्त्री-मूर्तियाँ मातृ शक्ति की उपासना का संकेत देती हैं। पशुपति-मुद्रा शिव-पूजा का, अग्निकुंड यज्ञ का और मृतकों के साथ वस्तुएँ दफनाने की परंपरा आत्मा में विश्वास का संकेत देती है। किसी एक विकल्प को निश्चित उत्तर नहीं माना जा सकता, इसलिए यह प्रश्न विवादास्पद (*) है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:हड़प्पा सभ्यता में लिंग-पूजा और योनि-पूजा के भी अनेक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो शैव परंपरा की प्राचीनता को दर्शाते हैं।
58. हड़प्पाकालीन स्थलों में अभी तक किस धातु की प्राप्ति नहीं हुई?
(a) तांबा
(b) स्वर्ण
(c) चांदी
(d) लोहा
Chhattisgarh P.C.S.(Pre) 2011
उत्तर-(d)
हड़प्पा सभ्यता एक कांस्ययुगीन (Bronze Age) सभ्यता थी, अर्थात् यहाँ के लोग तांबे और टिन को मिलाकर कांसा बनाना जानते थे। उत्खनन में तांबा, कांसा, सोना और चांदी से बनी वस्तुएँ प्राप्त हुई हैं, लेकिन लोहे का कोई भी साक्ष्य नहीं मिला। इसका कारण यह है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग लोहे से पूर्णतः अपरिचित थे। भारत में लौह युग का आरम्भ उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ई.पू.) से माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा सभ्यता में तांबे की अधिकांश आपूर्ति राजस्थान के खेतड़ी क्षेत्र की खानों से होती थी। इसके अलावा, हड़प्पाई कारीगर विश्व में पहली बार कांसे में आर्सेनिक मिलाकर उसे और कठोर बनाने की तकनीक जानते थे।
59. निम्न में से कौन-सा स्थल घग्गर और उसकी सहायक नदियों की घाटी में स्थित है?
(a) आलमगीरपुर
(b) लोथल
(c) मोहनजोदड़ो
(d) बनावली
R.A.S./R.T.S.(Pre) 2010
उत्तर-(d)
बनावली हरियाणा के हिसार जिले में स्थित एक प्रमुख हड़प्पाई पुरास्थल है, जो घग्गर नदी (प्राचीन सरस्वती नदी) और उसकी सहायक नदियों की घाटी में अवस्थित है। इस स्थल की खुदाई में जौ की अच्छी फसल और मिट्टी के हल जैसी दुर्लभ वस्तुएँ मिली हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बनावली से हड़प्पा पूर्व काल और परिपक्व हड़प्पा काल दोनों के साक्ष्य मिले हैं, जो इसे सभ्यता के विकास-क्रम को समझने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं। यहाँ से मिट्टी से बना एक हल (plough) मिला है जो हड़प्पाई कृषि का दुर्लभ प्रमाण है।
60. सर्वप्रथम मानव ने निम्न धातु का उपयोग किया –
(a) सोना
(b) चांदी
(c) तांबा
(d) लोहा
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 2012
उत्तर-(c)
तांबा (Copper) विश्व की पहली धातु है जिसे मानव ने उपयोग में लाया। यह प्रकृति में शुद्ध अवस्था में भी पाई जाती है, इसलिए इसे गलाने और आकार देने की तकनीक आसानी से विकसित हुई। विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रयोग का काल अलग-अलग रहा है, परन्तु समग्र रूप से मानव इतिहास में तांबे का प्रयोग सर्वप्रथम हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तांबे के प्रयोग का सबसे पुराना साक्ष्य लगभग 9000 ई.पू. का है, जो आधुनिक तुर्की (अनातोलिया) में मिला है। भारत में ताम्र पाषाण काल (Chalcolithic Age) में तांबे और पत्थर के उपकरण साथ-साथ प्रयोग किए जाते थे; इस काल की प्रमुख संस्कृतियाँ अहार, मालवा और जोर्वे थीं।
61. मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा की पुरातात्विक खुदाई के प्रभारी थे-
(a) लॉर्ड मैकाले
(b) जॉन मार्शल
(c) क्लाइव
(d) कर्नल टाड
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के तत्कालीन महानिदेशक सर जॉन मार्शल के निर्देशन में वर्ष 1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा तथा वर्ष 1922 में राखालदास (R.D.) बनर्जी ने मोहनजोदड़ो स्थल की खोज की। दोनों स्थलों की विधिवत् खुदाई की जिम्मेदारी जॉन मार्शल की देखरेख में हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जॉन मार्शल ने वर्ष 1924 में लंदन के ‘Illustrated London News’ में सिंधु घाटी सभ्यता की आधिकारिक घोषणा की थी। उन्होंने ही इस सभ्यता को ‘Indus Valley Civilisation’ नाम दिया। वे 1902 से 1928 तक ASI के महानिदेशक रहे।
62. हाथी दांत का पैमाना हड़प्पीय संदर्भ में मिला है-
