1. जहांगीर ने मुख्यतया निम्नलिखित में से किस कला को संरक्षण दिया था?
U.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(a)
जहांगीर चित्रकला का असाधारण पारखी था और उसने इस कला को सबसे अधिक राज्याश्रय दिया। वह केवल संरक्षक ही नहीं था, बल्कि उसकी कला-दृष्टि इतनी पैनी थी कि वह किसी भी संयुक्त चित्र में अलग-अलग चित्रकारों के योगदान को पहचान सकता था। उसके काल में पशु-पक्षियों और व्यक्ति-चित्रण (portrait) की कला चरम पर पहुँची।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर की आत्मकथा तुजुक-ए-जहांगीरी में उसने स्वयं अनेक चित्रकारों की प्रशंसा की है और चित्रों का विस्तृत विवरण दिया है — यह ग्रंथ मुगल चित्रकला का एक प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोत माना जाता है। उसके दरबारी चित्रकार उस्ताद मंसूर को नादिर-उल-अस्र (युग का अद्वितीय) की उपाधि दी गई थी।
2. दास्तान-ए-अमीर हम्जा का चित्रांकन किसके द्वारा किया गया?
46th B.P.S.C. (Pre) 2004
उत्तर-(a)
दास्तान-ए-अमीर हम्जा मुगल चित्रकला की सबसे महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। इसे हुमायूं के काल में प्रारंभ किया गया और अकबर के शासनकाल में पूर्ण किया गया। पहले मीर सैयद अली और बाद में अब्दुस्समद की देखरेख में लगभग 50 चित्रकारों ने मिलकर इसे तैयार किया। इस ग्रंथ में कुल लगभग 1,400 चित्र थे जो कपड़े पर बनाए गए थे, जो उस समय की दृष्टि से अत्यंत असाधारण था। यह ग्रंथ पैगंबर मुहम्मद के चाचा अमीर हम्जा के वीरतापूर्ण कारनामों पर आधारित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस ग्रंथ के चित्र सामान्य कागज पर नहीं, बल्कि कपड़े पर बनाए गए थे और इनका आकार असामान्य रूप से बड़ा (लगभग 68 × 53 सेमी) था, जो मुगल चित्रकला में अद्वितीय है। इस परियोजना को पूरा होने में लगभग 15 वर्ष लगे थे।
3. मुगल चित्रकला ने किसके शासनकाल में उन्नति की?
Uttarakhand Lower Sub. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
जहांगीर के शासनकाल को मुगल चित्रकला का स्वर्णयुग कहा जाता है। इस काल में चित्रकला की रेखाएँ अधिक सूक्ष्म और रंग-संयोजन अधिक परिष्कृत हो गया। उसके काल के प्रमुख चित्रकारों में अबुल हसन, उस्ताद मंसूर, बिशनदास और फारुख बेग उल्लेखनीय हैं। अबुल हसन ने जहांगीर के सिंहासनारोहण का ऐतिहासिक चित्र बनाया था जिसे तुजुक-ए-जहांगीरी के मुखपृष्ठ पर स्थान मिला।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर के काल में चित्रों में पहली बार प्रकाश-छाया (chiaroscuro) और परिप्रेक्ष्य (perspective) का प्रयोग यूरोपीय प्रभाव से हुआ। साथ ही इस काल में हाशिया-चित्रण (border painting) की कला अत्यंत विकसित हुई, जिसमें पुस्तकों के हाशियों पर बारीक पशु-पक्षियों के चित्र बनाए जाते थे।
4. चित्रकला की मुगल शैली का प्रारंभ किया था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2009 | U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010 | U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
मुगल चित्रकला की नींव हुमायूं ने रखी। ईरान में निर्वासन के दौरान उसने दो प्रतिभाशाली फारसी चित्रकारों — मीर सैयद अली और अब्दुस्समद — को अपनी सेवा में लिया। इन दोनों चित्रकारों ने भारत आकर मुगल चित्रकला का बीज बोया और एक व्यवस्थित कला-विद्यालय की स्थापना की, जो आगे अकबर के काल में पल्लवित हुई। फारसी सफ़वी शैली से प्रेरित होकर भारतीय तत्त्वों के मिश्रण से एक नई मिश्रित शैली का जन्म हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अब्दुस्समद को शीरीन कलम (मीठी कलम) की उपाधि दी गई थी और वे अकबर के काल में दीवान-ए-तान (राजस्व विभाग के अधिकारी) भी बने — यह दर्शाता है कि मुगल काल में चित्रकारों को उच्च प्रशासनिक पदों पर भी नियुक्त किया जाता था।
5. चित्रकला की मुगल कलम भारतीय लघुचित्र कला की रीढ़ है। निम्नलिखित में से किस कलम पर मुगल चित्रकला का प्रभाव नहीं पड़ा?
I.A.S. (Pre) 1995
उत्तर-(d)
मुगल चित्रकला का प्रभाव पहाड़ी, राजस्थानी और कांगड़ा चित्रशैलियों पर स्पष्ट रूप से दिखता है — इन शैलियों ने मुगल रंग-पद्धति, पोशाक-चित्रण और रचना-संयोजन को आत्मसात किया। किंतु कालीघाट चित्रकला (कोलकाता, 19वीं सदी) पर मुगल प्रभाव नहीं है। यह शैली कालीघाट मंदिर के निकट पटुआ (pat) कलाकारों द्वारा विकसित हुई और इसमें स्थानीय धार्मिक विषय, ब्रिटिश उपनिवेशवाद की आलोचना और बंगाली सामाजिक जीवन के दृश्य प्रमुखता से मिलते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कालीघाट चित्रकला को भारत की पहली लोकप्रिय कला (popular art) माना जाता है क्योंकि ये चित्र मंदिर के तीर्थयात्रियों को सस्ते दामों पर बेचे जाते थे। इसकी굵은 काली रेखाओं और सरल रूपाकारों ने आधुनिक भारतीय कला को भी प्रभावित किया।
6. यूरोपीय चित्रकारी (European paintings) का प्रवेश किसके दरबार में हुआ?
