व्यायाम मंडल
➣ व्यायाम मंडल (1897 ई.) आधुनिक भारत के प्रारम्भिक क्रांतिकारी संगठनों में से एक था। अनेक इतिहासकार इसे आधुनिक भारत का प्रथम क्रांतिकारी संगठन मानते हैं, क्योंकि इसी संगठन के माध्यम से पहली बार ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित रूप से सशस्त्र प्रतिरोध का मार्ग अपनाया गया।
➣ इस संगठन की स्थापना दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि चापेकर (चापेकर बंधुओं) ने पूना (वर्तमान पुणे) में की थी। प्रारम्भ में यह युवाओं को शारीरिक व्यायाम, लाठी-काठी, तलवारबाज़ी तथा आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वाला संगठन था, किन्तु शीघ्र ही इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति की तैयारी करना बन गया।
➣ 1897 ई. में प्लेग आयुक्त डब्ल्यू. सी. रैण्ड और लेफ्टिनेंट चार्ल्स एयर्स्ट की हत्या ने व्यायाम मंडल को पूरे देश में प्रसिद्ध कर दिया।
इस घटना ने भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत की तथा आगे चलकर मित्र मेला, अभिनव भारत, अनुशीलन समिति और अन्य गुप्त क्रांतिकारी संगठनों के गठन को भी प्रेरित किया।स्थापना की पृष्ठभूमि
➣ 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में महाराष्ट्र में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के नेतृत्व में राष्ट्रीय चेतना का तेजी से विकास हो रहा था। तिलक ने गणपति उत्सव (1893) तथा शिवाजी उत्सव (1895) को सार्वजनिक रूप देकर युवाओं में राष्ट्रवाद, संगठन और स्वाभिमान की भावना जागृत की। इन उत्सवों का प्रभाव चापेकर बंधुओं सहित अनेक युवाओं पर पड़ा।
➣ इसी समय ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों, आर्थिक शोषण तथा भारतीयों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के कारण शिक्षित युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा था। उनका विश्वास था कि केवल याचिकाओं और प्रार्थनाओं से अंग्रेज़ी शासन समाप्त नहीं होगा।
➣ 1896 ई. में पूना (पुणे) तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में भयंकर प्लेग महामारी फैल गई। महामारी को नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने डब्ल्यू. सी. रैण्ड (W. C. Rand) को प्लेग आयुक्त नियुक्त किया।
➣ रैण्ड के नेतृत्व में प्लेग नियंत्रण के नाम पर ब्रिटिश सैनिकों और अधिकारियों ने भारतीय घरों में बिना अनुमति प्रवेश किया, महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया, धार्मिक भावनाओं की उपेक्षा की तथा लोगों की निजी संपत्ति को भी क्षति पहुँचाई। इन कठोर उपायों से जनता में ब्रिटिश शासन के प्रति गहरा रोष फैल गया।
➣ इन परिस्थितियों ने चापेकर बंधुओं को यह विश्वास दिलाया कि ब्रिटिश शासन का विरोध केवल भाषणों या प्रार्थनाओं से नहीं किया जा सकता। इसलिए उन्होंने युवाओं को संगठित कर उन्हें शारीरिक एवं शस्त्र प्रशिक्षण देने तथा आवश्यकता पड़ने पर सशस्त्र प्रतिरोध के लिए तैयार करने का निर्णय लिया।
व्यायाम मंडल की स्थापना (1897)
➣ 1897 ई. में दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि चापेकर ने पूना (वर्तमान पुणे) में व्यायाम मंडल की स्थापना की।
➣ अनेक इतिहासकार इसे आधुनिक भारत का प्रथम क्रांतिकारी संगठन मानते हैं, क्योंकि इसी संगठन ने पहली बार ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित सशस्त्र प्रतिरोध का मार्ग अपनाया।
➣ प्रारम्भ में व्यायाम मंडल का उद्देश्य युवाओं को शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनाना तथा उनमें अनुशासन, साहस और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना था।
➣ इसके लिए सदस्यों को नियमित रूप से व्यायाम, लाठी, तलवारबाज़ी, कुश्ती तथा अन्य पारंपरिक युद्ध-कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता था।
