1. निम्नलिखित में से किस शासक ने ‘दीवान-ए-अमीर-कोही’ विभाग की स्थापना की थी?
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2017
उत्तर-(c)
मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से ‘दीवान-ए-अमीर-कोही’ नामक कृषि विभाग की स्थापना की थी। इस विभाग के माध्यम से किसानों को नकद ऋण (सोंढर) देकर बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने का प्रयास किया गया, हालांकि व्यवहार में यह योजना भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण असफल रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुहम्मद बिन तुगलक को ‘तोगा’ (टोकन करेंसी) चलाने और राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करने के लिए भी जाना जाता है, जिसके कारण इतिहासकार उसे ‘भ्रमित प्रतिभावान’ कहते हैं। दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में प्रसिद्ध मोरक्कन यात्री इब्न बतूता आया था, जिसने अपनी पुस्तक ‘रेहला’ में तत्कालीन भारत का विस्तृत वर्णन किया है।
2. इतिहासकार बरनी ने दिल्ली के सुल्तानों के अधीन भारत में शासन को वास्तव में इस्लामी नहीं माना क्योंकि-
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(a)
सल्तनत काल में हिंदू जनसंख्या बहुसंख्यक थी और इस्लाम स्वीकार करने वाली आबादी अपेक्षाकृत बहुत कम थी, इसी आधार पर बरनी ने इस शासन व्यवस्था को पूर्णतः इस्लामी राज्य मानने से इनकार किया। जियाउद्दीन बरनी फिरोज तुगलक के काल का प्रमुख इतिहासकार था, जिसकी रचना ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ सल्तनतकालीन इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बरनी ने अपनी पुस्तक ‘फतवा-ए-जहांदारी’ में आदर्श राज्य की संकल्पना प्रस्तुत करते हुए शासक के कर्तव्यों पर विचार किया है।
3. निम्नलिखित में से कौन एक युग्म सुमेलित नहीं है?
(a) दीवान-ए-मुस्तखराज – अलाउद्दीन खिलजी
(b) दीवान-ए-अमीरकोही – मुहम्मद तुगलक
(c) दीवान-ए-खैरात – फिरोज तुगलक
(d) दीवान-ए-रियासत – बलबन
(a) दीवान-ए-मुस्तखराज – अलाउद्दीन खिलजी
(b) दीवान-ए-अमीरकोही – मुहम्मद तुगलक
(c) दीवान-ए-खैरात – फिरोज तुगलक
(d) दीवान-ए-रियासत – बलबन
U.P.P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(d)
वास्तव में ‘दीवान-ए-रियासत’ की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी प्रसिद्ध बाजार नियंत्रण नीति को क्रियान्वित करने के लिए की थी, बलबन से इसका कोई संबंध नहीं था, इसलिए विकल्प (d) असंगत युग्म है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण व्यवस्था के अंतर्गत अनाज, वस्त्र, घोड़े आदि की कीमतें निश्चित कर दी गई थीं और इसकी निगरानी के लिए ‘शहना-ए-मंडी’ नामक अधिकारी नियुक्त किए गए थे। दूसरा तथ्य यह है कि फिरोज तुगलक द्वारा स्थापित ‘दीवान-ए-खैरात’ विभाग गरीब मुस्लिम लड़कियों के विवाह में आर्थिक सहायता देने हेतु कार्य करता था।
4. सल्तनत काल के अधिकांश अमीर एवं सुल्तान किस वर्ग के थे?