63rd B.P.S.C. (Pre) 2017
उत्तर-(b)
यूरोपीय चित्रकला का मुगल दरबार में प्रवेश अकबर के समय पुर्तगालियों के माध्यम से हुआ। पुर्तगाली मिशनरी गोवा से अकबर के दरबार में ईसाई धार्मिक चित्र (जैसे — वर्जिन मेरी और बाल ईसा के चित्र) लेकर आए। मुगल चित्रकारों ने यूरोपीय शैली से दो महत्त्वपूर्ण तकनीकें सीखीं — व्यक्ति-चित्रण (individual portrait) और दूरदृष्टि (perspective/foreshortening), जिसमें दूर की वस्तुएँ छोटी दिखाई जाती हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के दरबार में मिस्किन एक प्रमुख चित्रकार था जिसने यूरोपीय शैली को अपनाया। इसके अतिरिक्त, 1580 ई. में अकबर के निमंत्रण पर फतेहपुर सीकरी आए जेसुइट पादरियों (Father Acquaviva आदि) ने जो चित्र भेंट किए, वे मुगल चित्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।
7. किस मुगल शासक ने चित्रकारी के लिए कारखाने बनवाए?
66th B.P.S.C. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
हुमायूं ने चित्रकारी के लिए एक विशेष कारखाना स्थापित किया था जो उसके पुस्तकालय से जुड़ा हुआ था। इसे निगार खाना या तस्वीर खाना कहा जाता था। यह कदम मुगल राज्य की ओर से चित्रकला को संस्थागत संरक्षण देने का पहला प्रयास था। बिहार लोक सेवा आयोग ने अपनी प्रारंभिक उत्तर-पत्रिका में इस प्रश्न का उत्तर (b) अकबर को माना था, जो विवादास्पद रहा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हुमायूं काबुल और ईरान में निर्वासन के दौरान सफ़वी दरबार की चित्रकला से गहरे प्रभावित हुआ था। तबरीज़ के शाह तहमास्प के दरबार ने उसे फारसी चित्रकला की उत्कृष्टता से परिचित कराया, जिसके बाद उसने भारत लौटने पर इस कला को राजकीय संरक्षण देने का निश्चय किया।
8. दसवंत और वसावन प्रसिद्ध चित्रकार मुगल सम्राट के राजदरबारी थे-
60th to 62nd B.P.S.C. (Pre) 2016
उत्तर-(a)
दसवंत और वसावन दोनों अकबर के काल के प्रतिभाशाली चित्रकार थे। दसवंत एक साधारण कहार (पालकी उठाने वाले) का पुत्र था, जिसकी प्रतिभा को अकबर ने पहचाना और उसे उच्च प्रशिक्षण दिलाया। अबुल फजल ने आइने अकबरी में उसे अपने युग का अग्रणी चित्रकार बताया है। दुर्भाग्यवश दसवंत बाद में मानसिक रोग का शिकार हो गया और 1584 ई. में उसने आत्महत्या कर ली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अबुल फजल ने आइने अकबरी में अकबरकालीन 17 प्रमुख चित्रकारों के नाम दर्ज किए हैं जिनमें दसवंत, वसावन, केशव लाल, मुकुंद, मिस्किन, फारुख बेग और जगन प्रमुख हैं। यह सूची मुगल चित्रकला के इतिहास का एक अमूल्य प्राथमिक स्रोत है।
9. निम्नलिखित में से कौन जहांगीरी चित्रकार थे? नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए-
1. अब्दुस्समद 2. अबुल हसन
3. अक़ा रिज़ा 4. मीर सैयद अली
कूट :
1. अब्दुस्समद 2. अबुल हसन
3. अक़ा रिज़ा 4. मीर सैयद अली
कूट :
U.P.P.C.S. (Pre) 2012
उत्तर-(b)
जहांगीर के दरबार के प्रमुख चित्रकारों में अबुल हसन, उस्ताद मंसूर, अक़ा रिज़ा, बिशनदास, फारुख बेग, मोहम्मद नादिर, मनोहर और गोवर्धन विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। मीर सैयद अली और अब्दुस्समद हुमायूं के काल के चित्रकार थे, जिन्होंने मुगल चित्रकला की आधारशिला रखी थी। अक़ा रिज़ा के पुत्र अबुल हसन को जहांगीर ने नादिर-उज़-ज़माँ (युग का अद्भुत) की उपाधि दी थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बिशनदास जहांगीर का एक विशिष्ट चित्रकार था जिसे जहांगीर ने ईरान के शाह अब्बास का चित्र बनाने के लिए राजदूत-दल के साथ ईरान भेजा था — यह किसी मुगल चित्रकार को विदेश भेजने का पहला ज्ञात उदाहरण है।
10. मुगल चित्रकला के विषय में कौन-सा कथन सत्य है?
