1. गौतम बुद्ध का महापरिनिब्बान जिस राज्य में हुआ था, वह है-
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(c)
महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण मल्ल गणराज्य की राजधानी कुशीनारा (वर्तमान कुशीनगर, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। 483 ई.पू. में 80 वर्ष की आयु में उन्होंने यहीं शरीर त्याग किया। इससे पहले वे पावा (जो भी मल्ल गणराज्य का ही एक नगर था) में चुंद लुहार के घर भोजन करने गए थे, जहाँ ‘सूकरमद्दव’ खाने से उन्हें रक्तातिसार हो गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध के अंतिम शिष्य का नाम सुभद्र था, जिन्हें उन्होंने कुशीनारा में ही दीक्षा दी थी। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अस्थि-अवशेषों (धातु) को आठ भागों में बाँटा गया और उन पर स्तूप बनाए गए।
2. निम्नलिखित में से किस राजवंश के अभिलेख से इस परंपरा का समर्थन होता है कि लुम्बिनी शाक्यमुनि बुद्ध का जन्म स्थान था?
U.P. U.D.A. L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(a)
मौर्य सम्राट अशोक के रुम्मिनदेई स्तंभ अभिलेख (लुम्बिनी, नेपाल में स्थित) से यह प्रमाण मिलता है कि शाक्यमुनि बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था। अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 20वें वर्ष इस स्थान की तीर्थयात्रा की और यहाँ एक स्तंभ स्थापित किया। अभिलेख में लुम्बिनी गाँव को धार्मिक कर (बलि) से मुक्त करने और भू-कर को घटाकर 1/8 करने का उल्लेख भी मिलता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह अभिलेख ब्राह्मी लिपि में प्राकृत भाषा में लिखा गया है। लुम्बिनी वर्तमान में नेपाल के रूपन्देही जिले में स्थित है और इसे यूनेस्को ने 1997 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है।
3. गौतम बुद्ध का जन्म कब हुआ था?
M.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(a)
गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. में नेपाल के लुम्बिनी वन में हुआ था। उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था। उनके पिता शुद्धोधन शाक्य गणराज्य के प्रधान (राजा) थे और माता महामाया (माया देवी) कोलिय वंश की राजकुमारी थीं। माता की मृत्यु जन्म के सातवें दिन हो गई थी, जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मौसी (विमाता) महाप्रजापति गौतमी ने किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सिद्धार्थ के जन्म पर ज्योतिषी आसित (कालदेवल) ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो महान चक्रवर्ती सम्राट बनेगा या महान संन्यासी। उन्होंने 16 वर्ष की आयु में यशोधरा से विवाह किया और उनके पुत्र का नाम राहुल था।
4. निम्नलिखित में से कौन एक अशोक का अभिलेख इस परंपरा की पुष्टि करता है कि गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था?
U.P.U.D.A/L.D.A. (Mains) 2010
उत्तर-(d)
अशोक का रुम्मिनदेई स्तंभ अभिलेख (वर्तमान नेपाल में स्थित) स्पष्ट रूप से पुष्टि करता है कि गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था। इसमें उल्लेख है कि अशोक ने स्वयं आकर उस जन्म-स्थल की पूजा की और एक प्रस्तर स्तंभ खड़ा करवाया। निगाली सागर स्तंभ अभिलेख में बुद्ध कनकमुनि के स्तूप को दोगुना करने का उल्लेख है, जबकि रामपुरवा स्तंभ पर कोई धार्मिक अभिलेख नहीं है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रुम्मिनदेई अभिलेख की खोज 1896 ई. में जर्मन पुरातत्त्वविद् डॉ. एंटोन फ्युरर ने की थी। यह अभिलेख अशोक के तीर्थयात्रा (धम्मयात्रा) का भी प्रमाण है, जो बौद्ध तीर्थ-स्थलों की यात्रा से संबंधित थी।
5. बुद्ध के जीवन की किस घटना को ‘महाभिनिष्क्रमण’ के रूप में जाना जाता है?
M.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(c)
29 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ ने सांसारिक जीवन त्याग दिया, जिसे बौद्ध साहित्य में ‘महाभिनिष्क्रमण’ (महान गृह-त्याग) कहा गया है। इसके पीछे चार दृश्यों (वृद्ध व्यक्ति, रोगी, शव और एक प्रसन्नचित्त संन्यासी) का बहुत बड़ा योगदान था। गृहत्याग की रात उन्होंने अपनी पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल को सोता हुआ छोड़कर अपने सारथी चन्ना के साथ कंथक नामक घोड़े पर सवार होकर कपिलवस्तु छोड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गृहत्याग के बाद सिद्धार्थ ने सर्वप्रथम वैशाली में आलार कालाम के आश्रम में और फिर राजगृह में उद्दक रामपुत्त के पास शिक्षा ग्रहण की। बोधगया में बोधि वृक्ष (पीपल) के नीचे 6 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान (सम्बोधि) की प्राप्ति हुई।
6. बुद्ध का जन्म हुआ था-
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
M.P.P.C.S. (Pre) 1992
M.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(b)
गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था, जो कपिलवस्तु के निकट स्थित एक वन-उद्यान था। उनकी माता माया देवी अपने मायके देवदह जाते समय लुम्बिनी में रुकी थीं, जहाँ उन्होंने एक शाल वृक्ष की डाल पकड़ते हुए सिद्धार्थ को जन्म दिया। लुम्बिनी वर्तमान नेपाल के रूपन्देही जिले में स्थित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बौद्ध परंपरा के अनुसार बुद्ध का जन्म, ज्ञान-प्राप्ति (सम्बोधि) और महापरिनिर्वाण — तीनों घटनाएँ वैशाख पूर्णिमा के दिन हुई थीं, इसीलिए वैशाख पूर्णिमा को ‘बुद्ध पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है।
7. गौतम बुद्ध की मां किस वंश से सम्बंधित थी?
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
गौतम बुद्ध की माता माया देवी कोलिय गणराज्य के शासक अंजन की पुत्री थीं, अतः वे कोलिय वंश से संबंधित थीं। कोलिय गणराज्य की राजधानी देवदह थी, जो शाक्य गणराज्य के निकट स्थित थी। उल्लेखनीय है कि शाक्य और कोलिय दोनों गणराज्य रोहिणी नदी के किनारे बसे थे और इन दोनों में वैवाहिक संबंध प्रचलित थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध की मौसी एवं विमाता महाप्रजापति गौतमी भी कोलिय वंश की ही थीं। उन्होंने बाद में बौद्ध धर्म की दीक्षा ली और वे बौद्ध संघ में प्रवेश पाने वाली प्रथम महिला (भिक्षुणी) बनीं।
8. निम्न में से कौन-सा नाम बुद्ध का दूसरा नाम है?
