➣ यह समय वैदिक काल के अंत का था। लोगों के भौतिक जीवन में काफी विकास हुआ। खानाबदोश और घुमन्तू जीवन का अन्त हो गया था।
➣ लौहे के बढ़ते उपयोग ने बड़े राज्यों को जन्म दिया। नए कृषि उपकरणों से कृषि व्यवस्थित ढंग से होने लगी। छोटे-छोटे कबीलों ने राज्यों का रूप ले लिया।
➣ इन महाजपदों का उल्लेख बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रन्थ भवति सूत्र में मिलता है।
➣ बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तरनिकाय से ज्ञात होता है कि गौतम बुद्ध के जन्म के पूर्व समस्त उत्तर भारत 16 बड़े राज्यों में विभाजित था। इन्हें सोलह (षोडश) महाजनपद कहा गया है। इन सोलह महाजनपदों के नाम हैं-कोशल, काशी, मगध, अंग, वज्जि, चेदि, मल्ल, वत्स, कुरु, पांचाल, मत्स्य, शूरसेन, कम्बोज, अवंति, अस्सक (अश्मक) तथा गांधार।
➣ जैन ग्रंथ भगवतीसूत्र में भी इन 16 महाजनपदों के नाम मिलते हैं, किंतु इसमें कुछ नाम भिन्न दिए गए हैं। इसमें प्राप्त सोलह महाजनपदों के नाम हैं-अंग, बंग, मलय, अच्छ, वच्छ (वत्स), मगह (मगध), मालव, कोच्छ, लाढ़, मोलि (मल्ल), कोशल, काशी, पाठ्य, सम्मुत्तर, अवध एवं वज्जि।
➣ 16 महाजनपदों में से 15 महाजनपद उत्तर भारत में थे जबकि दक्षिण भारत में गोदावरी नदी के किनारे स्थित एकमात्र जनपद अस्मक था।
| जनपद | राजधानी | क्षेत्र |
|---|---|---|
| 1.अंग | चंपा | भागलपुर, मुंगेर (बिहार) |
| 2.मगध | गिरिव्रज/राजगृह | पटना एवं गया (बिहार) |
| 3.काशी | वाराणसी | वाराणसी के आसपास |
| 4.कोशल | साकेत एवं श्रावस्ती | पूर्वी उत्तर प्रदेश |
| 5.वज्जि | वैशाली | मुजफ्फरपुर के आसपास (बिहार) |
| 6.मल्ल | कुशीनारा/पावा | देवरिया एवं गोरखपुर (उ. प्र.) |
| 7.चेदि | सुक्तिमती | बुंदेलखण्ड (उ. प्र.) |
| 8.वत्स | कौशाम्बी | इलाहाबाद (उ.प्र.) |
| 9.कुरु | इन्द्रप्रस्थ | मेरठ तथा हरियाणा के क्षेत्र |
| 10.पाचाल | अहिच्छत्र, काम्पिल्य | आधुनिक पश्चिम उत्तर प्रदेश |
| 11.सूरसेन | मथुरा | मथुरा (उ. प्र.) |
| 12.गांधार | तक्षशिला | पेशावर तथा कश्मीर |
| 13.कम्बोज | राजपुरा (हाटक) | उत्तर प्रदेश सीमा प्रान्त |
| 14.अस्मक | पोतन या पोटिल | गोदावरी क्षेत्र |
| 15.अवन्ति | उज्जयिनी/ महिष्मती | मालवा और मध्य प्रदेश |
| 16.मत्स्य | विराटनगर | जयपुर के आसपास |
➣ उत्तरी बिहार के वर्तमान भागलपुर तथा मुंगेर के जिले अंग महाजनपद के अंतर्गत थे। इसकी राजधानी चंपा थी। महाभारत तथा पुराणों में इसका प्राचीन नाम मालिनी प्राप्त होता है।
➣ बुद्ध के समय भारत के छः महानगरों में चंपा की गणना की जाती थी। महापरिनिर्वाणसूत्र में इन छः महानगरों के नाम प्राप्त होते हैं। ये हैं-चंपा, राजगृह, बनारस, साकेत, कौशाम्बी तथा श्रावस्ती।
➣ दीघनिकाय के अनुसार, चंपा नगर निर्माण की योजना वास्तुकार महागोविंद ने की थी।