U.P. P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(a)
दिल्ली सल्तनत की स्थापना से लेकर खिलजी वंश तक के अधिकांश सुल्तान और प्रमुख अमीर मध्य एशियाई तुर्क वंश से संबंधित थे, यद्यपि बाद में खिलजी और तुगलक वंशों के साथ यह वर्चस्व कुछ कम हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय है कि गुलाम वंश के संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक मूलतः मोहम्मद गोरी का तुर्क गुलाम था, जिसे ‘लाखबख्श’ (लाखों का दान देने वाला) कहा जाता था। एक अन्य तथ्य यह है कि इल्तुतमिश के शासनकाल में ‘तुर्कान-ए-चहलगानी’ (चालीस तुर्क अमीरों का समूह) का गठन हुआ, जिसका प्रभाव बलबन के समय तक बना रहा।
5. सल्तनत काल में ‘दीवान-ए-अमीर-कोही’ विभाग निम्नलिखित में से किससे संबंधित था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(c)
मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा स्थापित ‘दीवान-ए-अमीर-कोही’ विभाग सीधे कृषि से जुड़ा था, जिसका उद्देश्य कृषकों को आर्थिक सहायता देकर बंजर भूमि का विस्तार करना और दोआब क्षेत्र में कृषि सुधार लागू करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुहम्मद बिन तुगलक ने इसी काल में दोआब क्षेत्र में करों की दर बढ़ा दी थी, जिससे किसानों में विद्रोह की स्थिति पैदा हुई और यह उसकी अलोकप्रिय नीतियों में गिना जाता है। दूसरा तथ्य यह है कि इस योजना के लिए विशेष भूमि सर्वेक्षण भी करवाया गया था, जिसे इतिहासकार आधुनिक भूमि-सुधार योजनाओं का प्रारंभिक रूप मानते हैं।
6. निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही रूप में सुमेलित है?
I.A.S. (Pre) 2001
उत्तर-(a)
फिरोज तुगलक ने ‘दीवान-ए-बंदगान’ नामक विभाग की स्थापना की, जो राज्य के दासों के रख-रखाव, प्रशिक्षण और वितरण की देखरेख करता था; उसके शासनकाल में दासों की संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़कर लगभग 1,80,000 तक पहुंच गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फिरोज तुगलक ने सिंचाई के लिए नहरों का व्यापक निर्माण कराया, जिसमें यमुना से जुड़ी नहरें प्रमुख थीं, और इसी कारण उसे जल-कार्यों का जनक भी कहा जाता है। दूसरा तथ्य यह है कि उसने ‘दार-उल-शफा’ नामक मुफ्त चिकित्सालय की भी स्थापना करवाई थी।
7. निम्नलिखित में से किस शासक ने ‘दीवान-ए-अमीर-कोही’ विभाग की स्थापना की थी?
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2017
उत्तर-(c)
यह विभाग मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा स्थापित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादन को बढ़ाना और किसानों को बेहतर बीज एवं वित्तीय सहायता प्रदान करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुहम्मद बिन तुगलक ही वह शासक था जिसने सांकेतिक मुद्रा (टोकन करेंसी) की शुरुआत की, जो तांबे और पीतल के सिक्कों को चांदी के सिक्कों के समान मूल्य देती थी, परंतु जालसाजी के कारण यह प्रयोग असफल रहा। दूसरा तथ्य यह है कि उसने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरि (दौलताबाद) स्थानांतरित करने का प्रयास किया था, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा।
8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. दिल्ली सल्तनत के राजस्व प्रशासन में राजस्व वसूली के प्रभारी को ‘आमिल’ कहा जाता था।
2. दिल्ली के सुल्तानों की इक्ता प्रणाली एक प्राचीन देशी संस्था थी।
3. ‘मीर बख्शी’ का पद दिल्ली के खलजी सुल्तानों के शासनकाल में अस्तित्व में आया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. दिल्ली सल्तनत के राजस्व प्रशासन में राजस्व वसूली के प्रभारी को ‘आमिल’ कहा जाता था।
2. दिल्ली के सुल्तानों की इक्ता प्रणाली एक प्राचीन देशी संस्था थी।
3. ‘मीर बख्शी’ का पद दिल्ली के खलजी सुल्तानों के शासनकाल में अस्तित्व में आया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
I.A.S. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
सल्तनत काल में परगने के राजस्व संग्रह का कार्य ‘आमिल’ नामक अधिकारी द्वारा किया जाता था, जबकि इक्ता व्यवस्था वास्तव में पश्चिम एशिया (ईरान) से आई एक विदेशी प्रशासनिक संस्था थी, जिसे इल्तुतमिश ने भारत में लागू किया, और ‘मीर बख्शी’ का पद खिलजी काल का नहीं बल्कि मुगल काल का था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इल्तुतमिश को ‘इक्ता व्यवस्था का संस्थापक’ माना जाता है और उसने ही दिल्ली सल्तनत में ‘चालीसा दल’ (तुर्कान-ए-चहलगानी) की शुरुआत की थी। दूसरा तथ्य यह है कि मुगल काल में मीर बख्शी सैन्य विभाग का सर्वोच्च अधिकारी होता था और मनसबदारी व्यवस्था की देखरेख भी करता था।
9. निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशिष्टता ‘इक्ता व्यवस्था’ की नहीं है?