Chhattisgarh U.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(c)
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर (c) मिहिर जारी किया है, हालाँकि यह विवादास्पद है। वस्तुतः गौतम बुद्ध के प्रसिद्ध नाम हैं — सिद्धार्थ (जन्म नाम), गौतम (गोत्र नाम), शाक्यमुनि (शाक्य कुल के मुनि), तथागत (जो सत्य को प्राप्त कर चुके हैं), और बुद्ध (ज्ञान प्राप्त करने वाले)। ‘प्रच्छन्न बौद्ध’ (छिपा हुआ बौद्ध) आदि शंकराचार्य की उपाधि थी, और पार्थ तथा गुडाकेश अर्जुन के नाम हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘तथागत’ शब्द का अर्थ है — ‘जो इसी मार्ग से आया और इसी मार्ग से गया’। बुद्ध ने स्वयं अपने लिए ‘तथागत’ संबोधन का सर्वाधिक प्रयोग किया है। ‘सम्मासम्बुद्ध’ भी उनका एक विशेष नाम है, जिसका अर्थ है — स्वयं के प्रयास से सम्यक् ज्ञान प्राप्त करने वाले।
9. निम्नलिखित में से किस राजा के एक अभिलेख से सूचना मिलती है कि शाक्यमुनि बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
U.P.P.C.S. (Mains) 2007
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
उत्तर-(a)
मौर्य सम्राट अशोक के रुम्मिनदेई स्तंभ अभिलेख से यह महत्वपूर्ण सूचना मिलती है कि शाक्यमुनि बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था। अशोक ने यहाँ एक अश्वशीर्ष (घोड़े के मस्तक वाला) स्तंभ स्थापित करवाया तथा लुम्बिनी को ‘लुम्बिनीग्राम’ नाम देते हुए इसे करमुक्त किया। कनिष्क, हर्ष और धर्मपाल के अभिलेखों में बुद्ध के जन्मस्थान लुम्बिनी का उल्लेख नहीं मिलता।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अशोक की इस धम्मयात्रा का विवरण उनके 8वें शिला अभिलेख में भी मिलता है, जिसमें बताया गया है कि उन्होंने बोधगया (जहाँ बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ) की भी यात्रा की थी। चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्रा-विवरणियों में लुम्बिनी और अशोक स्तंभ का उल्लेख किया है।
10. महात्मा बुद्ध का ‘महापरिनिर्वाण’ कहां हुआ?
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
53t to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
53t to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(c)
महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण 483 ई.पू. में कुशीनारा (वर्तमान कुशीनगर, उत्तर प्रदेश) में हुआ था, जो मल्ल गणराज्य की राजधानी थी। अंतिम समय में वे दो शाल वृक्षों के बीच उत्तर की ओर सिर करके लेट गए थे। उनके अंतिम शब्द थे — “वय धम्मा संखारा, अप्पमादेन सम्पादेथ” अर्थात् “सभी संयोगज वस्तुएं क्षणभंगुर हैं, अप्रमाद से साधना करो।”
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बौद्ध धर्म में चार पवित्र तीर्थ स्थल हैं — लुम्बिनी (जन्म), बोधगया (ज्ञान प्राप्ति), सारनाथ (प्रथम उपदेश/धम्मचक्कपवत्तन) और कुशीनगर (महापरिनिर्वाण)। कुशीनगर में 1876 ई. में ए. कार्लाइल ने पुरातात्विक उत्खनन द्वारा महापरिनिर्वाण मंदिर की खोज की थी।
11. महात्मा बुद्ध ने अपना पहला ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ किस स्थान पर दिया था ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
M.P.P.C.S. (Pre) 1991 1999
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
M.P.P.C.S. (Pre) 1991 1999
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध वाराणसी के निकट ऋषिपत्तन (आधुनिक सारनाथ) पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपने पाँच पूर्व-साथी ब्राह्मण तपस्वियों को पहला उपदेश दिया। इस ऐतिहासिक प्रथम उपदेश को बौद्ध परंपरा में ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ कहा जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस उपदेश में बुद्ध ने ‘मध्यम मार्ग’ और ‘अष्टांगिक मार्ग’ की शिक्षा दी, जो बौद्ध दर्शन का आधार है। सारनाथ में अशोक ने एक विशाल स्तूप और स्तंभ का निर्माण कराया था, जिसके शीर्ष पर बना ‘सिंह-चतुर्मुख’ आज भारत का राष्ट्रीय चिह्न है।
12. निम्नलिखित में से कौन-सा एक बौद्ध मत में निर्माण की अवधारणा की सर्वश्रेष्ठ व्याख्या करता है?
I.A.S. (Pre) 2013
उत्तर-(a)
बौद्ध दर्शन में ‘निर्वाण’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है — ‘बुझ जाना’ अथवा ‘शांत हो जाना’। बुद्ध के अनुसार समस्त दुःखों का मूल कारण तृष्णा (इच्छा) है। जब तृष्णा, द्वेष और अज्ञान रूपी तीन विकार पूरी तरह शांत हो जाते हैं, तब निर्वाण की प्राप्ति होती है — ठीक उसी प्रकार जैसे ईंधन न मिलने पर अग्नि स्वयं बुझ जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बौद्ध ग्रंथों में दो प्रकार के निर्वाण का उल्लेख है — ‘सोपादिशेष निर्वाण’ (जीवनकाल में प्राप्त) और ‘परिनिर्वाण’ (मृत्यु के उपरांत पूर्ण मुक्ति)। बुद्ध को 35 वर्ष की आयु में बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के समय सोपादिशेष निर्वाण और 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर में परिनिर्वाण प्राप्त हुआ।
13. आलार कालाम कौन थे?
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(d)
गृह-त्याग (महाभिनिष्क्रमण) के पश्चात सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) ज्ञान की खोज में भटकते हुए आलार कालाम के आश्रम पहुँचे और उनसे शिक्षा ग्रहण की। आलार कालाम सांख्य दर्शन के प्रसिद्ध आचार्य थे। उनसे शिक्षा प्राप्त कर सिद्धार्थ ने ‘आकिञ्चन्यायतन समाधि’ की अवस्था प्राप्त कर ली, परंतु उन्हें इससे पूर्ण संतोष नहीं मिला।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आलार कालाम के बाद सिद्धार्थ ने एक अन्य गुरु ‘उद्दक रामपुत्त’ से भी शिक्षा ली, किंतु वहाँ भी उन्हें अपेक्षित ज्ञान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने स्वतंत्र साधना का मार्ग चुना और अंततः बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया।
14. गौतम बुद्ध ने किस स्थान पर निर्वाण प्राप्त किया ?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011
M.P.P.C.S. (Pre) 1997
M.P.P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(*)
बौद्ध धर्म में ‘निर्वाण’ का अर्थ है — समस्त सांसारिक दुःखों और तृष्णाओं से पूर्ण मुक्ति। गौतम बुद्ध को यह निर्वाण (ज्ञान-प्राप्ति) बिहार के बोधगया में वर्तमान महाबोधि वृक्ष के नीचे प्राप्त हुई थी, न कि किसी अन्य स्थान पर — इसीलिए इस प्रश्न का उत्तर (*) अर्थात् ‘कोई विकल्प नहीं’ है। प्रश्न में दिया गया विकल्प (a) ‘कुशीनारा’ बुद्ध के महापरिनिर्वाण (मृत्यु) का स्थान है, निर्वाण (ज्ञान-प्राप्ति) का नहीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बोधगया का महाबोधि मंदिर परिसर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है (2002 से)। बुद्ध को यहाँ लगभग 528 ई.पू. में वैशाख पूर्णिमा की रात ज्ञान प्राप्त हुआ था।
15. महापरिनिर्वाण मंदिर अवस्थित है-
U.P. Lower Sub. (Mains) 2015
उत्तर-(a)
महापरिनिर्वाण मंदिर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में स्थित है। यहीं पर 483 ई.पू. में 80 वर्ष की आयु में गौतम बुद्ध को महापरिनिर्वाण (मृत्यु) प्राप्त हुआ था। मंदिर में लेटी हुई बुद्ध की विशाल मूर्ति 1876 ई. में ब्रिटिश पुरातत्वविद् ए. कनिंघम के निर्देशन में हुए उत्खनन में प्राप्त हुई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मूर्ति चुनार के बलुआ पत्थर से निर्मित है और इसकी लंबाई लगभग 6.1 मीटर है। कुशीनगर बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों — लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर — में से एक है।
16. महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण किसके गणतंत्र में हुआ था ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(a)
महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण कुशीनगर (प्राचीन कुशीनारा) में हुआ था, जो उस समय ‘मल्ल गणराज्य’ (नल्लों के गणतंत्र) का भाग था। बुद्ध की मृत्यु के पश्चात मल्लों ने उनके पार्थिव शरीर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद उनकी अस्थि-अवशेषों (रेलिक्स) को आठ भागों में विभाजित किया गया और विभिन्न राज्यों में उनके ऊपर स्तूपों का निर्माण कराया गया, जिन्हें ‘धातु-स्तूप’ कहा जाता है। मल्ल गणराज्य के दो प्रमुख केंद्र कुशीनारा और पावा थे।
17. गौतम बुद्ध द्वारा अपने धर्म में दीक्षित किया जाने वाला अंतिम व्यक्ति निम्नलिखित में से कौन था ?
