बॉम्बे एसोसिएशन (1852): स्थापना, उद्देश्य, प्रमुख गतिविधियाँ एवं सीमाएँ

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बॉम्बे एसोसिएशन (1852)

बॉम्बे एसोसिएशन की स्थापना 26 अगस्त 1852 ई. को बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में हुई थी। इसे बॉम्बे प्रेसीडेंसी की प्रथम संगठित राजनीतिक संस्था माना जाता है।

➣ इस संस्था की स्थापना का प्रमुख श्रेय जगन्नाथ शंकरशेठ को दिया जाता है, जबकि प्रसिद्ध पारसी समाज सुधारक नौरोजी फुरदूनजी ने भी इसके संगठन एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

19वीं शताब्दी के मध्य तक बंगाल में ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन (1851) जैसी राजनीतिक संस्थाएँ सक्रिय हो चुकी थीं, जबकि पश्चिमी भारत में ऐसी कोई प्रभावशाली संस्था नहीं थी, जो बॉम्बे प्रेसीडेंसी के लोगों की समस्याओं एवं माँगों को संगठित रूप से सामने रख सके।

➣ दूसरी ओर ब्रिटिश प्रशासनिक नीतियों, सरकारी सेवाओं में भारतीयों की सीमित भागीदारी तथा प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता के कारण शिक्षित भारतीयों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही थी। इन परिस्थितियों ने पश्चिमी भारत में एक संगठित राजनीतिक संस्था की आवश्यकता को जन्म दिया।

➣ प्रारम्भिक राजनीतिक संस्थाओं, विशेषकर ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन, से प्रेरणा लेकर जगन्नाथ शंकरशेठ, नौरोजी फुरदूनजी तथा अन्य सार्वजनिक नेताओं ने 26 अगस्त 1852 ई. को बॉम्बे एसोसिएशन की स्थापना की। इस प्रकार इस संस्था ने पश्चिमी भारत में संगठित राजनीतिक गतिविधियों की नींव रखी।

➣ बॉम्बे एसोसिएशन का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष यह था कि दादाभाई नौरोजी ने अपने सार्वजनिक एवं राजनीतिक जीवन का प्रारम्भिक अनुभव इसी संस्था के माध्यम से प्राप्त किया।

➣ आगे चलकर वे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। इस दृष्टि से बॉम्बे एसोसिएशन को दादाभाई नौरोजी के राजनीतिक प्रशिक्षण का प्रारम्भिक मंच भी माना जाता है।

संगठनात्मक स्वरूप

बॉम्बे एसोसिएशन का मुख्यालय बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में था। यह संस्था बॉम्बे प्रेसीडेंसी के शिक्षित भारतीयों, व्यापारियों, समाज सुधारकों, जमींदारों तथा सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों का एक संगठित राजनीतिक मंच थी।

➣ संस्था के प्रथम अध्यक्ष सर जमशेटजी जीजीभॉय थे, जो उस समय के प्रसिद्ध उद्योगपति, समाजसेवी एवं परोपकारी व्यक्ति थे। डॉ. भाऊ दाजी लाड (मूल नाम – रामचंद्र विट्ठल लाड) इसके प्रथम महासचिव नियुक्त किए गए, जबकि विनायक शंकरशेठ संस्था के प्रमुख सचिवों में सम्मिलित थे।

➣ संस्था के प्रमुख सदस्यों में जगन्नाथ शंकरशेठ, नौरोजी फुरदूनजी, दादाभाई नौरोजी, डॉ. भाऊ दाजी लाड तथा विनायक शंकरशेठ जैसे अनेक प्रतिष्ठित भारतीय नेता शामिल थे। इन नेताओं ने पश्चिमी भारत में संगठित राजनीतिक चेतना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उद्देश्य

➣ इसका उद्देश्य बॉम्बे प्रेसीडेंसी के लोगों को एक संगठित राजनीतिक मंच प्रदान करना तथा उनकी समस्याओं को संवैधानिक ढंग से ब्रिटिश सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना था। इसके अतिरिक्त बॉम्बे प्रेसीडेंसी के लोगों के राजनीतिक, प्रशासनिक एवं नागरिक हितों की रक्षा करना भी था।

  • बॉम्बे प्रेसीडेंसी के लोगों के हितों एवं अधिकारों की रक्षा करना।
  • ब्रिटिश सरकार के समक्ष भारतीयों की समस्याओं एवं माँगों को संगठित रूप से प्रस्तुत करना।
  • नई विधान परिषद के गठन में भारतीयों के प्रतिनिधित्व की माँग करना।
  • उच्च सरकारी सेवाओं में भारतीयों की नियुक्ति बढ़ाने तथा उनके साथ होने वाले भेदभाव का विरोध करना।
  • प्रशासनिक एवं न्यायिक सुधारों की माँग करना।
  • संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण उपायों द्वारा जनमत तैयार करना तथा प्रशासनिक सुधारों को प्रोत्साहित करना।

➣ बॉम्बे एसोसिएशन अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मुख्यतः याचिकाओं, ज्ञापनों एवं प्रतिवेदनों का सहारा लेती थी।।

संस्था समय-समय पर ब्रिटिश सरकार के समक्ष विधान परिषदों में भारतीय प्रतिनिधित्व, उच्च सरकारी सेवाओं में भारतीयों की नियुक्ति तथा प्रशासनिक एवं न्यायिक सुधारों से संबंधित अपनी माँगें प्रस्तुत करती थी।

