1. वर्ष 1919 में अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन का अध्यक्ष किसे चुना गया?
U.P.P.C.S. (Pre) 1993
उत्तर-(a)
प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की साम्राज्य के विभाजbन के विरोध में दिल्ली में 23-24 नवंबर 1919 को खिलाफत कमेटी का सम्मेलन हुआ, जिसकी अध्यक्षता 24 नवंबर को महात्मा गांधी ने की। इसके तुरंत बाद दिसंबर 1919 में हुए कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी सम्मेलन शृंखला में सितंबर 1920 के कांग्रेस के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव रखा, जिसे खिलाफत आंदोलन के साथ जोड़ा गया। साथ ही, खिलाफत आंदोलन की वकालत के लिए ही ‘अली बंधुओं’ ने 1920 में ‘हिजरत आंदोलन’ को भी प्रेरित किया, जिसके तहत हजारों भारतीय मुसलमान अफगानिस्तान चले गए।
2. ‘खिलाफत आंदोलन’ के प्रमुख नेता निम्नलिखित में से कौन थे?
U.P.P.C.S (Pre) 2016
उत्तर-(a)
खिलाफत आंदोलन के संचालन का मुख्य दायित्व अली बंधुओं — मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली — पर था, जिन्होंने देशभर में सभाएं कर मुस्लिम जनमानस को इस आंदोलन से जोड़ा।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मोहम्मद अली ने ‘हमदर्द’ और ‘कॉमरेड’ नामक समाचार-पत्र निकाले थे, जिनके माध्यम से उन्होंने खिलाफत के पक्ष में जनमत तैयार किया। दोनों भाइयों को 1921 में राजद्रोहात्मक भाषणों के आरोप में गिरफ्तार कर कारावास भेजा गया था।
3.खिलाफत के प्रश्न पर असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ?
M.P.P.C.S. (Pre) 1992
उत्तर-(b)
कलकत्ता में सितंबर 1920 में हुए कांग्रेस के विशेष अधिवेशन की अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की थी। इस अधिवेशन में गांधीजी के सुझाव पर असहयोग आंदोलन शुरू करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। इसके पीछे दो प्रमुख कारण थे- पहला, खिलाफत के मसले पर ब्रिटिश सरकार का रुख भारतीय मुसलमानों की भावनाओं के विरुद्ध था, और दूसरा, पंजाब में जलियांवाला बाग जैसी घटनाओं के दोषी अधिकारियों को सजा न दिया जाना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खिलाफत आंदोलन का संबंध तुर्की के सुल्तान (खलीफा) की सत्ता बचाने से था, जिसे प्रथम विश्व युद्ध में हार के बाद कमजोर कर दिया गया था। मोहम्मद अली और शौकत अली बंधुओं ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया था, और इसी कारण हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने के लिए गांधीजी ने असहयोग और खिलाफत आंदोलन को आपस में जोड़ा।
4.किसने खिलाफत आंदोलन को ‘हिंदुओं और मुसलमानों की एकता के एक ऐसे अवसर’ के रूप में देखा जो सौ वर्षों में भी पुनः प्रस्तुत नहीं होगा?
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर-(c)
महात्मा गांधी ने खिलाफत के मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने का दुर्लभ अवसर माना और इसी सोच के साथ उन्होंने इस आंदोलन को असहयोग आंदोलन से जोड़कर एक संयुक्त राष्ट्रव्यापी संघर्ष का रूप दिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी के इस रणनीतिक जुड़ाव की आलोचना बाद में कुछ इतिहासकारों ने यह कहकर की कि एक धार्मिक-अंतरराष्ट्रीय मुद्दे को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ना दीर्घकाल में हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ, विशेषकर 1922 में तुर्की में मुस्तफा कमाल पाशा द्वारा स्वयं खिलाफत संस्था समाप्त किए जाने के बाद।
4.निम्नलिखित में से किसने खिलाफत आंदोलन का प्रारंभ किया था?
नीचे दिए गए कूट से सही
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008
उत्तर-का चयन कीजिए-
खिलाफत आंदोलन की शुरुआत का श्रेय मुख्यतः अली बंधुओं को दिया जाता है, हालांकि इसके संचालन हेतु बनाई गई खिलाफत कमेटी में मौलाना अबुल कलाम आजाद, हकीम अजमल खान, हसरत मोहानी और डॉ. अंसारी जैसे नेता भी सम्मिलित थे। ध्यान देने योग्य है कि हाजी शरीयतुल्लाह का इस आंदोलन से कोई संबंध नहीं था, क्योंकि वे 19वीं सदी के फरायजी आंदोलन के संस्थापक थे।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हसरत मोहानी, जो खिलाफत कमेटी के सक्रिय सदस्य थे, उन्हें ही ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा गढ़ने का श्रेय भी दिया जाता है, जो आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख घोष-वाक्य बना।
5.खिलाफत आंदोलन को समर्थन दिया था-
Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(d)
गांधीजी ने भारतीय मुसलमानों को अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष में साथ लाने हेतु खिलाफत आंदोलन का खुलकर समर्थन किया, जबकि ह्यूम और कर्जन जैसे ब्रिटिश व्यक्तित्वों का इस आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सर सैयद अहमद खान, जिनका नाम विकल्पों में है, वस्तुतः 19वीं सदी के अलीगढ़ आंदोलन के प्रणेता थे और उनकी मृत्यु (1898) खिलाफत आंदोलन के आरंभ होने से दो दशक पूर्व ही हो चुकी थी, अतः उनका इस आंदोलन से प्रत्यक्ष संबंध संभव ही नहीं था।
6.खिलाफत आंदोलन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित में से कौन-कौन से थे?
1. भारत के मुसलमानों में ब्रिटिश विरोधी भावना उत्पन्न करना
2. मुस्लिम समाज का सुधार
3. पृथक निर्वाचक मंडल की मांग और खिलाफत का रक्षण
4. ऑटोमन साम्राज्य की रक्षा और खिलाफत का रक्षण
नीचे दिए हुए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
1. भारत के मुसलमानों में ब्रिटिश विरोधी भावना उत्पन्न करना
2. मुस्लिम समाज का सुधार
3. पृथक निर्वाचक मंडल की मांग और खिलाफत का रक्षण
4. ऑटोमन साम्राज्य की रक्षा और खिलाफत का रक्षण
नीचे दिए हुए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
I.A.S. (Pre) 1993
उत्तर-(d)
प्रथम विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध लड़ रहे तुर्की साम्राज्य के विघटन से क्षुब्ध होकर भारतीय मुसलमानों ने ऑटोमन साम्राज्य की रक्षा और खलीफा पद की पुनर्स्थापना हेतु यह आंदोलन छेड़ा, जो स्वाभाविक रूप से ब्रिटिश-विरोधी भावना से भी जुड़ गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में 1920 की ‘सेव्र की संधि’ (Treaty of Sèvres) महत्वपूर्ण रही, जिसके तहत मित्र राष्ट्रों ने ऑटोमन साम्राज्य का विभाजन कर दिया था; इसी संधि के विरोध में भारत में खिलाफत आंदोलन ने और तीव्र रूप धारण किया।
7.महात्मा गांधी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन क्यों किया?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(b)
गांधीजी की रणनीति यह थी कि खिलाफत के मुद्दे पर मुसलमानों का साथ देकर उन्हें राष्ट्रव्यापी असहयोग आंदोलन में शामिल किया जाए, ताकि स्वतंत्रता संग्राम को व्यापक जनाधार मिल सके।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यही रणनीति 1920 के नागपुर कांग्रेस अधिवेशन में औपचारिक रूप से स्वीकृत हुई, जहां असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव को कांग्रेस का आधिकारिक कार्यक्रम बना दिया गया और खिलाफत व स्वराज दोनों को एक साथ इसके लक्ष्य के रूप में रखा गया।
8.निम्नलिखित में से किस एक ने खिलाफत आंदोलन के दौरान हाज़िक्-उल-मुल्क की पदवी त्याग दी थी?