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
अपने जीवन के अंतिम दिनों में बुद्ध पावा नगर में अपने शिष्य चुंद के घर रुके, जहाँ उन्होंने ‘सूकरमाद्दव’ नामक भोजन ग्रहण किया। इससे वे गंभीर रूप से अस्वस्थ हो गए। तत्पश्चात वे कुशीनगर पहुँचे और यहाँ सुभद्द नामक परिव्राजक को अपना अंतिम उपदेश देकर उसे बौद्ध धर्म में दीक्षित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सुभद्द एक वृद्ध ब्राह्मण परिव्राजक थे, जो बुद्ध से मिलना चाहते थे। प्रारंभ में आनंद ने उन्हें रोका, किंतु बुद्ध ने स्वयं उन्हें बुलाया। सुभद्द को ‘बुद्ध का अंतिम शिष्य’ (पच्छिमसावक) कहा जाता है।
19. बुद्ध ने अपने जीवन की अंतिम वर्षा ऋतु कहां विताई थी ?
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
U.P.P.C.S. (Mains) 2015
उत्तर-(c)
पालि ग्रंथ ‘महापरिनिब्बान सुत्त’ के अनुसार बुद्ध ने अपने जीवन की अंतिम वर्षा ऋतु (वर्षावास) वैशाली में बिताई थी। वैशाली उस समय लिच्छवि गणराज्य की राजधानी थी। वहाँ उन्होंने अपने प्रिय शिष्य आनंद को अपने शीघ्र परिनिर्वाण का संकेत दिया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वैशाली का ऐतिहासिक महत्त्व इस दृष्टि से भी है कि यहाँ बुद्ध की मृत्यु के लगभग 100 वर्ष पश्चात द्वितीय बौद्ध संगीति (सभा) का आयोजन हुआ था। इसके अतिरिक्त, वैशाली में बुद्ध ने महिलाओं को पहली बार बौद्ध संघ में प्रवेश की अनुमति दी और अपनी मौसी महाप्रजापति गौतमी को भिक्षुणी के रूप में दीक्षित किया।
20. निम्नलिखित राज्यों में से किनका संबंध बुद्ध के जीवन से था?
1. अवंति
2. गांधार
3. कोसल
4.मगध
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
1. अवंति
2. गांधार
3. कोसल
4.मगध
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
I.A.S. (Pre) 2014
I.A.S. (Pre) 2015
I.A.S. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
दिए गए महाजनपदों में से केवल कोसल और मगध का सीधा संबंध गौतम बुद्ध के जीवन से था। बुद्ध ने मगध में राजगृह और नालंदा क्षेत्रों में तथा कोसल में श्रावस्ती और साकेत में धर्म-प्रचार किया था। कोसल-नरेश प्रसेनजित और मगध-नरेश बिम्बिसार दोनों बुद्ध के प्रमुख अनुयायी थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मगध-नरेश बिम्बिसार ने बुद्ध को राजगृह के निकट ‘वेणुवन’ (बाँस का उपवन) दान में दिया था, जो बौद्ध संघ का पहला स्थायी विहार बना। अवंति और गांधार में बौद्ध धर्म का प्रसार बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद उनके शिष्यों द्वारा हुआ।
21. ‘सप्तपर्णी गुफा’ स्थित है-
U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014
उत्तर-(c)
सप्तपर्णी गुफा बिहार के राजगृह (वर्तमान राजगीर) में स्थित है। यहीं बुद्ध की मृत्यु (483 ई.पू.) के तुरंत बाद प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था, जिसमें बुद्ध की शिक्षाओं को सुत्तपिटक और विनयपिटक में संकलित किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजगृह मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी थी और पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण इसे ‘पंचपहाड़ी नगर’ भी कहा जाता था। सप्तपर्णी गुफा का नाम ‘सप्तपर्ण’ (सात पत्तों वाले) वृक्षों की अधिकता के कारण पड़ा।
22. बुद्ध कौशाम्बी किसके राज्य काल में आए थे?
U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
महात्मा बुद्ध वत्स महाजनपद के राजा उदयन के शासनकाल में कौशाम्बी आए थे। उदयन ने बौद्ध धर्म अपनाने के बाद घोषिताराम विहार संघ को दान में दिया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कौशाम्बी (वर्तमान उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के निकट) वत्स महाजनपद की राजधानी थी और यमुना नदी के तट पर बसी थी। यह नगर व्यापार का प्रमुख केंद्र था तथा बुद्धकाल में 16 महाजनपदों में से एक वत्स की राजधानी के रूप में विशेष महत्त्व रखता था।
23. बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश दिए थे-
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
गौतम बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश कोसल राज्य की राजधानी श्रावस्ती में दिए। यहाँ उनके सबसे अधिक शिष्य बने और वे जेतवन विहार में दीर्घकाल तक रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जेतवन विहार की स्थापना कोसल के धनी व्यापारी अनाथपिंडक (सुदत्त) ने राजकुमार जेत से भूमि खरीदकर की थी। कहा जाता है कि उन्होंने उस भूमि को स्वर्णमुद्राओं से ढककर खरीदा था। बुद्ध ने अपने जीवन के 25 वर्षावास (वर्षाकालीन प्रवास) में से अधिकांश श्रावस्ती में ही बिताए।
24. बुद्ध ने अपना पहला उपदेश कहां दिया था ?
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के पश्चात अपना प्रथम उपदेश सारनाथ (वाराणसी के निकट) के मृगदाव (हिरण उद्यान) में अपने पाँच पूर्व साथी साधकों को दिया था। इस घटना को ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ कहा जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जिन पाँच शिष्यों को यह प्रथम उपदेश मिला, वे थे — कौण्डिन्य, वप्प, भद्दिय, महानाम और अस्सजि। इन्हें ‘पंचवर्गीय भिक्षु’ कहते हैं। इन्हीं पाँचों के साथ बौद्ध संघ की स्थापना हुई, जो बौद्ध धर्म के ‘त्रिरत्न’ (बुद्ध, धम्म, संघ) का आधार बना।
25. सारनाथ में अपना प्रथम वचन किसने दिया?
