मध्यकालीन भारत – एक परिचय

भारतीय इतिहास मध्यकालीन भारत मध्यकालीन भारत – एक परिचय

➣ पूर्वमध्यकाल राजपूतों की उत्पति तथा मध्यकाल भारत मुस्लिम शासकों का वर्णन करता है।

राणा सांगा , राणा कुम्भा एंव महाराणा प्रताप सिसोदिया वंश से सम्बंधित हैं जो लगभग 725ई. में बप्पा रावले द्वारा स्थापित की गई गहलौत वंश की शाखा थी।

➣ इनके बारे में प्राचीन भारत के सेक्शन “उत्तर भारत के प्रमुख राजवंश” मध्यकालीन भारत के सेक्शन “उत्तर-दक्षिण के स्वतंत्र प्रांतीय राज्य” में दिया गया है।

➣ मध्यकालीन भारत को सामान्यतः तीन भागों में विभाजित किया जाता है—

काल समयावधि मुख्य विशेषताएँ
पूर्व मध्यकाल लगभग 8वीं से 12वीं शताब्दी • राजपूत राज्यों का उदय
• प्रतिहार, पाल एवं राष्ट्रकूटों का त्रिपक्षीय संघर्ष
• क्षेत्रीय राज्यों का विकास
सल्तनत काल 1206–1526 ई. • गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद एवं लोदी वंश
मुगल काल 1526–1707 ई. एवं उत्तर-मुगल काल • बाबर से औरंगजेब तक साम्राज्य का उत्कर्ष
• मराठा, सिख एवं अन्य क्षेत्रीय शक्तियों का उदय

➣ सामान्यतः भारतीय इतिहास में 8वीं–12वीं शताब्दी के बीच के काल को पूर्व-मध्यकाल तथा 1206 ई. में दिल्ली सल्तनत की स्थापना से मध्यकालीन भारत का प्रमुख चरण माना जाता है।

➣ मध्यकालीन भारत के इतिहास में अधिकांश वर्णन मुस्लिम शासकों का किया गया है। इसमें विजयनगर साम्राज्य (दक्षिण-भारत में) मध्यकालीन भारत का एकमात्र साम्राज्य था जिसने हिन्दू धर्म को अक्षुण बनाये रखा।

➣ मध्यकाल इतिहास का प्रारंभ, अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वी राज चौहान की पराजय एंव मुहम्मद गौरी की विजय के साथ शुरू होता है जबकि अंत अंत सामान्यतः औरंगजेब की मृत्यु (1707 ई.) के साथ माना जाता है। औरंगजेब के शासन काल में छत्रपति शिवाजी के नेतृत्व मराठों का उदय होता है। जिन्होंने हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी थी।

➣ भारत के मध्यकाल के मुस्लिम शासकों को इस प्रकार बांटा जा सकता है-

अरबी + सल्तनत काल (तुर्की+अफगान)+ मुग़ल

अरबियो ने भारत पर केवल आक्रमण किया था किन्तु ये शासन नहीं कर सके हालाँकि इनके आक्रमण जैसलमेर, मेवाड़ सौराष्ट्र तक आ पहुंचे थे किन्तु उस समय भारत में पश्चिमी भाग में दो शक्तियों इन आक्रमणों को सिन्ध से आगे नहीं बढ़ने दिया।

➣ प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम ने अरबों को पश्चिमी राजस्थान और मालवा से खदेड़ दिया। बापा रावले (गहलौत वंश के संस्थापक) ने यही कार्य मेवाड़ और उसके आसपास के प्रदेश के लिए किया।

➣ लगभग तीन सौ वर्षो के पश्चात तुर्की आक्रमण प्रभावशाली रहे। गजनी वंश का शासक सुबुक्तगीन (गजनवी का पिता) ने लगभग 10वीं सदी के अंत में भारत के पश्चिमी भाग पर आक्रमण किया। इस समय यहाँ का शासक जयपाल (हिन्दुशाही वंश) था।

➣ कालांतर में तुर्की (मुहम्मद गजनवी) एंव अफगान शासकों (गौरी) ने भारत में 11सदी (तराईन के द्वितीय युद्ध 1192) से 16सदी (पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 तक) के आरंभ तक उत्तर-भारत पर शासन किया।