U.P.P.C.S. (Mains) 2014
उत्तर-(d)
हकीम अजमल खां को ब्रिटिश सरकार ने 1908 में ‘हाज़िक्-उल-मुल्क’ की उपाधि से सम्मानित किया था, परंतु खिलाफत व असहयोग आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के क्रम में उन्होंने यह सरकारी उपाधि त्याग दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: हकीम अजमल खां प्रसिद्ध यूनानी चिकित्सक भी थे और उन्होंने ही दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना (1920) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जो असहयोग आंदोलन के दौरान सरकारी शिक्षण संस्थानों के बहिष्कार के परिणामस्वरूप स्थापित राष्ट्रवादी शिक्षा संस्थानों में से एक थी।
9.गांधीजी को किसने सावधान किया था कि मुस्लिम धार्मिक नेताओं और उनके अनुयायियों के कट्टरपन को प्रोत्साहित न करें?
U.P.P.C..S. (Pre) 2002
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(d)
मुहम्मद अली जिन्ना (जब वे राष्ट्रवादी थे) खिलाफत आंदोलन को देश
की स्वतंत्रता के आंदोलन से जोड़ने के विरोधी थे। उन्होंने गांधीजी
को राजनीति में धर्म को न लाने की सलाह दी थी। उन्होंने खिलाफत
आंदोलन में गांधीजी की भागीदारी के विरुद्ध गांधीजी को सावधान
किया था कि वे मुस्लिम धार्मिक नेताओं एवं उनके अनुयायियों के
कट्टरपन को प्रोत्साहित न करें।
10. निम्नलिखित में से किसने महात्मा गांधी की खिलाफत आंदोलन में भागीदारी की भर्त्सना की थी?
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(d)
मुहम्मद अली जिन्ना ने महात्मा गांधी की धार्मिक नेताओं द्वारा
प्रारंभ खिलाफत आंदोलन में भागीदारी की भर्त्सना की थी, जबकि
मौलाना मुहम्मद अली, शौकत अली, अबुल कलाम आजाद, हकीम
अजमल खां और हसरत मोहानी खिलाफत आंदोलन में गांधीजी के
प्रमुख सहयोगी थे।
11. निम्नलिखित में से खिलाफत आंदोलन का परिणाम कौन था?
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(a)
गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन को हिंदू-मुस्लिम एकता का एक सुनहरा
अवसर माना। अतः इस आंदोलन का परिणाम हिंदू-मुस्लिम एकता
के रूप में सामने आया। तुर्की के प्रश्न पर, ब्रिटेन के प्रति आक्रोश ने
मुसलमानों को हिंदुओं के समीप ला दिया था।
12. वह व्यक्ति जिसने 4 अप्रैल, 1919 को दिल्ली की जामा मस्जिद के प्रवचन मंच से हिंदू-मुस्लिम एकता पर भाषण दिया, वे थे-
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(d)
4 अप्रैल, 1919 को दिल्ली की जामा मस्जिद के प्रवचन मंच से स्वामी
श्रद्धानंद ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर लगभग 30,000 मुस्लिमों के समक्ष
भाषण दिया था।
13. कांग्रेस ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया, मुख्यतः –
1. खलीफा की पुनःस्थापना के लिए
2. खलीफा को हटाने के लिए
3. मुसलमानों की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए
4. कांग्रेस में जिन्ना को हाशिए पर लाने के लिए
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
1. खलीफा की पुनःस्थापना के लिए
2. खलीफा को हटाने के लिए
3. मुसलमानों की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए
4. कांग्रेस में जिन्ना को हाशिए पर लाने के लिए
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
U.P.P.C.S. (Pre) 2000
उत्तर-(a)
कांग्रेस ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन खलीफा की पुनःस्थापना के
लिए तथा मुसलमानों की सहानुभूति पाने के लिए किया था। गांधीजी के
अनुसार, यह हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए स्वर्णिम अवसर था। उन्होंने
लिखा कि “जब मुसलमानों के महत्वपूर्ण हित खतरे में हों, तब यदि
हिंदू उनसे दूर रहे तो हिंदू-मुस्लिम एकता के बारे में कांग्रेस का कोई
अर्थ नहीं रहेगा।”
14. निम्नांकित में से किस भारतीय नेता ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन नहीं किया था?
U.P. Lower Sub. (Spl) (Pre) 2008
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
U.P.P.S.C. (GIC) 2010
उत्तर-(b)
सितंबर, 1920 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस के अधिवेशन का प्रमुख
मुद्दा जलियांवाला बाग कांड और खिलाफत आंदोलन था। खिलाफत
आंदोलन में मदन मोहन मालवीय सम्मिलित नहीं हुए थे तथा उन्होंने
इस आंदोलन में कांग्रेस की भागीदारी का विरोध किया था। सितंबर,
1919 में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी का गठन किया गया था।
15. वर्ष 1920 की खिलाफत कमेटी की सभा, जिसने गांधी को असहयोग आंदोलन के नेतृत्व को संभालने का अनुरोध किया था वह किस शहर में हुई थी ?
39th B.P.S.C. (Pre) 1994
उत्तर-(c)
गांधीजी ने वर्ष 1920 में खिलाफत कमेटी को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ
असहयोग आंदोलन छेड़ने की सलाह दी। जून, 1920 में खिलाफत
कमेटी ने इलाहाबाद में इस सलाह को स्वीकार किया और गांधीजी
को आंदोलन की अगुआई करने का अधिकार सौंपा। सितंबर, 1920 में
कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में
असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया।
“इस मिसाल में हम मुसलमानों को हिंदुओं से भिड़ा नहीं पाए। “
16.निम्नलिखित में से कौन-सी एक घटना से एचिंसन के इस कथन का संबंध है?
I.A.S. (Pre) 2000
उत्तर-(c)
एचिंसन की उक्त टिप्पणी खिलाफत और असहयोग आंदोलन (1919-
22) के संदर्भ में थी। ध्यातव्य है कि तुर्की के प्रश्न पर ब्रिटेन के प्रति
आक्रोश ने, मुसलमानों को हिंदुओं के समीप ला दिया था। मुहम्मद अली
ने घोषणा की थी कि वह मुसलमान पहले हैं और भारतीय बाद में।
17. 1921 का मोपला आंदोलन शाखा थी-
43rd B.P.S.C. (Pre) 1999
उत्तर-(a)
केरल प्रांत के मालाबार जिले के मोपला काश्तकारों के आंदोलन मुख्यतः
लगान एवं बेदखली को लेकर थे। जमींदार जब चाहते उन्हें भूमि से
बेदखल कर देते और जब चाहते मनमाना लगान वसूलते। दूसरी ओर,
वहां खिलाफत आंदोलन भी अपनी जड़ें जमाता जा रहा था। हालात ये
हो गए कि खिलाफत आंदोलन एवं काश्तकारों की बैठक में फर्क करना
मुश्किल हो गया। इस तरह दोनों आंदोलन एक-दूसरे में समा गए।
18.निम्न में से कौन-सा एक असहयोग आंदोलन को प्रारंभ करने का कारण नहीं था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(b)
असहयोग आंदोलन तीन प्रमुख कारणों से प्रारंभ हुआ था- खिलाफत का मुद्दा, पंजाब में जलियांवाला बाग जैसी घटनाओं में हुए अत्याचार, और रौलेट एक्ट जैसे दमनकारी कानूनों का विरोध। नमक कानून का इससे कोई संबंध नहीं था, क्योंकि वह बाद में 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान प्रासंगिक बना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रौलेट एक्ट को ‘काला कानून’ भी कहा जाता था, क्योंकि इसके तहत बिना मुकदमे के किसी भी व्यक्ति को बंदी बनाया जा सकता था। इस कानून के विरोध में ही 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में सभा हुई थी, जिसमें जनरल डायर के आदेश पर गोलीबारी की गई।
19.निम्नलिखित में से किसने 1920 के नागपुर के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में असहयोग के प्रस्ताव को प्रस्तावित किया था?