U.P. P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(d)
मुगल चित्रकला विषय-वैविध्य की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध थी। इसमें युद्ध और शिकार के दृश्य, पशु-पक्षियों के सजीव चित्र, राजदरबार के दृश्य, जीवनी-चित्रण (biography illustrations) और धार्मिक-पौराणिक विषय सभी शामिल हैं। उस्ताद मंसूर पशु-पक्षी चित्रण में विशेष रूप से दक्ष था और जहांगीर ने उसे नादिर-उल-अस्र की उपाधि से सम्मानित किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगल चित्रकला में शजरा-चित्रण (वंशावली-वृक्ष चित्र) और तिमसाल (वैयक्तिक प्रतिकृति/portrait) भी प्रचलित थे। जहांगीर के काल में बने गुलशन एल्बम में विभिन्न विषयों के चित्रों का अद्भुत संकलन है, जो आज भी तेहरान के गुलिस्तान पैलेस में सुरक्षित है।
11. प्रातःकाल में गाया जाने वाला राग है-
I.A.S. (Pre) 2000
उत्तर-(a)
तोड़ी राग प्रातःकालीन संगीत की एक प्रमुख रागिनी है, जिसे सूर्योदय के समय गाया-बजाया जाता है। यह काफी थाट से संबंधित है और इसमें ऋषभ, गंधार, धैवत — ये तीन स्वर कोमल होते हैं तथा मध्यम तीव्र होता है। राजदरबारों में भाट एवं चारण प्रातःकाल राजा को जगाने के लिए इस राग को गाते थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों को समय के अनुसार वर्गीकृत किया गया है — दरबारी कान्हड़ा रात्रि के द्वितीय प्रहर का राग है, जबकि भीमपलासी दोपहर के समय गाया जाता है। संगीत के इस समय-सिद्धांत को राग-समय सिद्धांत कहते हैं, जिसका उल्लेख संगीत रत्नाकर ग्रंथ में मिलता है।
2. तानसेन का मूल नाम था-
M.P.P.C.S. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
महान संगीतज्ञ तानसेन का वास्तविक नाम रामतनु पांडेय था। उनका जन्म ग्वालियर के निकट बेहट गाँव में हुआ था। बचपन में उन्होंने स्वामी हरिदास से संगीत की शिक्षा ग्रहण की और आगे चलकर अकबर के नवरत्नों में स्थान पाया। अकबर ने उन्हें कंठाभरणवाणीविलास की उपाधि दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तानसेन ने कई नए रागों की रचना की, जिनमें मियाँ की तोड़ी, मियाँ की मल्हार और मियाँ की सारंग विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। कहा जाता है कि दीपक राग गाने पर चारों ओर दीपक जल उठते थे।
3. निम्नलिखित में से किस मुगल शासक ने लाला कलावंत से हिंदू संगीत की शिक्षा ली?
U.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(c)
मुगल सम्राट अकबर संगीत का गहरा प्रेमी था। उसने लाला कलावंत से हिंदू शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा ली और स्वयं नगाड़ा (नक्कारा) बजाने में निपुण था। अकबर के दरबार में 36 प्रमुख संगीतकार थे, जिनमें तानसेन, बाज बहादुर, रामदास और हरिदास प्रमुख थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अकबर के समय में अबुल फजल ने आइन-ए-अकबरी में दरबारी संगीतकारों का विस्तृत विवरण दिया है। अकबर ने ध्रुपद गायकी को विशेष प्रोत्साहन दिया, जो उस काल की सर्वाधिक प्रतिष्ठित गायन शैली थी।
4. पहाड़ी स्कूल, राजपूत स्कूल, मुगल स्कूल और कांगड़ा स्कूल निम्नलिखित में से किस कला की विभिन्न शैलियों को दर्शित करते हैं?
U.P. P.C.S. (Pre) 1994
उत्तर-(b)
पहाड़ी, राजपूत, मुगल और कांगड़ा — ये सभी भारतीय मध्यकालीन चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ हैं। पहाड़ी चित्रकला उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों — वर्तमान हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल — में विकसित हुई। कांगड़ा शैली इसी पहाड़ी परंपरा की एक महत्वपूर्ण उपशाखा है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कांगड़ा शैली 18वीं शताब्दी में राजा संसारचंद के संरक्षण में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची। इस शैली में राधा-कृष्ण की लीलाओं, गीत गोविंद के दृश्यों और प्रकृति चित्रण का अद्वितीय समन्वय देखने को मिलता है। इसकी पतली रेखाएँ और सुकोमल रंगयोजना इसे अन्य शैलियों से अलग करती है।
5. निम्नलिखित राजाओं में से किसने अकबर के पूर्व तानसेन को संरक्षण दिया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
अकबर के दरबार में आने से पहले तानसेन रीवा (भाटा क्षेत्र) के राजा रामचंद्र सिंह के दरबार में संगीतज्ञ के रूप में कार्यरत थे। उनकी ख्याति सुनकर अकबर ने उन्हें अपने दरबार में बुलाया और विशेष सम्मान दिया। अबुल फजल के अनुसार अकबर ने तानसेन को सोने की गिन्नियों से तौला था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तानसेन ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था और उनका नाम मुहम्मद अता खान पड़ा। उनके मकबरे के निकट एक इमली का पेड़ है, जिसके बारे में मान्यता है कि उसकी पत्तियाँ चबाने से आवाज़ मधुर होती है। प्रतिवर्ष ग्वालियर में तानसेन समारोह आयोजित किया जाता है।
6. किशनगढ़ शैली किस कला के लिए प्रसिद्ध है?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(b)
राजस्थान में अजमेर के निकट स्थित किशनगढ़ रियासत की चित्रकला शैली पूरे भारत में अपने श्रृंगारिक चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इस शैली का विकास 18वीं शताब्दी में राजा सावंत सिंह (नागरीदास) के काल में हुआ। चित्रकार निहालचंद द्वारा बनाई गई बनी-ठनी इस शैली की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बनी-ठनी को भारतीय मोनालिसा कहा जाता है। इस शैली की विशेषता है — नायिकाओं की लंबी नुकीली नाक, कमल पंखुड़ी जैसी आँखें और पतली कमर। भारत सरकार ने 1973 में बनी-ठनी के चित्र पर एक डाक टिकट भी जारी किया था।
7. तानसेन, बैजू बावरा और गोपाल नायक जैसे संगीतज्ञों ने स्वामी हरिदास से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। स्वामी हरिदास के अनुयायियों ने कितने संगीत अर्चना केंद्र स्थापित किए हैं?