(a) कालीबंगा में
(b) लोथल में
(c) धौलावीरा में
(d) बनावली में
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014
उत्तर-(b)
गुजरात में भोगवा नदी के तट पर स्थित लोथल से हाथी दाँत (ivory) से निर्मित एक मापनी (scale/ruler) प्राप्त हुई है। इससे यह सिद्ध होता है कि हड़प्पाई लोग सटीक माप-तोल की उन्नत प्रणाली से परिचित थे और उनका व्यापार मानकीकृत था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लोथल से एक पूर्ण डॉकयार्ड (बंदरगाह) के अवशेष भी मिले हैं, जो विश्व के प्राचीनतम कृत्रिम बंदरगाहों में से एक माना जाता है। यहाँ से युगल शवाधान (double burial) का साक्ष्य भी मिला है, जो उस काल के सामाजिक रीति-रिवाजों को दर्शाता है।
63. सिंधु घाटी सभ्यता को खोज निकालने में जिन दो भारतीयों का नाम जुड़ा है, वे हैं-
(a) राखालदास बनर्जी तथा दयाराम साहनी
(b) जॉन मार्शल तथा ईश्वरी प्रसाद
(c) आशीर्वादी लाल श्रीवास्तव तथा रंगनाथ राव
(d) माधोस्वरूप वत्स तथा वी.राव
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003
उत्तर-(a)
सिंधु घाटी सभ्यता की खोज का श्रेय दो भारतीय पुरातत्वविदों को जाता है — दयाराम साहनी, जिन्होंने 1921 में हड़प्पा की खोज की, और राखालदास (R.D.) बनर्जी, जिन्होंने 1922 में मोहनजोदड़ो की खोज की। दोनों ने अपने-अपने स्थलों के महत्व को पहचाना और जॉन मार्शल को सूचित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राखालदास बनर्जी एक बौद्ध स्तूप की खोज करने गए थे, जब उन्हें मोहनजोदड़ो के टीले मिले। दयाराम साहनी ने अपनी खोज में हड़प्पा से कई मुहरें (seals) प्राप्त कीं, जिन्हें देखकर पहली बार यह अनुमान लगाया गया कि यह कोई महत्वपूर्ण प्राचीन सभ्यता है।
7. भारत में निम्नलिखित के आने का सही कालानुक्रम क्या है? उत्तर चुनिए- 1. सोने के सिक्के
2. आहत मुद्रा चांदी के सिक्के
3. लोहे का हल
4. नगर संस्कृति
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए।
कूट :
A B C D
(a) 3 4 1 2
(b) 3 4 2 1
(c) 4 3 1 2
(d) 4 3 2 1
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
भारत में सर्वप्रथम नगर संस्कृति का उदय हड़प्पा सभ्यता (लगभग 2600-1900 ई.पू.) में हुआ। इसके बाद उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ई.पू.) में लोहे के हल का प्रयोग प्रारम्भ हुआ, जिसने कृषि क्रांति को गति दी। आहत मुद्रा (Punch-Marked Coins) के रूप में चांदी के सिक्के छठी शताब्दी ई.पू. में प्रचलन में आए। सोने के सिक्के सर्वप्रथम हिन्द-यवन (Indo-Greek) शासकों ने दूसरी शताब्दी ई.पू. में जारी किए और कुषाण काल में इनका प्रचलन व्यापक हुआ। अतः सही क्रम है: नगर संस्कृति → लोहे का हल → आहत मुद्रा → सोने के सिक्के।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
भारत के सबसे प्राचीन आहत सिक्के ‘कार्षापण’ कहलाते थे और इनका उल्लेख पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ में मिलता है। कुषाण शासक विम कडफिसेस को भारत में स्वर्ण सिक्कों को बड़े पैमाने पर प्रचलित करने का श्रेय दिया जाता है।
64. निम्नलिखित में से कौन सुमेलित नहीं है?
(a) हड़प्पा – दयाराम साहनी
(b) लोथल – एस. आर. राव
(c) सुरकोटडा – जे.पी. जोशी
(d) धौलावीरा – वी. के. थापड़
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(d)
हड़प्पा का उत्खनन दयाराम साहनी (1921), लोथल का उत्खनन एस.आर. राव (1955-62) और सुरकोटडा का उत्खनन जे.पी. जोशी ने कराया — ये तीनों युग्म सही हैं। परन्तु धौलावीरा का उत्खनन वी.के. थापड़ ने नहीं, बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के आर.एस. बिष्ट ने 1989 से 2005 तक कराया था। अतः विकल्प (d) असुमेलित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: धौलावीरा (गुजरात के कच्छ जिले में) को वर्ष 2021 में UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह भारत में स्थित हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा पुरास्थल है और यहाँ से विश्व का सबसे पुराना साइनबोर्ड (दस हड़प्पाई अक्षरों में) मिला है।
65. सभ्यता की विकसित अवस्था में निम्नलिखित में से किस स्थल से घरों में कुओं के अवशेष मिले हैं?