U.P.P.C.S. (Pre) 2011
उत्तर-(a)
कलकत्ता के विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920) में जब गांधीजी ने असहयोग का प्रस्ताव रखा था, तब सी.आर. दास ने इसका विरोध किया था। परंतु दिसंबर 1920 में नागपुर में हुए कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में विस्तृत चर्चा के बाद यही सी.आर. दास इस प्रस्ताव के समर्थक बन गए और स्वयं इसे प्रस्तावित किया, जिसे अधिवेशन ने स्वीकृति दे दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: नागपुर अधिवेशन की अध्यक्षता सी. विजयराघवाचार्य ने की थी। इसी अधिवेशन में कांग्रेस के संविधान में संशोधन करके उसका लक्ष्य ‘स्वराज की प्राप्ति’ निश्चित किया गया, साथ ही कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को भाषाई आधार पर प्रांतीय समितियों में बांटा गया।
20.”एक वर्ष के भीतर स्वराज की प्राप्ति” लक्ष्य था-
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(d)
असहयोग आंदोलन की शुरुआत के साथ गांधीजी ने जनता में उत्साह भरने के लिए एक वर्ष के भीतर स्वराज दिलाने का वादा किया था। यह नारा आंदोलन की तीव्रता और जनसमर्थन बढ़ाने में सहायक रहा, हालांकि व्यवहारिक रूप से इतने कम समय में स्वराज प्राप्त करना संभव नहीं हो सका।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस आंदोलन के अंतर्गत विदेशी वस्तुओं, विशेषकर विदेशी वस्त्रों, का बहिष्कार करते हुए स्वदेशी और चरखे को बढ़ावा दिया गया। फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की घटना के बाद गांधीजी ने इस आंदोलन को स्वयं स्थगित कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि आंदोलन हिंसक हो गया है और यह अहिंसा के सिद्धांत के विपरीत है।
21.1919 के सुधारों की भारतीयों की आकांक्षाओं को पूर्ण करने में
असफलता के साथ, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ‘स्वराज’ अथवा
‘स्वशासन’ हेतु आंदोलन किया, नेतृत्व में-
U.P.P.C.S. (Mains) 2017
उत्तर-(a)
1919 के मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने भारतीयों को आंशिक स्वशासन तो दिया, परंतु यह जनाकांक्षाओं के अनुरूप नहीं था। इस असंतोष के बीच कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वराज प्राप्ति हेतु असहयोग आंदोलन का मार्ग अपनाया, जिसमें सरकारी संस्थानों, उपाधियों और न्यायालयों का बहिष्कार किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: 1919 के एक्ट के तहत केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था (राज्य परिषद और केंद्रीय विधान सभा) तथा प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली (Dyarchy) लागू की गई थी, जिसमें विषयों को ‘आरक्षित’ और ‘हस्तांतरित’ श्रेणियों में बांटा गया था।
22.महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया प्रथम जन आंदोलन था-
U.P.P.C.S. (Pre) 2007
उत्तर-(a)
गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह 1917 में चंपारन में नील की खेती करने वाले किसानों के लिए था, परंतु यह स्थानीय स्तर का आंदोलन था। राष्ट्रव्यापी स्तर पर जनता को एकजुट करने वाला उनका पहला बड़ा जन आंदोलन असहयोग आंदोलन (1920-22) ही था, जिसमें देश के हर वर्ग ने भाग लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चंपारन सत्याग्रह में गांधीजी के साथ राजेंद्र प्रसाद, मजहरुल हक और जे.बी. कृपलानी जैसे नेता जुड़े थे। इसके अतिरिक्त 1918 में गांधीजी ने अहमदाबाद में मिल मजदूरों के लिए और खेड़ा (गुजरात) में किसानों के लिए भी सत्याग्रह किया था, जो असहयोग आंदोलन से पहले की घटनाएं थीं।
23.’एक वर्ष में स्वराज’ का नारा गांधीजी ने कब दिया?
U.P.P.C.S. (Mains) 2012
उत्तर-(b)
गांधीजी ने 1 अगस्त 1920 को जब असहयोग आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की, उसी समय उन्होंने जनता को प्रेरित करने के लिए एक वर्ष के भीतर स्वराज प्राप्त करने का आह्वान किया था। यह नारा आंदोलन के प्रचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह तिथि बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि से भी जुड़ी थी, क्योंकि तिलक का निधन 1 अगस्त 1920 को ही हुआ था। दांडी मार्च, इसके विपरीत, मार्च-अप्रैल 1930 में नमक कानून तोड़ने के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन के अंतर्गत किया गया था।
24.गांधीजी ने असहयोग आंदोलन कब प्रारंभ किया ?
48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008
उत्तर-(a)
1 अगस्त 1920 को गांधीजी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन औपचारिक रूप से शुरू किया गया। यह आंदोलन देशभर में फैला, विशेषकर पश्चिमी भारत, बंगाल और उत्तरी भारत में इसका प्रभाव अत्यंत व्यापक रहा। इस दौरान मोतीलाल नेहरू, लाला लाजपत राय, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू और राजेंद्र प्रसाद जैसे प्रतिष्ठित वकीलों ने न्यायालयों का बहिष्कार करते हुए अपनी वकालत छोड़ दी थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस आंदोलन के दौरान कई राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान भी स्थापित हुए, जैसे काशी विद्यापीठ, जामिया मिलिया इस्लामिया और गुजरात विद्यापीठ, ताकि सरकारी स्कूलों के बहिष्कार से प्रभावित छात्रों को वैकल्पिक शिक्षा मिल सके।
25.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहला असहयोग आंदोलन किस वर्ष में शुरू किया था?
M.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(c)
कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में पारित असहयोग प्रस्ताव को दिसंबर 1920 में नागपुर अधिवेशन में औपचारिक स्वीकृति मिली, परंतु आंदोलन वास्तव में 1 अगस्त 1920 से ही शुरू हो गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी वर्ष लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में कलकत्ता का विशेष अधिवेशन हुआ था, और यह घटनाक्रम भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक जनांदोलन में बदलने का पहला सुनियोजित प्रयास माना जाता है, जिसमें गांधीवादी रणनीति को कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से अपनाया।
26. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन किस वर्ष प्रारंभ किया था?
