1.1905 में बंगाल विभाजन किस वायसराय ने किया?
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2003
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2003
उत्तर-(b)
लॉर्ड कर्जन 1899 से 1905 तक भारत के वायसराय रहे, और इसी अवधि में उन्होंने 1905 में बंगाल का विभाजन करवाया। आधिकारिक तौर पर इसे प्रशासनिक सुविधा का नाम दिया गया, परंतु वास्तविक मंशा बंगाल में उभरते राष्ट्रवाद को हिंदू-मुस्लिम आधार पर बाँटकर कमजोर करना थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कर्जन को उनके शैक्षणिक सुधारों (भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904) के लिए भी जाना जाता है, जिसकी भी तीखी आलोचना हुई थी। दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि व्यापक विरोध के कारण बंगाल विभाजन को अंततः 1911 के दिल्ली दरबार में लॉर्ड हार्डिंग के समय रद्द कर दिया गया।
2.निम्नलिखित में से किसने बंगाल के विभाजन (1905) के विरोध में हुए आंदोलन का नेतृत्व किया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने बंगाल विभाजन के विरुद्ध शुरुआती आंदोलन का नेतृत्व किया और उन्हें इस आंदोलन के दौरान “राष्ट्रगुरु” की उपाधि से सम्मानित किया गया। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से थे और उन्हें दो बार कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया (1895, 1902)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सुरेंद्रनाथ बनर्जी इंडियन सिविल सर्विस में चयनित होने वाले शुरुआती भारतीयों में थे, लेकिन एक विवाद के कारण उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था, जिसके बाद वे राजनीति और शिक्षा (रिपन कॉलेज की स्थापना) में सक्रिय हुए।
3.निम्नलिखित में सबसे बाद में क्या हुआ?
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
इन चार घटनाओं को कालक्रम में रखें तो सबसे पहले 1793 में लॉर्ड कार्नवालिस की स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था आती है, इसके बाद लॉर्ड वेलेजली (1798-1805) की सहायक संधि नीति, फिर लॉर्ड डलहौजी (1848-56) की हड़प नीति, और अंत में 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा किया गया बंगाल विभाजन सबसे बाद की घटना है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हड़प नीति के अंतर्गत डलहौजी ने सतारा, झाँसी और नागपुर जैसे राज्यों को बिना पुत्र उत्तराधिकारी होने के आधार पर अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया था, जो आगे चलकर 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख कारण बना।
4.बंग-भंग के बाद कौन-सा आंदोलन शुरू हुआ था?
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
बंगाल विभाजन के विरोध स्वरूप स्वदेशी आंदोलन का जन्म हुआ, जिसमें विदेशी वस्तुओं, विशेषकर ब्रिटिश वस्त्रों, का बहिष्कार करते हुए स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर बल दिया गया। यह आंदोलन आर्थिक राष्ट्रवाद की एक प्रमुख अभिव्यक्ति बना और इसी से प्रेरित होकर बाद में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद और बंगाल केमिकल्स जैसे स्वदेशी उद्यमों की स्थापना हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वदेशी आंदोलन के दौरान ही रवींद्रनाथ टैगोर ने “आमार सोनार बांग्ला” गीत की रचना की, जो आज बांग्लादेश का राष्ट्रगान है।
5.बंगाल के विभाजन के समय, बंगाल का लेफ्टिनेंट गवर्नर था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(a)
ध्यान देने योग्य बात है कि यहाँ “कर्जन” विकल्प में सर एन्ड्रू फ्रेजर का अभिप्राय लिया गया है, जो उस समय बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे, जबकि लॉर्ड कर्जन स्वयं भारत के वायसराय थे, लेफ्टिनेंट गवर्नर नहीं। प्रश्न में दिए गए विकल्पों के अनुसार उपलब्ध सही उत्तर (a) माना गया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कैनिंग भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल और प्रथम वायसराय (1858) थे, जबकि मेयो और मिंटो बाद के वायसराय रहे; इन सभी का सीधा संबंध बंगाल विभाजन से नहीं था।
6.बंग-भंग विरोधी आंदोलन का प्रारंभ किस तिथि से हुआ?
