1.भारत में मानव का सर्वप्रथम साक्ष्य कहां मिला है?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
भारत में आदि मानव का सबसे पुराना ज्ञात साक्ष्य मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ‘हथनौरा’ नामक स्थल से मिला है। यह खोज प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् डॉ. अरुण सोनकिया ने 5 दिसंबर, 1982 को की थी। प्राप्त जीवाश्म एक कपाल (Skull Cap) का था जिसे ‘नर्मदा मानव’ (Narmada Man) या होमो इरेक्टस नर्मदेंसिस कहा जाता है। यह जीवाश्म लगभग 2.5 से 5 लाख वर्ष पुराना माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नर्मदा घाटी में पाषाणकालीन औजारों के भी प्रचुर साक्ष्य मिले हैं, जो इस क्षेत्र में मानव बसाव की प्राचीनता को और पुष्ट करते हैं।
2. खाद्यान्नों की कृषि सर्वप्रथम प्रारंभ हुई थी
U.P.P.C.S. (Mains ) 2005
उत्तर-(a)
खाद्यान्नों की कृषि का सर्वप्रथम प्रारंभ नवपाषाण काल (Neolithic Age) में हुआ। इसी युग में मनुष्य ने भोजन के लिए शिकार और संग्रह पर निर्भरता छोड़कर स्थायी कृषि जीवन अपनाया, जिसे ‘नवपाषाण क्रांति’ या ‘कृषि क्रांति’ भी कहते हैं। भारत में नवपाषाण काल के कृषि के प्रमाण मेहरगढ़ (वर्तमान पाकिस्तान, लगभग 7000 ई.पू.) से गेहूँ और जौ की खेती के रूप में मिलते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:दक्षिण भारत में कर्नाटक के पिकलीहल और टेक्कलकोट जैसे नवपाषाणकालीन स्थलों से रागी व अन्य अनाज उगाए जाने के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।
3.एक ही कब्र से तीन मानव कंकाल निकले हैं-
U.P.P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(b)
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित दमदमा एक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाणकालीन स्थल है। यहाँ पाँच वर्षों तक किए गए उत्खनन में पश्चिमी व मध्यवर्ती क्षेत्रों से कुल 41 मानव शवाधान (burials) मिले। इनमें से 5 शवाधान युग्म (दो कंकाल एक साथ) थे और एक विशेष शवाधान में तीन मानव कंकाल एक ही कब्र में दफनाए हुए पाए गए। दमदमा, सराय नाहर राय और महदहा — ये तीनों स्थल मध्य गंगा घाटी की मेसोलिथिक सभ्यता के प्रमुख केंद्र हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:दमदमा से प्राप्त शवाधानों में मृतकों के साथ पशु अस्थियाँ और सूक्ष्मपाषाण उपकरण (microliths) भी रखे मिले, जो तत्कालीन अंत्येष्टि प्रथाओं पर प्रकाश डालते हैं।
4.उत्खनित प्रमाणों के अनुसार, पशुपालन का प्रारंभ हुआ था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2006
उत्तर-(d)
उत्खनन से प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार पशुपालन का आरंभ मध्यपाषाण काल के अंतिम चरण में हुआ। भारत में इसके प्रमाण मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित आदमगढ़ तथा राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित बागोर नामक स्थलों से मिले हैं, जो लगभग 5000 ई.पू. से 2000 ई.पू. के बीच के हैं। यहाँ गाय, भेड़, बकरी जैसे पशुओं की हड्डियाँ बड़ी मात्रा में पाई गई हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय तथ्य यह है कि बागोर स्थल को भारत में पशुपालन का सबसे प्राचीन केंद्र माना जाता है और यहाँ से प्राप्त साक्ष्य लगभग 5000-6000 ई.पू. तक के हैं, जो इसे एशिया के प्राचीनतम पशुपालन स्थलों में से एक बनाते हैं।
5. कोपेनहेगन संग्रहालय की सामग्री से पाषाण, कांस्य और लौह युग का त्रियुगीय विभाजन किया था –
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
डेनमार्क के कोपेनहेगन संग्रहालय की पुरातात्विक सामग्री के आधार पर पाषाण, कांस्य और लौह युग का त्रियुगीय (Three-Age System) वर्गीकरण डेनिश पुरातत्वविद् क्रिश्चियन जर्गेनसन थॉमसन (Christian Jürgensen Thomsen) ने किया था। थॉमसन ने 1836 ई. में अपनी पुस्तक ‘Ledetraad til Nordisk Oldkyndighed’ में इस वर्गीकरण को औपचारिक रूप से प्रकाशित किया। बाद में जॉन लुब्बाक ने 1865 में अपनी पुस्तक ‘Pre-Historic Times’ में पाषाण काल को आगे पुरापाषाण (Palaeolithic) और नवपाषाण (Neolithic) काल में विभाजित किया, जो आधुनिक पुरातत्व का आधार बना।