➣ शीघ्र ही यह संगठन केवल एक व्यायाम संस्था तक सीमित नहीं रहा। चापेकर बंधुओं ने इसे गुप्त रूप से ऐसे युवाओं का समूह बनाना प्रारम्भ किया, जो आवश्यकता पड़ने पर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र कार्रवाई कर सकें। इसी कारण व्यायाम मंडल ने धीरे-धीरे एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन का स्वरूप ग्रहण कर लिया।
➣ संगठन के सदस्यों में शिवाजी महाराज के साहस, स्वराज्य और गुरिल्ला युद्ध की परंपरा का विशेष प्रचार किया जाता था। साथ ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्रवादी विचारों से भी वे गहराई से प्रभावित थे।
➣ धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रीय चेतना और संगठन की भावना विकसित की जाती थी।
➣ व्यायाम मंडल की गतिविधियाँ मुख्यतः पूना और उसके आसपास के क्षेत्रों तक सीमित थीं, किन्तु इसके साहसिक कार्यों ने पूरे देश के युवाओं को प्रभावित किया।
➣ आगे चलकर रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड (1897) ने इस संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कर दिया और भारत में संगठित क्रांतिकारी आन्दोलन की दिशा को नई पहचान मिली।
रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड (1897)
➣ 1896–97 ई. में पूना (पुणे) में फैली प्लेग महामारी को नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने डब्ल्यू. सी. रैण्ड को विशेष प्लेग आयुक्त नियुक्त किया।
➣ रैण्ड के नेतृत्व में सैनिकों को बिना अनुमति भारतीय घरों की तलाशी लेने, लोगों को जबरन बाहर निकालने तथा प्लेग नियंत्रण के नाम पर कठोर कार्रवाई करने के व्यापक अधिकार दिए गए।
➣ प्लेग नियंत्रण अभियान के दौरान ब्रिटिश सैनिकों द्वारा भारतीयों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। घरों में बिना अनुमति प्रवेश, दुर्व्यवहार, धार्मिक स्थलों का अपमान तथा निजी संपत्ति की क्षति जैसी घटनाओं से पूना की जनता में भारी आक्रोश फैल गया। चापेकर बंधुओं ने रैण्ड को इसका मुख्य जिम्मेदार माना।
➣ दामोदर हरि चापेकर और बालकृष्ण हरि चापेकर ने रैण्ड को दंड देने का निर्णय लिया। कई दिनों तक उसकी गतिविधियों पर नज़र रखने के बाद उन्होंने 22 जून, 1897 ई. को कार्रवाई की योजना बनाई। उस दिन महारानी विक्टोरिया की हीरक जयंती के अवसर पर गवर्नमेंट हाउस, गणेशखिंड (पूना) में एक समारोह आयोजित किया गया था।
➣ समारोह समाप्त होने के बाद जब प्लेग आयुक्त डब्ल्यू. सी. रैण्ड और उसके सैन्य एस्कॉर्ट लेफ्टिनेंट चार्ल्स एयर्स्ट अपनी-अपनी बग्घियों से लौट रहे थे, तभी चापेकर बंधुओं ने उन पर गोलियाँ चला दीं।
➣ इस हमले में एयर्स्ट की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई, जबकि रैण्ड गंभीर रूप से घायल हुआ और 3 जुलाई, 1897 ई. को उसकी मृत्यु हो गई।
➣ इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार ने पूरे पूना में बड़े स्तर पर जाँच अभियान चलाया और अपराधियों की सूचना देने वाले को इनाम देने की घोषणा की।
➣ लालच में आकर गणेश शंकर द्रविड़ तथा रामचंद्र द्रविड़ ने चापेकर बंधुओं की जानकारी पुलिस को दे दी। इसी मुखबिरी के आधार पर दामोदर हरि चापेकर गिरफ्तार कर लिए गए।
➣ अपने बड़े भाई की गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए वासुदेव हरि चापेकर ने महादेव विनायक रानाडे के साथ मिलकर 8 फरवरी, 1899 ई. को दोनों द्रविड़ बंधुओं की गोली मारकर हत्या कर दी।
➣ इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने कठोर कार्रवाई करते हुए वासुदेव हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर तथा महादेव विनायक रानाडे को भी गिरफ्तार कर लिया।
➣ मुकदमे के दौरान चापेकर बंधुओं ने अपने कृत्य को राष्ट्रहित में किया गया कार्य बताया और किसी प्रकार का पश्चाताप व्यक्त नहीं किया। न्यायालय ने दामोदर हरि चापेकर को मृत्युदंड दिया, जिन्हें 18 अप्रैल, 1898 ई. को येरवडा केंद्रीय कारागार, पूना में फाँसी दी गई।