U.P.P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में हुई ऐतिहासिक सभा में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित हुआ, और इस दिन को बंग-भंग विरोधी तथा स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। इससे पहले 20 जुलाई, 1905 को सरकार ने विभाजन की घोषणा की थी, और 16 अक्टूबर, 1905 को यह विभाजन वास्तव में लागू हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस आंदोलन में “वंदे मातरम्” गीत व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ और रक्षाबंधन के पर्व को हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में मनाने की परंपरा भी इसी आंदोलन के दौरान बढ़ी।
7.निम्नलिखित में से कौन ‘स्वदेशी’ आंदोलन का आलोचक था एवं पूर्व तथा पाश्चात्य के मध्य एक बेहतर संबंध का समर्थक था?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2009
उत्तर-(c)
रवींद्रनाथ टैगोर प्रारंभ में स्वदेशी आंदोलन से जुड़े थे, परंतु आगे चलकर उन्होंने इसकी उग्र और हिंसक प्रवृत्तियों की आलोचना करते हुए पूर्व और पश्चिम के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंधों की वकालत की। उनका मानना था कि संकीर्ण राष्ट्रवाद के स्थान पर मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जो उनके उपन्यास “घरे-बाइरे” में स्पष्ट रूप से झलकता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में उनकी रचना “गीतांजलि” के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला, और वे एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे; बाद में उन्होंने जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में अपनी “नाइटहुड” की उपाधि भी लौटा दी।
8.बंगाल-विभाजन की घोषणा की गई –
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(a)
सामान्यतः इतिहासकार बंगाल विभाजन की घोषणा की तिथि 20 जुलाई, 1905 मानते हैं, परंतु कुछ स्रोतों में यह तिथि 19 जुलाई, 1905 भी दर्ज है। बिहार लोक सेवा आयोग ने अपनी आधिकारिक उत्तर कुंजी में विकल्प (a) यानी 19 जुलाई को सही माना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह विभाजन भौगोलिक रूप से बंगाल को पूर्वी बंगाल (मुस्लिम बहुसंख्यक) और पश्चिम बंगाल (हिंदू बहुसंख्यक) में बाँटता था, और पूर्वी बंगाल की राजधानी ढाका बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य सांप्रदायिक आधार पर बंगाली समाज को विभाजित करना भी माना जाता है।
9.बंगाल का विभाजन करने वाला गवर्नर जनरल कौन था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(a)
सर एन्ड्रू हेंडरसन लीथ फ्रेजर 1903 से 1908 तक बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर रहे और बंगाल विभाजन की योजना तैयार करने में उनकी सक्रिय भूमिका थी। एच.एच. रिजले उस समय गृह विभाग के सचिव थे, जिन्होंने प्रशासनिक रूप से विभाजन के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: एच.एच. रिजले एक प्रसिद्ध मानवशास्त्री भी थे, जिन्होंने भारत में जातियों के वर्गीकरण पर महत्वपूर्ण कार्य किया, जिसे “रिजले वर्गीकरण” के नाम से जाना जाता है।
10.भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में 16 अक्टूबर, 1905 निम्नलिखित कारणों में से किसके लिए प्रसिद्ध है?
I.A.S. (Pre) 2009
उत्तर-(b)
16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल विभाजन औपचारिक रूप से प्रभावी हुआ; इस दिन को बंगाल में शोक दिवस के रूप में मनाया गया, लोगों ने उपवास रखा, गंगा में स्नान किया और एक-दूसरे को राखी बांधकर भाईचारे तथा अखंडता का संदेश दिया। दादाभाई नौरोजी ने 1906 के कांग्रेस अधिवेशन में स्वराज को लक्ष्य घोषित किया था, जो एक अलग घटना है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी दिन कलकत्ता में बड़ी संख्या में लोगों ने जुलूस निकाला, जिसमें “बंदे मातरम्” का गायन हुआ, और यही घटनाक्रम आगे बंगाल विभाजन रद्द होने (1911) तक चलने वाले व्यापक जन-आंदोलन की नींव बना।
11. बंगाल का विभाजन मुख्यतः किया गया था-
U.P. Lower Sub. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
ब्रिटिश सरकार ने बंगाल विभाजन को प्रशासनिक सुविधा का नाम दिया, परंतु इसका वास्तविक मंतव्य बंगाल में पनप रहे राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर करना था, क्योंकि कलकत्ता उस समय राष्ट्रीय राजनीति और कांग्रेस की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। लॉर्ड कर्जन का यह कदम बंगाली समाज को धार्मिक आधार पर बाँटकर एकता को तोड़ने की रणनीति का हिस्सा माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस विभाजन से पूर्वी बंगाल में मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र बना, जिसकी राजधानी ढाका रखी गई, और इसी रणनीति को आगे “बाँटो और राज करो” (Divide and Rule) नीति के एक प्रमुख उदाहरण के रूप में देखा जाता है, जिसका प्रभाव बाद में 1909 के मार्ले-मिंटो सुधारों में पृथक निर्वाचक मंडल के रूप में भी दिखा।
12. ‘स्वदेशी’ और ‘बहिष्कार’ पहली बार किस घटना के दौरान संघर्ष की विधि के रूप में अपनाए गए थे?
