1. वर्ष 1934 में कांग्रेस समाजवादी पार्टी का गठन किया गया था द्वारा-
U.P. P.C.S. (Mains) 2008
उत्तर-(b)
कांग्रेस समाजवादी पार्टी का गठन वर्ष 1934 में जयप्रकाश नारायण और आचार्य नरेंद्र देव की पहल पर हुआ था। यह दल कांग्रेस के भीतर ही एक संगठित समूह के रूप में कार्य करता था, जिसका उद्देश्य कांग्रेस की नीतियों को समाजवादी दिशा में मोड़ना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य युवाओं को कम्युनिस्ट विचारधारा की ओर जाने से रोकना भी था। साथ ही, बाद में 1948 में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में ही यह दल कांग्रेस से अलग होकर स्वतंत्र समाजवादी पार्टी (सोशलिस्ट पार्टी) के रूप में स्थापित हुआ।
2.कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की पहली बैठक पटना में हुई, वर्ष-
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना मई 1934 में पटना में हुई थी, जब कांग्रेस की एक बैठक के दौरान समाजवादी विचारों वाले सदस्यों ने अलग से मिलकर इस पार्टी को औपचारिक रूप दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस पार्टी की नीतियों तथा संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप अक्टूबर-नवंबर 1934 में बंबई में आयोजित सम्मेलन में दिया गया। पार्टी ने 1936 के लखनऊ अधिवेशन और 1936 के मीरत (फैजपुर) अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर अपनी वामपंथी उपस्थिति को और मजबूत किया।
3.कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों परविचार कीजिए-
1. इसने ब्रिटिश माल के बहिष्कार और करों के अपवंचन (इवेजन) की वकालत की।
2. यह सर्वहारा वर्ग का अधिनायकत्व स्थापित करना चाहती थी।
3. इसने अल्पसंख्यकों तथा दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन- क्षेत्र की वकालत की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
1. इसने ब्रिटिश माल के बहिष्कार और करों के अपवंचन (इवेजन) की वकालत की।
2. यह सर्वहारा वर्ग का अधिनायकत्व स्थापित करना चाहती थी।
3. इसने अल्पसंख्यकों तथा दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन- क्षेत्र की वकालत की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
I.A.S. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने ब्रिटिश वस्तुओं तथा करों के बहिष्कार का समर्थन किया था, लेकिन करों के अपवंचन (टैक्स इवेजन) की वकालत नहीं की। पार्टी का उद्देश्य समानता पर आधारित समाजवादी समाज की स्थापना करना था, सर्वहारा वर्ग का अधिनायकत्व (डिक्टेटरशिप ऑफ द प्रोलितारिएट) स्थापित करना मार्क्सवाद-लेनिनवाद का लक्ष्य था, न कि इस पार्टी का। इसने अल्पसंख्यकों और दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की भी वकालत नहीं की, इसलिए तीनों कथन गलत हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी मार्क्सवादी सिद्धांतों से प्रभावित थी परंतु इसने गांधीवादी अहिंसक तरीकों को भी स्वीकार किया, जिससे यह पूर्णतः साम्यवादी दलों से भिन्न रही। पार्टी ने जमींदारी प्रथा के उन्मूलन और भूमि सुधार की मांग को प्रमुखता से उठाया था।
4.निम्नलिखित में से कौन कांग्रेस समाजवादी दल का प्रमुख नेता था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
आचार्य नरेंद्र देव कांग्रेस समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक थे और उन्हें पार्टी का प्रथम अध्यक्ष चुना गया था। इस पार्टी की स्थापना 1934 में जयप्रकाश नारायण के साथ मिलकर की गई थी। पार्टी के अन्य प्रमुख सदस्यों में अशोक मेहता, अच्युत पटवर्धन, मीनू मसानी, डॉ. राम मनोहर लोहिया, पुरुषोत्तम त्रिकमदास, यूसुफ मेहर अली, गंगा शरण सिंह तथा कमलादेवी चट्टोपाध्याय जैसे नाम शामिल थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आचार्य नरेंद्र देव संस्कृत तथा बौद्ध दर्शन के भी प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने काशी विद्यापीठ (अब काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1936 के फैजपुर कांग्रेस अधिवेशन में समाजवादियों के दबाव में ही पहली बार किसानों से संबंधित प्रस्ताव पारित हुआ था।
5.1934 ई. में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की गई थी-
66th B.P.S.C. (Pre) (Re-Exam) 2020
उत्तर-(c)
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन 1934 में जयप्रकाश नारायण तथा आचार्य नरेंद्र देव के संयुक्त प्रयासों से हुआ था। पार्टी के अन्य महत्वपूर्ण सदस्यों में डॉ. राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, मीनू मसानी और अशोक मेहता शामिल थे, और इसका पहला सम्मेलन 1934 में पटना में आयोजित हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जवाहरलाल नेहरू, हालांकि औपचारिक रूप से इस पार्टी के सदस्य नहीं थे, फिर भी वे वैचारिक रूप से समाजवादी विचारों के समर्थक माने जाते थे और कांग्रेस के भीतर समाजवादी गुट को नैतिक समर्थन देते थे। यह पार्टी आगे चलकर 1948 में स्वतंत्र सोशलिस्ट पार्टी के रूप में कांग्रेस से अलग हो गई।
6. वर्ष 1934 में पटना में अखिल भारतीय कांग्रेस समाजवादी पार्टी का संयोजक कौन था?
