पाषाण काल (2500 ईसा पूर्व) MCQ प्रश्न | UPSC

भारतीय इतिहास प्राचीन भारत पाषाण काल (2500 ईसा पूर्व) MCQ प्रश्न
1.भारत में मानव का सर्वप्रथम साक्ष्य कहां मिला है?
(a) नीलगिरि
(b) शिवालिक पहाड़ियां
(c) नल्लगाला पहाड़ियां
(d) नर्मदा घाटी
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
भारत में आदि मानव का सबसे पुराना ज्ञात साक्ष्य मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ‘हथनौरा’ नामक स्थल से मिला है। यह खोज प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् डॉ. अरुण सोनकिया ने 5 दिसंबर, 1982 को की थी। प्राप्त जीवाश्म एक कपाल (Skull Cap) का था जिसे ‘नर्मदा मानव’ (Narmada Man) या होमो इरेक्टस नर्मदेंसिस कहा जाता है। यह जीवाश्म लगभग 2.5 से 5 लाख वर्ष पुराना माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नर्मदा घाटी में पाषाणकालीन औजारों के भी प्रचुर साक्ष्य मिले हैं, जो इस क्षेत्र में मानव बसाव की प्राचीनता को और पुष्ट करते हैं।
2. खाद्यान्नों की कृषि सर्वप्रथम प्रारंभ हुई थी
(a) नवपाषाण काल में
(b) मध्यपाषाण काल में
(c) पुरापाषाण काल में
(d) प्रोटोऐतिहासिक काल में
U.P.P.C.S. (Mains ) 2005
उत्तर-(a)
खाद्यान्नों की कृषि का सर्वप्रथम प्रारंभ नवपाषाण काल (Neolithic Age) में हुआ। इसी युग में मनुष्य ने भोजन के लिए शिकार और संग्रह पर निर्भरता छोड़कर स्थायी कृषि जीवन अपनाया, जिसे ‘नवपाषाण क्रांति’ या ‘कृषि क्रांति’ भी कहते हैं। भारत में नवपाषाण काल के कृषि के प्रमाण मेहरगढ़ (वर्तमान पाकिस्तान, लगभग 7000 ई.पू.) से गेहूँ और जौ की खेती के रूप में मिलते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:दक्षिण भारत में कर्नाटक के पिकलीहल और टेक्कलकोट जैसे नवपाषाणकालीन स्थलों से रागी व अन्य अनाज उगाए जाने के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।
3.एक ही कब्र से तीन मानव कंकाल निकले हैं-
(a) सराय नाहर राय से
(b) दमदमा से
(c) महदहा से
(d) लंघनाज से
U.P.P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(b)
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित दमदमा एक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाणकालीन स्थल है। यहाँ पाँच वर्षों तक किए गए उत्खनन में पश्चिमी व मध्यवर्ती क्षेत्रों से कुल 41 मानव शवाधान (burials) मिले। इनमें से 5 शवाधान युग्म (दो कंकाल एक साथ) थे और एक विशेष शवाधान में तीन मानव कंकाल एक ही कब्र में दफनाए हुए पाए गए। दमदमा, सराय नाहर राय और महदहा — ये तीनों स्थल मध्य गंगा घाटी की मेसोलिथिक सभ्यता के प्रमुख केंद्र हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:दमदमा से प्राप्त शवाधानों में मृतकों के साथ पशु अस्थियाँ और सूक्ष्मपाषाण उपकरण (microliths) भी रखे मिले, जो तत्कालीन अंत्येष्टि प्रथाओं पर प्रकाश डालते हैं।
4.उत्खनित प्रमाणों के अनुसार, पशुपालन का प्रारंभ हुआ था-
(a) निचले पूर्वपाषाण काल में
(b) मध्य पूर्वपाषाण काल में
(c) ऊपरी एवं पाषाण काल में
(d) मध्यपाषाण काल में
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(d)
उत्खनन से प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार पशुपालन का आरंभ मध्यपाषाण काल के अंतिम चरण में हुआ। भारत में इसके प्रमाण मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित आदमगढ़ तथा राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित बागोर नामक स्थलों से मिले हैं, जो लगभग 5000 ई.पू. से 2000 ई.पू. के बीच के हैं। यहाँ गाय, भेड़, बकरी जैसे पशुओं की हड्डियाँ बड़ी मात्रा में पाई गई हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय तथ्य यह है कि बागोर स्थल को भारत में पशुपालन का सबसे प्राचीन केंद्र माना जाता है और यहाँ से प्राप्त साक्ष्य लगभग 5000-6000 ई.पू. तक के हैं, जो इसे एशिया के प्राचीनतम पशुपालन स्थलों में से एक बनाते हैं।
5. कोपेनहेगन संग्रहालय की सामग्री से पाषाण, कांस्य और लौह युग का त्रियुगीय विभाजन किया था –
(a) थॉमसन ने
(b) लुब्बाक ने
(c) टेलर
(d) चाइल्ड ने
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
डेनमार्क के कोपेनहेगन संग्रहालय की पुरातात्विक सामग्री के आधार पर पाषाण, कांस्य और लौह युग का त्रियुगीय (Three-Age System) वर्गीकरण डेनिश पुरातत्वविद् क्रिश्चियन जर्गेनसन थॉमसन (Christian Jürgensen Thomsen) ने किया था। थॉमसन ने 1836 ई. में अपनी पुस्तक ‘Ledetraad til Nordisk Oldkyndighed’ में इस वर्गीकरण को औपचारिक रूप से प्रकाशित किया। बाद में जॉन लुब्बाक ने 1865 में अपनी पुस्तक ‘Pre-Historic Times’ में पाषाण काल को आगे पुरापाषाण (Palaeolithic) और नवपाषाण (Neolithic) काल में विभाजित किया, जो आधुनिक पुरातत्व का आधार बना।
6. हड्डी से निर्मित आभूषण भारत में मध्यपाषाण काल के संदर्भ में प्राप्त हुए हैं-
(a) सराय नाहर राय से
(b) महदहा से
(c) लेखहिया से
(d) चोपनी मांडो से 95
U.P.R.O. / A.R.O. (Mains) 2013
उत्तर-(a&b)