I.A.S. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
बंगाल विभाजन के विरोध में 1905 में शुरू हुए आंदोलन में पहली बार ‘स्वदेशी’ (स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना) और ‘बहिष्कार’ (विदेशी वस्तुओं का त्याग) को संगठित रूप से राजनीतिक संघर्ष के अस्त्र के रूप में प्रयोग किया गया। यह तरीका इतना प्रभावी साबित हुआ कि आगे चलकर महात्मा गांधी ने भी असहयोग आंदोलन और स्वराज आंदोलनों में स्वदेशी की भावना को आधार बनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस आंदोलन के दौरान विदेशी वस्त्रों की होली जलाने की घटनाएँ भी हुईं, और इससे प्रेरित होकर देश के कई हिस्सों में स्वदेशी कपड़ा मिलों एवं हथकरघा उद्योग को बढ़ावा मिला।
13. बंगाल में ब्रिटेन की वस्तुओं के बहिष्कार का सुझाव सर्वप्रथम किसने दिया था ?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(b)
बांग्ला पत्रिका ‘संजीवनी’ के संपादक कृष्ण कुमार मित्र ने 13 जुलाई, 1905 के अंक में सबसे पहले ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का सुझाव दिया था, जो बंगाल विभाजन की घोषणा से ठीक पहले का समय था। इस सुझाव ने आगे चलकर पूरे बंगाल में एक संगठित जन-आंदोलन का रूप ले लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कृष्ण कुमार मित्र प्रसिद्ध समाज सुधारक आशुतोष मुखर्जी के समकालीन थे, और ‘संजीवनी’ पत्रिका उस दौर में बंगाली मध्यम वर्ग में राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती थी।
14. बंगाल विभाजन के विरुद्ध राष्ट्रवादियों ने निम्नलिखित कार्यक्रम प्रारंभ किए-
1. बायकाट 2. स्वदेशी
3. असहयोग 4. राष्ट्रीय शिक्षा
सही उत्तर चुनिए-
1. बायकाट 2. स्वदेशी
3. असहयोग 4. राष्ट्रीय शिक्षा
सही उत्तर चुनिए-
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(d)
बंगाल विभाजन (1905) के विरुद्ध राष्ट्रवादियों ने मुख्यतः तीन कार्यक्रम अपनाए- बायकाट (बहिष्कार), स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा। बायकाट के अंतर्गत ब्रिटिश वस्तुओं, विशेषकर विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया गया, जबकि स्वदेशी आंदोलन के तहत भारतीय निर्मित वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। असहयोग आंदोलन इस समय का हिस्सा नहीं था; यह बाद में महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1920 में प्रारंभ हुआ, अतः यह इस सूची में शामिल नहीं है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना 1906 में हुई थी, और इसी के अंतर्गत आगे चलकर बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना हुई, जिसके प्रथम प्राचार्य अरविंद घोष बने थे।
15. ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार को राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया गया था-
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
उत्तर-(d)
7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में हुई बैठक में औपचारिक रूप से ‘बहिष्कार प्रस्ताव’ पारित किया गया, जिसके बाद ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार को राष्ट्रीय नीति के रूप में अंगीकार किया गया। यह घोषणा बंगाल विभाजन की 20 जुलाई, 1905 की सरकारी घोषणा के तुरंत बाद आई प्रतिक्रिया थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस बहिष्कार आंदोलन का प्रभाव इतना व्यापक था कि मैनचेस्टर से आयातित कपड़े की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे ब्रिटिश व्यापारिक हितों पर भी प्रत्यक्ष असर पड़ा।
16. 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा किया गया बंगाल का विभाजन कब तक बना रहा?
