लाहौर अधिवेशन और पाकिस्तान की मांग (1940) PYQ MCQ प्रश्न | UPSC History

भारतीय इतिहास ›आधुनिक भारत › लाहौर अधिवेशन और पाकिस्तान की मांग (1940) PYQ MCQ प्रश्न
1.निम्नलिखित में से किसने मुहम्मद अली जिन्ना को ‘हिंदू-मुस्लिम एकता का दूत’ कहा था?
(a) सरोजिनी नायडू
(c) राजकुमारी अमृत कौर
(d) अरुणा आसफ अली
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
उत्तर-(a)
अपने आरंभिक राजनीतिक जीवन में मुहम्मद अली जिन्ना कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सौहार्द स्थापित करने के पक्षधर थे। वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में दोनों दलों के बीच समझौता (लखनऊ पैक्ट) कराने में उनकी भूमिका को देखते हुए कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू ने उन्हें “हिंदू-मुस्लिम एकता का दूत” की संज्ञा दी थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय है कि सरोजिनी नायडू ने वर्ष 1916 में जिन्ना पर इसी शीर्षक से एक लघु जीवनी भी लिखी थी। वर्ष 1919 में पार्लियामेंट्री सेलेक्ट कमेटी के समक्ष गवाही देते समय भी जिन्ना ने स्वयं को भारतीय राष्ट्रवादी बताया था, जिससे उनकी तत्कालीन छवि और स्पष्ट होती है। आगे चलकर 1920 के बाद उनके राजनीतिक विचारों में परिवर्तन आया और वे धीरे-धीरे मुस्लिम साम्प्रदायिक राजनीति की ओर अग्रसर हुए।
2. मुस्लिमों के लिए एक पृथक देश की प्रथम बार एक निश्चित अभिव्यक्ति कहां हुई थी?
(a) 1930 के मुस्लिम लीग के इलाहाबाद अधिवेशन के इकबाल के अध्यक्षीय भाषण में.
(b) कैम्ब्रिज पैम्फलेट में
(c) 1940 के मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(a)
मुसलमानों के लिए एक पृथक देश की मांग की सबसे पहली स्पष्ट झलक 1930 के मुस्लिम लीग के इलाहाबाद अधिवेशन में मुहम्मद इकबाल के अध्यक्षीय भाषण में मिलती है, जिसमें उन्होंने पंजाब, सिंध, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और बलूचिस्तान को मिलाकर एक मुस्लिम बहुल राज्य बनाने की इच्छा व्यक्त की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उस समय तक ‘पाकिस्तान’ नाम अस्तित्व में नहीं आया था; यह नाम तीन वर्ष बाद, 1933 में, चौधरी रहमत अली ने अपने पैम्फलेट ‘नाउ ऑर नेवर’ में गढ़ा। औपचारिक रूप से एक स्वतंत्र मुस्लिम राष्ट्र की मांग बाद में 1940 के लाहौर अधिवेशन में ‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ के रूप में सामने आई। आगे चलकर 23 मार्च की इस तिथि को पाकिस्तान में ‘यौम-ए-पाकिस्तान’ (पाकिस्तान दिवस) के रूप में मनाया जाता है।
3. मुसलमानों के लिए पृथक राष्ट्र का विचार दिया था-
(a) मुहम्मद अली जिन्ना ने
(b) सर सैयद अहमद खां ने
(c) सर मुहम्मद इकबाल ने
(d) लियाकत अली खां ने
U.P.P.C.S. (Mains) 2003
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(c)