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित सराय नाहर राय और महदहा दोनों मध्यपाषाणकालीन स्थलों से हड्डी निर्मित आभूषण मिले हैं। महदहा के ‘बूचड़खाना संकुल क्षेत्र’ से विशेष रूप से हड्डी व सींग से बने उपकरण और आभूषण बड़े पैमाने पर पाए गए हैं। महदहा का उत्खनन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. जी. आर. शर्मा के निर्देशन में हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उल्लेखनीय है कि इन स्थलों पर पाए गए हड्डी के मनके (bone beads) और पेंडेंट इस बात के प्रमाण हैं कि मध्यपाषाण काल में भी मनुष्यों में सौंदर्य-बोध और आत्म-अलंकरण की प्रवृत्ति विद्यमान थी, जो मानव सांस्कृतिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
7. मध्यपाषाणिक प्रसंग में पशुपालन के प्रमाण जहां मिले, वह स्थान है-
(a) लंघनाज
(b) बीरभानपुर
(c) आदमगढ़
(d) चोपनी मांडो
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(c)
मध्यपाषाण काल में पशुपालन के पुरातात्विक साक्ष्य मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित आदमगढ़ तथा राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित बागोर से प्राप्त हुए हैं। आदमगढ़ से गाय, भैंस, भेड़, बकरी तथा कुत्ते की हड्डियाँ मिली हैं जो पशुपालन की ओर संकेत करती हैं। विशेष तथ्य यह है कि लंघनाज (गुजरात) भी एक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाणकालीन स्थल है, जहाँ से मानव कंकाल तथा सूक्ष्मपाषाण (microliths) उपकरण मिले हैं, परंतु वहाँ पशुपालन के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चोपनी मांडो (इलाहाबाद, उ.प्र.) भारत का एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ हस्तनिर्मित मृद्भांड (handmade pottery) के साथ-साथ मध्यपाषाणकालीन उपकरण एक साथ पाए गए हैं।
8.रॉबर्ट ब्रूस फुट थे, एक-
(a) भूगर्भ-वैज्ञानिक
(b) पुरातत्वविद्
(c) पुरावंस्पतिशास्त्री
(d) इतिहासकार
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(a&b)
इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार रॉबर्ट ब्रूस फुट (1834–1912) ब्रिटिश भूगर्भ-वैज्ञानिक (Geologist) और पुरातत्वविद् (Archaeologist) दोनों थे। वे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) से संबद्ध थे और उन्होंने 1863 ई. में मद्रास के निकट पल्लवरम् (Pallavaram) नामक स्थल पर भारत का पहला पुरापाषाणकालीन पत्थर का हाथ-कुल्हाड़ी (hand axe) उपकरण खोजकर भारत में पाषाणकालीन संस्कृति के अध्ययन की नींव रखी। इसीलिए रॉबर्ट ब्रूस फुट को ‘भारतीय पाषाण काल के जनक’ (Father of Indian Prehistory) की संज्ञा दी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उन्होंने अपने जीवन में 460 से अधिक पाषाणकालीन स्थलों की पहचान की।
9. निम्नलिखित में से किस स्थल से हड्डी के उपकरण प्राप्त हुए
(a) चोपनी मांडो से
(b) काकोरिया से
(c) महदहा से
(d) सराय नाहर राय से
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(c&d)
मध्यपाषाणकालीन स्थल महदहा (उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में) से बड़ी संख्या में हड्डी और सींग से निर्मित उपकरण प्राप्त हुए हैं। प्रो. जी. आर. शर्मा ने महदहा को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया — झील क्षेत्र, बूचड़खाना संकुल क्षेत्र और कब्रिस्तान-निवास क्षेत्र। बूचड़खाना क्षेत्र से ही सर्वाधिक हड्डी के उपकरण और आभूषण पाए गए हैं। सराय नाहर राय से भी अल्प मात्रा में हड्डी के उपकरण मिले हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय है कि महदहा से प्राप्त हड्डी के उपकरणों में बाण की नोकें (bone points), सुइयाँ और खुरचनी (scrapers) प्रमुख हैं, जो शिकार और चर्म-शोधन जैसी गतिविधियों के प्रमाण हैं। ये उपकरण लगभग 8000–5000 ई.पू. काल के माने जाते हैं।
10. प्रथम मानव जीवाश्म भारत की किस नदी घाटी से प्राप्त हुआ था?
(a) गंगा नदी
(b) यमुना घाटी
(c) नर्मदा घाटी
(d) ताप्ती घाटी
(e) कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
66th B.P.S.C. Re-Exam 2020
उत्तर-(c)
भारत में प्रथम मानव जीवाश्म नर्मदा घाटी (मध्य प्रदेश) के हथनौरा स्थल से प्राप्त हुआ था। यह जीवाश्म एक मानव कपाल का टुकड़ा (Skull Cap) है, जिसे ‘नर्मदा मानव’ या वैज्ञानिक भाषा में होमो इरेक्टस नर्मदेंसिस कहा जाता है। यह भारत में पाए गए होमो इरेक्टस (Homo Erectus) का एकमात्र ज्ञात जीवाश्म है और इसे लगभग 2,50,000 से 5,00,000 वर्ष पुराना माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इस खोज का विशेष महत्त्व यह है कि इसने यह सिद्ध किया कि भारतीय उपमहाद्वीप में मानव विकास की प्रक्रिया अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है। नर्मदा घाटी को भारत की ‘सांस्कृतिक पालना’ (Cradle of Indian Civilization) भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ पाषाण काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के निरंतर मानव बसाव के साक्ष्य मिले हैं।
11. निम्नलिखित में से किसको चालकोलिथिक युग भी कहा जाता है ?
