1. दिल्ली के किस सुल्तान ने एक पृथक कृषि विभाग की स्थापना की एवं फसल चक्र की योजना बनाई थी?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-(d)
मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि सुधार के लिए “दीवान-ए-अमीर-कोही” नामक एक पृथक विभाग की स्थापना की, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाना और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना था। इस विभाग के अंतर्गत उसने फसल-चक्र की योजना भी बनाई, जिसके तहत गेहूं के स्थान पर जौ और गन्ने के स्थान पर गेहूं उगाने जैसे प्रयोग किए गए। यह योजना लगभग 60 वर्गमील भूमि के दोआब क्षेत्र में लागू की गई, परंतु उचित क्रियान्वयन न होने से असफल रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में ही मोरक्को का प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता भारत आया, जिसने सुल्तान के प्रशासनिक प्रयोगों का विस्तृत वर्णन अपनी यात्रा-वृत्तांत में किया है। इसी सुल्तान ने तांबे की सांकेतिक मुद्रा (टोकन करेंसी) चलाने का प्रयोग भी किया था, जो उसके अन्य असफल प्रशासनिक प्रयोगों में गिना जाता है।
2. कृषि को सम्मुन्नत करने के लिए नहर खुदवाने के संदर्भ में 13वीं शताब्दी का निम्नलिखित में पहला शासक होने का श्रेय किसे दिया जाता है?
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(c)
तुगलक वंश के संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई कदम उठाए। उसने मुकद्दमों और खुतों को उनके पुराने विशेषाधिकार लौटाए, लगान निर्धारण में फिर से बंटाई-प्रणाली अपनाई, भू-राजस्व की दर घटाकर उपज का लगभग एक-तिहाई कर दिया और सिंचाई-सुविधा बढ़ाने के लिए नहरों का निर्माण कराया। इस प्रकार सिंचाई हेतु नहरें बनवाने वाला वह पहला सुल्तान माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के निकट ‘तुगलकाबाद’ नामक एक नए दुर्ग-नगर का निर्माण कराया, जिसे उसने अपनी राजधानी बनाया। उसकी मृत्यु 1325 ई. में अफगानपुर में एक भवन के अचानक गिर जाने से हुई, जिसे लेकर इतिहासकारों में षड्यंत्र की भी चर्चा रही है।
3. दिल्ली से दौलताबाद राजधानी के स्थानांतरण का आदेश दिया था-
U.P.P.C.S. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने शासनकाल के आरंभिक वर्षों में राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद (पूर्व नाम देवगिरि) स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। समकालीन इतिहासकार बरनी के अनुसार, साम्राज्य के मध्य भाग में स्थित होने के कारण दौलताबाद को दक्षिण भारत पर प्रशासनिक नियंत्रण के लिए अधिक उपयुक्त समझा गया। हालांकि कुछ वर्षों बाद व्यावहारिक कठिनाइयों के चलते राजधानी को पुनः दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दौलताबाद का प्राचीन नाम ‘देवगिरि’ था, जो पहले यादव वंश की राजधानी रहा था। राजधानी-परिवर्तन के समय दिल्ली के बड़ी संख्या में निवासियों को भी दौलताबाद जाने पर बाध्य किया गया, जिससे आम जनता को भारी कष्ट सहना पड़ा – इसे इतिहासकार सुल्तान की अव्यावहारिक नीतियों के उदाहरण के रूप में देखते हैं।
4. अलाउद्दीन खिलजी के निम्न सेनाध्यक्षों में से कौन-सा तुगलक वंश का प्रथम सुल्तान बना?
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(a)
गाजी मलिक अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल का एक सक्षम सेनापति था और उसे दीपालपुर का सूबेदार नियुक्त किया गया था। उसने लगभग 29 बार मंगोल आक्रमणों को विफल कर उन्हें भारतीय सीमा से बाहर खदेड़ा, जिसके कारण उसे ‘मलिक-उल-गाजी’ की उपाधि मिली। खुसरो खान को पराजित करने के बाद उसने 8 सितंबर, 1320 ई. को दिल्ली के सिंहासन पर बैठकर तुगलक वंश की स्थापना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गाजी मलिक का मूल नाम ‘तुगलक’ था, और उसने इसी नाम पर अपने वंश का नामकरण किया। उसके द्वारा पराजित खुसरो खान, खिलजी वंश का अंतिम (नाममात्र) शासक था, जिसने बहुत अल्पकाल के लिए सत्ता संभाली थी।
5. मुहम्मद बिन तुगलक अपनी राजधानी दिल्ली से ले गया-
U.P.P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर-(a)
मुहम्मद बिन तुगलक के प्रशासनिक प्रयोगों में सबसे चर्चित प्रयोग राजधानी का दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरण था। दक्कन क्षेत्र के मध्य में स्थित होने के कारण सुल्तान को लगा कि दौलताबाद से दक्षिण भारत पर अधिक प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा। समकालीन इतिहासकार बरनी ने इसे साम्राज्य की भौगोलिक एकता बनाए रखने का प्रयास बताया, परंतु व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण कुछ समय बाद राजधानी पुनः दिल्ली लाई गई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: दौलताबाद किला अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुरक्षा-व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें ठोस चट्टान को काटकर गहरी खाई बनाई गई थी। मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में चीन के साथ कूटनीतिक संबंध भी स्थापित हुए, और इब्न बतूता को सुल्तान ने राजदूत के रूप में चीन भेजा था।
6. दिल्ली सल्तनत का सर्वाधिक विद्वान शासक जो खगोलशास्त्र, गणित एवं आयुर्विज्ञान सहित अनेक विद्याओं में माहिर था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(c)
मुहम्मद बिन तुगलक (शासनकाल लगभग 1325-1351 ई.) को दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों में सबसे अधिक विद्वान और बहुज्ञ माना जाता है। उसे खगोलशास्त्र, गणित, चिकित्साशास्त्र, तर्कशास्त्र, फारसी काव्य तथा सुलेख जैसे विविध विषयों का गहरा ज्ञान था। उसकी विद्वता के साथ-साथ राजधानी-परिवर्तन और सांकेतिक मुद्रा जैसे महत्वाकांक्षी परंतु अव्यावहारिक प्रयोग उसके शासनकाल की विशेष पहचान बने।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उसकी विरोधाभासी प्रकृति – असाधारण विद्वता के साथ अव्यावहारिक निर्णयों – के कारण इतिहासकार एलफिंस्टन ने उसे “अक्लमंद पागल” (ill-starred idealist) की उपाधि दी थी। इसके अतिरिक्त, उसने सोने-चांदी के स्थान पर तांबे के सिक्कों को सांकेतिक मुद्रा के रूप में चलाने का प्रयोग किया, जो जालसाजी के कारण असफल हो गया।
7. गाजी मलिक किस वंश का संस्थापक था?