कवि-दार्शनिक एवं राजनेता मुहम्मद इकबाल को मुसलमानों के लिए पृथक राष्ट्र के विचार का प्रवर्तक माना जाता है। वर्ष 1930 के मुस्लिम लीग के इलाहाबाद अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा था कि यदि भारतीय मुसलमानों को अपनी संस्कृति के स्वतंत्र विकास का अधिकार चाहिए, तो पंजाब, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत, सिंध और बलूचिस्तान को मिलाकर एक पृथक मुस्लिम राज्य बनाया जाना चाहिए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इकबाल को ‘शायर-ए-मशरिक’ (पूर्व का कवि) तथा पाकिस्तान में ‘मुफक्किर-ए-पाकिस्तान’ (पाकिस्तान का विचारक) कहा जाता है, और ‘बांग-ए-दरा’ व ‘बाल-ए-जिब्रील’ उनकी प्रसिद्ध काव्य रचनाएं हैं। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘सारे जहां से अच्छा’ की रचना भी इन्हीं इकबाल ने अपने आरंभिक जीवन में की थी, जब उनके विचार राष्ट्रवादी प्रकृति के थे।
4.कथन, “नेहरू एक राष्ट्रभक्त हैं, जबकि जिन्ना एक राजनीतिज्ञ हैं” व्यक्त किया गया था-
(a) एम. के. गांधी द्वारा
(b) मौलाना आजाद द्वारा
(c) सर मुहम्मद इकबाल द्वारा
(d) खान अब्दुल गफ्फार खान द्वारा
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(c)
जवाहरलाल नेहरू ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में उल्लेख किया है कि एक मुलाकात के दौरान मुहम्मद इकबाल ने उनसे कहा था कि नेहरू एक सच्चे राष्ट्रभक्त हैं, जबकि जिन्ना मूलतः एक राजनीतिज्ञ हैं। उल्लेखनीय है कि नेहरू ने यह पुस्तक वर्ष 1944 में अहमदनगर किले की जेल में अपनी नज़रबंदी के दौरान लिखी थी, जब वे भारत छोड़ो आंदोलन के सिलसिले में बंदी बनाए गए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इकबाल का निधन वर्ष 1938 में ही हो गया था, अतः वे न तो पाकिस्तान के निर्माण (1947) को देख सके और न ही मुस्लिम लीग की आगे की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सके।
5. भारतीय मुसलमानों के पृथक राज्य के लिए पाकिस्तान शब्द का प्रयोग सबसे पहले निम्न में से किसने किया?
(a) सर मुहम्मद इकबाल
(b) सर आगा खान
(c) एम.ए. जिन्ना
(d) चौधरी रहमत अली व उनके मित्रों ने
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
‘पाकिस्तान’ शब्द को सबसे पहले कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने अपने साथियों सहित 28 जनवरी, 1933 को प्रकाशित पैम्फलेट ‘नाउ ऑर नेवर: आर वी टू लिव और पेरिश फॉर एवर?’ में गढ़ा था। यह नाम पंजाब, अफगान (उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत), कश्मीर, सिंध और बलूचिस्तान- इन पांच क्षेत्रों के अंग्रेजी आद्याक्षरों को जोड़कर बनाया गया था, जिसमें ‘i’ अक्षर केवल उच्चारण को सहज बनाने हेतु बाद में जोड़ा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:रहमत अली ने इसी वर्ष कैम्ब्रिज में ‘पाकिस्तान नेशनल मूवमेंट’ की भी स्थापना की थी। हालांकि उनके विचार उस समय मुख्यधारा की मुस्लिम राजनीति, यहां तक कि जिन्ना से भी, अलग थे, फिर भी बाद में यही नाम मुस्लिम लीग की मांग और स्वतंत्र राष्ट्र दोनों के लिए स्थायी रूप से प्रचलित हो गया।
6. निम्नलिखित में से कौन एक कथन मुहम्मद अली जिन्ना के विषय में सही नहीं है?