6. हड्डी से निर्मित आभूषण भारत में मध्यपाषाण काल के संदर्भ में प्राप्त हुए हैं-
U.P.R.O. / A.R.O. (Mains) 2013
उत्तर-(a&b)
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित सराय नाहर राय और महदहा दोनों मध्यपाषाणकालीन स्थलों से हड्डी निर्मित आभूषण मिले हैं। महदहा के ‘बूचड़खाना संकुल क्षेत्र’ से विशेष रूप से हड्डी व सींग से बने उपकरण और आभूषण बड़े पैमाने पर पाए गए हैं। महदहा का उत्खनन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. जी. आर. शर्मा के निर्देशन में हुआ था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उल्लेखनीय है कि इन स्थलों पर पाए गए हड्डी के मनके (bone beads) और पेंडेंट इस बात के प्रमाण हैं कि मध्यपाषाण काल में भी मनुष्यों में सौंदर्य-बोध और आत्म-अलंकरण की प्रवृत्ति विद्यमान थी, जो मानव सांस्कृतिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
7. मध्यपाषाणिक प्रसंग में पशुपालन के प्रमाण जहां मिले, वह स्थान है-
U.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008
उत्तर-(c)
मध्यपाषाण काल में पशुपालन के पुरातात्विक साक्ष्य मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित आदमगढ़ तथा राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित बागोर से प्राप्त हुए हैं। आदमगढ़ से गाय, भैंस, भेड़, बकरी तथा कुत्ते की हड्डियाँ मिली हैं जो पशुपालन की ओर संकेत करती हैं। विशेष तथ्य यह है कि लंघनाज (गुजरात) भी एक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाणकालीन स्थल है, जहाँ से मानव कंकाल तथा सूक्ष्मपाषाण (microliths) उपकरण मिले हैं, परंतु वहाँ पशुपालन के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चोपनी मांडो (इलाहाबाद, उ.प्र.) भारत का एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ हस्तनिर्मित मृद्भांड (handmade pottery) के साथ-साथ मध्यपाषाणकालीन उपकरण एक साथ पाए गए हैं।
8.रॉबर्ट ब्रूस फुट थे, एक-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(a&b)
इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार रॉबर्ट ब्रूस फुट (1834–1912) ब्रिटिश भूगर्भ-वैज्ञानिक (Geologist) और पुरातत्वविद् (Archaeologist) दोनों थे। वे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) से संबद्ध थे और उन्होंने 1863 ई. में मद्रास के निकट पल्लवरम् (Pallavaram) नामक स्थल पर भारत का पहला पुरापाषाणकालीन पत्थर का हाथ-कुल्हाड़ी (hand axe) उपकरण खोजकर भारत में पाषाणकालीन संस्कृति के अध्ययन की नींव रखी। इसीलिए रॉबर्ट ब्रूस फुट को ‘भारतीय पाषाण काल के जनक’ (Father of Indian Prehistory) की संज्ञा दी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उन्होंने अपने जीवन में 460 से अधिक पाषाणकालीन स्थलों की पहचान की।
9. निम्नलिखित में से किस स्थल से हड्डी के उपकरण प्राप्त हुए
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(c&d)
मध्यपाषाणकालीन स्थल महदहा (उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में) से बड़ी संख्या में हड्डी और सींग से निर्मित उपकरण प्राप्त हुए हैं। प्रो. जी. आर. शर्मा ने महदहा को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया — झील क्षेत्र, बूचड़खाना संकुल क्षेत्र और कब्रिस्तान-निवास क्षेत्र। बूचड़खाना क्षेत्र से ही सर्वाधिक हड्डी के उपकरण और आभूषण पाए गए हैं। सराय नाहर राय से भी अल्प मात्रा में हड्डी के उपकरण मिले हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:उल्लेखनीय है कि महदहा से प्राप्त हड्डी के उपकरणों में बाण की नोकें (bone points), सुइयाँ और खुरचनी (scrapers) प्रमुख हैं, जो शिकार और चर्म-शोधन जैसी गतिविधियों के प्रमाण हैं। ये उपकरण लगभग 8000–5000 ई.पू. काल के माने जाते हैं।
10. प्रथम मानव जीवाश्म भारत की किस नदी घाटी से प्राप्त हुआ था?