M.P.P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(a)
गाजी मलिक, जिसे गयासुद्दीन तुगलक के नाम से जाना जाता है, तुगलक वंश का संस्थापक था। 1320 ई. में दिल्ली की सत्ता प्राप्त करने के बाद उसने इस वंश की स्थापना की, जो दिल्ली सल्तनत के सभी वंशों में सबसे लंबे समय (लगभग 1320-1412 ई.) तक शासन करने वाला वंश रहा। उसने प्रशासनिक एवं कृषि सुधारों के माध्यम से सल्तनत की व्यवस्था को सुदृढ़ किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तुगलक वंश के प्रमुख शासकों में गयासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद बिन तुगलक और फिरोजशाह तुगलक प्रमुख माने जाते हैं। फिरोजशाह तुगलक ने सिंचाई हेतु सर्वाधिक संख्या में नहरों का निर्माण कराया तथा कई जनकल्याणकारी विभागों की स्थापना की, जो इस वंश की प्रशासनिक उपलब्धियों में गिनी जाती हैं।
8. दीवाने-कोही किससे संबंधित है?
M.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(a)
‘दीवान-ए-अमीर-कोही’ मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा स्थापित एक विशेष विभाग था, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना तथा किसानों को बीज, औजार और पूंजी के रूप में प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करना था। इस योजना के अंतर्गत दोआब क्षेत्र की भूमि पर उन्नत खेती के प्रयोग किए गए, किंतु अनुभवहीन अधिकारियों और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यह योजना अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सकी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस योजना के तहत मुहम्मद तुगलक ने किसानों को ‘सोंढर’ नामक अग्रिम राशि (कृषि-ऋण) प्रदान की थी। यह योजना मुहम्मद तुगलक के पांच प्रमुख प्रशासनिक प्रयोगों में से एक मानी जाती है, जिनमें राजधानी-परिवर्तन और टोकन-करेंसी भी शामिल थे।
9. किस वंश के सुल्तानों ने सबसे अधिक समय तक देश में राज्य किया?
U.P. Lower Sub. (Spl) (Pre) 2008
उत्तर-(d)
दिल्ली सल्तनत के पांच प्रमुख वंशों में तुगलक वंश का शासनकाल सबसे लंबा (लगभग 1320 ई. से 1412 ई. तक, यानी करीब 92 वर्ष) रहा। तुलनात्मक रूप से गुलाम (दास) वंश ने लगभग 84 वर्ष, खिलजी वंश ने मात्र 30 वर्ष और लोदी वंश ने लगभग 75 वर्ष तक शासन किया। तुगलक वंश के अंतर्गत गयासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद बिन तुगलक तथा फिरोजशाह तुगलक जैसे शासकों ने सत्ता संभाली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तुगलक वंश के अंतिम काल में 1398 ई. में मध्य एशियाई आक्रमणकारी तैमूर ने दिल्ली पर आक्रमण किया, जिससे सल्तनत की शक्ति को गहरी क्षति पहुंची। तुगलक वंश के पतन के बाद दिल्ली पर सैय्यद वंश (लगभग 1414-1451 ई.) का शासन स्थापित हुआ।
10. ‘अमीर-ए-कोही’ एक नया विभाग किस सुल्तान द्वारा शुरू किया गया था?
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(c)
कृषि के विकास हेतु मुहम्मद बिन तुगलक ने ‘दीवान-ए-अमीर-ए-कोही’ नामक एक नवीन विभाग की स्थापना की। इस विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक एवं तकनीकी सहायता देकर अधिक से अधिक भूमि को कृषि-कार्य के अंतर्गत लाना था। इस प्रयोग के लिए लगभग 60 वर्गमील क्षेत्रफल की भूमि चुनी गई, जहां विभिन्न फसलों के साथ खेती के नए तरीके आजमाए गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह विभाग मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल (1325-1351 ई.) के मध्यवर्ती वर्षों में स्थापित किया गया था, जब सुल्तान कृषि सुधारों पर विशेष ध्यान दे रहा था। इस योजना की असफलता का एक प्रमुख कारण यह भी था कि किसानों को दी गई अग्रिम राशि (सोंढर) का दुरुपयोग कर कुछ किसान भाग गए, जिससे राजकोष को आर्थिक हानि उठानी पड़ी।
1. मध्यकालीन यात्री एवं लेखक इब्नबतूता किस देश का निवासी था?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(b)
इब्नबतूता का जन्म 1304 ई. में मोरक्को के तंजियर नगर में हुआ था। वह एक प्रसिद्ध यात्री, विधिवेत्ता (काज़ी) और इतिहासकार था, जिसने लगभग तीन दशकों तक उत्तरी अफ्रीका, अरब, फारस, मध्य एशिया, भारत, श्रीलंका, मालदीव तथा चीन तक की यात्राएं कीं। मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में वह भारत आया और उसे दिल्ली का काज़ी नियुक्त किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) इब्नबतूता ने अपनी यात्राओं का वर्णन ‘किताब-उल-रेहला’ (रेहला) नामक ग्रंथ में किया, जिसे मोरक्को के सुल्तान के आदेश पर विद्वान इब्न जुज़य ने लिखा था।
2) माना जाता है कि उसने अपने जीवनकाल में लगभग एक लाख बीस हज़ार किलोमीटर की यात्रा की, जो उसे मध्यकाल के सबसे महान यात्रियों में स्थान देता है।
2) माना जाता है कि उसने अपने जीवनकाल में लगभग एक लाख बीस हज़ार किलोमीटर की यात्रा की, जो उसे मध्यकाल के सबसे महान यात्रियों में स्थान देता है।
2. निम्नलिखित में कौन पहला सुल्तान था, जिसने भारत में सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन किया?