(a) वे ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ के समर्थक थे।
(b) उन्होंने 1940 के मुस्लिम लीग के लाहौर के वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
(c) असहयोग आंदोलन में उन्होंने भाग नहीं लिया था।
(d) वे सदैव डायरी रखते थे।
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
मुहम्मद अली जिन्ना द्विराष्ट्र सिद्धांत के प्रमुख प्रवर्तक थे और उन्होंने 22-24 मार्च, 1940 को हुए मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए भारत से पृथक एक मुस्लिम राष्ट्र की मांग रखी थी, जो आगे चलकर ‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ के नाम से जाना गया। महात्मा गांधी द्वारा प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन से जिन्ना सहमत नहीं थे और इसमें उन्होंने भाग नहीं लिया था; इसी असहमति के चलते उन्होंने वर्ष 1920 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से त्यागपत्र भी दे दिया था। परंतु जिन्ना के नियमित रूप से डायरी लिखने का कोई प्रामाणिक ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं मिलता, इसलिए यह कथन गलत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:एक रोचक तथ्य यह भी है कि जिन्ना ने वर्ष 1913 में मुस्लिम लीग की सदस्यता ग्रहण की थी, जबकि उस समय भी वे कांग्रेस के सदस्य बने रहे थे, क्योंकि दोनों दलों की सदस्यता उस दौर में परस्पर वर्जित नहीं थी।
7.पाकिस्तान के अलग राज्य आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
(a) आगा खान ने
(b) नवाब सलीमुल्लाह ने
(c) लियाकत अली खां ने
(d) मुहम्मद अली जिन्ना ने
38th B.P.S.C. (Pre) 1992
उत्तर-(d)
पाकिस्तान के लिए चले पृथकतावादी आंदोलन का नेतृत्व मुहम्मद अली जिन्ना ने किया। 22-24 मार्च, 1940 को लाहौर में आयोजित मुस्लिम लीग अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वे एक पृथक मुस्लिम राष्ट्र के अतिरिक्त कुछ और स्वीकार नहीं करेंगे, और इसी अधिवेशन में भारत से अलग मुस्लिम राष्ट्र की औपचारिक मांग रखी गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:आगे चलकर 14 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान के स्वतंत्र राष्ट्र बनने पर जिन्ना उसके प्रथम गवर्नर-जनरल बने और उन्हें वहां ‘कायदे-आज़म’ (महान नेता) की उपाधि से सम्मानित किया गया। मुस्लिम लीग की स्थापना, जिसके मंच से यह आंदोलन आगे बढ़ा, वर्ष 1906 में ढाका में नवाब सलीमुल्लाह के नेतृत्व में हुई थी।
8.निम्नलिखित में से किसने सर्वप्रथम भारत में एक पृथक मुस्लिम राज्य का प्रस्ताव रखा था?
(a) आगा खां
(b) एम.ए. जिन्ना
(c) लियाकत अली खां
(d) मुहम्मद इकबाल
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014
उत्तर-(d)
भारत में एक पृथक मुस्लिम राज्य का प्रस्ताव सबसे पहले मुहम्मद इकबाल ने वर्ष 1930 में मुस्लिम लीग के इलाहाबाद अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान रखा था, ध्यान रहे कि इस समय तक यह विचार केवल एक स्वायत्त इकाई के रूप का था, इसमें पूर्ण रूप से पृथक संप्रभु राष्ट्र की मांग नहीं थी और न ही उस समय ‘पाकिस्तान’ नाम अस्तित्व में आया था।
9. मुस्लिम लीग का वार्षिक अधिवेशन जिसमें जिन्ना के दो राष्ट्र के सिद्धांत को मान्यता दी गई थी, हुआ था-
(a) लाहौर में
(b) कराची में
(c) बंबई में
(d) लखनऊ में
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(a)
मार्च 1940 में लाहौर में आयोजित मुस्लिम लीग के वार्षिक अधिवेशन में जिन्ना के द्विराष्ट्र सिद्धांत को औपचारिक मान्यता प्रदान की गई। इस सिद्धांत से संबंधित प्रस्ताव का प्रारूप सिकंदर हयात खान ने तैयार किया था, जिसे 23 मार्च, 1940 को फजलुल हक ने अधिवेशन में प्रस्तुत किया। इसी ऐतिहासिक स्थल की स्मृति में आज लाहौर में ‘मीनार-ए-पाकिस्तान’ नामक स्मारक बना हुआ है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: द्विराष्ट्र सिद्धांत की वैचारिक जड़ें इससे काफी पहले सर सैयद अहमद खां के लेखन में भी देखी जा सकती हैं, यद्यपि उन्होंने कभी हिंदुओं और मुसलमानों के लिए पृथक राष्ट्र की औपचारिक मांग नहीं की थी।
10.’नाउ ऑर नेवर’ पैम्फलेट किसने लिखा?