➣ भारत पर अरबों के आक्रमण के बारे में जानकारी 9वीं सदी में लिखी गयी फुतुल-अल-बलदान और 13वीं सदी में रचित चचनामा से ज्ञात होती है।

मुग़ल भी मुस्लिम शासक थे। वे मध्य एशिया के मंगोल नेता चंगेज खां और तैमुर के वंशज थे। इनका उद्देश्य धर्म-प्रचार नहीं था। संभवत: इसीलिए इस वंशज के महानतम शासक अकबर ने धर्म-निरपेक्ष नीति को अपनी शासन व्यवस्था का आधार बनाया।

➣ इसके विपरीत सल्तनत काल में प्रशासनिक व्यवस्था पूर्ण रूप से इस्लाम धर्म पर आधारित थी। कुरान में वर्णित आदर्शों (शरा) के आधार पर ही मुस्लिम राज्य का गठन हुआ था। उनके प्रशासन में उलेमाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती थी। इस्लामी कानूनों की व्याख्या उलेमा करते थे एवं इनका पालन राज्य और जनता दोनों के लिए ही आवश्यक था।

सल्तनत कालीन वंश = गुलाम वंश, खिलजी वंश , तुगलक वंश सैय्यद वंश एंव लोदी वंश

➣ सल्तनत काल में भारत पर कई मंगोल आक्रमण हुए सबसे ज्यादा अल्लाउद्दीन खिलजी के समय हुए थे जबकि भारत में मुगल वंश की स्थापना के पश्चात भारत लगभग 200 वर्षों तक विदेशी आक्रमणों से सरक्षित रहा।

भारत में इस्लाम का उदय

➣ मध्यकालीन इतिहास में भारत में इस्लाम का उदय हुआ है। सबसे पहला मुस्लिम आक्रमण लगभग 636-38 ई. के आसपास बम्बई के निकट थाना को जीतने के लिए खलीफा उमर के समय में हुआ था। किन्तु यह असफल रहा।

➣ सर्वप्रथम मुहम्मद-बिन-कासिम (17 वर्ष की आयु) ने 711-712 ई. में भारत के विरुद्ध सफल अभियान किया। यह आक्रमण भारत के पश्चिमोतर सीमा से हुआ था। जिसमे उसने सिंध के राजा दाहिर को परास्त किया।

➣ यह पहला व अंतिम अरबी मुस्लिम आक्रमण था। जिसमे भारत में सर्वप्रथम जजिया कर लगाया एंव कुरान का भी अनुवाद भारत में सर्वप्रथम हुआ।

➣ कासिम (20 वर्ष की आयु) की शीघ्र ही मृत्यु हो गयी थी। इसलिए अरबी मुस्लिम शासकों के आक्रमण इतने प्रभावी नहीं रहे। जितने की तुर्कियों के।

986 ई. में गजनी के सुबुक्तगीन ने भारत के पश्चिमोत्तर भाग पर आक्रमण किया। जिसमे उसे हिन्दूशाही वंश के राजा जयपाल का सामना करना पड़ा। यह भारत पर पहला तुर्की मुस्लिम आक्रमण था।

➣ सुबुक्तगीन की मृत्यु के बाद उसके पुत्र महमूद गजनवी 1001 से 1027 ई. तक भारत पर 17 बार हमला किया। उलेखनीय है इन आक्रमणों का उद्देश्य केवल धन लूटना था, न कि भारत में स्थायी मुस्लिम शासन की स्थापना करना।

➣ 1018 ई. गजनवी ने कन्नौज तक पहुँच गया। उसने बुलंदशहर के शासक हरदत्त को पराजित किया। 1019 ई. में उसने पुनः कन्नौज पर आक्रमण किया। वहां के शासक राज्यपाल ने बिना युद्ध किए ही आत्मसमर्पण कर दिया।

➣ आत्मसमर्पण करने के कारण चंदेल राजा विद्याधर ने उसकी हत्या कर दी। विधाधर अकेला ऐसा हिंदू शासक था, जिसने मुसलमानों का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया।