➣ इस प्रकार बॉम्बे एसोसिएशन ने पश्चिमी भारत में संवैधानिक राजनीतिक आंदोलन की परंपरा को सुदृढ़ किया और भारतीयों के अधिकारों के लिए संगठित एवं शांतिपूर्ण ढंग से आवाज़ उठाई।

1876 में पुनर्जीवन का प्रयास

➣ स्थापना के कुछ वर्षों बाद बॉम्बे एसोसिएशन की गतिविधियाँ धीरे-धीरे कम होने लगीं और अंततः यह संस्था लगभग निष्क्रिय हो गई।

1876 ई. में नौरोजी फुरदूनजी तथा दादाभाई नौरोजी ने इस लगभग निष्क्रिय संस्था को पुनः सक्रिय करने का प्रयास किया। उनके प्रयासों से कुछ समय के लिए संस्था की गतिविधियों में पुनः गति आई, किन्तु यह सक्रियता अधिक समय तक बनी नहीं रह सकी।

➣ इसी अवधि में महादेव गोविंद रानाडे, फिरोजशाह मेहता तथा के. टी. तेलंग जैसे पाश्चात्य-शिक्षित नेताओं की नई पीढ़ी सार्वजनिक जीवन में उभर चुकी थी। इनके नेतृत्व में पश्चिमी भारत में नए राजनीतिक संगठनों का विकास होने लगा, जिससे बॉम्बे एसोसिएशन का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता गया।

➣ इसी समय वेस्टर्न इंडियन एसोसिएशन जैसी अन्य राजनीतिक संस्थाएँ भी अस्तित्व में आईं। परिणामस्वरूप बॉम्बे एसोसिएशन पश्चिमी भारत की प्रमुख राजनीतिक संस्था के रूप में अपनी पूर्व स्थिति बनाए नहीं रख सकी।

सीमाएँ

बॉम्बे एसोसिएशन का सदस्य-आधार मुख्यतः शिक्षित, सम्पन्न एवं अभिजात वर्ग तक सीमित था। किसानों, श्रमिकों तथा सामान्य जनता की इसमें प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी, इसलिए यह व्यापक जन-आंदोलन का रूप नहीं ले सकी।

➣ संस्था का प्रभाव मुख्यतः बॉम्बे प्रेसीडेंसी तक ही सीमित रहा। यह अन्य प्रांतों में अपने संगठन का विस्तार नहीं कर सकी और न ही अखिल भारतीय राजनीतिक संस्था बन पाई।

➣ संस्था की राजनीतिक गतिविधियाँ मुख्यतः याचिकाओं एवं ज्ञापनों तक सीमित रहीं। इसलिए ब्रिटिश सरकार पर व्यापक जनदबाव बनाने की इसकी क्षमता सीमित थी।

➣ समय के साथ अधिक संगठित एवं व्यापक आधार वाले राजनीतिक संगठनों के उदय के कारण बॉम्बे एसोसिएशन का प्रभाव निरंतर घटता गया। आगे चलकर बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन (1885) जैसी नई संस्थाओं ने पश्चिमी भारत के राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका संभाल ली।

महत्वपूर्ण तथ्य

विषय विवरण
स्थापना तिथि 26 अगस्त 1852 ई.
स्थान बॉम्बे (वर्तमान मुंबई)
प्रमुख संस्थापक जगन्नाथ शंकरशेठ (नौरोजी फुरदूनजी की भी महत्वपूर्ण भूमिका)
प्रथम अध्यक्ष सर जमशेटजी जीजीभॉय
प्रथम महासचिव डॉ. भाऊ दाजी लाड (मूल नाम – रामचंद्र विट्ठल लाड)
अन्य प्रमुख सदस्य दादाभाई नौरोजी, नौरोजी फुरदूनजी, विनायक शंकरशेठ
प्रेरणा-स्रोत ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन (1851) की संवैधानिक कार्यशैली
प्रमुख राजनीतिक पहल चार्टर एक्ट, 1853 के संबंध में सुधारों एवं विधान परिषद में भारतीय प्रतिनिधित्व की माँग
1876 का पुनर्जीवन नौरोजी फुरदूनजी एवं दादाभाई नौरोजी द्वारा पुनः सक्रिय करने का प्रयास
उत्तराधिकारी संस्था बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन (1885)
विशेषता बॉम्बे प्रेसीडेंसी की प्रथम संगठित राजनीतिक संस्था

कालक्रम

वर्ष घटना
1851 ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की स्थापना
26 अगस्त 1852 बॉम्बे एसोसिएशन की स्थापना
1853 चार्टर एक्ट के संबंध में भारतीय प्रतिनिधित्व की माँग
1876 पुनर्जीवन का प्रयास (नौरोजी फुरदूनजी एवं दादाभाई नौरोजी)
1885 बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन की स्थापना

बॉम्बे एसोसिएशन की स्थापना 26 अगस्त 1852 को बॉम्बे में हुई।
प्रमुख संस्थापकजगन्नाथ शंकरशेठ; प्रथम अध्यक्ष- सर जमशेटजी जीजीभॉय
प्रथम महासचिवडॉ. भाऊ दाजी लाड (मूल नाम – रामचंद्र विट्ठल लाड)।
ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन (1851) की कार्यशैली से प्रेरित होकर स्थापित की गई।
▪ चार्टर एक्ट, 1853 के संबंध में विधान परिषद में भारतीय प्रतिनिधित्व की माँग की।
▪ दादाभाई नौरोजी के प्रारम्भिक राजनीतिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था।
▪ 1876 में नौरोजी फुरदूनजी एवं दादाभाई नौरोजी ने इसे पुनः सक्रिय करने का प्रयास किया।
उत्तराधिकारी संस्थाबॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन (1885)

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