(a) मुहम्मद जिन्ना
(b) मुहम्मद इकबाल
(c) रहमत अली
(d) खफी खान
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(c)
‘नाउ ऑर नेवर: आर वी टू लिव और पेरिश फॉर एवर?’ शीर्षक पैम्फलेट चौधरी रहमत अली ने 28 जनवरी, 1933 को कैम्ब्रिज में प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने पहली बार ‘पाकिस्तान’ नाम का प्रयोग किया। दिलचस्प तथ्य यह है कि रहमत अली कभी भी जिन्ना के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग में शामिल नहीं हुए और उनके विचार मुख्यधारा की लीग राजनीति से काफी भिन्न थे। पाकिस्तान बनने के बाद वर्ष 1948 में वे वहां गए, परंतु शीघ्र ही उन्हें निर्वासित कर दिया गया और 1951 में कैम्ब्रिज में ही उनका निधन हुआ।
11. वह कौन तिथि थी, जब मुस्लिम लीग ने ‘पाकिस्तान दिवस’ मनाया था?
(a) 25 अप्रैल, 1920
(b) 5 फरवरी, 1922
(c) 14 जुलाई, 1942
(d) 23 मार्च, 1943
U.P.P.C.S. (Spl) (Pre) 2008
उत्तर-(d)
22-24 मार्च, 1940 को लाहौर में मुहम्मद अली जिन्ना की अध्यक्षता में मुस्लिम लीग का अधिवेशन हुआ, जिसमें 23 मार्च को भारत से पृथक मुस्लिम राष्ट्र ‘पाकिस्तान’ की मांग वाला प्रस्ताव पारित हुआ था। इसी ऐतिहासिक तिथि की स्मृति में मुस्लिम लीग ने तीन वर्ष बाद, 23 मार्च, 1943 को ‘पाकिस्तान दिवस’ मनाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:आगे चलकर स्वतंत्र पाकिस्तान में भी 23 मार्च को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाने लगा, क्योंकि यह तिथि वर्ष 1956 में पाकिस्तान के प्रथम संविधान के लागू होने की तिथि से भी मेल खाती है।
12. मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान का प्रस्ताव पारित किया गया था-
(a) फरवरी, 1922 में
(b) दिसंबर, 1928 में
(c) मार्च, 1940 में
(d) सितंबर, 1944 में
U.P. P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(c)
प्रसिद्ध ‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ (लाहौर प्रस्ताव) 23 मार्च, 1940 को लाहौर में हुए मुस्लिम लीग के अधिवेशन में पारित किया गया था। यह अधिवेशन 22 से 24 मार्च, 1940 तक चला था। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि मूल प्रस्ताव के पाठ में ‘पाकिस्तान’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था ‘पाकिस्तान’ नाम तो पहले से ही 1933 में रहमत अली द्वारा गढ़ा जा चुका था, जो बाद में इस प्रस्ताव के साथ स्थायी रूप से जुड़ गया।
13. मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन (1940) की अध्यक्षता किसने की थी ?
(a) लियाकत अली खां
(b) चौधरी खलीकुज्जमां
(c) मुहम्मद अली जिन्ना
(d) फातिमा जिन्ना
U.P. P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(c)
मार्च 1940 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता मुहम्मद अली जिन्ना ने स्वयं की थी। इसी अधिवेशन में दिए अपने भाषण में जिन्ना ने यह तर्क रखा कि हिंदू और मुसलमान धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक जीवन की दृष्टि से दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, जिन्हें एक साझा संविधान के अंतर्गत नहीं रखा जा सकता।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:एक रोचक तथ्य यह भी है कि जिन्ना की छोटी बहन फातिमा जिन्ना भी मुस्लिम लीग की एक सक्रिय सदस्य थीं और आगे चलकर पाकिस्तान आंदोलन की एक प्रमुख महिला नेता के रूप में उभरीं।
14. मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की स्थापना की मांग करने वाला प्रस्ताव पारित किया गया, वर्ष-
(a) 1939 में
(b) 1940 में
(c) 1941 में
(d) 1942 में
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
23 मार्च, 1940 को मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में ऐतिहासिक ‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ पारित हुआ, जिसका मूल आधार यह था कि ऐसा कोई भी संवैधानिक प्रबंध मुसलमानों को स्वीकार्य नहीं होगा जिसमें भारत के पूर्वी और पश्चिमी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को स्वतंत्र और सार्वभौम राज्यों के रूप में मान्यता न दी जाए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस मांग को इसके प्रारंभ से ही सिरे से अस्वीकार कर दिया था और इसे देश की एकता के विरुद्ध बताया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष, यानी 1940 में ही, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कांग्रेस के मंत्रिमंडलों ने भी सरकार के युद्ध-संबंधी निर्णयों के विरोध में त्यागपत्र दे दिए थे, जिससे राजनीतिक वातावरण और जटिल हो गया था।
15. ‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ की रूपरेखा किसने तैयार की ?