(a) हड़प्पा
(b) कालीबंगा
(c) लोथल
(d) मोहनजोदड़ो (3)
U.P.P.C.S. (Pre) 2004
उत्तर-(*)
सिंधु सभ्यता के अधिकांश नगरों के घरों में निजी कुएँ एवं स्नानागार के साक्ष्य मिले हैं। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, रामशरण शर्मा की पुस्तक ‘प्राचीन भारत का इतिहास’ में कालीबंगा के लगभग सभी घरों में कुओं का उल्लेख है, जबकि मोहनजोदड़ो से भी घरेलू कुओं के प्रचुर साक्ष्य मिले हैं। इस प्रश्न का उत्तर स्रोत के अनुसार भिन्न हो सकता है, इसलिए इसे (*) यानी विवादास्पद माना गया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मोहनजोदड़ो में लगभग 700 कुओं की पहचान की गई है, जो किसी भी कांस्य युगीन नगर में सर्वाधिक हैं। हड़प्पा सभ्यता की जल-प्रबंधन प्रणाली इतनी उन्नत थी कि उसे आधुनिक नगर नियोजन का पूर्वज माना जाता है।
66. हड़प्पा का उत्खनन करने वाला प्रथम पुरातत्वविद, जो इसके महत्व को नहीं समझ पाया था-
(a) ए. कनिंघम
(b) सर जॉन मार्शल
(c) मार्टिमर हीलर
(d) जॉर्ज एफ. डेल्स
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(a)
अलेक्जेंडर कनिंघम, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले महानिदेशक (1861-1865 और 1870-1885) थे, ने 1853 और 1873 में हड़प्पा का दौरा किया था। उन्हें वहाँ कुछ मुहरें और पुरावशेष मिले, परन्तु वे इन्हें किसी अज्ञात लिपि की सामग्री मानकर इसके ऐतिहासिक महत्व को पहचानने में असफल रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कनिंघम ने हड़प्पा से प्राप्त एक मुहर को बौद्ध काल की वस्तु समझ लिया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में हड़प्पा का उल्लेख तो किया, लेकिन इसे किसी स्वतंत्र और अज्ञात सभ्यता से नहीं जोड़ा। इस चूक के कारण इस महान् सभ्यता की पहचान लगभग 50 वर्षों तक अधूरी रही।
67. निम्नलिखित में से कौन हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के उत्खनन से संबंधित नहीं थे?
(a) आर. डी. बनर्जी
(b) के. एन. दीक्षित
(c) एम. एस. वत्स
(d) वी.ए. स्मिथ
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
आर.डी. बनर्जी (मोहनजोदड़ो, 1922), के.एन. दीक्षित और एम.एस. वत्स (हड़प्पा, 1926) — ये तीनों विद्वान सिंधु सभ्यता की खुदाई से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे। इनके अतिरिक्त अर्नेस्ट मैके, आरेल स्टीन, ए. घोष, जे.पी. जोशी आदि ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। परन्तु वी.ए. स्मिथ (Vincent Arthur Smith) का इस सभ्यता की खोज से कोई सम्बंध नहीं था; वे एक प्रसिद्ध इतिहासकार और कला इतिहासकार थे, जो मुख्यतः मौर्य और गुप्त काल पर अपने कार्य के लिए जाने जाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वी.ए. स्मिथ ने ‘Early History of India’ (1904) और ‘The Oxford History of India’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उन्होंने अशोक के शिलालेखों के अध्ययन में भी उल्लेखनीय कार्य किया, परन्तु सिंधु सभ्यता की खोज उनके कार्यकाल के बाद हुई।
68. धौलावीरा जिस राज्य में स्थित है,
(a) गुजरात
(b) हरियाणा
(c) पंजाब
(d) राजस्थान
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(a)
धौलावीरा गुजरात राज्य के कच्छ जिले के खदिर द्वीप पर स्थित एक प्रमुख हड़प्पाकालीन नगर है। यह भारत में हड़प्पा सभ्यता की दूसरी सबसे बड़ी बस्ती है — पहले स्थान पर हरियाणा स्थित राखीगढ़ी है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:यहाँ से हड़प्पा सभ्यता का एकमात्र बड़ा शिलालेख (साइनबोर्ड) मिला है जिसमें 10 बड़े अक्षर उकेरे गए हैं, हालाँकि इसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है। वर्ष 2021 में धौलावीरा को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त हुआ।
69. निम्नलिखित में से किस स्थल से द्वि-शव संस्कार (डबल बरिअल) का प्रमाण मिला है?