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(c)
पटना में 1934 में स्थापित अखिल भारतीय कांग्रेस समाजवादी पार्टी के संयोजक जयप्रकाश नारायण थे। उन्हें पार्टी का महासचिव चुना गया, जबकि आचार्य नरेंद्र देव को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई। इन नेताओं का मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग को कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा की ओर बढ़ने से रोकना तथा कांग्रेस के भीतर ही एक समाजवादी मंच तैयार करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जयप्रकाश नारायण ने इससे पहले अमेरिका में पढ़ाई के दौरान मार्क्सवादी विचारों से प्रभावित होकर साम्यवाद का अध्ययन किया था, परंतु बाद में वे लोकतांत्रिक समाजवाद की ओर उन्मुख हुए। आगे चलकर जयप्रकाश नारायण ने 1970 के दशक में संपूर्ण क्रांति आंदोलन का नेतृत्व भी किया, जो भारतीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण घटना बनी।
7.कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की पहली बैठक हुई-
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
मई 1934 में पटना में आयोजित कांग्रेस समिति की बैठक के दौरान समाजवादी विचारधारा से जुड़े सदस्यों ने एक अलग बैठक की, जिसमें अखिल भारतीय कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना को औपचारिक स्वीकृति दी गई। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर 1934 में बंबई में आयोजित सम्मेलन में पार्टी की नीतियों और कार्यप्रणाली को अंतिम रूप दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पटना को इस बैठक के लिए चुना जाना इस बात का भी संकेत था कि बिहार में समाजवादी विचारधारा का प्रभाव उस समय काफी प्रबल हो चुका था, जो आगे स्वामी सहजानंद सरस्वती के किसान आंदोलन से भी जुड़ा। पार्टी का घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) मुख्यतः आचार्य नरेंद्र देव द्वारा तैयार किया गया था।
8.जयप्रकाश नारायण इस पार्टी से जुड़े थे-.
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
जयप्रकाश नारायण कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और उन्होंने आचार्य नरेंद्र देव के साथ मिलकर 1934 में इस पार्टी की स्थापना की थी। वे इस पार्टी के महासचिव के पद पर भी रहे और कांग्रेस के भीतर समाजवादी विचारधारा को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जयप्रकाश नारायण को भारतीय राजनीति में “लोकनायक” की उपाधि दी गई, जो उन्हें स्वतंत्रता के बाद के दशकों में उनकी सामाजिक और राजनीतिक भूमिका के लिए प्रदान की गई थी। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसके दौरान वे हजारीबाग जेल से नाटकीय रूप से फरार हुए थे।
9. जयप्रकाश दिवस मनाया गया-
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(d)
अप्रैल 1946 में जयप्रकाश नारायण की रिहाई की मांग को लेकर ‘जयप्रकाश दिवस’ मनाया गया था। पटना के बांकीपुर मैदान में एक विशाल जनसभा का आयोजन हुआ, जिसमें ब्रिटिश सरकार की राजनीतिक बंदियों को कारावास में रखने की नीति की तीखी आलोचना की गई तथा जयप्रकाश नारायण की तत्काल रिहाई की मांग उठाई गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जयप्रकाश नारायण को 1943 में लाहौर के किले से अन्य साथियों के साथ भागने के बाद पुनः गिरफ्तार किया गया था और उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति तक विभिन्न जेलों में रखा गया। उनकी रिहाई की मांग ने आजादी से पहले के अंतिम वर्षों में जनआंदोलन को एक नई गति प्रदान की थी।
10. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. 1936 में हस्ताक्षरित “बंबई मेनिफेस्टो” प्रत्यक्ष रूप से समाजवादी आदर्शों के प्रतिपादन का विरोधी था।
2. इसको समस्त भारत से वृहद व्यापारिक समुदाय का सहयोग मिला था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
1. 1936 में हस्ताक्षरित “बंबई मेनिफेस्टो” प्रत्यक्ष रूप से समाजवादी आदर्शों के प्रतिपादन का विरोधी था।
2. इसको समस्त भारत से वृहद व्यापारिक समुदाय का सहयोग मिला था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
I.A.S. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