I.A.S. (Pre) 2014
उत्तर-(b)
बंगाल विभाजन के विरुद्ध छह वर्षों तक चले निरंतर जन-आंदोलन और राष्ट्रवादी दबाव के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा, और सम्राट जॉर्ज पंचम ने दिल्ली दरबार (1911) में इस विभाजन को रद्द करने की घोषणा की। यह उस दौर के सबसे सफल जन-आंदोलनों में एक था, जिसने ब्रिटिश सरकार को अपना निर्णय वापस लेने पर मजबूर किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी दिल्ली दरबार में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की भी घोषणा हुई थी, और बंगाल को पुनर्गठित करते समय बिहार-उड़ीसा को अलग प्रांत बनाया गया तथा असम को भी पुनः स्वतंत्र प्रांत का स्वरूप दिया गया।
17. स्वदेशी आंदोलन के प्रारंभ का तात्कालिक कारण क्या था?
I.A.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
स्वदेशी आंदोलन का सीधा और तात्कालिक कारण लॉर्ड कर्जन द्वारा 1905 में किया गया बंगाल विभाजन था। अरबिंद घोष, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल और लाला लाजपत राय जैसे उग्र राष्ट्रवादी नेता इस आंदोलन को संपूर्ण देश में फैलाना चाहते थे, जबकि गोपाल कृष्ण गोखले सहित उदारवादी गुट इसके राष्ट्रव्यापी विस्तार के पक्ष में नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इन चार नेताओं को मिलाकर “लाल-बाल-पाल” की त्रिमूर्ति प्रसिद्ध हुई (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल), जिन्होंने आगे चलकर कांग्रेस के भीतर उग्रवादी (Extremist) धारा का नेतृत्व किया।
18. लॉर्ड कर्जन द्वारा 1905 में किया गया बंगाल विभाजन रद्द किस वर्ष हुआ?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
U.P. P.C.S. (Pre) 1993
U.P. P.C.S (Pre) 1991
U.P. P.C.S. (Pre) 1993
U.P. P.C.S (Pre) 1991
उत्तर-(a)
12 दिसंबर, 1911 को दिल्ली दरबार में सम्राट जॉर्ज पंचम ने औपचारिक रूप से बंगाल विभाजन को रद्द करने की घोषणा की, जिसके बाद बंगाल को पुनः एक प्रांत के रूप में संगठित किया गया। यह निर्णय छह वर्षों तक चले स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन की प्रत्यक्ष परिणति थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दिल्ली दरबार में ही भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की भी घोषणा की गई, जो 1931 में नई दिल्ली के औपचारिक उद्घाटन के साथ पूर्ण रूप से प्रभावी हुई।
19. बंगाल विभाजन के प्रत्याघात के रूप में कौन-सा आंदोलन शुरू हुआ था?
