1. मुहम्मद-बिन-कासिम था-
U.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(c)
मुहम्मद-बिन-कासिम एक अरबी सेनापति था जो इराक के गवर्नर हज्जाज-बिन-यूसुफ का भतीजा और दामाद था। सिंध पर आक्रमण के समय उसकी आयु मात्र 17 वर्ष थी, फिर भी उसने असाधारण सैन्य कौशल का प्रदर्शन किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मुहम्मद-बिन-कासिम ने सिंध जीतने के बाद वहाँ के हिंदुओं और बौद्धों को ‘ज़िम्मी’ (संरक्षित प्रजा) का दर्जा दिया और उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की। भारत में पहली बार जजिया कर 712 ई. के युद्ध के पश्चात मुहम्मद बिन कासिम ने ही लगाया।
2. भारत पर पहला मुस्लिम आक्रमण किस वर्ष हुआ?
M.P.P.C.S. (Pre) 1995
उत्तर-(d)
भारत पर पहला सफल मुस्लिम आक्रमण 712 ई. में मुहम्मद-बिन-कासिम द्वारा किया गया था, जबकि विकल्पों में यह वर्ष दिया ही नहीं गया है, इसलिए सही उत्तर ‘इनमें से कोई नहीं’ है। इससे पहले 711 ई. में उबैदुल्लाह के नेतृत्व में एक अभियान भेजा गया था, किंतु वह विफल रहा। उस समय सिंध का शासक दाहिर था, जो एक ब्राह्मण राजा था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अरबों द्वारा सिंध विजय का विस्तृत विवरण फारसी ग्रंथ ‘चचनामा’ में मिलता है, जिसे मूलतः अरबी में लिखा गया था और बाद में 13वीं सदी में अली कूफी ने इसका फारसी में अनुवाद किया।
3. पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था-
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद का जन्म 570 ई. में सऊदी अरब के मक्का नगर में हुआ था। 610 ई. में उन्हें पहली बार अल्लाह का संदेश प्राप्त हुआ और उन्होंने इस्लाम का प्रचार आरंभ किया। 622 ई. में मक्का से मदीना की उनकी यात्रा को ‘हिजरत’ कहा जाता है और इसी वर्ष से इस्लामी हिजरी कैलेंडर की शुरुआत होती है। उनकी मृत्यु 632 ई. में हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:हजरत मुहम्मद को ‘अल-अमीन’ (विश्वासपात्र) की उपाधि दी गई थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही अरब प्रायद्वीप के अधिकांश भाग को इस्लाम के अंतर्गत एकीकृत कर लिया था।
4. भारत पर सर्वप्रथम मुस्लिम आक्रमणकारी थे-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(c)
भारत पर सर्वप्रथम अरब मुसलमानों ने आक्रमण किया था। खलीफा उमर के शासनकाल में 636-637 ई. में थाणे (वर्तमान मुंबई के निकट) पर पहला असफल आक्रमण हुआ। इसके बाद 712 ई. में मुहम्मद-बिन-कासिम के नेतृत्व में सिंध पर पहला सफल अरब आक्रमण हुआ, जिसमें राजा दाहिर पराजित हुआ। अरबों ने सिंध (712 ई.) और मुल्तान (713 ई.) को जीता, परंतु उनका विस्तार इससे आगे नहीं हो सका।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल राजवंशों ने संयुक्त रूप से अरबों को भारत के आंतरिक भागों में घुसने से रोका, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप पर इस्लाम का प्रभाव तात्कालिक रूप से सीमित रहा।
5. हिंद (भारत) की जनता के संदर्भ में ‘हिंदू’ शब्द का प्रथम बार प्रयोग किया था-
I.A.S. (Pre) 1995
उत्तर-(d)
भारत की जनता के लिए ‘हिंदू’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग अरबों ने किया था। यह शब्द ‘सिंधु’ नदी के अरबी उच्चारण से बना है क्योंकि अरबी भाषा में ‘स’ का उच्चारण ‘ह’ होता है। यूनानियों ने इस देश को ‘इंडिया’ और ईरानियों ने ‘हिंदुस्तान’ कहा। ऋग्वेद में ‘भरत’ कबीले के नाम पर देश का नाम ‘भारत’ पड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:‘हिंदू’ शब्द मूलतः एक भौगोलिक और जातीय पहचान था, न कि धार्मिक। इसे धार्मिक अर्थ में परिभाषित करने की प्रक्रिया मध्यकाल में इस्लाम के भारत में प्रसार के बाद धीरे-धीरे विकसित हुई।
6. चचनामा के अनुसार, 6वीं और 7वीं शताब्दी में सिंधु देश की राजधानी क्या थी?