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(c)
भारतीय इतिहास में सांकेतिक (टोकन) मुद्रा का प्रयोग सर्वप्रथम मुहम्मद बिन तुगलक ने किया। उसने तांबे एवं कांसे के सिक्के जारी किए और इन्हें चांदी के ‘टंका’ के बराबर मूल्य प्रदान किया। माना जाता है कि यह व्यवस्था चीन में मंगोल शासक कुबलाई खान तथा फारस के इल्खानी शासकों द्वारा अपनाई गई प्रतीक मुद्रा प्रणाली से प्रेरित थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) यह योजना लगभग 1329-30 ई. में लागू की गई थी।
2) यह योजना असफल रही क्योंकि राज्य इन सिक्कों की ढलाई पर नियंत्रण नहीं रख सका, जिससे लोगों ने घर-घर में जाली सिक्के बनाना शुरू कर दिया और अंततः सुल्तान को इन्हें वापस लेकर खजाने से असली सिक्कों के बदले बदलना पड़ा।
2) यह योजना असफल रही क्योंकि राज्य इन सिक्कों की ढलाई पर नियंत्रण नहीं रख सका, जिससे लोगों ने घर-घर में जाली सिक्के बनाना शुरू कर दिया और अंततः सुल्तान को इन्हें वापस लेकर खजाने से असली सिक्कों के बदले बदलना पड़ा।
3. किसने सल्तनत काल में डाक व्यवस्था का विस्तृत विवरण दिया है?
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002
उत्तर-(b)
सल्तनत काल की डाक व्यवस्था का सर्वाधिक विस्तृत वर्णन मोरक्को के यात्री इब्नबतूता ने अपनी पुस्तक ‘रेहला’ में किया है। उसके अनुसार दिल्ली सल्तनत में दो प्रकार की डाक प्रणालियां प्रचलित थीं- घोड़ों पर आधारित ‘उलाक’ (अश्व डाक) और मानव धावकों पर आधारित ‘डाक’ (पद-डाक)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) इब्नबतूता के अनुसार पद-डाक व्यवस्था अश्व-डाक से भी अधिक तेज थी, क्योंकि प्रत्येक एक-तिहाई मील पर धावक तैनात रहते थे जो संदेश को आगे के धावक तक पहुंचाते थे।
2) इस सुव्यवस्थित संचार-व्यवस्था का उपयोग सुल्तान द्वारा गुप्तचरी (बरीद व्यवस्था) तथा शीघ्र शाही आदेश भेजने के लिए भी किया जाता था, जिसकी नींव अलाउद्दीन खिलजी के समय में मजबूत हुई थी।
2) इस सुव्यवस्थित संचार-व्यवस्था का उपयोग सुल्तान द्वारा गुप्तचरी (बरीद व्यवस्था) तथा शीघ्र शाही आदेश भेजने के लिए भी किया जाता था, जिसकी नींव अलाउद्दीन खिलजी के समय में मजबूत हुई थी।
4. निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
कथन (A) : मुहम्मद तुगलक की प्रतीक मुद्रा योजना असफल सिद्ध हुई।
कारण (R) : मुहम्मद तुगलक का मुद्रा निर्गमन पर उचित नियंत्रण नहीं था।
कूट :
कथन (A) : मुहम्मद तुगलक की प्रतीक मुद्रा योजना असफल सिद्ध हुई।
कारण (R) : मुहम्मद तुगलक का मुद्रा निर्गमन पर उचित नियंत्रण नहीं था।
कूट :
U.P.P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(a)
मुहम्मद बिन तुगलक की सांकेतिक (टोकन) मुद्रा योजना असफल रही क्योंकि सुल्तान सिक्कों की ढलाई पर समुचित राजकीय नियंत्रण स्थापित नहीं कर सका। परिणामस्वरूप व्यापारियों और सामान्य जनता ने अपने घरों में बड़े पैमाने पर जाली तांबे के सिक्के ढालना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में अव्यवस्था फैल गई। इस प्रकार कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी ने अपनी पुस्तक ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ में मुहम्मद तुगलक की पांच प्रमुख महत्वाकांक्षी योजनाओं (दोआब में कर वृद्धि, राजधानी परिवर्तन, सांकेतिक मुद्रा, खुरासान अभियान तथा कराचिल अभियान) का उल्लेख किया है।
2) योजना की असफलता के बाद सुल्तान ने आदेश दिया कि लोग अपने टोकन सिक्के राजकोष में जमा कर असली सोने-चांदी के सिक्के प्राप्त कर सकते हैं, जिससे राजकोष पर भारी बोझ पड़ा और कथित रूप से तुगलकाबाद के बाहर तांबे के सिक्कों के ढेर लग गए थे।
2) योजना की असफलता के बाद सुल्तान ने आदेश दिया कि लोग अपने टोकन सिक्के राजकोष में जमा कर असली सोने-चांदी के सिक्के प्राप्त कर सकते हैं, जिससे राजकोष पर भारी बोझ पड़ा और कथित रूप से तुगलकाबाद के बाहर तांबे के सिक्कों के ढेर लग गए थे।
5. भारत में सर्वप्रथम सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन किया था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
दिल्ली सल्तनत में सांकेतिक (टोकन) मुद्रा का प्रचलन सर्वप्रथम मुहम्मद बिन तुगलक ने करवाया। उसने तांबे एवं पीतल मिश्रित सिक्के जारी किए जिनका मूल्य चांदी के सिक्कों के बराबर निर्धारित किया गया। बरनी के अनुसार, राजकोष में चांदी की कमी और साम्राज्य-विस्तार की महत्वाकांक्षी नीतियों को पूरा करने की आवश्यकता ने सुल्तान को यह कदम उठाने हेतु प्रेरित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) चीन में मंगोल शासक कुबलाई खान तथा फारस के इल्खानी शासक गायखातू पहले ही इस प्रकार की प्रतीक मुद्रा प्रणाली का प्रयोग कर चुके थे, जिससे मुहम्मद तुगलक को संभवतः प्रेरणा मिली थी।
2) इस योजना के विफल होने पर सुल्तान को अपनी पुरानी ‘टंका’ (चांदी का सिक्का) तथा ‘जीतल’ (तांबे का सिक्का) की मुद्रा प्रणाली की ओर लौटना पड़ा।
2) इस योजना के विफल होने पर सुल्तान को अपनी पुरानी ‘टंका’ (चांदी का सिक्का) तथा ‘जीतल’ (तांबे का सिक्का) की मुद्रा प्रणाली की ओर लौटना पड़ा।