(a) पुरापाषाण युग
(b) नवपाषाण युग
(c) ताम्रपाषाण युग
(d) लौह युग
44th B.P.S. C. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
ताम्रपाषाण युग को चालकोलिथिक (Chalcolithic) युग भी कहते हैं। यह नाम दो ग्रीक शब्दों — ‘Chalcos’ (तांबा) और ‘Lithos’ (पत्थर) — से मिलकर बना है। यह काल पाषाण युग और कांस्य युग के बीच का संक्रमण काल था, जिसमें मनुष्य ने पहली बार धातु (तांबे) का उपयोग पत्थर के औजारों के साथ-साथ शुरू किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:भारत में ताम्रपाषाण संस्कृतियों के प्रमुख स्थल अहाड़ (राजस्थान), कायथा (मध्य प्रदेश), जोर्वे (महाराष्ट्र) और मालवा (मध्य प्रदेश) हैं। तांबा विश्व में मानव द्वारा उपयोग की गई पहली धातु मानी जाती है, जिसका उपयोग लगभग 9000 ई.पू. में पश्चिम एशिया में शुरू हुआ था।
12. भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
(a) लोथल
(b) हड़प्पा
(c) मेहरगढ़
(d) मुंडिगाक
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(c)
मेहरगढ़ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बोलान दर्रे के पास कच्छी मैदान में स्थित है। यहाँ से लगभग 7000 ई.पू. के गेहूं और जौ की खेती के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि की प्राचीनतम जानकारी देते हैं। यहाँ के निवासी पशुपालन भी करते थे और मिट्टी की कच्ची ईंटों से मकान बनाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मेहरगढ़ की खुदाई 1974 में फ्रांसीसी पुरातत्वविद् Jean-François Jarrige के नेतृत्व में शुरू हुई थी। यह स्थल सिंधु घाटी सभ्यता का पूर्वज माना जाता है, क्योंकि यहाँ से सिंधु सभ्यता की अनेक विशेषताओं जैसे मिट्टी के बर्तन, मूर्तियाँ और कृषि के प्रारंभिक रूप देखने को मिलते हैं।
13. आहड़ सभ्यता के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
1. आहड़वासी तांबा गलाना जानते थे।
2. ये लोग चावल से परिचित नहीं थे।
3. धातु का काम आहड़वासियों की अर्थव्यवस्था का एक साधन था।
4. यहां से काले-लाल रंग के मृद्भांड मिले हैं, जिन सामान्यतः सफेद रंग से ज्यामितीय आकृतियां उकेरी हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए-
(a) 1, 3 एवं 4 सही हैं।
(b) 1 एंव 2 सही हैं।
(c) 1, 2 एवं 3 सही हैं।
(d) 3 एवं 4 सही हैं।
R.AS. / R.T.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
अहाड़ दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के उदयपुर जिले में बेड़च नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख ताम्रपाषाणिक संस्कृति का स्थल है। यहाँ के निवासी गेहूं, जौ और चावल की खेती करते थे, अतः कथन 2 गलत है। ‘तांबवती’ (तांबे वाला स्थान) इसका प्राचीन नाम था, जो यहाँ तांबे की प्रचुरता को दर्शाता है। अहाड़वासी तांबे को गलाकर औजार और आभूषण बनाते थे, जो उनकी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग था। यहाँ से प्राप्त काले-लाल मृद्भांडों पर सफेद रंग की ज्यामितीय आकृतियाँ इस संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। अतः कथन 1, 3 और 4 सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अहाड़ स्थल की खुदाई 1953-54 में अक्षय कीर्ति व्यास और 1961-62 में H.D. Sankalia के नेतृत्व में हुई थी। अहाड़ संस्कृति का काल लगभग 2800 ई.पू. से 1500 ई.पू. माना जाता है और यह राजस्थान की सबसे विकसित ताम्रपाषाण संस्कृतियों में से एक थी।
14. मानव द्वारा सर्वप्रथम प्रयुक्त अनाज था-
(a) गेहूं
(b) चावल
(c) जौ
(d) बाजरा
J.P.P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
वैश्विक दृष्टि से देखें तो मानव द्वारा सर्वप्रथम प्रयुक्त अनाज जौ (Barley) है, जिसे लगभग 8000 ई.पू. में पश्चिमी एशिया के ‘उर्वर अर्धचंद्र’ (Fertile Crescent) क्षेत्र में उगाया गया था। यह क्षेत्र भूमध्य सागर और ईरान के मध्य स्थित था। गेहूं की खेती भी लगभग इसी समय और इसी क्षेत्र में शुरू हुई। आधुनिक मानव समाज द्वारा मुख्यतः 8 खाद्य अनाज — जौ, गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा, सोरघम, राई एवं जई — उपभोग किए जाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:जौ को संस्कृत में ‘यव’ कहा जाता है और यह ऋग्वेद में उल्लिखित प्राचीनतम अनाजों में से एक है। जौ की यह विशेषता है कि यह अत्यधिक ठंड, सूखे और खराब मिट्टी में भी उग सकता है, इसीलिए इसे प्राचीन काल में सर्वाधिक उगाया गया।
15. उस स्थल का नाम बताइए, जहां से प्राचीनतम स्थायी जीवन के प्रमाण मिले हैं?