(a) कुन्तासी
(b) धौलावीरा
(c) लोथल
(d) कालीबंगा
U.P.P.C.S. (Mains) 2016
उत्तर-(*)
युगल समाधीकरण (Double Burial) से तात्पर्य एक ही कब्र में दो व्यक्तियों को एक साथ दफनाने की प्रथा से है। लोथल से सर्वाधिक तीन युगल समाधीकरण के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जबकि कालीबंगा और राखीगढ़ी से भी एक-एक युगल समाधि के प्रमाण मिले हैं। अतः यदि संख्या के आधार पर उत्तर चुना जाए तो (c) लोथल सही है, और यदि प्रमाण को आधार मानें तो (c) व (d) दोनों सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सिंधु सभ्यता में मृतकों को प्रायः उत्तर-दक्षिण दिशा में लिटाकर दफनाया जाता था और साथ में मृद्भांड व आभूषण भी रखे जाते थे। हड़प्पा से शवाधान के तीन प्रकार के साक्ष्य — पूर्ण दफन, आंशिक दफन और दाह-संस्कार — मिले हैं।
70. निम्नलिखित में से कौन-से स्थल में तीन नगरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं?
(a) मोहनजोदड़ो
(b) संघोल
(c) कालीबंगा
(d) धौलावीरा
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
धौलावीरा नगर को तीन स्पष्ट भागों में विभाजित किया गया था — ऊपरी दुर्ग (किला), मध्य नगर और निचला नगर। यह आयताकार नगर योजना हड़प्पा सभ्यता की नगर-निर्माण कुशलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। विशेष रूप से यहाँ से एक विशाल स्टेडियम-नुमा संरचना के अवशेष मिले हैं जो सार्वजनिक समारोहों अथवा सभाओं के लिए उपयोग में लाई जाती थी — यह हड़प्पा सभ्यता के किसी अन्य स्थल से प्राप्त नहीं हुई।
71. एक उन्नत जल प्रबंधन व्यवस्था का साक्ष्य प्राप्त हुआ है-
(a) आलमगीरपुर से
(b) धौलावीरा से
(c) कालीबंगा से
(d) लोथल से
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(b)
धौलावीरा में हड़प्पा सभ्यता की सबसे परिष्कृत जल प्रबंधन प्रणाली विद्यमान थी। यहाँ वर्षाजल संचयन के लिए 16 से अधिक बड़े जलाशयों का निर्माण किया गया था जो नहरों और बाँधों की एक सुव्यवस्थित श्रृंखला से जुड़े थे। इस नगर में जल की माँग और आपूर्ति को नियंत्रित करने की अत्यंत वैज्ञानिक व्यवस्था थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय है कि धौलावीरा एक शुष्क क्षेत्र में स्थित था, जहाँ वर्षा बहुत कम होती थी, इसलिए यहाँ की जल-संचयन प्रणाली और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
72. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं नीचे दिए गए कूट से सही
1. मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, रोपड़ एवं कालीबंगा सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल हैं।
2. हड़प्पा के लोगों ने सड़कों तथा नालियों के जाल के साथ नियोजित शहरों का विकास किया।
3. हड़प्पा के लोगों को धातुओं के उपयोग का पता नहीं था।
कूट :
उत्तर चुनिए ।
(a) 1 एवं 2 सही हैं।
(b) 1 एवं 3 सही हैं।
(c) 2 एवं 3 सही हैं।
(d) 1 2 एवं 3 सही हैं।
M.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
कथन 1 आंशिक रूप से सही है क्योंकि लोथल भी एक प्रमुख स्थल है जिसे सूची में सम्मिलित नहीं किया गया है। कथन 2 पूर्णतः सही है — सैंधव नगरों की सड़कें एक-दूसरे को समकोण (ऑक्सफोर्ड प्रणाली) पर काटती थीं और सड़कों के किनारे पक्की ढकी हुई नालियाँ होती थीं। कथन 3 पूर्णतः गलत है क्योंकि हड़प्पावासी ताँबा, काँसा, सोना और चाँदी जैसी धातुओं का भली-भाँति उपयोग करते थे। विशेष रूप से, हड़प्पा सभ्यता को काँस्य युगीन (Bronze Age) सभ्यता कहा जाता है क्योंकि यहाँ के लोग ताँबे में टिन मिलाकर काँसा बनाने में दक्ष थे।
73. कथन (a) : मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा नगर अब विलुप्त हो गए हैं। कारण (R) : वह खुदाई के दौरान प्रकट हुए थे।
उपर्युक्त के संदर्भ में निम्न में से कौन एक सही है?