6. कश्मीर घाटी के अंतिम मुस्लिम शासक युसूफ शाह चक, जिन्हें मुगल सम्राट अकबर द्वारा बिहार में निर्वासित किया गया था दफन हैं-
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(d)
कश्मीर के चक वंश के अंतिम शासक यूसुफ शाह चक को 1586 ई. में मुगल सेनापति कासिम खां द्वारा कश्मीर पर अधिकार कर लेने के बाद अकबर ने धोखे से बंदी बना लिया और उसे बिहार में निर्वासित कर दिया, जहां 1592 ई. में उसकी मृत्यु हो गई। उसे बिहार के नालंदा क्षेत्र में दफनाया गया, जो आज भी एक स्मारक के रूप में स्थित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) यूसुफ शाह चक की पत्नी हब्बा खातून एक प्रसिद्ध कश्मीरी कवयित्री थीं, जिनके लोकगीत आज भी कश्मीरी संस्कृति में लोकप्रिय हैं और उन्हें ‘कश्मीर की कोकिला’ कहा जाता है।
2) यूसुफ शाह चक के निर्वासन के साथ ही कश्मीर पर सदियों से चले आ रहे स्वतंत्र मुस्लिम शासन का अंत हो गया और यह क्षेत्र मुगल साम्राज्य का हिस्सा बन गया।
2) यूसुफ शाह चक के निर्वासन के साथ ही कश्मीर पर सदियों से चले आ रहे स्वतंत्र मुस्लिम शासन का अंत हो गया और यह क्षेत्र मुगल साम्राज्य का हिस्सा बन गया।
7. कथन (A) : मुहम्मद बिन तुगलक ने एक नया स्वर्ण सिक्का जारी किया, जो इब्नबतूता द्वारा दीनार कहलाया गया।
कारण (R) : मुहम्मद बिन तुगलक पश्चिम एशियाई तथा उत्तरी अफ्रीकी देशों के साथ व्यापार में अभिवृद्धि के लिए स्वर्ण सिक्कों की टोकन मुद्रा जारी करना चाहता था।
कूट :
कारण (R) : मुहम्मद बिन तुगलक पश्चिम एशियाई तथा उत्तरी अफ्रीकी देशों के साथ व्यापार में अभिवृद्धि के लिए स्वर्ण सिक्कों की टोकन मुद्रा जारी करना चाहता था।
कूट :
I.A.S. (Pre) 2006
उत्तर-(c)
इब्नबतूता ने मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा जारी किए गए स्वर्ण सिक्के को ‘दीनार’ नाम दिया था, इस अर्थ में कथन (A) सही है। परंतु कारण (R) में दी गई बात गलत है, क्योंकि सुल्तान ने तांबे की सांकेतिक मुद्रा मुख्यतः अपनी सैन्य आवश्यकताओं और राजकोष की कमी को पूरा करने के लिए जारी की थी, न कि पश्चिम एशिया व उत्तरी अफ्रीका के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए। इस प्रकार (A) सही है परंतु (R) गलत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में चांदी का सिक्का ‘अद्ली’ तथा तांबे का सिक्का ‘जीतल’ के नाम से भी प्रचलित था।
2) तुगलक ने अपने सिक्कों पर स्वयं को अब्बासी खलीफा का प्रतिनिधि (नायब-उल-खलीफा) घोषित करते हुए अभिलेख खुदवाए थे और मिस्र के खलीफा से मान्यता प्राप्त करने का प्रयास भी किया था।
2) तुगलक ने अपने सिक्कों पर स्वयं को अब्बासी खलीफा का प्रतिनिधि (नायब-उल-खलीफा) घोषित करते हुए अभिलेख खुदवाए थे और मिस्र के खलीफा से मान्यता प्राप्त करने का प्रयास भी किया था।
8. मूर देश का यात्री इब्नबतूता किसके शासनकाल में भारत आया?
U.P.P.C.S. (Pre) 1994
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(a)
‘मूर’ देश (मोरक्को) का निवासी इब्नबतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल (1325-1351 ई.) में, लगभग 1333 ई. में भारत आया। सुल्तान ने उसकी विद्वता से प्रभावित होकर उसे दिल्ली का काज़ी (मुख्य न्यायाधीश) नियुक्त किया और उसे एक बड़ी जागीर तथा वेतन भी प्रदान किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) भारत में लगभग आठ वर्ष रहने के बाद इब्नबतूता को सुल्तान ने चीन के युवान वंशीय शासक के दरबार में राजदूत बनाकर भेजा था।
2) भारत से चीन जाते समय वह मालाबार तट, मालदीव द्वीप समूह तथा श्रीलंका से होकर गुजरा, और इन क्षेत्रों का विस्तृत विवरण भी उसने अपनी पुस्तक ‘रेहला’ में दिया है।
2) भारत से चीन जाते समय वह मालाबार तट, मालदीव द्वीप समूह तथा श्रीलंका से होकर गुजरा, और इन क्षेत्रों का विस्तृत विवरण भी उसने अपनी पुस्तक ‘रेहला’ में दिया है।
9. इब्नबतूता भारत में किसके शासनकाल में आया?
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(d)
इब्नबतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था। वह सिंध के रास्ते भारत में प्रवेश करते हुए दिल्ली पहुंचा, जहां सुल्तान ने उसका भव्य स्वागत किया तथा उसे प्रशासनिक पद प्रदान किए। उसके यात्रा वृत्तांत में तत्कालीन दिल्ली सल्तनत के प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था तथा सुल्तान के व्यक्तित्व का जीवंत चित्रण मिलता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) इब्नबतूता ने मुहम्मद तुगलक को एक साथ अत्यंत दानी और अत्यंत क्रूर- दोनों रूपों में वर्णित किया है, जो सुल्तान के विरोधाभासी व्यक्तित्व को दर्शाता है।
2) इब्नबतूता के अतिरिक्त इस काल के आरंभ में अमीर खुसरो जैसे विद्वान भी दिल्ली सल्तनत के दरबार से संबद्ध रहे, हालांकि खुसरो की मृत्यु 1325 ई. में, गयासुद्दीन तुगलक के शासनकाल में ही हो गई थी।
2) इब्नबतूता के अतिरिक्त इस काल के आरंभ में अमीर खुसरो जैसे विद्वान भी दिल्ली सल्तनत के दरबार से संबद्ध रहे, हालांकि खुसरो की मृत्यु 1325 ई. में, गयासुद्दीन तुगलक के शासनकाल में ही हो गई थी।
10. “जब उसने राजत्व (Kingship) प्राप्त किया, तो वह शरियत के नियमों और आदेशों से पूर्णतया स्वतंत्र था।” बरनी ने यह कथन किस सुल्तान के लिए कहा?