(a) धौलावीरा
(b) किली गुल मोहम्मद से
(c) कालीबंगा
(d) मेहरगढ़
U.P.P.C.S. (Spl.) ( Mains ) 2008
उत्तर-(d)
दिए गए विकल्पों में प्राचीनतम स्थायी जीवन के प्रमाण बलूचिस्तान के कच्छी मैदान में स्थित मेहरगढ़ से मिले हैं, जिसकी प्रामाणिक तिथि लगभग 7000 ई.पू. है। यहाँ से मिट्टी की कच्ची ईंटों से बने मकान, अनाज भंडारण के गड्ढे और पशुओं की हड्डियाँ मिली हैं जो स्थायी बसावट और सुनियोजित जीवन के स्पष्ट प्रमाण हैं। किली गुल मोहम्मद की प्राचीनतम तिथि लगभग 4000 ई.पू. और कालीबंगा की 3500 ई.पू. है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मेहरगढ़ में पाए गए मानव दंत-अवशेषों पर की गई ड्रिलिंग के साक्ष्य बताते हैं कि यहाँ के लोग 7000-5500 ई.पू. के बीच दाँतों का उपचार करते थे — यह विश्व की सबसे प्राचीन दंत-चिकित्सा (Dentistry) का प्रमाण माना जाता है।
16. भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
(a) कोलडिहवा से
(b) लहुरादेव से
(c) मेहरगढ़
(d) टोकवा से
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008)
उत्तर-(b)
नवीनतम पुरातात्विक खोजों के आधार पर भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित लहुरादेव से प्राप्त हुए हैं। यहाँ से 9000 ई.पू. से 7000 ई.पू. के मध्य के चावल की खेती के साक्ष्य मिले हैं। इस खोज से पूर्व प्राचीनतम साक्ष्य वाला स्थल मेहरगढ़ (7000 ई.पू., गेहूं) तथा प्राचीनतम चावल साक्ष्य वाला स्थल कोलडिहवा (6500 ई.पू.) माना जाता था। यदि परीक्षा में लहुरादेव विकल्प में न हो तो उत्तर मेहरगढ़ होगा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लहुरादेव की खोज 2002-03 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त उत्खनन में हुई थी। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह सिद्ध हुआ कि गंगा के मैदान में भी चावल की खेती पश्चिम एशिया की कृषि परंपरा के समकालीन थी।
17. भारत में पशुपालन एवं कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
(a) अंजिरा से
(b) दम्ब सदात से
(c) किली गुल मोहम्मद से
(d) मेहरगढ़ से
64th B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(d)
भारतीय उपमहाद्वीप में पशुपालन एवं कृषि दोनों के सबसे पुराने साक्ष्य एक साथ मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) से मिले हैं। यहाँ गेहूं और जौ की खेती के साथ-साथ भेड़, बकरी और मवेशियों के पालन के प्रमाण भी 7000 ई.पू. के मिले हैं। किली गुल मोहम्मद, दम्ब सदात आदि स्थल बाद के काल के हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मेहरगढ़ में पाए गए पशु-अवशेषों के अध्ययन से पता चलता है कि यहाँ गाय को पालतू बनाने की प्रक्रिया लगभग 6000 ई.पू. तक पूरी हो गई थी। मेहरगढ़ के निवासी कपास की खेती भी करते थे, जो इस क्षेत्र में कपास की कृषि के सबसे प्रारंभिक प्रमाणों में से एक है।
18. नवपाषाण युग में भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में निम्नलिखित में से किस स्थान पर कृषि के अभ्युदय के प्रारंभिक प्रमाण प्राप्त हुए हैं ?
(a) मुंडिगाक
(b) मेहरगढ़
(c) दम्ब सादत
(d) बालाकोट
Chhattisgarh P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में नवपाषाण काल में कृषि के उदय के सबसे प्रारंभिक प्रमाण मेहरगढ़ से मिलते हैं। मेहरगढ़ बोलान दर्रे (बलूचिस्तान) के निकट स्थित है और यहाँ से 7000 ई.पू. की नवपाषाणिक कृषि के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं। मुंडिगाक (अफगानिस्तान) और बालाकोट (पाकिस्तान) के साक्ष्य अपेक्षाकृत बाद के हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मेहरगढ़ को 7 पुरातात्विक कालखंडों (Period I–VII) में विभाजित किया गया है। प्रथम काल (7000–5500 ई.पू.) में यहाँ कोई मिट्टी के बर्तन नहीं मिलते (Pre-pottery Neolithic), जो इसे विश्व के प्राचीनतम नवपाषाण स्थलों में विशिष्ट बनाता है।
19. भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
(a) ब्रह्मगिरि से
(b) बुर्जहोम
(c) कोलडिहवा से
(d) मेहरगढ़ से
U.P.P.C.S. (Mains ) 2010
उत्तर-(d)
जब विकल्पों में लहुरादेव न हो तो भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य वाला स्थल मेहरगढ़ माना जाता है। यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है और यहाँ से 7000 ई.पू. की गेहूं-जौ की खेती के प्रमाण मिले हैं। बुर्जहोम जम्मू-कश्मीर में स्थित नवपाषाण स्थल है, जहाँ से गड्ढों में रहने (pit-dwellers) के प्रमाण मिले हैं। कोलडिहवा इलाहाबाद के निकट बेलन नदी तट पर स्थित है जहाँ 6500 ई.पू. के चावल के साक्ष्य मिले हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बुर्जहोम (कश्मीर) के नवपाषाण निवासी अपने पालतू कुत्तों को मृत्यु के बाद अपने साथ दफनाते थे, जो उनके कुत्तों के प्रति विशेष लगाव और अनुष्ठानिक विश्वास को दर्शाता है — यह भारत में ऐसे साक्ष्य का अनूठा उदाहरण है।
20. निम्नलिखित में से किन स्थानों से मध्यपाषाण काल में पशुपालन के प्रमाण मिलते हैं?
(a) औदे
(b) बोरी
(c) बागोर
(d) लखनियां
U.P.P.C.S. (Pre) 2018
उत्तर-(c)
मध्यपाषाण काल में पशुपालन के प्रारंभिक साक्ष्य मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के निकट आदमगढ़ और राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित बागोर से मिलते हैं। बागोर को भारत में पशुपालन के सबसे पुराने स्थलों में से एक माना जाता है। यहाँ से लगभग 5000-2000 ई.पू. के काल के लघु पाषाण उपकरण (Microliths) और पालतू पशुओं की हड्डियाँ मिली हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बागोर स्थल कोठारी नदी के किनारे स्थित है और यहाँ की खुदाई 1967-68 में V.N. Misra के नेतृत्व में हुई थी। आदमगढ़ (होशंगाबाद) की शैलचित्र गुफाओं में भी पशुपालन और शिकार के दृश्य अंकित हैं, जो मध्यपाषाणकालीन जीवन-शैली पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालते हैं।
21. भीमबेटका को किसने खोजा था ?