U.P. Lower Sub. (Pre) 2008a
53rd to 55th B.P.S.C. (pre) 2011
53rd to 55th B.P.S.C. (pre) 2011
उत्तर-(c)
वर्ष 1920 में ही असहयोग आंदोलन की पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई- सितंबर में कलकत्ता में प्रस्ताव पारित हुआ, फिर 1 अगस्त से आंदोलन व्यवहारिक रूप से प्रारंभ हो गया, और अंततः दिसंबर में नागपुर अधिवेशन में इसे कांग्रेस की औपचारिक नीति के रूप में स्वीकार किया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस आंदोलन के अंतर्गत कई प्रसिद्ध शिक्षण संस्थानों का बहिष्कार किया गया, जिनमें कलकत्ता विश्वविद्यालय और अन्य सरकारी विश्वविद्यालय शामिल थे, और छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों की ओर प्रेरित किया गया।
27. नीचे कथनों पर ध्यान दीजिए-असहयोग आंदोलन से-
1. कांग्रेस सर्वप्रथम जन-आंदोलन बनी।
2.हिंदू-मुस्लिम एकता में वृद्धि हुई।
3.जनता के मन से ब्रिटिश ‘शक्ति’ का भय हट गया।
4.ब्रिटेन की सरकार भारतीयों को राजनीतिक रियायतें देने को राजी हुई।
इन कथनों में से-
1. कांग्रेस सर्वप्रथम जन-आंदोलन बनी।
2.हिंदू-मुस्लिम एकता में वृद्धि हुई।
3.जनता के मन से ब्रिटिश ‘शक्ति’ का भय हट गया।
4.ब्रिटेन की सरकार भारतीयों को राजनीतिक रियायतें देने को राजी हुई।
इन कथनों में से-
I.A.S. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
असहयोग आंदोलन (1920-22) ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को पहली
बार वास्तव में जनव्यापी रूप दिया। इससे पूर्व कांग्रेस मुख्यतः शिक्षित
मध्यम वर्ग तक सीमित संगठन मानी जाती थी, लेकिन इस आंदोलन ने
किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों और महिलाओं को बड़ी संख्या में आंदोलन
से जोड़ा। मालाबार क्षेत्र में हुई कुछ अप्रिय घटनाओं के बावजूद समग्र
रूप से मुसलमानों की व्यापक भागीदारी और हिंदू-मुस्लिम एकता
इस आंदोलन की उल्लेखनीय उपलब्धि रही, जिसे खिलाफत आंदोलन
के साथ जोड़े जाने से और बल मिला। आंदोलन ने सामान्य जनता के
मन से अंग्रेजी सत्ता के अजेय होने का भय भी दूर किया। हालांकि
चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी 1922) के बाद गांधीजी ने आंदोलन स्थगित
कर दिया और ब्रिटिश सरकार ने इस दौर में भारतीयों को कोई ठोस
राजनीतिक रियायत नहीं दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: यह आंदोलन भारत में
पहला ऐसा आंदोलन था जिसमें गांधीजी ने अपनी सत्याग्रह की रणनीति
को अखिल भारतीय स्तर पर लागू किया, और इसी आंदोलन के दौरान
दिसंबर 1920 में नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस के संविधान में संशोधन
करते हुए स्वराज प्राप्ति को संगठन का औपचारिक लक्ष्य घोषित किया
गया।
28. चौरी-चौरा किस जनपद में स्थित है?
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008
U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2013
U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2013
उत्तर-(b)
चौरी-चौरा संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) के गोरखपुर जिले में
स्थित एक कस्बा है। 4 फरवरी 1922 को यहां असहयोग आंदोलन से
जुड़े सत्याग्रहियों के एक जुलूस पर पुलिस द्वारा गोली चलाने के बाद
क्रोधित भीड़ ने थाने को आग लगा दी थी, जिसमें 22-23 पुलिसकर्मियों
की मृत्यु हो गई। इस घटना से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने असहयोग
आंदोलन वापस ले लिया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चौरी-चौरा कांड के बाद
ब्रिटिश सरकार ने इस घटना से जुड़े 225 से अधिक लोगों पर मुकदमा
चलाया, जिनमें से 19 को मृत्युदंड और कई को आजीवन कारावास की
सजा दी गई; आज गोरखपुर जिले में इस घटना की स्मृति में ‘चौरी-चौरा
शहीद स्मारक’ स्थापित है, जहां प्रत्येक वर्ष 4 फरवरी को सरकार द्वारा
श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
29.निम्न में से किसने असहयोग आंदोलन के दौरान अपनी वकालत छोड़ दी थी?
U.P.P.C.S. (Pre) 1999
उत्तर-(d)
गांधीजी के आह्वान पर असहयोग आंदोलन के दौरान अनेक प्रतिष्ठित
वकीलों ने अपनी वकालत का परित्याग कर दिया था, जिनमें चितरंजन
दास (सी.आर. दास), मोतीलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू,
विट्ठलभाई पटेल तथा वल्लभभाई पटेल प्रमुख थे। यह त्याग असहयोग
आंदोलन की उस रणनीति का हिस्सा था जिसमें सरकारी न्यायालयों, स्कूलों,
उपाधियों और विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार पर जोर दिया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चितरंजन दास ने वकालत छोड़ने के बाद दिसंबर 1922 में मोतीलाल
नेहरू के साथ मिलकर स्वराज पार्टी (कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी) की
स्थापना की, जिसने वैधानिक परिषदों में प्रवेश की रणनीति अपनाई; इसके
अतिरिक्त, सी.आर. दास 1922 में गया अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
के अध्यक्ष भी चुने गए थे।
30. ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी को जो उपाधि दी थी और जिसे उन्होंने असहयोग आंदोलन में वापस कर दिया, वह थी-
I.A.S (Pre) 1993
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
U.P. Lower Sub. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, जब प्रथम विश्व
युद्ध चल रहा था। युद्ध के दौरान सरकार के अनुरोध पर सहयोग और
भर्ती-प्रयासों में सहायता देने के कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘कैसर-ए-
हिंद’ (Kaisar-i-Hind) की उपाधि से सम्मानित किया था। जलियांवाला
बाग हत्याकांड (1919) से क्षुब्ध होकर तथा असहयोग आंदोलन के अंतर्गत
ब्रिटिश उपाधियों के बहिष्कार की नीति के तहत गांधीजी ने यह उपाधि
सरकार को वापस लौटा दी। उनके अनुसरण में जमनालाल बजाज ने भी
अपनी ‘राय बहादुर’ की उपाधि त्याग दी थी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: रवींद्रनाथ
टैगोर ने भी जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में अपनी ‘नाइटहुड’
(Knighthood) की उपाधि 1919 में ही वापस कर दी थी, जो उपाधि-त्याग
के इस सिलसिले की प्रारंभिक और प्रसिद्ध मिसाल मानी जाती है।
31. निम्नलिखित में से किसने असहयोग आंदोलन को समर्थन दिया, परंतु इसके परिणाम नहीं देख सके?
U.P.P.C.S. (Pre) 2010
उत्तर-(a)
महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाया गया असहयोग आंदोलन वर्ष 1920
से 1922 तक संचालित रहा। ‘लोकमान्य’ बाल गंगाधर तिलक, जो अपने
समय में भारतीय राष्ट्रवाद के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे,
ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया था, परंतु आंदोलन के शुरुआती
ही दिन 1 अगस्त 1920 को उनकी मृत्यु हो जाने के कारण वे इसके
परिणामों को देख नहीं सके।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: तिलक का प्रसिद्ध नारा
“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” इस दौर
के राष्ट्रवादी आंदोलन की प्रेरक शक्ति बना; इसके अतिरिक्त, तिलक
ने 1916 में होमरूल लीग की स्थापना की थी और ‘केसरी’ (मराठी) तथा
‘मराठा’ (अंग्रेजी) समाचार पत्रों के माध्यम से जन-जागरण का कार्य
किया था।
32. किस घटना के कारण गांधीजी ने असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) वापस लिया था?