66th B.P.S.C. Re-Exam 2020
उत्तर-(c)
भारत में प्रथम मानव जीवाश्म नर्मदा घाटी (मध्य प्रदेश) के हथनौरा स्थल से प्राप्त हुआ था। यह जीवाश्म एक मानव कपाल का टुकड़ा (Skull Cap) है, जिसे ‘नर्मदा मानव’ या वैज्ञानिक भाषा में होमो इरेक्टस नर्मदेंसिस कहा जाता है। यह भारत में पाए गए होमो इरेक्टस (Homo Erectus) का एकमात्र ज्ञात जीवाश्म है और इसे लगभग 2,50,000 से 5,00,000 वर्ष पुराना माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इस खोज का विशेष महत्त्व यह है कि इसने यह सिद्ध किया कि भारतीय उपमहाद्वीप में मानव विकास की प्रक्रिया अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है। नर्मदा घाटी को भारत की ‘सांस्कृतिक पालना’ (Cradle of Indian Civilization) भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ पाषाण काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के निरंतर मानव बसाव के साक्ष्य मिले हैं।
11. निम्नलिखित में से किसको चालकोलिथिक युग भी कहा जाता है ?
44th B.P.S. C. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
ताम्रपाषाण युग को चालकोलिथिक (Chalcolithic) युग भी कहते हैं। यह नाम दो ग्रीक शब्दों — ‘Chalcos’ (तांबा) और ‘Lithos’ (पत्थर) — से मिलकर बना है। यह काल पाषाण युग और कांस्य युग के बीच का संक्रमण काल था, जिसमें मनुष्य ने पहली बार धातु (तांबे) का उपयोग पत्थर के औजारों के साथ-साथ शुरू किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:भारत में ताम्रपाषाण संस्कृतियों के प्रमुख स्थल अहाड़ (राजस्थान), कायथा (मध्य प्रदेश), जोर्वे (महाराष्ट्र) और मालवा (मध्य प्रदेश) हैं। तांबा विश्व में मानव द्वारा उपयोग की गई पहली धातु मानी जाती है, जिसका उपयोग लगभग 9000 ई.पू. में पश्चिम एशिया में शुरू हुआ था।
12. भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
उत्तर-(c)
मेहरगढ़ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बोलान दर्रे के पास कच्छी मैदान में स्थित है। यहाँ से लगभग 7000 ई.पू. के गेहूं और जौ की खेती के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि की प्राचीनतम जानकारी देते हैं। यहाँ के निवासी पशुपालन भी करते थे और मिट्टी की कच्ची ईंटों से मकान बनाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मेहरगढ़ की खुदाई 1974 में फ्रांसीसी पुरातत्वविद् Jean-François Jarrige के नेतृत्व में शुरू हुई थी। यह स्थल सिंधु घाटी सभ्यता का पूर्वज माना जाता है, क्योंकि यहाँ से सिंधु सभ्यता की अनेक विशेषताओं जैसे मिट्टी के बर्तन, मूर्तियाँ और कृषि के प्रारंभिक रूप देखने को मिलते हैं।
13. आहड़ सभ्यता के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
1. आहड़वासी तांबा गलाना जानते थे।
2. ये लोग चावल से परिचित नहीं थे।
3. धातु का काम आहड़वासियों की अर्थव्यवस्था का एक साधन था।
4. यहां से काले-लाल रंग के मृद्भांड मिले हैं, जिन सामान्यतः सफेद रंग से ज्यामितीय आकृतियां उकेरी हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए-
1. आहड़वासी तांबा गलाना जानते थे।
2. ये लोग चावल से परिचित नहीं थे।
3. धातु का काम आहड़वासियों की अर्थव्यवस्था का एक साधन था।
4. यहां से काले-लाल रंग के मृद्भांड मिले हैं, जिन सामान्यतः सफेद रंग से ज्यामितीय आकृतियां उकेरी हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए-
R.AS. / R.T.S. (Pre) 2021
उत्तर-(a)
अहाड़ दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के उदयपुर जिले में बेड़च नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख ताम्रपाषाणिक संस्कृति का स्थल है। यहाँ के निवासी गेहूं, जौ और चावल की खेती करते थे, अतः कथन 2 गलत है। ‘तांबवती’ (तांबे वाला स्थान) इसका प्राचीन नाम था, जो यहाँ तांबे की प्रचुरता को दर्शाता है। अहाड़वासी तांबे को गलाकर औजार और आभूषण बनाते थे, जो उनकी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग था। यहाँ से प्राप्त काले-लाल मृद्भांडों पर सफेद रंग की ज्यामितीय आकृतियाँ इस संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। अतः कथन 1, 3 और 4 सही हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अहाड़ स्थल की खुदाई 1953-54 में अक्षय कीर्ति व्यास और 1961-62 में H.D. Sankalia के नेतृत्व में हुई थी। अहाड़ संस्कृति का काल लगभग 2800 ई.पू. से 1500 ई.पू. माना जाता है और यह राजस्थान की सबसे विकसित ताम्रपाषाण संस्कृतियों में से एक थी।
