जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने क्यूमर्स की हत्या कर खिलजी वंश की नींव डाली।
खिलजी वंश की स्थापना को खिलजी क्रांति नाम से जाना जाता है।
जलालुद्दीन फिरोज खिलजी का नाम मलिक फिरोज था।
खिलजी सर्वहारा वर्ग के थे।
खिलजी शासकों ने प्रशासन में धर्म और उलेमा के महत्व को अस्वीकार कर दिया।
जलालुद्दीन खिलजी ने अपनी राजधानी किलोकरी (दिल्ली के पास) को बनाई।
जलालुद्दीन ने अपने राज्याभिषेक के एक वर्ष बाद दिल्ली में प्रवेश किया।
जलालुद्दीन ने अपने पुत्रों को खानखाना, अर्कली खाँ एवं कद्र खाँ की उपाधि प्रदान की।
जलालुद्दीन खिलजी ने 1290 ई. में कड़ामानिकपुर के सूबेदार मलिक छज्जू के विद्रोह को दबाया।
जलालुद्दीन खिलजी की हत्या उसके भतीजे और दामाद (1296 ई. में) अलाउद्दीन खिलजी ने की।
अलाउद्दीन खिलजी के बचपन का नाम अली गुर्शस्प था।
अलाउद्दीन खिलजी ने अपना राज्याभिषेक दिल्ली में स्थित बलबन के लालमहल में करवाया।
प्रारम्भिक सफलता के बाद अलाउद्दीन ने सिकन्दर ए सानी की उपाधि ग्रहण की।
अलाउद्दीन ने विश्व विजय एवं एक नवीन धर्म स्थापित करने का विचार दिल्ली के कोतवाल अलाउदलमुल्क के कहने पर त्यागदिया।
सिक्कों पर तारीख लिखने की प्रथा अलाउद्दीन खिलजी ने शुरू की।
अलाउद्दीन खिलजी ने मद्य-निषेध, जुआ खेलने एवं भांग खाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया।
गुजरात के बघेल राजा कर्ण देव को पराजित कर अलाउद्दीन ने उसकी पत्नी कमला देवी से शादी की।
अलाउद्दीन का पहला अभियान गुजरात पर 1298 ई. में बघेल शासक राय कर्णदेव पर था।
गुजरात अभियान में नुसरत खाँ ने हिन्दू हिजड़े मलिक काफूर को एक हजार दीनार में खरीदा था।
मलिक काफूर को हजारदीनारी नाम से भी जाना जाता था।
अलाउद्दीन ने मलिक काफूर को मलिक-ए-नायब बना दिया।
अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद मलिक काफूर 35 दिनों तक शासक बना रहा।
मलिक काफूर ने सेनापति रहते हुए देवगिरि, वारंगल, द्वार समुद्र, मालाबार एवं मदुरा की महत्वपूर्ण विजय प्राप्त की।
प्रतापरुद्रदेव (वारंगल के शासक) ने संसार प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा दिया था।
अलाउद्दीन के समय मेवाड़ का शासक राणा रतन सिंह था।
मेवाड़ को जीतने के बाद अलाउद्दीन ने इसका नाम अपने पुत्र खिज्र खाँ के नाम पर “खिज्राबाद” रखा।
अलाउद्दीन को अपने शासनकाल में मंगोल आक्रमण का सामना करना पड़ा।
अलाउद्दीन खिलजी ने सीरी में अपनी राजधानी बनाई।
किरान-उस-सादेन की रचना अमीर खुसरो ने की।
आर्थिक मामलों से सम्बन्धित विभाग दीवान-ए-रियासत की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी ने की।
न्याय का उच्चतम् न्यायाधीश सुल्तान था।
पुलिस विभाग का प्रमुख कोतवाल होता था।
सर्वप्रथम डाक व्यवस्था की शुरुआत सल्तनत काल में अलाउद्दीन ने की।
स्थायी सेना, दाग एवं महाली तथा सैनिकों को नकद वेतन देने की प्रथा की शुरुआत सर्वप्रथम अलाउद्दीन खिलजी ने की।
बाजार नियंत्रण की पद्धति सर्वप्रथम अलाउद्दीन खिलजी ने शुरू की।
अलाउद्दीन प्रथम सुल्तान था, जिसने भूमि की माप कराई।
वह पैदावार का पचास प्रतिशत खराज वसूलता था।
अलाउद्दीन ने अमीर खुसरो तथा अमीर हसन देहलवी को संरक्षण प्रदान किया।
मलिक काफूर ने अलाउद्दीन के मरणोपरांत उसके नवजात पुत्र शिहाबुद्दीन को गद्दी पर बैठाकर उसका संरक्षक बन गया।
खजाइनूल फुतूह में अमीर खुसरो ने अलाउद्दीन को ‘विश्व का सुल्तान‘, ‘पृथ्वी के शासकों का सुल्तान‘, ‘युग का विजेता‘ तथा ‘जनता का चरवाहा‘ जैसी उपाधियाँ दी।
‘अलाई दरवाजा‘ अलाउद्दीन ने बनवाया।
मुबारक खिलजी ने खलीफा के आदेश को नहीं माना।
मुबारक शाह खिलजी ने स्वयं को खलीफा घोषित किया।
मुबारक खिलजी ने अल-इमाम, उल-इमाम, खिलाफत-उल-लह उपाधि धारण की।
बर्नी के अनुसार मुबारक शाह खिलजी कभी-कभी दरबार में नग्नावस्था में आता था।
मुबारक खिलजी की हत्या खुसरो शाह ने की।
खुसरो शाह की हत्या गाजी मलिक (गयासुद्दीन तुगलक) ने की।
खुसरो शाह ने पैगम्बर का सेनापति की उपाधि धारण की थी।
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