➣ वैशाली के लिच्छवियों ने विश्व का पहला गणतंत्र स्थापित किया था। सुत्तनिपात में वैशाली को मगधम् पुरम कहा गया है। ईसा पूर्व छठी शताब्दी में विश्व की प्रथम गणतंत्रात्मक व्यवस्था वैशाली का लिच्छवि में थी।
➣ काशी का सबसे शक्तिशाली शासक ब्रह्मदत्त था। इसने कोशल पर विजय प्राप्त की थी। अंततोगत्वा कोशल के राजा कंस ने काशी को जीतकर अपने राज्य में शामिल कर लिया।
➣ प्रसेनजित के समय कोशल का काशी के अतिरिक्त कपिलवस्तु के शाक्य, केसपुत्त के कालाम, रामगाम के कोलिय, पावा और कुशीनारा के मल्ल, पिप्पलिवन के मोरिय आदि गणराज्यों पर भी अधिकार था।
➣ संयुक्त निकाय के अनुसार, प्रसेनजित पांच राजाओं के एक गुट का नेतृत्व करता था।
➣ रामायणकालीन कोशल राज्य की राजधानी अयोध्या थी। कोशल के प्रमुख नगर श्रावस्ती और अयोध्या थे।
➣ बुद्ध काल में कोशल के दो भाग हो गए थे। उत्तरी भाग की राजधानी श्रावस्ती तथा दक्षिणी भाग की राजधानी साकेत थी। उत्खननों के आधार पर ज्ञात हुआ है कि प्राचीन श्रावस्ती का नगर विन्यास अर्द्धचंद्राकार था।
➣ पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में मल्ल महाजनपद स्थित था। इसके दो भाग थे-एक की राजधानी पावा (पडरौना) तथा दूसरे की कुशीनारा (कसया) थी।
➣ छठीं शताब्दी ई.पू. आधुनिक बुंदेलखंड के पूर्वी तथा उसके समीपवर्ती भागों में चेदि महाजनपद स्थित था। इसकी राजधानी सोत्यिवती थी, जिसकी पहचान महाभारत में शुक्तिमती से की जाती है।
➣ महाभारत काल में चेदि का शासक शिशुपाल था, जिसका वध कृष्ण द्वारा किया गया था।
➣ प्रयागराज के आस-पास के क्षेत्रों में वत्स महाजनपद स्थित था। विष्णु पुराण होता है कि हस्तिनापुर के राजा निचक्षु ने हस्तिनापुर के गंगा के प्रवाह बह जाने के बाद कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाई थी।
➣ बुद्ध काल में यहां पौरव वंश का शासन था। यहां का शासक उदयन था। बौद्ध भिक्षु पिण्डोला ने उदयन को बौद्ध मत में दीक्षित किया था।
➣ उदयन-वासवदत्ता की दंतकथा उज्जैन से संबंधित है। इस कथा को महाकवि भास ने अपने नाटक स्वप्नवासवदत्तम् में वर्णित किया है।
➣ कुरु महाजनपद मेरठ, दिल्ली तथा थानेश्वर के भू-भागों में स्थित था। महाभारतकालीन हस्तिनापुर नगर इसी राज्य में स्थित था। बुद्ध के समय यहां का राजा कोरव्य था।
➣ पांचाल महाजनपद आधुनिक रुहेलखंड के बरेली, बदायूं तथा फर्रुखाबाद के जिलों से मिलकर बनता था। प्रारंभ में इसके दो भाग थे-उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र तथा दक्षिणी पांचाल की राजधानी कांपिल्य थी।
➣ पांचाल महाजनपद के अंतर्गत कान्यकुब्ज का प्रसिद्ध नगर स्थित था। पांचाल जनपद की सीमाएं हिमालय की तलहटी से लेकर दक्षिण में चंबल नदी तक तथा पूर्व में कोसल तथा पश्चिम में कुरु जनपद को स्पर्श करती थीं।
➣ पांचाल मूलतः एक राजतंत्र था, किंतु ऐसा प्रतीत होता है कि कौटिल्य के समय तक वह एक गणराज्य हो गया था।