46th B.P.S.C. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
4 फरवरी 1922 को गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा कस्बे में हुई हिंसक
घटना, जिसमें भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी और कई पुलिसकर्मी
मारे गए, से अत्यंत क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने अहिंसा के सिद्धांत के
प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप असहयोग आंदोलन को वापस लेने का
निर्णय लिया। 12 फरवरी 1922 को बारदोली में आयोजित कांग्रेस कार्य
समिति की बैठक में औपचारिक रूप से आंदोलन को स्थगित कर दिया
गया। गांधीजी ने ‘यंग इंडिया’ पत्रिका में इस निर्णय को स्पष्ट करते हुए
लिखा कि आंदोलन को हिंसा से दूर रखने हेतु वे कोई भी अपमान या
यंत्रणा सहने को तत्पर हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: कांग्रेस कार्य समिति ने
बारदोली में ‘सामूहिक सविनय अवज्ञा’ (mass civil disobedience) को
स्थगित करते हुए केवल वैयक्तिक सत्याग्रह जारी रखने का निर्णय लिया
था, और इस निर्णय की कुछ युवा नेताओं, जैसे सुभाष चंद्र बोस तथा
जवाहरलाल नेहरू, ने आलोचना भी की थी।
33. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा असहयोग आंदोलन के संबंध में सही नहीं है?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(d)
असहयोग आंदोलन 1 अगस्त 1920 को प्रारंभ हुआ और 4 फरवरी
1922 को हुए चौरी-चौरा कांड के बाद महात्मा गांधी द्वारा वापस ले लिया
गया। इस आंदोलन का लक्ष्य ‘एक वर्ष के भीतर स्वराज की प्राप्ति’ घोषित
किया गया था, और इसके अंतर्गत सरकारी उपाधियों, विधान परिषदों,
न्यायालयों, सरकारी शिक्षण संस्थाओं तथा विदेशी वस्त्रों के पूर्ण बहिष्कार
की योजना बनाई गई थी। हालांकि मोहम्मद अली जिन्ना ने इस आंदोलन
का समर्थन नहीं किया, अपितु इसके तरीकों का विरोध करते हुए कांग्रेस
से अपनी दूरी बना ली।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जिन्ना ने सितंबर 1920 के
कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में असहयोग प्रस्ताव के विरोध में मतदान
किया था और इसी कारण उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से त्यागपत्र दे
दिया था; इसके विपरीत, खिलाफत आंदोलन से जुड़े मौलाना मोहम्मद
अली और शौकत अली जैसे नेताओं ने असहयोग आंदोलन का सक्रिय
समर्थन किया था।
34.किस घटना के कारण गांधीजी ने असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) वापस लिया था?
46th B.P.S.C. (Pre) 2004
उत्तर-(b)
इस तथ्यात्मक प्रश्न का उत्तर चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी 1922) है,
जिसमें गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा कस्बे में किसानों के एक जुलूस पर
गोली चलाए जाने से आक्रोशित भीड़ ने स्थानीय पुलिस थाने में आग
लगा दी थी। इस घटना में लगभग 22-23 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो
गई, जिससे क्षुब्ध होकर गांधीजी ने आंदोलन की अहिंसक प्रकृति को
बनाए रखने हेतु इसे स्थगित कर दिया। काकोरी कांड (1925) रेल डकैती
से संबंधित क्रांतिकारी घटना थी, जलियांवाला बाग कांड (1919) जनरल
डायर द्वारा निहत्थी जनता पर गोलीबारी की घटना थी, और मुजफ्फरपुर
कांड (1908) खुदीराम बोस तथा प्रफुल्ल चाकी से जुड़ी बमबारी की घटना
थी—इन तीनों का असहयोग आंदोलन की वापसी से सीधा संबंध नहीं है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चौरी-चौरा कांड को इतिहासकार अक्सर इस बात के
प्रमाण के रूप में उद्धृत करते हैं कि गांधीजी अहिंसा को केवल एक
रणनीति नहीं, बल्कि एक अनिवार्य नैतिक सिद्धांत मानते थे, और इसी
सिद्धांत के पालन हेतु उन्होंने व्यापक जनसमर्थन प्राप्त आंदोलन को भी
रोक देना स्वीकार किया।
35. किस क्षेत्र में राहुल सांकृत्यायन 1920 के असहयोग आंदोलन में सक्रिय थे?
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(a)
महापंडित राहुल सांकृत्यायन (1893-1963), जिनका जन्म आजमगढ़,
उत्तर प्रदेश में हुआ था, असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार के छपरा
क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों की सहायता तथा राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ी
गतिविधियों में सक्रिय रूप से सम्मिलित थे। वे प्रारंभ में गांधीवादी
आंदोलन से जुड़े, हालांकि बाद के जीवन में उनकी वैचारिक यात्रा
बौद्ध दर्शन, मार्क्सवाद और यात्रा-साहित्य की ओर भी विस्तृत हुई।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: राहुल सांकृत्यायन को हिंदी यात्रा-साहित्य का जनक
माना जाता है और उन्होंने तिब्बत की कई यात्राएं करते हुए बौद्ध
पांडुलिपियों की खोज की; उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘मेरी जीवन
यात्रा’ तथा ‘वोल्गा से गंगा’ सम्मिलित हैं, और उन्हें भारत सरकार
द्वारा पद्म भूषण सम्मान से भी अलंकृत किया गया था।
36. गांधीजी के असहयोग आंदोलन में लोगों को शराब से परहेज करने –
का आग्रह किया गया। फलस्वरूप सरकार के राजस्व में भारी कमी
आयी। एक प्रदेश की सरकार ने लोगों को फिर से शराब पीने को
प्रेरित करने के लिए प्रमुख व्यक्तियों की एक सूची प्रसारित की जो
शराब पीते थे। उस प्रदेश का नाम बताइए।
64th B.P.S.C. (Pre) 2018
उत्तर-(b)
असहयोग आंदोलन के अंतर्गत गांधीजी के मद्य-निषेध (शराब बहिष्कार)
के आह्वान के व्यापक प्रभाव के कारण उत्पाद शुल्क से प्राप्त होने
वाले सरकारी राजस्व में भारी गिरावट आई। इससे चिंतित होकर बिहार
एवं ओडिशा प्रांत की सरकार ने लोगों को पुनः मद्यपान की ओर
प्रेरित करने हेतु ऐसे महान एवं विख्यात ऐतिहासिक व्यक्तियों की एक
सूची प्रसारित की जो स्वयं शराब का सेवन करते थे, जिसमें सिकंदर,
जूलियस सीजर, नेपोलियन तथा शेक्सपियर जैसे नाम शामिल थे। यह
घटना दर्शाती है कि असहयोग आंदोलन का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, अपितु इसने औपनिवेशिक
राजस्व ढांचे को भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
उस समय बिहार और ओडिशा एक संयुक्त प्रांत (बिहार एवं उड़ीसा
प्रांत) के रूप में प्रशासित होते थे, जो 1936 में अलग-अलग प्रांतों में
विभाजित हुए; मद्य-निषेध आंदोलन गांधीजी के व्यापक रचनात्मक
कार्यक्रम (constructive programme) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था,
जिसमें स्वदेशी, चरखा और हिंदू-मुस्लिम एकता जैसे अन्य कार्यक्रम भी
सम्मिलित थे।
37. असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में कृषकों का नेतृत्व किसने किया ?