U.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
इक्ता व्यवस्था के अंतर्गत इक्तादार (मुक्ती) स्वयं अपने क्षेत्र से राजस्व एकत्र करके अपने प्रशासनिक एवं सैनिक खर्चे पूरे करता था, यह राशि सीधे सुल्तान के खजाने (खालिसा) में नहीं जाती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: निजाम-उल-मुल्क तूसी द्वारा रचित फारसी ग्रंथ ‘सियासतनामा’ सेल्जुक साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर आधारित है और इक्ता प्रणाली की प्रारंभिक जानकारी का प्रमुख स्रोत माना जाता है। दूसरा तथ्य यह है कि अलाउद्दीन खिलजी ने राजस्व आवश्यकताओं के कारण कई इक्ताओं को खालिसा भूमि में परिवर्तित कर दिया था, जिससे केंद्रीय कोष की आय बढ़ी।
10. मध्यकालीन भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा आकार की दृष्टि से आरोही क्रम में सही अनुक्रम है?
I.A.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
मुगलकालीन प्रशासनिक ढांचे में सबसे बड़ी इकाई सूबा (प्रांत) थी, जिसके अंतर्गत कई सरकार (जिले के समान) आते थे और प्रत्येक सरकार आगे कई परगनों में विभाजित होती थी, इस प्रकार आकार के बढ़ते क्रम में सही अनुक्रम परगना-सरकार-सूबा होगा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सूबे का प्रधान अधिकारी ‘सूबेदार’ (या निजाम) कहलाता था जबकि सरकार का प्रमुख ‘फौजदार’ और परगने का प्रमुख ‘शिकदार’ होता था। दूसरा तथ्य यह है कि शाहजहां के काल में परगना और सरकार के बीच एक नई इकाई ‘चकला’ जोड़ी गई, जो प्रशासनिक सुविधा हेतु बनाई गई थी।
11. हदीस है एक-
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(a)
इस्लामी कानून व्यवस्था में कुरान के बाद हदीस को दूसरा सबसे प्रमुख स्रोत माना जाता है, जिसमें पैगंबर मुहम्मद के कथनों, कार्यों और निर्णयों का संग्रह होता है, और इन्हीं दोनों स्रोतों के आधार पर इस्लामी शरीअत (कानून संहिता) का निर्माण होता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शरीअत के अंतर्गत आने वाले कानूनों को ‘शरा’ कहा जाता था, जबकि सुल्तान द्वारा बनाए गए धर्मनिरपेक्ष/प्रशासनिक कानूनों को ‘जवाबित’ कहा जाता था। दूसरा तथ्य यह है कि दिल्ली सल्तनत में न्याय व्यवस्था का प्रमुख अधिकारी ‘काजी-उल-कुजात’ (मुख्य काजी) होता था, जो शरीअत के आधार पर न्याय करता था।
12. जवाबित का संबंध किससे था?