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(b)
चचनामा के अनुसार 6वीं और 7वीं शताब्दी में सिंध की राजधानी ‘अरोड़’ थी। चचनामा एक ऐतिहासिक ग्रंथ है जिसमें सिंध के चच राजवंश और अरबों द्वारा सिंध विजय का विस्तृत वर्णन है। देवल (आधुनिक कराची के निकट) उस समय का एक प्रमुख बंदरगाह नगर था जहाँ मुहम्मद-बिन-कासिम ने सर्वप्रथम समुद्री मार्ग से आक्रमण किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चचनामा को ‘फतहनामा-ए-सिंध’ भी कहा जाता है। इसे 13वीं शताब्दी में मुहम्मद अली कूफी ने अरबी भाषा के मूल ग्रंथ का फारसी में अनुवाद किया, जो सिंध के प्रारंभिक इस्लामी इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
7. भारत में प्रथम मुस्लिम आक्रमणकारी था-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2002
उत्तर-(c)
दिए गए विकल्पों में भारत का प्रथम मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद-बिन-कासिम था, जिसने 712 ई. में सिंध पर विजय प्राप्त की। महमूद गजनी ने 1000-1027 ई. के बीच भारत पर 17 बार आक्रमण किए, जबकि मुहम्मद गोरी ने 12वीं शताब्दी के अंत में आक्रमण किए। कुतुबुद्दीन ऐबक गोरी का दास और दिल्ली सल्तनत का संस्थापक था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अरबों का सिंध और मुल्तान पर अधिकार लगभग 300 वर्षों तक रहा, परंतु वे कभी भी गंगा के मैदानों तक नहीं पहुँच सके। उनके आक्रमण का स्थायी प्रभाव व्यापार, गणित (शून्य का ज्ञान) और खगोलशास्त्र के आदान-प्रदान के रूप में देखा जाता है।
8. मक्का कहां है?
M.P.P.C.S. (Pre) 1995
उत्तर-(d)
मक्का सऊदी अरब के हिजाज़ क्षेत्र में स्थित है और इस्लाम का सबसे पवित्र नगर है। यहाँ ‘मस्जिद-अल-हराम’ और उसके केंद्र में ‘काबा’ स्थित है, जिसकी दिशा में मुस्लिम नमाज़ पढ़ते हैं। प्रतिवर्ष लाखों मुस्लिम यहाँ ‘हज’ करने आते हैं, जो इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मक्का गैर-मुस्लिमों के लिए पूर्णतः प्रतिबंधित नगर है। मक्का के साथ-साथ मदीना (जहाँ पैगंबर मुहम्मद की मस्जिद और मकबरा है) इस्लाम का दूसरा सबसे पवित्र नगर माना जाता है।
9. मुहम्मद बिन कासिम द्वारा सिंध की विजय कब हुई?
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(c)
मुहम्मद-बिन-कासिम ने 712 ई. में सिंध पर विजय प्राप्त की। उसने राजा दाहिर को रावर के युद्ध में पराजित कर मार डाला और सिंध को अरब खलीफा के साम्राज्य का हिस्सा बना लिया। इसके पश्चात 713 ई. में मुल्तान भी अरबों के अधीन हो गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:दाहिर की पराजय और मृत्यु के बाद उनकी बेटियों — सूर्यादेवी और परमाल देवी — को बंधक बनाकर खलीफा के दरबार में भेजा गया। इन दोनों ने साहस दिखाते हुए खलीफा के सामने मुहम्मद-बिन-कासिम पर आरोप लगाए, जिसके परिणामस्वरूप उसे मृत्युदंड दिया गया।
10. इनमें से कौन गजनी राजवंश का संस्थापक था?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
गजनी वंश (यामीनी वंश) का संस्थापक अल्पतगीन था, जो मूलतः सामानी वंश का एक तुर्की दास सेनापति था। उसने 962 ई. में गजनी को अपनी राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। उस समय उत्तर-पश्चिम भारत में हिंदूशाही वंश का शासन था जिसका विस्तार हिंदुकुश पर्वतमाला तक था। अल्पतगीन के बाद सेबुक्तिगीन और फिर महमूद गजनी सत्तासीन हुए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:महमूद गजनी, जो अल्पतगीन का पौत्र था, ने भारत पर 17 बार आक्रमण किए और सोमनाथ मंदिर (1025 ई.) को लूटा। उसे इस्लामी दुनिया में ‘गाज़ी’ (धर्मयोद्धा) की उपाधि दी गई थी।
1. पुराणों का अध्ययन करने वाला प्रथम मुसलमान था-
U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2002
उत्तर-(c)