65th B.P.S.C. (Pre) 2019
उत्तर-(a)
बिहार में असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान किसानों को संगठित करने और उन्हें जमींदारी उत्पीड़न के विरुद्ध जागरूक करने का काम स्वामी विद्यानंद ने किया। उन्होंने मुख्यतः उत्तर बिहार, विशेषकर दरभंगा रियासत के क्षेत्रों में रैयतों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया और किसान सभाओं के माध्यम से आंदोलन को गति दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बिहार में इसी दौर में स्वामी सहजानंद सरस्वती ने भी किसान आंदोलन की नींव रखी, जो आगे चलकर 1929 में अखिल भारतीय किसान सभा के गठन का आधार बना। साथ ही, राजकुमार शुक्ल बिहार में चंपारन आंदोलन (1917) से जुड़े थे, असहयोग आंदोलन के किसान नेतृत्व से नहीं, इसलिए इन दोनों संदर्भों को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
38. निम्नलिखित घटनाओं का सही क्रम नीचे दिए गए कूट से बतलाइए-
1. चौरी-चौरा कांड 2. असहयोग आंदोलन का स्थगन
3. बारदोली प्रस्ताव
कूट :
1. चौरी-चौरा कांड 2. असहयोग आंदोलन का स्थगन
3. बारदोली प्रस्ताव
कूट :
U.P.P.C.S. (Pre) 2001
उत्तर-(c)
4 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा कांड हुआ, जिसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने 12 फरवरी, 1922 को बारदोली में बैठक करके प्रस्ताव पास किया, और इसी निर्णय के अनुसार असहयोग आंदोलन को औपचारिक रूप से स्थगित कर दिया गया। इस प्रकार सही कालानुक्रम है— चौरी-चौरा कांड, बारदोली प्रस्ताव, फिर आंदोलन का स्थगन, जो विकल्प (c) से मेल खाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बारदोली प्रस्ताव को ‘बारदोली डिक्लेरेशन’ भी कहा जाता है और इसी बैठक में गांधीजी ने रचनात्मक कार्यक्रम (charkha, स्वदेशी, हिंदू-मुस्लिम एकता आदि) पर अधिक बल देने की रणनीति अपनाई। इसके अतिरिक्त, बारदोली बाद में 1928 के बारदोली सत्याग्रह (वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में लगान न देने के आंदोलन) के कारण भी प्रसिद्ध हुआ।
39. किस घटना के बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को अपनी ‘हिमालय जैसी भूल’ बताई थी ?
56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015
उत्तर-(*)
‘हिमालय जैसी भूल’ (Himalayan Blunder) वाला कथन गांधीजी ने चौरी-चौरा या असहयोग आंदोलन के संदर्भ में नहीं, बल्कि 1919 के रॉलेट सत्याग्रह के दौरान नाडियाड में मार्शल लॉ की परिस्थितियों में सत्याग्रह छेड़ने को लेकर दिया था। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि बिना जनता को पूर्ण रूप से अहिंसा का प्रशिक्षण दिए सविनय अवज्ञा आरंभ करना उनकी भूल थी। इसीलिए इस प्रश्न का दिए गए विकल्पों में कोई सटीक उत्तर नहीं बनता (*)।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गांधीजी ने यह स्वीकारोक्ति अपने पत्र-लेखों और ‘यंग इंडिया’ में भी व्यक्त की थी, और यही अनुभव बाद में उनके सुनियोजित जन-आंदोलनों (जैसे असहयोग आंदोलन में चरणबद्ध कार्यक्रम) की रणनीति का आधार बना।
40. महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया, क्योंकि-
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
उत्तर-(d)
गांधीजी अहिंसा को आंदोलन की अनिवार्य शर्त मानते थे। 4 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा (गोरखपुर) में भीड़ ने पुलिस थाने को आग लगा दी, जिसमें कई पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई। इस हिंसक घटना से गांधीजी को लगा कि जनता अभी अहिंसा के सिद्धांत को पूरी तरह आत्मसात नहीं कर पाई है, अतः उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चौरी-चौरा कांड में शामिल 172 लोगों पर मुकदमा चला, जिनमें से 19 को फांसी की सजा हुई थी, बाद में कई सजाओं में परिवर्तन भी हुआ। दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2021 में केंद्र सरकार ने चौरी-चौरा कांड की शताब्दी पर वर्षभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की थी।
41. दिल्ली में 24 फरवरी, 1922 को आयोजित अखिल भारतीय
कांग्रेस समिति की बैठक में असहयोग आंदोलन वापस लेने के
लिए गांधीजी के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2002
उत्तर-(d)
चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी, 1922) के बाद गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लिए जाने से कांग्रेस के एक वर्ग में असंतोष फैल गया। 24 फरवरी, 1922 को दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक हुई, जिसमें डॉ. बी.एस. मुंजे ने गांधीजी के इस निर्णय के विरोध में निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया, यद्यपि यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. मुंजे आगे चलकर हिंदू महासभा के प्रमुख नेताओं में शुमार हुए और उन्होंने 1937 में नासिक के भोंसला मिलिट्री स्कूल की स्थापना की थी। एक अन्य तथ्य यह है कि सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू सहित कुछ नेताओं ने भी आंदोलन की अचानक वापसी पर असहमति जताते हुए स्वराज पार्टी का गठन किया।
42. फरवरी, 2021 में प्रधानमंत्री जी द्वारा किस शताब्दी समारोह की शुरुआत की गई?
M.P.P.C.S. (Pre) 2020
उत्तर-(c)
4 फरवरी, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में चौरी-चौरा शताब्दी समारोह का शुभारंभ किया, जो स्वतंत्रता संग्राम की इस महत्वपूर्ण घटना की 100वीं वर्षगांठ को समर्पित था। इस अवसर पर सरकार ने पूरे वर्ष विभिन्न सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी क्रम में भारत सरकार ने ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ अभियान भी 2021 में आरंभ किया था, जो स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ (2022) तक चला। दूसरा तथ्य यह है कि गोरखपुर स्थित चौरी-चौरा में शहीद स्मारक पहले से ही स्थापित है, जिसे शताब्दी समारोह के दौरान और भी प्रमुखता मिली।
43. असहयोग आंदोलन के स्थगन-संबंधी घटनाओं का सही क्रम इंगित करें।
(i) चौरी-चौरा में पुलिस गोलीकांड
(ii) उग्र भीड़ द्वारा पुलिस थाना को जलाना
(iii) गांधीजी द्वारा आंदोलन का स्थगन
(iv) गांधीजी की गिरफ्तारी
निम्नलिखित कूटों में से अपना उत्तर चुने-
(i) चौरी-चौरा में पुलिस गोलीकांड
(ii) उग्र भीड़ द्वारा पुलिस थाना को जलाना
(iii) गांधीजी द्वारा आंदोलन का स्थगन
(iv) गांधीजी की गिरफ्तारी
निम्नलिखित कूटों में से अपना उत्तर चुने-
40th B.P.S.C. (Pre) 1995
उत्तर- (a)
घटनाओं का वास्तविक क्रम इस प्रकार था— पहले चौरी-चौरा में पुलिस ने जुलूस पर गोली चलाई (i), इससे उत्तेजित भीड़ ने थाने को आग के हवाले कर दिया (ii), इस हिंसा की सूचना मिलने पर गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को स्थगित कर दिया (iii), और आंदोलन की समाप्ति के बाद कमजोर पड़ी कांग्रेस की स्थिति का लाभ उठाकर सरकार ने 10 मार्च, 1922 को गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया (iv)। इस प्रकार सही क्रम i, ii, iii, iv है, जो विकल्प (a) से मेल खाता है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: गिरफ्तारी के बाद गांधीजी पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया, जिसमें न्यायाधीश सी.एन. ब्रूमफील्ड ने उन्हें 6 वर्ष के कारावास की सजा दी थी, हालांकि स्वास्थ्य कारणों से 1924 में उन्हें रिहा कर दिया गया।
44. चौरी-चौरा की घटना के समय महात्मा गांधी कहां थे?