39th B.P. (Pre) 1994 / U.P. P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(a)
‘जवाबित’ सुल्तान द्वारा अपनी प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार बनाए गए राजकीय/धर्मनिरपेक्ष कानून थे, जो इस्लामी धार्मिक कानून (शरा) से भिन्न होते थे और प्रशासन, राजस्व व दैनिक शासन-व्यवस्था से संबंधित मामलों को नियंत्रित करते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन खिलजी ने प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत कई कठोर जवाबित लागू किए थे, जिनमें बाजार नियंत्रण और गुप्तचर व्यवस्था (बरीद) से संबंधित नियम प्रमुख थे। दूसरा तथ्य यह है कि सल्तनत काल में शासक को ‘शरा’ के पालन के साथ-साथ जवाबित के माध्यम से शासन संचालन की पूरी स्वतंत्रता प्राप्त थी, जिससे राज्य की प्रकृति पूर्णतः धर्मतंत्रीय (theocratic) नहीं रह गई थी।
13. ‘शर्ब’ कर लगाया जाता था-
U.P. P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
फिरोज तुगलक ने इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप शासन चलाने का प्रयास किया और उलेमाओं की सलाह से उपज का दस प्रतिशत सिंचाई कर ‘शर्ब’ के रूप में लागू किया, जो उन किसानों से लिया जाता था जिनकी भूमि राजकीय नहरों से सिंचित होती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फिरोज तुगलक ने केवल चार इस्लाम-सम्मत कर (खराज, जजिया, खुम्स और जकात) ही वैध माने और अपने शासनकाल में लगभग 24-28 अन्य अनुचित करों को समाप्त कर दिया था। दूसरा तथ्य यह है कि फिरोज तुगलक द्वारा बनवाई गई ‘पश्चिमी यमुना नहर’ मध्यकालीन भारत की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक थी, जिसका उपयोग बाद के काल में भी होता रहा।
14. सल्तनत काल में भू-राजस्व का सर्वोच्च ग्रामीण अधिकारी था-
I.A.S. (Pre) 2004
उत्तर-(a)
सल्तनत काल में प्रशासन की सबसे निचली व स्वायत्त इकाई ग्राम थी, जहां ‘चौधरी’ भू-राजस्व संबंधी मामलों में सर्वोच्च वंशानुगत ग्रामीण अधिकारी होता था और राज्य के राजस्व अधिकारियों का किसानों से सीधा संपर्क नहीं होता था, बल्कि वे चौधरी जैसे पारंपरिक मध्यस्थों के माध्यम से लगान वसूल करते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांव स्तर पर लेखा-जोखा रखने वाला अधिकारी ‘पटवारी’ कहलाता था, जो भूमि के रिकॉर्ड और फसल संबंधी विवरण दर्ज करता था। दूसरा तथ्य यह है कि सुल्तान, इक्तादारों (मुक्ती) और उनके अधीनस्थों के कार्यों पर नजर रखने के लिए ‘ख्वाजा’ नामक केंद्रीय निरीक्षक नियुक्त करता था।
15. भारत के किस मध्यकालीन शासक ने ‘इक्ता व्यवस्था’ प्रारंभ की थी?
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
इल्तुतमिश को भारत में इक्ता व्यवस्था का प्रवर्तक माना जाता है, जिसके अंतर्गत सैनिक अधिकारियों को सेवा के बदले भूमि से राजस्व वसूलने का अधिकार (न कि स्वामित्व) दिया जाता था और यह अधिकार हस्तांतरणीय होता था, अर्थात समय-समय पर इक्तादारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत का वह पहला शासक था जिसने बगदाद के खलीफा से ‘सुल्तान’ की मान्यता प्राप्त की और चांदी का शुद्ध ‘टंका’ सिक्का जारी किया। दूसरा तथ्य यह है कि बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने इक्ता प्रणाली में सुधार करते हुए कई इक्ताओं को खालिसा भूमि में बदल दिया ताकि केंद्रीय राजकोष की आय बढ़ाई जा सके।
16. निम्नलिखित में कौन भूमि-उत्पाद पर लगने वाले कर को इंगित करता है?