➣ इसके बाद वासुदेव हरि चापेकर को 8 मई, 1899 ई., महादेव विनायक रानाडे को 10 मई, 1899 ई. तथा बालकृष्ण हरि चापेकर को 12 मई, 1899 ई. को उसी कारागार में फाँसी दे दी गई।
➣ रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड आधुनिक भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का पहला व्यापक रूप से चर्चित राजनीतिक हत्या-कांड माना जाता है। आगे चलकर मित्र मेला, अभिनव भारत, अनुशीलन समिति तथा अन्य अनेक क्रांतिकारी संगठनों ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया।
व्यायाम मंडल का महत्व
➣ रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड (1897) आधुनिक भारत के क्रांतिकारी आन्दोलन की पहली बड़ी सशस्त्र राजनीतिक कार्रवाई मानी जाती है।
➣ उस समय भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन उदारवादी चरण में था, जहाँ अधिकांश नेता ब्रिटिश सरकार से याचिकाओं, प्रार्थना-पत्रों एवं संवैधानिक सुधारों के माध्यम से अपने अधिकारों की माँग कर रहे थे।
➣ चापेकर बंधुओं की इस कार्रवाई ने पहली बार यह स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश शासन का विरोध केवल संवैधानिक तरीकों से ही नहीं, बल्कि सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से भी किया जा सकता है। यही कारण है कि अनेक इतिहासकार व्यायाम मंडल को आधुनिक भारत का प्रथम क्रांतिकारी संगठन मानते हैं।
➣ व्यायाम मंडल का अस्तित्व अधिक समय तक नहीं रहा, किन्तु इसने भारतीय युवाओं में राष्ट्रवाद, साहस तथा संगठित क्रांतिकारी गतिविधियों की नींव रखी।
➣ आगे चलकर मित्र मेला, अनुशीलन समिति, अभिनव भारत, गदर पार्टी, हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) तथा अन्य क्रांतिकारी संगठनों ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया।
➣ आगे चलकर मित्र मेला (1899), अनुशीलन समिति (1902), अभिनव भारत (1904), गदर पार्टी (1913), हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (1924) तथा अन्य क्रांतिकारी संगठनों ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया।
समयरेखा (Timeline)
| वर्ष / तिथि | प्रमुख घटना |
|---|---|
| 1896 ई. | पूना (पुणे) में प्लेग महामारी फैली। |
| 1897 ई. | चापेकर बंधुओं द्वारा व्यायाम मंडल की स्थापना। |
| 22 जून 1897 ई. | रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड; दामोदर एवं बालकृष्ण चापेकर ने प्लेग आयुक्त डब्ल्यू. सी. रैण्ड तथा लेफ्टिनेंट चार्ल्स एयर्स्ट पर गोली चलाई। |
| 22 जून 1897 ई. | लेफ्टिनेंट चार्ल्स एयर्स्ट की घटनास्थल पर मृत्यु। |
| 3 जुलाई 1897 ई. | गंभीर रूप से घायल डब्ल्यू. सी. रैण्ड की मृत्यु। |
| 18 अप्रैल 1898 ई. | दामोदर हरि चापेकर को येरवडा केंद्रीय कारागार, पूना में फाँसी दी गई। |
| 8 फरवरी 1899 ई. | वासुदेव हरि चापेकर एवं महादेव विनायक रानाडे ने मुखबिर द्रविड़ बंधुओं की हत्या की। |
| 8 मई 1899 ई. | वासुदेव हरि चापेकर को येरवडा केंद्रीय कारागार में फाँसी दी गई। |
| 10 मई 1899 ई. | महादेव विनायक रानाडे को येरवडा केंद्रीय कारागार में फाँसी दी गई। |
| 12 मई 1899 ई. | बालकृष्ण हरि चापेकर को येरवडा केंद्रीय कारागार में फाँसी दी गई। |
सारांश
- व्यायाम मंडल (1897 ई.) की स्थापना दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि चापेकर ने पूना (वर्तमान पुणे) में की थी।
- अनेक इतिहासकार व्यायाम मंडल को आधुनिक भारत का प्रथम क्रांतिकारी संगठन मानते हैं, क्योंकि इसी संगठन ने पहली बार ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित सशस्त्र प्रतिरोध का मार्ग अपनाया।
- 1896–97 ई. में पूना में फैली प्लेग महामारी तथा प्लेग आयुक्त डब्ल्यू. सी. रैण्ड द्वारा किए गए दमनकारी उपायों ने चापेकर बंधुओं को सशस्त्र कार्रवाई के लिए प्रेरित किया।