➣ धन की अधिकता के कारण कालांतर में महमूद गजनवी ने सिर्फ उन्ही क्षेत्रों पर हमला किया जहाँ सर्वाधिक मंदिर थे। 1025 ई. में अपने 16वें अभियान में गजनवी ने सोमनाथ को अपना निशाना बनाया था। उसके सभी अभियानों में यह अभियान सर्वाधिक महत्वपूर्ण था।

➣ महमूद ने सोमनाथ मंदिर का शिवलिंग तोड़ डाला। मंदिर को ध्वस्त कर दिया तथा हजारों पुजारी मौत के घाट उतार दिए और मंदिर का सोना व भारी खजाना लूटकर ले गया। अकेले सोमनाथ से उसे अब तक की सभी लूटों से अधिक धन प्राप्त हुआ था।

मुहम्मद ग़ोरी नामक एक अफगान मुसलमान सरदार ने महमूद ग़ज़नवी के वंशजों से राज्याधिकार छीन कर एक नये इस्लामी राज्य, ग़ोर (1173 ई.), की स्थापना की थी।

➣ मुहम्मद ग़ोरी महत्त्वाकांक्षी था। वह महमूद ग़ज़नवी की तरह भारत पर आक्रमण करने का इच्छुक था। वह लूटमार के साथ इस देश में मुस्लिम राज्य भी स्थापित करना चाहता था।

➣ उस समय में पश्चिमी पंजाब तक और दूसरी ओर मुल्तान एवं सिंध तक मुसलमानों का अधिकार हो चूका था, जिसके अधिकांश भाग पर महमूद के वंशज ग़ज़नवी सरदार शासन करते थे।

➣ मुहम्मद ग़ोरी को भारत के आंतरिक भाग तक पहुँचने के लिए पहले उन मुसलमान शासकों से, फिर वहाँ के राजपूतों से युद्ध करना था। शुरुवात में उसे इसमें सफलता भी मिली।

➣ किन्तु 1178 ई. में गुजरात के चालुक्य शासक भीमदेव द्वितीय द्वारा वह खदेड़ दिया गया। भारत में उसकी यह पहली पराजय थी। लेकिन वह एक नई योजना के साथ फिर से भारत पर चढ़ाई करने के लिया आया। इस बार उसका सामना तत्कालीन समय के शक्तिशाली हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान से हुआ।

➣ मुहम्मद ग़ोरी का पृथ्वीराज चौहान से दो भीषण युद्ध हुए, जिनमें से प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज विजयी हुआ, जबकि दूसरे युद्ध में उसे पराजय का सामना करना पड़ा। यह दोनों युद्ध थानेश्वर के निकटवर्ती तराइन या तरावड़ी के मैदान में क्रमशः 1191 ई. और 1192 ई. में हुए थे।

➣ मुहम्मद ग़ोरी ने पृथ्वीराज के विरुद्ध जो अभियान किया, वह एक प्रबल आक्रमण था। इसलिए महमूद ग़ज़नवी के बाद मुहम्मद ग़ोरी ही भारत पर चढ़ाई करने वाला दूसरा मुस्लिम आक्रांता माना गया है।

➣ पृथ्वी राज चौहान की पराजय ने मुस्लिम आक्रमणकारियों के लिए भारत के द्वार खोल दिए थे। 1194ई . में चंदावर के युद्ध गौरी ने जयचंद्र को परास्त कर कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया।

➣ मुहम्मद ग़ोरी का कोई पुत्र नहीं था। उसकी मौत ( 1206 ई. में ) के बाद उसके साम्राज्य के भारतीय क्षेत्र पर उसके ग़ुलाम क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत स्थापित करके उसका विस्तार करना शुरू कर दिया।

1206 ई. में ऐबक ने अपना राज्याभिषेक लाहौर में किया। इसने राजधानी लाहौर बनायी। ऐबक की मृत्यु के पश्चात इल्तुतमिश ने राजधानी दिल्ली स्थान्तरित की।