(a) और (R) दोनों सही हैं तथा (R) सही स्पष्टीकरण है (a) का।
(b) (a) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R) सही स्पष्टीकरण नहीं है (a) का।
(c) (a) सही है, किंतु (R) गलत है।
(d) (a) गलत है, किंतु (R) सही है।
U.P.P.C.S. (Pre) 2009
उत्तर-(b)
कथन सत्य है — मोहनजोदड़ो और हड़प्पा, दोनों नगर वर्तमान में मृतप्राय अवस्था में हैं। कारण भी सत्य है क्योंकि इन्हें उत्खनन के दौरान खोजा गया था — हड़प्पा की खोज 1921 में दयाराम साहनी ने और मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में राखालदास बनर्जी ने की थी। परंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता — ये नगर खुदाई के कारण नहीं, बल्कि समय के साथ बाढ़, जलवायु परिवर्तन, आक्रमण अथवा पर्यावरणीय कारणों से विलुप्त हुए। मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ सिंधी भाषा में “मृतकों का टीला” होता है, जो इसकी विलुप्तता को स्वयं इंगित करता है।
74. हड़प्पन संस्कृति के संदर्भ में शैलकृत स्थापत्य के प्रमाण कहां से मिले हैं?
(a) कालीबंगा
(b) धौलावीरा
(c) कोटदीजी
(d) आमरी
U.P.P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(b)
धौलावीरा से हड़प्पा सभ्यता में शैलकृत (पत्थर को काटकर बनाई गई) स्थापत्य कला के दुर्लभ प्रमाण प्राप्त हुए हैं। यहाँ पाषाण-निर्मित जलकुंड और प्रवेशद्वार विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। धौलावीरा का विशेष महत्त्व यह है कि यहाँ की अधिकांश संरचनाएँ पकी ईंटों के स्थान पर पत्थर से निर्मित हैं, जो इसे हड़प्पा के अन्य नगरों से अलग बनाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:यहाँ के उत्खनन का कार्य 1990 से 2005 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के आर. एस. बिष्ट के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।
75. कौन-सा हड़प्पीय (Harappan) नगर तीन भागों में विभक्त है?
(a) लोथल
(b) कालीबंगा
(c) धौलावीरा
(d) सुरकोटडा
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2013
उत्तर-(c)
धौलावीरा एकमात्र हड़प्पाकालीन नगर है जो तीन सुस्पष्ट भागों — ऊपरी दुर्ग (Citadel), मध्य नगर (Middle Town) और निचला नगर (Lower Town) — में विभाजित था। अधिकांश अन्य हड़प्पा नगर केवल दो भागों में विभाजित थे — दुर्ग और निचला नगर।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:धौलावीरा की एक अन्य विशेषता यह भी है कि यहाँ नगर की चारदीवारी के भीतर एक बड़ा सार्वजनिक प्रांगण (Ceremonial Ground) था, जो संभवतः उत्सव या सामाजिक कार्यों के लिए प्रयुक्त होता था।
76. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राचीन नगर अपने उन्नत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए सुप्रसिद्ध है, जहां बांधों की श्रृंखला का निर्माण किया गया था और संबद्ध जलाशयों में नहर के माध्यम से जल को प्रवाहित किया जाता था?
(a) धौलावीरा
(b) कालीबंगा
(c) राखीगढ़ी
(d) रोपड़
I.A.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
धौलावीरा अपनी अद्वितीय जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यह नगर दो मौसमी नदियों — मनसर और मनहर — के बीच स्थित था, परंतु उनका जल वर्षभर उपलब्ध नहीं रहता था। इसीलिए यहाँ के निवासियों ने बाँधों की श्रृंखला और नहरों के माध्यम से जलाशयों को भरने की एक वैज्ञानिक प्रणाली विकसित की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:यहाँ से प्राप्त जलाशयों की कुल संख्या लगभग 16 बताई जाती है। उल्लेखनीय है कि इतनी उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली तत्कालीन विश्व की किसी भी अन्य सभ्यता में नहीं मिलती।
77. लेखन कला की उचित प्रणाली विकसित करने वाली सर्वप्रथम प्राचीन सभ्यता थी –
(a) सिंधु
(b) मिस्र
(c) सुमेरिया
(d) चीन
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1992
उत्तर-(c)
सुमेरिया (वर्तमान इराक का दक्षिणी भाग) के निवासियों ने विश्व में सर्वप्रथम एक व्यवस्थित लिपि का आविष्कार किया जिसे ‘क्यूनीफार्म’ (Cuneiform) लिपि कहा जाता है। यह लिपि पच्चर (कील) के आकार के चिह्नों से मिलकर बनती थी और मिट्टी की पट्टियों पर उकेरी जाती थी। इस लिपि का विकास लगभग 3200 ई.पू. में हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: क्यूनीफार्म लिपि को पढ़ने में सफलता सर्वप्रथम जॉर्ज फ्रेडरिक ग्रोटेफेंड (George Friedrich Grotefend) ने 1802 ई. में प्राप्त की थी। सुमेरिया में लिखित साहित्य का सबसे प्राचीन ज्ञात उदाहरण ‘गिलगमेश महाकाव्य’ (Epic of Gilgamesh) है, जो संसार का सबसे पुराना लिखित महाकाव्य माना जाता है।
78. निम्नलिखित में से किस पशु का अंकन हड़प्पा संस्कृति की मुहरों पर नहीं मिलता है ?