(i) खराज (ii) खुम्स
(iii) उश्र (iv) मुक्तई
अपने उत्तर का चयन निम्नलिखित कूटों से करें-
(i) खराज (ii) खुम्स
(iii) उश्र (iv) मुक्तई
अपने उत्तर का चयन निम्नलिखित कूटों से करें-
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(d)
खराज, उश्र और मुक्तई भूमि उत्पाद से संबंधित कर थे, जबकि खुम्स वास्तव में युद्ध में प्राप्त लूट की संपत्ति पर लगने वाला धर्मनिरपेक्ष कर था जिसका भूमि की उपज से कोई सीधा संबंध नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सामान्य इस्लामी नियम के अनुसार युद्ध में प्राप्त लूट का 4/5 भाग सैनिकों में बांटा जाता था और केवल 1/5 भाग राजकोष (बैत-उल-माल) में जमा होता था, किंतु अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक ने इस अनुपात को उलट दिया। दूसरा तथ्य यह है कि ‘उश्र’ मुस्लिम स्वामित्व वाली भूमि पर लगने वाला हल्का कर था, जबकि ‘खराज’ गैर-मुस्लिम स्वामित्व वाली भूमि पर लगने वाला उच्च दर का कर था।
17. मध्यकाल की सरकार एक समग्र संरचना थी। ये विलय था-
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(c)
दिल्ली सल्तनत और बाद की मध्यकालीन शासन व्यवस्थाएं वास्तव में फारस-अरब की प्रशासनिक परंपराओं, मध्य एशियाई तुर्क-मंगोल सैनिक संगठन और भारतीय स्थानीय प्रशासनिक तत्वों का एक समन्वित मिश्रण थीं, जो सल्तनत को एक विशिष्ट चरित्र प्रदान करती थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फारसी सल्तनत काल की राजकीय भाषा बनी रही और प्रशासनिक शब्दावली (जैसे दीवान, वजीर, सूबा) मुख्यतः फारसी-अरबी मूल की थी। दूसरा तथ्य यह है कि भारतीय तत्वों में ग्राम पंचायत व्यवस्था, परंपरागत भू-माप पद्धतियां तथा स्थानीय अधिकारी (चौधरी, पटवारी, मुकद्दम) जैसी संस्थाएं शामिल थीं जिन्हें सल्तनत ने अपनी सुविधा अनुसार बनाए रखा।
18. निम्न में से किस राजवंश के अंतर्गत विजारत का चरमोत्कर्ष हुआ?
U.P.P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
तुगलक वंश के काल में ‘विजारत’ (वजीर पद) अपने शिखर पर पहुंच गया था, विशेष रूप से फिरोज तुगलक के शासनकाल में वजीर राज्य के राजस्व, सैनिक व्यय और सामान्य प्रशासन के सभी प्रमुख मामलों का संचालन करता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विजारत की संस्था की प्रेरणा अब्बासी खलीफाओं से फारस के माध्यम से आई थी, और महमूद गजनवी के दरबार में फजल-बिन-अहमद उसका प्रथम प्रसिद्ध वजीर था। दूसरा तथ्य यह है कि गयासुद्दीन तुगलक ने एक नई परंपरा शुरू करते हुए पूर्ववर्ती अनुभवी वजीरों (जैसे ख्वाजा खातिर और निजामुलमुल्क जुनैदी) को सम्मानपूर्वक सलाहकार के रूप में रखा, जिससे प्रशासन में अनुभव का समावेश हो सके।
19. ‘दीवान-ए-अर्ज’ विभाग संबंधित था –
60th to 62nd B.P.S.C. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
‘दीवान-ए-अर्ज’ सल्तनत काल का सैन्य/रक्षा विभाग था, जिसका प्रमुख अधिकारी ‘आरिज-ए-मुमालिक’ कहलाता था और इस विभाग का गठन गुलाम वंश के शासक बलबन ने सेना को संगठित व अनुशासित बनाने के उद्देश्य से किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को नकद वेतन (इक्ता के बदले) देने की प्रणाली शुरू की और सैनिकों एवं घोड़ों का विवरण रखने के लिए ‘दाग’ (घोड़ों पर निशान लगाना) तथा ‘हुलिया’ (सैनिकों का व्यक्तिगत विवरण) प्रणाली लागू की। दूसरा तथ्य यह है कि इस विभाग के अंतर्गत सैनिकों की भर्ती, प्रशिक्षण, हथियारों की व्यवस्था और सैन्य अभियानों का संचालन भी आता था।
20. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करो एवं निम्न दिए हुए कूट में से सही उत्तर का चयन करो-
सूची-I सूची-II
A. दीवाने अर्ज 1. धार्मिक मुद्दों से संबंधित
B. दीवाने रिसालत 2. सरकारी पत्र व्यवहार से संबंधित
C. दीवाने इन्शा 3. वित्तीय मामलात से संबंधित
D. दीवाने वजारत 4. सेना विभाग से संबंधित
कूट :
A B C D
सूची-I सूची-II
A. दीवाने अर्ज 1. धार्मिक मुद्दों से संबंधित
B. दीवाने रिसालत 2. सरकारी पत्र व्यवहार से संबंधित
C. दीवाने इन्शा 3. वित्तीय मामलात से संबंधित
D. दीवाने वजारत 4. सेना विभाग से संबंधित
कूट :
A B C D
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
दिल्ली सल्तनत के चार प्रमुख केंद्रीय विभाग थे- दीवान-ए-अर्ज सेना संबंधी मामलों का, दीवान-ए-रिसालत धार्मिक एवं विदेशी मामलों का, दीवान-ए-इंशा शाही पत्राचार व दस्तावेजों का, और दीवान-ए-वजारत वित्त व राजस्व का प्रबंधन करता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दीवान-ए-रिसालत का प्रमुख ‘सद्र-उस-सुदूर’ कहलाता था, जो धार्मिक मामलों के साथ-साथ न्यायिक मामलों की भी देखरेख करता था। दूसरा तथ्य यह है कि दीवान-ए-इंशा का प्रधान ‘दबीर-ए-खास’ होता था, जो सुल्तान के नाम से जारी होने वाले शाही फरमानों (आदेशों) का प्रारूप तैयार करता था।
21. किसके सिक्कों पर बगदाद के अंतिम खलीफा का नाम सर्वप्रथम अंकित हुआ?
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(d)
अलाउद्दीन मसूद शाह के सिक्कों पर सबसे पहले बगदाद के अंतिम अब्बासी खलीफा अल-मुस्तसीम (1242-58 ई.) का नाम अंकित किया गया, जबकि इससे पूर्व इल्तुतमिश के सिक्कों पर खलीफा अल-मुस्तनसिर (1226-42 ई.) का नाम लिखा जाता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दिल्ली सल्तनत के शासक स्वयं को बगदाद के खलीफा का प्रतिनिधि (नायब) मानते थे, जिससे उन्हें वैधता और धार्मिक मान्यता प्राप्त होती थी, यद्यपि व्यवहार में खलीफा का कोई वास्तविक नियंत्रण नहीं था। दूसरा तथ्य यह है कि 1258 ई. में मंगोलों द्वारा बगदाद पर आक्रमण कर खलीफा अल-मुस्तसीम की हत्या कर दी गई थी, जिससे अब्बासी खलीफा-तंत्र का अंत हो गया।
22. सल्तनत काल के सिक्के- टंका, शशगनी एवं जीतल किन धातुओं के थे?
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(a)
सल्तनत काल में टंका और शशगनी चांदी के सिक्के थे जबकि जीतल तांबे का सिक्का था, और इस प्रकार इन तीनों सिक्कों के निर्माण में मुख्यतः चांदी व तांबा धातुओं का ही उपयोग होता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इल्तुतमिश ने ही चांदी के ‘टंका’ (लगभग 175 ग्रेन वजन) और तांबे के ‘जीतल’ को मानक सिक्कों के रूप में स्थापित किया, और इन दोनों के बीच विनिमय दर लगभग 1:48 निर्धारित थी। दूसरा तथ्य यह है कि मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा शुरू की गई असफल सांकेतिक मुद्रा (टोकन करेंसी) में तांबे और पीतल के सिक्कों को चांदी के टंका के बराबर मूल्य देने का प्रयास किया गया था, जो जालसाजी के कारण विफल हो गया।
23. उत्तर भारत में चांदी का सिक्का ‘टंका’ जारी करने वाला कौन मध्यकालीन शासक था?