(a) डॉ. एच. डी. सांखलिया
(b) डॉ. श्याम सुंदर निगम
(c) डॉ. विष्णुधर वाकणकर
(d) डॉ. राजबली पाण्डेय
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
भीमबेटका की खोज वर्ष 1957-58 में प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता डॉ. विष्णुधर श्रीधर वाकणकर ने की थी। यह स्थल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यहाँ की गुफाओं में मानव निवास के प्रमाण लगभग 1 लाख वर्ष पुराने हैं। अतिरिक्त तथ्य: भीमबेटका को वर्ष 2003 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। यहाँ की शैल चित्रकारी में प्रयुक्त रंग मुख्यतः गेरू (लाल व पीला), सफेद और हरे रंग के हैं, जो वनस्पति एवं खनिज स्रोतों से तैयार किए जाते थे।
22. वृहत्पाषाण स्मारकों की पहचान की गई है-
(a) संन्यासी गुफाओं के रूप में
(b) मृतक को दफनाने के स्थान के रूप में
(c) मंदिर के रूप में
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(b)
वृहत्पाषाण (Megalith) विशाल पत्थरों से निर्मित वे संरचनाएं हैं जिनका उपयोग मृतकों को दफनाने के लिए किया जाता था। इनका निर्माण मुख्यतः दक्षिण भारत में लौह युग (लगभग 1000-100 ई.पू.) के दौरान हुआ। इनके प्रकारों में डोल्मेन, सिस्ट, कैर्न-सर्किल, टोपीकल शिला तथा मेहिर प्रमुख हैं। अतिरिक्त तथ्य: भारत में सर्वाधिक वृहत्पाषाण स्मारक कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में पाए जाते हैं। इन समाधियों में शव के साथ लोहे के औजार, मृदभांड और आभूषण भी रखे जाते थे, जो परलोक में जीवन की मान्यता को दर्शाते हैं।
23. नवदाटोली का उत्खनन किसने किया था ?
(a) के. डी. बाजपेयी ने
(b) वी. एस. वाकंकड़ ने
(c) एच.डी. सांकलिया ने
(d) डीलर ने
U.P. Lower Sub. (SpL.) (Pre) 2009
उत्तर-(c)
नवदाटोली (मध्य प्रदेश) का उत्खनन दक्कन कॉलेज, पुणे के प्रोफेसर एच. डी. सांकलिया ने 1952-53 में करवाया था। यह भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा उत्खनित ताम्रपाषाणिक ग्रामीण स्थल है, जिसकी तिथि लगभग 1600-1300 ई.पू. के मध्य निर्धारित की गई है। अतिरिक्त तथ्य: नवदाटोली नर्मदा नदी के दक्षिणी तट पर महेश्वर के निकट स्थित है। यहाँ से ताम्रपाषाण काल के मृदभांड, तांबे के औजार, अनाज के अवशेष (गेहूँ, जौ, मसूर) तथा पक्की मिट्टी की मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं।
24. ‘राख का टीला’ निम्नलिखित किस नवपाषाणिक स्थल से संबंधित है ?
(a) बुदिहाल
(b) संगनकल्लू
(c) कोलडिहवा
(d) ब्रह्मगिरि
U.P.P.C.S. (Mains ) 2009
उत्तर-(b)
कर्नाटक के बेल्लारी जनपद में स्थित संगनकल्लू (Sanganakallu) नवपाषाण कालीन पुरास्थल से ‘राख के टीले’ (Ashmounds) प्राप्त हुए हैं। ये टीले पशुओं के गोबर और जैविक पदार्थों के जलाने से निर्मित माने जाते हैं, जो सामूहिक उत्सवों या कर्मकांडों का प्रमाण हो सकते हैं। अतिरिक्त तथ्य: दक्षिण भारत में राख के टीले (Ashmounds) मुख्यतः कर्नाटक में पाए जाते हैं — संगनकल्लू के अतिरिक्त उत्नूर, कुप्पगल और ब्रह्मगिरि में भी ऐसे टीले मिले हैं। इन टीलों का काल लगभग 3000-1800 ई.पू. निर्धारित किया गया है।
25. निम्न में से किस एक पुरास्थल से पाषाण संस्कृति से लेकर हड़प्पा सभ्यता तक के सांस्कृतिक अवशेष प्राप्त हुए हैं?
(a) आम्री
(b) मेहरगढ़
(c) कोटदीजी
(d) कालीबंगा
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में बोलन दर्रे के निकट स्थित मेहरगढ़ से नवपाषाण काल से लेकर परिपक्व हड़प्पा सभ्यता तक के सांस्कृतिक अवशेष प्राप्त हुए हैं। इसकी खोज 1974 में फ्रांसीसी पुरातत्ववेत्ता जीन-फ्रैंकोइस जैरिज ने की थी। यह स्थल दक्षिण एशिया में कृषि और पशुपालन के सबसे प्राचीन प्रमाणों (लगभग 7000 ई.पू.) के लिए प्रसिद्ध है। अतिरिक्त तथ्य: मेहरगढ़ से विश्व की सबसे प्राचीन दंत-चिकित्सा (दाँत ड्रिलिंग) के साक्ष्य मिले हैं, जो लगभग 7500-9000 वर्ष पुराने हैं। यहाँ से कपास की खेती के भी प्राचीनतम प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
26. भारत में किस शिलाश्रय से सर्वाधिक चित्र प्राप्त हुए हैं?