(a) बैल
(b) हाथी
(c) घोड़ा
(d) भेड़
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2009
उत्तर-(c)
हड़प्पा सभ्यता की मुहरों पर बैल, हाथी, गैंडा, बाघ, भैंसा जैसे अनेक पशुओं का चित्रण मिलता है, परंतु घोड़े का अंकन किसी भी मुहर पर अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। हालाँकि लोथल, सुरकोटडा और कालीबंगा जैसे स्थलों से घोड़े की अस्थियों के कुछ अवशेष मिले हैं, जो विद्वानों के बीच बहस का विषय बने हुए हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प्पा मुहरों में ‘एककोणी पशु’ (Unicorn) का चित्रण सर्वाधिक मात्रा में मिलता है, जो संभवतः किसी धार्मिक या प्रशासनिक महत्त्व का प्रतीक था। इसके अलावा मोहनजोदड़ो से प्राप्त ‘पशुपति मुहर’ में एक योगी आकृति के चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा अंकित हैं, जिसे आद्य-शिव का प्रतीक माना जाता है।
79. निम्नलिखित में से कौन-सी सभ्यता नील नदी के तट पर पनपी ?
(a) रोमन सभ्यता
(b) सिंधु घाटी की सभ्यता
(c) यूनानी सभ्यता
(d) मिस्र की सभ्यता
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
उत्तर-(d)
मिस्र की सभ्यता का उद्भव और विकास नील नदी की उपजाऊ घाटी में हुआ। यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस ने मिस्र को ‘नील नदी का उपहार’ (Gift of the Nile) कहा था, क्योंकि नील की वार्षिक बाढ़ से आने वाली उपजाऊ मिट्टी ही इस सभ्यता की कृषि और समृद्धि का आधार थी। मिस्र की सभ्यता लगभग 3100 ई.पू. में प्रारंभ हुई और यह सिंधु घाटी सभ्यता तथा मेसोपोटामिया सभ्यता की समकालीन थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मिस्र की सभ्यता विश्व की सबसे दीर्घजीवी सभ्यताओं में से एक है, जो लगभग 3000 वर्षों तक निरंतर फलती-फूलती रही। मिस्रवासियों ने 365 दिन के सौर कैलेंडर का आविष्कार किया था, जो आधुनिक कैलेंडर का आधार है।
80. सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए ।
1. यह प्रमुखतः लौकिक सभ्यता थी तथा उसमें धार्मिक तत्व, यद्यपि उपस्थित था, वर्चस्वशाली नहीं था।
2. उस काल में भारत में कपास से वस्त्र बनाए जाते थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा / कौन-से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
I.A.S. (Pre) 2011
M.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(c)
सिंधु घाटी सभ्यता की नगर-योजना, जल-निकासी प्रणाली और व्यापारिक संगठन यह सिद्ध करते हैं कि यह मूलतः एक लौकिक (Secular) सभ्यता थी। धर्म का स्थान अवश्य था, परंतु इसने प्रशासन और नगर-निर्माण को नियंत्रित नहीं किया जैसा कि मेसोपोटामिया में देखा जाता है। मोहनजोदड़ो के उत्खनन में कपास के रेशों के अवशेष मिले हैं जो प्रमाणित करते हैं कि इस काल में भारत में कपास से वस्त्र निर्माण होता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यूनानी भाषा में कपास को ‘Sindon’ कहा जाता था, जो ‘सिंध’ शब्द से व्युत्पन्न है, यह इस बात का प्रमाण है कि कपास का व्यापार भारत से पश्चिम की ओर होता था। सिंधु घाटी की मुहरों पर किसी देवालय या पुजारी-राज्य के स्पष्ट प्रमाण न मिलने से इसकी लौकिक प्रकृति और भी पुष्ट होती है।
81. हड़प्पन स्थल सनौली के अभी हाल में उत्खननों से प्राप्त हुए हैं-
(a) मानव शवाधान
(b) पशुओं के शवाधान
(c) आवासीय भवन
(d) रक्षा दीवार
U.P. Lower (Sub.) (Pre) 2004
उत्तर-(a)
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित सनौली (Sanauli) हड़प्पाकालीन पुरास्थल से 125 से अधिक मानव शवाधान क्रमबद्ध रूप से प्राप्त हुए हैं। ये शवाधान उत्तर-दक्षिण दिशा में व्यवस्थित थे और इनके साथ मृतकों की दैनिक उपयोग की वस्तुएं, विशेषकर आभूषण, मिट्टी के बर्तन आदि भी रखे गए थे, जो तत्कालीन अंत्येष्टि परंपरा को दर्शाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 2018-19 में सनौली में हुई नवीनतम खुदाई में ताम्र-निर्मित रथ, ढाल और तलवारें भी प्राप्त हुई हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप में युद्ध-रथों के प्राचीनतम पुरातात्विक साक्ष्य माने जाते हैं। यह खोज सिंधु-सरस्वती सभ्यता के उत्तरवर्ती काल (लगभग 2000-1800 ई.पू.) की है।
82. निम्न स्थानों पर किस एक स्थान पर सिंधु घाटी सभ्यता से संबद्ध
विख्यात वृषभ-मुद्रा प्राप्त हुई थी ?