U.P. P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(a)
इल्तुतमिश को उत्तर भारत में शुद्ध चांदी के टंका सिक्के को मानकीकृत रूप में जारी करने का श्रेय दिया जाता है, जिससे एक स्थिर मुद्रा प्रणाली की स्थापना हुई और यह सिक्का आगे के सल्तनत शासकों के समय भी प्रचलन में रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इल्तुतमिश ने ही इक्ता व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत की थी और ‘तुर्कान-ए-चहलगानी’ (चालीस तुर्क सरदारों का समूह) का गठन किया, जो आगे के शासकों के समय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। दूसरा तथ्य यह है कि इल्तुतमिश की पुत्री रजिया सुल्तान दिल्ली सल्तनत की एकमात्र महिला शासक थी, जो अपने पिता के बाद गद्दी पर बैठी।
24. सल्तनत काल में ‘फवाज़िल’ का अर्थ था?
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
‘फवाज़िल’ से तात्पर्य उस अतिरिक्त राजस्व राशि से था, जिसे इक्तादार (मुक्ती) अपने सैनिक एवं प्रशासनिक व्यय पूरे करने के बाद अपनी इक्ता से एकत्र होने वाले राजस्व से बचाकर केंद्रीय सरकारी खजाने में जमा करवाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलाउद्दीन खिलजी ने राजस्व आकलन व्यवस्था को सख्त बनाते हुए इक्तादारों के हिसाब-किताब की कठोर जांच करवाई, जिससे फवाज़िल की राशि में वृद्धि हुई और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगा। दूसरा तथ्य यह है कि अलाउद्दीन खिलजी ने इसी कड़ी जांच-व्यवस्था के तहत ‘दीवान-ए-मुस्तखराज’ नामक विभाग की स्थापना की थी, जो बकाया राजस्व की वसूली के लिए जिम्मेदार था।
25. सल्तनत काल की दो प्रमुख मुद्राओं का पता निम्नलिखित कूट से करें-
1. दाम 2. जीतल
3. रुपिया 4. टंका
कूट :
1. दाम 2. जीतल
3. रुपिया 4. टंका
कूट :
U.P. P.C.S. (Pre) 2001
उत्तर-(d)
दिल्ली सल्तनत काल की दो प्रमुख मानक मुद्राएं चांदी का ‘टंका’ और तांबे का ‘जीतल’ थीं, जिन्हें इल्तुतमिश ने प्रचलित किया था, जबकि ‘दाम’ और ‘रुपिया’ जैसी मुद्राएं बाद के मुगलकाल में प्रचलन में आईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल सम्राट अकबर के काल में ‘रुपिया’ (शेरशाह सूरी द्वारा शुरू किया गया चांदी का सिक्का) मानक मुद्रा बन गया और तांबे का ‘दाम’ उसका विनिमय-समतुल्य सिक्का था, जिसका अनुपात लगभग 1:40 था। दूसरा तथ्य यह है कि शशगनी भी चांदी का एक सिक्का था जो सल्तनत काल में प्रचलित था, और टंका तथा जीतल के बीच विनिमय दर लगभग 1:48 निर्धारित थी।
26. निम्न में से किसने ‘टंका’ (Tanka) नामक चांदी का सिक्का चलाया था?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
इल्तुतमिश ने चांदी के शुद्ध टंका सिक्के को दिल्ली सल्तनत की मुद्रा व्यवस्था में मानक रूप से स्थापित किया, और इसे शुद्ध अरबी शैली में ढालने वाला वह पहला तुर्क शासक था, जिससे सल्तनत की मुद्रा प्रणाली को एक स्थायी आधार मिला।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इल्तुतमिश के समकालीन कुतुबुद्दीन ऐबक का शासनकाल अत्यंत संक्षिप्त (केवल 4 वर्ष) रहा और उसकी मृत्यु लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते समय घोड़े से गिरकर हुई थी। दूसरा तथ्य यह है कि बलबन ने मुद्रा सुधार के स्थान पर मुख्यतः सैन्य और प्रशासनिक संगठन (जैसे दीवान-ए-अर्ज की स्थापना तथा ‘रक्त और लौह’ की नीति) पर अधिक ध्यान केंद्रित किया था।
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