46th B.P.S.C. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
“जब उसने राजत्व प्राप्त किया, तो वह शरियत के नियमों और आदेशों से पूर्णतया स्वतंत्र था” – यह कथन इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी ने अपनी रचना ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ में मुहम्मद बिन तुगलक के लिए कहा है। बरनी ने सुल्तान को विरोधाभासी गुणों का सम्मिश्रण बताया है- वह विद्वान भी था और निर्दयी भी, दानशील भी था और कठोर भी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1) मुहम्मद बिन तुगलक को दर्शनशास्त्र, गणित, खगोलशास्त्र, चिकित्सा तथा फारसी काव्य का गहन ज्ञान था, जिसके कारण इतिहासकार उसे ‘पागल प्रतिभाशाली’ (Mad Genius) सुल्तान भी कहते हैं।
2) उसके पिता गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना 1320 ई. में की थी, और मुहम्मद बिन तुगलक 1325 ई. में सिंहासन पर बैठा।
2) उसके पिता गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना 1320 ई. में की थी, और मुहम्मद बिन तुगलक 1325 ई. में सिंहासन पर बैठा।
21. बेरोजगारों के सहायतार्थ, दिल्ली के निम्नलिखित सुल्तानों में से किसने ‘रोजगार कार्यालय’ की स्थापना की थी?
U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010
U.P.U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Mains) 2010
U.P.U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Mains) 2010
उत्तर-(d)
फिरोज शाह तुगलक (शासनकाल 1351-1388 ई.) ने बेरोजगारी की समस्या के समाधान हेतु एक विशेष कार्यालय की स्थापना की, जिसमें बेरोजगार व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाते थे और उनकी योग्यता एवं क्षमता का परीक्षण करने के बाद उन्हें उपयुक्त पद पर नियुक्त किया जाता था। यह कदम जन-कल्याण के प्रति उसकी संवेदनशील नीति का परिचायक है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. फिरोज शाह तुगलक ने ‘दार-उल-शफा’ नामक मुफ्त चिकित्सालय भी स्थापित किए थे, जहाँ निर्धन रोगियों का इलाज मुफ्त होता था।
2. उसकी आत्मकथा ‘फतूहात-ए-फिरोजशाही’ में उसकी जनकल्याणकारी योजनाओं का विवरण मिलता है।
2. उसकी आत्मकथा ‘फतूहात-ए-फिरोजशाही’ में उसकी जनकल्याणकारी योजनाओं का विवरण मिलता है।
22. होली त्यौहार के सार्वजनिक उत्सव में भाग लेने वाला दिल्ली का प्रथम सुल्तान कौन था?
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(b)
मुहम्मद बिन तुगलक (शासनकाल 1325-1351 ई.) दिल्ली का वह पहला सुल्तान था जिसने सार्वजनिक रूप से हिंदुओं के होली उत्सव में भाग लिया। वह स्वयं रंग खेलता था और दरबार में होली का आयोजन करवाता था, जो उसकी धार्मिक सहनशीलता और उदार दृष्टिकोण को दर्शाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. मुहम्मद बिन तुगलक एक विद्वान, गणित, खगोलशास्त्र और तर्कशास्त्र का ज्ञाता था, इसलिए इतिहासकार उसे विरोधाभासों का मिश्रण भी मानते हैं।
2. उसने राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करने का प्रसिद्ध (और असफल) प्रयोग किया था।
2. उसने राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करने का प्रसिद्ध (और असफल) प्रयोग किया था।
23. मध्यकालीन भारतीय राजाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) अलाउद्दीन खिलजी ने पहले एक अलग आरिज विभाग स्थापित किया
(b) बलबन ने अपनी सेना के घोड़ों को दागने की पद्धति शुरू की
(c) मुहम्मद बिन तुगलक के बाद दिल्ली की गद्दी पर उसके चाचा बैठे
(d) फिरोज तुगलक ने गुलामों का एक अलग विभाग स्थापित किया
(a) अलाउद्दीन खिलजी ने पहले एक अलग आरिज विभाग स्थापित किया
(b) बलबन ने अपनी सेना के घोड़ों को दागने की पद्धति शुरू की
(c) मुहम्मद बिन तुगलक के बाद दिल्ली की गद्दी पर उसके चाचा बैठे
(d) फिरोज तुगलक ने गुलामों का एक अलग विभाग स्थापित किया
I.A.S. (Pre) 2002
उत्तर-(d)
सल्तनतकालीन प्रशासनिक व्यवस्था में सुल्तानों ने अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न विभागों का गठन किया। बलबन ने सेना की देखरेख हेतु ‘दीवान-ए-अर्ज’ नामक सैन्य विभाग की स्थापना की थी, जबकि घोड़ों को दागने (दाग व्यवस्था) की प्रथा अलाउद्दीन खिलजी ने आरंभ की। मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद उसका चचेरा भाई फिरोज तुगलक गद्दी पर बैठा। फिरोज तुगलक ने ही दासों के लिए पृथक विभाग ‘दीवान-ए-बंदगान’ की स्थापना की, इसलिए विकल्प (d) सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. अलाउद्दीन खिलजी ने सैनिकों को नकद वेतन देने की व्यवस्था भी लागू की थी ताकि केंद्रीय सेना पर नियंत्रण मजबूत रहे।
2. बलबन ने ‘दीवान-ए-अर्ज’ के माध्यम से सैनिकों की भर्ती, वेतन और घोड़ों के रखरखाव की निगरानी की व्यवस्था की थी।
2. बलबन ने ‘दीवान-ए-अर्ज’ के माध्यम से सैनिकों की भर्ती, वेतन और घोड़ों के रखरखाव की निगरानी की व्यवस्था की थी।
24. इतिहासकार बदायूंनी ने किसकी मृत्यु पर कहा था कि “सुल्तान को अपनी प्रजा से और प्रजा को सुल्तान से मुक्ति मिल गई”?