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(c)
सारनाथ में प्रथम उपदेश महात्मा बुद्ध ने दिया था, जिसे ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ कहते हैं। यह स्थान वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सारनाथ को ‘ऋषिपत्तन’ और ‘मृगदाव’ के नाम से भी जाना जाता था। यहाँ सम्राट अशोक ने बाद में एक स्तूप और प्रसिद्ध अशोक स्तंभ का निर्माण करवाया, जिसके शीर्ष पर चार सिंहों की आकृति है — यही ‘सिंह-चतुर्मुख’ आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
26. गौतम बुद्ध अपना प्रथम उपदेश कहां दिए थे?
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था। बौद्ध साहित्य में इस उपदेश को ‘धम्मचक्कपवत्तन सुत्त’ के नाम से जाना जाता है, जिसमें बुद्ध ने चार आर्य सत्यों और अष्टांगिक मार्ग का विस्तार से वर्णन किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध के चार आर्य सत्य हैं — (1) दुख, (2) दुख का कारण (तृष्णा), (3) दुख का निरोध (निर्वाण), और (4) दुख निरोध का मार्ग (अष्टांगिक मार्ग)। अष्टांगिक मार्ग को ‘मध्यम प्रतिपदा’ भी कहते हैं क्योंकि यह अति-भोग और अति-कठोर तपस्या दोनों के बीच का मार्ग है।
27. ग्रंथों में उल्लिखित ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ है-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ का शाब्दिक अर्थ है — ‘धर्म के चक्र को गतिमान करना’। यह सारनाथ में बुद्ध द्वारा पाँच शिष्यों को दिए गए प्रथम उपदेश को संदर्भित करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ की तिथि को बौद्ध धर्म में ‘आषाढ़ पूर्णिमा’ (गुरु पूर्णिमा) के रूप में मनाया जाता है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज में अंकित ‘अशोक चक्र’ वास्तव में धर्मचक्र का ही प्रतीक है, जो इसी धर्मचक्रप्रवर्तन की स्मृति में सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है।
28. ‘धर्मचक्रप्रवर्तन किया गया था-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
धर्मचक्रप्रवर्तन सारनाथ में हुआ था। यह स्थल बुद्ध के जीवन की चार प्रमुख घटनाओं में से एक का साक्षी है — जन्म (लुंबिनी), ज्ञान प्राप्ति (बोधगया), प्रथम उपदेश (सारनाथ) और महापरिनिर्वाण (कुशीनगर)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इन चार पवित्र स्थलों को बौद्ध धर्म में ‘चतुर्महास्थान’ कहा जाता है। सारनाथ में स्थित ‘धमेख स्तूप’ उसी स्थान पर बना है जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था; इस स्तूप का निर्माण मूलतः सम्राट अशोक ने करवाया था।
29. बुद्ध की मृत्यु के पश्चात प्रथम बौद्ध संगीति की अध्यक्षता की गई-
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(a)
प्रथम बौद्ध संगीति लगभग 483 ई.पू. में राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता महाकस्सप ने की। इसमें बुद्ध के प्रमुख शिष्य आनंद (धम्म/सुत्त के प्रमाण) और उपालि (विनय के प्रमाण) उपस्थित थे। तत्कालीन मगध सम्राट अजातशत्रु ने इसे संरक्षण प्रदान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कुल चार प्रमुख बौद्ध संगीतियाँ हुईं — प्रथम (राजगृह, अजातशत्रु के काल में), द्वितीय (वैशाली, कालाशोक के काल में), तृतीय (पाटलिपुत्र, अशोक के काल में), और चतुर्थ (कुंडलवन, कश्मीर, कनिष्क के काल में)। तृतीय संगीति में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में अभिधम्मपिटक को भी संकलित किया गया।
30. प्रथम बौद्ध परिषद का संचालन निम्नलिखित में से किस एक ने किया ?
U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
उत्तर-(b)
प्रथम बौद्ध परिषद (संगीति) का संचालन महाकस्सप ने किया था। महाकस्सप बुद्ध के सबसे वरिष्ठ और प्रमुख शिष्यों में से एक थे और बुद्ध के महापरिनिर्वाण के पश्चात बौद्ध संघ के प्रमुख नेता बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महाकस्सप को बौद्ध परंपरा में ‘धुतगुण’ (कठोर तपस्या) के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। ज़ेन बौद्ध परंपरा में महाकस्सप को ‘पुष्पगाथा’ (Flower Sermon) की कथा के माध्यम से विशेष महत्त्व दिया जाता है — कहा जाता है कि बुद्ध ने एक बार बिना कुछ बोले केवल एक फूल उठाया और महाकस्सप ही एकमात्र शिष्य थे जो मुस्कुराए, जिससे बुद्ध ने उन्हें मौन ज्ञान (अव्यक्त धर्म) का उत्तराधिकारी घोषित किया।
31. द्वितीय बौद्ध समिति का आयोजन कहां हुआ था ?
U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2014
उत्तर-(b)
द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन बुद्ध की मृत्यु के लगभग 100 वर्ष पश्चात् कालाशोक के शासनकाल में वैशाली में हुआ था। इस संगीति का मुख्य कारण बौद्ध भिक्षुओं के बीच अनुशासन (विनय) संबंधी 10 विवादास्पद बिंदुओं पर उत्पन्न मतभेद था। इस संगीति की अध्यक्षता सब्बकामी ने की थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी द्वितीय संगीति के परिणामस्वरूप बौद्ध धर्म पहली बार दो शाखाओं — स्थविरवाद (Theravada) और महासांघिक — में विभाजित हुआ, जो आगे चलकर हीनयान और महायान संप्रदायों के विकास का आधार बनीं। वैशाली उस काल में लिच्छवी गणराज्य की राजधानी थी और बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र था।
32. चतुर्थ बौद्ध संगीति (परिषद) हुई
U.P.R.O./ A.R.O. (Mains) 2013
उत्तर-(a)
चतुर्थ बौद्ध संगीति कुषाण वंश के महान सम्राट कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर के कुंडलवन में आयोजित हुई थी। इसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की और उपाध्यक्ष के रूप में प्रसिद्ध कवि एवं दार्शनिक अश्वघोष ने भूमिका निभाई। इस संगीति में बौद्ध ग्रंथों के जटिल अंशों पर विचार-विमर्श कर उन्हें ‘विभाषाशास्त्र’ नामक टीकाओं में संकलित किया गया। इसी संगीति के बाद बौद्ध धर्म औपचारिक रूप से हीनयान और महायान — दो स्पष्ट संप्रदायों में बँट गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह एकमात्र बौद्ध संगीति थी जो संस्कृत भाषा में संपन्न हुई, जबकि पूर्ववर्ती तीनों संगीतियाँ पालि भाषा में आयोजित की गई थीं। कनिष्क ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए मध्य एशिया तक स्तूपों और विहारों का निर्माण कराया था।
33. निम्नलिखित चार स्थानों में हुई बौद्ध संगीतियों का सही कालक्रम नीचे दिए हुए कूट से ज्ञात करें-
1. वैशाली
2. राजगृह
3. कुंडलवन
4. पाटलिपुत्र
कूट :
1. वैशाली
2. राजगृह
3. कुंडलवन
4. पाटलिपुत्र
कूट :
U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
चारों बौद्ध संगीतियों का सही कालक्रम इस प्रकार है — प्रथम संगीति: राजगृह (अजातशत्रु के काल में, बुद्ध की मृत्यु के तत्काल बाद); द्वितीय संगीति: वैशाली (कालाशोक के काल में, लगभग 100 वर्ष बाद); तृतीय संगीति: पाटलिपुत्र (अशोक के काल में, मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में); चतुर्थ संगीति: कुंडलवन/कश्मीर (कनिष्क के काल में, वसुमित्र की अध्यक्षता में)। अतः सही क्रम है — 2, 1, 4, 3।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तृतीय बौद्ध संगीति (पाटलिपुत्र) में मोग्गलिपुत्त तिस्स ने ‘कथावत्थु’ नामक ग्रंथ की रचना की, जो अभिधम्म पिटक का महत्त्वपूर्ण भाग है। इसी संगीति में अशोक ने विभिन्न देशों में धर्म प्रचार के लिए दूत मंडल भेजने का निर्णय लिया, जिसके तहत उनके पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा श्रीलंका गए।
34. इनमें से किस शासक ने चतुर्थ बौद्ध संगीति कश्मीर में आयोजित की ?
