कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (1934)
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (Congress Socialist Party – CSP) की स्थापना 1934 ई. में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर कार्य करने वाले समाजवादी विचारधारा के नेताओं द्वारा की गई थी।
➣ इसका उद्देश्य कांग्रेस से अलग राजनीतिक दल बनाना नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर रहकर स्वतंत्रता आन्दोलन को समाजवादी दिशा प्रदान करना था।
➣ इसी कारण इसे प्रायः कांग्रेस के भीतर की पार्टी (a party within a party) अथवा कांग्रेस के भीतर समाजवादी समूह (Socialist Group within Congress) भी कहा जाता है।
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का मानना था कि भारत की राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक समानता भी आवश्यक है। इसलिए इसने किसानों, मजदूरों तथा वंचित वर्गों के हितों को राष्ट्रीय आन्दोलन से जोड़ने का प्रयास किया।
➣ पार्टी का दृष्टिकोण मार्क्सवाद से गहराई से प्रभावित था, यद्यपि इसके नेता सोवियत साम्यवादी दल की भारतीय शाखा के रूप में कार्य करने के बजाय भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल एक स्वतंत्र समाजवादी विचारधारा विकसित करना चाहते थे।
➣ भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने कांग्रेस के भीतर एक संगठित समाजवादी धारा के रूप में कार्य किया। पार्टी ने कांग्रेस के प्रस्तावों और नीतियों को अधिक जन-केंद्रित एवं मजदूर-किसान हितैषी बनाने हेतु लगातार दबाव बनाए रखा।
➣ आगे चलकर भारत छोड़ो आन्दोलन (1942) में इसके नेताओं ने भूमिगत रहकर आन्दोलन का नेतृत्व किया, जिससे इस संगठन की राष्ट्रीय पहचान और अधिक मजबूत हुई।
स्थापना की पृष्ठभूमि
➣ 1930 के दशक के प्रारम्भ तक भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के साथ-साथ समाजवादी विचारधारा का प्रभाव भी तेजी से बढ़ने लगा था। रूसी क्रांति (1917), विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (1929) तथा विभिन्न श्रमिक एवं किसान आंदोलनों ने भारतीय युवाओं और बुद्धिजीवियों को गहराई से प्रभावित किया।
➣ इसी समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर भी अनेक युवा नेता यह अनुभव करने लगे कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं होगी। उनका मत था कि स्वतंत्र भारत में आर्थिक विषमता, जमींदारी, शोषण तथा सामाजिक असमानता को समाप्त करने के लिए समाजवादी नीतियों को अपनाना आवश्यक है।
➣ सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930–1933) के स्थगन तथा उसके बाद उत्पन्न राजनीतिक परिस्थितियों ने कांग्रेस के भीतर वैचारिक बहस को और तेज कर दिया। इसी क्रम में 1933 ई. में नासिक जेल में बंद जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव, अच्युत पटवर्धन तथा अन्य समाजवादी नेताओं ने विचार-विमर्श किया।
➣ उन्होंने अनुभव किया कि कांग्रेस के भीतर समाजवादी विचारधारा को संगठित करने के लिए एक पृथक मंच का गठन आवश्यक है। यहीं से कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना का विचार स्पष्ट रूप से आकार लेने लगा।
➣ इस प्रकार पार्टी के गठन की अवधारणा उसकी वास्तविक स्थापना से लगभग एक वर्ष पूर्व ही नासिक जेल में विकसित हो चुकी थी।
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना (1934)
➣ 17 मई 1934 ई. को पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में आयोजित सम्मेलन में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) की स्थापना की गई। यह सम्मेलन अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) की बैठक के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसमें देशभर से लगभग 100 समाजवादी नेता एवं कार्यकर्ता सम्मिलित हुए।
➣ इस सम्मेलन में डॉ. राममनोहर लोहिया, यूसुफ मेहरअली, अच्युत पटवर्धन, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, मीनू मसानी, संपूर्णानंद तथा अन्य प्रमुख समाजवादी नेताओं ने भाग लिया। इन नेताओं का उद्देश्य कांग्रेस के भीतर समाजवादी विचारधारा को संगठित रूप देना था।
➣ पार्टी की स्थापना के समय आचार्य नरेंद्र देव को इसका प्रथम अध्यक्ष तथा जयप्रकाश नारायण को महामंत्री चुना गया।
➣ इसके अतिरिक्त ई.एम.एस. नंबूदरीपाद, मीनू मसानी, अच्युत पटवर्धन, राममनोहर लोहिया तथा संपूर्णानंद जैसे नेता भी संगठन की प्रारम्भिक कार्यकारिणी से जुड़े।
