मिस्र की सभ्यता (3100 ई. पू.)

विश्व इतिहास मिस्र की सभ्यता (3100 ई. पू.)
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मिस्र

➣ मिस्र या ईजिप्ट उत्तरी अफ्रीका में स्थित एक देश हैं। यह उत्तर में भूमध्य सागर, उत्तर पूर्व में गाजा पट्टी और इस्राइल, पूर्व में लाल सागर, पश्चिम में लीबिया एवं दक्षिण में सूडान से घिरा हुआ है।

नेपोलियन बोनापार्ट के आक्रमण करने के कारण ही मिस्त्र की सभ्यता की खोज हुई थी।

➣ ऐसा कहा जाता है कि एक शिलालेख 1798 में नील नदी के मुहाने पर मौजूद रोजीटा नाम की जगह से नेपोलियन बोनापार्ट को मिला था।

➣ मिस्र साम्राज्य की स्थापना—लगभग 3100 ईसा पूर्व

➣ मिस्र के प्रथम राजवंश का प्रथम शासक-मेनिस (2180-2040 ईसा पूर्व)

➣ विश्व की प्रथम महिला शासक—प्राचीन मिस्र की रानी हटशेटपुट

➣ मिस्र को नील नदी की देन कहनेवाला प्रमुख इतिहासकार–हेरोडोट्स

➣ मिस्र का नेपोलियन –थुटमोज तृतीय (मध्यकालीन राज्य का प्रतापी सम्राट)

➣ गीजा स्थित विश्व प्रसिद्ध पिरामिड का निर्माता—फराओ चियोप्स (खूफू) (2589 ई० पू०-2566 ई० पू०)

➣ अधिकांश पिरामिडों का निर्माण नील नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित ननफिस नगर में किया गया था।

➣ मिस्र सभ्यता के समय हुई विभिन्न राजनैतिक घटनाओं को देखते हुए मिस्र के राजनैतिक इतिहास को तीन भागों में विभक्त किया गया है-

I. पहला, पिरामिड युग 3400 ई. पू. से 2500 ई.पू. तक
II. दूसरा सामन्तशाही युग 2500 ई. पू. से लगभग 1800 ई. पू. तक
III. तीसरा नवीन साम्राज्य 1580 ईसा पूर्व से 1150 ईसा पूर्व तक।

पिरामिड युग

➣ पिरामिड काल का प्रथम शासक मनिस था। इसी के समय में मिन के वास्तविक राजनैतिक जीवन का श्रीगणेश हुआ।

➣ पिरामिड युग की महत्वपूर्ण उपलब्धि पिरामिड का निर्माण था जिसको फराओं ने अपने को मृत्यु के उपरान्त दफनाये जाने के लिए किया था।

2500 ई.पू. तक फराओं की शक्ति का पूर्ण हास हो गया।

➣ इसके परिणामस्वरूप मिस्र के राजनैतिक इतिहास में एक नये युग का श्रीगणेश हुआ, जिसे सामन्त शाही काल कहा जाता है।

सामन्तशाही युग व नवीन साम्राज्य

➣ सामन्तशाही युग में मिस्र के उत्तर से हिकसास जाति ने आक्रमण करके मिन को पराधीन बना लिया था।

➣ यूटमस प्रथम इस काल का 1545 ई.पू. से 1524 ई.पू. महान विजेता था तथा महारानी हतशीपुर 1501 ई. पू. से 1479 ई. पू.) प्रथम महिला शासिका थी।

➣ महारानी को मंदिरों के निर्माण तथा व्यापार में अधिक रुचि थी। उसने ” करनक” में एक सुन्दर मंदिर का निर्माण कराया।

➣ मिस्र के शासक फराओं कहलाते थे। लोग उसे ईश्वर का प्रतिनिधि मानते थे।

➣ राजतन्र दैवीय अवधारणा पर आधारित था। राजतन्त्र का पवित्र चरित्र ही राजा और रशासन का प्रतीक था।

➣ राजा और ईश्वर के बीच सबंध स्थापित करने के लिए रे (मिस्र का एक देवता) का पुत्र जैसी उपाधियों का इस्तेमाल किया जाता था।