66th B.P.S.C. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
कश्मीर में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति कुषाण सम्राट कनिष्क के संरक्षण में हुई थी। कनिष्क ने इस संगीति के लिए कुंडलवन (कश्मीर) में एक विशेष विहार का निर्माण कराया था। वसुमित्र इसके अध्यक्ष तथा अश्वघोष उपाध्यक्ष थे। इस संगीति में महासांघिकों का प्रभाव प्रमुख था और बौद्ध धर्म का विभाजन हीनयान व महायान में हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कनिष्क को ‘बौद्ध धर्म का द्वितीय अशोक’ भी कहा जाता है। उन्होंने अफगानिस्तान के पेशावर (पुरुषपुर) में एक विशाल स्तूप का निर्माण करवाया था, जो उस काल की सबसे ऊँची संरचनाओं में से एक था।
35. भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद पहली बौद्ध संगीति हुई थी-
B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(a)
भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण (483 ई.पू., कुशीनगर में) के तत्काल बाद प्रथम बौद्ध संगीति मगध नरेश अजातशत्रु के शासनकाल में राजगृह (वर्तमान राजगीर, बिहार) की सप्तपर्णि गुफा में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता महाकस्सप (महाकाश्यप) ने की। इसमें बुद्ध के उपदेशों को दो भागों — धम्म (सुत्तपिटक) और विनय (विनयपिटक) — में संकलित किया गया। आनंद ने धम्म और उपालि ने विनय का वाचन किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्रथम बौद्ध संगीति में लगभग 500 अरहतों (बौद्ध भिक्षुओं) ने भाग लिया था। इस संगीति में अभिधम्म पिटक को शामिल नहीं किया गया था; इसे बाद की संगीतियों में जोड़ा गया। यह संगीति वर्षाकाल के दौरान तीन महीनों तक चली थी।
36. निम्नलिखित पर विचार कीजिए-
I.A.S. (Pre) 2019
उत्तर-(d)
महायान बौद्ध मत की तीनों उल्लिखित विशेषताएँ सत्य हैं। महायान में बुद्ध को एक दैवीय और लोकोत्तर सत्ता माना गया है, जो अनेक रूपों और अवतारों में प्रकट होते हैं — यह हिंदू धर्म के प्रभाव का परिणाम था। ‘बोधिसत्व’ की अवधारणा महायान की केंद्रीय विशेषता है — वे वे प्राणी हैं जो स्वयं निर्वाण की कगार पर होते हुए भी समस्त जीवों की मुक्ति के लिए संसार में बने रहते हैं। मूर्तिपूजा और अनुष्ठान भी महायान की प्रमुख पद्धति बन गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हीनयान (थेरवाद) में बुद्ध को मात्र एक महापुरुष (मनुष्य) माना जाता है, जबकि महायान में वे ईश्वर तुल्य हो जाते हैं। महायान बौद्ध धर्म तिब्बत, चीन, जापान, कोरिया और वियतनाम में प्रचलित है, जबकि हीनयान (थेरवाद) श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड में प्रमुख है।
37. किस शासक के काल में चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन कश्मीर में हुआ था?
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 2010
LA.S. (Pre) 2001
LA.S. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर के कुंडलवन में आयोजित हुई थी। कनिष्क कुषाण वंश के सबसे शक्तिशाली सम्राट थे जिनका साम्राज्य मध्य एशिया से उत्तर भारत तक विस्तृत था। वसुमित्र इसके अध्यक्ष थे और अश्वघोष उपाध्यक्ष। इस संगीति में बौद्ध धर्म हीनयान और महायान संप्रदायों में विभक्त हुआ तथा ‘विभाषाशास्त्र’ नामक टीकाएँ संकलित की गईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अश्वघोष — जो इस संगीति के उपाध्यक्ष थे — संस्कृत साहित्य के महान कवि भी थे। उन्होंने ‘बुद्धचरित’ (बुद्ध की जीवनी) और ‘सौंदरानंद’ जैसे महाकाव्यों की रचना की। उन्हें अक्सर ‘भारत का प्रथम संस्कृत नाटककार’ भी कहा जाता है।
38. बौद्ध धर्म की महायान शाखा औपचारिक रूप से किसके शासनकाल में प्रकट हुई ?
I.A.S. (Pre) 1993
उत्तर-(c)
यद्यपि प्रश्न का उत्तर विकल्प (c) अर्थात् ‘धर्मपाल’ दिया गया है, तथापि ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार महायान बौद्ध मत कनिष्क (विकल्प d) के शासनकाल में चतुर्थ बौद्ध संगीति (कुंडलवन, कश्मीर) के दौरान औपचारिक रूप से एक पृथक संप्रदाय के रूप में उभरा। इस संगीति में महासांघिकों के प्रभाव और बुद्ध की दैवीय व्याख्या ने महायान को स्पष्ट स्वरूप दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महायान का सबसे प्रभावशाली दार्शनिक नागार्जुन था, जिन्होंने ‘शून्यवाद’ (Madhyamaka) का प्रतिपादन किया और ‘प्रज्ञापारमिता’ ग्रंथों की रचना की। नागार्जुन को ‘महायान का पिता’ भी कहा जाता है। नागार्जुन के विचार बाद में तिब्बती और चीनी बौद्ध धर्म की आधारशिला बने।
39. कश्मीर में कनिष्क के शासनकाल में जो बौद्ध संगीति आयोजित हुई थी, उसकी अध्यक्षता निम्नलिखित में से किसने की थी ?
I.A.S. (Pre) 2001
उत्तर-(d)
कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर के कुंडलवन में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति की अध्यक्षता वसुमित्र ने की थी। वसुमित्र एक प्रख्यात बौद्ध विद्वान थे और सर्वास्तिवाद संप्रदाय के प्रमुख आचार्य थे। इस संगीति में बौद्ध ग्रंथों की व्याख्या ‘विभाषाशास्त्र’ में की गई। प्रसिद्ध दार्शनिक कवि अश्वघोष इसके उपाध्यक्ष थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: वसुमित्र ने ‘प्रकरणपाद’ नामक महत्त्वपूर्ण अभिधर्म ग्रंथ की रचना भी की थी। कनिष्क द्वारा आयोजित यह संगीति इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि इसमें विभिन्न बौद्ध संप्रदायों के 500 से अधिक विद्वान भिक्षुओं ने भाग लिया था और इसके निष्कर्षों को ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण करके पाषाण संदूक में सुरक्षित किया गया था।
40. कनिष्क के शासनकाल में बौद्ध सभा किस नगर में आयोजित की गई थी ?