(a) घघरिया
(b) भीमबेटका
(c) लेखाहिया
(d) आदमगढ़
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
भारत में सर्वाधिक शैल चित्र भीमबेटका (मध्य प्रदेश) के शिलाश्रयों से प्राप्त हुए हैं। यहाँ अब तक लगभग 700 से अधिक शिलाश्रयों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से 400 से अधिक में चित्र उत्कीर्ण हैं। इन चित्रों में शिकार के दृश्य, नृत्य, युद्ध, पशु-आखेट एवं सामाजिक जीवन का चित्रण है। अतिरिक्त तथ्य: भीमबेटका के शैल चित्रों की शैलियाँ पाँच सांस्कृतिक कालखंडों में विभाजित की गई हैं — पुरापाषाण काल से लेकर मध्यकाल तक। यहाँ के कुछ चित्र ऑस्ट्रेलिया के कलाकूर्रा शैल चित्रों से समानता रखते हैं, जो प्रागैतिहासिक कला की वैश्विक एकरूपता को दर्शाता है।
27. नवदाटोली किस राज्य में अवस्थित है?
(a) गुजरात
(b) महाराष्ट्र
(c) छत्तीसगढ़
(d) मध्य प्रदेश
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(d)
नवदाटोली मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण ताम्रपाषाण कालीन पुरास्थल है। यह महेश्वर नगर के समीप है और इसका उत्खनन 1952-53 तथा 1957-59 में दो चरणों में सम्पन्न हुआ था। अतिरिक्त तथ्य: नवदाटोली की संस्कृति को ‘मालवा संस्कृति’ के नाम से जाना जाता है। यहाँ से प्राप्त मृदभांड अपनी विशिष्ट चित्रकारी के कारण पुरातत्व जगत में ‘मालवा मृदभांड’ कहलाते हैं।
28. निम्नलिखित में से किस भारतीय पुरातत्ववेत्ता ने पहली बार ‘भीमबेटका गुफा’ को देखा और उसके शैलचित्रों के प्रागैतिहासिक महत्व को खोजा?
(a) माघो स्वरूप वत्स
(b) एच. डी. संकालिया
(c) वी. एस. वाकंकर
(d) वी. एन. मिश्रा
U.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
वर्ष 1957 में वी. एस. वाकंकर (विष्णु श्रीधर वाकणकर) ने भीमबेटका के शैलचित्रों की प्रागैतिहासिक महत्ता को पहचाना। वे भोपाल से उज्जैन जाते समय ट्रेन से इन पहाड़ियों को देखकर रुक गए और उन्होंने इनका विस्तृत अध्ययन किया। उन्हें ‘प्रागैतिहासिक कला का खोजकर्ता’ भी कहा जाता है। अतिरिक्त तथ्य: वाकणकर को ‘आदिमानव का चितेरा’ भी कहा जाता है। भीमबेटका नाम महाभारत के पात्र भीम से लिया गया है — स्थानीय मान्यता के अनुसार पांडव वनवास के दौरान यहाँ रुके थे और भीम यहाँ बैठते (बैठका) थे।
29. ‘भीमबेटका’ किसके लिए प्रसिद्ध है?
(a) गुफाओं के शैल चित्र
(b) खनिज
(c) बौद्ध प्रतिमाएं
(d) नदी का उपागम स्थल
M.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(a)
भीमबेटका मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में विंध्याचल पर्वत श्रृंखला में स्थित है और यह प्रागैतिहासिक शैल चित्रकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इन गुफाओं में हाथी, बारहसिंगा, शेर, जंगली सूअर तथा शिकार के दृश्य चित्रित हैं। यहाँ के चित्र उच्च पुरापाषाण काल से लेकर मध्यकाल तक के माने जाते हैं। अतिरिक्त तथ्य: भीमबेटका के शैलचित्रों में सबसे प्रमुख रंग गेरू का लाल रंग है। यह स्थल उत्तर में विंध्य पर्वत श्रृंखला और दक्षिण में सतपुड़ा पर्वतमाला के मध्य स्थित है, जो इसे जैव विविधता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।
30. निम्न में से कौन-सा स्थल प्रागैतिहासिक चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है?
(a) अजंता
(b) भीमबेटका
(c) बाघ
(d) अमरावती
Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Mains) 2007
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(b)
दिए गए विकल्पों में भीमबेटका ही एकमात्र प्रागैतिहासिक चित्रकला स्थल है। अजंता और बाघ की गुफाएं बौद्ध धर्म से संबंधित ऐतिहासिक काल की चित्रकारी के लिए तथा अमरावती बौद्ध मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध हैं। भीमबेटका के चित्र लाखों वर्ष पुरानी मानव सभ्यता के जीवन्त प्रमाण हैं। अतिरिक्त तथ्य: अजंता की चित्रकारी गुप्त काल (चौथी-पाँचवीं शताब्दी ई.) में की गई थी और ये भित्तिचित्र (Fresco) तकनीक से निर्मित हैं, जो प्रागैतिहासिक भीमबेटका की शैल (Rock) कला से सर्वथा भिन्न हैं।
31. भीमबेटका की गुफाएं कहां स्थित हैं?
(a) भोपाल
(b) पंचमढ़ी
(c) सिंगरौली
(d) अब्दुलागंज-रायसेन
M.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
भीमबेटका की गुफाएं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में अब्दुलागंज के समीप स्थित हैं। ये भोपाल से लगभग 45 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में विंध्य पर्वत श्रृंखला में हैं। इस क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 10 वर्ग किलोमीटर है। अतिरिक्त तथ्य: भीमबेटका की पहाड़ियों में बलुआ पत्थर की चट्टानें पाई जाती हैं जिन पर शैल चित्र उत्कीर्ण हैं। यह स्थल रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है, जो इसे पर्यावरणीय दृष्टि से भी संरक्षित रखता है।
32. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण निम्नलिखित विभागों/मंत्रालयों में से किसका संलग्न कार्यालय है?