(a) हड़प्पा
(b) चन्हुदडो
(c) लोथल
(d) मोहनजोदड़ो
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
मोहनजोदड़ो से प्राप्त कूबड़ वाले बैल (वृषभ) की आकृति युक्त मुहर हड़प्पा कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पुरातत्त्वविद् जॉन मार्शल ने इस मुहर की कलात्मकता की विशेष प्रशंसा की थी। बैल की मांसपेशियों का सजीव चित्रण और शारीरिक अनुपात की सटीकता इस मुहर को असाधारण बनाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिंधु सभ्यता में मुहरें मुख्यतः सेलखड़ी (Steatite) पत्थर से बनाई जाती थीं। इन मुहरों का उपयोग व्यापारिक वस्तुओं पर मालिकाना पहचान अंकित करने और संभवतः प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता था। अब तक खुदाई में 2000 से अधिक मुहरें प्राप्त हो चुकी हैं।
83. निम्नलिखित सभ्यताओं का उत्तर से दक्षिण का सही क्रम कौन-सा है?
(a) माया एजटेक मुझस्का इंका
(b) माया मुझस्काइंका एजटेक
(c) एजटेक मुझस्का माया इंका
(d) एजटेक माया मुझस्का इंका
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
भौगोलिक दृष्टि से उत्तर से दक्षिण की ओर इन सभ्यताओं का क्रम इस प्रकार है — एजटेक सभ्यता मध्य मेक्सिको (उत्तरी मेसोअमेरिका) में, माया सभ्यता दक्षिणी मेक्सिको, बेलिज, ग्वाटेमाला और होंडुरास में, मुझस्का (Muisca) सभ्यता दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया के पूर्वी पठारी क्षेत्र में, और इंका सभ्यता दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर क्वीटो (इक्वाडोर) से सेंटियागो (चिली) तक विस्तृत थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुझस्का सभ्यता ही वह सभ्यता थी जिससे प्रसिद्ध ‘एल्डोरैडो’ (El Dorado – सोने का शहर) की किंवदंती जन्मी, क्योंकि इनके राजा सोने की धूल से लेपित होकर पवित्र झील गुआटाविटा में स्नान करते थे। इंका सभ्यता की सड़क प्रणाली लगभग 40,000 किलोमीटर लंबी थी जो आधुनिक युग में भी एक अद्भुत इंजीनियरिंग उपलब्धि मानी जाती है।
84. किस पशु के अवशेष सिंधु घाटी सभ्यता में प्राप्त नहीं हुए हैं ?
(a) शेर
(b) घोड़ा
(c) गाय
(d) हाथी
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
सिंधु घाटी सभ्यता के उत्खनन से गाय, हाथी, भैंसा, बाघ और चीता जैसे पशुओं के अवशेष प्राप्त हुए हैं। घोड़े के अवशेषों के संदर्भ में विद्वानों में मतभेद है — कुछ स्थलों से अस्थि अवशेष मिले हैं परंतु यह विवादास्पद है। शेर के अस्थि अवशेष या उसका कोई चित्रण अब तक किसी भी हड़प्पाकालीन स्थल से प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए इस प्रश्न का सर्वाधिक उचित उत्तर शेर (विकल्प a) है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिंधु सभ्यता में कुत्ते को पालतू पशु के रूप में रखा जाता था — हड़प्पा स्थल से एक मुहर पर कुत्ते की आकृति भी मिली है। लोथल से मिली एक मुहर पर लोमड़ी जैसे पशु का चित्रण है जिसे कुछ विद्वान ‘पंचतंत्र’ की कहानियों से भी जोड़ते हैं।
85. वस्त्रों के लिए कपास की खेती का आरंभ सबसे पहले किया गया-
(a) मिस्र में
(b) मेसोपोटामिया में
(c) मध्य अमेरिका में
(d) भारत में
U.P.P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
वस्त्र निर्माण के लिए कपास की खेती सर्वप्रथम भारत में की गई। 1922 में राखालदास बनर्जी के नेतृत्व में हुई मोहनजोदड़ो की खुदाई में कपास के सूत के अवशेष प्राप्त हुए, जो लगभग 3000 ई.पू. के थे। यह प्रमाण सिद्ध करता है कि भारत के लोग विश्व में सबसे पहले कपास से वस्त्र बनाना जानते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्राचीन यूनानी लेखकों ने भारतीय कपास का उल्लेख ‘ऊन उगाने वाले पेड़’ (Tree bearing wool) के रूप में किया था, क्योंकि वे इस फसल से अपरिचित थे। भारत से कपास का निर्यात मेसोपोटामिया तक होता था — यह तथ्य मेसोपोटामियाई व्यापारिक अभिलेखों में भी उल्लिखित है।