➣ भारत में तुर्की शासन का वास्तविक संस्थापक इल्तुतमिश ही था। भारत में मुस्लिम प्रभुसत्ता का वास्तविक शुभारंभ इल्तुतमिश से ही होता है। इसके समय चंगेज खां अपने दुश्मन का पीछा करते हुए भारत की सीमा तक पहुँच गया था। किन्तु सिन्धु नदी से वापस चला गया।

रजिया सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थी। इल्तुतमिश ने उसे अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। रजिया दिल्ली की प्रथमअन्तिम मुस्लिम महिला शासक थी। उसने सैनिक वेशभूषा धारण की, पर्दा प्रथा छोड़कर पुरूष वेशभूषा कुबा (कोट) व कुलाहा (टोपी) पहनकर दरबार में बैठती थी।

ग़यासुद्दीन बलबन ग़ुलाम वंश का नवाँ सुल्तान था। बलबन मूलतः सुल्तान इल्तुतमिश का तुर्की ग़ुलाम था। उसका जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ था। दुर्भाग्यवश बलबन अपनी युवास्था में ही मंगोलों द्वारा बंदी बना लिया गया।

➣ बलबन ने अपने विरोधियों की समाप्ति के लिए लौहरक्त की नीति (खून का बदला खून) का अनुपालन किया। इस नीति के अन्तर्गत विद्रोही व्यक्ति की हत्या कर उसकी स्त्री एवं बच्चों को दास बना लिया जाता था।

1290 में गुलाम वंश के अंत के पश्चात जलालुद्दीन फिरोज ख़िलजी ने खिलजी वंश की नींव रखी। खिलजी वंश के मुस्लिम शासकों में अलाउद्दीन खिलजी ने ही सर्वप्रथम दक्षिण भारत का अभियान प्रारंभ किया था।

➣ यद्दपि उसने दक्षिणी राज्यों से वार्षिक कर वसूला। उन पर शासन नहीं किया था। इस प्रकार मुस्लिम शासक अभी तक केवल उत्तर-भारत पर ही शासन कर रहे थे।

1320ई. में गयासुद्दीन मुहम्मद तुगलक ने तुगलक वंश की नींव रखी। दिल्ली सल्तनत के काल में तुगलक वंश के शासकों ने सबसे अधिक समय तक शासन किया। दिल्ली पर शासन करने वाले तुर्क राजवंशों में अंतिम तुगलक वंश ही था।

➣ ग़यासुद्दीन तुग़लक़ पूर्णतः साम्राज्यवादी था। इसने अलाउद्दीन ख़िलजी की दक्षिण नीति त्यागकर दक्षिणी राज्यों को दिल्ली सल्तनत में शामिल कर लिया। इस प्रकार अब दिल्ली सल्तनत में धीरे-धीरे दक्षिणी राज्य भी सम्मलित होने लगे थे।

➣ हालाँकि मुबारक खिलजी (1216-1320 ई.) ने सर्वप्रथम दक्षिणी राज्यों को दिल्ली सल्तनत में मिलाया था। किन्तु यह अयोग्य शासक साबित हुआ। विभिन्न स्रोतों में गयासुद्दीन मुहम्मद तुगलक को पहला शासक कहा गया है।

➣ मुबारक खिलजी द्वारा पहला राज्य देवगिरी एंव गयासुद्दीन तुगलक द्वारा दिल्ली सल्तनत में मिलाया गया वारंगल राज्य था।

➣ ग़यासुद्दीन तुग़लक़ की मृत्यु के बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र जूना खां (जौना खा), मुहम्मद बिन तुग़लक़ के नाम से दिल्ली की गद्दी पर (1325 ई. में) बैठा। मध्यकालीन सभी सुल्तानों में मुहम्मद तुग़लक़ सर्वाधिक शिक्षित, विद्वान, धर्म-निरेपक्ष, कला-प्रेमी एवं अनुभवी सेनापति था। इसे इतिहास में एक बुद्धिमान मूर्ख शासक के रूप में जाना जाता है।

➣ मुहम्मद बिन तुगलक को उसकी पाँच महत्त्वाकांक्षी योजनाओं (जैसे – राजधानी परिवर्तन एंव सांकेतिक मुद्रा) के कारण व्यापक‌ चर्चा मिली थी। किन्तु उसकी यह योजनाये असफल रही। अपनी महत्त्वाकांक्षी असफल योजनाओं के कारण ही मुहम्मद तुग़लक़ को असफलताओं का बादशाह कहा जाता है।