अलबरूनी (973–1048 ई.) पुराणों का गहन अध्ययन करने वाला पहला मुस्लिम विद्वान था। वह खीवा (ख्वारिज्म) का निवासी था और महमूद गजनवी के साथ भारत आया। उसने संस्कृत सीखकर भारतीय दर्शन, गणित, ज्योतिष और धर्म का व्यापक अध्ययन किया तथा अरबी में ‘तहकीक-ए-हिंद’ (किताब-उल-हिंद) की रचना की, जो तत्कालीन भारतीय समाज का अमूल्य दस्तावेज़ है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलबरूनी ने भारत में जाति-व्यवस्था, खगोलशास्त्र और गणित का भी विस्तृत विश्लेषण किया; उन्होंने पृथ्वी की परिधि की गणना करने का प्रयास किया, जो उस युग में एक असाधारण वैज्ञानिक उपलब्धि थी। इसके अलावा उन्होंने गीता और सांख्य दर्शन का भी अरबी में अनुवाद किया।
2. कथन (A) : महमूद गजनी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किए।
कारण (R) : वह भारत में स्थायी मुस्लिम शासन की स्थापना करना चाहता था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कारण (R) : वह भारत में स्थायी मुस्लिम शासन की स्थापना करना चाहता था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
U. P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2004
उत्तर-(c)
महमूद गजनवी ने 1000 ई. से 1027 ई. के बीच भारत पर 17 बार आक्रमण किए — यह कथन (A) सत्य है। किंतु कारण (R) असत्य है क्योंकि उसके आक्रमणों का एकमात्र उद्देश्य भारत के मंदिरों और नगरों से अपार धन-संपदा लूटकर गजनी को समृद्ध बनाना था, न कि यहाँ स्थायी इस्लामी राज्य स्थापित करना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: महमूद का सबसे विनाशकारी आक्रमण 1025 ई. में सोमनाथ मंदिर (गुजरात) पर हुआ, जहाँ उसने अकूत संपत्ति लूटी और मंदिर को ध्वस्त किया। उसने पंजाब को अपने साम्राज्य में मिलाकर लाहौर को उपराजधानी बनाया, जो भारत में उसकी एकमात्र स्थायी उपस्थिति थी।
3. शाहनामा का लेखक, फरिश्ता किसके दरबार से संबंधित था?
U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2013
उत्तर-(*)
यह प्रश्न त्रुटिपूर्ण है — ‘शाहनामा’ का लेखक फरिश्ता नहीं, बल्कि फिरदौसी है, जो महमूद गजनवी के दरबार का प्रख्यात फारसी कवि था। फिरदौसी ने लगभग 30 वर्षों की कठोर साधना से ‘शाहनामा’ की रचना की, जिसमें ईरान के पौराणिक और ऐतिहासिक नायकों की कथाएं हैं। इसलिए संभावित उत्तर विकल्प (b) है। फरिश्ता ने ‘तारीख-ए-फरिश्ता’ (जिसे ‘गुलशन-ए-इब्राहिमी’ भी कहते हैं) की रचना की, जो भारत के मुस्लिम शासकों का विस्तृत इतिहास है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: फिरदौसी को ‘पूर्व का होमर’ कहा जाता है। किंवदंती के अनुसार महमूद ने फिरदौसी से ‘शाहनामा’ के प्रत्येक श्लोक पर एक स्वर्णमुद्रा देने का वचन दिया था, किंतु बाद में चाँदी के सिक्के भेजे, जिससे रुष्ट होकर फिरदौसी ने वे सिक्के वापस कर दिए और गजनी छोड़ दिया।
4. अलबरूनी भारत में आया था-
U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Pre) 2010
उत्तर-(c)
अलबरूनी महमूद गजनवी के साथ ग्यारहवीं शताब्दी ई. में भारत आया। उसका जन्म 973 ई. में हुआ था और वह 1017 ई. के आसपास भारत पहुँचा। यहाँ उसने वर्षों तक रहकर संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन किया और भारतीय विज्ञान, दर्शन व संस्कृति को अरब जगत तक पहुँचाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलबरूनी ने भारतीयों की बौद्धिक श्रेष्ठता को स्वीकार करते हुए लिखा कि हिंदू विद्वान विदेशियों के साथ ज्ञान साझा करने में संकोच करते हैं। उन्होंने आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त की रचनाओं का अरबी में अनुवाद किया, जिससे भारतीय गणित और खगोलशास्त्र इस्लामी जगत में फैला।
5. निम्न में से कौन चंदेल शासक महमूद गजनवी से पराजित नहीं हुआ था?