47th B.P.S.C. (Pre) 2005
उत्तर-(c)
कनिष्क के शासनकाल में बौद्ध सभा (चतुर्थ बौद्ध संगीति) कश्मीर के कुंडलवन नामक स्थान पर आयोजित की गई थी। कनिष्क का शासनकाल लगभग 78 ई. से प्रारंभ माना जाता है और उनके नाम पर शक संवत् की शुरुआत हुई। इस संगीति के बाद बौद्ध धर्म हीनयान और महायान में विभाजित हो गया, जिसमें महायान का प्रचार-प्रसार उत्तर और मध्य एशिया की ओर हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कश्मीर प्राचीन काल से बौद्ध धर्म का महत्त्वपूर्ण केंद्र रहा है। चीनी यात्री ह्वेनसांग (7वीं सदी ई.) ने कश्मीर की अपनी यात्रा के दौरान वहाँ सैकड़ों बौद्ध विहारों और मठों का उल्लेख किया है। कनिष्क ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए मध्य एशिया, चीन और तिब्बत तक धर्म दूत भेजे थे।
41. बुद्ध के जीवन की चार महत्वपूर्ण घटनाओं और उनसे संबद्ध चार स्थानों का नीचे उल्लेख है, यह दो स्तंभों (I) एवं (II) में अंकित हैं, आपको इनका सुमेल करना है-
स्तम्भ-I स्तंभ-II
(1) जन्म – (i) सारनाथ
(2) ज्ञान प्राप्ति – (ii) बोधगया
(3) प्रथम प्रवचन – (iii) लुम्बिनी
(4) निघन – (iv) कुशीनगर
सही मेल है-
स्तम्भ-I स्तंभ-II
(1) जन्म – (i) सारनाथ
(2) ज्ञान प्राप्ति – (ii) बोधगया
(3) प्रथम प्रवचन – (iii) लुम्बिनी
(4) निघन – (iv) कुशीनगर
सही मेल है-
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(c)
महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. में नेपाल की तराई में स्थित लुम्बिनी (कपिलवस्तु के समीप) में हुआ था। बोधगया में निरंजना नदी के किनारे एक पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष के नीचे वैशाख पूर्णिमा की रात उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ, इसीलिए वह वृक्ष ‘बोधिवृक्ष’ कहलाया। सारनाथ (ऋषिपत्तन/मृगदाव) में उन्होंने अपने पाँच साथियों को प्रथम उपदेश दिया, जिसे ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ कहते हैं। कुशीनारा (वर्तमान कुशीनगर, उत्तर प्रदेश) में 483 ई.पू. में उनका निधन हुआ, जिसे बौद्ध परंपरा में ‘महापरिनिर्वाण’ कहा गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध के जीवन की इन चार प्रमुख घटनाओं से जुड़े स्थल सामूहिक रूप से ‘चतुर्महास्थान’ कहलाते हैं और ये प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल हैं। लुम्बिनी में सम्राट अशोक ने एक स्तंभ स्थापित किया था जो आज भी विद्यमान है और बुद्ध के जन्मस्थान का ऐतिहासिक प्रमाण देता है।
42. बोधगया में महाबोधि मंदिर बनाया गया, जहां-
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(b)
बोधगया (बिहार) में गौतम बुद्ध को 35 वर्ष की आयु में, 6 वर्षों की कठोर साधना के बाद, वैशाख पूर्णिमा की रात एक पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान (बोधि) प्राप्त हुआ था। इसी स्थान पर महाबोधि मंदिर का निर्माण हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महाबोधि मंदिर परिसर को यूनेस्को ने 2002 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। मूल मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ई.पू. में करवाया था, और वर्तमान मंदिर का निर्माण गुप्तकाल (5वीं-6वीं शताब्दी ई.) में हुआ माना जाता है।
43. प्रथम बौद्ध समिति का आयोजन हुआ था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(b)
प्रथम बौद्ध संगीति (सभा) का आयोजन 483 ई.पू. में मगध नरेश अजातशत्रु के शासनकाल में राजगृह (राजगीर) की सप्तपर्णि गुफा में हुई थी। इस सभा की अध्यक्षता महाकश्यप ने की थी। इसमें बुद्ध के उपदेशों को ‘विनयपिटक’ और ‘सुत्तपिटक’ के रूप में संकलित किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस संगीति में आनंद ने बुद्ध के उपदेशों (सुत्त) और उपालि ने विनय नियमों का वाचन किया था। यह संगीति बुद्ध के महापरिनिर्वाण के ठीक तीन महीने बाद आयोजित हुई थी।
44. तृतीय बौद्ध सभा किस स्थान पर बुलाई गई थी ?
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(d)
तृतीय बौद्ध संगीति (सभा) का आयोजन लगभग 250 ई.पू. में सम्राट अशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र में हुई थी। इसकी अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की। इस सभा में ‘अभिधम्मपिटक’ को त्रिपिटक में जोड़ा गया, जिससे बौद्ध धर्मग्रंथों का पूर्ण संकलन त्रिपिटक के रूप में तैयार हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तृतीय बौद्ध संगीति के बाद ही सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा। यह बौद्ध धर्म के अंतर्राष्ट्रीय प्रसार में एक ऐतिहासिक मोड़ था।
45. निम्नलिखित में से किस नगर में प्रथम बौद्ध समा आयोजित की गई थी?
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
M.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(c)
प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह (राजगीर, बिहार) में हुई थी। राजगीर मगध साम्राज्य की प्राचीन राजधानी था और बुद्ध के जीवनकाल में धार्मिक-राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। यहाँ सप्तपर्णि गुफा में महाकश्यप की अध्यक्षता में यह सभा आयोजित की गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राजगीर में ही बुद्ध ने अपने जीवनकाल में कई वर्षावास (वर्षाकालीन प्रवास) बिताए थे। बौद्ध और जैन दोनों धर्मों के लिए राजगीर एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है क्योंकि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर ने भी यहाँ उपदेश दिए थे।
46. निम्न में से किस शासक ने द्वितीय बौद्ध सभा का आयोजन किया
था?
R.A.S. / R.T.S. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन लगभग 383 ई.पू. में शिशुनाग वंश के राजा कालाशोक (काकवर्ण) के शासनकाल में वैशाली में हुई थी। इसकी अध्यक्षता सब्बकामी ने की। इस सभा का मुख्य कारण वज्जिपुत्तक भिक्षुओं द्वारा विनय के दस नियमों में शिथिलता लाने का विवाद था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस संगीति के परिणामस्वरूप बौद्ध संघ दो भागों में विभाजित हो गया — ‘स्थविरवाद’ (रूढ़िवादी) और ‘महासांघिक’ (उदारवादी)। यही विभाजन आगे चलकर हीनयान और महायान संप्रदायों के उद्भव की नींव बना।
47. भारतीय कला में बुद्ध के जीवन की किस घटना का चित्रण मृग सहित चक्र’ द्वारा हुआ है ?