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर गठित एक समाजवादी समूह थी। इसका उद्देश्य कांग्रेस से अलग राजनीतिक दल बनाना नहीं था, बल्कि कांग्रेस के भीतर रहकर समाजवादी विचारधारा को मजबूत करना, किसानों एवं मजदूरों को राष्ट्रीय आन्दोलन से जोड़ना तथा स्वतंत्र भारत के निर्माण में समाजवादी सिद्धांतों को अपनाने की दिशा में कांग्रेस को प्रभावित करना था।
प्रमुख संस्थापक एवं नेता
| नेता | भूमिका / योगदान |
|---|---|
| आचार्य नरेंद्र देव | कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के प्रथम अध्यक्ष। उन्हें भारतीय समाजवादी आन्दोलन का प्रमुख वैचारिक मार्गदर्शक माना जाता है। |
| जयप्रकाश नारायण | पार्टी के प्रथम महामंत्री। संगठन के विस्तार तथा समाजवादी विचारधारा के प्रचार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। |
| डॉ. राममनोहर लोहिया | प्रमुख समाजवादी विचारक। उन्होंने कांग्रेस के भीतर समाजवादी नीतियों तथा जनआधारित राजनीति का समर्थन किया। |
| अच्युत पटवर्धन | पार्टी के प्रमुख संस्थापक नेताओं में से एक। संगठन के निर्माण तथा बाद में भूमिगत गतिविधियों में सक्रिय रहे। |
| यूसुफ मेहरअली | युवा समाजवादी नेता। मजदूर आन्दोलन तथा राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। |
| मीनू मसानी | प्रारम्भिक समाजवादी नेताओं में प्रमुख। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संगठनात्मक विकास में योगदान दिया। |
| ई.एम.एस. नंबूदरीपाद | प्रारम्भिक कार्यकारिणी के सदस्य। आगे चलकर भारतीय वामपंथी आन्दोलन के प्रमुख नेता बने। |
| संपूर्णानंद | प्रारम्भिक समाजवादी नेतृत्व के प्रमुख सदस्य तथा संगठन के विस्तार में सहभागी। |
प्रमुख उद्देश्य
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का प्रमुख उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर रहकर समाजवादी विचारधारा को संगठित करना तथा स्वतंत्रता आन्दोलन को किसानों, मजदूरों और निम्न आय वर्ग से अधिक निकटता से जोड़ना था।
➣ पार्टी का मानना था कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं होगी। स्वतंत्र भारत में आर्थिक एवं सामाजिक समानता, शोषण का अंत तथा संसाधनों का न्यायसंगत वितरण भी आवश्यक है।
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी किसानों, मजदूरों तथा श्रमिक संगठनों को राष्ट्रीय आन्दोलन का सक्रिय भागीदार बनाना चाहती थी, ताकि स्वतंत्रता संघर्ष व्यापक जनआन्दोलन का स्वरूप ग्रहण कर सके।
➣ पार्टी लोकतांत्रिक तरीकों से समाजवादी व्यवस्था स्थापित करने की पक्षधर थी। उसका उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप समाजवादी नीतियों को विकसित करना था।
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी कांग्रेस से अलग संगठन बनाकर उसका विरोध नहीं करना चाहती थी, बल्कि कांग्रेस की नीतियों और कार्यक्रमों को समाजवादी दृष्टिकोण से प्रभावित करना चाहती थी।
प्रमुख गतिविधियाँ
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में भूमिका
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक संगठित समाजवादी धारा के रूप में कार्य किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय आन्दोलन को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित न रखकर उसे किसानों, मजदूरों तथा अन्य श्रमिक वर्गों के हितों से जोड़ना था।
➣ पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस के भीतर भूमि सुधार, श्रमिक अधिकार, आर्थिक समानता तथा समाजवादी नीतियों के समर्थन में लगातार आवाज़ उठाई। उनका मानना था कि स्वतंत्र भारत का निर्माण सामाजिक और आर्थिक न्याय के सिद्धांतों पर होना चाहिए।
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने विभिन्न किसान सभाओं, मजदूर संगठनों तथा ट्रेड यूनियनों के साथ संपर्क स्थापित कर राष्ट्रीय आन्दोलन का सामाजिक आधार व्यापक बनाने का प्रयास किया। इससे स्वतंत्रता आन्दोलन में ग्रामीण एवं श्रमिक वर्ग की भागीदारी बढ़ी।
➣ 1936 ई. के कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने समाजवादी विचारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की। इससे कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के विचारों को कांग्रेस के भीतर और अधिक महत्व मिलने लगा, यद्यपि कांग्रेस ने समाजवाद को अपना आधिकारिक सिद्धांत स्वीकार नहीं किया।
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने भारतीय कम्युनिस्टों तथा अन्य वामपंथी संगठनों के साथ समय-समय पर सहयोग भी किया, किन्तु उसने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी और कांग्रेस के भीतर रहकर कार्य करना जारी रखा।
भारत छोड़ो आन्दोलन (1942) में भूमिका