➣ मुहम्मद बिन तुगलक के समय ही 1336 ई. में हरिहर एंव बुक्का नामक दो भाइयों ने दक्षिण भारत में एक हिन्दू साम्राज्य, विजयनगर (1336-1649) की नींव रखी थी। उत्तर-भारत में जहाँ मुस्लिम शासकों का शासन था। वहीँ दक्षिण-भारत में विजयनगर में एक हिन्दू साम्राज्य ने सत्ता संभाल ली थी।

➣ भारत के एक हिस्से में (उत्तर-भारत) जहाँ जजिया कर लिया जा रहा था, मंदिरों को तोडा जा रहा था। वहीँ भारत एक हिस्से में (दक्षिण-भारत) कई मंदिरों का निर्माण हुआ एंव पुराने मंदिरों का जीर्णोधार हुआ। कृष्ण देवराय(तुलुव वंश से) विजयनगर का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक था।

➣ जिस समय भारत में मुग़ल वंश ने पाँव ज़माने शुरू किये थे। उस समय विजयनगर में तुलुव वंश के राजाओं का शासन था। कृष्ण देवराय तुलुव वंश का ही शासक था। देवराय की मृत्यु 1529 ई. में तथा बाबर की मृत्यु 1530 ई. में हुई थी। ये दोनों लगभग एक दुसरे के समकालीन थे।

➣ बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में कृष्ण देवराय को भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली कहा है। राणा सांगा, कृष्ण देवराय एंव बाबर तीनों शासक एक दूसरे के समकालीन थे।


औरंगजेब के समय शिवाजी (1627 -1680ई.) के नेतृत्व में स्वराज का सपना लेकर मराठों का उदय हुआ। मराठों ने ही मध्यकाल में सर्वप्रथम अखण्ड भारत का सपना देखा था (पहला अखण्ड भारत मौर्य साम्राज्य का था), शिवाजी के पश्चात उनके पुत्र शंभाजी (1680-89 ई.) एंव राजाराम (1689-1700 ई.) मराठों का नेतृत्व करते हैं और मराठों की स्वतंत्रता बनाए रखते हैं।

➣ कालांतर में पेशवा बालाजी विश्वनाथ (1713-1720 ई.) के नेतृत्व में फिर से मराठों का उत्थान होता है इसलिए इन्हें मराठा साम्राज्य का द्वितीय संस्थापक भी कहा जाता है।

➣ मुहम्मद बिन तुगलक के पश्चात फ़िरोज़ तुग़लक़ गद्दी (1351 ई. में) पर बैठा। उसने अपने शासन काल में कोई भी सैनिक अभियान साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं किया और जो भी अभियान किया, वह मात्र साम्राज्य को बचाये रखने के लिए किया।

➣ फ़िरोज़ तुग़लक़ कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उसके समय पहली बार ब्राह्मणों को भी जजिया कर देने को बाध्य किया गया। हिंदुओं के अनेक मंदिर नष्ट कर दिए गए, मंदिरों की मरम्मत पर पाबंदी लगा दी गई।

➣ तुगलक वंश के समय ही 1398 ई. में मध्य एशिया के दुर्दान्त आक्रमणकारी तैमूर लंग ने भारत पर आक्रमण (नासिरूद्दीन महमूद तुगलक के शासनकाल में) किया था। तैमूर के आक्रमण ने दिल्ली सल्तनत को नष्ट कर दिया।

➣ तैमूर लंग का प्रमुख उद्देश्य भारत में लूटपाट करना था। उसने दिल्ली , मेरठ, फिरोजाबाद , हरिद्वार में काफी लूटपाट की। जिसमे उसे काफी मात्रा में धन , सोना- चाँदी , हीरे-जवाहरात प्राप्त हुए। वह अपने साथ अनेक कारीगरों को भी अपने साथ ले गया।

➣ भारत पर आक्रमण के दौरान ख्रिज खां ने तैमूर की सहायता की थी। इस प्रकार अपने विजित प्रदेशों का राज्य पाल खिज्र खाँ को नियुक्त किया।