(a) संस्कृति
(b) पर्यटन
(c) विज्ञान और प्रौद्योगिकी
(d) मानव संसाधन विकास
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख संलग्न कार्यालय है, जो देश की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और उत्खनन कार्य का दायित्व निभाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:ASI की स्थापना 1861 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा की गई थी, जिन्हें “भारतीय पुरातत्व का पिता” भी कहा जाता है। ASI वर्तमान में 3,693 से अधिक स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण करता है, जिनमें 40 UNESCO विश्व धरोहर स्थल भी शामिल हैं।
33. गर्त आवास के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
(a) बुर्जहोम से
(b) कोलडिहवा से
(c) ब्रह्मगिरि से
(d) संगनकल्लू से
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(a)
जम्मू-कश्मीर में स्थित नवपाषाणिक पुरास्थल बुर्जहोम से गर्त आवास (गड्ढों में बने घर) के स्पष्ट साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। ये गड्ढे ज़मीन में खोदे जाते थे और लोग उनमें निवास करते थे, जो संभवतः कठोर शीत ऋतु से बचने का उपाय था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बुर्जहोम में मानव कंकाल के साथ कुत्ते का कंकाल भी शवाधान में मिला है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में मानव-पशु सहजीवन का दुर्लभ प्रमाण है। इस स्थल की खोज 1935 में डी. टेरा और पीटरसन ने की थी। यहाँ से हड्डी से बने औज़ार और हड्डी की सुइयाँ भी मिली हैं जो नवपाषाण काल की शिल्पकारी का प्रमाण हैं।
34. विंध्य क्षेत्र के किस शिलाश्रय से सर्वाधिक मानव कंकाल मिले हैं?
(a) मोरहना पहाड़
(b) घघरिया
(c) बघही खोर
(d) लेखहिया
U.P.P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
विंध्य क्षेत्र के लेखहिया शिलाश्रय (संख्या 1) से मध्यपाषाणिक लघु पाषाण उपकरणों के साथ-साथ 17 से अधिक मानव कंकाल प्राप्त हुए हैं — यह संख्या विंध्य क्षेत्र में किसी एकल शिलाश्रय से प्राप्त सर्वाधिक मानव कंकालों की है। अमेरिकी शोधकर्ता जॉन आर. लुकास के अनुसार यहाँ कुल 27 कंकालों की अस्थियाँ मिली हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लेखहिया उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित है और इसकी खुदाई जी.आर. शर्मा के नेतृत्व में इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा की गई थी। यहाँ से प्राप्त कंकाल लगभग 8000-5000 ईसा पूर्व के मध्यपाषाण काल के माने जाते हैं, जो तत्कालीन मानव जीवनशैली और दफन परंपराओं पर महत्त्वपूर्ण प्रकाश डालते हैं।
35. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए- (ऐतिहासिक स्थान ) (ख्याति का कारण)
1. बुर्जहोम : शैल कृत देव मंदिर
2. चंद्रकेतुगढ़ टेराकोटा कला
3. गणेश्वर ताम्र कलाकृतिया उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा / कौन-से सही
(a) केवल 1
(b) 1 और 2
(c) केवल 3
(d) 2 और 3
I.A.S. (Pre) 2021
उत्तर-(d)
बुर्जहोम (जम्मू-कश्मीर) नवपाषाण युग का पुरास्थल है जो गर्त आवासों और मानव-कुत्ता सह-शवाधान के लिए प्रसिद्ध है, न कि शैलकृत देव मंदिर के लिए — अतः युग्म 1 गलत है। चंद्रकेतुगढ़ (पश्चिम बंगाल) विद्याधरी नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है, जहाँ से ऐतिहासिक काल की उत्कृष्ट टेराकोटा कला के नमूने मिले हैं — युग्म 2 सही है। गणेश्वर (राजस्थान, सीकर जिला) से बड़ी मात्रा में ताम्र कलाकृतियाँ प्राप्त हुई हैं जिनमें दोहरी पेंचदार शिरे वाली बाणाग्र और मछली पकड़ने के कांटे शामिल हैं — युग्म 3 सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:गणेश्वर को “ताम्र संचयों की जननी” (Mother of Copper Hoards) कहा जाता है क्योंकि यहाँ से प्राप्त ताम्र वस्तुओं की संख्या और विविधता भारत में अन्यत्र दुर्लभ है। चंद्रकेतुगढ़ की टेराकोटा मूर्तियाँ मौर्य और शुंग काल (लगभग 3री-1ली शताब्दी ईसा पूर्व) की हैं और बंगाल की लोक कला परंपरा को समझने में महत्त्वपूर्ण हैं।
36. गैरिक मृद्भांड पात्र (ओ.सी.पी.) का नामकरण हुआ था-
(a) हस्तिनापुर में
(b) अहिच्छत्र में
(c) नोंह में
(d) लाल किला में
U.P.P.C.S. (Mains ) 2006
उत्तर-(a)
गेरूवर्णी मृद्भांड संस्कृति (Ochre Coloured Pottery – OCP) का नामकरण हस्तिनापुर में हुआ। प्रसिद्ध पुरातत्त्वविद् बी.बी. लाल ने 1951 में हस्तिनापुर की खुदाई के दौरान सर्वप्रथम इस विशिष्ट गेरुए रंग के मृद्भांड की पहचान की और वहीं इसका नामकरण किया। यह संस्कृति मुख्यतः गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र से जुड़ी है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:OCP संस्कृति का काल लगभग 2000-1500 ईसा पूर्व माना जाता है और इसे कुछ विद्वान हड़प्पा संस्कृति के पतन के बाद की संस्कृति से जोड़ते हैं। OCP के बर्तन अत्यंत भंगुर (कच्चे) होते थे और उन पर गेरू (लाल-नारंगी रंग) का लेप चढ़ा होता था, जो प्रायः छूने मात्र से उतर जाता था — यही इसकी सबसे विशिष्ट पहचान है।
37. निम्नलिखित में से किस स्थल से मानव कंकाल के साथ कुत्ते का कंकाल भी शवाधान से प्राप्त हुआ है?