86. मृण-पट्टिका पर उत्कीर्ण सींगयुक्त देवता की कृति प्राप्त हुई-
(a) बनावली से
(b) कालीबंगा से
(c) लोथल से
(d) सुरकोटडा से
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(b)
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित कालीबंगा हड़प्पाकालीन स्थल से प्राप्त मृण-पट्टिका (Terracotta tablet) पर दोहरे सींगों वाले एक देवता का अंकन मिलता है। यह चित्रण आद्य-शिव अथवा किसी पशुपति देवता की उपासना का संकेत देता है। मोहनजोदड़ो से भी एक मुहर पर सींगयुक्त देवता का चित्र प्राप्त हुआ है जिसे ‘पशुपति मुहर’ कहते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कालीबंगा ही एकमात्र हड़प्पाकालीन स्थल है जहाँ से प्राक्-हड़प्पा काल के जुते हुए खेत (Ploughed Field) के साक्ष्य मिले हैं — यह विश्व का सबसे पुराना जुते हुए खेत का पुरातात्विक प्रमाण है। इसके अतिरिक्त कालीबंगा से अग्निकुंड (Fire-altars) के भी साक्ष्य प्राप्त हुए हैं जो धार्मिक अनुष्ठानों की ओर संकेत करते हैं।
87. निम्नलिखित में से कौन-सा/से लक्षण सिंधु सभ्यता के लोगों का
सही चित्रण करता है/ करते हैं?
1. उनके विशाल महल और मंदिर होते थे।
2. ये देवियों और देवताओं, दोनों की पूजा करते थे।
3. वे युद्ध में घोड़ों द्वारा खींचे गए रथों का प्रयोग करते थे।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही कथन/कथनों को चुनिए ।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) 1, 2 और 3
(d) उपर्युक्त कथनों में से कोई भी सही नहीं है।
I.A.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
सिंधु घाटी सभ्यता के किसी भी स्थल से अब तक किसी मंदिर या राजमहल का स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिला है। धार्मिक जीवन की जानकारी मुख्यतः मुहरों और मिट्टी की मूर्तियों से होती है जिनमें मातृदेवी, पशुपति तथा लिंग-योनि पूजा के संकेत मिलते हैं, अर्थात देवी और देवता दोनों की उपासना के प्रमाण हैं। घोड़े द्वारा खींचे गए रथ के उपयोग के कोई पुरातात्विक साक्ष्य नहीं मिले हैं, यद्यपि सनौली में 2018-19 में ताम्र-रथ के अवशेष मिले हैं जो हड़प्पा सभ्यता के उत्तरवर्ती काल के हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिंधु सभ्यता में पाई गई मातृदेवी की मूर्तियाँ (Mother Goddess figurines) इस बात का संकेत देती हैं कि उस समाज में स्त्री-शक्ति की उपासना का विशेष महत्त्व था। मोहनजोदड़ो में मिला ‘महाजलकुंड’ (Great Bath) संभवतः धार्मिक स्नान के लिए प्रयुक्त होता था, जो अप्रत्यक्ष रूप से धर्म के महत्त्व को दर्शाता है।
88. हड़प्पा सभ्यता का स्थल मांडी, भारत के किस राज्य में स्थित है?
(a) गुजरात
(b) हरियाणा
(c) राजस्थान
(d) उत्तर प्रदेश
U.P.P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(d)
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बघरा ब्लॉक में स्थित मांडी गाँव जून 2000 में उस समय चर्चा में आया जब वहाँ एक खेत की खुदाई के दौरान प्राचीन आभूषण, मृद्भांड (मिट्टी के बर्तन) और अन्य पुरावस्तुएं मिलीं। इन्हें हड़प्पा सभ्यता से संबद्ध माना गया। यह स्थल ऊपरी गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में पड़ता है जो हड़प्पाकालीन बस्तियों के विस्तार की पूर्वी सीमा के निकट है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उत्तर प्रदेश में हड़प्पा सभ्यता से संबंधित अन्य महत्त्वपूर्ण स्थल हैं — बागपत जिले में सनौली, आलमगीरपुर (मेरठ जिला) और हुलास (सहारनपुर जिला)। आलमगीरपुर को हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी ज्ञात स्थल माना जाता है।
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