I.A.S. (Pre) 1999
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(d)
मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु थट्टा (सिंध) के निकट 20 मार्च, 1351 ई. को हुई थी, जब वह गुजरात में तागी के नेतृत्व में हुए विद्रोह को दबाने जा रहा था। उसकी मृत्यु पर प्रसिद्ध इतिहासकार बदायूंनी ने टिप्पणी की थी कि सुल्तान को अपनी प्रजा से और प्रजा को अपने सुल्तान से मुक्ति मिल गई, जो उसके कठोर एवं अप्रत्याशित स्वभाव के कारण जनता में व्याप्त असंतोष को दर्शाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. बदायूंनी मुगल काल का प्रसिद्ध इतिहासकार था जिसने ‘मुंतखब-उत-तवारीख’ नामक ग्रंथ की रचना की।
2. मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के समय उसका कोई जीवित पुत्र-उत्तराधिकारी नहीं था, जिसके कारण सेना के दबाव में फिरोज तुगलक को सुल्तान बनाया गया।
2. मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के समय उसका कोई जीवित पुत्र-उत्तराधिकारी नहीं था, जिसके कारण सेना के दबाव में फिरोज तुगलक को सुल्तान बनाया गया।
25. दिल्ली का जो सुल्तान भारत में नहरों के सबसे बड़े जाल का निर्माण करने के लिए प्रसिद्ध है, वह था-
I.A.S. (Pre) 1998
उत्तर-(c)
फिरोज शाह तुगलक मध्यकालीन भारत में सिंचाई हेतु सबसे विस्तृत नहर-तंत्र के निर्माण के लिए जाना जाता है। उसने यमुना, सतलज और घग्घर नदियों से जल लाने वाली कुल पांच प्रमुख नहरें खुदवाई थीं, जिनसे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस अतिरिक्त उपज पर उसने उलेमाओं की सहमति से ‘हक्क-ए-शर्ब’ नामक सिंचाई कर लगाया, ऐसा करने वाला वह दिल्ली का प्रथम सुल्तान था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. फिरोज की प्रमुख नहरों में सबसे लंबी नहर हिसार जिले तक लगभग 150 मील (240 किमी) तक फैली थी।
2. फिरोज तुगलक ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए फलदार वृक्षों के बड़े बाग भी लगवाए, जिनसे राज्य को आय होती थी।
2. फिरोज तुगलक ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए फलदार वृक्षों के बड़े बाग भी लगवाए, जिनसे राज्य को आय होती थी।
26. दिल्ली के किस मुस्लिम शासक के निधन पर एक इतिहासकार ने कहा, “राजा को प्रजा से मुक्ति मिली व उन्हें राजा से”?
M.P.P.C.S. (Pre) 1997
उत्तर-(b)
मुहम्मद बिन तुगलक अपनी महत्वाकांक्षी परंतु अव्यावहारिक योजनाओं—जैसे राजधानी परिवर्तन, सांकेतिक ताम्र मुद्रा का प्रचलन और खुरासान विजय की योजना—के कारण अपने शासनकाल में जनता तथा अमीरों दोनों में अप्रिय हो गया था। निरंतर विद्रोहों से जूझते हुए, सिंध में तागी के विद्रोह को दबाने जाते समय 1351 ई. में उसकी मृत्यु हो गई, जिस पर बदायूंनी की प्रसिद्ध टिप्पणी आती है कि सुल्तान और प्रजा दोनों एक-दूसरे से मुक्त हो गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. मुहम्मद बिन तुगलक की सांकेतिक मुद्रा (टोकन करेंसी) योजना नकली सिक्कों की भरमार के कारण असफल रही, जिसे उसे वापस लेना पड़ा।
2. उसने इब्न बतूता जैसे विदेशी यात्रियों को अपने दरबार में उच्च पदों पर नियुक्त किया था।
2. उसने इब्न बतूता जैसे विदेशी यात्रियों को अपने दरबार में उच्च पदों पर नियुक्त किया था।
27. दिल्ली का सुल्तान जो दान-दक्षिणा के बारे में काफी ध्यान रखता था और इसके लिए एक विभाग ‘दीवान-ए-खैरात’ स्थापित किया, वह था-
R.A.S./R.T.S (Pre) 1999
उत्तर-(b)
फिरोज शाह तुगलक एक धर्मपरायण शासक था जो दान-पुण्य के कार्यों में विशेष रुचि रखता था। उसने ‘दीवान-ए-खैरात’ नामक एक पृथक विभाग की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य निर्धन मुसलमानों, अनाथ बालिकाओं तथा विधवा महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना और गरीब घरानों की लड़कियों के विवाह में सहयोग देना था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. फिरोज तुगलक ने उलेमा वर्ग और धार्मिक संस्थानों को बड़ी मात्रा में जागीरें और भूमि अनुदान दिए, जिससे राज्य में धर्माधिकारियों का प्रभाव बढ़ा।
2. उसने जजिया कर को कठोरता से लागू किया और ब्राह्मणों को भी इस कर के दायरे में लाया, जो पहले इससे मुक्त थे।
2. उसने जजिया कर को कठोरता से लागू किया और ब्राह्मणों को भी इस कर के दायरे में लाया, जो पहले इससे मुक्त थे।
28. सर्वप्रथम लोक निर्माण विभाग की स्थापना की थी-
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2006
उत्तर-(d)
फिरोज शाह तुगलक को सल्तनत काल में सर्वप्रथम ‘लोक निर्माण विभाग’ (दीवान-ए-इमारत) की स्थापना का श्रेय दिया जाता है, जो सार्वजनिक भवनों, सड़कों, नहरों और नगरों के निर्माण-कार्य की देखरेख करता था। ऐतिहासिक उल्लेखों के अनुसार उसने लगभग 300 नए नगरों की स्थापना करवाई, जिनमें फतेहाबाद, हिसार, फिरोजपुर, जौनपुर और फिरोजाबाद प्रमुख हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. फिरोज तुगलक ने दिल्ली में कोटला फिरोज शाह नामक किले का निर्माण करवाया, जहाँ उसने अशोक के एक स्तंभ को टोपरा (हरियाणा) से लाकर स्थापित कराया था।
2. जौनपुर नगर की स्थापना फिरोज तुगलक ने अपने भाई फतह खान के पुत्र जौना (मुहम्मद बिन तुगलक) की स्मृति में करवाई थी।
2. जौनपुर नगर की स्थापना फिरोज तुगलक ने अपने भाई फतह खान के पुत्र जौना (मुहम्मद बिन तुगलक) की स्मृति में करवाई थी।
29. निम्नलिखित में से किस सुल्तान ने बेरोजगारों को रोजगार दिलवाया?
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
फिरोज शाह तुगलक का शासनकाल सल्तनत काल में जन-कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के सबसे निकट माना जाता है। उसने बेरोजगार व्यक्तियों को राजकीय सेवा में नियुक्ति दिलवाने के लिए विशेष व्यवस्था की, जिसके अंतर्गत योग्यता के अनुसार पदों का आवंटन किया जाता था, जिससे आम जनता में सुल्तान के प्रति सद्भावना बढ़ी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. फिरोज तुगलक ने भू-राजस्व प्रणाली में भी सुधार किया तथा राजस्व निर्धारण के लिए ‘दीवान-ए-मुस्तखराज’ विभाग की स्थापना की।
2. उसने गुलामों के पुत्रों को भी सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता देने की नीति अपनाई।
2. उसने गुलामों के पुत्रों को भी सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता देने की नीति अपनाई।
30. निम्नलिखित में से किस सुल्तान के दरबार में सबसे अधिक गुलाम थे?