(a) ब्रह्मगिरि
(b) बुर्जहोम
(c) चिरांद
(d) मास्की
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के निकट स्थित नवपाषाणिक पुरास्थल बुर्जहोम से मानव कंकाल के साथ कुत्ते का कंकाल भी शवाधान में मिला है। यह इस बात का प्रमाण है कि तत्कालीन लोग कुत्ते को अपने जीवन का अभिन्न अंग मानते थे और मृत्यु के बाद भी उसे साथ दफनाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बुर्जहोम में कुत्तों के अतिरिक्त हिरण और अन्य जानवरों की हड्डियाँ भी शवाधानों में मिली हैं, जो संभवतः मृत्यु के बाद के जीवन में भोजन की आपूर्ति की धारणा को दर्शाता है। यह परंपरा मध्य एशिया की नवपाषाणिक संस्कृतियों से काफी मिलती-जुलती है, जिससे संभावित सांस्कृतिक संपर्क का संकेत मिलता है।
38. ताम्राश्म काल में महाराष्ट्र के लोग मृतकों को घर के फर्श के नीचे किस तरह रखकर दफनाते थे?
(a) उत्तर से दक्षिण की ओर
(b) पूर्व से पश्चिम की ओर
(c) दक्षिण से उत्तर की ओर
(d) पश्चिम से पूर्व की ओर
U.P.P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(a)
महाराष्ट्र की ताम्रपाषाण कालीन जोर्वे संस्कृति (लगभग 1400-700 ईसा पूर्व) के प्रमुख पुरास्थलों — नेवासा, दैमाबाद, इनामगांव, चंदोली आदि — में मृतकों को उत्तर-दक्षिण दिशा में, अस्थिकलश में रखकर, घरों के फर्श के नीचे दफनाने के साक्ष्य मिले हैं। कब्र के साथ मिट्टी के बर्तन और तांबे की वस्तुएं भी रखी जाती थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इनामगांव (पुणे जिला) जोर्वे संस्कृति का सबसे अधिक उत्खनित पुरास्थल है जहाँ घर के भीतर शवाधान की यह परंपरा स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई है। उल्लेखनीय है कि कुछ बच्चों के शवों को उरण (घड़े) में रखकर दफनाया जाता था — इसे “उरण शवाधान” कहते हैं, जो बालमृत्यु और अंत्येष्टि संस्कारों की विविधता को दर्शाता है।
39. नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (a) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (a) : विध्य क्षेत्र के पाषाण युगीन लोगों ने नूतन भूतल काल के अंत में गंगा घाटी में प्रव्रजन किया।
कारण (R) : जलवायु परिवर्तन के कारण इस काल में शुष्कता का चरण था। नीचे दिए गए कूट से राही कूट : उत्तर का चयन कीजिए।
(a) (a) और (R) दोनों सही हैं, तथा (R), (a) की सही व्याख्या करता है।
(b) (a) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (a) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) (a) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (a) गलत है, परंतु (R) सही है।
U.P.R.O./ A.R.O. (Mains) 2016
उत्तर-(a)
पुरातत्त्वविद् जी.आर. शर्मा ने सराय नाहर राय (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) में उत्खनन के आधार पर यह अवधारणा प्रस्तुत की कि नूतन भूतल काल (Holocene) के अंत में जलवायु में शुष्कता आने से विंध्य क्षेत्र में भोजन और जल की कमी हो गई, जिसके कारण वहाँ के लोगों ने गंगा घाटी की ओर प्रव्रजन किया। अतः अभिकथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, अभिकथन की उचित व्याख्या करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:सराय नाहर राय से मध्यपाषाण कालीन मानव कंकाल और हड्डी के उपकरण प्राप्त हुए हैं। यह स्थल लगभग 10,000-5,000 ईसा पूर्व के मानव प्रव्रजन और बस्ती निर्माण को समझने में सहायक है। विंध्य से गंगा घाटी की ओर यह प्रव्रजन भारत में आद्य कृषि सभ्यता के उद्भव की पृष्ठभूमि भी तैयार करता है।
40. भीमबेटका को किसने खोजा था ?
(a) डॉ. एच. डी. सांखलिया
(b) डॉ. श्याम सुंदर निगम
(c) डॉ. विष्णुधर वाकणकर
(d) डॉ. राजबली पाण्डेय
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
भीमबेटका शैलाश्रय की खोज 1957-58 में प्रसिद्ध पुरातत्त्वविद् डॉ. विष्णुधर श्रीधर वाकणकर ने की थी। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में विंध्याचल पर्वत श्रृंखला में स्थित यह स्थल प्रागैतिहासिक शैल चित्रकला के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यहाँ 700 से अधिक शिलाश्रयों में मानव जीवन के लगभग 30,000 वर्ष पुराने चित्र अंकित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:भीमबेटका को 2003 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यहाँ के शैल चित्रों में शिकार के दृश्य, नृत्य, युद्ध, और पशु-पक्षियों के चित्र शामिल हैं जो मुख्यतः लाल और सफेद रंग से बनाए गए हैं। कुछ चित्र मौर्य और मध्यकालीन काल तक के भी पाए गए हैं, जो इस स्थल की निरंतर मानव उपस्थिति को प्रमाणित करते हैं।
41. निम्नलिखित में से किस स्थान पर मानव के साथ कुत्ते को दफनाए जाने का साक्ष्य मिला है ?
(a) बुर्जहोम
(b) कोलडिहवा
(c) चोपानी-मांडो
(d) मांडो
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
जम्मू-कश्मीर स्थित नवपाषाणिक पुरास्थल बुर्जहोम से ही मानव के साथ कुत्ते को दफनाने का स्पष्ट पुरातात्विक प्रमाण मिला है। यह शवाधान परंपरा भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी तरह का अनूठा उदाहरण है, जो मनुष्य और कुत्ते के बीच के गहरे भावनात्मक और सामाजिक संबंध को दर्शाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:कोलडिहवा (उत्तर प्रदेश) चावल की खेती के प्राचीनतम साक्ष्यों (लगभग 6000 ईसा पूर्व) के लिए प्रसिद्ध है, न कि पशु-शवाधान के लिए। चोपानी-मांडो (इलाहाबाद के पास) मध्यपाषाण कालीन पुरास्थल है जहाँ से मिट्टी के आदिम बर्तनों के साक्ष्य मिले हैं — इसे विश्व के प्राचीनतम मृद्भांड-निर्माण स्थलों में गिना जाता है।

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