66th B.P.S.C (Pre) 2020
उत्तर-(c)
बंगाल विभाजन की प्रतिक्रिया स्वरूप स्वदेशी आंदोलन का सूत्रपात हुआ, जिसमें विदेशी, विशेषकर ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के साथ स्वदेशी उद्योगों, शिक्षा संस्थानों और स्वदेशी भावना को प्रोत्साहित किया गया। यह आंदोलन असहयोग आंदोलन (1920) और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) से बहुत पहले हुआ था, इसलिए इन विकल्पों से इसकी पुष्टि नहीं होती।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वदेशी आंदोलन के दौरान ही 1906 में कलकत्ता में “राष्ट्रीय शिक्षा परिषद” की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली के समानांतर स्वदेशी शिक्षा का प्रसार करना था; यही संस्था आगे जादवपुर विश्वविद्यालय की स्थापना का आधार बनी।
20. बंगाल 1905 ई. में विभाजित हुआ, जिसके विरोध के फलस्वरूप यह दुबारा विभाजित हुआ-
46th B.P.S.C. (Pre) 2003
उत्तर-(c)
दिसंबर 1911 में सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी के भारत आगमन पर आयोजित दिल्ली दरबार में बंगाल विभाजन को रद्द करते हुए बंगाल को पुनर्गठित किया गया, जिसमें बिहार-उड़ीसा को अलग प्रांत बनाया गया और असम को 1874 की स्थिति के अनुरूप पुनः स्वतंत्र प्रांत का रूप दिया गया, जिसमें सिलहट को भी जोड़ दिया गया। इस अवसर पर कलकत्ता के स्थान पर दिल्ली को भारत की नई राजधानी बनाने की घोषणा भी की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस दिल्ली दरबार में भारतीय राजाओं और नवाबों ने भी सम्राट के प्रति निष्ठा प्रदर्शित की थी, और यह आयोजन ब्रिटिश साम्राज्य के वैभव प्रदर्शन का एक प्रमुख प्रतीक माना जाता है।
21. स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. इसने देशी शिल्पकारों के कौशल तथा उद्योगों को पुनर्जीवित करने में योगदान किया।
2. स्वदेशी आंदोलन के एक अवयव के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना हुई थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसने देशी शिल्पकारों के कौशल तथा उद्योगों को पुनर्जीवित करने में योगदान किया।
2. स्वदेशी आंदोलन के एक अवयव के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना हुई थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
I.A.S. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
स्वदेशी आंदोलन ने भारतीय हस्तशिल्प और उद्योगों के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण
योगदान दिया। बहिष्कार के परिणामस्वरूप विदेशी वस्तुओं, विशेषतः वस्त्र एवं
जूते-चप्पल, के आयात में उल्लेखनीय गिरावट आई, जिससे हथकरघा, वस्त्र,
चमड़ा तथा लौह-इस्पात जैसे स्वदेशी उद्योगों को बल मिला। इसी क्रम में
अगस्त 1906 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य
अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली के समानांतर स्वदेशी नियंत्रण में साहित्यिक, वैज्ञानिक
एवं तकनीकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना था। अतः कथन 1 और 2 दोनों सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की पहल पर ही कलकत्ता में बंगाल
नेशनल कॉलेज की स्थापना हुई, जिसके प्राचार्य अरबिंद घोष बने। परिषद द्वारा
स्थापित बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट का विकास आगे चलकर वर्तमान जादवपुर
विश्वविद्यालय (1955) के रूप में हुआ।
22. निम्नलिखित में से किसने स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व दिल्ली में किया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(d)
स्वदेशी आंदोलन का प्रसार केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रमुख
राष्ट्रवादी नेताओं ने इसे देश के विभिन्न भागों में फैलाया। पंजाब एवं उत्तर
प्रदेश में लाला लाजपत राय तथा अजीत सिंह, बंबई-पुणे क्षेत्र में बाल गंगाधर
तिलक, मद्रास प्रेसीडेंसी में चिदंबरम पिल्लै तथा दिल्ली में सैयद हैदर रज़ा ने
इस आंदोलन का नेतृत्व किया। अतः सही उत्तर सैयद हैदर रज़ा है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सैयद हैदर रज़ा दिल्ली के एक प्रमुख कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने
स्वदेशी प्रचार हेतु दिल्ली में जनसभाएं आयोजित कीं। उल्लेखनीय है कि बंगाल
विभाजन रद्द होने के साथ ही 1911 के दिल्ली दरबार में भारत की राजधानी
कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा भी की गई थी।
23. भारत की प्राचीन कला परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए एक ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट’ की स्थापना की थी-
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(a)
राष्ट्रवादी आंदोलन के सांस्कृतिक आयाम के रूप में अबनींद्रनाथ टैगोर ने
अपने बड़े भाई गगनेंद्रनाथ टैगोर के सहयोग से 1907 में इंडियन सोसाइटी
ऑफ ओरिएंटल आर्ट की स्थापना की। इसका उद्देश्य पाश्चात्य शैली के
बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय चित्रकला की प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित
करना था, जिससे आगे चलकर ‘बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट’ नामक नई कला-धारा
का जन्म हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अबनींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कृति ‘भारत माता’ (मूलतः
‘बंगमाता’ शीर्षक से चित्रित) स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रवाद की एक
शक्तिशाली प्रतीकात्मक छवि बनी। उनके प्रमुख शिष्य नंदलाल बोस ने आगे
चलकर शांतिनिकेतन के कला भवन में कला-शिक्षण को नई दिशा दी।
24. भारतीयों के विरोध के कारण बंगाल को फिर से कब एकीकृत किया गया?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
लॉर्ड कर्जन द्वारा 1905 में किए गए बंगाल विभाजन का भारतीयों ने व्यापक
विरोध किया, जिसके फलस्वरूप स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन ने जोर पकड़ा।
बढ़ते जन-असंतोष को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने 1911 के दिल्ली दरबार में
बंगाल विभाजन रद्द कर बंगाल को पुनः एक प्रांत के रूप में संगठित कर
दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी दिल्ली दरबार में सम्राट जॉर्ज पंचम की उपस्थिति में भारत
की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा भी हुई। साथ
ही बंगाल के पुनर्गठन के अंतर्गत 1912 में बिहार-उड़ीसा को अलग कर नया
प्रांत बनाया गया, जबकि असम को पुनः मुख्य आयुक्त प्रांत के रूप में
स्थापित किया गया।
25. स्वदेशी की भावना से ओत-प्रोत भारत के चरमपंथी राष्ट्रवादी आंदोलन काल के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(a)
स्वदेशी आंदोलन के दौरान बारिसाल क्षेत्र के मुस्लिम किसानों के बीच कार्य
करने वाले प्रमुख नेता अश्विनी कुमार दत्त थे, न कि लियाकत हुसैन। अतः
कथन (a) असत्य है। शेष कथन सही हैं- सतीश चंद्र मुखर्जी ने 1889 में
राष्ट्रीय शिक्षा की योजना तैयार की थी, 1906 में स्थापित बंगाल नेशनल
कॉलेज के प्राचार्य अरबिंद घोष थे, और रवींद्रनाथ टैगोर ने आत्मशक्ति के
सिद्धांत के माध्यम से ग्रामीण आत्मनिर्भरता पर बल दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अश्विनी कुमार दत्त द्वारा स्थापित ‘स्वदेश बांधव समिति’
बारिसाल क्षेत्र में स्वदेशी आंदोलन की सबसे प्रभावी जन-संगठनकारी
संस्थाओं में गिनी जाती है। सतीश चंद्र मुखर्जी की राष्ट्रीय शिक्षा योजना ने
ही आगे चलकर 1906 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद के गठन की नींव रखी।
26.निम्नलिखित वर्गों में कौन 1905 के स्वदेशी आंदोलन से मुख्यतः अप्रभावित रहा ?
(i) महिलाएं (ii) कृषक
(iii) मुसलमान (iv) बुद्धिजीवी
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(c)
लॉर्ड कर्जन द्वारा 20 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा के बाद
7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन
का प्रस्ताव औपचारिक रूप से पारित हुआ। इस आंदोलन में महिलाओं और
बुद्धिजीवी वर्ग ने सक्रिय भागीदारी की, परंतु किसान वर्ग एवं बहुसंख्यक
मुस्लिम समुदाय इससे प्रायः अछूते रहे। अतः विकल्प (c) सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: किसानों के उदासीन रहने का एक प्रमुख कारण यह था कि
बहिष्कार के चलते सस्ती विदेशी वस्तुओं के स्थान पर महंगी स्वदेशी वस्तुएं
खरीदने का बोझ अंततः उन्हीं पर पड़ता था। बारिसाल इसका अपवाद रहा,