U.P.P.C.S. (Mains) 2011
उत्तर-(d)
4 फरवरी, 1922 को जब चौरी-चौरा (गोरखपुर) में हिंसक घटना हुई, उस समय गांधीजी गुजरात के बारदोली में थे, जहां वे सविनय अवज्ञा आंदोलन को सामूहिक सत्याग्रह के रूप में आरंभ करने की तैयारियों में जुटे थे। घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने 12 फरवरी, 1922 को बारदोली में ही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाकर आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: बारदोली में नियोजित यह सविनय अवज्ञा कार्यक्रम स्थगित होने के बावजूद, बारदोली नाम बाद में 1928 के लगान-बंदी सत्याग्रह के कारण इतिहास में दोबारा प्रमुखता से उभरा, जिसका नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया।
45.महात्मा गांधी ने 1922 में असहयोग आंदोलन क्यों वापस ले लिया था ?
U.P.P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(c)
4 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा में हुई हिंसक घटना, जिसमें भीड़ ने पुलिस थाने को जलाकर कई पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी, ने गांधीजी को गहरे रूप से विचलित कर दिया। अहिंसा के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध गांधीजी ने इसे आंदोलन की दिशा से भटकाव माना और तत्काल असहयोग आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस निर्णय की रवीन्द्रनाथ टैगोर और कई अन्य नेताओं ने भी आलोचना की थी, उनका मानना था कि एक स्थानीय हिंसक घटना के कारण राष्ट्रव्यापी आंदोलन को रोकना उचित नहीं था। दूसरा तथ्य यह है कि इस आंदोलन की वापसी के पश्चात कांग्रेस के भीतर ‘परिवर्तनवादी’ (Pro-changers) और ‘अपरिवर्तनवादी’ (No-changers) गुटों का विभाजन स्पष्ट रूप से सामने आया।
46. निम्नलिखित में से किस प्रमुख कारण से महात्मा गांधी ने 1922 में असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया था?
U.P. B.E.O. (Pre) 2019
उत्तर-(d)
गांधीजी के लिए अहिंसा असहयोग आंदोलन की मूल आत्मा थी। 4 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा में भड़की हिंसा ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता अभी अनुशासित अहिंसक प्रतिरोध के लिए पूर्णतः तैयार नहीं थी, अतः उन्होंने तुरंत आंदोलन वापस लेने का फैसला किया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: चौरी-चौरा कांड पर वर्ष 2021 में स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया गया था ताकि इस घटना को राष्ट्रीय स्मृति में स्थान दिया जा सके। एक अन्य तथ्य यह है कि इस घटना ने गांधीजी की जन-नियंत्रण क्षमता को लेकर ब्रिटिश सरकार और भारतीय जनमानस दोनों में नई बहस को जन्म दिया।
47. असहयोग आंदोलन 1920 में प्रारंभ हुआ था। बताइए यह कब समाप्त हुआ?
U.P.P.C.S. (Pre) 1990
M.P.P.C.S. (Pre) 2006
M.P.P.C.S. (Pre) 2006
उत्तर-(c)
असहयोग आंदोलन की शुरुआत 1 अगस्त, 1920 को हुई थी और चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी, 1922) के पश्चात गांधीजी ने 12 फरवरी, 1922 को बारदोली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इसे औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की। इस प्रकार आंदोलन की समयावधि लगभग डेढ़ वर्ष रही।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: असहयोग आंदोलन की शुरुआत 1 अगस्त को इसलिए की गई थी क्योंकि यह बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि थी, जिनकी मृत्यु 1 अगस्त, 1920 को ही हुई थी। दूसरा तथ्य यह है कि यह आंदोलन खिलाफत आंदोलन के साथ संयुक्त रूप से चला था, जिससे हिंदू-मुस्लिम एकता की एक अनोखी मिसाल कायम हुई थी।
48. निम्नलिखित में से किसने असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी वस्त्रों के जलाए जाने का विरोध किया था?
U.P.P.C.S. (Mains) 2013
उत्तर-(a)
गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर असहयोग आंदोलन के तौर-तरीकों, विशेष रूप से विदेशी वस्त्रों की होली जलाने जैसी विनाशात्मक गतिविधियों से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि यह संसाधनों की अनुचित बर्बादी है और इसके स्थान पर रचनात्मक एवं शिक्षाप्रद कार्यक्रमों पर बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे गांधीजी को लिखे एक पत्र में स्पष्ट रूप से व्यक्त किया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टैगोर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) के विरोध में अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि भी अंग्रेज सरकार को वापस लौटा दी थी। इसके अतिरिक्त, गांधीजी और टैगोर के बीच वैचारिक मतभेदों के बावजूद दोनों के बीच गहरा सम्मान था, और गांधीजी ने टैगोर को ‘गुरुदेव’ की उपाधि दी थी।
49. निम्नांकित में किसका सुमेल नहीं है?
U.P.P.C.S. (Pre) 1996
उत्तर-(d)
असहयोग आंदोलन की शुरुआत 1 अगस्त, 1920 को हुई थी, न कि 1930 में। यह आंदोलन चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी, 1922) के बाद फरवरी 1922 में स्थगित कर दिया गया था। वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ हुआ था, जिसकी शुरुआत 12 मार्च 1930 को दांडी मार्च से हुई थी। शेष तीन युग्म सही सुमेलित हैं।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: मार्ले-मिंटो सुधार (1909) के अंतर्गत पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) की व्यवस्था की गई थी, जिसे सांप्रदायिक राजनीति की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
50. असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी वस्त्रों के लिए जलाए जाने पर किसने महात्मा गांधी को लिखा कि ‘यह निष्ठुर बर्बादी’ है?