U.P. P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(b)
चंदेल शासक विद्याधर (शासनकाल लगभग 1002–1035 ई.) महमूद गजनवी से पराजित नहीं हुए। महमूद ने 1019-20 ई. और पुनः 1022 ई. में चंदेलों पर आक्रमण किए, किंतु दोनों बार विद्याधर ने कूटनीतिक चातुर्य से रात्रि के अंधकार में अपनी सेना को सुरक्षित पीछे हटा लिया। मुस्लिम स्रोत स्वयं उन्हें तत्कालीन भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली हिंदू शासक मानते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: विद्याधर ने राजा राज्यपाल (कन्नौज) को, जो महमूद के सामने बिना युद्ध किए झुक गया था, दंडस्वरूप मृत्युदंड दिया — यह घटना उनकी राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चंदेल वंश खजुराहो के विश्वप्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण के लिए भी जाना जाता है।
6. महमूद गज़नी के साथ भारत आने वाला मुस्लिम विद्वान था-
Jharkhand P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(b)
महमूद गजनवी के साथ भारत आने वाला प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वान अलबरूनी था। वह बहुभाषाविद था — अरबी, फारसी, संस्कृत, ग्रीक और हिब्रू भाषाओं का जानकार। भारत प्रवास के दौरान उसने सामाजिक, धार्मिक और वैज्ञानिक विषयों पर गहन शोध किया। इब्नबतूता मुहम्मद बिन तुगलक के काल में (14वीं सदी) भारत आया, जबकि अमीर खुसरो दिल्ली सल्तनत के दरबारी कवि थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलबरूनी ने ‘तहकीक-ए-हिंद’ में भारत की भौगोलिक स्थिति, नदियों, पर्वतों और तीर्थस्थलों का भी वर्णन किया है। उन्होंने भारत और यूनानी दर्शन के बीच तुलनात्मक अध्ययन भी किया, जो मध्यकालीन तुलनात्मक धर्म-दर्शन का एक दुर्लभ उदाहरण है।
7. ‘शाहनामा’ का लेखक कौन था?
M.P.P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(b)
‘शाहनामा’ के रचयिता फारसी महाकवि फिरदौसी हैं, जिनका पूरा नाम अबुल कासिम मंसूर था। यह महाकाव्य लगभग 60,000 द्विपदियों (शेरों) में लिखा गया है और ईरान के पौराणिक एवं ऐतिहासिक राजाओं की वीरगाथाएं प्रस्तुत करता है। फिरदौसी को महमूद गजनवी का आश्रय प्राप्त था और वे गजनवी दरबार के रत्न माने जाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ‘शाहनामा’ को फारसी साहित्य का सर्वोच्च ग्रंथ माना जाता है और इसे रचने में फिरदौसी को लगभग 30 वर्ष लगे। यह ग्रंथ फारसी भाषा के संरक्षण में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाता है क्योंकि इसमें अरबी शब्दों का प्रयोग न्यूनतम रखा गया।
8. निम्नलिखित कथनों में से कौन अलबरूनी के संबंध में सही नहीं है?
U.P.P.S.C. (R.I.) 2014
उत्तर-(a)
अलबरूनी धर्मनिरपेक्ष लेखक नहीं थे — वे एक कट्टर सुन्नी मुसलमान थे और उनके लेखन में इस्लामी दृष्टिकोण स्पष्ट झलकता है। हालाँकि उन्होंने हिंदू धर्म और दर्शन को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया, किंतु उनका आधार इस्लामी विश्वदृष्टि ही था। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान और त्रिकोणमिति के विशेषज्ञ थे तथा उनका ग्रंथ उस काल के भारत का सजीव चित्रण करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अलबरूनी ने भारत में प्रचलित ज्योतिष और वर्ण-व्यवस्था का विश्लेषण करते हुए इसकी तुलना ईरानी समाज-व्यवस्था से की। उन्होंने ‘किताब-उस-सैदला’ नामक ग्रंथ भी लिखा, जो औषधि विज्ञान पर आधारित है और जिसमें भारतीय एवं यूनानी वनस्पतियों की जानकारी दी गई है।
9. महमूद गजनवी का दरबारी इतिहासकार कौन था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(b)