➣ 8 अगस्त 1942 ई. को भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ होने के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी सहित कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आन्दोलन के नेतृत्व का दायित्व काफी हद तक कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं के कंधों पर आ गया।
➣ जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, यूसुफ मेहरअली, अरुणा आसफ़ अली तथा अन्य समाजवादी नेताओं ने भूमिगत रहकर आन्दोलन का संचालन किया। उन्होंने गुप्त बैठकों, संदेश-व्यवस्था तथा भूमिगत साहित्य के माध्यम से आन्दोलन को जीवित बनाए रखा।
➣ जयप्रकाश नारायण को हजारीबाग केंद्रीय कारागार में बंद किया गया था, किन्तु 9 नवम्बर 1942 ई. को वे अपने साथियों के साथ जेल से निकलने में सफल रहे। इसके बाद उन्होंने भूमिगत रहकर आन्दोलन को नई गति प्रदान की। यह घटना भारत छोड़ो आन्दोलन की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक मानी जाती है।
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं ने भूमिगत नेटवर्क का निर्माण किया, गुप्त पत्रक प्रकाशित किए, संदेशों का आदान-प्रदान कराया तथा अनेक स्थानों पर ब्रिटिश प्रशासन के विरुद्ध जनप्रतिरोध को संगठित किया। इस कारण ब्रिटिश सरकार ने इनके विरुद्ध व्यापक दमनात्मक कार्रवाई की।
➣ भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने यह सिद्ध किया कि वह केवल एक वैचारिक संगठन नहीं थी, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर भूमिगत रहकर स्वतंत्रता आन्दोलन का नेतृत्व करने में भी सक्षम थी। इसी आन्दोलन ने जयप्रकाश नारायण और डॉ. राममनोहर लोहिया जैसे नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का कांग्रेस से अलग होना
➣ भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के सामने यह प्रश्न उठा कि क्या वह कांग्रेस के भीतर कार्य करती रहे या स्वतंत्र राजनीतिक दल के रूप में कार्य करे।
➣ 1948 ई. में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया कि कांग्रेस के भीतर अलग वैचारिक दलों अथवा समूहों की सदस्यता स्वीकार नहीं की जाएगी। इस निर्णय के बाद कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस से अलग होने का निर्णय लिया।
➣ इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी कांग्रेस से अलग होकर स्वतंत्र सोशलिस्ट पार्टी (Socialist Party) के रूप में संगठित हो गई। इसके साथ ही कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का कांग्रेस के भीतर एक संगठन के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया।
➣ यद्यपि संगठनात्मक रूप से कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का अंत हो गया, फिर भी इसके नेताओं और विचारों ने स्वतंत्र भारत की समाजवादी राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। आगे चलकर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, समाजवादी पार्टी तथा अन्य समाजवादी दलों के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
समयरेखा (Timeline)
| वर्ष / तिथि | प्रमुख घटना |
|---|---|
| 1917 ई. | रूसी क्रांति हुई, जिसने भारतीय युवाओं एवं समाजवादी नेताओं को गहराई से प्रभावित किया। |
| 1929 ई. | विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (Great Depression) प्रारम्भ हुई, जिससे समाजवादी विचारों को और बल मिला। |
| 1933 ई. | नासिक जेल में बंद समाजवादी नेताओं ने कांग्रेस के भीतर एक पृथक समाजवादी मंच की आवश्यकता पर विचार किया। |
| 17 मई 1934 ई. | पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) की स्थापना हुई। |
| 1934 ई. | आचार्य नरेंद्र देव प्रथम अध्यक्ष तथा जयप्रकाश नारायण प्रथम महामंत्री बने। |
| 1936 ई. | कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू ने समाजवादी विचारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की। |
| 8 अगस्त 1942 ई. | भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ हुआ। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं ने भूमिगत आन्दोलन का नेतृत्व किया। |
| 9 नवम्बर 1942 ई. | जयप्रकाश नारायण अपने साथियों सहित हजारीबाग केंद्रीय कारागार से निकलने में सफल रहे। |
| 1948 ई. | कांग्रेस के निर्णय के बाद कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी कांग्रेस से अलग होकर स्वतंत्र सोशलिस्ट पार्टी बन गई। |
सारांश
- कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) की स्थापना 17 मई 1934 ई. को पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक समाजवादी समूह के रूप में की गई थी।