➣ राजा को बाज (falcon) होरस और आइसिस के पुत्र के रूप में भी पहचाना जाता था।

सामाजिक वर्गीकरण

➣ मिस्र संस्कृति की न्याय प्रणाली धर्म पर आधारित थी। आधिकारिक तौर पर कानूनी प्रणाली का मुखिया फैरो था।

➣ मिस्र गाँवो , छोटे कस्बों और शाही भूमियों में विभाजित था।

➣ मिस्री समाज पाँच वर्गो में विभाजित था : राजपरिवार, सामंत, पुजारी, मध्यमवर्ग तथा सर्फ और दास। मध्यम वर्ग में लिपिक, व्यापारी, कारीगर और स्वतंत्र किसान सम्मिलित थे।

➣ समाज की इकाई परिवार था। विध्यनुसार प्रत्येक व्यक्ति की केवल एक पत्नी हो सकती थी और उसी की संतान को परिवारिक संपत्ति उत्तराधिकार में मिलती थी।

➣ मिस्री समाज के प्रत्येक वर्ग में भाई-बहिन के विवाह की प्रथा थी, इसलिये पति पत्नी में बाल्यावस्था से ही स्नेह संबंध रहता था।

➣ समाज में स्त्रियों को अत्यंत प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त था। मैक्समूलर के अनुसार किसी अन्य जाति ने स्त्रियों को उतना उच्च वैधानिक सम्मान प्रदान नहीं किया जितना मिस्रियों ने।

➣ पुरुषों और महिलाओं, दोनों को संपत्ति रखने और बेचने, अनुबंध करने, विवाह और तलाक करने, उत्तराधिकार प्राप्त करने और अदालत में कानूनी विवादों का मुकदमा लड़ने का अधिकार प्राप्त था।

➣ स्त्री व पुरुषों में लगभग उच्च वर्ग के लोग आभूषण पहनते थे। संगीत, नृत्य, नटबाजी, पशु, जुआ आदि उनके मनोरंजन के साधन थे।

हाथीदांत जड़ित मेज और कुर्सियाँ तथा बहुमूल्य पर्दै व कालीन सामन्तों के भवनों की शोभा बढ़ाते थे।

कृषि व पशुपालन

➣ मिस्र के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। जिस तरह सिंधु घाटी सभ्यता को सिंधु नदी ने समृद्ध बनाया उसी तरह नील नदी मिस्र वासियों के लिए वरदान थी।

➣ मिस्र में खेती कार्य के लिए सिंचाई का भी इस्तेमाल किया जाता था। सम्भवत: सिंचाई व्यवस्था का आधार नील नदी थी।

➣ वे मुख्यत: गेहूँ, जौ, मटर, सरसों, अंजीर, खजूर, सन तथा अंगूर और अन्य अनेक फलों की खेती करते थे।


हड़प्पा संस्कृति में जल संचय होता था किन्तु उसका प्रयोग सिंचाई के लिए नहीं किया जाता था।

➣ अर्थव्यवस्था खाद्य पदार्थों , अनाज , मवेशी , रोटी , बेयर और लिनन के आदान प्रदान पर आधारित थी।

➣ मिस्र को प्राचीन विश्व का अन्न का भंडार कहा जाता था, क्योंकि वहाँ वर्ष में तीन बार फसलें बोई जाती थी ।

➣ दूसरा प्रमुख उद्यम पशु-पालन था। उनके प्रमुख पालतू पशु थे गाय, भेड़, बकरी, गधा, बकरी, गधा, कुत्ता, गाय, ऊंट, सूअर आदि।

व्यापार व उद्योग

➣ मिस्र में धातु, लकड़ी, मिट्टी, काँच, कागज तथा कपड़े का काम करने वाले कुशल कारीगर थे। वे कई प्रकार के जलपोत बनाने की कला में भी कुशल थे।

असीरिया और नूबिया से वे देवदारु, हाथीदाँत और आबनूस का आयात करते थे।

➣ चमड़े और खालों से वे भाँति भाँति के वस्त्र और ढाल इत्यादि तथा पेपाइरस पौधे से कागज, हलकी नावें, चप्पलें, चटाईयाँ और रस्सियाँ आदि बनाते थे।