मई 1936 में बंबई के 21 प्रमुख उद्योगपतियों ने ‘बंबई मेनिफेस्टो’ पर हस्ताक्षर किए थे, जो स्पष्ट रूप से समाजवादी विचारधारा के प्रतिपादन का विरोधी दस्तावेज़ था, जैसा कि जवाहरलाल नेहरू ने स्वयं लखनऊ अधिवेशन में इसकी आलोचना करते हुए कहा था। इस मेनिफेस्टो को देशभर के बड़े व्यापारिक समुदाय का व्यापक समर्थन भी प्राप्त हुआ था, इसलिए दोनों कथन सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह मेनिफेस्टो मुख्यतः कांग्रेस के 1936 के लखनऊ अधिवेशन में नेहरू द्वारा अध्यक्षीय भाषण में समाजवाद और भूमि सुधार की वकालत के प्रत्युत्तर में जारी किया गया था। इसमें जी. डी. बिड़ला, पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास जैसे प्रमुख उद्योगपति शामिल थे, जो निजी संपत्ति और पूंजीवादी आर्थिक ढांचे की सुरक्षा चाहते थे।
11.बिहार सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक थे-
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
जयप्रकाश नारायण बिहार सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना से जुड़े प्रमुख नेताओं में थे। इस पार्टी का गठन गंगाशरण सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी तथा रामानंद मिश्र जैसे समाजवादी विचारधारा के नेताओं द्वारा किया गया था, जो बाद में अखिल भारतीय कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी में विलय होकर एक व्यापक आंदोलन का हिस्सा बनी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रामवृक्ष बेनीपुरी हिंदी साहित्य के भी प्रसिद्ध लेखक थे और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से भी समाजवादी विचारों का प्रसार किया। बिहार में समाजवादी आंदोलन की यह पृष्ठभूमि स्वामी सहजानंद सरस्वती के किसान सभा आंदोलन से भी जुड़ी रही, जिससे बिहार समाजवादी राजनीति का एक प्रमुख केंद्र बना।
12. जयप्रकाश नारायण को कौन-सी उपाधि दी गई थी?
43rd B.P.S.C. (Pre) 1999
उत्तर-(b)
जयप्रकाश नारायण को ‘लोकनायक’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था, जो उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के दशकों में जनता के हितों के लिए किए गए संघर्षों के सम्मान में दी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जयप्रकाश नारायण ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हजारीबाग केंद्रीय जेल से नाटकीय रूप से फरार होकर भूमिगत रहकर आंदोलन का संचालन किया था। उन्हें वर्ष 1999 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।
13.’लोकनायक’ के नाम से किसे जाना जाता है?
46th B.P.S.C. (Pre) 2004
उत्तर-(c)
जयप्रकाश नारायण को ‘लोकनायक’ के नाम से जाना जाता है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया तथा अरुणा आसफ अली के साथ मिलकर भूमिगत रहकर भारतीय जनता को संगठित करने का कार्य किया। 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में उन्होंने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया, जिसने बिहार आंदोलन की शुरुआत की। वर्ष 1999 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन ने आगे चलकर 1975 में लगाए गए आपातकाल के विरुद्ध जनांदोलन की पृष्ठभूमि तैयार की और 1977 के लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
14.जयप्रकाश नारायण किस नाम से पहचाने जाते हैं?
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
जयप्रकाश नारायण को ‘लोकनायक’ के नाम से पहचाना जाता है, जो उन्हें उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान तथा स्वतंत्रता के पश्चात समाजसेवा और राजनीतिक सुधार आंदोलनों में निभाई गई भूमिका के लिए दी गई उपाधि है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘लोकमान्य’ की उपाधि बाल गंगाधर तिलक को, ‘लोकहितवादी’ की उपाधि गोपाल हरि देशमुख को दी गई थी, इस प्रकार ये सभी उपाधियां भिन्न-भिन्न व्यक्तित्वों से संबद्ध हैं। जयप्रकाश नारायण ने 1929 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने से पहले अमेरिका के विस्कॉन्सिन और ओहायो विश्वविद्यालयों में समाजशास्त्र की पढ़ाई की थी।
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