45th B.P.S.C. (Pre) 2001
उत्तर-(d)
फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल में दास-प्रथा अपने चरमोत्कर्ष पर थी। ऐतिहासिक अनुमानों के अनुसार उसके राज्य में दासों की संख्या लगभग एक लाख अस्सी हजार तक पहुँच गई थी, जो दिल्ली सल्तनत के किसी भी सुल्तान के दरबार में सर्वाधिक थी। इन दासों के प्रबंधन हेतु ‘दीवान-ए-बंदगान’ नामक पृथक विभाग बनाया गया था और प्रत्येक दास को उसकी योग्यता के अनुसार 10 से 100 टंके तक मासिक वेतन तथा कभी-कभी जागीरें भी प्रदान की जाती थीं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:1. फिरोज तुगलक के दासों में से लगभग 12,000 दास विभिन्न शिल्पकलाओं और कारीगरी के कार्यों में प्रशिक्षित किए गए थे।
2. इन दासों की बड़ी संख्या ने फिरोज की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के संघर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे सल्तनत की राजनीतिक स्थिरता प्रभावित हुई।
2. इन दासों की बड़ी संख्या ने फिरोज की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के संघर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे सल्तनत की राजनीतिक स्थिरता प्रभावित हुई।
31. दिल्ली के किस सुल्तान ने इस उद्देश्य से एक ‘अनुवाद विभाग’ की स्थापना की, कि उससे दोनों संप्रदायों के लोगों में एक-दूसरे के विचारों की समझ बेहतर हो सके?
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
उत्तर-(b)
दिल्ली सल्तनत के सुल्तान फिरोज तुगलक ने एक पृथक ‘अनुवाद विभाग’ की स्थापना करवाई थी, जिसका उद्देश्य हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के बीच परस्पर वैचारिक समझ को बढ़ाना था। इस विभाग के अंतर्गत कई संस्कृत ग्रंथों का फारसी भाषा में अनुवाद कराया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) फिरोज तुगलक के निर्देश पर ज्योतिष से संबंधित एक संस्कृत ग्रंथ का फारसी अनुवाद ‘दलायल-ए-फिरोजशाही’ नाम से तैयार किया गया। (2) स्वयं फिरोज तुगलक ने अपनी प्रशासनिक नीतियों एवं कार्यों का वर्णन करते हुए ‘फतूहात-ए-फिरोजशाही’ नामक आत्मकथा भी लिखी थी।
32. दिल्ली के किस सुल्तान ने ब्राह्मणों पर भी जजिया लगाया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
फिरोज तुगलक ने अपने शासनकाल में पहली बार ब्राह्मणों को भी जजिया कर के दायरे में ला दिया, जबकि इससे पहले के सुल्तानों के समय ब्राह्मण वर्ग को इस कर से छूट प्राप्त थी। इस फैसले के विरोध में दिल्ली के ब्राह्मणों ने भूख हड़ताल का सहारा लिया, परंतु अंततः अन्य हिंदुओं ने मिलकर ब्राह्मणों की ओर से यह कर चुकाने का निर्णय लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) फिरोज तुगलक के समय जजिया को कृषि भू-कर (खराज) से अलग करके एक स्वतंत्र कर के रूप में वसूला जाने लगा। (2) शरीयत के अनुसार शासन चलाने के क्रम में फिरोज तुगलक ने राज्य में लागू लगभग दो दर्जन गैर-इस्लामी अतिरिक्त करों को समाप्त भी कर दिया था।
33. दिल्ली सल्तनत के तुगलक राजवंश का अंतिम शासक निम्नलिखित में से कौन था?
I.A.S. (Pre) 2004
उत्तर-(c)
तुगलक वंश का अंतिम शासक नासिर-उद्-दीन महमूद (1394-1412 ई.) था। इसके दुर्बल शासनकाल में केंद्रीय सत्ता का तेजी से पतन हुआ और ख्वाजा जहां ने जौनपुर में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना कर ली। इसी शासनकाल के दौरान दिल्ली की शक्ति इतनी सीमित रह गई थी कि कहा जाता था कि ‘शहंशाह की सल्तनत दिल्ली से पालम तक ही फैली हुई है।’
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) 1398 ई. में मध्य एशियाई आक्रमणकारी तैमूर ने नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में ही दिल्ली पर आक्रमण कर भारी विनाश और लूटपाट की। (2) तैमूर के आक्रमण से उत्पन्न अव्यवस्था के बाद, तुगलक वंश के पतन के पश्चात 1414 ई. में खिज्र खां ने सैय्यद वंश की स्थापना की।
34. दिल्ली के किस सुल्तान ने सबसे ज्यादा नहरों का निर्माण किया था?