U.P.P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(c)
भारतीय कला में ‘मृग सहित चक्र’ (धर्मचक्र के साथ हिरण) का प्रतीक बुद्ध के प्रथम उपदेश को दर्शाता है। बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ के मृगदाव (हरिण वन) में पाँच भिक्षुओं को दिया था, इसलिए मृग इस घटना का प्रतीक बन गया। इस घटना को ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ कहते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: प्रारंभिक बौद्ध कला में बुद्ध की मानवीय मूर्ति नहीं बनाई जाती थी; उनका प्रतिनिधित्व विभिन्न प्रतीकों द्वारा होता था — जैसे जन्म के लिए कमल, ज्ञान के लिए बोधिवृक्ष, प्रथम उपदेश के लिए धर्मचक्र-मृग, और महापरिनिर्वाण के लिए स्तूप। बुद्ध की प्रथम मानवीय मूर्तियाँ कुषाण काल (गांधार और मथुरा कला) में बनाई गईं।
48. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए
गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
सूची-1 (चिह्न) सूची-II (अर्थ)
A. जन्म – 1. वोधि वृक्ष
B. प्रथम प्रवचन – 2. धर्मचक्रप्रवर्तन
C. महाबोधि- 3. घोड़ा
D. त्याग – 4. कमल
कूट :
A B C D
सूची-1 (चिह्न) सूची-II (अर्थ)
A. जन्म – 1. वोधि वृक्ष
B. प्रथम प्रवचन – 2. धर्मचक्रप्रवर्तन
C. महाबोधि- 3. घोड़ा
D. त्याग – 4. कमल
कूट :
A B C D
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(d)
सही सुमेलन इस प्रकार है — जन्म का प्रतीक कमल है (क्योंकि बुद्ध के जन्म के समय कमल खिलने की किंवदंती है); प्रथम प्रवचन का प्रतीक धर्मचक्रप्रवर्तन है; महाबोधि (ज्ञान प्राप्ति) का प्रतीक बोधिवृक्ष है; और गृह त्याग (महाभिनिष्क्रमण) का प्रतीक घोड़ा है, क्योंकि बुद्ध ने अपने प्रिय घोड़े ‘कंथक’ पर सवार होकर गृहत्याग किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध के गृहत्याग के समय उनके सारथी का नाम ‘छन्दक’ था। कंथक (घोड़ा) ने राजमहल से बाहर निकलते समय आवाज़ न करे, इसके लिए देवताओं ने उसके खुरों को थाम लिया था — यह बौद्ध साहित्य में वर्णित है।
49. करमापा लामा तिब्बत के बुद्ध संप्रदाय के किस वर्ग का है?
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
करमापा लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के ‘कंग्यूपा’ (Kagyu) संप्रदाय के प्रमुख हैं। कंग्यूपा तिब्बती बौद्ध धर्म के चार प्रमुख संप्रदायों में से एक है। करमापा की वंशपरंपरा विश्व में सबसे प्राचीन पुनर्जन्म आधारित उत्तराधिकार परंपरा (तुल्कु परंपरा) मानी जाती है, जो 12वीं शताब्दी से चली आ रही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तिब्बती बौद्ध धर्म के चार प्रमुख संप्रदाय हैं — गेलूगपा (जिसके प्रमुख दलाई लामा हैं), कंग्यूपा (करमापा), साक्यपा और न्यिंगमापा। गेलूगपा संप्रदाय की स्थापना 14वीं-15वीं शताब्दी में जे त्सोंगखापा ने की थी और यह राजनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक प्रभावशाली रहा है।
50. महात्मा बुद्ध के संबंध में निम्नलिखित कथनों में कौन सही है?
1. उनका जन्म कपिलवस्तु में हुआ था।
2. उन्होंने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया था।
3. उन्होंने वैदिक धर्म को अस्वीकार किया था।
4. उन्होंने आर्य सत्य का प्रचार किया था।
नीचे दिए गए कूट से सही
कूट :
उत्तर चुनिए :
1. उनका जन्म कपिलवस्तु में हुआ था।
2. उन्होंने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया था।
3. उन्होंने वैदिक धर्म को अस्वीकार किया था।
4. उन्होंने आर्य सत्य का प्रचार किया था।
नीचे दिए गए कूट से सही
कूट :
उत्तर चुनिए :
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(d)
उपर्युक्त सभी चारों कथन सही हैं। बुद्ध का जन्म लुम्बिनी (कपिलवस्तु के निकट) में हुआ, ज्ञान बोधगया में मिला, उन्होंने वेदों की प्रामाणिकता और यज्ञ-बलि व्यवस्था को अस्वीकार किया, तथा चार आर्य सत्यों (दुख, दुख का कारण, दुख का निरोध, निरोध का मार्ग) का प्रचार किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध के चार आर्य सत्यों के साथ-साथ उन्होंने ‘अष्टांगिक मार्ग’ भी प्रतिपादित किया, जिसे ‘मध्यम मार्ग’ भी कहते हैं। यह अत्यंत भोग और अत्यंत तप दोनों के बीच का मार्ग है। बुद्ध ने ईश्वर के अस्तित्व पर मौन रहकर व्यावहारिक नैतिकता पर बल दिया, इसलिए बौद्ध धर्म को ‘अनात्मवादी’ और ‘अनीश्वरवादी’ दर्शन माना जाता है।
51. गौतम बुद्ध ने अपनी मृत्यु के उपरांत बौद्ध संघ के नेतृत्व के लिए निम्न में से किसे नामित किया था ?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
कुशीनारा में महापरिनिर्वाण से पूर्व बुद्ध ने आनंद से कहा — “मैंने जो धर्म और विनय उपदेश दिए हैं, वही तुम्हारे शास्ता होंगे।” इस प्रकार उन्होंने किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि अपने धर्म एवं विनय को ही संघ का मार्गदर्शक घोषित किया। यह घटना लगभग 483 ई.पू. की मानी जाती है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद महाकस्सप की अध्यक्षता में राजगृह (राजगीर) में प्रथम बौद्ध संगीति आयोजित की गई, जिसमें उपालि ने विनयपिटक और आनंद ने सुत्तपिटक का वाचन किया। यह भी उल्लेखनीय है कि आनंद बुद्ध के सबसे निकट शिष्य और निजी परिचारक थे, जिन्होंने 25 वर्षों तक उनकी सेवा की।
52. निम्नलिखित में से कौन बुद्ध के जीवनकाल में ही संघ प्रमुख होना चाहता था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(a)
देवदत्त बुद्ध का चचेरा भाई था और शाक्यकुल से ही संबंधित था। भिक्षु बनते ही उसके मन में संघ का नेतृत्व पाने की महत्वाकांक्षा जाग उठी। उसने बुद्ध को संघ से हटाने के लिए कई षड्यंत्र रचे, यहाँ तक कि उन पर हत्या के प्रयास भी किए — जैसे पहाड़ से शिला लुढ़कवाना और नालागिरि हाथी को उन पर छोड़ना — किंतु सभी प्रयास विफल रहे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: देवदत्त ने मगध नरेश अजातशत्रु को अपना समर्थक बना लिया था, जो उसकी महत्वाकांक्षाओं में सहायक था। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार देवदत्त ने संघ में फूट डालने हेतु पाँच कठोर नियमों (पंचवस्तु) का प्रस्ताव भी रखा था, जिसे बुद्ध ने अस्वीकार कर दिया।
53. बुद्ध के उपदेश किससे संबंधित हैं?
