1. मुगलकाल में सेना का प्रधान निम्न में से कौन था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(b)
मुगल साम्राज्य में मीर बख्शी सैन्य प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी होता था। वह सभी श्रेणियों के मनसबदारों की नियुक्ति के आदेश जारी करता था और सैनिकों का मुआयना (हुलिया दर्ज करना) तथा घोड़ों को दागने (दाग प्रथा) का कार्य उसी के अधीन था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल काल में तीन मीर बख्शी होते थे — प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय — जो मिलकर सैन्य विभाग का संचालन करते थे। ‘दाग प्रथा’ (घोड़ों को दागना) और ‘हुलिया’ (सैनिकों का विवरण रखना) की व्यवस्था अकबर ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए लागू की थी।
2. मध्यकालीन भारत में मनसबदारी प्रथा खासतौर पर इसलिए चालू की गई थी, ताकि-
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
मनसबदारी व्यवस्था अकबर द्वारा लगभग 1571 ई. में लागू की गई थी। यह एक ऐसी समन्वित प्रशासनिक-सैन्य व्यवस्था थी जिसमें सभी नागरिक एवं सैन्य अधिकारियों को एक निश्चित ‘मनसब’ (पद-श्रेणी) प्रदान किया जाता था। इसका प्रमुख उद्देश्य एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन स्थापित करना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह व्यवस्था मंगोल दशमलव सैन्य प्रणाली से प्रेरित थी। मनसबदारी में ‘जात’ (व्यक्तिगत पद) और ‘सवार’ (रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या) — ये दोहरी व्यवस्था अकबर के शासन के 40वें वर्ष में जोड़ी गई।
3. मुगल प्रशासन में ‘मुहतसिब’ था-
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
उत्तर-(c)
मुगल प्रशासन में ‘मुहतसिब’ सार्वजनिक नैतिकता एवं आचरण के निरीक्षण विभाग का प्रमुख अधिकारी होता था। वह समाज में नैतिक मानकों को बनाए रखने, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर नियंत्रण रखने और धार्मिक नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह पद इस्लामी प्रशासनिक परंपरा से लिया गया था। अकबर ने इस पद का उपयोग मदिरा-विक्रय और वेश्यावृत्ति को नगरों से बाहर करने के लिए किया था, हालाँकि बाद के मुगल शासकों के काल में इस पद की प्रभावशीलता कम होती गई।
4. निम्नलिखित में से किसे मुगल सेना में चिकित्सक नियुक्त किया गया था?
U. P. P. C. S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(c)
निकोलो मनूची (Niccolao Manucci) एक इतालवी यात्री था जो 17वीं शताब्दी में भारत आया। उसने प्रारंभ में दारा शिकोह की सेना में तोपची (artillery man) का कार्य किया। 1659 ई. में दारा शिकोह की औरंगजेब के हाथों पराजय और मृत्यु के बाद मनूची ने चिकित्सा का पेशा अपनाया और मुगल दरबार से जुड़ा रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मनूची ने ‘Storia do Mogor’ नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा जो मुगल दरबार के जीवन, राजनीति और औरंगजेब के शासन पर एक महत्वपूर्ण समकालीन स्रोत माना जाता है। फ्रांसीसी चिकित्सक फ्रांस्वा बर्नियर भी मुगल दरबार में चिकित्सक के रूप में रहे और उन्होंने ‘Travels in the Mughal Empire’ लिखी।
5. मुगल प्रशासन के दौरान जिले को किस नाम से जाना जाता था?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
मुगल प्रशासनिक संरचना में साम्राज्य को ‘सूबों’ (प्रांतों) में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सूबे को कई ‘सरकारों’ (जिलों) में बाँटा जाता था। सरकार को आगे ‘परगनों’ या ‘महलों’ में विभाजित किया जाता था, और परगने के नीचे ‘मौजे’ (गाँव) होते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के समय में कुल 12 सूबे थे जो औरंगजेब के काल तक बढ़कर 21 हो गए। प्रत्येक सरकार का प्रमुख अधिकारी ‘फौजदार’ होता था जो कानून-व्यवस्था और सैन्य मामलों का प्रभारी था, जबकि ‘अमलगुज़ार’ राजस्व संग्रह का कार्य देखता था।
6. मुगल काल में जनपद (जिला) क्या कहलाता था?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2009
उत्तर-(b)
मुगल काल में जनपद (जिला) को ‘सरकार’ कहा जाता था। यह प्रशासनिक इकाई सूबे और परगने के मध्य की कड़ी थी। ‘इक्ता’ दिल्ली सल्तनत काल की प्रशासनिक इकाई थी, जबकि ‘तर्फ’ मुगल काल में परगने के एक उपविभाग को कहते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल प्रशासनिक पदानुक्रम इस प्रकार था — सूबा (प्रांत) → सरकार (जिला) → परगना → मौजा (ग्राम)। परगने के प्रमुख अधिकारियों में ‘शिकदार’ (सैन्य प्रशासन) और ‘आमिल’ (राजस्व) प्रमुख थे।
7. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, अहंदी वे घुड़सवार सिपाही थे-
1. जिन्होंने अपनी सेवाएं एकाकी प्रदान की
2. जिन्होंने किसी सरदार के साथ अपने को संलग्न नहीं किया
3. सम्राट ही जिनका आसन्न कर्नल था
4. जिन्होंने अपने को मिर्जाओं के साथ संलग्न किया
इन कथनों में से-
1. जिन्होंने अपनी सेवाएं एकाकी प्रदान की
2. जिन्होंने किसी सरदार के साथ अपने को संलग्न नहीं किया
3. सम्राट ही जिनका आसन्न कर्नल था
4. जिन्होंने अपने को मिर्जाओं के साथ संलग्न किया
इन कथनों में से-
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(b)
‘अहदी’ मुगल सेना के विशेष अभिजात घुड़सवार सैनिक थे जो सीधे बादशाह की सेवा में होते थे। वे किसी मनसबदार या सरदार के अधीन नहीं होते थे — बादशाह ही उनका प्रत्यक्ष स्वामी था। उनकी भर्ती, वेतन, घोड़े और वस्त्र सब राज्य द्वारा प्रदान किए जाते थे। एक अहदी को लगभग 500 रुपये मासिक वेतन मिलता था, जबकि सामान्य घुड़सवार को मात्र 12–15 रुपये।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के काल में अहदी सैनिकों की संख्या लगभग 12,000 तक पहुँच गई थी। इनके अतिरिक्त ‘दाखिली’ नामक एक अन्य श्रेणी के घुड़सवार भी होते थे, जो मनसबदारों के कोटे में शामिल होते थे किंतु राज्य के खर्चे पर भरण-पोषण पाते थे।
8. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है-
अभिकथन (A) : मुगल साम्राज्य मूल रूप से एक सैनिक राज्य था।
कारण (R) : केंद्रीय शासन व्यवस्था के विकास की प्राणशक्ति उसकी सैनिक शक्ति पर निर्भर थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए।
अभिकथन (A) : मुगल साम्राज्य मूल रूप से एक सैनिक राज्य था।
कारण (R) : केंद्रीय शासन व्यवस्था के विकास की प्राणशक्ति उसकी सैनिक शक्ति पर निर्भर थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए।
U.P.P.C.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
मुगल साम्राज्य की समस्त प्रशासनिक संरचना सैन्य शक्ति पर टिकी थी। लगभग सभी उच्च अधिकारियों (मनसबदारों) को सैन्य दायित्व सौंपे जाते थे और साम्राज्य का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण सेना के बल पर ही संभव हुआ। अतः अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सटीक व्याख्या करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल सेना में चार प्रमुख अंग थे — पैदल सेना (पियादा), घुड़सवार सेना (सवार), हाथी सेना (फीलखाना) और तोपखाना (तोपचीखाना)। तोपखाना मुगल सैन्य श्रेष्ठता का सबसे महत्वपूर्ण कारण था, जिसने पानीपत के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाई।
9. मुगल शासन में मीर बख्शी का कर्तव्य था-
U.P. P.C.S. (Spl.) Pre 2004
उत्तर-(d)
मुगल प्रशासन में मीर बख्शी भू-राजस्व अधिकारियों के कार्यों का पर्यवेक्षण करता था। साथ ही वह सैन्य विभाग के वेतन वितरण से भी संबद्ध था। इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार ने मीर बख्शी को ‘Pay Master’ (वेतनाधिकारी) की संज्ञा दी है, किंतु यह उसका नियमित कार्य नहीं था — वास्तविक वेतनाधिकारी ‘दीवान-ए-तन’ होता था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल केंद्रीय प्रशासन में चार प्रमुख विभागाध्यक्ष थे — वकील (प्रधानमंत्री), दीवान (वित्त मंत्री), मीर बख्शी (सैन्य प्रशासन) और सद्र-उस-सुदूर (धार्मिक मामले एवं दान)। इनमें से दीवान का पद कालांतर में सर्वाधिक प्रभावशाली हो गया।
10. निम्नलिखित बातों में से कौन एक मुगल मनसबदारी व्यवस्था के विषय में सत्य नहीं है?
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(c)
मनसबदारी व्यवस्था में ‘जात’ मनसबदार का व्यक्तिगत पद-दर्जा था जो उसके वेतन का निर्धारण करता था, जबकि ‘सवार’ उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या को दर्शाता था। नियम यह था कि ‘सवार’ पद कभी भी ‘जात’ पद से अधिक नहीं हो सकता था। इस आधार पर मनसबदारों को तीन कोटियों में बाँटा जाता था। इस व्यवस्था में कुल 33 वर्ग थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: न्यूनतम मनसब 10 और अधिकतम 10,000 का होता था (हालाँकि शहजादों को 12,000 तक का मनसब भी मिलता था)। 1,000 से अधिक ‘जात’ वाले मनसबदार ‘अमीर’ और 5,000 से ऊपर वाले ‘अमीर-उल-उमरा’ कहलाते थे।
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