➣ वापस लौटते समय तैमूर ने जीते गये क्षेत्रों लाहौर, मुल्तान, दीपालपुर आदि का प्रशासन खिज्र खाँ को सौंप दिया। इसी खिज्र खाँ ने आगे चलकर दिल्ली में सैयद वंश की स्थापना की थी।

1414 ई. में खिज्र खाँ ने सैयद वंश की स्थापना की। खिज्र खाँ ने सुल्तान के बदले रैयत-ए-आला की उपाधि ग्रहण की। 20 मई, 1421 ई. को खिज्र खां की मृत्यु हो गयी थी।

➣ लगभग 37 वर्ष के बाद सैय्यद वंश भी समाप्त हो गया और दिल्ली तख़्त पर नए राजवंश की स्थापना हुई।

➣ सैय्यद वंश के अंतिम सुल्तान अलाउद्दीन आलमशाह द्वारा राज्य त्यागने के पश्चात दिल्ली में पुन: एक बार राजसत्ता एवं राजवंश का परिवर्तन हुआ। सैय्यदों का स्थान अब लोदियों ने ले लिया।

बहलोल लोदी ने भारत में प्रथम अफगान राज्य की स्थापना की। (द्वितीय अफगान राज्य की स्थापना शेरशाह सूरी ने की थी।) लोदियों के उदय के साथ ही दिल्ली सल्तनत के विघटन की प्रक्रिया पूरी हो गयी। इस वंश में तीन शासक हुए- बहलोल लोदी (1451-1489 ई.), सिकन्दर लोदी (1489-1517ई.) एंव इब्राहिम लोदी (1517 ई.- 1526 ई.)।

➣ सिकन्दर लोदी गुजरात के महमूद बेगड़ा और मेवाड़ के राणा सांगा का समकालीन था। सिकन्दर लोदी एंव राणा सांगा के मध्य खतौली का युद्ध हुआ था। जिसमे लोदी परास्त हुआ।

➣ लोदी वंश का तृतीय शासक इब्राहिम लोदी के समय की सबसे महत्वपूर्ण घटना पानीपत का प्रथम युद्ध (1526 ई.) है जिसने भारत में दिल्ली सल्तनत युग को समाप्त किया और मुगलों के नेतृत्व में मध्यकालीन भारत का दूसरा अध्याय आरंभ हुआ।

➣ सल्तनत कालीन शासकों ने सुल्तान की उपाधि धारण की थी जबकि मुग़ल शासकों ने पादशाह/बादशाह/सम्राट जैसी उपाधि धारण की। सुल्तान अपने आपको खलीफा का नायब (सहयोगी) ही मानते थे। समस्त इस्लामी राज्य का सांविधानिक प्रधान खलीफा ही माना जाता था।

भारत में मुग़ल

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➣ मुग़ल वंश मध्यकालीन भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली साम्राज्य था। साथ ही यह भारत का अंतिम राजवंश भी जिसने इतने भारत के इतने बड़े भू-भाग पर शासन किया।

प्रो. कादरी ने मुग़ल साम्राज्य को एक कथन में समझाया है, उनके अनुसार
बाबर ने मुग़ल राज्य के भवन के लिए मैदान साफ़ किया,
हुमायूँ ने उसकी नीव डाली,
अकबर ने उस पर सुंदर भवन खड़ा किया,
जहाँगीर ने उसे सजाया−सँवारा,
शाहजहाँ ने उसमें निवास कर आंनद किया,
औरंगज़ेब ने उसे विध्वंस कर दिया।

➣ मुगल शासक वास्तव में तुर्कों की चगताई नामक शाखा के थे। इस शाखा का नाम प्रसिद्ध मंगोल नेता चंगेज खां के द्वितीय पुत्र के नाम पर पड़ा था, जिसके अधिकार में मध्य एशिया तथा तुर्कों का देश तुर्किस्तान थे।

➣ मुग़ल वंश ऐसा पहले व अंतिम विदेशी आक्रमणकारी थे जिन्होंने भारत में करीबन 331 वर्षो तक शासन किया। उत्तर-मुग़ल शासकों के शासनकाल में 1739ई. में फारस शासक नादिरशाह (ईरान का नेपोलियन) तथा अहमद शाह अब्दाली का विदेशी हमला हुआ।