➣ मिस्र वासियों को ताँबे के अतिरिक्त अन्य धातुएँ बाहर से मंगवानी पड़ती थी। मिस्र वासी लकड़ी पर नक्काशी तथा काँच पर चित्रकारी कार्य से भी अवगत थे ।

➣ वस्तु-विनिमय का व्यापक रूप से विनिमय के माध्यम के रूप में उपयोग किया जाता था। अरबइथोपिया से उनके व्यापारिक संबंध थे ।

धार्मिक जीवन

➣ सभ्यता के प्रारंभिक काल में मिस्रवासी बहुदेववादी थे किन्तु साम्राज्यवादी युग में अखनाटन नामक फराओं ने एकेश्वरवाद की विचारधारा को महत्व दिया तथा सूर्य की उपासना आरम् की।

➣ मंदिरों और देव – प्रतिमाओं की देखभाल करना पुरोहित की जिम्मेदारी थी।


हड़प्पा संस्कृति में पूजा के साक्ष्य मिलते हैं किन्तु मंदिरों के साक्ष्य नहीं मिले हैं।

➣ उन्होंने अपने देवताओं की कल्पना प्राय: मनुष्यों अथवा पशुपक्षियों अथवा मिले-जुले रूप में की। उनके अधिकांश देवता प्राकृतिक शक्तियों के दैवी रूप थे।

➣ आकाश की कल्पना उन्होंने नूत नाम की दैवी अथवा हथौर नाम की दैवी गौ के रूप में की थी।

सूर्य, चंद्र तथा नील नदी को ही नहीं वरन् झरनों, पर्वतों, पशुपक्षियों, लताकुंजों, वृक्षों और विविध वनस्पतियों तक को वे दैवी शक्ति से अभिहित मानते थे।

मेंफिस का प्रमुख देवता था। किसी प्राकृतिक शक्ति का दैवीकरण न होकर कलाओं और कलाकारों का संरक्षक था।

➣ सूर्य की उपासना मिस्र में लगभग सभी जगह विभिन्न नामों और रूपों में होती थी। उसका संयुक्त नाम एमन-रे लोकप्रिय हो गया।

➣ मिस्र वासियों के प्रमुख देवता रॉ ( सूर्य), ओसरिम (नील नदी) तथा सिन (चंद्रमा) थे।

तकनीकी-ज्ञान

➣ मिस्र के लोगों ने तारों व सूर्य के आधार पर अपना कलेण्डर बना लिया था तथा वर्ष के 360 दिन की गणना कर ली थी।

➣ मिश्र वासियों ने धूप घड़ी का आविष्कार कर लिया था।

➣ मिस्र के लोग ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में भी बहुत अधिक रुचि रखते थे। रसायन (कैमिस्ट्री) शब्द की उत्पत्ति भी मिस्र से ही मानी जाती है।

➣ अपनी वर्णमाला विकसित करके उन्होंने पेपीरस वृक्ष से कागज का निर्माण भी किया था।

➣ मिस्र वासियों का विश्वास था कि मृत्यु के बाद शव में आत्मा निवास करती है । अत: वे शव पर एक विशेष तेल का लेप करते थे। इससे सैकड़ों वर्षों तक शव सड़ता नहीं था।

➣ शवों की सुरक्षा के लिए समाधियां बनाई जाती थी, जिन्हें वे पिरामिड कहते थे। इन पिरामिडों में रखे शवों को ममी कहा जाता था।

➣ पिरामिड 481 फीट ऊंचा तथा 755 फीट चौड़ा है। इसमें ढाई—ढाई टन के 23 लाख पत्थर के टुकड़ें लगे है।

➣ पिरामिड के बाहर पत्थर पर एक विशालकाय नृसिंह की मूर्ति जिसे स्फिंक्स कहा जाता है, बनी है।

ई. पू. 3000मिस्र के दोनों भागों का एकीकरण
ई. पू. 2600खूफू, खेफरे
ई. पू. 2100-1788अमेहोतप प्रथम, अमेहोतप द्वितीय
ई. पू. 1680-1580हिस्कोस का आधिपत्य
ई. पू. 1580-1090अहमोस प्रथम, थुटमोस द्वितीय

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