U. P. P. C. S. (Pre) 2009
उत्तर-(a)
स्वामी हरिदास भक्तिकाल के प्रमुख संत-संगीतज्ञ थे। उनके अनुयायियों (हरिदास संप्रदाय) ने कुल 5 संगीत अर्चना केंद्र स्थापित किए। स्वामी हरिदास ने ब्रजभाषा में ध्रुपद रचनाएँ कीं और संगीत को भक्ति का माध्यम बनाया। उनके शिष्यों में तानसेन, बैजू बावरा, गोपाल नायक और मदनलाल उल्लेखनीय हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: स्वामी हरिदास वृंदावन में निवास करते थे और उन्होंने केलिमाल नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें उनकी संगीत-रचनाएँ संकलित हैं। वे ध्रुपद गायकी के वृंदावनी परंपरा के प्रवर्तक माने जाते हैं।
8. अकबर के शासनकाल में ध्रुपद गायकों में सम्मिलित थे-
1. तानसेन 2. हरिदास
3. सूरदास 4. विलास खां
नीचे दिए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
कूट :
1. तानसेन 2. हरिदास
3. सूरदास 4. विलास खां
नीचे दिए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
कूट :
U.P. P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(a)
अकबर के शासनकाल में तानसेन और स्वामी हरिदास दो प्रमुख ध्रुपद गायक थे। विलास खां जहांगीर के दरबार का प्रसिद्ध संगीतज्ञ था, जबकि सूरदास भक्ति काव्य के कवि थे — वे ध्रुपद गायक की श्रेणी में नहीं आते। सूरदास ने कृष्ण-भक्ति में सूरसागर की रचना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ध्रुपद गायकी की चार प्रमुख वाणियाँ हैं — गौहरबानी, डागुरबानी, खंडारबानी और नौहारबानी। तानसेन गौहरबानी परंपरा से संबंधित थे। ध्रुपद को भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे प्राचीन और गंभीर गायन शैली माना जाता है।
9. निम्नलिखित में से कौन-सा एक संगीत वाद्य बजाने में औरंगजेब की दक्षता थी?
U.P.P.C.S. (Mains) 2007 | U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(c)
औरंगजेब ने संगीत को इस्लाम के विरुद्ध मानकर दरबार में उस पर प्रतिबंध लगा दिया था, परंतु यह विडंबना ही है कि वह स्वयं एक कुशल वीणावादक था। इसके अतिरिक्त उसी के काल में फारसी भाषा में भारतीय शास्त्रीय संगीत पर राग दर्पण जैसी सर्वाधिक पुस्तकें लिखी गईं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: औरंगजेब के संगीत-विरोध के कारण जब संगीतकारों ने विरोध स्वरूप एक मृत संगीत की अर्थी निकाली, तो औरंगजेब ने कहा — “इसे और गहरे दफनाओ।” उसके शासनकाल में अनेक संगीतकार राजपूत एवं मराठा दरबारों में चले गए, जिससे क्षेत्रीय संगीत परंपराओं को बल मिला।
10. प्रसिद्ध तानसेन का मकबरा स्थित है-
U.P. P.C.S. (Pre) 1999 | M.P.P.C.S. (Pre) 1991 | M.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(b)
तानसेन का मकबरा मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। यहाँ उन्होंने राजा मानसिंह द्वारा स्थापित ग्वालियर संगीत विद्यालय (घराना) में प्रशिक्षण लिया था। ग्वालियर घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत का सबसे प्राचीन एवं प्रतिष्ठित घराना माना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ग्वालियर में प्रतिवर्ष दिसंबर माह में तानसेन समारोह का आयोजन किया जाता है, जो भारत के प्रमुख शास्त्रीय संगीत उत्सवों में से एक है। इस समारोह में देश-विदेश के ख्याति प्राप्त शास्त्रीय संगीतकार प्रस्तुति देते हैं।
11. इनमें से किस मुगल सम्राट ने सचित्र पांडुलिपियों से ध्यान हटाकर चित्राधार (एलबम) और वैयक्तिक रूपचित्रों पर अधिक जोर दिया?
I.A.S. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
हुमायूं और अकबर के काल में मुगल चित्रकारी का मुख्य केंद्र सचित्र पांडुलिपियाँ थीं, जैसे — तूतीनामा, हम्जानामा, रज्मनामा आदि। जहांगीर ने इस परंपरा से हटकर व्यक्ति-चित्रण (portrait) और चित्राधारों (albums) को सर्वाधिक महत्व दिया। उसने स्वयं, नूरजहाँ, फारस के सम्राट, दरबारियों एवं पशु-पक्षियों के चित्र बनवाए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जहांगीर ने अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-जहांगीरी में चित्रकला के प्रति अपनी गहरी रुचि का उल्लेख किया है। उसके दरबार के प्रमुख चित्रकार उस्ताद मंसूर, अबुल हसन और बिशनदास थे। मंसूर को नादिर-उल-अस्र (युग का आश्चर्य) की उपाधि जहांगीर ने ही दी थी।
12. दिल्ली में पुराना किला के सामने खैरुल मनजिल नामक मस्जिद का निर्माण किसने करवाया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2018
उत्तर-(d)
माहम अनगा अकबर की धाय माँ (foster mother) थी और मुगल दरबार में उसका अत्यधिक प्रभाव था। उसने 1561 ई. में दिल्ली के पुराने किले के सामने खैरुल मनजिल नामक मस्जिद एवं मदरसे का निर्माण करवाया, जिसे मदरसा-ए-बेगम के नाम से भी जाना जाता है। यह मुगलकाल में किसी महिला द्वारा बनवाई गई दिल्ली की प्रमुख इमारतों में से एक है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:माहम अनगा के पुत्र अधम खाँ ने अकबर के वज़ीर शमसुद्दीन आतगा खाँ की हत्या कर दी थी, जिसके बाद अकबर ने स्वयं अधम खाँ को आगरा के किले की दीवार से नीचे फिंकवा दिया था।
13. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर का चयन कीजिए-
सूची-I सूची-II
A. हसन निज़ामी 1. आलमगीरनामा
B. ख्वांदमीर 2. नुश्खा-ए-दिलकुशा
C. मुहम्मद काज़िन 3. हुमायूंनामा
D. भीमसेन 4. ताजुल मासिर
कूट : A B C D
सूची-I सूची-II
A. हसन निज़ामी 1. आलमगीरनामा
B. ख्वांदमीर 2. नुश्खा-ए-दिलकुशा
C. मुहम्मद काज़िन 3. हुमायूंनामा
D. भीमसेन 4. ताजुल मासिर
कूट : A B C D
U.P.P. C.S. (Mains) 2003
उत्तर-(a)
सही सुमेलन इस प्रकार है — हसन निज़ामी ने ताजुल मासिर की रचना की, जो कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश के शासनकाल का विवरण देती है और दिल्ली सल्तनत के आरंभिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। ख्वांदमीर ने कानून-ए-हुमायूंनी लिखी जिसे हुमायूंनामा भी कहते हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:मुहम्मद काज़िम ने औरंगजेब के शासनकाल पर आलमगीरनामा लिखी तथा मराठा सरदारों की जानकारी देने वाले मुगल अधिकारी भीमसेन ने नुश्खा-ए-दिलकुशा की रचना की, जो औरंगजेब के दक्कन अभियानों का आँखों देखा विवरण प्रस्तुत करती है।
14. बाबरनामा का अंग्रेजी अनुवाद किसने किया?