➣ बाबर ने भारत पर पाँच बार आक्रमण किया था। बाबर का भारत के विरुद्व किया गया प्रथम अभियान 1519 ई. में युसूफजाई जाति के विरुद्ध था। इस अभियान में बाबर ने बाजौर और भीरा के शक्तिशाली क़िले को अपने अधिकार में किया।

21 अप्रैल 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर और इब्राहीम लोदी का आमना सामना हुआ। युद्ध में इब्राहीम लोदी बुरी तरह से परास्त हुआ और मारा गया और बाबर ने भारत में मुग़ल वंश की नींव स्थापित की।

➣ कालातर में खानवा (1527), चंदेरी (1528) एंव घाघरा (1529) के युद्ध में भी उसे सफलता मिली। खानवा (राणा सांगा के विरुद्ध) एंव चंदेरी (मेदिनी राय के विरुद) के युद्धों ने राजपूतों की शक्ति को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।

➣ अफगान शासकों के विरुद्ध हुए घाघरा युद्ध में यद्दपि बाबर सफल रहा किन्तु युद्ध निर्णायक नहीं रहा। सन 1530 में बाबर की मृत्यु के पश्चात अफगान फिर उठे।

➣ बाबर का उत्तराधिकारी हुमायूं हुआ। जिसके शासनकाल एक अफगान सरदार शेरशाह सूरी ने अफगानी विद्रोहियों का नेतृत्व किया।

➣ सन 1540 ई . बिलग्राम या कन्नौज का युद्ध हुमायूं एंव शेरशाह के मध्य लड़ा गया। हुमायूं युद्ध में परास्त हुआ। इस युद्ध के बाद शेर ख़ाँ ने आगरा और दिल्ली पर भी अधिकार कर लिया। इस तरह से सत्ता एक बार फिर से अफ़ग़ानों के हाथ में आ गई।

➣ कुछ समयांतराल के लिए भारत से मुग़ल वंश का अस्तित्व समाप्त हो गया और शेर खां ने दिल्ली में सूर वंश (1539 -1555 ई.) की स्थापना की। इस प्रकार शेरशाह सूरी को द्वितीय अफगान साम्राज्य का संस्थापक कहा गया है।

➣ शेरशाह से परास्त होने के उपरान्त हुमायूँ सिंध चला गया, जहाँ उसने लगभग 15 वर्ष तक घुमक्कड़ों जैसे निर्वासित जीवन व्यतीत किया। उसके निर्वासन समय में ही अकबर का जन्म हुआ था।

➣ दूसरी तरफ दिल्ली तख़्त पर अफगान शासक शेरशाह सूरी (1540-1545 ई.) शासन कर रहा था। शेरशाह सूरी का अल्प शासनकाल प्रशासनिक सुधारों के लिए जाना जाता है।

➣ शेरशाह की 22 मई, 1545 ई. को मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के पश्चात इस्लामशाह (1545-1553 ई.) गद्दी पर बैठा। किन्तु युवावस्था में ही उसकी मृत्यु हो जाने के कारण उसके उत्तराधिकारियों में गृह युद्ध छिड़ गया। इससे हुमायूँ को भारत के साम्राज्य को पुनः प्राप्त करने का अवसर मिल गया।

1555 की दो ज़बरदस्त लड़ाईयों (मच्छिवारा-15 मई, 1555 ई. एंव सरहिन्द का युद्ध – 22 जून, 1555 ई.) में उसने अफ़ग़ानों को पराजित कर दिया और दिल्ली तथा आगरा को फिर से जीत लिया।

➣ लेकिन वह विजय के फल का आनन्द उठाने के लिए अधिक समय जीवित नहीं रहा। जनवरी, 1556 ई. में उसकी मृत्यु हो गयी। मृत्यु के समय उसका पुत्र अकबर पंजाब में था। बैरम खां के संरक्षक में कलानौर में ही अकबर राज्याभिषेक करवाया गया।