14. मानव द्वारा सर्वप्रथम प्रयुक्त अनाज था-
J.P.P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(c)
वैश्विक दृष्टि से देखें तो मानव द्वारा सर्वप्रथम प्रयुक्त अनाज जौ (Barley) है, जिसे लगभग 8000 ई.पू. में पश्चिमी एशिया के ‘उर्वर अर्धचंद्र’ (Fertile Crescent) क्षेत्र में उगाया गया था। यह क्षेत्र भूमध्य सागर और ईरान के मध्य स्थित था। गेहूं की खेती भी लगभग इसी समय और इसी क्षेत्र में शुरू हुई। आधुनिक मानव समाज द्वारा मुख्यतः 8 खाद्य अनाज — जौ, गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा, सोरघम, राई एवं जई — उपभोग किए जाते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:जौ को संस्कृत में ‘यव’ कहा जाता है और यह ऋग्वेद में उल्लिखित प्राचीनतम अनाजों में से एक है। जौ की यह विशेषता है कि यह अत्यधिक ठंड, सूखे और खराब मिट्टी में भी उग सकता है, इसीलिए इसे प्राचीन काल में सर्वाधिक उगाया गया।
15. उस स्थल का नाम बताइए, जहां से प्राचीनतम स्थायी जीवन के
प्रमाण मिले हैं?
U.P.P.C.S. (Spl.) ( Mains ) 2008
उत्तर-(d)
दिए गए विकल्पों में प्राचीनतम स्थायी जीवन के प्रमाण बलूचिस्तान के कच्छी मैदान में स्थित मेहरगढ़ से मिले हैं, जिसकी प्रामाणिक तिथि लगभग 7000 ई.पू. है। यहाँ से मिट्टी की कच्ची ईंटों से बने मकान, अनाज भंडारण के गड्ढे और पशुओं की हड्डियाँ मिली हैं जो स्थायी बसावट और सुनियोजित जीवन के स्पष्ट प्रमाण हैं। किली गुल मोहम्मद की प्राचीनतम तिथि लगभग 4000 ई.पू. और कालीबंगा की 3500 ई.पू. है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मेहरगढ़ में पाए गए मानव दंत-अवशेषों पर की गई ड्रिलिंग के साक्ष्य बताते हैं कि यहाँ के लोग 7000-5500 ई.पू. के बीच दाँतों का उपचार करते थे — यह विश्व की सबसे प्राचीन दंत-चिकित्सा (Dentistry) का प्रमाण माना जाता है।
16. भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008)
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008)
उत्तर-(b)
नवीनतम पुरातात्विक खोजों के आधार पर भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित लहुरादेव से प्राप्त हुए हैं। यहाँ से 9000 ई.पू. से 7000 ई.पू. के मध्य के चावल की खेती के साक्ष्य मिले हैं। इस खोज से पूर्व प्राचीनतम साक्ष्य वाला स्थल मेहरगढ़ (7000 ई.पू., गेहूं) तथा प्राचीनतम चावल साक्ष्य वाला स्थल कोलडिहवा (6500 ई.पू.) माना जाता था। यदि परीक्षा में लहुरादेव विकल्प में न हो तो उत्तर मेहरगढ़ होगा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:लहुरादेव की खोज 2002-03 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त उत्खनन में हुई थी। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह सिद्ध हुआ कि गंगा के मैदान में भी चावल की खेती पश्चिम एशिया की कृषि परंपरा के समकालीन थी।
17. भारत में पशुपालन एवं कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
64th B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(d)
भारतीय उपमहाद्वीप में पशुपालन एवं कृषि दोनों के सबसे पुराने साक्ष्य एक साथ मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) से मिले हैं। यहाँ गेहूं और जौ की खेती के साथ-साथ भेड़, बकरी और मवेशियों के पालन के प्रमाण भी 7000 ई.पू. के मिले हैं। किली गुल मोहम्मद, दम्ब सदात आदि स्थल बाद के काल के हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मेहरगढ़ में पाए गए पशु-अवशेषों के अध्ययन से पता चलता है कि यहाँ गाय को पालतू बनाने की प्रक्रिया लगभग 6000 ई.पू. तक पूरी हो गई थी। मेहरगढ़ के निवासी कपास की खेती भी करते थे, जो इस क्षेत्र में कपास की कृषि के सबसे प्रारंभिक प्रमाणों में से एक है।
18. नवपाषाण युग में भारतीय उपमहाद्वीप के
उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में निम्नलिखित में से किस स्थान पर कृषि के अभ्युदय के प्रारंभिक प्रमाण प्राप्त हुए हैं ?