U.P. R.O/A.R.O. (Mains) 2017
उत्तर-(a)
बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) अपनी मातृभाषा चगताई तुर्की में लिखी थी। अकबर के नवरत्नों में शामिल अब्दुर्रहीम खानखाना ने इसका फारसी में अनुवाद किया। बाद में जॉन लेडेन और विलियम अर्स्काइन ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रस्किन वास्तव में अर्स्काइन का ही प्रचलित हिंदी रूपांतरण है। यह ग्रंथ विश्व साहित्य में किसी शासक द्वारा लिखी गई सर्वप्रथम प्रामाणिक आत्मकथाओं में से एक मानी जाती है और मध्य एशिया तथा भारत के तत्कालीन समाज, भूगोल व राजनीति का अमूल्य विवरण प्रस्तुत करती है।
15. निम्नलिखित में से किसने हितोपदेश का फारसी में अनुवाद किया था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(d)
संस्कृत के नीतिग्रंथ हितोपदेश का फारसी अनुवाद लगभग 1450 ई. में ताज-अल-दिन मुफ्ती अल-मलीकी ने मुफरिह-अल-कुबाल नाम से किया था, जिन्हें ही कुछ पुस्तकों में ताजुल माली कहा गया है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मुगलकाल में संस्कृत ग्रंथों के अनुवाद की परंपरा अकबर के काल में विशेष रूप से फली-फूली — अकबर के आदेश पर महाभारत का रज्मनामा नाम से तथा रामायण का भी फारसी में अनुवाद करवाया गया था। दारा शिकोह ने उपनिषदों का सिर्र-ए-अकबर नाम से फारसी अनुवाद करवाया था।
16. गुलबदन बेगम पुत्री थी-
U.P.P.C.S. (Pre) 2004 | U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(a)
गुलबदन बेगम बाबर की पुत्री थी, जिसका जन्म 1523 ई. और मृत्यु 1603 ई. में हुई। उसने अकबर के अनुरोध पर हुमायूंनामा की रचना की, जिसमें बाबर और हुमायूं के शासनकाल का व्यक्तिगत एवं ऐतिहासिक विवरण है। यह मुगलकाल में किसी महिला द्वारा लिखा गया एकमात्र महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:गुलबदन बेगम ने अपनी रचना में हुमायूं और उसके भाई कामरान के बीच के संघर्ष का भी उल्लेख किया है। वह फारसी और तुर्की दोनों भाषाओं की विदुषी थी और अकबर उसका बड़ा सम्मान करता था।
17. मुगलकाल में निम्नलिखित में से किस महिला ने ऐतिहासिक विवरण लिखे?
I.A.S. (Pre) 1994 | U.P. P.C.S. (Pre) 1998
उत्तर-(a)
मुगलकाल में ऐतिहासिक विवरण लिखने वाली एकमात्र प्रमुख महिला गुलबदन बेगम थी, जिसने हुमायूंनामा की रचना की। अन्य विकल्पों में — नूरजहां बेगम राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली थी और उसके नाम के सिक्के भी चले, पर उसने कोई ऐतिहासिक ग्रंथ नहीं लिखा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:जहांआरा बेगम ने सूफी संत मुइनुद्दीन चिश्ती की जीवनी मुनिस अल-अर्वाह लिखी, जो ऐतिहासिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक रचना है; जेबुन्निसां बेगम औरंगजेब की पुत्री थी जो मखफी उपनाम से फारसी कविताएँ लिखती थी।
18. हुमायूंनामा की रचना किसने की थी?
42nd B.P.S.C. (Pre) 1997 | U.P. P.C.S. (Pre) 2004 | Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010 | U.P.P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(c)
हुमायूंनामा की रचना गुलबदन बेगम ने की थी। यह ग्रंथ फारसी भाषा में लिखा गया और इसमें बाबर तथा हुमायूं के समय की घटनाओं का जीवंत विवरण है। अकबर के इतिहासकार अबुल फजल ने आईन-ए-अकबरी में इस ग्रंथ की प्रशंसा की है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: ख्वांदमीर ने कानून-ए-हुमायूंनी नामक एक अलग ग्रंथ लिखा था जिसे भी कभी-कभी हुमायूंनामा कहा जाता है — यह भ्रम परीक्षाओं में अक्सर देखा जाता है। गुलबदन बेगम वाला हुमायूंनामा अधिक प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक माना जाता है।
19. हुमायूंनामा की रचना किसने की?