➣ इस बीच दिल्ली पर हेमू (हेमचन्द्र) ने तख़्त पर अधिकार कर लिया और एक हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की। इसलिए कई जगह हेमू को अंतिम हिन्दू सम्राट भी कहा गया है। यद्दपि यह शासन काल अल्पसमय के लिए ही रहा।

➣ शीघ्र ही 5 नवम्बर, 1556 ई. में पानीपत का द्वितीय युद्ध हुआ। जिसमे उसकी पराजय हुई और तख्त एक बार फिर से मुग़ल के हाथों चला गया। इस बार गद्दी अकबर ने संभाली।

➣ अकबर मुग़ल वंश का सबसे महानतम शासक हुआ जिसने धर्म निरपेक्ष नीति एंव राजपूतों से वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित कर साम्राज्य का विस्तार किया। यह पहला मुग़ल शासक था जिसने दक्षिण अभियान छेड़ा। दक्षिण अभियान के पश्चात ही अकबर ने सम्राट की उपाधि धारण की थी।

➣ अकबर ने जजिया कर , दास प्रथा, तीर्थ यात्रा कर समाप्त कर दिया। इसके अतिरिक्त उसने सती प्रथा को रोकने का प्रयास भी किया।

➣ कालांतर में जहाँगीर (1605-27 ई.) एंव शाहजहाँ (1628-1657 ई.) ने अकबर की नीति का अनुसरण किया और क्रमवार शासन किया। सन 1658 ई. में औरंगज़ेब (1658-1707 ई.) ने अपने भाइयों की हत्या कर गद्दी पर अधिकार कर लिया।

➣ मुग़ल शासकों में अकबर तथा औरंगजेब दोनों का कार्यकाल सबसे अधिक लगभग 49-50 वर्ष का था। अकबर ने जहाँ भारत में मुग़ल वंश की नींव मजबूत की, वहीँ औरंगजेब मुग़लों के पतन के लिए उत्तरदायी रहा।

➣ औरंगजेब सर्वोपरि एक सुन्नी मुसलमान था। औरंगज़ेब ने इस्लाम धर्म के महत्व को स्वीकारते हुए क़ुरान को अपने शासन का आधार बनाया। उसे जिन्दा पीर कहा गया है।

➣ इसके अतरिक्ति इस्लाम नहीं स्वीकार करने के कारण सिक्खों के 9वें गुरु तेगबहादुर की हत्या औरंगजेब ने 1675ई. में दिल्ली में करवा दी थी ( जहाँगीर ने सिक्खों के पाँचवें गुरु अर्जुनदेव को शहजादा ख़ुसरो की सहायता करने के कारण फांसी दे दी थी।

1679 ई. को हिन्दुओं पर दोबारा जज़िया कर लगा दिया। मंदिरों को तोड़वाने का आदेश देकर नवीन एवं पुराने मंदिरों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा दिया गया। दरबार में बसंत, होली, दीवाली आदि त्योहार मनाने बंद कर दिए। यद्दपि उसके समय सर्वाधिक हिन्दू सेनापति थे।

➣ औरंगजेब के समय शिवाजी के नेतृत्व में स्वराज का सपना लेकर मराठों का उदय हुआ, किन्तु आगे चलकर उत्तराधिकारी अयोग्य एंव निर्बल साबित हुए। इसलिए आशिंक सफलता ही प्राप्त हुई।

14 जनवरी 1761 में हुई पानीपत की तीसरी लड़ाई अहमद शाह अब्दाली और मराठा सेनापति सदाशिव राव भाऊ के मध्य हुई। इस युद्ध ने मराठों शक्ति को पूरी तरह समाप्त कर दिया था। युद्ध में बालाजी के पुत्र विश्वास राव, सदाशिव राव भाऊ भी मारे गए। कुछ समय पश्चात पेशवा बालाजी बाजीराव की भी मृत्यु हो गयी।

➣ पानीपत की तीसरी लड़ाई ने मराठों को कमजोर कर दिया था जिसका फायदा अंग्रेजों को हुआ और भारत की सत्ता धीरे-धीरे ब्रिटिश के हाथों में चली गयी। जिसने 1947 तक भारत पर शासन किया।

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