Chhattisgarh P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में नवपाषाण काल में कृषि के उदय के सबसे प्रारंभिक प्रमाण मेहरगढ़ से मिलते हैं। मेहरगढ़ बोलान दर्रे (बलूचिस्तान) के निकट स्थित है और यहाँ से 7000 ई.पू. की नवपाषाणिक कृषि के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं। मुंडिगाक (अफगानिस्तान) और बालाकोट (पाकिस्तान) के साक्ष्य अपेक्षाकृत बाद के हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मेहरगढ़ को 7 पुरातात्विक कालखंडों (Period I–VII) में विभाजित किया गया है। प्रथम काल (7000–5500 ई.पू.) में यहाँ कोई मिट्टी के बर्तन नहीं मिलते (Pre-pottery Neolithic), जो इसे विश्व के प्राचीनतम नवपाषाण स्थलों में विशिष्ट बनाता है।
19. भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-
U.P.P.C.S. (Mains ) 2010
उत्तर-(d)
जब विकल्पों में लहुरादेव न हो तो भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य वाला स्थल मेहरगढ़ माना जाता है। यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है और यहाँ से 7000 ई.पू. की गेहूं-जौ की खेती के प्रमाण मिले हैं। बुर्जहोम जम्मू-कश्मीर में स्थित नवपाषाण स्थल है, जहाँ से गड्ढों में रहने (pit-dwellers) के प्रमाण मिले हैं। कोलडिहवा इलाहाबाद के निकट बेलन नदी तट पर स्थित है जहाँ 6500 ई.पू. के चावल के साक्ष्य मिले हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बुर्जहोम (कश्मीर) के नवपाषाण निवासी अपने पालतू कुत्तों को मृत्यु के बाद अपने साथ दफनाते थे, जो उनके कुत्तों के प्रति विशेष लगाव और अनुष्ठानिक विश्वास को दर्शाता है — यह भारत में ऐसे साक्ष्य का अनूठा उदाहरण है।
20. निम्नलिखित में से किन स्थानों से मध्यपाषाण काल में पशुपालन
के प्रमाण मिलते हैं?
U.P.P.C.S. (Pre) 2018
उत्तर-(c)
मध्यपाषाण काल में पशुपालन के प्रारंभिक साक्ष्य मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के निकट आदमगढ़ और राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित बागोर से मिलते हैं। बागोर को भारत में पशुपालन के सबसे पुराने स्थलों में से एक माना जाता है। यहाँ से लगभग 5000-2000 ई.पू. के काल के लघु पाषाण उपकरण (Microliths) और पालतू पशुओं की हड्डियाँ मिली हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बागोर स्थल कोठारी नदी के किनारे स्थित है और यहाँ की खुदाई 1967-68 में V.N. Misra के नेतृत्व में हुई थी। आदमगढ़ (होशंगाबाद) की शैलचित्र गुफाओं में भी पशुपालन और शिकार के दृश्य अंकित हैं, जो मध्यपाषाणकालीन जीवन-शैली पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालते हैं।
21. भीमबेटका को किसने खोजा था ?
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
भीमबेटका की खोज वर्ष 1957-58 में प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता डॉ. विष्णुधर श्रीधर वाकणकर ने की थी। यह स्थल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यहाँ की गुफाओं में मानव निवास के प्रमाण लगभग 1 लाख वर्ष पुराने हैं। अतिरिक्त तथ्य: भीमबेटका को वर्ष 2003 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। यहाँ की शैल चित्रकारी में प्रयुक्त रंग मुख्यतः गेरू (लाल व पीला), सफेद और हरे रंग के हैं, जो वनस्पति एवं खनिज स्रोतों से तैयार किए जाते थे।
Leave a Reply