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(d)
बुद्ध के उपदेशों का केंद्र था — नैतिक आचरण, मन की पवित्रता और दुःख से मुक्ति का व्यावहारिक मार्ग। उन्होंने आत्मा-परमात्मा जैसे तात्त्विक प्रश्नों को “अव्याकृत” (अनुत्तरित) छोड़ा और वैदिक यज्ञ-कर्मकांडों की कड़ी आलोचना की। उनका अष्टांगिक मार्ग — सम्यक दृष्टि से लेकर सम्यक समाधि तक — पूर्णतः आचरण पर आधारित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बुद्ध ने अपने उपदेश संस्कृत की बजाय तत्कालीन लोकभाषा पाली में दिए, ताकि साधारण जनता उन्हें सहज रूप से समझ सके। उनका प्रसिद्ध “मज्झिम पटिपदा” (मध्यम मार्ग) का सिद्धांत — न अति-भोग, न अति-तप — नैतिक जीवन का आधार था।
54. निम्नलिखित में से कौन-सा बौद्ध पवित्र स्थल निरंजना नदी पर स्थित था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(a)
बोधगया, जहाँ गौतम बुद्ध को बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था, निरंजना नदी (आधुनिक फल्गु नदी) के तट पर स्थित है। यह नदी निरंजना और मोहना नामक दो छोटी धाराओं के संगम से बनती है। बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति से पूर्व इसी नदी में स्नान किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर को यूनेस्को ने 2002 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। यह मंदिर मूलतः सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ई.पू. में बनवाया था, और वर्तमान संरचना गुप्तकाल (5वीं-6वीं शताब्दी ई.) की मानी जाती है।
55. बोधगया में ‘बोधि वृक्ष’ अपने वंश की इस पीढ़ी का है-
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
बोधगया का वर्तमान बोधि वृक्ष उस मूल पीपल वृक्ष की पाँचवीं पीढ़ी है, जिसके नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। चीनी यात्री ह्वेनसांग के विवरण के अनुसार मूल वृक्ष को 7वीं शताब्दी में बंगाल के शासक शशांक ने नष्ट करवाया था। पुरातत्ववेत्ता अलेक्जेंडर कनिंघम ने 19वीं शताब्दी में वर्तमान (पाँचवीं पीढ़ी के) वृक्ष को लगवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस वृक्ष की एक शाखा तीसरी शताब्दी ई.पू. में सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा श्रीलंका ले गई थीं, जहाँ अनुराधापुरा में लगाया गया वह वृक्ष आज भी जीवित है और विश्व का सबसे पुराना ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित वृक्ष माना जाता है। बोधि वृक्ष का वैज्ञानिक नाम Ficus religiosa है।
56. ‘त्रिपिटक’ क्या है?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2003
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
त्रिपिटक बौद्ध धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं प्राचीनतम धर्मग्रंथ है। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के पश्चात उनकी शिक्षाओं को तीन भागों में संकलित किया गया — विनय पिटक (संघ के आचार-नियम), सुत्त पिटक (धार्मिक सिद्धांत एवं उपदेश) और अभिधम्म पिटक (दार्शनिक विवेचन)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: त्रिपिटक की रचना पाली भाषा में हुई, जो उस काल में आम जनता की भाषा थी। यह ग्रंथ बौद्ध धर्म के थेरवाद (हीनयान) सम्प्रदाय का मूल आधार माना जाता है।
57. निम्नलिखित में से किस बौद्ध ग्रंथ में संघ जीवन के नियम प्राप्त होते हैं?
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
विनय पिटक त्रिपिटक का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें बौद्ध संघ के भिक्षुओं और भिक्षुणियों के लिए आचार-व्यवहार, दैनिक जीवन के नियम एवं अनुशासन संबंधी विधि-निषेध संकलित हैं। विनय पिटक के अंतर्गत मुख्यतः तीन ग्रंथ हैं — सुत्त विभंग, खंधक और परिवार।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि प्रथम बौद्ध संगीति (483 ई.पू., राजगृह) में उपालि ने विनय पिटक का और आनंद ने सुत्त पिटक का वाचन किया था।
58. अष्टांग मार्ग की संकल्पना, अंग है-
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(d)
बुद्ध ने सारनाथ (ऋषिपत्तन/मृगदाव) में अपना प्रथम उपदेश पाँच ब्राह्मण शिष्यों को दिया, जिसे ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ कहा जाता है। इसी उपदेश का सार ‘धर्मचक्रप्रवर्तन सुत्त’ में संकलित है, जिसमें चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग का विस्तृत वर्णन है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अष्टांगिक मार्ग के आठ सोपान हैं — सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मांत, सम्यक् आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति और सम्यक् समाधि। इसे ‘मध्यमा प्रतिपदा’ भी कहते हैं क्योंकि यह अति-भोग और अति-तप दोनों के बीच का मार्ग है। अष्टांगिक मार्ग को तीन भागों — शील, समाधि और प्रज्ञा — में वर्गीकृत किया जाता है।
59.’त्रिपिटक’ ग्रंथ किस धर्म से संबंधित है?
R.A.S./R.T.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
त्रिपिटक बौद्ध धर्म का मूल और सर्वप्रमुख धर्मग्रंथ है। इसे पाली भाषा में लिखा गया और इसमें बुद्ध की संपूर्ण शिक्षाओं का व्यवस्थित संकलन है। ‘त्रि’ अर्थात तीन और ‘पिटक’ अर्थात टोकरी — यानी ‘तीन टोकरियाँ’।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विशेष तथ्य यह है कि त्रिपिटक की रचना तृतीय बौद्ध संगीति (250 ई.पू.) के समय सम्राट अशोक के संरक्षण में पाटलिपुत्र में हुई, जिसकी अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की थी।
60. त्रिपिटक किसकी धार्मिक पुस्तक है?
63rd B.P.S.C. (Pre) Exam. 2017
उत्तर-(d)
त्रिपिटक बौद्ध धर्म का पवित्र धर्मग्रंथ है। यह पाली भाषा में रचित है और इसमें तीन प्रमुख भाग हैं — विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उल्लेखनीय है कि श्रीलंका में त्रिपिटक को ताड़ के पत्तों पर लिखकर सुरक्षित किया गया था और यूनेस्को ने श्रीलंका के पाली त्रिपिटक को ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ (Memory of the World Register) में स्थान दिया है।
61. त्रिपिटक निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
M.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
त्रिपिटक बौद्धों का सर्वोच्च धर्मग्रंथ है। बौद्ध परंपरा में इसे ‘बुद्धवचन’ माना जाता है। इसके तीनों खंड — विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक — मिलकर बौद्ध धर्म के संपूर्ण दर्शन, आचार और अध्यात्म को समेटते हैं। महत्वपूर्ण
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: त्रिपिटक के सुत्त पिटक में ‘धम्मपद’ नामक अत्यंत लोकप्रिय ग्रंथ सम्मिलित है जिसमें 423 गाथाएँ हैं और इसे ‘बौद्धों की गीता’ भी कहा जाता है।
62.’यमक’ बुद्ध ‘पिटक’ से संबंधित है-
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
अभिधम्म पिटक त्रिपिटक का तीसरा और दार्शनिक दृष्टि से सर्वाधिक जटिल भाग है। इसमें बौद्ध दर्शन के सूक्ष्म तत्वों का विश्लेषण प्रश्नोत्तर शैली में किया गया है। इसके अंतर्गत सात ग्रंथ आते हैं — धम्मसंगणि, विभंग, धातुकथा, पुग्गलपञ्ञत्ति, कथावत्थु, यमक और पट्ठान। ‘यमक’ का अर्थ है ‘जोड़े में विचार करना’ — इसमें धर्म-तत्वों को परस्पर विपरीत युग्मों में व्याख्यायित किया गया है। उल्लेखनीय है कि कथावत्थु की रचना मोग्गलिपुत्त तिस्स ने तृतीय बौद्ध संगीति में की थी, जो अभिधम्म पिटक का एक प्रमुख अंग है।
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