जहां अश्विनी कुमार दत्त के प्रयासों से किसान भी आंदोलन से जुड़े।
27. ब्रिटिश पत्रकार एच.डब्ल्यू. नेविन्सन जुड़े थे-
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(c)
ब्रिटिश पत्रकार हेनरी वुड्ड नेविन्सन (H.W. Nevinson) स्वदेशी आंदोलन के
दौरान भारत आए और लगभग चार माह तक यहां रहकर मानचेस्टर गार्जियन,
ग्लासगो हेराल्ड तथा डेली क्रॉनिकल जैसे समाचार पत्रों के लिए रिपोर्टिंग की।
उन्होंने अपने अनुभवों को ‘द न्यू स्पिरिट इन इंडिया’ नामक पुस्तक में
संकलित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नेविन्सन इससे पहले बाल्कन युद्धों तथा बाद में प्रथम विश्व
युद्ध के गैलीपोली अभियान की रिपोर्टिंग के लिए भी जाने जाते थे और अपने
समय के सर्वाधिक प्रतिष्ठित युद्ध-संवाददाताओं में गिने जाते हैं।
28. मद्रास में स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
स्वदेशी आंदोलन का प्रसार बंगाल से होकर शीघ्र ही पूरे देश में हुआ। जहां
तिलक ने बंबई-पुणे क्षेत्र में, लाला लाजपत राय एवं अजीत सिंह ने
पंजाब-उत्तर प्रदेश में तथा सैयद हैदर रज़ा ने दिल्ली में इसका नेतृत्व किया,
वहीं मद्रास प्रेसीडेंसी में यह जिम्मेदारी वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै ने निभाई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चिदंबरम पिल्लै को ‘कप्पलोट्टिय तमिझन’ (जहाज चलाने वाला
तमिल) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने ब्रिटिश शिपिंग
एकाधिकार को चुनौती देने हेतु 1906 में स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी की
स्थापना की, जिसे भारतीयों द्वारा स्थापित पहली स्वदेशी शिपिंग कंपनी
माना जाता है।
29.स्वदेशी आंदोलन के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
स्वदेशी आंदोलन में समाज के कुछ विशिष्ट वर्गों के मुसलमान ही शामिल
हो सके, जबकि महिलाओं ने पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शनों एवं धरनों में
सक्रिय भागीदारी की। यह आंदोलन मुख्यतः शहरी उच्च एवं मध्यम वर्ग तक
सीमित रहा और बारिसाल को छोड़कर बंगाल के किसानों पर इसका विशेष
प्रभाव नहीं पड़ा। परंतु यह आंदोलन केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा-
तिलक, लाला लाजपत राय एवं अरबिंद घोष ने इसे पूरे देश में फैलाया। अतः
कथन (d) असत्य है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वदेशी आंदोलन के दौरान ही राष्ट्रीय आंदोलन में
चरमपंथी (उग्र राष्ट्रवादी) धारा का उदय हुआ, जिसका नेतृत्व ‘लाल-बाल-पाल’
(लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल) की तिकड़ी ने
किया। 1907 के सूरत अधिवेशन में इसी मतभेद के कारण कांग्रेस नरमपंथी
एवं चरमपंथी गुटों में विभाजित हो गई।
30. निम्नांकित में से किस आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का शीर्षक गीत बना?
U.P.P.C.S. (Mains) 2002
U.P.P.C.S. (Pre) 2005
Uttarakhand P.C.S (Mains) 2006
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.C.S. (Pre) 2005
Uttarakhand P.C.S (Mains) 2006
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(a)
16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन प्रभावी होने के दिन को संपूर्ण
बंगाल में शोक दिवस के रूप में मनाया गया। लोगों ने उपवास रखा, घरों में
चूल्हे नहीं जलाए, कलकत्ता में हड़ताल रही तथा सुबह गंगा स्नान कर लोग
‘वंदे मातरम’ गाते हुए सड़कों पर उतरे। बंगाल-विभाजन का विरोध दर्शाने
हेतु लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखियां भी बांधीं। इसी दौरान ‘वंदे
मातरम’ स्वदेशी आंदोलन तथा समग्र राष्ट्रीय आंदोलन का शीर्षक गीत बन
गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘वंदे मातरम’ मूलतः बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास
‘आनंदमठ’ (1882) में संस्कृत-बंगाली मिश्रित भाषा में रचित गीत है। 1896
के कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार सार्वजनिक रूप
से गाया था, जबकि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके प्रथम दो अंतरों
को राष्ट्रगीत के रूप में औपचारिक मान्यता दी।
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