महमूद गजनवी का दरबारी इतिहासकार उत्बी था, जिसने ‘किताब-उल-यामिनी’ (जिसे ‘तारीख-ए-यामिनी’ भी कहते हैं) नामक ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में महमूद के शासनकाल और भारत के विरुद्ध उसके अभियानों का विस्तृत विवरण मिलता है। महमूद विद्वानों और कलाकारों का प्रबल संरक्षक था और उसने अपने दरबार में अपने युग के श्रेष्ठ मेधावियों को एकत्रित किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: उत्बी ने ‘किताब-उल-यामिनी’ अरबी भाषा में लिखी। ‘यामिनी’ शब्द महमूद की उपाधि ‘यामीन-उद-दौला’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘राज्य का दायाँ हाथ’। यह उपाधि उसे खलीफा अल-कादिर ने प्रदान की थी। महमूद के दरबार में उत्बी के अलावा फिरदौसी, अलबरूनी, फर्रुखी और मसूद-ए-सलमान जैसे प्रख्यात विद्वान भी थे।
10. महमूद गजनी के साथ भारत आने वाला प्रसिद्ध इतिहासकार कौन था?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
महमूद गजनी के साथ भारत आने वाला प्रसिद्ध इतिहासकार और विद्वान अलबरूनी था। वह केवल इतिहासकार ही नहीं, बल्कि गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, दार्शनिक और भाषाविद भी था। उसने भारत में रहकर संस्कृत में दक्षता प्राप्त की और भारतीय ज्ञान-परंपरा को इस्लामी जगत तक पहुँचाया। फरिश्ता 16वीं-17वीं शताब्दी के इतिहासकार थे, इब्नबतूता 14वीं सदी में तुगलक काल में आए और अफीफ भी तुगलक-कालीन इतिहासकार थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आधुनिक इतिहासकारों ने अलबरूनी को ‘भारतविद्या (Indology) का जनक’ कहा है। उनकी ‘तहकीक-ए-हिंद’ में 11वीं शताब्दी के भारत की सामाजिक संरचना, मंदिर-व्यवस्था, शिक्षा-पद्धति और भूगोल का ऐसा विवरण मिलता है जो अन्यत्र दुर्लभ है।
21. मुहम्मद गोरी को सबसे पहले किसने पराजित किया?
U.P. P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(a)
1178 ई. में मुहम्मद गोरी ने गुजरात पर आक्रमण किया। उस समय गुजरात के चालुक्य (सोलंकी) वंश के शासक भीम II (मूलराज II) थे। उनकी साहसी विधवा माता नायिका देवी ने सेना का नेतृत्व किया और आबू पर्वत (माउंट आबू) के निकट कस्बा गड्डारघट्टा के पास गोरी को करारी शिकस्त दी — यह भारत में मुहम्मद गोरी की पहली और सबसे बड़ी पराजय थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:नायिका देवी कदम्ब वंश की राजकुमारी थीं और उनकी इस विजय की चर्चा मेरुतुंग रचित ‘प्रबंध चिंतामणि’ में मिलती है। इस पराजय के बाद गोरी लगभग सात वर्षों तक भारत पर आक्रमण करने का साहस नहीं जुटा सका।
22. किस मुस्लिम शासक के सिक्कों पर देवी लक्ष्मी की आकृति बनी है?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(a)
मुहम्मद गोरी ने भारत विजय के प्रारंभिक काल में ऐसे सिक्के जारी किए जिनके एक तरफ देवी लक्ष्मी की आकृति और दूसरी तरफ अरबी में कलमा अंकित था। यह उसकी व्यावहारिक नीति का प्रमाण था — स्थानीय हिंदू जनता का विश्वास जीतने हेतु परिचित धार्मिक प्रतीकों का उपयोग किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:ये सिक्के गोरी द्वारा पृथ्वीराज चौहान से विजित क्षेत्रों में प्रचलन के लिए ढाले गए थे। गोरी के इन द्विभाषिक एवं द्विधर्मी सिक्कों को भारतीय मुद्राशास्त्र (Numismatics) में अनूठा उदाहरण माना जाता है, क्योंकि किसी भी अन्य मुस्लिम शासक ने हिंदू देवी की आकृति वाले सिक्के उतने व्यापक पैमाने पर नहीं चलाए।
23. निम्नलिखित में से किसने महमूद गजनी के हमले के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण किया?