➣ मत्स्य महाजनपद राजस्थान के जयपुर क्षेत्र में बसा हुआ था। इसके अंतर्गत वर्तमान अलवर एवं भरतपुर का एक भाग भी सम्मिलित था। इसकी राजधानी विराट की स्थापना विराट नामक राजा द्वारा की गई थी।
➣ शूरसेन महाजनपद आधुनिक ब्रजमंडल क्षेत्र में बसा हुआ था। इसकी राजधानी मथुरा थी। प्राचीन यूनानी लेखक इस राज्य को शूरसेनोई तथा इसकी राजधानी को मेथोरा कहते थे।
➣ अश्मक महाजनपद गोदावरी नदी (आंध्र प्रदेश) के तट पर स्थित था। महाजनपदों में केवल अश्मक ही दक्षिण भारत में स्थित था।
➣ अवंति महाजनपद पश्चिमी तथा मध्य मालवा के क्षेत्र में बसा था। इस महाजनपद के दो भाग थे-उत्तरी अवंति की राजधानी उज्जयिनी तथा दक्षिणी अवंति की राजधानी माहिष्मती थी।
➣ गौतम बुद्ध के समय यहां का राजा प्रद्योत था। बिंबिसार के समय में मगध के साथ प्रद्योत के संबंध मैत्रीपूर्ण थे।
➣ प्रद्योत को पाण्डुरोग से ग्रसित हो जाने पर बिंबिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को उसके उपचार के लिए भेजा। बौद्ध पुरोहित महाकच्चायन के प्रभाव से प्रद्योत बौद्ध बन गया।
➣ प्राचीन भारत के उत्तरी भाग में दो जनपद थे। ये जनपद थे-गांधार और कम्बोज। गांधार महाजनपद वर्तमान पाकिस्तान के पेशावर तथा रावलपिंडी जिलों में स्थित था।
➣ रामायण से ज्ञात होता है कि तक्षशिला नगर की स्थापना भरत के पुत्र तक्ष ने की थी। गांधार महाजनपद का दूसरा प्रमुख नगर पुष्कलावती था।
➣ कौटिल्य ने कम्बोजों को वार्ताशस्त्रोपजीवी संघ अर्थात पशुपालन, कृषि, वाणिज्य तथा शस्त्र द्वारा जीविका चलाने वाला कहा है। प्राचीन समय में कम्बोज अपने श्रेष्ठ घोड़ों के लिए विख्यात था।
➣ सोलह महाजनपदों में से चार-कोशल, मगध, वत्स तथा अवंति अत्यंत शक्तिशाली थे।
➣ सोलह महाजनपदों में से आठ वर्तमान उत्तर प्रदेश में स्थित थे। ये महाजनपद हैं-काशी, कोशल, वत्स, मल्ल, कुरु, पांचाल, शूरसेन तथा चेदि।
➣ बुद्ध काल में गंगाघाटी में कई गणराज्यों के अस्तित्व का प्रमाण मिलता है। ये गणराज्य थे-कपिलवस्तु के शाक्य, सुमसुमारगिरि के भग्ग, अलकप्प के बुलि, केसपुत्त के कालाम, रामगाम के कोलिय, कुशीनारा के मल्ल, पावा के मल्ल, पिप्पलिवन के मोरिय, वैशाली के लिच्छवी तथा मिथिला के विदेह।
महाजनपद एवं गणतंत्र व्यवस्था
- पाणिनी के अष्टाध्यायी में 22 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।
- वैशाली के लिच्छवियों ने विश्व का पहला गणतंत्र स्थापित किया था।
- महाजनपदों की गणतंत्रात्मक व्यवस्था में प्रतिनिधियों की सभा को संथागार कहा जाता था।
- बुद्ध के समय 10 गणतंत्र राज्य थे। इनमें से 8 वज्जि संघ के अंतर्गत थे, शेष 2 मल्ल संघ के अंतर्गत थे।
- महाजनपदों की शासन प्रणाली में ब्राह्मण तथा क्षत्रिय को कर से मुक्ति की सुविधा थी।
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