- 22 जून, 1897 ई. को रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड में चापेकर बंधुओं ने डब्ल्यू. सी. रैण्ड तथा लेफ्टिनेंट चार्ल्स एयर्स्ट पर गोली चलाई। इस हमले में एयर्स्ट की तत्काल मृत्यु हो गई, जबकि रैण्ड की 3 जुलाई, 1897 ई. को मृत्यु हुई।
- चापेकर बंधुओं की गिरफ्तारी में गणेश शंकर द्रविड़ तथा रामचंद्र द्रविड़ की मुखबिरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बाद में वासुदेव हरि चापेकर और महादेव विनायक रानाडे ने दोनों द्रविड़ बंधुओं की हत्या कर दी।
- दामोदर हरि चापेकर को 18 अप्रैल, 1898 ई., वासुदेव हरि चापेकर को 8 मई, 1899 ई., महादेव विनायक रानाडे को 10 मई, 1899 ई. तथा बालकृष्ण हरि चापेकर को 12 मई, 1899 ई. को येरवडा केंद्रीय कारागार, पूना में फाँसी दी गई।
- रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड आधुनिक भारत के क्रांतिकारी आन्दोलन की पहली बड़ी सशस्त्र राजनीतिक कार्रवाई मानी जाती है।
- उस समय भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन उदारवादी चरण में था, जबकि चापेकर बंधुओं की इस कार्रवाई ने पहली बार ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष की विचारधारा को सामने रखा।
- आगे चलकर मित्र मेला, अनुशीलन समिति, अभिनव भारत, गदर पार्टी, हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) तथा अन्य क्रांतिकारी संगठनों ने इसी क्रांतिकारी परंपरा को आगे बढ़ाया।
अक्सर होने वाले सामान्य भ्रम
- व्यायाम मंडल को केवल व्यायाम कराने वाली संस्था समझना अधूरा होगा। शुरुआत में यह शारीरिक प्रशिक्षण देने वाला संगठन था, लेकिन आगे चलकर यह गुप्त क्रांतिकारी संगठन के रूप में भी सक्रिय हुआ।
- व्यायाम मंडल की स्थापना बंगाल में नहीं, बल्कि 1897 ई. में पूना (वर्तमान पुणे) में हुई थी।
- व्यायाम मंडल के संस्थापक विनायक दामोदर सावरकर नहीं थे। इसकी स्थापना दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर और वासुदेव हरि चापेकर ने की थी।
- रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड बंगाल की घटना नहीं थी। यह 22 जून 1897 ई. को पूना के गणेशखिंड में हुआ था।
- रैण्ड और एयर्स्ट दोनों की मृत्यु घटनास्थल पर नहीं हुई थी। चार्ल्स एयर्स्ट की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई थी, जबकि डब्ल्यू. सी. रैण्ड गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में 3 जुलाई 1897 ई. को उसकी मृत्यु हुई।
- रैण्ड एवं एयर्स्ट हत्याकांड को केवल व्यक्तिगत प्रतिशोध की घटना नहीं माना जाना चाहिए। यह प्लेग नियंत्रण के नाम पर किए गए ब्रिटिश अत्याचारों के विरोध में की गई राजनीतिक कार्रवाई थी।
- दामोदर हरि चापेकर की गिरफ्तारी केवल पुलिस की सामान्य जाँच के परिणामस्वरूप नहीं हुई थी। गणेश शंकर द्रविड़ और रामचंद्र द्रविड़ की मुखबिरी ने उनकी गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- द्रविड़ बंधुओं की हत्या दामोदर चापेकर ने नहीं की थी। वासुदेव हरि चापेकर ने महादेव विनायक रानाडे के साथ मिलकर 8 फरवरी 1899 ई. को दोनों द्रविड़ बंधुओं की हत्या की थी।
- चापेकर बंधुओं को काला पानी की सजा नहीं दी गई थी। तीनों को अलग-अलग तिथियों पर येरवडा केंद्रीय कारागार (पूना) में फाँसी दी गई थी।
- व्यायाम मंडल और अभिनव भारत एक ही संगठन नहीं थे। व्यायाम मंडल की स्थापना 1897 ई. में चापेकर बंधुओं ने की थी, जबकि अभिनव भारत की स्थापना 1904 ई. में विनायक दामोदर सावरकर ने मित्र मेला का पुनर्गठन करके की थी।
- व्यायाम मंडल के बाद सीधे अनुशीलन समिति की स्थापना नहीं हुई थी। क्रम को व्यायाम मंडल (1897) – मित्र मेला (1899) – अनुशीलन समिति (1902) – अभिनव भारत (1904) के रूप में समझना चाहिए।
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