Jharkhand P.S.C. (Mains) 2016
उत्तर-(b)
1025-26 ई. में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर अपार धन-संपदा लूटी और शिवलिंग को खंडित किया। उस समय गुजरात का शासक चालुक्य (सोलंकी) वंश का भीमदेव प्रथम (1022–1063 ई.) था। महमूद के लौटने के बाद भीमदेव प्रथम ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:महमूद ने सोमनाथ मंदिर के विशाल द्वार (Somnath Gates) भी उखाड़ कर गजनी ले गया था जिन्हें बाद में 1842 में ब्रिटिश गवर्नर-जनरल एलनबरो ने वापस लाने का असफल प्रयास किया। सोमनाथ मंदिर को इतिहास में कुल छह बार ध्वस्त और पुनर्निर्मित किया गया, और वर्तमान मंदिर का निर्माण 1951 में सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर हुआ।
24. निम्नलिखित नामों को कालानुक्रम में व्यवस्थित करें व नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर प्राप्त करें-
1. चंगेज खां 2. महमूद गजनवी
3. मोहम्मद गोरी 4. तैमूर
कूट :
1. चंगेज खां 2. महमूद गजनवी
3. मोहम्मद गोरी 4. तैमूर
कूट :
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(b)
इन चारों आक्रांताओं का सही कालक्रम है — महमूद गजनवी (971–1030 ई.), मुहम्मद गोरी (1149–1206 ई.), चंगेज खां (1162–1227 ई., भारत पर संभावित आक्रमण का भय 1221 ई. में) और तैमूर लंग (1336–1405 ई., भारत पर आक्रमण 1398 ई.)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:तैमूर के आक्रमण के समय दिल्ली का सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद तुगलक था; तैमूर ने दिल्ली में भीषण नरसंहार किया और अपार लूट के साथ वापस लौटा। चंगेज खां ने स्वयं भारत पर आक्रमण नहीं किया किंतु उसके सेनापति ने सिंधु तक घुसपैठ की थी।
25. किसने एक तरफ संस्कृत मुद्रालेख के साथ चांदी के सिक्के निर्गत किए?
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(b)
महमूद गजनवी ने चांदी के द्विभाषिक सिक्के जारी किए जिनके एक तरफ अरबी में इस्लामी कलमा और दूसरी तरफ देवनागरी लिपि में संस्कृत मुद्रालेख अंकित था। ये सिक्के भारत में अपने अधिकृत क्षेत्रों में व्यापार सुगम बनाने के उद्देश्य से जारी किए गए थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:महमूद गजनवी ने भारत पर 17 आक्रमण किए (999–1027 ई.) और प्रत्येक बार लूट की भारी संपत्ति गजनी ले जाता था — इसी धन से उसने गजनी को मध्य एशिया की एक भव्य सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित किया तथा विद्वान अलबरूनी को भारत लाकर ‘किताब उल-हिंद’ लिखवाई।
26. युद्ध जिसमें भारत में मुस्लिम शक्ति की स्थापना हुई-
U.P. P.C.S. (Pre) 1995
उत्तर-(b)
1192 ई. में हरियाणा के तराइन (तरावड़ी) मैदान में हुए द्वितीय युद्ध में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को परास्त किया। इस निर्णायक युद्ध के बाद उत्तर भारत में केंद्रीय मुस्लिम राजनीतिक सत्ता की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ जो बाद में दिल्ली सल्तनत के रूप में फली-फूली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:तराइन के प्रथम युद्ध (1191 ई.) में पृथ्वीराज चौहान ने गोरी को हराकर बंदी बना लिया था, लेकिन उदारतापूर्वक छोड़ दिया — यह ऐतिहासिक भूल बाद में घातक सिद्ध हुई। पृथ्वीराज रासो के अनुसार इस युद्ध में 150 से अधिक राजपूत राजाओं ने एकजुट होकर गोरी का सामना किया था।
27. निम्नलिखित में से मध्य एशिया के किस शासक ने 1192 ई. में उत्तर भारत को जीता?
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
उत्तर-(c)
अफगानिस्तान के घोर (गोर) प्रांत से आए शिहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी ने 1192 ई. में तराइन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को हराकर उत्तर भारत पर अपना वर्चस्व स्थापित किया। उसका पहला भारतीय अभियान 1175 ई. में मुल्तान के विरुद्ध था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मुहम्मद गोरी की 1206 ई. में हत्या हो गई और उसके कोई पुत्र न होने के कारण उसके गुलाम (मामलुक) सरदारों ने सत्ता संभाली — इस प्रकार दिल्ली में गुलाम वंश (1206–1290 ई.) की नींव पड़ी, जिसका पहला सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक था।
28. मुहम्मद गोरी ने जयचंद को किस युद्ध में पराजित किया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2008
उत्तर-(c)
1194 ई. में यमुना तट पर स्थित चंदावर (वर्तमान फिरोजाबाद जिला, उत्तर प्रदेश) के मैदान में मुहम्मद गोरी ने कन्नौज के शक्तिशाली गहड़वाल (राठौड़) वंशी राजा जयचंद को परास्त कर मार डाला। इस विजय से गंगा-यमुना दोआब सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश और बनारस मुस्लिम आधिपत्य में आ गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:जयचंद का पृथ्वीराज चौहान से पुराना वैर था और ऐसी मान्यता है कि इसी शत्रुता के कारण उसने तराइन के युद्ध में पृथ्वीराज की सहायता नहीं की, जो परोक्ष रूप से उसके अपने पतन का कारण बनी। जयचंद के पतन के साथ उत्तर भारत का अंतिम बड़ा हिंदू साम्राज्य भी समाप्त हो गया।
29. निम्नलिखित में से कौन राजा मुहम्मद गोरी द्वारा चंदावर के युद्ध में पराजित किया गया था?