U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002
U.P.P.C.S. (Pre) 2003
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
U.P.P.C.S. (Pre) 2003
U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004
U.P.P.C.S. (Mains) 2010
उत्तर-(b)
रबींद्रनाथ टैगोर रचनात्मक कार्य को आंदोलनात्मक गतिविधियों से अधिक महत्वपूर्ण मानते थे। उन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के स्थान पर गांधीजी से रचनात्मक कार्यक्रम अपनाने का आग्रह किया और इस कृत्य को ‘अविवेकी एवं निष्ठुर बर्बादी’ की संज्ञा दी।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: टैगोर ने ‘सर्वंट ऑफ इंडिया सोसाइटी’ के संस्थापक गोपाल कृष्ण गोखले से प्रेरित होकर ही असहयोग जैसे आंदोलनात्मक रुख के बजाय शिक्षा एवं ग्रामीण पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी, जिसकी झलक उनके शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन परियोजनाओं में मिलती है।
51.1923-28 के काल में भारतीय राजनीति में क्रांतिकारी कार्यविधियों की पुनरावृत्ति (Revial) का कारण था-
41st B.P.S.C. (Pre) 1996
उत्तर-(b)
1922 में असहयोग आंदोलन के स्थगन के बाद देश में राजनीतिक गतिविधियों के अभाव से कई युवा राष्ट्रवादी निराश हो गए। गांधीजी के अहिंसात्मक नेतृत्व से असंतुष्ट होकर ये युवा रूस, चीन, आयरलैंड, तुर्की और मिस्र जैसे देशों में हो रहे क्रांतिकारी आंदोलनों से प्रेरणा लेकर हिंसक माध्यम से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष की ओर उन्मुख हुए, जिससे यह काल क्रांतिकारी गतिविधियों की पुनरावृत्ति का काल बन गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इसी कालखंड में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (1924) की स्थापना हुई, जिसने काकोरी ट्रेन डकैती (1925) को अंजाम दिया, और बाद में इसी संगठन से प्रेरित होकर 1928 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन भगत सिंह व उनके साथियों द्वारा किया गया।
52. निम्नलिखित संस्थाओं में से कौन असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान स्थापित की गई?
1. काशी विद्यापीठ 2. गुजरात विद्यापीठ
3. जामिया मिलिया 4. काशी हिंदू विश्वविद्यालय
कूट :
1. काशी विद्यापीठ 2. गुजरात विद्यापीठ
3. जामिया मिलिया 4. काशी हिंदू विश्वविद्यालय
कूट :
U.P.P.C.S. (Mains) 2005
उत्तर-(c)
असहयोग आंदोलन के दौरान वर्ष 1921 में बनारस में काशी विद्यापीठ, वर्ष 1920 में अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ तथा वर्ष 1920 में अलीगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना हुई, जिसे बाद में दिल्ली स्थानांतरित किया गया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना इससे पहले मदन मोहन मालवीय द्वारा 1916 में की गई थी, इसलिए विकल्प (c) सही है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना के प्रमुख प्रेरकों में डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और हकीम अजमल खान का नाम भी उल्लेखनीय है, और बाद में डॉ. जाकिर हुसैन इसके कुलपति बने जिन्होंने इस संस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
53.1921-22 के असहयोग आंदोलन का मुख्य प्रतिफल था-
U.P.P.C.S. (Pre) 2005
उत्तर-(a)
असहयोग आंदोलन अपने मूल राजनीतिक उद्देश्यों में पूरी तरह सफल नहीं हो सका, परंतु इसके रचनात्मक पक्ष को अत्यधिक सफलता मिली। इस आंदोलन ने कांग्रेस को नई दिशा दी, साम्राज्यवादी सत्ता पर गहरा प्रभाव डाला और देशभर में राष्ट्रप्रेम तथा बलिदान की भावना का प्रसार किया। इस दौर में हिंदू-मुस्लिम एकता अपने उच्चतम बिंदु पर थी, क्योंकि यह आंदोलन खिलाफत आंदोलन के साथ संयुक्त रूप से चलाया गया था।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: खिलाफत आंदोलन तुर्की के खलीफा (सुल्तान) के पद को बचाने हेतु चलाया गया था, और इसका नेतृत्व मुख्य रूप से अली बंधु (मोहम्मद अली और शौकत अली) ने किया था, जिनके साथ गांधीजी का सहयोग इस हिंदू-मुस्लिम एकता का आधार बना।
54. निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित हैं?
U.P.P.C.S. (Mains) 2004
उत्तर-(b)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन दिसंबर 1929 में हुआ था, असहयोग आंदोलन की शुरुआत 1 अगस्त 1920 को हुई थी, और रौलेट सत्याग्रह अप्रैल 1919 में हुआ था। केवल भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 में फांसी दी गई थी, अतः केवल विकल्प (b) ही सही सुमेलित है।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929) में ही जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में ‘पूर्ण स्वराज’ (Complete Independence) का प्रस्ताव पास किया गया था, और इसी अधिवेशन के बाद 26 जनवरी 1930 को पहली बार ‘स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाया गया था।
55. निम्नलिखित वक्तव्यों पर विचार कीजिए-
कथन (a) : महात्मा गांधी द्वारा 1922 में असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
कारण (R) : इस स्थगन का सी.आर. दास एवं मोतीलाल नेहरू द्वारा विरोध किया गया।
कूट :
कथन (a) : महात्मा गांधी द्वारा 1922 में असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
कारण (R) : इस स्थगन का सी.आर. दास एवं मोतीलाल नेहरू द्वारा विरोध किया गया।
कूट :
U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010
उत्तर-(b)
गांधीजी ने फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण असहयोग आंदोलन को स्थगित किया था, न कि सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू के विरोध के कारण। हालांकि यह सत्य है कि इन दोनों नेताओं ने इस स्थगन का कड़ा विरोध किया था। इस प्रकार दोनों कथन सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की उचित व्याख्या प्रस्तुत नहीं करता।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने आंदोलन स्थगन से असंतुष्ट होकर ही दिसंबर 1922 में ‘स्वराज पार्टी’ (कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी) का गठन किया, जिसका उद्देश्य विधान परिषदों में प्रवेश कर भीतर से सरकार का विरोध करना था।
56. असहयोग आंदोलन के दौरान किसने पटना कॉलेज छोड़ा, जबकि उसकी परीक्षा के केवल 20 दिन ही बचे थे?
Bihar P.C.S. (Pre) 2016
उत्तर-(c)
बिहार के सारण जिले के सिताब दियारा में जन्मे जयप्रकाश नारायण ने असहयोग आंदोलन से प्रेरित होकर पटना कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी थी, जबकि उनकी परीक्षा को मात्र 20 दिन शेष रह गए थे। इसके पश्चात उन्होंने कांग्रेस द्वारा संचालित बिहार विद्यापीठ में प्रवेश लिया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: जयप्रकाश नारायण आगे चलकर उच्च शिक्षा हेतु अमेरिका गए, जहां उन्होंने मार्क्सवाद का गहन अध्ययन किया, और स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात वे 1970 के दशक में ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन के प्रमुख नेता के रूप में प्रसिद्ध हुए, जिन्हें ‘लोकनायक’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।
57. निम्न में से किसने असहयोग आंदोलन-विरोधी सभा की स्थापना की ?
Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2019
उत्तर-(*)
वर्ष 1920 में पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास, जमनादास द्वारकादास, कावसजी जहांगीर, पी. सेठना और सीतलवाड़ जैसे बंबई के प्रमुख उद्योगपतियों ने मिलकर असहयोग आंदोलन-विरोधी सभा की स्थापना की थी। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने प्रारंभिक उत्तर कुंजी में विकल्प (a) को सही माना था, परंतु संशोधित उत्तर कुंजी में इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर कर दिया गया।
📌 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य: इस प्रकार के विरोधी संगठनों के पीछे मुख्य कारण यह था कि असहयोग आंदोलन के अंतर्गत विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने की नीति से बंबई के मिल मालिकों और व्यापारी वर्ग के व्यावसायिक हितों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा था, जिससे उनमें असंतोष व्याप्त था।
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