(a) रहमत अली
(b) सिकंदर हयात खां
(c) मुहम्मद अली जिन्ना
(d) फजलुल हक
Jharkhand P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(b)
‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ की मूल रूपरेखा सिकंदर हयात खां ने तैयार की थी, जिसे 23 मार्च, 1940 को लाहौर अधिवेशन में फजलुल हक ने प्रस्तुत किया। सिकंदर हयात खां उस समय पंजाब प्रांत के प्रधानमंत्री (वर्तमान मुख्यमंत्री के समतुल्य पद) थे और पंजाब की यूनियनिस्ट पार्टी के प्रमुख नेता थे, जो हिंदू, मुस्लिम व सिख जमींदारों का साझा संगठन था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:रोचक तथ्य यह है कि सिकंदर हयात खां स्वयं इस प्रस्ताव के कुछ प्रावधानों, विशेषकर पूर्ण विभाजन की अवधारणा से, बाद में सहमत नहीं थे और उन्होंने इस पर अपनी आपत्ति भी सार्वजनिक रूप से व्यक्त की थी।
16. मुस्लिम लीग ने भारत के विभाजन की मांग का प्रस्ताव अपने किस क अधिवेशन में किया था?
(a) लाहौर में
(b) कराची में
(c) इलाहाबाद में
(d) ढाका में
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
मुस्लिम लीग ने भारत के विभाजन और पृथक मुस्लिम राष्ट्र की औपचारिक मांग 23 मार्च, 1940 को अपने लाहौर अधिवेशन में रखी थी, जो आगे चलकर ‘लाहौर प्रस्ताव’ या ‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इससे पूर्व, मुस्लिम लीग की स्थापना वर्ष 1906 में ढाका में नवाब सलीमुल्लाह के नेतृत्व में हुई थी, जबकि 1930 का इलाहाबाद अधिवेशन इकबाल के भाषण के लिए जाना जाता है, जिसमें केवल एक स्वायत्त मुस्लिम इकाई की बात कही गई थी, पूर्ण विभाजन की नहीं। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय भी कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की इस विभाजनकारी मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
17. वर्ष 1940 में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में पाकिस्तान के सृजन का प्रस्ताव किसने रखा था?
(a) एम.ए. जिन्ना
(b) मुहम्मद इकबाल
(c) रहमत अली
(d) खलीकुज्जमां
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(d)
23 मार्च, 1940 को मुस्लिम लीग के वार्षिक लाहौर अधिवेशन में प्रसिद्ध ‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ पारित हुआ, जिसके तहत भारत का विभाजन कर एक पृथक मुस्लिम राष्ट्र की मांग की गई। इस प्रस्ताव को मूल रूप से फजलुल हक ने प्रस्तुत किया था, जिसका अनुमोदन (समर्थन) चौधरी खलीकुज्जमां ने किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चौधरी खलीकुज्जमां उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) के एक प्रमुख मुस्लिम लीग नेता थे और विभाजन के पश्चात भारत के बजाय पाकिस्तान चले गए थे, जबकि फजलुल हक बंगाल के प्रभावशाली नेता थे जो आगे चलकर कृषक प्रजा पार्टी के माध्यम से बंगाल के प्रधानमंत्री भी बने।

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