U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016
उत्तर-(b)
1194 ई. के चंदावर युद्ध में मुहम्मद गोरी ने जयचंद को पराजित एवं वध किया। जयचंद कन्नौज के गहड़वाल वंश का सबसे प्रतापी राजा था और उसका साम्राज्य बनारस, गया तथा गंगा के मैदानी क्षेत्रों तक फैला था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:जयचंद ने ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि धारण की थी और उसके दरबार में प्रसिद्ध संस्कृत कवि जयदेव (गीतगोविंद के रचयिता) रहते थे — हालांकि कुछ इतिहासकार इस संबंध को विवादास्पद मानते हैं। जयचंद की मृत्यु के बाद गहड़वाल वंश का अस्तित्व समाप्त हो गया।
30. 1194 के चंदावर के युद्ध में मुहम्मद गोरी ने किसे हराया था?
M.P. P.C.S. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
1194 ई. के चंदावर युद्ध में मुहम्मद गोरी के हाथों जयचंद की पराजय और मृत्यु हुई। गोरी की सेना का नेतृत्व उसके विश्वस्त सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने किया था। इस युद्ध में भारी मात्रा में धन-संपदा लूटी गई जिसमें बनारस के मंदिरों की अकूत संपत्ति भी शामिल थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:चंदावर की विजय के पश्चात गोरी के प्रतिनिधि के रूप में कुतुबुद्दीन ऐबक ने उत्तर भारत में मुस्लिम सत्ता को सुदृढ़ किया। 1206 ई. में गोरी की हत्या के बाद ऐबक ने स्वतंत्र रूप से दिल्ली सल्तनत की स्थापना की और कुतुब मीनार का निर्माण आरंभ करवाया।
31. रेशम बुनकरों की श्रेणी की जानकारी निम्नलिखित किस शिलालेख से मिलती है?
M.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित दशपुर (प्राचीन दशपुर नगरी) से प्राप्त शिलालेख गुप्तकालीन राजा कुमारगुप्त प्रथम (415–455 ई.) के शासनकाल से संबंधित है। इस अभिलेख में गुजरात (लाट प्रदेश) से आकर दशपुर में बसी रेशम बुनकरों की श्रेणी ‘पट्टवाय श्रेणी’ का उल्लेख है, जिसने वहाँ एक सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था। अभिलेख में गवर्नर बंधुवर्मा का भी नाम आता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:यह अभिलेख गुप्त काल में व्यापारिक श्रेणियों (guilds) की सामाजिक एवं धार्मिक भूमिका का दुर्लभ प्रमाण है — श्रेणियाँ केवल व्यापार ही नहीं करती थीं, बल्कि मंदिर निर्माण जैसे धर्मार्थ कार्यों में भी योगदान देती थीं। यह शिलालेख संस्कृत में है और इसे दो अलग-अलग तिथियों पर उत्कीर्ण किया गया था।
32. भारत में मुहम्मद गोरी ने किसको प्रथम अक्ता प्रदान किया था?