Jharkhand P.S.C. (Mains) 2016
उत्तर-(d)
हुमायूंनामा की रचना गुलबदन बेगम ने की थी, जो इस प्रश्न के किसी भी विकल्प में नहीं है, इसलिए सही उत्तर उपरोक्त में से कोई नहीं है। बदायूंनी ने मुंतखब-उत-तवारीख, अबुल फजल ने अकबरनामा व आईन-ए-अकबरी तथा अहमद यादगार ने तारीख-ए-शाही या तारीख-ए-सलातीन-ए-अफगाना की रचना की थी। इस प्रश्न का उद्देश्य परीक्षार्थियों को यह स्मरण कराना है कि हुमायूंनामा के रचनाकार के रूप में गुलबदन बेगम का नाम याद रखना आवश्यक है।
20. दिल्ली का वह शिक्षा केंद्र जो मदरसा-ए-बेगम कहलाता था, किसके द्वारा स्थापित किया गया था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
माहम अनगा ने दिल्ली में पुराने किले के सामने खैरुल मनजिल मस्जिद एवं मदरसे की स्थापना 1561 ई. में की, जो मदरसा-ए-बेगम के नाम से प्रसिद्ध हुई। खैरुल मनजिल का अर्थ है सर्वश्रेष्ठ गृह। यह इमारत मुगलकाल की उन चुनिंदा इमारतों में है जो किसी महिला के संरक्षण में बनी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:माहम अनगा का राजनीतिक प्रभाव इतना अधिक था कि कुछ इतिहासकार उसे अकबर के प्रधानमंत्री बैरम खाँ की विदाई के बाद एक छुपी हुई शक्ति के रूप में वर्णित करते हैं।
21. सुमेलित करें पुस्तकों के नाम को उनके लेखकों से, और निम्न के कूट में से सही उत्तर का चयन करें-
सूची-I (पुस्तक) सूची-II (लेखक)
A. आलमगीर नामा 1. मुअतमद खां
B. तबक़ाते अकबरी 2. मिर्जा मोहम्मद काज़िम
C. चहार चमन 3. चन्द्रभान ब्रह्मन
D. इकबालनामा जहांगीरी 4. निज़ामउद्दीन अहमद
कूट : A B C D
सूची-I (पुस्तक) सूची-II (लेखक)
A. आलमगीर नामा 1. मुअतमद खां
B. तबक़ाते अकबरी 2. मिर्जा मोहम्मद काज़िम
C. चहार चमन 3. चन्द्रभान ब्रह्मन
D. इकबालनामा जहांगीरी 4. निज़ामउद्दीन अहमद
कूट : A B C D
R.A.S./ R.T.S. (Pre) 2013
उत्तर-(d)
सही सुमेलन इस प्रकार है — आलमगीरनामा मिर्जा मोहम्मद काज़िम ने लिखी, जो औरंगजेब के शासन के पहले दस वर्षों (1658–1668 ई.) का विवरण देती है; तबकाते अकबरी निज़ामुद्दीन अहमद ने लिखी जो दिल्ली सल्तनत से लेकर अकबर तक का इतिहास समेटे है; चहार चमन चंद्रभान ब्रह्मन द्वारा रचित शाहजहाँ के दरबार का दुर्लभ हिंदू दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है; तथा इकबालनामा-ए-जहांगीरी मुअतमद खाँ की कृति है जो जहाँगीर की आत्मकथा तुजुक-ए-जहाँगीरी की पूरक मानी जाती है।
22. निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?
(पुस्तकें) (लेखक)
(पुस्तकें) (लेखक)
U.P.P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(c)
तुगलकनामा की रचना अमीर खुसरो ने की थी, न कि इब्नबतूता ने। इब्नबतूता एक मोरक्कन यात्री था जिसने मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत भ्रमण किया और अपने यात्रा-वृत्तांत को रेहला नामक पुस्तक में लिपिबद्ध किया। शेष तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अमीर खुसरो को तूती-ए-हिंद (भारत का तोता) कहा जाता था और उन्होंने खड़ी बोली हिंदी के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इब्नबतूता लगभग 1333 ई. में भारत आए और उन्होंने मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में काजी के पद पर भी कार्य किया था।
23. अनवर-ए-सुहेली नामक ग्रंथ निम्नलिखित में किसका अनुवाद है?
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(a)
अनवर-ए-सुहेली मूल रूप से संस्कृत ग्रंथ पंचतंत्र का फारसी अनुवाद है। इसकी रचना मुल्ला वाइज हुसैन काशफीह ने सुल्तान हुसैन मिर्जा के काल में की थी। इससे पूर्व गजनवी काल में नसुरूल्लाह मुंशी शीराजी ने पंचतंत्र का अनुवाद कलीला-वा-दिमनाह बेहरामशाही नाम से किया था तथा अकबर के काल में अबुल फजल ने इसे आयर-ए-दानिश नाम से अनुवादित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पंचतंत्र की मूल रचना विष्णु शर्मा ने की थी और यह विश्व के सर्वाधिक अनूदित ग्रंथों में से एक है — इसका अनुवाद 50 से अधिक भाषाओं में हो चुका है। अकबर के काल में महाभारत का फारसी अनुवाद रज्मनामा के नाम से किया गया था।
24. निम्न मुसलमान विद्वानों में से हिंदी साहित्य के लिए किसका सबसे महत्वपूर्ण योगदान है?