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
दिल्ली के सुल्तानों में फिरोज शाह तुगलक ने सिंचाई व्यवस्था के विस्तार पर सबसे अधिक ध्यान दिया और सबसे ज्यादा नहरों का निर्माण कराया। उसने यमुना, सतलुज तथा घाघर जैसी नदियों से जोड़कर कई नहरें खुदवाईं, जिनसे शुष्क क्षेत्रों में कृषि भूमि की सिंचाई संभव हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) फिरोज तुगलक द्वारा बनवाई गई नहरों में से एक नहर हिसार के निकट के क्षेत्र को सिंचित करती थी, जिसके चलते उसने वहाँ ‘हिसार-ए-फिरोजा’ नामक नगर की स्थापना भी की। (2) उसी सिंचित भूमि की उपज पर फिरोज तुगलक ने ‘हक्क-ए-शर्ब’ नामक सिंचाई कर भी लगाया, जो दिल्ली सल्तनत में अपनी तरह का पहला कर था।
35. टोपरा तथा मेरठ से दो अशोक स्तंभ लेख दिल्ली कौन लाया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
फिरोज शाह तुगलक प्राचीन स्मारकों के प्रति विशेष रुचि रखता था और उसने मेरठ तथा टोपरा (वर्तमान अंबाला जिला, हरियाणा) से अशोक के दो स्तंभ-लेखों को दिल्ली लाने की व्यवस्था करवाई। टोपरा से लाए गए स्तंभ को उसने अपने महल और फिरोजाबाद की मस्जिद के निकट पुनः स्थापित कराया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इन स्तंभों पर उत्कीर्ण लेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में थे, जिन्हें उस समय कोई पढ़ नहीं सकता था। (2) सदियों बाद, 1837 ई. में अंग्रेज विद्वान जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी लिपि को समझा और इन अशोक स्तंभ-लेखों का सफलतापूर्वक अनुवाद किया।
36. राज्य के खर्च पर हज की व्यवस्था करने वाला पहला भारतीय शासक था-
I.A.S. (Pre) 1994
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
U.P.P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(b)
राज्य के खर्च पर हज यात्रा की व्यवस्था करवाने वाला पहला भारतीय मुस्लिम शासक फिरोज तुगलक था। उसकी जनकल्याण संबंधी नीतियों में धार्मिक तथा सामाजिक सेवा के अनेक कार्य शामिल थे, जिनमें यह व्यवस्था एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) फिरोज तुगलक ने निर्धन मुस्लिम लड़कियों के विवाह में सहायता के लिए ‘दीवान-ए-खैरात’ नामक एक पृथक विभाग की स्थापना की थी। (2) उसने रोजगार दिलाने हेतु ‘दीवान-ए-इस्तियाक’ नामक एक विभाग भी बनाया, जिससे बेरोजगार व्यक्तियों को राजकीय सेवा में नियुक्ति दी जाती थी।
37. ‘हक्क-ए-शर्ब’ अथवा सिंचाई कर लगाने वाला दिल्ली का प्रथम सुल्तान कौन था?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(d)
‘हक्क-ए-शर्ब’ अर्थात सिंचाई कर लगाने वाला दिल्ली का पहला सुल्तान फिरोज तुगलक था। यह कर उन किसानों की भूमि की उपज पर लगाया जाता था जिन्हें फिरोज द्वारा बनवाई गई नहरों के पानी से सिंचाई की सुविधा मिलती थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) फिरोज तुगलक के शासनकाल में कुल मिलाकर केवल चार प्रकार के कर शरीयत के अनुरूप मान्य थे- खराज, जकात, जजिया तथा खम्स, और इन्हीं के साथ हक्क-ए-शर्ब को भी लागू किया गया। (2) इस सिंचाई कर की दर सामान्यतः उपज के दशमांश (1/10 भाग) के बराबर निर्धारित की गई थी।
38. दिल्ली का कौन-सा सुल्तान अशोक स्तंभ को दिल्ली लाया था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(a)
दिल्ली के सुल्तानों में फिरोजशाह तुगलक ही वह शासक था जो प्राचीन अशोक स्तंभों को दिल्ली लाया था। उसने इन ऐतिहासिक स्मारकों को सम्मान सहित अपनी राजधानी में स्थापित कराकर प्राचीन भारतीय धरोहर के संरक्षण का परिचय दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) समकालीन इतिहासकार शम्स-ए-सिराज अफीफ ने अपनी रचना ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ में इन स्तंभों को विशेष रूप से निर्मित बड़ी गाड़ियों द्वारा दिल्ली लाए जाने का विवरण दिया है। (2) टोपरा से लाया गया अशोक स्तंभ आज भी दिल्ली के ‘फिरोज शाह कोटला’ परिसर में देखा जा सकता है।
39. निम्नलिखित में से किस सुल्तान ने फलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए उपाय किए?
44th B.P.S.C. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
बागवानी में गहरी रुचि रखने वाला सुल्तान फिरोज तुगलक था, जिसने दिल्ली के आसपास लगभग 1200 नए फलों के बाग लगवाए तथा अपने बागों में उगाई जाने वाली विभिन्न फल किस्मों की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष प्रयास किए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) इन बागों से होने वाली आय राजकीय कोष का एक नियमित स्रोत बन गई थी, जिससे राज्य को आर्थिक लाभ भी होता था। (2) फिरोज तुगलक के बागवानी संबंधी कार्यों तथा सिंचाई हेतु बनाई गई नहरों का परस्पर गहरा संबंध था, क्योंकि अधिकांश नए बाग उन्हीं नहरों के पानी से सिंचित क्षेत्रों में लगाए गए थे।
40. फिरोज तुगलक द्वारा स्थापित ‘दार-उल-शफा’ क्या था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2013
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
फिरोज तुगलक द्वारा स्थापित ‘दार-उल-शफा’ एक खैराती अस्पताल था, जिसमें निर्धन तथा रोगी व्यक्तियों का निःशुल्क उपचार किया जाता था और इसके लिए कुशल हकीमों (चिकित्सकों) की नियुक्ति की गई थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: (1) ‘दार-उल-शफा’ के अलावा फिरोज तुगलक ने जनकल्याण हेतु ‘दीवान-ए-खैरात’ (निर्धनों की सहायता हेतु) और ‘दीवान-ए-इस्तियाक’ (रोजगार हेतु) नामक विभाग भी स्थापित किए थे। (2) फिरोज तुगलक का शासनकाल मध्यकालीन भारत में राजकीय जनकल्याण संस्थाओं की स्थापना के लिहाज से अत्यंत उल्लेखनीय माना जाता है।
41. निम्न को उनके कालक्रमानुसार क्रमबद्ध कीजिए-
1. रुक्नुद्दीन 2. मुबारक खान 3. फिरोज शाह तुगलक 4. आलमशाह
नीचे दिए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
1. रुक्नुद्दीन 2. मुबारक खान 3. फिरोज शाह तुगलक 4. आलमशाह
नीचे दिए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
U.P.P.C.S. (Mains) 2003
उत्तर-(c)
सही कालक्रम है- रुक्नुद्दीन फिरोज (1236 ई.), मुबारक खां/मुबारक शाह खिलजी (1316-1320 ई.), फिरोज शाह तुगलक (1351-1388 ई.) तथा आलमशाह (1445-1451 ई.)। रुक्नुद्दीन फिरोज इल्तुतमिश का पुत्र था और उसकी मृत्यु के बाद कुछ समय के लिए सिंहासन पर बैठा, परंतु उसकी अयोग्यता के कारण कुलीनों ने उसे हटाकर रजिया को सुल्तान बनाया। मुबारक खां, अलाउद्दीन खिलजी का पुत्र था जिसने मलिक काफूर की हत्या के बाद स्वयं को सुल्तान घोषित किया। फिरोज शाह तुगलक का शासनकाल प्रशासनिक और निर्माण कार्यों के लिए जाना जाता है- उसने हिसार, फतेहाबाद, जौनपुर तथा फिरोजाबाद जैसे नगर बसाए और दीवान-ए-खैरात तथा दार-उल-शफा (निःशुल्क चिकित्सा केंद्र) जैसी कल्याणकारी संस्थाओं की स्थापना की। आलमशाह सैय्यद वंश का अंतिम शासक था, जिसके पश्चात् बहलोल लोदी ने 1451 ई. में लोदी वंश की स्थापना की।
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