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में विजय के उपरांत मुहम्मद गोरी ने अपने विश्वस्त गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को भारत का प्रतिनिधि नियुक्त किया और उसे पहला ‘अक्ता’ (भूक्षेत्र) प्रदान किया। अक्ता प्रथा एक प्रशासनिक व्यवस्था थी जिसमें राजस्व वसूली के बदले सैनिक सेवा का दायित्व होता था। ऐबक ने 1192 से 1206 ई. तक गोरी के प्रतिनिधि के रूप में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों पर शासन किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:अक्ता प्रथा मूलतः अब्बासी खिलाफत में प्रचलित ‘इक्ता’ व्यवस्था का भारतीय रूपांतरण थी और दिल्ली सल्तनत में यह राजस्व प्रशासन की रीढ़ बनी। कुतुबुद्दीन ऐबक को उसकी उदारता के कारण ‘लाखबख्श’ (लाखों देने वाला) भी कहा जाता था।
33. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
कथन (A) : भारत पर तुर्की आक्रमण सफल हुए।
कारण (R) : उत्तर भारत में राजनीतिक एकता नहीं थी।
नीचे दिए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।
कथन (A) : भारत पर तुर्की आक्रमण सफल हुए।
कारण (R) : उत्तर भारत में राजनीतिक एकता नहीं थी।
नीचे दिए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।
U.P.P.C.S. (Pre) 2018
उत्तर-(a)
तुर्की आक्रमणों की सफलता के पीछे उत्तर भारत की राजनीतिक विखंडित स्थिति एक प्रमुख कारण थी। 12वीं शताब्दी में उत्तर भारत में कोई एकीकृत शक्तिशाली साम्राज्य नहीं था — चाहमान (चौहान), गहड़वाल, चंदेल और परमार जैसे राजपूत वंश आपसी वैर में उलझे रहते थे। इसी कारण वे मुहम्मद गोरी के विरुद्ध संयुक्त मोर्चा नहीं बना सके। अतः कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:इसके अलावा तुर्की सेना की श्रेष्ठ घुड़सवार युद्धनीति और हल्की गतिशील घुड़सवार टुकड़ियों का प्रयोग भारतीय हाथी-आधारित सेना के विरुद्ध निर्णायक रूप से प्रभावी रहा। मुहम्मद गोरी स्वयं एक कुशल सामरिक रणनीतिकार था जो युद्धभूमि में परिस्थिति के अनुसार रणनीति बदलने में माहिर था।
34. ‘नालंदा विहार’ का विध्वंस किया था-
60th to 62nd B.P.S.C. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने लगभग 1193 ई. में बिहार पर आक्रमण कर नालंदा विहार को ध्वस्त एवं अग्नि को समर्पित किया। नालंदा विश्वविद्यालय उस समय बौद्ध शिक्षा का सर्वोच्च केंद्र था जहाँ दस हजार से अधिक विद्यार्थी और दो हजार से अधिक शिक्षक थे। बख्तियार ने मठों में रहने वाले बौद्ध भिक्षुओं को मारा और विशाल पुस्तकालय को जला दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:तिब्बती बौद्ध ग्रंथ ‘पाग-सम-जोन-जांग’ के अनुसार इस पुस्तकालय की आग इतनी विकराल थी कि वह कई महीनों तक जलती रही। नालंदा के साथ-साथ बख्तियार ने विक्रमशिला और ओदन्तपुरी विहारों को भी नष्ट किया, जिससे भारत में बौद्ध धर्म और शिक्षा का केंद्र लगभग समाप्त हो गया।
35. बिहार का प्रथम मुस्लिम विजेता कौन था?
60th to 62nd B.P.S.C. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी बिहार का पहला मुस्लिम विजेता था। वह मूलतः अफगानिस्तान के खिलजी जनजाति से था और मुहम्मद गोरी की सेना में एक साधारण सैनिक के रूप में शामिल हुआ था। 1193 ई. के आसपास उसने बिहार पर विजय प्राप्त की, बौद्ध विहारों को नष्ट किया और उदन्तपुरी को अपनी राजधानी बनाया। बाद में 1203-04 ई. तक उसने बंगाल में नदिया (लखनौती) पर भी कब्जा किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बख्तियार खिलजी की बिहार विजय से वहाँ पल-पोसकर बड़े हुए बौद्ध धर्म का व्यावहारिक रूप से पतन हो गया। उसने 1205-06 ई. में तिब्बत अभियान चलाया किंतु वहाँ बुरी तरह पराजित हुआ और लौटते समय उसकी मृत्यु हो गई।
36. मुहम्मद गोरी के किस दास ने बंगाल एवं बिहार पर विजय प्राप्त की?
U.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(c)
मुहम्मद गोरी के सेवक इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने बिहार (1193 ई.) और बंगाल (1203-04 ई.) पर विजय प्राप्त की। बंगाल विजय के समय वहाँ का अंतिम सेन वंशी शासक लक्ष्मणसेन था, जो नदिया से भागकर ढाका के पास चला गया। बख्तियार ने लखनौती (वर्तमान मालदा, पश्चिम बंगाल के निकट) को अपनी राजधानी बनाई और पूर्वी भारत में मुस्लिम सत्ता की नींव रखी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:बख्तियार खिलजी की विजय के पश्चात बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु नेपाल और तिब्बत की ओर पलायन कर गए, जिससे बौद्ध धर्म का प्रसार हिमालयी क्षेत्रों में हुआ। बंगाल में मुस्लिम शासन की यही नींव आगे चलकर बंगाल सल्तनत के रूप में विकसित हुई।
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