R.A.S./R.T.S. (Pre) 1994
उत्तर-(c)
मुसलमान विद्वानों में हिंदी साहित्य के लिए सर्वाधिक योगदान अब्दुर्रहीम खानखाना का रहा। वे अकबर के संरक्षक बैरम खां के पुत्र थे और फारसी, अरबी, तुर्की, संस्कृत, हिंदी तथा राजस्थानी भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे। उनकी प्रसिद्ध रचना रहीम सतसई है जिसमें जीवन-दर्शन से परिपूर्ण दोहों का संग्रह है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रहीम ने बरवै नायिकाभेद और नगर शोभा जैसी अन्य हिंदी रचनाएं भी लिखीं। उन्होंने बाबर की आत्मकथा तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) का तुर्की से फारसी में अनुवाद भी किया था, जिससे उनकी बहुभाषीय प्रतिभा का परिचय मिलता है।
25. अबुल फजल द्वारा अकबरनामा पूरा किया गया था-
U.P.P.C.S. (Pre) 2014
उत्तर-(a)
अकबर के नवरत्नों में से एक अबुल फजल ने अकबरनामा को 1590 से 1596 ई. के बीच लिखा, अर्थात् यह लगभग 7 वर्षों में पूर्ण हुआ। यद्यपि कुछ स्रोतों में इसे 12 से 13 वर्ष भी बताया गया है, जिस कारण उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर कर दिया था। अकबरनामा तीन भागों में विभाजित है, जिसका तीसरा भाग आइन-ए-अकबरी के नाम से जाना जाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: आइन-ए-अकबरी मुगलकालीन प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था एवं संस्कृति का विश्वकोशीय विवरण प्रस्तुत करता है। अबुल फजल की हत्या 1602 ई. में अकबर के पुत्र राजकुमार सलीम (बाद में जहाँगीर) के इशारे पर वीर सिंह बुंदेला ने की थी।
26. तबकात-ए-अकबरी किसने लिखी थी?
Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(d)
तबकात-ए-अकबरी की रचना ख्वाजा निजामुद्दीन अहमद ने की थी, जिसे तारीख-ए-निजामी के नाम से भी जाना जाता है। यह ग्रंथ फारसी भाषा में लिखा गया है और इसमें अकबर के शासनकाल का विस्तृत ऐतिहासिक विवरण है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: निजामुद्दीन अहमद अकबर के दरबार में बख्शी (सैन्य अधिकारी) के पद पर थे। तबकात-ए-अकबरी का रचनाकाल लगभग 1592-93 ई. माना जाता है और इसमें गजनवी वंश से लेकर अकबर के 38वें शासन वर्ष तक का इतिहास समाहित है, जो इसे मुगलकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनाता है।
27. शाहजहांनामा के लेखक कौन हैं?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2015
उत्तर-(d)
शाहजहांनामा के लेखक इनायत खां हैं। यह शाहजहां के शासनकाल का ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसे अब्दुल हमीद लाहौरी की कृति पादशाहनामा से भिन्न समझना आवश्यक है, जो भी शाहजहाँ के काल का ही वृत्तांत है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: शाहजहाँ के दरबारी इतिहासकार अब्दुल हमीद लाहौरी ने पादशाहनामा में शाहजहाँ के प्रथम 20 वर्षों के शासन का विस्तृत विवरण दिया है। शाहजहां के काल में मुगल साम्राज्य की स्थापत्य उपलब्धियाँ चरमोत्कर्ष पर थीं, जिनमें ताजमहल, लाल किला और जामा मस्जिद प्रमुख हैं।
28. भारत के इतिहास के संदर्भ में अब्दुल हमीद लाहौरी कौन थे?
I.A.S. (Pre) 2006
उत्तर-(b)
अब्दुल हमीद लाहौरी शाहजहां के शासनकाल के राजकीय इतिहासकार थे। उन्होंने पादशाहनामा की रचना की जिसमें शाहजहाँ के शासन का प्रामाणिक वर्णन मिलता है। वे मूलतः यात्री के रूप में शाहजहाँ के दरबार में आए थे किंतु बाद में दरबारी इतिहासकार बन गए।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: पादशाहनामा फारसी भाषा में लिखा गया और इसे दो खंडों में विभाजित किया गया है — पहला खंड 1628-38 ई. तक और दूसरा खंड 1638-48 ई. तक के इतिहास को समेटता है। शाहजहाँ के काल को मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल माना जाता है।
29. निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा एक सुमेलित है?
U.P.P.C.S. (Mains) 2009
उत्तर-(a)
प्रस्तुत विकल्पों में केवल विकल्प (a) सही सुमेलित है। तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) बाबर की स्वयं लिखी आत्मकथा है जो चगताई तुर्की भाषा में मुबइयान शैली में रचित है। शेष युग्म असुमेलित हैं — हुमायूंनामा बाबर की पुत्री गुलबदन बेगम ने, तारीखे शेरशाही अब्बास खां शरवानी ने और तबकाते अकबरी निजामुद्दीन अहमद ने लिखी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बाबरनामा विश्व की प्रथम वास्तविक आत्मकथाओं में से एक मानी जाती है जिसमें बाबर ने भारत की भूगोल, वनस्पति, पशु-पक्षी और यहाँ के निवासियों का अत्यंत सजीव वर्णन किया है। इसका फारसी अनुवाद बाबरनामा के नाम से अकबर के शासनकाल में अब्दुर्रहीम खानखाना ने किया था।
30. कवि हृदय राजा जिसने नागरीदास के नाम से कृष्ण की प्रशंसा में छंद लिखे-
U.P.P.C.S. (Mains) 2004 | U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(d)
राजस्थान की किशनगढ़ रियासत के राजा सावंत सिंह (1699–1764 ई.) ने नागरीदास उपनाम से भगवान कृष्ण की स्तुति में अनेक काव्य-रचनाएं कीं। वे निम्बार्क संप्रदाय के अनुयायी थे, जो कृष्ण-राधा की युगल उपासना पर केंद्रित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: किशनगढ़ शैली की चित्रकारी भी सावंत सिंह के काल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची; इस शैली में उनकी प्रेमिका बणी-ठणी को भारत की मोनालिसा कहा जाता है। किशनगढ़ के शासकों ने मुगल दरबार के साथ वैवाहिक संबंध भी स्थापित किए थे।
31. मुगलकालीन ग्रंथ मासिर-ए-आलमगिरी किसकी रचना है?