- इसकी स्थापना की पृष्ठभूमि में रूसी क्रांति (1917), विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (1929), समाजवादी विचारधारा का बढ़ता प्रभाव तथा सविनय अवज्ञा आन्दोलन के बाद कांग्रेस के भीतर उत्पन्न वैचारिक बहस प्रमुख कारण थे।
- 1933 ई. में नासिक जेल में बंद जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव, अच्युत पटवर्धन तथा अन्य समाजवादी नेताओं ने कांग्रेस के भीतर एक संगठित समाजवादी मंच बनाने का विचार विकसित किया।
- पार्टी के प्रथम अध्यक्ष आचार्य नरेंद्र देव तथा प्रथम महामंत्री जयप्रकाश नारायण बने। डॉ. राममनोहर लोहिया, यूसुफ मेहरअली, अच्युत पटवर्धन, मीनू मसानी तथा ई.एम.एस. नंबूदरीपाद इसके प्रमुख नेताओं में थे।
- कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का उद्देश्य कांग्रेस से अलग राजनीतिक दल बनाना नहीं था, बल्कि कांग्रेस के भीतर रहकर समाजवादी विचारधारा को मजबूत करना तथा किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों को राष्ट्रीय आन्दोलन से जोड़ना था।
- इस संगठन ने कांग्रेस की नीतियों को अधिक जनोन्मुख, किसान-मजदूर हितैषी तथा समाजवादी बनाने का प्रयास किया और राष्ट्रीय आन्दोलन के सामाजिक आधार का विस्तार किया।
- भारत छोड़ो आन्दोलन (1942) के दौरान कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं ने भूमिगत रहकर आन्दोलन का नेतृत्व किया। जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, यूसुफ मेहरअली तथा अरुणा आसफ़ अली ने इस आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 9 नवम्बर 1942 ई. को जयप्रकाश नारायण का हजारीबाग केंद्रीय कारागार से निकलना भारत छोड़ो आन्दोलन की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक माना जाता है।
- 1948 ई. में कांग्रेस द्वारा आंतरिक दलों की सदस्यता समाप्त करने के निर्णय के बाद कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी कांग्रेस से अलग होकर स्वतंत्र सोशलिस्ट पार्टी बन गई।
- भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का सबसे बड़ा योगदान कांग्रेस के भीतर समाजवादी विचारधारा को संगठित करना तथा स्वतंत्रता आन्दोलन को किसानों, मजदूरों और युवाओं से अधिक व्यापक रूप से जोड़ना था।
कुछ महत्वपूर्ण भ्रम-बिंदु
➣ कई विद्यार्थी मानते हैं कि कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग एक स्वतंत्र राजनीतिक दल थी। वास्तव में इसकी स्थापना 1934 ई. में कांग्रेस के भीतर एक समाजवादी समूह के रूप में हुई थी।
➣ यह समझना भी सही नहीं है कि कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) एक ही संगठन थे। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी कांग्रेस के भीतर कार्य करती थी, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एक स्वतंत्र राजनीतिक दल थी।
➣ कई बार यह भ्रम हो जाता है कि कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का उद्देश्य कांग्रेस का विरोध करना था। वास्तव में इसका उद्देश्य कांग्रेस से अलग होना नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर रहकर उसकी नीतियों को समाजवादी दिशा देना था।
➣ कुछ विद्यार्थी आचार्य नरेंद्र देव और जयप्रकाश नारायण की भूमिकाओं में भ्रमित हो जाते हैं। ध्यान रखें कि आचार्य नरेंद्र देव कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के प्रथम अध्यक्ष थे, जबकि जयप्रकाश नारायण इसके प्रथम महामंत्री थे।
➣ कई परीक्षाओं में पूछा जाता है कि भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान भूमिगत आन्दोलन का नेतृत्व किन नेताओं ने किया। इसमें जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, यूसुफ मेहरअली तथा अरुणा आसफ़ अली जैसे कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
➣ यह भी ध्यान रखें कि जयप्रकाश नारायण का हजारीबाग केंद्रीय कारागार से निकलना 9 नवम्बर 1942 ई. की महत्वपूर्ण घटना है, जिसे भारत छोड़ो आन्दोलन के संदर्भ में विशेष रूप से याद रखा जाता है।
➣ कई विद्यार्थी यह समझते हैं कि कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी कांग्रेस का हिस्सा बनी रही। वास्तव में 1948 ई. में कांग्रेस द्वारा आंतरिक दलों की सदस्यता समाप्त करने के निर्णय के बाद कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी कांग्रेस से अलग होकर स्वतंत्र सोशलिस्ट पार्टी (Socialist Party) बन गई।
➣ कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का सबसे बड़ा योगदान सशस्त्र क्रांति करना नहीं था, बल्कि कांग्रेस के भीतर समाजवादी विचारधारा को संगठित करना तथा राष्ट्रीय आन्दोलन को किसानों, मजदूरों और युवाओं से अधिक व्यापक रूप से जोड़ना था।
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