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(a)
मासिर-ए-आलमगिरी फारसी भाषा में लिखा गया एक प्रमुख मुगलकालीन ऐतिहासिक ग्रंथ है, जिसकी रचना साकी मुस्तैद खां ने की। यह ग्रंथ औरंगजेब (आलमगीर) के 50 वर्षीय शासनकाल (1658–1707 ई.) का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी काल के एक अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथ मुंतखब-उल-लुबाब की रचना खफी खां ने की, जो औरंगजेब के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखता है। औरंगजेब के शासनकाल में हिंदू मंदिरों पर कर (जज़िया) पुनः लागू किया गया था, जिसे अकबर ने समाप्त किया था।
32. निम्नलिखित में से किस एक ने महत्वपूर्ण कृतियां रामचंद्रिका एवं रसिकप्रिया की रचना की थी?
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
उत्तर-(a)
हिंदी रीतिकाल के प्रवर्तक कवि केशवदास (1555–1617 ई.) ने रामचंद्रिका और रसिकप्रिया दोनों महत्वपूर्ण रचनाएं कीं। रामचंद्रिका एक महाकाव्य है जिसमें राम के जीवन का वर्णन है, जबकि रसिकप्रिया रीति-शास्त्र पर आधारित काव्य है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: केशवदास ओरछा (मध्यप्रदेश) के राजा इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि थे। उनकी एक अन्य प्रसिद्ध रचना कविप्रिया है जिसमें उन्होंने अपनी शिष्या प्रवीण राय को काव्यशास्त्र की शिक्षा दी थी।
33. मुगलकाल में दरबारी भाषा थी-
U.P. P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(c)
मुगल साम्राज्य में फारसी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त था और समस्त शाही दरबारी कार्यवाही इसी भाषा में होती थी। अकबर ने एक अनुवाद विभाग स्थापित किया जिसके अंतर्गत संस्कृत, अरबी, तुर्की और ग्रीक भाषाओं की रचनाओं का फारसी में अनुवाद करवाया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: भारत में फारसी साहित्य के विकास का प्रथम केंद्र लाहौर था। बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा मूलतः तुर्की भाषा में लिखी थी, जिसका बाद में फारसी में अनुवाद हुआ।
34. मुगलों की अदालत में भाषा थी-
M.P.P.C.S. (Pre) 1991
उत्तर-(b)
मुगल न्यायालयों सहित संपूर्ण शासन-प्रशासन में फारसी का वर्चस्व था। यह भाषा प्रारंभ में केवल शासक और अमीर वर्ग तक सीमित थी, किंतु धीरे-धीरे इसका प्रसार विस्तृत हुआ।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी लंबे समय तक फारसी को अपने प्रशासन में प्रयुक्त किया और 1837 ई. में लॉर्ड विलियम बेंटिंक के काल में फारसी को हटाकर अंग्रेज़ी को आधिकारिक भाषा बनाया गया। मुगल काल में उर्दू भाषा का विकास फारसी और हिंदी के मेल से हुआ।
35. नस्तालीक है-
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
नस्तालीक एक विशेष प्रकार की फारसी लिपि-शैली है जो मध्यकालीन भारत में मुगल दरबार में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती थी। यह लिपि अपनी सुंदरता और प्रवाह के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थी। स्वयं औरंगजेब नस्तालीक और शिकस्त दोनों लिपियों में दक्ष था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नस्तालीक लिपि का विकास 14वीं-15वीं शताब्दी में ईरान में हुआ था और इसे मीर अली तबरीजी ने विकसित किया माना जाता है। मुगल कालीन एक अन्य प्रचलित लिपि नस्ख थी, जो अपेक्षाकृत सरल और स्पष्ट होती थी तथा कुरान लिखने में प्रयुक्त होती थी।
36. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
सूची-I सूची-II
A. भीमसेन कायस्थ 1. चहार चमन
B. चंद्रभान ब्रह्मन 2. फुतूहात-ए-आलमगीरी
C. ईश्वरदास नागर 3. खुलासत-उत-तवारीख
D. सुजानराय भंडारी 4. तारीख-ए-दिलकुशा
कूट : A B C D
सूची-I सूची-II
A. भीमसेन कायस्थ 1. चहार चमन
B. चंद्रभान ब्रह्मन 2. फुतूहात-ए-आलमगीरी
C. ईश्वरदास नागर 3. खुलासत-उत-तवारीख
D. सुजानराय भंडारी 4. तारीख-ए-दिलकुशा
कूट : A B C D
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(d)
इन चारों मुगलकालीन लेखकों और उनकी कृतियों का सही सुमेलन इस प्रकार है- भीमसेन कायस्थ ने तारीख-ए-दिलकुशा लिखी जो औरंगजेब के काल का विवरण देती है; चंद्रभान ब्रह्मन ने चहार चमन की रचना की जो शाहजहाँ के दरबार का वृत्तांत है; ईश्वरदास नागर ने फुतूहात-ए-आलमगीरी लिखी। और सुजानराय भंडारी ने खुलासत-उत-तवारीख की रचना की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खुलासत-उत-तवारीख मुगल काल के इतिहास के साथ-साथ उस समय की भौगोलिक जानकारी का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। चंद्रभान ब्रह्मन शाहजहाँ के दीवान-ए-खास के मुंशी थे और उन्होंने फारसी में उत्कृष्ट काव्य रचनाएं भी कीं।
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